सुप्रीम कोर्ट स्टाफ को 2 दिन का वर्क फ्रॉम होम:जज कार पूलिंग करके कोर्ट जाएंगे; मोदी की ईंधन बचाने की अपील पर फैसला

PM मोदी की ईंधन बचत की अपील पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने वर्किंग को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। अब कोर्ट के हर विभाग का स्टाफ दो दिन वर्क फ्रॉम होम पर रहेगा। सभी जज कार पूल करेंगे। रजिस्ट्री से जुड़ा 50 फीसदी स्टाफ भी घर से काम करेगा। सोमवार, शुक्रवार और मिसलेनियस डे ( जो दिन पहले से तय नहीं होते) पर लिस्ट मामलों की सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी। इसके अलावा कोर्ट के अन्य वर्किंग डे में भी सुनवाई ऑनलाइन ही की जाएगी। कोर्ट ने रजिस्ट्री विभाग को निर्देश दिया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक समय पर भेजें और टेक्निकल सपोर्ट हर समय उपलब्ध रहे, जिससे अदालत की कार्यवाही प्रभावित न हो। सुप्रीम कोर्ट सचिव जनरल भारत पराशर ने इस संबंध नें सर्कुलर जारी किया है। पीएम की अपील का राज्यों पर भी असर पीएम मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर देश के राज्यों में भी दिखने लगा है। शुक्रवार को केरलम के सीएम बनने जा रहे वीडी सतीशन पद संभालने से पहले ही अपने काफिले में केवल तीन गाड़ियां रखने का फैसला किया है, जिसमें सिर्फ एक पायलट और एक एस्कॉर्ट वाहन चलेगा। एक दिन पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस गुरुवार को MLC शपथ ग्रहण समारोह के लिए बाइक से विधान भवन पहुंचे थे। दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने पेट्रोल-डीजल की बचत के लिए नए आदेश जारी किए। अब दिल्ली में सरकारी कर्मचारी हफ्ते में 2 दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ करेंगे। 50% सरकारी बैठकें ऑनलाइन होंगी और कोई भी मंत्री 1 साल तक विदेशी दौरे पर नहीं जाएगा। त्रिपुरा में ग्रुप C और D के सिर्फ 50% सरकारी कर्मचारी ही रोज ऑफिस आएंगे, बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। पंजाब में गवर्नर ऑफिस में हर बुधवार को अधिकारी चार-पहिया वाहन से नहीं आएंगे। हरियाणा में सीएम नायब सिंह सैनी हफ्ते में एक दिन बिना गाड़ी के चलेंगे। पीएम मोदी भी बुधवार को काफिला छोड़ सिर्फ 2 गाड़ियों के साथ निकले। वहीं गृह मंत्री अमित शाह के काफिले में 4 गाड़ियां नजर आई थीं। PM की अपील के बाद 13 राज्यों में सरकार-नेताओं के फैसले 1. ओडिशा: सीएम ने काफिले में गाड़ियां घटाईं ओडिशा के सीएम मोहन माझी ने अपने काफिले की गाड़ियां घटा दी हैं। उनके काफिले में सिर्फ चार गाड़ियां हैं। जिसमें दो पुलिस की गाड़ी शामिल हैं। 2. अरुणाचल प्रदेश: मंत्रियों-सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्रा पर रोक अरुणाचल प्रदेश सरकार ने खर्च कम करने के लिए अगले एक साल तक मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके अलावा मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के काफिले में वाहनों की संख्या 50% तक घटाने का आदेश दिया है। सरकार ने सरकारी बैठकों के लिए “वर्चुअल फर्स्ट” पॉलिसी भी लागू की है। अब जरूरी सरकारी यात्राओं के लिए कम से कम 15 दिन पहले टिकट बुक कराना जरूरी होगा, जबकि एलटीसी (भारत सरकार का अपने कर्मचारियों को दिया जाने वाला खर्च) यात्राओं की योजना 45 दिन पहले बनानी होगी। 3. त्रिपुरा: 50% कर्मचारी ही ऑफिस आएंगे, बाकी वर्क फ्रॉम होम त्रिपुरा सरकार ने खर्च और पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब सरकारी दफ्तरों में ग्रुप C और D के सिर्फ 50% कर्मचारी ही रोज ऑफिस आएंगे, बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। सरकार ने सभी विभागों को कर्मचारियों की साप्ताहिक ड्यूटी रोस्टर बनाने के निर्देश दिए हैं। जरूरी और इमरजेंसी सेवाओं वाले कर्मचारियों पर यह नियम लागू नहीं होगा। 4. हरियाणा: सीएम ने काफिला घटाया, हफ्ते में एक दिन बिना गाड़ी के चलेंगे हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए अपने सरकारी काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि अब उनके काफिले में सिर्फ सुरक्षा के लिए जरूरी वाहन ही शामिल होंगे। सीएम ने यह भी तय किया है कि वे हफ्ते में एक दिन कोई भी गाड़ी इस्तेमाल नहीं करेंगे। 5. आंध्र प्रदेश: सीएम के साथ अब पहले से आधा काफिला आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने अपने काफिले में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों की संख्या 50% कम करने का फैसला लिया है। अब जिला दौरों के दौरान उनके साथ पहले से आधी गाड़ियां ही चलेंगी। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों, वीआईपी लोगों से भी सरकारी गाड़ियों का कम इस्तेमाल करने और जरूरत होने पर ही यात्रा करने की अपील की है। 6. पंजाब: हर बुधवार अधिकारी चार पहिया से नहीं आएंगे पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा, हमने अपने अधिकारियों के साथ बैठक के बाद यह फैसला किया है कि हर बुधवार को हमारा कोई भी अधिकारी चार-पहिया वाहन से नहीं आएगा। 7. राजस्थान: सीएम भजनलाल के काफिले में अब 5 गाड़ियां राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाने का आदेश दिया। पहले काफिले में 14-16 गाड़ियां रहती थीं, लेकिन बुधवार को दिल्ली दौरे के दौरान उनके साथ सिर्फ 5 गाड़ियां ही चलीं। पूरी खबर पढ़ें… 8. बिहार: CM सम्राट चौधरी इलेक्ट्रिक गाड़ी से सचिवालय पहुंचे बिहार के CM सम्राट चौधरी बुधवार को कैबिनेट बैठक के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ी से सचिवालय पहुंचे। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीएम की गाड़ी के पीछे पेट्रोल-डीजल वाली करीब 20 गाड़ियों का काफिला था। वहीं अब कई मंत्री सिर्फ एक या दो गाड़ियों में ही कार्यक्रमों और बैठकों में पहुंच रहे हैं। 9. मध्य प्रदेश: VIP काफिलों पर ब्रेक, CM ने गाड़ियां घटाईं मध्य प्रदेश में अब मंत्रियों और वीआईपी काफिलों में गाड़ियों की संख्या सीमित की जाएगी। साथ ही सरकारी दौरों और भ्रमण के दौरान रैलियों पर भी रोक रहेगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव को Z+ कैटेगरी की सिक्योरिटी मिली है। इस वजह से उनके काफिले में अब तक कुल 13 वाहन शामिल रहते थे। नए आदेश के बाद भोपाल में स्थानीय दौरे के दौरान मुख्यमंत्री के काफिले में अब सिर्फ 8 वाहन शामिल होंगे। पूरी खबर पढ़ें… 10. यूपी: बैठकें वर्चुअल होंगी; 2 दिन वर्क फ्रॉम होम उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने मंगलवार को 7 बड़े फैसले लिए। मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और अफसरों का काफिला 50% घटेगा। हफ्ते में एक दिन इन्हें पब्लिक ट्रांसपोर्ट या बस-मेट्रो से चलना होगा। पूरी खबर पढ़ें… 11. दिल्ली: सरकारी कर्मचारी 2 दिन ‘वर्क फ्रॉम
‘अमरी’ के बाद चर्चा में आई अमृता प्रीतम की बायोपिक:भंसाली का सपना और साहिर का इश्क; क्या बड़े पर्दे पर दिखेगा अमृता-इमरोज का रिश्ता?

फिल्ममेकर मीरा नायर ने हाल ही में मशहूर चित्रकार अमृता शेरगिल के जीवन से प्रेरित अपनी नई फिल्म ‘अमरी’ का ऐलान किया। इसके बाद से इंडस्ट्री में एक बार फिर अमृता प्रीतम की भी बायोपिक को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। खबरें सामने आते ही बॉलीवुड में उस दूसरी ‘अमृता’ यानि अमृता प्रीतम की अधूरी कहानी फिर याद की जाने लगी, जिस पर सालों से फिल्म बनाने की कोशिशें होती रही हैं। भंसाली का ड्रीम प्रोजेक्ट बनकर रह गई ‘गुस्ताखियां’ अमृता प्रीतम की जिंदगी को बड़े परदे पर उतारने की सबसे बड़ी कोशिश संजय लीला भंसाली ने की थी। ‘गुस्ताखियां’ नाम के प्रोजेक्ट पर वह लंबे समय तक काम करते रहे हैं। शाहरुख- प्रियंका के नाम ने भी बटोरी थीं सुर्खियां भंसाली की फिल्म के लिए पहले ऐश्वर्या राय बच्चन का नाम सामने आया था। बाद में करीना कपूर खान भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ीं। हालांकि, मेल लीड और डेट्स की समस्याओं के चलते फिल्म आगे नहीं बढ़ पाई। भंसाली के अलावा डायरेक्टर जसमीत के. रीन ने भी अमृता प्रीतम और साहिर की कहानी पर काम शुरू किया था। शाहरुख खान, रेड चिलीज एंटरटेनमेंट के जरिए इसे प्रोड्यूस कर करने वाले थे और संभवतः खुद साहिर का किरदार भी प्ले करते। वहीं, अमृता प्रीतम के रोल के लिए सबसे ज्यादा चर्चा प्रियंका चोपड़ा जोनास के नाम की थी। ‘अमरी’ का रिस्पॉन्स मेकर्स को देगा एक नई हिम्मत माना जा रहा है कि अगर ‘अमरी’ दर्शकों और क्रिटिक्स के बीच चर्चा का विषय बनती है, तो फिल्ममेकर्स फिर से अमृता प्रीतम की कहानी को बड़े परदे पर लाने का रिस्क ले सकते हैं। फिलहाल, हिंदी सिनेमा की यह सबसे चर्चित अधूरी बायोपिक्स में से एक बनी हुई है, जिसका इंतजार दर्शकों को सालों से है। जानकारों के मुताबिक, अमृता प्रीतम की कहानी में प्रेम, दर्द, विद्रोह और साहित्य का ऐसा मेल है, जो बड़े परदे के लिए परफेक्ट माना जाता है। साहिर लुधियानवी के लिए उनका प्रेम, उनकी कविताएं और बाद में इमरोज के साथ उनका रिश्ता हमेशा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। यही वजह है कि हर दौर के बड़े फिल्ममेकर्स उनकी जिंदगी को बेहद सिनेमैटिक मानते रहे हैं।
