लॉर्ड्स टेस्ट के पहले दिन 16 विकेट गिरे:इंग्लैंड पहली पारी में 140 पर ऑलआउट; न्यूजीलैंड 61/6; रॉबिन्सन को 4 विकेट

न्यूजीलैंड के इंग्लैंड दौरे का पहला टेस्ट मैच लॉर्ड्स स्टेडियम में खेला जा रहा है। इस मैच के पहले दिन गेंदबाजों का बोलबाला रहा। यहां गुरुवार को कुल 16 विकेट गिरे। इस मुकाबले का टॉस न्यूजीलैंड ने जीता और गेंदबाजी चुनी। मेजबान इंग्लैंड पहली पारी में 140 रन पर ऑलआउट हो गई। जबकि, न्यूजीलैंड ने स्टंप्स तक 61 रन बनाने में 6 विकेट गंवा दिए। ग्लेन फिलिप्स 31 और नाथन स्मिथ 6 रन पर नाबाद लौटे। इंग्लैंड के ओली रॉबिन्सन ने 4 विकेट झटके। गस एटकिंसन और जोश टंग को एक-एक विकेट मिला। रॉबिन्सन ने पहले ओवर में ही 3 विकेट लिए रॉबिन्सन ने अपनी तीसरी, पांचवीं और छठी गेंद पर विकेट लेकर लॉर्ड्स में मौजूद दर्शकों को उत्साहित कर दिया। उन्होंने डेवोन कॉन्वे (एक रन), केन विलियमसन (3 रन) और रचिन रवींद्र (जीरो) को जल्दी आउट किया। इसके बाद गस एटकिंसन ने कप्तान टॉम लैथम को 3 रन पर आउट कर न्यूजीलैंड का स्कोर 12/4 कर दिया। रॉबिन्सन ने डेरिल मिचेल को भी पवेलियन भेजा, जबकि जोश टंग ने टॉम ब्लंडेल का विकेट लिया। न्यूजीलैंड के टॉप-5 बैटर्स कुल 16 रन ही बना सके। इनमें से दो खाता भी नहीं खोल सके। पहले इंग्लैंड की बल्लेबाजी भी लड़खड़ाई न्यूजीलैंड के कप्तान टॉम लैथम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। बादलों से घिरे मौसम और तेज गेंदबाजों के लिए मददगार परिस्थितियों का कीवी गेंदबाजों ने पूरा फायदा उठाया। फरवरी 2024 के बाद टेस्ट मैच खेलने उतरे काइल जैमीसन ने 5 विकेट लेकर इंग्लैंड की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। उन्होंने 62 रन देकर 5 विकेट हासिल किए। नाथन स्मिथ ने 3 और विल ओ’रूर्के ने 2 विकेट लिए। इंग्लैंड की ओर से हैरी ब्रूक ने सबसे ज्यादा 52 रन बनाए। कप्तान बेन स्टोक्स ने 35वें जन्मदिन पर उपयोगी पारी खेली, लेकिन बड़ी साझेदारी नहीं बना सके। बारिश और खराब रोशनी से खेल प्रभावित मैच के दौरान बारिश और खराब रोशनी ने भी खेल में बाधा डाली। दोपहर में बारिश के कारण लगभग दो घंटे का खेल रुका, जबकि खराब रोशनी की वजह से चाय और दिन का खेल निर्धारित समय से पहले समाप्त करना पड़ा। इंग्लैंड की आखिरी जोड़ी जोश टंग और शोएब बशीर ने 22 रन जोड़कर टीम को 140 रन तक पहुंचाया। दिन के अंत तक यह साझेदारी इंग्लैंड के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होती दिख रही है। ————————————————————- इंटरनेशनल क्रिकेट की यह खबर भी पढ़िए… पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया से लगातार तीसरी वनडे सीरीज जीती, तीसरे मैच में 4 विकेट से हराया लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया को 4 विकेट से हरा दिया। इस जीत के साथ पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगातार तीसरी वनडे सीरीज अपने नाम कर ली। ऑस्ट्रेलिया पहले बल्लेबाजी करते हुए 42 ओवर में 157 रन पर सिमट गई थी। जवाब में पाकिस्तान ने 41.1 ओवर में 6 विकेट खोकर 158 रन का टारगेट हासिल कर लिया। पढ़ें पूरी खबर
लॉर्ड्स टेस्ट के पहले दिन 16 विकेट गिरे:इंग्लैंड पहली पारी में 140 पर ऑलआउट; न्यूजीलैंड 61/6; रॉबिन्सन को 4 विकेट

न्यूजीलैंड के इंग्लैंड दौरे का पहला टेस्ट लॉर्ड्स स्टेडियम में खेला जा रहा है। पहले दिन गेंदबाज हावी रहे। यहां गुरुवार को कुल 16 विकेट गिरे। न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी। इंग्लैंड पहली पारी में 140 रन पर ऑलआउट हो गई। जवाब में न्यूजीलैंड ने स्टंप्स तक 61 रन पर 6 विकेट गंवा दिए। ग्लेन फिलिप्स 31 और नाथन स्मिथ 6 रन पर नाबाद रहे। इंग्लैंड के ओली रॉबिन्सन ने 4 विकेट लिए। गस एटकिंसन और जोश टंग को एक-एक विकेट मिला। रॉबिन्सन ने पहले ओवर में ही 3 विकेट लिए रॉबिन्सन ने पहले ओवर में तीन विकेट झटके। उन्होंने तीसरी, 5वीं और छठी गेंद पर विकेट लिए। उन्होंने डेवोन कॉन्वे (एक रन), केन विलियमसन (3 रन) और रचिन रवींद्र (जीरो) को जल्दी आउट किया। इसके बाद गस एटकिंसन ने कप्तान टॉम लैथम को 3 रन पर आउट कर न्यूजीलैंड का स्कोर 12/4 कर दिया। रॉबिन्सन ने डेरिल मिचेल को भी पवेलियन भेजा, जबकि जोश टंग ने टॉम ब्लंडेल का विकेट लिया। न्यूजीलैंड के टॉप-5 बैटर्स सिर्फ 16 रन बना सके। इनमें से दो खाता भी नहीं खोल सके। पहले इंग्लैंड की बल्लेबाजी भी लड़खड़ाई न्यूजीलैंड के कप्तान टॉम