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3 दोस्तों की सोच से Ashwin AI बना डॉक्टरों का फ्रेंड! बातचीत सुनकर बनाता है मेडिकल रिकॉर्ड, दिल्ली AIIMS में होगी जल्द एंट्री

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होमताजा खबरDelhi Ashwin AI बनेगा डॉक्टरों का बेस्ट फ्रेंड, बातचीत सुनकर बनाता है मेडिकल रिकॉर्ड Last Updated:February 27, 2026, 07:15 IST Delhi AIIMS Ashwin AI Medical : अश्विन एआई को तीन दोस्तोने बनाया है. इसे प्रभु राजगोपाल, अनिरुद्ध वर्ना और विजयराजा द्वारा विकसित किया गयाहै. जो AIIMS Delhi में हेल्थकेयर डॉक्यूमेंटेशन को आसान बनाकर मरीजों और डॉक्टरों के लिए मददगार साबित हो रहा है. आइये जानते हैं इसके बारे में ख़बरें फटाफट दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब भारत में भी लगभग हर क्षेत्र में शुरू हो चुका है, लेकिन भारत में खासकर कुछ ऐसे क्षेत्र हैं. जहां AI की सबसे अधिक आवश्यकता है. इनमें से एक प्रमुख क्षेत्र भारत का हेल्थकेयर सेक्टर है, जो काफी बड़ा है. जो अभी भी कई मामलों में अभी भी व्यवस्थित नहीं है. इसलिए यहां AI की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस की जा रही है. इस कड़ी में एक नया नाम Ashwin AI तेजी से उभरकर सामने आया है. यह एक AI-आधारित हेल्थकेयर टूल है, जिसे मरीजों और डॉक्टरों दोनों के काम को आसान बनाने के लिए विकसित किया गया है. ऐसे काम करता है Ashwin AI Ashwin AI के पीछे तीन दोस्तों की सोच और मेहनत है. प्रभु राजगोपाल जो आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर हैं और इस प्लेटफॉर्म में संस्थापक और अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे हैं. अनिरुद्ध वर्ना सह-संस्थापक और सीटीओ हैं, जिन्होंने इसकी तकनीक को मजबूत बनाया है. जबकि विजयराजा सह-संस्थापक और सीओओ हैं. जो इसके ऑपरेशन और ग्रोथ को संभालते हैं. इन तीनों ने मिलकर एक ऐसा AI-आधारित हेल्थकेयर समाधान तैयार किया है, जिसका उद्देश्य डॉक्टरों का समय बचाना और मरीजों की देखभाल को बेहतर बनाना है. Ashwin AI एक AI-powered क्लीनिकल डॉक्यूमेंटेशन प्लेटफॉर्म है, जो डॉक्टर और मरीज के बीच होने वाली बातचीत को सुनकर उसे अपने-आप डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड में बदल देता है. आसान शब्दों में कहें तो जो काम पहले डॉक्टरों को हाथ से लिखना या कंप्यूटर पर टाइप करना पड़ता था. वह अब AI खुद करता है और चाहे कितना भी पुराना रिकॉर्ड क्यों ना हो. वह सिस्टम में ही रहेगा और आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री कभी भी आप देख सकते हैं. कभी किसी डॉक्टर के पास जा रहे हैं तो उसे भी आप इस सिस्टम के माध्यम से अपनी पूरी मेडिकल हिस्ट्री दिखा सकते हैं. यह सिस्टम रियल-टाइम में बातचीत को समझता है. साथ ही उसे व्यवस्थित क्लीनिकल डॉक्यूमेंटेशन में बदलता है और हेल्थकेयर वर्कफ्लो को आसान बनाता है. इससे डॉक्टर कागजी या डिजिटल फॉर्म भरने की बजाय मरीज पर ज़्यादा ध्यान दे पाते हैं. इसकी एक और खास बात यह भी है कि Ashwin AI कई भारतीय भाषाओं को ट्रांसक्राइब करने में सक्षम है और बातचीत को आसान भाषा में लिखित रूप में उपलब्ध करवा देगा. AIIMS Delhi में हुई एंट्री हाल ही में आयोजित AI समिट 2026 में Ashwin AI की जमकर सराहना हुई. जहां इसकी AI-based हेल्थकेयर तकनीक को खास तौर पर सराहा गया. इसके बाद यह प्लेटफॉर्म और अधिक चर्चा में आ गया. Ashwin AI अब सरकारी स्तर पर भी अपनी जगह बना रहा है. टीम इस समय NIC के साथ काम कर रही है और देश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थानों में से एक AIIMS, दिल्ली भी जल्द ही अपने सिस्टम में Ashwin AI को इस्तेमाल करने जा रहा है. यह कदम भारत के हेल्थकेयर सिस्टम में AI पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में लगभग 4 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटेंट राइटर…और पढ़ें First Published : February 27, 2026, 07:13 IST

ट्रम्प बोले- ईरान के साथ बातचीत में इनडायरेक्टली शामिल रहूंगा:पिछले साल परमाणु ठिकानों पर बमबारी से इन्हें अक्ल आई; आज स्विट्जरलैंड में बैठक

ट्रम्प बोले- ईरान के साथ बातचीत में इनडायरेक्टली शामिल रहूंगा:पिछले साल परमाणु ठिकानों पर बमबारी से इन्हें अक्ल आई; आज स्विट्जरलैंड में बैठक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत में इनडायरेक्ट रूप से शामिल रहेंगे। उन्होंने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। यह बयान ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर दूसरे दौर की बातचीत से पहले आया है। अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत आज (17 फरवरी 2026) जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में हो रही है। इससे पहले ओमान में 6 फरवरी को पहली बैठक हुई थी। ट्रम्प ने कहा, ‘मैं उन बातचीत पर नजर रहूंगा।’ उन्होंने संकेत दिया कि ईरान इस बार समझौते को लेकर गंभीर है। डील की संभावना पर ट्रम्प ने कहा कि ईरान इसे लेकर सख्त रुख अपनाता रहा है, लेकिन पिछले साल अमेरिका की ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी से उसे अक्ल आई। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि वे समझौता न करने के परिणाम भुगतना चाहेंगे।’ ईरान-अमेरिका के बीच किन मुद्दों पर बातचीत होगी ईरान ने ऑपरेशनल क्षमताओं की जांच के लिए नौसैनिक अभ्यास शुरू किया एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक, ईरान ने सोमवार को कुछ ही हफ्तों में दूसरी बार नौसैनिक अभ्यास शुरू किया। यह अभ्यास स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज, पर्शियन गल्फ और गल्फ ऑफ ओमान में हो रहा है। इसका मकसद खुफिया और ऑपरेशनल क्षमताओं की जांच करना है। समुद्री सुरक्षा कंपनी ईओएस रिस्क ग्रुप ने कहा कि इस इलाके से गुजरने वाले जहाजों को रेडियो पर चेतावनी दी गई कि स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज के उत्तरी मार्ग में मंगलवार को लाइव-फायर ड्रिल हो सकती है। हालांकि ईरानी सरकारी टीवी ने लाइव-फायर अभ्यास का जिक्र नहीं किया। जनवरी के अंत में हुए इसी तरह के अभ्यास के दौरान अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कड़ा बयान जारी किया था। उसने कहा था कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय हवाई और समुद्री क्षेत्र में पेशेवर तरीके से काम करने का अधिकार है, लेकिन वह अमेरिकी वॉरशिप या ट्रेड जहाजों को परेशान न करें। ईरान के उप विदेश मंत्री बोले- ट्रम्प प्रतिबंध हटाएं तो डील संभव व्हाइट हाउस का कहना है कि वह ऐसा समझौता चाहता है, जिससे ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। वहीं, रविवार को ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने अमेरिका के साथ परमाणु समझौते को लेकर बातचीत करने की इच्छा जताई है। उन्होंने BBC को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर अमेरिका प्रतिबंध हटाने पर बात करने को तैयार है, तो हम अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कई मुद्दों पर समझौता करने के लिए तैयार है। वहीं अमेरिकी अधिकारी बार-बार कहते रहे हैं कि परमाणु वार्ता में प्रगति रुकने की वजह ईरान है, न कि अमेरिका। रवांची बोले- हमने 60% इंरिच्ड यूरेनियम घटाने का प्रस्ताव दिया ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौता एक लंबे समय से चल रही विवादास्पद बातचीत है, जिसका मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना है। जिससे वह परमाणु हथियार न बना सके। मजीद तख्त-रवांची ने कहा कि ईरान ने 60% तक इंरिच्ड यूरेनियम को कम करने का प्रस्ताव दिया है। ईरान के पास 400 किलो से ज्यादा उच्च स्तर पर इंरिच्ड यूरेनियम का भंडार है। 2015 के परमाणु समझौते के तहत उसने अपना यूरेनियम रूस भेजा था। इस बार क्या वह ऐसा करेगा, इस पर तख्त-रवांची ने कहा कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। रूस ने दोबारा यह सामग्री स्वीकार करने की पेशकश की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान अस्थायी रूप से यूरेनियम इंरिचमेंट रोकने का प्रस्ताव भी दे चुका है। बैलिस्टिक मिसाइल पर विवाद अटका ईरान की एक बड़ी शर्त रही है कि बातचीत सिर्फ परमाणु मुद्दे पर हो। तख्त-रवांची ने कहा कि उनकी समझ है कि अगर समझौता करना है तो फोकस परमाणु मुद्दे पर ही रहेगा। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गया है। ईरान इस पर बिल्कुल भी समझौता करने को तैयार नहीं है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है। ईरान का कहना है कि यह उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रक्षा के लिए जरूरी है। जब जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु साइटों पर हमला किया, तब ईरान की मिसाइलों ने ही उसकी रक्षा की। इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि ईरान हिजबुल्लाह, हूती जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन देना बंद करे। अमेरिका इस मुद्दे को भी शामिल करना चाहता है, लेकिन ईरान मुख्य रूप से सिर्फ परमाणु मुद्दे पर फोकस रखना चाहता है। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी। यह ईरान की रक्षात्मक क्षमता है और इसे छोड़ना मतलब खुद को कमजोर करना होगा। ईरान कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या क्षेत्रीय समूहों पर नहीं। रवांची बोले- हमारे अस्तित्व पर खतरा हुआ तो जवाब देंगे ईरान के उप विदेश मंत्री ने ट्रम्प के बयानों पर चिंता जताई। सार्वजनिक रूप से और निजी तौर पर अमेरिका बातचीत में रुचि दिखा रहा है, लेकिन ट्रम्प ने हाल में सत्ता परिवर्तन की बात की। तख्त-रवांची ने कहा कि निजी संदेशों में ऐसा नहीं है। उन्होंने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बढ़ोतरी पर चिंता जताई और कहा कि दूसरा युद्ध सबके लिए बुरा होगा। अगर ईरान को अस्तित्व का खतरा लगा, तो ईरान जवाब देगा। ईरान ने क्षेत्रीय देशों से बात की है और सब युद्ध के खिलाफ हैं। ईरान को लगता है कि इजराइल इस वार्ता को तोड़ना चाहता है। समझौते को लेकर तख्त-रवांची ने कहा कि ईरान जेनेवा में उम्मीद के साथ जाएगा और दोनों पक्षों को ईमानदारी दिखानी होगी। क्षेत्र में तैनात किए जा रहे 40,000 से अधिक अमेरिकी सैनिकों के बारे में पूछे जाने पर, तख्त-रावंची ने जवाब दिया, ‘ऐसी स्थिति में खेल अलग होगा।’ ईरान से तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में तैनाती बढ़ा रहा अमेरिका अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। अमेरिका अब अपना सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड वहां भेज रहा है। यह एक न्यूक्लियर-पावर्ड कैरियर एयरक्राफ्ट है। रॉयटर्स को दो अमेरिकी अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है। अधिकारी के मुताबिक, जेराल्ड

लोकसभा गतिरोध समाप्त करने के लिए बातचीत के बावजूद 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन रद्द नहीं किया जाएगा: सूत्र | राजनीति समाचार

US President Donald Trump. (IMAGE: REUTERS)

आखरी अपडेट:फ़रवरी 11, 2026, 18:45 IST सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि सामान्य कार्यवाही बहाल करने के लिए बातचीत के बावजूद लोकसभा से आठ विपक्षी सांसदों का निलंबन रद्द नहीं किया जाएगा। संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा की कार्यवाही में भाग लेते सदस्य (फोटो: पीटीआई) सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि लोकसभा से आठ विपक्षी सांसदों का निलंबन रद्द नहीं किया जाएगा, हालांकि सदन में सामान्य कामकाज बहाल करने के लिए ट्रेजरी बेंच और विपक्षी दलों के बीच बातचीत चल रही है। इस महीने की शुरुआत में लगाई गई अनुशासनात्मक कार्रवाई बजट सत्र के शेष भाग के लिए जारी रहेगी, जो 2 अप्रैल को समाप्त होगा। सदन में कार्यवाही के दौरान हंगामे के बाद कांग्रेस के सात और सीपीआई (एम) के एक सांसद को निलंबित कर दिया गया। यह अव्यवस्था उन आपत्तियों से जुड़ी थी जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी को एक लेख उद्धृत करने से रोक दिया गया था जिसमें 2020 के भारत-चीन संघर्ष पर पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे के एक अप्रकाशित संस्मरण का हवाला दिया गया था। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान गांधी द्वारा लगातार दूसरे दिन इस मुद्दे को उठाने का प्रयास करने के बाद टकराव बढ़ गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ट्रेजरी बेंच के अन्य सदस्यों ने आपत्ति जताई और अध्यक्ष ने फैसला सुनाया कि संदर्भ नहीं दिया जा सकता। इसके बाद गांधी ने स्पीकर ओम बिरला से कहा कि उन्होंने जिस दस्तावेज़ का हवाला देना चाहा था, उसे प्रमाणित कर दिया है और उन्होंने इसे “हमारे लोकतंत्र पर धब्बा” बताया कि उन्हें बोलने से रोका गया। जैसे-जैसे गतिरोध गहराता गया, विपक्षी सांसदों ने नारे लगाए, कुछ महासचिव की मेज की ओर बढ़े, कागजात फाड़ दिए और उन्हें अध्यक्ष की ओर फेंक दिया, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बाद में सदन में इस आचरण को संसदीय प्राधिकार के लिए “पूरी तरह से उपेक्षा” दिखाने वाला बताया। रिजिजू ने शेष सत्र के लिए आठ सदस्यों को निलंबित करने की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पेश किया, जिसे लगातार हंगामे के बीच ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। निलंबित सांसदों ने बाद में सरकार पर असहमति को दबाने का आरोप लगाते हुए संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। एक ने कहा कि कार्रवाई “लोकतंत्र पर हमला” थी, जबकि दूसरे ने आरोप लगाया कि गांधी को जानबूझकर बोलने से रोका गया था। पीठासीन अधिकारी कृष्ण प्रसाद टेनेटी को यह कहते हुए उद्धृत किया गया कि सदस्यों ने अनुचित व्यवहार किया था, जिसमें अध्यक्ष को अनौपचारिक शब्दों में संबोधित करना और बाद में सदन के पटल पर कागजात फेंकना शामिल था। नरवाने संस्मरण विवाद के अलावा, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टिप्पणियों और वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर विध्वंस अभियान से संबंधित आरोपों पर विपक्ष के विरोध के कारण भी बैठक बाधित हुई, जिसके कारण बार-बार स्थगन करना पड़ा। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: फ़रवरी 11, 2026, 18:45 IST समाचार राजनीति लोकसभा गतिरोध खत्म करने के लिए बातचीत के बावजूद 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन रद्द नहीं किया जाएगा: सूत्र अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)लोकसभा निलंबन(टी)विपक्षी सांसदों को निलंबित(टी)बजट सत्र अनुशासनात्मक कार्रवाई(टी)राहुल गांधी लोकसभा विवाद(टी)एमएम नरवणे संस्मरण भारत चीन संघर्ष(टी)संसदीय हंगामा(टी)संसद में असहमति को दबाना(टी)लोकतंत्र पर हमला