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चूँकि कांग्रेस ने केरल के मुख्यमंत्री की घोषणा में देरी की, भाजपा ने एक नाम सुझाया | भारत समाचार

Venugopal has emerged as a key contender in the race for Kerala CM

आखरी अपडेट:11 मई, 2026, 16:04 IST पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, पूर्व केंद्रीय मंत्री और केरल बीजेपी प्रमुख राजीव चंद्रशेखर ने जवाब दिया, “मैं न तो पुष्टि करूंगा और न ही इनकार करूंगा कि यह सच है।” तिरुवनंतपुरपुरम में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान केरल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर। (पीटीआई फोटो) केरल मुख्यमंत्री गतिरोध: केरल का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा इस पर सस्पेंस जारी है क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में कई दौर की चर्चा के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने अभी तक अपने अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की है। देरी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के भीतर तीव्र राजनीतिक बहस छेड़ दी है, वरिष्ठ नेताओं वीडी सतीसन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के समर्थकों ने केरल और दिल्ली में विरोध, पोस्टर और प्रदर्शनों के माध्यम से अपने पसंदीदा उम्मीदवारों का खुले तौर पर समर्थन किया है। सियासी रस्साकशी के बीच बीजेपी की केरल इकाई भी अपने पसंदीदा उम्मीदवार के संकेत देती नजर आई। एक्स पर एक पोस्ट में कांग्रेस नेतृत्व के संघर्ष का मज़ाक उड़ाते हुए कहा गया, “केरल बीजेपी और राष्ट्रीय बीजेपी के बीच हास्यास्पद कड़ी लड़ाई। केरल बीजेपी केरल में केसी वेणुगोपाल को चाहती है, राष्ट्रीय बीजेपी दिल्ली में केसी वेणुगोपाल को चाहती है।” पोस्ट में सुझाव दिया गया कि भाजपा नेतृत्व शायद चाहता है कि वेणुगोपाल राष्ट्रीय राजधानी में ही रहें क्योंकि वहां उनके लिए बहुत कम राजनीतिक खतरा है, जबकि केरल भाजपा भी राज्य में इसी तरह के कारणों से उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में पसंद करेगी। पोस्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, पूर्व केंद्रीय मंत्री और केरल भाजपा प्रमुख राजीव चंद्रशेखर ने हंसते हुए और मुंह बंद करने वाले इमोजी के साथ जवाब दिया, “मैं न तो पुष्टि करूंगा और न ही इनकार करूंगा कि यह सच है।” उनकी प्रतिक्रिया ने सोशल मीडिया पर तुरंत ध्यान आकर्षित किया और केरल के मुख्यमंत्री पद पर चल रहे राजनीतिक नाटक में एक और मोड़ जोड़ दिया। केरल में क्या हो रहा है? कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 140 विधानसभा सीटों में से 102 सीटों पर कब्जा कर लिया, जिससे एक दशक के बाद ऐतिहासिक वापसी हुई और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया। हालाँकि, जीत ने जल्द ही अंदरूनी कलह को जन्म दे दिया, क्योंकि प्रमुख राजनेताओं के समर्थकों ने शीर्ष पद के लिए अपना जोर तेज कर दिया। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने केरल में एक दशक के बाद सत्ता में वापसी करते हुए निर्णायक वापसी की है। लेकिन जश्न थमने से पहले ही सारा ध्यान तेजी से मुख्यमंत्री के चयन के बड़े सवाल पर केंद्रित हो गया है. केरल के मुख्यमंत्री पद के लिए तीन प्रमुख नाम सबसे आगे चल रहे हैं, वे हैं वीडी सतीसन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला। इस स्थिति में क्लासिक कांग्रेस सत्ता संघर्ष के सभी तत्व मौजूद हैं – संगठनात्मक प्रभुत्व बनाम विधायी नेतृत्व, पीढ़ीगत बदलाव बनाम अनुभव, और दिल्ली का प्रभाव बनाम राज्य इकाई की प्राथमिकता। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को एआईसीसी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला और वीडी सतीसन और केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ के साथ अलग-अलग और संयुक्त बैठकें कीं। तीन घंटे से अधिक समय तक चली इस मंत्रणा में एआईसीसी पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक ने भाग लिया। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि कांग्रेस नेतृत्व जानबूझकर आम सहमति सुनिश्चित करने और केरल में पार्टी की जोरदार जीत के बाद और शर्मिंदगी को रोकने के लिए समय ले रहा है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तिरुवनंतपुरम, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया जैसे ही कांग्रेस ने केरल के मुख्यमंत्री की घोषणा में देरी की, भाजपा ने एक नाम सुझाया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल के मुख्यमंत्री गतिरोध(टी)केरल के सीएम की दौड़(टी)कांग्रेस नेतृत्व की खींचतान(टी)यूडीएफ सत्ता संघर्ष(टी)वीडी सतीसन(टी)केसी वेणुगोपाल(टी)रमेश चेन्निथला(टी)राजीव चन्द्रशेखर प्रतिक्रिया

गर्मियों के लिए सत्तू की छाछ रेसिपी: घर पर बनाएं सत्तू की छाछ, गर्मी में चाहिए सत्तू की छाछ; स्वाद ऐसा की सब पूछेंगे रेसिपी

