Tuesday, 22 Sep 2026 | 07:43 AM

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नेपाल बाढ़- 5300 से ज्यादा अब भी लापता:1259 की मौत, 12 हजार को बचाया; भारत ने मदद की एक और खेप भेजी

नेपाल बाढ़- 5300 से ज्यादा अब भी लापता:1259 की मौत, 12 हजार को बचाया; भारत ने मदद की एक और खेप भेजी

नेपाल में भोटेकोशी बाढ़ की तबाही के 10 दिन बाद भी 5,300 से ज्यादा लोग लापता हैं। अब तक 1,259 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि राहत और बचाव दलों ने 12,038 लोगों को सुरक्षित निकाला है। संकट के बीच भारत ने भी नेपाल के लिए राहत सामग्री की एक और खेप भेजी है। गुरुवार रात दो C-130J विमानों से 21.5 टन मानवीय सहायता काठमांडू पहुंची। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों में 21,402 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। ये टीमें खोज, बचाव, राहत वितरण और बरामद शवों के प्रबंधन में लगी हैं। चितवन में सबसे ज्यादा शव मिले अलग-अलग जिलों में शवों की बरामदगी जारी है। चितवन में अब तक 355 शव मिले हैं, जिनमें अज्ञात मानव अवशेष भी शामिल हैं। नवलपरासी ईस्ट में 218, नवलपरासी वेस्ट में 212, नुवाकोट में 177, रसुवा में 127, गोरखा में 72, धादिंग में 60 और तनहुँ में 38 शव बरामद किए गए हैं। अब तक 95 शवों की पहचान की जा चुकी है। प्रशासन और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लापता लोगों की जानकारी जुटाने के साथ शवों की पहचान का काम भी कर रहे हैं। भारत की नई खेप में फोरेंसिक किट और मेडिकल उपकरण भारत के छठे और सातवें राहत विमान गुरुवार रात काठमांडू पहुंचे। दोनों C-130J विमानों से आई 21.5 टन सहायता में फोरेंसिक किट और मेडिकल उपकरण शामिल हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, राहत सामग्री नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि यह सहायता रसुवा फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल के राहत प्रयासों के लिए भारत के लगातार जारी सहयोग का हिस्सा है।

US ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय को राहत:फैमिली कैटेगरी की तारीखें बढ़ीं; 1 अक्टूबर से नए वीजा नंबर मिलेंगे

US ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय को राहत:फैमिली कैटेगरी की तारीखें बढ़ीं; 1 अक्टूबर से नए वीजा नंबर मिलेंगे

अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय परिवारों के लिए सितंबर का वीजा बुलेटिन राहत लेकर आया है। परिवार-आधारित कई श्रेणियों में ग्रीन कार्ड मिलने की तारीखें काफी आगे बढ़ी हैं। हालांकि, EB-1 श्रेणी में खास बदलाव नहीं हुआ है। EB-1 श्रेणी में असाधारण प्रतिभा वाले लोग, बेहतरीन प्रोफेसर-रिसर्चर और एमएनसी के कुछ वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। भारत के लिए सितंबर में इसकी फाइनल एक्शन डेट 15 अक्टूबर 2022 है। सितंबर का वीजा बुलेटिन मौजूदा वित्त वर्ष का आखिरी बुलेटिन है। अमेरिका का वित्त वर्ष 1 अक्टूबर से 30 सितंबर तक चलता है। नए वार्षिक वीजा नंबर 1 अक्टूबर से उपलब्ध होंगे। खबर को लगातार अपडेट किया जा रहा है।

US ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय को राहत:फैमिली कैटेगरी की तारीखें बढ़ीं; 1 अक्टूबर से नए वीजा नंबर मिलेंगे

US ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय को राहत:फैमिली कैटेगरी की तारीखें बढ़ीं; 1 अक्टूबर से नए वीजा नंबर मिलेंगे

अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय परिवारों के लिए सितंबर का वीजा बुलेटिन राहत लेकर आया है। परिवार-आधारित कई श्रेणियों में ग्रीन कार्ड मिलने की तारीखें काफी आगे बढ़ी हैं। हालांकि, EB-1 श्रेणी में खास बदलाव नहीं हुआ है। EB-1 श्रेणी में असाधारण प्रतिभा वाले लोग, बेहतरीन प्रोफेसर-रिसर्चर और एमएनसी के कुछ वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। भारत के लिए सितंबर में इसकी फाइनल एक्शन डेट 15 अक्टूबर 2022 है। सितंबर का वीजा बुलेटिन मौजूदा वित्त वर्ष का आखिरी बुलेटिन है। अमेरिका का वित्त वर्ष 1 अक्टूबर से 30 सितंबर तक चलता है। नए वार्षिक वीजा नंबर 1 अक्टूबर से उपलब्ध होंगे। F-1 में 13 महीने की बढ़त सितंबर वीजा बुलेटिन में भारत और चीन के लिए F-1 श्रेणी की फाइनल एक्शन डेट 15 दिसंबर 2018 से बढ़कर 22 जनवरी 2020 हो गई है। यह श्रेणी अमेरिकी नागरिकों के अविवाहित वयस्क बेटे-बेटियों के लिए है। F-2B में करीब 20 महीने की राहत ग्रीन कार्ड धारकों के अविवाहित वयस्क बेटे-बेटियों के लिए F-2B की तारीख 1 जनवरी 2018 से बढ़कर 22 अगस्त 2019 हो गई है। यानी एक महीने में करीब 20 महीने की बढ़त मिली है। F-3 में करीब 29 महीने की बढ़त अमेरिकी नागरिकों के विवाहित बेटे-बेटियों के लिए F-3 की फाइनल एक्शन डेट 15 मई 2012 से बढ़कर 22 अक्टूबर 2014 हो गई है। इसमें करीब 29 महीने की बढ़त हुई है। F-2A में एक महीने की बढ़त ग्रीन कार्ड धारकों के पति-पत्नी और नाबालिग बच्चों के लिए F-2A की तारीख 22 जुलाई 2026 से बढ़कर 22 अगस्त 2026 हो गई है। वित्त वर्ष 2026 में परिवार आधारित इमिग्रेशन की कुल सीमा 2.26 लाख और रोजगार आधारित इमिग्रेशन की सीमा 1,86,317 है। प्रति देश 7% यानी 28,862 वीजा की सीमा है। कुल मिलाकर इस महीने परिवार आधारित ग्रीन कार्ड की कई श्रेणियों में अच्छी प्रगति हुई है, जबकि EB-1 में कोई बदलाव नहीं हुआ। अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर नया बिल पेश इससे पहले अमेरिकी सीनेट में एक ऐसा विधेयक पेश किया गया थआ, जिसमें पिछले 7 साल से लगातार अमेरिका में रह रहे लोगों को ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देने वाला आधिकारिक दस्तावेज है। इसे आधिकारिक तौर पर परमानेंट रेजिडेंट कार्ड कहा जाता है। भारतीय H-1B वीजाधारकों के लिए यह प्रस्ताव क्यों अहम है? यह प्रस्ताव भारतीयों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका में H-1B वीजा पर काम करने वाले लोगों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है। फिलहाल रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड पर हर देश के लिए एक तय सीमा (पर-कंट्री कैप) लागू है। इसी वजह से हजारों भारतीयों को ग्रीन कार्ड मिलने में कई-कई साल लग जाते हैं। अगर यह विधेयक कानून बन जाता है, तो पिछले 7 साल से लगातार अमेरिका में रह रहे पात्र H-1B वीजाधारकों को ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने का एक नया विकल्प मिल जाएगा।

बिग बॉस 20 का घर बना ‘हाउस ऑफ इल्यूजन’:गार्डन में शार्क से लेकर बेडरूम में बिच्छू तक, हर कोना सुनाएगा नई कहानी

बिग बॉस 20 का घर बना ‘हाउस ऑफ इल्यूजन’:गार्डन में शार्क से लेकर बेडरूम में बिच्छू तक, हर कोना सुनाएगा नई कहानी

