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चुनाव के बाद बंगाल के मुर्शिदाबाद में लेनिन की मूर्ति तोड़े जाने से बंगाल में तनाव बढ़ गया | राजनीति समाचार

CBSE Class 12th Result 2026 Release Date, Time Live Updates: Scorecards soon a cbseresults.nic.in.

आखरी अपडेट:06 मई, 2026, 13:30 IST घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें व्लादिमीर लेनिन की तोड़ी गई मूर्ति को देखा जा सकता है. पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जियागंज इलाके में लेनिन की एक मूर्ति को तोड़ दिया गया. (छवि: एएनआई) विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों की घोषणा के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक पारा बढ़ने के साथ ही मंगलवार रात मुर्शिदाबाद जिले के जियागंज इलाके में व्लादिमीर लेनिन की एक मूर्ति को तोड़ दिया गया। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें व्लादिमीर लेनिन की तोड़ी गई मूर्ति को देखा जा सकता है. कथित तौर पर यह घटना तब हुई जब हाल ही में संपन्न चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा 206 सीटें जीतने के बाद मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सत्ता से हटाने के कुछ दिनों बाद राज्य में हिंसा में वृद्धि देखी गई। तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव में जीत के बाद भाजपा पर राज्य में ‘संगठित आतंक’ फैलाने का आरोप लगाया है। हालांकि, बीजेपी ने इस घटना में अपनी भूमिका से इनकार करते हुए कहा है कि टीएमसी पार्टी को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। भाजपा ने बेनेगल में 293 निर्वाचन क्षेत्रों में से 206 सीटें जीतकर भारी जीत दर्ज की है। इस बीच, तृणमूल ने 80 सीटें जीतीं – जो 2021 में 215 सीटों के अपने विशाल स्कोर के आधे से भी कम है। चुनाव में अपनी हार के बाद, बनर्जी ने अपना इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है और जोर देकर कहा है कि उनकी पार्टी ने जनादेश नहीं खोया है और आरोप लगाया है कि फैसला “लूट लिया गया” था। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : पश्चिम बंगाल, भारत, भारत समाचार राजनीति चुनाव के बाद बंगाल के मुर्शिदाबाद में लेनिन की मूर्ति तोड़े जाने से बंगाल में तनाव बढ़ गया है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)टीएमसी(टी)बीजेपी(टी)व्लादिमीर लेनिन

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर 37 होगी:कैबिनेट ने प्रस्ताव को मंजूरी दी, संसद के अगले सत्र में बिल पेश होगा

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर 37 होगी:कैबिनेट ने प्रस्ताव को मंजूरी दी, संसद के अगले सत्र में बिल पेश होगा

केंद्रीय कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार संसद के अगले सत्र में इससे जुड़ा विधेयक पेश करेगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को बताया कि सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल चीफ जस्टिस समेत 33 जजों की तय संख्या है। सरकार इसमें चार नए जज जोड़ना चाहती है। इसके लिए संसद के अगले सत्र में बिल लाया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद 1956 के कानून में संशोधन किया जाएगा। संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का अधिकार संसद के पास है। कानून लागू होने के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम नए जजों के नाम सरकार को भेजेगा। 2019 में आखिरी बार बढ़ी थी संख्या 2019 में सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 33 की गई थी। अब छह साल बाद फिर संख्या बढ़ाने का फैसला लिया गया है। इससे पहले सरकार ने 2008 में सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 26 से बढ़ाकर 31 की थी। सुप्रीम कोर्ट में अभी 2 खाली पद फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में दो पद खाली हैं। जस्टिस बी.आर. गवई नवंबर 2025 में और जस्टिस राजेश बिंदल अप्रैल 2026 में रिटायर हुए थे। आने वाले महीनों में सुप्रीम कोर्ट में तीन और पद खाली होने वाले हैं। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस पंकज मित्तल जून 2026 में रिटायर होंगे, जबकि जस्टिस संजय करोल अगस्त 2026 में सेवानिवृत्त होंगे। संविधान के अनुच्छेद 124(3) के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का जज वही बन सकता है जो भारतीय नागरिक हो। इसके लिए व्यक्ति का कम से कम पांच साल तक हाईकोर्ट में जज रहना या 10 साल तक वकील के तौर पर काम करना जरूरी है। किसी प्रतिष्ठित कानून विशेषज्ञ को भी सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग सुप्रीम कोर्ट में इस समय 92,385 पेंडिंग मामले हैं। कोविड के बाद ई-फाइलिंग बढ़ने से मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है। केंद्र सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को राज्यसभा में बताया कि देशभर के कोर्ट में कुल 5.49 करोड़ से अधिक केस पेंडिंग हैं। इसमें 90,897 मामले सुप्रीम कोर्ट और देश के 25 हाई कोर्ट में 63,63,406 मामले लंबित थे। ————-

