Monday, 12 Oct 2026 | 08:00 AM

Trending :

डॉ. श्रीराम नेने की हेल्थ पर पहली किताब लॉन्च:बोले- 21 किलो वजन घटाया, बताया पत्नी माधुरी दीक्षित की फिटनेस का राज डॉ. श्रीराम नेने की हेल्थ पर पहली किताब लॉन्च:बोले- 21 किलो वजन घटाया, बताया पत्नी माधुरी दीक्षित की फिटनेस का राज मुंबई में मैट्रिक्स वेलनेस में पहुंचे बॉलीवुड सेलेब्स:परिवार के साथ पहुंचे जैकी श्रॉफ, दिशा पाटनी भी शामिल हुईं; 84वें जन्मदिन पर अमिताभ के 'संडे दर्शन' फिल्म रामायण की रिलीज डेट का ऐलान:5 नवंबर को 5 भाषाओं में आएगी फिल्म; नए पोस्टर में दिखे रावण बने यश और रणबीर एक्टर इमरान खान पर मुंबई में FIR दर्ज:CJP प्रदर्शन में पुलिस ने डिटेन किया था; रिहाई के बाद गर्लफ्रेंड बोलीं- पुलिस ने कैब नहीं करने दी एक्टर इमरान खान पर मुंबई में FIR दर्ज:CJP प्रदर्शन में पुलिस ने डिटेन किया था; रिहाई के बाद गर्लफ्रेंड बोलीं- पुलिस ने कैब नहीं करने दी
EXCLUSIVE

श्मशान के मुर्दों से उतारे कपड़े बाजार में बिक रहे:शादियों और पूजा-पाठ में लोग पहन रहे 'कफन' की साड़ियां; अहमदाबाद तक फैला नेटवर्क

श्मशान के मुर्दों से उतारे कपड़े बाजार में बिक रहे:शादियों और पूजा-पाठ में लोग पहन रहे 'कफन' की साड़ियां; अहमदाबाद तक फैला नेटवर्क

