Tuesday, 22 Sep 2026 | 05:55 AM

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400 साल पुराने मंदिर से निकली 'द वन' की कहानी:अरुणाभ बोले- कहानी लिखते समय जीभ कटी, फिर नॉन-वेज छोड़ने का फैसला किया

400 साल पुराने मंदिर से निकली 'द वन' की कहानी:अरुणाभ बोले- कहानी लिखते समय जीभ कटी, फिर नॉन-वेज छोड़ने का फैसला किया

टीवीएफ की चर्चित वेब सीरीज ‘पंचायत’ के निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा अब बड़े पर्दे पर ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ लेकर आ रहे हैं। फिल्म की कहानी भारतीय लोककथाओं, आस्था और संस्कृति से जुड़ी है। इसका आइडिया बिहार के करीब 400 साल पुराने वन देवी मंदिर की कहानी से आया। अरुणाभ कुमार ने एकता कपूर के साथ इसे प्रोड्यूस किया है और आनंदेश्वर द्विवेदी के साथ कहानी लिखी है। फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमन्ना भाटिया, मनीष पॉल और सुनील ग्रोवर नजर आएंगे। दैनिक भास्कर से बातचीत में अरुणाभ और दीपक ने फिल्म के आइडिया, 35-40 रातों तक चली शूटिंग, कलाकारों की मेहनत और कहानी से जुड़ा दिलचस्प किस्सा साझा किया। अरुणाभ ने बताया कि कहानी लिखते समय एक बार उनकी जीभ कट गई, जिसके बाद उन्होंने फिल्म पर काम करते हुए नॉन-वेज खाना छोड़ दिया। सवाल: सबसे पहले फिल्म के आइडिया के बारे में बताइए। क्या यह किसी लोककथा या सच्ची घटना से प्रेरित है? जवाब/अरुणाभ कुमार: इस कहानी के मूल स्रोत दो हैं। पहला श्रेय मैं एकता कपूर को देना चाहूंगा। हम अक्सर साथ में मंदिर जाते हैं। एक जनवरी को नए साल के मौके पर हम सिद्धिविनायक मंदिर जाते हैं। महाशिवरात्रि पर मुक्तेश्वर मंदिर भी गए हैं। इन यात्राओं के दौरान मंदिरों से जुड़ी कहानियों पर हमारी बातचीत होने लगी। एकता ने मुझे महालक्ष्मी मंदिर और मुक्तेश्वर मंदिर से जुड़ी कुछ अद्भुत कहानियां सुनाईं। इसके बाद मैंने उन्हें बताया कि बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में भी ऐसे कई मंदिर हैं, जिनके पीछे बहुत दिलचस्प कहानियां हैं। तब हमें एहसास हुआ कि भारतीय संस्कृति में लगभग हर मंदिर के पीछे कोई न कोई अद्भुत कहानी है। सवाल : इस कहानी से आपका व्यक्तिगत जुड़ाव कैसे हुआ और फिल्म बनाने का फैसला कैसे हुआ? जवाब/अरुणाभ कुमार: दूसरा स्रोत मेरी मां हैं। वह मुझे दुर्गा पूजा के दौरान देवी और शक्ति के अलग-अलग मंदिरों में ले जाया करती थीं। हम वहां पूजा करते थे, साड़ी चढ़ाते थे और कई दिनों तक मंदिर जाते थे। इसी दौरान वह मुझे पटना से करीब 35 किलोमीटर दूर बिहटा स्थित वन देवी मंदिर लेकर गई थीं। यह करीब 400 साल पुराना मंदिर है। मान्यता है कि 16वीं सदी में वैद्यनाथ मिश्रा नाम के व्यक्ति ने इसे स्थापित किया था। उस समय वहां के लोग जंगल से जुड़े रहस्यमय तत्वों से परेशान थे। उनसे बचने के लिए उन्होंने दुर्गा के दस रूपों की प्रार्थना की और उन्हीं में से एक रूप वन देवी के रूप में वहां स्थापित हुआ। मैं इस कहानी से बहुत प्रभावित हुआ। मैंने यह कहानी दीपक और फिर एकता को सुनाई। उन्हें भी यह कहानी बहुत पसंद आई। एकता ने कहा कि इतनी बड़ी और अद्भुत कहानी को बड़े पर्दे पर लाना चाहिए। उन्हें