ममता बनर्जी की हार पर देवोलीना का तंज:चुनाव नतीजों पर बोलीं- बुरा सपना खत्म हुआ; प्रदेश में अब नो रुम्बा तुम्बा, सिर्फ ढिंका चिका

ममता बनर्जी की हार पर देवोलीना का तंज:चुनाव नतीजों पर बोलीं- बुरा सपना खत्म हुआ; प्रदेश में अब नो रुम्बा तुम्बा, सिर्फ ढिंका चिका

‘साथ निभाना साथिया’ में गोपी बहु के नाम से फेमस देवोलीना भट्टाचार्जी ने पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तंज कसा है। देवोलीना ने सोशल मीडिया पर खुशी जताई कि बंगाल में अब बदलाव आ गया है। बंगाल की रहने वाली एक्ट्रेस ने ममता बनर्जी की हार पर खुशी जताते हुए उन्हें प्रदेश के लिए एक ‘बुरा सपना’ बताया है। देवोलीना ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर साफ कहा कि वह किसी राजनेता से अगर सबसे ज्यादा नफरत करती हैं, तो वो ममता बनर्जी ही हैं। ममता को बताया सबसे नापसंद नेता देवोलीना ने ट्विटर (X) पर लिखा कि बंगाल ने पिछले कई सालों में सबसे बुरा दौर देखा है। उन्होंने लिखा, “अगर मैंने कभी किसी राजनेता से नफरत की है, तो वो यही हैं। आरजी (राहुल गांधी) और उनके गैंग से भी ज्यादा।” एक्ट्रेस का मानना है कि बंगाल में बदलाव की सख्त जरूरत थी और अब जाकर जनता को राहत मिली है। उन्होंने ममता और उनकी टीम को सीधे ‘टाटा’ कह दिया। राहुल गांधी और उनके सेंस ऑफ ह्यूमर पर टिप्पणी अपने पोस्ट में देवोलीना ने राहुल गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “असल में मुझे लगता है कि आरजी एक अच्छे इंसान हैं और उनका सेंस ऑफ ह्यूमर भी कमाल का है, जो केंद्र सरकार के लिए हमेशा फायदेमंद साबित होता है।” हालांकि, ममता बनर्जी के मामले में उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब वह बंगाल की राजनीति में कभी नहीं दिखेंगी। ‘नो रुम्बा तुम्बा, अब सिर्फ ढिंका चिका’ देवोलीना ने अपने ट्वीट के आखिर में बंगाली भाषा का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि अब बंगाल में कोई ‘रुम्बा तुम्बा ज़ुम्बा’ नहीं चलेगा। उन्होंने लिखा, “पलटानो दरकर चिलो सो पालते गेइछे (बदलाव की जरूरत थी और वो हो गया)। अब बंगाल में सिर्फ ढिंका चिका, ढिंका चिका होगा।” शादी के बाद एक्टिंग से ब्रेक पर हैं देवोलीना फिलहाल देवोलीना छोटे पर्दे से दूर हैं और अपने परिवार के साथ समय बिता रही हैं। उन्होंने दिसंबर 2022 में शनावाज शेख से शादी की थी और दिसंबर 2024 में उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया, जिसका नाम जॉय रखा है। देवोलीना ‘साथ निभाना साथिया’ के अलावा ‘बिग बॉस’ जैसे बड़े शोज का हिस्सा रह चुकी हैं।

ममता बनर्जी की हार पर देवोलीना का तंज:चुनाव नतीजों पर बोलीं- बुरा सपना खत्म हुआ; प्रदेश में अब नो रुम्बा तुम्बा, सिर्फ ढिंका चिका

ममता बनर्जी की हार पर देवोलीना का तंज:चुनाव नतीजों पर बोलीं- बुरा सपना खत्म हुआ; प्रदेश में अब नो रुम्बा तुम्बा, सिर्फ ढिंका चिका

