रजनीकांत की फिल्म 'जेलर 2' के सेट पर हादसा:चेन्नई की फिल्म सिटी में करंट लगने से 28 साल के कर्मचारी की मौत

सुपरस्टार रजनीकांत की आने वाली तमिल फिल्म ‘जेलर 2’ के सेट पर करंट लगने से एक कर्मचारी की मौत हो गई है। यह हादसा चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड (ECR) पर पनैयूर स्थित आदित्यराम फिल्म सिटी के एक सेट पर हुआ। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक की पहचान 28 साल के कार्तिकेयन के तौर पर हुई है। यह हादसा पनैयूर में शूटिंग की जगह पर हुआ। मिली जानकारी के मुताबिक, कार्तिकेयन फिल्म की शूटिंग के लिए घर जैसा सेट तैयार करने का काम कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें जोरदार करंट लगा, जिससे उनकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, कार्तिकेयन आर्ट डायरेक्शन से जुड़े काम में लगे हुए थे। कनाथुर पुलिस ने बताया कि मामले में अभी FIR दर्ज नहीं हुई है। पुलिस फिलहाल उस परिस्थिति की जांच कर रही है, जिसकी वजह से बिजली का लीकेज हुआ। जेलर 2 की शूटिंग पूरी हो चुकी यह घटना उस घोषणा के कुछ दिनों बाद हुई है, जब फिल्म की प्रोडक्शन कंपनी सन पिक्चर्स ने बताया था कि जेलर 2 की शूटिंग पूरी हो चुकी है। 21 अप्रैल को मेकर्स ने सोशल मीडिया पर रैप-अप पार्टी की तस्वीरें शेयर की थीं, जिनमें रजनीकांत और डायरेक्टर नेल्सन कलाकारों और क्रू के साथ केक काटते नजर आए थे। फिल्म की रिलीज डेट बदल सकती है रजनीकांत ने पहले मीडिया को बताया था कि फिल्म 12 जून को रिलीज हो सकती है। वहीं, हाल ही में पिंकविला की रिपोर्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि फिल्म की रिलीज डेट में बदलाव हो सकता है। अब फिल्म को 4 सितंबर 2026 को रिलीज किए जाने की संभावना जताई जा रही है। यह तारीख कृष्ण जयंती के मौके पर पड़ रही है। फिल्म 2023 की ब्लॉकबस्टर जेलर का सीक्वल है। इसमें राम्या कृष्णन, योगी बाबू और मिर्ना अपने पुराने किरदारों में लौटेंगे। पहली फिल्म में मोहनलाल, शिवराजकुमार और जैकी श्रॉफ ने कैमियो किया था। विनायकन, वसंत रवि, तमन्ना भाटिया और सुनील भी अहम रोल में दिखे थे। सैकनिल्क के मुताबिक, लगभग ₹200 करोड़ के बजट में बनी जेलर ने दुनिया भर में ₹604.5 करोड़ की कमाई की थी। साउथ फिल्मों के सेट पर पहले भी हादसे हुए गौरतलब है कि इससे पहले भी साउथ फिल्मों के सेट पर हादसे हुए हैं। फिल्म ‘सरदार 2’ के सेट पर 54 वर्षीय स्टंटमैन एस. एलुमलाई की मौत स्टंट रिहर्सल के दौरान 20 फीट ऊंचाई से गिरने के कारण हुई थी। वहीं, कमल हासन की फिल्म ‘इंडियन 2’ के सेट पर 19 फरवरी 2020 को बड़ा हादसा हुआ था। यह हादसा चेन्नई के EVP फिल्म सिटी में रात के शूट के दौरान हुआ। शूटिंग के समय एक बड़ी क्रेन पर भारी लाइटिंग सेट लगाया गया था। अचानक क्रेन गिर गई और वहां मौजूद कई लोग उसकी चपेट में आ गए। इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में असिस्टेंट डायरेक्टर कृष्णा, आर्ट असिस्टेंट चंद्रन और प्रोडक्शन असिस्टेंट मधु शामिल थे। कई अन्य लोग घायल भी हुए थे। हादसे के बाद पुलिस ने लापरवाही का केस दर्ज किया था।
आपके भी हाथ पैर अक्सर पड़ जाते हैं सुन्न? ये कोई बीमारी का संकेत तो नहीं, जानिये

कभी‑कभी हम अचानक महसूस करते हैं कि हाथ या पैर सुन्न पड़ गए हैं या उनमें झनझनाहट हो रही है. इसे आम बोलचाल में “हाथ‑पैर सो जाना” कहा जाता है. यह स्थिति कभी‑कभी सामान्य होती है, लेकिन बार‑बार होने पर इसके पीछे कुछ स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हो सकते हैं. आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं. 1. नसों पर दबाव पड़नासबसे सामान्य कारण है किसी एक स्थिति में लंबे समय तक बैठना या लेटना.जैसे पैर पर पैर रखकर बैठना या हाथ के नीचे सिर रखकर सोना.इससे नसों (nerves) पर दबाव पड़ता है और उस हिस्से में खून का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे सुन्नपन महसूस होता है. 2. खून का संचार धीमा होनाजब शरीर के किसी हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन सही से नहीं होता, तब वहां झनझनाहट या सुन्नपन होने लगता है.जैसे बहुत देर तक एक ही पोजीशन में रहने से. 3. विटामिन की कमीविटामिन B12, B6 या अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी से भी नसें कमजोर हो जाती हैं.इससे हाथ‑पैरों में अक्सर झनझनाहट या सुन्नपन महसूस हो सकता है. 4. डायबिटीज का प्रभावडायबिटीज के मरीजों में नसों पर असर पड़ता है, जिसे न्यूरोपैथी कहा जाता है.इससे पैरों में सुन्नपन, जलन या चुभन हो सकती है. 5. रीढ़ (स्पाइन) से जुड़ी समस्याकमर या गर्दन की नस दबने पर हाथ या पैर सुन्न हो सकते हैं.जैसे स्लिप डिस्क या सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस. 6. तनाव और चिंताकभी‑कभी ज्यादा तनाव या घबराहट के कारण भी शरीर में अजीब‑सी झनझनाहट महसूस होती है.यह मानसिक स्थिति का असर भी हो सकता है. कब ध्यान देना जरूरी है? अगर सुन्नपन:बार‑बार हो रहा हो.लंबे समय तक बना रहे.साथ में कमजोरी या दर्द हो.तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें. बचाव के उपायलंबे समय तक एक ही पोजीशन में न रहें.नियमित व्यायाम करें.सही पोषण लें, खासकर विटामिन B युक्त आहार.पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं.बैठने और सोने की सही मुद्रा अपनाएं. निष्कर्षहाथ‑पैर सुन्न पड़ना ज्यादातर मामलों में सामान्य होता है और कुछ समय में ठीक हो जाता है. लेकिन बार‑बार ऐसा होना किसी अंदरूनी समस्या का संकेत भी हो सकता है.
