मार्केट-कैप में माइक्रोन ने मेटा-टेस्ला को पीछे छोड़ा:AI चिप की डिमांड से शेयरों में 18.4% का उछाल; कंपनी की कुल वैल्यू $1.37 ट्रिलियन पहुंची

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और मेमोरी चिप की भारी मांग के चलते अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयरों में ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली है। गुरुवार को कारोबारी सेशन में माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन कुछ समय के लिए दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों मेटा प्लेटफॉर्म्स और टेस्ला से भी ज्यादा हो गया। मजबूत तिमाही अनुमानों (गाइडेंस) के बाद निवेशकों के बढ़े भरोसे से कंपनी के शेयर इंट्राडे में 18.4% तक उछल गए। मेटा-टेस्ला के बिल्कुल करीब बंद हुआ मार्केट कैप रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को कारोबार खत्म होने पर माइक्रोन टेक्नोलॉजी का शेयर 15.8% की बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार बंद होने पर माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.37 ट्रिलियन डॉलर रहा। इसकी तुलना में मेटा प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैप 1.38 ट्रिलियन डॉलर और इलॉन मस्क की कंपनी टेस्ला का मार्केट कैप 1.41 ट्रिलियन डॉलर था। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान आई बड़ी तेजी से माइक्रोन कुछ समय के लिए इन दोनों कंपनियों से आगे निकल गया था। चौथी तिमाही में $50 बिलियन रेवेन्यू का अनुमान माइक्रोन की इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे कंपनी का चौथी तिमाही (अगस्त में समाप्त होने वाली तिमाही) के लिए जारी किया गया मजबूत रेवेन्यू अनुमान है। कंपनी ने इस तिमाही में करीब 50 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू हासिल करने का अनुमान जताया है। यह वॉल स्ट्रीट के 43.2 बिलियन डॉलर के अनुमान से काफी ज्यादा है। इस शानदार परफॉर्मेंस ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि हाइपरस्केलर्स के कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर जारी चिंताओं के बावजूद AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च मजबूत बना हुआ है। भविष्य की सप्लाई के लिए $22 बिलियन के एडवांस ऑर्डर चिप मार्केट में मची इस होड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि माइक्रोन को भविष्य में मेमोरी चिप्स की सप्लाई सुरक्षित करने के लिए ग्राहकों से 22 बिलियन डॉलर के कमिटमेंट (एडवांस ऑर्डर) मिल चुके हैं। यह हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और अन्य AI फोकस्ड प्रोडक्ट्स की भारी डिमांड को दर्शाता है। 2027 के बाद तक बनी रहेगी चिप की किल्लत ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोन के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) संजय मेहरोत्रा ने एनालिस्ट्स से बात करते हुए कहा कि फिलहाल मांग के मुकाबले सप्लाई पूरी होने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। बाजार में यह तंग स्थिति (शॉर्टेज) कैलेंडर वर्ष 2027 के बाद भी बने रहने की आशंका है। चिप की उपलब्धता में केवल 2028 से धीरे-धीरे सुधार होने की संभावना है। मई में छुआ था $1 ट्रिलियन का पड़ाव माइक्रोन ने इसी साल मई के आखिरी हफ्ते में पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप का आंकड़ा पार किया था। इस आंकड़े को छूकर कंपनी दुनिया की चुनिंदा दिग्गज टेक कंपनियों के क्लब में शामिल हो गई थी। इस अर्निंग रिपोर्ट के आने के बाद से अब तक कंपनी का शेयर 15% से ज्यादा चढ़ चुका है, जबकि साल 2026 में अब तक इस स्टॉक में कुल 326% की भारी बढ़त दर्ज की जा चुकी है। सेमीकंडक्टर और स्टोरेज शेयरों में आई चौतरफा तेजी माइक्रोन के शानदार नतीजों का असर पूरी इंडस्ट्री पर देखने को मिला। गुरुवार को फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 3.2% चढ़ गया। एलएसईजी (LSEG) के डेटा के मुताबिक, यह इंडेक्स अब तक के अपने सबसे मजबूत तिमाही प्रदर्शन की राह पर है। माइक्रोन की कॉम्पिटिटर कंपनियों में सैंडिस्क का शेयर 22%, वेस्टर्न डिजिटल 7.4% और सीगेट टेक्नोलॉजी 4.3% मजबूत हुआ। वहीं क्वालकॉम के शेयरों में भी तेजी आई, क्योंकि कंपनी ने अपने AI-फोकस्ड डेटा-सेंटर