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बनारसी टमाटर चाट रेसिपी: होली के स्वाद पर घर में बनाएं बनारसी टमाटर चाट, खाए ही मेहमान भी बनेंगे प्रमुख; नोट कर लें रेसिपी

बनारसी टमाटर चाट रेसिपी: होली के स्वाद पर घर में बनाएं बनारसी टमाटर चाट, खाए ही मेहमान भी बनेंगे प्रमुख; नोट कर लें रेसिपी

कैसे बनाएं बनारसी टमाटर चाट: होली का त्योहार रंग-बिरंगे, मिठाइयों और स्वादिष्ट व्यंजनों के बिना अधूरा लगता है। अगर इस बार आप गुझिया और चटनी के साथ कुछ अलग और चटपटा बनाना चाहते हैं, तो बनारसी टमाटर चाट जरूर बनाएं। यह उत्तर प्रदेश के बनारस की मशहूर स्ट्रीट फूड डिश है, जिसका आटा-मीठा और स्वादिष्ट स्वाद हर किसी को पसंद आता है। बता दें कि इसे बनाना बेहद आसान है और कम समय में तैयार हो जाता है। तो जानिए क्या है इसे बनाने की सबसे आसान रेसिपी। बनारसी टमाटर चाट बनाने की आवश्यक सामग्री लेकिन आपका गरमा-गरमबरामसी टमाटर चाट तैयार है। इसे एक कारखाने में स्थापित और ऊपर से सेव, ब्लूटूथ कटी प्याज और हरी धनिया से सजाकर सर्व करें। पिलपिला तो थोड़ा नींबू का रस भी डाल सकते हैं। होली की पार्टी में ये चैट हर किसी का दिल जीत लेती है। अन्य खास टिप (टैग्सटूट्रांसलेट)बनारस टमाटर चाट(टी)बनारसी टमाटर चाट रेसिपी(टी)कैसे बनाएं बनारसी टमाटर चाट(टी)बनारसी टमाटर चाट(टी)टमाटर चाट(टी)घर का बना टमाटर चाट(टी)टमाटर चाट

जान्हवी कपूर ने भाई अर्जुन के समर्थन में आवाज उठाई:ऑनलाइन बुलिंग पर जताई नाराजगी, कहा- क्लिकबेट और रेज-बेट से फैल रही नफरत

जान्हवी कपूर ने भाई अर्जुन के समर्थन में आवाज उठाई:ऑनलाइन बुलिंग पर जताई नाराजगी, कहा- क्लिकबेट और रेज-बेट से फैल रही नफरत

जान्हवी कपूर ने भाई अर्जुन कपूर के खिलाफ हो रही ऑनलाइन बुलिंग पर कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में एक बातचीत के दौरान जाह्नवी ने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी को भी निशाना बनाना या ट्रोल करना बिल्कुल गलत है और इसके लिए कोई बहाना नहीं हो सकता। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि लगातार हो रही व्यक्तिगत टिप्पणियां और ट्रोलिंग मानसिक रूप से नुकसान पहुंचा सकती हैं। इंडियन इक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक जान्हवी ने यह भी आरोप लगाया कि कई लोग अर्जुन कपूर का नाम सिर्फ क्लिकबेट और ‘रेज-बेट के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके मुताबिक, कुछ सोशल मीडिया पेज और यूजर्स बिना तथ्यों की जांच किए भड़काऊ हेडलाइन बनाते हैं, ताकि ज्यादा व्यूज और एंगेजमेंट मिल सके। उन्होंने कहा कि यह एक तरह से पब्लिक फिगर्स को आसान निशाना बनाने जैसा है, जहां सच्चाई से ज्यादा सनसनी को महत्व दिया जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर कलाकार इंसान होता है और उसे भी सम्मान और संवेदनशीलता की जरूरत होती है। जान्हवी ने कहा कि आलोचना और नफरत में फर्क होता है। रचनात्मक आलोचना किसी के काम को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है, लेकिन व्यक्तिगत हमले और अपमान किसी भी तरह से जायज नहीं हैं। सोशल मीडिया पर बढ़ती ट्रोलिंग को लेकर उन्होंने लोगों से जिम्मेदारी दिखाने की अपील की। जान्हवी का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं है कि किसी को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार लोग बिना पूरी जानकारी के राय बना लेते हैं, जिससे गलतफहमियां और नकारात्मकता बढ़ती है। गौरतलब है कि अर्जुन कपूर अक्सर अपने काम और निजी जिंदगी को लेकर ट्रोलिंग का सामना करते रहे हैं। ऐसे में जाह्नवी का यह बयान न सिर्फ अपने भाई के समर्थन में है, बल्कि सोशल मीडिया पर बढ़ती हेट स्पीच के खिलाफ एक मजबूत संदेश भी माना जा रहा है।

‘जब खुली किताब’ का ट्रेलर आउट:पंकज कपूर और डिंपल कपाड़िया लीड रोल में आएंगे नजर, 6 मार्च को जी5 पर स्ट्रीम होगी फिल्म

