Wednesday, 30 Sep 2026 | 06:47 PM

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सऊदी क्राउन प्रिंस का सलाहकार बनना चाहता था एपस्टीन:प्राइवेट आइलैंड पर ‘मस्जिद’ बनवाई, सोने का गुंबद, मक्का से कपड़े और उजबेकिस्तान से टाइल्स मंगवाए

सऊदी क्राउन प्रिंस का सलाहकार बनना चाहता था एपस्टीन:प्राइवेट आइलैंड पर ‘मस्जिद’ बनवाई, सोने का गुंबद, मक्का से कपड़े और उजबेकिस्तान से टाइल्स मंगवाए

सेक्स अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में कई साल तक अपने संबंध बनाए। वह एक तरफ बिजनेस के मौके ढूंढ रहा था, और दूसरी तरफ इस्लाम से जुड़ी दुर्लभ और धार्मिक चीजें भी इकट्ठा कर रहा था। उसने इन चीजों को अपने कैरेबियन द्वीप पर बनी एक विवादित इमारत को सजाने में इस्तेमाल किया, जिसे वह ‘मस्जिद’ कहता था। उसने मक्का की काबा से किस्वा मंगवाई। किस्वा वह कपड़ा होता है जिस पर सोने से कुरान की आयतें कढ़ी होती हैं और इसे काबा पर चढ़ाया जाता है। इसके अलावा उजबेकिस्तान की एक मस्जिद से हाथ से बनी टाइल्स लाई गईं। सोने का गुंबद भी बनाया गया, जिसकी डिजाइन पुराने सीरिया की इमारतों जैसी थी। नार्वे राजदूत के जरिए खास लोगों से संपर्क बनाया एपस्टीन का मकसद सिर्फ इस्लामी चीजें जुटाना नहीं था, बल्कि ताकतवर और अमीर लोगों से अपने रिश्ते भी मजबूत करना था। नॉर्वे के राजनयिक टेरजे रोड-लार्सन के जरिए एपस्टीन को सऊदी अरब के खास लोगों तक पहुंच मिली। इनमें क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, सलाहकार राफत अल सब्बाग और शाही सहयोगी अजीजा अल अहमदी शामिल थीं। इसी नेटवर्क की मदद से उसे काबा से जुड़े खास कपड़े भी मिले थे। 2014 की एक फोटो में एपस्टीन न्यूयॉर्क में अपने घर के अंदर फर्श पर फैले ऐसे ही एक कपड़े को देख रहा है। उसके साथ अमीरात के बड़े कारोबारी सुल्तान अहमद बिन सुलयेम भी मौजूद थे। बाद में एपस्टीन से जुड़े होने की वजह से उन्हें नुकसान उठाना पड़ा और उन्हें दुबई की बंदरगाह कंपनी डीपी वर्ल्ड के प्रमुख पद से इस्तीफा देना पड़ा। एपस्टीन की इस्लामिक डिजाइन में काफी दिलचस्पी थी दस्तावेजों से उसके प्राइवलेंट आइलैंड लिटिल सेंट जेम्स पर बनी एक रहस्यमयी इमारत का सच भी सामने आया। पहले इसे म्यूजिक रूम, मंडप, चैपल या कोई रहस्यमयी मंदिर कहा जाता था, लेकिन उसके ईमेल और साथ काम करने वाले कलाकार की बातों से पता चला कि वह इसे ‘मस्जिद’ कहता था, हालांकि इसका इस्तेमाल कभी धार्मिक इबादत के लिए हुआ हो, इसका कोई सबूत नहीं है। इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले रोमानियाई कलाकार आयन निकोला ने भी बताया कि एपस्टीन इसे मस्जिद ही कहता था। यह भी पता चला कि इस मस्जिद की दीवारों या हिस्सों पर अरबी लिखावट (जैसे अल्लाह) डालने का प्लान था। एक ईमेल में एपस्टीन ने यहां तक सुझाव दिया कि ‘अल्लाह’ लिखे अरबी शब्दों की जगह उसके अपने नाम के अक्षर J और E लिख दिए जाएं। रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि एपस्टीन को इस्लामी डिजाइन में काफी दिलचस्पी थी। 2003- उसने कहा था कि उसके पास बहुत बड़ा फारसी कालीन है जो शायद किसी मस्जिद से आया होगा। 2008- जब वह जेल में था, तब भी उसने अपने द्वीप पर एक हमाम (तुर्की स्नानघर) और इस्लामी शैली के बगीचे बनाने की योजना बनाई थी। 