Tuesday, 22 Sep 2026 | 12:05 AM

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ट्रम्प का दावा- डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ समझौता हुआ:अमेरिका ग्रीनलैंड में ज्यादा सैनिक तैनात करेगा; डेनमार्क ने कहा- संप्रभुता हमारी रहेगी

ट्रम्प का दावा- डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ समझौता हुआ:अमेरिका ग्रीनलैंड में ज्यादा सैनिक तैनात करेगा; डेनमार्क ने कहा- संप्रभुता हमारी रहेगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एक समझौता किया है। इसके तहत ग्रीनलैंड में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी बढ़ेगी। ट्रम्प के ऐलान के कुछ देर बाद डेनमार्क के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि समझौता डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संप्रभुता को मान्यता देता है। ग्रीनलैंड के लोगों का अपना भविष्य तय करने का अधिकार भी बरकरार रहेगा। ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक स्वशासित क्षेत्र है। समझौते की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। समझौते पर अगले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारें हस्ताक्षर करेंगी। इसे लागू करने से पहले डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संसदों की मंजूरी जरूरी होगी। ग्रीनलैंड में अमेरिका विरोधी देशों के सैन्य अड्डे नहीं होंगें ट्रम्प ने कहा कि समझौते के तहत अमेरिका के विरोधी देश ग्रीनलैंड में सैन्य अड्डा नहीं बना सकेंगे। ट्रम्प के मुताबिक, ग्रीनलैंड में संवेदनशील क्षेत्रों में कोई बड़ा निवेश भी अमेरिका की लिखित मंजूरी के बिना नहीं किया जा सकेगा। अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने भी कहा कि नाटो से बाहर के देशों को ग्रीनलैंड में सैन्य अड्डा बनाने या सैन्य मौजूदगी रखने की अनुमति नहीं होगी। ग्रीनलैंड आजाद हुआ तो भी अमेरिकी सेना की पहुंच रहेगी अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी के मुताबिक, समझौता ग्रीनलैंड के भविष्य में स्वतंत्र देश बनने की स्थिति में भी लागू रहेगा। ग्रीनलैंड लंबे समय में आजादी की मांग कर रहा है और वहां कई लोग स्वतंत्र देश चाहते हैं। अभी ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन है और उसकी रक्षा की जिम्मेदारी डेनमार्क के पास है। ट्रम्प प्रशासन की एक बड़ी चिंता यह रही है कि अगर भविष्य में ग्रीनलैंड आजाद हो जाता है, तो भी अमेरिकी सेना को वहां मौजूदा सैन्य पहुंच मिलती रहे। अमेरिका नए सैन्य ठिकाने भी बना सकता है ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड में बड़ी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड में कई ऐसी जगहें हैं, जहां अमेरिकी सेना की मौजूदगी बढ़ाई जा सकती है। शीत युद्ध के दौरान अमेरिका के ग्रीनलैंड में एक दर्जन से ज्यादा सैन्य ठिकाने थे। बाद में इनमें से ज्यादातर बंद कर दिए गए। फिलहाल वहां अमेरिका का पिटुफिक स्पेस बेस मौजूद है। हाल के हफ्तों में अमेरिकी सैन्य अधिकारी ग्रीनलैंड का दौरा कर पुराने सैन्य ठिकानों को फिर से खोलने की संभावनाएं देख रहे हैं। 1951 से ग्रीनलैंड में अमेरिकी सेना की मौजूदगी अमेरिका ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पहली बार ग्रीनलैंड में सैन्य मौजूदगी बनाई थी। 1951 में अमेरिका और डेनमार्क के बीच एक रक्षा समझौता हुआ। इसके तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड में सैन्य ठिकाने चलाने और वहां अपनी सेना की गतिविधियां करने की काफी आजादी मिली। इस समझौते में नाटो देशों की सेनाओं को भी ग्रीनलैंड में पहुंच की अनुमति थी। लेकिन इसमें रूस या चीन जैसे देशों की सैन्य मौजूदगी पर साफ रोक नहीं थी। नए समझौते में गैर-नाटो देशों को सैन्य अड्डा बनाने और सेना रखने से रोकने की बात कही गई है। हालांकि, ग्रीनलैंड नाटो क्षेत्र का हिस्सा है, इसलिए किसी गैर-नाटो देश के वहां सैन्य अड्डा बनाने की संभावना पहले से ही काफी कम मानी जाती थी। जनवरी में अमेरिका-डेनमार्क के बीच तनाव बढ़ गया था ट्रम्प लंबे समय से ग्रीनलैंड को अमेरिका के साथ जोड़ने की इच्छा जाहिर करते रहे हैं। लेकिन डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने इस विचार को खारिज किया है। इस साल जनवरी में दोनों पक्षों के बीच तनाव इतना बढ़ गया था। डेनमार्क की सेना ने अमेरिकी हमले की स्थिति के लिए ग्रीनलैंड के एयरफील्ड को नष्ट करने तक की योजना बनाई थी। डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में सैनिक भी भेजे थे। हालांकि, ऐसी स्थिति कभी नहीं आई। ———————— यह खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- ट्रम्प को भरोसा, जिनपिंग से अपनी बात मनवा लेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 24 सितंबर को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

बांग्लादेश-तुर्किये मिलकर ड्रोन फैक्ट्री बनाएंगे, तकनीक भी ट्रांसफर होगी:बोगुरा में बनेगी यूनिट, यह भारत की सीमा सिर्फ 75 किमी दूर

बांग्लादेश-तुर्किये मिलकर ड्रोन फैक्ट्री बनाएंगे, तकनीक भी ट्रांसफर होगी:बोगुरा में बनेगी यूनिट, यह भारत की सीमा सिर्फ 75 किमी दूर