‘साथ निभाना साथिया’ में गोपी बहु के नाम से फेमस देवोलीना भट्टाचार्जी ने पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तंज कसा है। देवोलीना ने सोशल मीडिया पर खुशी जताई कि बंगाल में अब बदलाव आ गया है। बंगाल की रहने वाली एक्ट्रेस ने ममता बनर्जी की हार पर खुशी जताते हुए उन्हें प्रदेश के लिए एक ‘बुरा सपना’ बताया है। देवोलीना ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर साफ कहा कि वह किसी राजनेता से अगर सबसे ज्यादा नफरत करती हैं, तो वो ममता बनर्जी ही हैं। ममता को बताया सबसे नापसंद नेता देवोलीना ने ट्विटर (X) पर लिखा कि बंगाल ने पिछले कई सालों में सबसे बुरा दौर देखा है। उन्होंने लिखा, “अगर मैंने कभी किसी राजनेता से नफरत की है, तो वो यही हैं। आरजी (राहुल गांधी) और उनके गैंग से भी ज्यादा।” एक्ट्रेस का मानना है कि बंगाल में बदलाव की सख्त जरूरत थी और अब जाकर जनता को राहत मिली है। उन्होंने ममता और उनकी टीम को सीधे ‘टाटा’ कह दिया। राहुल गांधी और उनके सेंस ऑफ ह्यूमर पर टिप्पणी अपने पोस्ट में देवोलीना ने राहुल गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “असल में मुझे लगता है कि आरजी एक अच्छे इंसान हैं और उनका सेंस ऑफ ह्यूमर भी कमाल का है, जो केंद्र सरकार के लिए हमेशा फायदेमंद साबित होता है।” हालांकि, ममता बनर्जी के मामले में उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब वह बंगाल की राजनीति में कभी नहीं दिखेंगी। ‘नो रुम्बा तुम्बा, अब सिर्फ ढिंका चिका’ देवोलीना ने अपने ट्वीट के आखिर में बंगाली भाषा का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि अब बंगाल में कोई ‘रुम्बा तुम्बा ज़ुम्बा’ नहीं चलेगा। उन्होंने लिखा, “पलटानो दरकर चिलो सो पालते गेइछे (बदलाव की जरूरत थी और वो हो गया)। अब बंगाल में सिर्फ ढिंका चिका, ढिंका चिका होगा।” शादी के बाद एक्टिंग से ब्रेक पर हैं देवोलीना फिलहाल देवोलीना छोटे पर्दे से दूर हैं और अपने परिवार के साथ समय बिता रही हैं। उन्होंने दिसंबर 2022 में शनावाज शेख से शादी की थी और दिसंबर 2024 में उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया, जिसका नाम जॉय रखा है। देवोलीना ‘साथ निभाना साथिया’ के अलावा ‘बिग बॉस’ जैसे बड़े शोज का हिस्सा रह चुकी हैं।

विनेश फोगाट को डोपिंग एजेंसी का नोटिस:बेंगलुरु में टेस्ट के लिए नहीं मिलीं, 7 मई तक देना होगा जवाब

विनेश फोगाट को डोपिंग एजेंसी का नोटिस:बेंगलुरु में टेस्ट के लिए नहीं मिलीं, 7 मई तक देना होगा जवाब

