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अमेरिका ने 100 चीनी कंपनियां को 'मिलिट्री लिस्ट' में डाला:दावा- ये कंपनियां चीनी सेना की मदद कर रहीं, कंपनियों पर प्रतिबंधों का खतरा बढ़ा

अमेरिका ने 100 चीनी कंपनियां को 'मिलिट्री लिस्ट' में डाला:दावा- ये कंपनियां चीनी सेना की मदद कर रहीं, कंपनियों पर प्रतिबंधों का खतरा बढ़ा

अमेरिका ने अलीबाबा ग्रुप, बायडू और BYD जैसी दिग्गज चीनी टेक और ऑटोमोबाइल कंपनियों को ‘चीनी मिलिट्री कंपनियों’ की लिस्ट में शामिल किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के अनुसार ये कंपनियां पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) यानी चीनी सेना और वहां की सुरक्षा एजेंसियों की मदद करती हैं। अमेरिका ने नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) के सेक्शन 1260H के तहत अब तक 100 से अधिक चीनी कंपनियों को इस ब्लैकलिस्ट में डाल दिया है। क्या है अमेरिका का सेक्शन 1260H और इसका असर? क्या है यह कानून: अमेरिकी नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) का सेक्शन 1260H अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को उन चीनी कंपनियों की पहचान कर उन्हें लिस्टेड करने की शक्ति देता है, जो अमेरिका में कमर्शियल काम करती हैं, लेकिन बैकएंड पर चीनी सेना को मजबूत बना रही हैं। क्यों किया जाता है लिस्टेड: अमेरिका को आशंका है कि चीन ‘मिलिट्री-सिविल फ्यूज़न’ नीति के तहत नागरिक और व्यावसायिक तकनीकों का इस्तेमाल अपनी सेना को आधुनिक और घातक बनाने में कर रहा है। क्या होता है असर: इस लिस्ट में आने के बाद इन कंपनियों पर कई तरह के अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा बढ़ जाता है। अमेरिकी कंपनियां और निवेशक इनमें निवेश करने से कतराते हैं। इससे इनके ग्लोबल सप्लाई चेन और बिजनेस ऑपरेशंस पर बुरा असर पड़ता है। अलीबाबा, टेनसेंट और शाओमी जैसी बड़ी कंपनियों पर शिकंजा पेंटागन द्वारा जारी की गई इस नई लिस्ट में चीन के लगभग हर बड़े सेक्टर की दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इनमें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अलीबाबा, सर्च इंजन और एआई सेक्टर की बड़ी कंपनी बायडू, और दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माता कंपनियों में से एक BYD शामिल है। इनके अलावा इस लिस्ट में बैटरी बनाने वाली कंपनी CATL, गेमिंग और सोशल मीडिया की बड़ी कंपनी टेनसेंट, टेलिकॉम कंपनी हुवावे और ड्रोन बनाने वाली कंपनी DJI को भी शामिल किया गश है। इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्किंग डिवाइस बनाने वाली टीपी-लिंक, रोबोटिक्स फर्म यूनिट्री , सर्विलांस कैमरा बनाने वाली हिकविज़), और कोस्को शिपिंग जैसी दिग्गज कंपनियां भी इस सूची में शामिल हैं। चीन की बड़ी टेलिकॉम ऑपरेटर जैसे चाइना मोबाइल, चाइना टेलीकॉम, और चाइना यूनिकॉम को भी सेना से जुड़े होने के कारण इसमें डाला गया है। पेंटागन ने दिया चीनी सरकारी मंत्रालयों और सेना से संबंधों का हवाला अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इन कंपनियों को लिस्टेड करने के लिए ठोस कानूनी और रणनीतिक कारण बताए हैं। पेंटागन का कहना है कि ये कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चीन के सरकारी तंत्र और सैन्य संस्थानों से जुड़ी हुई हैं। आधिकारिक दस्तावेज में खास तौर पर ‘स्टेट-ओन्ड एसेट्स सुपरविज़न एंड एडमिनिस्ट्रेशन कमीशन’ (SASAC) और ‘मिनिस्ट्री ऑफ इंडस्ट्री एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी’ (MIIT) का ज़िक्र किया गया है। इसके अलावा चीन के स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इंडस्ट्री फॉर नेशनल डिफेंस (SASTIND) और चीन की मुख्य सेना यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ-साथ पीपुल्स आर्म्ड पुलिस व चीनी खुफिया और कानून प्रवर्तन (लॉ-इन्फोर्समेंट) एजेंसियों के साथ भी इन कंपनियों के संबंध का दावा अमेरिका ने किया है। चीन के ‘लिटिल जाइंट’ और ‘सिंगल चैंपियन’ प्रोग्राम पर अमेरिका की नजर पेंटागन के नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि ये कंपनियां चीन के रणनीतिक तकनीकी विकास के कई बड़े प्रोग्राम्स में हिस्सा ले रही हैं। इनमें चीन के महत्वाकांक्षी ‘लिटिल जाइंट’ और ‘सिंगल चैंपियन’ जैसी स्कीम्स शामिल हैं। वाशिंगटन का मानना है कि बीजिंग इन सरकारी स्कीम्स के जरिए उन्नत तकनीकों को विकसित कर रहा है ताकि तकनीक के मामले में अमेरिका को पछाड़ा जा सके और इन तकनीकों का इस्तेमाल रक्षा और सैन्य तैयारियों में किया जा सके। लिस्ट से बाहर निकलने के लिए कंपनियां कर सकती हैं अपील अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस आधिकारिक दस्तावेज में यह भी साफ किया है कि यदि किसी कंपनी को लगता है कि उसे गलत तरीके से इस लिस्ट में डाला गया है, तो वह इस फैसले को चुनौती दे सकती है। पेंटागन ने इसके लिए एक प्रॉपर प्रोसेस और गाइडलाइंस जारी की हैं। लिस्टेड कंपनियां अपनी सफाई में सबूत पेश कर सकती हैं और नाम हटाने के लिए पुनर्विचार की अपील कर सकती हैं।

दीपिका-रणवीर नए घर में दिखे:एक्ट्रेस का बेबी बंप नजर आया; अपार्टमेंट में दूसरे बच्चे के जन्म के बाद शिफ्ट हो सकते हैं

दीपिका-रणवीर नए घर में दिखे:एक्ट्रेस का बेबी बंप नजर आया; अपार्टमेंट में दूसरे बच्चे के जन्म के बाद शिफ्ट हो सकते हैं