नए कपड़ों से घी और सेंट की खुशबू न आए तो कोई पहचान ही नहीं सकता कि वे श्मशान के हैं। लोग इन्हें पूजा-पाठ और शादियों में पहनते हैं। लेन-देन में दिए जाने वाले कपड़े भी यही होते हैं। इंदौर के एक श्मशान घाट का एजेंट दिलीप माने यह बात बेशर्मी से कहता है। वह उस संगठित गिरोह का हिस्सा है, जो श्मशान घाट से लेकर अहमदाबाद तक फैला है। यह गिरोह, अंतिम संस्कार के लिए आए शवों से उतारे गए कपड़े, साड़ियां, शॉल, पेंट-शर्ट और तौलिए धोकर, प्रेस कर बाजार में नए बताकर बेच देता है। हर महीने लाखों रुपए का यह काला कारोबार इतनी सफाई से चलता है कि न शिकायत होती है, न कोई पकड़ा जाता है। भास्कर रिपोर्टर ने राजस्थान का कारोबारी बनकर इंदौर के 6 श्मशान घाटों पर गिरोह के एजेंटों से संपर्क किया। पूरी चेन समझी और मुर्दों के कपड़े खरीदने की डील की। टीम उस व्यापारी तक पहुंची, जो श्मशान घाटों से कपड़े सीधे अहमदाबाद भेजता है। पढ़िए, श्मशान से बाजार तक यह घिनौना कारोबार कैसे चलता है… ऐसे चलता है यह पूरा खेल इस पूरे खेल की शुरुआत श्मशान घाट से होती है। मुखाग्नि से पहले शवों से उतारे गए या श्मशान में फेंके गए कपड़ों को वहां के एजेंट और कर्मचारी इकट्ठा करते हैं। इसके बाद कपड़े छोटे दलालों, फिर बड़े व्यापारियों और आखिर में गुजरात के अहमदाबाद जैसे बड़े केंद्रों तक पहुंचते हैं। वहां कपड़ों की ‘मरम्मत’ कर उन्हें चमकाया जाता है और आकर्षक पैकिंग में बाजार भेज दिया जाता है। भास्कर ने इस खेल का पर्दाफाश करने के लिए सबसे पहले मुक्तिधाम के एजेंट से संपर्क किया, जहां एजेंटों ने खुद इस धंधे की परतें खोलीं। खेमा पहलवान ने दूसरे एजेंट के पास भेजा पड़ताल की शुरुआत पंचकुईया मुक्तिधाम से हुई। यहां खेमा पहलवान ने बताया कि माल बिक चुका है, लेकिन अगला सौदा रामबाग के दिलीप माने से हो सकता है। दिलीप माने रिपोर्टर को मालवा मिल मुक्तिधाम ले गया, जहां उसकी सास विमला बाई एजेंट के रूप में काम करती है। विमला बोली- साड़ियों का रेट 70-80 रुपए मालवा मिल मुक्तिधाम के गोदाम में साड़ियों और कपड़ों का ढेर लगा था। विमला बाई ने बताया, ‘इंदौर के राजवाड़ा से कुछ लोग आए थे। बोले- धोकर, प्रेस करके पन्नी में पैक करके देते हैं। बस किसी मुसलमान को मत बेचना।’ यहां शॉल 20-40 रुपए, कुर्ता-पायजामा 45 रुपए और साड़ियां 70-80 रुपए में बेची जा रही हैं। एजेंट दिलीप ने हंसते हुए कहा, ‘घी और मुर्दे की सेंट की खुशबू जब तक न आए, तब तक किसी को क्या पता चलेगा? सब कलाकार हैं, सब धो लेते हैं।’ बाणगंगा मुक्तिधाम के तीन गोदाम सयाजी मुक्तिधाम के एजेंटों ने बंडल खोलकर साड़ियां दिखाईं और दावा किया कि यह ‘बेहतर माल’ है, जिसे पहनने पर कोई पहचान नहीं पाएगा। वहीं, बाणगंगा मुक्तिधाम के संजय यादव ने तीन गोदाम बना रखे हैं। एक गोदाम मुक्तिधाम के सुविधाघर में है, जबकि दूसरा 2 किमी दूर एक घर में है। यहां लाखों का माल डंप पड़ा है। ‘जितना माल होगा, सब खरीद लेंगे’ पड़ताल में पता चला कि शहर के लगभग सभी मुक्तिधामों का एक बड़ा खरीदार मोनू भाईजान है। उसने सभी एजेंटों को हिदायत दे रखी है कि माल सिर्फ उसे ही दिया जाए। भास्कर रिपोर्टर जब मोनू भाईजान के पास विक्रेता बनकर पहुंचा, तो उसने चंदन नगर बुलाकर बड़े व्यापारी सलमान से मिलवाया। मोनू ने बताया, “हम कुछ माल खुद फेरी लगाकर बेचते हैं और बाकी सलमान भाई को दे देते हैं। यहां से पूरा माल ट्रक भरकर अहमदाबाद जाता है।” व्यापारी सलमान ने कहा, “आप तो गाड़ी भरकर लाओ, जितना भी माल हो, मैं खरीद लूंगा। यहां से माल गुजरात जाता है।” शुभ कार्यों में पहने जा रहे ‘मुर्दों के कपड़े’ इस इन्वेस्टिगेशन का सबसे डरावना पहलू यह है कि ये कपड़े उन्हीं लोगों तक पहुंच रहे हैं, जो इन्हें पवित्र मानकर शुभ कार्यों में पहनते हैं। हिंदू परंपरा में अंतिम संस्कार से पहले मृतक के कपड़े उतारे जाते हैं। यह धार्मिक क्रिया है, जिसमें शरीर को शुद्ध वस्त्र पहनाकर मुखाग्नि दी जाती है। उस वक्त परिजन पूरी तरह शोक में डूबे होते हैं। ऐसे में उतारे गए कपड़ों का क्या होता है, यह उन्हें पता नहीं चल पाता। एजेंटों के मुताबिक, साड़ियां बाजार में 150 से 250 रुपए तक में बिक जाती हैं। कई बार नई दुल्हनों की पूजा की साड़ियां भी इसी ‘सप्लाई चेन’ का हिस्सा होती हैं। श्मशान के बर्तनों और लोटों का भी यही हाल है। दिलीप माने के मुताबिक, उसके पास 700-800 किलो बर्तनों का स्टॉक है, जो ‘फ्रेश’ है और जला हुआ नहीं है। महामंडलेश्वर बोले- आस्था के साथ खिलवाड़ अखिल भारतीय संत समिति के कार्यकारी अध्यक्ष और महामंडलेश्वर स्वामी अनिलानंद महाराज ने कहा- मुर्दों के कपड़ों का दोबारा इस्तेमाल हिंदू धर्म में अशुभ माना जाता है। जो लोग अनजाने में ऐसे कपड़े पहनते हैं, उन्हें अशुभ फल मिल सकता है। वैज्ञानिक कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में शव को चार घंटे भी घर में नहीं रखा जाता। अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाने के बाद घर में गंगाजल और गोमूत्र छिड़ककर पवित्र किया जाता है। शव के कपड़ों को अग्नि के हवाले करना जरूरी माना गया है। ये खबर भी पढ़ें… मुर्दे जिंदा किए…बीमा के लिए फिर मार दिया मौत परिवार के लिए मातम लाती है, लेकिन उज्जैन में जालसाजों ने इसे ‘कमाई का जरिया’ बना लिया। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने ऐसा घोटाला उजागर किया, जिसमें मुर्दों के नाम पर बीमा पॉलिसी लेकर करोड़ों के क्लेम हड़पने की कोशिश की गई। इस ‘डेथ स्कैम’ में एजेंट, सरपंच, सचिव और सरकारी कर्मचारी शामिल थे। पढ़ें पूरी खबर…

यूपी-बिहार में बारिश, राजस्थान में ओले गिरे:एमपी में आंधी, हिमाचल में बर्फबारी का अलर्ट; गुजरात का राजकोट देश में सबसे गर्म

यूपी-बिहार में बारिश, राजस्थान में ओले गिरे:एमपी में आंधी, हिमाचल में बर्फबारी का अलर्ट; गुजरात का राजकोट देश में सबसे गर्म

