Saturday, 13 Jun 2026 | 08:07 PM

Trending :

EXCLUSIVE

नेतन्याहू बोले- ईरान के नए सुप्रीम लीडर जिंदा:बंकर में छिपे, सत्ता पर पिता खामेनेई जैसी पकड़ नहीं, जनता के विद्रोह का डर सता रहा

नेतन्याहू बोले- ईरान के नए सुप्रीम लीडर जिंदा:बंकर में छिपे, सत्ता पर पिता खामेनेई जैसी पकड़ नहीं, जनता के विद्रोह का डर सता रहा

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई जिंदा हैं, लेकिन उनकी सत्ता पर पकड़ उनके पिता अली खामेनेई जैसी मजबूत नहीं है। CBS न्यूज के शो ‘60 मिनट्स’ को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि मुजतबा किसी बंकर या गुप्त जगह पर छिपे हुए हैं और वहीं से सत्ता संभालने की कोशिश कर रहे हैं। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान इस समय 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे कमजोर दौर में है। उनके मुताबिक, शासन के भीतर दरारें बढ़ रही हैं और अलग-अलग गुटों में मतभेद सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संघर्ष जारी रखना चाहते हैं, जबकि दूसरे लोगों को डर है कि इससे अर्थव्यवस्था टूट जाएगी और जनता सड़कों पर उतर सकती है। नेतन्याहू ने कहा कि ईरानी शासन को सबसे ज्यादा डर अपनी ही जनता से है। उन्होंने दावा किया कि इजराइल और अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान में विरोध प्रदर्शन बढ़े और लोगों ने शासन के खिलाफ आवाज उठाई। अमेरिका-इजराइल के हमले में घायल हुए थे मुजबता ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमले में घायल हुए थे। इसके बाद से वह गुप्त ठिकाने पर रह रहे हैं और डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के ठिकाने पर हमला किया था। दावा किया गया है कि उसी हमले में मुजतबा खामेनेई घायल हो गए थे। हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई, उनकी पत्नी और बेटे की मौत हो गई थी। बताया गया कि मुजतबा खामेनेई की हालत गंभीर रही है। उनके एक पैर का तीन बार ऑपरेशन किया गया है और अब उन्हें नकली पैर लगाना पड़ सकता है। एक हाथ की भी सर्जरी हुई है और वह धीरे-धीरे ठीक हो रहा है। उनके चेहरे और होंठ बुरी तरह जल गए हैं। इस वजह से उन्हें बोलने में परेशानी हो रही है और आगे प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, जो पेशे से हार्ट सर्जन हैं, और स्वास्थ्य मंत्री भी उनके इलाज में शामिल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बड़े अधिकारी और सेना के कमांडर उनसे मिलने नहीं जाते, क्योंकि उन्हें डर है कि इजराइल उनके जरिए ठिकाने का पता लगा सकता है। नेतन्याहू बोले- ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत नुकसान पहुंचा नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ हाल की कार्रवाई में पेट्रोकेमिकल प्लांट, स्टील प्लांट और मिसाइल निर्माण से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। उनके मुताबिक, इससे ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत दोनों को नुकसान पहुंचा है। इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनके मुताबिक, ईरान के पास अब भी एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है, कई परमाणु केंद्र सक्रिय हैं और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल इस बात पर सहमत हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो दोबारा सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर आर्थिक दबाव और समझौते से लक्ष्य हासिल हो जाए तो सैन्य कार्रवाई जरूरी नहीं होगी। नेतन्याहू का दावा- हमला नहीं करते तो ईरान एक-दो महीने में परमाणु बना लेता इंटरव्यू में नेतन्याहू ने दावा किया कि अगर इजराइल और अमेरिका ने हाल में कार्रवाई नहीं की होती, तो ईरान एक-दो महीने में परमाणु बम बना सकता था। उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित करने की कोशिश कर रहा था। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान ऐसा देश है, जो खुले तौर पर अमेरिका और इजराइल के विनाश की बात करता है। उनके मुताबिक, ईरान की मिसाइल क्षमता भविष्य में अमेरिका तक हमला करने की स्थिति में पहुंच सकती थी। इसी बीच, नेतन्याहू ने यह भी कहा कि ईरानी शासन का कमजोर होना हिजबुल्लाह, हमास और हूती जैसे संगठनों को भी प्रभावित करेगा। उनके मुताबिक, ये सभी संगठन ईरान के समर्थन पर टिके हैं और अगर तेहरान कमजोर हुआ तो इनकी ताकत भी घटेगी। उन्होंने दावा किया कि युद्ध से पहले हिजबुल्लाह के पास करीब डेढ़ लाख मिसाइलें और रॉकेट थे। इजराइल ने इनमें से 90% से ज्यादा नष्ट कर दिए हैं, लेकिन खतरा अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत दोनों को नुकसान पहुंचा सोशल मीडिया और अमेरिका में इजराइल की छवि को लेकर पूछे गए सवाल पर नेतन्याहू ने कहा कि कई विदेशी ताकतें बॉट फार्म और फर्जी अकाउंट के जरिए इजराइल विरोधी माहौल बना रही हैं। उन्होंने कहा कि इसका असर खासतौर पर युवा अमेरिकियों पर पड़ा है। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इजराइल आने वाले वर्षों में अमेरिकी सैन्य आर्थिक मदद को धीरे-धीरे खत्म करना चाहता है। उनके मुताबिक, इजराइल अब मदद लेने वाले देश की बजाय अमेरिका का बराबरी वाला साझेदार बनना चाहता है। उन्होंने कहा कि अगले 10 साल में अमेरिकी सैन्य सहायता को शून्य तक लाने की योजना बनाई जा सकती है। साथ ही इजराइल खुफिया जानकारी, तकनीक और मिसाइल डिफेंस जैसे क्षेत्रों में अमेरिका के साथ साझेदारी बढ़ाना चाहता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
भारत में एलपीजी संकट, बिना गैस के खाना पकाने, स्वस्थ भोजन रेसिपी, आहार युक्तियाँ जानें