7 मिनट में कैंसर पर प्रहार, लंग्स कैंसर के लिए भारत में लॉन्च हुई क्रांतिकारी दवा, अस्पताल में घंटों रुकने का झंझट खत्म

Last Updated:May 15, 2026, 17:01 IST Lung Cancer Revolutionary Drug: लंग्स कैंसर के लिए भारत में क्रांतिकारी दवा को लॉन्च किया गया है. रॉश फार्मा कंपनी ने ऐसी दवा ईजाद की है जो 7 मिनट के अंदर इंजेक्शन के रूप में शरीर में पहुंचा दी जाती है और इतने समय में इसका असर शुरू होने लगता है. कंपनी का दावा है कि यह दवा शरीर के अंदर जाने में 80 प्रतिशत समय को घटा देगी. इससे लंग्स कैंसर के इलाज में क्रांतिकारी परिवर्तन आने की संभावना है. लंग्स कैंसर की नई दवा लॉन्च. Lung Cancer Revolutionary Drug: कैंसर के इलाज की दुनिया में आज एक नया इतिहास रचा गया है. भारत में लंग्स कैंसर के इलाज के लिए रॉश फार्मा ने एक क्रांतिकारी दवा को लॉन्च किया है. देश ही नहीं दुनिया की यह पहली इम्यूनोथेरेपी है जिसे इंजेक्शन के माध्यम से 7 मिनट के अंदर शरीर में पहुंचा दिया जाता है. इसलिए इसे 7-मिनट वाली इंजेक्टेबल इम्यूनोथेरेपी कहा जा रहा है. यह दुनिया की पहली ऐसी थेरेपी है जिसे नसों के बजाय स्किन के नीचे इंजेक्शन के जरिए दिया जा सकता है. अब तक कैंसर के मरीजों को घंटों तक अस्पताल के बिस्तर पर लेटकर नसों के जरिए कीमोथेरेपी या इम्यूनोथेरेपी लेनी पड़ती थी. इसमें 5 से 6 घंटे का समय बर्बाद होता था. लेकिन Tecentriq SC (Atezolizumab) नाम की इस नई दवा ने इस पूरी प्रक्रिया को ही बदल दिया है. स्विट्जरलैंड की दिग्गज कंपनी रोश फार्मा द्वारा पेश की गई यह तकनीक न केवल मरीजों का समय बचाएगी बल्कि उनके दर्द और मानसिक तनाव को भी कम करेगी.यह दवा अब पूरे देश में उपलब्ध है. इलाज में 80 प्रतिशत समय की बचतकिसी भी कैंसर के इलाज में जब कीमोथेरेपी दी जाती है तो इसमें घंटों समय लगता है. साथ ही अस्पताल में एक दिन बिताना पड़ता है. लेकिन रॉश फार्मा वाली इस थेरेपी को इंजेक्शन की तरह दिया जाता है और इसमें 80 प्रतिशत कम समय लगता है. इससे अस्पताल में अब बहुत कम समय बिताना पड़ेगा. अस्पताल में पहले जितनी देर में 1 मरीज को थेरेपी दी जाती थी इस नई दवा के आने से अब उतने समय में 5 मरीजों को इलाज किया जा सकेगा. अब तक इस दवा को 85 देशों में लॉन्च किया जा चुका है और 10 हजार से ज्यादा मरीज इससे लाभान्वित हो चुके हैं. लंग्स कैंसर के इस नई दवा से मरीजों का खर्च भी कम हो जाएगा और इससे देश पर आर्थिक बोझ में भी कमी आएगी. जिन मरीजों में मेटास्टेटिक लंग्स कैंसर था यानी कैंसर कोशिकाएं शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुकी थी, उन मरीजों पर भी इसका सफल प्रयोग किया गया है. अस्पताल और मरीज दोनों को फायदारॉश फार्मा ने अपने अध्ययन के आधार पर बताया है कि चूंकि यह दवा सीधे स्किन में इंजेक्ट की जाती है इसलिए दर्द भरे कीमोथेरेपी की तुलना में मरीज इसे ज्यादा पसंद करते हैं. यूरोपियन लीग कांग्रेस के मुताबिक 2024 में 5 में से 4 मरीजों ने इस इंजेक्शन को पसंद किया. इससे मरीजों को मानसिक संतुष्टि मिलती है और उसे आराम भी मिलता है. अस्पताल में ज्यादा देर नहीं बिताना पड़ता है. इस दवा के साइड इफेक्ट्स भी कम है. जहां कीमोथेरेपी या अन्य इलाज में मरीज में दर्द ज्यादा होता और इससे एंग्जाइटी और जलन होती है, उसके मुकाबले टिसेंट्रिक एससी Tecentriq SC दवा में कम साइड इफेक्ट्स देखे गए. मेदांता अस्पात में ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. सज्जन राजपुरोहित ने कहा कि इम्यूनोथेरेपी से कैंसर के मरीजों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि जो ट्रेडिशनल आईवी एडमिनिस्ट्रेशन दवा है उसमें लंबा समय लगता है और यह ज्यादा कष्टदायक होता था. इससे बड़े सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों जहां कैंसर का जटिल इलाज होता है, पर ज्यादा दबाव पड़ता था. वहीं बार-बार अस्पताल जाना और इलाज में लंबा समय लगने से मरीज में भावनात्मक एवं शारीरिक दबाव बढ़ जाता है. वहीं सबक्यूटेनियस एडमिनिस्ट्रेशन से मरीजों का इलाज बहुत जल्दी और आसानी से किया जा सकता है. इससे इलाज का उनका समग्र अनुभव बेहतर होता है. इसमें ज्यादा वेटिंग