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जेंडर का फर्क मिट रहा, पर बदल रहीं सिर्फ महिलाएं:36% अमेरिकी उपभोक्ता परंपरागत जेंडर कैटेगरी से बाहर जाकर कपड़े खरीद चुके

जेंडर का फर्क मिट रहा, पर बदल रहीं सिर्फ महिलाएं:36% अमेरिकी उपभोक्ता परंपरागत जेंडर कैटेगरी से बाहर जाकर कपड़े खरीद चुके

ऑफिस में सूट-वेस्ट पहनी महिलाएं आम हो गई हैं। लेकिन क्या आपने किसी पुरुष को झुमकियां पहनकर मीटिंग में आते देखा है? शायद नहीं। यही फर्क हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की असिस्टेंट प्रोफेसर मारेन हॉफ की नई रिसर्च का केंद्र बना। हॉफ जब ऑफिस में महिलाओं को सूट-वेस्ट में देखने लगीं तो उन्होंने खुद भी कुछ खरीद लिए। लेकिन एक मार्केटिंग स्कॉलर के रूप में उनके जेहन में सवाल उठा- यह बदलाव किस दिशा में हो रहा है? इसका जवाब उन्होंने ‘जर्नल ऑफ कंज्यूमर रिसर्च’ में दिया है-महिलाओं की तुलना में पुरुष बेहद कम बदल रहे हैं। मारेन की रिसर्च टीम ने 1880 से 2022 के बीच अमेरिका के एक लाख बच्चों के नामों का विश्लेषण किया। पाया कि हर साल औसतन 310 पुरुष नाम जेंडर-फ्लूइड बने। यानी लड़कियों ने पुरुषों के नाम अपनाए, जबकि जो पुरुषों ने महिला नाम अपनाए, वे सिर्फ 207 थे। ब्लेक इसका अच्छा उदाहरण है। 1883 में यह सिर्फ लड़कों का नाम था। 1960 के दशक में लड़कियों ने इसे अपनाना शुरू किया। 1981 तक यह दोनों का हो गया। टीम ने फैशन रिटेलर फारफेच के 2 लाख से ज्यादा प्रोडक्ट इमेज एक इमेज-रिकॉग्निशन मॉडल से जांचे। नतीजा साफ था- महिलाओं के 7% कपड़े एआई ने पुरुषों के समझ लिए, जबकि पुरुषों के सिर्फ 5.3% कपड़े ही महिलाओं का समझा। यानी महिलाओं के फैशन में मर्दाना छाप ज्यादा है, पर इसका उल्टा कम हो रहा है। इसकी वजह सीधी है- मर्दानगी को समाज में ताकत का प्रतीक माना जाता है। महिलाओं के लिए पुरुष-स्टाइल कम जोखिम भरा है, बल्कि यह उन्हें प्रोफेशनल और सशक्त दिखाता है। पुरुषों के लिए स्त्रियोचित स्टाइल अब भी सामाजिक रूप से जोखिम भरा माना जाता है। हॉफ कहती हैं, ‘यह ट्रेंड समावेश के नाम पर है, लेकिन असल में यह पुरानी पावर डायनेमिक्स को बनाए रखता है।’ दिलचस्प है कि 36% अमेरिकी उपभोक्ता परंपरागत जेंडर कैटेगरी से बाहर जाकर कपड़े खरीद चुके हैं। नॉर्डस्ट्रॉम, मार्क जैकब्स और गुची जैसे ब्रांड जेंडर-फ्लूइड कलेक्शन ला चुके हैं। लेकिन मारेन की रिसर्च कहती है कि जब तक यह बदलाव एकतरफा है, तब तक समानता दूर है। असली बदलाव तब आएगा जब पुरुष भी बिना झिझक झुमकियां पहन सकें। यूनिसेक्स जेंडर-फ्लूइड का बस एक हिस्सा, फैशन इंडस्ट्री में इसकी चार कैटेगरी फैशन की दुनिया में चार अलग-अलग अवधारणाएं हैं, जिन्हें अक्सर एक समझ लिया जाता है: जेंडर-फ्लूइड – धीरे-धीरे और स्थायी रूप से लिंग की सीमाएं तोड़ता है, मसलन पुरुषों के लिए पर्ल नेकलेस। जेंडर-बेंडिंग – अपोजिट जेंडर के कपड़े पहनना, पर यह अस्थायी होता है। यूनिसेक्स – न मर्दाना, न स्त्रैण- जैसे ओवरसाइज्ड हूडी। एंड्रोजनी – एक ही लुक में दोनों का मिश्रण, जैसे आधा सूट, आधी ड्रेस।