पीएम मोदी UAE के दौरे पर रवाना:राष्ट्रपति अल नाहयान मुलाकात करेंगे, दोनों देशों के बीच ऊर्जा समझौते संभव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिन के विदेश दौरे पर रवाना हो गए हैं। उनके दौरे का पहला पड़ाव UAE होगा, जहां वे राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और जायद अल नाहयान भारत-UAE व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। दोनों नेता ऊर्जा सहयोग के अलावा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बातचीत करेंगे। वेस्ट एशिया में जारी तनाव भी बातचीत का अहम हिस्सा रहेगा। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच LPG व स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से जुड़े दो अहम समझौते हो सकते हैं। इस दौरे का सबसे बड़ा फोकस भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। माना जा रहा है कि LPG और LNG सप्लाई बढ़ाने को लेकर भी दोनों देशों के बीच बातचीत हो सकती है। क्रूड ऑयल का उत्पादन बढ़ाएगा UAE UAE ने हाल ही में दुनिया के बड़े तेल निर्यातक देशों के संगठन OPEC छोड़ने का ऐलान किया है। UAE ने 2027 तक अपना क्रूड ऑयल उत्पादन बढ़ाकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन करने की योजना बनाई है। ऐसे में भारतीय कंपनियों और UAE की कंपनियों के बीच लंबी अवधि के ऊर्जा समझौतों पर बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है। पूर्व भारतीय राजदूत संजय सुधीर ने ANI से बातचीत में कहा कि वेस्ट एशिया के हालात के बीच प्रधानमंत्री मोदी का UAE दौरा काफी अहम है। उन्होंने कहा कि यह भारत की तरफ से समर्थन का मजबूत संकेत भी माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा भारत और UAE के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को भी मजबूत करेगी। दोनों देशों के बीच पहले से व्यापक रणनीतिक साझेदारी है और इस दौरे का मकसद उसे और आगे बढ़ाना है। 105 मिनट के लिए भारत आए थे UAE प्रेसीडेंट UAE प्रेसीडेंट अल नाहयान 19 जनवरी को 105 मिनट के भारत दौर पर आए थे। PM मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया था। इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड और डिफेंस समेत 9 बड़े समझौते हुए। गल्फ देशों में UAE को सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट करता है भारत UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच 6 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार है। इसमें UAE ने भारत से 2 लाख करोड़ रुपए का इम्पोर्ट किया है। भारत का UAE के साथ वित्तीय घाटा है। यानी भारत UAE से आयात ज्यादा करता है और निर्यात कम। भारत ने वित्तवर्ष 2022-23 में UAE से 4 लाख करोड़ रुपए का इंपोर्ट किया है। भारत ने UAE के साथ एक ट्रेड पैक्ट पर भी साइन किया था। भारत, UAE को पेट्रोलियम प्रोडक्ट, मेटल, स्टोन, जेम्स एंड ज्वेलरी, मिनरल्स, फूड आइटम जैसे अनाज, चीनी, फल और सब्जियां, चाय, मांस और सीफूड, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग मशीनरी प्रोडक्ट और कैमिकल्स एक्सपोर्ट करता है। भारत UAE को क्या एक्सपोर्ट करता है? UAE को भारत के प्रमुख एक्सपोर्ट में पेट्रोलियम प्रोडक्ट, मेटल, स्टोन, जेम्स एंड ज्वैलरी, मिनरल्स, फूड आइटम जैसे अनाज, चीनी, फल और सब्जियां, चाय, मांस और सीफूड, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग मशीनरी प्रोडक्ट और कैमिकल्स शामिल हैं।
पीएम मोदी UAE के दौरे पर रवाना:राष्ट्रपति अल नाहयान मुलाकात करेंगे, दोनों देशों के बीच ऊर्जा समझौते संभव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिन के विदेश दौरे पर रवाना हो गए हैं। उनके दौरे का पहला पड़ाव UAE होगा, जहां वे राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और जायद अल नाहयान भारत-UAE व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। दोनों नेता ऊर्जा सहयोग के अलावा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बातचीत करेंगे। वेस्ट एशिया में जारी तनाव भी बातचीत का अहम हिस्सा रहेगा। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच LPG व स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से जुड़े दो अहम समझौते हो सकते हैं। इस दौरे का सबसे बड़ा फोकस भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। माना जा रहा है कि LPG और LNG सप्लाई बढ़ाने को लेकर भी दोनों देशों के बीच बातचीत हो सकती है। क्रूड ऑयल का उत्पादन बढ़ाएगा UAE UAE ने हाल ही में दुनिया के बड़े तेल निर्यातक देशों के संगठन OPEC छोड़ने का ऐलान किया है। UAE ने 2027 तक अपना क्रूड ऑयल उत्पादन बढ़ाकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन करने की योजना बनाई है। ऐसे में भारतीय कंपनियों और UAE की कंपनियों के बीच लंबी अवधि के ऊर्जा समझौतों पर बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है। पूर्व भारतीय राजदूत संजय सुधीर ने ANI से बातचीत में कहा कि वेस्ट एशिया के हालात के बीच प्रधानमंत्री मोदी का UAE दौरा काफी अहम है। उन्होंने कहा कि यह भारत की तरफ से समर्थन का मजबूत संकेत भी माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा भारत और UAE के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को भी मजबूत करेगी। दोनों देशों के बीच पहले से व्यापक रणनीतिक साझेदारी है और इस दौरे का मकसद उसे और आगे बढ़ाना है। 