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‘लापरवाह उपेक्षा…’: युसूफ पठान से ममता के लिए लोकसभा सीट खाली करने को कहने पर सौरव गांगुली | भारत समाचार

Gus Atkinson celebrates taking the wicket of New Zealand's Will O'Rourke (Picture credit: AP)

आखरी अपडेट:06 जून, 2026, 17:11 IST एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सौरव गांगुली ने ममता बनर्जी की ओर से यूसुफ पठान से संपर्क किया और उन्हें अपनी संसदीय सीट से हटने के लिए कहा। पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी टीएमसी सांसद यूसुफ पठान के साथ। (एक्स/यूसुफ पठान) बंगाल में हाल ही में हुए चुनाव में हार के बाद, जहां वह अपनी भबनीपुर सीट मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से हार गईं, खबरें सामने आईं कि ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद यूसुफ पठान से उनकी बहरामपुर सीट खाली करने के लिए कहकर संसद में प्रवेश की मांग कर रही थीं। की एक रिपोर्ट आनंदबाजार पत्रिका दावा किया गया कि पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली ने ममता बनर्जी की ओर से यूसुफ पठान से संपर्क किया था ताकि वह अपना संदेश ले सकें कि पूर्व सीएम को निर्वाचन क्षेत्र से उपचुनाव लड़ने की अनुमति देने के लिए उन्हें बहरामपुर सांसद के रूप में अपने पद से हट जाना चाहिए। यूसुफ पठान, जो एक पूर्व क्रिकेटर भी हैं, 2024 के लोकसभा चुनावों में अपने राजनीतिक पदार्पण पर बहरामपुर में एक विशाल हत्यारे के रूप में उभरे, उन्होंने अनुभवी कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को हराया। 50-52% मुस्लिम आबादी के साथ बहरामपुर टीएमसी के लिए सुरक्षित सीट मानी जाती है। ‘दादा’ ने हवा साफ़ की हालाँकि, बाद में गांगुली ने पठान से अपनी सीट खाली करने के लिए कहने से इनकार कर दिया, और उन्हें “सच्चाई की लापरवाही भरी अवहेलना” कहा। उन्होंने कहा, “उपरोक्त आरोप असत्य हैं। मैं मीडिया से अनुरोध करूंगा कि मुद्रित और प्रकाशित तथ्यों की सत्यता की पुष्टि किए बिना अफवाहों और अटकलों का शिकार न बनें। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि लेख में उपरोक्त आरोपों की सच्चाई और सत्यता की जांच और सत्यापन के लिए किट को आवश्यक नहीं समझा गया।” भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का कहना है, ”…यह आरोप लगाया गया था कि मैंने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से श्री यूसुफ़ पठान से संपर्क किया था और उनका संदेश दिया था कि उन्हें अपने संवैधानिक पद से हट जाना चाहिए/इस्तीफ़ा दे देना चाहिए…” pic.twitter.com/0RkRsRhYfo– एएनआई (@ANI) 6 जून, 2026 उन्होंने कहा, ”यह रिकॉर्ड में रखना जरूरी है कि सुश्री ममता बनर्जी ने मुझसे कभी भी श्री यूसुफ पठान को कोई संदेश देने के लिए अनुरोध/कहा नहीं था, चाहे वह अपनी संसदीय सीट से हट जाएं, जैसा कि आरोप लगाया गया है या अन्यथा या बिल्कुल भी।” उन्होंने कहा कि वह कभी भी किसी भी स्तर पर राजनीतिक मामलों में शामिल नहीं रहे हैं। यह रिपोर्ट तब आई है जब टीएमसी, जिसने 2026 के विधानसभा चुनावों में सिर्फ 80 सीटें जीती थीं, 60 से अधिक विधायकों द्वारा पार्टी तोड़ने और निष्कासित नेता रीतब्रत बनर्जी को राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में चुने जाने के बाद अपने अस्तित्व के सबसे गंभीर संकट का सामना कर रही है। पार्टी के कई नेताओं ने खुलेआम पार्टी नेतृत्व के प्रति असंतोष व्यक्त किया है और पद छोड़ने की योजना बना रहे हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में अवीक बनर्जी अवीक बनर्जी News18 में वरिष्ठ उप संपादक हैं। ग्लोबल स्टडीज में मास्टर की डिग्री के साथ नोएडा में रहने वाले अवीक के पास डिजिटल मीडिया और न्यूज क्यूरेशन में तीन साल से अधिक का अनुभव है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय विषयों में विशेषज्ञता रखते हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘लापरवाह उपेक्षा…’: युसूफ पठान से ममता के लिए लोकसभा सीट खाली करने को कहने पर सौरव गांगुली अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)ममता बनर्जी संसद में प्रवेश(टी)ममता बनर्जी सीट(टी)सौरव गांगुली का इनकार(टी)यूसुफ पठान बहरामपुर(टी)टीएमसी राजनीतिक संकट(टी)बंगाल चुनाव झटका(टी)सुवेंदु अधिकारी की जीत(टी)ऋतब्रत बनर्जी विरोध

शिल्पा शिंदे पर सीएम फडणवीस से कानूनी कार्रवाई की मांग:प्रोड्यूसर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट के झूठे आरोप लगाए; शिल्पा का पोस्ट- 'जो उखाड़ना है उखाड़ लो'

शिल्पा शिंदे पर सीएम फडणवीस से कानूनी कार्रवाई की मांग:प्रोड्यूसर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट के झूठे आरोप लगाए; शिल्पा का पोस्ट- 'जो उखाड़ना है उखाड़ लो'

