Tuesday, 22 Sep 2026 | 11:25 AM

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वर्ल्ड ह्यूमनायड रोबोट गेम्स शुरू:उसैन बोल्ट से भी तेज निकला रोबोट, 9.39 सेकेंड में 100 मीटर दौड़ा

वर्ल्ड ह्यूमनायड रोबोट गेम्स शुरू:उसैन बोल्ट से भी तेज निकला रोबोट, 9.39 सेकेंड में 100 मीटर दौड़ा

चीन की राजधानी बीजिंग में शनिवार से शुरू हुए 5 दिवसीय ‘दूसरे वर्ल्ड ह्यूमनायड रोबोट गेम्स’ के दौरान टेक्नोलॉजी की दुनिया में नया इतिहास रचा गया। चीन की सिंहुआ यूनिवर्सिटी की ‘तियानझुओ’ टीम द्वारा विकसित ह्यूमनाइड रोबोट ने 100 मीटर की रेस महज 9.39 सेकेंड में पूरी कर ली। इसके साथ ही ‘लाइटनिंग’ नाम के इस रोबोट ने उसैन बोल्ट द्वारा 2009 में स्थापित 100 मीटर दौड़ के 9.58 सेकेंड के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। पिछले साल इसी प्रतियोगिता में रोबोट का बेस्ट टाइम 21.50 सेकेंड था, जो अब घटकर आधे से भी कम रह गया है। इसके अलावा तिएनकुंग रोबोट ने हाई जंप में 2.88 मी. पार कर रिकॉर्ड बनाया। इंसानों का सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड 2.45 मी. है। दूसरे वर्ल्ड ह्यूमनायड रोबोट गेम्स टूर्नामेंट में 16 देशों की 666 टीमों और 2,056 रोबोट्स हिस्सा ले रहे हैं। इनके बीच 51 अलग-अलग इवेंट्स के तहत 1,301 मुकाबले खेले जाएंगे। इनमें फुटबॉल, बास्केटबॉल, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो और जूडो शामिल हैं।

बांग्लादेश बोला- हमारे PM को भारत दौरे की जल्दबाजी नहीं:मंत्री ने कहा- भारत से अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित से समझौता नहीं करेंगे

बांग्लादेश बोला- हमारे PM को भारत दौरे की जल्दबाजी नहीं:मंत्री ने कहा- भारत से अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित से समझौता नहीं करेंगे

बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहता है, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। हुमायूं कबीर ने कहा कि प्रधानमंत्री के भारत दौरे का फैसला दोनों देशों के बीच बातचीत और जरूरी तैयारियों के बाद होगा। द्विपक्षीय दौरे के लिए भारत ने किया आमंत्रित भारत ने तारिक रहमान को द्विपक्षीय दौरे के लिए आमंत्रित किया है। उन्हें 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने का न्योता भी मिला है। यह दौरा भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते सुधारने के लिए अहम माना जा रहा है। 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा हुआ है। शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा बांग्लादेश शेख हसीना सत्ता से हटने के बाद भारत आ गई थीं। बांग्लादेश लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। कबीर ने कहा कि हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच जारी बातचीत का हिस्सा है। हाल ही में हसीना के भारत से दिए गए बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा दिया। खबर अपडेट की जा रही है…

संडे प्रोफाइल : रोरी कैनेडी:कैनेडी परिवार की रोरी डॉक्यूमेंट्री फिल्मों से बना रही हैं खास पहचान

संडे प्रोफाइल : रोरी कैनेडी:कैनेडी परिवार की रोरी डॉक्यूमेंट्री फिल्मों से बना रही हैं खास पहचान

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी की भतीजी रोरी कैनेडी ने पेचीदा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर कई चर्चित डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाई हैं। इन दिनों विमानन कंपनी बोइंग पर बनाई नई डॉक्यूमेंट्री को लेकर रोरी चर्चा में हैं। अमेरिका के मशहूर कैनेडी परिवार की विरासत से जुड़ी रोरी कैनेडी ने अपनी पहचान राजनीति में नहीं बल्कि डॉक्यूमेंट्री फिल्मों की दुनिया में बनाई है। उनके पिता सीनेटर रॉबर्ट कैनेडी पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी के छोटे भाई थे। कैनेडी परिवार का इतिहास कई त्रासद घटनाओं से भरा रहा है। 1968 में रोरी के जन्म से पहले ही उनके अंकल जॉन एफ. कैनेडी और पिता रॉबर्ट कैनेडी की हत्या हो चुकी थी। ब्राउन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने वाली रोरी बताती हैं कि कॉलेज के दिनों में अमेरिका में केबल टीवी तेजी से लोकप्रिय हो रहा था। इससे फिल्मों के प्रति उनका रुझान बढ़ा। वह एक आयरिश परिवार में पली-बढ़ीं, जहां कहानी सुनाने की पुरानी परंपरा थी, जो उनके रचनात्मक सफर का आधार बनी। रोरी ने अपनी फिल्मों में राजनीति और सरकार के फैसलों से पैदा होने वाले मानवीय संकटों को प्रमुखता से उठाया। इराक की कुख्यात अबू गरेब जेल की परिस्थितियों पर बनी उनकी फिल्म को एमी अवॉर्ड मिला। वियतनाम युद्ध के अंतिम दिनों पर बनी उनकी फिल्म ऑस्कर के लिए नामजद हुई। एक अन्य फिल्म में उन्होंने पिता रॉबर्ट कैनेडी की हत्या के बाद अपनी मां की जिंदगी पर पड़े असर को दिखाया। अलग तरह की कहानियां सामने लाने के इरादे से शुरू हुआ उनका सफर अब तक 35 से अधिक डॉक्यूमेंट्री फिल्मों तक पहुंच चुका है। अब उनकी नई फिल्म ‘फ्री फॉल : अ रेकनिंग फॉर बोइंग’ विमानन कंपनी बोइंग की अंदरूनी कहानी सामने लाती है। फिल्म में कंपनी के व्हिसल ब्लोअर्स के अनुभवों के जरिए यह बताया गया है कि सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़े सवालों पर कंपनी के भीतर क्या हुआ। यह उनकी 2022 में आई फिल्म ‘डाउनफॉल : द केस अगेंस्ट बोइंग’ की अगली कड़ी है। पहली फिल्म में रोरी ने बताया था कि प्रतिस्पर्धा और मुनाफे की होड़ ने किस तरह कंपनी के फैसलों को प्रभावित किया और दुर्घटनाओं की जवाबदेही पर सवाल खड़े हुए। रोरी के मुताबिक पहली फिल्म के बाद बोइंग ने सार्वजनिक रूप से भरोसा दिलाया था कि उसने गलतियों से सबक लिया है, लेकिन उड़ानों में दोबारा खराबी की नई खबरें सामने आने लगीं। इसी दौरान कंपनी के कई व्हिसल ब्लोअर्स ने रोरी से संपर्क किया और दावा किया कि हालात सुधरने के बजाय और खराब हो रहे हैं। इनमें बोइंग के पूर्व कर्मचारी जॉन बार्नेट भी थे, जिन्होंने पहली फिल्म के लिए महत्वपूर्ण जानकारी दी थी। मार्च 2024 में बोइंग के खिलाफ गवाही के दौरान बार्नेट मृत पाए गए थे। रोरी का मानना है कि कंपनियों और सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके फैसलों का केंद्र सार्वजनिक हित हो, न कि निजी।

रक्षा-समझौते की आड़ में हथियारों का जखीरा भर रहा पाकिस्तान:तुर्किये से ड्रोन की सप्लाई, 60 घंटे में दर्जनों सैन्य विमान पहुंचे

रक्षा-समझौते की आड़ में हथियारों का जखीरा भर रहा पाकिस्तान:तुर्किये से ड्रोन की सप्लाई, 60 घंटे में दर्जनों सैन्य विमान पहुंचे

सऊदी और तुर्किये से हुए रक्षा समझौते की आड़ में पाकिस्तान हथियारों का जखीरा बढ़ाता जा रहा है। 19 से 21 अगस्त के बीच करीब 60 घंटे में तुर्किये के दर्जनों सैन्य विमानों ने पाकिस्तान के अलग-अलग एयरबेस पर लैंडिंग और टेकऑफ की। इनमें सी-130 सैन्य परिवहन विमान और ए400एम जंबो मिलिट्री विमान शामिल थे। रावलपिंडी के नूरखान और कराची के मसरूर एयरबेस पर तुर्किये के सी-130 सैन्य विमानों की लगातार आवाजाही रही। वहीं, तुर्किये का ए400एम विमान भी मुरीद एयरबेस पर पहुंचा। इसकी पहचान कॉल-साइन टीयूएएफ 526 से हुई। इन विमानों से तुर्किये ने पाकिस्तान को ड्रोन की बड़ी खेप पहुंचाई। ड्रोन की सप्लाई रात के अंधेरे में की गई, ताकि सैटेलाइट ट्रैकिंग से गतिविधियों को छिपाया जा सके। तुर्किये से पहुंची ड्रोन की खेप को बहावलपुर और रावलपिंडी की मिलिट्री स्टोरेज फैसिलिटीज में रखा गया है। पाकिस्तान को AI-गाइडेड केमांके क्रूज मिसाइल भी मिली ड्रोन के साथ पाकिस्तान को तुर्किये से एयर-डिफेंस सिस्टम और आधुनिक हथियार भी मिले हैं। इनमें एचक्यू सीरीज या इसी तरह का एयर-डिफेंस/सैम सिस्टम शामिल है। बायरक्तार TB2 ड्रोन: दुनिया के सबसे चर्चित आर्म्ड ड्रोन में शामिल है। रूस इसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ कर रहा है। अकिंसी ड्रोन: भारी पेलोड ले जाने वाला हाई-एंड कॉम्बैट ड्रोन। यह करीब 250 किमी तक की दूरी पर एक्सप्लोसिव पेलोड ले जा सकता है। केमांके क्रूज मिसाइल: AI-गाइडेड मिसाइल है, जो खुद टारगेट खोजने की क्षमता रखती है। इसकी रेंज 200+ किमी बताई गई है और इसे ड्रोन से भी लॉन्च किया जा सकता है। F-16 अपग्रेड किट: पाकिस्तान के पुराने F-16 लड़ाकू विमानों के बेड़े के लिए तुर्किये से इंटीग्रेशन किट भी मिली है। मुनीर ने एर्दोगान को ड्रोन देने के लिए राजी किया मक्का में हुए रक्षा समझौते के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगान से ड्रोन देने को कहा था। मुनीर ने बताया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को काफी नुकसान हुआ था। चीन से पाकिस्तान को जे-सीरीज के लड़ाकू विमान पर्याप्त संख्या में मिल चुके थे, लेकिन इस दौरान उसके ड्रोन का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया था। बलूचिस्तान में बड़े ऑपरेशन की तैयारी में मुनीर बलूचिस्तान में विद्रोहियों से घिरे मुनीर अब बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी में हैं। इसके लिए सेना की टुकड़ियां रवाना की जा रही हैं। यह कार्रवाई अगले 48 घंटे में शुरू हो सकती है। जुलाई में ‘ऑपरेशन शाबान’ शुरू करने के बाद भी बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की पकड़ कमजोर हुई है। सेना की 25 से ज्यादा चेकपोस्ट खाली हो चुकी हैं और कई जगहों पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों का कब्जा है। ईरान सीमा से लगे बलूचिस्तान के इलाकों में भी पाकिस्तानी सेना को लगातार चुनौती मिल रही है। रावलपिंडी GHQ में 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात बलूच विद्रोहियों के हमले की आशंका के चलते रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान आर्मी के हेडक्वार्टर में 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं। शहबाज सरकार ने शनिवार को रावलपिंडी के GHQ को अगले 6 महीने के लिए संवेदनशील जोन घोषित किया है।

रक्षा-समझौते की आड़ में हथियारों का जखीरा भर रहा पाकिस्तान:तुर्किये से ड्रोन की सप्लाई, 60 घंटे में दर्जनों सैन्य विमान पहुंचे

रक्षा-समझौते की आड़ में हथियारों का जखीरा भर रहा पाकिस्तान:तुर्किये से ड्रोन की सप्लाई, 60 घंटे में दर्जनों सैन्य विमान पहुंचे

सऊदी और तुर्किये से हुए रक्षा समझौते की आड़ में पाकिस्तान हथियारों का जखीरा बढ़ाता जा रहा है। 19 से 21 अगस्त के बीच करीब 60 घंटे में तुर्किये के दर्जनों सैन्य विमानों ने पाकिस्तान के अलग-अलग एयरबेस पर लैंडिंग और टेकऑफ की। इनमें सी-130 सैन्य परिवहन विमान और ए400एम जंबो मिलिट्री विमान शामिल थे। रावलपिंडी के नूरखान और कराची के मसरूर एयरबेस पर तुर्किये के सी-130 सैन्य विमानों की लगातार आवाजाही रही। वहीं, तुर्किये का ए400एम विमान भी मुरीद एयरबेस पर पहुंचा। इसकी पहचान कॉल-साइन टीयूएएफ 526 से हुई। इन विमानों से तुर्किये ने पाकिस्तान को ड्रोन की बड़ी खेप पहुंचाई। ड्रोन की सप्लाई रात के अंधेरे में की गई, ताकि सैटेलाइट ट्रैकिंग से गतिविधियों को छिपाया जा सके। तुर्किये से पहुंची ड्रोन की खेप को बहावलपुर और रावलपिंडी की मिलिट्री स्टोरेज फैसिलिटीज में रखा गया है। पाकिस्तान को AI-गाइडेड केमांके क्रूज मिसाइल भी मिली ड्रोन के साथ पाकिस्तान को तुर्किये से एयर-डिफेंस सिस्टम और आधुनिक हथियार भी मिले हैं। इनमें एचक्यू सीरीज या इसी तरह का एयर-डिफेंस/सैम सिस्टम शामिल है। बायरक्तार TB2 ड्रोन: दुनिया के सबसे चर्चित आर्म्ड ड्रोन में शामिल है। रूस इसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ कर रहा है। अकिंसी ड्रोन: भारी पेलोड ले जाने वाला हाई-एंड कॉम्बैट ड्रोन। यह करीब 250 किमी तक की दूरी पर एक्सप्लोसिव पेलोड ले जा सकता है। केमांके क्रूज मिसाइल: AI-गाइडेड मिसाइल है, जो खुद टारगेट खोजने की क्षमता रखती है। इसकी रेंज 200+ किमी बताई गई है और इसे ड्रोन से भी लॉन्च किया जा सकता है। F-16 अपग्रेड किट: पाकिस्तान के पुराने F-16 लड़ाकू विमानों के बेड़े के लिए तुर्किये से इंटीग्रेशन किट भी मिली है। मुनीर ने एर्दोगान को ड्रोन देने के लिए राजी किया मक्का में हुए रक्षा समझौते के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगान से ड्रोन देने को कहा था। मुनीर ने बताया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को काफी नुकसान हुआ था। चीन से पाकिस्तान को जे-सीरीज के लड़ाकू विमान पर्याप्त संख्या में मिल चुके थे, लेकिन इस दौरान उसके ड्रोन का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया था। बलूचिस्तान में बड़े ऑपरेशन की तैयारी में मुनीर बलूचिस्तान में विद्रोहियों से घिरे मुनीर अब बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी में हैं। इसके लिए सेना की टुकड़ियां रवाना की जा रही हैं। यह कार्रवाई अगले 48 घंटे में शुरू हो सकती है। जुलाई में ‘ऑपरेशन शाबान’ शुरू करने के बाद भी बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की पकड़ कमजोर हुई है। सेना की 25 से ज्यादा चेकपोस्ट खाली हो चुकी हैं और कई जगहों पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों का कब्जा है। ईरान सीमा से लगे बलूचिस्तान के इलाकों में भी पाकिस्तानी सेना को लगातार चुनौती मिल रही है। रावलपिंडी GHQ में 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात बलूच विद्रोहियों के हमले की आशंका के चलते रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान आर्मी के हेडक्वार्टर में 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं। शहबाज सरकार ने शनिवार को रावलपिंडी के GHQ को अगले 6 महीने के लिए संवेदनशील जोन घोषित किया है। ———————- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान ने पत्रकार को आतंकी लिस्ट में डाला:PoK प्रदर्शन कवर करने वाले दानिश इरशाद पर बिना मुकदमे कार्रवाई, बैंक अकाउंट सीज-यात्रा पर रोक पाकिस्तान ने PoK में हो रहे प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार और रिसर्चर दानिश इरशाद का नाम आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची यानी फोर्थ शेड्यूल में डाल दिया है। खास बात यह है कि सरकार ने उनके खिलाफ न तो किसी आतंकी गतिविधि का आरोप बताया है और न ही किसी अदालत का फैसला सामने आया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

सायरा बानो@82, दिलीप कुमार से शादी की भविष्यवाणी हुई सच:मेहमानों ने शादी से चुराए कांटे-छुरी, खाना कम पड़ा; शाहरुख को बेटा माना; जानिए किस्से

सायरा बानो@82, दिलीप कुमार से शादी की भविष्यवाणी हुई सच:मेहमानों ने शादी से चुराए कांटे-छुरी, खाना कम पड़ा; शाहरुख को बेटा माना; जानिए किस्से

साल 1955 तमिलनाडु के कोयंबटूर में फिल्म ‘आजाद’ की शूटिंग चल रही थी। इसी दौरान फिल्म प्रोड्यूसर एस.एस. वासन ने दिलीप कुमार की मुलाकात एक मशहूर ज्योतिषी से कराई। ज्योतिषी ने दिलीप कुमार का चेहरा देखा, हाथ की रेखाएं पढ़ीं और फिर उनकी कुंडली बनाई। इसके बाद उन्होंने ऐसी भविष्यवाणी की, जिसे सुनकर खुद दिलीप कुमार भी हैरान रह गए। ज्योतिषी ने कहा कि दिलीप कुमार की शादी 40 साल की उम्र के बाद होगी। उनकी दुल्हन उनसे करीब आधी उम्र की होगी। इतना ही नहीं, वह भी फिल्मों से जुड़ी होगी। भविष्यवाणी यहीं खत्म नहीं हुई। ज्योतिषी ने यह भी कहा कि उस महिला को एक गंभीर बीमारी भी होगी। यह सुनकर दिलीप कुमार ने कहा था, “मैं तो कभी फिल्म वाली लड़की से शादी ही नहीं करूंगा।” उस वक्त दिलीप कुमार ने इस भविष्यवाणी को गंभीरता से नहीं लिया था, लेकिन करीब 11 साल बाद ज्योतिषी की कही लगभग हर बात सच हो गई। 1966 में 44 साल के दिलीप कुमार ने 22 साल की एक्ट्रेस सायरा बानो से निकाह किया। आज सायरा बानो के 82वें जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी और दिलीप कुमार के साथ उनकी प्रेम कहानी के कुछ अनसुने किस्से। दिलीप कुमार के चलते उर्दू सीखनी शुरू की सायरा बानो का जन्म 1944 में मशहूर अदाकारा नसीम बानो और प्रोड्यूसर मियां एहसान-उल-हक के घर हुआ था। दिलचस्प बात ये है कि जिस साल सायरा दुनिया में आईं, उसी साल दिलीप कुमार की पहली फिल्म ज्वार भाटा (1944) रिलीज हुई थी। सायरा करीब 6 साल की थीं, जब उनको पढ़ाई के लिए यूनाइटेड किंगडम भेज दिया गया। लंदन के मशहूर एलीट स्कूल क्वीन्स हाउस में उनकी पढ़ाई हुई। छुट्टियां होतीं, तो सायरा हिंदुस्तान आती थीं। ऐसी ही एक छुट्टी में 12 साल की सायरा अपनी मां के साथ घर पर फिल्म आन देख रही थीं। फिल्म महबूब खान ने बनाई थी और हीरो थे दिलीप कुमार। दिलीप साहब की अदाकारी ने सायरा के दिल पर ऐसा असर किया कि फिल्म खत्म होते ही उन्होंने मां के सामने अपनी ख्वाहिश जाहिर कर दी। सायरा ने साफ कह दिया- अगर शादी करेंगी, तो सिर्फ दिलीप कुमार से। लंदन में पढ़ाई के दौरान भी सायरा बानो के दिल में एक ही ख्वाब था- एक दिन वह मिसेज दिलीप कुमार बनेंगी। सायरा ने दैनिक भास्कर को दिए एक पुराने इंटरव्यू में यह बात बताई थी। सायरा की मां नसीम बानो उनसे कहती थीं कि अगर उन्हें दिलीप कुमार की पत्नी बनना है, तो पहले उनकी पसंद-नापसंद और शौक को समझना होगा। बस फिर क्या था, सायरा ने भी दिलीप साहब की पसंद की चीजें सीखना शुरू कर दिया। जब उन्हें मालूम हुआ कि दिलीप कुमार को उर्दू और शायरी बेहद पसंद है, तो सायरा ने बाकायदा मौलवी साहब से उर्दू पढ़ना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, दिलीप साहब को सितार पसंद था, तो सायरा ने सितार सीखने की कोशिश भी की। काम करने को लेकर दिलीप कुमार ने सफेद बाल दिखा दिए सायरा की मां नसीम एक एक्ट्रेस थीं, इसलिए दिलीप कुमार की नसीम बानो से मुलाकात होती रहती थी। वो सायरा के बारे में भी जानते थे। जब सायरा ने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने का फैसला किया और निर्माता एस. मुखर्जी ने यह बात दिलीप कुमार से कही तो उन्होंने कहा था कि सायरा को फिल्मों में करियर बनाने से रोका जाना चाहिए। 1960 के दशक की शुरुआत में फिल्म ‘दिल दिया दर्द लिया’ की कास्टिंग शुरू होने वाली थी। इसी दौरान निर्माता एस. मुखर्जी ने दिलीप कुमार से कहा था, “यूसुफ, यह लड़की आपके साथ काम करने के लिए पागल है।” जिस पर दिलीप कुमार ने अपने सफेद-काले बालों में हाथ फेरकर सायरा से कहा था, “क्या तुमने मेरे ये सफेद बाल देखे हैं? मैं तुमसे बहुत ज्यादा उम्र का हूं और मैं सुअर की तरह खाता हूं!” शम्मी कपूर की डांट सुनकर सायरा रोने लगी थीं सायरा बानो की पहली फिल्म 1961 में रिलीज हुई ‘जंगली’ थी। हालांकि फिल्मों में कदम रखने का फैसला उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था। परिवार, खासकर उनकी मां नसीम बानो, इसके खिलाफ थीं, लेकिन सायरा ने अपने इस ख्वाब को छोड़ना मंजूर नहीं किया। उन्होंने स्कूल की छुट्टियों के दौरान ‘जंगली’ की शूटिंग शुरू की। कुछ महीने शूटिंग करने के बाद वह वापस लंदन चली गईं और अपनी पढ़ाई पूरी करने लगीं। लेकिन फिल्म की शूटिंग से लेकर रिलीज तक, कुछ ऐसे वाकये हुए, जिन्होंने सायरा को रुला दिया। दरअसल, सायरा बानो ने फिल्म ‘जंगली’ साइन तो कर ली थी, लेकिन उन्हें एक्टिंग का कोई तजुर्बा नहीं था। शूटिंग के पहले दिन वह कश्मीर के शालीमार बाग पहुंचीं। वहां हजारों लोग शूटिंग देखने के लिए जमा थे। सायरा वैसे भी काफी शर्मीली थीं। उन्हें ‘कश्मीर की कली’ गाने की एक लाइन पर घूमकर लिप-सिंक करना था, लेकिन वह बार-बार गलती कर रही थीं। लिप-सिंक पर ध्यान देतीं, तो गलत दिशा में घूम जातीं। घूमने पर ध्यान देतीं, तो गाने की लाइन छूट जाती। कई रीटेक के बाद शम्मी कपूर ने उन्हें डांटते हुए कहा कि अगर काम करना है, तो ठीक से करो। यह सुनकर सायरा बहुत शर्मिंदा हुईं और रोने लगीं। उनकी बहन ने भी कहा कि अभी वक्त है, चाहो तो एक्टिंग छोड़कर वापस चल सकते हैं, लेकिन सायरा ने हार नहीं मानी। उन्होंने दोबारा वही सीन किया और इस बार बिल्कुल सही कर दिया। लेकिन रिलीज से पहले एक और वाकये ने सायरा को परेशान कर दिया। एक दिन वह अपनी मां के साथ मुंबई की एक दुकान पर गई थीं। वहां एक सेल्समैन दिलीप कुमार का बड़ा फैन था। उसने सायरा की मां से पूछा कि बेटी की फिल्म कब आ रही है? मां ने बताया कि अगले महीने। यह सुनते ही सेल्समैन बोला कि अगले महीने दिलीप कुमार की ‘गंगा जमुना’ भी रिलीज हो रही है। दोनों फिल्में साथ आईं, तो सायरा की फिल्म कौन देखेगा? यह सुनकर सायरा घबरा गईं और वहीं रोने लगीं। उन्हें लगा कि उनकी फिल्म फ्लॉप हो जाएगी। लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा। ‘जंगली’ और ‘गंगा जमुना’ एक हफ्ते के अंतर से रिलीज हुईं और दोनों फिल्मों ने शानदार कामयाबी हासिल की। पार्टी में पहली बार दिलीप कुमार

सायरा बानो@82, दिलीप कुमार से शादी की भविष्यवाणी हुई सच:मेहमानों ने शादी से चुराए कांटे-छुरी, खाना कम पड़ा; शाहरुख को बेटा माना; जानिए किस्से

सायरा बानो@82, दिलीप कुमार से शादी की भविष्यवाणी हुई सच:मेहमानों ने शादी से चुराए कांटे-छुरी, खाना कम पड़ा; शाहरुख को बेटा माना; जानिए किस्से

साल 1955 तमिलनाडु के कोयंबटूर में फिल्म ‘आजाद’ की शूटिंग चल रही थी। इसी दौरान फिल्म प्रोड्यूसर एस.एस. वासन ने दिलीप कुमार की मुलाकात एक मशहूर ज्योतिषी से कराई। ज्योतिषी ने दिलीप कुमार का चेहरा देखा, हाथ की रेखाएं पढ़ीं और फिर उनकी कुंडली बनाई। इसके बाद उन्होंने ऐसी भविष्यवाणी की, जिसे सुनकर खुद दिलीप कुमार भी हैरान रह गए। ज्योतिषी ने कहा कि दिलीप कुमार की शादी 40 साल की उम्र के बाद होगी। उनकी दुल्हन उनसे करीब आधी उम्र की होगी। इतना ही नहीं, वह भी फिल्मों से जुड़ी होगी। भविष्यवाणी यहीं खत्म नहीं हुई। ज्योतिषी ने यह भी कहा कि उस महिला को एक गंभीर बीमारी भी होगी। यह सुनकर दिलीप कुमार ने कहा था, “मैं तो कभी फिल्म वाली लड़की से शादी ही नहीं करूंगा।” उस वक्त दिलीप कुमार ने इस भविष्यवाणी को गंभीरता से नहीं लिया था, लेकिन करीब 11 साल बाद ज्योतिषी की कही लगभग हर बात सच हो गई। 1966 में 44 साल के दिलीप कुमार ने 22 साल की एक्ट्रेस सायरा बानो से निकाह किया। आज सायरा बानो के 82वें जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी और दिलीप कुमार के साथ उनकी प्रेम कहानी के कुछ अनसुने किस्से। दिलीप कुमार के चलते उर्दू सीखनी शुरू की सायरा बानो का जन्म 1944 में मशहूर अदाकारा नसीम बानो और प्रोड्यूसर मियां एहसान-उल-हक के घर हुआ था। दिलचस्प बात ये है कि जिस साल सायरा दुनिया में आईं, उसी साल दिलीप कुमार की पहली फिल्म ज्वार भाटा (1944) रिलीज हुई थी। सायरा करीब 6 साल की थीं, जब उनको पढ़ाई के लिए यूनाइटेड किंगडम भेज दिया गया। लंदन के मशहूर एलीट स्कूल क्वीन्स हाउस में उनकी पढ़ाई हुई। छुट्टियां होतीं, तो सायरा हिंदुस्तान आती थीं। ऐसी ही एक छुट्टी में 12 साल की सायरा अपनी मां के साथ घर पर फिल्म आन देख रही थीं। फिल्म महबूब खान ने बनाई थी और हीरो थे दिलीप कुमार। दिलीप साहब की अदाकारी ने सायरा के दिल पर ऐसा असर किया कि फिल्म खत्म होते ही उन्होंने मां के सामने अपनी ख्वाहिश जाहिर कर दी। सायरा ने साफ कह दिया- अगर शादी करेंगी, तो सिर्फ दिलीप कुमार से। लंदन में पढ़ाई के दौरान भी सायरा बानो के दिल में एक ही ख्वाब था- एक दिन वह मिसेज दिलीप कुमार बनेंगी। सायरा ने दैनिक भास्कर को दिए एक पुराने इंटरव्यू में यह बात बताई थी। सायरा की मां नसीम बानो उनसे कहती थीं कि अगर उन्हें दिलीप कुमार की पत्नी बनना है, तो पहले उनकी पसंद-नापसंद और शौक को समझना होगा। बस फिर क्या था, सायरा ने भी दिलीप साहब की पसंद की चीजें सीखना शुरू कर दिया। जब उन्हें मालूम हुआ कि दिलीप कुमार को उर्दू और शायरी बेहद पसंद है, तो सायरा ने बाकायदा मौलवी साहब से उर्दू पढ़ना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, दिलीप साहब को सितार पसंद था, तो सायरा ने सितार सीखने की कोशिश भी की। काम करने को लेकर दिलीप कुमार ने सफेद बाल दिखा दिए सायरा की मां नसीम एक एक्ट्रेस थीं, इसलिए दिलीप कुमार की नसीम बानो से मुलाकात होती रहती थी। वो सायरा के बारे में भी जानते थे। जब सायरा ने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने का फैसला किया और निर्माता एस. मुखर्जी ने यह बात दिलीप कुमार से कही तो उन्होंने कहा था कि सायरा को फिल्मों में करियर बनाने से रोका जाना चाहिए। 1960 के दशक की शुरुआत में फिल्म ‘दिल दिया दर्द लिया’ की कास्टिंग शुरू होने वाली थी। इसी दौरान निर्माता एस. मुखर्जी ने दिलीप कुमार से कहा था, “यूसुफ, यह लड़की आपके साथ काम करने के लिए पागल है।” जिस पर दिलीप कुमार ने अपने सफेद-काले बालों में हाथ फेरकर सायरा से कहा था, “क्या तुमने मेरे ये सफेद बाल देखे हैं? मैं तुमसे बहुत ज्यादा उम्र का हूं और मैं सुअर की तरह खाता हूं!” शम्मी कपूर की डांट सुनकर सायरा रोने लगी थीं सायरा बानो की पहली फिल्म 1961 में रिलीज हुई ‘जंगली’ थी। हालांकि फिल्मों में कदम रखने का फैसला उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था। परिवार, खासकर उनकी मां नसीम बानो, इसके खिलाफ थीं, लेकिन सायरा ने अपने इस ख्वाब को छोड़ना मंजूर नहीं किया। उन्होंने स्कूल की छुट्टियों के दौरान ‘जंगली’ की शूटिंग शुरू की। कुछ महीने शूटिंग करने के बाद वह वापस लंदन चली गईं और अपनी पढ़ाई पूरी करने लगीं। लेकिन फिल्म की शूटिंग से लेकर रिलीज तक, कुछ ऐसे वाकये हुए, जिन्होंने सायरा को रुला दिया। दरअसल, सायरा बानो ने फिल्म ‘जंगली’ साइन तो कर ली थी, लेकिन उन्हें एक्टिंग का कोई तजुर्बा नहीं था। शूटिंग के पहले दिन वह कश्मीर के शालीमार बाग पहुंचीं। वहां हजारों लोग शूटिंग देखने के लिए जमा थे। सायरा वैसे भी काफी शर्मीली थीं। उन्हें ‘कश्मीर की कली’ गाने की एक लाइन पर घूमकर लिप-सिंक करना था, लेकिन वह बार-बार गलती कर रही थीं। लिप-सिंक पर ध्यान देतीं, तो गलत दिशा में घूम जातीं। घूमने पर ध्यान देतीं, तो गाने की लाइन छूट जाती। कई रीटेक के बाद शम्मी कपूर ने उन्हें डांटते हुए कहा कि अगर काम करना है, तो ठीक से करो। यह सुनकर सायरा बहुत शर्मिंदा हुईं और रोने लगीं। उनकी बहन ने भी कहा कि अभी वक्त है, चाहो तो एक्टिंग छोड़कर वापस चल सकते हैं, लेकिन सायरा ने हार नहीं मानी। उन्होंने दोबारा वही सीन किया और इस बार बिल्कुल सही कर दिया। लेकिन रिलीज से पहले एक और वाकये ने सायरा को परेशान कर दिया। एक दिन वह अपनी मां के साथ मुंबई की एक दुकान पर गई थीं। वहां एक सेल्समैन दिलीप कुमार का बड़ा फैन था। उसने सायरा की मां से पूछा कि बेटी की फिल्म कब आ रही है? मां ने बताया कि अगले महीने। यह सुनते ही सेल्समैन बोला कि अगले महीने दिलीप कुमार की ‘गंगा जमुना’ भी रिलीज हो रही है। दोनों फिल्में साथ आईं, तो सायरा की फिल्म कौन देखेगा? यह सुनकर सायरा घबरा गईं और वहीं रोने लगीं। उन्हें लगा कि उनकी फिल्म फ्लॉप हो जाएगी। लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा। ‘जंगली’ और ‘गंगा जमुना’ एक हफ्ते के अंतर से रिलीज हुईं और दोनों फिल्मों ने शानदार कामयाबी हासिल की। पार्टी में पहली बार दिलीप कुमार

बांग्लादेश में 2 साल में 457 फैक्ट्रियां बंद:2026 में 62 हजार नौकरियां गईं, गैस संकट से 800 कंपनियों के बंद होने का खतरा

बांग्लादेश में 2 साल में 457 फैक्ट्रियां बंद:2026 में 62 हजार नौकरियां गईं, गैस संकट से 800 कंपनियों के बंद होने का खतरा

बांग्लादेश के उद्योगों पर संकट गहराता जा रहा है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो साल में देश के 7 प्रमुख औद्योगिक इलाकों में 457 औद्योगिक इकाइयां स्थायी रूप से बंद हो चुकी हैं। इनमें 108 गारमेंट उद्योग से जुड़ी यूनिट्स शामिल हैं। फैक्ट्रियां बंद होने का सीधा असर रोजगार पर पड़ा है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच 95 फैक्ट्रियां बंद हुईं और 61,881 लोगों की सीधी नौकरी चली गई। बंद फैक्ट्रियों का संकट सिर्फ कपड़ा उद्योग तक सीमित नहीं पिछले दो साल में बंद हुई 457 फैक्ट्रियों में कपड़ा और गारमेंट से जुड़ी फैक्ट्रियों के साथ दूसरे उद्योगों की इकाइयां भी शामिल हैं। इनमें 287 इकाइयां अन्य मैन्युफैक्चरिंग कारोबार से जुड़ी थीं। यानी बांग्लादेश में उद्योगों की मुश्किल किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है। बढ़ती लागत और ऊर्जा संकट का असर अलग-अलग तरह के कारखानों पर पड़ रहा है। गैस की कमी ने संकट और बढ़ाया सबसे बड़ी परेशानी ऊर्जा की कमी को लेकर है। अगस्त की शुरुआत में गाजीपुर में गैस का दबाव इतना कम हो गया कि 700 से 800 फैक्ट्रियों में काम रोकना पड़ा या कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजना पड़ा। गैस की कमी से बॉयलर और दूसरी मशीनें पूरी क्षमता से नहीं चल पातीं। इससे उत्पादन घटता है और फैक्ट्रियों के लिए विदेशी खरीदारों के ऑर्डर समय पर पूरा करना मुश्किल हो जाता है। दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं विदेशी खरीदार गैस की कमी से अभी जो फैक्ट्रियां बंद हैं, उनके लिए ज्यादा दिन तक काम रोकना मुश्किल हो सकता है। फैक्ट्री बंद होने के बाद भी कर्मचारियों की तनख्वाह, बैंक का कर्ज और बाकी खर्च देने पड़ते हैं। गैस की जगह डीजल या एलपीजी से काम चलाने पर खर्च और बढ़ जाता है। ऐसे में अगर संकट लंबा चला तो कई फैक्ट्रियों के लिए दोबारा काम शुरू करना मुश्किल हो सकता है। ऊर्जा संकट का असर सिर्फ फैक्ट्रियों में कामकाज पर नहीं पड़ रहा है। इससे बांग्लादेश के लिए विदेशी कंपनियों से कारोबार हासिल करना भी मुश्किल हो रहा है। अगर फैक्ट्रियां समय पर ऑर्डर पूरा नहीं कर पाईं तो विदेशी खरीदार दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं। इससे बांग्लादेश की फैक्ट्रियों की कमाई घटेगी और कर्मचारियों की तनख्वाह, कर्ज और बाकी खर्च संभालना और मुश्किल हो जाएगा। गैस नहीं मिली तो कपड़ा उद्योग पर और संकट बांग्लादेश के निर्यात कारोबार में कपड़ा और तैयार कपड़ों का बड़ा हिस्सा है। इनके लिए धागा बनाने, कपड़े की रंगाई और दूसरे शुरुआती काम करने वाली फैक्ट्रियां जरूरी हैं। अगर इन्हें पर्याप्त गैस नहीं मिली तो आगे तैयार कपड़े बनाने वाली फैक्ट्रियों का काम भी प्रभावित होगा। इसी वजह से उद्योग संगठनों ने इन इकाइयों को गैस सप्लाई में प्राथमिकता देने की मांग की है। उद्योग संगठनों ने सरकार से यह भी कहा है कि फैक्ट्रियों को रोजाना गैस की उपलब्धता और दबाव की जानकारी दी जाए, ताकि वे उसी हिसाब से उत्पादन की तैयारी कर सकें। इसके अलावा गैस संकट से परेशान छोटी और मझोली फैक्ट्रियों को बैंक कर्ज चुकाने में कुछ समय की राहत देने और मजदूरों से जुड़े विवाद जल्द सुलझाने की मांग की गई है। आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि गैस और बिजली का संकट कब तक बना रहता है। अभी कई फैक्ट्रियां कम क्षमता पर चल रही हैं। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे और विदेशी ऑर्डर भी कमजोर रहे, तो आर्थिक दबाव झेल रही कई और फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं। इसका असर सिर्फ रोजगार पर नहीं पड़ेगा। स्थानीय कारोबार और बांग्लादेश की निर्यात कमाई भी प्रभावित हो सकती है।

एक्ट्रेस पूनम ढिल्लों अस्पताल में भर्ती:डेंगू से संक्रमित होने के बाद लीलावती अस्पताल में चल रहा इलाज

एक्ट्रेस पूनम ढिल्लों अस्पताल में भर्ती:डेंगू से संक्रमित होने के बाद लीलावती अस्पताल में चल रहा इलाज

वेटरन एक्ट्रेस और सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) की प्रेसिडेंट पूनम ढिल्लों डेंगू से संक्रमित होने के बाद मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती हैं। उनका पिछले कई दिनों से अस्पताल में इलाज चल रहा है। यह जानकारी पत्रकार विक्की ललवानी ने सोशल मीडिया के जरिए शेयर की। उन्होंने बताया कि पूनम ढिल्लों से सुबह मैसेज पर बात हुई और एक्ट्रेस ने अपनी तबीयत में सुधार की जानकारी दी। विक्की ललवानी ने लिखा कि पूनम ढिल्लों कई दिनों से अस्पताल में हैं और अब रिकवरी कर रही हैं। उन्होंने एक्ट्रेस के जल्द पूरी तरह ठीक होने की कामना भी की। गौरतलब है कि पूनम ढिल्लों हाल ही में CINTAA को लेकर भी चर्चा में रही हैं। CINTAA की एग्जीक्यूटिव कमेटी के 8 सदस्यों ने हाल ही में अपने पदों और कमेटी से इस्तीफा दे दिया। इन सदस्यों ने आरोप लगाया था कि उन्हें संगठन की मौजूदा लीडरशिप पर कोई भरोसा नहीं है। उन्होंने नए चुनाव कराने की मांग भी की थी। वहीं, पूनम ढिल्लों ने अपने और वाइस प्रेसिडेंट पद्मिनी कोल्हापुरे के खिलाफ लगे आरोपों को बहुत आपत्तिजनक बताया था। पूनम ढिल्लों ने अपने खिलाफ लगाए आरोपों को खारिज किया। उन्होंने ANI से बात करते हुए कहा था, बात यह थी कि चीजें उनके हिसाब से नहीं हो रही थीं। वे CAWT (सिने आर्टिस्ट्स वेलफेयर ट्रस्ट) के जरिए CINTAA सदस्यों पर नियंत्रण रखने की कोशिश कर रहे थे। जब ऐसा नहीं हो पाया तो उन्होंने हमारे खिलाफ अजीब और गंभीर आरोप लगाने शुरू कर दिए। पूनम ने आरोपों की भाषा पर नाराजगी जताते हुए कहा था, आप यकीन नहीं करेंगे कि आरोप कितने अश्लील थे। वे इतने आपत्तिजनक थे कि अगर हम चाहते तो इसमें शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई करने पर विचार कर सकते थे। ऐसे आरोप, दुख पहुंचाने वाले बयान और आपत्तिजनक भाषा बड़े स्तर पर फैलाई गई। पूनम ने बताया था कि इस विवाद का उन पर इमोशनल असर पड़ा और उन्होंने कई बार कार्यकारी समिति से इस्तीफा देने के बारे में सोचा। उन्होंने कहा कि दो या तीन लोग, जिन्हें उन्होंने पेड प्रवक्ता बताया, इसी तरह की बातें करते थे। उन्होंने कहा था कि उनमें से एक या दो CINTAA के सदस्य भी थे। उन्होंने बहुत अनुचित और दुख पहुंचाने वाले बयान दिए। फिर भी हमने चुप रहना चुना। पूनम ने आत्मसम्मान को सबसे जरूरी बताया पूनम ने कहा था कि मैं सिर्फ एक बात कहना चाहूंगी। मेरा आत्मसम्मान और ईमानदारी मेरे लिए बहुत जरूरी है। हमने जो कुछ वर्षों में कमाया है, वह एक-दो साल में नहीं कमाया। हमने अपने व्यवहार, गरिमा, मौजूदगी और लोगों के साथ व्यवहार व बातचीत के तरीके से दशकों में अपनी प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान बनाया है। हिंदुस्तान टाइम्स के साथ एक और इंटरव्यू में पूनम ने कहा कि वह और पद्मिनी CINTAA के लिए गुडविल बनाने के लिए अपने रिसोर्स और कनेक्शन का इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इसका मकसद पर्सनल फायदा नहीं है। पूनम ने कहा कि संगठन के सदस्यों के लिए कुछ करने की पहल कोई और नहीं कर रहा था, इसलिए मैं उनके आरोपों से हैरान हूं। CAWT और कार्यक्रम से जुटाई रकम पर सफाई पूनम ने कहा था कि इस्तीफा देने वाले सदस्य CAWT को बचाने की कोशिश कर रहे थे। यह ट्रस्ट दिवंगत दिलीप कुमार, अमरीश पुरी, अमजद खान और दूसरे वरिष्ठ कलाकारों ने बनाया था। उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट ने सदस्यों को मेडिकल सुविधाएं देने की अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की है। पूनम के मुताबिक, पिछले कुछ दशकों में मौजूदा समिति के किसी सदस्य ने CAWT के लिए रकम नहीं जुटाई। उन्होंने बताया कि हाल में एक कार्यक्रम के जरिए रकम जुटाई गई। कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाली कलाकार कविता कृष्णमूर्ति और मधुश्री को साड़ियां दी गईं, जबकि बिना फीस प्रस्तुति देने वाले नितिन मुकेश को कुर्ता दिया गया। पूनम ने कहा, इस्तीफा देने वाले सदस्य हम पर साड़ियां खरीदने का आरोप लगा रहे हैं। क्या हमने वे साड़ियां अपने लिए खरीदी थीं? हम यह मानते हैं कि इन कलाकारों ने बिना फीस हमारे लिए प्रस्तुति दी थी, इसलिए उन्हें ये उपहार दिए गए। पद्मिनी और मैंने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन किया था और अपने अनुरोध पर उनसे प्रस्तुति करवाई थी। इन गायकों ने CINTAA के लिए मदद की। हमने इन परफॉर्मेंस से 1 करोड़ रुपए जुटाए। ऐसे में अगर हम कलाकारों के उपहारों पर 1 लाख रुपए खर्च करते हैं तो इसमें समस्या क्या है? ‘42 साल से इंडस्ट्री में हूं, क्या ऐसा विश्वासघात कर सकती हूं’ पूनम ने सवाल किया था कि फिल्म इंडस्ट्री में दशकों तक काम करने के बाद क्या उन पर संगठन से विश्वासघात करने का आरोप लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा था, हम इस इंडस्ट्री में 42 साल से हैं। कुछ लोग 45 साल से और कुछ 48 साल से इसका हिस्सा हैं। क्या आपको सच में लगता है कि इतने वर्षों बाद हम ऐसा विश्वासघात कर सकते हैं? मैं आपके साथ एक बहुत निजी बात साझा करना चाहती हूं। पिछले एक या डेढ़ साल में कई बार ऐसा लगा कि CINTAA की कार्यकारी समिति से इस्तीफा देकर अलग हो जाऊं। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा था कि इन लोगों ने हमारा जीवन बहुत मुश्किल बना दिया था। हर एक चीज का विरोध किया गया। हर पहल का विरोध किया गया।