105 मिनट के लिए भारत आए थे UAE प्रेसीडेंट UAE प्रेसीडेंट अल नाहयान 19 जनवरी को 105 मिनट के भारत दौर पर आए थे। PM मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया था। इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड और डिफेंस समेत 9 बड़े समझौते हुए। गल्फ देशों में UAE को सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट करता है भारत UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच 6 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार है। इसमें UAE ने भारत से 2 लाख करोड़ रुपए का इम्पोर्ट किया है। भारत का UAE के साथ वित्तीय घाटा है। यानी भारत UAE से आयात ज्यादा करता है और निर्यात कम। भारत ने वित्तवर्ष 2022-23 में UAE से 4 लाख करोड़ रुपए का इंपोर्ट किया है। भारत ने UAE के साथ एक ट्रेड पैक्ट पर भी साइन किया था। भारत, UAE को पेट्रोलियम प्रोडक्ट, मेटल, स्टोन, जेम्स एंड ज्वेलरी, मिनरल्स, फूड आइटम जैसे अनाज, चीनी, फल और सब्जियां, चाय, मांस और सीफूड, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग मशीनरी प्रोडक्ट और कैमिकल्स एक्सपोर्ट करता है। भारत UAE को क्या एक्सपोर्ट करता है? UAE को भारत के प्रमुख एक्सपोर्ट में पेट्रोलियम प्रोडक्ट, मेटल, स्टोन, जेम्स एंड ज्वैलरी, मिनरल्स, फूड आइटम जैसे अनाज, चीनी, फल और सब्जियां, चाय, मांस और सीफूड, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग मशीनरी प्रोडक्ट और कैमिकल्स शामिल हैं।
डॉलर के मुकाबले रुपया ऑल टाइम लो पर आया:1 डॉलर की कीमत 95.94 रुपए हुई, इससे महंगाई बढ़ने का खतरा

रुपया आज 15 मई को डॉलर के मुकाबले 30 पैसे गिरकर 95.94 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। इससे पहले गुरुवार को रुपया 95.64 के ऑल टाइम लो पर पहुंचा था। पिछले कुछ दिनों से रुपए में लगातार गिरावट जारी है। साल 2026 की शुरुआत से ही रुपया दबाव में है। पिछले साल दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर के पार गया था। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं और जियोपॉलिटिकल तनाव कम नहीं हुआ, तो रुपया जल्द ही 100 के स्तर को भी छू सकता है। रुपए में गिरावट के प्रमुख कारण मिडिल ईस्ट तनाव: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज रूट में सप्लाई बाधित होने की आशंका ने बाजार में डर पैदा कर दिया है। युद्ध के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए डॉलर की ओर भाग रहे हैं। कच्चे तेल के दाम: भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। तेल महंगा होने से भारत को अधिक डॉलर चुकाने पड़ रहे हैं, जिससे रुपए पर दबाव बढ़ गया है। मजबूत होता डॉलर इंडेक्स: दुनिया की 6 प्रमुख करेंसी के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 99.05 के स्तर पर पहुंच गया है। जब डॉलर ग्लोबल मार्केट में मजबूत होता है, तो रुपया और अन्य एशियाई करेंसी कमजोर हो जाती हैं। विदेशी निवेशकों की निकासी: विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। अकेले बुधवार को FII ने 4,700 करोड़ रुपए से ज्यादा के शेयर बेचे। बाजार से डॉलर बाहर जाने के कारण रुपए की वैल्यू घट रही है। बढ़ती महंगाई का डर: भारत में थोक महंगाई दर (WPI) साढ़े तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। एनर्जी की बढ़ती कीमतों से ‘इंपोर्टेड इन्फ्लेशन’ का खतरा बढ़ गया है, जिससे इकोनॉमी के सेंटीमेंट बिगड़े हैं। डॉलर महंगा, भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा मिडिल ईस्ट संघर्ष को दशकों का सबसे गंभीर एनर्जी संकट माना जा रहा है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। तेल की कीमतें: कच्चे तेल महंगे होने से भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ा है। जरूरी सामान महंगा: LPG, प्लास्टिक और अन्य पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की सप्लाई प्रभावित। महंगाई का डर: डॉलर महंगा होने से पेट्रोल-डीजल और इम्पोर्टेड सामान महंगे होंगे, जिससे रिटेल महंगाई बढ़ सकती है। विदेश में पढ़ाई-घूमना महंगा: विदेश जाने या पढ़ाई के लिए डॉलर खरीदने पर अब ज्यादा रुपए खर्च करने होंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स महंगे: मोबाइल, लैपटॉप और आयातित पार्ट्स महंगे हो सकते हैं, क्योंकि भुगतान डॉलर में होता है। तेल उत्पादन पिछले दो दशकों में सबसे निचले स्तर पर रॉयटर्स के सर्वे के मुताबिक, अप्रैल में ओपेक (OPEC) देशों का तेल उत्पादन पिछले दो दशकों में सबसे निचले स्तर पर रहा है। सऊदी अरामको के CEO अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल निर्यात में रुकावट के कारण बाजार में स्थिरता आने में 2027 तक का समय लग सकता है। इससे हर हफ्ते करीब 10 करोड़ बैरल तेल का नुकसान हो रहा है। इन्वेस्टमेंट बैंक जेपी मॉर्गन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अगले महीने खुल भी जाता है, तो भी तेल की कीमतें इस साल 100 डॉलर के आसपास बनी रहेंगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि रास्ता खुलने के बाद भी लॉजिस्टिक और टैंकरों की कमी के कारण सप्लाई सामान्य होने में समय लगेगा। प्रधानमंत्री की अपील और सरकार के कड़े कदम रुपए में लगातार आ रही गिरावट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते देशवासियों से विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए अपील की थी। उन्होंने लोगों से फिजूलखर्ची कम करने और देशहित में आर्थिक अनुशासन बनाए रखने को कहा था। इसी कड़ी में सरकार ने मंगलवार रात कीमती धातुओं के आयात पर टैरिफ बढ़ा दिए थे ताकि डॉलर के बाहर जाने की रफ्तार को कम किया जा सके। ट्रेडर्स का मानना है कि आने वाले समय में रुपए में और गिरावट देखी जा सकती है। करेंसी की कीमत कैसे तय होती है? डॉलर के मुकाबले किसी करेंसी की वैल्यू घटे तो उसे मुद्रा का गिरना या कमजोरी (करेंसी डेप्रिसिएशन) कहते हैं। हर देश के पास फॉरेन करेंसी रिजर्व होता है, जिससे इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन होते हैं। इसके घटने-बढ़ने का असर करेंसी पर पड़ता है। अगर भारत के फॉरेन रिजर्व में डॉलर पर्याप्त होंगे तो रुपया स्थिर रहेगा। डॉलर घटे तो रुपया कमजोर, बढ़े तो मजबूत होगा।
डॉलर के मुकाबले रुपया ऑल टाइम लो पर आया:1 डॉलर की कीमत 95.94 रुपए हुई, इससे महंगाई बढ़ने का खतरा

रुपया आज 15 मई को डॉलर के मुकाबले 30 पैसे गिरकर 95.94 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। इससे पहले गुरुवार को रुपया 95.64 के ऑल टाइम लो पर पहुंचा था। पिछले कुछ दिनों से रुपए में लगातार गिरावट जारी है। साल 2026 की शुरुआत से ही रुपया दबाव में है। पिछले साल दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर के पार गया था। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं और जियोपॉलिटिकल तनाव कम नहीं हुआ, तो रुपया जल्द ही 100 के स्तर को भी छू सकता है। रुपए में गिरावट के प्रमुख कारण मिडिल ईस्ट तनाव: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज रूट में सप्लाई बाधित होने की आशंका ने बाजार में डर पैदा कर दिया है। युद्ध के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए डॉलर की ओर भाग रहे हैं। कच्चे तेल के दाम: भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। तेल महंगा होने से भारत को अधिक डॉलर चुकाने पड़ रहे हैं, जिससे रुपए पर दबाव बढ़ गया है। मजबूत होता डॉलर इंडेक्स: दुनिया की 6 प्रमुख करेंसी के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 99.05 के स्तर पर पहुंच गया है। जब डॉलर ग्लोबल मार्केट में मजबूत होता है, तो रुपया और अन्य एशियाई करेंसी कमजोर हो जाती हैं। विदेशी निवेशकों की निकासी: विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। अकेले बुधवार को FII ने 4,700 करोड़ रुपए से ज्यादा के शेयर बेचे। बाजार से डॉलर बाहर जाने के कारण रुपए की वैल्यू घट रही है। बढ़ती महंगाई का डर: भारत में थोक महंगाई दर (WPI) साढ़े तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। एनर्जी की बढ़ती कीमतों से ‘इंपोर्टेड इन्फ्लेशन’ का खतरा बढ़ गया है, जिससे इकोनॉमी के सेंटीमेंट बिगड़े हैं। डॉलर महंगा, भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा मिडिल ईस्ट संघर्ष को दशकों का सबसे गंभीर एनर्जी संकट माना जा रहा है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। तेल की कीमतें: कच्चे तेल महंगे होने से भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ा है। जरूरी सामान महंगा: LPG, प्लास्टिक और अन्य पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की सप्लाई प्रभावित। महंगाई का डर: डॉलर महंगा होने से पेट्रोल-डीजल और इम्पोर्टेड सामान महंगे होंगे, जिससे रिटेल महंगाई बढ़ सकती है। विदेश में पढ़ाई-घूमना महंगा: विदेश जाने या पढ़ाई के लिए डॉलर खरीदने पर अब ज्यादा रुपए खर्च करने होंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स महंगे: मोबाइल, लैपटॉप और आयातित पार्ट्स महंगे हो सकते हैं, क्योंकि भुगतान डॉलर में होता है। तेल उत्पादन पिछले दो दशकों में सबसे निचले स्तर पर रॉयटर्स के सर्वे के मुताबिक, अप्रैल में ओपेक (OPEC) देशों का तेल उत्पादन पिछले दो दशकों में सबसे निचले स्तर पर रहा है। सऊदी अरामको के CEO अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल निर्यात में रुकावट के कारण बाजार में स्थिरता आने में 2027 तक का समय लग सकता है। इससे हर हफ्ते करीब 10 करोड़ बैरल तेल का नुकसान हो रहा है। इन्वेस्टमेंट बैंक जेपी मॉर्गन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अगले महीने खुल भी जाता है, तो भी तेल की कीमतें इस साल 100 डॉलर के आसपास बनी रहेंगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि रास्ता खुलने के बाद भी लॉजिस्टिक और टैंकरों की कमी के कारण सप्लाई सामान्य होने में समय लगेगा। प्रधानमंत्री की अपील और सरकार के कड़े कदम रुपए में लगातार आ रही गिरावट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते देशवासियों से विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए अपील की थी। उन्होंने लोगों से फिजूलखर्ची कम करने और देशहित में आर्थिक अनुशासन बनाए रखने को कहा था। इसी कड़ी में सरकार ने मंगलवार रात कीमती धातुओं के आयात पर टैरिफ बढ़ा दिए थे ताकि डॉलर के बाहर जाने की रफ्तार को कम किया जा सके। ट्रेडर्स का मानना है कि आने वाले समय में रुपए में और गिरावट देखी जा सकती है। करेंसी की कीमत कैसे तय होती है? डॉलर के मुकाबले किसी करेंसी की वैल्यू घटे तो उसे मुद्रा का गिरना या कमजोरी (करेंसी डेप्रिसिएशन) कहते हैं। हर देश के पास