उत्तर और मध्य भारत में गर्मी के बीच बारिश का दौर जारी है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार में गुरुवार को बारिश हुई। वहीं बिहार और हिमाचल प्रदेश में ओले भी गिरे। बिहार के जमुई समेत 5 जिलों में तेज बारिश हुई। राजस्थान के अलवर, टोंक और कोटपूतली-बहरोड़ जिले में गुरुवार दोपहर बाद मौसम बदला और बारिश और ओलावृष्टि हुई। इस दौरान ओले भी गिरे। प्रदेश का तापमान 2°C से 3°C बढ़ सकता है। हिमाचल प्रदेश के शिमला, जुब्बरहट्टी, सुंदरनगर और कांगड़ा में बारिश हुई। कई जगहों पर बिजली भी गिरी। पिछले 24 घंटों में सिरमौर के सराहन में सबसे ज्यादा 20 मिमी बारिश दर्ज की गई। आज राज्य के ऊपरी जिलों किन्नौर और मंडी में बर्फबारी और बारिश की संभावना है। 11 से 13 मई तक राज्य में येलो अलर्ट जारी किया गया है। यूपी में गुरुवार को बांदा, बिजनौर, शाहजहांपुर, कानपुर देहात और महोबा में तेज बारिश हुई। बिजनौर में सड़क पर CCTV के लिए लगाया गया टावर गिर गया, जिससे बिजली गुल हो गई। बाराबंकी में हाईवे पर फिसलन की वजह से दो डबल डेकर बसें, एक डीसीएम और कई अन्य गाड़ियां टकरा गईं। बस सवार बस्ती निवासी एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। गुजरात का राजकोट देश में सबसे गर्म रहा, यहाँ का तापमान 42.9°C दर्ज किया गया। मध्य प्रदेश में पिछले 7 दिन से आंधी-बारिश का दौर है। आज भी ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी और टीकमगढ़ में बारिश और आंधी हुई। वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत प्रदेश के 44 जिलों में गर्मी का असर भी रहेगा। उत्तराखंड के उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में आज बारिश और बर्फबारी का अनुमान है। केदारनाथ में गुरुवार को ताजा बर्फबारी हुई। पिथौरागढ़ में 18 मिमी और बागेश्वर के सोंग में 12 मिमी बारिश दर्ज की गई। देशभर से मौसम से जुड़ी तस्वीरें… अगले दिन के मौसम का हाल 9 मई: 10 मई

बंगाल में आज सीएम का ऐलान हो सकता है:शाह पर्यवेक्षक बने, दोपहर में BJP विधायक दल की बैठक; 9 मई को शपथ ग्रहण

बंगाल में आज सीएम का ऐलान हो सकता है:शाह पर्यवेक्षक बने, दोपहर में BJP विधायक दल की बैठक; 9 मई को शपथ ग्रहण

पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजे आने के 4 दिन बाद शुक्रवार को नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। बीजेपी ने गृह मंत्री अमित शाह को केंद्रीय पर्यवेक्षक और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को सह-पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। दोनों नेता दोपहर 2 बजे बीजेपी विधायक दल की बैठक में शामिल होंगे। मीटिंग में सीएम का ऐलान किया जा सकता है। नए सीएम का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को कोलकाता के परेड ग्राउंड में होगा। सीएम बनने की रेस में सुवेंदु अधिकारी सबसे आगे हैं। सुवेंदु ने ममता बनर्जी को भवानीपुर से हराया है। इसके अलावा वे नंदीग्राम से भी चुनाव लड़े थे। वहां भी उनको जीत मिली। बंगाल में पिछले 4 दिनों का घटनाक्रम… 4 मई: बंगाल चुनाव के नतीजे आए, भाजपा पहली बार सरकार बनाने जा रही 4 मई को बंगाल की 293 सीटों के नतीजे आए। बीजेपी को 206 सीटें मिलीं। वहीं ममता की पार्टी TMC सिर्फ 81 पर सिमट गई। भवानीपुर से सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,114 वोटों से हराया। सुवेंदु के खिलाफ यह उनकी लगातार दूसरी हार है। 2021 विधानसभा चुनाव में सुवेंदु नंदीग्राम से ममता के खिलाफ जीते थे। बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीट हैं, एक सीट फालता पर 21 मई को दोबारा मतदान होगा। रिजल्ट 24 मई को आएगा। 5 मई: ममता बोलीं- मैं आजाद पंछी, शेर की तरह लड़ूंगी; इस्तीफा नहीं दूंगी ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा- मैं CM पद से इस्तीफा नहीं दूंगी। हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे हैं। इसलिए इस्तीफा देने राजभवन नहीं जाऊंगी। ममता ने आगे कहा- चुनाव आयोग असली विलेन है। उसने भाजपा के साथ मिलकर 100 सीटें लूटीं। अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ सकती हूं, सड़कों पर रहूंगी। 6 मई: सुवेंदु के पीए की गोली मारकर हत्या, टीएमसी पर आरोप सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वे कोलकाता से मध्यमग्राम अपने घर लौट रहे थे। कोलकाता से करीब 20 km दूर डोलतला में एक कार रथ की स्कॉर्पियो के सामने खड़ी हो गई। इसी बीच बाइक पर आए हमलावरों ने 6 से 10 राउंड फायरिंग की। दो गोलियां चंद्रनाथ के सीने से आर-पार हो गईं। एक गोली पेट में लगी। अस्पताल में उनकी मौत हो गई। 7 मई: सुवेंदु बोले- मैंने ममता को हराया, इसलिए पीए की हत्या भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि उनके पर्सनल असिस्टेंट चंद्रनाथ रथ की हत्या इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने ममता को हराया है। सुवेंदु ने कहा- इस हत्या को जिस तरह से अंजाम दिया गया, उसकी जितनी भी निंदा करें वह कम है। हत्या की वजह भवानीपुर से ममता की हार हो सकती है।