टेलीविजन एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे के एक हालिया खुलासे पर ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने कड़ी आपत्ति जताई है। शिल्पा ने कॉमेडियन भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया के पॉडकास्ट में माना था कि उन्होंने टीवी शो ‘भाभीजी घर पर हैं’ के प्रोड्यूसर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट (यौन उत्पीड़न) के झूठे आरोप लगाए थे। इस बयान के बाद एसोसिएशन ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मामले में हस्तक्षेप कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना के बीच शिल्पा ने एक वीडियो शेयर कर आलोचकों को जवाब दिया है। झूठे आरोपों से असली पीड़ितों को नुकसान ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर शिल्पा शिंदे के इस कबूलनामे पर गहरी निराशा जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि ऐसे कदमों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। एसोसिएशन ने कहा कि यौन उत्पीड़न के झूठे आरोपों से किसी भी व्यक्ति के सम्मान, परिवार, बच्चों, करियर और मानसिक स्थिति को कभी न ठीक होने वाला नुकसान पहुंचता है। इससे समाज में उस व्यक्ति की छवि हमेशा के लिए खराब हो जाती है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से दखल की मांग एसोसिएशन ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराने की अपील की है। AICWA के मुताबिक, अगर यह साबित होता है कि किसी ने जानबूझकर झूठे आरोप लगाए हैं, तो कानून के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। एसोसिएशन ने कहा कि जब कोई जानबूझकर ऐसे झूठे केस करता है, तो इससे उन असली पीड़ितों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगते हैं जो न्याय की उम्मीद में आगे आते हैं। इससे बॉलीवुड और फिल्म इंडस्ट्री में प्रताड़ना झेलने वाले असली लोगों को अपनी बात रखने में मुश्किल होगी। ‘जो उखाड़ना है उखाड़ लो’ सोशल मीडिया पर लगातार हो रही आलोचना के बीच शिल्पा शिंदे ने इंस्टाग्राम पर एक नया वीडियो पोस्ट कर अपना बचाव किया है। उन्होंने अपनी तस्वीरों और वीडियो के साथ एक रील शेयर की, जिस पर लिखा था, “एक महिला बनो, हमेशा यह कहने के लिए तैयार रहो कि जो उखाड़ना है उखाड़ लो।” इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा कि जलने वाले जलते रहें। एक अन्य पोस्ट में शिल्पा ने कहा कि जिंदगी में सब कुछ साफ-साफ बोलने के चक्कर में आधे लोग वैसे ही साफ हो गए हैं। 2016 में मेकर्स पर लगाए थे संगीन आरोप शिल्पा शिंदे ने 2015 में टीवी शो भाभीजी घर पर हैं में अंगूरी भाभी का किरदार निभाया था। एक साल बाद शिल्पा ने मेकर्स और प्रोड्यूसर के खिलाफ कई संगीन आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई और शो छोड़ दिया। शिल्पा शिंदे ने हाल ही में पॉडकास्ट के दौरान कहा था, “यह बात कोई नहीं जानता। मैं अब सच बोलने से नहीं डरती। मैंने अपने प्रोड्यूसर के खिलाफ सेक्सुअल हैरेसमेंट का केस दर्ज कराया था क्योंकि मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। कांट्रैक्ट के विवाद को सुलझाने के लिए मैंने ऐसा किया और बाद में सेटलमेंट करके मैं उस स्थिति से बाहर आ गई।” शिल्पा ने आगे दावा किया कि वे खुद लॉ बैकग्राउंड से आती हैं और पुलिस का कहना था कि अगर एफआईआर दर्ज करानी है, तो गंभीर आरोप लिखने ही होंगे।

शिल्पा शिंदे पर सीएम फडणवीस से कानूनी कार्रवाई की मांग:प्रोड्यूसर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट के झूठे आरोप लगाए; शिल्पा का पोस्ट- 'जो उखाड़ना है उखाड़ लो'

शिल्पा शिंदे पर सीएम फडणवीस से कानूनी कार्रवाई की मांग:प्रोड्यूसर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट के झूठे आरोप लगाए; शिल्पा का पोस्ट- 'जो उखाड़ना है उखाड़ लो'

टेलीविजन एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे के एक हालिया खुलासे पर ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने कड़ी आपत्ति जताई है। शिल्पा ने कॉमेडियन भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया के पॉडकास्ट में माना था कि उन्होंने टीवी शो ‘भाभीजी घर पर हैं’ के प्रोड्यूसर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट (यौन उत्पीड़न) के झूठे आरोप लगाए थे। इस बयान के बाद एसोसिएशन ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मामले में हस्तक्षेप कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना के बीच शिल्पा ने एक वीडियो शेयर कर आलोचकों को जवाब दिया है। झूठे आरोपों से असली पीड़ितों को नुकसान ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर शिल्पा शिंदे के इस कबूलनामे पर गहरी निराशा जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि ऐसे कदमों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। एसोसिएशन ने कहा कि यौन उत्पीड़न के झूठे आरोपों से किसी भी व्यक्ति के सम्मान, परिवार, बच्चों, करियर और मानसिक स्थिति को कभी न ठीक होने वाला नुकसान पहुंचता है। इससे समाज में उस व्यक्ति की छवि हमेशा के लिए खराब हो जाती है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से दखल की मांग एसोसिएशन ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराने की अपील की है। AICWA के मुताबिक, अगर यह साबित होता है कि किसी ने जानबूझकर झूठे आरोप लगाए हैं, तो कानून के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। एसोसिएशन ने कहा कि जब कोई जानबूझकर ऐसे झूठे केस करता है, तो इससे उन असली पीड़ितों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगते हैं जो न्याय की उम्मीद में आगे आते हैं। इससे बॉलीवुड और फिल्म इंडस्ट्री में प्रताड़ना झेलने वाले असली लोगों को अपनी बात रखने में मुश्किल होगी। ‘जो उखाड़ना है उखाड़ लो’ सोशल मीडिया पर लगातार हो रही आलोचना के बीच शिल्पा शिंदे ने इंस्टाग्राम पर एक नया वीडियो पोस्ट कर अपना बचाव किया है। उन्होंने अपनी तस्वीरों और वीडियो के साथ एक रील शेयर की, जिस पर लिखा था, “एक महिला बनो, हमेशा यह कहने के लिए तैयार रहो कि जो उखाड़ना है उखाड़ लो।” इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा कि जलने वाले जलते रहें। एक अन्य पोस्ट में शिल्पा ने कहा कि जिंदगी में सब कुछ साफ-साफ बोलने के चक्कर में आधे लोग वैसे ही साफ हो गए हैं। 2016 में मेकर्स पर लगाए थे संगीन आरोप शिल्पा शिंदे ने 2015 में टीवी शो भाभीजी घर पर हैं में अंगूरी भाभी का किरदार निभाया था। एक साल बाद शिल्पा ने मेकर्स और प्रोड्यूसर के खिलाफ कई संगीन आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई और शो छोड़ दिया। शिल्पा शिंदे ने हाल ही में पॉडकास्ट के दौरान कहा था, “यह बात कोई नहीं जानता। मैं अब सच बोलने से नहीं डरती। मैंने अपने प्रोड्यूसर के खिलाफ सेक्सुअल हैरेसमेंट का केस दर्ज कराया था क्योंकि मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। कांट्रैक्ट के विवाद को सुलझाने के लिए मैंने ऐसा किया और बाद में सेटलमेंट करके मैं उस स्थिति से बाहर आ गई।” शिल्पा ने आगे दावा किया कि वे खुद लॉ बैकग्राउंड से आती हैं और पुलिस का कहना था कि अगर एफआईआर दर्ज करानी है, तो गंभीर आरोप लिखने ही होंगे।