March 12, 2026/
5:57 pm

बिना गैस की बनी डिश | छवि: एआई/फ्रीपिक स्वस्थ नाश्ता और स्नैक रेसिपी: यहां देखें भागदौड़ भरी जिंदगी में हर...

India vs South Africa Live Score, T20 World Cup 2026 Super 8s: Follow Scorecard And Match Action From Ahmedabad. (Picture Credit: AFP)

February 22, 2026/
7:11 pm

आखरी अपडेट:22 फरवरी, 2026, 19:11 IST अखिलेश यादव ने केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक को 100 विधायक जुटाने पर...

authorimg

April 3, 2026/
12:42 pm

Health Risks of Early Menopause : आजकल कई रिपोर्ट्स और सर्वे यह इशारा कर रहे हैं कि भारत में महिलाएं...

शाजापुर में गर्मी बढ़ी, तेज धूप ने बढ़ाई परेशानी:जमकर तपाएगा अप्रैल का पहला सप्ताह, तापमान 40 डिग्री तक पहुंचने के आसार

March 24, 2026/
1:28 pm

शाजापुर में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। तीन दिन पहले बादलों के कारण मिली राहत के बाद,...

Netanyahu Trump Secret Meeting: Iran Attack Decision

April 8, 2026/
12:48 pm

वॉशिंगटन डीसी14 मिनट पहले कॉपी लिंक तारीख: 11 फरवरी जगह: व्हाइट हाउस, वॉशिंगटन डीसी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सुबह...

राजनीति

नेतन्याहू बोले- ईरान के नए सुप्रीम लीडर जिंदा:बंकर में छिपे, सत्ता पर पिता खामेनेई जैसी पकड़ नहीं, जनता के विद्रोह का डर सता रहा

नेतन्याहू बोले- ईरान के नए सुप्रीम लीडर जिंदा:बंकर में छिपे, सत्ता पर पिता खामेनेई जैसी पकड़ नहीं, जनता के विद्रोह का डर सता रहा