लगा कि यह कहानी बड़े कैनवास की मांग करती है। यहीं से फिल्म की शुरुआत हुई। सवाल: दीपक जी, जब आपने पहली बार यह कहानी सुनी तो आपकी क्या प्रतिक्रिया थी? जवाब/दीपक कुमार मिश्रा: मैं बहुत उत्साहित था। हिंदी सिनेमा में इस तरह की लोककथा बड़े पर्दे पर पहले नहीं दिखाई गई है। मुझे यह बात बहुत नई लगी। हालांकि कहानी लोककथा है, लेकिन इसकी कहानी आज के समाज से जुड़ी है। जब हम किसी ऐसे मंदिर में जाते हैं तो हमारे मन में कई सवाल आते हैं- क्या यह सच है? ऐसा क्यों हुआ? ऐसी मान्यताएं कैसे बनीं? यही जिज्ञासा मुझे इस कहानी की तरफ खींच लाई। सवाल: जब आप सेट पर पहुंचे तो आपके दिमाग में फिल्म की पहली तस्वीर क्या थी? जवाब/दीपक कुमार मिश्रा: हमने कहानी के उस हिस्से से शुरुआत की थी, जहां कहानी मुंबई से शुरू होती है। मेरी पहली कोशिश यही थी कि शुरुआत में यह कहानी बिल्कुल सामान्य इंसान की कहानी लगे। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़े, उसकी असली दुनिया धीरे-धीरे खुलती जाए और उसमें अलग-अलग आयाम जुड़ते जाएं। जब मैं मुंबई में शूट कर रहा था तो मेरे दिमाग में फिल्म की तस्वीर अलग थी। जब गांव और जंगल वाले हिस्से में पहुंचा तो वह तस्वीर पूरी तरह बदल गई। हर लोकेशन और हर दिन अपने साथ एक नई चुनौती लेकर आया। हमारी कोशिश थी कि कहानी को उसकी जरूरत के मुताबिक पूरी तरह जस्टिस दिया जाए। सवाल: इस फिल्म से जुड़ा कोई ऐसा अनुभव रहा, जब आप लोग कहानी में पूरी तरह डूब गए? जवाब/अरुणाभ कुमार: हां, एक बहुत मजेदार किस्सा है। मैंने पहली बार गोवा में दीपक को यह कहानी सुनाई थी। कहानी लिखने के दौरान एक बार मैंने नॉन-वेज खाया और उसी समय मेरी जीभ कट गई। इसके बाद मैंने मन में तय कर लिया कि जब तक इस कहानी पर काम करूंगा, नॉन-वेज नहीं खाऊंगा। धीरे-धीरे बात इतनी आगे बढ़ गई कि मैं वेजिटेरियन ही बन गया। सुनने में यह बात आपको अजीब लग सकती है, लेकिन जब आप किसी कहानी में पूरी तरह डूब जाते हैं तो ऐसी चीजें होने लगती हैं। कई बार ऐसा होता है कि लव स्टोरी लिखते समय आपको अपना पुराना प्यार याद आने लगता है। माता-पिता पर कहानी लिखते हैं तो अपने पेरेंट्स की याद आती है। इसी तरह हम भी इस कहानी में धीरे-धीरे पूरी तरह घुसते चले गए। सवाल: दीपक जी, इस फिल्म की शूटिंग के दौरान आपके साथ ऐसा क्या हुआ जो हमेशा याद रहेगा? जवाब/दीपक कुमार मिश्रा: हमने करीब 35-40 रातों तक लगातार शूटिंग की। पूरी टीम ऐसी हो गई थी कि शूट खत्म होने के बाद भी रात में नींद आना मुश्किल हो गया था। इस कहानी में रात अपने आप में एक कैरेक्टर है। हमने रात में लगातार एक्शन और एक्टिंग सीन्स शूट किए। सुबह 6 बजे तक शूटिंग के बाद भी कलाकार पूरी ऊर्जा के साथ काम करते थे। सबसे अच्छी बात यह थी कि पूरी टीम कहानी में इतनी डूब गई थी कि किसी को महसूस ही नहीं होता था कि हम इतनी रातों से लगातार जाग रहे हैं। सवाल: कलाकारों ने फिल्म के लिए कितनी मेहनत की? जवाब/दीपक कुमार मिश्रा: : सभी कलाकारों ने बहुत मेहनत की। सिद्धार्थ और तमन्ना अपने सीन्स को लेकर काफी सीरियस थे। वे बार-बार पूछते थे कि इसे और बेहतर कैसे किया जा सकता है। कल्चरल ऑथेंटिसिटी को लेकर भी वे बहुत सजग

