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पंजाबी सिंगर की हत्या, लाश नहर में मिली:लुधियाना से गनपॉइंट पर किडनैप किया; आरोपी जबरन शादी करना चाहता था

पंजाबी सिंगर की हत्या, लाश नहर में मिली:लुधियाना से गनपॉइंट पर किडनैप किया; आरोपी जबरन शादी करना चाहता था

लुधियाना में पंजाबी सिंगर इंदर कौर उर्फ यशइंदर कौर (29) की हत्या कर दी गई। आज सुबह 11 बजे उनका शव नीलो नहर में मिला। इंदर को 6 दिन पहले गन गनपॉइंट पर किडनैप किया गया, जिसके बाद से परिवार लगातार उनकी तलाश में जुटा हुआ था। परिवार ने कहा कि मोगा का रहने वाला व्यक्ति जबरदस्ती शादी करने का दबाव बना रहा था। मना करने पर उसने किडनैप कर लिया था। फिर हत्या करने के बाद वह कनाडा भाग है। वह हत्या करने के लिए ही कनाडा से नेपाल के रास्ते पंजाब आया था, फिर इसी रास्ते वापस भाग गया। तीन साल पहले दोनों की इंस्टाग्राम पर दोस्ती हुई थी, लेकिन जैसे ही इंदर को पता चला कि आरोपी शादीशुदा है और उसके बच्चे हैं, तो उसने शादी करने से मना कर दिया था, इसी बात से आरोपी खुन्नस रखने लगा था। फिलहाल पुलिस ने मृतका के शव को नहर से बाहर निकलवा लिया और पोस्टमॉर्टम के लिए समराला के सिविल अस्पताल में भेज दिया है। इंदर के माता-पिता और दो भाई कोरिया में रहते हैं। जबकि उसका एक भाई लुधियाना के जमालपुर में रहता है। बाजार से घर का राशन-पानी लेने गई थी सिंगर के भाई जोतइंदर सिंह ने कहा कि, इंदर कौर 13 मई को रात करीब साढ़े 6 बजे अपनी सफेद रंग की फोर्ड फिगो कार लेकर बाजार से घर का राशन-पानी (ग्रॉसरी) लेने निकली थी, लेकिन वह वापस घर नहीं लौटी। जब लड़की वापस नहीं आई, तो परिवार वालों ने अपने स्तर पर उसकी तलाश शुरू की। छानबीन के दौरान उन्हें पता चला कि यशइंदर की दोस्ती सुखविंदर सिंह उर्फ सुक्खा नाम के एक व्यक्ति से थी, जो मूल रूप से मोगा का रहने वाला है, लेकिन अभी अपने परिवार के साथ कनाडा में रहता है। 13 मई की रात को सुखविंदर सिंह उर्फ सुक्खा, उसके पिता प्रीतम सिंह, उसके दोस्त करमजीत सिंह और कुछ अन्य अज्ञात साथियों ने मिलकर यशइंदर कौर को गन-पॉइंट पर जान से मारने की नीयत से अगवा कर लिया। कनाडा से नेपाल के रास्ते पंजाब आया आरोपी भाई ने कहा कि सुखविंदर सिंह उर्फ सुक्खा, यशइंदर कौर पर जबरदस्ती शादी करने का दबाव बना रहा था और इस काम में सुक्खा के पिता प्रीतम सिंह भी उसका साथ दे रहे थे। दूसरी तरफ, यशइंदर को पता चल चुका था कि सुखविंदर पहले से ही शादीशुदा है और उसके बच्चे भी हैं, इसलिए वह इस शादी के लिए साफ मना कर रही थी। उन्होंने कहा कि इसी बात का बदला लेने के लिए उसका अपहरण किया गया। आरोपी कनाडा से नेपाल के रास्ते पंजाब आया था। मोगा से वह दो टैक्सियां किराए पर लेकर आया। यहां आकर उसने उसकी बहन को गन पॉइंट पर किडनैप किया। इसके बाद आरोपी सुखविंदर सिंह ने नहर के किनारे बहन की हत्या की और उसके बाद फिर से नेपाल के रास्ते कनाडा भाग गया है। 5 साल पहले इंस्टाग्राम पर दोस्ती हुई थी पांच साल पहले इंदर कौर ने सिंगिंग छोड़ दी थी और अब बुटीक व मेकअप आर्टिस्ट का काम कर रही थी। बहन और आरोपी सुखविंदर की इंस्टाग्राम पर पिछले 5 साल से दोस्ती थी। वो घर आता जाता रहता था। उसका कनाडा में कंस्ट्रक्शन का काम था। मेरी भी उससे बातचीत होती रहती थी। जब पता चला कि वो शादीशुदा है, तो फिर बहन ने शादी से इनकार कर दिया। 13 मई को आखिरी बार 10 बजे रात को इंदर कौर से बात हुई। उसने कहा कि मैं घर आ रही हूं। उसके बाद उसका फोन बंद हो गया। उसके बाद नहीं पता कि क्या हो गया। इंदर के जन्मदिन पर भी आया था आरोपी रिश्तेदार और पूर्व पार्षद जसपाल सिंह ग्यासपुरा ने बताया कि सुखविंदर और इंदर की दोस्ती करीब 5-6 साल पुरानी थी। 13 जनवरी को इंदर के जन्मदिन पर भी सुखविंदर आया था। मार्च में उसने इंदर से शादी करने का वादा किया था, लेकिन बाद में कहने लगा कि कुछ समय बाद शादी करेंगे। बाद में परिवार को पता चला कि वह पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं। उन्होंने बताया कि सुखविंदर कनाडा के कैलगरी में रहता है और वहां का PR होल्डर है। उसकी उम्र 37 साल है। दोनों की पहचान सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। जसपाल सिंह ने आरोप लगाया कि सुखविंदर ने ही इंदर की हत्या की है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने कार और शव दोनों बरामद कर लिए हैं, जबकि दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। किडनैपिंग वाली बात नहीं है। सुखविंदर ने कहा कि वो विदेश जा रहा है, तो इंदर उसे अपनी कार से छोड़ने जा रही थी। रास्ते में दोनों में क्या हुआ पता नहीं और उसने उसकी हत्या कर दी। मामले की जांच कर रही पुलिस थाना जमालपुर के एसएचओ बलबीर सिंह ने कहा कि नीलो नहर में से लाश मिलने की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव की शिनाख्त के लिए परिवार को बुलाया गया। जिसके बाद उसकी पहचान की गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पंजाब- ट्रक में घुसी कार, 4 दोस्तों की मौत:2 लाशें ड्राइविंग सीट पर फंसी, एक-दूसरे से चिपकीं, कटर से काटकर निकालीं

