तमिल चुनाव में नाम का कन्फ्यूजन! एक सीट, तीन-तीन ‘विजय’, वोटर बोले-असली कौन है भाई?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार मुद्दा, वादे और वादे पीछे छोड़ दिए गए हैं।सियासत का खेल भी दिलचस्प और पेचीदा होता जा रहा है। इस बार कॉम्पिटिशन सिर्फ यूनिवर्सल के बीच नहीं, बल्कि यूनिवर्सल के बीच भी है। चेन्नई के कई दावों पर हमनाम गुलामी की वे ने राजनीतिक गणित को लेकर चर्चा की है और सबसे ज्यादा असर विजय और उनकी पार्टी तमिलगात्री कजगम (टीवीके) पर पड़ा है। चेन्नई की कई सिफारिशों पर ऐसा लग रहा है जैसे चुनाव नहीं, ऑलवेस्ट की कॉपी-पेस्ट प्रतियोगिता चल रही हो और सबसे ज्यादा ‘टारगेट’ बने हैं सुपरस्टार-से-नेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कजगम (टीवीके)। 6 अप्रैल को नामांकन की अंतिम तिथि समाप्त हुई ही तस्वीर साफ हो गई कि चेन्नई के कई नामांकन पर एक ही नाम के कई उम्मीदवार मैदान में हैं, राजनीतिक विशेषज्ञ इसे कोई संयोग नहीं मान रहे हैं, बल्कि इसे एक सोची-समझी रणनीति बता रहे हैं, जिसका उद्देश्य मतदाताओं को प्रेरित करना और समर्थकों का समूह बनाना है। एक विजय नहीं, संपूर्ण ‘विजय परिवार’ मैदान मेंपेरम्बूर सीट पर असली विजय चुनाव लड़ रहे हैं… लेकिन मजा तब आया जब बैलेट दो पर और ‘विजय’ भी कूद पड़े। पेरम्बूर सीट, जहां अभिनेता विजय के लिए खुद चुनाव लड़ रहे हैं, वहां दो और सोलो ने बिल्कुल एक ही नाम से नामांकन किया है। ऐसे में बैलेट पर एक ही नाम के कई बार प्रदर्शन और प्रदर्शन से शुरू होगा कन्न फ़ुजन का खेल। टीवीके के लिए यह सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी पहली बार बड़े स्तर पर इलिनोइस में उतरी है और उसकी पहचान अभी भी मजबूत नहीं हुई है। अब सोचिये सामने वाले वोटर का मामला, ईवीएम के बेकार दिमाग में सिर्फ एक सवाल: “यार, मेरा वाला विजय कौन है?” हर सीट पर ‘नाम क्लोन’सिर्फ पेरम्बूर ही नहीं, बल्कि चेन्नई की कई रेवेरेशंस पर येरे रेवेरेशंस दिख रहे हैं। हार्बर में “सिनोरा” नाम का पूरा ज्वालामुखी उतरा हुआ है। रॉयपुरम में डी जयकुमार के सामने तीन-तीन जयकुमार लाइन में हैं- जैसे टिकटें खिड़की पर फॉर्म की मंजूरी आ गई। हार्बर सीट पर टीवीके उम्मीदवार सिनोरा पीएस अशोक के खिलाफ दो और “सिनोरा” नाम वाले प्रतियोगी मैदान में हैं। रॉयपुरम में डी जयकुमार के सामने तीन हमनाम प्रतियोगी हैं। चेपॉक-ट्रिपलिकेन सीट पर टीवीके उम्मीदवार डी सेल्वम चेपॉक-ट्रिपलिकन में उधयोदय स्टालिन के सामने टीवीके के डी सेल्वम हैं… लेकिन उनके तीन ‘डुप्लीकेट’ भी मौजूद हैं, जहां उनका मुकाबला उधयोदय स्टालिन से है।थाउजेंड लाइट्स में तो हाल ही में यह है कि जेसीडी एम्बालैब्स को भी शायद दो बार चेक करना पड़ा कि “मैं असली हूं या नहीं!” थाउजेंड लाइट्स सीट पर जेसीडी प्रभावशाली के सामने भी तीन हमनाम प्रतियोगी प्रतियोगी हैं। वहीं विल्लीवक्कम और एग्मोर की पसंद पर भी यही रणनीति देखने को मिल रही है। मीम्स की बाढ़ आ गई—सोशल मीडिया पर उठो सवालटीवीके चक ने सोशल मीडिया पर हाफनामों की कॉपी साझा करते हुए आरोप लगाया है कि हमनाम मासूम के दस्तावेज में एक नोट हीरी वकील से जुड़े हुए हैं। हालाँकि, जब इन नामांकित से संपर्क करने की कोशिश की गई तो कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। एक कॉल पर जवाब आया- “गलत नंबर है” और फोन कट गया। दूसरे ने अपने नामांकन का उद्देश्य शैल साध ली पर रखा। “एक नाम, तीन उम्मीदवार- 1 खरीदें 2 मुफ़्त पाएं!”