2009- जेल से बाहर आने से पहले उसने आर्किटेक्ट्स को ये डिजाइन तैयार करने के लिए कहा। 2011- उसने उजबेकिस्तान के एक संपर्क को लिखा कि उसे असली टाइल्स चाहिए जो मस्जिद की अंदरूनी दीवारों जैसी हों। 2013- उसने सीरिया के अलेप्पो में बने 15वीं सदी के यालबुगा हमाम की फोटो भेजकर कहा कि उसी तरह की डिजाइन बनाई जाए, जिसमें सुनहरी गुंबद, मेहराब और खास तरह की दीवारें हों। एपस्टीन खुद को ईमेल करके डिजाइन आइडिया भेजता था, जिनमें पुराने मिडिल ईस्ट की मस्जिदों की तस्वीरें शामिल होती थीं। क्राउन प्रिंस का सलाहकार बनना चाहता था एपस्टीन करीब 2010 के आसपास, एपस्टीन की दोस्ती नॉर्वे के राजनयिक टेरजे रोड-लार्सन से हुई। दोनों के बीच बिजनेस और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर लगातार बातचीत होती रहती थी। 2016 में उनकी बातचीत में सऊदी अरब ज्यादा आने लगा, क्योंकि उस समय मोहम्मद बिन सलमान देश की तेल कंपनी अरामको को शेयर बाजार में लाने की तैयारी कर रहे थे। एपस्टीन चाहता था कि वह उनका फाइनेंशियल सलाहकार बने। रोड-लार्सन ने उसकी मुलाकात राफत अल सब्बाग (शाही सलाहकार) और अजीजा अल अहमदी (शाही सहयोगी) से करवाई। इनके जरिए एपस्टीन ने क्राउन प्रिंस तक पहुंच बनाने की कोशिश की। उसने न्यूयॉर्क में इनसे मुलाकात की और प्रिंस से सीधे मिलकर अपने अलग तरह का आइडिया पेश करना चाहा, जैसे मुसलमानों के लिए ‘शरिया’ नाम की नई करेंसी बनाना। फिर उसे सऊदी अरब आने का न्योता मिला। अजीजा अल अहमदी ने एपस्टीन से कहा कि जब वह सऊदी अरब के दूतावास जाए, तो वहां के अधिकारियों से यह बोले कि उसे खुद मोहम्मद बिन सलमान ने बुलाया है। सऊदी पहुंचने के बाद एपस्टीन ने रोड-लार्सन को अपनी और प्रिंस की दो तस्वीरें भेजीं, जिन्हें बाद में उसने अपने घर में भी लगाया। 2017 की शुरुआत में अजीजा अल अहमदी और एपस्टीन न्यूयॉर्क में मिले। उसी समय उनके नीचे काम करने वाले लोग आपस में ईमेल या मैसेज के जरिए बात कर रहे थे। वे यह तय कर रहे थे कि सऊदी अरब से कुछ सामान जैसे एक तंबू और दूसरी चीजें एपस्टीन के प्राइवेट आइलैंड पर भेजी जाएं। एपस्टीन के स्टाफ ने एक कस्टम एजेंट से कहा कि उन्हें काबा से 3 कपड़ें मिल रहे हैं। । एक जो काबा के अंदर इस्तेमाल हुआ था, दूसरा किस्वा जो बाहर ढका रहता है, और तीसरा उसी खास फैक्ट्री का बना हुआ था। किस्वा का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व होता है। इसे हर साल सैकड़ों कारीगर बनाते हैं। इसमें करीब 700 किलो रेशम और 115 किलो सोने-चांदी के धागे का इस्तेमाल होता है। इसकी कीमत करीब 50 लाख डॉलर होती है। जब इसे बदला जाता है, तो इसके टुकड़े खास संस्थाओं या सम्मानित लोगों को दे दिए जाते हैं। अजीजा अल अहमदी ने एक ईमेल में लिखा कि जो काला कपड़ा भेजा गया है, उसे कम से कम 1 करोड़ मुसलमान छू चुके हैं। लोग काबा के सात चक्कर लगाते हैं और इस कपड़े को छूकर अपनी दुआएं और उम्मीदें जोड़ते हैं। यह साफ नहीं है कि ये चीजें उन्हें कैसे मिलीं। इस बारे में न तो उन्होंने और न ही सऊदी सरकार ने कोई जवाब दिया। सलाहकार नहीं बन पाने पर नाराज हुआ था एपस्टीन 2017 में हरिकेन मारिया तूफान आया, जिससे एपस्टीन के आइलैंड पर काफी नुकसान हुआ और उसकी मस्जिद में