पाकिस्तान के बाद अब तुर्किये बांग्लादेश में भी अपनी डिफेंस इंडस्ट्री का दायरा बढ़ा रहा है। बांग्लादेश और तुर्किये अब मिलकर ड्रोन बनाने की तैयारी में हैं। दोनों देशों की साझेदारी से बोगुरा में ड्रोन फैक्ट्री बनाई जाएगी। इस ड्रोन फैक्ट्री की लागत 25 हजार करोड़ रुपए है। तुर्किये बांग्लादेश को ड्रोन बनाने की तकनीक भी देगा। बोगुरा भारत की सीमा से करीब 75 किमी दूर है। फैक्ट्री के पास एयरफोर्स का नया एयरबेस भी बनेगा बोगुरा बांग्लादेश के उत्तरी हिस्से में है। यहां जिस इलाके में फैक्ट्री की योजना है, उसके पास ही बांग्लादेश एयरफोर्स का नया एयरबेस विकसित किया जा रहा है। बोगुरा एयरपोर्ट को भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक अपग्रेड करने की योजना है। भारत के लिहाज से इसकी अहमियत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि बांग्लादेश की करीब 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा भारत से लगती है। भास्कर एक्सपर्ट अविनाश मोहनानी, आईबी के पूर्व संयुक्त निदेशक के मुताबिक, भारत की सबसे लंबी लगभग चार हजार किमी लंबी सीमा बांग्लादेश से लगती है। ये भारत के किसी भी पड़ोसी देश के साथ सबसे लंबी बॉर्डर है। साथ ही ये दुनिया में किन्हीं भी दो देशों के बीच की 5वीं सबसे लंबी भू-सीमा मानी जाती है। भारत के नजरिये से देखें तो बांग्लादेश के तुर्किये से डिफेंस गठजोड़ से पूर्वोत्तर के राज्यों में खतरा बढ़ेगा। बांग्लादेश का भारत से लगती सीमा पर ड्रोन की तैनाती का प्लान भी है। बांग्लादेश सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान वाले मक्का रक्षा करार में भी एंट्री चाहता है। पाक इसमें मध्यस्थ के रोल में है। तुर्किये ने ड्रोन तकनीक को कई देशों तक पहुंचाया तुर्किये की पहचान दुनिया में उसके सैन्य ड्रोन कार्यक्रम से बनी है। इनमें बायरक्तार TB2 प्रमुख है। तुर्किये ने ड्रोन तकनीक को कई देशों तक पहुंचाया है। बांग्लादेश के साथ भी ड्रोन सहयोग पिछले कुछ समय में दोनों देशों के रक्षा रिश्तों का अहम हिस्सा बना है। द डिप्लोमैट ने जून 2026 में रिपोर्ट किया था कि दोनों देशों के बीच सहयोग का केंद्र ड्रोन हैं और सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन पर भी चर्चा चल रही है। बांग्लादेश पहले से तुर्किये के बनाए सैन्य उपकरणों का इस्तेमाल करता है। इनमें ओटोकर के COBRA सीरीज के बख्तरबंद वाहन भी शामिल हैं। ओटोकर के मुताबिक COBRA II का इस्तेमाल दुनिया के 20 से ज्यादा देशों की सेनाएं करती हैं। तुर्किये की ड्रोन बनाने वाली कंपनी पाकिस्तान में भी है तुर्किये और पाकिस्तान के बीच भी ड्रोन और रक्षा तकनीक पर सहयोग लगातार बढ़ा है। तुर्किये की ड्रोन बनाने वाली कंपनी बायकर पाकिस्तान में पहले से मौजूद है। 2023 में बायकर की पाकिस्तानी सहायक कंपनी ने नेशनल एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी पार्क (NASTP) में रिसर्च एंड डेवलपमेंट गतिविधियों के लिए समझौता किया था। पाकिस्तान और तुर्किये ने एयरोस्पेस, ड्रोन और रक्षा उत्पादन में संयुक्त उपक्रम और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर भी बातचीत की है। बांग्लादेश में तुर्किये के 12 कल्चरल सेंटर बनें बांग्लादेश में 6 महीने के दौरान तुर्किये के 12 कल्चरल सेंटर बन गए हैं। कट्टरपंथी छात्र शिबिर और जमात-ए-इस्लामी के साथ चल रहे इन सेंटरों में भारत विरोधी एजेंडे पर जोर दिया जा रहा है। ढाका में यूनुस एम्रे इंस्टीट्यूट और एक समर्पित तुर्की कल्चरल सेंटर स्थापित करने की तैयारी चल रही है। तुर्किये की सरकार की ‘तुर्किये स्कॉलरशिप्स’ प्रोग्राम में इस साल बांग्लादेश के 3 हजार छात्रों को तुर्किये में उच्च शिक्षा के लिए भेजा जा चुका है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… सऊदी को F-35 फाइटर जेट देगा अमेरिका: ट्रम्प की ₹2.3 लाख करोड़ की डील को मंजूरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी अरब को 48 F-35 फाइटर जेट बेचने की मंजूरी दे दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

बांग्लादेश-तुर्किये मिलकर ड्रोन फैक्ट्री बनाएंगे, तकनीक भी ट्रांसफर होगी:बोगुरा में बनेगी यूनिट, यह भारत की सीमा सिर्फ 75 किमी दूर

बांग्लादेश-तुर्किये मिलकर ड्रोन फैक्ट्री बनाएंगे, तकनीक भी ट्रांसफर होगी:बोगुरा में बनेगी यूनिट, यह भारत की सीमा सिर्फ 75 किमी दूर