‘जब खुली किताब’ का ट्रेलर आउट:पंकज कपूर और डिंपल कपाड़िया लीड रोल में आएंगे नजर, 6 मार्च को जी5 पर स्ट्रीम होगी फिल्म

एप्लॉज एंटरटेनमेंट की फिल्म ‘जब खुली किताब’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है। फिल्म में दिग्गज एक्टर पंकज कपूर और डिंपल कपाड़िया मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। ट्रेलर से साफ है कि कहानी परिपक्व उम्र के रिश्तों, अधूरी भावनाओं और जीवन के नए अध्याय की खोज पर केंद्रित है। दोनों कलाकारों की गहरी और सधी हुई अदाकारी फिल्म को खास बना रही है। यह फिल्म मशहूर एक्टर-लेखक सौरभ शुक्ला के चर्चित नाटक पर आधारित है। उन्होंने न केवल मूल नाटक लिखा था, बल्कि इसके फिल्म रूपांतरण का निर्देशन भी खुद किया है। नाटक की लोकप्रियता को देखते हुए फिल्म से भी दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं। ये है कहानी कहानी दो ऐसे लोगों की है जो जीवन के उत्तरार्ध में एक-दूसरे से मिलते हैं और अपने अतीत की परतें खोलते हुए रिश्तों को नए नजरिए से समझने की कोशिश करते हैं। फिल्म में अपारशक्ति खुराना भी अहम भूमिका निभा रहे हैं, जो कहानी में नई पीढ़ी का दृष्टिकोण जोड़ते हैं। ट्रेलर में हल्की-फुल्की नोकझोंक, भावनात्मक संवाद और जीवन के अनुभवों से उपजी संवेदनशीलता की झलक मिलती है। एप्लॉज एंटरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत और शूस्ट्रैप फिल्म्स के बैनर तले बनी यह फिल्म 6 मार्च 2026 से जी5 पर स्ट्रीम होगी।

ईरान-इजराइल युद्ध में बेतिया के कैप्टन आशीष लापता:1 मार्च को जहाज पर गिरी थी मिसाइल; पत्नी को एजेंसी ने फोन कर दी जानकारी

ईरान-इजराइल युद्ध में बेतिया के कैप्टन आशीष लापता:1 मार्च को जहाज पर गिरी थी मिसाइल; पत्नी को एजेंसी ने फोन कर दी जानकारी

इजराइल-ईरान जंग में बेतिया के कैप्टन आशीष कुमार लापता हैं। एजेंसी ने कैप्टन की पत्नी को फोन कर घटना की जानकारी दी है। ओमान की खाड़ी में तेल टैंकर ‘Skylight’ पर 1 मार्च को मिसाइल हमला हुआ था। हमले के समय जहाज खासब तट के पास एंकर पर खड़ा था। अधिकांश क्रू मेंबर्स को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन कैप्टन आशीष समेत 2 अन्य लोग अब भी लापता हैं। परिजनों ने ओमान स्थित भारतीय दूतावास और शिपिंग कंपनी से संपर्क किया है, मगर अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। परिवार ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप कर जल्द खोजबीन और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की मांग की है। आशीष को 16 साल का एक्सपीरियंस है। वे 6 महीने से घर पर थे। 22 जनवरी 2026 में उन्होंने दुबई की कंपनी जॉइन की थी। आशीष का 4 साल के बेटा है। उन्होंने मां से होली पर आने का वादा किया था। पत्नी बोली- 28 फरवरी को आखिरी बात हुई थी आशीष की पत्नी ने बताया, ‘एजेंसी के अधिकारियों के पास वहां काम करने वाले लोगों के परिवार वालों के नंबर रहते हैं। मैं आशीष की पत्नी हूं, इसलिए हमारा नंबर उनके पास था। 2 मार्च को हमें एजेंसी की तरफ से कॉल आया था। उन्होंने हमसे कहा, आशीष की शिप पर अटैक हो गया है। वो अभी तक मिसिंग बताए जा रहे हैं। 22 जनवरी को उन्होंने जॉइन किया था। अभी एक महीने ही काम किए हुए हुआ था। हमलोगों की हर शनिवार को बात होती थी। 28 फरवरी की रात हमारी आखिरी बार बात हुई थी।’ कप्तान लापता हैं, कंपनी भी कुछ नहीं बता रही आशीष कुमार के छोटे भाई आकाश कुमार ने बताया, ‘हमले की सूचना मिलते ही हमने Embassy of India, Muscat को ईमेल भेजा। 2 मार्च को शिपिंग कंपनी के एजेंट सुमित ने कॉल कर बताया कि हमला हुआ था, ज्यादातर क्रू को बचा लिया गया है, लेकिन हमारे भाई आशीष और दो अन्य सदस्य अभी भी लापता हैं।’ भाई ने आरोप लगाया कि, कंपनी द्वारा न तो सही स्थिति बताई जा रही है। न ही लापता सदस्यों को लेकर कोई ठोस जानकारी साझा की जा रही है। दूतावास से भी अभी तक केवल औपचारिक जवाब मिले हैं, ठोस सूचना नहीं। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