नहीं करनी पड़ती. कैंसर केयर डिलीवरी में क्रांतिकारी सुधाररॉश फार्मा इंडिया के एमडी एवं सीईओ राजविंदर मेहदवान ने बताया कि हमारी कंपनी इस तरह के उच्च गुणवत्ता वाली दवाइयों पर रिसर्च करने और उसे विकसित करने के संकल्प के साथ काम कर रही है. हम न सिर्फ क्लिनिकल परिणामों को बेहतर बनाते हैं बल्कि इलाज में आने वाली चुनौतियों को भी दूर करते हैं. इसी कड़ी में टिसेंट्रिक एससी की लॉन्चिंग एडवांस्ड कैंसर केयर तक पहुंच को बेहतर बनाने के प्रति हमारी निरंतर प्रतिबद्धता को दिखाती है. यह दवा मरीजों और डॉक्टरों के लिए ऐसा सॉल्यूशन है जो बेहद तेजी से काम करती है और जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों को सुलझाती है. यह इलाज को अधिक कुशल बनाने में कारगर साबित हुई है. रॉश फार्मा इंडिया के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. सिवाबालन सिवानेसन ने कहा, कैंसर का इलाज अब सिर्फ मरीज को जीवित रखने तक केंद्रित नहीं रहा बल्कि अब ऐसे तरीकों पर जोर दिया जा रहा है जो मरीज के अनुभव, सुविधा और जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर कर सके. टिसेंट्रिक एससी के साथ हम एक ऐसा इनोवेशन ला रहे हैं जो इलाज के समय को काफी हद तक कम कर देता है. साथ ही इससे टिसेंट्रिक का पहले से प्रमाणित प्रभाव एवं सेफ्टी प्रोफाइल भी बना रहता है. हमारा मानना है कि इस तरह की तरक्की भारत में ज्यादा पेशेंट-सेंट्रिक एवं फ्यूचर-रेडी कैंसर केयर डिलीवरी में अहम भूमिका निभा सकती है. मणिपाल हॉस्पिटल बेंगलुरु में मेडिकल ऑन्कोलॉजी के कंसल्टेंट एवं एचओडी डॉ. अमित रौथन ने बताया कि भारत में कैंसर के बढ़ते दबाव को देखते हुए जरूरी है कि हम मरीजों को इलाज देने के तरीके के बारे में फिर से सोचें. सबक्यूटेनियस इम्यूनोथेरेपी जैसे इनोवेशन से इलाज का तरीका बदल जाएगा. इसके लिए अब सिर्फ बड़े शहरों के अस्पतालों की ओर नहीं देखना होगा बल्कि छोटे शहरों के अस्पतालों में भी इसे आसानी से दिया जा सकेगा. इससे कैंसर मरीज और हेल्थकेयर सिस्टम दोनों पर दबाव कम होगा. यह दवा कैसे काम करती हैयह इंजेक्शन पेट या जांघ की त्वचा के नीचे दिया जाता
वर्कआउट के दौरान कार्डियक अरेस्ट आने पर तुरंत क्या करें? ये वीडियो नहीं देखा तो बड़ी गलती हो सकती है – News18 हिंदी

Heart Attack in Gym: आजकल जिम में वर्कआउट करते समय अचानक हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं, और ये सिर्फ आम लोगों तक सीमित नहीं हैं. दिल्ली के 40 साल के मोहित, फरीदाबाद के 35 साल के पंकज और गाजियाबाद के 26 साल के कपिल तीनों ही जिम में एक्सरसाइज के दौरान अचानक गिर पड़े और उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में भी इसी तरह का एक मामला सामने आया, जहां कंवलजीत सिंह बग्गा की जिम में वर्कआउट करते समय हार्ट अटैक से मौत हो गई. ये घटनाएं सिर्फ आम लोगों तक ही नहीं रहीं. टीवी एक्टर सिद्धांत वीर सूर्यवंशी की भी जिम में एक्सरसाइज के दौरान तबीयत बिगड़ी थी और बाद में उनकी मौत हो गई. वहीं कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को भी वर्कआउट के दौरान सीने में दर्द हुआ और इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी. अब सवाल ये उठता है कि आखिर जिम में एक्सरसाइज करते समय ऐसा क्यों हो रहा है? क्या इसके पीछे ज्यादा वर्कआउट, गलत डाइट या फिर स्टेरॉयड का इस्तेमाल वजह है? और सबसे जरूरी बात हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में फर्क क्या होता है, और अगर किसी के साथ ऐसा हो जाए तो उसकी जान कैसे बचाई जा सकती है? इन सभी सवालों के जवाब देंगे फिटनेस एक्सपर्ट सुमित दुबे और कार्डियोलॉजी के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. ऋषि वी. लोहीया, किम्स- किंग्सवे हॉस्पिटल्स से. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
CJI बोले- बेरोजगार युवा कॉकरोच जैसे:ये मीडिया, सोशल मीडिया और RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करते हैं