'हर महिला सम्मान की हकदार है':'पेड्डी' में जाह्नवी के किरदार पर आपत्ति के बाद डायरेक्टर ने मांगी माफी, बोले- आपत्तिजनक सीन्स में बदलाव करेंगे

'हर महिला सम्मान की हकदार है':'पेड्डी' में जाह्नवी के किरदार पर आपत्ति के बाद डायरेक्टर ने मांगी माफी, बोले- आपत्तिजनक सीन्स में बदलाव करेंगे

फिल्म पेड्डी में एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर के किरदार ‘अचियम्मा’ को लेकर उठे विवाद के बीच डायरेक्टर बुची बाबू सना ने पब्लिकली माफी मांगी है। सोशल मीडिया पर दर्शकों ने फिल्म में महिला किरदार के प्रेजेंटेशन पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद डायरेक्टर ने रिएक्शन देते हुए महिलाओं के सम्मान की बात कही और विवादित सीन्स में बदलाव की बात कही। डायरेक्टर बुची बाबू सना ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर एक बयान जारी कर लिखा, एक फिल्ममेकर के तौर पर, मेरा मानना है कि सिनेमा को लोगों का मनोरंजन करना चाहिए, उन्हें प्रेरित करना चाहिए और उनसे जुड़ना चाहिए। इसका मकसद कभी भी किसी को असहज महसूस कराना या उनका अपमान करना नहीं होना चाहिए। हमने पेड्डी के कुछ सीन पर आए रिएक्शन को गंभीरता से लिया है। महिलाओं के सम्मान की बात करते हुए बाबू ने लिखा, मैं हमेशा महिलाओं का सम्मान करता आया हूं, चाहे वह पर्दे पर हों या असल जिंदगी में। हमारा इरादा कभी भी किसी महिला किरदार को गलत तरीके से दिखाने या उसका अपमान करने का नहीं था। लेकिन अगर फिल्म का कोई हिस्सा लोगों को ऐसा महसूस कराता है, तो हम उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं, उनकी चिंताओं को समझते हैं और इसके लिए दिल से माफी मांगते हैं। सीन में बदलाव की बात करते हुए उन्होंने लिखा, मिली प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करने के बाद हमने फिल्म के उन हिस्सों में बदलाव करने का फैसला किया है जिन पर आपत्ति जताई गई है। सिनेमा और दर्शकों का रिश्ता बहुत खास होता है। एक कहानीकार के तौर पर हमारी जिम्मेदारी है कि हम समय के साथ बदलती सोच और संवेदनशीलताओं का ध्यान रखें। अपने बयान के अंत में फिल्ममेकर ने लिखा, हर महिला सम्मान, गरिमा और सही रिप्रेजेंटेशन की हकदार है। हम आगे भी ऐसी कहानियां सुनाने के लिए कमिटेड हैं जो मजबूत किरदारों को सामने लाएं और इन वैल्यूज को बनाए रखें। अपनी राय ईमानदारी से शेयर करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद। किरदार को जरूरत से ज्यादा बोल्ड बताया दरअसल, फिल्म पेड्डी की रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर जाह्नवी कपूर के किरदार ‘अचियम्मा’ को लेकर कुछ लोगों का कहना है कि किरदार को कहानी की जरूरत के बजाय दर्शकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से अधिक बोल्ड तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इसके चलते फिल्म मेकर्स की ऑनलाइन आलोचना होने लगी। हालांकि, पूरे विवाद पर अभी तक जाह्नवी कपूर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अभिनेत्री ने मामले पर पब्लिकली कोई बयान नहीं दिया है। दुनियाभर में 150.49 करोड़ की कमाई हुई पेड्डी एक स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म है, जो खेल के माध्यम से अपनी पहचान तलाशने वाले एक व्यक्ति की कहानी पर आधारित है। फिल्म को बुच्ची बाबू सना ने लिखा और डायरेक्ट किया है। फिल्म में राम चरण, जाह्नवी कपूर, शिव राजकुमार, दिव्येंदु और जगपति बाबू प्रमुख भूमिकाओं में हैं। पेड्डी 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। सैकनिल्क के अनुसार, फिल्म ने रिलीज के दूसरे दिन भारत में 26.90 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ ही फिल्म का कुल इंडिया नेट कलेक्शन 96.40 करोड़ रुपए पहुंच गया है। वहीं, भारत में फिल्म का कुल ग्रॉस कलेक्शन 114.49 करोड़ रुपए हो चुका है। ओवरसीज मार्केट में भी ‘पेड्डी’ को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। दूसरे दिन फिल्म ने विदेशों में 8 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन किया। इसके बाद फिल्म का कुल ओवरसीज ग्रॉस कलेक्शन 36 करोड़ रुपए हो गया है। दुनियाभर में ‘पेड्डी’ की कमाई 150.49 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। ये खबर भी पढ़ें… राम चरण से मिलकर रो पड़ा फैन: स्टेज पर एक्टर की तरफ भागा था, घबरा गई थीं जाह्नवी कपूर; बॉडीगार्ड ने उठाकर बाहर निकाला था फिल्म ‘पेद्दी’ के प्रमोशन इवेंट का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें राम चरण जैसा दिखने वाला एक फैन सुरक्षा घेरा तोड़कर स्टेज की तरफ दौड़ पड़ा था। हालांकि, सुरक्षा कर्मियों ने उसे तुरंत रोक लिया था। पूरी खबर पढ़ें