10 से 12 मई के बीच गोंडा में होने वाले सीनियर ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट से पहले विनेश फोगाट को इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ITA) ने नोटिस जारी किया है। यह नोटिस डोपिंग टेस्ट के लिए तय समय और स्थान पर मौजूद नहीं रहने के कारण दिया गया है। पिछले 12 महीनों में यह उनकी पहली ऐसी गलती है। हालांकि, इस चेतावनी का उनके आगामी टूर्नामेंट में भाग लेने पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन नियमों के अनुसार, अगर भविष्य में ऐसी दो और चूक होती हैं, तो उन पर दो साल का प्रतिबंध लगाया जा सकता है। 18 दिसंबर को टेस्ट के लिए पहुंची टीम, बेंगलुरु में नहीं मिलीं विनेश फोगाट इंटरनेशनल टेस्टिंग एंजेसी के नोटिस के मुताबिक, मामला 18 दिसंबर 2025 का है। डोपिंग कंट्रोल ऑफिसर (DCO) विनेश फोगाट के बताए बेंगलुरु पते पर पहुंचे थे, लेकिन वे 60 मिनट के तय टाइम स्लॉट में वहां मौजूद नहीं थीं। नियम के अनुसार, ‘रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल’ में शामिल खिलाड़ियों को रोज एक घंटा ऐसा बताना होता है, जब वे बिना नोटिस टेस्ट के लिए उपलब्ध रहें। उस समय विनेश वहां नहीं मिलीं, जिसे नियम का उल्लंघन माना गया 20 महीने बाद अखाड़े में वापसी विनेश फोगाट करीब 20 महीने बाद एक बार फिर कुश्ती के अखाड़े में वापसी करने जा रही हैं। उन्होंने पेरिस ओलिंपिक के बाद कुश्ती से संन्यास लेने का ऐलान किया था, लेकिन कुछ महीनों बाद वापसी की घोषणा कर दी। एशियन गेम्स ट्रायल के लिए आखिरी मौका जापान में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच होने वाले एशियन गेम्स के ट्रायल में हिस्सा लेने के लिए यह विनेश के पास आखिरी मौका है। रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के नियमों के मुताबिक एशियन गेम्स ट्रायल में भाग लेने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना जरूरी है। चूंकि नेशनल चैंपियनशिप पहले ही हो चुकी है, इसलिए अब विनेश को नेशनल रैंकिंग चैंपियनशिप में पदक जीतकर ट्रायल के लिए क्वालिफाई करना होगा विनेश की सफाई: ‘विधानसभा सत्र और बच्चे की वजह से अपडेट नहीं कर पाई लोकेशन’ विनेश को 5 जनवरी 2026 को इस बारे में सूचित किया गया था, जिसका जवाब उन्होंने 19 जनवरी को दिया। विनेश ने बताया कि वे उस दिन हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में हिस्सा लेने के लिए बेंगलुरु से चंडीगढ़ गई थीं। उन्होंने अपनी नई पारिवारिक जिम्मेदारियों और हाल ही में हुए बच्चे के जन्म का भी हवाला दिया। विनेश ने कहा कि व्यस्तता के कारण वे अपनी लोकेशन अपडेट नहीं कर पाईं। एजेंसी ने दलील ठुकराई: ‘SMS और ऐप से जानकारी देना खिलाड़ी की जिम्मेदारी’ ITA ने विनेश की दलील को नाकाफी माना है। एजेंसी ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि के तौर पर उनकी व्यस्तता हम समझते हैं, लेकिन डोपिंग नियमों का पालन करना पूरी तरह खिलाड़ी की जिम्मेदारी है। नोटिस में कहा गया कि विनेश के पास SMS, ईमेल या मोबाइल ऐप के जरिए लोकेशन अपडेट करने के कई रास्ते थे, जिनका उन्होंने उपयोग नहीं किया। एजेंसी ने विनेश को इस फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 7 दिन का समय दिया है। क्या है नियम? वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (WADA) के नियमों के मुताबिक, अगर कोई खिलाड़ी 12 महीने के भीतर 3 बार अपनी लोकेशन बताने में फेल होता है या टेस्ट के लिए मौजूद नहीं रहता, तो इसे ‘एंटी डोपिंग रूल वायलेशन’ माना जाता है। इसमें खिलाड़ी पर 2 साल तक का प्रतिबंध लग सकता है। विनेश के केस में यह अभी पहली गलती है, इसलिए उन्हें केवल चेतावनी दी गई है।