400 साल पुराने मंदिर से निकली 'द वन' की कहानी:अरुणाभ बोले- कहानी लिखते समय जीभ कटी, फिर नॉन-वेज छोड़ने का फैसला किया

400 साल पुराने मंदिर से निकली 'द वन' की कहानी:अरुणाभ बोले- कहानी लिखते समय जीभ कटी, फिर नॉन-वेज छोड़ने का फैसला किया

टीवीएफ की चर्चित वेब सीरीज ‘पंचायत’ के निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा अब बड़े पर्दे पर ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ लेकर आ रहे हैं। फिल्म की कहानी भारतीय लोककथाओं, आस्था और संस्कृति से जुड़ी है। इसका आइडिया बिहार के करीब 400 साल पुराने वन देवी मंदिर की कहानी से आया। अरुणाभ कुमार ने एकता कपूर के साथ इसे प्रोड्यूस किया है और आनंदेश्वर द्विवेदी के साथ कहानी लिखी है। फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमन्ना भाटिया, मनीष पॉल और सुनील ग्रोवर नजर आएंगे। दैनिक भास्कर से बातचीत में अरुणाभ और दीपक ने फिल्म के आइडिया, 35-40 रातों तक चली शूटिंग, कलाकारों की मेहनत और कहानी से जुड़ा दिलचस्प किस्सा साझा किया। अरुणाभ ने बताया कि कहानी लिखते समय एक बार उनकी जीभ कट गई, जिसके बाद उन्होंने फिल्म पर काम करते हुए नॉन-वेज खाना छोड़ दिया। सवाल: सबसे पहले फिल्म के आइडिया के बारे में बताइए। क्या यह किसी लोककथा या सच्ची घटना से प्रेरित है? जवाब/अरुणाभ कुमार: इस कहानी के मूल स्रोत दो हैं। पहला श्रेय मैं एकता कपूर को देना चाहूंगा। हम अक्सर साथ में मंदिर जाते हैं। एक जनवरी को नए साल के मौके पर हम सिद्धिविनायक मंदिर जाते हैं। महाशिवरात्रि पर मुक्तेश्वर मंदिर भी गए हैं। इन यात्राओं के दौरान मंदिरों से जुड़ी कहानियों पर हमारी बातचीत होने लगी। एकता ने मुझे महालक्ष्मी मंदिर और मुक्तेश्वर मंदिर से जुड़ी कुछ अद्भुत कहानियां सुनाईं। इसके बाद मैंने उन्हें बताया कि बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में भी ऐसे कई मंदिर हैं, जिनके पीछे बहुत दिलचस्प कहानियां हैं। तब हमें एहसास हुआ कि भारतीय संस्कृति में लगभग हर मंदिर के पीछे कोई न कोई अद्भुत कहानी है। सवाल : इस कहानी से आपका व्यक्तिगत जुड़ाव कैसे हुआ और फिल्म बनाने का फैसला कैसे हुआ? जवाब/अरुणाभ कुमार: दूसरा स्रोत मेरी मां हैं। वह मुझे दुर्गा पूजा के दौरान देवी और शक्ति के अलग-अलग मंदिरों में ले जाया करती थीं। हम वहां पूजा करते थे, साड़ी चढ़ाते थे और कई दिनों तक मंदिर जाते थे। इसी दौरान वह मुझे पटना से करीब 35 किलोमीटर दूर बिहटा स्थित वन देवी मंदिर लेकर गई थीं। यह करीब 400 साल पुराना मंदिर है। मान्यता है कि 16वीं सदी में वैद्यनाथ मिश्रा नाम के व्यक्ति ने इसे स्थापित किया था। उस समय वहां के लोग जंगल से जुड़े रहस्यमय तत्वों से परेशान थे। उनसे बचने के लिए उन्होंने दुर्गा के दस रूपों की प्रार्थना की और उन्हीं में से एक रूप वन देवी के रूप में वहां स्थापित हुआ। मैं इस कहानी से बहुत प्रभावित हुआ। मैंने यह कहानी दीपक और फिर एकता को सुनाई। उन्हें भी यह कहानी बहुत पसंद आई। एकता ने कहा कि इतनी बड़ी और अद्भुत कहानी को बड़े पर्दे पर लाना चाहिए। उन्हें लगा कि यह कहानी बड़े कैनवास की मांग करती है। यहीं से फिल्म की शुरुआत हुई। सवाल: दीपक जी, जब आपने पहली बार यह कहानी सुनी तो आपकी क्या प्रतिक्रिया थी? जवाब/दीपक कुमार मिश्रा: मैं बहुत उत्साहित था। हिंदी सिनेमा में इस तरह की लोककथा बड़े पर्दे पर पहले नहीं दिखाई गई है। मुझे यह बात बहुत नई लगी। हालांकि कहानी लोककथा है, लेकिन इसकी कहानी आज के समाज से जुड़ी है। जब हम किसी ऐसे मंदिर में जाते हैं तो हमारे मन में कई सवाल आते हैं- क्या यह सच है? ऐसा क्यों हुआ? ऐसी मान्यताएं कैसे बनीं? यही जिज्ञासा मुझे इस कहानी की तरफ खींच लाई। सवाल: जब आप सेट पर पहुंचे तो आपके दिमाग में फिल्म की पहली तस्वीर क्या थी? जवाब/दीपक कुमार मिश्रा: हमने कहानी के उस हिस्से से शुरुआत की थी, जहां कहानी मुंबई से शुरू होती है। मेरी पहली कोशिश यही थी कि शुरुआत में यह कहानी बिल्कुल सामान्य इंसान की कहानी लगे। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़े, उसकी असली दुनिया धीरे-धीरे खुलती जाए और उसमें अलग-अलग आयाम जुड़ते जाएं। जब मैं मुंबई में शूट कर रहा था तो मेरे दिमाग में फिल्म की तस्वीर अलग थी। जब गांव और जंगल वाले हिस्से में पहुंचा तो वह तस्वीर पूरी तरह बदल गई। हर लोकेशन और हर दिन अपने साथ एक नई चुनौती लेकर आया। हमारी कोशिश थी कि कहानी को उसकी जरूरत के मुताबिक पूरी तरह जस्टिस दिया जाए। सवाल: इस फिल्म से जुड़ा कोई ऐसा अनुभव रहा, जब आप लोग कहानी में पूरी तरह डूब गए? जवाब/अरुणाभ कुमार: हां, एक बहुत मजेदार किस्सा है। मैंने पहली बार गोवा में दीपक को यह कहानी सुनाई थी। कहानी लिखने के दौरान एक बार मैंने नॉन-वेज खाया और उसी समय मेरी जीभ कट गई। इसके बाद मैंने मन में तय कर लिया कि जब तक इस कहानी पर काम करूंगा, नॉन-वेज नहीं खाऊंगा। धीरे-धीरे बात इतनी आगे बढ़ गई कि मैं वेजिटेरियन ही बन गया। सुनने में यह बात आपको अजीब लग सकती है, लेकिन जब आप किसी कहानी में पूरी तरह डूब जाते हैं तो ऐसी चीजें होने लगती हैं। कई बार ऐसा होता है कि लव स्टोरी लिखते समय आपको अपना पुराना प्यार याद आने लगता है। माता-पिता पर कहानी लिखते हैं तो अपने पेरेंट्स की याद आती है। इसी तरह हम भी इस कहानी में धीरे-धीरे पूरी तरह घुसते चले गए। सवाल: दीपक जी, इस फिल्म की शूटिंग के दौरान आपके साथ ऐसा क्या हुआ जो हमेशा याद रहेगा? जवाब/दीपक कुमार मिश्रा: हमने करीब 35-40 रातों तक लगातार शूटिंग की। पूरी टीम ऐसी हो गई थी कि शूट खत्म होने के बाद भी रात में नींद आना मुश्किल हो गया था। इस कहानी में रात अपने आप में एक कैरेक्टर है। हमने रात में लगातार एक्शन और एक्टिंग सीन्स शूट किए। सुबह 6 बजे तक शूटिंग के बाद भी कलाकार पूरी ऊर्जा के साथ काम करते थे। सबसे अच्छी बात यह थी कि पूरी टीम कहानी में इतनी डूब गई थी कि किसी को महसूस ही नहीं होता था कि हम इतनी रातों से लगातार जाग रहे हैं। सवाल: कलाकारों ने फिल्म के लिए कितनी मेहनत की? जवाब/दीपक कुमार मिश्रा: : सभी कलाकारों ने बहुत मेहनत की। सिद्धार्थ और तमन्ना अपने सीन्स को लेकर काफी सीरियस थे। वे बार-बार पूछते थे कि इसे और बेहतर कैसे किया जा सकता है। कल्चरल ऑथेंटिसिटी को लेकर भी वे बहुत सजग