'हर महिला सम्मान की हकदार है':'पेड्डी' में जाह्नवी के किरदार पर आपत्ति के बाद डायरेक्टर ने मांगी माफी, बोले- आपत्तिजनक सीन्स में बदलाव करेंगे

'हर महिला सम्मान की हकदार है':'पेड्डी' में जाह्नवी के किरदार पर आपत्ति के बाद डायरेक्टर ने मांगी माफी, बोले- आपत्तिजनक सीन्स में बदलाव करेंगे

फिल्म पेड्डी में एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर के किरदार ‘अचियम्मा’ को लेकर उठे विवाद के बीच डायरेक्टर बुची बाबू सना ने पब्लिकली माफी मांगी है। सोशल मीडिया पर दर्शकों ने फिल्म में महिला किरदार के प्रेजेंटेशन पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद डायरेक्टर ने रिएक्शन देते हुए महिलाओं के सम्मान की बात कही और विवादित सीन्स में बदलाव की बात कही। डायरेक्टर बुची बाबू सना ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर एक बयान जारी कर लिखा, एक फिल्ममेकर के तौर पर, मेरा मानना है कि सिनेमा को लोगों का मनोरंजन करना चाहिए, उन्हें प्रेरित करना चाहिए और उनसे जुड़ना चाहिए। इसका मकसद कभी भी किसी को असहज महसूस कराना या उनका अपमान करना नहीं होना चाहिए। हमने पेड्डी के कुछ सीन पर आए रिएक्शन को गंभीरता से लिया है। महिलाओं के सम्मान की बात करते हुए बाबू ने लिखा, मैं हमेशा महिलाओं का सम्मान करता आया हूं, चाहे वह पर्दे पर हों या असल जिंदगी में। हमारा इरादा कभी भी किसी महिला किरदार को गलत तरीके से दिखाने या उसका अपमान करने का नहीं था। लेकिन अगर फिल्म का कोई हिस्सा लोगों को ऐसा महसूस कराता है, तो हम उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं, उनकी चिंताओं को समझते हैं और इसके लिए दिल से माफी मांगते हैं। सीन में बदलाव की बात करते हुए उन्होंने लिखा, मिली प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करने के बाद हमने फिल्म के उन हिस्सों में बदलाव करने का फैसला किया है जिन पर आपत्ति जताई गई है। सिनेमा और दर्शकों का रिश्ता बहुत खास होता है। एक कहानीकार के तौर पर हमारी जिम्मेदारी है कि हम समय के साथ बदलती सोच और संवेदनशीलताओं का ध्यान रखें। अपने बयान के अंत में फिल्ममेकर ने लिखा, हर महिला सम्मान, गरिमा और सही रिप्रेजेंटेशन की हकदार है। हम आगे भी ऐसी कहानियां सुनाने के लिए कमिटेड हैं जो मजबूत किरदारों को सामने लाएं और इन वैल्यूज को बनाए रखें। अपनी राय ईमानदारी से शेयर करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद। किरदार को जरूरत से ज्यादा बोल्ड बताया दरअसल, फिल्म पेड्डी की रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर जाह्नवी कपूर के किरदार ‘अचियम्मा’ को लेकर कुछ लोगों का कहना है कि किरदार को कहानी की जरूरत के बजाय दर्शकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से अधिक बोल्ड तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इसके चलते फिल्म मेकर्स की ऑनलाइन आलोचना होने लगी। हालांकि, पूरे विवाद पर अभी तक जाह्नवी कपूर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अभिनेत्री ने मामले पर पब्लिकली कोई बयान नहीं दिया है। दुनियाभर में 150.49 करोड़ की कमाई हुई पेड्डी एक स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म है, जो खेल के माध्यम से अपनी पहचान तलाशने वाले एक व्यक्ति की कहानी पर आधारित है। फिल्म को बुच्ची बाबू सना ने लिखा और डायरेक्ट किया है। फिल्म में राम चरण, जाह्नवी कपूर, शिव राजकुमार, दिव्येंदु और जगपति बाबू प्रमुख भूमिकाओं में हैं। पेड्डी 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। सैकनिल्क के अनुसार, फिल्म ने रिलीज के दूसरे दिन भारत में 26.90 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ ही फिल्म का कुल इंडिया नेट कलेक्शन 96.40 करोड़ रुपए पहुंच गया है। वहीं, भारत में फिल्म का कुल ग्रॉस कलेक्शन 114.49 करोड़ रुपए हो चुका है। ओवरसीज मार्केट में भी ‘पेड्डी’ को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। दूसरे दिन फिल्म ने विदेशों में 8 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन किया। इसके बाद फिल्म का कुल ओवरसीज ग्रॉस कलेक्शन 36 करोड़ रुपए हो गया है। दुनियाभर में ‘पेड्डी’ की कमाई 150.49 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। ये खबर भी पढ़ें… राम चरण से मिलकर रो पड़ा फैन: स्टेज पर एक्टर की तरफ भागा था, घबरा गई थीं जाह्नवी कपूर; बॉडीगार्ड ने उठाकर बाहर निकाला था फिल्म ‘पेद्दी’ के प्रमोशन इवेंट का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें राम चरण जैसा दिखने वाला एक फैन सुरक्षा घेरा तोड़कर स्टेज की तरफ दौड़ पड़ा था। हालांकि, सुरक्षा कर्मियों ने उसे तुरंत रोक लिया था। पूरी खबर पढ़ें