‘बिग बॉस 20’ का घर इस बार सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि एक अलग ही दुनिया नजर आ रहा है। शो की थीम ‘हाउस ऑफ इल्यूजन’ और ‘ड्युअलिटी’ को ध्यान में रखते हुए घर के हर हिस्से को अलग अंदाज में डिजाइन किया गया है। गार्डन में जानवरों और पक्षियों की आकृतियां, दीवारों पर कई आंखें, तालाब में शार्क, पेड़ पर सांप और एक अलग जिम एरिया नजर आता है। ड्राइंग रूम से लेकर किचन, डाइनिंग एरिया और बेडरूम तक हर जगह कोई न कोई कहानी छिपी है। इस बार घर को डिजाइन किया है वर्षा जैन ने। इसे तैयार करने में करीब डेढ़ महीने तक रोजाना 100 से ज्यादा लोग दिन-रात काम करते रहे। गार्डन में कदम रखते ही दिखेगा ‘अलग संसार’ बिग बॉस के घर में प्रवेश करते ही सबसे पहले गार्डन एरिया नजर आता है। यहां दीवारों पर अलग-अलग जानवरों और पक्षियों की बड़ी-बड़ी आकृतियां बनाई गई हैं। एक तरफ गोरिल्ला नजर आता है तो दूसरी ओर ईगल की आकृति खास ध्यान खींचती है। बिग बॉस के हाथ पर बना ईगल भी इस डिजाइन का हिस्सा है। इसका शो की कहानी से क्या कनेक्शन है, यह आने वाले एपिसोड में सामने आएगा। गार्डन के एक हिस्से में पेड़ पर खतरनाक सांप की आकृति बनाई गई है। वहीं एक विचित्र प्राणी को कैंप लगाए हुए दिखाया गया है। यानी घर के बाहर का हिस्सा भी सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि शो की थीम का हिस्सा है। स्विमिंग पूल में इस बार दिखेगी शार्क गार्डन का स्विमिंग पूल भी इस बार पहले जैसा सामान्य नहीं है। पानी के बीच शार्क की आकृति इसे बिल्कुल अलग लुक देती है। साफ पानी के बीच नजर आती शार्क घर के ‘इल्यूजन’ वाले कॉन्सेप्ट को और मजबूत करती है। गार्डन में कंटेस्टेंट्स के लिए छोटा जिम गार्डन एरिया में ही कंटेस्टेंट्स के लिए जिम बनाया गया है। यहां वे एक्सरसाइज और फिटनेस पर ध्यान दे सकेंगे। यानी घर के अंदर होने वाले तनाव और गेम के बीच फिटनेस के लिए भी अलग जगह रखी गई है। ड्राइंग रूम में हर चीज बताएगी अपनी कहानी गार्डन से आगे बढ़ते ही घर का ड्राइंग और लिविंग एरिया आता है। घर का हर हिस्सा अलग नजर आता है, लेकिन सभी हिस्से एक ही थीम से जुड़े हुए हैं। बेडरूम, किचन, लिविंग एरिया और टेरेस के रंग और कॉन्सेप्ट अलग रखे गए हैं, लेकिन ओवरऑल थीम एक ही है। यही वजह है कि एक कमरे से दूसरे कमरे में जाते ही दर्शकों को अलग दुनिया का एहसास होगा। दीवारों पर बनी आंखें देंगी ‘हर चीज देखे जाने’ का एहसास घर की कुछ दीवारों पर बड़ी संख्या में आंखों की आकृतियां बनाई गई हैं। इनका मतलब भी सीधा है- घर के अंदर कुछ भी छिपा नहीं है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। यह डिजाइन बिग बॉस के उस मूल कॉन्सेप्ट को भी दर्शाता है, जिसमें कंटेस्टेंट्स लगातार कैमरों की निगरानी में रहते हैं। किचन में खाना कम, गॉसिप और झगड़े ज्यादा! अब पहुंचते हैं बिग बॉस के सबसे चर्चित हिस्सों में से एक- किचन एरिया में। यहां खाना बनाने के साथ-साथ गॉसिप, बहस और लड़ाई-झगड़े भी खूब होते हैं। इस बार किचन का लुक भी थीम के मुताबिक रखा गया है। फिलहाल यहां नजर आने वाली कुछ चीजें असली नहीं, बल्कि सेट का हिस्सा हैं। किचन से आगे बढ़ते ही डाइनिंग एरिया आता है। डाइनिंग टेबल पर खाने से ज्यादा होंगी बातें बिग बॉस के घर की डाइनिंग टेबल सिर्फ खाना खाने की जगह नहीं होती। यहां कंटेस्टेंट्स बैठकर एक-दूसरे से बातें करते हैं, रणनीतियां बनाते हैं और कई बार छोटी-सी बात बड़े विवाद में बदल जाती है। यही वजह है कि इस घर में डाइनिंग एरिया भी कहानी का अहम हिस्सा नजर आता है। बेडरूम में मधुमक्खी, बिच्छू और रंग-बिरंगी तितलियां घर का बेडरूम इस बार सबसे ज्यादा रहस्यमयी हिस्सों में से एक है। यहां दीवारों और आसपास के डिजाइन में मधुमक्खी, बिच्छू, छिपकली और रंग-बिरंगी तितलियों की आकृतियां नजर आती हैं। डिजाइन को इस तरह तैयार किया गया है कि रात में सोने वाला कंटेस्टेंट भी इस अजीबोगरीब दुनिया के बीच खुद को महसूस करे। बिच्छू और सांप जैसी आकृतियां जहां खतरे का संकेत देती हैं, वहीं तितलियां सपनों और कल्पना की दुनिया का एहसास कराती हैं। समुद्र में डूबती कश्ती भी डिजाइन का हिस्सा बेडरूम के एक हिस्से में पेड़ के पीछे समुद्र और डूबती हुई कश्ती का दृश्य दिखाई देता है। ऐसा लगता है जैसे समुद्र में कोई नाव डूब रही हो और उसमें मौजूद लोग मुश्किल में हों। यह पूरा सेटअप ‘हाउस ऑफ इल्यूजन’ की थीम को आगे बढ़ाता है, जहां वास्तविक और काल्पनिक दुनिया के बीच की सीमा धुंधली नजर आती है। ऑक्टोपस चेस खेलेगा, जानवर भी देंगे संकेत घर में कई ऐसी चीजें रखी गई हैं, जो सामान्य दुनिया में संभव नहीं लगतीं। उदाहरण के तौर पर एक ऑक्टोपस को चेस खेलते हुए दिखाया गया है। इस तरह की ‘लार्जर दैन लाइफ’ आकृतियां दर्शकों को लगातार यह एहसास कराती हैं कि वे एक सामान्य घर नहीं, बल्कि एक काल्पनिक दुनिया में प्रवेश कर चुके हैं। ‘हाउस ऑफ इल्यूजन’ और ‘ड्युअलिटी’ है पूरे डिजाइन की थीम इस बार पूरे घर का कॉन्सेप्ट ‘हाउस ऑफ इल्यूजन’ और ‘ड्युअलिटी’ पर आधारित है। गेम शो की थीम को ध्यान में रखते हुए घर के हर हिस्से को अलग बनाया गया है। यानी एक तरफ घर खूबसूरत और आकर्षक दिखाई देता है, तो दूसरी तरफ उसमें छिपे सांप, बिच्छू, आंखें और दूसरी आकृतियां एक रहस्यमयी और चुनौतीपूर्ण दुनिया का एहसास कराती हैं। डेढ़ महीने में तैयार हुआ इतना बड़ा सेट इतने बड़े सेट को तैयार करना आसान नहीं था। डिजाइनर वर्षा जैन को फिजिकल कंस्ट्रक्शन में करीब डेढ़ महीने का समय लगा। हालांकि, उससे पहले डिजाइन को अंतिम रूप देने में काफी समय लगा। बारिश के मौसम में भी करीब 100 से ज्यादा मजदूर रोजाना दिन-रात काम करते रहे, ताकि तय समय में इतना बड़ा सेट तैयार किया जा सके। इस बार घर सिर्फ घर नहीं, कहानी का हिस्सा है बिग बॉस 20 के घर को देखकर साफ नजर आता है कि इस बार डिजाइन को सिर्फ खूबसूरत बनाने पर ध्यान