सऊदी क्राउन प्रिंस का सलाहकार बनना चाहता था एपस्टीन:प्राइवेट आइलैंड पर ‘मस्जिद’ बनवाई, सोने का गुंबद, मक्का से कपड़े और उजबेकिस्तान से टाइल्स मंगवाए

सऊदी क्राउन प्रिंस का सलाहकार बनना चाहता था एपस्टीन:प्राइवेट आइलैंड पर ‘मस्जिद’ बनवाई, सोने का गुंबद, मक्का से कपड़े और उजबेकिस्तान से टाइल्स मंगवाए

सेक्स अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में कई साल तक अपने संबंध बनाए। वह एक तरफ बिजनेस के मौके ढूंढ रहा था, और दूसरी तरफ इस्लाम से जुड़ी दुर्लभ और धार्मिक चीजें भी इकट्ठा कर रहा था। उसने इन चीजों को अपने कैरेबियन द्वीप पर बनी एक विवादित इमारत को सजाने में इस्तेमाल किया, जिसे वह ‘मस्जिद’ कहता था। उसने मक्का की काबा से किस्वा मंगवाई। किस्वा वह कपड़ा होता है जिस पर सोने से कुरान की आयतें कढ़ी होती हैं और इसे काबा पर चढ़ाया जाता है। इसके अलावा उजबेकिस्तान की एक मस्जिद से हाथ से बनी टाइल्स लाई गईं। सोने का गुंबद भी बनाया गया, जिसकी डिजाइन पुराने सीरिया की इमारतों जैसी थी। नार्वे राजदूत के जरिए खास लोगों से संपर्क बनाया एपस्टीन का मकसद सिर्फ इस्लामी चीजें जुटाना नहीं था, बल्कि ताकतवर और अमीर लोगों से अपने रिश्ते भी मजबूत करना था। नॉर्वे के राजनयिक टेरजे रोड-लार्सन के जरिए एपस्टीन को सऊदी अरब के खास लोगों तक पहुंच मिली। इनमें क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, सलाहकार राफत अल सब्बाग और शाही सहयोगी अजीजा अल अहमदी शामिल थे। इसी नेटवर्क की मदद से उसे काबा से जुड़े खास कपड़े भी मिले थे। 2014 की एक फोटो में एपस्टीन न्यूयॉर्क में अपने घर के अंदर फर्श पर फैले ऐसे ही एक कपड़े को देख रहा है। उसके साथ अमीरात के बड़े कारोबारी सुल्तान अहमद बिन सुलयेम भी मौजूद थे। बाद में एपस्टीन से जुड़े होने की वजह से उन्हें नुकसान उठाना पड़ा और उन्हें दुबई की बंदरगाह कंपनी डीपी वर्ल्ड के प्रमुख पद से इस्तीफा देना पड़ा। एपस्टीन की इस्लामिक डिजाइन में काफी दिलचस्पी थी दस्तावेजों से उसके प्राइवलेंट आइलैंड लिटिल सेंट जेम्स पर बनी एक रहस्यमयी इमारत का सच भी सामने आया। पहले इसे म्यूजिक रूम, मंडप, चैपल या कोई रहस्यमयी मंदिर कहा जाता था, लेकिन उसके ईमेल और साथ काम करने वाले कलाकार की बातों से पता चला कि वह इसे ‘मस्जिद’ कहता था, हालांकि इसका इस्तेमाल कभी धार्मिक इबादत के लिए हुआ हो, इसका कोई सबूत नहीं है। इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले रोमानियाई कलाकार आयन निकोला ने भी बताया कि एपस्टीन इसे मस्जिद ही कहता था। यह भी पता चला कि इस मस्जिद की दीवारों या हिस्सों पर अरबी लिखावट (जैसे अल्लाह) लिखने का प्लान था। एक ईमेल में एपस्टीन ने यहां तक सुझाव दिया कि ‘अल्लाह’ लिखे अरबी शब्दों की जगह उसके अपने नाम के अक्षर J और E लिख दिए जाएं। रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि एपस्टीन को इस्लामी डिजाइन में काफी दिलचस्पी थी। 2003- उसने कहा था कि उसके पास बहुत बड़ा फारसी कालीन है जो शायद किसी मस्जिद से आया होगा। 2008- जब वह जेल में था, तब भी उसने अपने द्वीप पर एक हमाम (तुर्की स्नानघर) और इस्लामी शैली के बगीचे बनाने की योजना बनाई थी। 