Tuesday, 22 Sep 2026 | 04:28 AM

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राखी पर रामदेव ने कंगना के लिए भेजी मिठाइयां-रुपए:बोले- विवाद खत्म करें; कंगना ने कहा था- बाबा मेरे बेडरूम में चमगादड़ बनकर लटका

राखी पर रामदेव ने कंगना के लिए भेजी मिठाइयां-रुपए:बोले- विवाद खत्म करें; कंगना ने कहा था- बाबा मेरे बेडरूम में चमगादड़ बनकर लटका

रक्षाबंधन पर योग गुरु बाबा रामदेव ने अभिनेत्री और सांसद कंगना रनोट के लिए मिठाई और उपहार भेजा। उन्होंने एक सफेद लिफाफे में 500 रुपए के नोटों की गड्डी भी भेजी। इस दौरान रामदेव ने कहा कि रिश्तों में मिठास बनी रहनी चाहिए और पुराने गिले-शिकवे भुलाकर प्रेम के साथ आगे बढ़ना चाहिए। रामदेव ने कहा कि देश में किसी भी कारण से नफरत और एक-दूसरे के प्रति वैर-भाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों उनके और कंगना रनोट के बीच विवाद की चर्चा हुई थी, जिसे संवाद के जरिए खत्म किया जाना चाहिए। रामदेव ने यह भी कहा कि वे कंगना को फोन कर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देंगे। इसके बाद कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर रामदेव का वीडियो शेयर किया। उन्होंने लिखा- “त्योहार का दिन होता है सब भूल-चूक माफ करने के लिए। मेरे भाई बाबा रामदेव जी ने बहुत अच्छी बात कही कि विवाद नहीं, संवाद होना चाहिए। आज रक्षाबंधन के दिन मैं उनकी मिठाई और बड़े भाई का प्रेम, दोनों स्वीकार करती हूं। बहुत धन्यवाद। ईश्वर आपको लंबी आयु दे।” पहले जानिए विवाद कैसे शुरू हुआ कंगना रनोट ने जेन-जी प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा था। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने कंगना के बयान पर कहा था, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के युवा को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” रामदेव की इस टिप्पणी के बाद कंगना ने भी पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि बाबा रामदेव को उनकी जवानी और बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम नहीं करना चाहिए। कंगना ने फिर उठाया पुराना विवाद विवाद शांत होने के बाद अब कंगना ने एक बार फिर बाबा रामदेव की टिप्पणी का जिक्र किया है। डीडी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कंगना ने कहा कि बाबा रामदेव उनसे पहले से ही नाराज चल रहे हैं। कंगना ने कहा, “अभी उनसे पूछा गया कि कंगना ने प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा है, तो उन्होंने कहा, उसका बचपन देखा है क्या था, उसकी जवानी देखी है क्या थी। क्या बाबा रामदेव मेरे बेडरूम में चमगादड़ बनकर लटका हुआ था, उसने देखा है क्या था। क्या देखा। मुझे समझ नहीं आ रहा, ऐसा क्या देखा। बताना चाहिए था न कि क्या देखा।” अब रक्षाबंधन पर रामदेव ने भेजा गिफ्ट पुराने विवाद के बीच रक्षाबंधन पर बाबा रामदेव ने अपने बयान में साफ कहा कि पुराने गिले-शिकवे भुलाकर रिश्तों में मिठास बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाद को संवाद से खत्म किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कंगना को फोन कर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देने की बात भी कही। हम इस खबर को अपडेट कर रहे हैं…

कंगना ने फिर साधा रामदेव बाबा पर निशाना:कहा- मेरी जवानी की बात करते हैं, क्या मेरे बेडरूम में चमगादड़ बनकर लटके थे, जानिए क्या है विवाद

कंगना ने फिर साधा रामदेव बाबा पर निशाना:कहा- मेरी जवानी की बात करते हैं, क्या मेरे बेडरूम में चमगादड़ बनकर लटके थे, जानिए क्या है विवाद

कंगना रनोट ने कुछ समय पहले Gen-Z को गटरछाप कहा था। इस पर रामदेव बाबा ने कहा “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता।” कंगना ने इस पर कहा कि बाबा रामदेव मेरी जवानी और बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम न करें। विवाद लगभग खत्म हो चुका था, लेकिन कंगना ने फिर एक बार इस विवाद पर बयान दिया है। कंगना रनोट ने डीडी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा है, ‘बाबा रामदेव मुझसे पहले ही नाराज चल रहे हैं। अभी उनसे पूछा गया कि कंगना ने प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा है, तो उन्होंने कहा, उसका बचपन देखा है क्या था, उसकी जवानी देखी है क्या थी। क्या बाबा रामदेव मेरे बेडरूम में चमगादड़ बनकर लटका हुआ था, उसने देखा है क्या था। क्या देखा। मुझे समझ नहीं आ रहा, ऐसा क्या देखा। बताना चाहिए था न कि क्या देखा।’ कंगना रनोट ने इन विवादों पर भी दिया रिएक्शन- कृति सेनन एड विवाद- कंगना रनोट लगातार कृति सेनन के उस रक्षाबंधन एड की आलोचना कर रही हैं, जिसमें उन्होंने रिवीलिंग कपड़े पहने थे। कंगना ने इस विवाद पर कहा है कि क्या इस तरह के कपड़े किसी मुस्लिम फेस्टिवल में पहने दिखाए जा सकते हैं। एक्ट्रेस ने कहा कि एक फेस्टिवल कल्चर रिप्रेसेंट करता है, जिसमें इस तरह के ब्रालेट नहीं पहने जा सकते। भड़काऊ बयान देने पर रिएक्शन- कंगना ने लगातार मुद्दों पर विवादित बयान देने पर भी रिएक्शन दिया है। कंगना ने कहा कि अगर कॉकरोच है, तो उसे चप्पल से ही मारा जाएगा। उसे हाथ से नहीं मारा जाता या उसे किस नहीं किया जा सकता। वहीं अगर तितली हो, तो लोग उसे पकड़ते हैं, तस्वीरें क्लिक करते हैं। उनका कहना है कि जिस तरह के लोग बयान देते हैं, उस पर वो वैसे ही जवाब देती हैं। कंगना बोलीं- मैं बीजेपी की पपेट नहीं- कंगना ने बयानों को पार्टी से जोड़े जाने पर कहा, जब बहुत ज्यादा शोर होता है, तो कहीं न कहीं आपको भी चिल्लाना पड़ता है। मैं कई बार तगड़े बयान दे देती हूं, पर मैं जानबूझकर ऐसा नहीं करना चाहती। तो इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि मैं कोई पपेट थोड़ी ना हूं। बीजेपी आज मेरे साथ है, कल हो या ना हो। दो साल से मैं पार्लियामेंट की मेंबर हूं। 20 साल से मैं कलाकार हूं। मेरा एक वजूद है। मैं अगर खड़ी हो जाऊं तो 20 प्रेस वाले आएंगे और मेरी बात सुनेंगे।’ क्या था कंगना रनोट और रामदेव बाबा का पूरा विवाद? कंगना रनोट ने जेन-जी प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा था। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने कंगना के बयान पर कहा था, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के युवा को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” इस पर कंगना ने सोशल मीडिया पर लिखा, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम मत कीजिए। कोई सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही ऐसा सोच सकता है। कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से झूठे या फर्जी मेडिकल दावों को लेकर फटकार नहीं लगी। इसलिए मुझे चरित्र का पाठ मत पढ़ाइए। आपका चरित्र जैसा भी है, मेरा उससे कहीं बेहतर है। यहां कोई फ्रॉड नहीं मिला है।”

