टेक्सास में हनुमान जी की मूर्ति से ट्रम्प समर्थक नाराज:कहा- ये दिल्ली नहीं, पिछड़े देशों के लोग अमेरिका पर कब्जा कर रहे

अमेरिका के टेक्सास राज्य में हनुमान जी की मूर्ति पर ट्रम्प समर्थक नेता कार्लोस टुर्सियोस ने नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया X पर लिखा कि यह इस्लामाबाद या नई दिल्ली नहीं है। यह शुगर लैंड, टेक्सास है। टुर्सियोस ने कहा कि पिछड़े देशों के प्रावासी धीरे-धीरे टेक्सास और अमेरिका पर कब्जा कर रहे हैं। यह अमेरिका की तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति क्यों है? हमला रोकिए। बता दें कि हनुमान की 90 फीट ऊंची मूर्ति टेक्सास राज्य के ‘श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर’ में लगी है और इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ कहा जाता है। टुर्सियोस पर नस्लभेदी सोच फैलाने का आरोप कई लोग सोशल मीडिया पर टुर्सियोस के इस बयान का विरोध कर रहे हैं। कुछने उन पर नस्लभेदी सोच फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि प्रवासी समुदाय और अलग-अलग धर्मों के लोगों ने अमेरिकी समाज को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है। कार्तिक गडा नाम के एक यूजर ने अमेरिका में बोली जाने वाली भाषाओं का चार्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा कि अमेरिका में 4.1 करोड़ घरों में स्पेनिश बोली जाती है, जबकि भारतीय भाषाएं टॉप 10 में भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि घर में बोली जाने वाली भाषा समाज में घुलने-मिलने का बड़ा संकेत है और भारतीय-अमेरिकी समुदाय काफी हद तक मुख्यधारा में शामिल हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि जब किसी भारतीय भाषा के बोलने वालों की संख्या स्पेनिश से ज्यादा हो जाएगी, तब यह देखा जाएगा कि कौन कितना घुला-मिला है। नूरी सुन्नाह नाम के एक यूजर ने लिखा कि यह मूर्ति करीब डेढ़ साल से वहीं है। मंदिर में आने वाले हिंदुओं को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। अगर किसी को यह पसंद नहीं है, तो वह इसे नजरअंदाज कर सकता है। टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची मूर्ति अमेरिका के टेक्सास राज्य के शुगर लैंड में मौजूद श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची कांसे की मूर्ति है। इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ कहा जाता है। यह भारत के बाहर हनुमानजी की सबसे ऊंची मूर्ति है। मूर्ति का वजन 90 टन है और इसे पांच धातुओं के मिश्रण से बनाया गया है। हनुमानजी को अभय मुद्रा में हाथ आगे करके और गदा के साथ दिखाया गया है। यह कमल के तख्त पर खड़ी है, जिसे हाथी की मूर्तियों से सजाया गया है। अमेरिका में यह तीसरी सबसे ऊंची मूर्ति है, जो स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (151 फीट) और फ्लोरिडा की पेगासस एंड ड्रैगन (110 फीट) के बाद आती है। मूर्ति की स्थापना के लिए 15 से 18 अगस्त 2024 को तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा समारोह हुआ था जिसमें हजारों लोग शामिल हुए थे। ट्रम्प समर्थक नेता ने पिछले साल भी विवादित बयान दिया था यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प समर्थक नेता ने हनुमान जी की मूर्ति को लेकर इस तरह का बयान दिया हो। पिछले साल ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के नेता अलेक्जेंडर डंकन ने भगवान हनुमान की प्रतिमा पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने इसे झूठे भगवान की झूठी प्रतिमा कहा था। डंकन ने X पर लिखा था- हम टेक्सास में एक झूठे हिंदू भगवान की झूठी मूर्ति क्यों लगने दे रहे हैं? हम एक ईसाई राष्ट्र हैं। कई अन्य संगठनों ने भी इसे धार्मिक आस्था पर हमला बताते हुए माफी की मांग की थी। अमेरिकी नागरिकों ने भी इसकी घोर निंदा की थी। भारतवंशियों के खिलाफ हेट क्राइम बढ़ा ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में भारतवंशियों के खिलाफ हेट क्राइम के मामले बढ़े हैं। बाइडेन कार्यकाल में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों के खिलाफ ऑनलाइन नफरत व हिंसा सीमित रही। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2024 तक 46,000 ट्रोलिंग और 884 धमकियां दर्ज हुईं। लेकिन ट्रम्प के लौटते ही हालात बिगड़ गए। अक्टूबर 2025 तक ट्रोलिंग बढ़कर 88,000 तक पहुंची, यानी इसमें 91% की वृद्धि दर्ज की गई। दिसंबर में वीजा और माइग्रेंट मामले में ट्रम्प-मस्क-रामास्वामी बहस के बाद 76% धमकियां ‘नौकरियां छीनने’ से जुड़ी रहीं। ट्रम्प सरकार के H-1B वीजा फीस बढ़ाने और 104 भारतीयों को डिपोर्ट करने के फैसले ने माहौल भड़काया। कई शहरों में निशाने पर भारतीय समुदाय के लोग नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच अमेरिका के शहरों में भारतीय समुदाय को निशाना बनाते हुए हिंसक वारदातों की एक शृंखला सामने आई। फरवरी 2025 में वर्जीनिया में एक भारतीय-अमेरिकी कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मार्च 2025 में एक किराना स्टोर पर हुए हमले में पिता-पुत्री की जान चली गई। सितंबर 2025 में टेक्सास के डलास में दो छात्रों और श्रमिकों की हत्या कर दी गई। इसी महीने चंद्रमौली नागमल्लैया की सिर काटकर हत्या ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। अक्टूबर 2025 में पेंसिल्वेनिया के पिट्सबर्ग में एक मोटेल पर गोलीबारी में भारतीय मूल के मालिक और कर्मचारियों को निशाना बनाया गया। वहीं ओहायो, इलिनॉय और इंडियाना राज्यों में छात्रों से हेट क्राइम के मामले सामने आए। ‘भारतीयों को देश से निकालो’ जैसे नारे बढ़ें रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ते नस्लभेद का यह ट्रेंड सिर्फ भारतीयों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई समुदाय को निशाना बना रहा है। इसमें धर्म, नागरिकता या जातीय पहचान का कोई फर्क नहीं किया जा रहा। रिपोर्ट में इसके चार प्रमुख कारण बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में प्रवासियों के खिलाफ जो वैश्विक नाराजगी बढ़ी है, वह इस नस्लभेदी ट्रेंड का पहला बड़ा कारण है। यह भावना दुनियाभर में उभर रही दक्षिणपंथी राजनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। ट्रम्प की नीतियों से भारतीयों पर नस्लभेदी पोस्ट बढ़े H-1B पर अमेरिकी हैं गुस्सा अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर गुस्सा भी इस ट्रेंड को बढ़ा रहा है। दक्षिणपंथी समूहों का आरोप है कि भारतीय ‘कम योग्य’ होते हुए भी अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीन रहे हैं। इससे सोशल मीडिया पर ‘भारतीयों को देश से निकालो’ जैसे नारों में इजाफा हुआ। श्वेत वर्चस्ववाद अपने चरम पर भारतीयों के खिलाफ नस्लभेद एशियाई समुदायों के खिलाफ व्यापक भेदभाव का हिस्सा है। ट्रम्प की जीत के बाद श्वेत वर्चस्ववादी गतिविधियां चरम पर पहुंच जाती हैं। जबकि, चुनावी दौर में हेट क्राइम में करीब 80% की बढ़ोतरी देखी जाती है। ट्रेड डील पर तनाव का भी असर भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर तनाव से नफरत को हवा
विधानसभा चुनाव से पहले ‘द केरल स्टोरी 2’ पर राजनीति गरमाई: ‘लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश’ | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:19 फरवरी, 2026, 16:59 IST राजीव चन्द्रशेखर ने द केरल स्टोरी 2 का विरोध करने के लिए पिनाराई विजयन की आलोचना की और इसे पाखंड और चुनावी ध्यान भटकाने वाला बताया। विजयन ने एक्स से मुलाकात की और द केरल स्टोरी के सीक्वल की खबरों पर कड़ा विरोध जताया। (फ़ाइल फ़ोटो) केरल भाजपा प्रमुख राजीव चंद्रशेखर ने गुरुवार को राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की आगामी फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ पर उनकी “नफरत फैलाने वाली फिल्म” टिप्पणी को लेकर उन पर निशाना साधा और कहा कि वह विधानसभा चुनाव से पहले “लोगों का ध्यान भटकाने” का प्रयास कर रहे हैं। चन्द्रशेखर ने कहा कि विजयन के पास “मुख्यमंत्री के रूप में केवल 45 दिन और” हैं और उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी टिप्पणियों का उद्देश्य सरकार की “10 साल की विफलता” से ध्यान भटकाना है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आगे विजयन के “पाखंड” को उजागर करते हुए कहा कि जब एक फिल्म रिलीज हुई जो भगवा खेमे के खिलाफ थी, तो विजयन ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रूप में सराहा, लेकिन जब उनकी राजनीतिक सोच के खिलाफ एक फिल्म बनाई गई, तो यह अचानक एक समस्या बन गई। “पिनाराई विजयन के पास मुख्यमंत्री के रूप में 45 दिन और हैं, और वह जानते हैं कि 46वें दिन उन्हें अपना आवास बदलना होगा। जब एक फिल्म आई जो भाजपा के खिलाफ थी, तो हमने विरोध नहीं किया या कुछ नहीं कहा। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला दिया। ऐसा कैसे हो सकता है कि जब कोई और उनकी राजनीतिक सोच के खिलाफ फिल्म बनाता है, तो यह अचानक एक समस्या बन जाती है? यह पाखंड है। यह मूल रूप से केरल के लोगों को उनकी 10 साल की विफलता से ध्यान भटकाने का एक प्रयास है।” समाचार एजेंसी एएनआई. #घड़ी | दिल्ली: ‘द केरल स्टोरी 2’ फिल्म पर केरल के सीएम पिनाराई विजयन के रुख के बारे में केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर का कहना है, “पिनाराई विजयन के पास मुख्यमंत्री के रूप में 45 दिन और हैं, और वह जानते हैं कि 46वें दिन उन्हें अपना आवास बदलना होगा…जब… pic.twitter.com/PGh75SICa2– एएनआई (@ANI) 19 फ़रवरी 2026 उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फिल्म निर्माताओं को फिल्में बनाने और दर्शकों को उन्हें देखने का अधिकार है। उन्होंने कहा, “किसी ने आपको संरक्षक नियुक्त नहीं किया है। आपको ऐसा व्यवहार करने की कोई आवश्यकता नहीं है कि आप किसी समुदाय के रक्षक हैं। आज हर भारतीय, हर मलयाली को समान मौलिक अधिकार दिए गए हैं। लोगों को मूर्ख बनाना बंद करें। यह फिल्म इसलिए दिखाई जाएगी क्योंकि जितना आपको फिल्म देखने का अधिकार है, उतना ही मुझे भी फिल्म देखने का अधिकार है। जैसे किसी भी निर्देशक को फिल्म बनाने का अधिकार है, वैसे ही इस निर्देशक को भी फिल्म बनाने का अधिकार है।” चंद्रशेखर ने आगे कहा कि अगर फिल्म में कुछ भी गैरकानूनी है तो लोगों को धमकाने के बजाय मामले को अदालत में ले जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर आपको इससे कोई समस्या है, और अगर फिल्म में कुछ गैरकानूनी है, तो अदालत जाएं। लेकिन लोगों को धमकाने की कोशिश न करें। लोगों में डर पैदा करने के लिए अपने मुख्यमंत्री के पद का इस्तेमाल करने की कोशिश न करें, जिसे हम अनुमति नहीं देंगे।” विजयन ने क्या कहा? इससे पहले दिन में, विजयन ने एक्स से मुलाकात की और द केरल स्टोरी के सीक्वल की रिपोर्टों पर कड़ा विरोध व्यक्त किया। उन्होंने इसे “नफरत फैलाने वाली फिल्म” बताया और कहा कि इसका सीक्वल राज्य में “सांप्रदायिक कलह” भड़काने का एक और प्रयास होगा। “नफरत फैलाने वाली फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के सीक्वल की रिलीज से संबंधित रिपोर्टों को अत्यंत गंभीरता से देखा जाना चाहिए। पहले भाग के सांप्रदायिक एजेंडे और ज़बरदस्त झूठ को देखने के बाद, केरल एक बार फिर हमारे धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को अवमानना के साथ बदनाम करने के इस प्रयास को खारिज कर देगा।” विजयन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा। नफरत फैलाने वाली फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ के सीक्वल