Thursday, 30 Jul 2026 | 10:22 PM

Trending :

EXCLUSIVE

सऊदी क्राउन प्रिंस का सलाहकार बनना चाहता था एपस्टीन:प्राइवेट आइलैंड पर ‘मस्जिद’ बनवाई, सोने का गुंबद, मक्का से कपड़े और उजबेकिस्तान से टाइल्स मंगवाए

सऊदी क्राउन प्रिंस का सलाहकार बनना चाहता था एपस्टीन:प्राइवेट आइलैंड पर ‘मस्जिद’ बनवाई, सोने का गुंबद, मक्का से कपड़े और उजबेकिस्तान से टाइल्स मंगवाए

सेक्स अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में कई साल तक अपने संबंध बनाए। वह एक तरफ बिजनेस के मौके ढूंढ रहा था, और दूसरी तरफ इस्लाम से जुड़ी दुर्लभ और धार्मिक चीजें भी इकट्ठा कर रहा था। उसने इन चीजों को अपने कैरेबियन द्वीप पर बनी एक विवादित इमारत को सजाने में इस्तेमाल किया, जिसे वह ‘मस्जिद’ कहता था। उसने मक्का की काबा से किस्वा मंगवाई। किस्वा वह कपड़ा होता है जिस पर सोने से कुरान की आयतें कढ़ी होती हैं और इसे काबा पर चढ़ाया जाता है। इसके अलावा उजबेकिस्तान की एक मस्जिद से हाथ से बनी टाइल्स लाई गईं। सोने का गुंबद भी बनाया गया, जिसकी डिजाइन पुराने सीरिया की इमारतों जैसी थी। नार्वे राजदूत के जरिए खास लोगों से संपर्क बनाया एपस्टीन का मकसद सिर्फ इस्लामी चीजें जुटाना नहीं था, बल्कि ताकतवर और अमीर लोगों से अपने रिश्ते भी मजबूत करना था। नॉर्वे के राजनयिक टेरजे रोड-लार्सन के जरिए एपस्टीन को सऊदी अरब के खास लोगों तक पहुंच मिली। इनमें क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, सलाहकार राफत अल सब्बाग और शाही सहयोगी अजीजा अल अहमदी शामिल थे। इसी नेटवर्क की मदद से उसे काबा से जुड़े खास कपड़े भी मिले थे। 2014 की एक फोटो में एपस्टीन न्यूयॉर्क में अपने घर के अंदर फर्श पर फैले ऐसे ही एक कपड़े को देख रहा है। उसके साथ अमीरात के बड़े कारोबारी सुल्तान अहमद बिन सुलयेम भी मौजूद थे। बाद में एपस्टीन से जुड़े होने की वजह से उन्हें नुकसान उठाना पड़ा और उन्हें दुबई की बंदरगाह कंपनी डीपी वर्ल्ड के प्रमुख पद से इस्तीफा देना पड़ा।
एपस्टीन की इस्लामिक डिजाइन में काफी दिलचस्पी थी दस्तावेजों से उसके प्राइवलेंट आइलैंड लिटिल सेंट जेम्स पर बनी एक रहस्यमयी इमारत का सच भी सामने आया। पहले इसे म्यूजिक रूम, मंडप, चैपल या कोई रहस्यमयी मंदिर कहा जाता था, लेकिन उसके ईमेल और साथ काम करने वाले कलाकार की बातों से पता चला कि वह इसे ‘मस्जिद’ कहता था, हालांकि इसका इस्तेमाल कभी धार्मिक इबादत के लिए हुआ हो, इसका कोई सबूत नहीं है। इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले रोमानियाई कलाकार आयन निकोला ने भी बताया कि एपस्टीन इसे मस्जिद ही कहता था। यह भी पता चला कि इस मस्जिद की दीवारों या हिस्सों पर अरबी लिखावट (जैसे अल्लाह) लिखने का प्लान था। एक ईमेल में एपस्टीन ने यहां तक सुझाव दिया कि ‘अल्लाह’ लिखे अरबी शब्दों की जगह उसके अपने नाम के अक्षर J और E लिख दिए जाएं। रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि एपस्टीन को इस्लामी डिजाइन में काफी दिलचस्पी थी। 2003- उसने कहा था कि उसके पास बहुत बड़ा फारसी कालीन है जो शायद किसी मस्जिद से आया होगा। 2008- जब वह जेल में था, तब भी उसने अपने द्वीप पर एक हमाम (तुर्की स्नानघर) और इस्लामी शैली के बगीचे बनाने की योजना बनाई थी। 2009- जेल से बाहर आने से पहले उसने आर्किटेक्ट्स को ये डिजाइन तैयार करने के लिए कहा। 2011- उसने उजबेकिस्तान के एक संपर्क को लिखा कि उसे असली टाइल्स चाहिए जो मस्जिद की अंदरूनी दीवारों जैसी हों। 2013- उसने सीरिया के अलेप्पो में बने 15वीं सदी के यालबुगा हमाम की फोटो भेजकर कहा कि उसी तरह की डिजाइन बनाई जाए, जिसमें सुनहरी गुंबद, मेहराब और खास तरह की दीवारें हों। एपस्टीन खुद को ईमेल करके डिजाइन आइडिया भेजता था, जिनमें पुराने मिडिल ईस्ट की मस्जिदों की तस्वीरें शामिल होती थीं। क्राउन प्रिंस का सलाहकार बनना चाहता था एपस्टीन करीब 2010 के आसपास, एपस्टीन की दोस्ती नॉर्वे के राजनयिक टेरजे रोड-लार्सन से हुई। दोनों के बीच बिजनेस और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर लगातार बातचीत होती रहती थी। 