आंधी-बारिश में ताजमहल के पत्थर टूटकर गिर रहे:दीवारों में दरारें, रॉयल गेट भी बदहाल; पूर्व इंचार्ज बोले- अब ASI ठेकेदारों के भरोसे

ताजमहल करीब 373 साल पुराना हो चुका है। दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतों में शामिल इस स्मारक के रॉयल गेट (शाही दरवाजे) के पत्थर अब दरकने लगे हैं। दरवाजे की दीवारों में कई जगह दरारें आ गई हैं। कुछ पत्थर अपनी जगह से खिसक चुके हैं। शाही गेट अब आंधी और बारिश भी नहीं झेल पा रहा। पिछले महीने आंधी-बारिश के दौरान दो बार गेट के पत्थर टूटकर गिर चुके हैं। ये पत्थर मुगलकाल के हैं। इससे पहले भी ताजमहल परिसर के कई हिस्सों में पत्थर और जालियां टूट चुकी हैं। मुख्य मकबरे के पीछे यमुना नदी की तरफ लगी जालीदार रेलिंग भी तेज बारिश और आंधी नहीं झेल पाई। साल 2020 में यह रेलिंग गिर गई थी। पहले ताजा घटनाओं पर नजर डालते हैं… 7 अप्रैल 2026: आगरा में तेज आंधी और बारिश हुई। इस दौरान ताजमहल के रॉयल गेट के सफेद और लाल पत्थर निकलकर गिर गए। गनीमत रही कि कोई पर्यटक इसकी चपेट में नहीं आया। 30 अप्रैल 2026: आगरा में हल्की आंधी और बारिश हुई। इसके बावजूद रॉयल गेट के कमजोर हो चुके पत्थर इसे नहीं झेल पाए। सफेद पत्थर के 5 टुकड़े टूटकर नीचे गिर पड़े। अब कुछ पुरानी घटनाओं पर नजर डालिए… 31 मई 2024: ताजमहल के रॉयल गेट का एक पत्थर टूटकर गिर गया था। 20 दिसंबर 2024: ताजमहल के दक्षिणी गेट की दीवार से पत्थर टूटकर गिर गए थे। 29 मई 2020: ताजमहल में संगमरमर और लाल पत्थर की जालियां टूट गई थीं। पश्चिमी गेट की चूल टूटने से गेट टेढ़ा हो गया था। ये घटनाएं सिर्फ उदाहरण भर हैं। ताजमहल के कर्मचारी बताते हैं कि इसके अलावा भी कई बार और पत्थर और जालियां टूटकर गिर चुकी हैं। बदहाल हो चुका है रॉयल गेट ताजमहल का रॉयल गेट यानी शाही दरवाजा अब जर्जर हो चुका है। कई जगहों से पत्थर अपनी जगह छोड़ चुके हैं। दीवारों में दरारें दिखाई देने लगी हैं। पत्थर इतने पुराने हो गए हैं कि वे दीवारों से उखड़कर गिरने लगे हैं। लाल पत्थर से बने रॉयल गेट में नक्काशी के लिए लगाए गए सफेद और काले पत्थर भी निकल रहे हैं। कई जगह पत्थर झड़ने से दीवारों में गैप बन गया है। रॉयल गेट की बदहाली की 4 तस्वीरें… जानिए रॉयल गेट का इतिहास रॉयल गेट ताजमहल का मुख्य प्रवेश द्वार है। ताजमहल के पश्चिमी और पूर्वी गेट से प्रवेश करने के बाद पर्यटक फोरकोर्ट में पहुंचते हैं। यहां से इसी शाही दरवाजे के जरिए मुख्य मकबरे तक जाते हैं। पहले दक्षिणी गेट से आने वाले पर्यटक भी इसी दरवाजे के सामने पहुंचते थे। हालांकि, साल 2018 से दक्षिणी गेट बंद है। शाही दरवाजा भी उतना ही पुराना माना जाता है, जितना ताजमहल का मुख्य मकबरा। क्या कहते हैं जानकार आगरा के इतिहासकार राजकिशोर राजे बताते हैं कि शाही दरवाजे का निर्माण मुख्य मकबरे के साथ ही हुआ था। मुगलकाल में इसे शाही दरवाजा कहा जाता था। बाद में ब्रिटिश शासन के दौरान रॉयल गेट कहा जाने लगा। ताजमहल के पूर्व इंचार्ज व एएसआई में संरक्षण सहायक के पद से रिटायर्ड एसके कुलश्रेष्ठ कहते हैं कि समय के साथ पत्थरों की उम्र घट रही है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण संरक्षण नहीं होगा तो पत्थर टूटकर गिरेंगे। पहले संरक्षण का काम विभाग खुद कराता था। तब इंजीनियर ऐतिहासिक पहलुओं को ध्यान में रखकर काम करते थे। अब ज्यादातर काम ठेकेदारों पर निर्भर है। उनका मानना है कि ठेकेदार उतने अनुभवी नहीं हैं, जिसकी वजह से संरक्षण कार्य की क्वालिटी प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि गुणवत्ता गिरने की एक बड़ी वजह पुराने मैटेरियल का अब उपलब्ध न होना है। पहले निर्माण और संरक्षण में कंकड़ लाइम का इस्तेमाल होता था। अब न वैसा चूना मिल रहा है और न ही वैसा मोर्टार, जिसमें मजबूती देने वाले घटक मौजूद होते थे। एक साल में 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षित स्मारकों में ताजमहल का टिकट सबसे महंगा माना जाता है। ताजमहल में भारतीय पर्यटकों के लिए 50 रुपए, सार्क देशों के नागरिकों के लिए 540 रुपए और विदेशी पर्यटकों के लिए 1100 रुपए का टिकट है। मुख्य गुंबद तक जाने के लिए 200 रुपए का अतिरिक्त टिकट देना होता है। यानी पूरा ताजमहल देखने के लिए भारतीयों को 250 रुपए और विदेशी पर्यटकों को 1300 रुपए खर्च करने पड़ते हैं। एएसआई के आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में सिर्फ ऑफलाइन टिकटों से 105 करोड़ 49 लाख की कमाई हुई। ऑनलाइन टिकट की आय जोड़ने पर यह आंकड़ा 200 करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंच जाता है। जानें किस वर्ष कितनी आय रही देश के सभी संरक्षित स्मारकों में कमाई के मामले में ताजमहल आज भी सबसे आगे है। 