सीजेआई सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान देश के बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच कहा। उन्होंने कहा- कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच जैसे होते हैं, जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं। CJI और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने शुक्रवार को एक वकील की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उसने सीनियर एडवोकेट का दर्जा पाने मांग की थी। बेंच ने वकील को फटकार लगाते हुए कहा- समाज में पहले से ही पैरासाइट (परजीवी) हैं जो सिस्टम पर हमला करते हैं। बेंच ने कहा कि दुनिया में हर कोई सीनियर बनने के योग्य हो सकता है, लेकिन आप इसके हकदार नहीं हैं। अगर आपको दिल्ली HC ने सीनियर एडवोकेट बना भी दिया, तो सुप्रीम कोर्ट आपके व्यवहार को देखते हुए उसे फैसलो को रद्द कर देगा। बेंच का सवाल- आपके पास कोई और केस नहीं कोर्ट ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता के पास कोई और मुकदमा नहीं है और क्या यह किसी सीनियर एडवोकेट बनने की चाह रखने वाले का सही व्यवहार है। सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया जाता है, इसे खुद से हासिल करने की कोशिश नहीं की जाती। बेंच ने सवाल किया कि आप इसे हासिल करने के पीछे पड़े हैं, क्या यह सही लगता है। सुप्रीम कोर्ट CBI से कई वकीलों की डिग्री की जांच कराने पर विचार कर सकता है, क्योंकि उनकी डिग्री की सत्यता पर गंभीर सवाल हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस पर कुछ नहीं करेगा, क्योंकि उन्हें वोट चाहिए। सुनवाई के अंत में याचिकाकर्ता ने कोर्ट से माफी मांगी और अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी। ……………. सीजेआई सूर्यकांत से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई सूर्यकांत बोले: फटेहाल आदमी के झोले में संविधान, यह न्याय की सबसे बड़ी ताकत सीजेआई सूर्यकांत अप्रैल के आखिरी हफ्ते में राजस्थान के जयपुर पहुंचे थे। उन्होंने यहां एक कॉन्फ्रेंस में कहा था कि पूर्व जज देश की अमूल्य धरोहर हैं। उनके अनुभव, ज्ञान और न्यायिक विवेक का राष्ट्र निर्माण, एडीआर, लोक अदालतों और कानूनी जागरूकता अभियानों में सक्रिय उपयोग होना चाहिए। पूरी खबर पढ़ें… CJI बोले मुझे डांटकर चैम्बर से बाहर निकाल दिया था: फिर उन्हीं जज की सलाह पर छोड़ा न्यायिक सेवा इंटरव्यू सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार को अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा एक किस्सा सुनाया। केस की सुनवाई के दौरान CJI ने बताया कैसे एक जज ने उन्हें डांट लगाते हुए चैंबर से बाहर निकल जाने को कहा था। ये किस्सा जस्टिस सूर्यकांत ने ज्यूडिशियल सर्विस की एप्लीकेंट की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया। पूरी खबर पढ़ें…
समुद्र की लहरों पर क्रूज कंपनियां बेच रहीं सेहत:योग, ध्यान और लॉन्जेविटी को अब नया बिजनेस मॉडल बना रहीं लग्जरी क्रूज इंडस्ट्री

समुद्री यात्राएं अब बदल रही हैं। कभी जुआघर, आलीशान खान-पान और नाच-गाने के लिए मशहूर यह सेक्टर ‘वेलनेस टूरिज्म’ की ओर मुड़ चुका है। 2026 के रुझान बताते हैं कि अब यात्रियों को सिर्फ छुट्टियां नहीं, बल्कि मानसिक शांति और शरीर को ऊर्जावान बनाने का अनुभव बेचा जा रहा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है ओरिएंट एक्सप्रेस और सौंदर्य जगत के बड़े नाम गुर्लेन की ‘ओशन रीबर्थ’ स्कीम। अक्टूबर 2026 में पुर्तगाल से बारबाडोस तक चलने वाली यह 14 दिनों की समुद्री यात्रा दुनिया के सबसे बड़े पाल वाले जहाज ओरिएंट एक्सप्रेस कोरिंथियन पर शुरू होगी। इस विशेष अनुभव के लिए शुरुआती किराया 67 लाख रुपए तय किया गया है। कंपनी के अनुसार, यह केवल एक आलीशान जहाज की यात्रा नहीं है, बल्कि ‘पूर्ण स्वास्थ्य यात्रा’ है। इसमें हर यात्री की सेहत की जांच कर उनके लिए खान-पान, शारीरिक गतिविधियों और उपचार की व्यक्तिगत स्कीम तैयार की जाएगी। गुर्लेन ने आधिकारिक बयान में कहा, ‘इस यात्रा का उद्देश्य यात्रियों को स्वास्थ्य का गहरा अनुभव देना है। बीमारियों से बचाव और मानसिक मजबूती को यात्रा का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है।’ जहाज पर ध्यान, योगासन और सांस संबंधी वर्कशॉप के साथ-साथ उच्च तकनीक वाले उपचार भी मिलेंगे। गुर्लेन का दावा है कि उनका विशेष उपकरण पहली बार 7 उन्नत सौंदर्य तकनीकों को एक साथ पेश करता है, जो त्वचा और स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। इस यात्रा में मार्गदर्शन के लिए कई विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। इनमें प्रख्यात सौंदर्य विशेषज्ञ अमेली डेमांजे, श्वसन क्रिया विशेषज्ञ आर्थर गुएरिन और आहार एवं पोषण विशेषज्ञ डेबोरा पासुती होंगे। 