2009- जेल से बाहर आने से पहले उसने आर्किटेक्ट्स को ये डिजाइन तैयार करने के लिए कहा। 2011- उसने उजबेकिस्तान के एक संपर्क को लिखा कि उसे असली टाइल्स चाहिए जो मस्जिद की अंदरूनी दीवारों जैसी हों। 2013- उसने सीरिया के अलेप्पो में बने 15वीं सदी के यालबुगा हमाम की फोटो भेजकर कहा कि उसी तरह की डिजाइन बनाई जाए, जिसमें सुनहरी गुंबद, मेहराब और खास तरह की दीवारें हों। एपस्टीन खुद को ईमेल करके डिजाइन आइडिया भेजता था, जिनमें पुराने मिडिल ईस्ट की मस्जिदों की तस्वीरें शामिल होती थीं। क्राउन प्रिंस का सलाहकार बनना चाहता था एपस्टीन करीब 2010 के आसपास, एपस्टीन की दोस्ती नॉर्वे के राजनयिक टेरजे रोड-लार्सन से हुई। दोनों के बीच बिजनेस और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर लगातार बातचीत होती रहती थी। 2016 के दौरान उनकी बातचीत में सऊदी अरब ज्यादा आने लगा, क्योंकि उस समय मोहम्मद बिन सलमान देश की तेल कंपनी अरामको को शेयर बाजार में लाने की तैयारी कर रहे थे। एपस्टीन चाहता था कि वह उनका फाइनेंशियल सलाहकार बने। रोड-लार्सन ने उसकी मुलाकात राफत अल सब्बाग (शाही सलाहकार) और अजीजा अल अहमदी (शाही सहयोगी) से करवाई। इनके जरिए एपस्टीन ने क्राउन प्रिंस तक पहुंच बनाने की कोशिश की। उसने न्यूयॉर्क में इनसे मुलाकात की और प्रिंस से सीधे मिलकर अपने अलग तरह के आइडिया पेश करना चाहा, जैसे मुसलमानों के लिए ‘शरिया’ नाम की नई करेंसी बनाना। फिर उसे सऊदी अरब आने का न्योता मिला। अजीजा अल अहमदी ने एपस्टीन से कहा कि जब वह सऊदी अरब के दूतावास जाए, तो वहां के अधिकारियों से यह बोले कि उसे खुद मोहम्मद बिन सलमान ने बुलाया है। सऊदी पहुंचने के बाद एपस्टीन ने रोड-लार्सन को अपनी और प्रिंस की दो तस्वीरें भेजीं, जिन्हें बाद में उसने अपने घर में भी लगाया। 2017 की शुरुआत में अजीजा अल अहमदी और एपस्टीन न्यूयॉर्क में मिले। उस समय उनके नीचे काम करने वाले लोग आपस में ईमेल या मैसेज के जरिए बात कर रहे थे। वे यह तय कर रहे थे कि सऊदी अरब से कुछ सामान जैसे एक तंबू और दूसरी चीजें एपस्टीन के प्राइवेट आइलैंड पर भेजी जाएं। एपस्टीन के स्टाफ ने एक कस्टम एजेंट से कहा कि उन्हें काबा से 3 कपड़ें मिल रहे हैं। एक जो काबा के अंदर इस्तेमाल हुआ था दूसरा किस्वा जो बाहर ढका रहता है और तीसरा उसी खास फैक्ट्री का बना हुआ था किस्वा का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व होता है। इसे हर साल सैकड़ों कारीगर बनाते हैं। इसमें करीब 700 किलो रेशम और 115 किलो सोने-चांदी के धागे का इस्तेमाल होता है। इसकी कीमत करीब 50 लाख डॉलर होती है। जब इसे बदला जाता है, तो इसके टुकड़े खास संस्थाओं या सम्मानित लोगों को दे दिए जाते हैं। अजीजा अल अहमदी ने एक ईमेल में लिखा कि जो काला कपड़ा भेजा गया है, उसे कम से कम 1 करोड़ मुसलमान छू चुके हैं। लोग काबा के सात चक्कर लगाते हैं और इस कपड़े को छूकर अपनी दुआएं और उम्मीदें जोड़ते हैं। यह साफ नहीं है कि ये चीजें उन्हें कैसे मिलीं। इस बारे में न तो उन्होंने और न ही सऊदी सरकार ने कोई जवाब दिया। सलाहकार नहीं बन पाने पर नाराज हुआ था एपस्टीन 2017 में हरिकेन मारिया तूफान आया, जिससे एपस्टीन के आइलैंड पर काफी नुकसान हुआ और उसकी मस्जिद में