कश्मीर में एडवांस हथियारों वाली 1500 विलेज गार्ड्स की फौज:5 जिलों के ग्रामीण जवानों के साथ 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे

कश्मीर में एडवांस हथियारों वाली 1500 विलेज गार्ड्स की फौज:5 जिलों के ग्रामीण जवानों के साथ 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे

ऑपरेशन सिंदूर के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने गांव स्तर पर सुरक्षा तंत्र काफी मजबूत किया है। पिछलेे एक साल में पांच जिलों में 1500 से ज्यादा विलेज डिफेंस गार्ड्स (वीडीजी) को ट्रेनिंग दी गई है। इसमें हथियार चलाना, टैक्टिकल मूवमेंट, सर्विलांस व इमरजेंसी रिस्पॉन्स शामिल है। वहीं, .303 राइफल की जगह एसएलआर, बुलेटप्रूफ जैकेट व वायरलेस कम्युनिकेशन सेट भी दिए जा रहे हैं। ये ग्रामीण सीमाई इलाकों में जवानों के साथ 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं। राजौरी के अमित कुमार कहते हैं कि पिछले एक साल में कई बार घुसपैठ की कोशिशें हुईं, पर वीडीजी सदस्यों ने समय रहते सेना और पुलिस को अलर्ट किया। उनके मुताबिक गांव में कोई अजनबी आता है तो लोग तुरंत पहचानकर मूवमेंट की सूचना देते हैं। रात में सुरक्षा बलों के साथ जॉइंट पेट्रोलिंग भी होती है। बदलाव: आतंकी घटनाएं 27.5% घटीं पिछले एक साल में जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं से होने वाली मौतों में लगभग 27.5% की कमी दर्ज की गई है। जहां हमले से पहले वाले साल में कुल 127 मौतें हुई थीं, वहीं पिछले एक साल में यह आंकड़ा घटकर 92 रह गया है। हिंसा का सबसे गहरा असर पर्यटन पर पड़ा है, जिससे पर्यटकों की सालाना संख्या 33 लाख से गिरकर 11.60 लाख रह गई है। पर्यटकों का भरोसा बहाल करने के लिए कई स्तरों पर कोशिशें की जा रही हैं। पुलिस: 50-60% इनपुट ह्यूमन इंटेलिजेंस पर एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक सर्च ऑपरेशन में 60% इनपुट ह्यूमन इंटेलिजेंस पर आधारित होते हैं। बॉर्डर और पहाड़ी गांवों में स्थानीय लोग और वीडीजीज सदस्य सर्विलांस की पहली परत की तरह काम करते हैं। इनकी वजह से कई आतंकी वारदात रोकने में सफलता मिली है। अमरनाथ यात्रा: सीएपीएफ की 190 कंपनियां होंगी सुरक्षा में तैनात 3 जुलाई से शुरू होने वाले अमरनाथ यात्रा की तैयारियां के बीच चुनाव ड्यूटी के लिए दूसरे राज्यों में गईं सीएपीएफ की 190 कंपनियां जम्मू-कश्मीर लौटने लगी हैं। ये कंपनियां अगले दो हफ्ते में पहुंच जाएंगी। प्रशासन का फोकस टूरिस्ट लोकेशन और हाईवे की सुरक्षा पर है। हर कंपनी में करीब 100 जवान होते हैं। आतंकियों काे मारने में कामयाबी पिछले साल दिसंबर में सेना ने डोडा के कई गांवों में स्पेशल ट्रेनिंग कैंप लगाए। सांबा, कठुआ, राजौरी और पुंछ जैसे संवेदनशील जिलों में फॉरेस्ट पेट्रोलिंग, माउंटेन सर्विलांस की ट्रेनिंग दी गई। फोकस खास तौर पर दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों पर है, जहां इमरजेंसी में सुरक्षा बलों को पहुंचने में वक्त लगता है। डोडा और आसपास के जिलों में महिलाएं भी वीडीजी नेटवर्क से जुड़ी हैं और गांव की सुरक्षा व निगरानी में हिस्सा ले रही हैं। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… ऑपरेशन सिंदूर का एक साल: PM मोदी ने सोशल मीडिया डीपी बदली, ऑपरेशन का लोगो लगाया, लिखा- देश सेनाओं के शौर्य को सलाम करता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी डिस्प्ले पिक्चर बदलकर ऑपरेशन सिंदूर का लोगो लगाया। यह पहल पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए सैन्य ऑपरेशन की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना के साहस को ट्रिब्यूट देने के लिए की गई। पूरी खबर पढ़ें…

कश्मीर में एडवांस हथियारों वाली 1500 विलेज गार्ड्स की ‘फौज’:5 जिलों के ग्रामीण जवानों के साथ 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे

कश्मीर में एडवांस हथियारों वाली 1500 विलेज गार्ड्स की ‘फौज’:5 जिलों के ग्रामीण जवानों के साथ 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे

ऑपरेशन सिंदूर के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने गांव स्तर पर सुरक्षा तंत्र काफी मजबूत किया है। पिछलेे एक साल में पांच जिलों में 1500 से ज्यादा विलेज डिफेंस गार्ड्स (वीडीजी) को ट्रेनिंग दी गई है। इसमें हथियार चलाना, टैक्टिकल मूवमेंट, सर्विलांस व इमरजेंसी रिस्पॉन्स शामिल है। वहीं, .303 राइफल की जगह एसएलआर, बुलेटप्रूफ जैकेट व वायरलेस कम्युनिकेशन सेट भी दिए जा रहे हैं। ये ग्रामीण सीमाई इलाकों में जवानों के साथ 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं। राजौरी के अमित कुमार कहते हैं कि पिछले एक साल में कई बार घुसपैठ की कोशिशें हुईं, पर वीडीजी सदस्यों ने समय रहते सेना और पुलिस को अलर्ट किया। उनके मुताबिक गांव में कोई अजनबी आता है तो लोग तुरंत पहचानकर मूवमेंट की सूचना देते हैं। रात में सुरक्षा बलों के साथ जॉइंट पेट्रोलिंग भी होती है। बदलाव: आतंकी घटनाएं 27.5% घटीं पिछले एक साल में जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं से होने वाली मौतों में लगभग 27.5% की कमी दर्ज की गई है। जहां हमले से पहले वाले साल में कुल 127 मौतें हुई थीं, वहीं पिछले एक साल में यह आंकड़ा घटकर 92 रह गया है। हिंसा का सबसे गहरा असर पर्यटन पर पड़ा है, जिससे पर्यटकों की सालाना संख्या 33 लाख से गिरकर 11.60 लाख रह गई है। पर्यटकों का भरोसा बहाल करने के लिए कई स्तरों पर कोशिशें की जा रही हैं। पुलिस: 50-60% इनपुट ह्यूमन इंटेलिजेंस पर एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक सर्च ऑपरेशन में 60% इनपुट ह्यूमन इंटेलिजेंस पर आधारित होते हैं। बॉर्डर और पहाड़ी गांवों में स्थानीय लोग और वीडीजीज सदस्य सर्विलांस की पहली परत की तरह काम करते हैं। इनकी वजह से कई आतंकी वारदात रोकने में सफलता मिली है। अमरनाथ यात्रा: सीएपीएफ की 190 कंपनियां होंगी सुरक्षा में तैनात 3 जुलाई से शुरू होने वाले अमरनाथ यात्रा की तैयारियां के बीच चुनाव ड्यूटी के लिए दूसरे राज्यों में गईं सीएपीएफ की 190 कंपनियां जम्मू-कश्मीर लौटने लगी हैं। ये कंपनियां अगले दो हफ्ते में पहुंच जाएंगी। प्रशासन का फोकस टूरिस्ट लोकेशन और हाईवे की सुरक्षा पर है। हर कंपनी में करीब 100 जवान होते हैं। आतंकियों काे मारने में कामयाबी पिछले साल दिसंबर में सेना ने डोडा के कई गांवों में स्पेशल ट्रेनिंग कैंप लगाए। सांबा, कठुआ, राजौरी और पुंछ जैसे संवेदनशील जिलों में फॉरेस्ट पेट्रोलिंग, माउंटेन सर्विलांस की ट्रेनिंग दी गई। फोकस खास तौर पर दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों पर है, जहां इमरजेंसी में सुरक्षा बलों को पहुंचने में वक्त लगता है। डोडा और आसपास के जिलों में महिलाएं भी वीडीजी नेटवर्क से जुड़ी हैं और गांव की सुरक्षा व निगरानी में हिस्सा ले रही हैं। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… ऑपरेशन सिंदूर का एक साल: PM मोदी ने सोशल मीडिया डीपी बदली, ऑपरेशन का लोगो लगाया, लिखा- देश सेनाओं के शौर्य को सलाम करता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी डिस्प्ले पिक्चर बदलकर ऑपरेशन सिंदूर का लोगो लगाया। यह पहल पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए सैन्य ऑपरेशन की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना के साहस को ट्रिब्यूट देने के लिए की गई। पूरी खबर पढ़ें…

ऊपर से सख्त दिखने वाला ये फल गर्मियों में पेट को दे ठंडक, त्वचा के लिए वरदान, जानें इस फ्रूट की अन्य खूबियां