सोमवार को दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह मुंबई के बांद्रा वेस्ट स्थित अपने समुद्र किनारे बने नए क्वाड्रुप्लेक्स घर की बालकनी में नजर आए। दोनों घर के इंटीरियर के काम की प्रोग्रेस देखने पहुंचे थे। जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए, उनमें दीपिका सफेद को-ऑर्ड आउटफिट में दिखीं, जबकि रणवीर ने लाल टी-शर्ट, काली पैंट और काली कैप पहनी हुई थी। वहीं हाल ही में दूसरी बार प्रेग्नेंट दीपिका का बेबी बंप भी नजर आया। खबरों के अनुसार, दूसरे बच्चे के जन्म के बाद कपल नए आलीशान घर में शिफ्ट हो सकता है। समुद्र के सामने बना यह लग्जरी क्वाड्रुप्लेक्स अपार्टमेंट काफी बड़ा और शानदार बताया जा रहा है। अप्रैल में की थी प्रेग्नेंसी अनाउंसमेंट दीपिका पादुकोण ने 19 अप्रैल को अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी अनाउंस की थी। दीपिका और रणवीर के इंस्टाग्राम हैंडल पर उनकी बेटी दुआ की एक तस्वीर शेयर की गई थी, जिसमें बेटी ने एक प्रेग्नेंसी टेस्ट किट पकड़ी हुई है, जो पॉजिटिव रिजल्ट दिखा रहा है। तस्वीर में रणवीर बेटी को गोद में लिए हुए हैं, हालांकि उनका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था। वहीं, तस्वीर में दुआ का आधा चेहरा नजर आ रहा था। 2024 में बेटी दुआ का जन्म हुआ था बता दें कि दीपिका और रणवीर ने 8 सितंबर 2024 को अपनी बेटी दुआ के जन्म की जानकारी दी थी। उस समय उन्होंने लिखा था, ‘वेलकम बेबी गर्ल। 8-9-2024। दीपिका और रणवीर।’ इससे पहले फरवरी 2024 में दीपिका ने प्रेग्नेंसी की घोषणा की थी। दोनों की लव स्टोरी 2013 में फिल्म ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’ के सेट से शुरू हुई थी। कई सालों तक रिश्ते में रहने के बाद दोनों ने 2018 में इटली में शादी की थी। कपल के वर्कफ्रंट की बात करें तो रणवीर हाल ही में फिल्म धुरंधर और धुरंधर 2 में नजर आए थे। दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुईं। ‘धुरंधर’ के पहले पार्ट ने दुनियाभर में 1307 करोड़ रुपए का कारोबार किया था, जबकि इसके सीक्वल को भी दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स मिला था। धुरंधर 2 ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई करते हुए भारत में दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनने का रिकॉर्ड बनाया। सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने भारत में करीब ₹1149 करोड़ नेट कलेक्शन और दुनियाभर में लगभग ₹1813 करोड़ ग्रॉस कमाई की है। ग्रॉस कलेक्शन टिकट से कुल कमाई और नेट कलेक्शन टैक्स के बाद की कमाई होती है। वहीं, दीपिका शाहरुख खान के साथ फिल्म किंग में नजर आएंगी।

चिन्मय सुथार की नजरें IPL पर:मुंबई लीग में ऑरेंज कैप जीती थी; बीमारी की वजह से 11 महीने मैदान से दूर रहे थे

चिन्मय सुथार की नजरें IPL पर:मुंबई लीग में ऑरेंज कैप जीती थी; बीमारी की वजह से 11 महीने मैदान से दूर रहे थे