पाकिस्तान के बाद अब तुर्किये बांग्लादेश में भी अपनी डिफेंस इंडस्ट्री का दायरा बढ़ा रहा है। बांग्लादेश और तुर्किये अब मिलकर ड्रोन बनाने की तैयारी में हैं। दोनों देशों की साझेदारी से बोगुरा में ड्रोन फैक्ट्री बनाई जाएगी। इस ड्रोन फैक्ट्री की लागत 25 हजार करोड़ रुपए है। तुर्किये बांग्लादेश को ड्रोन बनाने की तकनीक भी देगा। बोगुरा भारत की सीमा से करीब 75 किमी दूर है। बोगुरा इतना अहम क्यों है? बोगुरा बांग्लादेश के उत्तरी हिस्से में है। यहां जिस इलाके में फैक्ट्री की योजना है, उसके पास ही बांग्लादेश एयरफोर्स का नया एयरबेस विकसित किया जा रहा है। बोगुरा एयरपोर्ट को भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक अपग्रेड करने की योजना है। भारत के लिहाज से इसकी अहमियत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि बांग्लादेश की करीब 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा भारत से लगती है। बोगुरा भारत-बांग्लादेश सीमा से करीब 75 किमी दूर बताया जा रहा है। भास्कर एक्सपर्ट अविनाश मोहनानी, आईबी के पूर्व संयुक्त निदेशक के मुताबिक, भारत की सबसे लंबी लगभग चार हजार किमी लंबी सीमा बांग्लादेश से लगती है। ये भारत के किसी भी पड़ोसी देश के साथ सबसे लंबी बॉर्डर है। साथ ही ये दुनिया में किन्हीं भी दो देशों के बीच की 5वीं सबसे लंबी भू-सीमा मानी जाती है। बोगुरा ड्रोन यूनिट भारत के बॉर्डर से मात्र 75 किमी की दूरी पर है। भारत के नजरिये से देखें तो बांग्लादेश के तुर्किये से डिफेंस गठजोड़ से पूर्वोत्तर के राज्यों में खतरा बढ़ेगा। बांग्लादेश का भारत से लगती सीमा पर ड्रोन की तैनाती का प्लान भी है। बांग्लादेश सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान वाले मक्का रक्षा करार में भी एंट्री चाहता है। पाक इसमें मध्यस्थ के रोल में है। तुर्किये ने ड्रोन तकनीक को कई देशों तक पहुंचाया तुर्किये की पहचान दुनिया में उसके सैन्य ड्रोन कार्यक्रम से बनी है। इनमें बायरक्तार TB2 प्रमुख है। तुर्किये ने ड्रोन तकनीक को कई देशों तक पहुंचाया है। बांग्लादेश के साथ भी ड्रोन सहयोग पिछले कुछ समय में दोनों देशों के रक्षा रिश्तों का अहम हिस्सा बना है। द डिप्लोमैट ने जून 2026 में रिपोर्ट किया था कि दोनों देशों के बीच सहयोग का केंद्र ड्रोन हैं और सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन पर भी चर्चा चल रही है। बांग्लादेश पहले से तुर्किये के बनाए सैन्य उपकरणों का इस्तेमाल करता है। इनमें ओटोकर के COBRA सीरीज के बख्तरबंद वाहन भी शामिल हैं। ओटोकर के मुताबिक COBRA II का इस्तेमाल दुनिया के 20 से ज्यादा देशों की सेनाएं करती हैं। तुर्किये की ड्रोन बनाने वाली कंपनी पाकिस्तान में भी है तुर्किये और पाकिस्तान के बीच भी ड्रोन और रक्षा तकनीक पर सहयोग लगातार बढ़ा है। तुर्किये की ड्रोन बनाने वाली कंपनी बायकर पाकिस्तान में पहले से मौजूद है। 2023 में बायकर की पाकिस्तानी सहायक कंपनी ने नेशनल एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी पार्क (NASTP) में रिसर्च एंड डेवलपमेंट गतिविधियों के लिए समझौता किया था। पाकिस्तान और तुर्किये ने एयरोस्पेस, ड्रोन और रक्षा उत्पादन में संयुक्त उपक्रम और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर भी बातचीत की है। बांग्लादेश में तुर्किये के 12 कल्चरल सेंटर बनें बांग्लादेश में 6 महीने के दौरान तुर्किये के 12 कल्चरल सेंटर बन गए हैं। कट्टरपंथी छात्र शिबिर और जमात-ए-इस्लामी के साथ चल रहे इन सेंटरों में भारत विरोधी एजेंडे पर जोर दिया जा रहा है। ढाका में यूनुस एसे इंस्टीट्यूट और एक समर्पित तुर्की कल्चरल सेंटर स्थापित करने की तैयारी चल रही है। तुर्किये की सरकार की ‘तुर्किये स्कॉलरशिप्स’ प्रोग्राम में इस साल बांग्लादेश के 3 हजार छात्रों को तुर्किये में उच्च शिक्षा के लिए भेजा जा चुका है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… सऊदी को F-35 फाइटर जेट देगा अमेरिका: ट्रम्प की ₹2.3 लाख करोड़ की डील को मंजूरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी अरब को 48 F-35 फाइटर जेट बेचने की मंजूरी दे दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

सऊदी का यूरोप को अगले महीने तेल देने से इनकार:इराक से ड्रोन हमले के बाद पाइपलाइन बंद, मरम्मत में 5-6 हफ्ते लगेंगे

सऊदी का यूरोप को अगले महीने तेल देने से इनकार:इराक से ड्रोन हमले के बाद पाइपलाइन बंद, मरम्मत में 5-6 हफ्ते लगेंगे