authorimg

Last Updated:May 07, 2026, 23:41 IST Wood apple health benefits in summer: अगर आपको गैस, अपच या पेट दर्द जैसी समस्याएं अक्सर परेशान करती हैं, तो बेल का सेवन लाभकारी हो सकता है. खासतौर पर गर्मियों में बेल का शरबत पेट को ठंडक पहुंचाता है. जानिए किस तरह से बेल सेहत के लिए है फायदेमंद और गर्मियों में इसे क्यों खाना चाहिए. गर्मियों में बेल के सेवन के फायदे. पुराने समय से बेल यानी बिल्व को घरेलू उपचार का अहम हिस्सा माना जाता रहा है. दादी-नानी के नुस्खों में इसका इस्तेमाल आम था और आज भी यह कई स्वास्थ्य समस्याओं के लिए फायदेमंद माना जाता है. आधुनिक लाइफस्टाइल में जहां लोग पाचन, त्वचा और ऊर्जा से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे हैं. ऐसे में गर्मियों का सुपर फल बेल इन सभी समस्याओं से बचे रहने के लिए एक नेचुरल विकल्प साबित हो सकता है. पेट और त्वचा के लिए रामबाण है बेल. जानिए इसके अन्य क्या फायदे होते हैं शरीर पर… बेल के सेवन के फायदे (Bael fruit benefits) पाचन तंत्र रखे दुरुस्त अगर आपको गैस, अपच या पेट दर्द जैसी समस्याएं अक्सर परेशान करती हैं, तो बेल का सेवन लाभकारी हो सकता है. खासतौर पर गर्मियों में बेल का शरबत पेट को ठंडक पहुंचाता है और डाइजेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है. कब्ज की समस्या में भी इसे उपयोगी माना जाता है. वात और कफ करे संतुलित आयुर्वेद में बेल को ऐसा फल माना गया है जो शरीर में बढ़े हुए वात और कफ दोष को नियंत्रित करने में मदद करता है. इन दोषों के असंतुलन से शरीर में भारीपन, सुस्ती और सर्दी-जुकाम जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. बेल शरीर को हल्का और संतुलित बनाए रखने में सहायक माना जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. शुगर और मेटाबॉलिज्म के लिए फायदेमंद आजकल डायबिटीज और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. बेल का नियमित सेवन शरीर के शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद कर सकता है. साथ ही यह मेटाबॉलिक एक्टिविटी को बेहतर बनाकर शरीर में ऊर्जा के सही उपयोग में सहायक होता है, जिससे थकान कम महसूस होती है. त्वचा को दे ठंडक और पोषण स्किन केयर में भी बेल काफी उपयोगी माना जाता है. हल्की जलन, इंफ्लेमेशन या रैशेज की समस्या होने पर बेल का गूदा या रस आराम पहुंचा सकता है. यह त्वचा को ठंडक देने के साथ अंदर से पोषण भी देता है, जिससे स्किन हेल्दी और साफ नजर आती है. इम्यूनिटी करे बूस्ट खांसी-जुकाम जैसी मौसमी समस्याओं में भी बेल लाभकारी माना जाता है. इसका सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करता है, जिससे मौसम बदलने पर होने वाली बीमारियों से बचाव आसान हो सकता है. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

लौकी का पुलाव रेसिपी: गर्मी में पेट का मजा चाहता है लौकी का पुलाव, स्वाद और सेहत दोनों पर पड़ता है असर; बच्चों को भी आती है पसंद

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 1 कप बासमती चावल, 1 छोटी लौकी (कद्दूकस हुई), 1 प्याज स्ट्रॉबेरी कटा, 1 हरी मिर्च, 1 छोटा सा जीरा, 1 तेजपत्ता, 2 लौंग छवि: फ्रीपिक 1 छोटी इलायची, आधा छोटा हल्दी, स्वाद नमक, 2 बड़ा चम्मच घी या तेल, 2 कप पानी, थोड़ा हरा धनिया छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले चावल को धोकर करीब 20 मिनट के लिए विलंबित करें। अब कुकर या पैन में घी गरम करें. इसमें जीरा, तेजपत्ता, लौंग और इलायची के टुकड़े टुकड़े भून लें। छवि: फ्रीपिक इसके बाद कटा हुआ प्याज और हरी मिर्च स्टोमनॉल होने तक। अब लोकी इसमें शामिल हो गए और 2-3 मिनट तक महानुभाव से भूल गए। फिर हल्दी और नमक मिश्रण करें। छवि: एआई अब भीगे हुए चावल और बने हुए हाथ से बने मसाले। इसके बाद पानी के उपकरण कुकर का समुद्र तट बंद कर दिया गया। 1-2 शहर आने तक। छवि: एआई जब कुकर का खिलौना निकल जाए, तो पुलाव को पतले हाथों से फुलाएं और ऊपर से हरा धनिया बांधें। छवि: एआई लॉकी बॉडी को ठंडक क्लिनिक में मदद मिलती है। यह पेट को चित्रित करता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है। गर्मी में डायहाइड्रेशन की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। छवि: सोशल मीडिया कम क्वालिटी में बनने की वजह से यह माना जाता है। लोकी का पुलाव आप दही, रायता, पुदीने की चटनी या पापड़ के साथ सर्व कर सकते हैं। फ़्लोरिडा तो ऊपर से छोटी-छोटी घी-मसाले का स्वाद और भी बढ़ाया जा सकता है। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)लौकी का पुलाव रेसिपी(टी)लौकी का पुलाव(टी)पुलाव रेसिपी(टी)लौकी रेसिपी(टी)लौकी रेसिपी(टी)ग्रीष्मकालीन रेसिपी(टी)लौकी पुलाव कैसे बनाएं(टी)घर का बना लौकी पुलाव

तरबूज में केमिकल का डर, मुंबई कांड के बाद पटना में अलर्ट, टिश्यू पेपर से करें असली-नकली की पहचान

तरबूज में केमिकल का डर, मुंबई कांड के बाद पटना में अलर्ट, टिश्यू पेपर से करें असली-नकली की पहचान