लैथम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। बादलों से घिरे मौसम और तेज गेंदबाजों के लिए मददगार परिस्थितियों का कीवी गेंदबाजों ने पूरा फायदा उठाया। फरवरी 2024 के बाद टेस्ट खेलने उतरे काइल जैमीसन ने 62 रन देकर 5 विकेट लिए और इंग्लैंड की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। नाथन स्मिथ ने 3 और विल ओ’रूर्के ने 2 विकेट लिए। इंग्लैंड की ओर से हैरी ब्रूक ने सबसे ज्यादा 52 रन बनाए। कप्तान बेन स्टोक्स ने 35वें जन्मदिन पर उपयोगी पारी खेली, लेकिन बड़ी साझेदारी नहीं बना सके। बारिश और खराब रोशनी से खेल प्रभावित मैच के दौरान बारिश और खराब रोशनी ने भी खेल में बाधा डाली। दोपहर में बारिश के कारण लगभग दो घंटे का खेल रुका, जबकि खराब रोशनी की वजह से चाय और दिन का खेल निर्धारित समय से पहले समाप्त करना पड़ा। इंग्लैंड की आखिरी जोड़ी जोश टंग और शोएब बशीर ने 22 रन जोड़कर टीम को 140 रन तक पहुंचाया। दिन के अंत तक यह साझेदारी इंग्लैंड के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होती दिख रही है। ————————————————————- इंटरनेशनल क्रिकेट की यह खबर भी पढ़िए… पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया से लगातार तीसरी वनडे सीरीज जीती, तीसरे मैच में 4 विकेट से हराया लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया को 4 विकेट से हरा दिया। इस जीत के साथ पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगातार तीसरी वनडे सीरीज अपने नाम कर ली। ऑस्ट्रेलिया पहले बल्लेबाजी करते हुए 42 ओवर में 157 रन पर सिमट गई थी। जवाब में पाकिस्तान ने 41.1 ओवर में 6 विकेट खोकर 158 रन का टारगेट हासिल कर लिया। पढ़ें पूरी खबर
वरुण धवन ने पैर छूकर गोविंदा का लिया आशीर्वाद:गले भी लगे, डेविड धवन को भी संभालते दिखे; देखें वीडियो

फिल्म प्रोड्यूसर और पूर्व CBFC सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) अध्यक्ष पहलाज निहलानी के अंतिम संस्कार के दौरान वरुण धवन और उनके भाई रोहित धवन ने एक्टर गोविंदा के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान गोविंदा ने भी दोनों को गले लगाया और प्यार जताया। इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद फैंस वरुण और रोहित के संस्कारों की जमकर तारीफ कर रहे हैं। वहीं, अंतिम संस्कार के दौरान वरुण धवन अपने पिता डेविड धवन का हाथ पकड़कर उन्हें सहारा देते हुए भी नजर आए। गोविंदा को उनके करियर का पहला बड़ा ब्रेक निहलानी की फिल्म इल्जाम से मिला था। उनके निधन पर गोविंदा ने कहा, “पहलाज निहलानी हमारे लिए नींव के पत्थर जैसे थे। मेरे जैसे कई कलाकार, जो गरीबी से निकलकर आगे बढ़े, उन्हें सफल बनाने में उनका बड़ा योगदान रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “देश में कम से कम एक दर्जन ऐसे कलाकार होंगे, जिनकी जिंदगी बदलने में पहलाज निहलानी का बड़ा हाथ रहा। उन्होंने कई लोगों को जमीन से उठाकर आसमान तक पहुंचाने का काम किया। यह खास हुनर उन्हें भगवान ने दिया था।” पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन बुधवार देर रात 3 बजे हुआ। वह कई दिनों से बीमार थे। निहलानी का अंतिम संस्कार गुरूवार दोपहर 3 बजे मुंबई के सांताक्रूज श्मशान में हुआ। दैनिक भास्कर से बातचीत में ट्रेड एनालिस्ट अतुल मोहन ने बताया है कि कोविड में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें कुछ दवाइयों से कॉम्प्लिकेशन्स हो गए थे, जिससे उनकी किडनी पर असर पड़ा था। उनका इसी से संबंधित इलाज चल रहा था। अंतिम दर्शन करने पहुंचे थे सेलेब्स कई दिनों से इलाज जारी था फिल्म एसोसिएशन IMPAA के प्रेसिडेंट अभय सिन्हा ने पहलाज निहलानी के निधन पर कहा- वो कई दिनों से बीमार थे, हॉस्पिटल में थे। रात 3 बजे उनका देहांत हुआ है। इंडस्ट्री ने एक अच्छा इंसान खो दिया। बहुत बड़े प्रोड्यूसर थे। वो IMPAA के भी चेयरपर्सन थे। शत्रुघ्न सिन्हा के बेहद क्लोज थे, उनकी हर पार्टी में पहुंचते थे। पहलाज निहलानी को 5 साल पहले खून की उल्टियां हुई थीं, जिसके बाद वो 28 दिनों तक मुंबई के नानावटी अस्पातल में भर्ती रहे थे। पहलाज निहलानी का करियर गोविंदा को दिया था करियर का पहला बड़ा ब्रेक गोविंदा ने पहलाज निहलानी के साथ आंखें, शोला और शबनम जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया। कुछ समय पहले ही उन्होंने लर्न फ्रॉम द लीजेंड के पॉडकास्ट में गोविंदा पर कहा था, ‘फिल्म आंधी तूफान के बाद मैं मिथुन चक्रवर्ती और शत्रुघ्न के साथ एक फिल्म बनाना चाहता था, लेकिन उस समय मिथुन और शत्रुघ्न 4-4 शिफ्ट करते थे। इस वजह से हमारी नहीं बनी। फिर रीक्कू राकेश, गोविंदा को मेरे पास लेकर आए। फोटोग्राफ भी लेकर आए, लेकिन मुझे पसंद नहीं आए। उसका लुक पसंद नहीं आया।’ ‘अगले दिन वो मेरे पास वीडियो कैसेट लेकर आया, जिसमें उसके डांस थे। उस समय ब्रेक डांस माइकल जैक्सन की वजह से पॉपुलर थे। उसने मुझे कैसेट दिखाया, तो मैंने पूछा क्या-क्या आता है। मुझे उसका चेहरा पसंद नहीं था, लेकिन उसका डांस और एक्शन पसंद आया। मेरी स्टोरी पूरी एक्शन थी। मैं लंदन जा रहा था, तो मैं उससे कहकर गया कि तुम अपनी तैयारी करो। लंदन में छुट्टियों के समय मैंने कहानी पूरी की। फिर मैंने उसमें डांस डाला। आज की डेट में उसके जितना टैलेंटेड कोई एक्टर नहीं है। उस समय वो एडवोकेट के रोल में, इंसपेक्टर के रोल में फिट नहीं होता था, हाइट की वजह से। लेकिन अब वो स्टार हो गया, स्टार से तो कुछ भी करवा लो।’ पूरी खबर यहां पढ़ें…
वरुण धवन ने पैर छूकर गोविंदा का लिया आशीर्वाद:गले भी लगे, डेविड धवन को भी संभालते दिखे; देखें वीडियो

फिल्म प्रोड्यूसर और पूर्व CBFC सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) अध्यक्ष पहलाज निहलानी के अंतिम संस्कार के दौरान वरुण धवन और उनके भाई रोहित धवन ने एक्टर गोविंदा के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान गोविंदा ने भी दोनों को गले लगाया और प्यार जताया। इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद फैंस वरुण और रोहित के संस्कारों की जमकर तारीफ कर रहे हैं। वहीं, अंतिम संस्कार के दौरान वरुण धवन अपने पिता डेविड धवन का हाथ पकड़कर उन्हें सहारा देते हुए भी नजर आए। गोविंदा को उनके करियर का पहला बड़ा ब्रेक निहलानी की फिल्म इल्जाम से मिला था। उनके निधन पर गोविंदा ने कहा, “पहलाज निहलानी हमारे लिए नींव के पत्थर जैसे थे। मेरे जैसे कई कलाकार, जो गरीबी से निकलकर आगे बढ़े, उन्हें सफल बनाने में उनका बड़ा योगदान रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “देश में कम से कम एक दर्जन ऐसे कलाकार होंगे, जिनकी जिंदगी बदलने में पहलाज निहलानी का बड़ा हाथ रहा। उन्होंने कई लोगों को जमीन से उठाकर आसमान तक पहुंचाने का काम किया। यह खास हुनर उन्हें भगवान ने दिया था।” पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन बुधवार देर रात 3 बजे हुआ। वह कई दिनों से बीमार थे। निहलानी का अंतिम संस्कार गुरूवार दोपहर 3 बजे मुंबई के सांताक्रूज श्मशान में हुआ। दैनिक भास्कर से बातचीत में ट्रेड एनालिस्ट अतुल मोहन ने बताया है कि कोविड में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें कुछ दवाइयों से कॉम्प्लिकेशन्स हो गए थे, जिससे उनकी किडनी पर असर पड़ा था। उनका इसी से संबंधित इलाज चल रहा था। अंतिम दर्शन करने पहुंचे थे सेलेब्स कई दिनों से इलाज जारी था फिल्म एसोसिएशन IMPAA के प्रेसिडेंट अभय सिन्हा ने पहलाज निहलानी के निधन पर कहा- वो कई दिनों से बीमार थे, हॉस्पिटल में थे। रात 3 बजे उनका देहांत हुआ है। इंडस्ट्री ने एक अच्छा इंसान खो दिया। बहुत बड़े प्रोड्यूसर थे। वो IMPAA के भी चेयरपर्सन थे। शत्रुघ्न सिन्हा के बेहद क्लोज थे, उनकी हर पार्टी में पहुंचते थे। पहलाज निहलानी को 5 साल पहले खून की उल्टियां हुई थीं, जिसके बाद वो 28 दिनों तक मुंबई के नानावटी अस्पातल में भर्ती रहे थे। पहलाज निहलानी का करियर गोविंदा को दिया था करियर का पहला बड़ा ब्रेक गोविंदा ने पहलाज निहलानी के साथ आंखें, शोला और शबनम जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया। कुछ समय पहले ही उन्होंने लर्न फ्रॉम द लीजेंड के पॉडकास्ट में गोविंदा पर कहा था, ‘फिल्म आंधी तूफान के बाद मैं मिथुन चक्रवर्ती और शत्रुघ्न के साथ एक फिल्म बनाना चाहता था, लेकिन उस समय मिथुन और शत्रुघ्न 4-4 शिफ्ट करते थे। इस वजह से हमारी नहीं बनी। फिर रीक्कू राकेश, गोविंदा को मेरे पास लेकर आए। फोटोग्राफ भी लेकर आए, लेकिन मुझे पसंद नहीं आए। उसका लुक पसंद नहीं आया।’ ‘अगले दिन वो मेरे पास वीडियो कैसेट लेकर आया, जिसमें उसके डांस थे। उस समय ब्रेक डांस माइकल जैक्सन की वजह से पॉपुलर थे। उसने मुझे कैसेट दिखाया, तो मैंने पूछा क्या-क्या आता है। मुझे उसका चेहरा पसंद नहीं था, लेकिन उसका डांस और एक्शन पसंद आया। मेरी स्टोरी पूरी एक्शन थी। मैं लंदन जा रहा था, तो मैं उससे कहकर गया कि तुम अपनी तैयारी करो। लंदन में छुट्टियों के समय मैंने कहानी पूरी की। फिर मैंने उसमें डांस डाला। आज की डेट में उसके जितना टैलेंटेड कोई एक्टर नहीं है। उस समय वो एडवोकेट के रोल में, इंसपेक्टर के रोल में फिट नहीं होता था, हाइट की वजह से। लेकिन अब वो स्टार हो गया, स्टार से तो कुछ भी करवा लो।’ पूरी खबर यहां पढ़ें…