सऊदी अरब ने अपनी एक अहम तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले के बाद अगले महीने यूरोपीय ग्राहकों को कच्चे तेल की सप्लाई रोक दी है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, सऊदी अरामको ने कम से कम दो यूरोपीय रिफाइनिंग कंपनियों को इसकी जानकारी दी है। यह फैसला सभी यूरोपीय खरीदारों पर लागू होगा। पिछले हफ्ते हुए हमले में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के तीन पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए हैं। सऊदी अरब ने इसके लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया के ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया है। पहले समझें- कौन सी पाइपलाइन है? सऊदी अरामको की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन करीब 1,200 किलोमीटर लंबी है। यह सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से में मौजूद तेल को लाल सागर तक पहुंचाती है, जहां से इसे दूसरे देशों तक भेजा जा सकता है। हमले के बाद पाइपलाइन को बंद कर दिया गया। 17 सितंबर को सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों और उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, इसके रास्ते में मौजूद तीन पंपिंग स्टेशन को नुकसान पहुंचा है। यूरोप को अगले महीने नहीं मिलेगा सऊदी तेल अरामको ने कम से कम दो यूरोपीय रिफाइनिंग कंपनियों को बताया है कि अगले महीने उन्हें सऊदी अरब से कच्चे तेल की सप्लाई नहीं मिलेगी। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, यह फैसला सिर्फ इन कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी यूरोपीय खरीदारों पर लागू होगा। पाइपलाइन बंद होने के बाद यूरोप की कुछ कंपनियों ने सऊदी तेल की जगह दूसरे देशों से कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया है। पोलैंड की तेल कंपनी ऑर्लेन ने 10 से ज्यादा टेंडर जारी किए हैं, ताकि वैकल्पिक सप्लाई हासिल की जा सके। यूरोप सऊदी से कितना तेल लेता है? अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, OECD में शामिल यूरोपीय देशों ने जून में सऊदी अरब से रोजाना करीब 5.77 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। इसलिए अगले महीने सऊदी सप्लाई रुकने से यूरोपीय रिफाइनरियों को दूसरे स्रोतों से तेल खरीदना पड़ेगा। होर्मुज की रुकावट के बीच पाइपलाइन और अहम ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन ऐसे समय बंद हुई है जब पिछले छह महीने से होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के कारण मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। सऊदी अरब इस पाइपलाइन के जरिए तेल को लाल सागर तक भेजकर होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी निर्भरता कम कर सकता था। इसके जरिए रोजाना करीब 40 लाख से 50 लाख बैरल कच्चा तेल भेजा जा रहा था। यह मात्रा दुनिया की कुल तेल सप्लाई का करीब 4 से 5% है। इसी वजह से यह पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए बेहद अहम रास्ता बनी हुई थी। अब पाइपलाइन बंद होने से अरामको के ग्राहकों में वैकल्पिक तेल की तलाश तेज हो गई है। यूरोपीय खरीदारों को भी सऊदी सप्लाई की जगह दूसरे देशों से कच्चा तेल जुटाना पड़ेगा।

पुतिन की जीत तय, फिर भी रूस में चुनाव:यूक्रेन के कब्जे वाले इलाकों में भी वोटिंग; युद्ध का विरोध करने वाली पार्टी बाहर

पुतिन की जीत तय, फिर भी रूस में चुनाव:यूक्रेन के कब्जे वाले इलाकों में भी वोटिंग; युद्ध का विरोध करने वाली पार्टी बाहर