चैंबर में उतरने से कर्मचारियों की मौत की होगी जांच:महापौर बोले-मृतकों के आश्रितों को नौकरी देंगे, दोषियों पर कार्रवाई करेंगे; चैंबर में बगैर संसाधन-किट नहीं उतरते कर्मचारी

चैंबर में उतरने से कर्मचारियों की मौत की होगी जांच:महापौर बोले-मृतकों के आश्रितों को नौकरी देंगे, दोषियों पर कार्रवाई करेंगे; चैंबर में बगैर संसाधन-किट नहीं उतरते कर्मचारी

इंदौर में सोमवार शाम को सीवर टैंक में उतरने से नगर निगम के दो कर्मचारियों की मौत के मामले में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने जांच के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी और मृत कर्मचारियों के आश्रितों को आउटसोर्स पर नौकरी दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने निगम कर्मचारियों से कहा है कि वे बिना संसाधन व किट के सीवर टैंक में ना उतरें। जोन 13 में चोइथराम मंडी गेट के पास 30 फीट गहरे सीवर टैंक में करण यादव और अजय डोडियार उतरे थे। टैंक के अंदर जहरीली गैस थी, इस कारण उनकी दम घुटने से मौत हो गई थी। जानकारी के अनुसार कर्मचारियों की ड्यूटी शाम 5 बजे तक थी। उस समय मौके पर तीन कर्मचारी मौजूद थे। शाम करीब 6:30 बजे नगर निगम के आउटसोर्स से कार्यरत दो कर्मचारी जोन-13 क्षेत्र में प्राइमरी मेन लाइन में सेफ्टी टैंक की डीवॉटरिंग की जा रही थी, तभी पाइप का टुकड़ा चैंबर में गिरा था उसे वे निकाल रहे थे, तभी ये हादसा हुआ था। आश्रितों को आउटसोर्स पर नौकरी देंगे महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि दोनों कर्मचारी आउटसोर्स पर थे। इसलिए हमने दोनों के आश्रितों को आउटसोर्स पर नौकरी देने के लिए कहा है। इस दुख की घड़ी में नगर निगम की पूरी टीम दोनों परिवार के साथ है। घटनाक्रम क्या है, कैसे हुआ है। इसके पीछे कोई दोषी है, इसकी जांच करने के लिए निर्देश दे दिए हैं। सीएम डॉ.मोहन यादव ने भी इस दुखद घटना का तुरंत संज्ञान लेकर मृतकों के परिवारों को 30-30 लाख रुपए की राहत राशि देने की घोषणा भी की है। चैंबर की सफाई के लिए नहीं उतरे थे कर्मचारी महापौर ने बताया कि दोनों कर्मचारी ड्रेनेज लाइन या चैंबर की सफाई के लिए नहीं उतरे थे, बल्कि प्राइमरी लाइन में सेफ्टी टैंक की डीवॉटरिंग के दौरान पाइप का तुकड़ा चैंबर में गिर गया था, जिसे निकालने के लिए पहले एक कर्मचारी उतरा और जब वह वापस नहीं आया तो दूसरा कर्मचारी उसे देखने के लिए उतर गया और गैस से दोनों की मौत हो गई। इन कर्मचारियों को सफाई के निर्देश भी नहीं दिए गए थे। उन्होंने बताया कि सभी को स्पष्ट निर्देश हैं कि छोटी लाइन हो या बड़ी। चैंबर के अंदर उतरकर किसी भी प्रकार की सफाई नहीं करना है। ड्रेनेज-चैंबर की सफाई के लिए जो प्रॉटोकॉल है, जो संसाधन है, जो किट है, जो प्रक्रिया है उसी अनुरूप टीम उस काम को करती है। ये डीवॉटरिंग का काम किसके निर्देश पर हो रहा था, क्यों हो रहा था इसकी जांच करवाई जा रही है। जांच में जो स्थिति आएगी उस आधार पर सभी दोषियों पर कार्रवाई भी की जाएगी। दोनों को CPR भी दिया था निगम कर्मियों को बचाने के लिए सीवर टैंक में उतरे अमन सेम ने बताया कि मुझे पता चला कि दो लोग चैंबर में डूब गए हैं। मैंने अपनी कमर में रस्सी बांधी और चैंबर में नीचे उतरा। हुक को एक आदमी की बेल्ट से फंसा दिया। इस दौरान मेरे मुंह में गैस भर गई थी, फिर हम दोनों ऊपर आ गए। करण और अजय को बाहर निकाला और उन्हें CPR भी दिया। उनके फेफड़ों में पानी भर गया था। पानी निकालने के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए थे।

‘वज्र’ में दिखेगा हाई-ऑक्टेन एक्शन:टाइगर तैयार, जापान में शूट होगी फिल्म; 2027 में OTT पर भी देंगे दस्तक

‘वज्र’ में दिखेगा हाई-ऑक्टेन एक्शन:टाइगर तैयार, जापान में शूट होगी फिल्म; 2027 में OTT पर भी देंगे दस्तक