1966 में पहली बार लगा था टिकट साल 1966 से पहले ताजमहल में प्रवेश पूरी तरह फ्री था। ताजमहल में पहली बार 1966 में टिकट व्यवस्था लागू की गई। उस समय टिकट की कीमत सिर्फ 20 पैसे रखी गई थी। अब बढ़ती पर्यटक संख्या को कंट्रोल करने के लिए स्टेप टिकट व्यवस्था लागू है। इसके तहत अलग-अलग श्रेणी के पर्यटकों के लिए अलग टिकट दर तय की गई है। ऐसे बढ़े टिकट के दाम संरक्षण पर ध्यान नहीं ताजमहल का रॉयल गेट ही नहीं, इसके अन्य हिस्से भी कई जगह से जर्जर हो चुके हैं। इसके बावजूद कमाई की तुलना में ताजमहल के संरक्षण कार्य पर उतना खर्च नहीं किया जा रहा। एएसआई के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में ताजमहल के संरक्षण कार्य पर लगभग 5 करोड़ रुपए खर्च किए गए। ASI के संरक्षण सहायक कलंदर बिंद कहते हैं- संरक्षण कार्य पर पूरा ध्यान दिया जाता है। एक साल में ताजमहल में लगभग 5 करोड़ के संरक्षण कार्य कराए गए हैं। 6 स्लाइड में जानिए ताजमहल का इतिहास… —————————— यह खबर भी पढ़ें…. 17 साल की गर्लफ्रेंड की हत्या करके लाश फेंकी:शादी का दबाव बना रही थी; प्रयागराज में घर से भगाया, उसी दिन मर्डर किया प्रयागराज में बॉयफ्रेंड ने नाबालिग गर्लफ्रेंड की दुप्पटे से गला घोंटकर हत्या कर दी। उसने चाकू से भी कई वार किए। फिर लाश को शारदा नहर के पास गड्ढे में फेंक दिया। ऊपर से झाड़ियां डाल दीं। ताकि कोई उसे देख न पाए। पढ़ें पूरी खबर…
तिरुवनंतपुरम का सिंहासन: केरल के सीएम पद के लिए कांग्रेस में त्रिकोणीय लड़ाई | भारत समाचार

आखरी अपडेट:08 मई, 2026, 06:00 IST प्राथमिक दावेदार विपक्ष के निवर्तमान नेता वीडी सतीसन और एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल हैं। तीसरे अनुभवी, रमेश चेन्निथला, एक कारक बने हुए हैं केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ केरल में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर निर्णय लेने के लिए कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक के दौरान बोलते हुए, तिरुवनंतपुरम, गुरुवार, 7 मई, 2026। तस्वीर/पीटीआई 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद केरल राज्य एक ऐतिहासिक राजनीतिक चौराहे पर आ गया है। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के एक दशक के प्रभुत्व के बाद, राज्य वैकल्पिक सत्ता के अपने पारंपरिक पैटर्न पर लौट आया है, लेकिन एक ऐसी ताकत के साथ जिसने राजनीतिक प्रतिष्ठान को परेशान कर दिया है। 8 मई तक, संकट अब इस बारे में नहीं है कि सरकार बदलेगी या नहीं, बल्कि यह है कि नए प्रशासन का नेतृत्व कौन करेगा और वामपंथी आधी सदी में अपनी सबसे महत्वपूर्ण हार से कैसे निपटेंगे। 2026 के चुनाव परिणामों ने इस संकट को कैसे जन्म दिया? यह संकट 4 मई को तब शुरू हुआ जब वोटों की गिनती में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की भारी जीत सामने आई। 2021 के नतीजों में एक नाटकीय उलटफेर में, एलडीएफ की सीट हिस्सेदारी 99 से घटकर सिर्फ 35 रह गई, जबकि यूडीएफ ने 140 सदस्यीय सदन में 97 सीटें हासिल कीं। हार का पैमाना कैबिनेट में सबसे अधिक दिखाई दिया; पिनाराई विजयन सरकार के 13 मंत्रियों को अपनी सीट गंवानी पड़ी। यहां तक कि स्वयं मुख्यमंत्री को भी अपने गढ़ धर्मदाम में अभूतपूर्व डर का सामना करना पड़ा, शुरुआती दौर में पिछड़ने के बाद अंततः काफी कम अंतर से आगे निकल गए। इस “हार” ने “कैप्टन” के युग को प्रभावी ढंग से समाप्त कर दिया है और सीपीआई (एम) को 50 वर्षों में पहली बार भारत में एक भी राज्य सरकार के बिना छोड़ दिया है। कांग्रेस नेतृत्व की लड़ाई में सबसे आगे कौन हैं? यूडीएफ के सरकार बनाने की तैयारी के साथ, कांग्रेस पार्टी के भीतर “तीन-तरफ़ा नेतृत्व युद्ध” छिड़ गया है। प्राथमिक दावेदार विपक्ष के निवर्तमान नेता वीडी सतीसन और एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल हैं। कई जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं द्वारा सतीसन को यूडीएफ के “प्रतिरोध के मानवीय चेहरे” के वास्तुकार के रूप में श्रेय दिया जा रहा है, जबकि वेणुगोपाल को एक शक्तिशाली राष्ट्रीय व्यक्ति के रूप में देखा जाता है जिसे आलाकमान सुनता है। तीसरे अनुभवी, रमेश चेन्निथला, एक कारक बने हुए हैं, जिन्हें उनके प्रशासनिक अनुभव के लिए एसएनडीपी योगम जैसे प्रभावशाली सामाजिक समूहों का समर्थन प्राप्त है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने गतिरोध को तोड़ने और अगले मुख्यमंत्री को अंतिम रूप देने के लिए नवनिर्वाचित विधायकों के साथ एक-पर-एक परामर्श करने के लिए पर्यवेक्षकों मुकुल वासनिक और अजय माकन को तिरुवनंतपुरम भेजा है। एलडीएफ के पतन के पीछे प्रमुख कारक क्या थे? पर्यवेक्षक गहरे बैठे सत्ता विरोधी लहर और आंतरिक दरार के संयोजन की ओर इशारा करते हैं। सरकार आर्थिक चिंताओं – जिसमें बढ़ती बेरोज़गारी और कृषि संकट – के साथ-साथ वन क्षेत्रों में “बफ़र ज़ोन” विवाद भी शामिल थी, के बोझ तले दबी हुई थी। इसके अलावा, कट्टरपंथी समूहों के समर्थन का स्वागत करने के वामपंथियों के फैसले की उसके पारंपरिक धर्मनिरपेक्ष आधार ने तीखी आलोचना की। आंतरिक असहमति ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पयन्नूर जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में, यूडीएफ द्वारा समर्थित विद्रोही उम्मीदवारों ने सीपीआई (एम) नेतृत्व को सफलतापूर्वक चुनौती दी, इस धारणा का फायदा उठाते हुए कि पार्टी “अहंकारी” और “पहुंच योग्य नहीं” हो गई है। इस धारणा को चिकित्सा उपचार के लिए मुख्यमंत्री की लगातार विदेश यात्राओं से और बल मिला, जबकि राज्य के अपने स्वास्थ्य सेवा मॉडल को जांच का सामना करना पड़ा। सरकार गठन की वर्तमान स्थिति क्या है? आज तक, पिनाराई विजयन ने नए मंत्रिमंडल के शपथ लेने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए अपना इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की औपचारिक रूप से अपने नेता का चुनाव करने के लिए इंदिरा भवन में बैठक होने की उम्मीद है। हालाँकि, लॉबिंग चरम पर पहुंच गई है, राज्य भर में विभिन्न गुटों के समर्थन में पोस्टर और सोशल मीडिया अभियान दिखाई दे रहे हैं। यूडीएफ के लिए तात्कालिक चुनौती एक स्थिर प्रशासन प्रदान करने के लिए इन आंतरिक प्रतिद्वंद्विताओं का प्रबंधन करना है। वामपंथियों के लिए, यह संकट गहन आत्मनिरीक्षण की अवधि का प्रतीक है क्योंकि वे अपने “द्रविड़-आसन्न” कल्याण मॉडल को मतदाताओं के साथ सामंजस्य बिठाने का प्रयास करते हैं जिन्होंने निर्णायक रूप से नेतृत्व शैली में बदलाव का आह्वान किया है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया तिरुवनंतपुरम का सिंहासन: केरल के सीएम पद के लिए कांग्रेस में तीन-तरफ़ा लड़ाई अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल चुनाव(टी)कांग्रेस(टी)केरल चुनाव(टी)पोल्स(टी)विधानसभा चुनाव(टी)वाम(टी)मुख्यमंत्री(टी)पिनाराई विजयन
खिलाड़ियों के कमरे तक पहुंचे बाहरी लोग:IPL के एंटी-करप्शन नियमों में चूक; टीमों को चेतावनी, नियम तोड़ने पर होगी कड़ी कार्रवाई

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के मौजूदा सीजन में सुरक्षा और एंटी करप्शन प्रोटोकॉल के उल्लंघन का मामला सामने आया है। BCCI की एंटी करप्शन एंड सिक्योरिटी यूनिट (ACSU) की रिपोर्ट के मुताबिक, कई मैचों के दौरान टीम के डगआउट, होटल और टीम बस में ऐसे लोग देखे गए, जिन्हें वहां रहने की अनुमति नहीं थी। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए BCCI सभी 10 फ्रेंचाइजी के लिए सख्त एडवाइजरी जारी करेगा। बोर्ड ने साफ किया है कि भविष्य में ऐसी गलती दोहराने पर कड़ा एक्शन लिया जाएगा। ACSU ने रिपोर्ट में जताई चिंता IPL के चेयरमैन अरुण धूमल ने पुष्टि की कि ACSU ने इस मामले पर बोर्ड को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। धूमल ने बताया, ‘एंटी-करप्शन यूनिट ने कुछ अनियमितताओं की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाहरी व्यक्ति डगआउट, टीम बस और होटल के उन एरिया में पाए गए जहां सिर्फ खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों को जाने की अनुमति है। ‘प्लेयर्स एंड मैच ऑफिशियल्स एरिया’ (PMOA) के अपने प्रोटोकॉल होते हैं। हम फ्रेंचाइजी से कहेंगे कि वे SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) का सख्ती से पालन करें ताकि टूर्नामेंट की निष्पक्षता बनी रहे।’ खिलाड़ियों के कमरों तक पहुंच रहे थे बाहरी लोग BCCI सचिव देवाजीत सैकिया ने इस मामले पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इस बार कुछ फ्रेंचाइजी और खिलाड़ियों के व्यवहार में खामियां देखी गई हैं। सैकिया के मुताबिक,’हमने देखा है कि बहुत से बाहरी लोग टीम के सदस्यों के साथ घूम रहे हैं। कुछ लोग बिना परमिशन के होटल के उन कमरों तक पहुंच रहे हैं जहां खिलाड़ी या टीम अधिकारी ठहरे हुए हैं। यह हमारे एंटी-करप्शन प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है।’ टीम मालिकों पर भी गिरेगी गाज! बोर्ड की नजर सिर्फ बाहरी लोगों पर नहीं, बल्कि टीम मालिकों और अधिकारियों पर भी है। सैकिया ने कहा,’यह भी देखा गया है कि कुछ टीम मालिक और बड़े अधिकारी उन जगहों पर खिलाड़ियों के साथ घुल-मिल रहे हैं जहां उनका जाना वर्जित है। हमने इसे बहुत गंभीरता से लिया है। हम एक एडवाइजरी जारी कर रहे हैं जिसे सख्ती से लागू किया जाएगा। इसके बाद अगर कोई भी उल्लंघन होता है, तो BCCI और IPL मैनेजमेंट कड़ी कार्रवाई करेगा।’ क्या होता है PMOA प्रोटोकॉल? सुरक्षा को लेकर पहले भी रहे हैं सख्त नियम BCCI IPL की साख को लेकर हमेशा संवेदनशील रहा है। 2013 के स्पॉट फिक्सिंग मामले के बाद एंटी-करप्शन यूनिट की भूमिका बढ़ गई है। हर टीम के साथ एक डेडिकेटेड ACSU अधिकारी तैनात रहता है, जो खिलाड़ियों की गतिविधियों और उनसे मिलने वाले लोगों पर नजर रखता है। मौजूदा रिपोर्ट बताती है कि इस बार निगरानी तंत्र में सेंध लगाने की कोशिश हुई, जिसे बोर्ड शुरुआती स्तर पर रोकना चाहता है।
खिलाड़ियों के कमरे तक पहुंचे बाहरी लोग:IPL के एंटी-करप्शन नियमों में चूक; टीमों को चेतावनी, नियम तोड़ने पर होगी कड़ी कार्रवाई