की रिलीज से जुड़ी खबरों को बेहद गंभीरता से देखा जाना चाहिए। पहले भाग के सांप्रदायिक एजेंडे और ज़बरदस्त झूठ को पहले ही देख लेने के बाद, केरल एक बार फिर हमारे धर्मनिरपेक्ष को बदनाम करने के इस प्रयास को अस्वीकार कर देगा…- पिनाराई विजयन (@pinarayivijayan) 19 फ़रवरी 2026 मामला पहुंचा हाई कोर्ट इस बीच, फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर एक याचिका के बाद केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को सूचना और प्रसारण मंत्रालय, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड और फिल्म “द केरल स्टोरी 2 – गोज़ बियॉन्ड” के निर्माता को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता, श्रीदेव नंबूदिरी, जो पेशे से जीवविज्ञानी हैं, ने आरोप लगाया कि फिल्म के टीज़र ने “उनके विवेक को झकझोर दिया”, क्योंकि यह केरल को खराब रोशनी में दिखाता है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि हालांकि फिल्म के टीज़र में अन्य राज्यों की कहानियां शामिल हैं, लेकिन शीर्षक से यह आभास होता है कि घटनाएं, चाहे काल्पनिक हों या वास्तविक, विशेष रूप से केरल में घटित हो रही हैं। ‘द केरल स्टोरी 2’ के निर्माताओं ने हाल ही में सीक्वल का ट्रेलर जारी किया, जिसमें दिखाया गया कि कैसे हिंदू महिलाओं को प्यार के नाम पर इस्लामिक पुरुषों ने फंसाया था। उनके समानांतर जीवन ने दिखाया कि कैसे रोमांस और विद्रोह नियंत्रण और चुप्पी में बदल जाते हैं, प्यार एक ऐसे हथियार में बदल जाता है जो स्वतंत्रता को नष्ट कर देता है। फिल्म को अमरनाथ झा और विपुल अमृतलाल शाह ने लिखा है, जबकि इसका निर्देशन कामाख्या नारायण सिंह ने किया है। यह फिल्म 27 फरवरी को सिनेमाघरों में आएगी। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तिरुवनंतपुरम, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 19 फरवरी, 2026, 16:59 IST समाचार राजनीति विधानसभा चुनाव से पहले ‘द केरल स्टोरी 2’ पर राजनीति गरमाई: ‘लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश’ अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग
फुल स्टॉप जरूरी, पर प्यार को कॉमा दें:कैमरे के सामने झूठ नहीं चलता, मृणाल और सिद्धांत ने जिंदगी, जजमेंट पर रखी अपनी राय

मृणाल ठाकुर और सिद्धांत चतुर्वेदी की अपकमिंग रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ कल यानी कि 20 फरवरी 2026 को रिलीज होने वाली है। मृणाल और सिद्धांत ने हाल ही में दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। मृणाल जहां खुद से प्यार करना, धीमी जिंदगी और भावनात्मक संतुलन की बात करती हैं, वहीं सिद्धांत इंडस्ट्री में जजमेंट, भाषा के कॉम्प्लेक्स और अपनी जड़ों पर गर्व का खुलकर जिक्र किया। पेश है बातचीत के कुछ प्रमुख अंश.. सवाल: मृणाल, इस फिल्म से पहले आप ब्रेकअप की स्थिति में थीं। उस दौर को आप कैसे देखती हैं? जवाब / मृणाल: मेरे लिए वह वही समय और वही मुकाम था, जब यह चीज मेरी जिंदगी में होनी थी। मुझे लगता है कि मेरे भीतर बहुत सारी जटिलताएं, असुरक्षाएं और डर थे। लेकिन आज उन्हीं कमजोरियों को मैंने अपनी ताकत बना लिया है। सवाल: आपने अपनी भाषा और एक्सेंट को लेकर भी असुरक्षा की बात की थी। आज उस डर को कैसे देखती हैं? जवाब / मृणाल:शुरुआत में मुझे बहुत डर लगता था कि अगर मैं हिंदी या अंग्रेजी में बात करूंगी, तो मेरी मराठी एक्सेंट सामने आ जाएगी। लेकिन आज जब मैं मराठी में बात करती हूं, तो वही लोग उसे पसंद करते हैं और बहुत प्यार मिलता है। यह मेरे लिए बहुत बड़ा आत्मविश्वास है। सवाल: इस फिल्म ने आपको जीवन को किस तरह देखने का नजरिया दिया? जवाब / मृणाल: इस फिल्म ने मुझे सिखाया कि जैसे हैं, वैसे ही रहना सबसे जरूरी है। आप से बेहतर आप कोई और नहीं हो सकता। यह एक यात्रा है, एक आत्म-खोज है। मैंने इस फिल्म को एक एक्ट्रेस के तौर पर इसलिए चुना क्योंकि इसकी कहानी अलग और साहसी थी। लेकिन कब यह फिल्म मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गई, मुझे पता ही नहीं चला। सवाल: आज की तेज रफ्तार जिंदगी पर यह फिल्म क्या सवाल उठाती है? जवाब / मृणाल: आज हम हर वक्त जल्दी में रहते हैं। खाना खाते समय भी मोबाइल देखते हैं। सुबह क्या होती है, यह हम भूल चुके हैं। यह फिल्म हमें सिखाती है कि कभी-कभी रुकना जरूरी है, खुद को समझना जरूरी है। अपनी कमजोरियों, अपनी ताकतों और अपने लोगों से प्यार करना जरूरी है। सवाल: सिद्धांत, शूटिंग के दौरान आप निजी तौर पर मुश्किल दौर से गुजर रहे थे। उस अनुभव ने आपके अभिनय को कैसे प्रभावित किया? जवाब / सिद्धांत: जो भी मेरे दिल में चल रहा था, मैंने उसे पर्दे पर उतार दिया है। जब दर्शक फिल्म देखेंगे, तो उन्हें वह महसूस होगा। मैं हमेशा कोशिश करता हूं कि अपने निजी अनुभवों को अपने काम में सच्चाई के साथ डाल सकूं, क्योंकि कैमरे के सामने आप झूठ नहीं बोल सकते। सवाल : क्या वह निजी संघर्ष आपके लिए नुकसानदायक था या मददगार? जवाब / सिद्धांत: इस फिल्म के दौरान मेरी जिंदगी में कुछ चल रहा था, दुर्भाग्य से भी और सौभाग्य से भी। लेकिन मुझे लगता है कि जिंदगी में जो होता है, किसी कारण से होता है। आज पूरी टीम फिल्म से खुश है और मुझे संतोष है कि जो भी दर्द था, वह सही जगह इस्तेमाल हुआ। सवाल: मृणाल, किसी किरदार की तैयारी आप किस तरह करती हैं? जवाब / मृणाल: मेरे लिए तैयारी बहुत आंतरिक होती है। मैं ज्यादातर इंडस्ट्री से बाहर के लोगों से बातचीत करके प्रेरणा लेती हूं। चाहे वह ट्रेन में मिलने वाला कोई यात्री हो, फ्लाइट का सहयात्री हो, या रोजमर्रा की जिंदगी में मिलने वाले लोग, उनकी कहानियां मुझे बहुत कुछ सिखाती हैं। सवाल : रोशनी जैसे किरदार को गढ़ने में किन चीजों ने मदद की? जवाब / मृणाल: हर किरदार के पीछे कोई न कोई असली इंसान होता है। रोशनी कई चीजों का