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चिन्मय सुतार की नजरें IPL पर:मुंबई लीग में ऑरेंज कैप जीती थी; बीमारी की वजह से 11 महीने मैदान से दूर रहे थे

चिन्मय सुथार की नजरें IPL पर:मुंबई लीग में ऑरेंज कैप जीती थी; बीमारी की वजह से 11 महीने मैदान से दूर रहे थे

मराठा रॉयल्स के स्टार बल्लेबाज और पिछले साल मुंबई क्रिकेट लीग में ऑरेंज कैप अपने नाम करने वाले चिन्मय सुतार ने आगामी सीजन को लेकर अपनी रणनीतियों का खुलासा किया है। सुथार ने कहा कि इस साल मुंबई क्रिकेट लीग में वह अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर IPL फ्रेंचाइजी टीमों को प्रभावित करने का पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों, करियर के उतार-चढ़ाव और अपनी सफलता में पिता के योगदान को लेकर खुलकर बात की। 5 साल की उम्र से बल्ला थामने वाले चिन्मय ने बताया कि वे खुद को मुख्य रूप से एक प्योर बल्लेबाज मानते हैं, जो जरूरत पड़ने पर स्पिन गेंदबाजी भी कर सकता है। पिता राजेश ने सचिन तेंदुलकर के साथ की थी ओपनिंग, वहीं से मिली प्रेरणा चिन्मय सुतार ने अपने पारिवारिक बैकग्राउंड और क्रिकेट की तरफ झुकाव को लेकर बताया कि उनके घर में हमेशा से ही खेल का माहौल रहा है। उनके पिता राजेश खुद एक बेहतरीन क्रिकेटर रह चुके हैं और उन्होंने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के साथ ओपनिंग भी की थी। अपने पिता के प्रभाव पर बात करते हुए चिन्मय ने कहा, “मैं बचपन से ही अपने पापा को क्रिकेट खेलते हुए देखता आया हूं। उन्हें देखकर मुझे हमेशा लगता था कि मुझे भी क्रिकेट खेलना चाहिए। इसी तरह क्रिकेट के लिए मेरा प्यार डेवलप हुआ। जब पापा मैदान पर खेलते थे, तो मुझे बहुत अच्छा लगता था और देखने में बहुत मजा आता था। मेरी इसी दिलचस्पी को देखकर उन्होंने मेरा क्रिकेट करियर स्टार्ट करवाया। 5 साल की उम्र में शुरू किया खेल, अंडर-14 के दिनों में समझा प्रोफेशनल क्रिकेट जब चिन्मय से पूछा गया कि क्या उन्होंने बचपन में ही तय कर लिया था कि आगे चलकर प्रोफेशनल क्रिकेटर बनना है, तो उन्होंने कहा, ‘नहीं, बिल्कुल नहीं। शुरुआत में ऐसा कुछ भी तय नहीं किया था। मुझे बस खेलने में मजा आता था और मैं गेम को पूरी तरह एंजॉय करता था। लेकिन जब मैंने पापा को खेलते देखा और आगे जाकर खुद एज ग्रुप के मैच खेलने लगा, तब समझ आया कि प्रोफेशनल क्रिकेट क्या होता है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘स्कूल गेम्स खेलने के बाद जब मैंने अंडर-14 जैसे एज़ ग्रुप और फिर ए-डिवीजन क्लब क्रिकेट खेलना शुरू किया, तब मुझे असल मायने में इस बात का आईडिया आया कि प्रोफेशनल क्रिकेट की राह कैसी होती है और कौन से मैच खेलकर हम जिंदगी में आगे बढ़ सकते हैं। 15 साल की उम्र में बीमारी का सामना, 11 महीने तक मैदान से रहे दूर करियर के शुरुआती दिनों में ही इस युवा खिलाड़ी को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। 