बिजनेस के लिए महत्वाकांक्षी ग्रोथ प्लान पेश किया है। एप्पल के कारण टेक सेक्टर में दिखा मिला-जुला रुख माइक्रोन के ब्लॉकबस्टर नतीजों के बावजूद ग्लोबल टेक सेक्टर में मिला-जुला रुख रहा। निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि हाइपरस्केलर्स द्वारा AI पर किया जा रहा भारी खर्च कब तक टिक पाएगा। इसी बीच एपल ने मेमोरी और स्टोरेज चिप की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए अपने आईपैड और मैकबुक की कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर दिया। एपल के इस कदम से कंपनी के शेयरों में 6.1% की गिरावट आई और बाजार में एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर बूम की इस बढ़ी हुई लागत का बोझ आखिरी में कौन उठाएगा। क्या होते हैं हाइपरस्केलर्स और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी? हाइपरस्केलर्स: ये वे बड़ी क्लाउड कंप्यूटिंग और टेक कंपनियां (जैसे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एमेजन और मेटा) होती हैं, जो बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर का संचालन करती हैं। इनके द्वारा किया जाने वाला खर्च पूरी टेक इंडस्ट्री की दिशा तय करता है। हाई-बैंडविड्थ मेमोरी: यह एक एडवांस और सुपर-फास्ट मेमोरी चिप होती है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से AI और डीप लर्निंग के प्रोसेस को तेजी से चलाने के लिए किया जाता है। इसकी मांग इस समय दुनिया भर में सबसे ज्यादा है।
मार्केट-कैप में माइक्रोन ने मेटा-टेस्ला को पीछे छोड़ा:AI चिप की डिमांड से शेयरों में 18.4% का उछाल; कंपनी की कुल वैल्यू $1.37 ट्रिलियन पहुंची

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और मेमोरी चिप की भारी मांग के चलते अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयरों में ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली है। गुरुवार को कारोबारी सेशन में माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन कुछ समय के लिए दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों मेटा प्लेटफॉर्म्स और टेस्ला से भी ज्यादा हो गया। मजबूत तिमाही अनुमानों (गाइडेंस) के बाद निवेशकों के बढ़े भरोसे से कंपनी के शेयर इंट्राडे में 18.4% तक उछल गए। मेटा-टेस्ला के बिल्कुल करीब बंद हुआ मार्केट कैप रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को कारोबार खत्म होने पर माइक्रोन टेक्नोलॉजी का शेयर 15.8% की बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार बंद होने पर माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.37 ट्रिलियन डॉलर रहा। इसकी तुलना में मेटा प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैप 1.38 ट्रिलियन डॉलर और इलॉन मस्क की कंपनी टेस्ला का मार्केट कैप 1.41 ट्रिलियन डॉलर था। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान आई बड़ी तेजी से माइक्रोन कुछ समय के लिए इन दोनों कंपनियों से आगे निकल गया था। चौथी तिमाही में $50 बिलियन रेवेन्यू का अनुमान माइक्रोन की इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे कंपनी का चौथी तिमाही (अगस्त में समाप्त होने वाली तिमाही) के लिए जारी किया गया मजबूत रेवेन्यू अनुमान है। कंपनी ने इस तिमाही में करीब 50 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू हासिल करने का अनुमान जताया है। यह वॉल स्ट्रीट के 43.2 बिलियन डॉलर के अनुमान से काफी ज्यादा है। इस शानदार परफॉर्मेंस ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि हाइपरस्केलर्स के कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर जारी चिंताओं के बावजूद AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च मजबूत बना हुआ है। भविष्य की सप्लाई के लिए $22 बिलियन के एडवांस ऑर्डर चिप मार्केट में मची इस होड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि माइक्रोन को भविष्य में मेमोरी चिप्स की सप्लाई सुरक्षित करने के लिए ग्राहकों से 22 बिलियन डॉलर के कमिटमेंट (एडवांस ऑर्डर) मिल चुके हैं। यह हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और अन्य AI फोकस्ड प्रोडक्ट्स की भारी डिमांड को दर्शाता है। 