5,380 वर्ग फुट का गुर्लेन केंद्र इस यात्रा का मुख्य आकर्षण है, जहां भाप स्नान, विश्राम कक्ष और खुले आसमान के नीचे तैरने के लिए खास पूल जैसी सुविधाएं हैं। संपन्न यात्री अब दिखावे वाली सुविधाओं के बजाय ‘परिवर्तनकारी अनुभव’ चाहते हैं, जहां लग्जरी के साथ बेहतर स्वास्थ्य का मेल हो। सालाना 14% की रफ्तार से बढ़ रहा लग्जरी क्रूज बाजार, 2035 में 273 अरब डॉलर का होगा यह बदलाव सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है। वर्जिन वॉयेज और एक्सप्लोरा जर्नीज जैसी बड़ी कंपनियां भी अब मानसिक शांति और ध्वनि उपचार जैसे कार्यक्रमों पर जोर दे रही हैं। बिजनेस रिसर्च इनसाइट की रिपोर्ट के अनुसार यह लग्जरी क्रूज बाजार 13.9% की सालाना रफ्तार से बढ़ रहा है। 2026 में 9.9 अरब डॉलर (करीब 94.7 हजार करोड़ रुपए) और 2035 तक 31 अरब डॉलर के पार जा सकता है। स्वास्थ्य पर्यटन बाजार के 2026 तक 273 अरब डॉलर (करीब 26 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंचने का अनुमान है।
ऊषा उत्थुप ने वायरल पोस्ट पर सफाई दी:सिंगर ने ‘दीदी’ गाने को ममता बनर्जी की चुनावी हार से जोड़ने के दावों को गलत बताया

वेटरन सिंगर ऊषा उत्थुप ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पोस्ट पर रिएक्ट किया, जिसमें उनके एक गाने को ममता बनर्जी की हालिया चुनावी हार से जोड़ा गया। सिंगर ने इन दावों को गलत बताया। दरअसल, यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब X पर एक यूजर ने उत्थुप का बंगाली गाना ‘दीदी’ गाते हुए वीडियो शेयर किया। पोस्ट में दावा किया गया कि सिंगर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार का जश्न मना रही हैं। पोस्ट में यह भी कहा गया कि TMC शासन के दौरान उनके कार्यक्रमों के लिए कट मनी मांगी जाती थी, जिसके कारण वह कोलकाता छोड़कर मुंबई चली गई थीं। यूजर ने लिखा कि अब वह वापस लौट आई हैं। सिंगर ने दावों को बताया गलत इन दावों पर रिएक्ट करते हुए ऊषा उत्थुप ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर मेरे बारे में एक पोस्ट वायरल हो रही है। मैं साफ करना चाहती हूं कि उस पोस्ट में कही गई कई बातें गलत और भ्रामक हैं। जिस गाने की बात हो रही है, वह एक बंगाली गाना है। इसे कई साल पहले बनाया गया था और यह एक अरबी धुन से प्रेरित है। मैं पिछले 20 सालों से इसे सिर्फ एक संगीत प्रस्तुति के तौर पर गाती आ रही हूं।’ सिंगर ने आगे लिखा, ‘मैं यह भी साफ करना चाहती हूं कि मैं 1976 से कोलकाता में रह रही हूं। मैंने कभी कोलकाता छोड़कर मुंबई शिफ्ट नहीं किया। कोलकाता हमेशा मेरा घर रहा है और मैं आज भी यहां के लोगों और इस शहर से बहुत प्यार करती हूं।’ पोस्ट के अंत में ऊषा उत्थुप ने लिखा, ‘उस पोस्ट में जो बातें, टिप्पणियां और कहानियां फैलाई जा रही हैं, उनका मुझसे कोई लेना-देना नहीं है। मैं उनसे खुद को नहीं जोड़ती और उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेती। कृपया मुझे बेवजह ऐसे विवादों में न घसीटें, जिनसे मेरा कोई संबंध नहीं है। ढेर सारा प्यार, दीदी (ऊषा उत्थुप)।’ बंगाल चुनाव में TMC की हार हुई गौरतलब है कि हाल ही में भारतीय जनता पार्टी ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल की। पार्टी ने 294 सदस्यों वाली विधानसभा में 207 सीटें जीतीं, जबकि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस 15 साल बाद सत्ता से बाहर हो गई। पार्टी की सीटों की संख्या 215 से घटकर 80 हो गई और ममता बनर्जी भी अपनी भवानीपुर सीट हार गईं। बीजेपी के नेता शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें 15,000 से अधिक वोटों के अंतर से हराया। शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई 2026 को राज्य के पहले भाजपा (BJP) मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
आपकी हर हरकत पर नजर, कनेक्टिविटी निजता के लिए खतरा:स्मार्टफोन, टीवी, ओटीटी यहां तक कि कनेक्टेड कार भी चुरा सकती है आपका डेटा

