वर्ल्ड अपडेट्स:पाकिस्तान के कराची में पैरामिलिट्री हेडक्वार्टर पर आतंकी हमला, 3 रेंजर्स की मौत

पाकिस्तान के कराची में शनिवार को आतंकियों ने अर्धसैनिक बल पाकिस्तान रेंजर्स के हेडक्वार्टर पर हमला कर दिया। हमले में तीन रेंजर्स जवानों की मौत हो गई। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी और जवाबी अभियान शुरू कर दिया। सिंध के पुलिस महानिरीक्षक जावेद आलम ओधो ने बताया कि आतंकी एक वाहन में सवार होकर आए और मुख्य गेट तोड़कर परिसर में घुस गए। हमला शुरू होते ही विस्फोट की आवाज भी सुनाई दी। हालांकि, पुलिस अभी इसकी जांच कर रही है कि विस्फोट किस वजह से हुआ। हमले के बाद मुठभेड़ शुरू ओधो ने बताया कि हमले के तुरंत बाद जवानों ने मोर्चा संभाल लिया और आतंकियों से मुठभेड़ शुरू कर दी। शुरुआती गोलीबारी में तीन जवान मारे गए। इसके बाद आसपास की सड़कें बंद कर दी गईं और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। SSU और एंटी टेररिस्ट फोर्स भी तैनात सिंध के गृह मंत्री जिया-उल-हसन लांझार ने बताया कि रेंजर्स की मदद के लिए स्पेशल सिक्योरिटी यूनिट (SSU) और एंटी टेररिस्ट फोर्स की टीमें भी मौके पर भेजी गई हैं। सुरक्षा बल परिसर में तलाशी अभियान चला रहे हैं, जबकि पुलिस हमले की साजिश और इसमें शामिल आतंकियों की पहचान में जुटी है।
अनऑफिशियल टेस्ट, भारत-ए की बढ़त 170 रन हुई:सुदर्शन दूसरी पारी में चोटिल होकर लौटे; श्रीलंका-ए ने 330 रन बनाए, नबी को 4 विकेट

भारत-ए ने श्रीलंका-ए के खिलाफ पहले अनऑफिशियल टेस्ट पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। गॉल में तीसरे दिन टीम ने 170 रन की बढ़त हासिल की और स्टंप्स तक बिना विकेट खोए 48 रन बना लिए। देवदत्त पडीक्कल और आयुष पांडे नाबाद लौटे। पहली पारी में शतक लगाने वाले ओपनर साई सुदर्शन केवल 7 रन बनाकर चोटिल होने के कारण रिटायर्ड हर्ट हो गए। तेज गेंदबाज आकिब नबी के 4 विकेट की बदौलत श्रीलंका-ए की पहली पारी 330 रन पर सिमट गई। इससे पहले भारत ने 452/6 पर पारी डिक्लेयर की थी। आकिब नबी ने निचले बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा श्रीलंका-ए ने तीसरे दिन 113/2 से आगे खेलना शुरू किया। नुवानिदु फर्नांडो और अशेन बंडारा ने तीसरे विकेट के लिए 105 रन की साझेदारी की। फर्नांडो को 84 रन पर यश ठाकुर ने आउट किया। इसके बाद कप्तान सहान अराच्चिगे और अशेन बंडारा ने चौथे विकेट के लिए 117 रन जोड़कर टीम को संभाला। बंडारा ने 70 और अराच्चिगे ने 72 रन बनाए। एक समय श्रीलंका-ए का स्कोर 300 रन के पार पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने शानदार वापसी की। आकिब नबी ने आखिरी पांच में से चार विकेट लेकर श्रीलंका-ए की पारी 330 रन पर समेट दी। उन्होंने 19.4 ओवर में 58 रन देकर 4 विकेट लिए। हर्ष दुबे और यश ठाकुर को दो-दो विकेट मिले। साई सुदर्शन चोटिल, भारत की बढ़ी चिंता 122 रन की बढ़त के साथ दूसरी पारी शुरू करने उतरी भारत-ए को शुरुआत में ही झटका लगा। पहली पारी में शतक जड़ने वाले साई सुदर्शन चौथे ओवर में 7 रन बनाकर चोटिल हो गए और रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। पडिक्कल और आयुष ने संभाली पारी साई सुदर्शन के बाहर जाने के बाद देवदत्त पडिक्कल और छत्तीसगढ़ के युवा बल्लेबाज आयुष पांडे ने जिम्मेदारी संभाली। दोनों ने बिना कोई विकेट गंवाए दिन का खेल समाप्त होने तक 48 रन जोड़ दिए। पडिक्कल और आयुष दोनों 20-20 रन बनाकर नाबाद लौटे। भारत-ए अब चौथे दिन अपनी बढ़त को 250 रन के पार ले जाकर श्रीलंका-ए के सामने मुश्किल लक्ष्य रखना चाहेगा।
‘वो सुबह हम से ही आएगी’ पर बोले महेश भट्ट:रंगमंच आज भी जोड़ता है इंसान से इंसान को, अनु मलिक ने बताई चुनौती

मुंबई में जल्द मंचित होने जा रहे नाटक ‘वो सुबह हम से ही आएगी’ को लेकर फिल्ममेकर महेश भट्ट और संगीतकार अनु मलिक ने दैनिक भास्कर से बात की। यह नाटक बदलाव, उम्मीद और इंसान की भीतर की ताकत की कहानी है। इसे महेश भट्ट प्रजेंट कर रहे हैं। नाटक दिनेश गौतम ने लिखा है, तारिक हमीद डायरेक्ट कर रहे हैं। इसके गीत IPS अधिकारी कैसर खालिद ने लिखे हैं और संगीत अनु मलिक ने दिया है। मंच पर इमरान जाहिद और नमिता सचदेवा अभिनय करते नजर आएंगे। दैनिक भास्कर से बातचीत में महेश भट्ट ने कहा कि आज लोगों के पास मोबाइल, स्ट्रीमिंग और डिजिटल कंटेंट के कई विकल्प हैं, लेकिन रंगमंच की ताकत अब भी अलग है। उन्होंने कहा, “रंगमंच में आप किसी कलाकार की सांस महसूस करते हैं। वहां जो अनुभव मिलता है, वह किसी स्क्रीन पर नहीं मिल सकता। हम दुनिया से जुड़े हुए दिखते हैं, लेकिन भीतर से कटते जा रहे हैं। ऐसे दौर में थिएटर इंसान को इंसान से जोड़ता है।” नाटक के मूल विचार पर बात करते हुए महेश भट्ट ने कहा कि असली बदलाव बाहर से नहीं, भीतर से आता है। उन्होंने कहा, “जब तक आप अपने अंदर की रोशनी नहीं जगाएंगे, तब तक उधार की रोशनी पर चलते रहेंगे। सबसे बुरा वक्त ही कई बार आपको अपनी असली ताकत से मिलाता है।” भट्ट ने अपनी जिंदगी के संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि करियर और निजी जीवन के कठिन दौर ने उन्हें बदला और उसी से कई यादगार कहानियां निकलीं। उन्होंने कहा, “अगर इस नाटक को देखकर दर्शकों को लगे कि अगर कहानी का किरदार कर सकता है तो हम भी कर सकते हैं, तो यही इसकी सबसे बड़ी सफलता होगी।” वहीं, नाटक के संगीत को लेकर अनु मलिक ने कहा कि वह शुरुआत से इस प्रोजेक्ट से भावनात्मक रूप से जुड़ गए थे। अनु मलिक ने कहा, “इस नाटक का शीर्षक ही इतना असरदार था कि मैं उससे तुरंत जुड़ गया। इमरान जाहिद ने जब कहानी सुनाई और गीत भेजे तो मैंने उसी वक्त धुन बना ली।” उन्होंने थिएटर और फिल्मों के संगीत के फर्क पर कहा, “थिएटर के लिए संगीत बनाना ज्यादा मुश्किल है, क्योंकि सब कुछ रियल टाइम में होता है। जो दर्शक उस पल महसूस करता है, वही उसके साथ घर तक जाता है।” महेश भट्ट के साथ अपने रिश्ते पर अनु मलिक ने कहा, “महेश भट्ट मेरे लिए सिर्फ निर्देशक नहीं हैं। उन्होंने हमेशा मुझ पर भरोसा किया। उनका नाम सुनते ही मेरे दिमाग में धुन बनने लगती है। यही उनका जादू है।” नाटक ‘वो सुबह हम से ही आएगी’ उम्मीद, आत्मविश्वास और भीतर की रोशनी की बात करता है। इसके जरिए टीम संदेश देना चाहती है कि बदलाव किसी और से नहीं, खुद से शुरू होता है।
‘वो सुबह हम से ही आएगी’ पर बोले महेश भट्ट:रंगमंच आज भी जोड़ता है इंसान से इंसान को, अनु मलिक ने बताई चुनौती

मुंबई में जल्द मंचित होने जा रहे नाटक ‘वो सुबह हम से ही आएगी’ को लेकर फिल्ममेकर महेश भट्ट और संगीतकार अनु मलिक ने दैनिक भास्कर से बात की। यह नाटक बदलाव, उम्मीद और इंसान की भीतर की ताकत की कहानी है। इसे महेश भट्ट प्रजेंट कर रहे हैं। नाटक दिनेश गौतम ने लिखा है, तारिक हमीद डायरेक्ट कर रहे हैं। इसके गीत IPS अधिकारी कैसर खालिद ने लिखे हैं और संगीत अनु मलिक ने दिया है। मंच पर इमरान जाहिद और नमिता सचदेवा अभिनय करते नजर आएंगे। दैनिक भास्कर से बातचीत में महेश भट्ट ने कहा कि आज लोगों के पास मोबाइल, स्ट्रीमिंग और डिजिटल कंटेंट के कई विकल्प हैं, लेकिन रंगमंच की ताकत अब भी अलग है। उन्होंने कहा, “रंगमंच में आप किसी कलाकार की सांस महसूस करते हैं। वहां जो अनुभव मिलता है, वह किसी स्क्रीन पर नहीं मिल सकता। हम दुनिया से जुड़े हुए दिखते हैं, लेकिन भीतर से कटते जा रहे हैं। ऐसे दौर में थिएटर इंसान को इंसान से जोड़ता है।” नाटक के मूल विचार पर बात करते हुए महेश भट्ट ने कहा कि असली बदलाव बाहर से नहीं, भीतर से आता है। उन्होंने कहा, “जब तक आप अपने अंदर की रोशनी नहीं जगाएंगे, तब तक उधार की रोशनी पर चलते रहेंगे। सबसे बुरा वक्त ही कई बार आपको अपनी असली ताकत से मिलाता है।” भट्ट ने अपनी जिंदगी के संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि करियर और निजी जीवन के कठिन दौर ने उन्हें बदला और उसी से कई यादगार कहानियां निकलीं। उन्होंने कहा, “अगर इस नाटक को देखकर दर्शकों को लगे कि अगर कहानी का किरदार कर सकता है तो हम भी कर सकते हैं, तो यही इसकी सबसे बड़ी सफलता होगी।” वहीं, नाटक के संगीत को लेकर अनु मलिक ने कहा कि वह शुरुआत से इस प्रोजेक्ट से भावनात्मक रूप से जुड़ गए थे। अनु मलिक ने कहा, “इस नाटक का शीर्षक ही इतना असरदार था कि मैं उससे तुरंत जुड़ गया। इमरान जाहिद ने जब कहानी सुनाई और गीत भेजे तो मैंने उसी वक्त धुन बना ली।” उन्होंने थिएटर और फिल्मों के संगीत के फर्क पर कहा, “थिएटर के लिए संगीत बनाना ज्यादा मुश्किल है, क्योंकि सब कुछ रियल टाइम में होता है। जो दर्शक उस पल महसूस करता है, वही उसके साथ घर तक जाता है।” महेश भट्ट के साथ अपने रिश्ते पर अनु मलिक ने कहा, “महेश भट्ट मेरे लिए सिर्फ निर्देशक नहीं हैं। उन्होंने हमेशा मुझ पर भरोसा किया। उनका नाम सुनते ही मेरे दिमाग में धुन बनने लगती है। यही उनका जादू है।” नाटक ‘वो सुबह हम से ही आएगी’ उम्मीद, आत्मविश्वास और भीतर की रोशनी की बात करता है। इसके जरिए टीम संदेश देना चाहती है कि बदलाव किसी और से नहीं, खुद से शुरू होता है।
‘क्या बंगाली जानते हैं कि राजमा क्या है?’: महुआ मोइत्रा ने बंगाल मिड-डे मील विवाद पर बीजेपी पर निशाना साधा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:27 जून, 2026, 16:28 IST पश्चिम बंगाल में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा कोलकाता के स्कूलों में मध्याह्न भोजन से अंडे हटाने के लिए एक नया पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के बाद राजनीतिक विवाद पैदा हो गया। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा. (पीटीआई/फ़ाइल) पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के तहत स्कूलों में मध्याह्न भोजन से अंडे हटाने के फैसले के बाद तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा और दावा किया कि अधिकांश बंगाली मांसाहारी हैं और “सोया पसंद नहीं करते”। भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा कोलकाता में स्कूल के मध्याह्न भोजन की तैयारी को इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) को सौंपने और अंडे की जगह राजमा जैसे शाकाहारी भोजन देने के लिए एक नया पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद पैदा हो गया। टीएमसी ने सरकार पर बंगाल में शाकाहारी संस्कृति थोपने का आरोप लगाया है. नई सरकार के तहत राज्य का पहला बजट पेश करते हुए, बंगाल के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने घोषणा की कि प्राथमिक विद्यालय के मध्याह्न भोजन की लागत 6.78 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये प्रति छात्र की जाएगी और इस्कॉन को केएमसी क्षेत्र में एक पायलट परियोजना के तहत पका हुआ भोजन की आपूर्ति करने का काम सौंपा जाएगा। ‘क्या बंगाली राजमा के बारे में जानते हैं?’ शाकाहारी मध्याह्न भोजन मेनू को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए महुआ मोइत्रा ने कहा कि ज्यादातर बच्चों को सोया पसंद नहीं है और उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर स्कूलों में शाकाहार को थोपने का आरोप लगाया। “अंडे एक श्रेणी ए प्रोटीन हैं, जिसका अर्थ है कि सभी अमीनो एसिड इसमें शामिल हैं। एकमात्र गैर-पशु प्रोटीन जो प्रथम श्रेणी का है वह सोया है। हमारे बच्चों को सोया पसंद नहीं है। जब हम इसे स्कूलों में खिलाते हैं, तो उन्हें सोया पसंद नहीं है। तो यहां आप अंडे का विकल्प चुन रहे हैं,” उसने कहा। #देखें | कोलकाता, पश्चिम बंगाल: समान नागरिक संहिता पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा का कहना है, “हमारा सवाल यह है कि इस कोड को लाने के पीछे आपकी मंशा क्या है? क्या यह वास्तव में सभी संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए कल्याण के लिए, समानता के लिए लाया गया है? और हमें पूरा यकीन है… pic.twitter.com/VUVJuAlZds– एएनआई (@ANI) 26 जून, 2026 मोइत्रा ने कहा कि 98% बंगाली आबादी मांसाहारी है और अंडे की तुलना में सोया में पोषण की कमी है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि विधायक राजमा चावल क्यों नहीं खा रहे हैं। “आप राजमा चावल क्यों नहीं खाते? और राजमा क्या है? क्या बंगाली जानते हैं कि राजमा क्या है? जब तक मैं दिल्ली नहीं गया तब तक मुझे नहीं पता था कि राजमा क्या होता है। हमारे स्कूल जाने वाले 40% बच्चे स्कूल जाते हैं क्योंकि (अंडे इसका हिस्सा हैं) दिन का एक पौष्टिक गर्म भोजन है।” बीजेपी बनाम टीएमसी मिड-डे मील विवाद ने टीएमसी और बीजेपी के बागी गुट के बीच खींचतान शुरू कर दी है। विपक्ष के नेता रीताब्रत बनर्जी ने भी इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि बंगालियों की पीढ़ियां अपने नियमित आहार के हिस्से के रूप में पशु प्रोटीन का सेवन करते हुए बड़ी हुई हैं। हालाँकि, भाजपा और इस्कॉन ने इस कदम का बचाव किया। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि इसका उद्देश्य छात्रों को स्वच्छ और अच्छी गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराना है। कोलकाता इस्कॉन के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने भी तर्क दिया कि शाकाहारी भोजन अंडे की तुलना में अधिक प्रोटीन सामग्री प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया, “यह एक गलत धारणा है कि पोषण केवल अंडे पर निर्भर करता है। बच्चों को दालों, सोया उत्पादों, डेयरी उत्पादों और सब्जियों के माध्यम से आवश्यक प्रोटीन और पोषक तत्व मिल सकते हैं।” पीटीआई. चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में अवीक बनर्जी अवीक बनर्जी News18 में वरिष्ठ उप संपादक हैं। ग्लोबल स्टडीज में मास्टर की डिग्री के साथ नोएडा में रहने वाले अवीक के पास डिजिटल मीडिया और न्यूज क्यूरेशन में तीन साल से अधिक का अनुभव है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय विषयों में विशेषज्ञता रखते हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘क्या बंगाली जानते हैं कि राजमा क्या है?’: महुआ मोइत्रा ने बंगाल मिड-डे मील विवाद पर बीजेपी पर निशाना साधा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल मध्याह्न भोजन विवाद(टी)महुआ मोइत्रा(टी)इस्कॉन मध्याह्न भोजन(टी)स्कूल भोजन में अंडे(टी)शाकाहारी बनाम मांसाहारी(टी)बीजेपी बनाम टीएमसी(टी)कोलकाता स्कूल पोषण(टी)मध्याह्न भोजन में राजमा
जेंडर का फर्क मिट रहा, पर बदल रहीं सिर्फ महिलाएं:36% अमेरिकी उपभोक्ता परंपरागत जेंडर कैटेगरी से बाहर जाकर कपड़े खरीद चुके

ऑफिस में सूट-वेस्ट पहनी महिलाएं आम हो गई हैं। लेकिन क्या आपने किसी पुरुष को झुमकियां पहनकर मीटिंग में आते देखा है? शायद नहीं। यही फर्क हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की असिस्टेंट प्रोफेसर मारेन हॉफ की नई रिसर्च का केंद्र बना। हॉफ जब ऑफिस में महिलाओं को सूट-वेस्ट में देखने लगीं तो उन्होंने खुद भी कुछ खरीद लिए। लेकिन एक मार्केटिंग स्कॉलर के रूप में उनके जेहन में सवाल उठा- यह बदलाव किस दिशा में हो रहा है? इसका जवाब उन्होंने ‘जर्नल ऑफ कंज्यूमर रिसर्च’ में दिया है-महिलाओं की तुलना में पुरुष बेहद कम बदल रहे हैं। मारेन की रिसर्च टीम ने 1880 से 2022 के बीच अमेरिका के एक लाख बच्चों के नामों का विश्लेषण किया। पाया कि हर साल औसतन 310 पुरुष नाम जेंडर-फ्लूइड बने। यानी लड़कियों ने पुरुषों के नाम अपनाए, जबकि जो पुरुषों ने महिला नाम अपनाए, वे सिर्फ 207 थे। ब्लेक इसका अच्छा उदाहरण है। 1883 में यह सिर्फ लड़कों का नाम था। 1960 के दशक में लड़कियों ने इसे अपनाना शुरू किया। 1981 तक यह दोनों का हो गया। टीम ने फैशन रिटेलर फारफेच के 2 लाख से ज्यादा प्रोडक्ट इमेज एक इमेज-रिकॉग्निशन मॉडल से जांचे। नतीजा साफ था- महिलाओं के 7% कपड़े एआई ने पुरुषों के समझ लिए, जबकि पुरुषों के सिर्फ 5.3% कपड़े ही महिलाओं का समझा। यानी महिलाओं के फैशन में मर्दाना छाप ज्यादा है, पर इसका उल्टा कम हो रहा है। इसकी वजह सीधी है- मर्दानगी को समाज में ताकत का प्रतीक माना जाता है। महिलाओं के लिए पुरुष-स्टाइल कम जोखिम भरा है, बल्कि यह उन्हें प्रोफेशनल और सशक्त दिखाता है। पुरुषों के लिए स्त्रियोचित स्टाइल अब भी सामाजिक रूप से जोखिम भरा माना जाता है। हॉफ कहती हैं, ‘यह ट्रेंड समावेश के नाम पर है, लेकिन असल में यह पुरानी पावर डायनेमिक्स को बनाए रखता है।’ दिलचस्प है कि 36% अमेरिकी उपभोक्ता परंपरागत जेंडर कैटेगरी से बाहर जाकर कपड़े खरीद चुके हैं। नॉर्डस्ट्रॉम, मार्क जैकब्स और गुची जैसे ब्रांड जेंडर-फ्लूइड कलेक्शन ला चुके हैं। लेकिन मारेन की रिसर्च कहती है कि जब तक यह बदलाव एकतरफा है, तब तक समानता दूर है। असली बदलाव तब आएगा जब पुरुष भी बिना झिझक झुमकियां पहन सकें। यूनिसेक्स जेंडर-फ्लूइड का बस एक हिस्सा, फैशन इंडस्ट्री में इसकी चार कैटेगरी फैशन की दुनिया में चार अलग-अलग अवधारणाएं हैं, जिन्हें अक्सर एक समझ लिया जाता है: जेंडर-फ्लूइड – धीरे-धीरे और स्थायी रूप से लिंग की सीमाएं तोड़ता है, मसलन पुरुषों के लिए पर्ल नेकलेस। जेंडर-बेंडिंग – अपोजिट जेंडर के कपड़े पहनना, पर यह अस्थायी होता है। यूनिसेक्स – न मर्दाना, न स्त्रैण- जैसे ओवरसाइज्ड हूडी। एंड्रोजनी – एक ही लुक में दोनों का मिश्रण, जैसे आधा सूट, आधी ड्रेस।
सैफ ने हमले पर की बात:कहा- उसने पूरी ताकत से चाकू मारा, सफेद कुर्ता खून से सन गया, तैमूर ने पूछा था- क्या आप मर जाओगे

सैफ अली खान ने जनवरी 2025 में घर में घुसकर हुए डरावने, जानलेवा हमले पर बात की है। एक्टर ने बताया है कि जब वो बच्चों के कमरे में पहुंचे तो वो हमलावर जेह और नैनी को पहले ही चोट पहुंचा चुका था। जैसे ही सैफ ने उसे रोकने की कोशिश की, उस शख्स ने उन्हें पूरी ताकत से चाकू मार दिया और उनका सफेद कुर्ता खून से लाल हो गया। सैफ ने ये भी बताया है कि हमले के बाद वो फर्श पर गिर पड़े और उन्हें लगा कि वो अब जिंदा नहीं बच सकेंगे। तभी बेटे तैमूर ने उनसे पूछा था कि क्या वो मरने वाले हैं। हमले पर बात करते हुए सैफ ने ये भी कहा कि वो उस शख्स को माफ करने के लिए तैयार हैं। सैफ अली खान ने मोजो स्टोरी को दिए इंटरव्यू में हमले पर बात करते हुए कहा, ‘वह बहुत ही भयावह घटना थी। एक चोर बाथरूम की खिड़की से घर में घुस आया। हम सो रहे थे, तभी नैनी ने आकर कहा, “जेह बाबा के कमरे में कोई आदमी है, जिसके हाथ में छुरी है और वह पैसे मांग रहा है।” ‘मैं तुरंत बच्चों के कमरे में गया। वह शख्स बच्चे (जेह) को पकड़े हुए था। उसने बच्चे को हल्की चोट पहुंचाई थी और हमारी मेड को भी जख्मी कर दिया था। शायद अगर मैं पहले लाइट जला देता और उससे बात करने की कोशिश करता, तो स्थिति अलग हो सकती थी। लेकिन उस समय मैंने बिना सोचे-समझे उस पर हमला कर दिया और हमारी हाथापाई शुरू हो गई।’ ‘इसके बाद वह चाकू लेकर बेकाबू हो गया। चारों तरफ खून और अफरा-तफरी मच गई। फिर मेरी नेपाली मेड गीता वहां आई, उसने उसे जोर से धक्का देकर कमरे के दूसरी तरफ फेंक दिया।’ आगे सैफ ने कहा, ‘कुछ देर बाद मैंने नोटिस किया कि मैं सफेद कुर्ता-पायजामा पहने हुए था, जो खून से पूरी तरह भीग चुका था। एक समय ऐसा आया जब मैं फर्श पर पड़ा था और मुझे लगा कि शायद मैं मर जाऊंगा। मैं सोच रहा था कि मैंने अपनी जिंदगी अच्छी तरह जी ली है। मैं बस अपने बच्चे का हाथ पकड़कर दुनिया को अलविदा कहना चाहता था। फिर मेरी आंख खुली और मैंने सोचा ऐसा नहीं होगा। फिर मैं हॉस्पिटल गया। मैं वाकई तैमूर के साथ रहना चाहता था। मैंने उससे पूछा कि क्या तुम मेरे साथ हॉस्पिटल आओगे। उसने मुझे देखा और पूछा, ‘क्या आप मरने वाले हैं?’ मैंने कहा, ‘नहीं, मेरी पीठ में बहुत दर्द है, लेकिन मैं ठीक हो जाऊंगा’, उसने कहा, हां मैं चलूंगा।’ सैफ ने ये भी कहा कि उस शख्स ने उन्हें पूरी ताकत से चाकू मारा था। चाकू का 6 इंच का टुकड़ा उनकी पीठ में रह गया था। वो टुकड़ा रीड़ की हड्डी के पास लगा था। सैफ ने कहा, ‘मेरा एक पैर सुन्न हो रहा था, मैं पैरालाइस होने के बेहद करीब था।’ मैं उसे माफ करना चाहता हूं- सैफ अली खान आखिर में सैफ ने कहा, मैं उस आदमी को माफ भी करना चाहता था, क्योंकि मुझे लगता है कि उससे बहुत बड़ी गलती हो गई थी और वह लड़ाई करने नहीं आया था। मैं उसे माफ करने के लिए तैयार हूं, लेकिन जिस हिस्से में उसने मुझे मारने की कोशिश की, उसे भुला पाना मेरे लिए अब भी मुश्किल है। मुझे लगता है कि समाज में अमीरी-गरीबी और असमानता जैसी चीजों ने भी ऐसी परिस्थितियां पैदा की हैं।” जनवरी 2025 में हुआ था हमला सैफ अली खान पर बीते साल 15 जनवरी को उनके घर सतगुरु शरण अपार्टमेंट में घुसकर हमला हुआ था। इसके बाद सैफ खुद ऑटो कर बच्चों के साथ अस्पताल पहुंचे थे। लीलावती हॉस्पिटल की मेडकिल रिपोर्ट के अनुसार, एक्टर सैफ अली खान को पांच जगहों पर चाकू घोंपा गया था। उनको पीठ, कलाई, गर्दन, कंधे और कोहनी पर चोटें लगी थीं। इलाज के बाद एक्टर को 21 जनवरी को डिस्चार्ज किया गया। पुलिस ने 2 दिन बाद बांग्लादेशी नागरिक शरीफुल इस्लाम को गिरफ्तार किया था। आरोपी अब भी पुलिस की हिरासत में है।
सैफ ने हमले पर की बात:कहा- उसने पूरी ताकत से चाकू मारा, सफेद कुर्ता खून से सन गया, तैमूर ने पूछा था- क्या आप मर जाओगे

सैफ अली खान ने जनवरी 2025 में घर में घुसकर हुए डरावने, जानलेवा हमले पर बात की है। एक्टर ने बताया है कि जब वो बच्चों के कमरे में पहुंचे तो वो हमलावर जेह और नैनी को पहले ही चोट पहुंचा चुका था। जैसे ही सैफ ने उसे रोकने की कोशिश की, उस शख्स ने उन्हें पूरी ताकत से चाकू मार दिया और उनका सफेद कुर्ता खून से लाल हो गया। सैफ ने ये भी बताया है कि हमले के बाद वो फर्श पर गिर पड़े और उन्हें लगा कि वो अब जिंदा नहीं बच सकेंगे। तभी बेटे तैमूर ने उनसे पूछा था कि क्या वो मरने वाले हैं। हमले पर बात करते हुए सैफ ने ये भी कहा कि वो उस शख्स को माफ करने के लिए तैयार हैं। सैफ अली खान ने मोजो स्टोरी को दिए इंटरव्यू में हमले पर बात करते हुए कहा, ‘वह बहुत ही भयावह घटना थी। एक चोर बाथरूम की खिड़की से घर में घुस आया। हम सो रहे थे, तभी नैनी ने आकर कहा, “जेह बाबा के कमरे में कोई आदमी है, जिसके हाथ में छुरी है और वह पैसे मांग रहा है।” ‘मैं तुरंत बच्चों के कमरे में गया। वह शख्स बच्चे (जेह) को पकड़े हुए था। उसने बच्चे को हल्की चोट पहुंचाई थी और हमारी मेड को भी जख्मी कर दिया था। शायद अगर मैं पहले लाइट जला देता और उससे बात करने की कोशिश करता, तो स्थिति अलग हो सकती थी। लेकिन उस समय मैंने बिना सोचे-समझे उस पर हमला कर दिया और हमारी हाथापाई शुरू हो गई।’ ‘इसके बाद वह चाकू लेकर बेकाबू हो गया। चारों तरफ खून और अफरा-तफरी मच गई। फिर मेरी नेपाली मेड गीता वहां आई, उसने उसे जोर से धक्का देकर कमरे के दूसरी तरफ फेंक दिया।’ आगे सैफ ने कहा, ‘कुछ देर बाद मैंने नोटिस किया कि मैं सफेद कुर्ता-पायजामा पहने हुए था, जो खून से पूरी तरह भीग चुका था। एक समय ऐसा आया जब मैं फर्श पर पड़ा था और मुझे लगा कि शायद मैं मर जाऊंगा। मैं सोच रहा था कि मैंने अपनी जिंदगी अच्छी तरह जी ली है। मैं बस अपने बच्चे का हाथ पकड़कर दुनिया को अलविदा कहना चाहता था। फिर मेरी आंख खुली और मैंने सोचा ऐसा नहीं होगा। फिर मैं हॉस्पिटल गया। मैं वाकई तैमूर के साथ रहना चाहता था। मैंने उससे पूछा कि क्या तुम मेरे साथ हॉस्पिटल आओगे। उसने मुझे देखा और पूछा, ‘क्या आप मरने वाले हैं?’ मैंने कहा, ‘नहीं, मेरी पीठ में बहुत दर्द है, लेकिन मैं ठीक हो जाऊंगा’, उसने कहा, हां मैं चलूंगा।’ सैफ ने ये भी कहा कि उस शख्स ने उन्हें पूरी ताकत से चाकू मारा था। चाकू का 6 इंच का टुकड़ा उनकी पीठ में रह गया था। वो टुकड़ा रीड़ की हड्डी के पास लगा था। सैफ ने कहा, ‘मेरा एक पैर सुन्न हो रहा था, मैं पैरालाइस होने के बेहद करीब था।’ मैं उसे माफ करना चाहता हूं- सैफ अली खान आखिर में सैफ ने कहा, मैं उस आदमी को माफ भी करना चाहता था, क्योंकि मुझे लगता है कि उससे बहुत बड़ी गलती हो गई थी और वह लड़ाई करने नहीं आया था। मैं उसे माफ करने के लिए तैयार हूं, लेकिन जिस हिस्से में उसने मुझे मारने की कोशिश की, उसे भुला पाना मेरे लिए अब भी मुश्किल है। मुझे लगता है कि समाज में अमीरी-गरीबी और असमानता जैसी चीजों ने भी ऐसी परिस्थितियां पैदा की हैं।” जनवरी 2025 में हुआ था हमला सैफ अली खान पर बीते साल 15 जनवरी को उनके घर सतगुरु शरण अपार्टमेंट में घुसकर हमला हुआ था। इसके बाद सैफ खुद ऑटो कर बच्चों के साथ अस्पताल पहुंचे थे। लीलावती हॉस्पिटल की मेडकिल रिपोर्ट के अनुसार, एक्टर सैफ अली खान को पांच जगहों पर चाकू घोंपा गया था। उनको पीठ, कलाई, गर्दन, कंधे और कोहनी पर चोटें लगी थीं। इलाज के बाद एक्टर को 21 जनवरी को डिस्चार्ज किया गया। पुलिस ने 2 दिन बाद बांग्लादेशी नागरिक शरीफुल इस्लाम को गिरफ्तार किया था। आरोपी अब भी पुलिस की हिरासत में है।
पैपराजी पर भड़कीं मलाइका अरोड़ा:किसी से बात कर रही थीं; ज्यादा करीब आने पर बोलीं- बाबा, आप इधर आ जाओ

मलाइका अरोड़ा का हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में वह किसी से बात करती नजर आ रही हैं। इस दौरान पैपराजी उनके काफी करीब आ जाते हैं, जिससे वे नाराज हो गईं। मलाइका पैपराजी से कहती हैं, “बाबा, आप इधर आ जाओ।” जिसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि, अब तक यह जानकारी सामने नहीं आ पाई कि यह वीडियो कब और कहां का है। मलाइका ने बिना जरूरत तस्वीरें खींचने पर नाराजगी जताई थी बता दें कि मलाइका अरोड़ा ने कहा था कि उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब पैपराजी उनकी बिना जरूरत वाली तस्वीरें क्लिक करते हैं। दिसंबर 2022 में कॉमेडियन भारती सिंह से बातचीत के दौरान मलाइका ने कहा था, “मैंने कभी किसी को नहीं डांटा, जब तक किसी ने मुझे धक्का न दिया हो या गलत व्यवहार न किया हो, लेकिन मुझे सबसे ज्यादा गुस्सा तब आता है, जब फोटोग्राफर्स मेरे चेहरे की बजाय मेरे शरीर के अलग-अलग हिस्सों की तस्वीरें लेने लगते हैं। कैमरा ऊपर-नीचे घूमता रहता है और मुझे इससे दिक्कत होती है।” मलाइका ने आगे कहा था, “वे मेरे शरीर के कुछ खास हिस्सों पर ही फोकस क्यों करते हैं? मुझे अपने शरीर पर गर्व है। फिर लोग कहते हैं कि अगर नहीं दिखाना है, तो पूरे कपड़े पहन लो। लेकिन मैं क्या पहनूं, यह मेरा फैसला है। मुझे जैसे कपड़े पसंद हैं, मैं वैसे ही पहनूंगी।” उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसी तस्वीरों की वजह से उन्हें अपने परिवार को भी जवाब देना पड़ता है। इसलिए यह बात उन्हें परेशान करती है। सलमान भी पैपराजी पर भड़के थे वहीं, पिछले महीने सलमान खान भी पैपराजी पर भड़क गए थे। दरअसल, वे हिंदुजा अस्पताल पहुंचे थे, जहां से निकलते समय पैपराजी के शोर से एक्टर भड़क गए थे। हालांकि, बाद में जब सलमान फिल्म राजा शिवाजी की सक्सेस पार्टी में पहुंचे, तब सभी पैपराजी ने उनसे माफी मांगी थी। सलमान जैसे ही पार्टी में पहुंचे, वैसे ही सभी पैपराजी ने उन्हें घेर लिया और माफी मांगने लगे। सभी एक साथ, “सॉरी भाईजान, जोर से बोलो सॉरी”, कहते दिखे। इसके बाद सलमान ने भी उनकी माफी कबूल कर ली थी। बता दें कि इस पहले गोविंदा के बॉडीगार्ड्स की भी पैपराजी से बहस हो चुकी है। दरअसल, गोविंदा पिछले एक इवेंट में पहुंचे थे। वहां से निकलते हुए उन्हें पैपराजी ने घेर लिया था। जब उनके गार्ड्स ने निकलने की जगह बनाने के लिए लोगों को पीछे किया, तो पैपराजी ने आरोप लगाया कि उन्हें धक्का दिया गया। विवाद बढ़ने पर गोविंदा को खुद बीच-बचाव करना पड़ा था।
पैपराजी पर भड़कीं मलाइका अरोड़ा:किसी से बात कर रही थीं; ज्यादा करीब आने पर बोलीं- बाबा, आप इधर आ जाओ

मलाइका अरोड़ा का हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में वह किसी से बात करती नजर आ रही हैं। इस दौरान पैपराजी उनके काफी करीब आ जाते हैं, जिससे वे नाराज हो गईं। मलाइका पैपराजी से कहती हैं, “बाबा, आप इधर आ जाओ।” जिसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि, अब तक यह जानकारी सामने नहीं आ पाई कि यह वीडियो कब और कहां का है। मलाइका ने बिना जरूरत तस्वीरें खींचने पर नाराजगी जताई थी बता दें कि मलाइका अरोड़ा ने कहा था कि उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब पैपराजी उनकी बिना जरूरत वाली तस्वीरें क्लिक करते हैं। दिसंबर 2022 में कॉमेडियन भारती सिंह से बातचीत के दौरान मलाइका ने कहा था, “मैंने कभी किसी को नहीं डांटा, जब तक किसी ने मुझे धक्का न दिया हो या गलत व्यवहार न किया हो, लेकिन मुझे सबसे ज्यादा गुस्सा तब आता है, जब फोटोग्राफर्स मेरे चेहरे की बजाय मेरे शरीर के अलग-अलग हिस्सों की तस्वीरें लेने लगते हैं। कैमरा ऊपर-नीचे घूमता रहता है और मुझे इससे दिक्कत होती है।” मलाइका ने आगे कहा था, “वे मेरे शरीर के कुछ खास हिस्सों पर ही फोकस क्यों करते हैं? मुझे अपने शरीर पर गर्व है। फिर लोग कहते हैं कि अगर नहीं दिखाना है, तो पूरे कपड़े पहन लो। लेकिन मैं क्या पहनूं, यह मेरा फैसला है। मुझे जैसे कपड़े पसंद हैं, मैं वैसे ही पहनूंगी।” उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसी तस्वीरों की वजह से उन्हें अपने परिवार को भी जवाब देना पड़ता है। इसलिए यह बात उन्हें परेशान करती है। सलमान भी पैपराजी पर भड़के थे वहीं, पिछले महीने सलमान खान भी पैपराजी पर भड़क गए थे। दरअसल, वे हिंदुजा अस्पताल पहुंचे थे, जहां से निकलते समय पैपराजी के शोर से एक्टर भड़क गए थे। हालांकि, बाद में जब सलमान फिल्म राजा शिवाजी की सक्सेस पार्टी में पहुंचे, तब सभी पैपराजी ने उनसे माफी मांगी थी। सलमान जैसे ही पार्टी में पहुंचे, वैसे ही सभी पैपराजी ने उन्हें घेर लिया और माफी मांगने लगे। सभी एक साथ, “सॉरी भाईजान, जोर से बोलो सॉरी”, कहते दिखे। इसके बाद सलमान ने भी उनकी माफी कबूल कर ली थी। बता दें कि इस पहले गोविंदा के बॉडीगार्ड्स की भी पैपराजी से बहस हो चुकी है। दरअसल, गोविंदा पिछले एक इवेंट में पहुंचे थे। वहां से निकलते हुए उन्हें पैपराजी ने घेर लिया था। जब उनके गार्ड्स ने निकलने की जगह बनाने के लिए लोगों को पीछे किया, तो पैपराजी ने आरोप लगाया कि उन्हें धक्का दिया गया। विवाद बढ़ने पर गोविंदा को खुद बीच-बचाव करना पड़ा था।