15 साल की उम्र में वे गंभीर रूप से बीमार हो गए, जिससे उनके खेल पर ब्रेक लग गया। उस मुश्किल दौर को याद करते हुए चिन्मय ने कहा, ‘वह समय मेरे लिए मानसिक रूप से बहुत सेंसिटिव (भावुक) था। उस बीमारी के दौरान मैं लगभग 10 से 11 महीने तक क्रिकेट नहीं खेल पाया था। एक खिलाड़ी के लिए इतने लंबे समय तक मैदान से दूर रहना बेहद कठिन होता है, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा।’ ‘पापा ही मेरे कोच और लाइफ के सबसे बड़े सपोर्ट सिस्टम’ मुश्किल दौर से उबरने और हर परिस्थिति में साथ देने के लिए चिन्मय ने अपने पिता को अपना सबसे बड़ा मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा, “बिल्कुल, मेरे पापा ही मेरे कोच हैं और मैं बचपन से उन्हें फॉलो करते आया हूं। जब भी मैं क्रिकेट या लाइफ में डाउन फील करता था, तो वो हमेशा मेरी मदद करते थे और आज भी करते हैं। वो मेरी लाइफ के सबसे बड़े पार्ट हैं। जब मेरा समय अच्छा नहीं होता है, तो वो मुझे संभालते हैं। मैं बहुत लकी हूं कि मेरे पास ऐसे पापा हैं जो मुझे क्रिकेट की हर बारीकी समझाते हैं।” खुद को मानते हैं टॉप ऑर्डर बैटर, स्पिन बॉलिंग भी कर लेते हैं अपनी खेल शैली और टीम में अपनी भूमिका पर बात करते हुए मराठा रॉयल्स के इस खिलाड़ी ने साफ किया कि वे ऑलराउंडर से ज्यादा अपनी बल्लेबाजी पर भरोसा करते हैं। मुंबई क्रिकेट लीग में शानदार प्रदर्शन कर ऑरेंज कैप जीतने वाले चिन्मय ने अपनी पोजीशन को लेकर कहा,’मैं पूरी तरह से एक बैटर हूं और टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी करना पसंद करता हूं। हां, मैं टीम के लिए स्पिन गेंदबाजी भी डाल लेता हूं, लेकिन मेरी मुख्य पहचान बल्लेबाजी ही है। खुद को मानते हैं टॉप ऑर्डर बैटर, स्पिन बॉलिंग भी कर लेते हैं अपनी खेल शैली और टीम में अपनी भूमिका पर बात करते हुए मराठा रॉयल्स के इस खिलाड़ी ने साफ किया कि वे ऑलराउंडर से ज्यादा अपनी बल्लेबाजी पर भरोसा करते हैं। मुंबई क्रिकेट लीग में शानदार प्रदर्शन कर ऑरेंज कैप जीतने वाले चिन्मय ने अपनी पोजीशन को लेकर कहा, “मैं पूरी तरह से एक बैटर हूं और टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी करना पसंद करता हूं। हां, मैं टीम के लिए स्पिन गेंदबाजी भी डाल लेता हूं, लेकिन मेरी मुख्य पहचान बल्लेबाजी ही है। ——————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… विमेंस टी-20 वर्ल्डकप प्रैक्टिस मैच में भारतीय जीती:वेस्टइंडीज को 26 रन से हराया; भारती की नाबाद फिफ्टी, श्रेयांका को 4 विकेट भारतीय विमेंस टीम ने बल्लेबाजों और स्पिनरों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत पहले वार्म-अप मैच में वेस्टइंडीज को 26 रन से हरा दिया। सोमवार को कार्डिफ में खेले गए मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 8 विकेट पर 179 रन बनाए। जवाब में वेस्टइंडीज की 8 विकेट खोकर 153 रन ही बना सकी। पूरी खबर