एक्शन स्टार टाइगर श्रॉफ ने 2 मार्च को अपने जन्मदिन के मौके पर अपनी अगली फिल्म ‘वज्र’ के टाइटल की आधिकारिक घोषणा कर दी। यह फिल्म निर्देशक राम माधवानी और निर्माता महावीर जैन के साथ मिलकर बनाई जा रही है। ‘नीरजा’ और ‘आर्या’ जैसे कंटेंट-ड्रिवन प्रोजेक्ट्स के लिए पहचाने जाने वाले राम माधवानी के साथ टाइगर का यह सहयोग इंडस्ट्री में खास चर्चा बटोर रहा है। ‘वज्र’ को 2027 की सबसे बड़ी एक्शन फिल्मों में से एक माना जा रहा है, जिसमें हाई-ऑक्टेन एक्शन देखने को मिलेगा। फिल्म की शूटिंग अप्रैल से शुरू करने की है प्लानिंग सूत्रों के मुताबिक ‘वज्र’ एक स्पिरिचुअल एक्शन थ्रिलर होगी, जिसकी शूटिंग अप्रैल से शुरू करने की योजना है। फिल्म का बड़ा हिस्सा जापान में फिल्माया जाएगा, जहां टाइगर विशेष मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षण भी लेंगे। इसे ग्लोबल दर्शकों के लिए नए प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है। ‘बागी 5’ भी है बननी, डेवलपमेंट स्टेज में है ‘हीरोपंती 3’ 2027 के लिए टाइगर ने बड़े स्केल पर बदलाव की तैयारी की है। साजिद नाडियाडवाला के बैनर तले बनने वाली ‘बागी 5’ उनकी सफल फ्रेंचाइज का अगला चैप्टर होगी। इसके अलावा ‘हीरोपंती 3’ फिलहाल डेवलपमेंट स्टेज में है और स्क्रिप्ट पर नए सिरे से काम किया जा रहा है, ताकि पिछली किस्त की कमियों को सुधारा जा सके। अंतरराष्ट्रीय स्टंट डायरेक्टर्स के साथ तैयारी हो रही है… डिजिटल स्पेस में टाइगर 2027 में अपना ओटीटी डेब्यू करने की तैयारी में भी हैं। ओटीटी के लिए वे आठ एपिसोड की एक एक्शन सीरीज में दिखेंगे। जिसकी कहानी जासूसी और अंडरकवर ऑपरेशन्स के इर्द-गिर्द है। अंतरराष्ट्रीय स्टंट डायरेक्टर्स के साथ इसकी तैयारी भी हो रही है।

अब कस्टमाइज्ड सिनेमा का दौर:बटन दबाते ही रेगिस्तान में बदलेगा बर्फीले इलाके का दृश्य, IIM-IIT की तर्ज पर क्रिएटिव टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट; एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट के क्रिएटर होंगे तैयार

अब कस्टमाइज्ड सिनेमा का दौर:बटन दबाते ही रेगिस्तान में बदलेगा बर्फीले इलाके का दृश्य, IIM-IIT की तर्ज पर क्रिएटिव टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट; एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट के क्रिएटर होंगे तैयार

