ट्रम्प के जन्मजात नागरिकता से जुड़े आदेश पर रोक:जज बोलीं- सरकार जन्म से मिली नागरिकता नहीं छीन सकती

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के जन्म से मिलने वाली नागरिकता सीमित करने वाले नए आदेश पर फेडरल जज ने रोक लगा दी है। मैरीलैंड की जज डेबोरा बोर्डमैन ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। जज ने कहा कि संविधान के तहत जन्म से अमेरिकी नागरिकता पाने वाले बच्चों की नागरिकता सरकार नहीं रोक सकती। ट्रम्प ने 6 अगस्त को यह आदेश जारी किया था। इसमें ‘बर्थ टूरिज्म’ को निशाना बनाया गया था। इसमें विदेशी लोग बच्चे के जन्म के लिए अमेरिका आते हैं, ताकि बच्चे को अमेरिकी नागरिकता मिल सके। आदेश में कुछ अन्य मामलों में अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता पर भी रोक लगाने की बात कही गई थी। जज बोलीं- नागरिकता रोकने का अधिकार नहीं जज बोर्डमैन ने कहा कि ट्रम्प का आदेश संविधान के खिलाफ हो सकता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि इस मामले में आने वाले बच्चे जन्म से अमेरिकी नागरिक हैं। अदालत के आदेश के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय, गृह सुरक्षा विभाग और सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन फिलहाल इस मामले से जुड़े बच्चों की नागरिकता रोकने की कार्रवाई नहीं कर सकेंगे। सरकार ने फैसले का विरोध किया ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि अदालत ने जल्दबाजी में दखल दिया है। सरकार के मुताबिक, आदेश को लागू करने के नियम और दिशा-निर्देश अभी तैयार नहीं हुए थे। जज ने कहा कि मामले में तत्काल अदालत की दखल जरूरी है। राष्ट्रपति की ओर से नागरिकता का अधिकार सीमित करने की कोशिश की अदालत में समीक्षा हो सकती है। प्रवासी संगठनों ने कोर्ट में चुनौती दी थी प्रवासी अधिकार संगठनों CASA और असायलम सीकर एडवोकेसी प्रोजेक्ट ने आदेश के खिलाफ अदालत का रुख किया। उनका कहना था कि इससे कई बच्चों की नागरिकता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने मांग की कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक इन बच्चों को मिलने वाली नागरिकता पर कोई रोक न लगाई जाए। सुप्रीम कोर्ट पहले भी ट्रम्प को रोक चुका है जन्म से मिलने वाली नागरिकता को लेकर ट्रम्प प्रशासन की कोशिशों पर सुप्रीम कोर्ट भी 30 जून को फैसला दे चुका है। कोर्ट ने प्रशासन की उस कोशिश को रोक दिया था, जिसमें कुछ बच्चों की जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की बात कही गई थी। अब फेडरल जज के इस फैसले से ट्रम्प प्रशासन की जन्मसिद्ध नागरिकता सीमित करने की कोशिश को एक और झटका लगा है। बच्चों की नागरिकता के लिए हजारों लोग अमेरिका आते हैं माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट (MPI) के अनुसार, अमेरिका में हर साल जन्म लेने वाले बच्चों में ‘बर्थ टूरिज्म’ से जुड़े मामलों की संख्या बहुत कम होती है। संस्था का अनुमान है कि हर साल 22 हजार से 26 हजार लोग अपने बच्चों को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका आते हैं। हालांकि 2024 के सरकारी आंकड़ों में विदेशी पते वाली माताओं से जन्मे केवल 9,600 बच्चों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था। ———————- यह भी पढ़ें…. अमेरिका में 2 लाख विदेशियों के वीजा रद्द होंगे: इतिहास में पहली बार एक साथ इतने वीजा कैंसिल होंगे अमेरिकी सरकार 2 लाख विदेशी नागरिकों के बिजनेस (B1) और टूरिस्ट वीजा (B2) रद्द करने की तैयारी कर रही है। पूरी खबर पढ़ें…
हर्षिता गौर का दिल टूटा, दो साल बाद संभलीं:बोलीं- उस रिश्ते ने खुद से प्यार करना सिखाया, पेरेंट्स अब शादी के लिए दबाव नहीं डालते

हर्षिता गौर ने एक्टिंग की शुरुआत टीवी से की और ‘मिर्जापुर’ से उन्हें अलग पहचान मिली। इंटरव्यू में उन्होंने पहली कमाई, माता-पिता के सपोर्ट और आने वाले प्रोजेक्ट्स समेत कई बातें साझा कीं। उनकी मां डॉक्टर होने के साथ 9 साल तक थिएटर भी कर चुकी हैं। बचपन में हर्षिता ने एक्टर बनने का सपना देखा था, लेकिन माता-पिता को उम्मीद थी कि यह सपना कुछ समय बाद खत्म हो जाएगा। उन्होंने मुंबई में अपने 12 साल पुराने घर को खरीदने की कोशिश का भी जिक्र किया। इसके अलावा उन्होंने सपनों के राजकुमार, दिल टूटने और खुद को प्यार करना सीखने पर भी बात की। बचपन में एक्टिंग करने का ख्याल कैसे आया? मैं करीब 7-8 साल की रही होंगी, जब मैंने मां से कहा था कि मुझे टीवी पर आना है। बचपन में ज्यादा फिल्में नहीं देखती थी, लेकिन 4 साल की उम्र से कथक सीख रही थी और स्टेज पर परफॉर्म करती थी। जब लोग मेरी तारीफ करते थे और मिलने आते थे, तो शायद वहीं से एक्टर बनने का ख्याल आया। आपकी मां भी थिएटर करती थीं? हां, मेरी मां डॉक्टर हैं, लेकिन उन्होंने पंजाब में करीब 9 साल तक थिएटर भी किया था। बचपन में मुझे पता नहीं था कि वह थिएटर एक्टर रही हैं। जब मैं थोड़ी बड़ी हुई, तब उन्होंने बताया। मुझे लगता है कि एक्टिंग का कीड़ा शायद उन्हीं से आया है। जब आपने माता-पिता को बताया कि एक्टर बनना है, तो उनकी क्या प्रतिक्रिया थी? शुरुआत में उन्हें लगा कि मैं कुछ समय बाद भूल जाऊंगी। लेकिन यह सपना कभी खत्म नहीं हुआ। 