मेल है। जिसमें लेखक की सोच, निर्देशक का नजरिया और मेरी निजी समझ शामिल है। सबसे जरूरी बात यह है कि कलाकार को बहना आना चाहिए, फ्लो में रहना चाहिए और निर्देशक के विजन पर भरोसा करना चाहिए। सवाल: शशांक का किरदार आपके असली जीवन से कितना मेल खाता है? जवाब/ सिद्धांत: बहुत ज्यादा नहीं। अनुभव मिलते-जुलते हो सकते हैं, लेकिन हर इंसान उन्हें अलग तरह से जीता है। मैं जानबूझकर ऐसे किरदार चुनता हूं जो मुझसे काफी अलग हों। अपनी जिंदगी तो मैं जी ही रहा हूं, मुझे दूसरों की जिंदगी को करीब से देखने में दिलचस्पी है। यही मेरी जिज्ञासा है। सवाल : आपके लिए अब तक का सबसे मुश्किल किरदार कौन सा रहा? जवाब / मृणाल: मेरे लिए सबसे मुश्किल किरदार ‘लव सोनिया’ का रहा है। वह मेरी पहली फिल्म थी और मैंने बहुत गहरे अनुभव देखे। उस फिल्म ने मुझे अंदर से तोड़ा भी और आज जो मैं हूं, उसे गढ़ा भी। उस किरदार से निकलना आसान नहीं था। सवाल : सिद्धांत, आपके लिए सबसे कठिन किरदार कौन सा रहा? जवाब / सिद्धांत: मेरे लिए ‘धड़क’ सबसे मुश्किल रही। ट्रैजिक किरदार आपके साथ रह जाते हैं। उस किरदार से निकलने में मुझे लगभग एक साल लग गया। उस दौरान मैं बहुत गुस्से में रहता था, लेकिन एक हल्की और सकारात्मक फिल्म ने मुझे उस अंधेरे से बाहर निकाला। सवाल: इंडस्ट्री में भाषा, पहनावे और पहचान को लेकर होने वाले जजमेंट को आप कैसे देखते हैं? जवाब / सिद्धांत: मुझे बचपन में महंगे कपड़े न पहनने पर चिढ़ाया गया, लेकिन मेरे माता-पिता ने सिखाया कि पहचान काम से बनती है, ब्रांड से नहीं। इंडस्ट्री में कई जगह टैलेंट से ज्यादा भाषा, एक्सेंट और पहनावे को महत्व दिया जाता है, लेकिन हमें अपनी जड़ों और अपनी भाषाओं पर गर्व होना चाहिए। सवाल : सोशल मीडिया की अफवाहों और खबरों को आप कैसे संभालती हैं? जवाब / मृणाल: मैं ध्यान नहीं देती। अगर मुझे कुछ कहना होगा, तो मैं खुद अपने सोशल मीडिया पर कहूंगी। मैं चाहती हूं कि मुझे मेरे काम के लिए जाना जाए. एक ऐसे एक्ट्रेस के रूप में जिसने अलग और मुश्किल रास्ते चुने। सवाल: इस फिल्म में एक संवाद है कि कुछ रिश्तों को फुल स्टॉप लगा देना चाहिए। कब पता चलता है? जवाब / मृणाल : किसी को नहीं पता। जब प्यार में चीजें बहुत बिगड़ जाएं, तो फुल स्टॉप जरूरी होता है। लेकिन अगर दोनों मिलकर समस्याओं से निपट सकते हैं,
चीनी रोबोट विवाद के बाद प्रोफेसर को नौकरी की तलाश:लिंक्डइन पर लिखा ओपन टू वर्क; गलगोटिया यूनिवर्सिटी AI समिट से बाहर

चाइनीज रोबोट को गलगोटिया यूनिवर्सिटी का इन्वेंशन बताने वाली प्रोफेसर नेहा सिंह अब नई नौकरी की तलाश में हैं। उन्होंने लिंक्डइन प्रोफाइल पर ‘ओपन टू वर्क’ का स्टेटस अपडेट कर दिया है। इस मामले के आने के बाद सरकार ने यूनिवर्सिटी को AI समिट से बाहर कर दिया था। वहीं यूनिवर्सिटी ने इस पूरे मामले के लिए प्रोफेसर को जिम्मेदार ठहराते हुए माफी मांगी है। यूनिवर्सिटी ने कहा, “हमारी एक प्रतिनिधि को सही जानकारी नहीं थी। वे कैमरे पर आने के उत्साह में गलत तथ्य दे गईं। उन्हें प्रेस से बात करने के लिए अधिकृत भी नहीं किया गया था।” आईटी सचिव बोले- गलत जानकारी बर्दाश्त नहीं विवाद पर बात करते हुए आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा, “हम चाहते हैं कि लोग एक्सपो में जो भी प्रदर्शित करें, उसमें उनका वास्तविक काम दिखे। हम नहीं चाहते कि ऐसे आयोजनों का इस्तेमाल किसी और तरीके से किया जाए। गलत जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।” जब उनसे पूछा गया कि क्या मंत्रालय ने पहले मॉडल्स की जांच नहीं की थी, तो उन्होंने कहा, “ये चीजें बिक्री के लिए नहीं थीं, जहां हमें सर्टिफिकेशन की जरूरत हो। जब कोई प्रोडक्ट का डेमो देता है, तो हम मानकर चलते हैं कि उन्हें पता है वे क्या कह रहे हैं। अगर हम प्रदर्शनी की हर चीज को सर्टिफाई करने लगेंगे, तो लोग कहेंगे कि हम इनोवेशन को रोक रहे हैं।” वीडियो वायरल होने से शुरू हुआ विवाद वीडियो में यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह कह रही हैं कि इस रोबोटिक डॉग का नाम ‘ओरियन’ है। इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ ने तैयार किया है। उन्होंने ये भी कहा कि यूनिवर्सिटी AI के क्षेत्र में 350 करोड़ रुपए का निवेश कर रही है। इस वीडियो के सामने आने के बाद कई टेक एक्सपर्ट्स और यूजर्स ने दावा किया कि यह असल में चीनी कंपनी ‘यूनिट्री’ का ‘Go2’ मॉडल है, जो बाजार में 2-3 लाख रुपए में उपलब्ध है। वहीं एक अन्य वीडियो में यूनिवर्सिटी जिस ड्रोन को कैंपस में ‘शुरुआत से’ तैयार करने का दावा कर रही हैं, उसे यूजर्स ने ₹40 हजार वाला रेडीमेड ‘स्ट्राइककर V3 ARF’ मॉडल बताया है। यूनिवर्सिटी ने माना था, हमने नहीं बनाया ये डॉग वीडियो वायरल होने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने कहा था- हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि गलगोटिया ने यह रोबोटिक डॉग नहीं बनाया है और न ही हमने कभी ऐसा दावा किया है। लेकिन हम ऐसे दिमाग तैयार कर रहे हैं जो जल्द ही भारत में ऐसी ही टेक्नोलॉजी को डिजाइन करेंगे, उनकी इंजीनियरिंग करेंगे और उन्हें यहीं बनाएंगे। नॉलेज बॉक्स: क्या है यूनिट्री Go2 रोबोटिक डॉग यूनिट्री Go2 चीन की यूनिट्री रोबोटिक्स कंपनी द्वारा बनाया गया एक एआई-पावर्ड रोबोटिक डॉग है, जो अपनी फुर्ती और एडवांस सेंसर्स के लिए दुनियाभर में मशहूर है। इसमें 4D LiDAR तकनीक का इस्तेमाल हुआ है, जिसकी मदद से यह सीढ़ियां चढ़ने, ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने और अपने रास्ते में आने वाली बाधाओं को पहचानता है। लगभग 2 से 3 लाख रुपए की कीमत वाला यह रोबोट वॉयस कमांड पर भी काम करता है और मुख्य रूप से तकनीकी रिसर्च और शिक्षा के क्षेत्र में इस्तेमाल किया जाता है। कैसे काम करती है यह तकनीक रोबोटिक डॉग बनाने में मैकेनिकल इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर का गहरा तालमेल होता है: आर्टिफिशियल मांसपेशियां: इनके पैरों में सर्वो मोटर्स या एक्चुएटर्स लगे होते हैं, जो मांसपेशियों की तरह काम करते हैं। इससे रोबोट सीढ़ियां चढ़ने और कूदने में सक्षम होता है। लिडार (LiDAR) तकनीक: लेजर पल्स के जरिए ये रोबोट अपने आसपास का 3D मैप बना लेते हैं। इससे इन्हें पता चलता है कि सामने दीवार है या कोई और रुकावट। खुद का दिमाग: मशीन लर्निंग एल्गोरिदम की मदद से ये बिना किसी इंसान के बताए खुद फैसला ले सकते हैं कि किस रास्ते से जाना सुरक्षित होगा। 2011 में शुरू हुई थी गलगोटिया यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी 2011 में शुरू हुई थी। ये यूनिवर्सिटी 20 अलग-अलग स्कूलों के जरिए डिप्लोमा से लेकर पीएचडी तक के 200 से ज्यादा कोर्स कराती हैं। सुनील गलगोटिया यूनिवर्सिटी के चांसलर और ध्रुव गलगोटिया CEO हैं। अब दिल्ली में चल रही AI समिट के बारे में जानें…
एक्स हसबेंड ने X वाइफ से लिया ऐसा बदला, सन्न रह गया पूरा शहर, चारों तरफ मची चीख-पुकार | hyderabad sunitha murdered case ex husband arrested revenge inside story domestic violence canada visa passport suspension

Last Updated:February 19, 2026, 13:28 IST हैदराबाद के वनस्थलीपुरम में एक पूर्व पति ने अपनी एक्स वाइफ के साथ जो सलूक किया, उसकी चर्चा सोशल मीडिया पर शुरू हो गई है. एक्स हसबेंड ने अपनी ही एक्स वाइफ को चाकू से गोदकर हत्या कर दी. पूर्व पत्नी ने पूर्व पति पर घरेलू हिंसा का केस क रखा था. इस कारण आरोपी का पासपोर्ट जब्त हो गया था और वह कनाडा नहीं जा पा रहा था. इसी रंजिश में उसने खौफनाक वारदात को अंजाम दिया. हैदराबाद पुलिस ने आरोपी को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया है. हैदराबाद में एक्स पति ने एक्स वाइफ से लिया खौफनाक बदला. हैदरबाद. तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के वनस्थलीपुरम इलाके में बुधवार को दिन-दहाड़े एक ऐसी घटना घटी है, जिससे हर कोई हैरान और परेशान हो गया. एक पति-पत्नी की तलाक के बाद जो कहानी सामने आई, वह हर किसी को होश उड़ा रहा है. एक आईटी इंजीनियर ने पारिवारिक कलह और कोर्ट कचहरी के चक्कर से तंग आकर अपराधी बन गया. सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी एक्स वाइफ के घर में घुसकर मौत के घाट उतार दिया. हत्या के बाद बाथरूम में बंद हो गया. पुलिस ने आरोपी शख्स को गिरफ्तार कर लिया है. मृतक की पहचान सुनीता के रूप में हुई है और आरोपी शख्स का नाम महेश है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर वह शख्स क्यों इस घटना को अंजाम दिया? क्या मां की मौत ने शख्स को अंदर से तोड़ दिया था? क्या यह हत्या केवल निजी दुश्मनी का नतीजा था या फिर इसके पीछे करियर की बर्बादी, कानूनी पचड़े और परिवार की मौत का बदला लेने की एक लंबी और सनकी दास्तां छिपी थी? कहानी शुरू होती है साल 2022 में जब आरोपी और 29 वर्षीय पीड़िता की शादी हुई थी. दोनों ही आईटी क्षेत्र में काम करते थे और एक खुशहाल भविष्य का सपना देख रहे थे. शादी के बाद पति कनाडा चला गया और कुछ समय बाद पत्नी भी उसके पास पहुंच गई. लेकिन सात समंदर पार जाने के बाद दोनों के बीच दूरियां कम होने के बजाय बढ़ने लगीं. आपसी विवाद इतना बढ़ गया कि महिला वापस भारत लौट आई और उसने महाराष्ट्र में अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज करा दिया. सनक की वजह- पासपोर्ट जब्त और मां की मौत साल 2024 में दोनों का आधिकारिक रूप से तलाक हो गया. महिला ने अपनी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाते हुए अप्रैल 2025 में दूसरी शादी कर ली. वहीं दूसरी ओर आरोपी पति की मुश्किलें बढ़ती जा रही थीं. मार्च 2025 में उसकी मां का निधन हो गया, जिसके बाद वह भारत आया. लेकिन घरेलू हिंसा के केस के कारण उसके खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर जारी हो चुका था. इस वजह से उसका पासपोर्ट निलंबित कर दिया गया और वह वापस कनाडा नहीं जा सका. 30-year-old woman allegedly stabbed multiple times by her ex-husband
सालाना 90 लाख होगा कार प्रोडक्शन:कार कंपनियां 1 लाख करोड़ लगा 65% बढ़ाएंगी उत्पादन, कम दाम पर बेहतर कारों की उम्मीद

देश की पांच बड़ी कार कंपनियां अगले 5-6 साल में करीब 1 लाख करोड़ रुपए निवेश करके उत्पादन क्षमता 65% तक बढ़ाने जा रही हैं। इससे कारों का सालाना उत्पादन 55 लाख से बढ़कर 90 लाख तक पहुंच सकता है। बढ़ती मांग के बीच इससे सप्लाई बढ़ेगी, नए मॉडल आएंगे और लोकप्रिय मॉडलों के लिए इंतजार की अवधि घट सकती है। देश की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों मारुति सुजुकी इंडिया, टोयोटा फिलोस्कर मोटर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स और जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया ने आक्रामक विस्तार की योजना बनाई है। इसके तहत भारी-भरकम निवेश से नए कारखाने खोले जाएंगे। एसयूवी, ईपी और हाइब्रिड टेक्नोलॉजी पर जोर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि आगामी वर्षों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। नतीजतन अभी के मुकाबले कम कीमतों पर बेहतर फीचर वाली कारें बाजार में आ सकती हैं। क्षमता विस्तार की होड़: नई फैक्ट्रियां, मॉडल, टेक्नोलॉजी पर फोकस मारुति सुजुकीः 35,000 करोड़ रुपए का नया निवेश कंपनी अभी सालाना 26 लाख कारें बना सकती है। 2027 से 2030 के बीच अतिरिक्त 15 लाख कारों की उत्पादन क्षमता जोड़ेगी। गुजरात के गांधीनगर में सालाना 10 लाख कारों का नया बड़ा प्लांट लगेगा। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनी बाजार हिस्सेदारी बचाना चाहती है। टोयोटा किर्लोस्कर मोटरः क्षमता दोगुनी करेगी टोयोटा किलोस्कर मोटर उत्पादन क्षमता दोगुनी सालाना 10 लाख कारों तक पहुंचाने जा रही है। बिदादी (कर्नाटक) प्लांट का विस्तार करेगी। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में नया बड़ा कारखाना लगाएगी। इससे फॉच्यूनर, इनोवा जैसे मॉडलों की लंबी वेटिंग कम हो जाएगी। महिंद्रा एंड महिंद्राः सालाना उत्पादन 7.4 लाख बढ़ाएगी कंगनी नागपुर में 5 लाख और चाकण में 2.4 लाख यूनिट की नई फैसिलिटी जोड़ेगी। अभी उत्पादन क्षमता सालाना 7.74 लाख कारों की है। 2030 तक इसे 15 लाख से ऊपर ले जाने का लक्ष्य है। 2027 में आने वाली कॉम्पैक्ट एसयूवी रेंज के लिए यह जरूरी है। टाटा मोटर्स नई ईवी, एसयूवी उतारेगी कंपनी तमिलनाडु में नया प्लॉट लगाएगी। जिसमें 9,000 करोड़ रुपए लगेंगे और सालाना 2.5 लाख कारें बनेगी। मौजूदा फैक्ट्रियां सालाना 8.5 लाख तक कारें बना रही हैं। कंपनी इलेक्ट्रिक कारों और एसयूवी के नए मॉडलों पर फोकस करेगी। नए मॉडल उतारेगी। एमजी मोटर क्षमता तीन गुना करेगी जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया 4,000 करोड़ रुपए के निवेश से क्षमता लगभग तीन गुना करके सालाना 3 लाख कारों तक पहुंचाएगी। कंपनी प्लग-इन हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों के नए मॉडल बाजार में उतारने पर फोकस कर रही है। आक्रामक विस्तार की जरूरत इसलिए पड़ी – जीएसटी के ढांचे में बदलाव और कटौती से टैक्स व्यवस्था अब बिलकुल स्पष्ट हो गई है। पहले टैक्स के मामले में अनिश्चितता बनी हुई थी, लेकिन अब कंपनियां लंबे समय की प्लानिंग कर सकती है। – मांग लगातार बढ़ रही है। आगामी वर्षों में भी कमोबेश यही स्थिति रहेगी। वाहन डीलरों के संगठन फाडा के प्रेसिडेंट सीएस विग्नेश्वर ने कहा कि जीएसटी में कटौती कई साल तक मांग मजबूत रखेगी। घरेलु, विदेशी बाजारों में मजबूत डिमांड सबसे बड़ा आकर्षण। – 2025 में रिकॉर्ड 45.30 लाख कारों की बिक्री हुई। – घरेलू बाजार में बिकी सालाना 7.3% बढ़ी, इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन 17% बढ़ा – गाड़ियों के निर्यात में 19.2% की तगड़ी बढ़ोतरी हुई।
ब्राजील कार्निवल, उमड़ा जनसैलाब, टूटेगा रिकॉर्ड:6.5 करोड़ लोगों की भीड़ और 190 करोड़ का बजट, सांबा की धुन पर थिरकी दुनिया

दुनिया के सबसे बड़े उत्सवों में से एक बाजील कार्निवल चरम पर पहुंच चुका है। 13 फरवरी से शुरू हुआ उत्सव अलग-अलग शहरों के बाद अब रियो डी जेनेरियों में दस्तक दे चुका है। 21 फरवरी तक चलने वाले कार्निवल में रिकॉर्ड तोड़ भीड़ उमड़ रही है। इस साल अनुमान है कि लगभग 6.5 करोड़ लोग शामिल होंगे। अलग-अलग शहरों में कार्निवाल में 4 हजार से ज्यादा कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। रियो डी जेनेरियो में ही करीब 80 लाख लोगों के आने की उम्मीद है। कलाकार और सांबा स्कूल भाग ले रहे हैं रियो में परेड का केंद्र सांबाडीम है, जहां 12 टॉप-लीग सांबा स्कूल मुख्य प्रतियोगिता में उतर रहे हैं। इनके साथ दर्जनों स्कूल निचली डिवीजनों में परेड करते हैं। हर बड़े सांबा स्कूल में हजारों डांसर, म्यूजीशियन, कारीगर, कॉस्ट्यूम डिजाइनर टेलर और सेट बनाने वाले लोग जुड़े होते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक अकेले एक उभरते स्कूल पाड़े मिग्वेल का बजट करीब 190 करोड़ रु है। अकेले रियो में हर साल करीब 70.000 अस्थायी नौकरियां मिलती हैं। इसमें सुरक्षा, सफाई, स्टाल, होटल रेस्तरां स्टाफ, इवेंट मैनेजमेंट शामिल हैं।
दावा- गाजा के 90% इलाके पर हमास का कब्जा:विरोध करने वालों की सजा दे रहा; ट्रम्प बोले- पीस बोर्ड को ₹90 हजार करोड़ देंगे

गाजा में अक्टूबर में लागू हुए सीजफायर के बाद हालात फिर बदलते दिख रहे हैं। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक गाजा के एक कार्यकर्ता मोहम्मद दियाब का दावा है कि हमास ने उन इलाकों के 90% से ज्यादा हिस्से पर दोबारा कब्जा जमा लिया है, जहां वह पहले से मौजूद था। दियाब का कहना है कि हमास की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां फिर से सड़कों पर दिखाई दे रही हैं। वे अपराध रोकने के नाम पर कार्रवाई कर रही हैं और जिन लोगों को अपना विरोधी या सहयोगी मानती हैं, उनके खिलाफ कदम उठा रही हैं। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऐलान किया है कि अमेरिका गाजा के लिए बने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को 10 अरब डॉलर (90 हजार करोड़ रुपये) की मदद देगा। यह संगठन अंतरराष्ट्रीय विवाद सुलझाने के लिए बनाया गया है और इसकी शुरुआत गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण के मकसद से हुई थी। बोर्ड ऑफ पीस मीटिंग की 3 तस्वीर… बोर्ड की मीटिंग में 50 देश के नेता शामिल हुए ट्रम्प ने कहा कि यह रकम युद्ध पर होने वाले खर्च के मुकाबले बहुत छोटी है। उन्होंने सदस्य देशों से कहा कि अगर सभी देश साथ आएं तो उस इलाके में स्थायी शांति लाई जा सकती है, जो सदियों से युद्ध और हिंसा झेलता आया है। ट्रम्प की अध्यक्षता में बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक वॉशिंगटन में हो रही है। पहले शिखर सम्मेलन में कम से कम 50 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, विदेश मंत्री या दूत शामिल हुए। बैठक में गाजा के लिए ट्रम्प की शांति योजना पर रिपोर्ट पेश की जानी है। हालांकि टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक बोर्ड के शुरुआती दस्तावेज में गाजा का साफ तौर पर जिक्र नहीं है। ट्रम्प ने कहा कि बोर्ड का मकसद सिर्फ गाजा नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में शांति लाना है। वहीं कई यूरोपीय देशों ने इसे ट्रम्प का निजी प्रोजेक्ट बताते हुए इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। 