ईरान बोला- दोबारा जंग नहीं चाहते:लेकिन हमला हुआ तो पूरी ताकत से जवाब देंगे; अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए

ईरान बोला- दोबारा जंग नहीं चाहते:लेकिन हमला हुआ तो पूरी ताकत से जवाब देंगे; अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए

ईरान ने कहा है कि वह किसी नए युद्ध की शुरुआत नहीं करना चाहता, लेकिन उस पर हमला हुआ तो वह पूरी ताकत से जवाब देगा। ईरानी न्यूज एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। देश पर किसी भी तरह का हमला या दबाव डाला गया तो तेहरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। उधर, ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के ऊर्जा और बैंकिंग सेक्टर को निशाना बनाते हुए नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कहा कि उसने ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई की है, जो दक्षिण और पूर्वी एशिया में करोड़ों डॉलर मूल्य की ईरानी LPG बेच रहा था। अमेरिका का आरोप है कि ईरानी गैस को जानबूझकर ओमान की LPG बताकर बेचा जा रहा था, ताकि उसकी असली पहचान छिपाई जा सके। कुल 12 संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। इनमें 5 कंपनियां मार्शल आइलैंड्स, 4 संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और 1 चीन में स्थित हैं। इसके अलावा 6 जहाजों पर भी कार्रवाई की गई है, जिनमें 4 पनामा-फ्लैग्ड टैंकर शामिल हैं। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

रुपया डॉलर के मुकाबले 81 पैसे मजबूत हुआ:RBI पॉलिसी के बाद ₹94.93 पर हुआ बंद; रेपो रेट 5.25% पर बरकरार

रुपया डॉलर के मुकाबले 81 पैसे मजबूत हुआ:RBI पॉलिसी के बाद ₹94.93 पर हुआ बंद; रेपो रेट 5.25% पर बरकरार

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के नतीजों के बाद शुक्रवार को भारतीय करेंसी में तेजी देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 81 पैसे की बढ़त के साथ 94.93 के स्तर पर बंद हुआ। केंद्रीय बैंक द्वारा विदेशी पूंजी के इनफ्लो (आगमन) को बढ़ाने और फॉरेक्स लिक्विडिटी को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों से बाजार का सेंटिमेंट सुधरा है। फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि RBI गवर्नर के इस फैसले से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने के लिए पूरी तरह पर्याप्त है। लगातार दूसरी बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं RBI ने शुक्रवार को उम्मीद के मुताबिक अपनी ब्याज दरों (रेपो रेट) में कोई बदलाव नहीं किया। यह लगातार दूसरी बार है जब दरों को स्थिर रखा गया है। मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि एमपीसी ने सर्वसम्मति से शॉर्ट-टर्म लेंडिंग रेट यानी रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही नीतिगत रुख को ‘न्यूट्रल’ रखा गया है। केंद्रीय बैंक ने यह फैसला पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों को ध्यान में रखकर लिया है। दिनभर के उतार-चढ़ाव में ₹94.89 के ऊंचे स्तर तक गया रुपया इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट (विदेशी मुद्रा बाजार) में शुक्रवार को रुपये की शुरुआत मजबूती के साथ 95.72 पर हुई थी। ट्रेडिंग के दौरान इसने 94.89 का इंट्राडे हाई (उच्चतम स्तर) छुआ। आखिर में यह पिछले क्लोजिंग भाव से 81 पैसे की बढ़त दर्ज करते हुए 94.93 पर बंद हुआ। इससे पहले गुरुवार को डॉलर के मुकाबले रुपया महज 2 पैसे बढ़कर 95.74 पर बंद हुआ था। साल 2013 के बाद डॉलर जुटाने का सबसे बड़ा प्रयास कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी ने कहा, “RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई के अनुमान को 50 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 5.1% कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद रेपो रेट को 5.25% पर न्यूट्रल रुख के साथ बरकरार रखा है। इससे साफ है कि ब्याज दरों का इस्तेमाल महंगाई को रोकने के लिए होगा, जबकि रुपये को मजबूत बनाए रखने के लिए कैपिटल अकाउंट का सहारा लिया जाएगा।” उन्होंने आगे बताया कि सरकार और RBI ने मिलकर जो कदम उठाए हैं, वे 2013 के बाद से डॉलर जुटाने के सबसे व्यापक प्रयास हैं। इनमें नए 15, 30 और 40 साल के सरकारी बॉन्ड्स (G-Sec) को फुली एक्सेसिबल रूट में शामिल करना, FPI कंसंट्रेशन लिमिट को हटाना और PSU ECB स्वैप विंडो जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा सरकारी बॉन्ड्स में विदेशी निवेश पर टैक्स हटाने से ग्लोबल फंड्स का आकर्षण भारत की तरफ तेजी से बढ़ेगा। आने वाले दिनों में ₹94 तक आ सकता है स्तर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहती हैं, तो इन कदमों से रुपये को और मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में रुपया सुधरकर 94 से 94.5 के स्तर तक पहुंच सकता है, जबकि डॉलर-रुपये का ऊपरी स्तर अब 96 के आसपास सीमित हो गया है। हालांकि, ₹94 से आगे की मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि नए नियमों के जरिए देश में कितना डॉलर आता है। 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है विदेशी मुद्रा भंडार RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश की आर्थिक स्थिति पर भरोसा जताते हुए कहा कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 682.3 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर है। यह भंडार देश की करीब 11 महीने की आयात जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह पर्याप्त है। दूसरी ओर, दुनिया की छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दिखाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.19% की गिरावट के साथ 99.22 पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, ब्रेंट क्रूड वायदा 0.29% घटकर 94.75 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। GDP ग्रोथ का अनुमान घटा, महंगाई की चिंता बढ़ी RBI ने जहां एक तरफ रुपये को संभालने के इंतजाम किए हैं, वहीं अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर कुछ अनुमानों में बदलाव भी किया है। केंद्रीय बैंक ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ रेट का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2027 के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित रिटेल महंगाई दर का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया है। इस बीच, घरेलू शेयर बाजार में मामूली गिरावट रही। सेंसेक्स 116.67 अंक गिरकर 74,243.34 पर और निफ्टी 49.85 अंक फिसलकर 23,366.70 पर बंद हुआ। एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने गुरुवार को ₹4,447.06 करोड़ के शेयर बेचे थे।