हमारी जिंदगी पहले से ज्यादा स्मार्ट और ‘कनेक्टेड’ हो गई है। मनोरंजन, सुविधा और सोशल मीडिया के इस दौर में यही कनेक्टिविटी अब हमारी निजता के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही है। ओटीटी प्लेटफॉर्म, स्मार्ट टीवी, स्मार्ट फोन, स्मार्ट कारें और यहां तक कि सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई सेल्फी भी अब डेटा चोरी और निगरानी का जरिया बन रही हैं। मानें या न मानें, आम इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी भी डिजिटल निगरानी के दायरे में आ चुकी है। अक्सर कंपनियां जाने-अनजाने में सहमति ले लेती हैं क्योंकि अधिकांश यूजर गोपनीयता नीति को पढ़े बिना अपनी रजामंदीं दे देते हैं। डिजिटल निगरानी – रोजमर्रा की जिंदगी पर है उपकरण या सुविधा बेचने वाली कंपनियों की नजर स्मार्टफोन- कई एप बैकग्राउंड में आपकी बातें सुनकर आपको आपकी पसंद के विज्ञापन दिखाते हैं। जीपीएस और सेंसर की मदद से आपकी हर मूवमेंट को ट्रैक किया जाता है। स्मार्ट टीवी- कई स्मार्ट टीवी ऑटोमैटिक कंटेंट रिकॉग्निशन के जरिये ट्रैक करते हैं कि आप क्या देख रहे हैं। टीवी में लगे माइक्रोफोन आपकी निजी बातचीत रिकॉर्ड कर सकते हैं। स्मार्ट स्पीकर- एलेक्सा और गूगल होम जैसे डिवाइस ‘वेक वर्ड’ (उन्हें एक्टिव करने वाले आदेश) के इंतजार में हर समय बातें सुनते हैं। ये बातें रिकॉर्ड करके कंपनियों को भेज सकते हैं। वाई-फाई राउटर- साइंस डायरेक्ट मैगजीन में छपे नवीनतम शोध के अनुसार, वाई-फाई राउटर बीम-फॉर्मिंग फीडबैक (बीएफआई) के जरिए कमरे में मौजूद लोगों की गतिविधियों को 99% सटीकता से पहचान सकते हैं। कनेक्टेड कारें- कार की सीटों, डैशबोर्ड, इंजन, स्टीयरिंग व्हील जैसी लगभग हर जगह लगे सेंसर आपका डेटा रिकॉर्ड करते हैं। मोजिला फाउंडेशन की प्राइवेसी नाइटमेयर ऑन व्हील्स रिपोर्ट के मुताबिक कई कारें संवेदनशील डेटा एकत्र कर रही हैं। 25 कारों के सर्वे में 19 ने कहा कि वे ये डेटा बेच सकती हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ मुकदमा अमेरिका में टेक्सास के अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन ने नेटफ्लिक्स पर मुकदमा किया है। आरोप है कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने यूजर्स यहां तक कि बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखी और बिना स्पष्ट सहमति के उनकी जानकारी इकट्ठा की। सुरक्षा के लिए ये उपाय अपनाएं – किसी भी एप को केवल जरूरी परमिशन ही दें। अलाऊ ऑल जैसी अनुमतियां न दें। – माइक्रोफोन, कैमरा और लोकेशन हमेशा व्हाइल यूजिंग मोड पर एक्टिव करें। – एप परमिशन की नियमित रूप से समीक्षा करें। हमेशा मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें और समय-समय पर बदलते रहें। – जहां संभव हो, ‘पासकी’ और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का ही इस्तेमाल करें। – कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम में अनावश्यक एप और हर समय अकाउंट लॉगिन न रखें। -नियमित रूप से सॉफ्टवेयर अपडेट करें। ब्लूटूथ, वाई-फाई ऑटो-कनेक्ट बंद रखें।
आपकी हर हरकत पर नजर, कनेक्टिविटी निजता के लिए खतरा:स्मार्टफोन, टीवी, ओटीटी यहां तक कि कनेक्टेड कार भी चुरा सकती है आपका डेटा

हमारी जिंदगी पहले से ज्यादा स्मार्ट और ‘कनेक्टेड’ हो गई है। मनोरंजन, सुविधा और सोशल मीडिया के इस दौर में यही कनेक्टिविटी अब हमारी निजता के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही है। ओटीटी प्लेटफॉर्म, स्मार्ट टीवी, स्मार्ट फोन, स्मार्ट कारें और यहां तक कि सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई सेल्फी भी अब डेटा चोरी और निगरानी का जरिया बन रही हैं। मानें या न मानें, आम इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी भी डिजिटल निगरानी के दायरे में आ चुकी है। अक्सर कंपनियां जाने-अनजाने में सहमति ले लेती हैं क्योंकि अधिकांश यूजर गोपनीयता नीति को पढ़े बिना अपनी रजामंदीं दे देते हैं। डिजिटल निगरानी – रोजमर्रा की जिंदगी पर है उपकरण या सुविधा बेचने वाली कंपनियों की नजर स्मार्टफोन- कई एप बैकग्राउंड में आपकी बातें सुनकर आपको आपकी पसंद के विज्ञापन दिखाते हैं। जीपीएस और सेंसर की मदद से आपकी हर मूवमेंट को ट्रैक किया जाता है। स्मार्ट टीवी- कई स्मार्ट टीवी ऑटोमैटिक कंटेंट रिकॉग्निशन के जरिये ट्रैक करते हैं कि आप क्या देख रहे हैं। टीवी में लगे माइक्रोफोन आपकी निजी बातचीत रिकॉर्ड कर सकते हैं। स्मार्ट स्पीकर- एलेक्सा और गूगल होम जैसे डिवाइस ‘वेक वर्ड’ (उन्हें एक्टिव करने वाले आदेश) के इंतजार में हर समय बातें सुनते हैं। ये बातें रिकॉर्ड करके कंपनियों को भेज सकते हैं। वाई-फाई राउटर- साइंस डायरेक्ट मैगजीन में छपे नवीनतम शोध के अनुसार, वाई-फाई राउटर बीम-फॉर्मिंग फीडबैक (बीएफआई) के जरिए कमरे में मौजूद लोगों की गतिविधियों को 99% सटीकता से पहचान सकते हैं। कनेक्टेड कारें- कार की सीटों, डैशबोर्ड, इंजन, स्टीयरिंग व्हील जैसी लगभग हर जगह लगे सेंसर आपका डेटा रिकॉर्ड करते हैं। मोजिला फाउंडेशन की प्राइवेसी नाइटमेयर ऑन व्हील्स रिपोर्ट के मुताबिक कई कारें संवेदनशील डेटा एकत्र कर रही हैं। 