53 साल के अर्जुन रामपाल ने दूसरी शादी की:14 साल छोटी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला से शादी रजिस्टर कराई, रिलेशनशिप से दो बेटे हैं

53 साल के अर्जुन रामपाल ने दूसरी शादी की:14 साल छोटी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला से शादी रजिस्टर कराई, रिलेशनशिप से दो बेटे हैं

बॉलीवुड एक्टर अर्जुन रामपाल ने अपनी लंबे समय से गर्लफ्रेंड गैब्रिएला डेमेट्रियड्स से शादी कर ली है। गोवा में बुधवार को यह शादी रजिस्टर्ड कराई है। दोनों ने उत्तरी गोवा के मापुसा स्थित सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में शादी की कानूनी प्रक्रिया पूरी की। PTI के मुताबिक, इस दौरान उनके करीबी दोस्त मौजूद थे। स्थानीय कानून के तहत पहले और दूसरे हस्ताक्षर के बीच 15 दिन का इंतजार जरूरी होता है। इस अवधि को माफ कराने के लिए कपल ने स्थानीय कोर्ट के असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर से विशेष अनुमति ली थी। सब-रजिस्ट्रार सूरज वर्नेकर ने बताया कि शादी गोवा के यूनिफॉर्म सिविल कोड के तहत रजिस्टर्ड हुई। अर्जुन और गैब्रिएला शाम करीब 4 बजे ऑफिस पहुंचे थे। दोनों इस मौके पर कैजुअल कपड़ों में थे। 2018 से रिश्ते में हैं अर्जुन और गैब्रिएला अर्जुन और गैब्रिएला 2018 से रिश्ते में हैं। यह रिश्ता एक्टर के पूर्व पत्नी मेहर जेसिया से अलग होने के बाद शुरू हुआ था। शादी से 7 पहले यानी 2019 में अर्जुन और गैब्रिएला के पहले बेटे एरिक का जन्म हुआ था। इसके चार साल बाद उनके दूसरे बेटे एरिव का जन्म हुआ। 2025 में अर्जुन ने गैब्रिएला से अपनी सगाई की जानकारी दी थी। यह सगाई दोनों के डेटिंग शुरू करने के छह साल बाद हुई थी। दो बच्चों के बाद शादी नहीं करने पर यह कहा था अर्जुन ने इससे पहले रणवीर इलाहाबादिया के यूट्यूब चैनल पर बताया था कि दो बच्चों के माता-पिता होने के बावजूद उन्होंने गैब्रिएला से शादी क्यों नहीं की थी? एक्टर ने कहा था कि यह न मेरी वजह से है और न उसकी वजह से। शादी आखिर है क्या? एक कागज ही तो है। मुझे लगता है कि हम पहले से शादीशुदा हैं और मेरे मन में इसे लेकर कोई शक नहीं है, लेकिन कभी-कभी वह कागज आपको बदल भी सकता है क्योंकि आपको लगता है कि अब सब स्थायी है, जबकि असल में यह एक गलत धारणा है और आप कानूनी तौर पर बंध जाते हैं। उन्होंने आगे कहा था, इससे एक-दूसरे के प्रति आपका रवैया बदल सकता है। मुझे लगता है कि हम दोनों ऐसा ही महसूस करते हैं। हमारे बीच जो कुछ हुआ, वह बहुत स्वाभाविक था। मैं इसके बारे में ज्यादा बात नहीं करना चाहता, क्योंकि मैं इसे नजर न लगने देना चाहता हूं। मुझे नहीं लगता कि मुझे किसी को इस बात का जवाब देना जरूरी है। हमारे लिए यह बहुत खूबसूरत है। आपको जब तक संभव हो, इसे महसूस करते रहना चाहिए। हम दोनों के मन में एक-दूसरे से शादी हो चुकी है। हम एक-दूसरे को सही दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं और साथ ही बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड भी हैं। हालांकि, अर्जुन रामपाल ने यह भी साफ किया था कि वह शादी के खिलाफ नहीं हैं। अर्जुन की पहली शादी मेहर जेसिया से हुई थी अर्जुन रामपाल की पहली शादी पूर्व सुपरमॉडल मेहर जेसिया से 1998 में हुई थी। इस शादी से उनकी दो बेटियां माहिका और मायरा हुईं। 20 साल साथ रहने के बाद, मई 2018 में उन्होंने अलग होने की घोषणा की और नवंबर 2019 में दोनों का तलाक हो गया।