अन्नामलाई ने नए राजनीतिक संगठन की घोषणा की, तमिलनाडु भाजपा से बड़े पैमाने पर इस्तीफे की शुरुआत | शीर्ष बिंदु | भारत समाचार

Nathan Smith celebrates taking the wicket of England's Josh Tongue (Picture credit: AP)

आखरी अपडेट:05 जून, 2026, 22:54 IST अन्नामलाई ने कहा कि उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भाजपा के ढांचे से परे हैं और उन्हें एक व्यापक मंच की आवश्यकता है। के अन्नामलाई की वर्तमान स्थिति मूल रूप से पिछले उदाहरणों से भिन्न है क्योंकि उनके राजनीतिक प्रक्षेपवक्र की कल्पना और पोषण पूरी तरह से पार्टी के वर्तमान राष्ट्रीय नेतृत्व के आधुनिक, संस्थागत ढांचे के भीतर किया गया था। फ़ाइल चित्र/पीटीआई अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कई दिनों की अटकलों के बाद, तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई ने शुक्रवार को एक नया राजनीतिक आंदोलन शुरू करने की घोषणा की और पुष्टि की कि वह राज्य में अगला चुनाव एक नए बैनर के तहत लड़ेंगे। अन्नामलाई ने यह कहते हुए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया कि वह समावेशी और जन-केंद्रित राजनीति पर केंद्रित एक “नया रास्ता” अपनाना चाहते हैं। इस घटनाक्रम से तमिलनाडु भाजपा के भीतर इस्तीफों की लहर शुरू हो गई, कई नेताओं ने अन्नामलाई के नए उद्यम का समर्थन करने के लिए पार्टी छोड़ दी। एक सोशल मीडिया संबोधन में, अन्नामलाई ने कहा कि उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भाजपा के ढांचे से परे हैं और उन्हें एक व्यापक मंच की आवश्यकता है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन द्वारा उनका इस्तीफा स्वीकार करने के बाद उन्होंने घोषणा की, “आज से, एक नया रास्ता, एक नया आंदोलन; एक नया राजनीतिक आंदोलन।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनकी नई पहल एक समावेशी राजनीतिक एजेंडे के तहत विविध पृष्ठभूमि के लोगों को एक साथ लाने का प्रयास करेगी। अन्नामलाई का कहना है कि वह पीएम मोदी का सम्मान करते रहेंगे भाजपा से नाता तोड़ने के बाद भी अन्नामलाई ने स्पष्ट कर दिया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हैं। उन्होंने कहा, ”मैं पीएम मोदी का बहुत सम्मान करता हूं।” उन्होंने कहा कि वह सम्मानजनक तरीके से पार्टी से बाहर आए हैं और तमिलनाडु में राजनीति की एक नई शैली शुरू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अन्नामलाई का दावा, बीजेपी के साथ मतभेद 18 महीने से बरकरार अपने फैसले के बारे में बताते हुए अन्नामलाई ने कहा कि यह कदम अचानक नहीं था। उन्होंने खुलासा किया कि पद छोड़ने का निर्णय लेने से पहले वह लगभग 18 महीने तक भाजपा नेतृत्व के साथ मतभेदों पर चर्चा करते रहे थे। उनके अनुसार, निर्णय में क्षणिक असहमति के बजाय व्यापक विचार-विमर्श किया गया। अन्नामलाई ने ‘समावेशी राजनीति’, व्यक्तित्व पंथ के अंत पर जोर दिया अपनी राजनीतिक दृष्टि को रेखांकित करते हुए, अन्नामलाई ने तर्क दिया कि तमिलनाडु को व्यक्तित्व-संचालित राजनीति से आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “तमिलनाडु के विकास के लिए हर किसी का उपयोग किया जाना चाहिए। हमें पंथ की राजनीति से बाहर आना चाहिए और आम आदमी की राजनीति स्थापित करनी चाहिए।” पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा कि उनका आंदोलन आम नागरिकों को सशक्त बनाने और अधिक भागीदारी वाली राजनीतिक संस्कृति बनाने पर केंद्रित होगा। एआईएडीएमके के साथ गठबंधन को प्रमुख ट्रिगर के रूप में देखा जा रहा है तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के रूप में नैनार नागेंद्रन की जगह लिए जाने और 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले अन्नाद्रमुक के साथ अपने गठबंधन को पुनर्जीवित करने के भाजपा के फैसले के बाद अन्नामलाई कथित तौर पर असहज हो गए थे। एआईएडीएमके ने लोकसभा चुनाव से पहले सितंबर 2023 में बीजेपी से नाता तोड़ लिया था, लेकिन बाद में गठबंधन दोबारा शुरू कर दिया। अन्नामलाई ने आक्रामक द्रमुक विरोधी अभियान के साथ टीएन बीजेपी की प्रोफ़ाइल बनाई तमिलनाडु भाजपा प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, अन्नामलाई राज्य में पार्टी के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक के रूप में उभरे। अपनी आक्रामक राजनीतिक शैली के लिए जाने जाने वाले, उन्होंने सत्तारूढ़ डीएमके सरकार पर लगातार निशाना साधा और पार्टी नेताओं पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए बहुप्रचारित “डीएमके फाइल्स” जारी की। उनकी प्रखर वक्तृत्व कला, संगठनात्मक कौशल और युवा मतदाताओं के बीच अपील ने तमिलनाडु में भाजपा की छवि को बढ़ाने में मदद की। स्वयंसेवक अभियान को व्यापक प्रतिक्रिया अन्नामलाई की नई राजनीतिक पहल को पहले ही जनता से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी। उनके पोर्टल wetheleaders.org के अनुसार, राजनीति के एक नए मॉडल का समर्थन करने के लिए उनके आह्वान के कुछ ही घंटों के भीतर 8.83 लाख से अधिक लोगों ने स्वयंसेवकों के रूप में पंजीकरण कराया। यह आंकड़ा उनके नए उद्यम द्वारा उत्पन्न जमीनी स्तर की रुचि के शुरुआती संकेतक के रूप में काम कर सकता है। अन्नामलाई के समर्थन में तमिलनाडु भाजपा नेताओं ने इस्तीफा दिया घोषणा के तुरंत बाद, तमिलनाडु भाजपा के उपाध्यक्ष कारू नागराजन ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और अन्नामलाई को समर्थन देने का वादा किया। नागराजन ने उन्हें “ऊर्जावान और साहसी नेता” बताते हुए कहा कि वह नए आंदोलन में शामिल होंगे। राज्य भाजपा सचिव सुमति वेंकटेश ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। अन्नामलाई के जाने के बाद कथित तौर पर तमिलनाडु के कम से कम 13 अन्य भाजपा नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में -सौरभ वर्मावरिष्ठ उपसंपादक सौरभ वर्मा मुख्य उप-संपादक के रूप में News18.com के लिए सामान्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दैनिक समाचारों को कवर करते हैं। वह राजनीति पर गहरी नजर रखते हैं। आप उन्हें ट्विटर –twitter.com/saurbhkverma19 पर फ़ॉलो कर सकते हैं न्यूज़ इंडिया अन्नामलाई ने नए राजनीतिक संगठन की घोषणा की, तमिलनाडु भाजपा से बड़े पैमाने पर इस्तीफे की शुरुआत | शीर्ष बिंदु अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)के अन्नामलाई नया राजनीतिक आंदोलन(टी)के अन्नामलाई का इस्तीफा(टी)तमिलनाडु बीजेपी संकट(टी)नया राजनीतिक दल तमिलनाडु(टी)समावेशी राजनीति तमिलनाडु(टी)एआईएडीएमके बीजेपी गठबंधन(टी)डीएमके फाइलें विवाद(टी)तमिलनाडु चुनाव 2026

पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव से भारत नाराज:कहा- इससे अवैध कब्जा वैध नहीं होगा; वहां 7 जून को 24 सीटों पर वोटिंग

पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव से भारत नाराज:कहा- इससे अवैध कब्जा वैध नहीं होगा; वहां 7 जून को 24 सीटों पर वोटिंग

भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को होने वाले विधानसभा चुनावों का कड़ा विरोध किया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि पाकिस्तान जिस क्षेत्र पर अवैध और जबरन कब्जा किए हुए है, वहां चुनाव कराने की उसकी योजना पूरी तरह अस्वीकार्य है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। इसलिए पाकिस्तान को उन क्षेत्रों में किसी भी तरह की राजनीतिक प्रक्रिया चलाने का कोई अधिकार नहीं है। चुनाव कराने जैसी गतिविधियां वहां की जमीनी हकीकत को नहीं बदल सकतीं। गिलगित-बाल्टिस्तान में रविवार को 10 जिलों की 24 सामान्य सीटों पर मतदान कराया जाएगा। चुनाव प्रचार अपने अंतिम चरण में है और विभिन्न राजनीतिक दल जोर-शोर से प्रचार अभियान चला रहे हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान पाकिस्तान के प्रशासनिक नियंत्रण में है, लेकिन भारत इसे अपने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का हिस्सा मानता है। इसी वजह से वहां होने वाले हर चुनाव या राजनीतिक कदम पर भारत आमतौर पर आपत्ति दर्ज कराता है। साढ़े पांच साल बाद हो रहे चुनाव गिलगित-बाल्टिस्तान में साढ़े पांच साल बाद हो रहे हैं। इससे पहले यहां नवंबर 2020 में चुनाव हुए थे, जिनमें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने जीत हासिल की थी। यहां का कार्यकाल 5 साल का होता है। 2020 में चुनी गई विधानसभा ने नवंबर 2025 में अपना कार्यकाल पूरा कर लिया था। नियमों के मुताबिक इसके बाद नए चुनाव कराए जाने थे, लेकिन खराब मौसम और प्रशासनिक कारणों से मतदान समय पर नहीं हो सका। क्षेत्र में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी होती है, जिससे कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हो जाता है। इसी वजह से चुनाव को टाल दिया गया और बाद में 7 जून 2026 की तारीख तय की गई। गिलगित-बाल्टिस्तान में दूसरा चुनाव गिलगित-बाल्टिस्तान और Pok (जिसे पाकिस्तान आजाद जम्मू-कश्मीर कहता है) की प्रशासनिक व्यवस्था अलग-अलग रही है। Pok का अपना अलग संविधान, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विधानसभा है। पाकिस्तान Pok को कुछ स्वायत्तता देता है, हालांकि वास्तविक शक्ति काफी हद तक इस्लामाबाद के पास रहती है। लेकिन गिलगित-बाल्टिस्तान की स्थिति अलग थी। 1947 से लेकर कई दशकों तक इसे पाकिस्तान ने सीधे संघीय सरकार के जरिए चलाया। यहां न तो प्रांत का दर्जा था और न ही पाकिस्तान की संसद में पूरा प्रतिनिधित्व था। फिर 2009 में पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान एम्पावरमेंट एंड सेल्फ-गवर्नेंस ऑर्डर लागू किया। इसके तहत पहली बार यहां विधानसभा चुनाव हुए और एक स्थानीय सरकार बनाई गई। हालांकि तब भी विधानसभा के अधिकार सीमित थे और अहम फैसले प्रधानमंत्री लेता था। इसके बाद 2018 में पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान ऑर्डर 2018 लागू किया। इसमें स्थानीय विधानसभा और मुख्यमंत्री को कई शक्तियां दी गईं। यानी कि गिलगित-बाल्टिस्तान में ‘ऑर्डर ऑफ 2018’ के तहत यह दूसरा चुनाव कराया जा रहा है।

पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव से भारत नाराज:कहा- इससे अवैध कब्जा वैध नहीं होगा; 7 जून को 24 सीटों पर वोटिंग

पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव से भारत नाराज:कहा- इससे अवैध कब्जा वैध नहीं होगा; 7 जून को 24 सीटों पर वोटिंग

भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को होने वाले विधानसभा चुनावों का कड़ा विरोध किया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि पाकिस्तान जिस क्षेत्र पर अवैध और जबरन कब्जा किए हुए है, वहां चुनाव कराने की उसकी योजना पूरी तरह अस्वीकार्य है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। इसलिए पाकिस्तान को उन क्षेत्रों में किसी भी तरह की राजनीतिक प्रक्रिया चलाने का कोई अधिकार नहीं है। चुनाव कराने जैसी गतिविधियां वहां की जमीनी हकीकत को नहीं बदल सकतीं। गिलगित-बाल्टिस्तान में रविवार को 10 जिलों की 24 सीटों पर मतदान कराया जाएगा। यह भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का हिस्सा है। हालांकि, यह पाकिस्तान के कब्जे में है। इसी वजह से वहां होने वाले हर चुनाव या राजनीतिक कदम पर भारत आमतौर पर आपत्ति दर्ज कराता है। साढ़े पांच साल बाद हो रहे चुनाव गिलगित-बाल्टिस्तान में साढ़े पांच साल बाद हो रहे हैं। इससे पहले यहां नवंबर 2020 में चुनाव हुए थे, जिनमें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने जीत हासिल की थी। यहां का कार्यकाल 5 साल का होता है। 2020 में चुनी गई विधानसभा ने नवंबर 2025 में अपना कार्यकाल पूरा कर लिया था। नियमों के मुताबिक इसके बाद नए चुनाव कराए जाने थे, लेकिन खराब मौसम और प्रशासनिक कारणों से मतदान समय पर नहीं हो सका। क्षेत्र में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी होती है, जिससे कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हो जाता है। इसी वजह से चुनाव को टाल दिया गया और बाद में 7 जून 2026 की तारीख तय की गई। गिलगित-बाल्टिस्तान में दूसरा चुनाव गिलगित-बाल्टिस्तान और Pok (जिसे पाकिस्तान आजाद जम्मू-कश्मीर कहता है) की प्रशासनिक व्यवस्था अलग-अलग रही है। Pok का अपना अलग संविधान, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विधानसभा है। पाकिस्तान Pok को कुछ स्वायत्तता देता है, हालांकि वास्तविक शक्ति काफी हद तक इस्लामाबाद के पास रहती है। लेकिन गिलगित-बाल्टिस्तान की स्थिति अलग थी। 1947 से लेकर कई दशकों तक इसे पाकिस्तान ने सीधे संघीय सरकार के जरिए चलाया। यहां न तो प्रांत का दर्जा था और न ही पाकिस्तान की संसद में पूरा प्रतिनिधित्व था। फिर 2009 में पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान एम्पावरमेंट एंड सेल्फ-गवर्नेंस ऑर्डर लागू किया। इसके तहत पहली बार यहां विधानसभा चुनाव हुए और एक स्थानीय सरकार बनाई गई। हालांकि तब भी विधानसभा के अधिकार सीमित थे और अहम फैसले प्रधानमंत्री लेता था। इसके बाद 2018 में पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान ऑर्डर 2018 लागू किया। इसमें स्थानीय विधानसभा और मुख्यमंत्री को कई शक्तियां दी गईं। यानी कि गिलगित-बाल्टिस्तान में ‘ऑर्डर ऑफ 2018’ के तहत यह दूसरा चुनाव कराया जा रहा है। PoK में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव होंगे गिलगित-बाल्टिस्तान के बाद 27 जुलाई को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। PoK की विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होता है, जबकि 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। PoK में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। इससे पहले 2021 में PoK विधानसभा चुनाव में इमरान खान की पार्टी (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने। हालांकि अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिर गई। इसका असर वहां की राजनीति पर भी पड़ा। मई 2022 में सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद PTI ने ही सरदार तनवीर इलियास को नया प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन अप्रैल 2023 में PoK की उच्च अदालत ने उन्हें अदालत की अवमानना के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद उनका पद चला गया और एक बार फिर नया प्रधानमंत्री चुनना पड़ा। इसके बाद PTI के ही चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने इमरान खान और PTI से दूरी बना ली और खुद को स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित किया। बाद में पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और अन्य दलों के समर्थन से उनकी सरकार चलती रही। इस दौरान PoK में महंगाई, बिजली दरों और आटे की कीमतों को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन भी हुए। 2024 में कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए थे, जिसके बाद पाकिस्तान की संघीय सरकार को सब्सिडी और आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा करनी पड़ी। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 24 सीटें रिजर्व 2019 में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के बाद बने परिसीमन ढांचे के तहत जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 24 सीटें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान के लिए आरक्षित हैं। इन सीटों पर चुनाव नहीं होते क्योंकि ये क्षेत्र फिलहाल पाकिस्तान के नियंत्रण में हैं। इसलिए इन्हें खाली रखा जाता है। ——————————– यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश में ट्रम्प जैसे दिखने वाले भैंसे की कुर्बानी रुकी:तीन लाख रुपए में ईद के लिए नीलाम हुआ था, अब नेशनल जू भेजा गया बांग्लादेश में डोनाल्ड ट्रम्प नाम से मशहूर सफेद भैंसे की ईद पर कुर्बानी रोक दी गई है। इस भैंसे को 3.85 लाख टका (करीब 3 लाख रूपए) में बेचा गया था। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, भैंसे को जिंजिरा के रसूलपुर इलाके के रहने वाले मोहम्मद शोरोन ने 23 मई को ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी के लिए खरीदा था। पूरी खबर यहां पढ़ें…