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ऑफिस में सूट-वेस्ट पहनी महिलाएं आम हो गई हैं। लेकिन क्या आपने किसी पुरुष को झुमकियां पहनकर मीटिंग में आते देखा है? शायद नहीं। यही फर्क हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की असिस्टेंट प्रोफेसर मारेन हॉफ की नई रिसर्च का केंद्र बना। हॉफ जब ऑफिस में महिलाओं को सूट-वेस्ट में देखने लगीं तो उन्होंने खुद भी कुछ खरीद लिए। लेकिन एक मार्केटिंग स्कॉलर के रूप में उनके जेहन में सवाल उठा- यह बदलाव किस दिशा में हो रहा है? इसका जवाब उन्होंने ‘जर्नल ऑफ कंज्यूमर रिसर्च’ में दिया है-महिलाओं की तुलना में पुरुष बेहद कम बदल रहे हैं। मारेन की रिसर्च टीम ने 1880 से 2022 के बीच अमेरिका के एक लाख बच्चों के नामों का विश्लेषण किया। पाया कि हर साल औसतन 310 पुरुष नाम जेंडर-फ्लूइड बने। यानी लड़कियों ने पुरुषों के नाम अपनाए, जबकि जो पुरुषों ने महिला नाम अपनाए, वे सिर्फ 207 थे। ब्लेक इसका अच्छा उदाहरण है। 1883 में यह सिर्फ लड़कों का नाम था। 1960 के दशक में लड़कियों ने इसे अपनाना शुरू किया। 1981 तक यह दोनों का हो गया। टीम ने फैशन रिटेलर फारफेच के 2 लाख से ज्यादा प्रोडक्ट इमेज एक इमेज-रिकॉग्निशन मॉडल से जांचे। नतीजा साफ था- महिलाओं के 7% कपड़े एआई ने पुरुषों के समझ लिए, जबकि पुरुषों के सिर्फ 5.3% कपड़े ही महिलाओं का समझा। यानी महिलाओं के फैशन में मर्दाना छाप ज्यादा है, पर इसका उल्टा कम हो रहा है। इसकी वजह सीधी है- मर्दानगी को समाज में ताकत का प्रतीक माना जाता है। महिलाओं के लिए पुरुष-स्टाइल कम जोखिम भरा है, बल्कि यह उन्हें प्रोफेशनल और सशक्त दिखाता है। पुरुषों के लिए स्त्रियोचित स्टाइल अब भी सामाजिक रूप से जोखिम भरा माना जाता है। हॉफ कहती हैं, ‘यह ट्रेंड समावेश के नाम पर है, लेकिन असल में यह पुरानी पावर डायनेमिक्स को बनाए रखता है।’ दिलचस्प है कि 36% अमेरिकी उपभोक्ता परंपरागत जेंडर कैटेगरी से बाहर जाकर कपड़े खरीद चुके हैं। नॉर्डस्ट्रॉम, मार्क जैकब्स और गुची जैसे ब्रांड जेंडर-फ्लूइड कलेक्शन ला चुके हैं। लेकिन मारेन की रिसर्च कहती है कि जब तक यह बदलाव एकतरफा है, तब तक समानता दूर है। असली बदलाव तब आएगा जब पुरुष भी बिना झिझक झुमकियां पहन सकें। यूनिसेक्स जेंडर-फ्लूइड का बस एक हिस्सा, फैशन इंडस्ट्री में इसकी चार कैटेगरी फैशन की दुनिया में चार अलग-अलग अवधारणाएं हैं, जिन्हें अक्सर एक समझ लिया जाता है: जेंडर-फ्लूइड – धीरे-धीरे और स्थायी रूप से लिंग की सीमाएं तोड़ता है, मसलन पुरुषों के लिए पर्ल नेकलेस। जेंडर-बेंडिंग – अपोजिट जेंडर के कपड़े पहनना, पर यह अस्थायी होता है। यूनिसेक्स – न मर्दाना, न स्त्रैण- जैसे ओवरसाइज्ड हूडी। एंड्रोजनी – एक ही लुक में दोनों का मिश्रण, जैसे आधा सूट, आधी ड्रेस।

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