आने वाला समय इंटरएक्टिव, कस्टमाइज्ड और इमर्सिव सिनेमा का है। दर्शक सिर्फ फिल्म देखेंगे नहीं, बल्कि महसूस करेंगे। फर्ज कीजिए थिएटर में एक दृश्य में रेगिस्तान का बैकग्राउंड है। आप इसे लद्दाख की बर्फीली वादियों में देखना चाहते हैं। रिमोट कंट्रोल का बटन दबाते ही दृश्य बदल जाएगा। दृश्य 360 डिग्री घुमाकर किसी भी एंगल से देख सकेंगे। थियेटर में अगर 40 दर्शक हैं तो सब अपनी पसंद के एंगल से फिल्म देख सकेंगे। 8 साल पहले आई हॉलीवुड फिल्म रियल प्लेयर वन में दिखाई विशाल वर्चुअल दुनिया ओएसिस की तरह दर्शक स्पर्श, कंपन, गर्मी, सर्दी, हवा और दूरी का अहसास कर पाएंगे। इसके लिए बॉडी सूट, ग्लव्ज और वीआर हेडसेट पहनने होंगे। यह अभी उपलब्ध 4डी सिनेमा से अलग है, जहां सीट हिलती है, पानी के छींटे पड़ते हैं या खुशबू आती है। इमर्सिव सिनेमा में वर्चुअल एक्शन का असर होगा, जिसमें एवीजीसी एक्सआर (एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट, गेमिंग, कॉमिक्स व एक्सटेंडेट रियलिटी) का हर पहलू शामिल है। मुंबई के एनएफडीसी कैंपस​ स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी (आईआईसीटी) में एवीजीसी एक्सआर के हर पहलू के लिए आधुनिक लैब व स्टूडियो हैं। सीईओ निनाद रायकर कहते हैं कि डीम्ड यूनिवर्सिटी दर्जे के बाद एनिमेशन, गेमिंग जैसे स्पेशलाइज्ड यूजी-पीजी कोर्स शुरू होंगे। अभी 19 डिप्लोमा-सर्टिफिकेट कोर्स हैं। संस्थान ने करिकुलम, रिसर्च व इनोवेशन के लिए नेटफ्लिक्स, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एपल, मेटा समेत 24 संस्थानों को भागीदार बनाया है। 2030 तक 20 लाख प्रोफेशनल की जरूरत 2030 तक इस इंडस्ट्री को 20 लाख प्रोफेशनल की जरूरत होगी। ऑरेंज इकोनॉमी के लिए बजट में घोषित 15 हजार स्कूलों व 500 कॉलेजों में छात्रों को एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट्स जैसे क्षेत्रों में कुशल बनाने के लिए एवीजीसी कंटेंट क्रिएशन लैब का खाका जल्द तैयार होगा। सरकार की योजना एक मॉडल आईआईसीटी विकसित करने के बाद आईआईटी व आईआईएम की तर्ज पर देश में अलग-अलग जगह आईआईसीटी स्थापित करने की है। हॉलीवुड की 60% फिल्मों का प्रोसेस भारत में- सलिल देशपांडे फैकल्टी, आईआईसीटी भारत में भी एवीजीसी एक्सआर सेक्टर के लैब हैं। हॉलीवुड की 60% फिल्मों के कुछ हिस्से और दुनिया की 10% फिल्मों का एवीजीसी एक्सआर जॉब बैकएंड वर्क भारत में होता है। राजामौली जैसे फिल्मकार हैदराबाद की अन्नपूर्णा लैब इस्तेमाल करते हैं। भारत में अभी रोटोमेशन, रोटोस्कॉपिंग, मैचमूव, ट्रैकिंग, क्लीनअप, पेंट, क्राउड सिमुलेशन, लाइटिंग सपोर्ट का काम होता है। भारत बैकएंड पर काम करता है। करीब 80 लाख लोग जुड़े हैं। पर, भारत कॉन्सेप्ट डिजाइन यानी कहानी, कैरेक्टर, क्रिएटिव कंट्रोल, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी) पर मालिकाना हक नहीं रखता। ऑरेंज इकोनॉमी में हिस्सेदारी बढ़ाने का लाभ बैकएंड से फ्रंटफुट पर जाने में मिलेगा। आईआईसीटी की क्षमता आज ही अवतार जैसी फिल्मों के 40-50 फीसदी निर्माण की है। अभी आईआईसीटी 10 स्टार्टअप को इंक्यूबेट भी कर रही है।

ब्यूटी टिप्स: चेहरे पर पपीते के साथ लगाएं ये एक चीज, चांद जैसा आएगा निखार

ब्यूटी टिप्स: चेहरे पर पपीते के साथ लगाएं ये एक चीज, चांद जैसा आएगा निखार

सौंदर्य युक्तियाँ: इस भाग में दौड़ भरी जिंदगी, प्रदूषण और तनाव का सबसे पहला असर हमारे चेहरे पर दिखता है। बाजार में मिलने वाले सुपरमार्केट और फ़्लोरिंग के लिए थोड़े समय के लिए तो चमक दे देते हैं, लेकिन लंबे समय में इन केमिकल स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में अगर आप प्राकृतिक और सुरक्षित तरीके से अपनी त्वचा को निखारना चाहती हैं, तो आपकी रसोई में ही छिपा हुआ है। आइए इस लेख में पपीता और दही से बने फेस पैक के बारे में विस्तार से बताया गया है। जिससे आप पर असर दिख सकता है। पपीता और दही के लिए क्यों है स्वादिष्ट? पपीते में पपेन नाम का एंजाइम होता है, जो डेड स्किन सेल्स को स्किन को एक्सफोलिएट करता है। विटामिन ए, सी और ई प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो आहार को कम करने में मदद करते हैं। वहीं दही में लैक्टिक एसिड होता है। यह केवल त्वचा की गहराई से सफाई नहीं करता है, बल्कि पोर्स को टाइट करने में मदद करता है। जब ये दोनों मिलते हैं, तो त्वचा को पोषण और ग्लो का डबल डोज मिलता है। फेसबुक पैक कैसे बनायें? 2-3 बड़े टुकड़े पका हुआ पपीता1 बड़ा जेनरेटर देवीआधा हिस्सा पपीता और दही से फ़ैस पैक कैसे खरीदें? एक कटोरे में मैश किए हुए पपीते और दही को तब तक हिलाया जब तक कि एक स्टोलोजी पेस्ट न बन जाए।अगर तुम्हारी खाल बहुत बड़ी अजीब है, तो इसमें थोड़ा सा शहद भी मिला लें।अपने चेहरे को किसी भी माइल्ड क्लींजर से साफ करें।इस पैक को चेहरे और गर्दन पर समान रूप से पहनें।इसे 15 से 20 मिनट तक इन्वेंटरी डेस्टिनेशन तक।सर्दी या गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। पपीता और दही का फेस पैक लगाने के फायदे पपीता त्वचा की ऊपरी बेजान परत को हटा देता है, जिससे चेहरा तुरंत खिला-खिला और चमकदार दिखने लगता है।नियमित रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले फेस के काले गोदाम, झा अवशेष और दाग-धब्बे के आभूषण समाप्त हो रहे हैं।पपीते के एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा के प्लास्टर को बनाए रखते हैं, जिससे आपकी उम्र पहले से ही कम हो जाती है।दही की ठंडक टैनिंग ख़त्म होती है।