‘ममता हमारी सर्वोच्च नेता हैं, सलाहकार नहीं’: रीताब्रता की योजना पर आंतरिक कलह ने टीएमसी विद्रोही खेमे को प्रभावित किया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:05 जून, 2026, 09:54 IST बागी टीएमसी विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन किया, लेकिन जोर देकर कहा कि ममता बनर्जी ही सर्वोच्च नेता बनी रहेंगी, उन्हें एकमात्र मुख्य सलाहकार बनाने की योजना को खारिज कर दिया। टीएमसी संस्थापक ममता बनर्जी और नेता प्रतिपक्ष रीताब्रत बनर्जी की फ़ाइल छवि। (स्रोत: पीटीआई) ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विद्रोही गुट द्वारा तृणमूल कांग्रेस विधायक दल पर कब्ज़ा करने और उन्हें 58 विधायकों के समर्थन के साथ विपक्ष के नेता के रूप में स्थापित करने के एक दिन बाद, कई विधायकों ने ममता बनर्जी के प्रति अपनी वफादारी की पुष्टि की, और जोर देकर कहा कि वह उनकी सर्वोच्च नेता बनी रहेंगी। यह टिप्पणी रीताब्रता के उस प्रस्ताव के जवाब में आई है जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री को नवगठित विधायक दल के लिए “मुख्य सलाहकार” के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए। कई बागी विधायकों ने खुले तौर पर इस सुझाव का विरोध किया और तर्क दिया कि ममता बनर्जी पार्टी की सर्वोच्च नेता बनी हुई हैं। कुछ लोगों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी स्थिति को घटाकर मात्र मुख्य सलाहकार तक सीमित कर दिया गया तो वे नई व्यवस्था के लिए अपने समर्थन पर पुनर्विचार कर सकते हैं। ममता की भूमिका को लेकर विद्रोही खेमे में मतभेद नव-मान्यता प्राप्त विपक्ष के नेता रीताब्रत बनर्जी की अध्यक्षता वाले विद्रोही विधायी समूह की बैठक के दौरान मतभेद सामने आए। इस एपिसोड में असंतुष्ट खेमे के सामने आने वाली चुनौती पर प्रकाश डाला गया क्योंकि यह टीएमसी संस्थापक ममता बनर्जी के प्रति वफादारी और सम्मान को जारी रखते हुए सांसद अभिषेक बनर्जी से स्वतंत्र रास्ता अपनाने का प्रयास कर रहा है। यह भी पढ़ें: ‘मुख्य सलाहकार और मार्गदर्शक’: क्या ममता ने वह तृणमूल कांग्रेस पार्टी खो दी है जिसे उन्होंने खड़ा किया था? बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए बागी विधायक गुलशन मलिक ने कहा, “हमें बताया गया कि पार्टी ममता बनर्जी के नेतृत्व में जारी रहेगी। वह महज एक सलाहकार नहीं हैं। हम चाहते हैं कि पार्टी उनके नेतृत्व में काम करे।” पंचला विधायक ने कहा, “अगर ममता बनर्जी को सर्वोच्च नेता के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता है, तो हमें सोचना होगा कि हमें इस ब्लॉक में रहना चाहिए या नहीं।” बयानों ने विद्रोही खेमे के भीतर एक प्रमुख तनाव को रेखांकित किया: ममता बनर्जी के नाम पर किए गए विद्रोह ने अब उस पार्टी में उनकी भविष्य की भूमिका पर बहस छेड़ दी है, जिसकी स्थापना उन्होंने लगभग तीन दशक पहले की थी। इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए सिताई की बागी विधायक संगीता रॉय बसुनिया ने कहा, “ममता बनर्जी हमारी सर्वोच्च नेता हैं और रहेंगी। वह सलाहकार नहीं हो सकतीं। वह हमारी नेता हैं।” ऋतब्रत बनर्जी ने ममता को क्या दिया सुझाव? ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी से अपील की थी कि वह उनकी “मुख्य सलाहकार” बनी रहें और “विधानसभा के अंदर और बाहर रचनात्मक कार्य करने के लिए इस विधायक दल का मार्गदर्शन करें।” उन्होंने कहा, “हम उनसे अनुरोध करेंगे कि वह हमारे मुख्य सलाहकार बने रहें और विधानसभा के अंदर और बाहर रचनात्मक कार्य करने के लिए इस विधायक दल का मार्गदर्शन करें। हम उनसे अपील करते हैं कि वह हमें पहचानें क्योंकि हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है। लेकिन अभिषेक बनर्जी का इस विधायक दल से कोई संबंध नहीं है।” यह भी पढ़ें: ‘प्रमुख विपक्ष के रूप में प्रदर्शन करेंगे’: रीताब्रता को विपक्ष के नेता के रूप में स्पीकर की मंजूरी के एक दिन बाद ‘असली तृणमूल’ ने नियंत्रण हासिल