SC ने केंद्र से कहा:रेप विक्टिम के अबॉर्शन पर टाइम लिमिट हटाइए, समय के साथ कानून बदलना चाहिए; अभी 6 महीने तक गर्भपात का नियम

SC ने केंद्र से कहा:रेप विक्टिम के अबॉर्शन पर टाइम लिमिट हटाइए, समय के साथ कानून बदलना चाहिए; अभी 6 महीने तक गर्भपात का नियम

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 15 साल की रेप विक्टिम की 30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी खत्म करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग को जबरन मां बनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और ऐसे मामलों में फैसला पीड़िता का ही होना चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र से कहा कि ऐसे मामलों में अबॉर्शन के लिए टाइम लिमिट से जुड़े कानून में बदलाव किया जाए। कोर्ट ने कहा- कानून ऐसा होना चाहिए जो समय के साथ बदलता रहे और वर्तमान हालात के अनुसार चले। AIIMS की ओर से कहा गया था कि 30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी में भ्रूण एक ‘वायबल लाइफ’ है और इस स्टेज पर अबॉर्शन सफल नहीं हो सकता। AIIMS डॉक्टरों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि विक्टिम के माता-पिता से बात कर यह तय किया जाए कि गर्भ जारी रखना है या नहीं।

भारत का गलत नक्शा दिखाने पर नेपाली एयरलाइन का माफीनामा:खेसारी लाल ने ली फिरकी, कहा- अंग्रेजी समझ नहीं आई; पहले आलोचना की थी

भारत का गलत नक्शा दिखाने पर नेपाली एयरलाइन का माफीनामा:खेसारी लाल ने ली फिरकी, कहा- अंग्रेजी समझ नहीं आई; पहले आलोचना की थी

हाल ही में नेपाल के एयरलाइन्स द्वारा भारत का गलत नक्शा दिखाया गया था, जिसके बाद एक्टर और राजनेता खेसारी लाल यादव ने एयरलाइन्स की आलोचना की थी। अब एयरलाइन द्वारा इस गलती पर माफी मांग ली है, जिसमें एक्टर ने फिरकी ली है। खेसारी लाल यादव ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एयरलाइन के माफीनामे को री-पोस्ट कर लिखा है, ‘अंग्रेजी तो नहीं समझ पाए इतना भारी, लेकिन लगा की माफी मांग लिया गया है। हमार भाई।’ गलत नक्शा दिखाने पर एक्टर ने की एयरलाइन की आलोचना गुरुवार को नेपाल के एयरलाइन्स ने एक पोस्ट में भारत का गलत नक्शा दिखाया था। इसके बाद खेसारी लाल यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘कोई बता पाएगा कि क्या सोच कर नेपाल एयरलाइंस ने भारत के नक्शे में ऐसी छेड़छाड़ की है और वो भी जम्मू कश्मीर को लेकर? ये मामूली बात नहीं है, जानबूझकर किया हुआ काम लगता हैं। इसको चिढ़ाना बोलते हैं।’ कुछ देर बाद एयरलाइन्स द्वारा पोस्ट डिलीट कर दी गई। इस पर एक्टर ने आगे लिखा, ‘माय डियर नेपाल एयरलाइन्स, पोस्ट डिलीट करके भाग जाने से काम नहीं चलेगा। जवाब देना पड़ेगा। माफी मांगिए या फिर मंशा बताइए की क्यों ऐसा किए? इतना शांत और अच्छा पड़ोसी आखिर किस मजबूरी में ऐसा गलती करने लगा?’ नेपाल एयरलाइन्स ने मांगी माफी कश्मीर की बॉर्डर को गलत तरह से दर्शाने के बाद नेपाल एयरलाइन्स ने पोस्ट डिलीट की और फिर माफी मांगते हुए लिखा, हम हाल ही में अपने सोशल मीडिया चैनलों पर साझा किए गए नेटवर्क मैप में हुई गलती के लिए ईमानदारी से क्षमा प्रार्थी हैं। उस मानचित्र में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से संबंधित गंभीर मानचित्रण त्रुटियां थीं, जो नेपाल या नेपाल एयरलाइंस की आधिकारिक स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करती हैं।

