Tuesday, 22 Sep 2026 | 05:02 AM

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मूवी रिव्यू – ‘टॉक्सिक’:यश की फिल्म में स्टाइल, स्टारडम और एक्शन का पूरा ओवरडोज, लेकिन कहानी उलझी; तीन घंटे बाद सिरदर्द होता है

मूवी रिव्यू – ‘टॉक्सिक’:यश की फिल्म में स्टाइल, स्टारडम और एक्शन का पूरा ओवरडोज, लेकिन कहानी  उलझी; तीन घंटे बाद सिरदर्द होता है

यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ में स्टाइल, स्टारडम और एक्शन का पूरा ओवरडोज है, लेकिन कहानी इतनी उलझी है कि तीन घंटे बाद सिरदर्द होता है। ड्यूरेशन: 3 घंटे 14 मिनट 12 सेकंड दैनिक भास्कर रेटिंग: 1.5/5 यश की ‘टॉक्सिक’ एक बड़े स्केल की गैंगस्टर फिल्म है, जिसमें ड्रग्स, परिवार, बदला, धोखा और खूब सारा एक्शन है। फिल्म का लुक शानदार है, यश का जलवा बरकरार है, लेकिन कहानी के मामले में फिल्म आपको पकड़ने के बजाय बार-बार उलझाती है। फिल्म की कहानी कहानी 1940 के दशक के गोवा की है, जहां ड्रग्स के कारोबार पर गैंग्स का कब्जा है। राया बने यश इसी दुनिया का बड़ा नाम है। परिवार में हुए धोखे और पुराने हिसाब-किताब के बाद कहानी उसके बेटे टिकट तक पहुंचती है, जहां बदले और गैंगवार का खेल शुरू होता है। आइडिया सुनने में दमदार है, लेकिन फिल्म इसे इतने किरदारों और इतनी तेजी से आगे बढ़ाती है कि कुछ देर बाद कहानी समझने से ज्यादा ये याद रखना मुश्किल हो जाता है कि कौन किसका आदमी है। फिल्म में एक्टिंग यश इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। राया के किरदार में उनका स्वैग, लुक, बॉडी लैंग्वेज और स्क्रीन प्रेजेंस शानदार है। टिकट के रोल में भी उन्होंने अपने अंदाज को बदलने की कोशिश की है और कुछ सीन्स में उनकी परफॉर्मेंस वाकई असर छोड़ती है। नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसी बड़ी फीमेल स्टारकास्ट फिल्म में है, लेकिन अफसोस कि इनके किरदार उतनी मजबूती से नहीं लिखे गए। इतने बड़े नाम होने के बावजूद ज्यादातर किरदार यश के आसपास ही घूमते रह जाते हैं। फिल्म में डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले गीतू मोहनदास ने फिल्म को छोटा सोचकर नहीं बनाया। सेट बड़े हैं, विजुअल्स रिच हैं और पूरी दुनिया को एक अलग अंदाज देने की कोशिश की गई है, लेकिन दिक्कत ये है कि डायरेक्टर ने कहानी से ज्यादा स्टाइल पर भरोसा कर लिया। स्क्रीनप्ले लगातार एक जगह से दूसरी जगह भागता है। किरदार आते हैं, गोली चलाते हैं, कोई मर जाता है और कहानी आगे बढ़ जाती है। लेकिन दर्शक के मन में एक ही सवाल घूमता रहता है ये हो क्यों रहा है? फिल्म की एडिटिंग एडिटिंग भी काफी तेज है। एक्शन में इतने कट हैं कि रोमांच के बजाय कई जगह उलझन होने लगती है। फिल्म खूबसूरत जरूर दिखती है, लेकिन खूबसूरत दृश्य और अच्छी कहानी में फर्क होता है। फिल्म में सिनेमैटोग्राफी यहां फिल्म को पूरे नंबर मिलते हैं। पुराने दौर का गोवा, शानदार सेट, कपड़े, रोशनी और एक्शन सीन मिलकर फिल्म को भव्य बनाते हैं। कई सीन ऐसे हैं, जिन्हें देखकर लगेगा कि फिल्म पर खूब पैसा खर्च हुआ है। लेकिन परेशानी वही है आंखों को फिल्म खूब पसंद आती है, दिमाग को कम। फिल्म में म्यूजिक संगीत फिल्म की एक और कमजोर कड़ी है। रवि बस्रूर का बैकग्राउंड स्कोर कई जगह माहौल बनाने के बजाय शोर पैदा करता है। हर बड़े सीन को भारी बनाने की कोशिश में संगीत इतना हावी हो जाता है कि कई बार सीन का असर ही दब जाता है। विशाल मिश्रा, रवि बस्रूर और तनिष्क बागची जैसे नामों से उम्मीद काफी ज्यादा थी। गाने बुरे नहीं हैं, लेकिन उनमें भी लगातार शोर महसूस होता है। कुछ देर सुनने के बाद कान भी आराम मांगने लगते हैं फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘टॉक्सिक’ में सब कुछ बड़ा है यश का स्टारडम, बजट, सेट, एक्शन और दृश्य। बस कहानी उस लेवल की नहीं है। फिल्म आपको बार-बार प्रभावित करने की कोशिश करती है, लेकिन मनोरंजन नहीं कर पाती। यश के कई पल शानदार हैं, मगर अकेला स्टारडम 3 घंटे 14 मिनट की फिल्म को नहीं खींच सकता। कुल मिलाकर, ‘टॉक्सिक’ की सबसे बड़ी परेशानी यही है फिल्म बहुत कुछ दिखाती है, लेकिन महसूस बहुत कम कराती है।