कर लिया टिप्पणियाँ विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि 58 विधायकों के एक बड़े वर्ग ने, जो विधायक दल पर रीताब्रत बनर्जी के कब्जे के पीछे थे, लगातार तर्क दिया था कि उनका विद्रोह ममता बनर्जी पर नहीं बल्कि संगठन के भीतर उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव पर था। उस पृष्ठभूमि में, ममता बनर्जी को “मुख्य सलाहकार” के रूप में नामित करने के ऋतब्रत के प्रस्ताव को कई लोगों ने असंतुष्टों के इस दावे को संरक्षित करने के प्रयास के रूप में देखा कि उनका आंदोलन पार्टी संस्थापक के साथ जुड़ा हुआ है। इस कदम को व्यापक रूप से तृणमूल कार्यकर्ताओं और समर्थकों को आश्वस्त करने के प्रयास के रूप में देखा गया कि विद्रोह स्वयं ममता बनर्जी के बजाय पार्टी की वर्तमान सत्ता संरचना पर निर्देशित था। ममता को समर्थन, अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बगावत हालाँकि, गुरुवार को बागी विधायकों के बयानों से पता चलता है कि किसी भी कदम पर विद्रोही खेमे के कुछ वर्गों में बेचैनी बढ़ रही है, जिसे पार्टी के भीतर ममता बनर्जी के कद को कम करने के रूप में समझा जा सकता है। असहमति असंतुष्टों के राजनीतिक आख्यान के मूल पर प्रहार करती है। विद्रोह शुरू होने के बाद से, कई बागी विधायकों ने कहा है कि उनकी आपत्ति अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव पर थी, न कि ममता बनर्जी के नेतृत्व पर। फिर भी, जैसा कि समूह विधायक दल के नाटकीय अधिग्रहण के बाद एक नई नेतृत्व व्यवस्था स्थापित करने के लिए आगे बढ़ रहा है, उस अंतर को बनाए रखना कठिन होता जा रहा है। असंतुष्टों ने लगातार अपने अभियान को उस नेता को चुनौती देने के बजाय पार्टी की मूल दिशा को पुनः प्राप्त करने के प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया है, जिन्होंने 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की और 2011 में इसे पश्चिम बंगाल में सत्ता तक पहुंचाया। यह भी पढ़ें: ‘अगर ममता मेरे पास आती हैं…’: दलबदलू हुमायूं कबीर ने पूर्व बॉस को बंगाल विधानसभा में वापस जाने का प्रस्ताव दिया यहां तक कि विधानसभा अध्यक्ष को अपने पत्र में भी बागी विधायकों ने ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष के रूप में स्वीकार करना जारी रखा, साथ ही विधायक दल के मामलों पर अभिषेक बनर्जी के अधिकार को खारिज कर दिया। ममता बनर्जी के प्रति वफादारी और अभिषेक बनर्जी के विरोध के बीच अलगाव विद्रोहियों के तर्क की आधारशिला बना हुआ है। इससे उन्हें उन आरोपों का प्रतिकार करने में भी मदद मिली है कि उनके कार्य पार्टी के संस्थापक नेतृत्व को कमजोर करने का प्रयास हैं। टीएमसी के भीतर दरार ताज़ा तनाव भाजपा से चुनावी हार और इसके बाद उसके विधायी रैंकों में विभाजन के
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी के फैसलों का ऐलान आज:रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रहने का अनुमान; रुपए को संभालने और महंगाई रोकने पर फोकस

भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की तीन दिवसीय बैठक के फैसले आज घोषित होंगे। बाजार को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट को 5.25% पर ही बरकरार रखेगा। हालांकि, विशेषज्ञों का एक छोटा हिस्सा रुपए पर बढ़ते दबाव और महंगाई के जोखिम को देखते हुए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी जता रहा है। इससे पहले अप्रैल में भी रेपो रेट में बदलाव नहीं हुआ था। RBI ने आखिरी बार दिसंबर 2025 में ब्याज दर 0.25% घटाकर 5.25% की थी। RBI जिस रेट पर बैंकों को लोन देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं। जब RBI रेपो रेट घटाता है तो बैंक इस फायदे को ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है। वित्त वर्ष 2026-27 में मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की कुल 6 बैठकें होंगी। पहली बैठक 6-8 अप्रैल 2026 को हुई थी। रेपो रेट क्या है, इससे लोन कैसे सस्ता होता है? RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अक्सर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं यानी बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं। रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है। इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है। ————————————————————— बिजनेस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सेंसेक्स 150 अंक चढ़कर 74,500 पर कारोबार कर रहा:निफ्टी 50 अंक ऊपर 23,450 पर पहुंचा; मीडिया और आईटी शेयरों में खरीदारी आज यानी शुक्रवार, 5 जून को सेंसेक्स 150 अंक (0.23%) की तेजी के साथ 74,500 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 50 अंकों (0.18%) की तेजी है, ये 23,450 के स्तर पर आ गया है। आज के कारोबार में मीडिया और आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी है। पूरी खबर पढ़े…