टेक दिग्गज अब ‘किसान’ बने; अमेरिका में कृषिभूमि की होड़:गेट्स-बेजोस 7 लाख एकड़ जमीन पर आलू-गाजर उगा रहे, जुकरबर्ग पाल रहे मवेशी

टेक दिग्गज अब ‘किसान’ बने; अमेरिका में कृषिभूमि की होड़:गेट्स-बेजोस 7 लाख एकड़ जमीन पर आलू-गाजर उगा रहे, जुकरबर्ग पाल रहे मवेशी

दुनिया के सबसे अमीर और टेक दिग्गजों में अब पशु-पालन और खेती का शौक बढ़ रहा है। अमेरिका में खेती की जमीन अब सिर्फ किसान की जरूरत नहीं, अरबपतियों के लिए बड़ा निवेश और शौक बन चुकी है। कोई यहां मवेशी पाल रहा है, तो कोई जमीन खरीदकर भविष्य ज्यादा सुरक्षित कर रहा है। मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग हवाई के काउआई द्वीप पर करीब 2,871 करोड़ रु. के 4,000 एकड़ कोउलाउ रेंच पर वाग्यू और एंगस नस्ल के मवेशी पाल रहे हैं। वहीं, रेडिट के सह-संस्थापक एलेक्सिस ओहानियन फ्लोरिडा में अपने फार्म पर केले के बाग और मधुमक्खी पालन कर रहे हैं। हालांकि, इन दिग्गजों के खेती-बारी का नया शौक अमेरिका में कृषि जमीनों को एक बेहद महंगे ‘एसेट क्लास’ में बदल दिया है। ‘ द लैंड रिपोर्ट’ के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स के पास 2.75 लाख एकड़ कृषि भूमि है, जिससे वे अमेरिका के 44वें सबसे बड़े भूस्वामी बन गए हैं। अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस 4.62 लाख एकड़ और वॉलमार्ट घराने से जुड़े स्टेन क्रोनके 27 लाख एकड़ जमीन के मालिक हैं। क्रोनके ने 2025 में न्यू मैक्सिको में 9.38 लाख एकड़ जमीन खरीदी, जिसे अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी रैंच बिक्री बताया गया। अलग-अलग राज्यों में इन जमीनों पर आलू, गाजर, प्याज, सोयाबीन, मक्का और कपास जैसी फसलें उगाई जाती हैं। कुछ किसानों को लीज पर भी दी जाती है। पीपुल्स कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में कृषि भूमि 411 लाख करोड़ की परिसंपत्ति बन चुकी है। अमेरिकी कृषि विभाग के मुताबिक, बीते वर्ष खेतों के मूल्य में 4.3% की बढ़ोतरी हुई। नेशनल यंग फार्मर्स कोएलिशन की पॉलिसी निदेशक एरिन फॉस्टर के अनुसार, जमीन की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि पहली बार खेती में उतरने वाले युवा या छोटे किसान प्रतिस्पर्धा से पूरी तरह बाहर हो गए हैं। जमीन में निवेश क्यों? महंगाई के साथ बढ़ती है कीमत महंगाई से सुरक्षित बचाव – सीमित प्राकृतिक संसाधन होने के कारण जमीन की कीमतें हमेशा महंगाई के साथ बढ़ती हैं। एआई और डेटा सेंटर्स की मांग – टेक कंपनियों (एआई हाइपरस्केलर्स) को विशाल डेटा सेंटर बनाने के लिए बड़े भूभाग की जरूरत होती है। लाइफस्टाइल और नॉन-फाइनेंशियल फायदे – कोरोना महामारी के बाद बड़े परिसरों में शिकार, मछली पकड़ने और खुद का ऑर्गेनिक अन्न उगाने का रुझान बढ़ा है।

फिल्ममेकर कुकू कोहली के निधन पर सलमान खान दुखी:पत्नी अरुणा ईरानी के लिए लिखा, मेरा दिल आपके साथ है; कार्डियक अरेस्ट से हुआ था निधन