पंजाब- ट्रक में घुसी कार, 4 दोस्तों की मौत:2 लाशें ड्राइविंग सीट पर फंसी, एक-दूसरे से चिपकीं, कटर से काटकर निकालीं

गुरदासपुर में नेशनल हाईवे पर मंगलवार सुबह ऑल्टो कार सड़क किनारे खड़े ट्रक में जा घुसी। इससे कार सवार 4 दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। 2 की लाशें ड्राइवर सीट पर फंस गईं। लोगों के अनुसार हादसे के दौरान जोरदार धमाका हुआ। इसके बाद सुबह पुलिस को बुलाया गया, फिर लाशों को बाहर निकालने के लिए कार की बॉडी को कटर से काटा गया। शवों को निकालने में डेढ़ घंटे का समय लग गया। सभी एक दूसरे से चिपके हुए मिले। पुलिस जांच के अनुसार, तीन युवक हिमाचल प्रदेश के एक निजी नशा मुक्ति केंद्र से रात को ही फरार हुए थे। केंद्र से भागने के बाद उन्होंने पठानकोट में रहने वाले चौथे दोस्त को कार समेत साथ लिया, जिसके बाद तड़के करीब 4 बजे यह हादसा हो गया। पुलिस अब उस ट्रक को ट्रेस करने में जुटी है, जिसके पीछे यह कार टकराई थी। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पॉस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। इनमें से एक युवक 2 बच्चों का पिता था। बताया जा रहा है कि कार की स्पीड 80 से 100 के आसपास थी। चश्मदीद ने क्या बताया, 4 पॉइंट में पढ़िए… इन 4 युवकों की हुई मौत पुलिस के अनुसार हादसे में मारे गए युवकों की पहचान पठानकोट के भदरोआ स्थित टीचर कॉलोनी निवासी विक्रम उर्फ विक्की (31), गंदला लाहड़ी (सुजानपुर) निवासी नरेश कुमार, सरना निवासी विनोद कुमार और जम्मू निवासी राही के रूप में हुई है। हिमाचल में नशा मुक्ति केंद्र से भागे विनोद, राही और नरेश ने विक्रम से संपर्क किया था। इसके बाद विक्रम अपनी ऑल्टो कार लेकर उनके साथ चला गया। एक मृतक दो बच्चों का पिता था विक्रम उर्फ विक्की (31) के रूप में हुई है। वह पठानकोट में स्लीपवेल मैट्रेस के शोरूम में काम करता था और कुछ दिन पहले दोस्तों के साथ घूमने गया था। विक्की के 2 बच्चे हैं। पत्नी को फोन कर कहा था- लेट हो जाऊंगा विक्रम उर्फ विक्की ने देर रात को पठानकोट में अपनी पत्नी को फोन किया था। विक्की ने पत्नी को कहा था कि वो सुबह लेट हो जाएगा। काम पर जाना है। साथ ही उसने अपने कपड़े प्रेस करने के लिए भी कहा था। नशा मुक्ति केंद्र से भागे थे तीन युवक मामले की जांच कर रहे ASI बलजीत सिंह ने बताया कि 3 युवक हिमाचल प्रदेश में स्थित संजीवनी नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती थे।। जहां से ये बीती रात चकमा देकर फरार हो गए। पुलिस ने जब नशा मुक्ति केंद्र के मालिक से संपर्क साधा तो उसने पुष्टि की कि ये तीनों युवक रात के समय अपना बैग और सामान लेकर मोटरसाइकिल पर केंद्र से चुपके से निकल गए थे। गुरदासपुर-बटाला साइड से आ रहे थे प्रारंभिक जांच के अनुसार, ये चारों युवक ऑल्टो कार में सवार होकर गुरदासपुर से बटाला साइड की तरफ जा रहे थे। नेशनल हाईवे पर नौशहरा मज्झा सिंह के पास एक ट्रक खड़ा था। जिसमें इनकी कार पीछे से टकरा गई। हादसे के बाद ट्रक ड्राइवर ट्रक समेत मौके से फरार हो गया। पुलिस अधिकारी ने बताया हम हाईवे और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी कैमरे खंगाल रहे हैं, ताकि उस ट्रक को ट्रेस किया जा सके, जिसके पीछे कार टकराई थी। परिजनों के बयानों पर भी होगी कार्रवाई पुलिस के अनुसार युवक नशा मुक्ति केंद्र की सुरक्षा को भेदकर वहां से बाहर कैसे निकले, इस बात की जांच संबंधित क्षेत्र की पुलिस करेगी। वहीं हादसे का शिकार हुए युवकों के परिजनों से भी संपर्क कर लिया गया है। परिवारों के बयानों पर आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। —— ये खबर भी पढ़ें: लुधियाना में 3 बच्चों की मां ने किया सुसाइड: मरने से पहले भाई को किया फोन; जेठ-जेठानी पर तंग करने का आरोप; पति विदेश में रहता लुधियाना के थाना मेहरबान के अंतर्गत आते गांव जीवनपुर में एक 32 वर्षीय विवाहिता ने ससुराल वालों से तंग आकर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतका की पहचान पूजा कौर के रूप में हुई है। परिजनों द्वारा कल लगाए गए धरने (प्रदर्शन) के बाद पुलिस हरकत में आई और आज जेठ, जेठानी सहित 3 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने 2 आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है। (पढ़ें पूरी खबर)