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चिन्मय सुथार की नजरें IPL पर:मुंबई लीग में ऑरेंज कैप जीती थी; बीमारी की वजह से 11 महीने मैदान से दूर रहे थे

मराठा रॉयल्स के स्टार बल्लेबाज और पिछले साल मुंबई क्रिकेट लीग में ऑरेंज कैप अपने नाम करने वाले चिन्मय सुतार ने आगामी सीजन को लेकर अपनी रणनीतियों का खुलासा किया है। सुथार ने कहा कि इस साल मुंबई क्रिकेट लीग में वह अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर IPL फ्रेंचाइजी टीमों को प्रभावित करने का पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों, करियर के उतार-चढ़ाव और अपनी सफलता में पिता के योगदान को लेकर खुलकर बात की। 5 साल की उम्र से बल्ला थामने वाले चिन्मय ने बताया कि वे खुद को मुख्य रूप से एक प्योर बल्लेबाज मानते हैं, जो जरूरत पड़ने पर स्पिन गेंदबाजी भी कर सकता है। पिता राजेश ने सचिन तेंदुलकर के साथ की थी ओपनिंग, वहीं से मिली प्रेरणा चिन्मय सुतार ने अपने पारिवारिक बैकग्राउंड और क्रिकेट की तरफ झुकाव को लेकर बताया कि उनके घर में हमेशा से ही खेल का माहौल रहा है। उनके पिता राजेश खुद एक बेहतरीन क्रिकेटर रह चुके हैं और उन्होंने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के साथ ओपनिंग भी की थी। अपने पिता के प्रभाव पर बात करते हुए चिन्मय ने कहा, “मैं बचपन से ही अपने पापा को क्रिकेट खेलते हुए देखता आया हूं। उन्हें देखकर मुझे हमेशा लगता था कि मुझे भी क्रिकेट खेलना चाहिए। इसी तरह क्रिकेट के लिए मेरा प्यार डेवलप हुआ। जब पापा मैदान पर खेलते थे, तो मुझे बहुत अच्छा लगता था और देखने में बहुत मजा आता था। मेरी इसी दिलचस्पी को देखकर उन्होंने मेरा क्रिकेट करियर स्टार्ट करवाया। 5 साल की उम्र में शुरू किया खेल, अंडर-14 के दिनों में समझा प्रोफेशनल क्रिकेट जब चिन्मय से पूछा गया कि क्या उन्होंने बचपन में ही तय कर लिया था कि आगे चलकर प्रोफेशनल क्रिकेटर बनना है, तो उन्होंने कहा, ‘नहीं, बिल्कुल नहीं। शुरुआत में ऐसा कुछ भी तय नहीं किया था। मुझे बस खेलने में मजा आता था और मैं गेम को पूरी तरह एंजॉय करता था। लेकिन जब मैंने पापा को खेलते देखा और आगे जाकर खुद एज ग्रुप के मैच खेलने लगा, तब समझ आया कि प्रोफेशनल क्रिकेट क्या होता है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘स्कूल गेम्स खेलने के बाद जब मैंने अंडर-14 जैसे एज़ ग्रुप और फिर ए-डिवीजन क्लब क्रिकेट खेलना शुरू किया, तब मुझे असल मायने में इस बात का आईडिया आया कि प्रोफेशनल क्रिकेट की राह कैसी होती है और कौन से मैच खेलकर हम जिंदगी में आगे बढ़ सकते हैं। 15 साल की उम्र में बीमारी का सामना, 11 महीने तक मैदान से रहे दूर करियर के शुरुआती दिनों में ही इस युवा खिलाड़ी को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। 15 साल की उम्र में वे गंभीर रूप से बीमार हो गए, जिससे उनके खेल पर ब्रेक लग गया। उस मुश्किल दौर को याद करते हुए चिन्मय ने कहा, ‘वह समय मेरे लिए मानसिक रूप से बहुत सेंसिटिव (भावुक) था। उस बीमारी के दौरान मैं लगभग 10 से 11 महीने तक क्रिकेट नहीं खेल पाया था। एक खिलाड़ी के लिए इतने लंबे समय तक मैदान से दूर रहना बेहद कठिन होता है, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा।’ ‘पापा ही मेरे कोच और लाइफ के सबसे बड़े सपोर्ट सिस्टम’ मुश्किल दौर से उबरने और हर परिस्थिति में साथ देने के लिए चिन्मय ने अपने पिता को अपना सबसे बड़ा मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा, “बिल्कुल, मेरे पापा ही मेरे कोच हैं और मैं बचपन से उन्हें फॉलो करते आया हूं। जब भी मैं क्रिकेट या लाइफ में डाउन फील करता था, तो वो हमेशा मेरी मदद करते थे और आज भी करते हैं। वो मेरी लाइफ के सबसे बड़े पार्ट हैं। जब मेरा समय अच्छा नहीं होता है, तो वो मुझे संभालते हैं। मैं बहुत लकी हूं कि मेरे पास ऐसे पापा हैं जो मुझे क्रिकेट की हर बारीकी समझाते हैं।” खुद को मानते हैं टॉप ऑर्डर बैटर, स्पिन बॉलिंग भी कर लेते हैं अपनी खेल शैली और टीम में अपनी भूमिका पर बात करते हुए मराठा रॉयल्स के इस खिलाड़ी ने साफ किया कि वे ऑलराउंडर से ज्यादा अपनी बल्लेबाजी पर भरोसा करते हैं। मुंबई क्रिकेट लीग में शानदार प्रदर्शन कर ऑरेंज कैप जीतने वाले चिन्मय ने अपनी पोजीशन को लेकर कहा,’मैं पूरी तरह से एक बैटर हूं और टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी करना पसंद करता हूं। हां, मैं टीम के लिए स्पिन गेंदबाजी भी डाल लेता हूं, लेकिन मेरी मुख्य पहचान बल्लेबाजी ही है। खुद को मानते हैं टॉप ऑर्डर बैटर, स्पिन बॉलिंग भी कर लेते हैं अपनी खेल शैली और टीम में अपनी भूमिका पर बात करते हुए मराठा रॉयल्स के इस खिलाड़ी ने साफ किया कि वे ऑलराउंडर से ज्यादा अपनी बल्लेबाजी पर भरोसा करते हैं। मुंबई क्रिकेट लीग में शानदार प्रदर्शन कर ऑरेंज कैप जीतने वाले चिन्मय ने अपनी पोजीशन को लेकर कहा, “मैं पूरी तरह से एक बैटर हूं और टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी करना पसंद करता हूं। हां, मैं टीम के लिए स्पिन गेंदबाजी भी डाल लेता हूं, लेकिन मेरी मुख्य पहचान बल्लेबाजी ही है। ——————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… विमेंस टी-20 वर्ल्डकप प्रैक्टिस मैच में भारतीय जीती:वेस्टइंडीज को 26 रन से हराया; भारती की नाबाद फिफ्टी, श्रेयांका को 4 विकेट भारतीय विमेंस टीम ने बल्लेबाजों और स्पिनरों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत पहले वार्म-अप मैच में वेस्टइंडीज को 26 रन से हरा दिया। सोमवार को कार्डिफ में खेले गए मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 8 विकेट पर 179 रन बनाए। जवाब में वेस्टइंडीज की 8 विकेट खोकर 153 रन ही बना सकी। पूरी खबर

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