संजय दत्त के मराठी बोलने से इनकार पर विवाद:बोले- 6 साल जेल में रहा, तब भी नहीं सीखी; शिवसेना नेता हंसे; शक्स ने धक्का दिया

संजय दत्त के मराठी बोलने से इनकार पर विवाद:बोले- 6 साल जेल में रहा, तब भी नहीं सीखी; शिवसेना नेता हंसे; शक्स ने धक्का दिया

महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर चल रहे विवाद के बीच बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त ने मराठी में बोलने से इनकार कर दिया। रविवार को मुंबई में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “मैं 6 साल तक येरवडा जेल में रहा, तब भी मराठी भाषा नहीं सीख पाया।” संजय दत्त के बयान पर अब विवाद हो गया है। यह कार्यक्रम ठाणे में शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आयोजित किया था। संजय दत्त मंच पर हिंदी में बोल रहे थे। इस पर मंत्री ने उन्हें मराठी में बोलने के लिए कहा, लेकिन 67 साल के एक्टर ने मजाकिया अंदाज में ऐसा करने से मना कर दिया। संजय दत्त और प्रताप सरनाईक मंच पर खड़े थे तभी मंत्री ने कहा, “आजकल मैं सभी लोगों को मराठी सिखा रहा हूं। तो मैंने सोचा कि क्यों न हम सब संजय दत्त से मराठी में बात करवाएं। वह हिंदी में बात करते हैं, लेकिन हम सभी मराठी समझते हैं।” मंत्री की बात पर मंच पर मौजूद लोगों के चेहरे पर हंसी दिखाई दी। इसके बाद संजय दत्त ने माइक लिया और पहले “हर हर महादेव” के नारे लगाए। फिर उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “प्रताप भाई, मैं 6 साल जेल में रहा, येरवडा में। तब भी मराठी नहीं सीख पाया। मैंने थोड़ी सी सीखी थी।” बीजेपी विधायक ने शिवसेना मंत्री पर निशाना साधा संजय दत्त के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रताप सरनाईक पर सवाल उठाए। नरेंद्र मेहता ने कहा, “अगर कोई कलाकार मराठी नहीं जानता तो उस पर आप हंसते हैं, लेकिन दूसरी तरफ आम रिक्शा चालकों पर मराठी भाषा को लेकर दबाव बनाया जाता है। यह कैसा न्याय है? एकनाथ शिंदे ने उन्हें कभी कुछ करने नहीं दिया। वहां डमी मंत्री की जरूरत है, इसलिए वे हैं।” रैली में संजय दत्त को शख्स ने दिया धक्का, एक्टर ने हाथ पकड़कर खींचा मंच पर कुछ समय रहने के बाद संजय दत्त अपनी टीम के साथ रवाना होने लगे। वह उतर रहे थे, तभी एक शख्स तेजी से उन्हें धक्का देते हुए पास से गुजरा। संजय दत्त ने इसे नजरअंदाज नहीं किया और उस शख्स का हाथ पकड़कर अपनी ओर खींच लिया। जैसे ही शख्स ने देखा कि वह संजय दत्त हैं, उसने तुरंत माफी मांग ली। मराठी न बोलने पर सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल संजय दत्त के मराठी बोलने से इनकार के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। एक यूजर ने लिखा, “सिर्फ संजय दत्त या सलमान खान ही किसी मंत्री को इस तरह मना कर सकते हैं और फिर भी मुस्कुरा सकते हैं।” एक यूजर ने लिखा, “मतलब साफ है, मराठी भाषा का अनिवार्य होना सिर्फ शहर के ऑटो-रिक्शा और टैक्सी वालों के लिए है, बड़े लोगों के लिए नहीं।” एक ने कहा, “विडंबना देखिए, काश शहर के ऑटो वाले भी ऐसा कह पाते और भारी जुर्माने से बच पाते।” कुछ लोग मराठी न बोलने पर संजय दत्त को ट्रोल भी कर रहे हैं। एक ने कहा, “आप पूरी जिंदगी महाराष्ट्र में रहे, फिर भी आपको मराठी नहीं आती। यह शर्मनाक है।” संजय दत्त के वो बयान और डायलॉग, जिनसे हुआ विवाद 1. 2009: चुनावी सभा में TADA को लेकर बयान 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान संजय दत्त समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार कर रहे थे। उत्तर प्रदेश के मऊ में एक चुनावी सभा के दौरान उन्होंने अपने पिता सुनील दत्त और मां नरगिस का जिक्र करते हुए 1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद अपने खिलाफ हुई कार्रवाई पर बात की। संजय दत्त ने कहा था कि उनकी मां मुस्लिम थीं और इसी वजह से उनके परिवार को परेशान किया गया। उन्होंने अपने खिलाफ TADA के तहत हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया। इस बयान को लेकर विवाद हुआ और चुनाव आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया। संजय दत्त के बयान को चुनाव प्रचार में सांप्रदायिक संदर्भ के तौर पर देखा गया। 2. 2016: सलमान खान को बताया ‘एरोगेंट’ संजय दत्त और सलमान खान की दोस्ती बॉलीवुड की चर्चित दोस्तियों में रही है। ऐसे में 2016 में एक कार्यक्रम के दौरान जब संजय दत्त से सलमान खान को एक शब्द में बयान करने के लिए कहा गया और उन्होंने ‘एरोगेंट’ कहा, तो यह जवाब सुर्खियों में आ गया। मीडिया में दोनों के बीच अनबन की अटकलें लगने लगीं। हालांकि, संजय दत्त ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनके और सलमान के बीच कोई झगड़ा नहीं है। 3. 2026: ‘धुरंधर’ के डायलॉग को लेकर विवाद फिल्म ‘धुरंधर में संजय दत्त के किरदार एसपी चौधरी असलम के एक डायलॉग पर बलोच समुदाय ने आपत्ति जताई। विवाद के बाद थिएटर रिलीज के वर्जन में उस हिस्से को म्यूट किया गया।

अमेरिका में यात्री को फ्लाइट में टेप से बांधा:मारपीट और हंगामा कर रहा था, विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी

अमेरिका में यात्री को फ्लाइट में टेप से बांधा:मारपीट और हंगामा कर रहा था, विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी

अमेरिका में अमेरिकन एयरलाइंस की एक फ्लाइट में 67 साल के यात्री ने अचानक हंगामा शुरू कर दिया। उसने पहले फ्लाइट अटेंडेंट और दूसरे यात्रियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। इसके बाद पास बैठे यात्री पर हमला कर दिया और बीच-बचाव करने आई एक महिला को भी धक्का दिया। हालात बिगड़ने पर तीन यात्रियों ने उसे काबू कर डक्ट टेप और जिप टाई से सीट पर बांध दिया। घटना के कारण फ्लाइट को बाल्टीमोर डायवर्ट करना पड़ा। यह घटना 3 सितंबर की रात अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट 618 में हुई। विमान टेक्सास के डलास-फोर्ट वर्थ से न्यू जर्सी के नेवार्क जा रहा था। जीसस और नरक की बातें करते हुए चिल्लाने लगा रिपोर्ट्स के मुताबिक, उड़ान के करीब दो घंटे बाद यात्री अचानक आक्रामक हो गया। वह जीसस और नरक में जाने की बातें करते हुए चिल्ला रहा था। उसने एक अश्वेत फ्लाइट अटेंडेंट के खिलाफ नस्लीय गाली दी और समलैंगिक लोगों को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। इसके बाद वह पास बैठे यात्री से भिड़ गया। गवाहों के मुताबिक, उसने पहले उस यात्री के लैपटॉप पर वार किया और फिर उसका गला पकड़ लिया। एक महिला यात्री ने बीच-बचाव की कोशिश की तो उसने उसकी तरफ भी हमला करने की कोशिश की। 3 यात्रियों ने मिलकर काबू किया आरोपी के हिंसक होने के बाद तीन पुरुष यात्री उसकी तरफ मदद के लिए आगे आए। उन्होंने मिलकर उसे रोकने की कोशिश की। इनमें रिटायर्ड अफसर जुआन मेजिया भी शामिल थे। मेजिया के मुताबिक, कुछ ही सेकंड में विमान का माहौल पूरी तरह बदल गया। पहले सब कुछ सामान्य था, लेकिन यात्री अचानक चिल्लाने और मारपीट करने लगा। आरोपी को रोकने की कोशिश के दौरान उसने मेजिया के हाथ पर काट लिया। इसके बाद फ्लाइट क्रू ने यात्रियों को डक्ट टेप और जिप टाई दीं। यात्रियों ने उसे सीट से बांध दिया और उसके हाथ जिप टाई से सुरक्षित कर दिए। बाल्टीमोर में उतरते ही गिरफ्तार फ्लाइट को बाल्टीमोर-वॉशिंगटन इंटरनेशनल थर्गूड मार्शल एयरपोर्ट डायवर्ट किया गया। विमान के उतरने के बाद मैरीलैंड ट्रांसपोर्टेशन अथॉरिटी पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया। पुलिस के मुताबिक, उसकी पहचान 67 वर्षीय आर्थर लेन लुंडीन के रूप में हुई है। वह एरिजोना के टक्सन का रहने वाला है। उसके खिलाफ सेकंड-डिग्री असॉल्ट और डिसऑर्डरली कंडक्ट के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने बताया कि लुंडीन के हाथ में एक खुला घाव भी था। उसे मौके पर पैरामेडिक्स ने देखा और इलाज के बाद यात्रा के लिए सुरक्षित बताया। कोर्ट ने रिहा किया, 19 अक्टूबर को सुनवाई स्थानीय पुलिस की कार्रवाई के अलावा FBI भी मामले की जांच कर रही है। एजेंसी यह देख रही है कि घटना में संघीय कानून के तहत भी कोई मामला बनता है या नहीं। FAA भी घटना की जांच कर रही है। कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक, लुंडीन शुरुआती सुनवाई में पेश हुआ और उसे अपने मुचलके पर रिहा कर दिया गया। उसकी अगली सुनवाई 19 अक्टूबर को तय की गई है। रियल एस्टेट कंपनी ने नौकरी से हटाया लुंडीन एरिजोना की रियल एस्टेट कंपनी लॉन्ग रियलिटी में काम करता था। घटना के बाद कंपनी ने उसे हटा दिया और वेबसाइट से उसका प्रोफाइल भी डिलीट कर दिया। अमेरिकन एयरलाइंस ने कहा कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है। लुंडीन के विमान से उतरने के बाद फ्लाइट ने नेवार्क के लिए अपनी यात्रा पूरी की

अमेरिका में यात्री को फ्लाइट में टेप से बांधा:मारपीट और हंगामा कर रहा था, विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी

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मेक्सिको में आतिशबाजी का सामान फटा, 10 की मौत:धमाकों से मेले में दीवार गिरी; 64 घायल

मेक्सिको में आतिशबाजी का सामान फटा, 10 की मौत:धमाकों से मेले में दीवार गिरी; 64 घायल

मेक्सिको में धार्मिक उत्सव के दौरान आतिशबाजी का सामान फटने से कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई और 64 लोग घायल हुए हैं। विस्फोट के बाद एक दीवार भी गिर गई। हादसा शनिवार रात टेमास्कालसिंगो में नुएस्त्रा सेन्योरा दे ला लूज चर्च के पास हुआ। यहां संरक्षक संत के सम्मान में उत्सव चल रहा था और सैकड़ों लोग आतिशबाजी देखने की तैयारी कर रहे थे। टेमास्कालसिंगो मध्य मेक्सिको का एक कस्बा है, जिसकी आबादी करीब 66 हजार है। यह मेक्सिको सिटी से लगभग 160 km उत्तर-पश्चिम में स्थित है। विस्फोट की वजह अभी पता नहीं चली है। मेक्सिको स्टेट अटॉर्नी जनरल्स ऑफिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय बिशप ने बताया कि घायलों में दो पादरी भी शामिल हैं। हादसे के 2 वीडियो… वायरल वीडियो में जान बचाकर भागते दिखे लोग… सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में विस्फोट के बाद का मंजर दिख रहा है। इसमें दर्जनों लोग धुएं और मलबे के बीच बचे हुए लोगों की तलाश करते नजर आ रहे हैं। मेक्सिको में आतिशबाजी से जुड़े विस्फोट आम हैं। सड़कों पर होने वाले समारोहों और धार्मिक उत्सवों में अक्सर आतिशबाजी का इस्तेमाल किया जाता है। करीब चार साल पहले मध्य मेक्सिको के हिडाल्गो राज्य के हुआहुत्ला नगरपालिका के एक गांव में भी तेज आतिशबाजी विस्फोट हुआ था। इसमें 17 लोग घायल हुए थे।

मेक्सिको में चर्च के उत्सव में आतिशबाजी का सामान फटा:धमाकों से मेले में दीवार भी गिरी; 10 की मौत, 64 घायल

मेक्सिको में चर्च के उत्सव में आतिशबाजी का सामान फटा:धमाकों से मेले में दीवार भी गिरी; 10 की मौत, 64 घायल

मेक्सिको में एक चर्च के धार्मिक उत्सव के दौरान आतिशबाजी के सामान में जोरदार धमाका हो गया। हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई और 64 लोग घायल हुए हैं। धमाके की वजह से एक दीवार भी गिर गई। हादसा शनिवार रात मेक्सिको के मेक्सिको राज्य के टेमास्कालसिंगो कस्बे में नुएस्त्रा सेन्योरा दे ला लूज चर्च के पास हुआ। सैकड़ों लोग आतिशबाजी देखने के लिए जमा हुए थे। विस्फोट की वजह सामने नहीं आई है। मेक्सिको स्टेट अटॉर्नी जनरल्स ऑफिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय बिशप ने बताया कि घायलों में दो पादरी भी शामिल हैं। टेमास्कालसिंगो की आबादी करीब 66 हजार है और यह जगह मेक्सिको सिटी से करीब 160 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में है। हादसे के 2 वीडियो… वायरल वीडियो में जान बचाकर भागते दिखे लोग… सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में विस्फोट के बाद का मंजर दिख रहा है। इसमें दर्जनों लोग धुएं और मलबे के बीच बचे हुए लोगों की तलाश करते नजर आ रहे हैं। मेक्सिको में आतिशबाजी से जुड़े विस्फोट आम हैं। सड़कों पर होने वाले समारोहों और धार्मिक उत्सवों में अक्सर आतिशबाजी का इस्तेमाल किया जाता है। करीब चार साल पहले मध्य मेक्सिको के हिडाल्गो राज्य के हुआहुत्ला नगरपालिका के एक गांव में भी तेज आतिशबाजी विस्फोट हुआ था। इसमें 17 लोग घायल हुए थे।

मियामी में रनवे से बाहर निकला कार्गो प्लेन, आग लगी:पार्किंग में खड़ी गाड़ियों से टकराया, कई मौतों की आशंका

मियामी में रनवे से बाहर निकला कार्गो प्लेन, आग लगी:पार्किंग में खड़ी गाड़ियों से टकराया, कई मौतों की आशंका

अमेरिका के मियामी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रविवार को बोइंग 767 कार्गो विमान लैंडिंग के बाद रनवे से बाहर निकल गया। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) के मुताबिक, प्लेन स्थानीय समय के मुताबिक दोपहर करीब 2 बजे रनवे से बाहर गया। वीडियो में विमान एयरपोर्ट के पास एक सड़क के किनारे दिखाई दे रहा है। विमान अमेजन का बताया जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। FAA ने CNN को दिए बयान में बताया कि बोइंग 767-300 कार्गो विमान ने सैन जुआन, प्यूर्टो रिको के लुइस मुनोज मारिन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। एयर ट्रैफिक कंट्रोल के रिकॉर्ड किए गए ऑडियो में एक ग्राउंड वाहन से टावर को सूचना देते सुना गया, “लगता है कि विमान 30 नंबर रनवे से आगे निकल गया है।” यह ऑडियो ATC.com ने कैप्चर किया। मियामी एयरपोर्ट पर ग्राउंड स्टॉप लागू FAA के अलर्ट के मुताबिक, रनवे पर प्लेन अभी भी मौजूद है। इस कारण मियामी एयरपोर्ट पर ग्राउंड स्टॉप लागू है। इसका मतलब है कि एयरपोर्ट पर सभी विमानों की आवाजाही रोक दी गई है। बताया जा रहा है कि कार्गो प्लेन अमेजन का था। हादसे पर प्रतिक्रिया के लिए अमेजन से संपर्क किया गया, लेकिन उसकी तरफ से अभी कोई बयान सामने नहीं आया है। प्लेन में कितने लोग सवार थे, रनवे के बाहर गाड़ियों से टकराने के बाद कितने घायल हुए और गाड़ियों के नुकसान की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। यह खबर लगातार अपडेट की जा रही है।

ट्रम्प के दामाद ने यूक्रेनी राष्ट्रपति से मुलाकात की:पुतिन से चर्चा के एक दिन बाद कीव पहुंचे; रूस से युद्ध खत्म कराने पर चर्चा

ट्रम्प के दामाद ने यूक्रेनी राष्ट्रपति से मुलाकात की:पुतिन से चर्चा के एक दिन बाद कीव पहुंचे; रूस से युद्ध खत्म कराने पर चर्चा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर और दूत स्टीव विटकॉफ ने रविवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से अहम बातचीत की। यह बातचीत रूस के साथ चल रहे युद्ध को खत्म कराने की अमेरिकी कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए हुई। दोनों की यह कीव की पहली यात्रा थी। इससे एक दिन पहले उन्होंने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। बैठक के बाद विटकॉफ ने कहा, हमने बहुत सार्थक और महत्वपूर्ण बातचीत की। यह काफी गंभीर चर्चा थी। हम इससे बहुत उत्साहित हैं और जब तक जरूरत होगी, बातचीत जारी रखेंगे। कुशनर ने कहा कि इस यात्रा से अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को काफी कुछ सीखने को मिला है। उम्मीद है कि इससे शांति की कोशिशों को आगे बढ़ाने के नए रास्ते मिलेंगे। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

आज का एक्सप्लेनर:ट्रम्प के दामाद, दोस्त से लेकर CIA डायरेक्टर तक, मॉस्को क्यों जा रहे; क्या रूस-यूक्रेन जंग खत्म होने वाली है

आज का एक्सप्लेनर:ट्रम्प के दामाद, दोस्त से लेकर CIA डायरेक्टर तक, मॉस्को क्यों जा रहे; क्या रूस-यूक्रेन जंग खत्म होने वाली है

25 अगस्त को अमेरिकी इंटेलिजेंस के मुखिया जॉन रैटक्लिफ ने मॉस्को की सीक्रेट विजिट की। 10 दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के 2 भरोसेमंद दूत- जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी मॉस्को पहुंचे और रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिले। आखिर अमेरिकी अधिकारी एक के बाद एक मॉस्को क्यों जा रहे, बंद कमरों में क्या बात हो रही और क्या रूस-यूक्रेन जंग खत्म होने वाली है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बीते दिनों ट्रम्प के किन अधिकारियों ने रूस का दौरा किया? जवाब: पिछले 2 हफ्तों में ट्रम्प के 3 बड़े अधिकारी मॉस्को पहुंचे… जेरेड और स्टीव के दौरे से पहले रूस ने कीव पर 72 घंटे के लिए हमले रोकने का ऐलान किया था। यूक्रेन ने भी मॉस्को पर ड्रोन-मिसाइल हमले न करने की बात कही है। सवाल-2: CIA डायरेक्टर रास्ते बदल-बदलकर क्यों पहुंचे मॉस्को, हुआ क्या? जवाब: CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ का मॉस्को दौर काफी सीक्रेट रहा। वे सामान्य प्लेन से सीधे मॉस्को नहीं पहुंचे, बल्कि उन्होंने अमेरिकी एयरफोर्स के C-17 ग्लोबमास्टर एयरक्राफ्ट से सफर किया। फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि रैटक्लिफ के C-17 ने अमेरिका के मैरीलैंड के जॉइंट बेस एंड्रयूज से लातविया के रीगा के लिए उड़ान भरी। फिर वे 25 अगस्त को मॉस्को के व्नुकोवो एयरपोर्ट पहुंचे। सिर्फ 8 घंटे मॉस्को में रहे। क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि रैटक्लिफ ने रूसी इंटेलिजेंस SVR के मुखिया सर्गेई नारिश्किन और घरेलू सुरक्षा एजेंसी FSB के चीफ अलेक्जेंडर बोर्तनिकोव से बात की। बाद में पुतिन को इसकी जानकारी दी गई। अमेरिकी न्यूज आउटलेट एक्सियोस, न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सूत्रों के हवाले से लिखा… सवाल-3: ट्रम्प के दामाद और दोस्त ने पुतिन से क्या बात की? जवाब: गाजा-इजराइल और रूस-यूक्रेन जंग को अमेरिका की ओर से ट्रम्प के 2 भरोसेमंद दूत संभाल रहे हैं। एक तो हैं- ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर और दूसरे उनके 30 साल पुराने दोस्त स्टीव विटकॉफ हैं। जेरेड ट्रम्प की बेटी इवांका के पति और बिजनेसमैन हैं। वहीं स्टीव उनके रियल एस्टेट बिजनेस में पार्टनर हैं। जेरेड और स्टीव की जोड़ी मौजूदा डिप्लोमेसी की दुनिया में काफी मशहूर है। 5 सितंबर को ये जोड़ी मॉस्को पहुंची। एयरपोर्ट पर रूसी राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रीव ने उनकी अगवानी की। इसके बाद दोनों क्रेमलिन गए, जहां वे पुतिन से मिले। 3 घंटे 10 मिनट मीटिंग चली और फिर डिनर भी हुआ। रूसी राष्ट्रपति के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने इस मीटिंग को पॉजिटिव, भरोसेमंद और नतीजा देने वाली बताया। बैठक में आर्थिक मुद्दों और रूस-अमेरिका के जॉइंट प्रोजेक्ट्स पर भी बात हुई। जेरेड और स्टीव के दौरे से पहले ट्रम्प ने कहा था कि दोनों जंग खत्म करने का नया प्रस्ताव लेकर जा रहे हैं और यह अच्छा मौका है कि हम यह कर पाएं। लेकिन दिमित्री पेस्कोव ने मीटिंग में कोई नई बात या चर्चा होने से इनकार किया। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि आने वाले हफ्तों में बड़ी बैठकें हो सकती हैं, जिनके अच्छे नतीजे होंगे। सवाल-4: अगर ट्रम्प, पुतिन और जेलेंस्की साथ बैठे तो क्या बात हो सकती है? जवाब: ऐसी चर्चा पहली बार नहीं हो रही है कि ट्रम्प, पुतिन और जेलेंस्की बातचीत की मेज पर एक साथ आएं। पहले भी ट्रम्प और जेलेंस्की इसके लिए राजी थे, लेकिन पुतिन इसे टालते रहे। अब रैटक्लिफ ने फिर से ये पेशकश की है। ऐसे में अगर तीनों के बीच बैठक हुई तो 4 बड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है… सवाल-5: तो क्या जल्द ही रूस-यूक्रेन जंग रुकने वाली है? जवाब: खुद ईरान जंग में उलझा अमेरिका 8 महीने बाद फिर से रूस-यूक्रेन जंग रोकने के लिए लामबंदी कर रहा है। जेरेड और स्टीव पहली बार कीव भी जा रहे हैं, जो अब तक सिर्फ मॉस्को जाते रहे। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि जंग खत्म हो सकती है। पिछले महीने जेलेंस्की ने उम्मीद जताई थी कि सितंबर में बहुत कुछ बदल सकता है। अमेरिकी और रूसी अधिकारियों ने भी संभावना जताई है कि आने वाले दिनों पर सकारात्मक नतीजे मिल सकते हैं। 4 एक्सपर्ट्स से जानिए… ******* रिसर्च सहयोग- आदित्य रवि ———– ये भी खबर पढ़िए… क्या बांग्लादेश मक्का पैक्ट में शामिल होकर सऊदी-पाक-तुर्किये के साथ लड़ेगा; भारत के तीन तरफ से घिरने का खतरा हाल ही में सऊदी, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच मक्का में एक डिफेंस एग्रीमेंट हुआ। इसमें NATO की तरह करार है कि तीनों में से किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। अब इसमें कुछ और इस्लामिक देशों के शामिल होने की अटकलें लग रही हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम है भारत का पड़ोसी- बांग्लादेश। पूरी खबर पढ़िए…