इजराइल बोला- पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भरोसा नहीं:वहां हमास नेता बहुत दौरे कर रहे; ईरान की चेतावनी- हमला हुआ तो पलटवार करेंगे

भारत में इजराइल के राजदूत रियुवेन अजार ने पाकिस्तान को समस्याग्रस्त देश बताते हुए कहा है कि उस पर क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ के रूप में आसानी से भरोसा नहीं किया जा सकता। PTI को दिए एक इंटरव्यू में अजार ने कहा कि पाकिस्तान की भूमिका को लेकर उनके मन में सवाल हैं। अगर कोई मध्यस्थ किसी एक पक्ष के ज्यादा करीब हो जाए, तो बातचीत मुश्किल हो सकती है। अजार ने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ सालों में हमास नेताओं की पाकिस्तान और बांग्लादेश यात्राएं बढ़ी हैं। भारत के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि इजराइल जिन सुरक्षा खतरों का सामना कर रहा है, उनसे दूसरे देश भी सीख ले सकते हैं। वहीं, ईरान का कहना है कि अगर उसके ऊपर हमला किया जाता है तो वह उसका जवाब जरूर देगा। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि अपनी सुरक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि कुवैत और बहरीन भी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते, क्योंकि उन्होंने अमेरिका को अपनी जमीन और सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
पुतिन बोले- अमेरिका का मोदी पर दबाव डालना बेकार:भारत महान देश, रूस को उसपर भरोसा है, US से उसकी नजदीकी पर हमें दिक्कत नहीं

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि अमेरिका भारत पर रूस के साथ उसके रिश्ते सहित कई मुद्दों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस तरह की कोशिशें बेकार हैं। भारत इसका विरोध करेगा। पुतिन ने PTI समेत दुनिया की प्रमुख न्यूज एजेंसियों के हेड से बातचीत के दौरान भारत और प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ भी की। उन्होंने कहा- भारत एक महान देश है। भारत एक महान देश और लोकतंत्र है। रूस उसे अपना भरोसेमंद पार्टनर मानता है। रूसी राष्ट्रपति ने आगे कहा- भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। अमेरिका से उसके बढ़ते संबंधों का भारत-रूस साझेदारी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रूस के साथ भारत के रिश्ते पहले की तरह मजबूत रहेंगे। पुतिन ने भरोसा जताया कि आने वाले सालों में भारत और रूस के बीच व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। PTI के सवाल के जवाब में पुतिन ने कहा कि भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और सबसे तेज विकास दर वाले देशों में गिना जाता है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि अचानक नहीं मिली, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की लगातार मेहनत और नीतियों का परिणाम है। पुतिन ने कहा- हमें खुशी है कि भारत उन सभी देशों के साथ संबंध बढ़ा रहा है, जिन्हें वह अपने राष्ट्रीय हितों के लिए महत्वपूर्ण मानता है। उन्होंने कहा कि रूस के साथ सहयोग को लेकर भारत पर पश्चिमी देशों की ओर से दबाव बनाने की कोशिशें हुई हैं। पुरूसी राष्ट्रपति ने कहा कि कुछ पश्चिमी देशों ने भारत पर रूस के साथ सहयोग कम करने का दबाव बनाने की कोशिश की थी। हालांकि अब सभी को समझ आ गया है कि प्रधानमंत्री मोदी और भारत पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए नुकसानदायक साबित होगा।
द्रमुक अलग हो गई, टीएमसी टूट गई, आप बाहर हो गई: कैसे कांग्रेस के नेतृत्व वाले भारतीय गुट ने अस्तित्व पर संकट डाला | भारत समाचार