मुकेश खन्ना बोले- रणवीर सिंह के चेहरे पर नेगेटिविटी है:वो शक्तिमान के रोल के लिए सही नहीं; किलविश का रोल कर सकते हैं

मुकेश खन्ना बोले- रणवीर सिंह के चेहरे पर नेगेटिविटी है:वो शक्तिमान के रोल के लिए सही नहीं; किलविश का रोल कर सकते हैं

एक्टर मुकेश खन्ना ने रणवीर सिंह को एक बार फिर ‘शक्तिमान’ के रोल के लिए सही नहीं बताया। उन्होंने कहा कि रणवीर के चेहरे पर “नेगेटिविटी” दिखती है, इसलिए वे उन्हें इस किरदार में नहीं देखना चाहते, हालांकि उनकी एक्टिंग की तारीफ की। ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ में रोल के लिए रणवीर सिंह को इन दिनों काफी सराहना मिल रही है। दोनों ही फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। वहीं हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में जब मुकेश खन्ना से पूछा गया कि ‘धुरंधर’ देखने के बाद रणवीर सिंह को लेकर क्या उनकी राय बदली है, तो उन्होंने कहा, “सब लोग मुझे मनाने में लगे हैं कि फिल्म चल गई, अब रणवीर बहुत बड़े एक्टर बन गए हैं, लेकिन मैं शक्तिमान के लिए बड़ा स्टार नहीं चाहता। मुझे उस रोल के लिए एक खास इमेज चाहिए, जो मुझे रणवीर में नहीं दिखती। इसलिए मैंने इसका विरोध किया। मैं उनकी एक्टिंग के खिलाफ नहीं हूं।” किलविश के रोल के लिए सही बताया अपने विरोध की वजह बताते हुए खन्ना ने कहा, “वो (रणवीर सिंह) अलाउद्दीन खिलजी जैसा किरदार कर सकता है, ‘गली बॉय’ कर चुका है, ‘धुरंधर’ भी बहुत अच्छा किया है, मैंने उसकी तारीफ भी की, लेकिन मेरे लिए शक्तिमान बनने के लिए सिर्फ अच्छा एक्टर होना काफी नहीं है, एक खास चेहरा भी चाहिए। वो चेहरा शक्तिमान पर सूट करना चाहिए। मेरा विरोध सिर्फ इतना है कि उसकी आंखों में शक्तिमान दिखना चाहिए। जब वो खड़ा हो, तो उसमें कोई चालाकी नहीं दिखनी चाहिए। मैं रणवीर को किलविश (विलेन) के रोल में साइन कर सकता हूं, लेकिन शक्तिमान के लिए नहीं। उसके चेहरे पर नेगेटिविटी दिखती है, पॉजिटिविटी नहीं।” वहीं शक्तिमान पर फिल्म बनने को लेकर उन्होंने कहा, “फिल्म आनी चाहिए, जरूर आनी चाहिए। रुकावट के लिए खेद है। सब जानते हैं कि दिक्कत क्या है और मेरा विरोध क्या है।”

देवास में पेड़ पर लटका मिला युवक का शव:दो दिन पहले निर्माणाधीन मकान के काम के सिलसिले में आया था

देवास में पेड़ पर लटका मिला युवक का शव:दो दिन पहले निर्माणाधीन मकान के काम के सिलसिले में आया था

देवास के कंचनपुर क्षेत्र में एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। युवक का शव उसके निर्माणाधीन मकान के पास एक पेड़ पर लटका मिला। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। मृतक की पहचान बिलासा निवासी सुमेर सिंह चौहान के रूप में हुई है। वह दो दिन पहले ही कंचनपुर में अपने निर्माणाधीन मकान के काम के सिलसिले में आए थे और वहीं रह रहे थे। गुरुवार सुबह आसपास के लोगों ने उन्हें पेड़ पर लटका देखा। इसी दौरान मृतक का भतीजा आदित्य यादव नवादा से उनके लिए खाना लेकर पहुंचा, जिसने घटना की जानकारी दी। सूचना मिलने पर परिजन भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने शव को पेड़ से उतारकर जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

बीच सड़क पर नीतू कपूर और रणबीर ने किया डांस:साथ में पोज भी दिए, मां ने बेटे को गले लगाकर किया किस

बीच सड़क पर नीतू कपूर और रणबीर ने किया डांस:साथ में पोज भी दिए, मां ने बेटे को गले लगाकर किया किस

एक्ट्रेस नीतू कपूर और उनके बेटे रणबीर कपूर बुधवार को पैपराजी के सामने साथ डांस स्टेप्स करते नजर आए। यह वीडियो तब का है जब मुंबई में दोनों एक साथ स्पॉट हुए और पैपराजी को पोज दिए और डांस स्टेप्स भी करते दिखे। नीतू ने बेटे को गले लगाया और उनके गाल पर प्यार से किस किया। इस दौरान रणबीर कपूर ब्लू डेनिम जींस और लेमन कलर की शर्ट में दिखे, जबकि नीतू कपूर डेनिम जींस, व्हाइट-ब्लू शर्ट और ब्लेजर में नजर आईं। दोनों के इस अंदाज पर यूजर्स ने प्रतिक्रिया देते हुए उनकी जोड़ी और बॉन्डिंग की तारीफ की है। नीतू कपूर फिल्म ‘दादी की शादी’ में आएंगी नजर गौरतलब, नीतू कपूर (नीतू सिंह) 70 और 80 के दशक की चर्चित अभिनेत्री रही हैं और उन्होंने ‘अमर अकबर एंथोनी’, ‘दीवार’ और ‘धर्मवीर’ जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया है। 67 की उम्र में भी वे फिल्मों में एक्टिव हैं। जल्द ही वो फिल्म ‘दादी की शादी’ में नजर आएंगी, जो 8 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इस फिल्म में वह कपिल शर्मा के साथ मुख्य भूमिका में हैं। खास बात यह है कि इस फिल्म से नीतू सिंह की बेटी रिद्धिमा कपूर साहनी भी अपना एक्टिंग डेब्यू कर रही हैं। वहीं रणबीर कपूर के वर्कफ्रंट की बात करें तो वो डायरेक्टर नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभाते दिखेंगे और यह फिल्म दिवाली पर रिलीज होने वाली है। इसके अलावा वे संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘लव एंड वॉर’ में आलिया भट्ट और विक्की कौशल के साथ नजर आएंगे। फिल्म 21 जनवरी 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

सहायक कृषि अधिकारी भर्ती-5 मई से भर सकते आवेदन-फॉर्म:एग्जाम में 166 अयोग्य घोषित; जानिए-कितने पदों पर भर्ती और कितने कैंडिडेट्स सिलेक्ट

सहायक कृषि अधिकारी भर्ती-5 मई से भर सकते आवेदन-फॉर्म:एग्जाम में 166 अयोग्य घोषित; जानिए-कितने पदों पर भर्ती और कितने कैंडिडेट्स सिलेक्ट

राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से सहायक कृषि अधिकारी (कृषि विभाग) भर्ती-2024 के तहत पात्रता जांच के लिए 400 कैंडिडेट्स की सूची जारी कर दी है। ये भर्ती 125 पदों के लिए थी। ऑनलाइन डिटेल आवेदन फॉर्म भरने के लिए 5 से 11 मई 2026 (रात्रि 11.59) तक लिंक खोला जाएगा। परीक्षा में 10% से ज्यादा प्रश्नों में पांच विकल्पों में से कोई भी विकल्प नहीं भरने के कारण 166 अभ्यर्थियों को अयोग्य घोषित किया है। आयोग सचिव रामनिवास मेहता ने बताया कि सहायक कृषि अधिकारी के प्रथम प्रश्न पत्र की परीक्षा 12 अक्टूबर एवं द्वितीय प्रश्न पत्र की परीक्षा का आयोजन 13 अक्टूबर 2025 को किया गया था। अंतिम रूप से सफल अभ्यर्थियों की सूची कृषि विभाग की ओर से दस्तावेज सत्यापन कराए जाने के बाद आयोग द्वारा जारी की जाएगी। कृषि विभाग करेगा डॉक्यूमेंट्स वैरीफिकेशन कैंडिडेट्स अपने एसएसओ आईडी के माध्यम से रिक्रूटमेंट पोर्टल पर माय रिक्रूटमेंट-डीटेल्ड फॉर्म कम स्क्रूटनी- अप्लाई नाउ का चयन कर अपना विस्तृत आवेदन पत्र ऑनलाइन भरें। विस्तृत आवेदन-पत्र व दस्तावेजों की जांच संबंधित विभाग (कृषि विभाग) की ओर से ही की जाएगी। इसलिए ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने और सबमिट करने के बाद प्रिंट ऑप्शन पर जाकर सम्पूर्ण विस्तृत आवेदन-पत्र को 2 प्रतियों में प्रिंट कर अपने पास संभाल कर रखें। कृषि विभाग की सूचना के अनुसार निर्धारित दिनांक, समय व स्थान पर कैंडिडेट्स को उपस्थित होना होगा। संबंधित विभाग की ओर से ही उचित माध्यम से अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के लिए सूचित किया जाएगा। विभाग की ओर से दस्तावेज सत्यापन के लिए निर्धारित तिथि को उपस्थित नहीं होने पर अभ्यर्थी को अपात्र मानते हुए परिणाम में शामिल नहीं किया जायेगा। अभ्यर्थियों की पात्रता जांच विज्ञापन की शर्तों व नियमों के अनुसार की जाएगी। पात्रता की समस्त शर्तें नियमानुसार पूर्ण नहीं करने वाले अभ्यर्थियों की पात्रता आयोग द्वारा रद्द कर दी जाएगी।

रुपया रिकॉर्ड ऑल टाइम लो पर आया:1 डॉलर की कीमत 95.20 रुपए हुई, इससे महंगाई बढ़ने का खतरा

रुपया रिकॉर्ड ऑल टाइम लो पर आया:1 डॉलर की कीमत 95.20 रुपए हुई, इससे महंगाई बढ़ने का खतरा

भारतीय रुपया आज यानी 30 अप्रैल को डॉलर के मुकाबले 95.20 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। मिडिल ईस्ट युद्ध और एनर्जी सप्लाई रुकावटों से यह गिरावट आई। विदेशी ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन के मुताबिक, ईरान युद्ध जारी रहा तो रुपया 98 तक जा सकता है। विदेशी निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली और वैश्विक स्तर पर बढ़ते व्यापारिक तनाव की वजह से रुपए में यह गिरावट देखी जा रही है। साल 2026 की शुरुआत से ही रुपया दबाव में है। पिछले साल दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर के पार गया था। डॉलर महंगा, भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा मिडिल ईस्ट संघर्ष को दशकों का सबसे गंभीर एनर्जी संकट माना जा रहा है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। करेंसी की कीमत कैसे तय होती है? डॉलर के मुकाबले किसी करेंसी की वैल्यू घटे तो उसे मुद्रा का गिरना या कमजोरी (करेंसी डेप्रिसिएशन) कहते हैं। हर देश के पास फॉरेन करेंसी रिजर्व होता है, जिससे इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन होते हैं। इसके घटने-बढ़ने का असर करेंसी पर पड़ता है। अगर भारत के फॉरेन रिजर्व में डॉलर पर्याप्त होंगे तो रुपया स्थिर रहेगा। डॉलर घटे तो रुपया कमजोर, बढ़े तो मजबूत होगा।

रुपया रिकॉर्ड ऑल टाइम लो पर आया:1 डॉलर की कीमत 95.20 रुपए हुई, इससे महंगाई बढ़ने का खतरा

रुपया रिकॉर्ड ऑल टाइम लो पर आया:1 डॉलर की कीमत 95.20 रुपए हुई, इससे महंगाई बढ़ने का खतरा

भारतीय रुपया आज यानी 30 अप्रैल को डॉलर के मुकाबले 95.20 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। मिडिल ईस्ट युद्ध और एनर्जी सप्लाई रुकावटों से यह गिरावट आई। विदेशी ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन के मुताबिक, ईरान युद्ध जारी रहा तो रुपया 98 तक जा सकता है। विदेशी निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली और वैश्विक स्तर पर बढ़ते व्यापारिक तनाव की वजह से रुपए में यह गिरावट देखी जा रही है। साल 2026 की शुरुआत से ही रुपया दबाव में है। पिछले साल दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर के पार गया था। डॉलर महंगा, भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा मिडिल ईस्ट संघर्ष को दशकों का सबसे गंभीर एनर्जी संकट माना जा रहा है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। करेंसी की कीमत कैसे तय होती है? डॉलर के मुकाबले किसी करेंसी की वैल्यू घटे तो उसे मुद्रा का गिरना या कमजोरी (करेंसी डेप्रिसिएशन) कहते हैं। हर देश के पास फॉरेन करेंसी रिजर्व होता है, जिससे इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन होते हैं। इसके घटने-बढ़ने का असर करेंसी पर पड़ता है। अगर भारत के फॉरेन रिजर्व में डॉलर पर्याप्त होंगे तो रुपया स्थिर रहेगा। डॉलर घटे तो रुपया कमजोर, बढ़े तो मजबूत होगा।