अमिताभ बच्चन ने अयोध्या में 2.67 एकड़ जमीन खरीदी:15 मिनट की दूरी पर राम मंदिर; BIG B का यहां तीसरी बड़ी संपत्ति

बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अयोध्या में फिर जमीन खरीदी है। इस बार उन्होंने 2.67 एकड़ यानी 4.27 बीघा जमीन खरीदी है। इसकी कीमत करीब 35 करोड़ रुपए है। यह प्रॉपर्टी मुंबई बेस्ड डेवलपर ‘द हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा’ (HoABL) से ली गई है। कंपनी के मुताबिक, शुक्रवार को जमीन की रजिस्ट्री हुई। जमीन 75 एकड़ में बन रहे लग्जरी प्रोजेक्ट ‘द सरयू’ के पास और राम मंदिर से महज 15-20 मिनट की दूरी पर है। डील की प्रक्रिया AB कॉर्प लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश यादव के जरिए की गई। अयोध्या में अमिताभ बच्चन का यह तीसरा और कंपनी में चौथा इन्वेस्टमेंट है। कब-कब जमीनें खरीदी देखिए 2 तस्वीरें.. जनवरी, 2024 में 86 लाख की 2 बीघा जमीन खरीदी थी अमिताभ बच्चन ने इससे पहले अयोध्या में 31 जनवरी, 2024 को 2 बीघा (करीब 5,069 वर्ग मीटर) जमीन खरीदी थी। इसकी कीमत 86 लाख रुपए से ज्यादा बताई गई थी। अमिताभ ने यह जमीन अपने पिता हरिवंश राय बच्चन के मेमोरियल ट्रस्ट के नाम पर ली थी। अमिताभ बच्चन का यह प्लॉट तिहुरा मांझा इलाके में स्थित है। यहां से राम मंदिर की दूरी करीब 7 किलोमीटर है, यानी उन्हें मंदिर पहुंचने में लगभग 15-20 मिनट लगेंगे। 9 फरवरी 2024 को अमिताभ बच्चन रामलला के दर्शन करने अयोध्या पहुंचे थे। उस समय उन्होंने कहा था- अब अयोध्या आना-जाना लगा रहेगा। मैं हमेशा छोरा गंगा किनारे वाला हूं। सरयू किनारे बस रही 75 एकड़ में कॉलोनी लोढ़ा ग्रुप की कॉलोनी सरयू नदी के किनारे बस रही है, जिसका नाम ‘द सरयू’ रखा गया है। यह कॉलोनी करीब 75 एकड़ में फैली हुई है। 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद पहली बार अमिताभ बच्चन के यहां जमीन खरीदने की चर्चा सामने आई थी। उस समय अभिनंदन लोढ़ा ग्रुप के प्रतिनिधि ने बताया था कि सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी इस कॉलोनी में जमीन लेने वाले हैं। उस दौरान अमिताभ बच्चन के जमीन खरीदने की खबरें काफी सुर्खियों में रहीं। कहा गया था कि उन्होंने करीब 10,000 वर्ग फीट का प्लॉट लिया है, जिसकी कीमत लगभग 14.5 करोड़ रुपए बताई गई थी। द सरयू प्रोजेक्ट का कुछ ऐसा है लेआउट… अभिनंदन लोढ़ा को जानिए… अभिनंदन लोढ़ा ‘द हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा के फाउंडर और चेयरमैन हैं, जो देश में प्लॉटेड डेवलपमेंट और लैंड प्रोजेक्ट्स के लिए जानी जाती है। वे रियल एस्टेट टाइकून मंगल प्रभात लोढ़ा के बेटे हैं। उनके बड़े भाई अभिषेक लोढ़ा मैक्रोटेक डेवलपर्स (लोढ़ा ग्रुप) का नेतृत्व करते हैं। कुछ साल पहले परिवार के बिजनेस का अलग-अलग संचालन तय हुआ, जिसके बाद अभिनंदन ने अपनी अलग कंपनी शुरू की। पिछले चार साल में ‘द हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा’ ने 150 एकड़ जमीन अधिगृहीत की है। कंपनी महाराष्ट्र में दापोली और अलीबाग, अयोध्या और गोवा में बड़े पैमाने पर डिलीवरी की तैयारी कर रही है। उत्तर प्रदेश में भी भारी निवेश किया जा रहा है। 3 हजार करोड़ के निवेश के साथ अयोध्या में बदलाव ला रहे हैं। सिर्फ अयोध्या के लिए 1,200 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट शामिल हैं। कंपनी की एक प्रमुख परियोजना द सरयू है। यह 75 एकड़ का लग्जरी प्रोजेक्ट है, जिसमें भारत का पहला पूरी तरह शाकाहारी 5 स्टार होटल भी शामिल है। इसका मैनेजमेंट होटल चेन ‘द लीला’ की तरफ से किया जा रहा है। हर साल 5.75 करोड़ श्रद्धालु आते हैं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मंदिर निर्माण से पहले अयोध्या में हर साल करीब 5.75 करोड़ श्रद्धालु आते थे। वहीं जनवरी से जून 2025 के बीच यह संख्या बढ़कर करीब 23 करोड़ तक पहुंच गई। अनुमान है कि 2026 के अंत तक यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 50 करोड़ से भी ज्यादा हो सकती है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर 85 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च पिछले कुछ सालों में अयोध्या में सड़कों, रेलवे, एयरपोर्ट और शहरी विकास से जुड़ी परियोजनाओं पर 85 हजार करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया गया है। इसी वजह से अयोध्या अब सिर्फ धार्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि रियल एस्टेट निवेश का बड़ा केंद्र भी बनती जा रही है। कंपनी चेयरमैन बोले-जमीन एक पीढ़ियों की विरासत हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा के चेयरमैन अभिनंदन लोढ़ा ने कहा- अयोध्या में जमीन केवल एक संपत्ति नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक सुरक्षित रहने वाली विरासत है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ती कनेक्टिविटी के कारण यहां लंबे समय के निवेश की संभावनाएं लगातार मजबूत हो रही हैं। ———————————- ये खबर भी पढ़िए… यूपी में बिक रहा मिलावटी तेल, 38 कंपनियों को नोटिस:6 करोड़ का सरसों का तेल जब्त; खाने से हो सकती है दिल की बीमारी यूपी में खाने के तेल में बड़े पैमाने पर मिलावट हो रही है। सरसों के तेल में घटिया तेल मिलाया जा रहा है। रंग और झाग के लिए केमिकल मिलाकर बनाया और बेचा जा रहा। इसका खुलासा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग (FSDA) की कार्रवाई में हुआ है। FSDA की जांच के दौरान कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए। उन्नाव और मुजफ्फरनगर में FIR दर्ज की गई है। 38 तेल कंपनियों और फर्मों को नोटिस जारी किया गया है। पढ़ें पूरी खबर…
कर्नाटक के ग्रामीण पुनर्गठन: मनरेगा विवाद के बाद सिद्धारमैया ने ग्राम पंचायतों का नाम बदलकर महात्मा गांधी के नाम पर रखा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 06, 2026, 16:51 IST सिद्धारमैया ने प्रमुख ग्रामीण रोजगार योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाकर मनरेगा को वीबी-जी रैम जी अधिनियम से बदलने के केंद्र के फैसले की आलोचना की। सिद्धारमैया ने भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र का कदम विचारधारा से प्रेरित है। (फ़ाइल छवि: News18) एक महीने पहले घोषित निर्णय को औपचारिक रूप देते हुए, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि राज्य भर में लगभग 6,000 ग्राम पंचायतों का नाम बदलकर “राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम को अमर” कर दिया जाएगा। सिद्धारमैया ने घोषणा की, “अब इसका नाम ‘महात्मा गांधी ग्राम पंचायत’ रखा जाएगा।” यह निर्णय केंद्र द्वारा मनरेगा कानून की जगह लेने और प्रमुख ग्रामीण रोजगार योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने के लिए विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी रैम जी) विधेयक, 2025 पेश करने के बाद आया है। योजना को बदलने और नाम बदलने के कदम को विपक्षी दलों की काफी आलोचना का सामना करना पड़ा, जिन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर कार्यक्रम से गांधी का नाम मिटाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। केंद्र सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि नई योजना एक “प्रमुख उन्नयन” थी जिसे पुरानी प्रणाली में संरचनात्मक कमजोरियों को दूर करने के लिए डिज़ाइन किया गया था और, जैसा कि ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था, यह “महात्मा गांधी की भावना” के अनुरूप था। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने भाजपा पर ग्रामीण कल्याण कार्यक्रमों से गांधी की विरासत को मिटाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। सिद्धारमैया ने कहा कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान शुरू की गई रोजगार योजना ने ग्रामीण आजीविका में बदलाव लाया है। उन्होंने पहले कहा, “मनरेगा के तहत, प्रत्येक ग्राम पंचायत को सालाना लगभग 1 करोड़ रुपये मिलते थे और ग्रामीण गरीबों, विशेषकर महिलाओं को 100 दिनों के रोजगार का आश्वासन दिया जाता था। वह गारंटी अब छीन ली जा रही है।” उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से देश भर में लाखों लोगों को लाभ हुआ है। मुख्यमंत्री के अनुसार, लाभार्थियों में 53 प्रतिशत महिलाएं थीं, 28 प्रतिशत एससी/एसटी समुदायों से थे, और लगभग पांच लाख विशेष रूप से सक्षम व्यक्ति थे। सिद्धारमैया ने भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि यह कदम विचारधारा से प्रेरित है। जनवरी में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा, “आरएसएस कार्यकर्ता गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या की और मोदी ने महात्मा गांधी के नाम पर बनाई गई जन-समर्थक योजना की हत्या कर दी है।” सिद्धारमैया ने विरोध प्रदर्शन के दौरान आरोप लगाया, “मनरेगा के तहत, पंचायतों के पास गरीबों और जरूरतमंदों को रोजगार देने की शक्ति थी। अब फैसले दिल्ली में लिए जाएंगे।” पहले प्रकाशित: मार्च 06, 2026, 16:51 IST समाचार राजनीति कर्नाटक का ग्रामीण पुनर्गठन: सिद्धारमैया ने मनरेगा विवाद के बाद ग्राम पंचायतों का नाम बदलकर महात्मा गांधी के नाम पर रखा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक(टी)कांग्रेस(टी)बीजेपी(टी)सिद्धारमैया(टी)महात्मा गांधी(टी)मनरेगा(टी)पंचायत(टी)रोजगार
वर्षा उसगांवकर समेत 5 एक्ट्रेस से ₹47 लाख की ठगी:प्रोड्यूसर के खिलाफ केस दर्ज; प्रॉपर्टी में निवेश के नाम पर फंसाया, पैसे मांगने पर धमकी दी

तिरंगा और दूध का कर्ज जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम करने वाली एक्ट्रेस वर्षा उसगांवकर लाखों की धोखाधड़ी का शिकार हो गई हैं। ऊषा के अलावा 4 अन्य एक्ट्रेसेस से भी धोखाधड़ी की गई है। जिसके बाद फिल्म निर्माता और बिल्डर अविनाश जाधव के खिलाफ मुंबई में शिकायत दर्ज की गई है। आरोप हैं कि अविनाश जाधव ने निवेश की आड़ में इन एक्ट्रेसेस से 47 लाख रुपए की ठगी की है। मराठी फिल्म और थिएटर एक्ट्रेस मृणालिनी सुभाष जांभले भी इन पीड़ितों में शामिल हैं। उन्होंने मुंबई के शिवाजी पार्क पुलिस में अविनाश जाधव के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है, जिसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। मुनाफे का लालच देकर ठगे पैसे शिकायत के अनुसार, आरोपी अविनाश जाधव लंबे समय से इन एक्ट्रेसेस को जानता था। जाधव ने खुद को एक बड़ा बिल्डर और फिल्म प्रोड्यूसर बताया था। उसने एक्ट्रेसेस को डोंबिवली स्थित एक कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में निवेश करने पर कम समय में ज्यादा मुनाफा देने का लालच दिया। उसने वादा किया था कि एक साल के अंदर ही वह पूरी मूल राशि लौटा देगा। नवंबर 2019 से फरवरी 2020 के बीच एक्ट्रेसेस ने निवेश करना शुरू कर दिया। मृणालिनी जांभले, वर्षा उसगांवकर और तीन अन्य लोगों ने मिलकर चेक और ऑनलाइन पेमेंट से कुल 47 लाख रुपए जाधव को दिए थे। शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए जाधव ने 4 लाख 52 हजार रुपए वापस भी किए, लेकिन इसके बाद उसने पैसे देना बंद कर दिया। जाधव ने नंबर बदला और धमकी दी पीड़ित एक्ट्रेसेस का आरोप है कि जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगने के लिए संपर्क किया, तो आरोपी ने अपना मोबाइल नंबर और पता बदल लिया। काफी तलाश के बाद जब एक्ट्रेसेस डोंबिवली पहुंचीं और उससे अपना हक मांगा, तो जाधव ने उन्हें धमकी दी। उसने साफ कह दिया कि वह पैसे नहीं लौटाएगा, जिसे जो करना है कर ले। इसके बाद ठगी का एहसास होने पर एक्ट्रेसेस ने पुलिस स्टेशन जाकर एफआईआर दर्ज कराई। आरोपी के खिलाफ आईपीसी की कई धाराओं में केस दर्ज शिवाजी पार्क पुलिस ने आरोपी अविनाश जाधव के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने इसी तरह और कितने लोगों को अपने जाल में फंसाया है। पुलिस जल्द ही आरोपी को पूछताछ के लिए समन भेज सकती है। फिल्मों में अभी भी एक्टिव हैं वर्षा उसगांवकर वर्षा उसगांवकर 90 के दशक की पॉपुलर एक्ट्रेस रही हैं। उन्होंने ‘हनीमून’, ‘तिरंगा’, ‘सोने की जंजीर’ और ‘घर आया मेरा परदेसी’ जैसी कई बड़ी हिंदी फिल्मों में काम किया है। हिंदी के साथ-साथ वह मराठी सिनेमा का भी जाना-माना नाम हैं और आज भी फिल्मों और सीरियल्स में काफी सक्रिय हैं।
रोहतक में बॉलीबुड सिंगर पर भड़के नवीन जयहिंद:बादशाह को भांडशाह बताया, बोले-लड़कियों को लेकर गाने में भरी अश्लीलता

बॉलीवुड सिंगर एवं रैपर बादशाह के आए नए गाने टटीरी को लेकर रोहतक में नवीन जयहिंद भड़क गए। उन्होंने कहा कि गाने में हरियाणा रोडवेज की बस का प्रयोग किया गया है। साथ ही लड़कियों से स्कूल ड्रेस में बस के ऊपर डांस करवाया गया है, जो गलत है। गाने में काफी अश्लीलता परोसी गई है, जिसको लेकर सभी लोगों को आवाज उठानी चाहिए। नवीन जयहिंद ने रैपर बादशाह को भांडशाह कहते हुए कहा कि हरियाणा रोडवेज की बस का प्रयोग एक गाने में रैपर बादशाह ने किया है, जिसके ऊपर लड़कियों को सरकारी स्कूल की ड्रेस में नचाया है। साथ ही गाने के बोल भी अश्लील है, जिसको लेकर तुरंत हरियाणा सरकार को हस्तक्षेप करते हुए बादशाह के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। विधानसभा में उठानी चाहिए आवाज नवीन जयहिंद ने कहा कि विधानसभा का सत्र चला हुआ है। ऐसे में विपक्ष के विधायकों को विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाना चाहिए। हरियाणा की बहन बेटियों के लिए एक व्यक्ति द्वारा अश्लील शब्दों का प्रयोग किया गया है, जिसके खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए। लड़कियों के फोन आए, रोने लगी नवीन जयहिंद ने कहा कि 3-4 लड़कियों के फोन आए है, जो फोन पर रोने लगी। लड़कियों ने बताया कि रास्ते में कुछ युवक उन्हें गाना गाकर छेड़ रहे हैं। क्योंकि गाने में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है। गाना बनाने वाले बेवकुफ नहीं है, जानबुझकर हरियाणा की लड़कियों को लेकर यह गाना बनाया गया है। परिवहन मंत्री को लेना चाहिए संज्ञान नवीन जयहिंद ने कहा कि हरियाणा रोडवेज की बस का प्रयोग गाने में किया गया, इस मामले में परिवहन मंत्री अनिल विज को संज्ञान लेना चाहिए। उनके विभाग की बस को कोई कैसे अश्लील गाने के लिए प्रयोग कर रहा है। कल को कोई अश्लील फिल्म बनाकर हरियाणा रोडवेज को बदनाम कर सकता है। शिक्षामंत्री करवाए मामले में जांच नवीन जयहिंद ने कहा कि इस मामले में शिक्षामंत्री को भी जांच करवानी चाहिए कि कौन से स्कूल की लड़कियों को स्कूल ड्रेस में बस के ऊपर नचाया गया है। यह गाने की वीडियो कहा शूट की गई है, इसको लेकर भी जांच होनी चाहिए। साथ ही सभी सरपंच, विधायक, नेता व मंत्रियों के साथ सामाजिक संगठनों को भी आवाज उठानी चाहिए।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाते ही कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री? बीजेपी 4 नामों पर विचार कर रही है | विशेष | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 06, 2026, 15:16 IST भारतीय जनता पार्टी की बिहार इकाई और व्यापक आरएसएस पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर, संभावित मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के रूप में कम से कम चार नामों पर चर्चा हो रही है। नीतीश का सबसे स्थायी राजनीतिक योगदान मतदाताओं का उनका ‘उप-वर्गीकरण’ था। (फ़ाइल तस्वीर: पीटीआई) बिहार के मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे और राज्यसभा में स्थानांतरित होने के साथ, पटना के सत्ता गलियारों में परिचित मंथन फिर से शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी की बिहार इकाई और व्यापक आरएसएस पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर, संभावित मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के रूप में कम से कम चार नामों पर चर्चा की जा रही है, जिनमें से प्रत्येक दिल्ली और गठबंधन सहयोगियों, विशेष रूप से कुमार और उनकी पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड) दोनों के साथ एक अलग राजनीतिक ताकत, निर्वाचन क्षेत्र और समीकरण का प्रतिनिधित्व करते हैं। बीजेपी के एक सूत्र ने न्यूज 18 को बताया, “चार नामों पर विचार चल रहा है, अंतिम फैसला पार्टी के शीर्ष नेता करेंगे। पार्टी एक ऐसा नेता चाहती है जो एनडीए के सभी सहयोगियों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए सरकार चलाएगा।” वर्तमान स्थिति ने भाजपा की आंतरिक गणनाओं और संभावित चेहरों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है, जब पार्टी शीर्ष पद पर दावा करने का फैसला करेगी तो मुख्यमंत्री पद के लिए संभावित चेहरों को पेश किया जा सकता है। प्रचलन में प्रमुख नामों में से एक राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं। एक जुझारू ओबीसी नेता, जो महागठबंधन सरकार के खिलाफ पार्टी के आक्रामक अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं, माना जाता है कि चौधरी को केंद्रीय नेतृत्व का विश्वास हासिल है और वह राज्य में भाजपा के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक बनकर उभरे हैं। हालाँकि, पार्टी के भीतर कुछ लोगों का मानना है कि उनकी तीखी राजनीतिक शैली हमेशा गठबंधन ढांचे के भीतर जद (यू) और नीतीश कुमार को प्रबंधित करने के लिए आवश्यक नाजुक संतुलन के अनुरूप नहीं हो सकती है। एक और नाम जिसका बार-बार उल्लेख किया जाता है वह है केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, जो लंबे समय से भाजपा के संगठनात्मक कार्यकर्ता हैं और पार्टी संरचना में गहरी जड़ें रखते हैं। राय को ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा जाता है जो जमीनी स्तर के भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखता है। उनकी संगठनात्मक पृष्ठभूमि और अपेक्षाकृत कम प्रोफ़ाइल वाली राजनीतिक शैली को पार्टी के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों और अंदरूनी लोगों द्वारा फायदे के रूप में देखा जाता है, खासकर राज्य इकाई और पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय बनाए रखने में। हालाँकि, बिहार जैसे राज्य में जहां हर गणना में जाति का वर्चस्व है, यादव विकल्प अब पार्टी के लिए काम नहीं कर सकता है, नेताओं के एक अन्य वर्ग ने कहा। राजनीतिक गलियारों में तीसरे विकल्प के तौर पर पश्चिम चंपारण के सांसद और पूर्व प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष संजय जयसवाल की भी चर्चा हो रही है. जयसवाल को पार्टी लाइन की स्पष्ट रक्षा और संगठन और संसद दोनों में उनके अनुभव के लिए जाना जाता है, जयसवाल को प्रशासनिक समझ और राजनीतिक अनुभव वाला नेता माना जाता है। फिर भी, दूसरों की तरह, मुख्य सवाल यह है कि क्या वह गठबंधन सरकार की जटिलताओं से निपटने में सक्षम होंगे जहां नीतीश कुमार की जेडीयू एक प्रमुख भागीदार बनी हुई है। चौथा नाम जो सामने आता है वह विजय सिन्हा का है, जो वर्तमान में राज्य में भाजपा के प्रमुख नेताओं में से एक और बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष हैं। सिन्हा ने राज्य इकाई के भीतर एक मुखर नेता के रूप में प्रतिष्ठा बनाई है और उन्हें पार्टी कैडर के वर्गों के बीच समर्थन प्राप्त है। हालाँकि, भाजपा नेतृत्व के लिए, गणना व्यक्तिगत लोकप्रियता से परे है। बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई संभावित चेहरा भाजपा के संगठनात्मक आधार को संतुष्ट रखते हुए नीतीश कुमार और चिराग पासवान की एलजेपी सहित गठबंधन सहयोगियों के साथ नाजुक राजनीतिक समीकरण का प्रबंधन करने में सक्षम होगा। जैसा कि बिहार एक बार फिर राजनीतिक अनिश्चितता के चरण में प्रवेश कर रहा है, नेतृत्व पर निर्णय संभवतः विधानसभा में संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि उस राज्य में भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति के आधार पर होगा जो इसके राष्ट्रीय राजनीतिक गणना के केंद्र में है। पहले प्रकाशित: मार्च 06, 2026, 14:42 IST समाचार राजनीति नीतीश कुमार के राज्यसभा जाते ही कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री? बीजेपी 4 नामों पर विचार कर रही है | अनन्य अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)बिहार के मुख्यमंत्री(टी)नीतीश कुमार का इस्तीफा(टी)बीजेपी बिहार इकाई(टी)राज्यसभा शिफ्ट(टी)सम्राट चौधरी(टी)नित्यानंद राय(टी)संजय जयसवाल(टी)विजय सिन्हा
कर्नाटक में बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध से आंध्र के साथ राजनीतिक जुबानी जंग शुरू | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 06, 2026, 14:56 IST इस मुद्दे ने दो दक्षिणी राज्यों के बीच नए सिरे से राजनीतिक खींचतान शुरू कर दी है, जिसने सबसे पहले नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग को प्रतिबंधित करने के विचार को हरी झंडी दिखाई थी। कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया. (छवि: न्यूज18) भले ही कर्नाटक और आंध्र प्रदेश बच्चों में डिजिटल लत और उनके सीखने और मानसिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव पर बढ़ती चिंता को संबोधित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे ने दो दक्षिणी राज्यों के बीच एक ताजा राजनीतिक टकराव पैदा कर दिया है कि किसने सबसे पहले नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग को प्रतिबंधित करने के विचार को हरी झंडी दिखाई थी। दोनों राज्य मानते हैं कि मामले के मूल में स्मार्टफोन के युग में बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य और युवा दिमागों पर सोशल मीडिया की बढ़ती पकड़ है। यह बहस तब शुरू हुई जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2026-27 के लिए अपना रिकॉर्ड 17वां राज्य बजट पेश करते हुए घोषणा की कि सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए कदम उठाएगी। सिद्धारमैया ने क्या कहा सिद्धारमैया ने बजट पेश करते हुए कहा, “बच्चों पर बढ़ते मोबाइल उपयोग के प्रतिकूल प्रभाव को रोकने के उद्देश्य से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।” मुख्यमंत्री ने हाल ही में बच्चों के बीच डिजिटल निर्भरता में चिंताजनक वृद्धि के बारे में चिंता जताई थी और चेतावनी दी थी कि अनियंत्रित गैजेट का उपयोग छात्रों के व्यवहार, ध्यान देने की क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। 22 फरवरी को, सिद्धारमैया ने कर्नाटक राज्य उच्च शिक्षा परिषद में राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ एक बैठक के दौरान, 16 वर्ष से कम उम्र के नाबालिगों के लिए मोबाइल फोन और सोशल मीडिया की पहुंच को प्रतिबंधित करने पर उनके विचार मांगे। ऑस्ट्रेलिया और अन्य पश्चिमी देशों जैसे देशों का उदाहरण देते हुए, जिन्होंने बच्चों के बीच सोशल मीडिया के उपयोग को विनियमित करना शुरू कर दिया है, सिद्धारमैया ने तर्क दिया कि अत्यधिक गैजेट का उपयोग छात्रों के व्यवहार और सीखने के पैटर्न को चिंताजनक तरीके से आकार देना शुरू कर रहा है। आंध्र की योजना 24 फरवरी को, आंध्र प्रदेश सरकार ने अपनी विधानसभा को बताया कि वह भी स्कूली छात्रों द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग को विनियमित करने के लिए कानून का अध्ययन कर रही है। गृह मंत्री वंगालापुडी अनिता ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को विनियमित करने, झूठे प्रचार पर अंकुश लगाने और बच्चों को हानिकारक ऑनलाइन सामग्री से बचाने के तरीकों की जांच करने के लिए एक कैबिनेट उप-समिति का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि समिति पहले ही दो बार मिल चुकी है और कर्नाटक और तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों में अपनाए गए नीतिगत उपायों की जांच कर रही है। गृह मंत्री के अनुसार, राज्य ने अब तक आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट से संबंधित 1,384 मामले दर्ज किए हैं, जिसमें 1,067 लोगों को गिरफ्तार किया गया और अदालतों में पेश किया गया। शब्दों का राजनीतिक युद्ध इस मुद्दे ने जल्द ही राजनीतिक मोड़ ले लिया, आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने सुझाव दिया कि यह विचार सबसे पहले उनके राज्य में प्रस्तावित किया गया था। लोकेश ने लिखा, “नकल चापलूसी का सबसे गंभीर रूप है। यह देखकर खुशी हुई कि कर्नाटक 16 साल से कम उम्र के लोगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है – एक विचार जिसे हमने पहले आंध्र प्रदेश में युवा दिमागों को डिजिटल दुनिया के अंधेरे पक्ष से बचाने के लिए प्रस्तावित किया था। कभी-कभी अच्छे विचार तेजी से आगे बढ़ते हैं।” लोकेश ने यह भी कहा कि सरकार सोशल मीडिया तक आयु-उपयुक्त पहुंच सुनिश्चित करने और इसके हानिकारक प्रभावों को कम करने के लिए कानूनी ढांचे का अध्ययन कर रही है। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर भरोसा टूट रहा है। बच्चे इसका लगातार उपयोग कर रहे हैं, जिससे उनका ध्यान और शिक्षा प्रभावित हो रही है। महिलाओं को लगातार ऑनलाइन दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।” प्रस्तावित प्रतिबंध के साथ-साथ, सिद्धारमैया के बजट में छात्र कल्याण को मजबूत करने के उद्देश्य से उपायों की भी रूपरेखा दी गई है। सरकार ने कहा कि छात्रों के बीच मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए 204 ब्लॉक संसाधन केंद्रों में से प्रत्येक में एक योग्य मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता नियुक्त किया जाएगा। कर्नाटक ने जागरूकता अभियानों, परामर्श केंद्रों और शैक्षणिक संस्थानों में सख्त अनुशासन के माध्यम से परिसरों में नशीली दवाओं के दुरुपयोग से निपटने के लिए कदमों की भी घोषणा की। इसके अलावा, सरकार ने कहा कि वह विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए रोहित वेमुला अधिनियम बनाएगी और छात्रों के बीच नेतृत्व और लोकतांत्रिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव आयोजित करेगी। अंडर-13 के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव जल्द ही लागू किया जाएगा: आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश विधानसभा में बोलते हुए, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि सरकार 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया की पहुंच को प्रतिबंधित करने के कदमों पर विचार कर रही है। आईटी मंत्री नारा लोकेश द्वारा सुझाए गए एक प्रस्ताव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही अगले 90 दिनों के भीतर 13 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया तक पहुंचने से रोकने के लिए एक कार्यक्रम शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार 13-16 आयु वर्ग के लिए संभावित नियमों पर भी चर्चा कर रही है और व्यापक सहमति के आधार पर निर्णय लेगी। नायडू ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि बच्चे सोशल मीडिया से नकारात्मक रूप से प्रभावित न हों और आश्वासन दिया कि उनकी भलाई की रक्षा के लिए कदम उठाए जाएंगे। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: मार्च 06, 2026, 14:55 IST समाचार राजनीति कर्नाटक में बच्चों
‘नीति नहीं, बल्कि शोषण’: राहुल गांधी, खड़गे ने रूसी तेल पर अमेरिकी छूट को लेकर सरकार की आलोचना की | भारत समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 06, 2026, 14:05 IST विकास पर प्रतिक्रिया देते हुए, राहुल गांधी ने कहा कि भारत की विदेश नीति को अपने लोगों की इच्छा से आकार दिया जाना चाहिए और देश के इतिहास और मूल्यों में निहित होना चाहिए। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी (छवि: पीटीआई) संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट की घोषणा के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की विदेश नीति पर हमला किया, जिसे ट्रम्प और उनके प्रशासन ने महीनों तक नई दिल्ली को फटकार लगाई थी, और अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। विकास पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, गांधी ने कहा कि भारत की विदेश नीति को उसके लोगों की इच्छा से आकार दिया जाना चाहिए और देश के इतिहास और मूल्यों में निहित होना चाहिए। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “आज हम जो देख रहे हैं वह नीति नहीं है। यह एक समझौता किए गए व्यक्ति के शोषण का परिणाम है।” भारत की विदेश नीति हमारे लोगों की सामूहिक इच्छा से उभरती है। इसकी जड़ें हमारे इतिहास, हमारे भूगोल और सत्य और अहिंसा पर आधारित हमारे आध्यात्मिक लोकाचार में होनी चाहिए। आज हम जो देख रहे हैं वह नीति नहीं है। यह एक समझौतावादी के शोषण का परिणाम है… https://t.co/GEO4MY6hzu – राहुल गांधी (@RahulGandhi) 6 मार्च 2026 गांधी ने लोकसभा में अपने पहले भाषण का एक वीडियो भी साझा किया, जहां उन्होंने तर्क दिया कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है और दावा किया कि वाशिंगटन प्रभावी ढंग से निर्णय ले रहा है कि भारत किससे तेल खरीद सकता है। उन्होंने भाषण में कहा था, “अमेरिका हमें बताएगा कि हम किससे तेल खरीद सकते हैं या किससे नहीं – अगर यह रूस या ईरान है, तो अमेरिका फैसला करेगा। लेकिन हमारे प्रधान मंत्री फैसला नहीं करेंगे।” इसके अतिरिक्त, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि भारत को 30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीदने की “अनुमति” देने के अमेरिकी फैसले से पता चलता है कि सरकार “लगातार राजनयिक स्थान छोड़ रही है।” खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता खतरे में है और दावा किया कि सरकार ने व्यापार और ऊर्जा सहित कई मोर्चों पर आत्मसमर्पण कर दिया है। उन्होंने एक्स पर एक लंबी पोस्ट में कहा, “यह उस तरह की भाषा है जिसका उपयोग स्वीकृत राज्यों के लिए किया जाता है, न कि भारत के लिए, जो वैश्विक व्यवस्था में एक जिम्मेदार और समान भागीदार रहा है।” भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय संप्रभुता गंभीर खतरे में है क्योंकि पीएम मोदी को एप्सटीन फाइल्स और अदानी मामले पर ब्लैकमेल किया जा रहा है। ’30 दिनों की छूट’ के रूप में हमें रूसी तेल खरीदने की ‘अनुमति’ देने की अमेरिकी घोषणा स्पष्ट रूप से मोदी सरकार को प्रदर्शित करती है… – मल्लिकार्जुन खड़गे (@ खड़गे) 6 मार्च 2026 अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी विकास पर सवाल उठाए। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने पूछा कि एक संप्रभु राष्ट्र को अपनी ऊर्जा खरीद के लिए दूसरे देश से अनुमति की आवश्यकता क्यों होनी चाहिए, जबकि सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि छूट भारत की संप्रभुता के लिए “बेहद अपमानजनक” थी। इस तरह की टिप्पणी अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की घोषणा के बाद आई है कि ट्रेजरी विभाग भारतीय रिफाइनरों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट जारी कर रहा है, उन्होंने कहा कि इस कदम का उद्देश्य पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करना था। बेसेंट ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के परिणामस्वरूप तेल और गैस उत्पादन अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। वैश्विक बाजार में तेल का प्रवाह जारी रखने के लिए, ट्रेजरी विभाग भारतीय रिफाइनरों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट जारी कर रहा है।” भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका का “आवश्यक भागीदार” बताते हुए, सचिव बेसेंट ने कहा कि वाशिंगटन को उम्मीद है कि नई दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद में वृद्धि करेगी। “यह स्टॉप-गैप उपाय वैश्विक ऊर्जा को बंधक बनाने के ईरान के प्रयास के कारण उत्पन्न दबाव को कम करेगा।” यह छूट खाड़ी क्षेत्र में चल रहे तनाव के कारण दी गई है क्योंकि कई खाड़ी देशों में मिसाइल हमलों के कारण तेल के उत्पादन पर असर पड़ा है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के कारण स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है, जो एक संकीर्ण समुद्री चोकपॉइंट है जो वैश्विक तेल आपूर्ति का 20 प्रतिशत संभालता है। ईरान, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच पिछले सप्ताह शुरू हुए संघर्ष के बीच सऊदी अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी और इराक के रुमैला तेल क्षेत्र जैसी कई प्रमुख तेल आपूर्ति इकाइयाँ प्रभावित हुईं। यूक्रेन पर मॉस्को के हमले के बाद भारत को रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार माना जाता है। हालाँकि, वाशिंगटन के दबाव में आने के बाद भारत ने इस साल की शुरुआत में रूसी तेल की खरीद में कटौती करना शुरू कर दिया। इसके बाद, अमेरिका ने नई दिल्ली पर लगाए गए टैरिफ को कम कर दिया। इसके अतिरिक्त, भारत और अमेरिका दोनों ने एक दूसरे के साथ एक अंतरिम व्यापार समझौता भी हासिल किया है, जिससे दोनों देशों के बीच संबंध बढ़े हैं। पहले प्रकाशित: मार्च 06, 2026, 14:05 IST न्यूज़ इंडिया ‘नीति नहीं, बल्कि शोषण’: राहुल गांधी, खड़गे ने रूसी तेल पर अमेरिकी छूट को लेकर सरकार की आलोचना की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)भारत की विदेश 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रोहतक में नेहरा खाप की बादशाह पर कार्रवाई की मांग:गाने में लड़कियों को स्कूल ड्रेस में नचाने पर आपत्ति; CM के नाम शिकायत दी

रोहतक जिले के महम में नेहरा खाप के सदस्यों ने एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। खाप ने रैपर बादशाह और संबंधित स्कूल स्टाफ के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। यह मांग एक हालिया हरियाणवी गाने में स्कूल की लड़कियों को बस की छत पर स्कूल ड्रेस में नचाने और आपत्तिजनक बोल के विरोध में की गई है। नेहरा युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप नेहरा निंदाना ने बताया कि गाने में स्कूल की लड़कियों को हरियाणा रोडवेज की बस की छत पर नाचते हुए दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि गाने के बोल, जिसमें कलाकार खुद को बादशाह बताकर लड़कियों को ‘घोड़ी बनाने’ की बात कह रहा है, अत्यंत आपत्तिजनक और निंदनीय हैं। खाप ने बादशाह पर कानूनी कार्रवाई कर उसे जेल भेजने की मांग की है। नेहरा बोले- ऐसे गाने संस्कृति को खराब कर रहे संदीप नेहरा ने कहा कि हरियाणा अपनी समृद्ध संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और नारी सम्मान की परंपरा के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के गाने न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को गलत संदेश देकर सभ्यता और संस्कारों को भी नष्ट करते हैं। सरकार से तुरंत बैन करने की मांग नेहरा खाप ने इस विषय पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए हरियाणा सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से गाने पर तुरंत बैन करने की मांग की है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा से अपील की गई है कि जिस सरकारी स्कूल की लड़कियों को इस तरह के नृत्य के लिए इस्तेमाल किया गया, उस स्कूल के प्रिंसिपल और अध्यापकों पर कार्रवाई कर उन्हें बर्खास्त किया जाए।
रोहतक में नेहरा खाप की बादशाह पर कार्रवाई की मांग:गाने में लड़कियों को स्कूल ड्रेस में नचाने पर आपत्ति; CM के नाम शिकायत दी

रोहतक जिले के महम में नेहरा खाप के सदस्यों ने एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। खाप ने रैपर बादशाह और संबंधित स्कूल स्टाफ के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। यह मांग एक हालिया हरियाणवी गाने में स्कूल की लड़कियों को बस की छत पर स्कूल ड्रेस में नचाने और आपत्तिजनक बोल के विरोध में की गई है। नेहरा युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप नेहरा निंदाना ने बताया कि गाने में स्कूल की लड़कियों को हरियाणा रोडवेज की बस की छत पर नाचते हुए दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि गाने के बोल, जिसमें कलाकार खुद को बादशाह बताकर लड़कियों को ‘घोड़ी बनाने’ की बात कह रहा है, अत्यंत आपत्तिजनक और निंदनीय हैं। खाप ने बादशाह पर कानूनी कार्रवाई कर उसे जेल भेजने की मांग की है। नेहरा बोले- ऐसे गाने संस्कृति को खराब कर रहे संदीप नेहरा ने कहा कि हरियाणा अपनी समृद्ध संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और नारी सम्मान की परंपरा के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के गाने न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को गलत संदेश देकर सभ्यता और संस्कारों को भी नष्ट करते हैं। सरकार से तुरंत बैन करने की मांग नेहरा खाप ने इस विषय पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए हरियाणा सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से गाने पर तुरंत बैन करने की मांग की है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा से अपील की गई है कि जिस सरकारी स्कूल की लड़कियों को इस तरह के नृत्य के लिए इस्तेमाल किया गया, उस स्कूल के प्रिंसिपल और अध्यापकों पर कार्रवाई कर उन्हें बर्खास्त किया जाए।
होर्मुज से 24 घंटे में सिर्फ 2 जहाज निकले:दुनिया की 20% तेल सप्लाई रुकी; रक्षा मंत्री बोले- भारत की तेल-गैस सप्लाई पर सीधा असर

मिडल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री लाइफलाइन ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। जॉइंट मैरिटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर (JMIC) की 6 मार्च की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटों में इस रास्ते से सिर्फ दो कॉमर्शियल जहाज गुजरे। ये दोनों ही मालवाहक जहाज थे। कोई तेल टैंकर इस दौरान वहां से नहीं गुजरा। आमतौर पर इस रास्ते से हर दिन दर्जनों विशाल तेल टैंकर गुजरते हैं। यह स्थिति भारत सहित ग्लोबल अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है क्योंकि दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से सप्लाई होता है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के डर से ऑपरेटरों ने जहाज रोके स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ट्रैफिक कम होने की सबसे बड़ी वजह इस इलाके में कॉमर्शियल जहाजों पर लगातार हो रहे हमले हैं। इसके चलते शिप ऑपरेटर्स ने सावधानी बरतते हुए अपने जहाजों को रोक दिया है। JMIC ने इस पूरे क्षेत्र के लिए ‘क्रिटिकल’ सिक्योरिटी अलर्ट जारी कर रखा है। इजराइल-ईरान जंग से कच्चा तेल 83 डॉलर के पार पहुंचा ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई के कारण ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमतें आज 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। एक्सपर्ट अनुमान लगा रहे हैं कि अगर ये जंग लंबी चली और होर्मुज बंद रहा तो क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल पहुंच सकती है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और LNG सप्लाई इसी रास्ते से होती है। वर्तमान में कई जहाज फारस की खाड़ी में ही खड़े हैं या फिर लंबे रास्तों की तलाश कर रहे हैं। रक्षा मंत्री बोले- ‘न्यू नॉर्मल’ बनना खतरनाक खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि होर्मुज या पूरा फारस की खाड़ी वाला इलाका दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जब इस क्षेत्र में कोई बाधा या रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ता है। राजनाथ सिंह ने चेतावनी दी कि ये अनिश्चितताएं सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार को प्रभावित करती हैं। मौजूदा स्थिति काफी जटिल हो गई है और भविष्य में यह और भी ज्यादा अस्थिर हो जाएगी। जिस तरह से अलग-अलग देश जमीन, हवा, समुद्र और अब अंतरिक्ष में भी मुकाबला कर रहे हैं, वह चिंता का विषय है। यह असामान्यता अब ‘न्यू नॉर्मल’ बनती जा रही है। अब होर्मुज स्ट्रेट को जानें… होर्मुज स्ट्रेट करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। इसके दोनों मुहाने करीब 50 किमी चौड़े हैं, जबकि सबसे संकरा हिस्सा करीब 33 किमी चौड़ा है। इसमें आने-जाने वाले समुद्री ट्रैफिक के लिए 3 किमी चौड़ी शिपिंग लेन तय है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। ईरान के अलावा सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत के कुल ‘नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट’ का 10% से ज्यादा हिस्सा इसी रास्ते से सप्लाई होता है। इसमें बासमती चावल, चाय, मसाले और इंजीनियरिंग का सामान शामिल है। हर दिन लगभग 1.78 करोड़ बैरल से 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन इस रूट से जाता है। ईरान खुद रोजाना 17 लाख बैरेल पेट्रोलियम इस रूट से निर्यात करता है।