मूवी रिव्यू – ‘टॉक्सिक’:यश की फिल्म में स्टाइल, स्टारडम और एक्शन का पूरा ओवरडोज, लेकिन कहानी उलझी; तीन घंटे बाद सिरदर्द होता है

मूवी रिव्यू – ‘टॉक्सिक’:यश की फिल्म में स्टाइल, स्टारडम और एक्शन का पूरा ओवरडोज, लेकिन कहानी  उलझी; तीन घंटे बाद सिरदर्द होता है

यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ में स्टाइल, स्टारडम और एक्शन का पूरा ओवरडोज है, लेकिन कहानी इतनी उलझी है कि तीन घंटे बाद सिरदर्द होता है। ड्यूरेशन: 3 घंटे 14 मिनट 12 सेकंड दैनिक भास्कर रेटिंग: 1.5/5 यश की ‘टॉक्सिक’ एक बड़े स्केल की गैंगस्टर फिल्म है, जिसमें ड्रग्स, परिवार, बदला, धोखा और खूब सारा एक्शन है। फिल्म का लुक शानदार है, यश का जलवा बरकरार है, लेकिन कहानी के मामले में फिल्म आपको पकड़ने के बजाय बार-बार उलझाती है। फिल्म की कहानी कहानी 1940 के दशक के गोवा की है, जहां ड्रग्स के कारोबार पर गैंग्स का कब्जा है। राया बने यश इसी दुनिया का बड़ा नाम है। परिवार में हुए धोखे और पुराने हिसाब-किताब के बाद कहानी उसके बेटे टिकट तक पहुंचती है, जहां बदले और गैंगवार का खेल शुरू होता है। आइडिया सुनने में दमदार है, लेकिन फिल्म इसे इतने किरदारों और इतनी तेजी से आगे बढ़ाती है कि कुछ देर बाद कहानी समझने से ज्यादा ये याद रखना मुश्किल हो जाता है कि कौन किसका आदमी है। फिल्म में एक्टिंग यश इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। राया के किरदार में उनका स्वैग, लुक, बॉडी लैंग्वेज और स्क्रीन प्रेजेंस शानदार है। टिकट के रोल में भी उन्होंने अपने अंदाज को बदलने की कोशिश की है और कुछ सीन्स में उनकी परफॉर्मेंस वाकई असर छोड़ती है। नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसी बड़ी फीमेल स्टारकास्ट फिल्म में है, लेकिन अफसोस कि इनके किरदार उतनी मजबूती से नहीं लिखे गए। इतने बड़े नाम होने के बावजूद ज्यादातर किरदार यश के आसपास ही घूमते रह जाते हैं। फिल्म में डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले गीतू मोहनदास ने फिल्म को छोटा सोचकर नहीं बनाया। सेट बड़े हैं, विजुअल्स रिच हैं और पूरी दुनिया को एक अलग अंदाज देने की कोशिश की गई है, लेकिन दिक्कत ये है कि डायरेक्टर ने कहानी से ज्यादा स्टाइल पर भरोसा कर लिया। स्क्रीनप्ले लगातार एक जगह से दूसरी जगह भागता है। किरदार आते हैं, गोली चलाते हैं, कोई मर जाता है और कहानी आगे बढ़ जाती है। लेकिन दर्शक के मन में एक ही सवाल घूमता रहता है ये हो क्यों रहा है? फिल्म की एडिटिंग एडिटिंग भी काफी तेज है। एक्शन में इतने कट हैं कि रोमांच के बजाय कई जगह उलझन होने लगती है। फिल्म खूबसूरत जरूर दिखती है, लेकिन खूबसूरत दृश्य और अच्छी कहानी में फर्क होता है। फिल्म में सिनेमैटोग्राफी यहां फिल्म को पूरे नंबर मिलते हैं। पुराने दौर का गोवा, शानदार सेट, कपड़े, रोशनी और एक्शन सीन मिलकर फिल्म को भव्य बनाते हैं। कई सीन ऐसे हैं, जिन्हें देखकर लगेगा कि फिल्म पर खूब पैसा खर्च हुआ है। लेकिन परेशानी वही है आंखों को फिल्म खूब पसंद आती है, दिमाग को कम। फिल्म में म्यूजिक संगीत फिल्म की एक और कमजोर कड़ी है। रवि बसरूर का बैकग्राउंड स्कोर कई जगह माहौल बनाने के बजाय शोर पैदा करता है। हर बड़े सीन को भारी बनाने की कोशिश में संगीत इतना हावी हो जाता है कि कई बार सीन का असर ही दब जाता है। विशाल मिश्रा, रवि बस्रूर और तनिष्क बागची जैसे नामों से उम्मीद काफी ज्यादा थी। गाने बुरे नहीं हैं, लेकिन उनमें भी लगातार शोर महसूस होता है। कुछ देर सुनने के बाद कान भी आराम मांगने लगते हैं फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘टॉक्सिक’ में सब कुछ बड़ा है यश का स्टारडम, बजट, सेट, एक्शन और दृश्य। बस कहानी उस लेवल की नहीं है। फिल्म आपको बार-बार प्रभावित करने की कोशिश करती है, लेकिन मनोरंजन नहीं कर पाती। यश के कई पल शानदार हैं, मगर अकेला स्टारडम 3 घंटे 14 मिनट की फिल्म को नहीं खींच सकता। कुल मिलाकर, ‘टॉक्सिक’ की सबसे बड़ी परेशानी यही है फिल्म बहुत कुछ दिखाती है, लेकिन महसूस बहुत कम कराती है।