10वीं के बाद मेडिकल या नॉन-मेडिकल चुनना था, तब मैंने पापा से कहा कि मुझसे डॉक्टर नहीं बना जाएगा, मुझे एक्टर बनना है। उन्होंने फिर भी कहा कि नॉन-मेडिकल या इंजीनियरिंग कर लो। फिर इंजीनियरिंग करने का फैसला कैसे हुआ? मुझे एक्टिंग ही करनी थी। उस समय NSD और FTII में ग्रेजुएशन के कोर्स नहीं थे, इसलिए ग्रेजुएशन करनी ही थी। मैंने सोचा कि जब करनी ही है तो कुछ भी कर लेते हैं, इसलिए इंजीनियरिंग कर ली। मैं मजाक में कहती हूं कि मैं इंजीनियरिंग से एक्टिंग में नहीं आई, बल्कि इंजीनियरिंग एक्टिंग के रास्ते में आई थी। आपके पापा ने एक्टिंग के लिए मुंबई आने से नहीं रोका? मेरे पापा ने कभी मुझे कोशिश करने से नहीं रोका। वह खुद गांव से आकर डॉक्टर बने थे, इसलिए शायद समझते थे कि अपने रास्ते पर कोशिश करना जरूरी है। कॉलेज के दौरान मैं दिल्ली में छोटे-मोटे शूट करती थी। एक बार सिर्फ ऑडिशन देने के लिए चार दिन की छुट्टी में मुंबई आई थी। पापा ने कहा था कि पहले जाकर खुद को टेस्ट करो, क्या पता वहां तुम्हें रिजेक्ट कर दें। आपकी पहली कमाई कितनी थी और उससे क्या किया था? मेरी पहली कमाई ₹1000 थी। एक ऐड के लिए करीब 12 घंटे शूट किया था और मुझे ₹1000 मिले थे। मुझे नहीं लगता कि मैंने उससे कुछ खास किया था। बस घर जाकर बताया था कि ये तो शुरुआत है। टीवी शो के बाद कमाई कितनी बढ़ी? शुरुआत में ज्यादा पैसे नहीं मिलते थे, क्योंकि आप नए होते हैं। लेकिन जैसे-जैसे शो चलता गया और हिट हुआ, कमाई धीरे-धीरे बढ़ती गई। मैंने तीन साल शो किया और बाद में मेरी फीस भी बढ़ी। हालांकि, टीवी में लोग जितना कमाते हैं, उसके मुकाबले मैंने बहुत ज्यादा नहीं कमाया। मुंबई आए आपको काफी साल हो गए, क्या आप अभी भी उसी घर में रहती हैं? हां, जब से मुंबई आई हूं, तब से इसी घर में रह रही हूं। करीब 12 साल हो गए हैं। लोगों को यह बड़ी बात लगती है कि मुंबई जैसे शहर में कोई इतने साल एक ही घर में रह रहा है। क्या कभी अपना घर खरीदने का सोचा? बिल्कुल सोचा है। मैंने इसी घर को खरीदने की कोशिश की थी, लेकिन मेरे लैंडलॉर्ड अंकल-आंटी इसे बेचना नहीं चाहते थे। मुंबई में घर खरीदना आसान नहीं है। अगर आपके पास कम से कम 70-80 प्रतिशत डाउन पेमेंट नहीं है, तो लोन लेकर घर खरीदना महंगा पड़ सकता है। रेंट में कम से कम फ्लेक्सिबिलिटी बनी रहती है। माता-पिता अब शादी को लेकर सवाल करते हैं? अब तो उन्होंने बोलना ही छोड़ दिया है। शुरुआत में उन्होंने काफी कोशिश की थी, क्योंकि हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा सेटल हो जाए। लेकिन अब उन्हें लगता है कि किसी को फोर्स करके शादी नहीं कराई जा सकती। इसलिए उनकी दुआएं और प्रार्थनाएं चलती रहती हैं कि मुझे अच्छा पार्टनर मिल जाए। आपके सपनों का राजकुमार कैसा होना चाहिए? मेरे लिए सबसे जरूरी है कि वह इमोशनली अवेयर हो। उसे अपने पैटर्न, गलतियां और स्ट्रेंथ समझ में आती हो। कम्युनिकेशन अच्छा होना चाहिए, ताकि वह अपनी फीलिंग्स खुलकर बता सके। उसके आसपास रहने वाला हर इंसान खुद को रिस्पेक्टेड महसूस करे, यह मेरे लिए बहुत जरूरी है। क्या आपको अब तक अपना सपनों का राजकुमार मिला? रिश्ते रहे हैं, लेकिन उस समय हम दोनों शायद साथ में सही नहीं थे। हर इंसान अपनी जर्नी पर होता है और उसी हिसाब से सीखता है। मेरे पुराने रिश्तों में रहे लोग व्यक्तिगत तौर पर बहुत अच्छे हैं और आज भी मेरे दोस्त हैं। कभी आपका दिल भी टूटा? हां, बिल्कुल। मैंने भी शायद किसी का दिल दुखाया है, लेकिन मेरा भी टूटा है। इससे बाहर आने में मुझे करीब डेढ़ से दो साल लग गए। जब मैं उससे बाहर निकली, तो लगा कि शायद वह रिश्ता मेरी जिंदगी में इसलिए आया था, ताकि मैं खुद से प्यार करना सीख सकूं। उस रिश्ते से सबसे बड़ी सीख क्या मिली? उस रिश्ते ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। मेरी भी गलतियां रही होंगी और सामने वाले इंसान में कोई बुराई नहीं थी। लेकिन उस अनुभव के बाद मैं अलग इंसान बनी। आज पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि अच्छा हुआ वह दौर मेरी जिंदगी में आया, क्योंकि उससे मैंने खुद को समझना और प्यार करना सीखा। अभी आपके कौन-कौन से प्रोजेक्ट पाइपलाइन में हैं? मिर्जापुर’ फिल्म के अलावा दो और प्रोजेक्ट हैं। एक हॉरर प्रोजेक्ट है, जिसे निखिल आडवाणी की कंपनी ने बनाया है। इसमें परमब्रता चक्रवर्ती,