रूस में शुक्रवार यानी 18 सितंबर से तीन दिन का संसदीय चुनाव शुरू हो गया। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी यूनाइटेड रशिया का संसद में दबदबा बरकरार रहने की उम्मीद है। वहीं, यूक्रेन युद्ध का खुलकर विरोध करने वाली याब्लोको पार्टी को चुनाव से बाहर कर दिया गया है। यह 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण सैन्य हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव है। रूस के कब्जे वाले यूक्रेन के इलाकों में भी वोटिंग हो रही है। यूक्रेन और यूरोपीय संघ ने वहां हो रहे मतदान को अवैध बताया है। जब पुतिन की पार्टी का दबदबा है तो चुनाव क्यों अहम? क्रेमलिन के लिए यह चुनाव सिर्फ संसद के सदस्य चुनने तक सीमित नहीं है। पुतिन चाहते हैं कि बड़ी संख्या में लोग वोट डालें, ताकि यह संदेश जाए कि यूक्रेन युद्ध के बीच भी जनता सरकार और रूसी सैनिकों के साथ खड़ी है। पुतिन ने शुक्रवार को ऑनलाइन वोट डाला। चुनाव से पहले उन्होंने कहा कि लोगों का फैसला दिखाएगा कि लाखों लोग रूस के सैनिकों के साथ खड़े हैं और देश एकजुट है। 450 सीटों के लिए हो रही वोटिंग रूस के स्टेट ड्यूमा में 225 सीटों पर लोग राजनीतिक पार्टियों को वोट देंगे। बाकी 225 सीटों पर अलग-अलग इलाकों से खड़े उम्मीदवारों में से किसी एक को चुनेंगे। यूनाइटेड रशिया के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी, एलडीपीआर, ए जस्ट रशिया और न्यू पीपल जैसी पार्टियां भी चुनाव लड़ रही हैं। हालांकि, इन्हें रूस में सरकार के खिलाफ मजबूत विपक्ष नहीं माना जाता। बड़े मुद्दों पर ये पार्टियां अक्सर सरकार का साथ देती हैं। युद्ध विरोधी याब्लोको पार्टी चुनाव से बाहर याब्लोको रूस की एकमात्र पंजीकृत पार्टी थी, जो खुले तौर पर यूक्रेन युद्ध का विरोध करती रही है। रूस की सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने उसे पार्टी के नाम पर होने वाले चुनाव से बाहर कर दिया। हालांकि, उसके कुछ उम्मीदवार अलग-अलग सीटों पर व्यक्तिगत उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। कुछ दूसरे युद्ध विरोधी नेताओं को जेल भेजा गया है या उन्हें रूस छोड़ना पड़ा है। इससे चुनाव में यूक्रेन युद्ध का खुलकर विरोध करने वाली राजनीतिक आवाजें काफी कम हो गई हैं। रूस के मतदाताओं की पसंद अलग-अलग मॉस्को में वोट डालने पहुंचे लोगों की राय एक जैसी नहीं है। दिमित्री किरिलिन ने कहा कि वह बदलाव चाहते हैं और किसी दूसरी पार्टी को सत्ता में देखना चाहते हैं। वहीं अलेक्जेंडर वर्तुखिन का कहना था कि पुतिन की पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी जो काम कर रही हैं, वह पर्याप्त है। एक मतदान केंद्र पर गैलिना वाविलोवा ने कहा कि इस समय सबसे जरूरी चीज यूक्रेन युद्ध खत्म होना है। उनका कहना था कि हर कोई शांति चाहता है। पेंशनर ल्यूडमिला कलिनिना चाहती हैं कि लोगों की जिंदगी बेहतर हो और अमीर-गरीब के बीच का अंतर कम हो। 72 साल के प्रोफेसर व्लादिमीर चुबारेव ने कहा कि उन्हें सरकार की योजनाओं के सफल होने की उम्मीद है। उन्होंने रूस की जीत की भी बात कही। युद्ध का असर रूस के अंदर भी दिख रहा चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब यूक्रेन के ड्रोन हमलों का असर रूस के अंदर भी दिखाई दे रहा है। गर्मियों में यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरियों पर लंबी दूरी के ड्रोन से हमले किए। इसके बाद रूस के कई हिस्सों में ईंधन की कमी की समस्या सामने आई। ऑनलाइन सामान बेचने वाली कंपनियों वाइल्डबेरीज और ओजोन के गोदामों पर भी हमले हुए। इस तरह युद्ध का असर अब सिर्फ लड़ाई वाले इलाकों तक सीमित नहीं है। रूस के दूसरे हिस्सों में रहने वाले लोग भी इसका असर महसूस कर रहे हैं। कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों में भी वोटिंग इस चुनाव में रूस पहली बार यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिजिया इलाकों के लोगों को भी शामिल कर रहा है। रूस ने 2022 में इन चारों इलाकों को अपना हिस्सा बताकर अपने देश में शामिल करने का दावा किया था। लेकिन यूक्रेन और ज्यादातर दूसरे देश इसे नहीं मानते। रूस का इन चारों इलाकों पर पूरा नियंत्रण भी नहीं है। क्रीमिया में भी मतदान हो रहा है, जिस पर रूस ने 2014 में कब्जा किया था। डोनेट्स्क के रूस के कब्जे वाले हिस्से में वोट डालते लोगों के पास एक हथियारबंद रूसी सैनिक भी खड़ा दिखाई दिया। यूक्रेन और EU बोले- चुनाव नहीं मानेंगे यूक्रेन ने कब्जे वाले इलाकों में हो रहे मतदान को अवैध बताया है। उसने दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से इन चुनावों और इनके नतीजों को मान्यता नहीं देने की अपील की है। यूरोपीय संघ ने भी कहा है कि वह इन इलाकों में हुए चुनाव और उनके नतीजों को मान्यता नहीं देगा। यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता क्रिश्चियन विगांड ने कहा कि रूस के लोगों को देश के भविष्य को लेकर अलग-अलग राजनीतिक विकल्प नहीं मिल रहे हैं। चुनाव पर्यवेक्षकों को नहीं बुलाया रूस ने इस बार यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन यानी ओएससीई के चुनाव पर्यवेक्षकों को आमंत्रित नहीं किया है। यूरोपीय संघ के मुताबिक, इससे चुनाव की निगरानी को लेकर सवाल उठते हैं। EU ने कहा है कि वह रूस के मानवाधिकार समूहों, स्वतंत्र मीडिया और नागरिक संगठनों का समर्थन जारी रखेगा।

जगद्गुरु सतीशाचार्य महाराज से आमिर खान मिले:दोनों ने बातचीत भी की, मुलाकात के बाद महाभारत प्रोजेक्ट चर्चा में आया

जगद्गुरु सतीशाचार्य महाराज से आमिर खान मिले:दोनों ने बातचीत भी की, मुलाकात के बाद महाभारत प्रोजेक्ट चर्चा में आया

बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान हाल ही में जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी सतीशाचार्य महाराज से मिले। मुलाकात के दौरान दोनों के बीच काफी देर बातचीत हुई। आमिर ने आध्यात्मिक गुरु के प्रति अपना आभार भी व्यक्त किया। जगद्गुरु महाराज की सोशल मीडिया टीम ने आमिर के साथ मुलाकात का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘जब आध्यात्म और सिनेमा जगत की दो प्रमुख हस्तियां एक साथ आईं।’ टीम के अनुसार, आमिर ने जगद्गुरु महाराज का आशीर्वाद लिया और उनसे बातचीत की। वीडियो में आमिर हल्के नीले और सफेद रंग का कुर्ता और काला पजामा पहने नजर आए। वह जगद्गुरु महाराज के पास जाते, उनसे हाथ मिलाते और गर्मजोशी से गले मिलते दिखे। आध्यात्मिक गुरु की बातें सुनते हुए आमिर काफी प्रभावित नजर आए। देखें मुलाकात की तस्वीरें- मुलाकात के बाद पैपराजी में भी यह उत्सुकता दिखी कि क्या दोनों मिलकर कुछ करने की योजना बना रहे हैं। एक पैपराजी ने जगद्गुरु महाराज से पूछा, ‘क्या होने वाला है? कोई कार्यक्रम है?’ इस पर जगद्गुरु महाराज ने कहा कि उन्हें वहां जाना होगा जहां ‘धर्म’ उन्हें बुलाएगा, क्योंकि अभी गणेश महोत्सव का जश्न चल रहा है। यह पहली बार नहीं है जब आमिर खान जगद्गुरु सतीशाचार्य महाराज से मिले हैं। इससे पहले भी आमिर ने उनका आशीर्वाद लिया था और धर्म, उपनिषद और आध्यात्मिकता जैसे विषयों पर उनसे विस्तार से बातचीत की थी। मुलाकात के बाद आमिर का ‘महाभारत’ प्रोजेक्ट फिर चर्चा में आमिर खान कई बार फिल्म ‘महाभारत’ को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बता चुके हैं। ऐसे में जगद्गुरु सतीशाचार्य महाराज से उनकी मुलाकात के बाद ‘महाभारत’ को लेकर चर्चा फिर शुरू हो गई है। गौरतलब है कि महाभारत पर आमिर पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से काम करने की इच्छा जता रहे हैं। आमिर खान इस महाकाव्य को किसी एक फिल्म में नहीं, बल्कि हॉलीवुड की मशहूर फिल्म सीरीज ‘लॉर्ड ऑफ द रिंग्स’ की तरह एक भव्य फिल्म सीरीज के रूप में बैक-टू-बैक चैप्टर्स में बनाना चाहते हैं। साल 2024 में बीबीसी से बातचीत के दौरान आमिर खान ने महाभारत का जिक्र करते हुए कहा था, ‘यह मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट है और मेरे लिए किसी चैलेंज से कम नहीं है। मुझे डर है कि इसे बनाते समय मुझसे कोई गलती न हो जाए। यह एक बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि महाभारत हमारे लिए बहुत करीब है। यह हमारे खून में है, इसलिए मैं इसे बिल्कुल सही तरीके से बनाना चाहता हूं।’ आमिर ने कहा था, ‘मैं हर भारतीय को गर्व महसूस कराना चाहता हूं और साथ ही दुनिया को यह दिखाना चाहता हूं कि भारत के पास क्या है। मुझे नहीं पता, यह कब बन पाएगा।’ आमिर आध्यात्म की ओर बढ़ रहे हैं: सतीशाचार्य महाराज जगद्गुरु सतीशाचार्य महाराज ने एक इंटरव्यू में आमिर खान को लेकर कई बातें साझा की थीं। उन्होंने कहा था कि व्यक्तिगत रूप से वह बहुत अच्छे इंसान हैं। महाराज के मुताबिक, कुछ समय से आमिर उनके संपर्क में हैं और आध्यात्म की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया था कि आमिर गीता पढ़ते हैं, कलावा बांधते हैं और रुद्राक्ष धारण करते हैं। इसके अलावा, वे भगवान का नाम लेते हैं और भजन भी सीख रहे हैं। महाराज ने बताया था कि आमिर उनसे मिलने पर उनके लिए भजन गाकर सुनाते हैं। उन्होंने यह भी किस्सा साझा किया कि जब वे आमिर के घर भोजन करने गए थे, तो आमिर ने विशेष तैयारी करवाई। उनके मुताबिक, पूरे घर को गंगाजल से साफ करवाया गया, नए बर्तन और अनाज मंगवाए गए। इसके बाद भोजन बनाकर भगवान को भोग लगाया गया और पारंपरिक पद्धति से उन्हें भोजन कराया गया।

पाकिस्तान में नमाज के दौरान मस्जिद के पास धमाका:खैबर पख्तूनख्वा के कोहाट जिले में 15 की मौत, 50 से ज्यादा घायल

पाकिस्तान में नमाज के दौरान मस्जिद के पास धमाका:खैबर पख्तूनख्वा के कोहाट जिले में 15 की मौत, 50 से ज्यादा घायल

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट जिले में शुक्रवार को मस्जिद के पास जोरदार विस्फोट हुआ। धमाका शुक्रवार की नमाज के दौरान पुलिस लाइंस इलाके में हुआ। मेडिकल अधिकारियों के मुताबिक, इसमें कम से कम 15 लोगों की मौत हुई है, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हैं। कोहाट के जिला मुख्यालय अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ताहिर अली शाह ने जियो न्यूज को बताया कि अस्पताल में 15 शव और 50 से ज्यादा घायलों को लाया गया। पुलिस के मुताबिक, विस्फोट से मस्जिद के बाहरी हिस्से को काफी नुकसान पहुंचा। एक दीवार भी गिर गई। कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी है। धमाके के बाद पुलिस लाइंस इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया। घटना के बाद राहत और बचाव का काम शुरू किया गया। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर कोहाट-हंगू रोड को बंद कर दिया है। अस्पताल प्रशासन ने घायलों के इलाज के लिए इमरजेंसी घोषित कर दी है। फिलहाल विस्फोट की वजह और इसमें किसका हाथ था, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

लंदन-ढाका फ्लाइट में दो यात्रियों के बीच मारपीट:एक-दूसरे को घूंसे मारे, एक की टी-शर्ट फटी; यात्रियों ने छुड़ाया

लंदन-ढाका फ्लाइट में दो यात्रियों के बीच मारपीट:एक-दूसरे को घूंसे मारे, एक की टी-शर्ट फटी; यात्रियों ने छुड़ाया

लंदन से ढाका जा रही बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट में दो यात्रियों के बीच बहस के बाद मारपीट हो गई। दोनों ने एक-दूसरे को घूंसे मारे। इस दौरान एक यात्री की टी-शर्ट फट गई। आसपास के यात्रियों और केबिन क्रू ने बीच-बचाव कर दोनों को अलग किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में दोनों यात्री पहले बहस करते नजर आते हैं। कुछ ही देर बाद दोनों हाथापाई पर उतर आते हैं। झगड़े के दौरान आसपास बैठे यात्रियों में घबराहट फैल गई। फ्लाइट में बच्चे और बुजुर्ग भी मौजूद थे। मारपीट बढ़ने पर कुछ यात्री और केबिन क्रू के सदस्य दोनों के बीच पहुंच गए। उन्होंने दोनों को अलग कर स्थिति संभाली। वीडियो में भी यात्रियों को झगड़ा रोकने की कोशिश करते देखा जा सकता है। एयरलाइन को घटना की जानकारी नहीं थी बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस के जनरल मैनेजर (पब्लिक रिलेशंस) महबूबुद्दीन अहमद ने ढाका ट्रिब्यून से कहा कि उन्हें घटना की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा, “मुझे अभी इस मामले की जानकारी नहीं है। मैं इसकी जानकारी ले रहा हूं।” एयरलाइन ने अभी विवाद की वजह और दोनों यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी नहीं दी है।

लंदन-ढाका फ्लाइट में दो यात्रियों के बीच मारपीट:एक-दूसरे को घूंसे मारे, एक की टी-शर्ट फटी; यात्रियों ने छुड़ाया

लंदन-ढाका फ्लाइट में दो यात्रियों के बीच मारपीट:एक-दूसरे को घूंसे मारे, एक की टी-शर्ट फटी; यात्रियों ने छुड़ाया

लंदन से ढाका जा रही बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट में दो यात्रियों के बीच बहस के बाद मारपीट हो गई। दोनों ने एक-दूसरे को घूंसे मारे। इस दौरान एक यात्री की टी-शर्ट फट गई। आसपास के यात्रियों और केबिन क्रू ने बीच-बचाव कर दोनों को अलग किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में दोनों यात्री पहले बहस करते नजर आते हैं। कुछ ही देर बाद दोनों हाथापाई पर उतर आते हैं। झगड़े के दौरान आसपास बैठे यात्रियों में घबराहट फैल गई। फ्लाइट में बच्चे और बुजुर्ग भी मौजूद थे। मारपीट बढ़ने पर कुछ यात्री और केबिन क्रू के सदस्य दोनों के बीच पहुंच गए। उन्होंने दोनों को अलग कर स्थिति संभाली। वीडियो में भी यात्रियों को झगड़ा रोकने की कोशिश करते देखा जा सकता है। घटना का पूरा वीडियो… एयरलाइन को घटना की जानकारी नहीं थी बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस के जनरल मैनेजर (पब्लिक रिलेशंस) महबूबुद्दीन अहमद ने ढाका ट्रिब्यून से कहा कि उन्हें घटना की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा, “मुझे अभी इस मामले की जानकारी नहीं है। मैं इसकी जानकारी ले रहा हूं।” एयरलाइन ने अभी विवाद की वजह और दोनों यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी नहीं दी है। खबर अपडेट हो रही है…

मूवी रिव्यू – 'दायरा':पृथ्वीराज का गुस्सा, करीना का सवाल और चार लाशों का राज… कहानी में मसाला खूब, लेकिन यहां कमजोर है मूवी

मूवी रिव्यू – 'दायरा':पृथ्वीराज का गुस्सा, करीना का सवाल और चार लाशों का राज… कहानी में मसाला खूब, लेकिन यहां कमजोर है मूवी