‘कोई विभाजन नहीं है’: अन्नाद्रमुक ने टीवीके गठबंधन पर आंतरिक दरार की अफवाहों को खारिज किया, कहा गेंद विजय के पाले में है | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:06 मई, 2026, 11:50 IST अन्नाद्रमुक के प्रवक्ता कोवई सत्यन ने कहा कि पार्टी के भीतर “एकजुट सहमति” थी और इस बात पर जोर दिया कि नेतृत्व टीवीके के साथ गठबंधन पर अंतिम फैसला करेगा। एआईएडीएमके प्रवक्ता कोवई सत्यन तमिलनाडु सरकार का गठन: तमिलनाडु में तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) को समर्थन देने पर आंतरिक विभाजन की अटकलों के बीच, ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) ने बुधवार को विभाजन की अफवाहों को खारिज कर दिया, और कहा कि पार्टी एकजुट है और टीवीके को समर्थन देने पर कोई भी निर्णय अभिनेता से नेता बने विजय पर निर्भर करता है। लाइव अपडेट का पालन करें पत्रकारों से बात करते हुए, अन्नाद्रमुक के प्रवक्ता कोवई सत्यन ने कहा कि पार्टी के भीतर एक “एकजुट सहमति” थी और इस बात पर जोर दिया कि नेतृत्व चुनाव के बाद किसी भी संभावित गठबंधन पर अंतिम फैसला करेगा। समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से सत्यन ने कहा, “एआईएडीएमके में कोई विभाजन नहीं है। हर कोई आम सहमति में है। गेंद श्री विजय के पाले में है। बहुमत का फैसला आलाकमान द्वारा लिया जाएगा। अगर उन्हें सपने को हकीकत में बदलना है, तो यह श्री विजय की तरफ से आना होगा।” #घड़ी | चेन्नई, तमिलनाडु: यह पूछे जाने पर कि क्या एआईएडीएमके टीवीके को समर्थन देगी, एआईएडीएमके के प्रवक्ता कोवई सत्यन कहते हैं, “गेंद श्री विजय के पाले में है। बहुमत का निर्णय आलाकमान द्वारा लिया जाएगा। अगर उन्हें सपने को हकीकत में बदलना है, तो यह श्री से आना होगा… pic.twitter.com/G1ezhI7Ge0– एएनआई (@ANI) 6 मई 2026 उन्होंने कहा, “गेंद श्री विजय के पाले में है और उन्हें सोच-समझकर निर्णय लेना होगा कि क्या वह 5 साल का कार्यकाल पूरा करना चाहते हैं या कई और पार्टियों को विश्वास में लेने की कोशिश करना चाहते हैं। राज्यपाल ने टीवीके खेमे में विधायकों की संख्या पर स्पष्टता मांगी है। विकास हो रहा है।” उनकी टिप्पणी एआईएडीएमके के दो-तिहाई से अधिक विधायकों के सीवी षणमुगम के चेन्नई कार्यालय में एकत्र होने के बाद आई, जिसमें पार्टी नेतृत्व से टीवीके को समर्थन देने पर विचार करने का आग्रह किया गया, जो वर्तमान में तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत से कम है। और पढ़ें: एआईएडीएमके में दरार? विजय का समर्थन करने वाले दो-तिहाई से अधिक विधायकों ने सीवी षणमुगम के चेन्नई कार्यालय में मुलाकात की कथित तौर पर लगभग 35 विधायकों ने बैठक में भाग लिया और कहा जाता है कि उन्होंने अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी से टीवीके के साथ गठबंधन का पता लगाने का अनुरोध किया है। हालाँकि, सत्यन ने कहा कि कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और दोहराया कि पार्टी आलाकमान कार्रवाई का फैसला करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि टीवीके ने समर्थन के लिए औपचारिक रूप से किसी पार्टी से संपर्क नहीं किया है। उन्होंने कहा, “अगर वे स्थिरता चाहते हैं, तो उन्हें फैसला लेना चाहिए। कुछ गति है। हम इंतजार करेंगे और देखेंगे।” इस बीच, टीवीके ने कहा है कि उसने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से संबद्ध किसी भी पार्टी के साथ चर्चा नहीं की है। तमिलनाडु चुनाव तमिलनाडु में एक बड़ा राजनीतिक झटका देखने को मिला है, जहां पारंपरिक द्रविड़ पार्टियों में से कोई भी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर सामने नहीं आई है। अपने पहले चुनाव में, तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) ने 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतीं, जबकि ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) ने 47 सीटें हासिल कीं। सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) को बड़ा झटका लगा, उसने केवल 59 सीटें जीतीं, शेष सीटें कांग्रेस और वामपंथी समूहों सहित छोटी पार्टियों के पास गईं। टीवीके ने पहले ही पांच कांग्रेस विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया है और अब अतिरिक्त समर्थन हासिल करने और अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास में, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) जैसी पार्टियों के साथ-साथ अन्य पार्टियों तक पहुंच रही है। विजय के 7 मई को चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने की संभावना है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘कोई विभाजन नहीं है’: अन्नाद्रमुक ने टीवीके गठबंधन पर आंतरिक दरार की अफवाहों को खारिज किया, कहा गेंद विजय के पाले में है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु सरकार का गठन(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)टीवीके गठबंधन(टी)एआईएडीएमके समर्थन(टी)विजय तमिलनाडु सीएम(टी)त्रिशंकु विधानसभा तमिलनाडु(टी)तमिलनाडु राजनीतिक संकट(टी)द्रविड़ पार्टियां तमिलनाडु