‘चुप्पी ही त्याग है’: संपादकीय में सोनिया गांधी ने खामेनेई की हत्या पर भारत के रुख पर सवाल उठाए | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:मार्च 03, 2026, 10:57 IST सोनिया गांधी ने तर्क दिया कि इस तरह की चुप्पी संप्रभुता, गैर-हस्तक्षेप और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर आधारित भारत की लंबे समय से चली आ रही विदेश नीति से विचलन को दर्शाती है। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी | फ़ाइल छवि जैसे ही पश्चिम एशिया युद्ध चौथे दिन में प्रवेश कर गया, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक संपादकीय में अमेरिकी-इजरायल हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली होसैनी खामेनेई की हत्या पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया। इंडियन एक्सप्रेस. सोनिया गांधी ने क्या कहा? “ईरान नेता की हत्या पर सरकार की चुप्पी तटस्थ नहीं है, यह त्याग है” शीर्षक वाले अपने लेख में सोनिया गांधी ने लिखा कि ईरान ने 1 मार्च को पुष्टि की कि उसके सर्वोच्च नेता की पिछले दिन संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए लक्षित हमले में हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि चल रही बातचीत के दौरान एक मौजूदा राष्ट्रप्रमुख की हत्या अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गंभीर दरार का प्रतीक है, उन्होंने कहा कि नई दिल्ली की चुप्पी इस घटना की तरह ही मजबूती से सामने आई है। उनके अनुसार, भारत सरकार ने हत्या या ईरानी संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री कार्यालय ने हत्या की परिस्थितियों का उल्लेख करने से बचते हुए केवल एक संक्षिप्त शोक संदेश जारी किया, और यह अस्पष्टता बाद में वैश्विक राजनयिक प्रतिक्रियाओं के बावजूद “स्पष्ट शांति” में बदल गई। भारत की विदेश नीति पर सोनिया गांधी गांधी ने तर्क दिया कि इस तरह की चुप्पी संप्रभुता, गैर-हस्तक्षेप और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर आधारित भारत की लंबे समय से चली आ रही विदेश नीति से विचलन को दर्शाती है। उन्होंने लिखा कि भारत ने ऐतिहासिक रूप से पश्चिम एशिया और लैटिन अमेरिका सहित सभी क्षेत्रों में लक्षित हत्याओं और बल के अतिरिक्त-क्षेत्रीय उपयोग का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि बातचीत और शांतिपूर्ण संघर्ष समाधान की वकालत करने वाली ग्लोबल साउथ की आवाज के रूप में भारत की विश्वसनीयता कमजोर हो गई है। जिसे कई लोग अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन मानते हैं, उसकी निंदा न करके उन्होंने कहा कि भारत अपने सिद्धांतों में चयनात्मक दिखने का जोखिम उठा रहा है। संपादकीय में कहा गया है कि संकट के दौरान चुप्पी सहयोगियों, विरोधियों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संकेत भेजती है, जिससे पता चलता है कि भूराजनीतिक सुविधा मानदंडों के प्रति प्रतिबद्धताओं से अधिक हो सकती है। गांधी ने चेतावनी दी कि इससे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और नियम-आधारित बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आकार देने में मदद करने की उसकी महत्वाकांक्षा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने रक्षा, प्रौद्योगिकी और राजनीतिक सहयोग में इज़राइल के साथ भारत के गहरे संबंधों को स्वीकार किया, लेकिन तर्क दिया कि साझेदारी मूलभूत सिद्धांतों की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने लिखा, विदेश नीति में संतुलन की आवश्यकता है। सोनिया गांधी ने आगाह किया कि शक्तिशाली देशों को बिना परिणाम के विदेशी नेताओं को खत्म करने की अनुमति देने से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था प्रतिशोधात्मक हिंसा और अस्थिरता की ओर बढ़ सकती है। उन्होंने कहा, छोटे देश जबरदस्ती और एकतरफा आक्रामकता से सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून पर भरोसा करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के सभ्यतागत लोकाचार और संवैधानिक मूल्य शांति, संवाद और संप्रभुता के सम्मान पर जोर देते हैं और इन सिद्धांतों को छोड़ने से नैतिक प्रतिष्ठा और वैश्विक विश्वास दोनों कमजोर हो सकते हैं। स्पष्टता का आह्वान करते हुए, उन्होंने लिखा कि जब सिद्धांतों का परीक्षण किया जाता है तो लोकतंत्र का मूल्यांकन साहस से किया जाता है और उन्होंने भारत से अपनी आवाज पुनः प्राप्त करने का आग्रह किया, उन्होंने कहा कि चिंता की स्पष्ट अभिव्यक्ति एक न्यायपूर्ण और स्थिर विश्व व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करेगी। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि “इस संदर्भ में, चुप्पी विवेक नहीं है। यह त्याग है।” राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ संपादकीय पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि जब किसी विदेशी नेता की लक्षित हत्या पर भारत की ओर से संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून का कोई स्पष्ट बचाव नहीं होता है, तो यह देश की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर संदेह पैदा करता है। उन्होंने कहा कि भारत को संप्रभुता और शांति के लिए खड़ा होना चाहिए और अपनी नैतिक ताकत को फिर से खोजना चाहिए। “जब किसी विदेशी नेता की लक्षित हत्या से हमारे देश की संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून की कोई स्पष्ट रक्षा नहीं होती है, और निष्पक्षता को छोड़ दिया जाता है, तो यह हमारी विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता के बारे में गंभीर संदेह पैदा करता है। इस उदाहरण में, चुप्पी नहीं है… pic.twitter.com/LJECs5jPHR– राहुल गांधी (@RahulGandhi) 3 मार्च 2026 शिव सेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस टिप्पणी का समर्थन किया और कहा कि सरकार की चुप्पी “तटस्थ नहीं” थी और उन्होंने कॉलम को एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और कहा कि जब भारत किसी चीज के लिए खड़ा होना बंद कर देता है, तो वह किसी भी चीज के लिए गिरने का जोखिम उठाता है। ‘ईरान नेता की हत्या पर सरकार की चुप्पी तटस्थ नहीं है, यह त्याग है’जैसा कि मैंने पहले कहा था, जिस क्षण भारत किसी चीज के लिए खड़ा होना बंद कर देता है वह किसी भी चीज के लिए गिरने को तैयार हो जाता है। इससे अधिक सहमत नहीं हो सकता, अवश्य पढ़ें, श्रीमती सोनिया गांधी का एक महत्वपूर्ण कॉलम। pic.twitter.com/dwSL95g4gO– प्रियंका चतुवेर्दी🇮🇳 (@priyankac19) 3 मार्च 2026 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में पूर्ण पैमाने पर युद्ध छिड़ गया, जब अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त रूप से ईरानी रणनीतिक स्थलों पर हमला किया, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी और रुकी हुई परमाणु वार्ता के बीच परमाणु, सैन्य और नेतृत्व के आंकड़ों को निशाना बनाया। जगह : दिल्ली, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 03, 2026, 10:57 IST समाचार राजनीति ‘चुप्पी ही त्याग है’: संपादकीय में सोनिया गांधी ने खामेनेई की हत्या पर भारत के रुख पर सवाल उठाए अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट

बाथरूम में युवती की लाश, बदन पर चाकू के जख्म:मां के साथ सो रही थी दूसरी बेटी, कौन था हमलावर…खून किसने साफ किया?

बाथरूम में युवती की लाश, बदन पर चाकू के जख्म:मां के साथ सो रही थी दूसरी बेटी, कौन था हमलावर…खून किसने साफ किया?

मध्यप्रदेश क्राइम फाइल्स में आज एक ऐसे मर्डर केस की कहानी, जिसने दो राज्यों में सुर्खियां बटोरीं। मामला नरसिंहपुर जिले में एक युवती की संदिग्ध मौत का था। इसने पुलिस को उलझन में डाल दिया था। परिवार इसे बाथरूम में फिसलकर हुई दुर्घटना बता रहा था, लेकिन जांच में जो सच सामने आया, उसने सभी के होश उड़ा दिए। उसकी हत्या किसने और क्यों की? क्या मां-बेटी ही कातिल थीं या कोई बाहरी कत्ल करके फरार हो चुका था? आखिर क्या था पूरा मामला-पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 22 फरवरी की शाम करीब 4 बजे सुरेंद्र ढिमोले अपने फार्महाउस पर काम कर रहे थे। तभी उनकी भांजी खुशबू का घबराया हुआ फोन आया-“मामा, जल्दी आइए… शिखा बाथरूम में गिर गई है… हालत ठीक नहीं है… अस्पताल ले जाना है।” सुरेंद्र बिना देर किए बहन के घर पहुंचे। घर के भीतर अजीब-सी खामोशी थी। बाथरूम के पास शिखा बेहोश पड़ी थी। शरीर ढीला, चेहरा नीला। सुरेंद्र ने तुरंत एंबुलेंस को कॉल किया और शिखा को लेकर अस्पताल पहुंचे। घर में सिर्फ तीन लोग, दोपहर तक सब सामान्य घर में सिर्फ तीन लोग ही रहते थे। शिखा, खुशबू और उनकी मां बबली। शिखा घर की सबसे छोटी बेटी थी। दोपहर को सभी ने खाना खाया और सोने चले गए। 4 बजे खुशबू की नींद खुली तो वह बाथरूम की तरफ गई, जहां देखा कि शिखा बेहोश पड़ी है। मां और बहन को कुछ समझ नहीं आ रहा था यह सब अचानक कैसे हो गया। परिजन हैरान थे कि बाथरूम में फिसलने से मौत कैसे हो गई? दोपहर तक सबके साथ हंसती-खेलती घर वालों की दुलारी शिखा अब उनके बीच नहीं रही। डॉक्टरों को दिखे संदिग्ध निशान डॉक्टरों ने देखा कि शरीर पर कई जगह चोट के निशान थे। गर्दन के आसपास के घाव सामान्य गिरने जैसे नहीं लग रहे थे। कुछ कटे हुए निशान भी थे। डॉक्टरों को मामला संदिग्ध लगा तो पुलिस को सूचना दी। अस्पताल पहुंची पुलिस को शिखा की मौत संदेहास्पद लगी, लिहाजा शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घर वाले शिखा की मौत बाथरुम में गिरने से बता रहे थे। पुलिस ने घर का निरीक्षण किया। बाथरूम के फर्श पर पानी था, लेकिन खून के स्पष्ट निशान नहीं। शिखा का किसी से विवाद नहीं था पुलिस कों संदेह था कि शिखा की हत्या की गई, लेकिन घर वालों को खुद समझ नहीं आ रहा था कि आखिर शिखा की हत्या कौन और क्यों करेगा? न शिखा का कोई बॉयफ्रेंड था और ना ही कभी उसने किसी ऐसे लड़के के परेशान करने की बात का जिक्र किया था। लिहाजा जांच अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिक गई जो सबसे अहम थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही शिखा की मौत की असली वजह साफ हो सकती थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदली कहानी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उसने कहानी की दिशा ही बदल दी। रिपोर्ट में शरीर पर धारदार हथियार से किए गए कई घाव पाए गए, जिनमें सबसे गंभीर जख्म गर्दन पर थे। गर्दन पर 6 गहरे घाव थे, श्वास नली कटी हुई थी। सिर और चेहरे पर भी बेरहमी से हमला सिर के बाएं हिस्से में घाव और खोपड़ी के अंदर रक्तस्राव मिला। बाएं गाल, आंख, जबड़े और कान पर कटे घाव व सूजन थी। चेहरे पर भी हमला किया गया था। कोहनी, हाथ की अंगुली पर छिले घाव व नीले निशान थे। छाती के बीच में सूजन था। चाकू से कटने का निशान भी था। दोनों पैरों के जोड़ों पर रस्सी से बांधने जैसे निशान थे। हाथ-पैर बांधकर चाकू मारा गया पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने अपना मत दिया कि लड़की की मौत फिसलने से नहीं हुई, बल्कि उसकी बर्बर तरीके से हत्या की गई है। उसके हाथ-पैर बांधकर उसकी गर्दन पर कई बार चाकू मारा गया। फिर पत्थर जैसी वस्तु पर उसे पटका गया। क्या घर के भीतर ही छिपा था राज? अब यह साफ हो चुका था कि यह कोई साधारण हादसा नहीं है, बल्कि शिखा की बेरहमी से हत्या की गई। अब सवाल ये था कि अगर यह हत्या है, तो हत्यारा कौन है? घर में जबरन किसी के घुसने के निशान नहीं थे। लूटपाट नहीं तो क्या हत्यारा घर का ही कोई था? पुलिस ने मां और बहन से पूछताछ की। मां ने बताया कि दोपहर करीब 12 बजे खाना खा कर सो गई थी, करीब चार बजे जब उठी तो देखा कि शिखा बाथरूम में बेसुध हालत में गिरी है। खुशबू ने भी बेहोशी की हालत में शिखा को देखने के बाद मामा को फोन कर घर आने और शिखा को अस्पताल ले जाने की बात कही। दोनों का बयान एक जैसा था- ‘वह बाथरूम में फिसल गई थी।’ कॉल डिटेल में मिला नया सुराग पुलिस ने कॉल डिटेल खंगालनी शुरू की, वह किससे बात करती थी? घटना के समय लोकेशन पर कौन-कौन मौजूद था, पुलिस ने रिकॉर्ड मोबाइल कंपनी से निकलवाया। तो एक ऐसे शख्स का सुराग हाथ लगा जिसकी मोबाइल लोकेशन इससे पहले उस इलाके में कभी नहीं पाई गई थी। ये हादसा अब एक पहेली बन चुका था। इन सवालों के जवाब जानिए पार्ट 2 में- – क्या इस दौरान कोई बाहरी आदमी आया था? – शिखा की हत्या किसने और क्यों की? – शिखा का कत्ल घर के अंदर बेरहमी से किया गया तो उसकी मां और बहन खुशबू को पता क्यों नहीं चला। – क्या उसकी जिंदगी में कोई ऐसा राज था जो अब तक सामने नहीं आया? – वह कौन था जिसकी लोकेशन उस इलाके में पहली बार पाई गई थी?