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के मौजूदा सीजन में सुरक्षा और एंटी करप्शन प्रोटोकॉल के उल्लंघन का मामला सामने आया है। BCCI की एंटी करप्शन एंड सिक्योरिटी यूनिट (ACSU) की रिपोर्ट के मुताबिक, कई मैचों के दौरान टीम के डगआउट, होटल और टीम बस में ऐसे लोग देखे गए, जिन्हें वहां रहने की अनुमति नहीं थी। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए BCCI सभी 10 फ्रेंचाइजी के लिए सख्त एडवाइजरी जारी करेगा। बोर्ड ने साफ किया है कि भविष्य में ऐसी गलती दोहराने पर कड़ा एक्शन लिया जाएगा। ACSU ने रिपोर्ट में जताई चिंता IPL के चेयरमैन अरुण धूमल ने पुष्टि की कि ACSU ने इस मामले पर बोर्ड को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। धूमल ने बताया, ‘एंटी-करप्शन यूनिट ने कुछ अनियमितताओं की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाहरी व्यक्ति डगआउट, टीम बस और होटल के उन एरिया में पाए गए जहां सिर्फ खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों को जाने की अनुमति है। ‘प्लेयर्स एंड मैच ऑफिशियल्स एरिया’ (PMOA) के अपने प्रोटोकॉल होते हैं। हम फ्रेंचाइजी से कहेंगे कि वे SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) का सख्ती से पालन करें ताकि टूर्नामेंट की निष्पक्षता बनी रहे।’ खिलाड़ियों के कमरों तक पहुंच रहे थे बाहरी लोग BCCI सचिव देवाजीत सैकिया ने इस मामले पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इस बार कुछ फ्रेंचाइजी और खिलाड़ियों के व्यवहार में खामियां देखी गई हैं। सैकिया के मुताबिक,’हमने देखा है कि बहुत से बाहरी लोग टीम के सदस्यों के साथ घूम रहे हैं। कुछ लोग बिना परमिशन के होटल के उन कमरों तक पहुंच रहे हैं जहां खिलाड़ी या टीम अधिकारी ठहरे हुए हैं। यह हमारे एंटी-करप्शन प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है।’ टीम मालिकों पर भी गिरेगी गाज! बोर्ड की नजर सिर्फ बाहरी लोगों पर नहीं, बल्कि टीम मालिकों और अधिकारियों पर भी है। सैकिया ने कहा,’यह भी देखा गया है कि कुछ टीम मालिक और बड़े अधिकारी उन जगहों पर खिलाड़ियों के साथ घुल-मिल रहे हैं जहां उनका जाना वर्जित है। हमने इसे बहुत गंभीरता से लिया है। हम एक एडवाइजरी जारी कर रहे हैं जिसे सख्ती से लागू किया जाएगा। इसके बाद अगर कोई भी उल्लंघन होता है, तो BCCI और IPL मैनेजमेंट कड़ी कार्रवाई करेगा।’ क्या होता है PMOA प्रोटोकॉल? सुरक्षा को लेकर पहले भी रहे हैं सख्त नियम BCCI IPL की साख को लेकर हमेशा संवेदनशील रहा है। 2013 के स्पॉट फिक्सिंग मामले के बाद एंटी-करप्शन यूनिट की भूमिका बढ़ गई है। हर टीम के साथ एक डेडिकेटेड ACSU अधिकारी तैनात रहता है, जो खिलाड़ियों की गतिविधियों और उनसे मिलने वाले लोगों पर नजर रखता है। मौजूदा रिपोर्ट बताती है कि इस बार निगरानी तंत्र में सेंध लगाने की कोशिश हुई, जिसे बोर्ड शुरुआती स्तर पर रोकना चाहता है।
सीरीज लुक्खे से एक्टिंग डेब्यू कर रहे किंग:कहा- बदनाम होकर लोग नाम कमाते हैं, पलक तिवारी बोलीं- ऑडिशन में रो पड़ी थी

रैपर और सिंगर किंग यानी अर्पण कुमार चंदेल अब एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं। वह वेब सीरीज लुक्खे से अपना एक्टिंग डेब्यू कर रहे हैं, जिसमें उनके साथ पलक तिवारी भी नजर आएंगी। यह सीरीज अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो चुकी है। रिलीज से पहले दैनिक भास्कर से खास बातचीत में दोनों कलाकारों ने अपने किरदार, ऑडिशन, दोस्ती, युवाओं पर ड्रग्स के असर, सोशल मीडिया और AI जैसे मुद्दों पर खुलकर बात की। प्रिंस ने जहां अपने किरदार ‘बदनाम’ की सोच समझाई, वहीं पलक ने ‘सनोबर’ के इमोशनल सफर से जुड़ी दिलचस्प बातें साझा कीं। सवाल: जब आपको ‘लुक्खे’ टाइटल के बारे में पता चला तो पहला रिएक्शन क्या था? जवाब/प्रिंस: मुझे पहले टाइटल नहीं, कहानी सुनाई गई थी। कहानी इतनी दमदार लगी कि तभी तय कर लिया था कि यह प्रोजेक्ट करना है। बाद में जब ‘लुक्खे’ नाम सुना तो लगा कि यह टाइटल कहानी पर बिल्कुल फिट बैठता है। सवाल: कहानी में ऐसी क्या बात थी जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब/प्रिंस: कहानी धीरे-धीरे खुलती है। इसमें ऐसे किरदार हैं जो बदनाम होकर नाम कमाते हैं। वही चीज मुझे सबसे ज्यादा दिलचस्प लगी। सवाल: पलक, आपको ‘लुक्खे’ कैसे मिला? जवाब/पलक तिवारी: पहले मुझे ऑडिशन की स्क्रिप्ट मिली। उसमें दो सीन थे और उन्हें पढ़कर मैं रो पड़ी। तभी लगा कि यह बहुत इमोशनल और असरदार कहानी है। सवाल: ऑडिशन का अनुभव कैसा रहा? जवाब/पलक: मैंने कई बार ऑडिशन दिए। करीब छह-सात बार बुलाया गया। फिर जब सिलेक्शन हुआ और पूरी कहानी पता चली, तब लगा कि जो मैंने सोचा था, यह उससे भी बेहतर है। सवाल: इतना काम करने के बाद भी आप ऑडिशन देती हैं? जवाब/पलक: बिल्कुल। मुझे लगता है कि ऑडिशन एक एक्टर का कर्तव्य है। बिना दिखाए कि आप किरदार कैसे निभाएंगे, सिर्फ रोल मांगना सही नहीं है। मुझे ऑडिशन देना पसंद है। सवाल: प्रिंस, आप भी ऑडिशन को जरूरी मानते हैं? जवाब/प्रिंस: हां। जैसे गायक को लगातार गाने बनाते रहना चाहिए, वैसे ही एक्टर के लिए ऑडिशन जरूरी हैं। इससे कलाकार खुद को और बेहतर करता है। सवाल: म्यूजिक से एक्टिंग में आना कितना अलग अनुभव था? जवाब/प्रिंस: मेरे लिए यह बहुत मजेदार रहा। ग्रीष्म और