हिमाचल पंचायत चुनाव: चुनाव से पहले यहां हंगामा, दो मतपत्र गायब, आठ लोगों पर केस दर्ज

हिमाचल पंचायत चुनाव: चुनाव से पहले यहां हंगामा, दो मतपत्र गायब, आठ लोगों पर केस दर्ज

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर दो मतपत्र गायब होने की तैयारी है, जिसके बाद पुलिस ने सोमवार को आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मतपत्र सोलन जिले के कुनिहार क्षेत्र में तैयार किये जा रहे थे। जांच के दौरान दो मतपत्र गायब मिले, जिसके बाद दस्तावेज दर्ज किए गए। सोलन के पुलिस कप्तान (एसपी) तिरुमालाराजू वर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि किस मामले की जांच जारी है। हिमाचल प्रदेश में 3,754 ग्रामों के लिए 26, 28 और 30 मई को तीन चरण में चुनाव आयोजित किये जायेंगे। इन चुनावों में कुल 31,182 मतदान होंगे, जिनमें 21,654 ग्राम पंचायत सदस्य, 3,754 प्रधान, 3,754 उपप्रधान, 1,679 पंचायत समिति सदस्य और 251 जिला परिषद सदस्य शामिल हैं। ग्राम पंचायत, प्रधान और उपप्रधान के नतीजे मतदान वाले दिन ही घोषित होंगे, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के नतीजे 31 मई को घोषित होंगे। राज्य में 50,79,048 से अधिक किरदार अपने फ्रैंचाइज़ का इस्तेमाल करेंगे, जिनमें 25,11,249 महिलाएं, 25,67,770 पुरुष और 29 तृतीय लिंग के किरदार शामिल हैं। कुल मिलाकर 52,350 से पहली बार अपने फ्रैंचाइज़ का इस्तेमाल किया जाएगा।

गर्दन दर्द से हैं परेशान! बस आजमाएं ये 5 जादुई अप-डाउन एक्सरसाइज, ऑफिस चेयर पर ही मिल जाएगी राहत