25 कारों के सर्वे में 19 ने कहा कि वे ये डेटा बेच सकती हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ मुकदमा अमेरिका में टेक्सास के अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन ने नेटफ्लिक्स पर मुकदमा किया है। आरोप है कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने यूजर्स यहां तक कि बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखी और बिना स्पष्ट सहमति के उनकी जानकारी इकट्ठा की। सुरक्षा के लिए ये उपाय अपनाएं – किसी भी एप को केवल जरूरी परमिशन ही दें। अलाऊ ऑल जैसी अनुमतियां न दें। – माइक्रोफोन, कैमरा और लोकेशन हमेशा व्हाइल यूजिंग मोड पर एक्टिव करें। – एप परमिशन की नियमित रूप से समीक्षा करें। हमेशा मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें और समय-समय पर बदलते रहें। – जहां संभव हो, ‘पासकी’ और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का ही इस्तेमाल करें। – कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम में अनावश्यक एप और हर समय अकाउंट लॉगिन न रखें। -नियमित रूप से सॉफ्टवेयर अपडेट करें। ब्लूटूथ, वाई-फाई ऑटो-कनेक्ट बंद रखें।
रजनीकांत की फिल्म 'जेलर 2' के सेट पर हादसा:चेन्नई की फिल्म सिटी में करंट लगने से 28 साल के कर्मचारी की मौत

सुपरस्टार रजनीकांत की आने वाली तमिल फिल्म ‘जेलर 2’ के सेट पर करंट लगने से एक कर्मचारी की मौत हो गई है। यह हादसा चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड (ECR) पर पनैयूर स्थित आदित्यराम फिल्म सिटी के एक सेट पर हुआ। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक की पहचान 28 साल के कार्तिकेयन के तौर पर हुई है। यह हादसा पनैयूर में शूटिंग की जगह पर हुआ। मिली जानकारी के मुताबिक, कार्तिकेयन फिल्म की शूटिंग के लिए घर जैसा सेट तैयार करने का काम कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें जोरदार करंट लगा, जिससे उनकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, कार्तिकेयन आर्ट डायरेक्शन से जुड़े काम में लगे हुए थे। कनाथुर पुलिस ने बताया कि मामले में अभी FIR दर्ज नहीं हुई है। पुलिस फिलहाल उस परिस्थिति की जांच कर रही है, जिसकी वजह से बिजली का लीकेज हुआ। जेलर 2 की शूटिंग पूरी हो चुकी यह घटना उस घोषणा के कुछ दिनों बाद हुई है, जब फिल्म की प्रोडक्शन कंपनी सन पिक्चर्स ने बताया था कि जेलर 2 की शूटिंग पूरी हो चुकी है। 21 अप्रैल को मेकर्स ने सोशल मीडिया पर रैप-अप पार्टी की तस्वीरें शेयर की थीं, जिनमें रजनीकांत और डायरेक्टर नेल्सन कलाकारों और क्रू के साथ केक काटते नजर आए थे। फिल्म की रिलीज डेट बदल सकती है रजनीकांत ने पहले मीडिया को बताया था कि फिल्म 12 जून को रिलीज हो सकती है। वहीं, हाल ही में पिंकविला की रिपोर्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि फिल्म की रिलीज डेट में बदलाव हो सकता है। अब फिल्म को 4 सितंबर 2026 को रिलीज किए जाने की संभावना जताई जा रही है। यह तारीख कृष्ण जयंती के मौके पर पड़ रही है। फिल्म 2023 की ब्लॉकबस्टर जेलर का सीक्वल है। इसमें राम्या कृष्णन, योगी बाबू और मिर्ना अपने पुराने किरदारों में लौटेंगे। पहली फिल्म में मोहनलाल, शिवराजकुमार और जैकी श्रॉफ ने कैमियो किया था। विनायकन, वसंत रवि, तमन्ना भाटिया और सुनील भी अहम रोल में दिखे थे। सैकनिल्क के मुताबिक, लगभग ₹200 करोड़ के बजट में बनी जेलर ने दुनिया भर में ₹604.5 करोड़ की कमाई की थी। साउथ फिल्मों के सेट पर पहले भी हादसे हुए गौरतलब है कि इससे पहले भी साउथ फिल्मों के सेट पर हादसे हुए हैं। फिल्म ‘सरदार 2’ के सेट पर 54 वर्षीय स्टंटमैन एस. एलुमलाई की मौत स्टंट रिहर्सल के दौरान 20 फीट ऊंचाई से गिरने के कारण हुई थी। वहीं, कमल हासन की फिल्म ‘इंडियन 2’ के सेट पर 19 फरवरी 2020 को बड़ा हादसा हुआ था। यह हादसा चेन्नई के EVP फिल्म सिटी में रात के शूट के दौरान हुआ। शूटिंग के समय एक बड़ी क्रेन पर भारी लाइटिंग सेट लगाया गया था। अचानक क्रेन गिर गई और वहां मौजूद कई लोग उसकी चपेट में आ गए। इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में असिस्टेंट डायरेक्टर कृष्णा, आर्ट असिस्टेंट चंद्रन और प्रोडक्शन असिस्टेंट मधु शामिल थे। कई अन्य लोग घायल भी हुए थे। हादसे के बाद पुलिस ने लापरवाही का केस दर्ज किया था।