9 सदस्य गाजा के लिए 7 अरब डॉलर देने पर सहमत ट्रम्प ने गुरुवार को कहा कि कजाकिस्तान, अजरबैजान, UAE, मोरक्को, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और कुवैत ने गाजा राहत के लिए 7 अरब डॉलर (63 हजार करोड़ रुपए) से ज्यादा मदद देने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इंडोनेशिया, मोरक्को, अल्बानिया, कोसोवो और कजाकिस्तान ने गाजा में हालात संभालने के लिए अपने सैनिक और पुलिस बल भेजने का वादा किया है। ट्रम्प ने कहा कि मिस्र और जॉर्डन भी बड़ी मदद कर रहे हैं। वे सैनिक, ट्रेनिंग और एक भरोसेमंद फिलिस्तीनी पुलिस बल तैयार करने में सहयोग दे रहे हैं। ट्रम्प ने कहा कि गाजा पर खर्च किया गया हर डॉलर इलाके में स्थिरता लाने और बेहतर भविष्य बनाने में निवेश है। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि कितने सैनिक भेजे जाएंगे, वे कब तैनात होंगे और दी गई रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा। ट्रम्प के कंट्रोल में होगा पूरा पीस बोर्ड चार्टर के अनुसार, डोनाल्ड ट्रम्प को इनॉगुरल चेयरमैन (प्रथम अध्यक्ष) नामित किया गया है, और यह पद लाइफटाइम उनके द्वारा चुने गए उत्तराधिकारी तक रह सकता है। उनके पास वीटो पावर है। बोर्ड के अधिकांश फैसलों को चेयरमैन की मंजूरी चाहिए होती है, जिसका मतलब है कि ट्रम्प किसी भी निर्णय को रोक सकते हैं। बोर्ड के सदस्यों को जोड़ने, हटाने एजेंडा तय करने, सब्सिडियरी बॉडी बनाने, ग्रुप भंग करने पर ट्रम्प का पूरा कंट्रोल होगा। राष्ट्रपति पद खत्म होने के बाद भी वे चेयरमैन बने रह सकते हैं, क्योंकि यह पद उनकी राष्ट्रपति पद से स्वतंत्र है। केवल एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सर्वसम्मति से उन्हें हटाया जा सकता है (जो व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव है, क्योंकि एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी ट्रम्प ही नियुक्त करेंगे)। कई देशों ने शामिल होने से इनकार किया कई देशों ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया है, खासकर यूरोपीय देशों और कुछ सहयोगियों ने। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी आने से इनकार कर दिया है। उनकी जगह विदेश मंत्री गिदोन सार पहुंचे। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने स्पष्ट कहा कि बोर्ड का काम संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने बोर्ड में शामिल न होने का फैसला लिया, क्योंकि न्यूजीलैंड इसमें खास योगदान नहीं दे पाएगा । अधिकांश यूरोपीय देशों ने भी चिंता जताई है कि यह UN को कमजोर कर सकता है या ट्रम्प के व्यक्तिगत नियंत्रण वाला शरीर बन सकता है। कई G7 देशों ने भी दूरी बनाई है। शुरू में यह गाजा में युद्धविराम (2025 में हुए समझौते) को लागू करने, पुनर्निर्माण और स्थिरता के लिए था। UN सिक्योरिटी काउंसिल रेजोल्यूशन 2803 ने इसे स्वीकार किया था। गाजा में फोर्स के तैनाती की तैयारी में ट्रम्प गाजा में सुधार को लेकर ट्रम्प की 20 सूत्रीय योजना का पहला चरण सितंबर में घोषित हुआ था, जिसे तीन महीने पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने समर्थन दिया। पहले चरण में इजराइल-हमास के बीच आंशिक संघर्षविराम, मानवीय सहायता में बढ़ोतरी और बंधकों की रिहाई शामिल थी। दूसरे चरण में ISF की तैनाती और प्रशासनिक ढांचा खड़ा करना शामिल है। हालांकि, इन कदमों में देरी हो रही है। पिछले महीने एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा था कि ISF के गठन की घोषणा कुछ दिनों में हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। UN के प्रस्ताव के अनुसार, ISF को 2027 तक गाजा की सीमाओं की सुरक्षा, हथियारों को नष्ट करना, गैर-राज्य सशस्त्र समूहों के ढांचे को खत्म करने और नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी जाएगी। अब तक केवल इंडोनेशिया ने सार्वजनिक रूप से करीब 2,000 सैनिक भेजने की बात कही है। वे अप्रैल से पहले तैनात नहीं होंगे और गाजा के उस हिस्से में नहीं जाएंगे जो अभी भी इजराइली सेना के नियंत्रण में है। हमास बोला- जब तक इजराइली सेना यहां है, हथियार नहीं छोड़ेंगे दूसरी ओर हमास ने कहा है कि जब तक इजराइली सेना पूरी तरह नहीं हटती, वह हथियार नहीं डालेगा। हाल ही में हमास लीडर ओसामा हमदान ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में कहा कि संगठन ने अभी तक हथियारों पर कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया है। वहीं, इजराइल का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं छोड़ता, सेना
PAK गई पंजाबी महिला ने बताई लव स्टोरी:9 साल पहले फेसबुक पर इश्क हुआ, बच्चों से छिपाकर रखती मोबाइल, पति 22 साल से UK में

पंजाब से पाकिस्तान जाकर इस्लाम कबूल करने और नासिर हुसैन से निकाह करने वाली सरबजीत कौर उर्फ नूर फातिमा ने एक इंटरव्यू में अपनी पूरी कहानी बताई। सरबजीत कौर ने खुलासा किया कि उसकी और नासिर हुसैन की बातचीत 2016 में फेसबुक के जरिए शुरू हुई थी, जो बाद में दोस्ती से प्यार में बदल गई और 2025 के अंत तक शादी कर ली। सरबजीत ने बताया कि उसका पति 22 साल से यूके में है और वह मोबाइल अपने बच्चों से छिपाकर रखती थी। वह पहली बार ननकाना साहिब गई थी और 4 नवंबर को गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान पहुंची। सरबजीत ने यह भी कहा कि उसने अपनी इच्छा से इस्लाम कबूल किया और किसी के दबाव में कोई फैसला नहीं लिया। वहीं वकील ने भी वीजा, जांच और कानूनी प्रक्रिया को लेकर चल रही खबरों पर सफाई दी। इंटरव्यू के दौरान सरबजीत कौन ने अपने परिवार, बच्चों, पाकिस्तान पहुंचने, निकाह और वायरल ऑडियो से जुड़े सवालों के जवाब देते हुए कई बातों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट…. सरबजीत की जुबानी प्यार से लेकर पाक पहुंचने तक की कहानी सवाल: आपकी मुलाकात कैसे हुई? किस साल से आप पंजाब में रहकर बातचीत कर रही थीं? इश्क की कहानी कब शुरू हुई? जवाब: 2016 में हमारी बातचीत शुरू हुई। फेसबुक के जरिए संपर्क हुआ। 