फ़ोन करो तो जवाब दो- “गलत नंबर है”जब इन हमनाम शौक़ीन से बात करनी चाही, तो एक ने फ़ोन करके कहा- “गलत नंबर है” और फ़ोन कट गया। दूसरे ने तो इतनी रहस्यमयी शैलियां साधी कि लगे जैसे चुनाव नहीं, कोई अंडरकवर मिशन चल रहा हो। ये मजाक नहीं, पूरी रणनीति है, क्या है इस ‘नाम वाले गेम’ का असर?राजनीतिक सिद्धांतों का कहना है कि हमनाम उम्मीदवार के लिए कोई नई बात नहीं है। करीबी मुकाबलों में यह रणनीति अपनाई जाती है ताकि वोटरों को धोखा दिया जा सके और असली दावेदार के वोट कट सके।इस बार चेन्नई के 16 नामांकनों में कुल 628 नामांकन शामिल हैं। पेरूर में सबसे ज्यादा 66 उम्मीदवार हैं, जबकि मालापुर में सबसे कम 25. अब हंसी अपनी जगह है, लेकिन राजनीति में यह पुराना खेल है- वोट काटने की रणनीति। जब मुकाबला टक्कर का हो, तो नाम का कन्फ्यूजन पैदा करो… और वोटर को मजबूर कर दो। चेन्नई के 16 क्वार्टरों में कुल 628 प्रतियोगी मैदान हैं। पेरूर में 66 उम्मीदवार-यानी ईवीएम भी शायद सोच रही होगी, “इतने नाम कहां फिट होगा?” रियल एस्टेट अभी बाकी है, असर क्या होगा?यह ‘नाम का खेल’ वैज्ञानिकता पर कितना असर डालेगा, यह तो 4 मई को तीसरी के बाद ही साफ होगा। लेकिन इतना है कि इस बार मतदाताओं को सिर्फ उम्मीदवार नहीं, बल्कि सही नाम भी पहचानना होगा। तमिल की राजनीति में यह परिवर्तन नया सा संकेत देता है-अब चुनाव सिर्फ नाम या फिर आख़री का नहीं, बल्कि पहचान और भ्रम की लड़ाई भी बन गई है। अब जब वोटिंग होगी और रियल कॉमेडी उस दिन देखने को मिल सकती है, जब वोटर ईवीएम के सामने नाम आएगा… और फिर मिचमिचाकर सोचेंगे- “भाई, ये वाला विजय मेरा वाला है या अगले वाला?” तमिल इलेक्शन 2026 में एक बात साफ कर दी गई है- ये सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि पहचान की हकीकत बन गई है।
भवानीपुर से फिर मैदान में नैतिकता, नामांकित के लिए अखण्ड अखण्ड, नैतिकता हुई तेज

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता की भवानीपुर विधानसभा सीट से चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए रवाना हो गई हैं। भवानीपुर सीट ममता बनर्जी के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह उनका पारंपरिक क्षेत्र है। हर बार की तरह इस बार भी वह इसी सीट से चुनाव लड़ने जा रही हैं। नामांकन प्लेसमेंट के लिए उनके नामांकन होने के साथ-साथ राजनीतिक एसोसिएट्स का परीक्षण किया गया है। इस पार्टी के कई नेता और समर्थक भी उनके साथ नजर आ सकते हैं. इस चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है और सभी की नजरें अब भवानीपुर सीट पर टिकी हुई हैं। बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी से मुकाबला 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कोलकाता की भवानीपुर सीट पर इस बार बड़ा और सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। यहां मुख्यमंत्री और प्रमुख ममता बनर्जी का सामना बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी से है। यह मुकाबला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि बीजेपी ने सुवेंदु अधिकारी को मैदान में उतारकर 2021 के नंदीग्राम चुनाव में मुकाबले को फिर से दोहराने की कोशिश की है। उस समय भी दोनों नेताओं के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था. भवानीपुर विधानसभा सीट क्यों महत्वपूर्ण है? पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भवानीपुर विधानसभा सीट से गहरा और पुराना रिश्ता रहा है। यह सीट सिर्फ एक चुनावी क्षेत्र नहीं है, बल्कि उनकी राजनीतिक पहचान का अहम हिस्सा माना जाता है। हर चुनाव में इस सीट पर उनकी मजबूत पकड़ देखने को मिली है, जिससे यह सीट टीएमसी (मूल कांग्रेस) का गढ़ बन गई है। भवानीपुर कोलकाता का एक प्रमुख एवं राजनीतिक रूप से सक्रिय क्षेत्र है, जहाँ शहरी क्षेत्र की संख्या अधिक है। इस क्षेत्र में शिक्षा, व्यापार और मध्यम वर्ग की बड़ी भूमिका है, जो कि निवेशकों को प्रभावित करती है। ममता बनर्जी ने यहां से कई बार लॉगिन कर अपनी पसंद का प्रस्ताव दिया है। ये भी पढ़ें: तमिल चुनाव में नाम का कन्फ्यूजन! एक सीट, तीन-तीन ‘विजय’, वोटर बोले-असली कौन है भाई? (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)डब्ल्यूबी चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)ममता बनर्जी भबनीपुर(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव समाचार(टी)ममता नामांकन(टी)भबनीपुर सीट(टी)टीएमसी न्यूज(टी)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)ममता बनर्जी भवानीपुर(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव समाचार(टी)ममता नामांकन(टी)भवानीपुर सीट(टी)टीएमसी समाचार
ग्वालियर में मां की लाश के साथ 5दिन रहे भाई-बहन:डेढ़ माह बाद भी कह रहे- मां हमें लेने जरूर आएगी; कीड़े पड़ने पर पुलिस ने बीमार कहकर उठाया था शव

ग्वालियर के टोपी बाजार इलाके में रहने वाली रिटायर्ड क्लर्क उर्मिला भदौरिया (70) की मौत के बाद एक दर्दनाक कहानी सामने आई है। उनके मानसिक रूप से कमजोर बेटे अखंड (40) और बेटी रितु (38) पांच दिन तक मां के शव के साथ घर में ऐसे ही रहे जैसे सब सामान्य हो। उर्मिला देवी की मौत 14 फरवरी की रात हो गई थी, लेकिन दोनों बेटा-बेटी इसे समझ ही नहीं सके। 19 फरवरी को जब शव सड़ने लगा और उसमें कीड़े पड़ गए, तब बदबू बाहर फैली और पड़ोसियों को शक हुआ। पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को बरामद किया। दोनाें के सामने ‘बीमार’ बताकर ले गए शव पुलिस ने दोनों की मानसिक स्थिति को देखते हुए उनके सामने मां के शव को यह कहकर उठाया कि वह बीमार हैं और अस्पताल ले जा रहे हैं। यही बात अब उनके मन में बैठ गई है। एक दिन बाद दोनों रात को मां को तलाशते हुए कोतवाली थाना पहुंचे। उन्होंने पुलिस से कहा-हमारी मां खो गई है। कहीं मिल नहीं रही है, आप ढूंढ़ दो। मृतका के दोनों बेटा-बेटी इस बात से अनजान हैं कि उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं है। करीब एक महीने बाद भी दोनों भाई-बहन स्वर्ग सदन आश्रम में रह रहे हैं और दिनभर मां का इंतजार करते हैं। कभी दरवाजे पर बैठ जाते हैं तो कभी पूछते हैं “मां कब आएगी?” जब उन्हें समझाया जाता है कि मां अब इस दुनिया में नहीं है, तो वे इसे मानने से इंकार कर देते हैं और कहते हैं “मां बीमार है, अस्पताल गई है, हमें लेने जरूर आएगी।” मां ही थी उनकी पूरी दुनिया पड़ोसियों के मुताबिक, दोनों भाई-बहन महीनों घर से बाहर नहीं निकलते थे। मां ही उनकी देखभाल करती थीं। उर्मिला देवी ने पति के निधन के बाद अकेले ही बच्चों को पाला-पोसा और पढ़ाया-लिखाया। बेटा बी-टेक और बेटी साइंस ग्रेजुएट है। बच्चों की मानसिक स्थिति के कारण उर्मिला ने रिश्तेदारों और बाहरी दुनिया से दूरी बना ली थी। दो कमरों का घर ही उनका पूरा संसार बन गया था। घर की सफाई भी नियमित नहीं हो पाती थी। घर की छत पर सालों से कचरा जमा हो रहा है। पुलिस और आश्रम कर रहे काउंसलिंग घटना के बाद पुलिस ने दोनों को आश्रम में भर्ती कराया, जहां उनकी काउंसलिंग की जा रही है। लेकिन अब तक वे इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। आश्रम प्रबंधन के अनुसार, बच्चे बार-बार घर जाने की जिद करते हैं और मां से मिलने की बात कहते हैं। ऐसे में उनकी मानसिक स्थिति को देखते हुए धीरे-धीरे काउंसलिंग के जरिए सच्चाई समझाने की कोशिश की जा रही है। मां ने पिता बनकर बच्चों को संभाला था पड़ोसियों के मुताबिक जालिम सिंह का बाड़ा में रहने वाली 70 वर्षीय उर्मिला की शादी 45 साल पहले सुरेंद्र सिंह भदौरिया से हुई थी। उर्मिला उनकी दूसरी पत्नी थी। पहली पत्नी की प्रसव के दौरान मौत हो गई थी। गुजरते वक्त में बेटा अखंड प्रताप सिंह और बेटी रितु भदौरिया का जन्म हुआ। उर्मिला भदौरिया के पति की काफी समय पहले ही मौत हो चुकी थी। अकेले ही उन्होंने अपने बच्चों को संभाला, उन्हें पढ़ाया-लिखाया। अपनी हिम्मत से बच्चों की मानसिक कमजोरी को हराया। मामला तब बिगड़ा जब वे खुद बीमार हुईं और घर में बेबस पड़ी रहीं। उनको समझ नहीं आ रहा कि मां नहीं रही स्वर्ग सदन आश्रम के संचालक विकास गोस्वामी ने बताया कि उर्मिला देवी के निधन के बाद पुलिस ने उनके बेच्चे अखंड और रितु को आश्रम भेज दिया था। बच्चों की मां का शव उनके सामने पुलिस यह कहकर ले गई थी कि बीमार है इलाज कराने ले जा रहे हैं। उनके मन में वही बात ठहर सी गई है। अब वह यही कहते हैं कि मां बीमार है और उनको लेने आएगी। वह अपने घर जाने की जिद्द भी कर रहे हैं। पुलिस से कहा है कि उनकी सुरक्षा में एक बार उनको उनके घर को दिखा लाया जाए।
वजन घटाने के लिए ग्रीन टी बनाम ब्लैक टी: पेट की चर्बी बदलने के लिए कौन सी चाय बेहतर, ग्रीन या ब्लैक टी में क्या बेस्ट? जानिए फायदे

8 अप्रैल 2026 को 10:17 IST पर अद्यतन किया गया वजन घटाने के लिए ग्रीन टी बनाम ब्लैक टी: वजन घटाने के लिए लोग अक्सर ग्रीन टी और ब्लैक टी पीना पसंद करते हैं। आइए जानते हैं कि पेट की चर्बी के लिए कॅस सी चाय फ़्लोरिडा सबसे अच्छा होगा। (टैग्सटूट्रांसलेट)वजन घटाने के लिए हरी चाय(टी)काली चाय के फायदे(टी)मेटाबॉलिज्म टिप्स(टी)पेट की चर्बी जलाने(टी)वजन घटाने वाले पेय(टी)फिटनेस गाइड हिंदी(टी)हर्बल चाय के फायदे
केरल चुनाव 2026: केरल विधानसभा चुनाव के कुल, 883 उम्मीदवार मैदान में, कल वोट से पहले जान सहयोगी सब