मराठा रॉयल्स के स्टार बल्लेबाज और पिछले साल मुंबई क्रिकेट लीग में ऑरेंज कैप अपने नाम करने वाले चिन्मय सुथार ने आगामी सीजन को लेकर अपनी रणनीतियों का खुलासा किया है। सुथार ने कहा कि इस साल मुंबई क्रिकेट लीग में वह अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर IPL फ्रेंचाइजी टीमों को प्रभावित करने का पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों, करियर के उतार-चढ़ाव और अपनी सफलता में पिता के योगदान को लेकर खुलकर बात की। 5 साल की उम्र से बल्ला थामने वाले चिन्मय ने बताया कि वे खुद को मुख्य रूप से एक प्योर बल्लेबाज मानते हैं, जो जरूरत पड़ने पर स्पिन गेंदबाजी भी कर सकता है। पिता राजेश ने सचिन तेंदुलकर के साथ की थी ओपनिंग, वहीं से मिली प्रेरणा चिन्मय सुधार ने अपने पारिवारिक बैकग्राउंड और क्रिकेट की तरफ झुकाव को लेकर बताया कि उनके घर में हमेशा से ही खेल का माहौल रहा है। उनके पिता राजेश खुद एक बेहतरीन क्रिकेटर रह चुके हैं और उन्होंने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के साथ ओपनिंग भी की थी। अपने पिता के प्रभाव पर बात करते हुए चिन्मय ने कहा, “मैं बचपन से ही अपने पापा को क्रिकेट खेलते हुए देखता आया हूं। उन्हें देखकर मुझे हमेशा लगता था कि मुझे भी क्रिकेट खेलना चाहिए। इसी तरह क्रिकेट के लिए मेरा प्यार डेवलप हुआ। जब पापा मैदान पर खेलते थे, तो मुझे बहुत अच्छा लगता था और देखने में बहुत मजा आता था। मेरी इसी दिलचस्पी को देखकर उन्होंने मेरा क्रिकेट करियर स्टार्ट करवाया। 5 साल की उम्र में शुरू किया खेल, अंडर-14 के दिनों में समझा प्रोफेशनल क्रिकेट जब चिन्मय से पूछा गया कि क्या उन्होंने बचपन में ही तय कर लिया था कि आगे चलकर प्रोफेशनल क्रिकेटर बनना है, तो उन्होंने कहा, ‘नहीं, बिल्कुल नहीं। शुरुआत में ऐसा कुछ भी तय नहीं किया था। मुझे बस खेलने में मजा आता था और मैं गेम को पूरी तरह एंजॉय करता था। लेकिन जब मैंने पापा को खेलते देखा और आगे जाकर खुद एज ग्रुप के मैच खेलने लगा, तब समझ आया कि प्रोफेशनल क्रिकेट क्या होता है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘स्कूल गेम्स खेलने के बाद जब मैंने अंडर-14 जैसे एज़ ग्रुप और फिर ए-डिवीजन क्लब क्रिकेट खेलना शुरू किया, तब मुझे असल मायने में इस बात का आईडिया आया कि प्रोफेशनल क्रिकेट की राह कैसी होती है और कौन से मैच खेलकर हम जिंदगी में आगे बढ़ सकते हैं। 15 साल की उम्र में बीमारी का सामना, 11 महीने तक मैदान से रहे दूर करियर के शुरुआती दिनों में ही इस युवा खिलाड़ी को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। 15 साल की उम्र में वे गंभीर रूप से बीमार हो गए, जिससे उनके खेल पर ब्रेक लग गया। उस मुश्किल दौर को याद करते हुए चिन्मय ने कहा, ‘वह समय मेरे लिए मानसिक रूप से बहुत सेंसिटिव (भावुक) था। उस बीमारी के दौरान मैं लगभग 10 से 11 महीने तक क्रिकेट नहीं खेल पाया था। एक खिलाड़ी के लिए इतने लंबे समय तक मैदान से दूर रहना बेहद कठिन होता है, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा।’ ‘पापा ही मेरे कोच और लाइफ के सबसे बड़े सपोर्ट सिस्टम’ मुश्किल दौर से उबरने और हर परिस्थिति में साथ देने के लिए चिन्मय ने अपने पिता को अपना सबसे बड़ा मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा, “बिल्कुल, मेरे पापा ही मेरे कोच हैं और मैं बचपन से उन्हें फॉलो करते आया हूं। जब भी मैं क्रिकेट या लाइफ में डाउन फील करता था, तो वो हमेशा मेरी मदद करते थे और आज भी करते हैं। वो मेरी लाइफ के सबसे बड़े पार्ट हैं। जब मेरा समय अच्छा नहीं होता है, तो वो मुझे संभालते हैं। मैं बहुत लकी हूं कि मेरे पास ऐसे पापा हैं जो मुझे क्रिकेट की हर बारीकी समझाते हैं।” खुद को मानते हैं टॉप ऑर्डर बैटर, स्पिन बॉलिंग भी कर लेते हैं अपनी खेल शैली और टीम में अपनी भूमिका पर बात करते हुए मराठा रॉयल्स के इस खिलाड़ी ने साफ किया कि वे ऑलराउंडर से ज्यादा अपनी बल्लेबाजी पर भरोसा करते हैं। मुंबई क्रिकेट लीग में शानदार प्रदर्शन कर ऑरेंज कैप जीतने वाले चिन्मय ने अपनी पोजीशन को लेकर कहा,’मैं पूरी तरह से एक बैटर हूं और टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी करना पसंद करता हूं। हां, मैं टीम के लिए स्पिन गेंदबाजी भी डाल लेता हूं, लेकिन मेरी मुख्य पहचान बल्लेबाजी ही है। खुद को मानते हैं टॉप ऑर्डर बैटर, स्पिन बॉलिंग भी कर लेते हैं अपनी खेल शैली और टीम में अपनी भूमिका पर बात करते हुए मराठा रॉयल्स के इस खिलाड़ी ने साफ किया कि वे ऑलराउंडर से ज्यादा अपनी बल्लेबाजी पर भरोसा करते हैं। मुंबई क्रिकेट लीग में शानदार प्रदर्शन कर ऑरेंज कैप जीतने वाले चिन्मय ने अपनी पोजीशन को लेकर कहा, “मैं पूरी तरह से एक बैटर हूं और टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी करना पसंद करता हूं। हां, मैं टीम के लिए स्पिन गेंदबाजी भी डाल लेता हूं, लेकिन मेरी मुख्य पहचान बल्लेबाजी ही है। ——————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… विमेंस टी-20 वर्ल्डकप प्रैक्टिस मैच में भारतीय जीती:वेस्टइंडीज को 26 रन से हराया; भारती की नाबाद फिफ्टी, श्रेयांका को 4 विकेट भारतीय विमेंस टीम ने बल्लेबाजों और स्पिनरों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत पहले वार्म-अप मैच में वेस्टइंडीज को 26 रन से हरा दिया। सोमवार को कार्डिफ में खेले गए मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 8 विकेट पर 179 रन बनाए। जवाब में वेस्टइंडीज की 8 विकेट खोकर 153 रन ही बना सकी। पूरी खबर

चिन्मय सुतार की नजरें IPL पर:मुंबई लीग में ऑरेंज कैप जीती थी; बीमारी की वजह से 11 महीने मैदान से दूर रहे थे

चिन्मय सुथार की नजरें IPL पर:मुंबई लीग में ऑरेंज कैप जीती थी; बीमारी की वजह से 11 महीने मैदान से दूर रहे थे