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Last Updated:May 19, 2026, 07:11 IST Cervical Pain Exercises: रांची के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ श्याम कुमार त्रिपाठी ने चेयर पर बैठे बैठे करने लायक गर्दन की 5 आसान एक्सरसाइज बताईं. उन्होंने कहा कि इससे सर्वाइकल पेन से राहत मिलती है. साथ ही कभी ये बीमारी भी नहीं होती है. ख़बरें फटाफट रांची: आजकल लोग लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम कर रहे हैं, जिससे बॉडी पोस्चर खराब हो रहा है. ऐसे में रांची के फिजियोथेरेपिस्ट ने कुछ टिप्स दिए हैं. जहां आपको एक चेयर में बैठे हुए ही उठने की जरूरत नहीं है और आप गले की 5 एक्सरसाइज कर सकते हैं, जिससे धीरे-धीरे अगर आपको सर्वाइकल पेन है तो इससे काफी राहत मिलेगी और जिनको नहीं है, अगर वह करते हैं तो इसकी होने की संभावना न के बराबर हो जाएगी. रांची के जाने माने फिजियोथेरेपिस्ट डॉक्टर श्याम कुमार त्रिपाठी मोराबादी में स्टेप वन फिजियोथैरेपी क्लिनिक चलाते हैं. उनके पसा 16 साल का एक्सपीरियंस है. उन्होंने लोकल 18 को बताया कि अगर आप अपने चेयर में बैठे-बैठे बस यह 3-4 एक्सरसाइज कर लें तो सर्वाइकल पेन का टेंशन आपको लेने की जरूरत ही नहीं है..यह एक्सरसाइज जादू की तरह काम करता है. जादू की तरह काम करती है ये एक्सरसाइज • डॉ श्याम कुमार त्रिपाठी बताते हैं कि सबसे पहले टिकटोक एक्सरसाइज है. दरअसल, अपने बॉडी को एकदम सीधा रखें और अपने गले को सिर्फ आगे की तरफ ले जाइए और गले को पीछे की तरफ ले जाइए. आगे टिक, पीछे टॉक. इस तरीके का टिकटोक आगे पीछे करते रहिए, ऐसा 10 बार रिपीट करिए. • दूसरे एक्सरसाइज में अपको अपने सर को एकदम नीचे करना है और फिर एकदम ऊपर पीछे की तरफ कर लीजिए. मतलब अप एंड डाउन ऐसा भी 10 बार रिपीट करिए. जब भी आपको समय मिले एक घंटा में एक बार ऐसा कर लीजिए 10 बार. • तीसरा, अपने दोनों हाथों को अपने चेस्ट पास लाइए और पीछे की तरफ प्रेशर करके पीछे घुमाइए और फिर आगे दोनों हाथों को कीजिए और फिर दोनों हाथों को पीछे की तरफ कीजिए. इस तरीके को बार-बार रिपीट करिए. • चौथा, आप अपने सर को एकदम गोल-गोल राउंड शेप में घुमाइए, एक बार क्लाकवाइज घुमाइए और एक बार एंटी क्लाकवाइज. ऐसा भी 10 से 15 बार आपको करना है. अगर आप इतना ही कर ले, 1 घंटे में एक बार ऐसा कर ले तो आपको सर्वाइकल पेन से काफी राहत मिलेगी. • ऐसे में आपको एक बात का ध्यान रखना है. अगर आप मोबाइल फोन देखते हैं या फिर लैपटॉप चलाते हैं तो उसे अपने आंखों के बराबर रखना है. ऐसे में लैपटॉप स्टैंड होता है. आप वह ले लीजिए व मोबाइल फोन को भी थोड़ा ऊपर करके देखिए. गर्दन झुका कर फोन नहीं चलाना है और ना ही लैपटॉप. यह सर्वाइकल होने का बहुत बड़ा कारण होता है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

हिमाचल के मैदानी इलाकों में बढ़ेगी गर्मी:ऊना का पारा 39.7॰C पहुंचा, ऊंचे क्षेत्रों में अगले 3 दिन हल्की बूंदाबांदी के आसार

हिमाचल के मैदानी इलाकों में बढ़ेगी गर्मी:ऊना का पारा 39.7॰C पहुंचा, ऊंचे क्षेत्रों में अगले 3 दिन हल्की बूंदाबांदी के आसार

हिमाचल प्रदेश के अधिकांश भागों में आज सुबह से ही धूप खिली हुई है। राज्य में 2 दिन की तेज धूप के बाद गर्मी का प्रकोप बढ़ा है। बीते 24 घंटे के दौरान 11 शहरों का अधिकतम तापमान 35 डिग्री या उससे अधिक हो गया है। इससे दिन के वक्त मैदानी इलाकों में घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान ऊना में 39.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा बिलासपुर में 38.5 डिग्री सेल्सियस, सुंदरनगर में 38.1 डिग्री, हमीरपुर में 38 डिग्री, कांगड़ा में 38.3 डिग्री, बरठी में 37.4 डिग्री और मंडी में 37 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। तापमान में बढ़ोतरी के बाद दिन के समय लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। हालांकि, ऊंचे व मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम सुहावना बना हुआ है। अगले 72 घंटे तापमान में उछाल आएगा मौसम विभाग के अनुसार- अगले 72 घंटे के दौरान तापमान में हल्का उछाल आ सकता है, जिससे गर्मी और बढ़ने की संभावना है। हालांकि, आज से एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होने के आसार है, लेकिन इसका असर मुख्य रूप से अधिक ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों तक सीमित रहेगा। मैदानी और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में फिलहाल गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है। अगले तीन दिन ऊंचे पहाड़ों पर बूंदाबांदी मौसम विभाग ने 19 से 21 मई तक अधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई है। वहीं 22 मई को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है। इसके बाद 23 और 24 मई को भी ऊंचे इलाकों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी के आसार बने हुए हैं।

घंटों बैठे-बैठे काम करते हैं? पैरों को सुन्न होने से बचाएंगी ये आसान डेस्क एक्सरसाइज

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Last Updated:May 18, 2026, 23:26 IST आजकल ऑफिस हो या वर्क फ्रॉम होम, घंटों कुर्सी पर बैठे रहना लोगों की मजबूरी बन गया है. लेकिन लगातार बैठे रहने से पैरों में जकड़न, भारीपन और दर्द जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं. ऐसे में कुछ आसान Desk Exercises आपके पैरों को एक्टिव रखने और शरीर को हल्का महसूस कराने में मदद कर सकती हैं. ख़बरें फटाफट आजकल ज्यादातर लोगों का दिन कुर्सी पर बैठकर ही निकल जाता है. सुबह लैपटॉप खोलते हैं और फिर पता ही नहीं चलता कि कब कई घंटे बीत गए. लंबे समय तक बैठे रहने से सबसे ज्यादा असर पैरों पर पड़ता है. कई लोगों को पैरों में भारीपन, झनझनाहट, अकड़न या हल्का दर्द महसूस होने लगता है. कुछ लोगों के पैर तो इतने stiff हो जाते हैं कि उठते समय अजीब सा खिंचाव महसूस होता है. अच्छी बात ये है कि इसके लिए आपको जिम जाने या अलग से घंटों निकालने की जरूरत नहीं है. ऑफिस डेस्क पर बैठे-बैठे भी कुछ आसान एक्सरसाइज करके पैरों को एक्टिव रखा जा सकता है. अगर काफी देर से एक ही पोजिशन में बैठे हैं तो सबसे पहले अपने टखनों को मूव करिए. कुर्सी पर आराम से बैठें और एक पैर को थोड़ा ऊपर उठाकर धीरे-धीरे गोल घुमाएं. पहले दाईं दिशा में और फिर उल्टी दिशा में. इसके बाद दूसरे पैर से भी यही करें. सुनने में ये बहुत छोटी एक्सरसाइज लग सकती है, लेकिन इससे पैरों में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और stiffness कम महसूस होती है. जिन लोगों के पैर जल्दी सुन्न हो जाते हैं, उनके लिए ये काफी मददगार हो सकती है. Leg Extension से पैरों को दीजिए हल्का स्ट्रेचकई बार लंबे समय तक बैठे रहने से घुटनों और जांघों में जकड़न होने लगती है. ऐसे में लेग एक्सटेंशन काफी आराम दे सकता है. कुर्सी पर बैठकर एक पैर को सामने की तरफ सीधा करें और कुछ सेकंड तक रोककर रखें. फिर धीरे से नीचे ले आएं. अब यही दूसरे पैर से करें. इससे पैरों की muscles एक्टिव रहती हैं और लंबे समय तक बैठने का असर थोड़ा कम हो सकता है. अगर दिन में 8-9 घंटे बैठकर काम करते हैं तो इसे बीच-बीच में जरूर करें. Heel Raise और Toe Raise भी हैं फायदेमंदकई लोगों को लंबे समय तक बैठने के बाद पैरों में अजीब सा भारीपन महसूस होता है. इसके लिए Heel Raise और Toe Raise काफी आसान और असरदार एक्सरसाइज मानी जाती हैं. इसमें आपको सिर्फ एड़ियों और पंजों को ऊपर-नीचे करना होता है. पहले पंजे जमीन पर रखें और एड़ियों को ऊपर उठाएं, फिर एड़ियां नीचे रखकर पंजों को ऊपर करें. यह मूवमेंट पैरों की muscles को एक्टिव रखता है और ब्लड फ्लो बेहतर करने में मदद कर सकता है. सबसे अच्छी बात ये है कि इसे करते समय आपको काम रोकने की भी जरूरत नहीं पड़ती. Knee Lift से पैरों को रखें एक्टिवअगर बैठे-बैठे शरीर बिल्कुल सुस्त लगने लगे तो नी लिफ्ट ट्राय कर सकते हैं. इसमें कुर्सी पर सीधे बैठकर एक घुटने को ऊपर उठाना होता है और फिर धीरे से नीचे लाना होता है. इसके बाद दूसरे पैर से यही दोहराएं. इससे पैरों के साथ-साथ हिप्स भी थोड़ा एक्टिव महसूस करते हैं. लगातार बैठे रहने से शरीर का निचला हिस्सा कम मूव करता है, इसलिए ऐसी छोटी एक्सरसाइज दिनभर शरीर को हल्का और एक्टिव बनाए रखने में मदद करती हैं. सिर्फ 2 मिनट चलना भी जरूरी हैकई लोग सोचते हैं कि सिर्फ एक्सरसाइज कर लेना काफी है, लेकिन लंबे समय तक लगातार बैठे रहना भी ठीक नहीं माना जाता. कोशिश करें कि हर एक घंटे बाद कुर्सी से उठें और थोड़ा टहल लें. ऑफिस में हैं तो पानी लेने चले जाएं या थोड़ा वॉक कर लें. इससे शरीर को मूवमेंट मिलता है और पैरों में जमी हुई जकड़न कम हो सकती है. छोटी-छोटी आदतें ही लंबे समय में शरीर को ज्यादा आरामदायक महसूस कराती हैं. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi

इसके लिए कोई ‘ममता’ नहीं है: ‘सड़क पर नमाज़ न पढ़ें’ | सार्वजनिक स्थान = प्रार्थना मैट? | न्यूज18

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न आम, न तरबूज…उत्तराखंड की गर्मियों का साथी ये नन्हा फल, पहाड़ों पर इसके गाए जाते गीत

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Last Updated:May 18, 2026, 21:33 IST Kafal Benefits : उत्तराखंड के पहाड़ों में गर्मियों के मौसम में मिलने वाला काफल इन दिनों लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. गहरे लाल रंग का यह जंगली फल अपने खट्टे-मीठे स्वाद और औषधीय गुणों की वजह से काफी प्रसिद्ध है. काफल पकने का मतलब गर्मियों के आगमन. लोकगीत ‘काफल पाको मैनी चाखो’ ने इसे देशभर में पहचान दिलाई है. बागेश्वर के किशन मलड़ा लोकल 18 से बताते हैं कि काफल की खेती नहीं की जाती है. यह मध्य हिमालय के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है. काफल केवल फल नहीं बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं का अहम हिस्सा भी है. प्रसिद्ध लोकगीत ‘काफल पाको मैनी चाखो’ ने इसे देशभर में पहचान दिलाई है. पहाड़ों में यह गीत आज भी लोगों की जुबान पर रहता है. काफल पकने का मतलब गर्मियों के आगमन. इसी के साथ जंगलों में रौनक बढ़ने लगती है. गांवों में बच्चे और महिलाएं जंगलों में काफल तोड़ने जाते हैं, जो एक तरह की पारंपरिक गतिविधि बन चुकी है. कई मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी काफल जान है. काफल को प्राकृतिक ऊर्जा देने वाला फल माना जाता है. गर्मियों में इसे खाने से शरीर को ताजगी और ठंडक मिलती है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर की कमजोरी दूर करने में मदद करते हैं. स्थानीय लोग लंबे समय से इसे पारंपरिक स्वास्थ्यवर्धक फल के रूप में उपयोग करते आए हैं. पहाड़ों में जंगलों से लौटते समय लोग काफल खाकर थकान मिटाते हैं. इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. बिना किसी मिलावट और केमिकल के मिलने वाला काफल आज के समय में लोगों के लिए हेल्दी विकल्प बन चुका है. गर्मियों के मौसम में काफल स्थानीय ग्रामीणों के लिए अच्छी आय का साधन बन जाता है. गांवों के लोग जंगलों से काफल इकट्ठा कर बाजारों में बेचते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होती है. सड़क किनारे और स्थानीय बाजारों में काफल की अच्छी कीमत मिलती है. पर्यटक भी इसे खरीदने में काफी रुचि दिखाते हैं. कई परिवारों की मौसमी आय का बड़ा हिस्सा काफल बिक्री से आता है. खासकर महिलाओं और युवाओं को इससे रोजगार मिलता है. पहाड़ों में सीमित रोजगार के बीच यह जंगली फल लोगों के लिए आर्थिक सहारा बन रहा है. हर साल काफल सीजन का उन्हें बेसब्री से इंतजार रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google पिछले कुछ वर्षों में काफल की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. पहले यह केवल पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित था, लेकिन अब शहरों में भी इसकी मांग बढ़ने लगी है. लोग इसे उत्तराखंड की पारंपरिक पहचान के रूप में पसंद कर रहे हैं. कई स्थानीय व्यापारी काफल को पैक करके दूसरे शहरों तक पहुंचा रहे हैं. सोशल मीडिया और पर्यटन के कारण भी इसकी पहचान मजबूत हुई है. गर्मियों में बाजारों में काफल की दुकानें लोगों को आकर्षित करती हैं. बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इसका स्वाद पसंद करते हैं. प्राकृतिक, स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक होने के कारण काफल आज उत्तराखंड के सबसे चर्चित जंगली फलों में शामिल हो गया है. बागेश्वर के किशन मलड़ा लोकल 18 से बताते हैं कि काफल की सबसे खास बात यह है कि इसकी खेती नहीं की जाती है. यह मध्य हिमालय के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला जंगली फल है. उत्तराखंड के बागेश्वर, अल्मोड़ा, नैनीताल और पिथौरागढ़ जिलों के जंगलों में यह बड़ी मात्रा में मिलता है. करीब 1500 से 2500 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काफल के पेड़ अधिक पाए जाते हैं. ग्रामीण लोग हर साल मौसम आने पर जंगलों से काफल इकट्ठा करते हैं. पहाड़ों के पर्यावरण और जैव विविधता में भी इसका महत्त्वपूर्ण योगदान है. बिना किसी रासायनिक खाद या दवा के उगने वाला यह फल पूरी तरह प्राकृतिक होता है. बागेश्वर के चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि काफल केवल स्वादिष्ट फल ही नहीं बल्कि औषधीय गुणों का भी खजाना है. इसमें विटामिन सी, आयरन, कैल्शियम और एंटी-ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. काफल पाचन तंत्र को मजबूत करने और पेट की समस्याओं से राहत देने में उपयोगी है. इसकी छाल का उपयोग दांत दर्द और गले की खराश में भी किया जाता है. गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला यह फल प्राकृतिक औषधि की तरह काम करता है. उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों के बीच काफल काफी लोकप्रिय होता जा रहा है. पहाड़ घूमने पहुंचे लोग स्थानीय बाजारों और सड़कों पर काफल खरीदते नजर आते हैं. इसका अनोखा स्वाद पर्यटकों को बेहद पसंद आता है. कई लोग इसे पहाड़ों की खास पहचान मानते हैं. काफल से बने नमक-मसाले वाले स्वाद को लोग बड़े चाव से खाते हैं. सोशल मीडिया पर भी काफल की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल होते हैं. गर्मियों में पहाड़ी पर्यटन के साथ काफल की बिक्री भी बढ़ जाती है. स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि बाहर से आने वाले लोग अक्सर काफल के बारे में पूछते हैं, इसका स्वाद चखने के बाद दोबारा जरूर खरीदते हैं. गर्मियों का मौसम शुरू होते ही उत्तराखंड के पहाड़ों में काफल की मांग तेजी से बढ़ जाती है. यह जंगली फल अपने खट्टे-मीठे स्वाद के कारण बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को पसंद आता है. लाल और गहरे बैंगनी रंग का काफल जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है, मई-जून के महीनों में बाजारों में दिखाई देता है. स्थानीय लोग सुबह-सुबह जंगलों से काफल तोड़कर बाजारों तक पहुंचाते हैं. सड़क किनारे छोटे दुकानदार भी इसे बेचते नजर आते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। उत्तराखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|

ईपीएस ने ‘पीठ में छुरा घोंपने वाले’ विजय पर ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ का आरोप लगाया, एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन की रिपोर्टों को खारिज किया | भारत समाचार

Ruturaj Gaikwad and Kartik Sharma are building a partnership (Picture credit: AP)

आखरी अपडेट:18 मई, 2026, 20:40 IST पलानीस्वामी ने कहा कि फर्जी खबरें प्रसारित की गईं जिसमें आरोप लगाया गया कि अन्नाद्रमुक द्रमुक के समर्थन से सरकार बनाने की योजना पर काम कर रही है। एक विद्रोही खेमे के टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार से हाथ मिलाने के बाद एआईएडीएमके सुप्रीमो एडप्पादी के पलानीस्वामी को बड़ा झटका लगा। (पीटीआई/फ़ाइल) अन्नाद्रमुक के संकटग्रस्त प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी ने सोमवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय पर विधायकों को “खरीद-फरोख्त” करके लुभाने का आरोप लगाया और सरकार बनाने के लिए द्रमुक के साथ उनकी पार्टी के गठबंधन की अफवाहों को खारिज कर दिया। उनकी टिप्पणी एसपी वेलुमणि और सी वे षणमुगम के नेतृत्व वाले एक विद्रोही अन्नाद्रमुक गुट द्वारा ईपीएस पर कट्टर प्रतिद्वंद्वी द्रमुक के साथ सरकार बनाने का प्रयास करने का आरोप लगाने के बाद विजय को बाहरी समर्थन देने के बाद आई है। हालांकि, पलानीस्वामी ने एक बयान में कहा कि फर्जी खबरें प्रसारित की गईं जिसमें आरोप लगाया गया कि एआईएडीएमके डीएमके के समर्थन से सरकार बनाने की योजना पर काम कर रही है, उन्होंने कहा कि पार्टी की स्थापना 1972 में डीएमके के विरोध के सिद्धांत पर की गई थी। ईपीएस ने ‘बैकस्टैबर’ विजय की आलोचना की अन्नाद्रमुक सुप्रीमो ने विजय की तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) पर “खरीद-फरोख्त” और मंत्री पद की पेशकश के जरिए अन्नाद्रमुक पदाधिकारियों को लुभाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “जो पार्टी शुद्ध ताकत होने का दावा करती है, वह द्रमुक सहयोगियों के चरणों में गिर गई है। उसी पार्टी ने विधायकों की खरीद-फरोख्त कर अन्नाद्रमुक की पीठ में छुरा घोंपा है।” पलानीस्वामी ने आगे कहा कि टीवीके थोड़े समय के लिए ही टिकेगी और उन्हें विश्वास है कि तमिलनाडु में जल्द ही एआईएडीएमके की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा, ”एमजीआर और जयललिता के दिनों से, हमने विश्वासघात करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है और अगर वे पश्चाताप करते हैं तो उन्हें वापस ले लेते हैं।” इस बीच, बागी एआईएडीएमके नेता सी वे शनमुगम ने ईपीएस पर चुनाव से पहले टीवीके के साथ गठबंधन करने के लिए वरिष्ठ नेताओं की बार-बार सलाह को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उनकी टिप्पणी पलानीस्वामी द्वारा 13 मई को विधानसभा विश्वास प्रस्ताव के दौरान नेतृत्व की अवहेलना करने के लिए विधायक एसपी वेलुमणि और सी विजयभास्कर सहित कई बागी नेताओं को पार्टी पदों से निष्कासित करने के बाद आई है। अन्नाद्रमुक ने यह भी कहा कि उन्होंने उन 25 विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए आवेदन किया है जिन्होंने पार्टी के व्हिप की अवज्ञा की और टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने के लिए मतदान किया, जो ईपीएस नेतृत्व के तहत पार्टी में सबसे गंभीर संकट को दर्शाता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ईपीएस ने ‘पीठ में छुरा घोंपने वाले’ विजय पर ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ का आरोप लगाया, एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन की रिपोर्टों को खारिज किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु की राजनीति(टी)तमिलनाडु सरकार(टी)ईपीएस विजय(टी)ईपीएस बनाम विजय(टी)एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन(टी)एआईएडीएमके बागी विधायक(टी)विजय सरकार

क्या आप भी फ्रिज में रखते हैं कटे फल? ये गलती सेहत पर पड़ सकती है भारी, एक्सपर्ट ने बताया कब बन जाते हैं जहरीले

