'यादव जी की लव स्टोरी’ पर रोक लगाने की मांग:विदिशा में यादव समाज कलेक्टर से मिला; डायरेक्टर, प्रोड्यूसर पर FIR की अपील

यादव समाज ने प्रस्तावित बॉलीवुड फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ के नाम को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इसमें फिल्म के प्रदर्शन पर तत्काल रोक लगाने और इसके डायरेक्टर व प्रोड्यूसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। ज्ञापन में बताया गया है कि फिल्म के पोस्टर, ट्रेलर और सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री में यादव समाज की छवि को आपत्तिजनक तरीके से दिखाया गया है। समाज के प्रतिनिधियों का तर्क है कि किसी विशेष जाति को फिल्म के शीर्षक में इस तरह प्रस्तुत करना सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं है। उनका आरोप है कि इससे समाज में गलत संदेश जा सकता है और उसकी गरिमा को ठेस पहुंच सकती है। समाजजनों ने इस बात पर जोर दिया कि यादव समाज ने हमेशा राष्ट्र निर्माण, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसी किसी भी प्रस्तुति को स्वीकार नहीं किया जाएगा जो समाज की छवि को नकारात्मक रूप में दर्शाती हो। प्रतिनिधियों ने पूर्व में आई फिल्म ‘120 बहादुर’ को लेकर हुए विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ कुछ फिल्मों के नाम बदले जाते हैं, वहीं दूसरी ओर जाति विशेष के नाम पर फिल्में बनाई जा रही हैं। इसे उन्होंने दोहरे मापदंड की नीति करार दिया। यादव समाज के प्रतिनिधि रविंद्र यादव ने चेतावनी दी कि समाज की भावनाओं को बार-बार ठेस पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो समाज आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा।
20 मिनट में हेल्थ की पूरी जांच, रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार भी नहीं

Last Updated:February 20, 2026, 21:20 IST इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में क्लिनिक्स ऑन क्लाउड का हेल्थ एटीएम पेश हुआ, जो 20 मिनट में स्वास्थ्य जांच करता है. 150 शहरों में 3000 से ज्यादा मशीनें लग चुकी हैं. 80 रुपए में ज्यादातर जरूरी जांच कराई जा सकती हैं. नई दिल्ली. अब एटीएम का मतलब सिर्फ पैसे निकालना नहीं रहा. यहां पर स्वास्थ्य की जांच भी कराई जा सकती है. दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में एक ऐसा ‘हेल्थ एटीएम’ पेश किया गया है, जो चंद मिनटों में आपका पूरा स्वास्थ्य जांच लेता है. क्लिनिक्स ऑन क्लाउड कंपनी द्वारा विकसित यह मशीन ‘हेल्थ फॉर ऑल’ मिशन को मजबूती दे रही है और दूर-दराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बना रही है. कंपनी के फाउंडर और सीईओ अभय अग्रवाल ने बताया कि यह हेल्थ एटीएम पोर्टेबल है और कहीं भी लगाया जा सकता है. इसमें सिर्फ 20 मिनट लगते हैं, जिसमें पूरे शरीर की जांच हो जाती है. जांच के बाद रिपोर्ट कुछ ही सेकेंड में आपके व्हाट्सएप नंबर पर पहुंच जाती है. इस मशीन से जनरल हेल्थ चेकअप के साथ-साथ हृदय, कान, आंख, फेफड़े, किडनी, डायबिटीज, त्वचा रोग, एनीमिया और मानसिक स्वास्थ्य की जांच भी की जा सकती है. यह एआई आधारित मशीन गांवों और छोटे कस्बों के लिए वरदान है, जहां डॉक्टर और अस्पताल कम हैं. जांच बहुत सस्ती है और रिपोर्ट तुरंत मिल जाती है. कंपनी ने ‘बॉक्स क्लिनिक’ भी लॉन्च किया है, जो एक पोर्टेबल हेल्थ यूनिट है. इसे डोर-टू-डोर मेडिकल सर्विस, हेल्थ कैंप और आशा वर्कर्स के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा ‘हेल्थ लाउंज’ स्कूल, फिटनेस सेंटर, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, शॉपिंग मॉल और विश्वविद्यालयों जैसी जगहों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा. अभी तक देश के 150 शहरों में तीन हजार से ज्यादा हेल्थ एटीएम लग चुके हैं. इनके जरिए आठ मिलियन (80 लाख) से ज्यादा लोगों का स्वास्थ्य जांच हो चुका है. यह तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं को हर घर तक पहुंचाने में मदद कर रही है. समिट में आने वाले लोग अपने स्वास्थ्य की जांच करा रहे हैं, उन्हें यह मशीन बहुत ही उपयोगी लग रही है. यह मशीन दूर दराज इलाकों के लिए वरदान साबित हो सकती है. Location : New Delhi,New Delhi,Delhi First Published : February 20, 2026, 21:20 IST