आखरी अपडेट:04 जून, 2026, 23:34 IST एक एकीकृत चुनावी ताकत के रूप में जो संकल्पना की गई थी, वह क्षेत्रीय टुकड़ों में विघटित हो रही है, जिससे विपक्ष की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाएं अत्यधिक प्रभावित हो रही हैं। इंडिया ब्लॉक की बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी नेता राहुल गांधी, जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत, एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले, आप नेता संजय सिंह, राजद नेता तेजस्वी यादव, डीएमके नेता टीआर बालू और अन्य। (फ़ाइल तस्वीर: पीटीआई) विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (INDIA) ब्लॉक की संरचनात्मक स्थिरता अपनी स्थापना के बाद से अपने सबसे गंभीर अस्तित्वगत संकट का सामना कर रही है। समन्वित राजनीतिक निकासों की एक श्रृंखला, गहरी आंतरिक दरारें और प्रमुख क्षेत्रीय दिग्गजों के बीच सार्वजनिक दरार ने गठबंधन के दीर्घकालिक अस्तित्व के बारे में बुनियादी सवाल खड़े कर दिए हैं। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) द्वारा तमिलनाडु में गहरा असंतोष व्यक्त करने, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर पूर्ण विभाजन और आम आदमी पार्टी (एएपी) के आधिकारिक तौर पर केंद्रीय सीट-बंटवारे की व्यवस्था से दूर जाने के साथ, अखिल भारतीय सत्ता विरोधी मोर्चा तेजी से सुलझता दिख रहा है। एक एकीकृत चुनावी ताकत के रूप में जो संकल्पना की गई थी, वह क्षेत्रीय टुकड़ों में विघटित हो रही है, जिससे विपक्ष की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाएं अत्यधिक प्रभावित हो रही हैं। तमिलनाडु का टकराव और डीएमके का असंतोष दक्षिणी भारत में, जहां विपक्षी गठबंधन को पहले अधिकतम वैचारिक एकजुटता हासिल थी, वहां डीएमके और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के बीच गंभीर दरारें उभर आई हैं। इस मनमुटाव का असर 8 जून को राष्ट्रीय राजधानी में होने वाली इंडिया ब्लॉक नेताओं की आगामी बैठक पर पड़ने वाला है। जबकि लगभग 17 विपक्षी दलों के एक एकीकृत मोर्चे को पेश करने और संसद के अंदर और बाहर रणनीति पर चर्चा करने के लिए सभा में भाग लेने की उम्मीद है, हाई-प्रोफाइल बैठक द्रमुक के बिना आगे बढ़ने की संभावना है। तमिलनाडु में विजय की टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार में कांग्रेस के शामिल होने के बाद दोनों सहयोगियों के बीच संबंध इतने खराब हो गए हैं कि डीएमके ने औपचारिक रूप से अपने पूर्व सहयोगी से दूर लोकसभा में एक अलग सीटिंग ब्लॉक का अनुरोध किया है। सूत्र बताते हैं कि बैठने के इस प्रस्ताव को कमोबेश मंजूरी मिल चुकी है और वर्तमान में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अंतिम निर्णय का इंतजार है, जो एक गहरी और दृश्यमान संसदीय व्यवस्था को रेखांकित करता है। बंगाल प्रलय और तृणमूल विभाजन गठबंधन को एक विनाशकारी झटका पश्चिम बंगाल में भी लगा है, जहां विधानसभा चुनाव में भाजपा से हार के बाद तृणमूल कांग्रेस को औपचारिक आंतरिक विभाजन का सामना करना पड़ा है। ऐसा लगता है कि पार्टी के भीतर एक शक्तिशाली गुट ने मुख्य विपक्ष की जगह पर कब्ज़ा कर लिया है। इस आंतरिक विद्रोह ने बंगाल में एकीकृत भाजपा विरोधी मोर्चे की संभावना को प्रभावी ढंग से खत्म कर दिया है। अस्तित्व के संकट का सामना कर रही टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी और महासचिव अभिषेक बनर्जी के 8 जून को इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होने की संभावना है। आप का आधिकारिक निकास और उत्तरी मोर्चे का पतन इसके साथ ही, ऐसा लगता है कि आम आदमी पार्टी ने निश्चित रूप से खुद को इंडिया ब्लॉक के संयुक्त परिचालन ढांचे से अलग कर लिया है। दिल्ली में प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र को लेकर लगातार खींचतान और पंजाब में परस्पर विरोधी राज्य-स्तरीय रणनीतियों के कारण आप और कांग्रेस के बीच संबंध खराब हो रहे थे। आधिकारिक तौर पर गठबंधन से बाहर निकलकर, AAP ने एक नाजुक राष्ट्रीय सहमति के लिए अपने क्षेत्रीय शासन के कथानक से समझौता करने के बजाय अपने स्वतंत्र राजनीतिक पदचिह्न की रक्षा करने का विकल्प चुना है। यह प्रस्थान महत्वपूर्ण उत्तरी राज्यों और शहरी निर्वाचन क्षेत्रों में विपक्ष की व्यवहार्यता को पूरी तरह से खोखला कर देता है। नेतृत्वहीन गठबंधन का संरचनात्मक घाटा अंततः, भारतीय गुट का तेजी से विघटन एक मूलभूत संरचनात्मक दोष से उत्पन्न हुआ है: एक विलक्षण, सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत नेता और एक एकजुट वैचारिक गोंद की अनुपस्थिति। एक बाध्यकारी राष्ट्रीय आख्यान के अभाव में, व्यक्तिगत पार्टी की महत्वाकांक्षाओं