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Cut Fruits Storage: गर्मियों में ज्यादातर लोग तरबूज, खरबूजा, पपीता या अनानास जैसे फलों को काटकर फ्रिज में रख देते हैं ताकि बार-बार काटने की झंझट न रहे और ठंडे फल आसानी से मिल जाएं. देखने में यह आदत काफी आसान लगती है, लेकिन कई बार यही छोटी सी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है. बहुत से लोग सोचते हैं कि फ्रिज में रखने के बाद फल पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं, जबकि सच यह है कि कटने के बाद फलों की ताजगी तेजी से कम होने लगती है. हवा, नमी और बैक्टीरिया के संपर्क में आने के बाद उनमें खराबी शुरू हो जाती है, अगर सही तरीके से स्टोर न किया जाए तो कटे हुए फल पेट से जुड़ी दिक्कतों की वजह भी बन सकते हैं. खासकर गर्म मौसम में बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं और फल जल्दी खराब हो जाते हैं. यही कारण है कि एक्सपर्ट कटे फलों को ज्यादा देर तक स्टोर करने से बचने की सलाह देते हैं, अगर आप भी अक्सर कटे हुए फल फ्रिज में रखते हैं, तो यह जानना जरूरी है कि उन्हें कितनी देर तक सुरक्षित रखा जा सकता है और स्टोर करने का सही तरीका क्या है. कटे हुए फल जल्दी क्यों खराब होते हैं?जब भी किसी फल को काटा जाता है, उसकी बाहरी सुरक्षा परत हट जाती है. इसके बाद फल सीधे हवा और नमी के संपर्क में आ जाता है. यही वजह है कि उनमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं. साल्मोनेला, ई. कोलाई और लिस्टेरिया जैसे हानिकारक बैक्टीरिया कटे फलों में तेजी से बढ़ सकते हैं. फ्रिज बैक्टीरिया की रफ्तार को धीमा जरूर करता है, लेकिन उन्हें पूरी तरह खत्म नहीं करता. इसलिए यह मान लेना गलत है कि फ्रिज में रखा हर कटे फल पूरी तरह सुरक्षित है. ऑक्सीडाइजेशन से कम हो जाते हैं पोषक तत्वआपने कई बार देखा होगा कि कटने के कुछ देर बाद सेब या केला भूरा पड़ने लगता है. यह ऑक्सीडाइजेशन की वजह से होता है. हवा के संपर्क में आने पर फलों में मौजूद विटामिन-सी जैसे पोषक तत्व धीरे-धीरे कम होने लगते हैं. यानी फल सिर्फ स्वाद ही नहीं खोते, बल्कि उनका न्यूट्रिशन भी कम होने लगता है. लंबे समय तक कटे फल रखने से उनकी गुणवत्ता प्रभावित होती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. कितने समय तक सुरक्षित रहते हैं कटे फल?कटे फलों की सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि उन्हें किस तापमान पर रखा गया है. अगर फल कमरे के तापमान पर रखे हैं, तो उन्हें 4 से 6 घंटे के अंदर खा लेना चाहिए. अगर फ्रिज का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से कम है, तो ज्यादातर कटे फल करीब 24 घंटे तक ठीक रह सकते हैं. तरबूज, खरबूजा, पपीता और अनानास जैसे ज्यादा पानी वाले फल जल्दी खराब होते हैं. केला और सेब जैसे फल जल्दी रंग बदलते हैं, इसलिए इन्हें काटने के तुरंत बाद खाना बेहतर माना जाता है. लोग स्टोर करते समय कौन सी गलतियां करते हैं?कई लोग कटे फलों को प्लेट में खुला छोड़ देते हैं या हल्के फॉयल में ढककर फ्रिज में रख देते हैं. इससे फल लगातार हवा के संपर्क में बने रहते हैं और जल्दी खराब हो जाते हैं. इसके अलावा बार-बार फ्रिज खोलने से अंदर का तापमान बदलता रहता है. तापमान में उतार-चढ़ाव होने पर फलों में खराबी तेजी से बढ़ती है. कई बार लोग एक ही कंटेनर को बार-बार खोलते रहते हैं, जिससे बाहर की दूषित हवा अंदर पहुंचती रहती है. कटे फलों को सुरक्षित रखने का सही तरीका 1. एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल करेंकटे हुए फलों को हमेशा कांच या अच्छी क्वालिटी के एयरटाइट कंटेनर में रखें. इससे हवा अंदर कम जाती है और फल ज्यादा समय तक ताजे बने रहते हैं. 2. साफ-सफाई का ध्यान रखेंफल काटने से पहले हाथ, चाकू और कटिंग बोर्ड अच्छी तरह साफ करें. गंदे बर्तन या चाकू से बैक्टीरिया सीधे फल के अंदर पहुंच जाते हैं. 3. तुरंत फ्रिज में रखेंफल काटने के बाद उन्हें ज्यादा देर बाहर न छोड़ें. तुरंत फ्रिज में रखना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. 4. छोटे हिस्सों में स्टोर करेंअगर ज्यादा फल काट रहे हैं, तो उन्हें छोटे-छोटे कंटेनर में रखें. इससे हर बार पूरा कंटेनर खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कैसे पहचानें कि फल खराब हो चुके हैं?कई बार फल देखने में ठीक लगते हैं, लेकिन अंदर से खराब हो चुके होते हैं. ऐसे में इन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है. फल से खट्टी या फर्मेंटेशन जैसी गंध आना, फल का चिपचिपा हो जाना, ज्यादा पानी छोड़ना, रंग का बहुत ज्यादा गहरा या काला पड़ जाना, स्वाद में बदलाव महसूस होना. अगर इनमें से कोई भी संकेत दिखे, तो ऐसे फल खाने से बचना चाहिए. बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा जरूरी सावधानीकटे हुए खराब फल बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए ज्यादा नुकसानदायक हो सकते हैं. ऐसे लोगों में फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए उनके लिए हमेशा ताजे और तुरंत कटे फल देना ज्यादा सुरक्षित रहता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)