2016 के दौरान उनकी बातचीत में सऊदी अरब ज्यादा आने लगा, क्योंकि उस समय मोहम्मद बिन सलमान देश की तेल कंपनी अरामको को शेयर बाजार में लाने की तैयारी कर रहे थे। एपस्टीन चाहता था कि वह उनका फाइनेंशियल सलाहकार बने। रोड-लार्सन ने उसकी मुलाकात राफत अल सब्बाग (शाही सलाहकार) और अजीजा अल अहमदी (शाही सहयोगी) से करवाई। इनके जरिए एपस्टीन ने क्राउन प्रिंस तक पहुंच बनाने की कोशिश की। उसने न्यूयॉर्क में इनसे मुलाकात की और प्रिंस से सीधे मिलकर अपने अलग तरह के आइडिया पेश करना चाहा, जैसे मुसलमानों के लिए ‘शरिया’ नाम की नई करेंसी बनाना। फिर उसे सऊदी अरब आने का न्योता मिला। अजीजा अल अहमदी ने एपस्टीन से कहा कि जब वह सऊदी अरब के दूतावास जाए, तो वहां के अधिकारियों से यह बोले कि उसे खुद मोहम्मद बिन सलमान ने बुलाया है। सऊदी पहुंचने के बाद एपस्टीन ने रोड-लार्सन को अपनी और प्रिंस की दो तस्वीरें भेजीं, जिन्हें बाद में उसने अपने घर में भी लगाया। 2017 की शुरुआत में अजीजा अल अहमदी और एपस्टीन न्यूयॉर्क में मिले। उस समय उनके नीचे काम करने वाले लोग आपस में ईमेल या मैसेज के जरिए बात कर रहे थे। वे यह तय कर रहे थे कि सऊदी अरब से कुछ सामान जैसे एक तंबू और दूसरी चीजें एपस्टीन के प्राइवेट आइलैंड पर भेजी जाएं। एपस्टीन के स्टाफ ने एक कस्टम एजेंट से कहा कि उन्हें काबा से 3 कपड़ें मिल रहे हैं। एक जो काबा के अंदर इस्तेमाल हुआ था
दूसरा किस्वा जो बाहर ढका रहता है
और तीसरा उसी खास फैक्ट्री का बना हुआ था किस्वा का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व होता है। इसे हर साल सैकड़ों कारीगर बनाते हैं। इसमें करीब 700 किलो रेशम और 115 किलो सोने-चांदी के धागे का इस्तेमाल होता है। इसकी कीमत करीब 50 लाख डॉलर होती है। जब इसे बदला जाता है, तो इसके टुकड़े खास संस्थाओं या सम्मानित लोगों को दे दिए जाते हैं। अजीजा अल अहमदी ने एक ईमेल में लिखा कि जो काला कपड़ा भेजा गया है, उसे कम से कम 1 करोड़ मुसलमान छू चुके हैं। लोग काबा के सात चक्कर लगाते हैं और इस कपड़े को छूकर अपनी दुआएं और उम्मीदें जोड़ते हैं। यह साफ नहीं है कि ये चीजें उन्हें कैसे मिलीं। इस बारे में न तो उन्होंने और न ही सऊदी सरकार ने कोई जवाब दिया। सलाहकार नहीं बन पाने पर नाराज हुआ था एपस्टीन 2017 में हरिकेन मारिया तूफान आया, जिससे एपस्टीन के आइलैंड पर काफी नुकसान हुआ और उसकी मस्जिद में रखी कुछ चीजें टूट गईं या खराब हो गईं। इसी बीच एक और समस्या खड़ी हो गई। मोहम्मद बिन सलमान क्राउन प्रिंस बन गए और उन्होंने एपस्टीन की सलाह को नजरअंदाज कर दिया, जिससे वह नाराज हो गया। उसने एक मैसेज में लिखा कि “अगर मेरी सलाह मानी होती तो सऊदी को इतनी महंगी मदद की जरूरत नहीं पड़ती।” हालांकि यह पता नहीं चला है कि वह किस खर्च की बात कर रहा था। 2018 में जब पत्रकार जमाल खशोगी की इस्तांबुल में हत्या हुई, तो एपस्टीन ने इस पर भी रोड-लार्सन से बात की। रोड-लार्सन ने जवाब दिया, “उनके सिर पर एक काला साया है, और यह हटने वाला नहीं है।” यह बात जल्द ही एपस्टीन पर भी सही साबित हुई। कुछ ही समय बाद उसका एक पुराना केस (2008) खुल गया और उसका पतन शुरू हो गया। जुलाई 2019 में उसे फिर से गिरफ्तार किया गया। 8 अगस्त को आइलैंड का मालिकाना हक एक ट्रस्ट को दे दिया गया। 10 अगस्त को मैनहट्टन की जेल में उसने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
कांग्रेस नेताओं ने लगाए कटनी पुलिस पर आरोप:कहा- अपराध बढ़े, अफसर शराब पकड़ने और चालान काटने में लगे

February 22, 2026/
6:52 pm

कटनी में बढ़ते अपराधों और पुलिस की निष्क्रियता को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ आक्रामक...

बंगाल एग्जिट पोल लाइव स्ट्रीमिंग: बीजेपी की बनेगी सरकार या ममता के सिर फिर सजेगा ताज? कब-कहाँ देखें बंगाल चुनाव सर्वेक्षण

April 28, 2026/
4:47 pm

पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल 2026 लाइव स्ट्रीमिंग: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के तहत 29 अप्रैल...

E20 के बाद E85 फ्लेक्स-फ्यूल की तैयारी में भारत:माइलेज 30% तक कम हो सकता है; कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य

April 28, 2026/
1:30 pm

ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच कच्चे तेल के सप्लाई संकट को देखते हुए भारत सरकार अब E85 फ्लेक्स-फ्यूल की ओर कदम...

CBSE Results 2026

April 6, 2026/
9:35 am

आखरी अपडेट:06 अप्रैल, 2026, 09:35 IST इडुक्की कांग्रेस नेता सीपी मैथ्यू ने कथित तौर पर सुझाव दिया कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों...

झाबुआ में पारा 43.8°C पहुंचा, लू का प्रकोप:सड़कों पर सन्नाटा; डॉक्टरों ने धूप से बचने, हाइड्रेटेड रहने की दी सलाह

April 28, 2026/
10:38 am

झाबुआ में पिछले सात दिनों में तापमान में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल के अंतिम हफ्ते में...

सिंगरौली में युवक का शव नदी में मिला:पत्नी से विवाद के बाद लापता था, चार दिन बाद मिली लाश

March 10, 2026/
8:50 pm

सिंगरौली जिले के मोरवा थाना क्षेत्र के पेड़ताली गांव में अपनी पत्नी से विवाद के बाद घर में आग लगाने...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

सऊदी क्राउन प्रिंस का सलाहकार बनना चाहता था एपस्टीन:प्राइवेट आइलैंड पर ‘मस्जिद’ बनवाई, सोने का गुंबद, मक्का से कपड़े और उजबेकिस्तान से टाइल्स मंगवाए

सऊदी क्राउन प्रिंस का सलाहकार बनना चाहता था एपस्टीन:प्राइवेट आइलैंड पर ‘मस्जिद’ बनवाई, सोने का गुंबद, मक्का से कपड़े और उजबेकिस्तान से टाइल्स मंगवाए

सेक्स अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में कई साल तक अपने संबंध बनाए। वह एक तरफ बिजनेस के मौके ढूंढ रहा था, और दूसरी तरफ इस्लाम से जुड़ी दुर्लभ और धार्मिक चीजें भी इकट्ठा कर रहा था। उसने इन चीजों को अपने कैरेबियन द्वीप पर बनी एक विवादित इमारत को सजाने में इस्तेमाल किया, जिसे वह ‘मस्जिद’ कहता था। उसने मक्का की काबा से किस्वा मंगवाई। किस्वा वह कपड़ा होता है जिस पर सोने से कुरान की आयतें कढ़ी होती हैं और इसे काबा पर चढ़ाया जाता है। इसके अलावा उजबेकिस्तान की एक मस्जिद से हाथ से बनी टाइल्स लाई गईं। सोने का गुंबद भी बनाया गया, जिसकी डिजाइन पुराने सीरिया की इमारतों जैसी थी। नार्वे राजदूत के जरिए खास लोगों से संपर्क बनाया एपस्टीन का मकसद सिर्फ इस्लामी चीजें जुटाना नहीं था, बल्कि ताकतवर और अमीर लोगों से अपने रिश्ते भी मजबूत करना था। नॉर्वे के राजनयिक टेरजे रोड-लार्सन के जरिए एपस्टीन को सऊदी अरब के खास लोगों तक पहुंच मिली। इनमें क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, सलाहकार राफत अल सब्बाग और शाही सहयोगी अजीजा अल अहमदी शामिल थे। इसी नेटवर्क की मदद से उसे काबा से जुड़े खास कपड़े भी मिले थे। 2014 की एक फोटो में एपस्टीन न्यूयॉर्क में अपने घर के अंदर फर्श पर फैले ऐसे ही एक कपड़े को देख रहा है। उसके साथ अमीरात के बड़े कारोबारी सुल्तान अहमद बिन सुलयेम भी मौजूद थे। बाद में एपस्टीन से जुड़े होने की वजह से उन्हें नुकसान उठाना पड़ा और उन्हें दुबई की बंदरगाह कंपनी डीपी वर्ल्ड के प्रमुख पद से इस्तीफा देना पड़ा।
एपस्टीन की इस्लामिक डिजाइन में काफी दिलचस्पी थी दस्तावेजों से उसके प्राइवलेंट आइलैंड लिटिल सेंट जेम्स पर बनी एक रहस्यमयी इमारत का सच भी सामने आया। पहले इसे म्यूजिक रूम, मंडप, चैपल या कोई रहस्यमयी मंदिर कहा जाता था, लेकिन उसके ईमेल और साथ काम करने वाले कलाकार की बातों से पता चला कि वह इसे ‘मस्जिद’ कहता था, हालांकि इसका इस्तेमाल कभी धार्मिक इबादत के लिए हुआ हो, इसका कोई सबूत नहीं है। इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले रोमानियाई कलाकार आयन निकोला ने भी बताया कि एपस्टीन इसे मस्जिद ही कहता था। यह भी पता चला कि इस मस्जिद की दीवारों या हिस्सों पर अरबी लिखावट (जैसे अल्लाह) लिखने का प्लान था। एक ईमेल में एपस्टीन ने यहां तक सुझाव दिया कि ‘अल्लाह’ लिखे अरबी शब्दों की जगह उसके अपने नाम के अक्षर J और E लिख दिए जाएं। रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि एपस्टीन को इस्लामी डिजाइन में काफी दिलचस्पी थी। 2003- उसने कहा था कि उसके पास बहुत बड़ा फारसी कालीन है जो शायद किसी मस्जिद से आया होगा। 2008- जब वह जेल में था, तब भी उसने अपने द्वीप पर एक हमाम (तुर्की स्नानघर) और इस्लामी शैली के बगीचे बनाने की योजना बनाई थी। 2009- जेल से बाहर आने से पहले उसने आर्किटेक्ट्स को ये डिजाइन तैयार करने के लिए कहा। 2011- उसने उजबेकिस्तान के एक संपर्क को लिखा कि उसे असली टाइल्स चाहिए जो मस्जिद की अंदरूनी दीवारों जैसी हों। 2013- उसने सीरिया के अलेप्पो में बने 15वीं सदी के यालबुगा हमाम की फोटो भेजकर कहा कि उसी तरह की डिजाइन बनाई जाए, जिसमें सुनहरी गुंबद, मेहराब और खास तरह की दीवारें हों। एपस्टीन खुद को ईमेल करके डिजाइन आइडिया भेजता था, जिनमें पुराने मिडिल ईस्ट की मस्जिदों की तस्वीरें शामिल होती थीं। क्राउन प्रिंस का सलाहकार बनना चाहता था एपस्टीन करीब 2010 के आसपास, एपस्टीन की दोस्ती नॉर्वे के राजनयिक टेरजे रोड-लार्सन से हुई। दोनों के बीच बिजनेस और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर लगातार बातचीत होती रहती थी। 2016 के दौरान उनकी बातचीत में सऊदी अरब ज्यादा आने लगा, क्योंकि उस समय मोहम्मद बिन सलमान देश की तेल कंपनी अरामको को शेयर बाजार में लाने की तैयारी कर रहे थे। एपस्टीन चाहता था कि वह उनका फाइनेंशियल सलाहकार बने। रोड-लार्सन ने उसकी मुलाकात राफत अल सब्बाग (शाही सलाहकार) और अजीजा अल अहमदी (शाही सहयोगी) से करवाई। इनके जरिए एपस्टीन ने क्राउन प्रिंस तक पहुंच बनाने की कोशिश की। उसने न्यूयॉर्क में इनसे मुलाकात की और प्रिंस से सीधे मिलकर अपने अलग तरह के आइडिया पेश करना चाहा, जैसे मुसलमानों के लिए ‘शरिया’ नाम की नई करेंसी बनाना। फिर उसे सऊदी अरब आने का न्योता मिला। अजीजा अल अहमदी ने एपस्टीन से कहा कि जब वह सऊदी अरब के दूतावास जाए, तो वहां के अधिकारियों से यह बोले कि उसे खुद मोहम्मद बिन सलमान ने बुलाया है। सऊदी पहुंचने के बाद एपस्टीन ने रोड-लार्सन को अपनी और प्रिंस की दो तस्वीरें भेजीं, जिन्हें बाद में उसने अपने घर में भी लगाया। 2017 की शुरुआत में अजीजा अल अहमदी और एपस्टीन न्यूयॉर्क में मिले। उस समय उनके नीचे काम करने वाले लोग आपस में ईमेल या मैसेज के जरिए बात कर रहे थे। वे यह तय कर रहे थे कि सऊदी अरब से कुछ सामान जैसे एक तंबू और दूसरी चीजें एपस्टीन के प्राइवेट आइलैंड पर भेजी जाएं। एपस्टीन के स्टाफ ने एक कस्टम एजेंट से कहा कि उन्हें काबा से 3 कपड़ें मिल रहे हैं। एक जो काबा के अंदर इस्तेमाल हुआ था
दूसरा किस्वा जो बाहर ढका रहता है
और तीसरा उसी खास फैक्ट्री का बना हुआ था किस्वा का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व होता है। इसे हर साल सैकड़ों कारीगर बनाते हैं। इसमें करीब 700 किलो रेशम और 115 किलो सोने-चांदी के धागे का इस्तेमाल होता है। इसकी कीमत करीब 50 लाख डॉलर होती है। जब इसे बदला जाता है, तो इसके टुकड़े खास संस्थाओं या सम्मानित लोगों को दे दिए जाते हैं। अजीजा अल अहमदी ने एक ईमेल में लिखा कि जो काला कपड़ा भेजा गया है, उसे कम से कम 1 करोड़ मुसलमान छू चुके हैं। लोग काबा के सात चक्कर लगाते हैं और इस कपड़े को छूकर अपनी दुआएं और उम्मीदें जोड़ते हैं। यह साफ नहीं है कि ये चीजें उन्हें कैसे मिलीं। इस बारे में न तो उन्होंने और न ही सऊदी सरकार ने कोई जवाब दिया। सलाहकार नहीं बन पाने पर नाराज हुआ था एपस्टीन 2017 में हरिकेन मारिया तूफान आया, जिससे एपस्टीन के आइलैंड पर काफी नुकसान हुआ और उसकी मस्जिद में रखी कुछ चीजें टूट गईं या खराब हो गईं। इसी बीच एक और समस्या खड़ी हो गई। मोहम्मद बिन सलमान क्राउन प्रिंस बन गए और उन्होंने एपस्टीन की सलाह को नजरअंदाज कर दिया, जिससे वह नाराज हो गया। उसने एक मैसेज में लिखा कि “अगर मेरी सलाह मानी होती तो सऊदी को इतनी महंगी मदद की जरूरत नहीं पड़ती।” हालांकि यह पता नहीं चला है कि वह किस खर्च की बात कर रहा था। 2018 में जब पत्रकार जमाल खशोगी की इस्तांबुल में हत्या हुई, तो एपस्टीन ने इस पर भी रोड-लार्सन से बात की। रोड-लार्सन ने जवाब दिया, “उनके सिर पर एक काला साया है, और यह हटने वाला नहीं है।” यह बात जल्द ही एपस्टीन पर भी सही साबित हुई। कुछ ही समय बाद उसका एक पुराना केस (2008) खुल गया और उसका पतन शुरू हो गया। जुलाई 2019 में उसे फिर से गिरफ्तार किया गया। 8 अगस्त को आइलैंड का मालिकाना हक एक ट्रस्ट को दे दिया गया। 10 अगस्त को मैनहट्टन की जेल में उसने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.