जयशंकर बोले-भारत यूक्रेन जंग खत्म कराने में मदद को तैयार:कहा- जरूरत पड़ी तो मध्यस्थता करेंगे; ब्लैक सी में नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया

जयशंकर बोले-भारत यूक्रेन जंग खत्म कराने में मदद को तैयार:कहा- जरूरत पड़ी तो मध्यस्थता करेंगे; ब्लैक सी में नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया

केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में मदद के लिए तैयार है। उन्होंने जरूरत पड़ने पर मध्यस्थता करने की भी पेशकश की है। जयशंकर ने यह बात गुरुवार को कीव दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कही। वे यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ मौजूद थे। जयशंकर ने ब्लैक सी में भारतीयों समेत सभी नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि युद्ध का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकाला जाना चाहिए। ब्लैक सी दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। रूस और यूक्रेन से गेहूं, मक्का और सूरजमुखी तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के दूसरे देशों तक पहुंचता है। जयशंकर के यूक्रेन दौरे की तस्वीरें… यूक्रेन बोला- रूसी हमलों के बीच जयशंकर का दौरा अहम यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने जयशंकर के कीव दौरे को अहम बताया। उन्होंने कहा कि रूसी हमलों के बीच भारतीय विदेश मंत्री की यह यात्रा खास मायने रखती है। सिबिहा ने कहा कि रूस लगातार यूक्रेनी शहरों, बंदरगाहों और नागरिक जहाजों को निशाना बना रहा है। दोनों नेताओं ने ब्लैक सी में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने और इससे जुड़ी वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर भी चर्चा की। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के उस रुख का भी स्वागत किया, जिसमें भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए युद्ध खत्म करने की बात कहता रहा है। दोनों देश अगली अंतर-सरकारी आयोग की बैठक कराने पर भी सहमत हुए। दोनों नेताओं के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा, टेक्नोलॉजी और डिजिटल सेक्टर में भारत-यूक्रेन के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी बात हुई। जयशंकर 3 से 5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड दौरे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर 3 से 5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड की आधिकारिक यात्रा पर हैं। यूक्रेन के बाद वे पोलैंड जाएंगे, जहां उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की से द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के साथ भारत के रिश्तों को और मजबूत करना है। इस दौरान क्षेत्रीय हालात और आपसी हितों से जुड़े दूसरे अहम मुद्दों पर भी चर्चा होगी। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

भारत की जगह चीन से महंगी बिजली खरीद रहा बांग्लादेश:दोगुनी कीमत चुका रहा, फैसले के लेकर देश में विरोध

भारत की जगह चीन से महंगी बिजली खरीद रहा बांग्लादेश:दोगुनी कीमत चुका रहा, फैसले के लेकर देश में विरोध

बांग्लादेश भारत से मिलने वाली सस्ती बिजली के बावजूद चीन से महंगी बिजली खरीद रहा है। ढाका के पास अमीनबाजार में लग रहे वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट से 42 MW बिजली 25 टका यानी करीब 19.25 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदी जाएगी। इसके लिए 25 साल का करार हुआ है। भारत से बांग्लादेश को करीब 11 टका यानी 8.50 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। चीन से मिलने वाली बिजली की कीमत भारत से दोगुने से भी ज्यादा है। 2 सितंबर को बीजिंग में हुए इस समझौते का बांग्लादेश में विरोध हो रहा है। बांग्लादेश ने भारत के 1 पैसे के चार्ज पर आपत्ति जताई थी भारत के केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने सीमा-पार बिजली लेनदेन और ग्रिड से जुड़े खर्च के लिए 1 पैसे प्रति यूनिट शुल्क प्रस्तावित किया था। बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) ने इसका विरोध किया। इसके बाद भारत ने शुल्क को घटाकर आधा पैसा प्रति यूनिट करने की बात कही। चीन के प्रोजेक्ट से कचरे की समस्या भी होगी कम अमीनबाजार का प्रोजेक्ट सिर्फ बिजली बनाने के लिए नहीं है। इसमें ढाका के कचरे का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा। करीब 2.3 करोड़ आबादी वाले ढाका में रोजाना 8 हजार मीट्रिक टन कचरा निकलता है। वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से कचरे की समस्या कम करने के साथ बिजली भी पैदा होगी। बांग्लादेश इस समय बिजली की कमी और पावर कट की समस्या से जूझ रहा है। देश के सामने विदेशी मुद्रा का संकट भी है। बांग्लादेश के पावर सेक्टर में चीन का दखल बढ़ रहा चीन बांग्लादेश के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है। वह तीस्ता नदी पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत बिजली से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। अमीनबाजार का वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट भी इसी बढ़ती भागीदारी का हिस्सा है। चीन की योजना बांग्लादेश के रास्ते म्यांमार तक भी ऊर्जा पहुंच बढ़ाने की है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक ढाका के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से म्यांमार को बिजली सप्लाई करने की तैयारी है। इस तरह अमीनबाजार प्रोजेक्ट का इस्तेमाल बांग्लादेश की बिजली जरूरत के साथ क्षेत्रीय ऊर्जा कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए भी किया जाएगा। ———————– ये खबर भी पढ़ें… रूस-यूक्रेन ने ब्लैक सी में 300 जहाजों पर हमले किए:दुनिया में गेहूं-मक्का महंगा होने का खतरा; रूस का अनाज निर्यात 71% घटा रूस-यूक्रेन युद्ध में ब्लैक सी अब जंग का बड़ा मोर्चा बन गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने में दोनों देशों ने 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया है। पूरी खबर पढ़ें…

