लाहौर में जन्मे मुहम्मद अब्बास जब एक साल के थे, तब उनका परिवार हजारों किलोमीटर दूर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड चला गया था। अब पाकिस्तान की कोई याद उनके पास नहीं बची। लेकिन पहचान दो देशों से मिलकर बनी है- खून में पाकिस्तान और परवरिश में न्यूजीलैंड। अब्बास कहते हैं, ‘मैं बहुत छोटा था, इसलिए कुछ याद नहीं है। लेकिन मेरी पूरी परवरिश न्यूजीलैंड में हुई।’ यही दोहरी पहचान उनकी कहानी को खास बनाती है। अब्बास के पिता की वजह से उनका क्रिकेट से बचपन से ही लगाव था। अब्बास के शुरुआती हीरो पाकिस्तानी पेसर वसीम अकरम रहे। अब्बास कहते हैं, ‘मैंने उनके करियर का आखिरी हिस्सा ही देखा, लेकिन मेरे पापा हमेशा उनके बारे में बताते थे।’ बाद में न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों ने उन्हें प्रेरित किया। केन विलियमसन और ट्रेंट बोल्ट उनके रोल मॉडल बने। कुछ साल पहले उनकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया। पिता को वेलिंगटन में कोच की नौकरी मिली। अब अब्बास के सामने दो रास्ते थे, ऑकलैंड में रहना या परिवार के साथ वेलिंगटन जाना। उन्होंने परिवार को चुना। यही बदलाव उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक ले आया। मार्च 2025 में उन्हें न्यूजीलैंड के लिए वनडे डेब्यू का मौका मिला। खास बात यह थी कि मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ नेपियर में था। अब्बास कहते हैं ‘यह थोड़ा अजीब अहसास था। मैं उम्मीद नहीं कर रहा था कि खेलूंगा, लेकिन अचानक प्लेइंग इलेवन में आ गया। यह मेरे लिए सपने जैसा था।’ उन्होंने डेब्यू को यादगार बना दिया। नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए 26 गेंदों में 52 रन ठोक दिए और डेब्यू मैच में सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड बना दिया। वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, ‘मुझे उस समय पता ही नहीं था कि यह रिकॉर्ड है। बाद में बताया गया। अभी भी विश्वास नहीं होता।’ टॉम लैथम जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना उन्हें अब भी खास लगता है। हालांकि, पाकिस्तान से उनका रिश्ता अब भी कायम है। वे कहते हैं ‘मेरे कई रिश्तेदार वहां हैं। मैं 2018 तक नियमित जाता था। अब क्रिकेट की वजह से नहीं जा पाता, लेकिन दोनों देशों से मेरा गहरा जुड़ाव है।’ क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं बल्कि पिता से जुड़ा खास रिश्ता अब्बास के क्रिकेटिंग करियर की शुरुआत उनके पिता से होती है। उनके पिता ही उनके कोच भी रहे हैं। क्रिकेट उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि पिता से जुड़ा रिश्ता भी है। वे बताते हैं, ‘मेरे पिता ही मेरे सबसे बड़े कोच हैं। वे बॉलिंग कोच हैं और बचपन से मैंने उन्हीं के साथ ट्रेनिंग की है। उन्होंने ही मुझे क्रिकेट से जोड़ा।’ पिता के साथ बिताए गए समय, अभ्यास और अनुशासन ने उन्हें एक मजबूत खिलाड़ी बनाया।













