फिल्ममेकर कुकू कोहली के निधन पर सलमान खान दुखी:पत्नी अरुणा ईरानी के लिए लिखा, मेरा दिल आपके साथ है; कार्डियक अरेस्ट से हुआ था निधन

मशहूर फिल्ममेकर कुकू कोहली के निधन पर बॉलीवुड एक्टर सलमान खान ने गहरा दुख जताया है। सलमान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर कर कुकू कोहली की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इसके साथ ही उन्होंने कुकू की पत्नी और सीनियर एक्ट्रेस अरुणा ईरानी समेत पूरे परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं। 77 साल के कुकू कोहली का 25 अगस्त को कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया था, जिसके बाद 26 अगस्त को मुंबई के ओशिवारा श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। ‘अरुणा जी, भगवान आपको हिम्मत दे’ सलमान खान ने कुकू कोहली पर पोस्ट करते हुए लिखा, “भगवान आपकी आत्मा को शांति दे कुकू जी। अरुणा जी, मेरा दिल आपके साथ है। भगवान आपको हिम्मत दे।” सलमान की इस पोस्ट के बाद उनके फैंस और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग भी कुकू कोहली को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। अरुणा ईरानी और परिवार से सलमान का खास रिश्ता सलमान खान का अरुणा ईरानी और कुकू कोहली के परिवार से पुराना और करीबी रिश्ता रहा है। सलमान ने कुकू कोहली की पत्नी अरुणा ईरानी के साथ ‘सपने साजन के’ (1992) और ‘हम तुम्हारे हैं सनम’ (2002) जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम किया है। कुकू कोहली की बेटी करिश्मा कोहली का भी सलमान खान से प्रोफेशनल कनेक्शन रहा है। करिश्मा कोहली ने सलमान खान की सुपरहिट फिल्मों ‘एक था टाइगर’ और ‘बजरंगी भाईजान’ में डायरेक्टर कबीर खान के साथ बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया था। 25 अगस्त को कार्डियक अरेस्ट से हुआ निधन 77 साल के कुकू कोहली (अवतार कोहली) का निधन 25 अगस्त को कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुआ था। 26 अगस्त को मुंबई के ओशिवारा श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार में विक्की कौशल, कटरीना कैफ, रोहित शेट्टी, राजपाल यादव, जावेद अख्तर और शबाना आजमी भी पहुंचे। अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे सेलेब्स; देखें तस्वीरें राज कपूर के साथ काम करके करियर शुरू किया कुकू कोहली ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत राज कपूर की फिल्म बॉबी में असिस्टेंट के तौर पर काम करके की थी। उन्होंने कई साल उनके साथ रहकर फिल्म बनाने की बारीकियां सीखीं। बाद में वह फिल्म बेताब में सेकेंड यूनिट डायरेक्टर रहे। सनी देओल और अमृता सिंह स्टारर यह फिल्म हिट थी। इसके बाद उन्होंने अर्जुन में भी काम किया। 1991 में कुकू कोहली ने फूल और कांटे से बतौर डायरेक्टर शुरुआत की। फिल्म हिट रही और अजय देवगन को बॉलीवुड में पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने कोहराम और सुहाग जैसी फिल्में बनाईं। सुहाग में अजय देवगन और अक्षय कुमार पहली बार साथ नजर आए थे। 1995 में उनकी फिल्म हकीकत रिलीज हुई। इसमें अजय देवगन और तब्बू थे। फिल्म को फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में सात कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला। कुकू को बेस्ट डायरेक्टर के लिए भी नॉमिनेशन मिला। इसके बाद उन्होंने जुल्मी, अनाड़ी नंबर 1 और ये दिल आशिकाना जैसी फिल्में बनाईं। उनकी आखिरी फिल्म वो तेरा नाम था 2004 में रिलीज हुई थी। कुकू कोहली और अरुणा ईरानी ने गुपचुप शादी की थी कुकू कोहली की दो शादियां हुई थीं। कुकू कोहली की पहली पत्नी का नाम रीता कोहली था। रीता कोहली और कुकू कोहली की दो बेटियां पूजा और करिश्मा थीं। वहीं, कुकू कोहली की दूसरी शादी एक्ट्रेस अरुणा ईरानी से हुई। दोनों की पहली मुलाकात फिल्म कोहराम के सेट पर हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच बिल्कुल नहीं बनती थी। हालांकि, काम के दौरान कुकू कोहली अरुणा का काफी ख्याल रखते थे। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती बढ़ी और यही दोस्ती प्यार में बदल गई। जब अरुणा को कुकू से प्यार हुआ, तब उन्हें पता चला कि कुकू पहले से शादीशुदा हैं। उनकी पहली पत्नी रीता कोहली से दो बेटियां भी थीं। इसके बावजूद अरुणा ने कुकू के साथ रिश्ता आगे बढ़ाया। दोनों ने 1990 में शादी कर ली। हालांकि, उन्होंने कई साल तक अपनी शादी को सार्वजनिक नहीं किया।अरुणा ने बताया था कि वह कुकू की पहली पत्नी और उनके परिवार की परेशानियां नहीं बढ़ाना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने अपने रिश्ते को निजी रखा। शादी के बाद अरुणा और कुकू ने बच्चे नहीं करने का फैसला लिया। अरुणा ने कहा था कि उस समय उनकी उम्र और कुकू के पहले से बच्चों को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… लगान-गजनी फेम एक्टर प्रदीप रावत का निधन:74 साल के थे, दोबारा कैंसर हुआ था; महाभारत में अश्वत्थामा बने थे लगान और गजनी समेत कई फिल्मों में नजर आने वाले अभिनेता प्रदीप रावत का 74 साल की उम्र में 4 अगस्त को निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी लगान में उनके साथ काम करने वाले अभिनेता यशपाल शर्मा ने इंस्टाग्राम पर श्रद्धांजलि देते हुए शेयर की थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा के नए सॉन्ग पर कंट्रोवर्सी:ऑफिशियल ट्रैक जारी, बाबाओं-डेरों पर निशाना; यूजर्स ने लिखा-रामपाल, राम रहीम सबको लपेटा

हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा के नए सॉन्ग पर कंट्रोवर्सी:ऑफिशियल ट्रैक जारी, बाबाओं-डेरों पर निशाना; यूजर्स ने लिखा-रामपाल, राम रहीम सबको लपेटा

बदमाशी कल्चर वाले गानों के लिए कंट्रोवर्सी में रहे हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने फिर सुर्खियों में हैं। 26 अगस्त को मासूम ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर नए सॉन्ग ‘तत्वदर्शी’ का साढ़े 3 मिनट ऑफिशियल ट्रैक जारी किया। जिसमें पाखंडी बाबाओं और डेरों को निशाने पर लिया है। इस गाने के लिरिक्स हरियाणवी सिंगर-कलाकार हैरी लाठर ने लिखे हैं। हैरी लाठर पहले भी बाबाओं को लेकर गाने गा चुके हैं। उनका ‘सिरसा आले बाबा की चेली’ सॉन्ग पर खूब कंट्रोवर्सी खड़ी हुई थी। लाठर ने इस बार खुद गाने की बजाय दोस्त मासूम शर्मा के लिए लिरिक्स लिखे। दैनिक भास्कर से बातचीत में हैरी लाठर ने स्पष्ट किया कि गाना किसी एक बाबा को टारगेट करके नहीं लिखा गया। सॉन्ग का वीडियो भी आएगा। नए सॉन्ग का ट्रैक रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर कमेंट्स वॉर शुरू हो गई। कुछ सिंगर को ट्रोल कर रहे हैं, तो कुछ पक्ष ले रहे हैं। एक यूजर ने लिखा- भाई ने रामपाल को भी लपेट दिया, अब मासूम शर्मा की खैर नहीं, रामपाल वाले दिन-रात इसी का नाम लिया करेंगे। दूसरे यूजर ने लिखा- दो-चार रुपए के लिए नाचने वाला मासूम बताएगा कि सही-गलत क्या है। बहादुरगढ़ के यूजर का कमेंट है-मासूम ने रामपाल, राहरहीम, आसाराम, हांसी वाले बाबा, धीरेंद्र शास्त्री से लेकर उस सरकारी शंकराचार्य को लपेट दिया। लिरिक्स के जरिए बड़े बाबाओं पर निशाना हैरी लाठर ने सॉन्ग को लेकर कही ये 2 बड़ी बात महापंचायत में नहीं पहुंचे थे मासूम शर्मा सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट, गानों में गन कल्चर, नशे और स्टेज पर अश्लील डांस के खिलाफ महम चौबीसी के ऐतिहासिक चबूतरे पर 25 जुलाई महापंचायत हुई थी। इसमें कई हरियाणवी कलाकार, खाप प्रतिनिधि व सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर आए थे और ऐसे कंटेंट पर रोक लगाने का समर्थन किया था। इसमें सिंगर मासूम शर्मा बीमार होने की बात कहकर नहीं पहुंचे थे। हालांकि वीडियो जारी कर मुहिम का समर्थन किया था। इस महापंचायत को कुछ दिन बाद ही मासूम ने हिमाचल प्रदेश में हुए एक कार्यक्रम में अपना बैन सॉन्ग एक खटौला जेल के भीतर गाया था। गन कल्चर को बढ़ावा देने के आरोप में मासूम शर्मा के 19 गाने सरकार ने यू-ट्यूब से हटाए गए थे। सरकार ने कुल 67 गाने हटाए थे, जिनमें सबसे ज्यादा मासूम शर्मा के ही थे। ये खबर भी पढ़ें… सिरसा आला बाबा सॉन्ग पर कॉन्ट्रोवर्सी:हरियाणवी सिंगर हैरी लाठर बोले- किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं; मासूम शर्मा के करीबी हरियाणवी सिंगर हैरी लाठर का नया सॉन्ग सुर्खियों के साथ कॉन्ट्रोवर्सी में भी है। सिरसा आला बाबा टाइटल से जारी सॉन्ग लिरिक्स के कारण चर्चा में है। इसके बोल हैं- “सिरसा आला बाबा सै जो लारा लार चेलियां की।” सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यूजर्स गाने को लेकर अलग-अलग कमेंट कर रहे हैं। पढ़िएं पूरी खबर

नेपाल में तबाही, पानी बिहार क्यों पहुंचेगा:36 फाटक खोले, त्रिशूली-भोटेकोशी का पानी किन जिलों तक पहुंचेगा, समझिए पूरा कनेक्शन

नेपाल में तबाही, पानी बिहार क्यों पहुंचेगा:36 फाटक खोले, त्रिशूली-भोटेकोशी का पानी किन जिलों तक पहुंचेगा, समझिए पूरा कनेक्शन

बिहार से करीब 300 किलोमीटर दूर नेपाल में तिब्बत से आई अचानक बाढ़ ने तबाही मचा दी है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के पानी ने रसुवा, टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाके को तहस-नहस कर दिया है। गांव के गांव बह गए, बाजार तबाह हो गए, पुल टूट गए और सड़कें कट गईं। नेपाल में आई तबाही पर बिहार सरकार अलर्ट है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से गृह मंत्री अमित शाह ने बात की है और NDRF की टीम को सीमावर्ती जिलों में तैनात कर दिया है। नेपाल में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों, क्या यहां भी तबाही मचेगी, समझेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1: नेपाल के रसुवा में बाढ़ और तबाही कैसे आई है? जवाबः 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिले में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक बहुत तेज पानी आया। पानी तिब्बत की तरफ से आया और कुछ ही समय में घर, सड़क, पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बहा ले गया। उस समय रसुवा में ऐसी भारी स्थानीय बारिश की सूचना नहीं थी, इसलिए सामान्य बारिश से आई बाढ़ की संभावना कम मानी जा रही है। कैसे हुआ? कितना नुकसान? नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 95 लोगों के मौत की खबर है। नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक 500 से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 133 भारतीय समेत 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक हैं। सवाल-2: भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों? जवाबः नेपाल में आई तबाही से बिहार के खतरों को समझने के लिए भोट कोशी और त्रिशूली नदियों के तंत्रों को समझना होगा… त्रिशूली नदी के पानी से 5 जिलों को खतरा रसुवा नेपाल का उत्तरी, हिमालयी जिला है और चीन के तिब्बत से लगा है। टिमुरे/रसुवागढ़ी और स्याब्रुबेसी इसी क्षेत्र में हैं। यहां की नदियां ऊंचे हिमालय से निकलकर बहुत तेज ढाल वाले एरिया में नीचे उतरती हैं। इसी क्षेत्र में त्रिशूली नदी का डिस्चार्ज अचानक बढ़ता है तो पानी तेजी से नीचे आता है। भोटेकोशी से कोसी इलाके में खतरा भोटेकोशी नेपाल के उत्तरी हिस्से में चीन-तिब्बत सीमा से निकलने वाली हिमालयी नदी है। यह सिंधुपालचोक क्षेत्र से होकर बहती है। हालांकि, अबकी बार 2008 वाले हालात नहीं सवाल-3: कितना नुकसान हो सकता है, बिहार सरकार क्या कर रही है? जवाबः अभी नुकसान का आकलन करना जल्दीबाजी होगी। गंडक और कोसी बेसिन की नदियों में पानी बढ़ना चालू है। लेकिन गति सामान्य है। CM सम्राट चौधरी ने मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। डिप्टी CM और जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि लोग सतर्क रहें, घबराएं नहीं। अगले 24 घंटे अलर्ट रहने की जरूरत है। समस्या पहले से बड़ी है, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। गंडक नदी पर दबाव बढ़ने की आशंका है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से बाढ़ राहत के लिए अतिरिक्त टीमों की तैनाती की गई है। राहत एवं बचाव के लिए जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। सरकार अलर्ट, बोली-डरे नहीं सवाल-4ः नेपाल की नदियों से बिहार में क्यों आती है बाढ़? जवाबः नेपाल बिहार से करीब 400 फीट ऊंचाई (समुंद्र तल से) पर स्थित है। नेपाल में भारी बारिश होती है तो पानी ऊपर से नीचे की तरफ नेचुरल ग्रेविटी के कारण आता है। नेपाल में कोई बड़ा डैम नहीं है। जिससे पानी को कंट्रोल किया जा सके। नेपाल हिमालय पर बसा है। इसका करीब 75% हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र है। कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला बलान, महानंदा और अधवारा नदियों का समूह यहां से निकलता है। नेपाल में बारिश होने पर पानी इन्हीं नदियों के रास्ते गंगा नदी तक पहुंचता है। 129 साल से चल रही हाई डैम बनाने की बात उत्तर बिहार को बाढ़ से मुक्ति दिलाने के लिए 1897 से ही भारत और नेपाल की सरकारों के बीच सप्तकोशी नदी पर बांध की बात चल रही है। इसे लेकर आजादी से पहले और बाद में दोनों देशों की सरकारों के बीच कई बार वार्ताएं हुईं। आखिरकार 1991 में दोनों देशों के बीच इसे लेकर एक समझौता भी हुआ। 2004 में इस प्रस्तावित बांध की संभावनाओं को तलाशने के लिए नेपाल के धरान में एक संयुक्त परियोजना कार्यालय भी बना है। मगर 129 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद आज तक नेपाल के बराह क्षेत्र से 1.6 किमी उत्तर की दिशा में प्रस्तावित इस बांध के निर्माण को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। 21 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक की। इसके बाद वित्त मंत्री ने कोसी-मेची परियोजना के पहले चरण की राशि जारी करने और दूसरे चरण की तकनीकी मंजूरी देने का निर्देश जल शक्ति मंत्रालय को दिया है। CM सम्राट चौधरी ने कहा कि बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए कोसी नदी पर उच्च बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जल्द बनेगी। JDU नेता संजय झा ने बताया, ‘नेपाल में हाई डैम का निर्माण एकमात्र समाधान है, जिसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) 2028 तक बन जाएगी।’

जयपुर पहुंची 'मुन्ना माइकल' की एक्ट्रेस निधी अग्रवाल:एयरपोर्ट पर फैंस के साथ खिंचवाईं तस्वीरें, साउथ सिनेमा में एक्टिव हैं एक्ट्रेस

जयपुर पहुंची 'मुन्ना माइकल' की एक्ट्रेस निधी अग्रवाल:एयरपोर्ट पर फैंस के साथ खिंचवाईं तस्वीरें, साउथ सिनेमा में एक्टिव हैं एक्ट्रेस

बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना चुकी अभिनेत्री निधि अग्रवाल बुधवार को जयपुर पहुंचीं। वह शहर में आयोजित एक इवेंट में शामिल होने के लिए आई हैं। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही निधि का सामना कुछ ऐसे फैंस से हुआ, जो रामबाग पैलेस में होने वाली एक रॉयल वेडिंग में शामिल होने के लिए पहुंच रहे थे। फैंस ने निधि को देखते ही उनके साथ फोटो खिंचवाने की इच्छा जताई। निधि ने भी अपने प्रशंसकों को निराश नहीं किया। उन्होंने बाउंसर्स से दूर होकर सभी के साथ तस्वीरें क्लिक कराईं। अचानक एयरपोर्ट पर मिले फैंस के साथ उनका यह सहज अंदाज लोगों को पसंद आया। इसके बाद निधि अपने कार्यक्रम के लिए रवाना हो गईं। साउथ सिनेमा में लगातार सक्रिय हैं निधि निधि अग्रवाल पिछले कुछ वर्षों में मुख्य रूप से तेलुगु और तमिल फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रही हैं। मॉडलिंग से अपने करियर की शुरुआत करने वाली निधि ने फिल्मों में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने अभिनय की शुरुआत हिंदी फिल्म ‘मुन्ना माइकल’ (2017) से की थी। इस फिल्म में उन्होंने टाइगर श्रॉफ के साथ काम किया और अपने डांस और स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों का ध्यान खींचा। इसके बाद निधि ने तेलुगु सिनेमा का रुख किया और ‘सव्यसाची’ से तेलुगु फिल्मों में कदम रखा। इसके बाद वह ‘मिस्टर मजनू’, ‘आईस्मार्ट शंकर’ और ‘हीरो’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। खासतौर पर आईस्मार्ट शंकर ने उन्हें साउथ इंडस्ट्री में काफी लोकप्रियता दिलाई। तमिल सिनेमा में भी बनाई पहचान निधि ने तमिल फिल्मों में भी काम किया है। वह अभिनेता उदयनिधि स्टालिन के साथ ‘कलगा थलाइवन’ में नजर आईं। इसके अलावा उनकी फिल्मोग्राफी में तमिल और तेलुगु सिनेमा के कई प्रोजेक्ट शामिल हैं। निधि को फिल्मों के साथ-साथ उनके ग्लैमरस लुक और सोशल मीडिया प्रेजेंस के लिए भी जाना जाता है। मॉडलिंग बैकग्राउंड के कारण फैशन और स्टाइल के मामले में भी उनकी खास पहचान बनी हुई है। पवन कल्याण के साथ ‘हरि हर वीरा मल्लू’ को लेकर चर्चा में रहीं हाल के वर्षों में निधि की सबसे चर्चित फिल्मों में ‘हरि हर वीरा मल्लू’ भी शामिल रही, जिसमें उन्होंने तेलुगु सुपरस्टार पवन कल्याण के साथ स्क्रीन शेयर की। इस बड़े प्रोजेक्ट के कारण निधि एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आईं। निधि की लगातार बढ़ती सक्रियता बताती है कि वह अब केवल एक इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। हिंदी फिल्मों से शुरुआत करने के बाद उन्होंने तेलुगु और तमिल सिनेमा में अपनी जगह बनाई है और अलग-अलग भाषाओं के प्रोजेक्ट्स में काम कर रही हैं।

जयपुर पहुंची 'मुन्ना माइकल' की एक्ट्रेस निधी अग्रवाल:एयरपोर्ट पर फैंस के साथ खिंचवाईं तस्वीरें, साउथ सिनेमा में एक्टिव हैं एक्ट्रेस

जयपुर पहुंची 'मुन्ना माइकल' की एक्ट्रेस निधी अग्रवाल:एयरपोर्ट पर फैंस के साथ खिंचवाईं तस्वीरें, साउथ सिनेमा में एक्टिव हैं एक्ट्रेस

बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना चुकी अभिनेत्री निधि अग्रवाल बुधवार को जयपुर पहुंचीं। वह शहर में आयोजित एक इवेंट में शामिल होने के लिए आई हैं। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही निधि का सामना कुछ ऐसे फैंस से हुआ, जो रामबाग पैलेस में होने वाली एक रॉयल वेडिंग में शामिल होने के लिए पहुंच रहे थे। फैंस ने निधि को देखते ही उनके साथ फोटो खिंचवाने की इच्छा जताई। निधि ने भी अपने प्रशंसकों को निराश नहीं किया। उन्होंने बाउंसर्स से दूर होकर सभी के साथ तस्वीरें क्लिक कराईं। अचानक एयरपोर्ट पर मिले फैंस के साथ उनका यह सहज अंदाज लोगों को पसंद आया। इसके बाद निधि अपने कार्यक्रम के लिए रवाना हो गईं। साउथ सिनेमा में लगातार सक्रिय हैं निधि निधि अग्रवाल पिछले कुछ वर्षों में मुख्य रूप से तेलुगु और तमिल फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रही हैं। मॉडलिंग से अपने करियर की शुरुआत करने वाली निधि ने फिल्मों में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने अभिनय की शुरुआत हिंदी फिल्म ‘मुन्ना माइकल’ (2017) से की थी। इस फिल्म में उन्होंने टाइगर श्रॉफ के साथ काम किया और अपने डांस और स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों का ध्यान खींचा। इसके बाद निधि ने तेलुगु सिनेमा का रुख किया और ‘सव्यसाची’ से तेलुगु फिल्मों में कदम रखा। इसके बाद वह ‘मिस्टर मजनू’, ‘आईस्मार्ट शंकर’ और ‘हीरो’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। खासतौर पर आईस्मार्ट शंकर ने उन्हें साउथ इंडस्ट्री में काफी लोकप्रियता दिलाई। तमिल सिनेमा में भी बनाई पहचान निधि ने तमिल फिल्मों में भी काम किया है। वह अभिनेता उदयनिधि स्टालिन के साथ ‘कलगा थलाइवन’ में नजर आईं। इसके अलावा उनकी फिल्मोग्राफी में तमिल और तेलुगु सिनेमा के कई प्रोजेक्ट शामिल हैं। निधि को फिल्मों के साथ-साथ उनके ग्लैमरस लुक और सोशल मीडिया प्रेजेंस के लिए भी जाना जाता है। मॉडलिंग बैकग्राउंड के कारण फैशन और स्टाइल के मामले में भी उनकी खास पहचान बनी हुई है। पवन कल्याण के साथ ‘हरि हर वीरा मल्लू’ को लेकर चर्चा में रहीं हाल के वर्षों में निधि की सबसे चर्चित फिल्मों में ‘हरि हर वीरा मल्लू’ भी शामिल रही, जिसमें उन्होंने तेलुगु सुपरस्टार पवन कल्याण के साथ स्क्रीन शेयर की। इस बड़े प्रोजेक्ट के कारण निधि एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आईं। निधि की लगातार बढ़ती सक्रियता बताती है कि वह अब केवल एक इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। हिंदी फिल्मों से शुरुआत करने के बाद उन्होंने तेलुगु और तमिल सिनेमा में अपनी जगह बनाई है और अलग-अलग भाषाओं के प्रोजेक्ट्स में काम कर रही हैं।

मूवी रिव्यू – ‘टॉक्सिक’:यश की फिल्म में स्टाइल, स्टारडम और एक्शन का पूरा ओवरडोज, लेकिन कहानी उलझी; तीन घंटे बाद सिरदर्द होता है

मूवी रिव्यू – ‘टॉक्सिक’:यश की फिल्म में स्टाइल, स्टारडम और एक्शन का पूरा ओवरडोज, लेकिन कहानी  उलझी; तीन घंटे बाद सिरदर्द होता है

यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ में स्टाइल, स्टारडम और एक्शन का पूरा ओवरडोज है, लेकिन कहानी इतनी उलझी है कि तीन घंटे बाद सिरदर्द होता है। ड्यूरेशन: 3 घंटे 14 मिनट 12 सेकंड दैनिक भास्कर रेटिंग: 1.5/5 यश की ‘टॉक्सिक’ एक बड़े स्केल की गैंगस्टर फिल्म है, जिसमें ड्रग्स, परिवार, बदला, धोखा और खूब सारा एक्शन है। फिल्म का लुक शानदार है, यश का जलवा बरकरार है, लेकिन कहानी के मामले में फिल्म आपको पकड़ने के बजाय बार-बार उलझाती है। फिल्म की कहानी कहानी 1940 के दशक के गोवा की है, जहां ड्रग्स के कारोबार पर गैंग्स का कब्जा है। राया बने यश इसी दुनिया का बड़ा नाम है। परिवार में हुए धोखे और पुराने हिसाब-किताब के बाद कहानी उसके बेटे टिकट तक पहुंचती है, जहां बदले और गैंगवार का खेल शुरू होता है। आइडिया सुनने में दमदार है, लेकिन फिल्म इसे इतने किरदारों और इतनी तेजी से आगे बढ़ाती है कि कुछ देर बाद कहानी समझने से ज्यादा ये याद रखना मुश्किल हो जाता है कि कौन किसका आदमी है। फिल्म में एक्टिंग यश इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। राया के किरदार में उनका स्वैग, लुक, बॉडी लैंग्वेज और स्क्रीन प्रेजेंस शानदार है। टिकट के रोल में भी उन्होंने अपने अंदाज को बदलने की कोशिश की है और कुछ सीन्स में उनकी परफॉर्मेंस वाकई असर छोड़ती है। नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसी बड़ी फीमेल स्टारकास्ट फिल्म में है, लेकिन अफसोस कि इनके किरदार उतनी मजबूती से नहीं लिखे गए। इतने बड़े नाम होने के बावजूद ज्यादातर किरदार यश के आसपास ही घूमते रह जाते हैं। फिल्म में डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले गीतू मोहनदास ने फिल्म को छोटा सोचकर नहीं बनाया। सेट बड़े हैं, विजुअल्स रिच हैं और पूरी दुनिया को एक अलग अंदाज देने की कोशिश की गई है, लेकिन दिक्कत ये है कि डायरेक्टर ने कहानी से ज्यादा स्टाइल पर भरोसा कर लिया। स्क्रीनप्ले लगातार एक जगह से दूसरी जगह भागता है। किरदार आते हैं, गोली चलाते हैं, कोई मर जाता है और कहानी आगे बढ़ जाती है। लेकिन दर्शक के मन में एक ही सवाल घूमता रहता है ये हो क्यों रहा है? फिल्म की एडिटिंग एडिटिंग भी काफी तेज है। एक्शन में इतने कट हैं कि रोमांच के बजाय कई जगह उलझन होने लगती है। फिल्म खूबसूरत जरूर दिखती है, लेकिन खूबसूरत दृश्य और अच्छी कहानी में फर्क होता है। फिल्म में सिनेमैटोग्राफी यहां फिल्म को पूरे नंबर मिलते हैं। पुराने दौर का गोवा, शानदार सेट, कपड़े, रोशनी और एक्शन सीन मिलकर फिल्म को भव्य बनाते हैं। कई सीन ऐसे हैं, जिन्हें देखकर लगेगा कि फिल्म पर खूब पैसा खर्च हुआ है। लेकिन परेशानी वही है आंखों को फिल्म खूब पसंद आती है, दिमाग को कम। फिल्म में म्यूजिक संगीत फिल्म की एक और कमजोर कड़ी है। रवि बस्रूर का बैकग्राउंड स्कोर कई जगह माहौल बनाने के बजाय शोर पैदा करता है। हर बड़े सीन को भारी बनाने की कोशिश में संगीत इतना हावी हो जाता है कि कई बार सीन का असर ही दब जाता है। विशाल मिश्रा, रवि बस्रूर और तनिष्क बागची जैसे नामों से उम्मीद काफी ज्यादा थी। गाने बुरे नहीं हैं, लेकिन उनमें भी लगातार शोर महसूस होता है। कुछ देर सुनने के बाद कान भी आराम मांगने लगते हैं फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘टॉक्सिक’ में सब कुछ बड़ा है यश का स्टारडम, बजट, सेट, एक्शन और दृश्य। बस कहानी उस लेवल की नहीं है। फिल्म आपको बार-बार प्रभावित करने की कोशिश करती है, लेकिन मनोरंजन नहीं कर पाती। यश के कई पल शानदार हैं, मगर अकेला स्टारडम 3 घंटे 14 मिनट की फिल्म को नहीं खींच सकता। कुल मिलाकर, ‘टॉक्सिक’ की सबसे बड़ी परेशानी यही है फिल्म बहुत कुछ दिखाती है, लेकिन महसूस बहुत कम कराती है।

मूवी रिव्यू – ‘टॉक्सिक’:यश की फिल्म में स्टाइल, स्टारडम और एक्शन का पूरा ओवरडोज, लेकिन कहानी उलझी; तीन घंटे बाद सिरदर्द होता है

मूवी रिव्यू – ‘टॉक्सिक’:यश की फिल्म में स्टाइल, स्टारडम और एक्शन का पूरा ओवरडोज, लेकिन कहानी  उलझी; तीन घंटे बाद सिरदर्द होता है

यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ में स्टाइल, स्टारडम और एक्शन का पूरा ओवरडोज है, लेकिन कहानी इतनी उलझी है कि तीन घंटे बाद सिरदर्द होता है। ड्यूरेशन: 3 घंटे 14 मिनट 12 सेकंड दैनिक भास्कर रेटिंग: 1.5/5 यश की ‘टॉक्सिक’ एक बड़े स्केल की गैंगस्टर फिल्म है, जिसमें ड्रग्स, परिवार, बदला, धोखा और खूब सारा एक्शन है। फिल्म का लुक शानदार है, यश का जलवा बरकरार है, लेकिन कहानी के मामले में फिल्म आपको पकड़ने के बजाय बार-बार उलझाती है। फिल्म की कहानी कहानी 1940 के दशक के गोवा की है, जहां ड्रग्स के कारोबार पर गैंग्स का कब्जा है। राया बने यश इसी दुनिया का बड़ा नाम है। परिवार में हुए धोखे और पुराने हिसाब-किताब के बाद कहानी उसके बेटे टिकट तक पहुंचती है, जहां बदले और गैंगवार का खेल शुरू होता है। आइडिया सुनने में दमदार है, लेकिन फिल्म इसे इतने किरदारों और इतनी तेजी से आगे बढ़ाती है कि कुछ देर बाद कहानी समझने से ज्यादा ये याद रखना मुश्किल हो जाता है कि कौन किसका आदमी है। फिल्म में एक्टिंग यश इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। राया के किरदार में उनका स्वैग, लुक, बॉडी लैंग्वेज और स्क्रीन प्रेजेंस शानदार है। टिकट के रोल में भी उन्होंने अपने अंदाज को बदलने की कोशिश की है और कुछ सीन्स में उनकी परफॉर्मेंस वाकई असर छोड़ती है। नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसी बड़ी फीमेल स्टारकास्ट फिल्म में है, लेकिन अफसोस कि इनके किरदार उतनी मजबूती से नहीं लिखे गए। इतने बड़े नाम होने के बावजूद ज्यादातर किरदार यश के आसपास ही घूमते रह जाते हैं। फिल्म में डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले गीतू मोहनदास ने फिल्म को छोटा सोचकर नहीं बनाया। सेट बड़े हैं, विजुअल्स रिच हैं और पूरी दुनिया को एक अलग अंदाज देने की कोशिश की गई है, लेकिन दिक्कत ये है कि डायरेक्टर ने कहानी से ज्यादा स्टाइल पर भरोसा कर लिया। स्क्रीनप्ले लगातार एक जगह से दूसरी जगह भागता है। किरदार आते हैं, गोली चलाते हैं, कोई मर जाता है और कहानी आगे बढ़ जाती है। लेकिन दर्शक के मन में एक ही सवाल घूमता रहता है ये हो क्यों रहा है? फिल्म की एडिटिंग एडिटिंग भी काफी तेज है। एक्शन में इतने कट हैं कि रोमांच के बजाय कई जगह उलझन होने लगती है। फिल्म खूबसूरत जरूर दिखती है, लेकिन खूबसूरत दृश्य और अच्छी कहानी में फर्क होता है। फिल्म में सिनेमैटोग्राफी यहां फिल्म को पूरे नंबर मिलते हैं। पुराने दौर का गोवा, शानदार सेट, कपड़े, रोशनी और एक्शन सीन मिलकर फिल्म को भव्य बनाते हैं। कई सीन ऐसे हैं, जिन्हें देखकर लगेगा कि फिल्म पर खूब पैसा खर्च हुआ है। लेकिन परेशानी वही है आंखों को फिल्म खूब पसंद आती है, दिमाग को कम। फिल्म में म्यूजिक संगीत फिल्म की एक और कमजोर कड़ी है। रवि बसरूर का बैकग्राउंड स्कोर कई जगह माहौल बनाने के बजाय शोर पैदा करता है। हर बड़े सीन को भारी बनाने की कोशिश में संगीत इतना हावी हो जाता है कि कई बार सीन का असर ही दब जाता है। विशाल मिश्रा, रवि बस्रूर और तनिष्क बागची जैसे नामों से उम्मीद काफी ज्यादा थी। गाने बुरे नहीं हैं, लेकिन उनमें भी लगातार शोर महसूस होता है। कुछ देर सुनने के बाद कान भी आराम मांगने लगते हैं फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘टॉक्सिक’ में सब कुछ बड़ा है यश का स्टारडम, बजट, सेट, एक्शन और दृश्य। बस कहानी उस लेवल की नहीं है। फिल्म आपको बार-बार प्रभावित करने की कोशिश करती है, लेकिन मनोरंजन नहीं कर पाती। यश के कई पल शानदार हैं, मगर अकेला स्टारडम 3 घंटे 14 मिनट की फिल्म को नहीं खींच सकता। कुल मिलाकर, ‘टॉक्सिक’ की सबसे बड़ी परेशानी यही है फिल्म बहुत कुछ दिखाती है, लेकिन महसूस बहुत कम कराती है।