2025 के अंत तक हमने शादी कर ली। सवाल: क्या आप पहले भी ननकाना साहिब गई थीं? क्या पहले मुलाकात हुई थी? जवाब: नहीं, मैं पहली बार ननकाना साहिब गई थी। सवाल : कुछ दिन पहले खबरें चली थीं कि आपको वापस भेजा जा रहा है? जवाब (वकील): ऐसा कुछ नहीं था। वीजा एक्सटेंशन नहीं हुआ था, इसलिए पाकिस्तानी एजेंसियों को जांच करनी थी। जांच के बाद हमने याचिका दायर की कि इन्हें डिपोर्ट न किया जाए। बाद में कानूनी दस्तावेज पूरे किए गए और शेल्टर होम से रिहा कर दिया गया। सवाल: आपकी प्रेम कहानी कैसे शुरू हुई? जवाब: पहले दोस्ती थी, बाद में प्यार में बदल गई। सवाल: उस समय आपके पति कर्नेल सिंह आपके साथ थे? जवाब: कर्नेल सिंह 22 साल से यूके में रहते हैं। सवाल: क्या घर में किसी को पता था? आपके बेटे ने कहा कि आपको फोन चलाना या मैसेज करना भी नहीं आता था, फिर फेसबुक चैट कैसे की? जवाब: मैं फेसबुक से टिकटॉक पर आई। बच्चों से छुपाकर फोन रखा हुआ था। सवाल: आपके कितने बच्चे हैं? जवाब: दो बेटे हैं। सवाल: लोग कह रहे हैं कि आपने पंजाब में बसता-हंसता परिवार छोड़ दिया, गुरुओं की धरती का गलत इस्तेमाल किया। क्या आपको शर्म नहीं आती? जवाब: शर्म तो उन लोगों को आनी चाहिए। मैं किसी गलत रिश्ते में नहीं हूं। मैंने शादी की है। मैं गुरुओं-पीरों की धरती पर शादी करके आई हूं। मैंने कोई गलत कदम नहीं उठाया। सवाल: आपने कहा कि मुस्लिम बनकर आपको सुकून मिल रहा है। क्या आपको अपनी पुरानी धरती या गुरबाणी से सुकून नहीं मिला? जवाब: सिख धर्म और इस्लाम एक ही हैं। अल्लाह एक ही हैं। गोल्डन टेंपल की नींव भी एक मुस्लिम ने रखी थी। सवाल: आपकी एक ऑडियो वायरल हुई थी, जिसमें आप कह रहे थे कि आप एक आपत्तिजनक वीडियो डिलीट करवाने गए थे। क्या इस बात में कोई सच्चाई है? और क्या यह सही है कि नासिर हुसैन की बहन ने आपको पीटा? जवाब: नहीं, ऐसी कोई बात नहीं। जो भी किया, मैंने अपनी मर्जी से किया। मैंने अपनी इच्छा से इस्लाम कबूल किया। सवाल: जो ऑडियो वायरल हुई थी, वह कहां से आई? जवाब: मुझे नहीं पता, किसी ने बना ली होगी। सवाल: जब आप ननकाना साहिब पहुंचीं तो नासिर कैसे मिला? कौन-कौन पंजाब से आपके साथ गया था? जवाब: जिस दिन मैं आई, किसी रिश्तेदार या बच्चों को पता नहीं था। मेरा 13 दिन का वीजा लगा था, गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर 4 नवंबर को वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान पहुंची। वहां पहुंचकर मोबाइल का वाई-फाई ऑन किया, फिर संपर्क हुआ। सवाल: क्या आप शेखूपुरा से फरार हुई थीं? जवाब (वकील): ये फरार नहीं थीं। वीजा एक्सटेंशन की अर्जी दी गई थी। इस दौरान सरबजीत ने खुद कहा कि वह 4 नवंबर को पहुंचीं और 5 नवंबर को ही कोर्ट में पेश हो गई थीं। बाद में हाई कोर्ट में भी दस्तावेज जमा किए गए। फरार होने की बात गलत है। सवाल: क्या आपको परिवार की याद आती है? जवाब: नहीं। ******************* ये खबर भी पढ़ें: पाकिस्तान गई पंजाबी महिला ने नाम बदलकर निकाह किया: अटारी बॉर्डर से गई थी, खाली इमिग्रेशन फॉर्म से बढ़ा शक; तलाश में जुटी थी एजेंसियां पाकिस्तान दर्शन के लिए गए भारतीय सिख श्रद्धालुओं के जत्थे से कपूरथला की महिला सरबजीत कौर की गैरमौजूदगी का मामला अब स्पष्ट हो गया है। शुरुआती तौर पर सरबजीत के लापता होने की सूचना मिली थी, लेकिन जांच में पता चला है कि वे अब लापता नहीं, बल्कि उन्होंने पाकिस्तान में अपना नाम बदलकर नूर हुसैन के नाम से निकाह कर लिया है। (पढ़ें पूरी खबर)
थाने पहुंची हरियाणवी कलाकारों की कन्ट्रोवर्सी:'जीजा जी' सॉन्ग पर विवाद, सिंगर मीता बोले-बिग बॉस ऑफर के लिए कर रही; सोनिका ने गंदा आदमी बताया

हरियाणवी सिंगर अमित खासा उर्फ मीता बरोदा और मॉडल सोनिका सिंह का विवाद अब थाने तक पहुंच गया है। सोनिका सिंह का कहना है कि लगातार हो रही बदनामी से परेशान होकर उन्होंने पुलिस में शिकायत दी है। बता दें कि दोनों स्टॉर्स के बीच ‘जीजा जी’ सॉन्ग को लेकर विवाद चल रहा है। दोनों सोशल मीडिया पर भी एक- दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर चुके हैं। दोनों ने सॉन्ग की ऑनरशिप, यू-ट्यूब इनकम को लेकर अपना दावा कर रहे हैं। जीजा जी सॉन्ग करीब एक साल पहले आजाद सिंह खांडा खेड़ी की रागनी का मॉडिफाई वर्जन था। सिंगर मीता बरोदा का कहना है कि आजाद सिंह से परमिशन लेने के बाद ही उन्होंने इस गाने को रिकॉर्ड किया था। मीता बरोदा ने कहा… सोनिका बेवजह कन्ट्रोवर्सी को लंबा खींच रही है। उन्हें बिग बॉस में जाना है। इसीलिए कॉन्ट्रोवर्सी कर रही है। अब सिलसिलेवार पढ़िए विवाद की वजह… अब पढ़िए सोनिका सिंह ने क्या दावा किया… 3 पॉइंट में पढ़िए…विवाद पर मीता बरोदा क्या बोले सोनिका बोलीं- पुलिस को शिकायत दी सोनिका का कहना है कि सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणियों और बदनाम करने के प्रयास के चलते उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने मीता के साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी नहीं की है। पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। ——————- ये खबर भी पढ़ें… हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने सरपंच को धमकाया, VIDEO:मंच से उतारकर बोले- MLA-मंत्री तक को कुछ नहीं समझता, भीड़ से भी धक्का-मुक्की की हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। एक लाइव शो के दौरान उन्होंने स्टेज पर खड़े पूर्व सरपंच व समर्थकों पर चिल्लाते हुए नीचे उतरने को कह दिया। सिंगर ने कहा- मेरे गाने के प्रोग्राम के बीच में कोई सरपंच हो, कोई एमएलए हो, कोई मंत्री हो, मैं किसी ने कुछ नहीं मानता। आप चाहे सरपंच हो मेरा परफॉर्मेंस नीचे बैठकर देखो। (पूरी खबर पढ़ें)