Last Updated:May 07, 2026, 21:36 IST Real Watermelon Check Tips: राजधानी पटना में इन दिनों फलों में मिलावट को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है. मुंबई में सामने आए ‘तरबूज कांड’ ने इस डर को और गहरा कर दिया है. बता दें कि, मुंबई में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत बिरयानी के बाद तरबूज खाने से हो गई थी. इस घटना के बाद पूरे देश में कैमिकल वाले तरबूज को लेकर डर का माहौल बन गया है. भीषण गर्मी में जिस तरबूज को सबसे सुरक्षित और ताजगी देने वाला फल माना जाता है, अब उसी को खरीदने से पहले लोग कई बार सोचने लगे हैं. पहले केला और पपीता जैसे फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए केमिकल इस्तेमाल की खबरें आती थीं, लेकिन अब तरबूज में भी मिलावट के मामले सामने आ रहे हैं. पटना फ्रूट वेजिटेबल एसोसिएशन के अध्यक्ष शशिकांत प्रसाद के अनुसार, थोक बाजार में तो स्थिति सामान्य है, लेकिन खुदरा स्तर पर कुछ विक्रेता तरबूज को अधिक लाल और आकर्षक दिखाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसी को लेकर मेदांता अस्पताल, पटना की डाइटीशियन प्रिया दुबे और इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. शाची ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. डॉ. शाची के अनुसार, फलों को जल्दी पकाने या आकर्षक बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल यदि निर्धारित मात्रा से अधिक हों, तो इससे फूड प्वाइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए हमेशा भरोसेमंद विक्रेता से ही फल खरीदने की सलाह दी जाती है. उन्होंने बताया कि यदि किसी फल की सतह पर सफेद या मोटी परत दिखे, तो उसे सीधे खाने के बजाय अच्छी तरह धोना चाहिए. खासकर अंगूर और संतरे जैसे फलों में कीटनाशक अधिक इस्तेमाल होते हैं, इसलिए इन्हें खाने से पहले पानी में थोड़ा खाने वाला सोडा मिलाकर साफ करना सुरक्षित रहता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, एक बार में बहुत ज्यादा फल खाने से बचना चाहिए और कटे हुए फलों को लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए. खासतौर पर कई घंटों पहले कटे फल नुकसानदायक हो सकते हैं. यहां तक कि फ्रिज में रखे कटे फल भी चार घंटे के बाद सुरक्षित नहीं माने जाते, क्योंकि उनमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google डाइटीशियन प्रिया दुबे के अनुसार, अगर आप कटा हुआ तरबूज खरीद रहे हैं, तो उसकी जांच के लिए एक आसान तरीका है. तरबूज के गूदे पर टिश्यू पेपर रखकर हल्का दबाएं. यदि टिश्यू पर हल्का गुलाबी रंग आता है, तो यह सामान्य है. वहीं, अगर गहरा लाल रंग निकलता है, तो इसमें रोडामाइन बी जैसे केमिकल के इस्तेमाल की आशंका हो सकती है. घर पर जांच के लिए तरबूज का एक टुकड़ा पानी में डालें. यदि पानी हल्का गुलाबी हो, तो फल सामान्य है. लेकिन, अगर पानी तेजी से गहरा लाल हो जाए, तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है. विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि बिरयानी में भी मिलावट का खतरा है. रंग और स्वाद के लिए इस्तेमाल होने वाले केसर और हल्दी की जगह कुछ लोग सस्ते और हानिकारक केमिकल जैसे मेटानिल येलो का इस्तेमाल करते हैं. यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है और कैंसर तक का कारण बन सकता है. ऐसी मिलावटी बिरयानी की पहचान करने के लिए एक आसान तरीका है. थोड़े से चावल को हाथों में लेकर हल्के से रगड़ें. अगर रंग हल्का पीला दिखे और हाथ धोने पर आसानी से साफ हो जाए, तो यह प्राकृतिक रंग का संकेत है. लेकिन अगर रंग हाथों से चिपका रह जाए और पानी से न उतरे, तो समझ लें कि उसमें कृत्रिम रंग मिलाया गया है. एक और तरीका यह है कि चावल के कुछ दाने पानी में डालकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें. केसर और हल्दी के टुकड़े पानी के नीचे जमे हुए दिखाई देंगे यानी यह सेफ है. अगर चावल से कोई भी रंग नहीं निकलता है तो समझ जाएं कि यह नुकसानदायक है. गर्मी के मौसम में खासतौर पर सतर्क रहना बेहद जरूरी है, ताकि सेहत सुरक्षित रह सके. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

एयर कूलर की गलतियाँ: गर्मी में न बन जाए काल, करंट से बचने के लिए आज ही चेक करें ये 3 चीजें; अन्यथा लग सकता है जोर का झटका