देबू ने कहानी इतनी अच्छे इरादे से बनाई थी कि उसे निभाने में और मजा आया। सवाल: आपका किरदार ‘बदनाम’ असल जिंदगी में आपसे कितना मिलता-जुलता है? जवाब/प्रिंस: काफी अलग है। बदनाम कई गलत फैसले लेता है, मैं वैसा नहीं हूं। लेकिन एक चीज मिलती है कि वह अपने परिवार और अपनों से बहुत प्यार करता है। सवाल: पलक, आपका किरदार ‘सनोबर’ आपसे कितना मिलता है? जवाब/पलक: हम दोनों काफी अलग हैं, लेकिन एक बात कॉमन है कि सनोबर अपने परिवार और अपनों को बहुत महत्व देती है। वह हर छोटी चीज के लिए शुक्रगुजार रहती है और यह बात मुझसे मिलती है। सवाल: क्या सनोबर की जिंदगी से आप खुद को जोड़ पाती हैं? जवाब/पलक: कुछ हद तक। लेकिन उसका बचपन बहुत मुश्किलों में बीता, जबकि मेरी परवरिश काफी सुरक्षित माहौल में हुई। इसलिए उसकी हर परेशानी से मैं रिलेट नहीं कर पाती। सवाल: सीरीज में ड्रग्स और गलत रास्तों की बात दिखाई गई है। युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे? जवाब/प्रिंस: यह शो सिर्फ ड्रग्स के बारे में नहीं है, बल्कि उसके नतीजों के बारे में है। अगर कोई खुद को इन किरदारों में देखता है, तो उसे समझना चाहिए कि गलत फैसलों का अंजाम क्या होता है। सवाल: अगर कोई युवा भटका हुआ मिले तो आप क्या सलाह देते हैं? जवाब/प्रिंस: सबसे पहले मैं उसे समझाने की कोशिश करता हूं कि जिंदगी में उसके लिए सबसे जरूरी क्या है। हर परेशानी वक्त के साथ गुजर जाती है, इसलिए किसी गलत चीज पर निर्भर होने की जरूरत नहीं है। सवाल: पलक, आप इस मुद्दे को कैसे देखती हैं? जवाब/पलक: आज के समय में इस पर बात करना बहुत जरूरी है। यह सिर्फ म्यूजिक इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है, स्कूल-कॉलेज और पूरी दुनिया में यह समस्या है। जितनी जागरूकता फैलेगी, उतना बेहतर होगा। सवाल: पलक, आपको प्रिंस का कौन सा गाना सबसे ज्यादा पसंद है? जवाब/पलक: मुझे इनके सारे गाने पसंद हैं। ‘Maeri Jaan’ से मैं इनके म्यूजिक से जुड़ी थी, लेकिन ‘लुक्खे’ में इनके लिखे गानों ने मुझे बहुत प्रभावित किया। खासकर ‘हम जी लेंगे’। सवाल: प्रिंस, ‘हम जी लेंगे’ आपके लिए खास क्यों है? जवाब/प्रिंस: क्योंकि यह गाना सिर्फ सीरीज के लिए नहीं, असल जिंदगी के लिए भी मायने रखता है। इसमें उम्मीद, प्यार और संघर्ष की बात है। सवाल: पलक के बारे में क्या कहना चाहेंगे? जवाब/प्रिंस: पलक बहुत मैच्योर और समझदार इंसान हैं। उन्होंने हमेशा पहल करके दोस्ती निभाई। उनका सबसे अच्छा गुण यह है कि वह किसी भी कमरे में जाकर लोगों को अपना बना लेती हैं। सवाल: AI के बढ़ते इस्तेमाल को आप कैसे देखते हैं? जवाब/प्रिंस: AI एक अच्छा टूल है, लेकिन इंसानी भावनाओं और एहसासों को रिप्लेस नहीं कर सकता। मैं हमेशा असली और दिल से बनाई चीजों पर भरोसा करता हूं। सवाल: मदर्स डे पर क्या खास करने वाली हैं? जवाब/पलक: उस दिन जल्दी घर जाऊंगी और मम्मी के साथ ज्यादा समय बिताऊंगी। मां को ज्यादा कुछ नहीं चाहिए होता, बस साथ चाहिए। सवाल: आपकी वायरल सोशल मीडिया वीडियोज पर क्या कहना चाहेंगे? जवाब/प्रिंस: मैं इंटरनेट पर ज्यादा एक्टिव नहीं रहता। रील्स और वायरल चीजों से थोड़ा दूर ही रहता हूं। सवाल: सबसे यादगार DM कौन सा था? जवाब/प्रिंस: हाल ही में एक लड़के का मैसेज आया था, जो बहुत मुश्किल दौर से गुजर रहा था। उसकी बात पढ़कर उसकी परेशानी महसूस हुई और मैंने उसकी मदद की। सवाल: पलक, आप DM पढ़ती हैं? जवाब/पलक: सच कहूं तो मैं DM ज्यादा पढ़ती ही नहीं हूं।
लुधियाना- सगे भाईयों ने इकलौती बहन को घर गिफ्ट किया:175 गज में बना, कीमत करीब ₹50 लाख; सरप्राइज देख तो फूट-फूटकर रोई

लुधियाना में सगे भाइयों ने इकलौती बहन को 175 गज का घर गिफ्ट कर दिया। इसकी कीमत करीब 50 लाख रुपए है। भाईयों ने सरप्राइज तरीके से बहन को ये गिफ्ट दिया। वह ढोल बजाते हुए बहन को वहां ले गए। जब उन्होंने नेम प्लेट से कागज हटाया तो अपना नाम लिखा देकर बहन रो पड़ी। बहन शादीशुदा है। भाईयों का कहना है कि पिता के निधन के बाद बहन हमेशा उनके साथ खड़ी रही। इसलिए अपने घर के नजदीक ही मकान बनाकर दिया। बहन को घर गिफ्ट करने वाले दोनों भाई एक्टिंग करते हैं। एक भाई बिग बॉस के सीजन 10 में कॉमनर कंटेस्टेंट के तौर पर भी हिस्सा ले चुका है। बहन को सरप्राइज गिफ्ट में घर देने की पूरी कहानी ऐसे दिया सरप्राइज गिफ्ट की बहन रो पड़ी दोनों भाइयों अमर देवगन और देव देवगन ने इस सरप्राइज को बेहद खास तरीके से प्लान किया। देव ने बताया कि 5 मई को मेरी मैरिज एनिवर्सरी थी। जिसको लेकर घर पर पाठ रखा गया था। पाठ पूरा होने के बाद देव अपनी पत्नी को गिफ्ट देने के बहाने बाहर लेकर गए। उनके साथ बहन मनप्रीत कौर बिर्दी और परिवार को साथ ले लिया। इस दौरान बहन मनप्रीत ने पूछा कि अपनी एनिवर्सरी पर मुझे क्या गिफ्ट दे रहे हो। बहन को लगा कि एक्टिवा या फिर ऐसी कोई दूसरी चीज देंगे। वह रास्ते भर पूछती रही लेकिन दोनों भाईयों ने इसे सस्पेंस बनाए रखा। इसके बाद वह रिश्तेदारों और ढोल के साथ पैदल ही कोट मंगल सिंह में अपने घर की पास वाली गली में गए। वहां जाकर दोनों भाई एक घर के बाहर खड़े हो गए। जब उन्होंने घर के बाहर लगी नेमप्लेट से कागज हटाया तो उसमें मनप्रीत कौर बिरदी लिखा हुआ था। उन्होंने बहन को बताया कि यह तेरे लिए गिफ्ट है। यह देखकर बहन फूट-फूटकर रोने लगी और भाईयों के गले लग गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि भाईयों ने इतना बड़ा घर उसे गिफ्ट कर दिया। भाइयों ने उसे मुश्किल से चुप कराया कि आज रोने का नहीं बल्कि खुशी का दिन है। दोनों भाई कलाकार और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर अमर देवगन और देव देवगन लुधियाना के रहने वाले हैं और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और कलाकार हैं। ये दोनों मुख्य रूप से अपनी पंजाबी वेब सीरीज और फैमिली ड्रामा करते हैं। अमर देवगन अक्सर ऐसी शॉर्ट फिल्में और सीरीज बनाते हैं जो पंजाब के ग्रामीण जीवन,सामाजिक मुद्दों और पारिवारिक रिश्तों पर आधारित होती हैं। वह सकियां भैणां (सगी बहनें) सीरीज भी बना चुके हैं। वहीं देव बिग बॉस-10 में कॉमनर कंटेस्टेंट के तौर पर हिस्सा ले चुके हैं। 2016 में हुए इस शो में मेन कंटेस्टेंट सेलिब्रिटीज के साथ इंडिया वाले यानी कॉमन लोगों को भी सिलेक्ट किया गया था। इन्हीं में देव भी शामिल थे। एक्टिंग के अलावा देव वीडियो एडिटिंग, डायरेक्शन और डायलॉग लिखने में भी माहिर हैं।
पंजाब चुनाव से पहले AAP प्रधान ED रेड में घिरे:जांच एजेंसी का दावा- मनी लॉन्ड्रिंग आरोपी इनका करीबी; कल बिल्डिंग से ₹500 के नोट उड़े थे

पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मोहाली में 2 रिएल एस्टेट ग्रुपों में ED रेड 24 घंटे बाद भी जारी है। इसमें सबसे अहम किरदार मोहाली की वेस्टर्न टावर्स सोसाइटी में रहने वाला IT कारोबारी नितिन गोहिल है, जिसको लेकर विरोधी दावा कर रहे हैं कि वह पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन का करीबी है। कल देर शाम ED ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि इनके ठिकानों से 1 करोड़ रुपए की बरामदगी हो चुकी है। यह मामला सुर्खियों में तब आया, जब रेड होते ही सोसाइटी की 9वीं मंजिल से कैश के बैग नीचे फेंके गए। एक बैग फटने से 500 रुपए के नोट हवा में उड़ते नजर आए। इस मामले में ED ने पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रधान व सरकार में मंत्री अमन अरोड़ा को भी जोड़ा है। ED का कहना है कि फर्जी तरीके से चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) हासिल करने और जमीन मालिकों व ग्राहकों के साथ करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी का एक आरोपी अरोड़ा का करीबी है। हालांकि अरोड़ा ने इससे पल्ला झाड़ते हुए कहा था कि मेरा पूरा जीवन ईमानदारी भरा है। मैं ऐसे किसी प्रोपेगेंडा के आगे झुकने वाला नहीं हूं। नितिन गोहिल से OSD राजबीर घुम्मन के संबंधों के विपक्ष के आरोप पर कल CM भगवंत मान ने अमृतसर में स्पष्ट किया किया कि जिन पर रेड हुई, उनका हमसे कोई संबंध नहीं है। ED किसी पुराने मामले के सिलसिले में आई है। हमारा उनसे कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि विरोधियों ने सवाल उठाए कि कल जो रुपए हवा में उड़े और जो बरामदगी हुई, वह असल में CM के OSD राजबीर घुम्मन के हैं। यही है इनकी कट्टर ईमानदारी। ED रेड से जुड़े किरदार और PHOTOS… ED ने ये रेड क्यों की, 5 पॉइंट में जानिए… रेड पड़ी तो कैसे उड़े नोट, 5 पॉइंट में जानिए इस मामले के अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
कनाडा में परमानेंट-रेजिडेंस के फ्रॉड पीड़ितों को मुआवजा मिलेगा:नया नियम 15 जुलाई से लागू, हजारों भारतीयों को राहत; एजेंटों पर 9 करोड़ जुर्माना

कनाडा सरकार ने परमानेंट रेजिडेंस (PR) और स्टूडेंट वीजा के नाम पर होने वाली ठगी रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब अगर कोई लाइसेंसधारी इमिग्रेशन कंसलटेंट किसी छात्र या वर्कर के साथ धोखाधड़ी करता है, तो पीड़ित को सरकारी मुआवजा मिल सकेगा। यह नया नियम 15 जुलाई 2026 से पूरी तरह लागू हो जाएगा। नए नियमों के तहत फर्जीवाड़ा करने वाले एजेंटों पर 9 करोड़ रुपए तक जुर्माना और जेल की सजा भी हो सकती है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर पंजाब और गुजरात के उन हजारों भारतीय परिवारों पर पड़ेगा, जो कनाडा जाने के लिए लाखों रुपए खर्च करते हैं। साल 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा के इमिग्रेशन विभाग (IRCC) ने लगभग 10 हजार फर्जी एडमिशन लेटर पकड़े थे। इनमें से करीब 80 फीसद मामले अकेले पंजाब और गुजरात से जुड़े थे। वहीं पंजाबी-गुजराती स्टूडेंट्स को कनाडाई सरकार ने एक झटका भी दिया है। कनाडा के कई स्टेट ऐसे हैं जिन्होंने फूड सेक्टर व सर्विस सेक्टर को अपनी प्रायोरिटी लिस्ट से हटा दिया। इससे कनाडा में फूड सेक्टर के साथ-साथ सर्विस सेक्टर में काम करने वाले वर्कर्स व स्टूडेंट्स को PR स्टेटस (स्थायी नागरिकता जैसा दर्जा) मिलने पर संकट गहराता जा रहा है। पहले पढ़ें इमिग्रेशन कंसलटेंट्स पर क्या फैसला… PR नियम बदलने से किन वर्कर्स-स्टूडेंट्स की बढ़ी परेशानी, जानिए.. कौन-कौन प्रभावित होंगे? सबसे ज्यादा पंजाबी स्टूडेंट्स को नुकसान कनाडा सरकार की इस पॉलिसी का सबसे ज्यादा नुकसान पंजाबी स्टूडेंट्स व वर्कर्स को झेलना पड़ेगा क्योंकि कनाडा में फूड व सर्विस सेक्टर में सबसे ज्यादा पंजाबी काम करते हैं। कनाडा के अलग-अलग राज्यों ने स्टूडेंट्स व वर्कर्स की PR फाइल्स रिजेक्ट करना शुरू कर दिया। कनाडा के नोवा स्कोटिया के हैलिफैक्स स्थित गुरुद्वारा साहिब में कुछ स्टूडेंट्स व वर्कर्स पीआर फाइल्स रिजेक्ट होने के कारण धरने पर बैठे हैं। दरअसल उनका वीजा समाप्त होने वाला है और उन्होंने सरकार के पास पीआर की फाइल लगाई थी जिन्हें सरकार ने रिजेक्ट कर दिया है। स्टूडेंट्स की डिमांड है कि उन्होंने पीआर की फाइल्स तब लगाई थी जब सरकार ने फूड व सर्विस सेक्टर को प्रायोरिटी लिस्ट से बाहर नहीं किया था। उनकी कनाडा व स्टेट सरकार से डिमांड है कि उनकी पीआर फाइल को पुराने नियमों के हिसाब से अप्रूव करें। कनाडा जाने वालों में 70 फीसदी पंजाबी कनाडा जाने वाले भारतीयों में पंजाबियों की संख्या सबसे अधिक है। हालिया आंकड़ों के अनुसार फर्जी ऑफर लेटर और जाली दस्तावेजों के कारण जिन हजारों छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा मंडरा रहा है, उनमें से करीब 60 से 70 प्रतिशत युवा अकेले पंजाब के जालंधर, लुधियाना और अमृतसर जैसे शहरों से हैं। ये परिवार अक्सर अपनी जमीन बेचकर या भारी कर्ज लेकर 15 से 25 लाख रुपए तक इन कंसलटेंट्स को दे देते हैं, जिनका कोई कानूनी रिकॉर्ड नहीं होता। यही कारण है कि 15 जुलाई 2026 से लागू होने वाले नए नियम और मुआवजा फंड पंजाब के परिवारों के लिए संजीवनी साबित होंगे। पीड़ित को शिकायत और जांच के बाद फंड से भुगतान किया जाएगा। भारत और कनाडा में फर्क क्या? भारत में भी इमीग्रेशन को लेकर नियम सख्त है अगर कोई विजा कंसलटेंट या एजेंट फेक लेटर देता है या फेक वीजा लगवाता है तो उसका लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान है। भारत में हर राज्य के जिले में डीसी के पास किसी भी कंसलटेंट एजेंसी का लाइसेंस रद्द करने की पावर है। डिप्टी कमिश्नर की किसी भी कंसलटेंट को लाइसेंस प्रदान करता है और वही उसे रद्द कर सकता है। हालांकि, अगर कोई कंसलटेंट किसी के साथ ठगी करता है तो भारत सरकार की ओर से मुआवजा दिलाने का कोई प्रावधान नहीं है।
IPL में आज दिल्ली vs कोलकाता:प्लेऑफ की रेस में बने रहने के लिए कैपिटल्स को जीत जरूरी, नाइटराइडर्स ने पिछले तीनों मैच जीते

IPL में आज दिल्ली कैपिटल्स का सामना कोलकाता नाइट राइडर्स से होगा। मैच दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में शाम 7:30 बजे से खेला जाएगा। दिल्ली के लिए यह मुकाबला करो या मरो जैसा है। टीम 10 मैचों में 8 पॉइंट्स के साथ सातवें नंबर पर है। प्लेऑफ की उम्मीदें बनाए रखने के लिए उसे बाकी चारों मैच जीतने होंगे। वहीं, आठवें नंबर पर मौजूद KKR को अगले दौर में पहुंचने के लिए अपने सभी पांच मैच जीतने होंगे। दोनों टीमें 35वीं बार आमने-सामने होंगी दोनों टीमों के बीच अब तक 34 मैच खेले गए हैं। DC ने 14 और KKR ने 19 मैच जीते हैं। एक मैच टाई रहा, जिसे DC ने जीता। पिछले सीजन में दोनों के बीच खेले गए मुकाबले में कोलकाता जीता था। स्पिनर्स के सामने संघर्ष कर रहे बल्लेबाज दिल्ली का मैनेजमेंट अपनी बल्लेबाजी को लेकर चिंतित है। पिछले मैचों में जब भी पिच से गेंदबाजों को मदद मिली, दिल्ली का टॉप ऑर्डर ताश के पत्तों की तरह ढह गया। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ टीम एक समय 9 रन पर 6 विकेट गंवा चुकी थी। गुजरात टाइटंस के राशिद खान और चेन्नई के स्पिनर्स के सामने भी बल्लेबाज संघर्ष करते नजर आए थे। ऐसे में टीम को लगता है कि सपाट पिच पर ही बल्लेबाज खुलकर रन बना पाएंगे। दिल्ली के लिए केएल राहुल ने इस सीजन में 445 रन बनाए हैं। उनका स्ट्राइक रेट 180 के करीब रहा है। वे टीम के टॉप रन स्कोरर हैं। कुलदीप यादव का खराब सीजन, पेसर्स भी लुटा रहे रन दिल्ली की गेंदबाजी इस सीजन में सबसे कमजोर कड़ी साबित हुई है। मुख्य स्पिनर कुलदीप यादव अपने करियर के खराब दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने 10 मैचों में सिर्फ 7 विकेट लिए हैं और 10 से ज्यादा की इकॉनमी से रन दिए हैं। तेज गेंदबाज मुकेश कुमार, टी नटराजन और आकिब नबी डार का इकॉनमी रेट 11 से 13 के बीच है। कप्तान अक्षर पटेल (9 विकेट) को छोड़कर कोई भी गेंदबाज दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंच सका है। अक्षर टीम के टॉप विकेट टेकर हैं। KKR की ताकत स्पिन, लेकिन टॉप ऑर्डर सिरदर्द कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए अच्छी बात यह है कि उनके स्पिनर्स लगातार विकेट निकाल रहे हैं। वरुण के नाम 10 और नरेन के नाम 9 विकेट हैं। हालांकि, कप्तान अजिंक्य रहाणे और अंगक्रिश रघुवंशी की ओपनिंग जोड़ी टीम को उम्मीद के मुताबिक शुरुआत नहीं दे पा रही है। रिंकू सिंह को छोड़कर मिडिल ऑर्डर में भी निरंतरता की कमी रही है। KKR को मैच जीतने के लिए बल्लेबाजों को जिम्मेदारी लेनी होगी। अरुण जेटली स्टेडियम पिच रिपोर्ट अरुण जेटली स्टेडियम की पिच IPL में बल्लेबाजी के लिए अनुकूल मानी जाती है। सपाट पिच और छोटी बाउंड्री (60-66 मीटर) के कारण यहां हाई-स्कोरिंग मैच होते हैं। हालांकि, पिछले दो मैचों के नतीजे अलग रहे हैं। इस पिच पर IPL के 101 मैच खेले गए हैं। इनमें 48 बार पहले बल्लेबाजी और 52 बार चेज करने वाली टीम जीती है। एक मैच रद्द हुआ। बारिश की संभावना नहीं शुक्रवार को दिल्ली में मैच के दौरान तापमान लगभग 28 डिग्री से 32 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। वहीं बारिश संभावना नहीं है। दोनों टीमों की प्लेइंग-XI दिल्ली कैपिटल्स: केएल राहुल (विकेटकीपर), पथुम निसांका, करुण नायर, ट्रिस्टन स्टब्स, नीतीश राणा, अक्षर पटेल (कप्तान), आशुतोष शर्मा, मिचेल स्टार्क, कुलदीप यादव, लुंगी एनगिडी, टी नटराजन और समीर रिजवी। कोलकाता नाइट राइडर्स: अजिंक्य रहाणे (कप्तान), अंगकृष रघुवंशी (विकेटकीपर), कैमरन ग्रीन, रोवमन पॉवेल, मनीष पांडे, रिंकू सिंह, सुनील नरेन, अनुकूल रॉय, कार्तिक त्यागी, वरुण चक्रवर्ती, वैभव अरोड़ा और फिन एलन।
IPL में आज दिल्ली vs कोलकाता:प्लेऑफ की रेस में बने रहने के लिए कैपिटल्स को जीत जरूरी, नाइटराइडर्स ने पिछले तीनों मैच जीते

IPL में आज दिल्ली कैपिटल्स का सामना कोलकाता नाइट राइडर्स से होगा। मैच दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में शाम 7:30 बजे से खेला जाएगा। दिल्ली के लिए यह मुकाबला करो या मरो जैसा है। टीम 10 मैचों में 8 पॉइंट्स के साथ सातवें नंबर पर है। प्लेऑफ की उम्मीदें बनाए रखने के लिए उसे बाकी चारों मैच जीतने होंगे। वहीं, आठवें नंबर पर मौजूद KKR को अगले दौर में पहुंचने के लिए अपने सभी पांच मैच जीतने होंगे। दोनों टीमें 35वीं बार आमने-सामने होंगी दोनों टीमों के बीच अब तक 34 मैच खेले गए हैं। DC ने 14 और KKR ने 19 मैच जीते हैं। एक मैच टाई रहा, जिसे DC ने जीता। पिछले सीजन में दोनों के बीच खेले गए मुकाबले में कोलकाता जीता था। स्पिनर्स के सामने संघर्ष कर रहे बल्लेबाज दिल्ली का मैनेजमेंट अपनी बल्लेबाजी को लेकर चिंतित है। पिछले मैचों में जब भी पिच से गेंदबाजों को मदद मिली, दिल्ली का टॉप ऑर्डर ताश के पत्तों की तरह ढह गया। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ टीम एक समय 9 रन पर 6 विकेट गंवा चुकी थी। गुजरात टाइटंस के राशिद खान और चेन्नई के स्पिनर्स के सामने भी बल्लेबाज संघर्ष करते नजर आए थे। ऐसे में टीम को लगता है कि सपाट पिच पर ही बल्लेबाज खुलकर रन बना पाएंगे। दिल्ली के लिए केएल राहुल ने इस सीजन में 445 रन बनाए हैं। उनका स्ट्राइक रेट 180 के करीब रहा है। वे टीम के टॉप रन स्कोरर हैं। कुलदीप यादव का खराब सीजन, पेसर्स भी लुटा रहे रन दिल्ली की गेंदबाजी इस सीजन में सबसे कमजोर कड़ी साबित हुई है। मुख्य स्पिनर कुलदीप यादव अपने करियर के खराब दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने 10 मैचों में सिर्फ 7 विकेट लिए हैं और 10 से ज्यादा की इकॉनमी से रन दिए हैं। तेज गेंदबाज मुकेश कुमार, टी नटराजन और आकिब नबी डार का इकॉनमी रेट 11 से 13 के बीच है। कप्तान अक्षर पटेल (9 विकेट) को छोड़कर कोई भी गेंदबाज दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंच सका है। अक्षर टीम के टॉप विकेट टेकर हैं। KKR की ताकत स्पिन, लेकिन टॉप ऑर्डर सिरदर्द कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए अच्छी बात यह है कि उनके स्पिनर्स लगातार विकेट निकाल रहे हैं। वरुण के नाम 10 और नरेन के नाम 9 विकेट हैं। हालांकि, कप्तान अजिंक्य रहाणे और अंगक्रिश रघुवंशी की ओपनिंग जोड़ी टीम को उम्मीद के मुताबिक शुरुआत नहीं दे पा रही है। रिंकू सिंह को छोड़कर मिडिल ऑर्डर में भी निरंतरता की कमी रही है। KKR को मैच जीतने के लिए बल्लेबाजों को जिम्मेदारी लेनी होगी। अरुण जेटली स्टेडियम पिच रिपोर्ट अरुण जेटली स्टेडियम की पिच IPL में बल्लेबाजी के लिए अनुकूल मानी जाती है। सपाट पिच और छोटी बाउंड्री (60-66 मीटर) के कारण यहां हाई-स्कोरिंग मैच होते हैं। हालांकि, पिछले दो मैचों के नतीजे अलग रहे हैं। इस पिच पर IPL के 101 मैच खेले गए हैं। इनमें 48 बार पहले बल्लेबाजी और 52 बार चेज करने वाली टीम जीती है। एक मैच रद्द हुआ। बारिश की संभावना नहीं शुक्रवार को दिल्ली में मैच के दौरान तापमान लगभग 28 डिग्री से 32 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। वहीं बारिश संभावना नहीं है। दोनों टीमों की प्लेइंग-XI दिल्ली कैपिटल्स: केएल राहुल (विकेटकीपर), पथुम निसांका, करुण नायर, ट्रिस्टन स्टब्स, नीतीश राणा, अक्षर पटेल (कप्तान), आशुतोष शर्मा, मिचेल स्टार्क, कुलदीप यादव, लुंगी एनगिडी, टी नटराजन और समीर रिजवी। कोलकाता नाइट राइडर्स: अजिंक्य रहाणे (कप्तान), अंगकृष रघुवंशी (विकेटकीपर), कैमरन ग्रीन, रोवमन पॉवेल, मनीष पांडे, रिंकू सिंह, सुनील नरेन, अनुकूल रॉय, कार्तिक त्यागी, वरुण चक्रवर्ती, वैभव अरोड़ा और फिन एलन।