मराठा रॉयल्स के स्टार बल्लेबाज और पिछले साल मुंबई क्रिकेट लीग में ऑरेंज कैप अपने नाम करने वाले चिन्मय सुतार ने आगामी सीजन को लेकर अपनी रणनीतियों का खुलासा किया है। सुथार ने कहा कि इस साल मुंबई क्रिकेट लीग में वह अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर IPL फ्रेंचाइजी टीमों को प्रभावित करने का पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों, करियर के उतार-चढ़ाव और अपनी सफलता में पिता के योगदान को लेकर खुलकर बात की। 5 साल की उम्र से बल्ला थामने वाले चिन्मय ने बताया कि वे खुद को मुख्य रूप से एक प्योर बल्लेबाज मानते हैं, जो जरूरत पड़ने पर स्पिन गेंदबाजी भी कर सकता है। पिता राजेश ने सचिन तेंदुलकर के साथ की थी ओपनिंग, वहीं से मिली प्रेरणा चिन्मय सुतार ने अपने पारिवारिक बैकग्राउंड और क्रिकेट की तरफ झुकाव को लेकर बताया कि उनके घर में हमेशा से ही खेल का माहौल रहा है। उनके पिता राजेश खुद एक बेहतरीन क्रिकेटर रह चुके हैं और उन्होंने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के साथ ओपनिंग भी की थी। अपने पिता के प्रभाव पर बात करते हुए चिन्मय ने कहा, “मैं बचपन से ही अपने पापा को क्रिकेट खेलते हुए देखता आया हूं। उन्हें देखकर मुझे हमेशा लगता था कि मुझे भी क्रिकेट खेलना चाहिए। इसी तरह क्रिकेट के लिए मेरा प्यार डेवलप हुआ। जब पापा मैदान पर खेलते थे, तो मुझे बहुत अच्छा लगता था और देखने में बहुत मजा आता था। मेरी इसी दिलचस्पी को देखकर उन्होंने मेरा क्रिकेट करियर स्टार्ट करवाया। 5 साल की उम्र में शुरू किया खेल, अंडर-14 के दिनों में समझा प्रोफेशनल क्रिकेट जब चिन्मय से पूछा गया कि क्या उन्होंने बचपन में ही तय कर लिया था कि आगे चलकर प्रोफेशनल क्रिकेटर बनना है, तो उन्होंने कहा, ‘नहीं, बिल्कुल नहीं। शुरुआत में ऐसा कुछ भी तय नहीं किया था। मुझे बस खेलने में मजा आता था और मैं गेम को पूरी तरह एंजॉय करता था। लेकिन जब मैंने पापा को खेलते देखा और आगे जाकर खुद एज ग्रुप के मैच खेलने लगा, तब समझ आया कि प्रोफेशनल क्रिकेट क्या होता है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘स्कूल गेम्स खेलने के बाद जब मैंने अंडर-14 जैसे एज़ ग्रुप और फिर ए-डिवीजन क्लब क्रिकेट खेलना शुरू किया, तब मुझे असल मायने में इस बात का आईडिया आया कि प्रोफेशनल क्रिकेट की राह कैसी होती है और कौन से मैच खेलकर हम जिंदगी में आगे बढ़ सकते हैं। 15 साल की उम्र में बीमारी का सामना, 11 महीने तक मैदान से रहे दूर करियर के शुरुआती दिनों में ही इस युवा खिलाड़ी को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। 15 साल की उम्र में वे गंभीर रूप से बीमार हो गए, जिससे उनके खेल पर ब्रेक लग गया। उस मुश्किल दौर को याद करते हुए चिन्मय ने कहा, ‘वह समय मेरे लिए मानसिक रूप से बहुत सेंसिटिव (भावुक) था। उस बीमारी के दौरान मैं लगभग 10 से 11 महीने तक क्रिकेट नहीं खेल पाया था। एक खिलाड़ी के लिए इतने लंबे समय तक मैदान से दूर रहना बेहद कठिन होता है, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा।’ ‘पापा ही मेरे कोच और लाइफ के सबसे बड़े सपोर्ट सिस्टम’ मुश्किल दौर से उबरने और हर परिस्थिति में साथ देने के लिए चिन्मय ने अपने पिता को अपना सबसे बड़ा मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा, “बिल्कुल, मेरे पापा ही मेरे कोच हैं और मैं बचपन से उन्हें फॉलो करते आया हूं। जब भी मैं क्रिकेट या लाइफ में डाउन फील करता था, तो वो हमेशा मेरी मदद करते थे और आज भी करते हैं। वो मेरी लाइफ के सबसे बड़े पार्ट हैं। जब मेरा समय अच्छा नहीं होता है, तो वो मुझे संभालते हैं। मैं बहुत लकी हूं कि मेरे पास ऐसे पापा हैं जो मुझे क्रिकेट की हर बारीकी समझाते हैं।” खुद को मानते हैं टॉप ऑर्डर बैटर, स्पिन बॉलिंग भी कर लेते हैं अपनी खेल शैली और टीम में अपनी भूमिका पर बात करते हुए मराठा रॉयल्स के इस खिलाड़ी ने साफ किया कि वे ऑलराउंडर से ज्यादा अपनी बल्लेबाजी पर भरोसा करते हैं। मुंबई क्रिकेट लीग में शानदार प्रदर्शन कर ऑरेंज कैप जीतने वाले चिन्मय ने अपनी पोजीशन को लेकर कहा,’मैं पूरी तरह से एक बैटर हूं और टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी करना पसंद करता हूं। हां, मैं टीम के लिए स्पिन गेंदबाजी भी डाल लेता हूं, लेकिन मेरी मुख्य पहचान बल्लेबाजी ही है। खुद को मानते हैं टॉप ऑर्डर बैटर, स्पिन बॉलिंग भी कर लेते हैं अपनी खेल शैली और टीम में अपनी भूमिका पर बात करते हुए मराठा रॉयल्स के इस खिलाड़ी ने साफ किया कि वे ऑलराउंडर से ज्यादा अपनी बल्लेबाजी पर भरोसा करते हैं। मुंबई क्रिकेट लीग में शानदार प्रदर्शन कर ऑरेंज कैप जीतने वाले चिन्मय ने अपनी पोजीशन को लेकर कहा, “मैं पूरी तरह से एक बैटर हूं और टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी करना पसंद करता हूं। हां, मैं टीम के लिए स्पिन गेंदबाजी भी डाल लेता हूं, लेकिन मेरी मुख्य पहचान बल्लेबाजी ही है। ——————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… विमेंस टी-20 वर्ल्डकप प्रैक्टिस मैच में भारतीय जीती:वेस्टइंडीज को 26 रन से हराया; भारती की नाबाद फिफ्टी, श्रेयांका को 4 विकेट भारतीय विमेंस टीम ने बल्लेबाजों और स्पिनरों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत पहले वार्म-अप मैच में वेस्टइंडीज को 26 रन से हरा दिया। सोमवार को कार्डिफ में खेले गए मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 8 विकेट पर 179 रन बनाए। जवाब में वेस्टइंडीज की 8 विकेट खोकर 153 रन ही बना सकी। पूरी खबर

₹25 लाख खर्च कर हरियाणा पहुंचा युवक का शव:अमेरिका में सड़क हादसे में मौत, ₹50 लाख लगाकर भेजा था; प्लॉट-दुकान भी बिके

₹25 लाख खर्च कर हरियाणा पहुंचा युवक का शव:अमेरिका में सड़क हादसे में मौत, ₹50 लाख लगाकर भेजा था; प्लॉट-दुकान भी बिके