2027 के बाद तक बनी रहेगी चिप की किल्लत ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोन के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) संजय मेहरोत्रा ने एनालिस्ट्स से बात करते हुए कहा कि फिलहाल मांग के मुकाबले सप्लाई पूरी होने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। बाजार में यह तंग स्थिति (शॉर्टेज) कैलेंडर वर्ष 2027 के बाद भी बने रहने की आशंका है। चिप की उपलब्धता में केवल 2028 से धीरे-धीरे सुधार होने की संभावना है। मई में छुआ था $1 ट्रिलियन का पड़ाव माइक्रोन ने इसी साल मई के आखिरी हफ्ते में पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप का आंकड़ा पार किया था। इस आंकड़े को छूकर कंपनी दुनिया की चुनिंदा दिग्गज टेक कंपनियों के क्लब में शामिल हो गई थी। इस अर्निंग रिपोर्ट के आने के बाद से अब तक कंपनी का शेयर 15% से ज्यादा चढ़ चुका है, जबकि साल 2026 में अब तक इस स्टॉक में कुल 326% की भारी बढ़त दर्ज की जा चुकी है। सेमीकंडक्टर और स्टोरेज शेयरों में आई चौतरफा तेजी माइक्रोन के शानदार नतीजों का असर पूरी इंडस्ट्री पर देखने को मिला। गुरुवार को फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 3.2% चढ़ गया। एलएसईजी (LSEG) के डेटा के मुताबिक, यह इंडेक्स अब तक के अपने सबसे मजबूत तिमाही प्रदर्शन की राह पर है। माइक्रोन की कॉम्पिटिटर कंपनियों में सैंडिस्क का शेयर 22%, वेस्टर्न डिजिटल 7.4% और सीगेट टेक्नोलॉजी 4.3% मजबूत हुआ। वहीं क्वालकॉम के शेयरों में भी तेजी आई, क्योंकि कंपनी ने अपने AI-फोकस्ड डेटा-सेंटर बिजनेस के लिए महत्वाकांक्षी ग्रोथ प्लान पेश किया है। एप्पल के कारण टेक सेक्टर में दिखा मिला-जुला रुख माइक्रोन के ब्लॉकबस्टर नतीजों के बावजूद ग्लोबल टेक सेक्टर में मिला-जुला रुख रहा। निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि हाइपरस्केलर्स द्वारा AI पर किया जा रहा भारी खर्च कब तक टिक पाएगा। इसी बीच एपल ने मेमोरी और स्टोरेज चिप की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए अपने आईपैड और मैकबुक की कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर दिया। एपल के इस कदम से कंपनी के शेयरों में 6.1% की गिरावट आई और बाजार में एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर बूम की इस बढ़ी हुई लागत का बोझ आखिरी में कौन उठाएगा। क्या होते हैं हाइपरस्केलर्स और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी? हाइपरस्केलर्स: ये वे बड़ी क्लाउड कंप्यूटिंग और टेक कंपनियां (जैसे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एमेजन और मेटा) होती हैं, जो बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर का संचालन करती हैं। इनके द्वारा किया जाने वाला खर्च पूरी टेक इंडस्ट्री की दिशा तय करता है। हाई-बैंडविड्थ मेमोरी: यह एक एडवांस और सुपर-फास्ट मेमोरी चिप होती है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से AI और डीप लर्निंग के प्रोसेस को तेजी से चलाने के लिए किया जाता है। इसकी मांग इस समय दुनिया भर में सबसे ज्यादा है। ये खबर भी पढ़ें… सोमवार को गिरावट के साथ खुल सकता है भारतीय बाजार: गिफ्टी निफ्टी में 150 अंकों की कमजोरी; 8% टूटा दक्षिण कोरिया का कोस्पी मुहर्रम की छुट्टी के कारण आज 26 जून को भारतीय शेयर बाजार बंद हैं। लेकिन वैश्विक बाजारों में मंदी के कारण सोमवार को ये गिरावट के साथ खुल सकता है। आज दक्षिण कोरिया का बाजार कोस्पी 8% नीचे हैं और गिफ्ट निफ्टी 150 अंकों से ज्यादा टूट गया है। पूरी खबर पढ़ें…
पेरू की पहली महिला राष्ट्रपति, 19 वर्ष में संभाली जिम्मेदारी:पढ़ाई छूटी, जेल गईं और बंकर में काटी रातें, केइको ने बिखरने नहीं दी पार्टी

पेरू में पहली बार कोई महिला राष्ट्रपति बनने जा रही हैं। यहां चौथी बार चुनाव लड़ रही दक्षिणपंथी नेता केइको फुजीमोरी (51) ने जीत हासिल की है। केइको को करीब 50.1% वोट मिले, जबकि वामपंथी उम्मीदवार रोबर्टो सांचेज को 49.9% वोट मिले। केइको 28 जुलाई को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी। वह पूर्व राष्ट्रपति अल्बर्टो फुजीमोरी की बेटी हैं। चुनावी फंडिंग मामले में केइको 2018 से 2020 तक जेल में भी रह चुकी हैं। अब उनके सामने अपराध, भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता से देश को संभालने की चुनौती होगी। पढ़िए केइको के जीवन से जुड़े किस्से… धमाकों के बीच भी पिता स्कूल भेजते 1990 के दशक में केइको के पिता अल्बर्टो फुजीमोरी राष्ट्रपति थे। तब पेरू उग्रवादी संगठन सेंडेरो लुमिनोसो के हमलों से दहल रहा था। उस समय राष्ट्रपति भवन भी उग्रवादियों के निशाने पर था, इसलिए बेटी केइको और उनके भाई-बहनों को सुरक्षा के लिए लंबे समय तक बंकरों में रहना पड़ता था। रात में धमाकों और हमलों की खबरें आतीं तो बच्चे डर जाते और स्कूल न जाने की जिद करते। लेकिन पिता अल्बर्टो फुजीमोरी का नियम था कि हालात जैसे भी हों, पढ़ाई नहीं रुकेगी। संकट के बीच सामान्य जीवन जीना उन्होंने यहीं सीखा। छात्रा से फर्स्ट लेडी बनीं 1994 में केइको अमेरिका की स्टोनी ब्रूक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थीं। तभी उनके माता-पिता में विवाद के बाद दोनों अलग हो गए। उनकी मां सुजाना हिगुची ने अल्बर्टो के सहयोगियों पर भ्रष्टाचार व राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगाए। विवाद के बीच केइको को पढ़ाई छोड़कर पेरू लौटना पड़ा। महज 19 की उम्र में पिता ने सुजाना को हटाकर केइको को फर्स्ट लेडी की जिम्मेदारी सौंपी। तब वे दुनिया की सबसे कम उम्र की फर्स्ट लेडी में गिनी जाने लगीं। उस दौरान केइको ने राष्ट्रपति भवन के कुछ हिस्सों को अपने पसंदीदा गुलाबी रंग से सजवा दिया था। उन्हें अनुभवहीन किशोरी कहकर आलोचना झेलनी पड़ी, लेकिन केइको ने इसे सामान्य बात बताया। बेटियों को हिम्मत देने के लिए जेल से लिखती थीं चिट्ठी केइको की दो बेटियां हैं। 2018 में मनी लॉन्ड्रिंग व चुनावी फंडिंग मामले में केइको जेल गईं। उस दौरान वे जेल से बेटियों को चिट्ठियां लिखती थीं, जिनमें पढ़ाई पर ध्यान देने, हिम्मत बनाए रखने और परिवार का ख्याल रखने की सलाह देती थीं। ये पत्र बेटियों के साथ खुद केइको के लिए भी मुश्किल दौर में मानसिक सहारा बने। करीब 13 महीने बाद वे रिहा हुई और राजनीति में सक्रिय हुईं।
श्रीलंका पहले टेस्ट की पहली पारी में 308 पर ऑलआउट:वेस्टइंडीज से जस्टिन ग्रेव्स ने 3 विकेट झटके, धनंजय डी सिल्वा का शतक

श्रीलंका ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में 308 रन बनाए हैं। गुरुवार को मैच के पहले दिन का खेल समाप्त होने तक वेस्टइंडीज अपना खाता भी नहीं खोल सकी है। टीम के ओपनर्स नाबाद लौटे हैं। तीसरे सेशन में कैरेबियाई पारी का पहला ओवर समाप्त होने के बाद अंपायर्स ने बेल्स उठा लिए। ओपनर जॉन कैंपबेल 6 बॉल खेलकर नाबाद रहे। जबकि ब्रैंडन किंग ने एक भी बॉल नहीं फेस की। इससे पहले जॉयडन सेल्स ने श्रीलंकाई टीम का आखिरी विकेट झटका। उन्होंने असिथा फर्नांडो को अल्जारी जोसेफ के हाथों कैच कराया। सेल्स को श्रीलंकाई पारी में एक विकेट ही मिला। श्रीलंका की खराब शुरुआत, 50 के अंदर 3 विकेट गंवाए टॉस हारकर बैटिंग कर रही श्रीलंका की शुरुआत खराब रही। टीम ने 50 रन के अंदर 3 विकेट गंवा दिए थे। केमार रोच ने पहले ओवर की आखिरी बॉल पर पाथुम निसांका को 2 रन के स्कोर पर पवेलियन भेजा दिया। उसके बाद 10वें ओवर में अल्जारी जोसेफ ने निशान मदुष्का (23 रन) और कामिंदु मेंडिस (जीरो) को लगातार बॉल पर आउट किया। चंडीमल और डी सिल्वा ने पारी संभाली निसांका के आउट होने के बाद क्रीज पर उतरे दिनेश चांदीमल ने धनंजय डी सिल्वा के साथ पारी संभाली। दोनों ने 94 बॉल पर 68 रनों की साझेदारी की। वे चौथे विकेट के रूप में आउट हुए। उन्हें शमार जोसेफ ने बोल्ड कर दिया। चांदीमल 67 बॉल पर 54 रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने 8 चौके लगाए। डी सिल्वा का शतक, स्कोर 250 पार पहुंचाया 110 के स्कोर पर चांदीमल का विकेट गंवाने के बाद धनंजया डी सिल्वा ने श्रीलंकाई पारी को 250 पार पहुंचाया। डी सिल्वा ने 168 गेंद पर 120 रन की शतकीय पारी खेली। इस पारी में 17 चौके लगाए। उन्होंने लोअर ऑर्डर में 2 अर्धशतकीय साझेदारियां कीं। इनमें सोनल दिनुषा (43 रन) के साथ 150 गेंद पर 99 रन और मिलन रथनायके के साथ 85 गेंद पर 64 रन की साझेदारी शामिल रही। ग्रेव्स ने सबसे ज्यादा विकेट, 3 बॉलर्स को 2-2 विकेट वेस्टइंडीज की ओर से जस्टिन ग्रेव्स ने सबसे ज्यादा 3 विकेट लिए। उनके अलावा, 3 अन्य गेंदबाजों ने 2-2 विकेट हासिल किए। इनमें केमार रोच, अल्जारी जोसेफ और शमार जोसेफ के नाम शामिल रहे। एक विकेट जॉयडन सेल्स को मिला। ———————————————–
श्रीलंका पहले टेस्ट की पहली पारी में 308 पर ऑलआउट:वेस्टइंडीज से जस्टिन ग्रेव्स ने 3 विकेट झटके, धनंजय डी सिल्वा का शतक

श्रीलंका ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में 308 रन बनाए हैं। गुरुवार को मैच के पहले दिन का खेल समाप्त होने तक वेस्टइंडीज अपना खाता भी नहीं खोल सकी है। टीम के ओपनर्स नाबाद लौटे हैं। तीसरे सेशन में कैरेबियाई पारी का पहला ओवर समाप्त होने के बाद अंपायर्स ने बेल्स उठा लिए। ओपनर जॉन कैंपबेल 6 बॉल खेलकर नाबाद रहे। जबकि ब्रैंडन किंग ने एक भी बॉल नहीं फेस की। इससे पहले जॉयडन सेल्स ने श्रीलंकाई टीम का आखिरी विकेट झटका। उन्होंने असिथा फर्नांडो को अल्जारी जोसेफ के हाथों कैच कराया। सेल्स को श्रीलंकाई पारी में एक विकेट ही मिला। श्रीलंका की खराब शुरुआत, 50 के अंदर 3 विकेट गंवाए टॉस हारकर बैटिंग कर रही श्रीलंका की शुरुआत खराब रही। टीम ने 50 रन के अंदर 3 विकेट गंवा दिए थे। केमार रोच ने पहले ओवर की आखिरी बॉल पर पाथुम निसांका को 2 रन के स्कोर पर पवेलियन भेजा दिया। उसके बाद 10वें ओवर में अल्जारी जोसेफ ने निशान मदुष्का (23 रन) और कामिंदु मेंडिस (जीरो) को लगातार बॉल पर आउट किया। चंडीमल और डी सिल्वा ने पारी संभाली निसांका के आउट होने के बाद क्रीज पर उतरे दिनेश चांदीमल ने धनंजय डी सिल्वा के साथ पारी संभाली। दोनों ने 94 बॉल पर 68 रनों की साझेदारी की। वे चौथे विकेट के रूप में आउट हुए। उन्हें शमार जोसेफ ने बोल्ड कर दिया। चांदीमल 67 बॉल पर 54 रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने 8 चौके लगाए। डी सिल्वा का शतक, स्कोर 250 पार पहुंचाया 110 के स्कोर पर चांदीमल का विकेट गंवाने के बाद धनंजया डी सिल्वा ने श्रीलंकाई पारी को 250 पार पहुंचाया। डी सिल्वा ने 168 गेंद पर 120 रन की शतकीय पारी खेली। इस पारी में 17 चौके लगाए। उन्होंने लोअर ऑर्डर में 2 अर्धशतकीय साझेदारियां कीं। इनमें सोनल दिनुषा (43 रन) के साथ 150 गेंद पर 99 रन और मिलन रथनायके के साथ 85 गेंद पर 64 रन की साझेदारी शामिल रही। ग्रेव्स ने सबसे ज्यादा विकेट, 3 बॉलर्स को 2-2 विकेट वेस्टइंडीज की ओर से जस्टिन ग्रेव्स ने सबसे ज्यादा 3 विकेट लिए। उनके अलावा, 3 अन्य गेंदबाजों ने 2-2 विकेट हासिल किए। इनमें केमार रोच, अल्जारी जोसेफ और शमार जोसेफ के नाम शामिल रहे। एक विकेट जॉयडन सेल्स को मिला। ———————————————–
कच्चा-तेल ईरान युद्ध से पहले वाले भाव 72 डॉलर पर:एक्सपर्ट ने कहा- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत दशहरे तक ही संभव

ईरान युद्ध से पहले कच्चे तेल की जो कीमतें थीं, गुरुवार को वैश्विक बाजार में दाम उसी स्तर पर आ गए हैं। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। यह वही भाव (72.29 डॉलर) है, जो युद्ध शुरू होने से एक दिन पहले 27 फरवरी को था। 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के बाद स्विट्जरलैंड में हुई शांति वार्ता में अमेरिका ने ईरानी तेल के निर्यात पर आंशिक प्रतिबंध हटा लिए। इसके बाद होर्मुज रूट से गुजरने वाले जहाज की संख्या बढ़ने लगी है। सोमवार के बाद से करीब 80 जहाज इस होर्मुज से गुजर चुके हैं। हालांकि यह संख्या युद्ध से पहले रोजाना 100 से ज्यादा जहाजों से कम है। हालांकि कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद पेट्रोल पंपों पर दाम दशहरे तक ही कम हो सकते हैं। कंपनियां पहले अपने नुकसान की भरपाई कर सकती हैं पेट्रोलियम की कीमतों में राहत मिलने की कितनी उम्मीद है? एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा के मुताबिक, पेट्रोल, डीजल जैसे प्रोडक्ट्स जो अभी हम खरीद रहे हैं, उन्हें तैयार करने के लिए जो कच्चा तेल इस्तेमाल हो रहा है, उसे तब खरीदा गया था जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी कीमत करीब 110 डॉलर प्रति बैरल थी। भारतीय रिफाइनरियों के लिए ये करीब 125 डॉलर प्रति बैरल थे। 72 डॉलर के क्रूड से बने पेट्रोल, डीजल कब तक पंपों पर पहुंचेंगे? इसमें करीब ढाई महीने लगेंगे। मौजूदा भाव का तेल स्रोत देशों के बंदरगाहों पर जहाजों में लोड होने में 15-20 दिन लगेंगे। उन्हें भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचने में 55-60 दिन लगेंगे। वहां से रिफाइनरी और फिर पेट्रोल पंपों तक पहुंचने में भी समय लगेगा। यह पूरा चक्र 75-80 दिनों का होता है। तो क्या ढाई महीने बाद फौरन कीमतें कम हो जाएंगी? इसकी संभावना कम है। अभी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल-डीजल पर करीब 7.5 रुपए प्रति लीटर नुकसान हो रहा है। सरकार ने भी एक्साइज ड्यूटी 10 रुपए प्रति लीटर घटाई थी। कुछ दिन इसकी भरपाई की जा सकती है। उसके बाद ही पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की संभावना है। कब तक राहत मिल सकती है? दशहरे के आसपास पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने लगेंगे। ये भी उम्मीद कर सकते हैं कि अगस्त के आखिर तक या सितंबर की शुरुआत से कुछ राहत मिलने लगे। क्या कच्चे तेल के दाम फिर बढ़ेंगे? मुझे नहीं लगता है कि निकट भविष्य में कच्चे तेल के दाम बढ़ेंगे। ऐसी आशंका अब बेहद कम है।
कच्चा-तेल ईरान युद्ध से पहले वाले भाव 72 डॉलर पर:एनर्जी एक्सपर्ट ने कहा- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत दशहरे तक ही संभव

ईरान युद्ध से पहले कच्चे तेल की जो कीमतें थीं, गुरुवार को वैश्विक बाजार में दाम उसी स्तर पर आ गए हैं। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। यह वही भाव (72.29 डॉलर) है, जो युद्ध शुरू होने से एक दिन पहले 27 फरवरी को था। 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के बाद स्विट्जरलैंड में हुई शांति वार्ता में अमेरिका ने ईरानी तेल के निर्यात पर आंशिक प्रतिबंध हटा लिए। इसके बाद होर्मुज रूट से गुजरने वाले जहाज की संख्या बढ़ने लगी है। सोमवार के बाद से करीब 80 जहाज इस होर्मुज से गुजर चुके हैं। हालांकि यह संख्या युद्ध से पहले रोजाना 100 से ज्यादा जहाजों से कम है। हालांकि कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद पेट्रोल पंपों पर दाम दशहरे तक ही कम हो सकते हैं। कंपनियां पहले अपने नुकसान की भरपाई कर सकती हैं पेट्रोलियम की कीमतों में राहत मिलने की कितनी उम्मीद है? एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा के मुताबिक, पेट्रोल, डीजल जैसे प्रोडक्ट्स जो अभी हम खरीद रहे हैं, उन्हें तैयार करने के लिए जो कच्चा तेल इस्तेमाल हो रहा है, उसे तब खरीदा गया था जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी कीमत करीब 110 डॉलर प्रति बैरल थी। भारतीय रिफाइनरियों के लिए ये करीब 125 डॉलर प्रति बैरल थे। 72 डॉलर के क्रूड से बने पेट्रोल, डीजल कब तक पंपों पर पहुंचेंगे? इसमें करीब ढाई महीने लगेंगे। मौजूदा भाव का तेल स्रोत देशों के बंदरगाहों पर जहाजों में लोड होने में 15-20 दिन लगेंगे। उन्हें भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचने में 55-60 दिन लगेंगे। वहां से रिफाइनरी और फिर पेट्रोल पंपों तक पहुंचने में भी समय लगेगा। यह पूरा चक्र 75-80 दिनों का होता है। तो क्या ढाई महीने बाद फौरन कीमतें कम हो जाएंगी? इसकी संभावना कम है। अभी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल-डीजल पर करीब 7.5 रुपए प्रति लीटर नुकसान हो रहा है। सरकार ने भी एक्साइज ड्यूटी 10 रुपए प्रति लीटर घटाई थी। कुछ दिन इसकी भरपाई की जा सकती है। उसके बाद ही पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की संभावना है। कब तक राहत मिल सकती है? दशहरे के आसपास पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने लगेंगे। ये भी उम्मीद कर सकते हैं कि अगस्त के आखिर तक या सितंबर की शुरुआत से कुछ राहत मिलने लगे। क्या कच्चे तेल के दाम फिर बढ़ेंगे? मुझे नहीं लगता है कि निकट भविष्य में कच्चे तेल के दाम बढ़ेंगे। ऐसी आशंका अब बेहद कम है। ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में बच्ची से रेप केस में स्नैपचैट पर मुकदमा: इसके फीचर से रेपिस्ट बच्ची तक पहुंचा, भारत में इसके 25 करोड़ एक्टिव मंथली यूजर सोशल मीडिया एप स्नैपचैट की मूल कंपनी स्नैप पर अमेरिका के मिसौरी में मुकदमा दायर किया गया है। इस मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि प्लेटफॉर्म 12 साल की बच्ची के बलात्कार के लिए जिम्मेदार है। पूरी खबर पढ़ें…
इक्वाडोर ने 4 बार की वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी को हराया:20 साल बाद नॉकआउट में पहुंचा, जर्मनी लगातार 11 जीत के बाद हारी

24वीं रैंक की टीम इक्वाडोर ने फुटबॉल वर्ल्ड कप में शुक्रवार को 4 बार की वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी को 2-1 से हरा दिया है। इस जीत से टीम ने राउंड ऑफ-32 में जगह बना ली। इक्वाडोर 2006 के बाद पहली बार नॉकआउट में पहुंची है। ग्रुप-ई में तीसरे स्थान पर रहते हुए चार अंक हासिल करने वाला इक्वाडोर अब अगले राउंड में मैक्सिको से भिड़ सकता है। वहीं, पहले ही नॉकआउट में पहुंच चुकी जर्मनी की लगातार 11 मैचों की जीत का सिलसिला भी इस हार के साथ टूट गया है। मेटलाइफ स्टेडियम में इस मैच के दौरान 80,663 फैंस मौजूद रहे। फीफा के अनुसार इस वर्ल्ड कप के 56वें मैच तक कुल दर्शकों की संख्या 35,87,539 पहुंच गई, जो 1994 वर्ल्ड कप के पूरे टूर्नामेंट के रिकॉर्ड से अधिक है। शुरुआती बढ़त के बावजूद हारा जर्मनी जर्मनी ने मुकाबले की तेज शुरुआत करते हुए दूसरे ही मिनट में लेरॉय साने के गोल से बढ़त बना ली। फ्लोरियन विर्ट्ज के पास पर साने ने गोल दागा। हालांकि, इक्वाडोर ने 9वें मिनट में बराबरी हासिल कर ली। मिडफील्ड में गेंद छीनने के बाद पेड्रो वीटे ने निल्सन अंगुलो को पास दिया, जिन्होंने बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाकर स्कोर 1-1 कर दिया। यह टूर्नामेंट में इक्वाडोर का पहला गोल भी था। प्लाटा ने निर्णायक गोल दागा दूसरे हाफ में दोनों टीमों ने कई मौके बनाए। 77वें मिनट में पेड्रो वीटे के कॉर्नर पर केविन रोड्रिगेज ने हेडर लगाया, जिसे गोलकीपर मैनुएल नोयर पकड़ने ही वाले थे कि गोंजालो प्लाटा ने पैर बढ़ाकर गेंद को गोल में पहुंचा दिया। इस गोल ने इक्वाडोर को 2-1 की बढ़त दिलाई, जिसे उसने अंत तक कायम रखा। मैच 55: कुराकाओ Vs आइवरी कोस्ट, स्कोरलाइन 0-2 पेपे के डबल गोल से जीता आइवरी कोस्ट, पहली बार नॉकआउट में निकोलस पेपे के डबल गोल से आइवरी कोस्ट ने ग्रुप-ई मैच में कुराकाओ को 2-0 से हराकर पहली बार नॉकआउट में जगह बना ली। अब आइवरी कोस्ट 30 जून को राउंड ऑफ-32 में ग्रुप आई की उपविजेता टीम (फ्रांस या नॉर्वे) से भिड़ेगा। फिलाडेल्फिया स्टेडियम में आइवरी कोस्ट ने 7वें मिनट में बढ़त बना ली। 19 साल यान डियोमांडे ने कुराकाओ के डिफेंस की गलती का फायदा उठाते हुए गेंद निकोलस पेपे को पास की, जिन्होंने आसान गोल के साथ टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। फिर 64वें मिनट में पेपे ने बाएं पैर से शानदार शॉट लगाकर अपना दूसरा और टीम का दूसरा गोल दागा। इसके बाद टीम ने कुराकाओ को वापसी का मौका नहीं दिया। —————————————
इक्वाडोर ने 4 बार की वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी को हराया:20 साल बाद नॉकआउट में पहुंचा, जर्मनी लगातार 11 जीत के बाद हारी

24वीं रैंक की टीम इक्वाडोर ने फुटबॉल वर्ल्ड कप में शुक्रवार को 4 बार की वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी को 2-1 से हरा दिया है। इस जीत से टीम ने राउंड ऑफ-32 में जगह बना ली। इक्वाडोर 2006 के बाद पहली बार नॉकआउट में पहुंची है। ग्रुप-ई में तीसरे स्थान पर रहते हुए चार अंक हासिल करने वाला इक्वाडोर अब अगले राउंड में मैक्सिको से भिड़ सकता है। वहीं, पहले ही नॉकआउट में पहुंच चुकी जर्मनी की लगातार 11 मैचों की जीत का सिलसिला भी इस हार के साथ टूट गया है। मेटलाइफ स्टेडियम में इस मैच के दौरान 80,663 फैंस मौजूद रहे। फीफा के अनुसार इस वर्ल्ड कप के 56वें मैच तक कुल दर्शकों की संख्या 35,87,539 पहुंच गई, जो 1994 वर्ल्ड कप के पूरे टूर्नामेंट के रिकॉर्ड से अधिक है। शुरुआती बढ़त के बावजूद हारा जर्मनी जर्मनी ने मुकाबले की तेज शुरुआत करते हुए दूसरे ही मिनट में लेरॉय साने के गोल से बढ़त बना ली। फ्लोरियन विर्ट्ज के पास पर साने ने गोल दागा। हालांकि, इक्वाडोर ने 9वें मिनट में बराबरी हासिल कर ली। मिडफील्ड में गेंद छीनने के बाद पेड्रो वीटे ने निल्सन अंगुलो को पास दिया, जिन्होंने बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाकर स्कोर 1-1 कर दिया। यह टूर्नामेंट में इक्वाडोर का पहला गोल भी था। प्लाटा ने निर्णायक गोल दागा दूसरे हाफ में दोनों टीमों ने कई मौके बनाए। 77वें मिनट में पेड्रो वीटे के कॉर्नर पर केविन रोड्रिगेज ने हेडर लगाया, जिसे गोलकीपर मैनुएल नोयर पकड़ने ही वाले थे कि गोंजालो प्लाटा ने पैर बढ़ाकर गेंद को गोल में पहुंचा दिया। इस गोल ने इक्वाडोर को 2-1 की बढ़त दिलाई, जिसे उसने अंत तक कायम रखा। मैच 55: कुराकाओ Vs आइवरी कोस्ट, स्कोरलाइन 0-2 पेपे के डबल गोल से जीता आइवरी कोस्ट, पहली बार नॉकआउट में निकोलस पेपे के डबल गोल से आइवरी कोस्ट ने ग्रुप-ई मैच में कुराकाओ को 2-0 से हराकर पहली बार नॉकआउट में जगह बना ली। अब आइवरी कोस्ट 30 जून को राउंड ऑफ-32 में ग्रुप आई की उपविजेता टीम (फ्रांस या नॉर्वे) से भिड़ेगा। फिलाडेल्फिया स्टेडियम में आइवरी कोस्ट ने 7वें मिनट में बढ़त बना ली। 19 साल यान डियोमांडे ने कुराकाओ के डिफेंस की गलती का फायदा उठाते हुए गेंद निकोलस पेपे को पास की, जिन्होंने आसान गोल के साथ टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। फिर 64वें मिनट में पेपे ने बाएं पैर से शानदार शॉट लगाकर अपना दूसरा और टीम का दूसरा गोल दागा। इसके बाद टीम ने कुराकाओ को वापसी का मौका नहीं दिया। मैच 57: जापान Vs स्वीडन, स्कोरलाइन 1-1 जापान और स्वीडन ने ड्रॉ खेला, दोनों नॉकआउट में जापान और स्वीडन ने ग्रुप-एफ से नॉकआउट में प्रवेश कर लिया है। दोनों के बीच का मैच 1-1 से ड्रॉ रहा। जापान ग्रुप में दूसरे और स्वीडन पहले स्थान पर रहते हुए अगले दौर में पहुंचा। जापान ने तीसरी और स्वीडन ने चौथी बार नॉकआउट में प्रवेश किया है। डलास स्टेडियम में पहला हाफ गोल रहित रहने के बाद 56वें मिनट में रित्सु दोआन के पास पर दाइजेन माएदा ने गोल करके जापान को 1-0 की बढ़त दिलाई। हालांकि, यह बढ़त ज्यादा देर नहीं टिकी और 62वें मिनट में एंथनी एलांगा ने बॉक्स के बाहर से शानदार बाएं पैर का शॉट लगाकर स्वीडन को 1-1 की बराबरी दिला दी। उन्होंने इस टूर्नामेंट में दूसरा गोल दागा। एलांगा के गोल के साथ जापान ने एक एडिशन में सबसे ज्यादा गोल करने का रिकॉर्ड बनाया। टीम इस वर्ल्ड कप में 7 गोल कर चुकी है। उसने 2018 वर्ल्ड कप में छह गोल किए थे। —————————————
ईरान बोला-NATO देशों ने जंग में अमेरिका का साथ दिया:इन्हें जवाबदेह ठहराया जाए; होर्मुज में जहाज पर हमला, पुल को नुकसान

ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हुए हमले में साथ देने वाले NATO मेंबर देशों को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने सोशल मीडिया पर कहा कि NATO चीफ मार्क रुट ने खुद माना है कि इटली और रोमानिया ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का साथ दिया था। बघेई ने कहा कि इन्हें अपने नागरिकों और पूरी दुनिया को बताना चाहिए कि उन्होंने अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ इस कार्रवाई का समर्थन क्यों किया। होर्मुज स्ट्रेट में एक कॉमर्शियल जहाज पर किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल (हमलावर हथियार) से हमला हुआ। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने इसकी जानकारी दी है। जहाज ओमान के तट के पास था, तभी प्रोजेक्टाइल जहाज के दाहिने हिस्से से टकराया। इस हमले में जहाज के ब्रिज (जहां से जहाज को कंट्रोल किया जाता है) को नुकसान पहुंचा। जहाज के कप्तान ने बताया कि इस घटना में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान ने होर्मुज में नए रूट पर आपत्ति जताई : ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें होर्मुज से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नए समुद्री रास्ते (इवैक्यूएशन लेन) बनाने की बात कही गई थी। 2. होर्मुज को लेकर ईरान-अमेरिका आमने-सामने: ईरान ने कहा कि बिना नियम माने गुजरने वाले जहाजों पर कार्रवाई होगी। अमेरिका ने साफ किया कि होर्मुज पर किसी एक देश का नियंत्रण स्वीकार नहीं करेगा। 3. ट्रम्प ने युद्ध खर्च के लिए ₹8.3 लाख करोड़ मांगे: ट्रम्प सरकार ने अमेरिकी संसद से 87.6 अरब डॉलर (₹8.322 लाख करोड़) की अतिरिक्त फंडिंग मांगी। यह रकम युद्ध खर्च, सेना की तैयारी और हथियारों के भंडार के लिए इस्तेमाल होगी। 4. लेबनान में इजराइली हमले जारी: नाबातियेह के पास कार पर हमले में 3 लोगों की मौत और 1 व्यक्ति घायल हुआ। इजराइली सेना ने हमले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। 5. ईरान ने अमेरिका विरोधी नारों पर रोक की खबर खारिज की: ईरान ने कहा कि ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे या अमेरिकी झंडा जलाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। सरकार ने सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को गलत बताया। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….