पाकिस्तान में जन्म, न्यूजीलैंड से रिकॉर्ड:पिता की कोचिंग और अकरम से प्रेरणा; अब्बास ने डेब्यू मैच में ही रचा इतिहास

पाकिस्तान में जन्म, न्यूजीलैंड से रिकॉर्ड:पिता की कोचिंग और अकरम से प्रेरणा; अब्बास ने डेब्यू मैच में ही रचा इतिहास

लाहौर में जन्मे मुहम्मद अब्बास जब एक साल के थे, तब उनका परिवार हजारों किलोमीटर दूर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड चला गया ​था। अब पाकिस्तान की कोई याद उनके पास नहीं बची। लेकिन पहचान दो देशों से मिलकर बनी है- खून में पाकिस्तान और परवरिश में न्यूजीलैंड। अब्बास कहते हैं, ‘मैं बहुत छोटा था, इसलिए कुछ याद नहीं है। लेकिन मेरी पूरी परवरिश न्यूजीलैंड में हुई।’ यही दोहरी पहचान उनकी कहानी को खास बनाती है। अब्बास के पिता की वजह से उनका क्रिकेट से बचपन से ही लगाव था। अब्बास के शुरुआती हीरो पाकिस्तानी पेसर वसीम अकरम रहे। अब्बास कहते हैं, ‘मैंने उनके करियर का आखिरी हिस्सा ही देखा, लेकिन मेरे पापा हमेशा उनके बारे में बताते थे।’ बाद में न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों ने उन्हें प्रेरित किया। केन विलियमसन और ट्रेंट बोल्ट उनके रोल मॉडल बने। कुछ साल पहले उनकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया। पिता को वेलिंगटन में कोच की नौकरी मिली। अब अब्बास के सामने दो रास्ते थे, ऑकलैंड में रहना या परिवार के साथ वेलिंगटन जाना। उन्होंने परिवार को चुना। यही बदलाव उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक ले आया। मार्च 2025 में उन्हें न्यूजीलैंड के लिए वनडे डेब्यू का मौका मिला। खास बात यह थी कि मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ नेपियर में था। अब्बास कहते हैं ‘यह थोड़ा अजीब अहसास था। मैं उम्मीद नहीं कर रहा था कि खेलूंगा, लेकिन अचानक प्लेइंग इलेवन में आ गया। यह मेरे लिए सपने जैसा था।’ उन्होंने डेब्यू को यादगार बना दिया। नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए 26 गेंदों में 52 रन ठोक दिए और डेब्यू मैच में सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड बना दिया। वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, ‘मुझे उस समय पता ही नहीं था कि यह रिकॉर्ड है। बाद में बताया गया। अभी भी विश्वास नहीं होता।’ टॉम लैथम जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना उन्हें अब भी खास लगता है। हालांकि, पाकिस्तान से उनका रिश्ता अब भी कायम है। वे कहते हैं ‘मेरे कई रिश्तेदार वहां हैं। मैं 2018 तक नियमित जाता था। अब क्रिकेट की वजह से नहीं जा पाता, लेकिन दोनों देशों से मेरा गहरा जुड़ाव है।’ क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं बल्कि​ पिता से जुड़ा खास रिश्ता अब्बास के क्रिकेटिंग करियर की शुरुआत उनके पिता से होती है। उनके पिता ही उनके कोच भी रहे हैं। क्रिकेट उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि पिता से जुड़ा रिश्ता भी है। वे बताते हैं, ‘मेरे पिता ही मेरे सबसे बड़े कोच हैं। वे बॉलिंग कोच हैं और बचपन से मैंने उन्हीं के साथ ट्रेनिंग की है। उन्होंने ही मुझे क्रिकेट से जोड़ा।’ पिता के साथ बिताए गए समय, अभ्यास और अनुशासन ने उन्हें एक मजबूत खिलाड़ी बनाया।

पाकिस्तान में जन्म, न्यूजीलैंड से रिकॉर्ड:पिता की कोचिंग और अकरम से प्रेरणा; अब्बास ने डेब्यू मैच में ही रचा इतिहास

पाकिस्तान में जन्म, न्यूजीलैंड से रिकॉर्ड:पिता की कोचिंग और अकरम से प्रेरणा; अब्बास ने डेब्यू मैच में ही रचा इतिहास