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई जिंदा हैं, लेकिन उनकी सत्ता पर पकड़ उनके पिता अली खामेनेई जैसी मजबूत नहीं है। CBS न्यूज के शो ‘60 मिनट्स’ को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि मुजतबा किसी बंकर या गुप्त जगह पर छिपे हुए हैं और वहीं से सत्ता संभालने की कोशिश कर रहे हैं। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान इस समय 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे कमजोर दौर में है। उनके मुताबिक, शासन के भीतर दरारें बढ़ रही हैं और अलग-अलग गुटों में मतभेद सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संघर्ष जारी रखना चाहते हैं, जबकि दूसरे लोगों को डर है कि इससे अर्थव्यवस्था टूट जाएगी और जनता सड़कों पर उतर सकती है। नेतन्याहू ने कहा कि ईरानी शासन को सबसे ज्यादा डर अपनी ही जनता से है। उन्होंने दावा किया कि इजराइल और अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान में विरोध प्रदर्शन बढ़े और लोगों ने शासन के खिलाफ आवाज उठाई। अमेरिका-इजराइल के हमले में घायल हुए थे मुजबता ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमले में घायल हुए थे। इसके बाद से वह गुप्त ठिकाने पर रह रहे हैं और डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के ठिकाने पर हमला किया था। दावा किया गया है कि उसी हमले में मुजतबा खामेनेई घायल हो गए थे। हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई, उनकी पत्नी और बेटे की मौत हो गई थी। बताया गया कि मुजतबा खामेनेई की हालत गंभीर रही है। उनके एक पैर का तीन बार ऑपरेशन किया गया है और अब उन्हें नकली पैर लगाना पड़ सकता है। एक हाथ की भी सर्जरी हुई है और वह धीरे-धीरे ठीक हो रहा है। उनके चेहरे और होंठ बुरी तरह जल गए हैं। इस वजह से उन्हें बोलने में परेशानी हो रही है और आगे प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, जो पेशे से हार्ट सर्जन हैं, और स्वास्थ्य मंत्री भी उनके इलाज में शामिल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बड़े अधिकारी और सेना के कमांडर उनसे मिलने नहीं जाते, क्योंकि उन्हें डर है कि इजराइल उनके जरिए ठिकाने का पता लगा सकता है। नेतन्याहू बोले- ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत नुकसान पहुंचा नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ हाल की कार्रवाई में पेट्रोकेमिकल प्लांट, स्टील प्लांट और मिसाइल निर्माण से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। उनके मुताबिक, इससे ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत दोनों को नुकसान पहुंचा है। इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनके मुताबिक, ईरान के पास अब भी एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है, कई परमाणु केंद्र सक्रिय हैं और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल इस बात पर सहमत हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो दोबारा सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर आर्थिक दबाव और समझौते से लक्ष्य हासिल हो जाए तो सैन्य कार्रवाई जरूरी नहीं होगी। नेतन्याहू का दावा- हमला नहीं करते तो ईरान एक-दो महीने में परमाणु बना लेता इंटरव्यू में नेतन्याहू ने दावा किया कि अगर इजराइल और अमेरिका ने हाल में कार्रवाई नहीं की होती, तो ईरान एक-दो महीने में परमाणु बम बना सकता था। उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित करने की कोशिश कर रहा था। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान ऐसा देश है, जो खुले तौर पर अमेरिका और इजराइल के विनाश की बात करता है। उनके मुताबिक, ईरान की मिसाइल क्षमता भविष्य में अमेरिका तक हमला करने की स्थिति में पहुंच सकती थी। इसी बीच, नेतन्याहू ने यह भी कहा कि ईरानी शासन का कमजोर होना हिजबुल्लाह, हमास और हूती जैसे संगठनों को भी प्रभावित करेगा। उनके मुताबिक, ये सभी संगठन ईरान के समर्थन पर टिके हैं और अगर तेहरान कमजोर हुआ तो इनकी ताकत भी घटेगी। उन्होंने दावा किया कि युद्ध से पहले हिजबुल्लाह के पास करीब डेढ़ लाख मिसाइलें और रॉकेट थे। इजराइल ने इनमें से 90% से ज्यादा नष्ट कर दिए हैं, लेकिन खतरा अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत दोनों को नुकसान पहुंचा सोशल मीडिया और अमेरिका में इजराइल की छवि को लेकर पूछे गए सवाल पर नेतन्याहू ने कहा कि कई विदेशी ताकतें बॉट फार्म और फर्जी अकाउंट के जरिए इजराइल विरोधी माहौल बना रही हैं। उन्होंने कहा कि इसका असर खासतौर पर युवा अमेरिकियों पर पड़ा है। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इजराइल आने वाले वर्षों में अमेरिकी सैन्य आर्थिक मदद को धीरे-धीरे खत्म करना चाहता है। उनके मुताबिक, इजराइल अब मदद लेने वाले देश की बजाय अमेरिका का बराबरी वाला साझेदार बनना चाहता है। उन्होंने कहा कि अगले 10 साल में अमेरिकी सैन्य सहायता को शून्य तक लाने की योजना बनाई जा सकती है। साथ ही इजराइल खुफिया जानकारी, तकनीक और मिसाइल डिफेंस जैसे क्षेत्रों में अमेरिका के साथ साझेदारी बढ़ाना चाहता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.