करनाल के एक युवक की अमेरिका में सड़क हादसे में मौत हो गई। सोमवार देर शाम उसका शव अमेरिका से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा। यहां से एम्बुलेंस के जरिए शव मंगलवार सुबह गांव लाया गया। कफन में लिपटे बेटे के शरीर को देखते ही मां और बहन बेहोश होकर जमीन पर गिर गईं। परिजनों का कहना है कि ट्रक हादसे में 27 मई को गौरव की मौत हो गई थी। अमेरिकी पुलिस अधिकारियों ने उन्हें हादसे की जानकारी दी। उसका शव लाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से बात की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद 25 लाख रुपए खर्च कर अमेरिका में रह रहे भारतीय की मदद से गौरव का शव गांव आया। गौरव को 2 साल पहले अमेरिका भेजने में 50 लाख रुपए का खर्च आया था। इसके लिए उन्हें एक प्लॉट भी बेचना पड़ा। गांव बालरागड़ान में उसका अंतिम संस्कार किया गया। पिता ने बेटे के शव को मुखाग्नि दी। गौरव के अंतिम संस्कार के PHOTOS सिलसिलेवार जानिए, कैसे हुआ हादसा… 26 मई को आखिरी बार बात हुई करनाल के बालरागड़ान गांव निवासी रामफल ने बताया कि 27 मई को उनका बेटा गौरव (24) अमेरिका के कैलिफोर्निया से ट्रक लेकर निकला था। उसे कैलिफोर्निया में किसी दूसरी जगह ट्रक से डिलीवरी करनी थी। इस दौरान जब गौरव एक रेस्टोरेंट पर रुका तो उसकी कॉल आई। कुछ देर बातचीत में बताया कि अभी चाय पीने के लिए रुका है, इसके बाद बात करेगा। ट्रक का बैलेंस बिगड़ा, खाई में गिरने से मौत पिता रामफल के अनुसार, अमेरिकी पुलिस से उन्हें पता चला है कि रेस्टोरेंट से निकलने के बाद कुछ ही दूर चलने पर गौरव के ट्रक का एक्सीडेंट हो गया। इसके बाद ट्रक अनियंत्रित होकर खाई में गिर गया। इस हादसे में गौरव की मौके पर ही मौत हो गई। दोपहर करीब ढाई बजे उन्हें अमेरिका पुलिस अधिकारी का फोन आया, जिसने इस हादसे की जानकारी दी। शव भारत लाने में 25 लाख रुपए खर्च रामफल ने आगे बताया कि बेटे की मौत की सूचना पर पूरा परिवार बिखर गया। गौरव के शव लाने में भी काफी अड़चन आई। प्रशासनिक अधिकारों से भी इस बारे में मदद मांगी, लेकिन कही से कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद अमेरिका में रह रहे कुछ परिचितों ने गौरव के शव को भारत पहुंचाने में मदद की। इसमें उनके करीब 25 लाख रुपए भी खर्च हो गए। 6 माह में डंकी के रास्ते पहुंचा था अमेरिका पिता रामफल ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए करीब 2 साल पहले गौरव अमेरिका गया था। मैंने गौरव को वहां जाने से काफी रोका था, लेकिन वह फिर भी अमेरिका जाने की जिद पर अड़ा रहा। उसकी जिद के आगे झुकते हुए उसे अमेरिका भेजना पड़ा। एक एजेंट के जरिए गौरव करीब 6 महीने में डंकी रूट से अमेरिका पहुंचा था। इसके लिए एक प्लॉट और दुकान भी बेचनी पड़ी थी। पिता के पास 2 एकड़ जमीन, खेती से चलता है परिवार रामफल ने बताया कि उनका परिवार खेती-किसानी पर निर्भर है। परिवार के पास करीब 2 एकड़ जमीन है, जिससे ही घर का खर्च चलता है। उन्होंने बताया कि गौरव परिवार का इकलौता बेटा था। परिवार में उसकी एक छोटी बहन भी है, जिसकी करीब एक साल पहले शादी हो चुकी है। बेटे के जाने के बाद परिवार में केवल रामफल और उनकी पत्नी ही रह गए हैं। —————— यह खबर भी पढ़ें…. करनाल के युवक की अमेरिका में गोली मारकर हत्या:मौत से 3 घंटे पहले परिवार से वीडियो कॉल की, ₹60 लाख खर्च कर गया था करनाल जिला में इन्द्री क्षेत्र के गांव समौरा के एक युवक की अमेरिका के जॉर्जिया में गोली मारकर हत्या कर दी गई। युवक करीब दो साल पहले रोजगार की तलाश में विदेश गया था और वहीं पर स्टोर में काम कर रहा था। (पूरी खबर पढ़ें)

बिहार फिर से यूपी में? कांग्रेस को अखिलेश यादव के ‘बड़े दिल’ वाले संदेश के पीछे का डर | भारत समाचार

Bangladesh Vs Australia Live Score: Follow Latest Updates From The 1st ODI. (AFP Photo)

आखरी अपडेट:09 जून, 2026, 10:27 IST सपा की प्राथमिकता स्पष्ट होती जा रही है: सफल 2024 गठबंधन मॉडल को दोहराते हुए यह सुनिश्चित करना कि उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाला मुकाबला बना रहे। इंडिया ब्लॉक की बैठक में अखिलेश के हस्तक्षेप को उत्तर प्रदेश के प्रति उनके दृष्टिकोण के पूर्वावलोकन के रूप में पढ़ा जा सकता है। (एक्स @राहुलगांधी) जब समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने सोमवार को इंडिया ब्लॉक की बैठक में कांग्रेस नेताओं से कहा कि उन्हें सहयोगियों के प्रति “बड़ा दिल” दिखाना चाहिए, तो कमरे में कई लोगों ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की राजनीति पर एक टिप्पणी के रूप में देखा। हालाँकि, टिप्पणी में उत्तर प्रदेश का स्पष्ट संदेश भी था। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के करीब आने के साथ, यादव उस चीज से बचने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहे हैं जिसे विपक्षी दल तेजी से “बिहार की गलती” के रूप में वर्णित कर रहे हैं – सीट-बंटवारे में देरी, अवास्तविक मांगें, गठबंधन में घर्षण और नेतृत्व पर भ्रम का एक संयोजन जो बिहार में भारतीय ब्लॉक की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाता है। क्षेत्रीय दलों द्वारा खुले तौर पर कांग्रेस को स्वीकार करने के बारे में उनकी टिप्पणियाँ, जबकि ग्रैंड ओल्ड पार्टी अक्सर प्रतिक्रिया देने में विफल रही, कई सहयोगियों द्वारा साझा की गई व्यापक शिकायत को प्रतिबिंबित करती है: कि राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को क्षेत्रीय वास्तविकताओं की कीमत पर नहीं आना चाहिए। बिहार में वास्तव में क्या हुआ? विपक्षी हलकों में, बिहार एक सतर्क कहानी बन गया है। यह भी पढ़ें | विपक्ष को एकजुट रखने के लिए इंडिया ब्लॉक की 5-सूत्री योजना की व्याख्या: DMK और AAP के बिना क्या बदलाव आएगा? खुद कांग्रेस नेताओं ने निजी तौर पर बिहार चुनाव को “महंगा अनुभव” बताया है। News18 ने पहले रिपोर्ट दी थी कि पार्टी का मानना ​​है कि सीट-बंटवारे की बातचीत में देरी, लंबी बातचीत और गठबंधन सहयोगियों के बीच “दोस्ताना लड़ाई” ने विपक्ष की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया है। नतीजा इतना महत्वपूर्ण था कि द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, कांग्रेस ने महीनों पहले ही उत्तर प्रदेश में जीतने योग्य सीटों की पहचान करना शुरू कर दिया था और सीट-बंटवारे की बातचीत पहले से कहीं पहले पूरी करना चाहती थी। अखिलेश यादव के लिए, बिहार ने एक पुराने राजनीतिक सिद्धांत को मजबूत किया: सबसे मजबूत क्षेत्रीय पार्टी को राज्य चुनाव में गठबंधन की रणनीति का नेतृत्व करना चाहिए। एसपी क्यों मानती है कि वह बड़े हिस्से का हकदार है? लोकसभा चुनाव के विपरीत, विधानसभा चुनाव मूल रूप से स्थानीय प्रतियोगिताएं हैं। समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में प्रमुख विपक्षी ताकत के रूप में 2027 की दौड़ में प्रवेश कर रही है, वह पार्टी जिसकी विधानसभा में उपस्थिति कहीं अधिक है और जिसने 2024 में कांग्रेस की छह की तुलना में यूपी में 37 लोकसभा सीटें जीतीं। यही कारण है कि सपा के अंदरूनी सूत्र पहले से ही कांग्रेस की किसी भी आक्रामक मांग का विरोध करने के संकेत दे रहे हैं। यह बात पार्टी द्वारा किए गए आंतरिक मूल्यांकन के दौरान सामने आई, जिसने आधिकारिक तौर पर इस साल मई में राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC के साथ अपना अनुबंध समाप्त कर दिया, और जमीन पर नजर रखने के लिए एक निजी एजेंसी को काम पर रखा है। वास्तव में, यादव स्वयं राज्य के 403 निर्वाचन क्षेत्रों में जीतने योग्य चेहरों के चयन की प्रक्रिया की देखरेख कर रहे हैं। मनीकंट्रोल द्वारा उद्धृत एक आंतरिक आकलन में कहा गया है कि अगर गठबंधन जारी रहता है तो कांग्रेस 100 से अधिक विधानसभा सीटें मांग सकती है। हालांकि, एसपी को सलाह देने वाली सर्वे टीम ने सहयोगी दल की हिस्सेदारी करीब 70-75 सीटों तक सीमित रखने की सिफारिश की है. इस बीच, कांग्रेस ने लगभग 80 सीटों पर बातचीत के लिए आंतरिक रूप से तैयारी की है, 100-120 निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान की है जहां उसका मानना ​​​​है कि वह प्रतिस्पर्धा कर सकती है। इससे पता चलता है कि अंततः सौदेबाजी का क्षेत्र 70 से 80 सीटों के बीच हो सकता है, जिसमें एसपी यूपी के 403 निर्वाचन क्षेत्रों में से 320 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी। क्यों मुस्लिम बहुल सीटें बन सकती हैं सबसे बड़ा मुद्दा? सबसे कठिन बातचीत संख्या के बारे में नहीं बल्कि भूगोल के बारे में हो सकती है। दोनों पार्टियों का मानना ​​है कि कई मुस्लिम-प्रभावित निर्वाचन क्षेत्रों पर उनका दावा है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट है कि 2024 के लोकसभा प्रदर्शन के आधार पर कांग्रेस द्वारा सहारनपुर और अमरोहा जैसी सीटों पर जोर देने की उम्मीद है। हालाँकि, सपा इनमें से कई क्षेत्रों को अपने सामाजिक गठबंधन के केंद्र के रूप में देखती है। यह एक परिचित गठबंधन समस्या पैदा करता है जहां कांग्रेस विकास चाहती है, सपा अपने मूल आधार की रक्षा करना चाहती है और न ही राजनीतिक रूप से प्रतीकात्मक निर्वाचन क्षेत्रों को छोड़ना चाहती है। दोनों पक्ष इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं यह निर्धारित कर सकता है कि बातचीत सुचारू रहेगी या विवादास्पद हो जाएगी। अखिलेश की ‘बड़े दिल वाली’ टिप्पणी इंडिया ब्लॉक की बैठक में अखिलेश के हस्तक्षेप को उत्तर प्रदेश के प्रति उनके दृष्टिकोण के पूर्वावलोकन के रूप में पढ़ा जा सकता है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उनका तर्क ये नहीं है कि कांग्रेस ख़त्म हो जानी चाहिए. वास्तव में, सपा अभी भी उस गठबंधन में मूल्य देखती है जिसने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में भाजपा की संख्या को नाटकीय रूप से कम करने में मदद की थी। इसके बजाय, वह यह तर्क देते नजर आते हैं कि कांग्रेस को उन राज्यों में राजनीतिक वास्तविकताओं को पहचानना चाहिए जहां क्षेत्रीय दल मजबूत हैं। व्यावहारिक रूप से, इसका अर्थ है शीघ्र सीट-बंटवारा, कम सार्वजनिक विवाद, क्षेत्रीय सहयोगियों के प्रति अधिक सम्मान और आकांक्षा के बजाय जीतने की क्षमता के आधार पर आवंटन। अंतिम फॉर्मूला कैसा दिख सकता है? यदि वर्तमान संकेत सही हैं, तो एक संभावित रूपरेखा ऐसी हो सकती है जहां एसपी के पास लगभग 320-330 सीटें हों, जबकि कांग्रेस के पास 70-80 सीटें हों, शेष सीटों के लिए भारत के छोटे सहयोगी हों। सटीक संख्या बातचीत पर निर्भर करेगी, लेकिन एसपी की प्राथमिकता स्पष्ट होती जा रही है: सफल 2024 गठबंधन मॉडल को दोहराना

वैभव सूर्यवंशी श्रीलंका के खिलाफ उतरेंगे रिकॉर्ड बनाने:आज इंडिया-A ट्राई सीरीज का पहला मुकाबला, IPL में अब तक 2 सेंचुरी लगा चुके

वैभव सूर्यवंशी श्रीलंका के खिलाफ उतरेंगे रिकॉर्ड बनाने:आज इंडिया-A ट्राई सीरीज का पहला मुकाबला, IPL में अब तक 2 सेंचुरी लगा चुके

IPL के बाद आज वैभव सूर्यवंशी पहली बार मैदान में उतरने वाले हैं। इंडिया-A ट्राई सीरीज का पहला मुकाबला आज खेला जाएगा। श्रीलंका के खिलाफ रिकॉर्ड बनाने के लिए वैभव उतरेंगे। ये मैच श्रीलंका के रंगिरी दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में सुबह 10 बजे से है। इस वन-डे ट्राई सीरीज की तीसरी टीम अफगानिस्तान-A है। इससे पहले वे एशिया कप राइजिंग स्टार्स और अंडर-वर्ल्डकप में इंडिया की ओर से खेल चुके हैं। इसी साल जनवरी में हुए अंडर-19 वर्ल्डकप फाइनल में उन्होंने 175 रन की पारी खेली थी। वे प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने थे। वैभव ने IPL 2026 में सबसे ज्यादा 776 रन बनाए और ऑरेंज कैप जीता। वैभव ने मोस्ट वैल्युएबल प्लेयर, इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द ईयर, सुपर स्ट्राइकर और सबसे ज्यादा छक्के लगाने का अवॉर्ड भी जीता। इस सीजन उन्होंने 36 गेंद पर शतक लगाया था, जबकि तीन बार 90 से 100 के बीच में आउट हुए थे। 12 साल में रणजी डेब्यू से इंडिया-A तक का सफर वैभव ने जनवरी 2024 में बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया। तब उनकी उम्र 12 साल थी। 2024 में मुंबई और छत्तीसगढ़ के खिलाफ उन्होंने दो फर्स्ट क्लास मैचों में 31 रन बनाए थे। वैभव ने सचिन तेंदुलकर (15 साल) और युवराज सिंह (18 साल) को पीछे छोड़ा और घरेलू फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बने। वैभव ने 13 साल की उम्र में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अंडर-19 यूथ टेस्ट सीरीज में सिर्फ 58 गेंदों पर शतक जड़ दिया। यह अंडर-19 टेस्ट क्रिकेट में दूसरा सबसे तेज शतक था। उन्होंने 62 गेंदों में 104 रन की पारी खेली, जिसमें 14 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। वैभव ने लिस्ट-A (50 ओवर) में अब तक 8 मैच खेले हैं। इस दौरान उन्होंने 44.12 की औसत और 164.95 के स्ट्राइक रेट से 353 रन बनाए। उनका बेस्ट स्कोर 190 रन रहा है। सूर्यवंशी ने इस फॉर्मेट में 1 शतक और 1 अर्धशतक लगाया है। उन्होंने 37 चौके और 23 छक्के भी जड़े हैं। वैभव का सिलेक्शन इंडियन टीम में हुआ IPL 2025 में वैभव ने सिर्फ 7 मैचों में 252 रन बनाए, जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल था। इन सभी परफॉरमेंस के आधार पर BCCI ने उन्हें इंडिया-A में जगह दी। वैभव का सिलेक्शन इंडियन टीम में हो गया है। वह इंडियन क्रिकेट टीम में चुने गए अब तक के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने सचिन तेंदुलकर का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पुरुष क्रिकेटर्स में सचिन तेंदुलकर 16 साल, 194 दिन की उम्र में भारतीय टीम में चुने गए थे। वहीं, वैभव 15 साल 71 दिन में चुने गए हैं। एशिया कप में 243 से ज्यादा का स्ट्राइक रेट वैभव ने एशिया कप राइजिंग स्टार्स 2025 टी-20 में 4 मैचों में 59.75 की औसत और 243.87 के स्ट्राइक रेट से 239 रन बनाए थे। इस दौरान उनका बेस्ट स्कोर 144 रन रहा। सूर्यवंशी ने इस सीरीज में एक शतक भी लगाया था। उन्होंने 20 चौके और 22 छक्के लगाए।

वैभव सूर्यवंशी श्रीलंका के खिलाफ उतरेंगे रिकॉर्ड बनाने:आज इंडिया-A ट्राई सीरीज का पहला मुकाबला, IPL में अब तक 2 सेंचुरी लगा चुके

वैभव सूर्यवंशी श्रीलंका के खिलाफ उतरेंगे रिकॉर्ड बनाने:आज इंडिया-A ट्राई सीरीज का पहला मुकाबला, IPL में अब तक 2 सेंचुरी लगा चुके

IPL के बाद आज वैभव सूर्यवंशी पहली बार मैदान में उतरने वाले हैं। इंडिया-A ट्राई सीरीज का पहला मुकाबला आज खेला जाएगा। श्रीलंका के खिलाफ रिकॉर्ड बनाने के लिए वैभव उतरेंगे। ये मैच श्रीलंका के रंगिरी दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में सुबह 10 बजे से है। इस वन-डे ट्राई सीरीज की तीसरी टीम अफगानिस्तान-A है। इससे पहले वे एशिया कप राइजिंग स्टार्स और अंडर-वर्ल्डकप में इंडिया की ओर से खेल चुके हैं। इसी साल जनवरी में हुए अंडर-19 वर्ल्डकप फाइनल में उन्होंने 175 रन की पारी खेली थी। वे प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने थे। वैभव ने IPL 2026 में सबसे ज्यादा 776 रन बनाए और ऑरेंज कैप जीता। वैभव ने मोस्ट वैल्युएबल प्लेयर, इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द ईयर, सुपर स्ट्राइकर और सबसे ज्यादा छक्के लगाने का अवॉर्ड भी जीता। इस सीजन उन्होंने 36 गेंद पर शतक लगाया था, जबकि तीन बार 90 से 100 के बीच में आउट हुए थे। 12 साल में रणजी डेब्यू से इंडिया-A तक का सफर वैभव ने जनवरी 2024 में बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया। तब उनकी उम्र 12 साल थी। 2024 में मुंबई और छत्तीसगढ़ के खिलाफ उन्होंने दो फर्स्ट क्लास मैचों में 31 रन बनाए थे। वैभव ने सचिन तेंदुलकर (15 साल) और युवराज सिंह (18 साल) को पीछे छोड़ा और घरेलू फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बने। वैभव ने 13 साल की उम्र में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अंडर-19 यूथ टेस्ट सीरीज में सिर्फ 58 गेंदों पर शतक जड़ दिया। यह अंडर-19 टेस्ट क्रिकेट में दूसरा सबसे तेज शतक था। उन्होंने 62 गेंदों में 104 रन की पारी खेली, जिसमें 14 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। वैभव ने लिस्ट-A (50 ओवर) में अब तक 8 मैच खेले हैं। इस दौरान उन्होंने 44.12 की औसत और 164.95 के स्ट्राइक रेट से 353 रन बनाए। उनका बेस्ट स्कोर 190 रन रहा है। सूर्यवंशी ने इस फॉर्मेट में 1 शतक और 1 अर्धशतक लगाया है। उन्होंने 37 चौके और 23 छक्के भी जड़े हैं। वैभव का सिलेक्शन इंडियन टीम में हुआ IPL 2025 में वैभव ने सिर्फ 7 मैचों में 252 रन बनाए, जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल था। इन सभी परफॉरमेंस के आधार पर BCCI ने उन्हें इंडिया-A में जगह दी। वैभव का सिलेक्शन इंडियन टीम में हो गया है। वह इंडियन क्रिकेट टीम में चुने गए अब तक के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने सचिन तेंदुलकर का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पुरुष क्रिकेटर्स में सचिन तेंदुलकर 16 साल, 194 दिन की उम्र में भारतीय टीम में चुने गए थे। वहीं, वैभव 15 साल 71 दिन में चुने गए हैं। एशिया कप में 243 से ज्यादा का स्ट्राइक रेट वैभव ने एशिया कप राइजिंग स्टार्स 2025 टी-20 में 4 मैचों में 59.75 की औसत और 243.87 के स्ट्राइक रेट से 239 रन बनाए थे। इस दौरान उनका बेस्ट स्कोर 144 रन रहा। सूर्यवंशी ने इस सीरीज में एक शतक भी लगाया था। उन्होंने 20 चौके और 22 छक्के लगाए।

मई में रिकॉर्ड 25.31 लाख गाड़ियां बिकीं:इनमें पहली बार EV की हिस्सेदारी 11% के पार, मिडल ईस्ट संकट से महंगे हुए ईंधन का असर

मई में रिकॉर्ड 25.31 लाख गाड़ियां बिकीं:इनमें पहली बार EV की हिस्सेदारी 11% के पार, मिडल ईस्ट संकट से महंगे हुए ईंधन का असर

मई महीने में देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने बिक्री का एक नया रिकॉर्ड बनाया है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के मुताबिक, मई 2026 में देश की कुल ऑटो रिटेल सेल्स 9.55% बढ़कर 25,31,067 यूनिट पर पहुंच गई। पिछले साल मई में यह आंकड़ा 23,10,451 यूनिट था। इस रिकॉर्ड बिक्री के बीच सबसे बड़ी बात यह रही कि देश में पहली बार कुल बिकने वाले वाहनों में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की हिस्सेदारी 11% के पार निकल गई है। मिडल ईस्ट संकट के कारण पिछले दिनों देश में ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई थी, उसकी वजह से ग्राहकों का रुझान ग्रीन और फ्यूल-एफिशिएंट वाहनों की तरफ बढ़ा है। मई में पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री 23.25% बढ़ी FADA के आंकड़ों के अनुसार, मई के महीने में पैसेंजर व्हीकल्स (कार) की रिटेल बिक्री 23.25% की भारी बढ़त के साथ रिकॉर्ड 4,02,591 यूनिट रही। पिछले साल मई 2025 में यह आंकड़ा 3,26,656 यूनिट था। इसके अलावा टू-व्हीलर्स (दोपहिया वाहनों) की बिक्री भी 7.54% बढ़कर 18,44,947 यूनिट रही। दोपहिया वाहन की बिक्री 7% बढ़ी दोपहिया वाहनों में EV का शेयर 9% के करीब पहुंचा मई में ईंधन की कीमतों में हुए बदलाव का असर ग्राहकों की पूछताछ पर साफ देखा गया। डीलर्स का कहना है कि लोग अब ज्यादा माइलेज देने वाले और वैकल्पिक ईंधन (जैसे EV और हाइब्रिड) वाले वाहनों के बारे में ज्यादा पूछ रहे हैं। यही वजह है कि दोपहिया वाहनों के बाजार में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) का शेयर एक साल पहले के 6.11% से बढ़कर अब 9.25% पर पहुंच गया है। कमर्शियल और थ्री-व्हीलर सेगमेंट का प्रदर्शन थ्री-व्हीलर्स की बिक्री पिछले महीने 3.56% बढ़कर 1,11,526 यूनिट रही, जो पिछले साल मई में 1,07,688 यूनिट थी। वहीं, कमर्शियल व्हीकल्स (CV) यानी भारी वाहनों के सेगमेंट में भी 5.29% की ग्रोथ देखी गई और यह रिकॉर्ड 83,823 यूनिट पर पहुंच गया। हालांकि, पिछले साल के ऊंचे बेस के कारण कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (पहियों वाले निर्माण उपकरण) की बिक्री में 17.51% की गिरावट आई है।

मई में रिकॉर्ड 25.31 लाख गाड़ियां बिकीं:इनमें पहली बार EV की हिस्सेदारी 11% के पार, मिडल ईस्ट संकट से महंगे हुए ईंधन का असर

मई में रिकॉर्ड 25.31 लाख गाड़ियां बिकीं:इनमें पहली बार EV की हिस्सेदारी 11% के पार, मिडल ईस्ट संकट से महंगे हुए ईंधन का असर

मई महीने में देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने बिक्री का एक नया रिकॉर्ड बनाया है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के मुताबिक, मई 2026 में देश की कुल ऑटो रिटेल सेल्स 9.55% बढ़कर 25,31,067 यूनिट पर पहुंच गई। पिछले साल मई में यह आंकड़ा 23,10,451 यूनिट था। इस रिकॉर्ड बिक्री के बीच सबसे बड़ी बात यह रही कि देश में पहली बार कुल बिकने वाले वाहनों में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की हिस्सेदारी 11% के पार निकल गई है। मिडल ईस्ट संकट के कारण पिछले दिनों देश में ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई थी, उसकी वजह से ग्राहकों का रुझान ग्रीन और फ्यूल-एफिशिएंट वाहनों की तरफ बढ़ा है। मई में पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री 23.25% बढ़ी FADA के आंकड़ों के अनुसार, मई के महीने में पैसेंजर व्हीकल्स (कार) की रिटेल बिक्री 23.25% की भारी बढ़त के साथ रिकॉर्ड 4,02,591 यूनिट रही। पिछले साल मई 2025 में यह आंकड़ा 3,26,656 यूनिट था। इसके अलावा टू-व्हीलर्स (दोपहिया वाहनों) की बिक्री भी 7.54% बढ़कर 18,44,947 यूनिट रही। दोपहिया वाहन की बिक्री 7% बढ़ी दोपहिया वाहनों में EV का शेयर 9% के करीब पहुंचा मई में ईंधन की कीमतों में हुए बदलाव का असर ग्राहकों की पूछताछ पर साफ देखा गया। डीलर्स का कहना है कि लोग अब ज्यादा माइलेज देने वाले और वैकल्पिक ईंधन (जैसे EV और हाइब्रिड) वाले वाहनों के बारे में ज्यादा पूछ रहे हैं। यही वजह है कि दोपहिया वाहनों के बाजार में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) का शेयर एक साल पहले के 6.11% से बढ़कर अब 9.25% पर पहुंच गया है। कमर्शियल और थ्री-व्हीलर सेगमेंट का प्रदर्शन थ्री-व्हीलर्स की बिक्री पिछले महीने 3.56% बढ़कर 1,11,526 यूनिट रही, जो पिछले साल मई में 1,07,688 यूनिट थी। वहीं, कमर्शियल व्हीकल्स (CV) यानी भारी वाहनों के सेगमेंट में भी 5.29% की ग्रोथ देखी गई और यह रिकॉर्ड 83,823 यूनिट पर पहुंच गया। हालांकि, पिछले साल के ऊंचे बेस के कारण कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (पहियों वाले निर्माण उपकरण) की बिक्री में 17.51% की गिरावट आई है।