फॉरेन करेंसी रिजर्व होता है, जिससे इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन होते हैं। इसके घटने-बढ़ने का असर करेंसी पर पड़ता है। अगर भारत के फॉरेन रिजर्व में डॉलर पर्याप्त होंगे तो रुपया स्थिर रहेगा। डॉलर घटे तो रुपया कमजोर, बढ़े तो मजबूत होगा। ये खबर भी पढ़ें… पेट्रोल-डीजल ₹3-3 महंगे हुए, नई कीमतें लागू: दिल्ली में पेट्रोल ₹97.77 लीटर हुआ, कंपनियों को अभी भी ₹25-30 प्रति लीटर का घाटा पेट्रोल और डीजल 3-3 रुपए प्रति लीटर महंगा हो गया है। दिल्ली में अब पेट्रोल 97.77 रुपए प्रति लीटर में मिलेगा। डीजल की कीमत 90.67 रुपए प्रति लीटर हो गई है। नए दाम आज 15 मई से लागू हो गए हैं। करीब 2 साल बाद दामों में ये बढ़ोतरी की गई है। वहीं कंपनियों को अभी भी पेट्रोल-डीजल पर ₹25-₹30 प्रति लीटर का घाटा हो रहा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों के साथ प्रमुख शहरों में CNG भी ₹2 प्रति किलो तक महंगी हो गई हैं। दिल्ली में अब एक किलो CNG के लिए ₹79.09 खर्च करने होंगे। पूरी खबर पढ़ें…
‘वसूली शुरू’: कांग्रेस ने पेट्रोल, डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर पीएम मोदी पर ‘मेहंगाई मैन’ का तंज कसा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:15 मई, 2026, 10:55 IST कांग्रेस ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3 रुपये से अधिक और सीएनजी में 2 रुपये की बढ़ोतरी के लिए केंद्र की आलोचना की, पीएम मोदी को ‘मेहंगाई मैन’ कहा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की फ़ाइल छवि। (स्रोत: पीटीआई) कांग्रेस ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी के लिए केंद्र की आलोचना की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘मेहंगाई मैन’ कहा, जिन्होंने चुनाव के बाद लोगों पर ”चाबुक चलाया” है। सरकार ने पेट्रोल की कीमतें 3.14 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 97.77 रुपये कर दी हैं, जबकि डीजल की कीमतें 3.11 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई हैं, जिससे कीमत 90.67 रुपये हो गई है। एक्स पर निशाना साधते हुए, कांग्रेस ने मूल्य वृद्धि के लिए केंद्र की आलोचना की और कहा, “‘महंगाई आदमी’ मोदी ने आज एक बार फिर जनता पर चाबुक चलाया है। पेट्रोल और डीजल में 3-3 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इस बीच, सीएनजी की कीमतों में भी 2 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। चुनाव खत्म – मोदी की वसूली शुरू।” ‘महंगे आदमी’ मोदी ने आज फिर जनता पर हंटर चलाया। पेट्रोल और डीजल 3-3 रुपए महंगा कर दिया गया। वहीं, CNG के दाम भी 2 रुपए बढ़ा दिए गए। चुनाव ख़त्म – मोदी की चाहत शुरू – कांग्रेस (@INCIndia) 15 मई 2026 यह भी पढ़ें: ईंधन की कीमतें बढ़ीं: ईरान युद्ध के बीच पेट्रोल बढ़कर 97.77 रुपये, डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गया कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह “मोदी-सरकार द्वारा निर्मित संकट” है, जिसके लिए उन्होंने कहा कि देश के आम लोग अपनी जेब से भुगतान कर रहे हैं। खड़गे ने कहा, ”देश के लोगों को यह समझना चाहिए कि वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय ईंधन संकट के साथ-साथ भारत में आर्थिक संकट का प्रमुख कारण मोदी सरकार में नेतृत्व संकट, दूरदर्शी सोच की कमी और चरम सीमा तक व्याप्त अक्षमता है।” देश की जनता को ये बोझ होगा कि इस समय अंतरराष्ट्रीय ईंधन संकट के साथ-साथ भारत में आर्थिक संकट की बड़ी वजह मोदी सरकार में नेतृत्व संकट, दूरदर्शी सोच का अभाव और अक्षमता का कूट-कूट कर भरा है। ये संकट मोदी-सरकार निर्मित संकट है। जिसका खामियाज़ा देश की जनता को पेट्रोल,… – मल्लिकार्जुन खड़गे (@ खड़गे) 15 मई 2026 उन्होंने कहा, “यह संकट मोदी सरकार द्वारा निर्मित संकट है। देश की आम जनता पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमत अपनी जेब से चुका रही है।” इस बीच, केरल के नेता केसी वेणुगोपाल ने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “अमृत काल में आपका स्वागत है, मित्रों!” अमृत काल में आपका स्वागत है, मित्रों! जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें गिर गईं, तो मोदी सरकार ने अरबों का मुनाफा कमाया, और अब – पूरी तरह से अनुमानित संकट के 3 महीने बाद – जनता को दर्द सहने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इस सरकार का संकट प्रबंधन केवल… https://t.co/ASmzQCMeda के लिए है – केसी वेणुगोपाल (@kcvenugopalmp) 15 मई 2026 “जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें गिर गईं, तो मोदी सरकार ने अरबों का मुनाफा कमाया, और अब – पूरी तरह से अनुमानित संकट के 3 महीने बाद – जनता को दर्द सहने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इस सरकार का संकट प्रबंधन केवल अडानी को अभियोजन से बचाने के लिए है, आम जनता को आर्थिक झटके से बचाने के लिए नहीं। गरीबों को झटके से कैसे बचाया जाएगा, इस पर एक योजना देने के बजाय, वे दिन-ब-दिन लोगों का दम घोंट रहे हैं। लोग इस शासन और इसके कुप्रबंधन से पूरी तरह से तंग आ चुके हैं,” उन्होंने कहा। कहा. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई और बढ़ेगी, जिसके इस वित्त वर्ष में 6 फीसदी के करीब रहने का अनुमान है. वर्षों से जब अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें नरम थीं या गिर रही थीं, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आग्रह कर रही थी कि उन लाभों को भारतीय उपभोक्ताओं को दिया जाना चाहिए और गैस, पेट्रोल और डीजल की घरेलू कीमतें कम की जानी चाहिए। हालाँकि, ऐसा नहीं हुआ और…-जयराम रमेश (@जयराम_रमेश) 15 मई 2026 उन्होंने कहा, “अब जब प्रधानमंत्री के अच्छे दोस्तों – अमेरिका और इजराइल – द्वारा पश्चिम एशिया में युद्ध छेड़ दिया गया है और विधानसभा चुनाव खत्म हो गए हैं, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, मोदी सरकार ने पहले वाणिज्यिक एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा दी हैं। इससे मुद्रास्फीति बढ़ना तय है, जो अब इस वित्तीय वर्ष के लिए 6% के करीब होने का अनुमान है। विकास का अनुमान काफी कम हो जाएगा।” ‘भारत एक बड़े अपवाद के रूप में खड़ा है’: बीजेपी ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का बचाव किया भाजपा नेता अमित मालवीय और किरेन रिजिजू ने ईंधन की कीमतें बढ़ाने के सरकार के कदम का बचाव किया और कहा कि वैश्विक ईंधन संकट के बीच भारत एक “आश्चर्यजनक अपवाद” के रूप में सामने आया है। पश्चिम एशिया संघर्ष के फैलने के बाद से वैश्विक ईंधन की कीमतों में वृद्धि इस बात का खुलासा करती है कि विभिन्न देशों ने आर्थिक झटकों को कैसे प्रबंधित किया है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल चोकपॉइंट, होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना, और लंबे समय तक व्यवधान… pic.twitter.com/JtGwvpnLkP– अमित मालवीय (@amitmalviya) 15 मई 2026 “पश्चिम एशिया संघर्ष के फैलने के बाद से वैश्विक ईंधन की कीमतों में वृद्धि इस बात की तुलनात्मक तुलना प्रस्तुत करती है कि विभिन्न देशों ने आर्थिक झटकों को कैसे प्रबंधित किया है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल चोकपॉइंट, होर्मुज के जलडमरूमध्य के बंद होने और शिपमेंट में लंबे समय तक व्यवधान के कारण अप्रैल और मई की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया। दुनिया भर में, उपभोक्ताओं ने सीधे ईंधन स्टेशनों पर प्रभाव महसूस किया है। लेकिन भारत एक हड़ताली अपवाद के रूप में सामने आया है, “मालवीय ने कहा। इस बीच, रिजिजू ने कहा, “जब दुनिया पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद बढ़ती ईंधन लागत से जूझ रही थी, भारत अलग खड़ा था”। जब दुनिया पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद ईंधन की बढ़ती कीमतों से जूझ रही थी,
केसी बोकाड़िया बोले- ‘तीसरी बेगम’ में कड़वी सच्चाई दिखाई है:जय सियाराम विवाद, लव जिहाद मुद्दे और सेंसर बोर्ड पर खुलकर बोले फिल्ममेकर

अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, रेखा, माधुरी दीक्षित और राजकुमार जैसे बड़े सितारों के साथ काम कर चुके दिग्गज फिल्ममेकर केसी बोकड़िया इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘तीसरी बेगम’ को लेकर चर्चा में हैं। लव जिहाद, ट्रिपल तलाक और धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बनी इस फिल्म को लेकर उन्होंने दैनिक भास्कर से खुलकर बातचीत की। बोकाड़िया ने बताया कि फिल्म एक सच्ची घटना से प्रेरित है और इसका मकसद किसी धर्म को निशाना बनाना नहीं, बल्कि समाज के सामने एक गंभीर सवाल रखना है। उन्होंने सेंसर बोर्ड से विवाद, कोर्ट तक पहुंची लड़ाई और अपनी कन्विक्शन पर भी बेबाक राय रखी। सवाल: ‘तीसरी बेगम’ बनाने की प्रेरणा कहां से मिली? जवाब: एक असली घटना से। मैं एक परिचित के घर गया था, जहां उसने गर्व से बताया कि उसकी तीन पत्नियां हैं- मुस्लिम, राजपूत और ब्राह्मण। वहीं से मेरे मन में सवाल आया कि अलग संस्कार और खान-पान वाली लड़कियां ऐसे माहौल में कैसे एडजस्ट करती होंगी। उसी सोच से फिल्म की कहानी बनी। सवाल: फिल्म में लव जिहाद, ट्रिपल तलाक और हलाला जैसे मुद्दे दिख रहे हैं। इतने विवादित विषय पर फिल्म बनाने में डर नहीं लगा? जवाब: नहीं। मैंने जो देखा और महसूस किया, वही फिल्म में दिखाया। मेरा मकसद किसी धर्म को गलत बताना नहीं, बल्कि उन लड़कियों की मानसिक स्थिति दिखाना है जो अलग माहौल में जाकर संघर्ष करती हैं। मैंने इसे संतुलित तरीके से पेश किया है। सवाल: फिल्म में क्या दिखाया गया है? जवाब: फिल्म में एक ब्राह्मण लड़की शादी के बाद मुस्लिम परिवार में जाती है। वहां उसे नाम बदलने, तौर-तरीके अपनाने और नई जिंदगी में ढलने का दबाव झेलना पड़ता है। कहानी में उसकी परेशानी, संघर्ष और बाहर निकलने की कोशिश दिखाई गई है। सवाल: क्या फिल्म में धर्म परिवर्तन और जबरदस्ती जैसे मुद्दे भी हैं? जवाब: हमने दिखाया है कि कई बार लड़कियों को बड़े-बड़े सपने दिखाकर शादी की जाती है। बाद में उन्हें सच्चाई पता चलती है। फिल्म सिर्फ समस्या नहीं दिखाती, यह भी बताती है कि फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए। सवाल: क्या फिल्म में यह दिखाया गया है कि ऐसे मामलों के पीछे कोई नेटवर्क या पैसों का खेल होता है? जवाब: मैंने ऐसी बातें सुनी हैं, लेकिन फिल्म में उसे नहीं दिखाया। मैंने सिर्फ वही रखा जो कहानी और भावनाओं के हिसाब से जरूरी था। सवाल: सेंसर बोर्ड के साथ आपकी लंबी लड़ाई क्यों हुई? जवाब: सेंसर बोर्ड को कुछ डायलॉग्स और खासकर ‘जय सियाराम’ वाले सीन पर आपत्ति थी। मैंने साफ कहा कि इसे हटाऊंगा नहीं। बाद में मामला कोर्ट तक गया। कोर्ट ने फिल्म देखी और सिर्फ 24 सेकंड काटने के बाद रिलीज की अनुमति मिली। सवाल: क्या यह आपकी कन्विक्शन की जीत भी है? जवाब: बिल्कुल। अगर फिल्ममेकर को अपने विषय और कहानी पर भरोसा नहीं होगा तो वह फिल्म कैसे बनाएगा? मैंने वही दिखाया जो मुझे सही लगा। ‘जय सियाराम’ वाला सीन हटाने के लिए कहा गया, लेकिन मैं अपने स्टैंड पर कायम रहा। आखिरकार कोर्ट ने भी हमारी बात समझी। सवाल: ‘जय सियाराम’ वाले सीन पर इतनी बहस क्यों हुई? जवाब: फिल्म में एक लड़की से पूछा जाता है कि उसका भगवान कौन है, तो वह ‘जय सियाराम’ बोलती है। सेंसर को इस पर आपत्ति थी, लेकिन मैंने कहा कि यह किरदार की सच्चाई है। बाद में कोर्ट ने ज्यादातर सीन रहने दिए। सवाल: आपने फिल्म को खुद रिलीज करने का फैसला क्यों लिया? जवाब: आज सिस्टम काफी बदल गया है। कई लोग पहले ओटीटी के बारे में सोचते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि अगर कंटेंट अच्छा हो तो फिल्म थिएटर में जरूर चलती है। इसलिए मैंने खुद थिएटर मालिकों से बात की और अपनी तरह से फिल्म रिलीज करने का फैसला लिया। सवाल: क्या आज फिल्म रिलीज करना मुश्किल हो गया है? जवाब: बहुत मुश्किल है। टिकट, थिएटर और पूरा सिस्टम बदल गया है। अच्छे कंटेंट वाली फिल्मों को भी मौका कम मिलता है। लेकिन मुझे आज भी विश्वास है कि अच्छी फिल्म चलेगी। सवाल: इतने लंबे करियर और अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान जैसे बड़े स्टार्स के साथ काम करने के बाद भी आपको आज संघर्ष करना पड़ रहा है? जवाब: संघर्ष हर दौर में होता है। मैंने अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, रेखा, माधुरी दीक्षित जैसे बड़े सितारों के साथ काम किया है। उस दौर में रिश्तों और भरोसे पर काम होता था। आज सिस्टम बदल गया है, लेकिन मेरा काम करने का तरीका नहीं बदला। सवाल: क्या आज के स्टार्स और पुराने दौर के स्टार्स में फर्क महसूस होता है? जवाब: पहले कलाकारों में बहुत भरोसा था। अमिताभ बच्चन ने ‘आज का अर्जुन’ की कहानी तक नहीं सुनी थी। राजकुमार जैसे कलाकार फोन पर हां कह देते थे। आज चीजें ज्यादा कॉरपोरेट और सिस्टम बेस्ड हो गई हैं। सवाल: इतने बड़े स्टार्स के साथ काम करने के बाद भी आपने ‘तीसरी बेगम’ में नए चेहरों को क्यों चुना? जवाब: इस कहानी में मासूमियत और वास्तविकता जरूरी थी। अगर बड़े स्टार्स होते तो दर्शकों का ध्यान किरदार से ज्यादा स्टार इमेज पर जाता। मुझे कहानी का असर ज्यादा जरूरी लगा। सवाल: क्या आपको लगता है कि फिल्म पर प्रोपेगेंडा फैलाने के आरोप लगेंगे? जवाब: हो सकता है, लेकिन मैं तैयार हूं। मेरा मकसद किसी समुदाय के खिलाफ बोलना नहीं है। मैंने हमेशा सामाजिक और पारिवारिक फिल्में बनाई हैं। यह भी उसी तरह की फिल्म है। सवाल: मुस्लिम समुदाय के लिए आपका क्या संदेश है? जवाब: हम सब एक हैं। अगर किसी समुदाय में गलत चीजें हो रही हैं, तो उन्हें रोकना चाहिए। किसी भी चीज को प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। इंसानियत सबसे ऊपर है। सवाल: 78 साल की उम्र में भी इतनी ऊर्जा कहां से आती है? जवाब: भगवान की कृपा और लोगों का प्यार। मैंने हमेशा फिल्म इंडस्ट्री को पूजा की तरह माना है। अनुशासन में रहता हूं और काम को ईमानदारी से करता हूं। सवाल: फिल्म इंडस्ट्री जैसी प्रतिस्पर्धी जगह में इतना सरल और ईमानदार रहना कितना मुश्किल है? जवाब: अगर इंसान साफ नीयत से काम करे तो मजा आता है। मैंने हमेशा रिश्तों और सम्मान को महत्व दिया है। यही वजह है कि इतने साल बाद भी लोग प्यार देते हैं। सवाल: दर्शकों से
केसी बोकाड़िया बोले- ‘तीसरी बेगम’ में कड़वी सच्चाई दिखाई है:जय सियाराम विवाद, लव जिहाद मुद्दे और सेंसर बोर्ड पर खुलकर बोले फिल्ममेकर

अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, रेखा, माधुरी दीक्षित और राजकुमार जैसे बड़े सितारों के साथ काम कर चुके दिग्गज फिल्ममेकर केसी बोकड़िया इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘तीसरी बेगम’ को लेकर चर्चा में हैं। लव जिहाद, ट्रिपल तलाक और धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बनी इस फिल्म को लेकर उन्होंने दैनिक भास्कर से खुलकर बातचीत की। बोकाड़िया ने बताया कि फिल्म एक सच्ची घटना से प्रेरित है और इसका मकसद किसी धर्म को निशाना बनाना नहीं, बल्कि समाज के सामने एक गंभीर सवाल रखना है। उन्होंने सेंसर बोर्ड से विवाद, कोर्ट तक पहुंची लड़ाई और अपनी कन्विक्शन पर भी बेबाक राय रखी। सवाल: ‘तीसरी बेगम’ बनाने की प्रेरणा कहां से मिली? जवाब: एक असली घटना से। मैं एक परिचित के घर गया था, जहां उसने गर्व से बताया कि उसकी तीन पत्नियां हैं- मुस्लिम, राजपूत और ब्राह्मण। वहीं से मेरे मन में सवाल आया कि अलग संस्कार और खान-पान वाली लड़कियां ऐसे माहौल में कैसे एडजस्ट करती होंगी। उसी सोच से फिल्म की कहानी बनी। सवाल: फिल्म में लव जिहाद, ट्रिपल तलाक और हलाला जैसे मुद्दे दिख रहे हैं। इतने विवादित विषय पर फिल्म बनाने में डर नहीं लगा? जवाब: नहीं। मैंने जो देखा और महसूस किया, वही फिल्म में दिखाया। मेरा मकसद किसी धर्म को गलत बताना नहीं, बल्कि उन लड़कियों की मानसिक स्थिति दिखाना है जो अलग माहौल में जाकर संघर्ष करती हैं। मैंने इसे संतुलित तरीके से पेश किया है। सवाल: फिल्म में क्या दिखाया गया है? जवाब: फिल्म में एक ब्राह्मण लड़की शादी के बाद मुस्लिम परिवार में जाती है। वहां उसे नाम बदलने, तौर-तरीके अपनाने और नई जिंदगी में ढलने का दबाव झेलना पड़ता है। कहानी में उसकी परेशानी, संघर्ष और बाहर निकलने की कोशिश दिखाई गई है। सवाल: क्या फिल्म में धर्म परिवर्तन और जबरदस्ती जैसे मुद्दे भी हैं? जवाब: हमने दिखाया है कि कई बार लड़कियों को बड़े-बड़े सपने दिखाकर शादी की जाती है। बाद में उन्हें सच्चाई पता चलती है। फिल्म सिर्फ समस्या नहीं दिखाती, यह भी बताती है कि फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए। सवाल: क्या फिल्म में यह दिखाया गया है कि ऐसे मामलों के पीछे कोई नेटवर्क या पैसों का खेल होता है? जवाब: मैंने ऐसी बातें सुनी हैं, लेकिन फिल्म में उसे नहीं दिखाया। मैंने सिर्फ वही रखा जो कहानी और भावनाओं के हिसाब से जरूरी था। सवाल: सेंसर बोर्ड के साथ आपकी लंबी लड़ाई क्यों हुई? जवाब: सेंसर बोर्ड को कुछ डायलॉग्स और खासकर ‘जय सियाराम’ वाले सीन पर आपत्ति थी। मैंने साफ कहा कि इसे हटाऊंगा नहीं। बाद में मामला कोर्ट तक गया। कोर्ट ने फिल्म देखी और सिर्फ 24 सेकंड काटने के बाद रिलीज की अनुमति मिली। सवाल: क्या यह आपकी कन्विक्शन की जीत भी है? जवाब: बिल्कुल। अगर फिल्ममेकर को अपने विषय और कहानी पर भरोसा नहीं होगा तो वह फिल्म कैसे बनाएगा? मैंने वही दिखाया जो मुझे सही लगा। ‘जय सियाराम’ वाला सीन हटाने के लिए कहा गया, लेकिन मैं अपने स्टैंड पर कायम रहा। आखिरकार कोर्ट ने भी हमारी बात समझी। सवाल: ‘जय सियाराम’ वाले सीन पर इतनी बहस क्यों हुई? जवाब: फिल्म में एक लड़की से पूछा जाता है कि उसका भगवान कौन है, तो वह ‘जय सियाराम’ बोलती है। सेंसर को इस पर आपत्ति थी, लेकिन मैंने कहा कि यह किरदार की सच्चाई है। बाद में कोर्ट ने ज्यादातर सीन रहने दिए। सवाल: आपने फिल्म को खुद रिलीज करने का फैसला क्यों लिया? जवाब: आज सिस्टम काफी बदल गया है। कई लोग पहले ओटीटी के बारे में सोचते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि अगर कंटेंट अच्छा हो तो फिल्म थिएटर में जरूर चलती है। इसलिए मैंने खुद थिएटर मालिकों से बात की और अपनी तरह से फिल्म रिलीज करने का फैसला लिया। सवाल: क्या आज फिल्म रिलीज करना मुश्किल हो गया है? जवाब: बहुत मुश्किल है। टिकट, थिएटर और पूरा सिस्टम बदल गया है। अच्छे कंटेंट वाली फिल्मों को भी मौका कम मिलता है। लेकिन मुझे आज भी विश्वास है कि अच्छी फिल्म चलेगी। सवाल: इतने लंबे करियर और अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान जैसे बड़े स्टार्स के साथ काम करने के बाद भी आपको आज संघर्ष करना पड़ रहा है? जवाब: संघर्ष हर दौर में होता है। मैंने अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, रेखा, माधुरी दीक्षित जैसे बड़े सितारों के साथ काम किया है। उस दौर में रिश्तों और भरोसे पर काम होता था। आज सिस्टम बदल गया है, लेकिन मेरा काम करने का तरीका नहीं बदला। सवाल: क्या आज के स्टार्स और पुराने दौर के स्टार्स में फर्क महसूस होता है? जवाब: पहले कलाकारों में बहुत भरोसा था। अमिताभ बच्चन ने ‘आज का अर्जुन’ की कहानी तक नहीं सुनी थी। राजकुमार जैसे कलाकार फोन पर हां कह देते थे। आज चीजें ज्यादा कॉरपोरेट और सिस्टम बेस्ड हो गई हैं। सवाल: इतने बड़े स्टार्स के साथ काम करने के बाद भी आपने ‘तीसरी बेगम’ में नए चेहरों को क्यों चुना? जवाब: इस कहानी में मासूमियत और वास्तविकता जरूरी थी। अगर बड़े स्टार्स होते तो दर्शकों का ध्यान किरदार से ज्यादा स्टार इमेज पर जाता। मुझे कहानी का असर ज्यादा जरूरी लगा। सवाल: क्या आपको लगता है कि फिल्म पर प्रोपेगेंडा फैलाने के आरोप लगेंगे? जवाब: हो सकता है, लेकिन मैं तैयार हूं। मेरा मकसद किसी समुदाय के खिलाफ बोलना नहीं है। मैंने हमेशा सामाजिक और पारिवारिक फिल्में बनाई हैं। यह भी उसी तरह की फिल्म है। सवाल: मुस्लिम समुदाय के लिए आपका क्या संदेश है? जवाब: हम सब एक हैं। अगर किसी समुदाय में गलत चीजें हो रही हैं, तो उन्हें रोकना चाहिए। किसी भी चीज को प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। इंसानियत सबसे ऊपर है। सवाल: 78 साल की उम्र में भी इतनी ऊर्जा कहां से आती है? जवाब: भगवान की कृपा और लोगों का प्यार। मैंने हमेशा फिल्म इंडस्ट्री को पूजा की तरह माना है। अनुशासन में रहता हूं और काम को ईमानदारी से करता हूं। सवाल: फिल्म इंडस्ट्री जैसी प्रतिस्पर्धी जगह में इतना सरल और ईमानदार रहना कितना मुश्किल है? जवाब: अगर इंसान साफ नीयत से काम करे तो मजा आता है। मैंने हमेशा रिश्तों और सम्मान को महत्व दिया है। यही वजह है कि इतने साल बाद भी लोग प्यार देते हैं। सवाल: दर्शकों से
सेंसेक्स 107 अंक चढ़कर 75,506 पर पहुंचा:निफ्टी में भी 50 अंक की तेजी, यह 23,743 के स्तर पर कारोबार कर रहा

शेयर बाजार में आज यानी 15 मई को तेजी है। सेंसेक्स 100 अंक चढ़कर 75,506 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 50 अंक की तेजी, ये 23,743 के स्तर पर कारोबार कर रहा। एशियाई बाजारों में भी गिरावट कल अमेरिकी बाजारों में तेजी रही कल विदेशी निवेशकों ने ₹188 करोड़ के शेयर खरीदे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल सेंसेक्स 790 अंक चढ़कर बंद हुआ था इससे पहले शेयर बाजार में गुरुवार, 14 मई को बढ़त रही। सेंसेक्स 790 अंक (1.06%) की तेजी के साथ 75,399 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 277 अंक (1.18%) की बढ़त रही, ये 23,690 पर बंद हुआ था।