रेटिंग: 2.5/5 अवधि: 2 घंटे 23 मिनट शैली: क्राइम थ्रिलर / इन्वेस्टिगेटिव ड्रामा निर्देशक: मेघना गुलजार मुख्य कलाकार: करीना कपूर खान, पृथ्वीराज सुकुमारन, क्षिती जोग, कनवलजीत सिंह, जितेंद्र जोशी रिलीज डेट: 18 सितंबर 2026 कुछ फिल्में आपको कुर्सी पर इसलिए बैठाए रखती हैं क्योंकि आपको जानना होता है कि आगे क्या होगा। ‘दायरा’ शुरुआत में बिल्कुल यही काम करती है। एक लड़की की निर्मम हत्या, पुलिस का तेजी से आरोपियों तक पहुंचना, फिर उनका एनकाउंटर और उसके बाद उठता बड़ा सवाल क्या यह सच में न्याय था या कानून को किनारे रखकर किया गया फैसला? मेघना गुलजार की यह फिल्म 2019 के हैदराबाद रेप-मर्डर केस और उसके बाद हुए पुलिस एनकाउंटर से प्रेरित है। फिल्म ने वास्तविक घटना को हूबहू दोहराने के बजाय काल्पनिक नामों और परिस्थितियों के साथ अपनी कहानी गढ़ी है और यहीं से फिल्म दिलचस्प हो जाती है, क्योंकि यह आपको किसी एक पक्ष की तरफ आराम से बैठने नहीं देती। लेकिन दिक्कत यह है कि जिस फिल्म की शुरुआत इतनी मजबूत हो, उससे अंत भी उतना ही दमदार चाहिए। ‘दायरा’ में शुरुआत और पहला हिस्सा जितना पकड़ता है, दूसरा हिस्सा उतना ही धीरे-धीरे हाथ से निकलता जाता है। फिल्म की कहानी कहानी शुरू होती है रागिनी (प्रगति मिश्रा) से, जो एक रात हाईवे के पास मुसीबत में फंस जाती है। इसके बाद वह गायब हो जाती है और अगले दिन उसका जला हुआ शव मिलता है। रागिनी की मां पार्वती (क्षिती जोग) और भाई कबीर (भावेश बब्बानी) पुलिस से मदद मांगते हैं, लेकिन शुरुआती स्तर पर सिस्टम जिस तरह से मामले को लेता है, वही आगे की पूरी कहानी की नींव रख देता है। मामला मीडिया में उछलता है और जांच की जिम्मेदारी डीसीपी रमन कुमार (पृथ्वीराज सुकुमारन) को मिलती है। रमन अपनी टीम के साथ चार आरोपियों को पकड़ लेता है, लेकिन अदालत तक मामला पहुंचने से पहले ही चारों एक पुलिस एनकाउंटर में मारे जाते हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने भागने और हमला करने की कोशिश की थी। जवाबी कार्रवाई में वे मारे गए। बस, यहीं से असली फिल्म शुरू होती है। एक तरफ जनता रमन को हीरो मान रही है। दूसरी तरफ सवाल उठ रहा है क्या यह एनकाउंटर सच में हुआ था या सब कुछ पहले से तय था? मामले की जांच के लिए डीसीपी अजूनी कोहली (करीना कपूर खान) के नेतृत्व में विशेष जांच टीम बनाई जाती है। अजूनी का काम सिर्फ एनकाउंटर की जांच करना नहीं है, बल्कि उस पूरी कड़ी को जोड़ना है जो रागिनी के गायब होने से शुरू हुई थी। और फिर फिल्म रमन बनाम अजूनी नहीं, बल्कि तेज न्याय बनाम सही न्याय की बहस बन जाती है। फिल्म में एक्टिंग पृथ्वीराज सुकुमारन रमन कुमार के किरदार में पृथ्वीराज फिल्म की सबसे मजबूत कड़ियों में से एक हैं। उनके किरदार में पुलिस अधिकारी का रौब है, लेकिन उसके पीछे एक ऐसा आदमी भी है जो अपने फैसलों को सही मानता है। पृथ्वीराज का अभिनय ज्यादा शोर नहीं करता। खासकर उनकी आंखों और संवाद बोलने के अंदाज में काफी वजन है। वह रमन को पूरी तरह विलेन बनने से रोकते हैं और यही फिल्म के लिए जरूरी भी था। करीना कपूर खान करीना की अजूनी चमक-दमक वाली पुलिस अफसर नहीं है। वह ज्यादा शांत, व्यवस्थित और दिमाग से काम करने वाली अधिकारी है। करीना यहां ओवर-द-टॉप अभिनय नहीं करतीं और यही उनके पक्ष में जाता है। वह सवाल पूछती हैं, लोगों को पढ़ती हैं और छोटी-छोटी विसंगतियों को पकड़ती हैं। हालांकि, किरदार में जितनी संभावनाएं थीं, फिल्म उनका पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाती। क्षिती जोग रागिनी की मां पार्वती के रूप में क्षिती जोग कई जगह पूरी फिल्म पर भारी पड़ती हैं। उनका दुख चीखने-चिल्लाने से ज्यादा उनकी खामोशी में दिखाई देता है। फिल्म के सबसे मानवीय और भावुक हिस्से उन्हीं से जुड़े हैं। बाकी कलाकार भी अपने-अपने हिस्से को संभालते हैं और फिल्म को विश्वसनीय बनाने में मदद करते हैं। फिल्म का निर्देशन मेघना गुलजार को पता है कि क्राइम स्टोरी को सिर्फ अपराध की कहानी बनाकर नहीं छोड़ना है। ‘तलवार’ की तरह यहां भी वह दर्शक को जांच की प्रक्रिया के भीतर ले जाने की कोशिश करती हैं। फिल्म का पहला हिस्सा काफी प्रभावी है। घटनाओं को धीरे-धीरे खोलने का तरीका अच्छा है और दर्शक लगातार सोचता रहता है कि आखिर सच क्या है, लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म का टेम्पो थोड़ा गिरता है। कुछ जगहों पर कहानी जरूरत से ज्यादा समझाने लगती है और वही फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है। फिल्म की स्टोरीलाइन विचार बेहद मजबूत है। फिल्म का असली सवाल यह नहीं है कि रमन सही है या अजूनी। सवाल यह है कि अगर सिस्टम धीमा है तो क्या पुलिस को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार मिल जाता है? और अगर किसी अपराधी को अदालत तक पहुंचने से पहले मार दिया जाए, तो क्या वह न्याय कहलाएगा? फिल्म इन सवालों को उठाती जरूर है, लेकिन कई जगह उन पर और गहराई से उतरने की जरूरत महसूस होती है। फिल्म का स्क्रीनप्ले स्क्रीनप्ले की शुरुआत काफी चुस्त है। घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ती हैं और रहस्य धीरे-धीरे खुलता है, लेकिन दूसरे हिस्से में कुछ चीजें खिंचती हुई लगती हैं। कई जगह कहानी की गति कम हो जाती है और दर्शक को लगता है कि फिल्म उसी बात को थोड़ा अलग तरीके से फिर समझा रही है। सबसे बड़ी समस्या क्लाइमैक्स है। इतने सवाल खड़े करने के बाद फिल्म जिस तरह खत्म होती है, वह दर्शक को संतुष्ट करने के बजाय थोड़ा अधूरा छोड़ देती है। ऐसा लगता है जैसे फिल्म ने पटाखे दिखाए बहुत, लेकिन फुलझड़ी जलाकर घर चली गई। फिल्म का तकनीकी पक्ष कैमरा वर्क फिल्म के मूड को अच्छी तरह सपोर्ट करता है। बंद फ्रेम और क्लोज-अप्स किरदारों के तनाव को बढ़ाते हैं। एडिटिंग पहले हिस्से में काफी प्रभावी है, हालांकि इंटरवल के बाद फिल्म थोड़ी और चुस्त हो सकती थी। फिल्म की कमियां सबसे बड़ी कमी है इसका कमजोर दूसरा हिस्सा। दूसरी बड़ी परेशानी है कि फिल्म जिस शानदार सवाल से शुरुआत करती है, उसका जवाब देने की कोशिश में कुछ जगह बहुत ज्यादा समझाने लगती है। और फिर आता है क्लाइमैक्स। इतनी गंभीर