होली 2026: होली पर मेथी साबूदाना पकौड़े, ठंडी और रंगीन ड्रिंक्स के साथ बेस्ट बेस्ट बेस्ट; नुस्खा बताएं

होली स्नैक्स: होली को लेकर सामुहिक शुभारम्भ हो गया है। रंगीन होली 4 मार्च को मनाई जाएगी, त्योहार को मजेदार बनाने के लिए हम आज आपको एक खास संप्रदाय के बारे में बताते जा रहे हैं। जो व्रत में भी खा सकते हैं। हम बात कर रहे हैं मेथी साबूदाना पकोड़े की। इन पकौड़े में ताजी मेथी की सब्जी, इलेक्ट्रिक आलू, आलू और आलू के चिप्स हैं, जबकि साबूदाना और मैश्ड आलू नरम और कुरकुरे हैं. ये गर्म चाय, स्वादिष्ट ठंडाई या कलरफुल होली ड्रिंक्स के साथ कमाल का कॉम्बिनेशन देते हैं। ये बाहर से काले और भूरे रंग के होते हैं और अंदर से नग्न होते हैं। इसलिए पार्टी में जल्दी ख़त्म हो जाते हैं। मेथी साबूदाना पकौड़े कैसे बनायें? साबूदाना को 4-5 घंटे या रात भर का उपयोग करें। अच्छे से अच्छा पानी निकाल कर, बिल्कुल सूखा करलें। आलूकर चटनी और मैश कर लें। मेथी नामांकित को ढोकर नेपोलियन काट लें। बड़ी कटोरी में साबूदाना, मैश्ड आलू, कटी मेथी और मूंगफली पाउडर डोंडी हैंड्स हैंड्स। हरी मिर्च, अदरक पेस्ट, जीरा, लाल-काली मिर्च पाउडर, नींबू रस, चीनी और नमक सभी अच्छे से मिलाएं। धीरे-धीरे चावल का आटा डालें (शुरू में 4 मसाले) और गूंथें जब तक नॉन-स्टिकी दो न बन जाए। थोड़ा और आटा चाहिए। छोटा गोल या बेबी साइज पकौड़े खरीदें। मध्यम-तेज़ आँच पर तेल गर्म करें। पकौड़ों को बैच में मोनोलैन्ड ब्राउन और क्रिस्पी होने तक मुफ़्त में प्राप्त करें। टिशु पेपर पर आरंभ। ग्रीन, इमली की चटनी या होली स्पेशल डिप्स के साथ गरमा गरम सर्व करें। ये पकौड़े काफी देर तक क्रिस्पी रहते हैं। इसे पहले से 24 घंटे फ़र्ज़ी में रखा जा सकता है। फिर से मुफ़्त करें। होली के रंगों में इन टेस्टी पकौड़ों को शामिल कर परिवार और दोस्तों के साथ मजा लें। क्योंकि होली का त्योहार रंग-बिरंगा और स्वाद से भरपूर होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एआर रहमान झुके:‘वीरा राजा वीरा’ में जूनियर डागर ब्रदर्स को क्रेडिट देंगे; कॉपीराइट विवाद पर सुनवाई जारी

मशहूर संगीतकार एआर. रहमान ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने एक अहम फैसले के बाद सहमति जताई। उन्होंने कहा कि फिल्म ‘पोन्नियिन सेलवन-2’ के गीत ‘वीरा राजा वीरा’ में डागर परंपरा के प्रतिष्ठित संगीतज्ञ जूनियर डागर ब्रदर्स का नाम जोड़ा जाएगा। अब गाने की आधिकारिक क्रेडिट सूची में उनका नाम और योगदान शामिल किया जाएगा। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसका नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने किया। उन्होंने रहमान और फिल्म निर्माताओं को निर्देश दिया है कि वे इस नए क्रेडिट को पांच सप्ताह के भीतर सभी सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म्स पर दर्ज कराएं। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इस सहमति का अर्थ यह नहीं है कि मुख्य कॉपीराइट मुकदमे के अन्य पहलुओं पर किसी तरह का प्रभाव पड़ेगा। वह मामला अब भी अपनी प्रक्रिया के तहत जारी रहेगा। रहमान के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंहवी ने बोर्ड को बताया कि यह सहमति बिना पूर्वाग्रह के रूप में दी गई है और इसका अधिकारिक मुकदमें में रहमान के पक्ष को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। अदालत ने माना कि भारत की शास्त्रीय संगीत धरोहर की मान्यता और सम्मान देना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि डागर परंपरा, जिसे डागरवानी ध्रुपद कहा जाता है, भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक अनमोल धारा रही है और इसका योगदान अद्वितीय है। यही वजह है कि अदालत ने क्रेडिट को संशोधित करने की सलाह दी। बता दें कि यह विवाद साल 2023 से चला आ रहा है, जब उस्ताद फैयाज वसीफुद्दीन डागर ने दावा किया था कि ‘वीरा राजा वीरा’ गीत में उनके परिवार की पुरानी ध्रुपद रचना ‘शिवा स्तुति’ का अनुमति के बिना उपयोग किया गया है। डागर ने आरोप लगाया कि गीत की ताल, लय और भाव मूल धुन से मेल खाती है, जो उनके पिता उस्ताद नसीर फैयाजुद्दीन डागर और चाचा उस्ताद नसीर जहीरुद्दीन डागर द्वारा पहले रिकॉर्ड की गई थी। हालांकि रहमान और निर्माताओं का कहना है कि उनकी रचना एक मूल और स्वतंत्र संगीत संरचना है, सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम उठाया है ताकि पारंपरिक संगीत जगत को उचित मान्यता और सम्मान मिल सके। यह फैसला संगीत जगत में कॉपीराइट और सांस्कृतिक परंपरा की पहचान के मामले में एक महत्वपूर्ण मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।
यूपी के इंजीनियर और उसकी पत्नी को फांसी होगी:बच्चों का यौन शोषण करके वीडियो बनाकर बेचता था; जज बोले- मरते दम तक फंदे पर लटकाओ

उत्तर प्रदेश के बांदा कोर्ट ने शुक्रवार को बच्चों का यौन शोषण करने वाले पति-पत्नी को फांसी की सजा सुनाई। ये दोनों बच्चों का यौन शोषण करते थे और अश्लील वीडियो-फोटो बनाकर डार्क वेब के जरिए विदेशों में बेचते थे। फैसला देते समय पॉक्सो कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा- दोनों पति-पत्नी को मरते दम तक फंदे पर लटकाए रखा जाए। इससे पहले कोर्ट ने 18 फरवरी को दोनों को दोषी ठहराया था। पति रामभवन सिंचाई विभाग का इंजीनियर था, जबकि पत्नी दुर्गावती हाउस वाइफ थी। सीबीआई ने रामभवन को 18 नवंबर, 2020 को अरेस्ट किया था। वहीं, दुर्गावती को गवाहों पर दबाव डालकर समझौता कराने का दोषी पाया गया था। पति-पत्नी ने 50 से ज्यादा बच्चों का यौन शोषण किया बांदा का रहने वाला रामभवन (55) चित्रकूट में सिंचाई विभाग में जेई के पद पर तैनात था। वह चित्रकूट की SDM कॉलोनी में पत्नी दुर्गावती (50) के साथ रहता था। दोनों के कोई संतान नहीं थी। रामभवन अपनी पत्नी के साथ मिलकर गरीब घरों के बच्चों को लालच देकर अपने जाल में फंसाता था। दोनों मिलकर नाबालिगों का कुकर्म करते थे। बच्चों की उम्र 5 से 16 साल के बीच होती थी। बच्चों के साथ पत्नी संबंध बनाती थी, जबकि रामभवन उनसे कुकर्म करता था। इतना ही नहीं, दोनों लैपटॉप के कैमरे के जरिए बच्चों के अश्लील वीडियो भी बना लेते थे। इस दौरान अगर कोई बच्चा विरोध करता था, तो पति-पत्नी उसे मारते-पीटते थे। चिल्लाने पर उनका मुंह दबा देते थे। फिर पैसे या खिलौने, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट देने का लालच देकर उसकी जुबान बंद करा देते थे। एक बच्चे ने बताया था कि रामभवन मोबाइल फोन में गेम खेलने और यूट्यूब पर वीडियो दिखाने का लालच देकर अपने घर बुलाता था। पति-पत्नी कभी बांदा में किराए का मकान लेकर, तो कभी चित्रकूट में गंदा काम करते थे। इस दौरान पति-पत्नी ने 50 से ज्यादा बच्चों का यौन शोषण किया। इसकी शिकायत मिलने पर 31 अक्टूबर, 2020 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रामभवन के खिलाफ केस दर्ज किया। आरोप था कि वह बच्चों के अश्लील वीडियो/फोटो बनाकर डार्क वेब के जरिए अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क तक पहुंचाता था। इसके बाद 17 नवंबर 2020 को सीबीआई ने रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के 88वें दिन दाखिल की थी चार्जशीट CBI ने गिरफ्तारी के 88वें दिन बाद बांदा कोर्ट में 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में मेडिकल रिपोर्ट और बच्चों के बयानों को आधार बनाया गया था। इस दौरान CBI की टीम ने 4 से 42 साल तक की उम्र के लोगों के बयान दर्ज किए। सभी का मेडिकल परीक्षण कराने के साथ डिजिटल एविडेंस को कनेक्ट किया गया था। वकील बोले- इंटरपोल से मिला था इनपुट पॉक्सो कोर्ट के अधिवक्ता कमल सिंह ने बताया- यह मामला अक्टूबर- 2020 का है। सीबीआई को इंटरपोल की तरफ से सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति 3 मोबाइल नंबरों से 7 से लेकर 18 साल के बच्चों के पोर्न वीडियो बनाकर इंटरनेट में अपलोड करता है। साथ ही एक पेन ड्राइव भी मिली थी। उसमें 34 बच्चों के वीडियो और 679 फोटो थीं। ये बच्चे बांदा, चित्रकूट समेत आसपास के जिलों के रहने वाले थे। उस नंबर को ट्रेस किया गया, तो पता चला कि रामभवन अपनी पत्नी के साथ यह गंदा काम कर रहा था। रामभवन सिंचाई विभाग में जेई के पद पर तैनात था। सीबीआई ने बांदा पुलिस के साथ मिलकर जेई और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया था। बच्चों से जुड़ा मामला होने के चलते सीबीआई ने पॉक्सो कोर्ट में ट्रायल कराया। इस मामले में फरवरी 2021 में चार्जशीट लगाई। 74 गवाह CBI ने पॉक्सो कोर्ट में पेश किए। अधिवक्ता ने मांग करते हुए कहा- डीएम को एक पत्र लिखा जाए, जिसमें पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपए की राशि देने का काम किया जाए। चीन-अमेरिका समेत 47 देशों को बेचे थे वीडियो वकील ने बताया कि इन दोनों ने ये गंदे वीडियो चीन, अमेरिका, ब्राजील और अफगानिस्तान समेत 47 देशों को बेचे थे। जो बच्चे दरिंदगी का शिकार हुए थे, उनका इलाज दिल्ली AIIMS में किया गया था। ———————- ये खबर भी पढ़ेंः- शाह मानहानि केस-राहुल गांधी का आरोपों से इनकार, कहा- राजनीतिक साजिश में फंसाया गृह मंत्री अमित शाह पर टिप्पणी के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी शुक्रवार को यूपी में सुल्तानपुर की MP/MLA कोर्ट में पेश हुए। उनके वकील के मुताबिक, राहुल ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह केस राजनीतिक दुर्भावना के तहत दर्ज कराया गया है। इसमें कोई ठोस आधार नहीं है। पढ़ें पूरी खबर…
मूवी रिव्यू – ‘शतक’:सौ साल की विचारधारा पर बनी फिल्म, क्या इतिहास के कठिन सवालों का जवाब देती है या सिर्फ एक पक्ष दिखाती है?

‘शतक: संघ के 100 वर्ष’ एक ऐसी फिल्म है जो एक लंबे वैचारिक और ऐतिहासिक सफर को स्क्रीन पर समेटने की कोशिश करती है। निर्देशक आशीष मॉल ने 100 साल की कहानी को सीमित समय में पेश करने का जिम्मा उठाया है। फिल्म की टोन गंभीर और संतुलित रखने की कोशिश दिखाई देती है, लेकिन इतना बड़ा विषय अपने साथ चुनौतियां भी लेकर आता है। फिल्म की कहानी फिल्म डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के शुरुआती जीवन से शुरू होकर माधव सदाशिव गोलवलकर के दौर तक पहुंचती है। कहानी RSS की स्थापना, उसके विस्तार और अलग-अलग ऐतिहासिक घटनाओं में उसकी भूमिका को दिखाती है। हालांकि, नैरेटिव एक खास दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ता है। कुछ विवादित पहलुओं को बहुत हल्के ढंग से छुआ गया है। महात्मा गांधी की हत्या का जिक्र आता है, लेकिन हत्यारे का नाम नहीं लिया जाता। गांधी जी की हत्या के बाद लगे प्रतिबंध जैसे अहम ऐतिहासिक मोड़ों को भी संक्षेप में दिखाकर आगे बढ़ जाया जाता है, जिससे जटिल बहसों की गहराई सामने नहीं आ पाती। कई बड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम तेज रफ्तार में गुजरते हैं, इसलिए फिल्म जानकारी ज्यादा देती है, भावनात्मक ठहराव कम महसूस होता है। फिल्म में अभिनय कलाकारों ने संयमित और गंभीर अभिनय किया है। हेडगेवार और गोलवलकर के किरदार प्रभावशाली लगते हैं और फिल्म की टोन के अनुरूप रहते हैं। ओवरड्रामैटिक अंदाज से बचना फिल्म की ताकत है। फिर भी, तेज गति के कारण किरदारों का मानवीय पक्ष सीमित रह जाता है। कई जगह पात्र विचारों के प्रतिनिधि ज्यादा लगते हैं, इंसान कम। फिल्म का निर्देशन और टेक्निकल पहलू आशीष मॉल का निर्देशन नियंत्रित और साफ है। फिल्म उद्देश्य से भटकती नहीं। CGI और VFX का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया गया है, जिससे कई दृश्य भव्य लगते हैं। लेकिन यही तकनीकी चमक कुछ जगह कृत्रिम महसूस होती है। सेट और लोकेशन जरूरत से ज्यादा सजे हुए लगते हैं, जिससे उस दौर की वास्तविकता का असर थोड़ा कम हो जाता है। लगातार संवाद और घटनाओं की तेजी फिल्म को कई बार डॉक्यूमेंट्री या लेक्चर जैसा टोन दे देती है। फिल्म का म्यूजिक बैकग्राउंड स्कोर कहानी के माहौल को सपोर्ट करता है और गंभीरता बनाए रखता है। संगीत ओवरपावर नहीं करता, लेकिन ऐसा कोई खास म्यूजिक मोमेंट नहीं जो लंबे समय तक याद रहे। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘शतक’ एक ईमानदार और महत्वाकांक्षी प्रयास है, जो अपने विषय को सम्मान के साथ पेश करती है। लेकिन तेज रफ्तार और चुनिंदा दृष्टिकोण की वजह से फिल्म पूरी गहराई नहीं पकड़ पाती। इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए एक ठीकठाक अनुभव, मगर सिनेमाई असर के लिहाज से सीमित।
पंजाबी सिंगर को लाइव शो में फैन ने किया प्रपोज:पोस्टर पर लिखा- मेरी मम्मी नू पसंद है तू, सुनंदा शर्मा ने दिया मजेदार जवाब

पंजाबी सिंगर सुनंदा शर्मा को लाइव शो के दौरान एक फैन ने प्रपोज किया। भीड़ में खड़े फैन ने दिल के आकार वाले पोस्टर पर लिखा था-“मेरी मम्मी नू पसंद है तू (मेरी मम्मी को तुम पसंद हो)। इस पर सुनंदा ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया- पर मेरी मम्मी नू भी तां पसंद आने चाहिदे ओ (लेकिन मेरी मम्मी को भी तो तुम पसंद आने चाहिए)। सुनंदा ने फैन को स्टेज पर बुलाया, गले लगाया और उसके साथ डांस भी किया। इस खास पल का वीडियो खुद सिंगर ने सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसे फैंस खूब पसंद कर रहे हैं। 17 फरवरी को जयपुर में पूर्णिमा ग्रुप के वार्षिक खेल एवं सांस्कृतिक उत्सव ‘आरोहण 2026’ के दौरान यह मोमेंट देखने को मिला। अब पढ़िए वीडियो में क्या दिख रहा… 24 घंटे में 12 लाख से ज्यादा लाइक्स सुनंदा ने बुधवार को इस पल को अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया। पोस्ट के कैप्शन में लिखा— आई लव यू बादशाहो, यू गाइस आर माय स्ट्रेंथ। कंसर्ट्स में पूरी रौनक लगी रहती है। इस वीडियो को 24 घंटे के अंदर 1.2 मिलियन से ज्यादा लाइक्स, 4800 से अधिक कमेंट्स और लगभग 48 हजार लोगों ने शेयर किया । फैंस बोले- दीदी हमारा नंबर कब आएगा वीडियो इतना वायरल हुआ कि फैंस ने अपनी स्टोरी पर इसे शेयर करते हुए लिखना शुरू कर दिया सुनंदा दीदी हमारा नंबर कब आएगा। सुनंदा ने भी दरियादिली दिखाते हुए कई फैंस की स्टोरीज को री-शेयर किया और मजेदार जवाब देते हुए लिखा- हाहा..आ जाओ अगले शो में। सिंगर ने लिखा- आ जाओ कल वाले शो में इस बीच फैन ने सुनंदा के स्टाइल की हूबहू नकल उतारते हुए वीडियो बनाकर पोस्ट कर दिया। सुनंदा ने उस फैन को भी निराश नहीं किया और वीडियो शेयर करते हुए लिखा आ जाओ कल वाले शो में।
बजट सत्र युद्धक्षेत्र: सरकार के अप्रभावित रहने पर विपक्षी एकता को परीक्षा का सामना करना पड़ा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:19 फरवरी, 2026, 22:16 IST सिर्फ गैर-कांग्रेसी पार्टियाँ ही नहीं; कांग्रेस के कुछ निलंबित सांसद भी असहयोग की रणनीति से चिंतित हैं दोनों पक्ष इस बात पर अड़े हैं कि वे सही रास्ते पर हैं और उन्हें लोगों का समर्थन प्राप्त है। फ़ाइल छवि बजट सत्र का पहला भाग समाप्त हुए लगभग एक सप्ताह हो गया है, जो हाल के दिनों के सबसे विवादास्पद सत्रों में से एक है। आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया, अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया और विपक्ष के नेता राहुल गांधी की सदस्यता छीनने के लिए एक ठोस प्रस्ताव पेश किया गया। सत्र में एक अभूतपूर्व स्थिति भी देखी गई जहां महिला सांसदों पर भारत के प्रधान मंत्री को नुकसान पहुंचाने की योजना बनाने का आरोप लगाया गया। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार और विपक्ष के बीच शिष्टाचार और संवाद का टूटना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। चूंकि यह आम तौर पर स्वीकार किया जाता है कि सदन चलाने की जिम्मेदारी सरकार की होती है, विश्लेषकों ने सुझाव दिया है कि दूसरी छमाही में, सरकारी प्रबंधकों को विपक्ष के साथ पुल बनाने के लिए काम करना चाहिए। हालाँकि, राजनीतिक नेताओं के साथ बातचीत से दूसरी छमाही में रुख और सख्त होने का संकेत मिलता है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में सीएनएन-न्यूज18 को बताया, “हमने काफी कुछ किया है। जो कुछ हो रहा है उसके लिए एक व्यक्ति का जिद्दी व्यवहार जिम्मेदार है।” विपक्ष की एक मांग सांसदों का निलंबन रद्द करने की थी. लेकिन सरकारी सदन प्रबंधकों का सुझाव है कि, निलंबन रद्द करना तो दूर, दूसरी छमाही में और अधिक सांसदों को निलंबित किया जा सकता है, खासकर वे जो अध्यक्ष के कक्ष में गए और फिर लोकसभा में प्रधान मंत्री को रोकने का प्रयास किया। आगे के निलंबन से विभाजन और गहरा हो सकता है, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार चिंतित नहीं है। सत्ता पक्ष का आकलन यह है कि गैर-कांग्रेसी विपक्षी दल जैसे द्रमुक, टीएमसी और यहां तक कि वामपंथी भी चाहेंगे कि सदन चले, क्योंकि बंगाल, तमिलनाडु और केरल में चुनावों से पहले, राज्य-विशिष्ट मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए संसदीय मंच का उपयोग करने का यह उनका आखिरी मौका होगा। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास के नोटिस पर हस्ताक्षर न करके टीएमसी पहले ही रैंक तोड़ चुकी है। अखिलेश यादव ने भी हस्ताक्षर नहीं किए, हालांकि उनकी पार्टी के सहयोगियों ने हस्ताक्षर किए. अविश्वास प्रस्ताव पर पहले दिन ही चर्चा हो सकती है, क्योंकि सरकार विपक्ष के अंदर फूट को उजागर करना चाहती है। सिर्फ गैर-कांग्रेसी पार्टियाँ ही नहीं; कांग्रेस के कुछ निलंबित सांसद भी असहयोग की रणनीति से चिंतित हैं. निरंतर निलंबन का मतलब है तारांकित या अतारांकित प्रश्न पूछने का कोई मौका नहीं, उपस्थिति का कोई रिकॉर्ड नहीं, और अपने चुनाव क्षेत्र के मुद्दों को उठाने का कोई अवसर नहीं। हालाँकि, वरिष्ठ कांग्रेस नेतृत्व को लगता है कि वे 1) चीनी आक्रामकता के सामने आत्मसमर्पण और 2) ट्रम्प प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण की धारणा को उजागर करके सरकार को रक्षात्मक स्थिति में लाने में कामयाब रहे हैं। दोनों पक्ष इस बात पर अड़े हैं कि वे सही रास्ते पर हैं और उन्हें लोगों का समर्थन प्राप्त है। लेकिन जैसे-जैसे संसदीय चर्चाएँ, वाद-विवाद और बुनियादी सभ्यता प्रभावित होती है, “हम लोग” केवल यह देख सकते हैं कि संसद की लोकतांत्रिक परंपराएँ किसी अखाड़े में कुश्ती मैच जैसी किसी चीज़ को रास्ता देती हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 19 फरवरी, 2026, 22:16 IST समाचार राजनीति बजट सत्र युद्धक्षेत्र: सरकार के अप्रभावित रहने पर विपक्षी एकता को परीक्षा का सामना करना पड़ेगा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
शिवाजी जयंती पर ‘राजा शिवाजी’ का पहला पोस्टर जारी:कंधों पर कवच और चेहरे पर दृढ़ संकल्प के साथ नजर आए रितेश देशमुख

छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती के मौके पर ऐतिहासिक सिनेमा प्रेमियों के लिए बड़ी घोषणा हुई है। जियो स्टूडियोज और मुंबई फिल्म कंपनी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘राजा शिवाजी’ का पहला पोस्टर गुरुवार को जारी कर दिया गया। फिल्म का निर्देशन और मुख्य भूमिका रितेश विलासराव देशमुख निभा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्टर शेयर करते हुए इसे शिवाजी जयंती को समर्पित बताया। पोस्टर में रितेश देशमुख छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रभावशाली अवतार में नजर आ रहे हैं। साइड प्रोफाइल में दिखाई दे रहे महाराज के हाथ में तलवार है, कंधों पर कवच और चेहरे पर दृढ़ संकल्प साफ झलकता है। मेकर्स ने विजुअल ट्रीटमेंट को भव्य और गंभीर रखा है, जो स्वराज्य की स्थापना से पहले के संघर्ष और शांति दोनों का संकेत देता है। ‘राजा शिवाजी’ को पैन-इंडिया स्तर पर बड़े पैमाने पर तैयार किया जा रहा है। यह फिल्म मराठी और हिंदी, दोनों भाषाओं में रिलीज होगी। संगीत की जिम्मेदारी मशहूर जोड़ी अजय-अतुल ने संभाली है, जबकि सिनेमैटोग्राफी अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संतोष सिवन कर रहे हैं। मेकर्स का दावा है कि फिल्म तकनीक और विजुअल स्केल के लिहाज से भव्य अनुभव देगी। कहानी सिर्फ एक योद्धा राजा की नहीं, बल्कि उस बेटे की है जिसने स्वराज्य का संकल्प लिया और बड़ी शक्तियों के सामने झुकने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना। फिल्म में शिवाजी महाराज के जीवन, उनके साहस, रणनीति और राष्ट्रगौरव की भावना को सिनेमाई अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा। फिल्म को ज्योति देशपांडे और जेनेलिया देशमुख ने प्रोड्यूस किया है। यह फिल्म 1 मई 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।मेकर्स का कहना है कि यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की कोशिश है। पोस्टर रिलीज के साथ ही दर्शकों में उत्साह बढ़ गया है और अब सभी को टीजर का इंतजार है।
टेक्सास में हनुमान जी की मूर्ति से ट्रम्प समर्थक नाराज:कहा- ये दिल्ली नहीं, पिछड़े देशों के लोग अमेरिका पर कब्जा कर रहे

अमेरिका के टेक्सास राज्य में हनुमान जी की मूर्ति पर ट्रम्प समर्थक नेता कार्लोस टुर्सियोस ने नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया X पर लिखा कि यह इस्लामाबाद या नई दिल्ली नहीं है। यह शुगर लैंड, टेक्सास है। टुर्सियोस ने कहा कि पिछड़े देशों के प्रावासी धीरे-धीरे टेक्सास और अमेरिका पर कब्जा कर रहे हैं। यह अमेरिका की तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति क्यों है? हमला रोकिए। बता दें कि हनुमान की 90 फीट ऊंची मूर्ति टेक्सास राज्य के ‘श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर’ में लगी है और इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ कहा जाता है। टुर्सियोस पर नस्लभेदी सोच फैलाने का आरोप कई लोग सोशल मीडिया पर टुर्सियोस के इस बयान का विरोध कर रहे हैं। कुछने उन पर नस्लभेदी सोच फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि प्रवासी समुदाय और अलग-अलग धर्मों के लोगों ने अमेरिकी समाज को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है। कार्तिक गडा नाम के एक यूजर ने अमेरिका में बोली जाने वाली भाषाओं का चार्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा कि अमेरिका में 4.1 करोड़ घरों में स्पेनिश बोली जाती है, जबकि भारतीय भाषाएं टॉप 10 में भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि घर में बोली जाने वाली भाषा समाज में घुलने-मिलने का बड़ा संकेत है और भारतीय-अमेरिकी समुदाय काफी हद तक मुख्यधारा में शामिल हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि जब किसी भारतीय भाषा के बोलने वालों की संख्या स्पेनिश से ज्यादा हो जाएगी, तब यह देखा जाएगा कि कौन कितना घुला-मिला है। नूरी सुन्नाह नाम के एक यूजर ने लिखा कि यह मूर्ति करीब डेढ़ साल से वहीं है। मंदिर में आने वाले हिंदुओं को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। अगर किसी को यह पसंद नहीं है, तो वह इसे नजरअंदाज कर सकता है। टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची मूर्ति अमेरिका के टेक्सास राज्य के शुगर लैंड में मौजूद श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची कांसे की मूर्ति है। इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ कहा जाता है। यह भारत के बाहर हनुमानजी की सबसे ऊंची मूर्ति है। मूर्ति का वजन 90 टन है और इसे पांच धातुओं के मिश्रण से बनाया गया है। हनुमानजी को अभय मुद्रा में हाथ आगे करके और गदा के साथ दिखाया गया है। यह कमल के तख्त पर खड़ी है, जिसे हाथी की मूर्तियों से सजाया गया है। अमेरिका में यह तीसरी सबसे ऊंची मूर्ति है, जो स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (151 फीट) और फ्लोरिडा की पेगासस एंड ड्रैगन (110 फीट) के बाद आती है। मूर्ति की स्थापना के लिए 15 से 18 अगस्त 2024 को तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा समारोह हुआ था जिसमें हजारों लोग शामिल हुए थे। ट्रम्प समर्थक नेता ने पिछले साल भी विवादित बयान दिया था यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प समर्थक नेता ने हनुमान जी की मूर्ति को लेकर इस तरह का बयान दिया हो। पिछले साल ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के नेता अलेक्जेंडर डंकन ने भगवान हनुमान की प्रतिमा पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने इसे झूठे भगवान की झूठी प्रतिमा कहा था। डंकन ने X पर लिखा था- हम टेक्सास में एक झूठे हिंदू भगवान की झूठी मूर्ति क्यों लगने दे रहे हैं? हम एक ईसाई राष्ट्र हैं। कई अन्य संगठनों ने भी इसे धार्मिक आस्था पर हमला बताते हुए माफी की मांग की थी। अमेरिकी नागरिकों ने भी इसकी घोर निंदा की थी। भारतवंशियों के खिलाफ हेट क्राइम बढ़ा ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में भारतवंशियों के खिलाफ हेट क्राइम के मामले बढ़े हैं। बाइडेन कार्यकाल में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों के खिलाफ ऑनलाइन नफरत व हिंसा सीमित रही। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2024 तक 46,000 ट्रोलिंग और 884 धमकियां दर्ज हुईं। लेकिन ट्रम्प के लौटते ही हालात बिगड़ गए। अक्टूबर 2025 तक ट्रोलिंग बढ़कर 88,000 तक पहुंची, यानी इसमें 91% की वृद्धि दर्ज की गई। दिसंबर में वीजा और माइग्रेंट मामले में ट्रम्प-मस्क-रामास्वामी बहस के बाद 76% धमकियां ‘नौकरियां छीनने’ से जुड़ी रहीं। ट्रम्प सरकार के H-1B वीजा फीस बढ़ाने और 104 भारतीयों को डिपोर्ट करने के फैसले ने माहौल भड़काया। कई शहरों में निशाने पर भारतीय समुदाय के लोग नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच अमेरिका के शहरों में भारतीय समुदाय को निशाना बनाते हुए हिंसक वारदातों की एक शृंखला सामने आई। फरवरी 2025 में वर्जीनिया में एक भारतीय-अमेरिकी कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मार्च 2025 में एक किराना स्टोर पर हुए हमले में पिता-पुत्री की जान चली गई। सितंबर 2025 में टेक्सास के डलास में दो छात्रों और श्रमिकों की हत्या कर दी गई। इसी महीने चंद्रमौली नागमल्लैया की सिर काटकर हत्या ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। अक्टूबर 2025 में पेंसिल्वेनिया के पिट्सबर्ग में एक मोटेल पर गोलीबारी में भारतीय मूल के मालिक और कर्मचारियों को निशाना बनाया गया। वहीं ओहायो, इलिनॉय और इंडियाना राज्यों में छात्रों से हेट क्राइम के मामले सामने आए। ‘भारतीयों को देश से निकालो’ जैसे नारे बढ़ें रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ते नस्लभेद का यह ट्रेंड सिर्फ भारतीयों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई समुदाय को निशाना बना रहा है। इसमें धर्म, नागरिकता या जातीय पहचान का कोई फर्क नहीं किया जा रहा। रिपोर्ट में इसके चार प्रमुख कारण बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में प्रवासियों के खिलाफ जो वैश्विक नाराजगी बढ़ी है, वह इस नस्लभेदी ट्रेंड का पहला बड़ा कारण है। यह भावना दुनियाभर में उभर रही दक्षिणपंथी राजनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। ट्रम्प की नीतियों से भारतीयों पर नस्लभेदी पोस्ट बढ़े H-1B पर अमेरिकी हैं गुस्सा अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर गुस्सा भी इस ट्रेंड को बढ़ा रहा है। दक्षिणपंथी समूहों का आरोप है कि भारतीय ‘कम योग्य’ होते हुए भी अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीन रहे हैं। इससे सोशल मीडिया पर ‘भारतीयों को देश से निकालो’ जैसे नारों में इजाफा हुआ। श्वेत वर्चस्ववाद अपने चरम पर भारतीयों के खिलाफ नस्लभेद एशियाई समुदायों के खिलाफ व्यापक भेदभाव का हिस्सा है। ट्रम्प की जीत के बाद श्वेत वर्चस्ववादी गतिविधियां चरम पर पहुंच जाती हैं। जबकि, चुनावी दौर में हेट क्राइम में करीब 80% की बढ़ोतरी देखी जाती है। ट्रेड डील पर तनाव का भी असर भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर तनाव से नफरत को हवा