तिरंगा-प्रेरित ड्रेस पर ट्रोलिंग के बाद उर्वशी रौतेला की सफाई:बोलीं- मैं देश को सिर्फ राष्ट्रीयता नहीं, अपनी पहचान के रूप में साथ रखती हूं

तिरंगा-प्रेरित ड्रेस पर ट्रोलिंग के बाद उर्वशी रौतेला की सफाई:बोलीं- मैं देश को सिर्फ राष्ट्रीयता नहीं, अपनी पहचान के रूप में साथ रखती हूं

एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला ने हाल ही में जयपुर में हुए मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 के ग्रैंड फिनाले में पहने तिरंगा-प्रेरित गाउन पर उठे विवाद पर सफाई दी। उर्वशी ने कहा कि यह राष्ट्रीय ध्वज की हूबहू कॉपी नहीं थी, बल्कि तिरंगे से प्रेरित कॉउचर डिजाइन था। दरअसल, मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 का ग्रैंड फिनाले 23 अगस्त को जयपुर के जी स्टूडियोज में आयोजित हुआ। पूर्व मिस यूनिवर्स इंडिया उर्वशी रौतेला जजिंग पैनल का हिस्सा थीं। उनके साथ भारत की पहली मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन, मिस यूनिवर्स इंडिया 2024 रिया सिंघा, पर्यावरणविद और फिल्म प्रोड्यूसर प्रज्ञा कपूर और पूर्व मिस इंडिया यूनिवर्स व मिस यूनिवर्स रनर-अप सेलिना जेटली भी पैनल में थीं। कार्यक्रम के लिए उर्वशी ने तिरंगे से प्रेरित गाउन पहना था। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने इसे लेकर आपत्ति जताई। एक यूजर ने लिखा कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को कपड़े के रूप में पहनना या ड्रेस मटेरियल पर सीधे प्रिंट करना फ्लैग कोड ऑफ इंडिया के तहत अनुमति नहीं है। अन्य यूजर्स ने भी इसे लेकर नाराजगी जताई। उर्वशी बोलीं- गाउन राष्ट्रीय ध्वज की हूबहू कॉपी नहीं मामले को लेकर हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में उर्वशी ने कहा कि मैं अपने देश को सिर्फ अपनी राष्ट्रीयता के तौर पर नहीं, बल्कि अपनी पहचान के एक हिस्से के रूप में अपने साथ लेकर चलती हूं। मैं ऐसा कुछ पहनना चाहती थी, जो सिर्फ यह न बताए कि मैं कहां से हूं, बल्कि यह भी बताए कि मेरे लिए भारत का क्या मतलब है। इसी सोच से इस कॉउचर ड्रेस का आइडिया आया। उर्वशी ने कहा कि गाउन की सिल्हूट, रंगों की जगह, सजावट, डिटेलिंग और प्रोडक्शन को फैशन के तौर पर तैयार किया गया था। उनके मुताबिक, यह केवल तीन रंगों को ड्रेस पर लगाने के बारे में नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय भावना को कलात्मक अभिव्यक्ति में बदलने के बारे में था। विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और इस गाउन में कई साफ अंतर हैं। उनके अनुसार, गाउन राष्ट्रीय ध्वज की हूबहू प्रतिकृति नहीं है, बल्कि तिरंगे से प्रेरित तत्वों का इस्तेमाल करके तैयार किया गया कॉउचर डिजाइन है। उन्होंने बताया कि इसमें कलर शेड्स, डायरेक्शन, प्रोपोर्शन, मटीरियल और सेंट्रल सिंबल में जान-बूझकर बदलाव किए गए थे। गाउन में तीन कलर और सर्कल जैसे सेंट्रल मोटिफ का इस्तेमाल किया गया है। उर्वशी के अनुसार, गाउन की हॉरिजॉन्टल कलर स्ट्राइप्स को वर्टिकल बनाया गया, एम्बलम को ज्वेलरी में बदला गया, और सीक्विन और फ्रिंज का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि ऑरेंज असली केसरिया नहीं है, हरा एक अलग शेड है, और एम्बलम ऑफिशियल स्पेसिफिकेशन्स से अलग है। यह आउटफिट बेलारूसी डिजाइनर डारिया चेरमाशेंटसेवा के DASHA फैशन कॉउचर ने डिजाइन किया था। भारतीय फ्लैग कोड भारत सरकार का फ्लैग कोड ऑफ इंडिया, 2002 राष्ट्रीय ध्वज के इस्तेमाल से जुड़े नियम और प्रावधान बताता है। प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971 के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज को किसी भी तरह की पोशाक या यूनिफॉर्म का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए और इसे कुशन, रूमाल, नैपकिन या किसी ड्रेस मटेरियल पर कढ़ाई या प्रिंट नहीं किया जाना चाहिए। कानून में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रीय ध्वज को जानबूझकर जमीन, फर्श या पानी में छूने या घसीटने नहीं दिया जाना चाहिए।

कंगना से जुड़े सवाल पर भड़कीं तापसी पन्नू:मीडिया से बोलीं- आप सवाल पूछना बंद करेंगे, तभी विवाद खत्म होगा; कंगना ने 'सस्ती कॉपी' कहा था

कंगना से जुड़े सवाल पर भड़कीं तापसी पन्नू:मीडिया से बोलीं- आप सवाल पूछना बंद करेंगे, तभी विवाद खत्म होगा; कंगना ने 'सस्ती कॉपी' कहा था

बॉलीवुड एक्ट्रेस तापसी पन्नू कंगना रनोट से जुड़ा सवाल पूछे जाने पर भड़क गईं। हाल ही में कंगना ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तापसी पर उनकी परवरिश और माता-पिता का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया था। इस पर मीडिया से बातचीत के दौरान तापसी ने कहा कि जब लोग और मीडिया उनसे इस मुद्दे पर सवाल पूछना बंद कर देंगे, तब यह विवाद अपने आप खत्म हो जाएगा। तापसी अपनी अपकमिंग फिल्म ‘गांधारी’ के प्रमोशन के सिलसिले में बातचीत कर रही थीं। तापसी बोलीं- आप लोग विवाद खत्म नहीं होने देते जब तापसी से कंगना के आरोपों को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, आप इस बात को खत्म क्यों नहीं होने देते? जब कोई हम दोनों से यह सवाल पूछना बंद कर देगा, तो यह मुद्दा भी खत्म हो जाएगा। आप सब लोगों को यह सब देखने में मजा आ रहा है, इसलिए वही सवाल पूछ रहे हैं। ऐसे सवाल पूछना अगर आप बंद कर दें, तो यह बात कब की खत्म हो जाती। कंगना ने सस्ती कॉपी कहा, फिर डिलीट की स्टोरी इससे पहले कंगना रनौत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दो स्टोरीज शेयर की थीं, जिन्हें बाद में उन्होंने डिलीट कर दिया था। उन्होंने लिखा, ‘एक सस्ती कॉपी अपनी आने वाली B-ग्रेड फिल्म को लेकर भी हमेशा की तरह मीडिया में सिर्फ हेडलाइन बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन आज उन्होंने सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने मेरी परवरिश और मेरे माता-पिता का बेहद बेशर्मी से मजाक उड़ाया।’ एक्ट्रेस ने आगे लिखा, ‘मुझे लगता है कि सभी माता-पिता अपने बच्चों के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ करते हैं। मैं कभी किसी बहस में माता-पिता को नहीं लाती, लेकिन आज मैं उनके माता-पिता से भी पूछना चाहती हूं कि वे मेरे माता-पिता की तरह कोई ओरिजिनल इंसान क्यों नहीं पैदा कर सके? इतनी सस्ती कॉपी क्यों? आपकी कोशिशों के लिए मुझे अफसोस है।’ कंगना ने कहा- वो प्रतिष्ठित परिवार से आती हैं इसके बाद कंगना ने तापसी की टिप्पणी वाली एक खबर शेयर की और कहा कि कई लोग उनकी परवरिश और माता-पिता पर सवाल उठाते हैं। कंगना ने बताया कि उनका परिवार एक प्रतिष्ठित राजपूत जमींदार परिवार से आता है और उनके माता-पिता पढ़े-लिखे हैं। कंगना ने कहा कि यह उनकी निजी पसंद थी कि वह अपने करियर की शुरुआत बिल्कुल शुरुआत से करें। इसके लिए उनके माता-पिता पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं? तापसी-कंगना का विवाद कई साल पुराना अभिनेत्री तापसी पन्नू और कंगना रनोट के बीच विवाद काफी पुराना है। विवाद की शुरुआत 2018-19 के आसपास हुई। तापसी ने फिल्म ‘मनमर्जियां’ के प्रमोशन के दौरान कहा था कि कंगना को अपनी बात कहने के लिए फिल्टर की जरूरत है। इसके बाद 2019 में तापसी ने कंगना की फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ के ट्रेलर की तारीफ की, लेकिन कंगना का नाम नहीं लिया। इस पर कंगना की बहन रंगोली चंदेल ने तापसी को ‘सस्ती कॉपी’ कह दिया था। इसके बाद 2020 में सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर बहस तेज हुई। इसी दौरान कंगना ने तापसी और स्वरा भास्कर को ‘बी-ग्रेड एक्ट्रेस’ कहा था। कंगना ने कहा था कि दोनों आउटसाइडर होने के बावजूद नेपोटिज्म का समर्थन करती हैं। तापसी ने इस पर कहा था कि आउटसाइडर्स को आपस में नहीं लड़ना चाहिए। ये खबर भी पढ़ें ‘भाई को बिकिनी में राखी क्यों बांधेंगी?’:कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन में रिवीलिंग ड्रेस के बाद कंगना रनोट ने उठाए सवाल कृति सेनन हाल ही में रक्षाबंधन के लिए बने एक ज्वेलरी ब्रांड के विज्ञापन में नजर आई थीं। विज्ञापन में उन्होंने इंडो-वेस्टर्न कपड़े पहने थे, जिसमें ब्रालेट जैसा ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थी। पूरी खबर पढ़ें

कंगना से जुड़े सवाल पर भड़कीं तापसी पन्नू:मीडिया से बोलीं- आप सवाल पूछना बंद करेंगे, तभी विवाद खत्म होगा; कंगना ने 'सस्ती कॉपी' कहा था

कंगना से जुड़े सवाल पर भड़कीं तापसी पन्नू:मीडिया से बोलीं- आप सवाल पूछना बंद करेंगे, तभी विवाद खत्म होगा; कंगना ने 'सस्ती कॉपी' कहा था

बॉलीवुड एक्ट्रेस तापसी पन्नू कंगना रनोट से जुड़ा सवाल पूछे जाने पर भड़क गईं। हाल ही में कंगना ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तापसी पर उनकी परवरिश और माता-पिता का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया था। इस पर मीडिया से बातचीत के दौरान तापसी ने कहा कि जब लोग और मीडिया उनसे इस मुद्दे पर सवाल पूछना बंद कर देंगे, तब यह विवाद अपने आप खत्म हो जाएगा। तापसी अपनी अपकमिंग फिल्म ‘गांधारी’ के प्रमोशन के सिलसिले में बातचीत कर रही थीं। तापसी बोलीं- आप लोग विवाद खत्म नहीं होने देते जब तापसी से कंगना के आरोपों को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, आप इस बात को खत्म क्यों नहीं होने देते? जब कोई हम दोनों से यह सवाल पूछना बंद कर देगा, तो यह मुद्दा भी खत्म हो जाएगा। आप सब लोगों को यह सब देखने में मजा आ रहा है, इसलिए वही सवाल पूछ रहे हैं। ऐसे सवाल पूछना अगर आप बंद कर दें, तो यह बात कब की खत्म हो जाती। कंगना ने सस्ती कॉपी कहा, फिर डिलीट की स्टोरी इससे पहले कंगना रनौत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दो स्टोरीज शेयर की थीं, जिन्हें बाद में उन्होंने डिलीट कर दिया था। उन्होंने लिखा, ‘एक सस्ती कॉपी अपनी आने वाली B-ग्रेड फिल्म को लेकर भी हमेशा की तरह मीडिया में सिर्फ हेडलाइन बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन आज उन्होंने सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने मेरी परवरिश और मेरे माता-पिता का बेहद बेशर्मी से मजाक उड़ाया।’ एक्ट्रेस ने आगे लिखा, ‘मुझे लगता है कि सभी माता-पिता अपने बच्चों के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ करते हैं। मैं कभी किसी बहस में माता-पिता को नहीं लाती, लेकिन आज मैं उनके माता-पिता से भी पूछना चाहती हूं कि वे मेरे माता-पिता की तरह कोई ओरिजिनल इंसान क्यों नहीं पैदा कर सके? इतनी सस्ती कॉपी क्यों? आपकी कोशिशों के लिए मुझे अफसोस है।’ कंगना ने कहा- वो प्रतिष्ठित परिवार से आती हैं इसके बाद कंगना ने तापसी की टिप्पणी वाली एक खबर शेयर की और कहा कि कई लोग उनकी परवरिश और माता-पिता पर सवाल उठाते हैं। कंगना ने बताया कि उनका परिवार एक प्रतिष्ठित राजपूत जमींदार परिवार से आता है और उनके माता-पिता पढ़े-लिखे हैं। कंगना ने कहा कि यह उनकी निजी पसंद थी कि वह अपने करियर की शुरुआत बिल्कुल शुरुआत से करें। इसके लिए उनके माता-पिता पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं? तापसी-कंगना का विवाद कई साल पुराना अभिनेत्री तापसी पन्नू और कंगना रनोट के बीच विवाद काफी पुराना है। विवाद की शुरुआत 2018-19 के आसपास हुई। तापसी ने फिल्म ‘मनमर्जियां’ के प्रमोशन के दौरान कहा था कि कंगना को अपनी बात कहने के लिए फिल्टर की जरूरत है। इसके बाद 2019 में तापसी ने कंगना की फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ के ट्रेलर की तारीफ की, लेकिन कंगना का नाम नहीं लिया। इस पर कंगना की बहन रंगोली चंदेल ने तापसी को ‘सस्ती कॉपी’ कह दिया था। इसके बाद 2020 में सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर बहस तेज हुई। इसी दौरान कंगना ने तापसी और स्वरा भास्कर को ‘बी-ग्रेड एक्ट्रेस’ कहा था। कंगना ने कहा था कि दोनों आउटसाइडर होने के बावजूद नेपोटिज्म का समर्थन करती हैं। तापसी ने इस पर कहा था कि आउटसाइडर्स को आपस में नहीं लड़ना चाहिए। ये खबर भी पढ़ें ‘भाई को बिकिनी में राखी क्यों बांधेंगी?’:कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन में रिवीलिंग ड्रेस के बाद कंगना रनोट ने उठाए सवाल कृति सेनन हाल ही में रक्षाबंधन के लिए बने एक ज्वेलरी ब्रांड के विज्ञापन में नजर आई थीं। विज्ञापन में उन्होंने इंडो-वेस्टर्न कपड़े पहने थे, जिसमें ब्रालेट जैसा ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थी। पूरी खबर पढ़ें

मोहन भागवत न्यूयॉर्क पहुंचे, तीन देशों के दौरे की शुरुआत:अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जाएंगे; RSS के 100 साल पूरे होने पर कार्यक्रम में शामिल होंगे

मोहन भागवत न्यूयॉर्क पहुंचे, तीन देशों के दौरे की शुरुआत:अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जाएंगे; RSS के 100 साल पूरे होने पर कार्यक्रम में शामिल होंगे

RSS प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार को न्यूयॉर्क पहुंचे। यह उनके तीन देशों के दौरे का पहला पड़ाव है। वह अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जाएंगे। यह दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के मौके पर हो रहा है। उन्हें विदेशों में मौजूद भारतीय समुदाय के संगठनों ने आमंत्रित किया है। न्यूयॉर्क पहुंचने पर मोहन भागवत का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। दौरे के दौरान वह भारतीय मूल के लोगों और स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। RSS के मुताबिक, संगठन के 100 साल पूरे होने के मौके पर विदेशों में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में कार्यक्रम मोहन भागवत शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसका आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) फोरम कर रहा है। कार्यक्रम में भारतीय समुदाय के बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। यह कार्यक्रम रक्षाबंधन के मौके पर आयोजित किया जा रहा है। इसमें एकता, नागरिक जिम्मेदारी और वैश्विक सद्भाव का संदेश दिया जाएगा। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी और अलग-अलग धर्मों से जुड़े प्रमुख वक्ता शामिल होंगे। 25 अगस्त से शुरू हुआ तीन देशों का दौरा RSS के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया था कि मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर रहेंगे। यह दौरा विदेशों में मौजूद स्थानीय संगठनों और संस्थाओं के निमंत्रण पर हो रहा है। दौरे का समय RSS के शताब्दी वर्ष से भी जुड़ा है। RSS पर USCIRF की टिप्पणी से विवाद भागवत के दौरे से पहले RSS को लेकर अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की टिप्पणियों पर भारत ने आपत्ति जताई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने USCIRF को ‘पक्षपाती संस्था’ बताया था। उन्होंने कहा था कि आयोग भारत को लेकर बार-बार गलत और भड़काऊ बयान देता रहा है। USCIRF ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताते हुए RSS समेत कुछ संगठनों और लोगों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। भारत ने आयोग की रिपोर्ट को ‘पक्षपातपूर्ण और चुनिंदा तथ्यों पर आधारित’ बताते हुए खारिज कर दिया था।

फ्रांस में टॉरनेडो से 41 लोग घायल:300 घरों को नुकसान, छतें उड़ीं; ट्रेन-सड़क और हवाई सेवाओं पर भी असर

फ्रांस में टॉरनेडो से 41 लोग घायल:300 घरों को नुकसान, छतें उड़ीं; ट्रेन-सड़क और हवाई सेवाओं पर भी असर

फ्रांस के एक गांव में सोमवार को टॉरनेडो आया। इसमें 41 लोग घायल हुए और सैकड़ों घरों को नुकसान पहुंचा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टॉरनेडो से सबसे ज्यादा नुकसान करीब 1,000 आबादी वाले पोमास गांव में हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, यहां करीब 300 घरों को नुकसान पहुंचा और कुछ घरों की छतें पूरी तरह उड़ गईं। परिवहन मंत्री फिलिपे तबारो ने बताया कि ट्रेनें लेट हुईं, सड़कें बंद करनी पड़ीं और हवाई अड्डों पर देरी और उड़ानें रद्द हुईं। देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से के कई इलाकों में तूफान को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया था। टॉरनेडो से जुड़ी तस्वीरें… 117 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली राष्ट्रीय मौसम सेवा मेटेओ-फ्रांस ने बताया कि पास के अरकेट्स-एन-वाल गांव में हवा की रफ्तार 117.48 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई थी। देश के उत्तर में स्थित पेरिस के हवाई अड्डे पर भी देरी और उड़ानें रद्द होने की जानकारी दी गई। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि मौके पर 120 से ज्यादा बचावकर्मियों को तैनात किया गया। घायलों में से 15 लोगों को अस्पताल ले जाया गया। घायलों में एक गर्भवती महिला भी शामिल है। उसके पति ने एएफपी को बताया कि घर गिरने से महिला घायल हुई। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

अमेरिका में 2 लाख विदेशियों के वीजा रद्द होंगे:इतिहास में एक साथ पहली बार इतने वीजा कैंसिल होंगे, बिजनेस और टूरिस्ट वीजा पर असर

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अमेरिका 2 लाख तक बिजनेस और टूरिज्म वीजा रद्द करने की तैयारी कर रहा है। यह अब तक वीजा रद्द करने की सबसे बड़ी सामूहिक प्रक्रिया होगी। अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई की जा रही है। एसोसिएटेड प्रेस (एपी) ने इसकी रिपोर्ट दी है।

ईरान की करेंसी रियाल 20 लाख प्रति डॉलर पर पहुंची:यह अब तक का सबसे निचला स्तर, अमेरिकी प्रतिबंधों से बिगड़ी अर्थव्यवस्था

ईरान की करेंसी रियाल 20 लाख प्रति डॉलर पर पहुंची:यह अब तक का सबसे निचला स्तर, अमेरिकी प्रतिबंधों से बिगड़ी अर्थव्यवस्था

ईरान की मुद्रा रियाल सुबह के कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 लाख पर पहुंच गई। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह रियाल का अब तक का सबसे निचला रिकॉर्ड स्तर है। अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी, लंबे समय से जारी आर्थिक प्रतिबंधों और युद्ध की वजह से ईरान का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुका है। अमेरिका की ‘इकोनॉमिक डी-डे’ की तैयारी, नए प्रतिबंधों से बढ़ेगा दबाव ईरानी रियाल में यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वाशिंगटन नए और अधिक कड़े प्रतिबंधों का ऐलान करने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका ने इस कदम को “इकोनॉमिक डी-डे” करार दिया है। अमेरिका का मकसद इन कड़े वित्तीय प्रतिबंधों के जरिए ईरान पर दबाव को चरम पर पहुंचाना है, जिससे रियाल पर आने वाले दिनों में और ज्यादा गिरावट का खतरा मंडरा रहा है। युद्ध और महंगाई से पहले से ईरान परेशानी ईरान की करेंसी 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से पहले भी दबाव में थी। देश पहले से ही महंगाई और नेगेटिव आर्थिक विकास दर का सामना कर रहा था। हालांकि, पिछले छह महीनों से जारी युद्ध और संघर्ष ने ईरानी अर्थव्यवस्था को बहुत गहरा नुकसान पहुंचाया है, जिससे रियाल लगातार नए निचले स्तर को छू रहा है। अमेरिकी नेवल नाकेबंदी से क्रूड ऑयल और समुद्री व्यापार प्रभावित अमेरिका द्वारा ईरान के आसपास की गई नौसैनिक नाकेबंदी ने देश के आयात और निर्यात व्यवस्था की कमर तोड़ दी है। ईरान का मुख्य राजस्व स्रोत कच्चा तेल का निर्यात रहा है, लेकिन नाकेबंदी की वजह से उसके तेल टैंकरों की आवाजाही पर रोक लग गई है। इसके चलते देश में विदेशी मुद्रा भंडार विशेषकर अमेरिकी डॉलर की भारी कमी हो गई है, जिससे अनौपचारिक बाजारों में डॉलर की मांग और कीमत दोनों अनियंत्रित रूप से बढ़ गई हैं। आगे क्या: महंगाई और रोजमर्रा की चीजों के दाम और बढ़ने के आसार रियाल के कमजोर होने का सीधा असर ईरान के आम नागरिकों पर पड़ने वाला है। दूसरे देशों से आने वाला सामान, खानस और दवाइयों की कीमतें बढ़ जाएंगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका की प्रस्तावित ‘इकोनॉमिक डी-डे’ पाबंदियां लागू होती हैं और नाकेबंदी जारी रहती है, तो आने वाले हफ्तों में रियाल में और गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे ईरान में महंगाई और ज्यादा बढ़ सकती है।

ईरान की करेंसी रियाल 20 लाख प्रति डॉलर पर पहुंची:यह अब तक का सबसे निचला स्तर, अमेरिकी प्रतिबंधों से बिगड़ी अर्थव्यवस्था

ईरान की करेंसी रियाल 20 लाख प्रति डॉलर पर पहुंची:यह अब तक का सबसे निचला स्तर, अमेरिकी प्रतिबंधों से बिगड़ी अर्थव्यवस्था

ईरान की मुद्रा रियाल सुबह के कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 लाख पर पहुंच गई। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह रियाल का अब तक का सबसे निचला रिकॉर्ड स्तर है। अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी, लंबे समय से जारी आर्थिक प्रतिबंधों और युद्ध की वजह से ईरान का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुका है। अमेरिका की ‘इकोनॉमिक डी-डे’ की तैयारी, नए प्रतिबंधों से बढ़ेगा दबाव ईरानी रियाल में यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वाशिंगटन नए और अधिक कड़े प्रतिबंधों का ऐलान करने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका ने इस कदम को “इकोनॉमिक डी-डे” करार दिया है। अमेरिका का मकसद इन कड़े वित्तीय प्रतिबंधों के जरिए ईरान पर दबाव को चरम पर पहुंचाना है, जिससे रियाल पर आने वाले दिनों में और ज्यादा गिरावट का खतरा मंडरा रहा है। युद्ध और महंगाई से पहले से ईरान परेशान ईरान की करेंसी 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से पहले भी दबाव में थी। देश पहले से ही महंगाई और नेगेटिव आर्थिक विकास दर का सामना कर रहा था। हालांकि, पिछले छह महीनों से जारी युद्ध और संघर्ष ने ईरानी अर्थव्यवस्था को बहुत गहरा नुकसान पहुंचाया है, जिससे रियाल लगातार नए निचले स्तर को छू रहा है। अमेरिकी नेवल नाकेबंदी से क्रूड ऑयल और समुद्री व्यापार प्रभावित अमेरिका द्वारा ईरान के आसपास की गई नौसैनिक नाकेबंदी ने देश के आयात और निर्यात व्यवस्था की कमर तोड़ दी है। ईरान का मुख्य राजस्व स्रोत कच्चा तेल का निर्यात रहा है, लेकिन नाकेबंदी की वजह से उसके तेल टैंकरों की आवाजाही पर रोक लग गई है। इसके चलते देश में विदेशी मुद्रा भंडार विशेषकर अमेरिकी डॉलर की भारी कमी हो गई है, जिससे अनौपचारिक बाजारों में डॉलर की मांग और कीमत दोनों अनियंत्रित रूप से बढ़ गई हैं। आगे क्या: महंगाई और रोजमर्रा की चीजों के दाम और बढ़ने के आसार रियाल के कमजोर होने का सीधा असर ईरान के आम नागरिकों पर पड़ने वाला है। दूसरे देशों से आने वाला सामान, खानस और दवाइयों की कीमतें बढ़ जाएंगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका की प्रस्तावित ‘इकोनॉमिक डी-डे’ पाबंदियां लागू होती हैं और नाकेबंदी जारी रहती है, तो आने वाले हफ्तों में रियाल में और गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे ईरान में महंगाई और ज्यादा बढ़ सकती है।