आतिफ असलम बोले- भारत से बेहतर है पाकिस्तान कोक स्टूडियो:पाकिस्तान के गानों में दिखता है जादू; भारतीय संगीत में कमर्शियलाइजेशन ज्यादा

आतिफ असलम बोले- भारत से बेहतर है पाकिस्तान कोक स्टूडियो:पाकिस्तान के गानों में दिखता है जादू; भारतीय संगीत में कमर्शियलाइजेशन ज्यादा

पाकिस्तानी सिंगर आतिफ असलम ने भारत और पाकिस्तान के लोकप्रिय संगीत प्लेटफॉर्म ‘कोक स्टूडियो’ के बीच तुलना करते हुए पाकिस्तान कोक स्टुडियो को बेहतर बताया है। एक इंटरव्यू में आतिफ ने कहा कि कोक स्टूडियो पाकिस्तान की सफलता के पीछे उसका ‘रॉ और ओरिजनल’ संगीत है, जबकि कोक स्टूडियो इंडिया में ‘कमर्शियलाइजेशन’ (व्यावसायीकरण) ज्यादा हावी दिखता है। ‘भारतीय संगीत में कमर्शियलाइजेशन हावी’ दुबई के रेडियो स्टेशन मिर्ची यूएई को दिए इंटरव्यू में आतिफ असलम ने दोनों देशों के कोक स्टूडियो के काम करने के तरीके पर बात की। आतिफ ने कहा, दोनों ही तरफ संगीत की कंपोजिशन बेहतरीन बनाई जाती है, लेकिन भारतीय संगीत में वह रॉ-नेस गायब है जो हमारे गानों में होती है। इंडियन कोक स्टूडियो कमर्शियलाइजेशन पर बहुत ज्यादा भरोसा करता है और गानों को बाजार के हिसाब से ढालता है। इसके उलट, पाकिस्तानी कोक स्टूडियो पूरी तरह से ओरिजनल कंपोजिशन पर जोर देता है। वहां संगीतकारों के पास अपनी कला दिखाने की आजादी होती है और एक तरह से यह उनके लिए करो या मरो की स्थिति होती है, जहां वे अपनी अलग पहचान जोड़ सकते हैं। 2008 में शुरू हुआ कोक स्टूडियो पाकिस्तान कोक स्टूडियो पाकिस्तान की शुरुआत साल 2008 में हुई थी। इसके फाउंडर और प्रोड्यूसर रोहेल हयात थे। इस शो ने पारंपरिक सूफी, कव्वाली, गजल और लोक संगीत को आधुनिक वेस्टर्न इंस्ट्रूमेंट्स के साथ मिलाकर फ्यूजन म्यूजिक को एक नया मुकाम दिया। कोक स्टूडियो भारत: 2011 में हुई थी शुरुआत भारत में कोक स्टूडियो की शुरुआत साल 2011 में ‘एमटीवी कोक स्टूडियो इंडिया’ के नाम से हुई थी। शुरुआती सीजन्स में ए.आर. रहमान, अमित त्रिवेदी और क्लिंटन सेरेजो जैसे संगीतकारों ने कई बेहतरीन ओरिजनल ट्रैक्स बनाए, लेकिन बाद के सालों में यह प्लेटफॉर्म भारतीय फिल्म इंडस्ट्री और बॉलीवुड कंपोजर्स के प्रभाव में ज्यादा आ गया। भारत में बैन हुए, बोले- लोग VPN से गाने सुनते हैं इससे पहले आतिफ असलम ने भारत में लगे बैन पर बात करते हुए कहा कि लोग वीपीएन के जरिए उनका संगीत सुनते हैं और वो अपने फैंस को मिस करते हैं। यह बात उन्होंने रेडियो प्रेजेंटर क्रिस फेड के यूट्यूब चैनल पर बातचीत में कही। बातचीत में आतिफ असलम ने कहा, “मुझे भारत में बैन हुए लगभग 10 साल हो गए हैं। यह भारतीय सरकार का फैसला था। उन्होंने पाकिस्तान के कलाकारों को बैन करने का फैसला किया। भारतीय कलाकार भी पाकिस्तान में बैन हैं। पिछले 10 साल से। मैंने वहां कोई गाना रिलीज नहीं किया है।” उन्होंने भारतीय फैंस के लगातार अपने संगीत को सुनने का जिक्र करते हुए कहा कि लोग वीपीएन के जरिए उनका संगीत सुनते हैं और सीडी बनाकर दूसरों को देते हैं। उन्होंने कहा कि वह पाइरेसी को बढ़ावा नहीं देते, लेकिन संगीत जहां पहुंचना होता है, वहां पहुंच जाता है। मेरे पहले सिंगल के साथ भी ऐसा ही हुआ था। आतिफ ने भारतीय फैंस को उदास नहीं होने कहा भारतीय फैंस के लिए आतिफ ने कहा, “हां, इसे लेकर बुरा मत महसूस करो। उदास मत हो। मैं हमेशा से आप लोगों से कहना चाहता था कि मुझे आप लोगों की याद आती है। मुझे वहां काम करने की याद नहीं आती, लेकिन आप लोगों की याद आती है।” आतिफ ने आगे कहा कि मैंने प्लेबैक सिंगिंग से बहुत कुछ सीखा है। अगर यह बैन नहीं हुआ होता, तो शायद मैं अपना खुद का म्यूजिक नहीं बना पाता। इसलिए इसके लिए भी मैं आप लोगों का शुक्रिया अदा करता हूं। पाकिस्तानी कलाकारों पर क्यों लगा था बैन सितंबर 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था। इसी दौरान इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) ने अपने निर्माता सदस्यों को भारत-पाकिस्तान के रिश्ते सामान्य होने तक पाकिस्तानी कलाकारों और तकनीशियनों को काम न देने का निर्देश दिया था। हालांकि, 2016 के बाद भी कई बॉलीवुड फिल्मों में आतिफ असलम के गाने आए। 2017 में फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ का ‘दिल दियां गल्लां’, ‘राब्ता’ का ‘दरअसल’, ‘ट्यूबलाइट’ का ‘मैं अगर’ और ‘करीब करीब सिंगल’ का ‘जाने दे’ रिलीज हुआ। वहीं, 2018 में ‘बागी 2’ का ‘ओ साथी’, ‘सत्यमेव जयते’ का ‘पानियों सा’, ‘लवयात्री’ का ‘तेरा हुआ’ और ‘जीनियस’ का ‘दिल मेरी ना सुने’ गाना रिलीज हुआ। वहीं, मार्च 2019 के बाद से उनका कोई गाना बॉलीवुड फिल्मों में रिलीज नहीं हुआ। गौरतलब है कि फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के कुछ दिनों बाद ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने भी भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में पाकिस्तानी एक्टर्स और कलाकारों पर पूरी तरह बैन की घोषणा की थी। इस हमले में 40 CRPF जवानों की जान गई थी। 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा। इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तानी फिल्मों, वेब सीरीज, गानों और पॉडकास्ट पर रोक लगा दी। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने IT रूल्स 2021 के तहत OTT और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स से पाकिस्तानी कंटेंट हटाने का आदेश दिया। इसके अलावा कई पाकिस्तानी कलाकारों के सोशल मीडिया अकाउंट्स भी भारत में अस्थायी रूप से ब्लॉक किए गए। इनमें माहिरा खान और हानिया आमिर जैसे कलाकार शामिल थे।

नीदरलैंड्स ने अमेरिका-कनाडा से 86 टन सोना हटाकर लंदन भेजा:बैंक ऑफ इंग्लैड में रखा, कहा- संकट आने पर यहां आसानी से बेचा जा सकेगा

नीदरलैंड्स ने अमेरिका-कनाडा से 86 टन सोना हटाकर लंदन भेजा:बैंक ऑफ इंग्लैड में रखा, कहा- संकट आने पर यहां आसानी से बेचा जा सकेगा

नीदरलैंड्स ने अमेरिका और कनाडा में रखा 86 टन सोना निकालकर लंदन भेज दिया है। डच सेंट्रल बैंक (DNB) ने बताया कि यह ट्रांसफर मार्च से अगस्त के बीच कई महीनों में किया गया। अब यह सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा गया है। DNB के मुताबिक, संकट की स्थिति में लंदन में रखा सोना ज्यादा आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है। DNB के प्रेसिडेंट ओलाफ स्लेपेन ने कहा कि यह कदम देश की संकट से निपटने की तैयारी और मजबूती बढ़ाने के लिए जरूरी था। 27 टन सोना न्यूयॉर्क-ओटावा से नीदरलैंड्स लाया गया DNB के मुताबिक, 27 टन सोने की छड़ें न्यूयॉर्क और ओटावा से नीदरलैंड्स के जाइस्ट पहुंचाई गईं। इसके बाद इसी मात्रा और गुणवत्ता का सोना लंदन भेज दिया गया। सोने की छड़ों को पिघलाने की जरूरत नहीं पड़ी। हालांकि, अटलांटिक महासागर के पार इतनी बड़ी मात्रा में सोना किस तरह पहुंचाया गया, इसकी जानकारी बैंक ने नहीं दी। इस ट्रांसफर से पहले DNB के कुल सोने का 31.3% न्यूयॉर्क और 19.7% ओटावा में रखा था। अब दोनों जगहों पर यह हिस्सेदारी घटकर 18.5% रह गई है। वहीं, लंदन में रखे सोने की हिस्सेदारी 18.1% से बढ़कर 32.1% हो गई है। नीदरलैंड्स में 30.8% सोना अभी भी रखा हुआ है। न्यूयॉर्क में बेचकर लंदन में खरीदा बाकी सोना DNB ने बताया कि ट्रांसफर का बाकी हिस्सा अलग तरीके से किया गया। न्यूयॉर्क में सोना बेचा गया और उतनी ही मात्रा का सोना लंदन में दोबारा खरीदा गया। बैंक के मुताबिक, सोने की खरीद-बिक्री और फिजिकल ट्रांसफर को साथ करने से इतनी बड़ी और जटिल प्रक्रिया से जुड़े जोखिम को बांटने में मदद मिली। संकट में लंदन का सोना जल्दी इस्तेमाल हो सकेगा DNB के मुताबिक, बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा सोना दुनिया में सबसे आसानी से ट्रेड होने वाले सोने में माना जाता है। इसलिए किसी संकट के समय इसे अमेरिका या कनाडा में रखे सोने की तुलना में ज्यादा आसानी से बेचा या खरीदा जा सकता है। DNB ने इस फैसले के पीछे “बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव” का हवाला दिया है। हालांकि, बैंक ने यह साफ नहीं किया कि वह किन घटनाओं को लेकर ऐसा कह रहा है। अमेरिका-कनाडा के बीच जारी है ट्रेड विवाद यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड विवाद चल रहा है। दोनों देशों के बीच बातचीत फेल होने के बाद एक-दूसरे के सामान पर नए टैरिफ लगाए गए हैं। कनाडा के स्टील, एल्युमिनियम, लकड़ी और ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख सेक्टर अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित हुए हैं। अगस्त में अमेरिका ने करीब 28 अरब कनाडाई डॉलर यानी 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर अतिरिक्त 50% टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। नीदरलैंड्स के पास कुल 612.4 टन सोना DNB के मुताबिक, 2025 के अंत में नीदरलैंड्स के पास कुल 612.4 टन सोना था। इसकी कीमत करीब 72.2 अरब यूरो थी। बैंक ने बताया कि सोने को अलग-अलग जगहों पर रखने की व्यवस्था का मकसद जोखिम को बांटना और संकट के समय सोने तक आसानी से पहुंच बनाए रखना है।

नीदरलैंड्स ने अमेरिका-कनाडा से 86 टन सोना हटाकर लंदन भेजा:बैंक ऑफ इंग्लैड में रखा, कहा- संकट आने पर यहां आसानी से बेच सकेंगे

नीदरलैंड्स ने अमेरिका-कनाडा से 86 टन सोना हटाकर लंदन भेजा:बैंक ऑफ इंग्लैड में रखा, कहा- संकट आने पर यहां आसानी से बेच सकेंगे

नीदरलैंड्स ने अमेरिका और कनाडा में रखा 86 टन सोना निकालकर लंदन भेज दिया है। डच सेंट्रल बैंक (DNB) ने बताया कि यह ट्रांसफर मार्च से अगस्त के बीच कई महीनों में किया गया। अब यह सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा गया है। DNB के मुताबिक, संकट की स्थिति में लंदन में रखा सोना ज्यादा आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है। इस ट्रांसफर से पहले DNB के कुल सोने का 31.3% न्यूयॉर्क और 19.7% ओटावा में रखा था। अब दोनों जगहों पर यह हिस्सेदारी घटकर 18.5% रह गई है। वहीं, लंदन में रखे सोने की हिस्सेदारी 18.1% से बढ़कर 32.1% हो गई है। नीदरलैंड्स में 30.8% सोना अभी भी रखा हुआ है। 27 टन सोना न्यूयॉर्क-ओटावा से नीदरलैंड्स लाया गया DNB के मुताबिक, 27 टन सोने की छड़ें न्यूयॉर्क और ओटावा से नीदरलैंड्स के जाइस्ट पहुंचाई गईं। इसके बाद इसी मात्रा और गुणवत्ता का सोना लंदन भेज दिया गया। सोने की छड़ों को पिघलाने की जरूरत नहीं पड़ी। हालांकि, अटलांटिक महासागर के पार इतनी बड़ी मात्रा में सोना किस तरह पहुंचाया गया, इसकी जानकारी बैंक ने नहीं दी। DNB ने बताया कि ट्रांसफर का बाकी हिस्सा अलग तरीके से किया गया। न्यूयॉर्क में सोना बेचा गया और उतनी ही मात्रा का सोना लंदन में दोबारा खरीदा गया। बैंक के मुताबिक, सोने की खरीद-बिक्री और फिजिकल ट्रांसफर को साथ करने से इतनी बड़ी और जटिल प्रक्रिया से जुड़े जोखिम को बांटने में मदद मिली। संकट में लंदन का सोना जल्दी इस्तेमाल हो सकेगा DNB के मुताबिक, बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा सोना दुनिया में सबसे आसानी से ट्रेड होने वाले सोने में माना जाता है। इसलिए किसी संकट के समय इसे अमेरिका या कनाडा में रखे सोने की तुलना में ज्यादा आसानी से बेचा या खरीदा जा सकता है। DNB ने इस फैसले के पीछे “बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव” का हवाला दिया है। हालांकि, बैंक ने यह साफ नहीं किया कि वह किन घटनाओं को लेकर ऐसा कह रहा है। अमेरिका-कनाडा के बीच जारी है ट्रेड विवाद यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड विवाद चल रहा है। दोनों देशों के बीच बातचीत फेल होने के बाद एक-दूसरे के सामान पर नए टैरिफ लगाए गए हैं। कनाडा के स्टील, एल्युमिनियम, लकड़ी और ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख सेक्टर अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित हुए हैं। अगस्त में अमेरिका ने करीब 28 अरब कनाडाई डॉलर यानी 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर अतिरिक्त 50% टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। नीदरलैंड्स के पास कुल 612.4 टन सोना DNB के मुताबिक, 2025 के अंत में नीदरलैंड्स के पास कुल 612.4 टन सोना था। इसकी कीमत करीब 72.2 अरब यूरो थी। बैंक ने बताया कि सोने को अलग-अलग जगहों पर रखने की व्यवस्था का मकसद जोखिम को बांटना और संकट के समय सोने तक आसानी से पहुंच बनाए रखना है। लंदन का गोल्ड मार्केट सबसे बड़ा फ्रांस की नेशनल गोल्ड काउंटर के प्रेसिडेंट लॉरेंट श्वार्ट्ज ने कहा कि सेंट्रल बैंक करीब एक दशक से अपने गोल्ड रिजर्व को अलग-अलग जगहों पर शिफ्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के मौजूदा राजनीतिक माहौल की वजह से भी कुछ सेंट्रल बैंक सोना रखने के लिए दूसरी जगहों को चुन सकते हैं। श्वार्ट्ज के मुताबिक, लंदन का गोल्ड मार्केट दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा लिक्विड मार्केट है। यानी यहां सोने को आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है। इसलिए संकट के समय लंदन में रखा सोना जल्दी इस्तेमाल किया जा सकता है। सेंट्रल बैंक यहां अपने सोने को दूसरे बैंकिंग संस्थानों को आसानी से उधार भी दे सकते हैं। ——————– ये खबर भी पढ़ें… रूस-यूक्रेन ने ब्लैक सी में 300 जहाजों पर हमले किए:दुनिया में गेहूं-मक्का महंगा होने का खतरा; रूस का अनाज निर्यात 71% घटा रूस-यूक्रेन युद्ध में ब्लैक सी अब जंग का बड़ा मोर्चा बन गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने में दोनों देशों ने 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया है। इनमें अनाज ले जाने वाले जहाज, तेल टैंकर और दूसरे मालवाहक पोत शामिल हैं। लगातार हमलों से ब्लैक सी का समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

ट्रम्प के जन्मजात नागरिकता से जुड़े आदेश पर रोक:जज बोलीं- सरकार जन्म से मिली नागरिकता नहीं छीन सकती

ट्रम्प के जन्मजात नागरिकता से जुड़े आदेश पर रोक:जज बोलीं- सरकार जन्म से मिली नागरिकता नहीं छीन सकती

अमेरिका में फेडरल जज ने बुधवार को ट्रम्प प्रशासन के नए आदेश पर रोक लगा दी। यह आदेश अमेरिका में जन्म से मिलने वाली नागरिकता के नियम सीमित करने के लिए जारी किया गया था। ग्रीनबेल्ट की अमेरिकी जिला जज डेबोरा बोर्डमैन ने बुधवार को यह फैसला दिया। प्रवासी अधिकार संगठनों ने ट्रम्प के आदेश के खिलाफ याचिका लगाई थी। विवाद 30 जून को आए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुआ था। तब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन की उस कोशिश को खारिज कर दिया था, जिसमें ऐसे बच्चों की जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की बात कही गई थी, जिनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक या ग्रीन कार्ड धारक नहीं हैं। ट्रम्प ने बर्थ टूरिज्म को बनाया निशाना इसके बाद ट्रम्प ने 6 अगस्त को नया आदेश जारी किया। इसमें खास तौर पर ‘बर्थ टूरिज्म’ को निशाना बनाया गया था। बर्थ टूरिज्म उस स्थिति को कहा जाता है, जब विदेशी नागरिक अपने बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए अमेरिका जाकर जन्म देते हैं। नए आदेश में कुछ अन्य श्रेणियों के बच्चों की नागरिकता पर भी सवाल उठाया गया था। नए आदेश के खिलाफ उन बच्चों की ओर से अदालत में याचिका दायर की गई, जिनकी नागरिकता प्रभावित हो सकती थी। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि मुकदमे के नतीजे आने तक उनकी नागरिकता को पूरी तरह मान्यता दी जाए। सरकार नागरिकता को नकार नहीं सकती जज बोर्डमैन ने याचिकाकर्ताओं से सहमति जताते हुए कहा कि ट्रम्प का नया आदेश भी संविधान के खिलाफ हो सकता है। उन्होंने अपने फैसले में लिखा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इस मामले से जुड़े बच्चे जन्म से अमेरिकी नागरिक हैं। ऐसे में सरकार उनकी नागरिकता को नकार नहीं सकती। अदालत के आदेश के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय, गृह सुरक्षा विभाग और सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन जैसी संघीय एजेंसियां फिलहाल उन बच्चों की नागरिकता में दखल नहीं दे सकेंगी, जो इस मुकदमे के दायरे में आते हैं। संविधान से मिला हक राष्ट्रपति नहीं बदल सकते इस मामले में प्रवासी अधिकार संगठन CASA और असायलम सीकर अडवोकेट प्रोजेक्ट याचिकाकर्ता हैं। संगठनों का कहना है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता संविधान से मिला अधिकार है और इसे राष्ट्रपति के आदेश से नहीं बदला जा सकता। सरकार का तर्क – कोर्ट ने जल्दबाजी में दखल दिया अमेरिकी सरकार का तर्क है कि अदालत ने जल्दबाजी में दखल दिया, क्योंकि आदेश को कैसे लागू किया जाएगा, इससे जुड़े नियम और दिशा-निर्देश अभी जारी नहीं हुए हैं। हालांकि जज बोर्डमैन ने कहा कि मामले में तत्काल अदालत की दखल जरूरी है। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपति की ओर से नागरिकता के अधिकार को सीमित करने की यह नई कोशिश भी न्यायिक समीक्षा के दायरे में आती है। ———————-