केरल विधानसभा चुनाव 2026: केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) रत्न यू.के. केलकर ने मंगलवार को कहा कि विधानसभा चुनाव के लिए नौ अप्रैल को होने वाले मतदान के सभी हिस्से पूरे कर लिए गए हैं, जिसमें 883 दावेदार राज्य के 2.71 करोड़ का समर्थन हासिल करने की कोशिश करेंगे। केलकर ने बताया कि राज्य में 30,495 मतदान केंद्र स्थापित किये गये हैं. उन्होंने बताया कि इनमें 24 सहायक मतदान केंद्र भी शामिल हैं, संविधान आवश्यकता सूची के विशेष गहन पुनीक्षण (एसआईआर) के बाद पोस्ट किया गया। केलकर के अनुसार, केरल के कासरगोड, कब्लॉकर, पलक्क, मलप्पुरम और एर्नाकुलम में नए मतदान केंद्र की स्थापना की जाएगी। उन्होंने बताया कि इन वोटिंग वोटिंग में 352 का ऑपरेशन महिलाएं और 37 का ऑपरेशन डायलॉग लोग शामिल होंगे। केलकर के, 140 वितरण और संग्रह केंद्र स्थापित किये गये हैं और मैटपैटर्न की गिनती 140 ‘स्ट्रांग रूम’ में की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘चुनाव प्रक्रिया के प्रबंधन के तहत, हमने 1.46 लाख प्रशिक्षण चुनाव अधिकारियों की स्थापना की है। ‘कानून-व्यवस्था द्वारा बनाए गए भंडार और प्लास्टिक वोटिंग के लिए 76,000 पुलिस और सेंट्रल सीलिंग की स्थापना की गई है।’ (टैग्सटूट्रांसलेट)कन्नूर(टी)कासरगोड(टी)पलक्कड़(टी)रतन यू. केलकर(टी)मलप्पुरम(टी)एर्नाकुलम(टी)केरल चुनाव(टी)केरल चुनाव 2026(टी)कन्नूर(टी)मलप्पुरम(टी)रतन यू केलकर(टी)कन्नूर(टी)केरल चुनाव 2026(टी)के बॉलर(टी)कासरगोड(टी)पलक्क(टी)रत्न यू केलकर(टी)मलप्पुरम(टी)एर्नाकुलम(टी)केरल चुनाव(टी)केरल चुनाव 2026
रेपो रेट में बदलाव नहीं, लोन महंगे नहीं होंगे:RBI ने ब्याज दर 5.25% पर बरकरार रखी; 2025 में चार बार में 1.25% की कटौती

इस बार रेपो रेट में बदलाव नहीं किया गया है। इसे 5.25% पर बरकरार रखा है। यानी लोन महंगे नहीं होंगे और आपकी EMI भी नहीं बढ़ेगी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज 8 अप्रैल को मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग में लिए फैसलों की जानकारी दी। इससे पहले फरवरी में भी रेपो रेट में बदलाव नहीं किया था। RBI ने दिसंबर में ब्याज दर 0.25% घटाकर 5.25% की थी। RBI जिस रेट पर बैंकों को लोन देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं। जब RBI रेपो रेट घटाता है तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और वे इस फायदे को ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। 2025 में चार बार में 1.25% की कटौती RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की बड़ी बातें रेपो रेट पर लिए गए फैसले की वजह हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है। वित्त वर्ष 2026-27 में मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की कुल 6 बैठकें होंगी। पहली बैठक 6-8 अप्रैल 2026 को हुई है। रेपो रेट क्या है, इससे लोन कैसे सस्ता होता है? RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अक्सर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं यानी बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं। रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है। इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।
दिन में 4 बार खाना खाया, फिर भी 2 महीने में घटा लिया 12 किलो वजन ! शख्स ने बताया अनोखा वेट लॉस प्लान

Last Updated:April 08, 2026, 09:46 IST Easy Weight Loss Formula: इंस्टाग्राम पर एक शख्स ने बताया है कि उसने दिन में 4 बार खाना खाया और इसके बावजूद 2 महीने में 12 किलो वजन घटाने में कामयाबी हासिल कर ली. उसने वेट लॉस के लिए हेल्दी और प्रोटीन से भरपूर डाइट ली और चीनी व जंक फूड से दूरी बनाई. शख्स की जर्नी यह दिखाती है कि छोटे-छोटे बदलाव से भी तेजी से वजन घटाया जा सकता है. वेट लॉस करने के लिए सही खानपान की जरूरत होती है. Amazing Weight Loss Tips: आज के दौर में मोटापा सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है. बड़ी संख्या में युवा ओवरवेट और मोटापे का शिकार हो रहे हैं. अगर शरीर का वजन ज्यादा हो जाए, तो इससे डायबिटीज, हार्ट डिजीज, कैंसर, लिवर डिजीज समेत कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में तमाम लोग अपना वजन कम करने की कोशिश करते हैं. आमतौर पर वजन कम करने के लिए लोग कम खाना खाते हैं और दिनभर भूखा रहने की कोशिश करते हैं. हालांकि अगर खानपान में सुधार कर लिया जाए, तो बिना फास्टिंग और वर्कआउट के भी वेट लॉस किया जा सकता है. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक एक व्यक्ति ने यह साबित कर दिखाया कि बिना अत्यधिक सख्ती के भी सिर्फ सही खान-पान और छोटे बदलावों से वजन घटाया जा सकता है. उसने दिन में 4 बार बैलेंस्ड डाइट लेकर मात्र दो महीनों में 12 किलो वजन कम कर लिया. ईशान कार्डे नाम के युवक ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी वेट लॉस जर्नी साझा की. उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने 82 किलो से 70 किलो तक वजन घटाया और वह भी बिना किसी चीट मील के. उन्होंने अपनी डाइट में पूरी तरह अनुशासन बनाए रखा- न चीनी, न चिप्स, न बिस्कुट. खाने में सिर्फ हेल्दी और प्रोटीन से भरपूर फूड्स. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. ईशान अपने दिन की शुरुआत एक पौष्टिक और प्रोटीन-रिच नाश्ते से करते थे, जिसमें ओट्स, लगभग 150 मिलीलीटर दूध और एक स्कूप व्हे प्रोटीन शामिल था. उनका मानना था कि दिन की शुरुआत सही पोषण से करने पर पूरे दिन भूख कंट्रोल रहती है. इस नाश्ते से उन्हें अच्छी मात्रा में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट मिलते थे, जिससे उन्हें एनर्जी भी मिलती थी और पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता था. दोपहर के खाने यानी लंच में उन्होंने डाइट का विशेष ध्यान रखा. वह 200 ग्राम चिकन ब्रेस्ट या पनीर के साथ 2 रोटी, हल्की ग्रेवी और सलाद लेते थे. लंच में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का अच्छा संतुलन होता था, जिससे शरीर को जरूरी पोषण मिलता था और वजन घटाने की प्रक्रिया भी प्रभावित नहीं होती थी. शाम के समय भूख को कंट्रोल करने के लिए उन्होंने हल्का, लेकिन पौष्टिक स्नैक्स चुना. इसमें एक फल, थोड़े सूखे मेवे और 5 अंडों की सफेदी शामिल थी. यह कॉम्बिनेशन उन्हें पर्याप्त प्रोटीन देता था और अनावश्यक स्नैकिंग से बचाता था. रात के खाने में ईशान ने हल्का और लो-कार्ब खाना लिया. वह 200 ग्राम चिकन या पनीर के साथ सलाद लेते थे, जिससे शरीर को पर्याप्त प्रोटीन मिलता था, लेकिन कैलोरी कम रहती थी. इस तरह दिनभर में 4 बार संतुलित भोजन करके उन्होंने अपने शरीर की जरूरतों को पूरा किया और धीरे-धीरे वजन कम किया. अगर आप भी वजन कम करना चाहते हैं, तो यह वेट लॉस प्लान फॉलो कर सकते हैं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 08, 2026, 09:46 IST
'फेक रिफंड स्कैम' से ठगी के दो मामले दर्ज:मंडला में अपराधी फर्जी SMS भेजकर पैसे वापस मंगाकर कर रहे धोखाधड़ी

मंडला जिले में साइबर ठगी के हाल के मामलों के बाद पुलिस ने आम जनता के लिए चेतावनी जारी की है। अपराधी ‘फेक रिफंड स्कैम’ का सहारा लेकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ठग पहले फोन कर बताते हैं कि गलती से आपके खाते में पैसे ट्रांसफर हो गए हैं। इसके बाद फर्जी एसएमएस या स्क्रीनशॉट भेजकर पैसे आने का भ्रम पैदा किया जाता है। फिर भावनात्मक दबाव डालकर तुरंत रकम वापस भेजने के लिए कहा जाता है। पुलिस ने हाल ही में दो मामले दर्ज पहले मामले में एक दुकानदार को फर्जी बैंक मैसेज भेजकर 50 हजार रुपए लौटवाए गए। दूसरे मामले में बैंक में काम करने वाली महिला को 9 हजार रुपए लौटाने के लिए फंसाया गया, जबकि उसके खाते में कोई पैसा आया ही नहीं था। पुलिस ने जारी किया अलर्ट एसपी रजत सकलेचा ने लोगों से कहा कि केवल एसएमएस या स्क्रीनशॉट पर भरोसा न करें। पहले अपने बैंक बैलेंस की पुष्टि करें और किसी भी अनजान कॉल या दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रिफंड या खाते में पैसे जमा होने के लिए कभी भी ओटीपी साझा करने की जरूरत नहीं होती। किसी भी ऑनलाइन धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930, मंडला पुलिस हेल्पलाइन 7049141561 या साइबर क्राइम की बेबसाइट पर शिकायत दर्ज कराएं।
उमरिया में सुबह से तेज बारिश, गेंहू की फसलें बर्बाद:कटाई में देरी और रंग फीका पड़ने से भाव गिरने की आशंका

उमरिया में बुधवार सुबह से तेज बारिश हो रही है। बूंदाबांदी के बाद तेज बारिश के कारण गेहूं की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है, जिससे किसान चिंतित हैं। फसल कटाई में देरी और गेहूं का रंग फीका पड़ने की संभावना जताई जा रही है। पाली क्षेत्र में भी सुबह से हो रही बारिश जिला मुख्यालय सहित पूरे जिले में बुधवार सुबह 5 बजे से बूंदाबांदी शुरू हुई, जो बाद में तेज बारिश में बदल गई। सुबह 8:30 बजे तक बारिश की तीव्रता और बढ़ गई। पाली क्षेत्र में भी सुबह से तेज बारिश दर्ज की गई। बारिश के कारण लोगों को घरों से निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ा। दूध पहुंचाने वाले भी रेनकोट पहनकर अपने गंतव्य तक पहुंचे। मौसम में आए इस बदलाव से जिले में ठंडक बढ़ गई है। किसान बोले-बारिश से गेहूं की फसलों का रंग होगा खराब बारिश से किसान विशेष रूप से चिंतित हैं। किसान गुड्डा ने बताया कि इस बारिश से सभी फसलों पर असर पड़ेगा, खासकर गेहूं की फसल का रंग खराब हो जाएगा। इससे बाजार में गेहूं का सही भाव नहीं मिल पाएगा। सुबह से आसमान में बादल भी छाए हुए हैं। जिले में 8 अप्रैल को लगभग 3 घंटे में 2.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। तापमान में भी गिरावट आई है; जहां 7 अप्रैल को अधिकतम तापमान 36.8 डिग्री सेल्सियस था, वहीं 8 अप्रैल को यह 19.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अधिकारी रजनीश यादव के मुताबिक, जिले में बूंदाबांदी जारी रह सकती है।
5 घंटे तालाब में छिपा रहा 400 चोरियों का मास्टरमाइंड:कमल की डंठल से लेता रहा सांस, AC कोच से महिला का पर्स खींचकर भागा था

जबलपुर में पुलिस और एक शातिर अंतरराज्यीय चोर के बीच मंगलवार शाम फिल्मी ड्रामा देखने को मिला। पुलिस को चकमा देने के लिए आरोपी खितौला रेलवे स्टेशन के पास एक काई से भरे तालाब में कूद गया। वह करीब 5 घंटे तक पानी के अंदर छिपा रहा। चौंकाने वाली बात यह है कि वह सांस लेने के लिए कमल की डंठल (कमल-नाल) का सहारा लेता रहा। आखिरकार गोताखोरों की मदद से उसे दबोच लिया गया। घटना रीवा-इतवारी एक्सप्रेस ट्रेन की है। एसी कोच में एक महिला का पर्स चोरी करने की कोशिश के दौरान आरोपी आरपीएफ (RPF) की नजर में आ गया। जैसे ही ट्रेन सिहोरा रोड रेलवे स्टेशन के पास धीमी हुई, आरोपी कूदकर भागने लगा। आरपीएफ जवानों ने पीछा किया तो वह खितौला के एक गहरे और काई से भरे तालाब में जा कूदा। रात के अंधेरे और घनी शैवाल के कारण वह पुलिस की आंखों से ओझल हो गया। तीन विजुअल से समझें घटनाक्रम आरोपी ने खुद को पूरी तरह पानी में डुबो लिया खितौला थाना पुलिस और गोताखोरों की टीम ने जब रेस्क्यू शुरू किया तो पाया कि आरोपी पानी की सतह पर नहीं है। शातिर चोर ने खुद को पूरी तरह पानी में डुबो लिया था। केवल एक पाइपनुमा कमल-नाल के जरिए बाहर से ऑक्सीजन ले रहा था। करीब 5 घंटे की मशक्कत के बाद गोताखोरों ने उसे काई के बीच से ढूंढ़ निकाला। देखिए दो तस्वीरें पुराने फोटो ने खोली पोल, ‘सनी’ नाम सुनते ही उगली असलियत गिरफ्तारी के बाद आरोपी लगातार पुलिस को गुमराह करता रहा। उसने अपना नाम बबलू और पता चंडीगढ़ बताया, लेकिन आरपीएफ थाना प्रभारी राजीव खरब को कुछ शक हुआ। उन्हें याद आया कि 2018 में उन्होंने एक वाॅन्टेड चोर का फोटो मोबाइल फोन में सेव किया था। जैसे ही उन्होंने आरोपी को उसके पुराने नाम सनी से पुकारा। आरोपी सन्न रह गया और अपनी असलियत उगल दी। यूपी के बिजनौर में निर्दलीय पार्षद भी रह चुका जांच में जो खुलासा हुआ उसने पुलिस को भी हैरान कर दिया। आरोपी का असली नाम हरविंदर सिंह है। उसकी उम्र 32 साल है। वह यूपी के बिजनौर का रहने वाला है। वह अब तक देशभर में 400 से ज्यादा चोरियां कर चुका है। वह 2017 में बिजनौर के हल्दौर नगर निकाय से निर्दलीय पार्षद भी रह चुका है। 2018 में 70 लाख के हीरे-जवाहरात मिले थे 2018 में आरोपी के पास से 70 लाख के हीरे-जवाहरात मिले थे। उसने अवंतिका एक्सप्रेस ट्रेन से एक यात्री की लाइसेंसी पिस्तौल और कैश भी चोरी किया था। वह हमेशा एसी कोच को निशाना बनाता था। टीसी से बचने के लिए बाथरूम में छिप जाता। बिना टिकट सफर करता था। 8 राज्यों की पुलिस को थी तलाश हरविंदर के खिलाफ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, और मुंबई समेत कई राज्यों में केस दर्ज हैं। वह हर वारदात के बाद सिम बदल लेता था। कभी कोई पहचान-पत्र साथ नहीं रखता था। फिलहाल, जबलपुर पुलिस और आरपीएफ उससे अन्य वारदातों के सिलसिले में पूछताछ कर रही है। ………………… यह खबर भी पढ़ें भोपाल में मंत्री विश्वास सारंग के सरकारी बंगले में चोरी मध्य प्रदेश के खेल एवं सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग के सरकारी बंगले में चोरी हो गई है। बंगला परिसर में बने स्टोर रूम से अज्ञात चोर ट्रॉफियां, मोमेंटो और शील्ड उड़ा ले गए हैं। वारदात 2 और 3 अप्रैल की दरमियानी रात की है। इसका खुलासा 6 अप्रैल की सुबह हुआ है। पढ़ें पूरी खबर