रुबियो बोले- भारत-ईरान के बीच ट्रेड डील की जानकारी नहीं:अमेरिकी विदेश मंत्री की चेतावनी- ईरान से ट्रेड करने वालों पर लगाएंगे नए प्रतिबंध

पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की मुलाकात के बाद अमेरिका ने भारत-ईरान व्यापार संबंधों को लेकर अपनी स्थिति साफ की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच फिलहाल किसी ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है। हालांकि, उन्होंने साथ ही चेतावनी दी कि अगर कोई देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करता है तो उस देश पर भी अमेरिका प्रतिबंध लगा सकता है। खबर को लगातार अपडेट किया जा रहा है।
रूबियो बोले- भारत-ईरान के बीच ट्रेड डील की जानकारी नहीं:अमेरिकी विदेश मंत्री की चेतावनी- ईरान से ट्रेड करने वाले देशों पर भी प्रतिबंध लगाएंगे

पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की मुलाकात के बाद अमेरिका ने भारत-ईरान व्यापार संबंधों को लेकर अपनी स्थिति साफ की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच फिलहाल किसी ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है। हालांकि, उन्होंने साथ ही चेतावनी दी कि अगर कोई देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करता है तो उस देश पर भी अमेरिका प्रतिबंध लगा सकता है। रुबियो ने एक इंटरव्यू के दौरान ये बात कही। अमेरिका का ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर बैन दरअसल, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 अहम क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। जिनका इस्तेमाल ईरान दूसरे देशों में अपनी आर्थिक गतिविधियों के लिए करता है। इनमें डिजिटल एसेट्स (जैसे क्रिप्टोकरेंसी), टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग सेक्टर शामिल हैं। अमेरिका इन क्षेत्रों के जरिए ईरान की कमाई और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को रोकना चाहता है। यानी अगर कोई देश इन क्षेत्रों में ईरान के साथ ऐसा कारोबार करता है जिससे उसे पैसा या आर्थिक फायदा मिलता है। तो अमेरिका उस देश पर भी प्रतिबंध लगा सकता है या उसे अमेरिकी डॉलर की वित्तीय व्यवस्था से बाहर कर सकता है। SCO में मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात के बाद आया है। दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंध, व्यापार और पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की। मोदी ने कहा था कि भारत ईरान के साथ अपने पुराने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और नए क्षेत्रों को इसमें शामिल करने पर भी जोर दिया गया था। पश्चिम एशिया के तनाव पर बातचीत BRICS और SCO में सहयोग जारी रखेगा भारत मोदी ने कहा था कि भारत BRICS और SCO जैसे मंचों पर ईरान के साथ सहयोग जारी रखेगा। उन्होंने पेजेश्कियन को 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने का न्योता भी दिया।
ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना मजबूत करने के लिए वॉरफाइटर चुना:हंग काओ को दी जिम्मेदारी, पिता के साथ वियतनाम से भागकर अमेरिका आए थे

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने हंग काओ को नेवी सेक्रेटरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘सच्चे वॉरियर’ हैं। वह अमेरिकी नौसेना और मरीन कॉर्प्स को दुनिया की सबसे मजबूत सेना बनाए रखने के लिए सही व्यक्ति हैं। काओ को सैन्य अनुभव वाला अधिकारी माना जाता है। वह 31 साल तक अमेरिकी नौसेना में रहे हैं और इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया जैसे इलाकों में मिशन का हिस्सा रहे हैं। काओ का जन्म 1971 में दक्षिण वियतनाम के साइगॉन में हुआ था। जब वे 4 साल के थे तब दक्षिण वियतनाम में अमेरिका समर्थक सरकार गिर गई थी। उस पर उत्तर वियतनाम की कम्युनिष्ट सरकार ने कब्जा कर लिया था। इसके बाद काओ का परिवार भागकर अमेरिका पहुंचा था। नौसेना से रिटायर होने के बाद राजनीति में उतरे, दो बार हार मिली काओ ने 1989 में अमेरिकी नौसेना में अपना करियर शुरू किया। उनका काम समुद्र के अंदर खतरनाक मिशन करना और बम या दूसरे विस्फोटकों से जुड़े खतरों से निपटना था। उन्होंने इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया में कई सैन्य मिशनों में काम किया। अंडरवॉटर मिशनों की कमान संभाली और स्पेशल ऑपरेशंस से जुड़े काम भी किए। करीब तीन दशक के सैन्य करियर के बाद वह 2021 में कैप्टन के पद से रिटायर हुए। नौसेना से रिटायर होने के बाद काओ ने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 2022 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और 2024 में सीनेट के लिए वर्जीनिया से चुनाव लड़ा। हालांकि, दोनों चुनावों में उन्हें हार मिली। अक्टूबर 2025 में काओ को अमेरिकी नौसेना का अंडरसेक्रेटरी नियुक्त किया गया। यह नौसना में दूसरा सबसे बड़ा पद था। अप्रैल 2026 में ट्रम्प ने तत्कालीन नेवी सेक्रेटरी जॉन फेलन को पद से हटा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक फेलन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बीच नहीं बन रही थी। इसके बाद काओ को कार्यवाहक सेक्रेटरी की जिम्मेदारी दी गई थी। तब से काओ अमेरिकी नौसेना की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब ट्रम्प उन्हें इसी पद पर स्थायी रूप से नियुक्त करना चाहते हैं। हंग काओ स्थायी नेवी सेक्रेटरी कैसे बनेंगे? काओ की नियुक्ति अभी पक्की नहीं हुई है। दरअसल, राष्ट्रपति का काम नेवी सेक्रेटरी के पद के लिए नामित करना है। अंतिम मंजूरी अमेरिकी सीनेट देती है। 1. नामांकन सीनेट के पास जाएगा ट्रम्प का आधिकारिक नामांकन सीनेट को भेजा जाएगा। इसके बाद काओ के रिकॉर्ड और उनकी योग्यता की जांच की जाएगी। 2. सीनेट की सुनवाई होगी काओ को सीनेट की समिति के सामने पेश होना पड़ सकता है। वहां उनसे उनकी सोच, नौसेना की नीतियों, जहाज निर्माण, सैन्य तैयारियों और दूसरे मुद्दों पर सवाल पूछे जा सकते हैं। 3. समिति फैसला करेगी सुनवाई और जांच के बाद समिति उनके नामांकन को आगे बढ़ा सकती है। इसके बाद मामला पूरी सीनेट के सामने जाएगा। 4. वोटिंग होगी सीनेटर काओ के नाम पर वोट करेंगे। सीनेट में 100 सदस्य होते हैं, अगर उन्हें 51 वोट मिले तो उन्हें यह जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। ईरान युद्ध के बीच काओ के लिए नौसेना संभालना आसान नहीं काओ ऐसे समय में नौसेना की स्थायी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं, जब अमेरिकी सेना का ईरान के खिलाफ अभियान चल रहा है। इस दौरान अमेरिकी नौसेना की तैनाती और उस पर काम का दबाव बढ़ा है। अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन नौ महीने से ज्यादा समय तक समुद्र में तैनात रहा। इस दौरान उसका एक बड़ा हिस्सा ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के समर्थन में बीता। इतनी लंबी तैनाती के कारण जहाज पर मौजूद सैनिकों की थकान, मानसिक सेहत और जरूरी सामान की कमी को लेकर सवाल उठे। अमेरिकी सांसदों ने भी पेंटागन से इन हालात पर जवाब मांगा। अगस्त में काओ ने अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि मिशन की जरूरत के कारण जहाज की तैनाती बढ़ाई गई और सैनिकों की सुरक्षा सबसे अहम है। काओ के सामने नौसेना का बेड़ा बढ़ाने, नए युद्धपोत तैयार करने और सैनिकों पर लंबी तैनाती का दबाव कम करने की चुनौती होगी। चीन भी अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना मजबूत करने के लिए वॉरफाइटर चुना:हंग काओ को दी जिम्मेदारी, पिता के साथ वियतनाम से भागकर अमेरिका आए थे

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने हंग काओ को नेवी सेक्रेटरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि वे ‘सच्चे वॉरियर’ हैं। वह अमेरिकी नौसेना और मरीन कॉर्प्स को दुनिया की सबसे मजबूत सेना बनाए रखने के लिए सही व्यक्ति हैं। काओ को सैन्य अनुभव वाला अधिकारी माना जाता है। वह 31 साल तक अमेरिकी नौसेना में रहे हैं और इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया जैसे इलाकों में मिशन का हिस्सा रहे हैं। काओ का जन्म 1971 में दक्षिण वियतनाम के साइगॉन में हुआ था। जब वे 4 साल के थे तब दक्षिण वियतनाम में अमेरिका समर्थक सरकार गिर गई थी। उस पर उत्तर वियतनाम की कम्युनिस्ट सरकार ने कब्जा कर लिया था। इसके बाद काओ का परिवार भागकर अमेरिका पहुंचा था। नौसेना से रिटायर होने के बाद राजनीति में उतरे, दो बार हार मिली काओ ने 1989 में अमेरिकी नौसेना में अपना करियर शुरू किया। उनका काम समुद्र के अंदर खतरनाक मिशन करना और बम या दूसरे विस्फोटकों से जुड़े खतरों से निपटना था। उन्होंने इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया में कई सैन्य मिशनों में काम किया। अंडरवॉटर मिशनों की कमान संभाली और स्पेशल ऑपरेशंस से जुड़े काम भी किए। करीब तीन दशक के सैन्य करियर के बाद वह 2021 में कैप्टन के पद से रिटायर हुए। नौसेना से रिटायर होने के बाद काओ ने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 2022 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और 2024 में सीनेट के लिए वर्जीनिया से चुनाव लड़ा। हालांकि, दोनों चुनावों में उन्हें हार मिली। अक्टूबर 2025 में काओ को अमेरिकी नौसेना का अंडरसेक्रेटरी नियुक्त किया गया। यह नौसना में दूसरा सबसे बड़ा पद था। अप्रैल 2026 में ट्रम्प ने तत्कालीन नेवी सेक्रेटरी जॉन फेलन को पद से हटा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक फेलन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बीच नहीं बन रही थी। इसके बाद काओ को कार्यवाहक सेक्रेटरी की जिम्मेदारी दी गई थी। तब से काओ अमेरिकी नौसेना की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब ट्रम्प उन्हें इसी पद पर स्थायी रूप से नियुक्त करना चाहते हैं। हंग काओ स्थायी नेवी सेक्रेटरी कैसे बनेंगे? काओ की नियुक्ति अभी पक्की नहीं हुई है। दरअसल, राष्ट्रपति का काम नेवी सेक्रेटरी के पद के लिए नामित करना है। अंतिम मंजूरी अमेरिकी सीनेट देती है। 1. नामांकन सीनेट के पास जाएगा ट्रम्प का आधिकारिक नामांकन सीनेट को भेजा जाएगा। इसके बाद काओ के रिकॉर्ड और उनकी योग्यता की जांच की जाएगी। 2. सीनेट की सुनवाई होगी काओ को सीनेट की समिति के सामने पेश होना पड़ सकता है। वहां उनसे उनकी सोच, नौसेना की नीतियों, जहाज निर्माण, सैन्य तैयारियों और दूसरे मुद्दों पर सवाल पूछे जा सकते हैं। 3. समिति फैसला करेगी सुनवाई और जांच के बाद समिति उनके नामांकन को आगे बढ़ा सकती है। इसके बाद मामला पूरी सीनेट के सामने जाएगा। 4. वोटिंग होगी सीनेटर काओ के नाम पर वोट करेंगे। सीनेट में 100 सदस्य होते हैं, अगर उन्हें 51 वोट मिले तो उन्हें यह जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। ईरान युद्ध के बीच काओ के लिए नौसेना संभालना आसान नहीं काओ ऐसे समय में नौसेना की स्थायी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं, जब अमेरिकी सेना का ईरान के खिलाफ अभियान चल रहा है। इस दौरान अमेरिकी नौसेना की तैनाती और उस पर काम का दबाव बढ़ा है। अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन नौ महीने से ज्यादा समय तक समुद्र में तैनात रहा। इस दौरान उसका एक बड़ा हिस्सा ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के समर्थन में बीता। इतनी लंबी तैनाती के कारण जहाज पर मौजूद सैनिकों की थकान, मानसिक सेहत और जरूरी सामान की कमी को लेकर सवाल उठे। अमेरिकी सांसदों ने भी पेंटागन से इन हालात पर जवाब मांगा। अगस्त में काओ ने अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि मिशन की जरूरत के कारण जहाज की तैनाती बढ़ाई गई और सैनिकों की सुरक्षा सबसे अहम है। काओ के सामने नौसेना का बेड़ा बढ़ाने, नए युद्धपोत तैयार करने और सैनिकों पर लंबी तैनाती का दबाव कम करने की चुनौती होगी। चीन भी अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
रिपोर्ट-रूस की मदद से ईरान ने खतरनाक सुपरसोनिक मिसाइल बनाया:3 साल लगे; अमेरिकी जहाजों पर हमले में इस्तेमाल होगा

रूस गुपचुप तरीके से ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने की तकनीक दे रहा था। फाइनेंशियल टाइम्स (FT) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीक्रेट प्रोजेक्ट की शुरुआत 2023 में हुई थी। अमेरिका-इजराइल के ईरान के खिलाफ युद्ध के दौरान भी इस पर काम जारी रहा। इस कार्यक्रम का कोडनेम C430L है। इसमें कुछ रूसी मिसाइल एक्सपर्ट ईरान के साथ काम कर रहे थे। कार्यक्रम का मकसद ईरान को ऐसी मिसाइल तकनीक विकसित करने में मदद करना है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी वॉरशिप के खिलाफ किया जा सकता है। ईरान के पास सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल क्षमता नहीं है सुपरसोनिक का मतलब है ऐसी रफ्तार जो आवाज की गति (मैक 1) से ज्यादा हो। सुपरसोनिक मिसाइल कम से कम करीब 1,200 किमी/घंटा से ज्यादा की रफ्तार से उड़ती है। ईरान के पास तेज रफ्तार बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं। ईरान अपनी फत्तह मिसाइल की रफ्तार करीब मैक 13 से 15 बताता है, यानी लगभग 16,000 से 18,500 किमी/घंटा। ईरान के पास ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जो आवाज की रफ्तार से कई गुना तेज जा सकती हैं। लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल का उड़ने का तरीका अलग होता है। वह ऊपर जाती है और फिर तेज रफ्तार से नीचे अपने टारगेट की तरफ आती है। ऊंचाई पर आने वाली बैलिस्टिक मिसाइल रडार को ज्यादा आसानी से दिखाई दे सकती है। डिफेंस सिस्टम को उसे ट्रैक करने और उस पर हमला करने के लिए ज्यादा समय मिलता है। कम ऊंचाई पर आने वाली क्रूज मिसाइल जमीन या समुद्र की सतह के करीब उड़ती है। धरती की गोलाई और पहाड़ों जैसी चीजों की वजह से रडार उसे तब पकड़ सकता है, जब वह काफी करीब आ चुकी हो। यही वजह है कि ईरान सुपरसोनिक रफ्तार वाली क्रूज मिसाइल बना रहा है। 3 साल तक जारी रहा काम FT के मुताबिक, लीक हुए दस्तावेजों से पता चलता है कि C430L कार्यक्रम को लेकर रूस और ईरान के बीच बातचीत 2026 की गर्मियों तक जारी थी। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इस कार्यक्रम के तहत ईरान ने पूरी तरह तैयार सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित कर ली है या उसे सैन्य इस्तेमाल के लिए कब तक तैनात किया जा सकता है। C430L प्रोग्राम का मकसद- रैमजेट इंजन बनाना FT की जांच के मुताबिक, कार्यक्रम का मुख्य फोकस रैमजेट इंजन पर था। यह ऐसा इंजन है, जो तेज रफ्तार से उड़ रही मिसाइल को आगे बढ़ाने के लिए हवा और ईंधन का इस्तेमाल करता है। मिसाइल जब तेजी से आगे बढ़ती है तो सामने से आने वाली हवा इंजन के अंदर जाती है। वहां इस हवा में ईंधन मिलाकर जलाया जाता है। इससे पैदा होने वाली ताकत मिसाइल को आगे बढ़ाने और उसकी तेज रफ्तार बनाए रखने में मदद करती है। रैमजेट इंजन का तेज रफ्तार वाली मिसाइलों में इस्तेमाल होता है। हालांकि, इसे काम करने के लिए मिसाइल को पहले से पर्याप्त गति चाहिए। इसलिए शुरुआत में मिसाइल को गति देने के लिए अलग इंजन या लॉन्च सिस्टम की जरूरत हो सकती है। ईरान ने रैमजेट इंजन का टेस्ट भी किया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान रैमजेट इंजन विकसित कर चुका है और उसका उड़ान परीक्षण भी कर चुका है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि रूस की मदद से विकसित कोई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ईरानी सेना में तैनात हो चुकी है। पूर्व CIA विश्लेषक जिम लैमसन के मुताबिक, इस तरह की तकनीक ईरान को भविष्य में ऐसा हथियार सिस्टम विकसित करने में मदद कर सकती है, जो अमेरिकी नौसेना के जहाजों के लिए खतरा बने। ड्रोन से मिसाइल तकनीक तक पहुंचा रूस-ईरान का सहयोग ईरान पहले ही रूस को शाहेद ड्रोन दे चुका है। इन ड्रोन का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर हुआ है। ईरान ने रूस में इन ड्रोनों का उत्पादन शुरू करने में भी मदद की थी। वहीं रूस ने भी ईरान को सैन्य उपकरण और हथियार मुहैया कराए हैं। यह पहली बार हो रहा है जब रूस सिर्फ हथियार देने के बजाय ईरान की अपनी मिसाइल बनाने की क्षमता बढ़ाने में मदद कर रहा है। यही वजह है कि C430L प्रोग्राम को रूस और ईरान के सैन्य सहयोग में एक अहम कदम मान जा रहा है। रूस की सरकारी हथियार कंपनी भी शामिल एफटी के मुताबिक, सी430एल कार्यक्रम को रूस की सरकारी हथियार निर्यात कंपनी रोसबोरोनेक्सपोर्ट ने तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट में उसने रूस की मिसाइल कंपनी एनपीओ मशिनोस्त्रोयेनिया के साथ काम किया। अमेरिका ने 2014 में NPO मशिनोस्त्रोयेनिया पर प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह कंपनी जहाज, पनडुब्बी और जमीन से दागी जाने वाली क्रूज मिसाइलों पर काम करती है। यह कंपनी रूस के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े काम में भी शामिल रही है। FT को मिले लीक दस्तावेजों और यात्रा रिकॉर्ड से पता चलता है कि C430L समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले रूस के हथियार निर्यात अधिकारियों और NPO मशिनोस्त्रोयेनिया के कई वरिष्ठ इंजीनियरों ने ईरान के कई दौरे किए थे।
फिल्म ‘हनुमान अंश’ में दिखी जयपुर के चित्रकार की पेंटिंग:की-बोर्ड की कुंजियों से बनाई, तीन महीने में तैयार हुई नीम करोली बाबा की कलाकृति

जयपुर के कंटेम्परेरी कलाकार मुकेश शर्मा इन दिनों अपनी एक अनोखी कलाकृति को लेकर चर्चा में हैं। नीम करोली बाबा पर बनी उनकी यह पेंटिंग फिल्म ‘हनुमान अंश’ में दिखाई गई है। खास बात यह है कि फिल्म में मुकेश शर्मा के काम और इस पेंटिंग के निर्माण की प्रक्रिया को भी जगह दी गई है और फिल्म के अंत में उन्हें विशेष क्रेडिट दिया गया है। खास बात यह है कि इस पेंटिंग का सफर किसी सामान्य फिल्मी असाइनमेंट की तरह शुरू नहीं हुआ, बल्कि तकनीक और आध्यात्मिकता के बीच संबंध तलाशते हुए फिल्म के निर्माताओं की नजर मुकेश शर्मा की कला पर पड़ी। जयपुर के रहने वाले मुकेश शर्मा इन दिनों दिल्ली में रहकर अपनी कला साधना कर रहे हैं। वेनिस में देखे काम से शुरू हुआ फिल्म से जुड़ाव मुकेश शर्मा ने बताया कि फिल्म के निर्माता तकनीक के साथ काम करने वाले ऐसे कलाकारों की तलाश कर रहे थे, जिनकी कला में टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, चेतना और समकालीन जीवन से जुड़े सवाल दिखाई देते हों। इसी शोध के दौरान उनकी नजर मेरे काम पर पड़ी। निर्माताओं ने उनका विशाल स्कल्प्चरल इंस्टॉलेशन ‘नागराज’ वेनिस, इटली में देखा था। यहां देखें पेंटिंग के फोटोज… कुछ समय बाद फिल्म की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने उन से संपर्क किया। प्रोड्यूसर्स ने मुकेश शर्मा को बताया कि वह नीम करोली बाब पर फिल्म बना रहे हैं। और बाबा की आध्यात्मिक विचारधारा और तकनीक के बीच संबंध को भी फिल्म में तलाशना चाहते हैं। नीम करोली बाबा का प्रभाव भारत के साथ-साथ दुनिया भर के कई लोगों पर रहा है। तकनीक और समकालीन संस्कृति से जुड़े चर्चित नामों में स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग का उल्लेख भी अक्सर उनके संदर्भ में किया जाता है। निर्माताओं की दिलचस्पी इसी बिंदु में थी कि आध्यात्मिकता, तकनीक, ऊर्जा और मानवीय चेतना किस तरह एक-दूसरे से जोड़ती है। पोस्टर को अपनी कला भाषा में रीक्रिएट किया फिल्म की निर्माता अनुप्रिया नागर ने मुकेश शर्मा के साथ बातचीत के दौरान फिल्म का आधिकारिक पोस्टर शेयर किया, जिसे डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने तैयार किया था। मुकेश शर्मा ने इसी पोस्टर की छवि को अपनी विशिष्ट कला-भाषा में देखने और रीक्रिएट करने का प्रयास किया। कलाकार ने बताया कि उन्होंने इसके लिए डिस्कार्डेड कंप्यूटर और लैपटॉप की कुंजियों का इस्तेमाल किया। इन कुंजियों को काटा, घिसा और फिर एक-एक टुकड़े को बेहद बारीकी से जोड़ते हुए महाराज जी के चेहरे, कंबल और पूरी आकृति को आकार दिया गया। छोटे-छोटे हिस्सों को इस तरह संयोजित किया गया कि दूर से देखने पर एक संपूर्ण आकृति उभरती है, जबकि करीब से देखने पर उसमें इस्तेमाल की गई हजारों तकनीकी कुंजियां दिखाई देती हैं। यह पेंटिंग लगभग तीन महीने में बनकर तैयार हुई। ई-वेस्ट को दिया आध्यात्मिक अर्थ मुकेश शर्मा के लिए यह पेंटिंग केवल नीम करोली बाबा की तस्वीर नहीं है। यह तकनीक और आध्यात्मिकता के बीच एक समकालीन संवाद है। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर और लैपटॉप की कुंजियां महज ई-कचरा नहीं हैं। वे हमारे समय, हमारी भाषा, हमारी स्मृतियों और तकनीकी जीवन के दस्तावेज भी हैं। जब इन्हीं अलग-अलग हिस्सों को एक साथ जोड़कर एक नई आकृति दी जाती है, तो डिस्कार्डेड तकनीक भी एक नई अर्थपूर्ण और आध्यात्मिक उपस्थिति हासिल कर लेती है। आश्रम की यात्रा ने बदला अनुभव इस कलाकृति के निर्माण के दौरान मुकेश शर्मा ने खुद नीम करोली बाबा के आश्रम की यात्रा भी की। इसी दौरान यह पूरा काम उनके लिए सिर्फ एक पेशेवर कमीशन नहीं रहा। मुकेश शर्मा कहते हैं कि उन्हें महसूस हुआ कि यह सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि किसी तरह का भीतर से आया एक आह्वान था। उन्हें लगा कि शायद यह आध्यात्मिक जुड़ाव सही समय पर उनके सामने आया है और इसी वजह से उन्होंने इस कमीशन को स्वीकार किया।
स्वरा भास्कर बोलीं- रानी पद्मावती को कायर नहीं कहा:पद्मावत के जौहर सीन विवाद पर दी सफाई; सांसद प्रियंका चतुर्वेदी से भी हुई बहस

एक्ट्रेस स्वरा भास्कर 2018 की फिल्म ‘पद्मावत’ के जौहर सीन पर दिए गए बयान के बाद विवादों में आ गई हैं। दिल्ली में एक इवेंट के दौरान उन्होंने संजय लीला भंसाली की फिल्म के जौहर सीन पर सवाल उठाए थे। बयान के बाद सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि स्वरा ने रानी पद्मावती और जौहर करने वाली महिलाओं को कायर कहा है। भारी ट्रोलिंग के बाद मंगलवार को स्वरा ने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर सफाई दी। स्वरा ने कहा कि उन्होंने रानी पद्मावती को कायर नहीं कहा, बल्कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। दिल्ली के इवेंट में दिए बयान पर शुरू हुआ विवाद यह पूरा विवाद 31 अगस्त को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘वुमन, लाइफ, फ्रीडम’ टॉक के दौरान शुरू हुआ था। इवेंट में स्वरा ने फिल्म के क्लाइमेक्स का जिक्र करते हुए कहा था कि एक सीन में गर्भवती महिला का पेट दिखाया गया है जो जौहर करने जा रही है। स्वरा ने कहा था, “यह देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया था और मैंने थियेटर में ही ‘छी’ कह दिया था। 5 दिन विचार करने के बाद मैंने डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को ओपन लेटर लिखा था।” उन्होंने आगे कहा ‘क्या आप हमारे जैसे समाज में यही बताना चाहते हैं, जहां मुझे लगता है कि रेप की महामारी फैली हुई है?’ उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन पर ऐतिहासिक बलिदान का अपमान करने का आरोप लगाया था। इंस्टाग्राम वीडियो शेयर कर दी सफाई मंगलवार को स्वरा भास्कर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर मेरा एक क्लिप वायरल हो रहा है। मुझसे पूछा गया था कि पद्मावत देखने के बाद मैंने ओपन लेटर क्यों लिखा था। मैं साफ करना चाहती हूं कि मैंने रानी पद्मावती या महल की बाकी महिलाओं को कायर नहीं कहा। अगर गाली देनी है तो सही बात पर दीजिए। मैंने कहा था कि अगर मैं रेप पीड़िता होती, तो क्लाइमेक्स देखकर मुझे लगता कि रेप के बाद जिंदा बचकर मैंने कायरता दिखाई है।” ‘क्या महिला की पवित्रता उसकी जान से ज्यादा कीमती है?’ स्वरा ने कहा कि देश में आज भी रेप एक महामारी जैसा बन चुका है। हाल ही में दिल्ली में चलती बस में हुए गैंगरेप का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हमें ऐसी फिल्में बनानी चाहिए जो संदेश दें कि महिला की पवित्रता उसकी जिंदगी से ज्यादा कीमती है? उन्होंने निर्भया केस का उदाहरण देते हुए कहा कि निर्भया ने आखिरी सांस तक अपनी जिंदगी के लिए लड़ाई लड़ी थी। किसी भी महिला की जीने की इच्छा को कम नहीं आंकना चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी से सोशल मीडिया पर हुई बहस स्वरा के बयान पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रियंका ने लिखा कि जब चुनाव मौत और हराम में गुलाम बनने के बीच हो, तो महिलाओं ने मौत को चुना, जो उनका एक फैसला था। इस पर जवाब देते हुए स्वरा ने लिखा, “प्रियंका जी, आप असल बात नहीं समझ रही हैं। बात जौहर करने वाली महिलाओं की पसंद की नहीं, बल्कि इस बात की है कि हम किस चीज को महिमामंडित कर रहे हैं। क्या रेप के बाद किसी सर्वाइवर को जीने का हक नहीं है?” क्या है पद्मावत का जौहर सीन फिल्म में जौहर का सीन क्लाइमैक्स के पास आता है। अलाउद्दीन खिलजी की सेना राजपूतों को हरा देती है और चित्तौड़ के किले में घुस जाती है। दीपिका पादुकोण का किरदार ‘रानी पद्मावती’ किले की महिलाओं के साथ जौहर करती हैं। फिल्म में इसे पकड़े जाने से बचने के लिए खुद को आग के हवाले करने की घटना के तौर पर दिखाया गया है।
नेपाल बाढ़ में अबतक 1068 लोगों की मौत:4600 से ज्यादा की तलाश जारी; एक लड़की ने 17 रिश्तेदारों को खोया; चीन के 100 नागरिक लापता

नेपाल में बाढ़ के एक हफ्ते बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। आपदा में लापता लोगों की तलाश के बावजूद कई परिवारों को अपने परिजनों की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। कई इलाकों में कीचड़ और मलबा जमा होने से राहत कार्य मुश्किल बना हुआ है। 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद अब तक 1,068 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें 400 के केवल आंशिक अवशेष मिले हैं। करीब 4,606 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 500 विदेशी नागरिक हैं। नेपाल में सड़क और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे कई चीनी नागरिक लापता हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में करीब 100 चीनी नागरिकों का अब तक पता नहीं चला है। नेपाल और चीन के प्रभावित परिवारों की मांग है कि उनके परिजनों की सही और स्पष्ट जानकारी दी जाए। एक नेपाली लड़की ने बताया कि इस आपदा में उसने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। बाढ़ प्रभावित बिदुर में विस्थापित परिवार अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें अब भी दोबारा बाढ़ आने का डर सता रहा है। नेपाल के 5 लोगों के शव यूपी में मिले उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से मिले नेपाल के पांच नागरिकों के शव मंगलवार को सोनौली सीमा पर सौंपे गए। ये लोग नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बह गए थे। शव नेपाल पुलिस को सौंपे गए। इनमें दो महिलाएं और तीन पुरुष हैं। नेपाल में शव जलाने की बजाय दफनाए जा रहे नेपाल में बाढ़ के बाद सैकड़ों अज्ञात शवों को जलाने के बजाय दफनाया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि शवों के अवशेष सुरक्षित रहें और DNA जांच से पहचान कर परिजनों को सौंपे जा सकें। दरअसल, पानी और कीचड़ में लंबे समय तक दबे रहने से शवों की हालत बहुत खराब हो चुकी है। कई शव पानी में फूल गए हैं और तेजी से सड़ रहे हैं। इससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। दूसरी तरफ शवगृह और अस्थायी केंद्र भी शवों से भर चुके हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव नहीं है। यही वजह है कि अज्ञात शवों को सामूहिक कब्रों में दफनाया जा रहा है।