को सामूहिक लक्ष्यों पर प्राथमिकता दी गई है। कमजोर केंद्रीय कांग्रेस तंत्र को बचाने के लिए क्षेत्रीय क्षत्रप कड़ी मेहनत से हासिल किए गए अपने स्थानीय प्रभुत्व का त्याग करने को तैयार नहीं हैं। जैसे-जैसे क्षेत्रीय सहयोगी या तो दूर चले जाते हैं, संयुक्त रणनीति सत्रों का बहिष्कार करते हैं, या केंद्रीय समिति के खिलाफ सक्रिय रूप से विद्रोह करते हैं, भारतीय गुट तेजी से एक स्थायी राजनीतिक विकल्प के बजाय एक अस्थायी चुनावी व्यवस्था जैसा दिखता है, जो राष्ट्रीय विपक्ष को तीव्र रणनीतिक पक्षाघात की स्थिति में धकेल देता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में पथिकृत सेन गुप्ता पथिकृत सेन गुप्ता News18.com के वरिष्ठ एसोसिएट संपादक हैं और लंबी कहानी को छोटा करना पसंद करते हैं। वह राजनीति, खेल, वैश्विक मामलों, अंतरिक्ष, मनोरंजन और भोजन पर छिटपुट रूप से लिखते हैं। वह …और पढ़ें न्यूज़ इंडिया द्रमुक अलग हो गई, टीएमसी टूट गई, आप बाहर हो गई: कैसे कांग्रेस के नेतृत्व वाले भारतीय गुट ने अस्तित्व के संकट को झेला अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते 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आंध्र एनडीए ने राज्यसभा सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिया; टीडीपी 3 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जन सेना को 1 सीट मिली | भारत समाचार

आखरी अपडेट:04 जून, 2026, 21:24 IST आंध्र प्रदेश में एनडीए ने राज्यसभा सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिया, टीडीपी तीन सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जन सेना पार्टी एक सीट पर चुनाव लड़ेगी, नेताओं ने मतदाता सूची संशोधन और संगठनात्मक योजनाओं की भी समीक्षा की। आंध्र प्रदेश में एनडीए ने राज्यसभा सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिया, टीडीपी तीन सीटों पर और जन सेना पार्टी एक सीट पर चुनाव लड़ेगी। (छवि: फ़्लिकर) आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन ने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए अपनी सीट-बंटवारे की व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया है, जिसमें तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) चार में से तीन सीटों पर चुनाव लड़ेगी और जन सेना पार्टी को एक सीट आवंटित की गई है। यह निर्णय एनडीए नेताओं की एक बैठक के दौरान लिया गया, जिसमें राज्यसभा चुनाव के लिए गठबंधन की रणनीति पर चर्चा की गई और सीटों के वितरण पर सहमति बनी। समझौते के तहत, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली टीडीपी तीन राज्यसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, जबकि पवन कल्याण के नेतृत्व वाली जन सेना पार्टी एक सीट पर चुनाव लड़ेगी। सूत्रों ने कहा कि जन सेना पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवार के नाम की घोषणा आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व द्वारा की जाएगी। सीट-बंटवारे के अलावा, एनडीए नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित तैयारियों की भी समीक्षा की और राज्य में आगामी राजनीतिक गतिविधियों से पहले संगठनात्मक मामलों पर चर्चा की। सीट-बंटवारे का फॉर्मूला आंध्र प्रदेश में एनडीए गठबंधन के भीतर संतुलन को दर्शाता है, जहां टीडीपी प्रमुख भागीदार बनी हुई है, जबकि जन सेना गठबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आंध्र प्रदेश विधानसभा में वर्तमान में सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में संख्या के साथ, एनडीए उम्मीदवारों को व्यवस्था के तहत आवंटित राज्यसभा सीटों को आराम से सुरक्षित करने की उम्मीद है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें जगह : आंध्र प्रदेश, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया आंध्र एनडीए ने राज्यसभा सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिया; टीडीपी 3 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जन सेना को 1 सीट मिली अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)आंध्र प्रदेश राज्यसभा चुनाव(टी)एनडीए सीट बंटवारा(टी)टीडीपी राज्यसभा सीटें(टी)जन सेना पार्टी सीट(टी)चंद्रबाबू नायडू टीडीपी(टी)पवन कल्याण जन सेना(टी)आंध्र प्रदेश एनडीए गठबंधन(टी)विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची