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 4 बड़े चम्मच सत्तू, 2 चम्मच हरा धनिया, 1 हरी मिर्च पाउडर, थोड़ा सा जीरा पाउडर, स्वाद में काला नमक, थोड़ा सा साधारण नमक, थोड़ा सा साधारण नमक, थोड़ा सा हरा धनिया, कुछ पुदीने की मिठाई छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले एक बड़ा पोछे में सत्तू डाला। अब इसमें शामिल हैं छोटा-थोड़ा करके छाछ रेवेरे और अच्छे से शौकीन बने रहें ताकि छोटे-मोटे न बनें। छवि: फ्रीपिक इसके बाद इसमें प्याज, हरी मिर्च, अन्य जीरा, काला और साधारण नमक शामिल हैं। अब ऊपर से हरा धनियां और पुदीने की पत्तियां। छवि: एआई साड़ी को अच्छी तरह से लाइक करें। अगर आपको ज्यादा ठंडा पसंद है तो इसमें कुछ बर्फ के टुकड़े भी डाल सकते हैं. अब आपकी मंहगी-ठंडी और स्वादिष्ट सत्तू की छाछ तैयार है। छवि: एआई सत्तू शरीर को ठंडक की सलाह में मदद करता है। इसके अलावा, भोजन की खपत और पाचन क्षमता बेहतर होती है। गर्मी में लू और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए यह ड्रिंक काफी खतरनाक साबित होती है। छवि: फ्रीपिक पर्यटक तो इसमें थोड़ा नींबू रस भी मिला सकते हैं। पुदीना से स्वाद और ताजगी दोनों बढ़ते हैं। अगर बच्चे बना रहे हैं तो हरी मिर्च न डालें। छवि: फ्रीपिक गर्मी के दिनों में जब भी कुछ ठंडा और कॉकटेल पीने का मन करे, तब सत्तू की छाछ जरूर बनाएं। इसका देसी स्वाद हर किसी को पसंद आएगा। छवि: एआई अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें।

बच्चों के पैरों में दर्द I leg pain in childrens

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Last Updated:May 11, 2026, 15:54 IST बच्चों के पैरों में बार-बार होने वाला दर्द सिर्फ थकान नहीं, बल्कि ग्रोथ पेन, कमजोरी या पोषक तत्वों की कमी का संकेत भी हो सकता है. बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति सिंह ने बच्चों की डाइट, मसाज और घरेलू उपायों को लेकर जरूरी सलाह दी है. मिर्जापुर. अक्सर छोटे बच्चों के पैरों में दर्द होता है, बच्चों के पैरों में दर्द होने के बाद कई बार मालिश के बाद भी दर्द ठीक नहीं होता है. अगर आपके बच्चों के पैरों में दर्द है तो इसके कुछ खास वजह हो सकती है. पहले ग्रोथ हो सकता है और दूसरा कारण थकान हो सकता है. वहीं, कई बार न्यूट्रिएंट्स की कमी की वजह से भी दर्द होता है. मंडलीय अस्पताल में तैनात डाइटीशियन डॉक्टर ज्योति सिंह ने बच्चों को लेकर टिप्स दिए हैं. डॉक्टर ज्योति सिंह ने घरेलू नुस्खे के साथ ही चिकित्सकीय पद्धति से बच्चों का ध्यान रखने की बात कही है. उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रॉपर न्यूट्रिएंट्स दें और शाम में जरूर पैरों की मालिश करें. मंडलीय अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति सिंह ने लोकल 18 से बताया कि बच्चों के पैरों में दो चीजों से दर्द होता है. एक होता है ग्रोथ पैन, जो बच्चों के शारीरिक विकास की वजह से होता है. वहीं, दूसरा दर्द ज्यादा खेल-कूद आदि की वजह से होता है, कभी दर्द कमजोरी की वजह से भी हो सकता है. ऐसे में सबसे जरूरी बच्चों का खान-पान होता है. बच्चों को प्रॉपर प्रोटीन वाले सामान पनीर, अंडे, राजमा, सोयाबीन आदि को डाइट में रखना चाहिए. बच्चों को दूसरी जरूरी चीज कैल्शियम की आवश्यकता होती है. कैल्शियम के लिए बच्चों को रागी, चौराई, रामदाना, शिमला मिर्च, चने, खजूर और अंजीर आदि दे सकते हैं. बच्चों के पैरों में दर्द है तो इप्सम सॉल्ट है तो कुनकुने पानी में डालकर पैर को कुछ देर के लिए रोककर रखना चाहिए. ये टिप्स भी है बेहद कारगरडॉ. ज्योति सिंह ने बताया कि ध्यान रहे कि ज्यादा देर तक पैरों को पानी के अंदर नहीं रखे, वरना लूज मोशन जैसी समस्या हो सकती है. ऐसे में कम से कम समय तक पैरों को पानी में रखे. उन्होंने बताया कि बच्चों के पैरों में दर्द होन पर देसी तरीका है मसाज. थोड़ा मसाज बच्चों का रात में करना चाहिए. इसको करने से सोते समय बच्चों को बेहतर फील होता है. उनको अच्छी नींद लगती है, ये कुछ तरीके थे, जिनका उपयोग बच्चों के लिए पैरों में होने वाले दर्द को कम करने के लिए कर सकते हैं. अगर दर्द असहनीय हो या ज्यादा हो तो किसी पीडियाट्रिक को दिखा सकते हैं. मंडलीय अस्पताल में भी बाल रोग विशेषज्ञ है, यहां सम्पूर्ण इलाज है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Mirzapur,Uttar Pradesh

500 रु. में नौकरी की, ताने सहे, आज फैशन आइकन:मनीष मल्होत्रा के संघर्ष की कहानी, रंगीला से बने बॉलीवुड के बड़े चेहरे

500 रु. में नौकरी की, ताने सहे, आज फैशन आइकन:मनीष मल्होत्रा के संघर्ष की कहानी, रंगीला से बने बॉलीवुड के बड़े चेहरे

फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा किसी परिचय के मोहताज नहीं। लेकिन इस मुकाम पर पहुंचने के लिए उन्हें कई चुनौतियां पार करनी पड़ी हैं। अभी मनीष “मेट गाला’ में प्रदर्शित अपने विशेष परिधानों को लेकर चर्चा में हैं। जानते हैं उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी…. मुंबई के एक मध्यमवर्गीय पंजाबी परिवार में 5 दिसंबर 1966 को जन्मे मनीष अपने स्कूली दिनों में मां के साथ न सिर्फ साड़ी खरीदने जाते, बल्कि साड़ियों को लेकर उन्हें फैशन टिप्स भी देने लगे थे। यहीं से फैशन और कॉस्ट्यूम डिजाइन के प्रति उनका लगाव बढ़ने लगा। बचपन से ही वे फिल्मों के बेहद शौकीन थे। वे लगभग हर ​फिल्म देखने जाते, लेकिन कलाकारों के अभिनय से ज्यादा मनीष का ध्यान उनके पहनावे पर होता था। कलाकारों के परिधान देख कर वे फैशन की बारीकियां समझने लगे। संघर्ष – डिजाइनिंग की डिग्री नहीं ले पाए, सेट पर लोग कपड़े सिलने वाला बोलते 1980 के दशक में फैशन डिजाइनिंग को पुरुषों का पेशा नहीं माना जाता था। लोग उनका मजाक उड़ाते थे। मनीष कभी डिजाइनिंग की औपचारिक पढ़ाई भी नहीं कर पाए, क्योंकि तब देश में पुरुषों के लिए फैशन डिजाइनिंग कोर्स नहीं होते थे। और विदेश जाकर कोर्स करने के पैसे उनके पास नहीं ​थे। कॅरिअर की शुरुआत में उन्होंने मुम्बई के “इक्विनॉक्स’ बुटीक में महज 500 रुपए महीने की नौकरी की। यहां उन्हें ग्राहकों को कपड़े दिखाने और उन्हें तह करने का काम मिला। खाली समय में मनीष छिप कर डिजाइन स्केच बनाते थे। बॉलीवुड के शुरुआती वर्षों में प्रोड्यूसर उनके डिजाइन को अधिक ग्लैमरस बता कर रिजेक्ट कर देते। सेट पर उनसे कहा जाता कि तुम कपड़े सिलने वाले हो, उन्हें दो और चलते बनो। शुरुआत – “रंगीला’ से बने बॉलीवुड के बड़े चेहरे, जैक्सन की जैकेट डिजाइन की मल्होत्रा ने 1990 में फिल्म “स्वर्ग’ में जूही चावला के लिए कॉस्ट्यूम ​​डिजाइन कर बॉलीवुड में ​डेब्यू किया। मनीष बताते हैं कि “गुमराह’ के लिए उन्हें पहली बार यश जौहर ने 10 हजार रुपए दिए। 1995 में “रंगीला’ में उर्मिला मातोंडकर के आउटफिट ​डिजाइन ने उन्हें रातोंरात बॉलीवुड का बड़ा चेहरा बना दिया। 1996 में माइकल जैक्सन भारत आए थे तो मनीष ने उनकी जैकेट डिजाइन की थी। सफलता – खुद के नाम को ही लग्जरी ब्रांड बनाया, श्रमिकों के कल्याण से भी जुड़े मनीष ने 2005 में अपने नाम से ही डिजाइनर कपड़ों का लग्जरी ब्रांड लॉन्च किया। वे स्किन केयर और ज्वेलरी में भी अपने कलेक्शन लॉन्च कर चुके हैं। आईफा, फिल्मफेयर समेत कई अवॉर्ड उन्हें मिल चुके हैं। वे चिकनकारी की ​महिला श्रमिकों के ​कल्याण की एक सामाजिक संस्था से भी जुड़े हैं। उनकी नेटवर्थ करीब 2500 करोड़ रुपए बताई जाती है।

500 रु. में नौकरी की, ताने सहे,आज हैं फैशन आइकन:मेट गाला से माइकल जैक्सन तक; मनीष मल्होत्रा के संघर्ष की कहानी

500 रु. में नौकरी की, ताने सहे,आज हैं फैशन आइकन:मेट गाला से माइकल जैक्सन तक; मनीष मल्होत्रा के संघर्ष की कहानी

फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा किसी परिचय के मोहताज नहीं। लेकिन इस मुकाम पर पहुंचने के लिए उन्हें कई चुनौतियां पार करनी पड़ी हैं। अभी मनीष “मेट गाला’ में प्रदर्शित अपने विशेष परिधानों को लेकर चर्चा में हैं। जानते हैं उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी…. मुंबई के एक मध्यमवर्गीय पंजाबी परिवार में 5 दिसंबर 1966 को जन्मे मनीष अपने स्कूली दिनों में मां के साथ न सिर्फ साड़ी खरीदने जाते, बल्कि साड़ियों को लेकर उन्हें फैशन टिप्स भी देने लगे थे। यहीं से फैशन और कॉस्ट्यूम डिजाइन के प्रति उनका लगाव बढ़ने लगा। बचपन से ही वे फिल्मों के बेहद शौकीन थे। वे लगभग हर ​फिल्म देखने जाते, लेकिन कलाकारों के अभिनय से ज्यादा मनीष का ध्यान उनके पहनावे पर होता था। कलाकारों के परिधान देख कर वे फैशन की बारीकियां समझने लगे। संघर्ष – डिजाइनिंग की डिग्री नहीं ले पाए, सेट पर लोग कपड़े सिलने वाला बोलते 1980 के दशक में फैशन डिजाइनिंग को पुरुषों का पेशा नहीं माना जाता था। लोग उनका मजाक उड़ाते थे। मनीष कभी डिजाइनिंग की औपचारिक पढ़ाई भी नहीं कर पाए, क्योंकि तब देश में पुरुषों के लिए फैशन डिजाइनिंग कोर्स नहीं होते थे। और विदेश जाकर कोर्स करने के पैसे उनके पास नहीं ​थे। कॅरिअर की शुरुआत में उन्होंने मुम्बई के “इक्विनॉक्स’ बुटीक में महज 500 रुपए महीने की नौकरी की। यहां उन्हें ग्राहकों को कपड़े दिखाने और उन्हें तह करने का काम मिला। खाली समय में मनीष छिप कर डिजाइन स्केच बनाते थे। बॉलीवुड के शुरुआती वर्षों में प्रोड्यूसर उनके डिजाइन को अधिक ग्लैमरस बता कर रिजेक्ट कर देते। सेट पर उनसे कहा जाता कि तुम कपड़े सिलने वाले हो, उन्हें दो और चलते बनो। शुरुआत – “रंगीला’ से बने बॉलीवुड के बड़े चेहरे, जैक्सन की जैकेट डिजाइन की मल्होत्रा ने 1990 में फिल्म “स्वर्ग’ में जूही चावला के लिए कॉस्ट्यूम ​​डिजाइन कर बॉलीवुड में ​डेब्यू किया। मनीष बताते हैं कि “गुमराह’ के लिए उन्हें पहली बार यश जौहर ने 10 हजार रुपए दिए। 1995 में “रंगीला’ में उर्मिला मातोंडकर के आउटफिट ​डिजाइन ने उन्हें रातोंरात बॉलीवुड का बड़ा चेहरा बना दिया। 1996 में माइकल जैक्सन भारत आए थे तो मनीष ने उनकी जैकेट डिजाइन की थी। सफलता – खुद के नाम को ही लग्जरी ब्रांड बनाया, श्रमिकों के कल्याण से भी जुड़े मनीष ने 2005 में अपने नाम से ही डिजाइनर कपड़ों का लग्जरी ब्रांड लॉन्च किया। वे स्किन केयर और ज्वेलरी में भी अपने कलेक्शन लॉन्च कर चुके हैं। आईफा, फिल्मफेयर समेत कई अवॉर्ड उन्हें मिल चुके हैं। वे चिकनकारी की ​महिला श्रमिकों के ​कल्याण की एक सामाजिक संस्था से भी जुड़े हैं। उनकी नेटवर्थ करीब 2500 करोड़ रुपए बताई जाती है।

लक्ष्मीर भंडार जारी रहेगा: बीजेपी बंगाल में ममता की फ्लैगशिप योजना को क्यों खत्म नहीं करेगी | भारत समाचार

Venugopal has emerged as a key contender in the race for Kerala CM

आखरी अपडेट:11 मई, 2026, 14:59 IST टीएमसी ने मतदाताओं, विशेषकर महिला लाभार्थियों को बार-बार चेतावनी दी थी कि अगर राज्य में सत्ता में आई तो भाजपा लक्ष्मीर भंडार और अन्य प्रत्यक्ष-लाभ योजनाओं को बंद कर देगी। सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जो राज्य में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक विकास है। छवि/एक्स पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सबसे बड़े चुनाव प्रचार अभियानों में से एक को बेअसर करने के लिए तेजी से कदम उठाया और घोषणा की कि बंगाल में लक्ष्मी भंडार योजना और अन्य सभी चल रहे कल्याण कार्यक्रम नई भाजपा सरकार के तहत जारी रहेंगे। अपनी पहली कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए – जहां सरकार ने छह प्रमुख फैसले लिए – अधिकारी ने कहा: “लक्ष्मीर भंडार को कोई रोक नहीं होगी…बंगाल में चल रही सभी लाभार्थी योजनाएं बंद नहीं होंगी।” यह घोषणा बड़ा राजनीतिक महत्व रखती है क्योंकि लक्ष्मीर भंडार 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अभियान के केंद्रीय फ्लैशप्वाइंट में से एक के रूप में उभरा था। तृणमूल कांग्रेस और उसकी प्रमुख ममता बनर्जी के लिए, यह योजना केवल एक कल्याणकारी कार्यक्रम नहीं थी बल्कि एक राजनीतिक ढाल थी जिसके चारों ओर अधिकांश अभियान बनाया गया था। टीएमसी ने बार-बार महिला मतदाताओं और लाभार्थियों को चेतावनी दी कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में आई तो लक्ष्मीर भंडार और अन्य प्रत्यक्ष-लाभ योजनाओं को रद्द कर देगी। बनर्जी ने हर रैली में इस मुद्दे को उठाया और चुनाव को बंगाल के कल्याण मॉडल और भाजपा सरकार के तहत इसके संभावित निराकरण के बीच एक विकल्प के रूप में पेश करने का प्रयास किया। पूरे अभियान के दौरान, टीएमसी ने भाजपा को “महिला विरोधी” के रूप में चित्रित करने की कोशिश की, यह तर्क देते हुए कि भगवा पार्टी न तो प्रत्यक्ष नकद-हस्तांतरण योजनाओं में विश्वास करती है और न ही यह समझती है कि लक्ष्मीर भंडार जैसे कार्यक्रम पूरे बंगाल में घरेलू वित्त के साथ कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं। भाजपा इस मुद्दे पर बार-बार बचाव की मुद्रा में दिखी। जबकि कई भाजपा नेताओं ने मतदाताओं को आश्वासन दिया कि योजना जारी रहेगी – कुछ ने बढ़े हुए भुगतान का भी वादा किया – दूसरों ने यह सुझाव देकर विवाद पैदा कर दिया कि ऐसे कल्याण कार्यक्रमों की समीक्षा की जा सकती है या बंद कर दिया जा सकता है। प्रतिक्रिया ने अंततः भाजपा नेतृत्व को बार-बार यह स्पष्ट करने के लिए मजबूर किया कि यदि पार्टी सरकार बनाती है तो लक्ष्मीर भंडार को रोका नहीं जाएगा। यह योजना, जिसने 2021 में बनर्जी को सत्ता विरोधी लहर से निपटने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वर्तमान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों की 25 से 60 वर्ष की आयु की महिलाओं को प्रति माह 1,200 रुपये तक प्रदान करती है, जबकि अन्य श्रेणियों के लाभार्थियों को 1,000 रुपये मासिक मिलते हैं। यह भी पढ़ें | भाजपा की बंगाल विजय को बनने में 15 साल लगे: इसके उदय के पीछे के वास्तुकारों पर एक नजर अभियान के दौरान टीएमसी की कल्याण राजनीति की तीखी आलोचना करने के बावजूद लक्ष्मीर भंडार को बनाए रखने के भाजपा के फैसले की तुलना इस बात से की गई है कि 2014 में सत्ता में आने के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने यूपीए-युग की कई प्रमुख योजनाओं को कैसे संभाला था। सबसे प्रमुख उदाहरण महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) था, जिसे भाजपा ने शुरू में कांग्रेस-युग की “विफलता” के प्रतीक के रूप में हमला किया था, अंततः इसे बनाए रखने, विस्तार करने और राजनीतिक रूप से पुन: पैकेजिंग करने से पहले। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में संसद में मनरेगा को कांग्रेस की विफलताओं का “जीवित स्मारक” कहा था, फिर भी यह योजना बाद में केंद्र के सबसे बड़े ग्रामीण कल्याण कार्यक्रमों में से एक बन गई, खासकर कोविड-19 के दौरान। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना ​​​​है कि भाजपा बंगाल में इसी तरह की रणनीति का प्रयास कर सकती है – पहले लाभार्थियों को आश्वासन देना कि लक्ष्मीर भंडार सार्वजनिक प्रतिक्रिया से बचना जारी रखेगा, फिर योजना का ऑडिट या पुनर्गठन करना, टीएमसी के तहत कथित “रिसाव” या भ्रष्टाचार को उजागर करना, और अंततः भाजपा सरकार के स्वयं के कल्याण आख्यान के तहत इसे राजनीतिक रूप से पुनः ब्रांड या विस्तारित करने का प्रयास करना। लक्ष्मीर भंडार को बरकरार रखने के अलावा, अधिकारी ने अवैध आव्रजन को रोकने के उद्देश्य से लंबित बाड़ लगाने के काम को पूरा करने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के लिए बांग्लादेश सीमा पर भूमि अधिग्रहण का रास्ता भी साफ कर दिया – एक मुद्दा जिसे भाजपा ने अभियान के दौरान आक्रामक रूप से सामने रखा था। भाजपा ने बार-बार टीएमसी सरकार पर एक छिद्रित सीमा की अनुमति देने का आरोप लगाया था, जिसने कथित तौर पर मुस्लिम-बहुल बांग्लादेश से बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों को भारत में प्रवेश करने और चुनावी समर्थन के बदले में अज्ञात रहने में सक्षम बनाया था। एक और बड़ी घोषणा केंद्र की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना, आयुष्मान भारत को बंगाल में लागू करना थी। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम वाली सभी केंद्रीय कल्याण योजनाएं अब राज्य में लागू की जाएंगी, जो कई केंद्र सरकार के कार्यक्रमों के लिए बनर्जी के लंबे समय से चले आ रहे विरोध के उलट है। पूर्व मुख्यमंत्री ने अक्सर केंद्र प्रायोजित योजनाओं को अपनाने से इनकार कर दिया था जब बंगाल में पहले से ही अपने समानांतर संस्करण थे, जैसा कि आयुष्मान भारत के मामले में था। 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन ने राज्य के राजनीतिक इतिहास में सबसे बड़ी सफलता दर्ज की, जिसने भगवा पार्टी को बंगाल की प्रमुख राजनीतिक ताकत के रूप में मजबूती से स्थापित किया। 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद आक्रामक विस्तार के रूप में जो शुरू हुआ, उसका समापन भाजपा द्वारा राज्य में अपनी पहली सरकार बनाने के साथ हुआ, जिसने नाटकीय रूप से बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य को नया आकार दिया। उस उभार के केंद्र में अधिकारी थे, जो 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी से अलग होने के बाद बंगाल

फीफा वर्ल्ड कप में यलो फीवर:हिट गाने ‘यलो’ की तर्ज पर 9 देशों की किट का रंग पीला; जर्सी का बॉब मार्ले को ट्रिब्यूट

फीफा वर्ल्ड कप में यलो फीवर:हिट गाने ‘यलो’ की तर्ज पर 9 देशों की किट का रंग पीला; जर्सी का बॉब मार्ले को ट्रिब्यूट

अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा की संयुक्त मेजबानी में होने वाले 48 टीमों के फीफा वर्ल्ड कप में इस बार एक खास रंग का खुमार सिर चढ़कर बोल रहा है। यह रंग है पीला। दुनिया के मशहूर रॉक बैंड ‘कोल्डप्ले’ के सुपरहिट गाने ‘यलो’ की तर्ज पर इस बार 9 देशों ने अपनी होम या अवे किट के लिए सुनहरे और पीले रंग को चुना है। दिलचस्प बात यह है कि वर्ल्ड कप फाइनल के हाफ-टाइम शो में यही कोल्डप्ले बैंड अपनी धुनों का जादू बिखेरता नजर आएगा। पीली जर्सी का जिक्र हो और ब्राजील का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। बास्केटबॉल लेजेंड माइकल जॉर्डन के साथ कोलैबोरेशन वाली जर्सी के भारी बज के बावजूद, ब्राजील की असली पहचान उसकी पारंपरिक ‘क्लीन यलो’ होम जर्सी ही है, जो इस बार भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। वहीं, दक्षिणी गोलार्ध के रग्बी दिग्गज देश ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका भी अपनी पारंपरिक ‘यलो-गोल्ड’ जर्सी में नजर आएंगे। ऑस्ट्रेलिया को मेजबान अमेरिका, पराग्वे और तुर्किए के साथ रखा गया है, जहां उन पर खासी नजर रहेगी। वहीं, दक्षिण अफ्रीकी टीम मैक्सिको की धरती पर चेक रिपब्लिक और दक्षिण कोरिया से भिड़ेगा। दूसरी ओर, कोलंबिया ने दशकों पुरानी लाल-नीले ट्रिमिंग्स वाली सिंपल पीली जर्सी रखी है। लेकिन पहली बार उतर रहे जमैका की जर्सी इस बार कोलंबिया को भी फीका कर सकती है। जमैका की किट म्यूजिक लेजेंड बॉब मार्ले को ट्रिब्यूट है। इसमें बोल्ड गोल्ड, हरे और रूबी लाल रंग के साथ साउंड वेव्स, विनाइल रिकॉर्ड्स और कैसेट पैटर्न को उकेरा गया है। इसके अलावा ‘ब्लैकस्टार’ घाना की टीम भी पीली जर्सी में नजर आएगी। स्वीडन की जर्सी इस बार 70 के दशक की एनर्जी से प्रेरित है। इसमें उस दौर की जींस और पारंपरिक स्वीडिश लोक परिधानों पर मिलने वाली खास ‘फ्लावर स्टिचिंग’ (फूलों की कढ़ाई) की झलक दिखेगी। कुल मिलाकर टूर्नामेंट में सफेद रंग के अलावा लाल और नीला रंग अभी भी सबसे ज्यादा लोकप्रिय बेस कलर है। हालांकि, इस वर्ल्ड कप में फैंस को नाइजीरिया की क्रिएटिव जर्सी और इटली की टीम की कमी बहुत खलेगी। इटली के फैंस वर्ल्ड कप में अपनी टीम के न होने के गम को भुलाने के लिए कोल्डप्ले के मशहूर दर्द भरे गीत- ‘फिक्स यू’, ‘लॉस्ट’ और ‘द हार्डेस्ट पार्ट’ सुन सकते हैं। टूर्नामेंट के ग्रुप ई में पीले रंग का सबसे ज्यादा दबदबा टूर्नामेंट के ग्रुप ई में पीले रंग का सबसे ज्यादा दबदबा है। पहली बार वर्ल्ड कप खेल रहा कुराकाओ हल्के पीले रंग की जर्सी पहनकर उतरेगा, जिसके कंधों पर विंटेज रेट्रो स्ट्राइप्स हैं। इसी ग्रुप में इक्वाडोर भी है, जिसकी बोल्ड पीली जर्सी के कॉलर पर लिखा है- ‘सपना देखो, आगे बढ़ो और इतिहास बनाओ।’ आइवरी कोस्ट ने भी पीले रंग के बेस में हल्का नारंगी शेड चुना है।

नेतन्याहू बोले- ईरान के नए सुप्रीम लीडर जिंदा:बंकर में छिपे, सत्ता पर पिता खामेनेई जैसी पकड़ नहीं, जनता के विद्रोह का डर सता रहा

नेतन्याहू बोले- ईरान के नए सुप्रीम लीडर जिंदा:बंकर में छिपे, सत्ता पर पिता खामेनेई जैसी पकड़ नहीं, जनता के विद्रोह का डर सता रहा

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई जिंदा हैं, लेकिन उनकी सत्ता पर पकड़ उनके पिता अली खामेनेई जैसी मजबूत नहीं है। CBS न्यूज के शो ‘60 मिनट्स’ को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि मुजतबा किसी बंकर या गुप्त जगह पर छिपे हुए हैं और वहीं से सत्ता संभालने की कोशिश कर रहे हैं। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान इस समय 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे कमजोर दौर में है। उनके मुताबिक, शासन के भीतर दरारें बढ़ रही हैं और अलग-अलग गुटों में मतभेद सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संघर्ष जारी रखना चाहते हैं, जबकि दूसरे लोगों को डर है कि इससे अर्थव्यवस्था टूट जाएगी और जनता सड़कों पर उतर सकती है। नेतन्याहू ने कहा कि ईरानी शासन को सबसे ज्यादा डर अपनी ही जनता से है। उन्होंने दावा किया कि इजराइल और अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान में विरोध प्रदर्शन बढ़े और लोगों ने शासन के खिलाफ आवाज उठाई। अमेरिका-इजराइल के हमले में घायल हुए थे मुजबता ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमले में घायल हुए थे। इसके बाद से वह गुप्त ठिकाने पर रह रहे हैं और डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के ठिकाने पर हमला किया था। दावा किया गया है कि उसी हमले में मुजतबा खामेनेई घायल हो गए थे। हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई, उनकी पत्नी और बेटे की मौत हो गई थी। बताया गया कि मुजतबा खामेनेई की हालत गंभीर रही है। उनके एक पैर का तीन बार ऑपरेशन किया गया है और अब उन्हें नकली पैर लगाना पड़ सकता है। एक हाथ की भी सर्जरी हुई है और वह धीरे-धीरे ठीक हो रहा है। उनके चेहरे और होंठ बुरी तरह जल गए हैं। इस वजह से उन्हें बोलने में परेशानी हो रही है और आगे प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, जो पेशे से हार्ट सर्जन हैं, और स्वास्थ्य मंत्री भी उनके इलाज में शामिल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बड़े अधिकारी और सेना के कमांडर उनसे मिलने नहीं जाते, क्योंकि उन्हें डर है कि इजराइल उनके जरिए ठिकाने का पता लगा सकता है। नेतन्याहू बोले- ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत नुकसान पहुंचा नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ हाल की कार्रवाई में पेट्रोकेमिकल प्लांट, स्टील प्लांट और मिसाइल निर्माण से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। उनके मुताबिक, इससे ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत दोनों को नुकसान पहुंचा है। इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनके मुताबिक, ईरान के पास अब भी एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है, कई परमाणु केंद्र सक्रिय हैं और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल इस बात पर सहमत हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो दोबारा सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर आर्थिक दबाव और समझौते से लक्ष्य हासिल हो जाए तो सैन्य कार्रवाई जरूरी नहीं होगी। नेतन्याहू का दावा- हमला नहीं करते तो ईरान एक-दो महीने में परमाणु बना लेता इंटरव्यू में नेतन्याहू ने दावा किया कि अगर इजराइल और अमेरिका ने हाल में कार्रवाई नहीं की होती, तो ईरान एक-दो महीने में परमाणु बम बना सकता था। उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित करने की कोशिश कर रहा था। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान ऐसा देश है, जो खुले तौर पर अमेरिका और इजराइल के विनाश की बात करता है। उनके मुताबिक, ईरान की मिसाइल क्षमता भविष्य में अमेरिका तक हमला करने की स्थिति में पहुंच सकती थी। इसी बीच, नेतन्याहू ने यह भी कहा कि ईरानी शासन का कमजोर होना हिजबुल्लाह, हमास और हूती जैसे संगठनों को भी प्रभावित करेगा। उनके मुताबिक, ये सभी संगठन ईरान के समर्थन पर टिके हैं और अगर तेहरान कमजोर हुआ तो इनकी ताकत भी घटेगी। उन्होंने दावा किया कि युद्ध से पहले हिजबुल्लाह के पास करीब डेढ़ लाख मिसाइलें और रॉकेट थे। इजराइल ने इनमें से 90% से ज्यादा नष्ट कर दिए हैं, लेकिन खतरा अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत दोनों को नुकसान पहुंचा सोशल मीडिया और अमेरिका में इजराइल की छवि को लेकर पूछे गए सवाल पर नेतन्याहू ने कहा कि कई विदेशी ताकतें बॉट फार्म और फर्जी अकाउंट के जरिए इजराइल विरोधी माहौल बना रही हैं। उन्होंने कहा कि इसका असर खासतौर पर युवा अमेरिकियों पर पड़ा है। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इजराइल आने वाले वर्षों में अमेरिकी सैन्य आर्थिक मदद को धीरे-धीरे खत्म करना चाहता है। उनके मुताबिक, इजराइल अब मदद लेने वाले देश की बजाय अमेरिका का बराबरी वाला साझेदार बनना चाहता है। उन्होंने कहा कि अगले 10 साल में अमेरिकी सैन्य सहायता को शून्य तक लाने की योजना बनाई जा सकती है। साथ ही इजराइल खुफिया जानकारी, तकनीक और मिसाइल डिफेंस जैसे क्षेत्रों में अमेरिका के साथ साझेदारी बढ़ाना चाहता है।

तेलुगु एक्टर भरत कांत का सड़क हादसे में निधन:ट्रक से कार टकराई, करीबी दोस्त बिग बॉस फेम आशु रेड्डी ने की इमोशनल पोस्ट

तेलुगु एक्टर भरत कांत का सड़क हादसे में निधन:ट्रक से कार टकराई, करीबी दोस्त बिग बॉस फेम आशु रेड्डी ने की इमोशनल पोस्ट

तेलुगु एक्टर भरत कांत की हैदराबाद में एक सड़क हादसे में मौत हो गई। इस हादसे में सिनेमैटोग्राफर जी. साई त्रिलोक की भी जान चली गई। दुर्घटना आदिबाटला पुलिस स्टेशन क्षेत्र में आउटर रिंग रोड (ORR) के एग्जिट नंबर 12 के पास हुई। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि हादसा रविवार देर रात हुआ, जब कार पीछे से एक ट्रक से टकरा गई। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। आदिबाटला पुलिस ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच जारी है। भरत कांत ने 2021 की फिल्म ग्रामम और 2024 की फिल्म टेनेंट में काम किया था। उन्होंने वेब सीरीज गीतांजलि और पार्वती परमेश्वरुलु में भी एक्टिंग की थी। भरत कांत के निधन पर आशु रेड्डी ने दुख जताया बिग बॉस फेम और टीवी एक्ट्रेस आशु रेड्डी ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल पोस्ट शेयर कर भरत कांत के निधन पर दुख जताया है। भरत कांत उनके करीबी दोस्त थे। आशु रेड्डी ने इंस्टाग्राम पर भरत के साथ अपनी कुछ तस्वीरें और वीडियो शेयर किए। उन्होंने लिखा, “तुम्हारे बिना जो खालीपन आया है, वह कभी नहीं भरेगा। तुम हमेशा मेरे दिल में रहोगे।” उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “मुझे आपके निधन की खबर पर विश्वास नहीं हो रहा है। काश यह सच न होता। हम दोनों ने साथ में जो पल बिताए और जो प्यार आपने मुझे दिया, उसे मैं कभी नहीं भूलूंगी। आपके जाने का दुख कभी कम नहीं होगा। आप हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।”

तेलुगु एक्टर भरत कांत का सड़क हादसे में निधन:ट्रक से कार टकराई, करीबी दोस्त बिग बॉस फेम आशु रेड्डी ने की इमोशनल पोस्ट

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तेलुगु एक्टर भरत कांत की हैदराबाद में एक सड़क हादसे में मौत हो गई। इस हादसे में सिनेमैटोग्राफर जी. साई त्रिलोक की भी जान चली गई। दुर्घटना आदिबाटला पुलिस स्टेशन क्षेत्र में आउटर रिंग रोड (ORR) के एग्जिट नंबर 12 के पास हुई। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि हादसा रविवार देर रात हुआ, जब कार पीछे से एक ट्रक से टकरा गई। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। आदिबाटला पुलिस ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच जारी है। भरत कांत ने 2021 की फिल्म ग्रामम और 2024 की फिल्म टेनेंट में काम किया था। उन्होंने वेब सीरीज गीतांजलि और पार्वती परमेश्वरुलु में भी एक्टिंग की थी। भरत कांत के निधन पर आशु रेड्डी ने दुख जताया बिग बॉस फेम और टीवी एक्ट्रेस आशु रेड्डी ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल पोस्ट शेयर कर भरत कांत के निधन पर दुख जताया है। भरत कांत उनके करीबी दोस्त थे। आशु रेड्डी ने इंस्टाग्राम पर भरत के साथ अपनी कुछ तस्वीरें और वीडियो शेयर किए। उन्होंने लिखा, “तुम्हारे बिना जो खालीपन आया है, वह कभी नहीं भरेगा। तुम हमेशा मेरे दिल में रहोगे।” उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “मुझे आपके निधन की खबर पर विश्वास नहीं हो रहा है। काश यह सच न होता। हम दोनों ने साथ में जो पल बिताए और जो प्यार आपने मुझे दिया, उसे मैं कभी नहीं भूलूंगी। आपके जाने का दुख कभी कम नहीं होगा। आप हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।”