लाहौर में जन्मे मुहम्मद अब्बास जब एक साल के थे, तब उनका परिवार हजारों किलोमीटर दूर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड चला गया ​था। अब पाकिस्तान की कोई याद उनके पास नहीं बची। लेकिन पहचान दो देशों से मिलकर बनी है- खून में पाकिस्तान और परवरिश में न्यूजीलैंड। अब्बास कहते हैं, ‘मैं बहुत छोटा था, इसलिए कुछ याद नहीं है। लेकिन मेरी पूरी परवरिश न्यूजीलैंड में हुई।’ यही दोहरी पहचान उनकी कहानी को खास बनाती है। अब्बास के पिता की वजह से उनका क्रिकेट से बचपन से ही लगाव था। अब्बास के शुरुआती हीरो पाकिस्तानी पेसर वसीम अकरम रहे। अब्बास कहते हैं, ‘मैंने उनके करियर का आखिरी हिस्सा ही देखा, लेकिन मेरे पापा हमेशा उनके बारे में बताते थे।’ बाद में न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों ने उन्हें प्रेरित किया। केन विलियमसन और ट्रेंट बोल्ट उनके रोल मॉडल बने। कुछ साल पहले उनकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया। पिता को वेलिंगटन में कोच की नौकरी मिली। अब अब्बास के सामने दो रास्ते थे, ऑकलैंड में रहना या परिवार के साथ वेलिंगटन जाना। उन्होंने परिवार को चुना। यही बदलाव उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक ले आया। मार्च 2025 में उन्हें न्यूजीलैंड के लिए वनडे डेब्यू का मौका मिला। खास बात यह थी कि मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ नेपियर में था। अब्बास कहते हैं ‘यह थोड़ा अजीब अहसास था। मैं उम्मीद नहीं कर रहा था कि खेलूंगा, लेकिन अचानक प्लेइंग इलेवन में आ गया। यह मेरे लिए सपने जैसा था।’ उन्होंने डेब्यू को यादगार बना दिया। नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए 26 गेंदों में 52 रन ठोक दिए और डेब्यू मैच में सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड बना दिया। वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, ‘मुझे उस समय पता ही नहीं था कि यह रिकॉर्ड है। बाद में बताया गया। अभी भी विश्वास नहीं होता।’ टॉम लैथम जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना उन्हें अब भी खास लगता है। हालांकि, पाकिस्तान से उनका रिश्ता अब भी कायम है। वे कहते हैं ‘मेरे कई रिश्तेदार वहां हैं। मैं 2018 तक नियमित जाता था। अब क्रिकेट की वजह से नहीं जा पाता, लेकिन दोनों देशों से मेरा गहरा जुड़ाव है।’ क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं बल्कि​ पिता से जुड़ा खास रिश्ता अब्बास के क्रिकेटिंग करियर की शुरुआत उनके पिता से होती है। उनके पिता ही उनके कोच भी रहे हैं। क्रिकेट उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि पिता से जुड़ा रिश्ता भी है। वे बताते हैं, ‘मेरे पिता ही मेरे सबसे बड़े कोच हैं। वे बॉलिंग कोच हैं और बचपन से मैंने उन्हीं के साथ ट्रेनिंग की है। उन्होंने ही मुझे क्रिकेट से जोड़ा।’ पिता के साथ बिताए गए समय, अभ्यास और अनुशासन ने उन्हें एक मजबूत खिलाड़ी बनाया।

रितेश की फिल्म ‘राजा शिवाजी’ की कमाई 50 करोड़ पार:टॉप-5 मराठी फिल्मों में शामिल; महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग

रितेश की फिल्म ‘राजा शिवाजी’ की कमाई 50 करोड़ पार:टॉप-5 मराठी फिल्मों में शामिल; महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग

रितेश देशमुख के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘राजा शिवाजी’ ने बॉक्स ऑफिस पर 50 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लिया है। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित इस फिल्म को मराठी और हिंदी दोनों भाषाओं में रिलीज किया गया था। हालांकि रिलीज के पांचवें दिन (मंगलवार) को फिल्म की कमाई में थोड़ी गिरावट देखी गई। सैक्निल्क की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को फिल्म ने मराठी वर्जन में करीब 3.35 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। यह सोमवार के मुकाबले करीब 20.4% कम है। फिल्म के अब तक के कुल नेट कलेक्शन की बात करें, तो यह 44 करोड़ रुपए हो गया है। इसमें मराठी वर्जन का योगदान सबसे ज्यादा 30.5 करोड़ रुपए है। वर्ड-ऑफ-माउथ का मिल रहा फायदा फिल्म का इंडिया ग्रॉस कलेक्शन अब 52.68 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। हिंदी वर्जन की शुरुआत मराठी के मुकाबले थोड़ी धीमी रही थी, लेकिन रिव्यू और वर्ड-ऑफ-माउथ की वजह से हिंदी बेल्ट में भी फिल्म की कमाई बढ़ रही है। इस कलेक्शन के साथ ही ‘राजा शिवाजी’ अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली टॉप-5 मराठी फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो गई है। महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग फिल्म की सफलता के बीच शिवसेना (UBT) नेता अंबादास दानवे ने इसे महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग उठाई है। दानवे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर कहा है कि यह फिल्म शिवाजी महाराज के महान कार्यों को युवाओं और जनता तक पहुंचाती है। उन्होंने मांग की कि फिल्म को टैक्स-फ्री किया जाए ताकि टिकट सस्ते हों और ज्यादा से ज्यादा लोग इसे सिनेमाघरों में जाकर देख सकें। फिल्म में है बड़ी स्टारकास्ट 1 मई को रिलीज हुई इस फिल्म में रितेश देशमुख ने न सिर्फ मुख्य भूमिका निभाई है, बल्कि इसका निर्देशन भी खुद किया है। फिल्म में संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, विद्या बालन, भाग्यश्री और जेनेलिया देशमुख जैसे बड़े सितारे अहम किरदारों में नजर आए हैं। इनके अलावा महेश मांजरेकर, सचिन खेडेकर, फरदीन खान, जितेंद्र जोशी और अमोल गुप्ते ने भी फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।

रितेश की फिल्म ‘राजा शिवाजी’ की कमाई 50 करोड़ पार:टॉप-5 मराठी फिल्मों में शामिल; महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग

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रितेश देशमुख के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘राजा शिवाजी’ ने बॉक्स ऑफिस पर 50 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लिया है। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित इस फिल्म को मराठी और हिंदी दोनों भाषाओं में रिलीज किया गया था। हालांकि रिलीज के पांचवें दिन (मंगलवार) को फिल्म की कमाई में थोड़ी गिरावट देखी गई। सैक्निल्क की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को फिल्म ने मराठी वर्जन में करीब 3.35 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। यह सोमवार के मुकाबले करीब 20.4% कम है। फिल्म के अब तक के कुल नेट कलेक्शन की बात करें, तो यह 44 करोड़ रुपए हो गया है। इसमें मराठी वर्जन का योगदान सबसे ज्यादा 30.5 करोड़ रुपए है। वर्ड-ऑफ-माउथ का मिल रहा फायदा फिल्म का इंडिया ग्रॉस कलेक्शन अब 52.68 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। हिंदी वर्जन की शुरुआत मराठी के मुकाबले थोड़ी धीमी रही थी, लेकिन रिव्यू और वर्ड-ऑफ-माउथ की वजह से हिंदी बेल्ट में भी फिल्म की कमाई बढ़ रही है। इस कलेक्शन के साथ ही ‘राजा शिवाजी’ अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली टॉप-5 मराठी फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो गई है। महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग फिल्म की सफलता के बीच शिवसेना (UBT) नेता अंबादास दानवे ने इसे महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग उठाई है। दानवे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर कहा है कि यह फिल्म शिवाजी महाराज के महान कार्यों को युवाओं और जनता तक पहुंचाती है। उन्होंने मांग की कि फिल्म को टैक्स-फ्री किया जाए ताकि टिकट सस्ते हों और ज्यादा से ज्यादा लोग इसे सिनेमाघरों में जाकर देख सकें। फिल्म में है बड़ी स्टारकास्ट 1 मई को रिलीज हुई इस फिल्म में रितेश देशमुख ने न सिर्फ मुख्य भूमिका निभाई है, बल्कि इसका निर्देशन भी खुद किया है। फिल्म में संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, विद्या बालन, भाग्यश्री और जेनेलिया देशमुख जैसे बड़े सितारे अहम किरदारों में नजर आए हैं। इनके अलावा महेश मांजरेकर, सचिन खेडेकर, फरदीन खान, जितेंद्र जोशी और अमोल गुप्ते ने भी फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।