तस्वीर का विवरण

डेमोक्रेसी की वायरिंग और वर्कशॉप अवश्य जांचें: कई लोग प्राचीन काल के तार और वस्तुओं का उपयोग करते रहते हैं। गर्मी में लगातार अस्थिरता से तार गर्म हो रहे हैं और करंट लीकेज का खतरा बढ़ रहा है। छवि: एआई अगर तार कटी जली हुई तो तुरंत बदल दें। प्रोसेसर का उपयोग बिल्कुल नहीं किया जा सकता। उत्पाद बोर्ड की जगह सीधे एंटरप्राइज़ में इलेक्ट्रॉनिक्स प्लांट। बार-बार स्पार्किंग हो रही हो तो तुरंत बिजली मिस्त्री को कॉल करें। छवि: एआई पानी का लाइकेज बिल्कुल निश्चित नहीं है: ग्लूकोज में पानी और बिजली दोनों एक साथ होते हैं, इसलिए छोटे सी लाइकेज भी खतरनाक हो सकते हैं। कई बार मोटर या पंप के पास पानी जमा होने से बॉडी में करंट आने लगता है। छवि: एआई अर्थशास्त्र के नीचे पानी जमा हो रहा हो तो तुरंत ठीक करवाएं। मोटर के पास प्रमुख पत्रिकाएँ तो स्टॉक एक्सचेंज बंद कर दें। हाथों से लचीले हाथों से उधार लेना। बच्चों को लेबल के पास न चुनौती। छवि: फ्रीपिक अर्थ सही है या नहीं: कई निगमों में अर्थशास्त्र तो चल रहा है लेकिन उसका अर्थ सही नहीं है। यही सबसे बड़ा कारण है करंट लीक्स का। अगर लिनक्स छूते समय शॉक शॉक महसूस हो तो तुरंत सावधान हो जाएं। छवि: एआई सही अर्थ के लिए इलेक्ट्रीशियन से जांच करवाएं। थ्री-पिन प्लांट का प्रयोग करें। बिजली का बिलबोर्ड अपग्रेड हो तो तुरंत छूट। छवि: फ्रीपिक चॉकलेट को हमेशा जगह-जगह पर सुखाया जाता है। सफाई समय सारिणी न निकालें। लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं किया गया तो स्टॉक एक्सचेंज बंद कर दिया गया। स्थानीय और ख़राब गुणवत्ता वाले घटकों से सुसज्जित। छवि: एआई गर्मी में राहत देने वाला लैपटॉप अगर सही तरीके से इस्तेमाल न किया जाए तो बड़ा खतरा हो सकता है। इसलिए समय-समय पर उसकी वायरिंग, मोटर और अर्थिंग की जांच जरूर करवाएं। छवि: एआई थोड़ी सी सावधानी आपको बड़े हादसे से बचा सकती है। इसलिए नामांकित सभी युक्तियों को ध्यान में रखते हुए ही ग्लूकोज का प्रयोग करें। छवि: एआई

आम की तासीर ठंडी होती है या गर्म, गर्मियों के मौसम में किस तरह करें सेवन, एक्सपर्ट ने बताया

authorimg

Last Updated:May 07, 2026, 21:13 IST Mango Benefits and Side Effects: आम गर्मियों का फल है और इसका स्वाद सभी लोगों को खूब भाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार आम की तासीर गर्म होती है. इसे सीमित मात्रा और पानी में भिगोकर खाना बेहतर माना जाता है. सही तरीके से सेवन करने पर आम गर्मियों में भी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है. आम की तासीर गर्म होती है, लेकिन पानी में भिगोकर रोज 1-2 आम खाना सेफ है. Right Way To Eat Mango in Summer: गर्मियों का मौसम आते ही बाजार में आम की भरमार हो जाती है. यह गर्मियों में सबसे ज्यादा खाया जाने वाला फल है. आम का रसीला स्वाद हर उम्र के लोगों को पसंद आता है. आम में कई पोषक तत्व होते हैं, जो इसे सेहत के लिए भी फायदेमंद बनाते हैं. आम को लेकर एक सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है कि आम की तासीर ठंडी होती है या गर्म? कई लोग मानते हैं कि ज्यादा आम खाने से शरीर में गर्मी बढ़ जाती है, जबकि कुछ इसे सेहत के लिए बेहद फायदेमंद बताते हैं. इस बारे में एक्सपर्ट से हकीकत जानने की कोशिश करते हैं. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया आम में नेचुरल शुगर, फाइबर, विटामिन A, विटामिन C और कई एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को एनर्जी देने के साथ इम्यूनिटी मजबूत करने में मदद करते हैं. हालांकि आम की तासीर गर्म होती है और इस वजह से इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. कुछ लोगों को ज्यादा आम खाने पर मुंह में छाले, पिंपल्स, पेट में गर्मी या अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं. जिन लोगों का शरीर जल्दी गर्म हो जाता है, उन्हें आम को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत होती है. डाइटिशियन ने बताया कि आम खाने का सबसे अच्छा तरीका है कि इसे खाने से पहले कुछ देर पानी में भिगो दिया जाए. माना जाता है कि 20 से 30 मिनट तक पानी में रखने से आम की गर्मी कम हो सकती है. इससे आम पर मौजूद धूल या केमिकल भी साफ हो जाते हैं. यही वजह है कि पुराने समय से लोग आम को पानी में भिगोकर खाने की सलाह देते आए हैं. गर्मियों में आम का सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर माना जाता है. एक दिन में 1-2 आम खाना सामान्य रूप से सुरक्षित माना जाता है. एक्सपर्ट की मानें तो आम को सही तरीके से खाने पर यह शरीर को कई फायदे भी देता है. यह शरीर को ऊर्जा देता है, पाचन में मदद करता है और त्वचा के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. आम के साथ पर्याप्त पानी पीना और संतुलित डाइट लेना भी जरूरी है, ताकि शरीर में गर्मी का संतुलन बना रहे. आम मीठा होता है, जिसकी वजह से डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन बेहद कम मात्रा में करना चाहिए. अगर शुगर लेवल अनकंट्रोल है, तब आम अवॉइड करें. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें