53 साल के अर्जुन रामपाल ने दूसरी शादी की:14 साल छोटी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला से शादी रजिस्टर कराई, रिलेशनशिप से दो बेटे हैं

बॉलीवुड एक्टर अर्जुन रामपाल ने अपनी लंबे समय से गर्लफ्रेंड गैब्रिएला डेमेट्रियड्स से शादी कर ली है। गोवा में शुक्रवार को यह शादी रजिस्टर्ड कराई गई। दोनों ने उत्तरी गोवा के मापुसा स्थित सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में शादी की कानूनी प्रक्रिया पूरी की। PTI के मुताबिक, इस दौरान उनके करीबी दोस्त मौजूद थे। स्थानीय कानून के तहत पहले और दूसरे हस्ताक्षर के बीच 15 दिन का इंतजार जरूरी होता है। इस अवधि को माफ कराने के लिए कपल ने स्थानीय कोर्ट के असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर से विशेष अनुमति ली थी। सब-रजिस्ट्रार सूरज वर्नेकर ने बताया कि शादी गोवा के यूनिफॉर्म सिविल कोड के तहत रजिस्टर्ड हुई। अर्जुन और गैब्रिएला शाम करीब 4 बजे ऑफिस पहुंचे थे। दोनों इस मौके पर कैजुअल कपड़ों में थे। 2018 से रिश्ते में हैं अर्जुन और गैब्रिएला अर्जुन और गैब्रिएला 2018 से रिश्ते में हैं। यह रिश्ता एक्टर के पूर्व पत्नी मेहर जेसिया से अलग होने के बाद शुरू हुआ था। शादी से 7 साल पहले यानी 2019 में अर्जुन और गैब्रिएला के पहले बेटे एरिक का जन्म हुआ था। इसके चार साल बाद उनके दूसरे बेटे एरिव का जन्म हुआ। 2025 में अर्जुन ने गैब्रिएला से अपनी सगाई की जानकारी दी थी। दो बच्चों के बाद शादी नहीं करने पर यह कहा था अर्जुन ने इससे पहले रणवीर अलाहबादिया के यूट्यूब चैनल पर बताया था कि दो बच्चों के माता-पिता होने के बावजूद उन्होंने गैब्रिएला से शादी क्यों नहीं की थी? एक्टर ने कहा था कि यह न मेरी वजह से है और न उसकी वजह से। शादी आखिर है क्या? एक कागज ही तो है। मुझे लगता है कि हम पहले से शादीशुदा हैं और मेरे मन में इसे लेकर कोई शक नहीं है, लेकिन कभी-कभी वह कागज आपको बदल भी सकता है क्योंकि आपको लगता है कि अब सब स्थायी है, जबकि असल में यह एक गलत धारणा है और आप कानूनी तौर पर बंध जाते हैं। उन्होंने आगे कहा था, इससे एक-दूसरे के प्रति आपका रवैया बदल सकता है। मुझे लगता है कि हम दोनों ऐसा ही महसूस करते हैं। हमारे बीच जो कुछ हुआ, वह बहुत स्वाभाविक था। मैं इसके बारे में ज्यादा बात नहीं करना चाहता, क्योंकि मैं इसे नजर न लगने देना चाहता हूं। मुझे नहीं लगता कि मुझे किसी को इस बात का जवाब देना जरूरी है। हमारे लिए यह बहुत खूबसूरत है। आपको जब तक संभव हो, इसे महसूस करते रहना चाहिए। हम दोनों के मन में एक-दूसरे से शादी हो चुकी है। हम एक-दूसरे को सही दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं और साथ ही बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड भी हैं। हालांकि, अर्जुन रामपाल ने यह भी साफ किया था कि वह शादी के खिलाफ नहीं हैं। अर्जुन की पहली शादी मेहर जेसिया से हुई थी अर्जुन रामपाल की पहली शादी पूर्व सुपरमॉडल मेहर जेसिया से 1998 में हुई थी। इस शादी से उनकी दो बेटियां माहिका और मायरा हुईं। 20 साल साथ रहने के बाद, मई 2018 में उन्होंने अलग होने की घोषणा की और नवंबर 2019 में दोनों का तलाक हो गया।
कनाडा में 2 गुरुद्वारों को गिराने की धमकी:एक ही नंबर से 2 बार धमकी भरी कॉल आई, कैलगरी पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई

कनाडा के कैलगरी स्थित प्रमुख सिख धार्मिक स्थल दशमेश कल्चर सेंटर को अज्ञात लोगों ने इमारत गिराने की धमकी दी है। लगातार आ रहे इन नस्ली और धमकी भरे फोन कॉल्स के बाद गुरुद्वारा प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन और पुलिस की चिंता बढ़ गई है। एहतियात के तौर पर गुरुद्वारा साहिब परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड तैनात कर दिए गए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उसी नंबर से कनाडा के ही सवाना स्थित गोबिंद सरवर गुरुद्वारा साहिब को भी इसी तरह की धमकी मिली है। मामले की शिकायत मिलने के बाद कैलगरी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और समुदाय या दोनों में से किसी भी गुरुद्वारा साहिब को किसी सक्रिय खतरे की संभावना नहीं है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि धमकी देने वाले लोग कौन थे और उनका मकसद क्या था? पहले पार्किंग खाली करने को कहा, फिर इमारत ढहाने की धमकी दशमेश कल्चर सेंटर के चेयरमैन रणबीर सिंह परमार ने बताया कि गुरुद्वारा साहिब के कार्यालय में लगातार दो संदिग्ध फोन कॉल्स आईं। पहली कॉल में अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर गुरुद्वारा साहिब की पार्किंग खाली कराने को कहा। उसने दावा किया कि वहां कुछ तार बिछाने का काम किया जाना है। जबकि, कुछ समय बाद एक अन्य व्यक्ति ने फोन कर खुद को एक कंस्ट्रक्शन कंपनी का CEO बताया। उसने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चेयरमैन रणबीर सिंह परमार से बात की और सीधे गुरुद्वारा भवन को गिराने की धमकी दी। रणबीर ने बताया कि उसी नंबर से कनाडा के सवाना स्थित गोबिंद सरवर गुरुद्वारा साहिब को भी इसी तरह की धमकी भरी कॉल आई। कैलगरी पुलिस कर रही मामले की जांच कैलगरी पुलिस सर्विस ने मीडिया को दिए अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि वे इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कर रहे हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि केवल दशमेश कल्चर सेंटर ही नहीं, बल्कि एक अन्य नजदीकी गुरुद्वारे को भी इसी तरह का धमकी भरा फोन कॉल आया था। पुलिस कॉल करने वाले अज्ञात व्यक्तियों की पहचान करने और नंबरों को ट्रेस करने का प्रयास कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि यह कोई शरारत थी या इसके पीछे कोई नफरती मानसिकता थी। समाज सेवा से जुड़ा है गुरुद्वारा स्थानीय संगत और नियमित आने वाले लोगों ने घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि यह गुरुद्वारा सभी धर्मों के लिए खुला है और समाज सेवा, फूड बैंक और कपड़े बांटने जैसे काम करता है। दुनिया में पहले से तनाव है, ऐसे में देश के भीतर नफरत फैलाने के बजाय प्यार बांटना चाहिए। मेयर और नेताओं को दी गई सूचना घटना की गंभीरता को देखते हुए गुरुद्वारा कमेटी ने पुलिस के साथ-साथ अल्बर्टा प्रांत की प्रीमियर के कार्यालय, स्थानीय पार्षदों, सांसदों और विधायकों को सूचित किया है। कैलगरी के मेयर जेरेमी फारकस ने सोशल मीडिया पर इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए सिख समुदाय के प्रति अपना समर्थन जताया है। सिख संगठनों और गुरुद्वारा प्रबंधन के बयान गुरुद्वारा प्रबंधन के प्रतिनिधि अमनप्रीत सिंह परमार ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि गुरुद्वारा बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए फूड बैंक और कपड़े दान करने जैसे सामाजिक कार्य चलाता है। जब दुनिया में पहले से ही इतनी जंग चल रही है, तो हमें देश के भीतर आंतरिक युद्ध शुरू नहीं करने चाहिए, बल्कि प्यार फैलाना चाहिए। वहीं, डायरेक्टर ऑफ ऑपरेशंस, दशमेश कल्चर सेंटर राज सिद्धू ने बताया कि धमकी भरे फोन के समय परिसर में काफी संख्या में परिवार और बच्चे मौजूद थे। यह घटना परेशान करने वाली जरूर है, लेकिन यह समय डरने का नहीं, बल्कि एकजुट होने और संवाद करने का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरुद्वारे के दरवाजे हमेशा की तरह सभी संस्कृतियों और धर्मों के लोगों के लिए खुले रहेंगे। गुरुद्वारा अध्यक्ष हरपाल सिंह और अन्य सदस्यों ने चिंता जताई कि सोशल मीडिया पर चल रही कुछ तीखी और अनियंत्रित बयानबाजियां इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने फोन करने वाले व्यक्ति को भी आमंत्रित किया कि वह गुरुद्वारे आए और सिख समुदाय के बारे में करीब से जाने। कनाडा में बसे पंजाबी समुदाय में गुस्सा बता दें, दशमेश कल्चर सेंटर का इतिहास गौरवमयी है और 46 साल पहले इसकी नींव रखी गई थी। यह गुरुद्वारा अब 15 हजार से अधिक पंजीकृत सदस्यों और कैलगरी के करीब एक लाख से अधिक सिख प्रवासियों की धार्मिक और सामाजिक जरूरतों को पूरा करता है। ऐसे धार्मिक स्थान को गिराने की धमकी से कैलगरी ही नहीं पूरे कनाडा में बसे पंजाबियों में गुस्सा है। यही कारण है कि इस घटना पर स्थानीय प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। मेयर ने घटना की निंदी की कैलगरी के मेयर मेयर जेरोमी फारकास ने भी इस कायरतापूर्ण कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि कैलगरी में नफरत, डर या कट्टरता के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने सिख समुदाय के प्रति अपनी संवेदना और समर्थन व्यक्त करते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा दिया है। फिलहाल, दशमेश कल्चर सेंटर और दूसरे गुरुद्वारे में अतिरिक्त निजी सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए हैं और आने-जाने वाले वाहनों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
श्वेता तिवारी को मराठी यूजर्स ने दीं भद्दी गालियां:एक्ट्रेस ने राज ठाकरे से पूछा- क्या आपके सपोर्टर्स ऐसे हैं, क्या ये जायज; जानिए पूरा विवाद

एक्ट्रेस श्वेता तिवारी सोशल मीडिया पर मिल रहीं भद्दी गालियों पर भड़क गई हैं। उन्होंने गाली देने वाले यूजर्स की प्रोफाइल और उनके परिवार की तस्वीरें शेयर की हैं। साथ ही एक्ट्रेस ने राज ठाकरे से पूछा है कि क्या उनके सपोर्टर्स ऐसे हैं, जो खुद को मराठी कहते हैं और महिलाओं को घटिया गालियां देते हैं। श्वेता तिवारी ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम से कुछ ऐसी प्रोफाइल भी शेयर कीं, जिनमें ट्रोलर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के चीफ राज ठाकरे की पार्टी से जुड़ा नजर आ रहा था। श्वेता ने इसके साथ लिखा, आज मैं ऐसी एक बात करना चाहती हूं जो बहुत गहरी चिंता का विषय है और दुर्भाग्य से सोशल मीडिया पर बहुत आम हो चुकी है, किसी भी महिला को गंदी गाली देना। किसी भी महिला को। किसी भी उम्र की। किसी भी पेशे से जुड़ी हुई। कोई भी पुरुष, किसी भी बैकग्राउंड से, ऑनलाइन आकर किसी भी महिला को आपत्तिजनक शब्द कह सकता है। आगे श्वेता ने लिखा, ‘और जो बात मुझे सबसे ज्यादा झकझोरती है, वह यह है कि ये पुरुष जरूरी नहीं कि अनपढ़ हों या किसी खराब माहौल से आते हों। इनमें से बहुत से लोग पढ़े-लिखे हैं, देखने में सम्मानित परिवारों से आते हैं, उनकी पत्नियां हैं, बेटियां हैं, मां हैं और बहनें हैं और फिर भी वे किसी दूसरी महिला के लिए सबसे अपमानजनक शब्द इस्तेमाल करने में बिल्कुल सहज महसूस करते हैं।’ श्वेता तिवारी ने कुछ गाली देने वाले यूजर्स की प्रोफाइल भी शेयर की और साथ ही उनके परिवार की तस्वीरें भी शेयर कीं। राज ठाकरे से पूछा- क्या ऐसा व्यवहार जायज है श्वेता ने एक ऐसी प्रोफाइल दिखाई, जिस पर राज ठाकरे के समर्थन से जुड़ी चीजें पोस्ट की गई थीं। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “एक शख्स राज ठाकरे और उनकी पार्टी का सपोर्टर है। यह बात मेरे लिए थोड़ी पर्सनल हो गई, क्योंकि मैं अपनी पूरी जिंदगी महाराष्ट्र में रही हूं।” उन्होंने आगे लिखा, “मेरे पिता मुंबई में पले-बढ़े। मेरा भी यहीं जन्म हुआ और इसी शहर में मैं बड़ी हुई। पूरी जिंदगी मैंने मराठी माणुस से जुड़े गर्व और सम्मान को महसूस किया है। मैंने मराठी महिलाओं को गर्व से कहते सुना है कि वे मराठी मुलगी हैं।” श्वेता ने कहा, “मुझे लगता है कि मराठी संस्कृति महिलाओं के सम्मान, उनकी ताकत और गरिमा का ख्याल रखती है। लेकिन जब कोई मराठी माणुस किसी महिला को पर्सनल मैसेज करके गाली देता है, तो मुझे हैरानी होती है।” उन्होंने पूछा, “क्या मराठी माणुस का यही मतलब होता है? राज ठाकरे, मैं जानना चाहती हूं कि अगर ऐसे लोग आपके समर्थक हैं, तो क्या आप मानते हैं कि ऐसा व्यवहार जायज है?” एक्ट्रेस ने लिखा, “खुद को मराठी माणुस कहना ही काफी नहीं होता। महिलाओं का सम्मान करना भी मराठी माणुस की पहचान होती है।” श्वेता के मुताबिक, ट्रोल्स इस कदर बेशर्म हो चुके हैं कि उनके 8 साल के बेटे और बेटी पलक को लेकर भी भद्दी बातें बोलते हैं। ऑनलाइन डिलीवरी में कॉकरोच निकलने पर तुकाराम मुंढे को किया टैग श्वेता तिवारी ने गुरुवार को ऑनलाइन एनर्जी ड्रिंक ऑर्डर की थी। जब ऑर्डर खोला गया, तो उसमें कॉकरोच मिलने से एक्ट्रेस घबरा गईं। एक्ट्रेस ने वीडियो जारी कर महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी कार्रवाई से चर्चा में बने हुए FDA ऑफिसर तुकाराम मुंढे से सवाल किया है। ऑफिशियल इंस्टाग्राम से शेयर किए गए वीडियो में श्वेता तिवारी ने कहा, ‘हमने इंस्टामार्ट से रेडबुल मंगवाया। लेकिन इंस्टामार्ट से हमारे घर में ये (कॉकरोच) भी आया। कॉकरोच पूरे घर में भाग रहा है।’ दूसरे वीडियो में श्वेता ने कॉकरोच दिखाया और कहा, ‘क्या हमें तुकाराम मुंढे जी को टैग करना चाहिए। मुंढे जी ये हमारे घर में इंस्टामार्ट से कॉकरोच आ रहे हैं। आप कहां हैं, ध्यान दीजिए।’ द ट्रेटर में नजर आईं श्वेता तिवारी कसौटी जिंदगी की शो से देशभर में पहचान हासिल करने वालीं श्वेता तिवारी इन दिनों अमेजन प्राइम के शो द ट्रेटर्स सीजन 2 में नजर आ रही हैं। इससे पहले श्वेता रियलिटी शो बिग बॉस की विजेता रह चुकी हैं। श्वेता तिवारी अपनी निजी जिंदगी के चलते भी चर्चा में रह चुकी हैं।
हिंदू-मुस्लिम की सोच से बाहर आइए:कंगना रनोट ने शर्मिता टैगोर पर साधा निशाना, वंदे मातरम् पर सीनियर एक्ट्रेस के बयान पर भड़कीं

दिग्गज एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर की वंदे मातरम् पर टिप्पणी के बाद कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी है। शर्मिला टैगोर ने कहा था कि वंदे मातरम् के कुछ हिस्से एक ईश्वर को मानने वाले लोगों की आस्था से मेल नहीं खा सकते। उन्होंने कहा कि गीत में कई देवताओं का जिक्र है। कंगना बोलीं- हैरान हूं कि आपकी सोच इतनी छोटी है कंगना ने शर्मिला टैगोर के इंटरव्यू का वीडियो अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर किया। उन्होंने लिखा, “मैं खुश हूं कि शर्मिला जी ने वंदे मातरम् को लेकर अपनी आपत्ति के बारे में बात की। लेकिन एक कलाकार के तौर पर मैं हैरान हूं कि कला और कविता को लेकर उनकी सोच इतनी छोटी और बनावटी कैसे हो सकती है।” कंगना ने आगे लिखा, “किसी भी कविता या गीत में शब्द रूपक होते हैं। कवि या कलाकार मनचाहा असर पैदा करने के लिए हर तरह की कल्पना करता है और असंभव लगने वाली समानताएं खींचता है। विवेकानंद ने मशहूर तौर पर कहा था कि मुझे ऐसे युवा चाहिए, जो लोहे जैसे बने हों, जिनकी हड्डियां फौलाद की हों और जिनकी नसों में बिजली दौड़ती हो।” उन्होंने कहा, “विवेकानंद मौसम का अनुमान नहीं बता रहे थे। वह केवल शक्ति को जगाने की मांग कर रहे थे। कृपया हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर आइए।” आखिर में कंगना ने लिखा, “भले ही हम एक ईश्वर में विश्वास करते हों, डॉक्टर भी ताकत को शक्ति कहते हैं। आइए, एक-दूसरे को अपनों की तरह अपनाएं। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं और उस जोरदार गले मिलने से भी मुझे परेशानी नहीं है, जैसा आप हमेशा देती हैं।” शर्मिला बोलीं- एक ईश्वर को मानने वालों के लिए कहना मुश्किल शर्मिला टैगोर ने आईएएनएस से अपनी बात समझाते हुए कहा, “मेरी राय यह है कि बहुत से धार्मिक लोग एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं, कई ईश्वरों में नहीं। वंदे मातरम् में एक अंतरा है, जिसमें कई देवताओं का जिक्र किया गया है।” उन्होंने आगे कहा, “जो लोग एक धर्म में विश्वास करते हैं, उनके लिए ‘वंदे काली, वंदे दुर्गा’ कहना मुश्किल है। इसलिए, अगर हम भारत के सभी धार्मिक लोगों को साथ लेकर चलें, तो इसके पहले दो अंतरे बहुत अच्छे हैं।” शर्मिला टैगोर ने अब तक कंगना रनौत की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बयानों से चर्चा में हैं कंगना रनोट GenZ को कहा गटरछाप- जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में पहुंचे स्टूडेंट पर कंगना ने कहा था, ‘मैंने अपनी जिंदगी में कभी एक जगह पर इतनी बदसूरती नहीं देखी। Gen Z के विरोध प्रदर्शनों की ये रील्स उल्टी लाने वाली हैं। जिस तरह से वे बात करते हैं और जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं। मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी हर एक फ्रेम में सब कुछ इतना खटकने वाला और इतना भद्दा एक साथ नहीं देखा। मैं उन्हें जेनरेशन गटर कहती हूं। उनमें से कुछ के पास सिस्टम को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई-लिखाई में अच्छे नहीं हैं।’ बयान पर विवाद बढ़ने के बाद कंगना ने कहा कि पूरे देश के युवाओं को ‘गटरछाप’ नहीं कहा था। उनका बयान जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में मौजूद एक खास नस्ल को लेकर था। बाबा रामदेव से कहा- मेरी जवानी के सपने न देखें- योग गुरू बाबा रामदेव ने कंगना की आलोचना की है। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने जेन Z को लेकर कंगना की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के जवान को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए बाबा रामदेव पर पलटवार करते हुए लिखा, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम मत कीजिए। कोई सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही ऐसा सोच सकता है। कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से झूठे या फर्जी मेडिकल दावों को लेकर फटकार नहीं लगी। इसलिए मुझे चरित्र का पाठ मत पढ़ाइए। आपका चरित्र जैसा भी है, मेरा उससे कहीं बेहतर है। यहां कोई फ्रॉड नहीं मिला है।” महिलाओं को लिखा- यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं कंगना ने पोस्ट में लिखा कि पश्चिमी सोच से प्रभावित भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी सामने आई है, जिसे वह ‘गटर जेनरेशन’ कहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ नहीं है। साथ ही, उन्होंने उनकी सोच और मानसिकता पर भी सवाल उठाए और कहा कि वे अच्छी गृहिणी बनने के लिए भी सक्षम नहीं हैं। इसके बावजूद वे अपनी आजादी का दिखावा करती हैं। नशा, शराब और अनगिनत यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं। बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं। लगातार स्वतंत्र जीवन जीने की बातें करती हैं, जबकि वास्तव में वे आत्मनिर्भर होती ही नहीं। एक छोटी-सी बात याद दिला दूं, आजाद जीवन में कमाना पड़ता है। अगर बिना जिम्मेदारी उठाए स्वतंत्र बनने की कोशिश करोगे, तो तुम सिर्फ एक विकृत मानसिकता वाले इंसान हो, ‘गटर छाप’।’ बता दें कि कंगना भाजपा सांसद हैं। वह अक्सर अपने बयानों से चर्चा में रहती हैं। राजनैतिक करियर के साथ-साथ कंगना फिल्मों में भी काम कर रही हैं। जल्द ही वो तनु वेड्स मनु 3 और सीता द इन्कार्नेशन में नजर आएंगी।
हिंदू-मुस्लिम की सोच से बाहर आइए:कंगना रनोट ने शर्मिता टैगोर पर साधा निशाना, वंदे मातरम् पर सीनियर एक्ट्रेस के बयान पर भड़कीं

दिग्गज एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर की वंदे मातरम् पर टिप्पणी के बाद कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी है। शर्मिला टैगोर ने कहा था कि वंदे मातरम् के कुछ हिस्से एक ईश्वर को मानने वाले लोगों की आस्था से मेल नहीं खा सकते। उन्होंने कहा कि गीत में कई देवताओं का जिक्र है। कंगना बोलीं- हैरान हूं कि आपकी सोच इतनी छोटी है कंगना ने शर्मिला टैगोर के इंटरव्यू का वीडियो अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर किया। उन्होंने लिखा, “मैं खुश हूं कि शर्मिला जी ने वंदे मातरम् को लेकर अपनी आपत्ति के बारे में बात की। लेकिन एक कलाकार के तौर पर मैं हैरान हूं कि कला और कविता को लेकर उनकी सोच इतनी छोटी और बनावटी कैसे हो सकती है।” कंगना ने आगे लिखा, “किसी भी कविता या गीत में शब्द रूपक होते हैं। कवि या कलाकार मनचाहा असर पैदा करने के लिए हर तरह की कल्पना करता है और असंभव लगने वाली समानताएं खींचता है। विवेकानंद ने मशहूर तौर पर कहा था कि मुझे ऐसे युवा चाहिए, जो लोहे जैसे बने हों, जिनकी हड्डियां फौलाद की हों और जिनकी नसों में बिजली दौड़ती हो।” उन्होंने कहा, “विवेकानंद मौसम का अनुमान नहीं बता रहे थे। वह केवल शक्ति को जगाने की मांग कर रहे थे। कृपया हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर आइए।” आखिर में कंगना ने लिखा, “भले ही हम एक ईश्वर में विश्वास करते हों, डॉक्टर भी ताकत को शक्ति कहते हैं। आइए, एक-दूसरे को अपनों की तरह अपनाएं। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं और उस जोरदार गले मिलने से भी मुझे परेशानी नहीं है, जैसा आप हमेशा देती हैं।” शर्मिला बोलीं- एक ईश्वर को मानने वालों के लिए कहना मुश्किल शर्मिला टैगोर ने आईएएनएस से अपनी बात समझाते हुए कहा, “मेरी राय यह है कि बहुत से धार्मिक लोग एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं, कई ईश्वरों में नहीं। वंदे मातरम् में एक अंतरा है, जिसमें कई देवताओं का जिक्र किया गया है।” उन्होंने आगे कहा, “जो लोग एक धर्म में विश्वास करते हैं, उनके लिए ‘वंदे काली, वंदे दुर्गा’ कहना मुश्किल है। इसलिए, अगर हम भारत के सभी धार्मिक लोगों को साथ लेकर चलें, तो इसके पहले दो अंतरे बहुत अच्छे हैं।” शर्मिला टैगोर ने अब तक कंगना रनौत की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बयानों से चर्चा में हैं कंगना रनोट GenZ को कहा गटरछाप- जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में पहुंचे स्टूडेंट पर कंगना ने कहा था, ‘मैंने अपनी जिंदगी में कभी एक जगह पर इतनी बदसूरती नहीं देखी। Gen Z के विरोध प्रदर्शनों की ये रील्स उल्टी लाने वाली हैं। जिस तरह से वे बात करते हैं और जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं। मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी हर एक फ्रेम में सब कुछ इतना खटकने वाला और इतना भद्दा एक साथ नहीं देखा। मैं उन्हें जेनरेशन गटर कहती हूं। उनमें से कुछ के पास सिस्टम को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई-लिखाई में अच्छे नहीं हैं।’ बयान पर विवाद बढ़ने के बाद कंगना ने कहा कि पूरे देश के युवाओं को ‘गटरछाप’ नहीं कहा था। उनका बयान जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में मौजूद एक खास नस्ल को लेकर था। बाबा रामदेव से कहा- मेरी जवानी के सपने न देखें- योग गुरू बाबा रामदेव ने कंगना की आलोचना की है। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने जेन Z को लेकर कंगना की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के जवान को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए बाबा रामदेव पर पलटवार करते हुए लिखा, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम मत कीजिए। कोई सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही ऐसा सोच सकता है। कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से झूठे या फर्जी मेडिकल दावों को लेकर फटकार नहीं लगी। इसलिए मुझे चरित्र का पाठ मत पढ़ाइए। आपका चरित्र जैसा भी है, मेरा उससे कहीं बेहतर है। यहां कोई फ्रॉड नहीं मिला है।” महिलाओं को लिखा- यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं कंगना ने पोस्ट में लिखा कि पश्चिमी सोच से प्रभावित भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी सामने आई है, जिसे वह ‘गटर जेनरेशन’ कहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ नहीं है। साथ ही, उन्होंने उनकी सोच और मानसिकता पर भी सवाल उठाए और कहा कि वे अच्छी गृहिणी बनने के लिए भी सक्षम नहीं हैं। इसके बावजूद वे अपनी आजादी का दिखावा करती हैं। नशा, शराब और अनगिनत यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं। बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं। लगातार स्वतंत्र जीवन जीने की बातें करती हैं, जबकि वास्तव में वे आत्मनिर्भर होती ही नहीं। एक छोटी-सी बात याद दिला दूं, आजाद जीवन में कमाना पड़ता है। अगर बिना जिम्मेदारी उठाए स्वतंत्र बनने की कोशिश करोगे, तो तुम सिर्फ एक विकृत मानसिकता वाले इंसान हो, ‘गटर छाप’।’ बता दें कि कंगना भाजपा सांसद हैं। वह अक्सर अपने बयानों से चर्चा में रहती हैं। राजनैतिक करियर के साथ-साथ कंगना फिल्मों में भी काम कर रही हैं। जल्द ही वो तनु वेड्स मनु 3 और सीता द इन्कार्नेशन में नजर आएंगी।
अमेरिकन वॉरशिप जॉर्ज वॉशिंगटन की अरब सागर में एंट्री:250 दिन से तैनात अब्राहम लिंकन की जगह ली, ईरान के करीब अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी बढ़ी

अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर शिप USS जॉर्ज वॉशिंगटन ने पश्चिम एशिया में ऑपरेशन शुरू कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। जॉर्ज वॉशिंगटन अरब सागर क्षेत्र में USS अब्राहम लिंकन की जगह पहुंचा है। अब्राहम लिंकन लगातार 250 दिनों से ज्यादा समय से इस इलाके में तैनात था। जॉर्ज वॉशिंगटन इससे पहले साउथ चाइना सी में तैनात था USS जॉर्ज वॉशिंगटन इससे पहले साउथ चाइना सी में तैनात था। हाल ही में उसने वियतनाम के दा नांग में पोर्ट कॉल भी पूरा किया है। यह पहली बार नहीं है, जब यह एयरक्राफ्ट कैरियर अरब सागर में पहुंचा है। 1990 के दशक और 2000 के शुरुआती वर्षों में भी इसने फारस की खाड़ी में कई ऑपरेशन किए थे। इनमें इराक के कुवैत पर हमले के दौरान की गई तैनाती, 1994 का ऑपरेशन विजिलेंट वॉरियर, 1998 का ऑपरेशन डेजर्ट थंडर और 2002 में अफगान युद्ध के दौरान ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम शामिल हैं। दावा- वॉरशिप अब्राहम लिंकन से नौसैनिकों ने कूदने की कोशिश की थी अमेरिकी वॉरशिप USS अब्राहम लिंकन पर तैनात अमेरिकी नौसैनिक मानसिक और शारीरिक तनाव से गुजर रहे हैं। नेवी टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि जहाज पर तैनात 6 अमेरिकी सैन्यकर्मियों ने जहाज से समुद्र में कूदने की कोशिश की थी। USS अब्राहम लिंकन करीब 9 महीने से समुद्र में है। ये वॉरशिप ईरान जंग के दौरान बिना किसी पोर्ट पर रुके समुद्र में चल रहा है। इस पर करीब 5,000 अमेरिकी मरीन तैनात हैं। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
होर्मुज में अमेरिका पर ईरान भारी पड़ रहा:ट्रम्प की धमकी के बावजूद जहाज ईरानी रास्ते से जा रहे, सिर्फ 3 ने ओमानी रास्ता चुना

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले ज्यादातर जहाज अपनी पहचान या रास्ता छिपा रहे हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 से 19 अगस्त के बीच 236 जहाज यहां से गुजरे, लेकिन 148 जहाजों की राह साफ तौर पर पता नहीं चल सकी। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ट्रम्प की धमकियों के बावजूद कई जहाज ईरानी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे यह सवाल उठता है कि होर्मुज स्ट्रेट में इस समय अमेरिका का दबदबा ज्यादा है या ईरान का। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दावा है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री यातायात पर अमेरिकी सेना का नियंत्रण है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका इस इलाके की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेने की कोशिश कर सकता है। वहीं, ईरान का कहना है कि तेहरान की मंजूरी के बिना कोई जहाज होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजर सकता। ऐसे में दोनों देशों के दावों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि वास्तव में इस रणनीतिक जलमार्ग पर किसका नियंत्रण है। जहाजों की आवाजाही के आंकड़े इस सवाल का अहम संकेत देते हैं। ईरान और अमेरिका के अलग-अलग दावे ट्रम्प ने ओमान पर बमबारी की धमकी भी दी है। ओमान अमेरिका का सहयोगी है और होर्मुज स्ट्रेट के दूसरी तरफ ईरान के सामने स्थित है। स्ट्रेट का समुद्री इलाका ईरान और ओमान दोनों के अधिकार क्षेत्र में आता है। ट्रम्प की धमकी का मकसद मस्कट को तेहरान के साथ होर्मुज स्ट्रेट का संयुक्त संचालन करने के समझौते से रोकना बताया गया है। युद्ध के बाद दो रास्तों में बंटा होर्मुज युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज को एक ही समुद्री रास्ता माना जाता था। जहाज तय रास्ते से गुजरते थे। उनका रास्ता बंदरगाह, जहाज के समझौते और सुरक्षा को देखकर तय होता था। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद यहां दो अलग रास्तों की बात होने लगी। ईरानी रास्ता: यह होर्मुज के उत्तरी हिस्से में ईरान के तट के पास है। यह लारक और किश्म द्वीपों के करीब से गुजरता है और ईरान के बंदरगाहों और तेल टर्मिनलों तक जाता है। ओमानी रास्ता: यह होर्मुज के दक्षिणी हिस्से में ओमान के करीब है और ईरान के तट से दूर है। अमेरिका इसी रास्ते से जहाजों को गुजरने पर जोर देता है। अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में चलने वाले कई वाणिज्यिक जहाज भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। 80% से ज्यादा जहाजों का रास्ता पता नहीं समुद्री खुफिया कंपनी केप्लर के मुताबिक, 1 से 19 अगस्त के बीच 112 तेल, एलपीजी और एलएनजी ले जाने वाले जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। इनमें से 21 जहाज खुले तौर पर ईरानी रास्ते से गए, जबकि सिर्फ 2 जहाजों ने ओमानी रास्ते का इस्तेमाल किया। बाकी 89 जहाजों का रास्ता साफ नहीं था। यानी इस दौरान होर्मुज से गुजरने वाले 80% से ज्यादा तेल और गैस वाले जहाजों की आवाजाही पूरी तरह ट्रैक नहीं हो सकी। ऐसा तब होता है जब जहाज अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद कर देते हैं। कई बार जहाज का AIS डेटा केप्लर के तय ईरानी या ओमानी रास्तों से मेल भी नहीं खाता। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि जहाज वास्तव में किस रास्ते से गुजरा। सभी तरह के जहाजों में भी ईरानी रास्ता आगे 1 से 19 अगस्त के बीच कुल 236 जहाज स्ट्रेट से गुजरे। इनमें तेल और गैस के अलावा सूखा माल और रसायन ले जाने वाले जहाज भी शामिल थे। यानी हर 10 में से 6 से ज्यादा जहाज किस रास्ते से गुजरे, यह साफ तौर पर पता नहीं चल सका। जहाज AIS क्यों बंद कर रहे हैं? युद्ध शुरू होने के बाद ईरान और अमेरिका दोनों ने अपने बताए समुद्री रास्तों या नियमों का पालन नहीं करने वाले जहाजों को चेतावनी दी। कुछ मामलों में जहाजों पर हमले भी हुए। इसी वजह से कई जहाज अपना ट्रांसपोंडर बंद कर रहे हैं। इससे उनकी सही स्थिति और वे किस रास्ते से जा रहे हैं, इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। ब्रिटेन के थिंक टैंक चैथम हाउस के एसोसिएट फेलो नील क्विलियम ने अल जजीरा से कहा कि ट्रांसपोंडर बंद करने से जहाज की आवाजाही कम दिखाई देती है। हालांकि, इससे समुद्री सुरक्षा का खतरा भी बढ़ जाता है। उनके मुताबिक, कुछ जहाज संचालकों को लगता है कि मौजूदा हालात में व्यापार जारी रखने का फायदा इन सुरक्षा जोखिमों से ज्यादा है। रास्ते में जहाजों के बीच सामान भी बदला जा रहा ट्रांसपोंडर बंद करने की एक वजह समुद्र में दो जहाजों के बीच सामान का ट्रांसफर भी है। एनर्जी एक्सपर्ट मार्क अयूब ने अल जजीरा से कहा कि सऊदी अरब, इराक और कुवैत समेत कुछ खाड़ी देशों ने ओमानी रास्ते से कुछ खेप भेजीं। इसके लिए कुछ जहाजों की ट्रैकिंग बंद की गई और रास्ते में दूसरे जहाजों को माल सौंपा गया। उनके मुताबिक, कुछ ईरानी जहाज भी ओमानी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका मकसद प्रतिबंधों और अमेरिकी नाकाबंदी से बचना है। क्या आंकड़े ईरान के दबदबे की ओर इशारा कर रहे हैं? 148 जहाजों का रास्ता साफ नहीं होने की वजह से यह तय करना मुश्किल है कि वास्तव में कितने जहाज ईरानी या ओमानी रास्ते से गुजरे। फिर भी उपलब्ध आंकड़ों से एक बात सामने आती है। अमेरिकी नाकाबंदी और ट्रम्प की धमकियों के बावजूद हर पांच में से एक जहाज खुले तौर पर ईरानी रास्ते से गुजरा। सभी तरह के जहाजों को मिलाकर देखें तो 35% जहाजों ने सार्वजनिक रूप से ईरानी रास्ते का इस्तेमाल किया। इसके मुकाबले ओमानी या पुराने रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बहुत कम रही। इससे संकेत मिलता है कि कई जहाज अमेरिकी धमकियों के बावजूद ईरानी रास्ते का इस्तेमाल करने को तैयार हैं। यानी मौजूदा हालात में ईरान को नाराज करने का डर ट्रम्प की धमकियों से ज्यादा असरदार दिखाई दे रहा है। होर्मुज दुनिया के लिए इतना अहम क्यों है अमेरिका-इजराइल का ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के तेल और एलएनजी की करीब एक-पांचवीं सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती थी। तब हर दिन करीब 130 जहाज यहां से गुजरते थे। इसके मुकाबले अगस्त के 19 दिनों में कुल 236
PAK सांसद बोले- UAE में पाकिस्तानियों से भेदभाव हुआ:फ्लाइट कैंसिल होने के बाद होटल में कमरा नहीं मिला; भारतीय-अमेरिकी यात्रियों को रहने दिया

पाकिस्तान के सांसद और नेशनल असेंबली के पूर्व स्पीकर असद कैसर UAE में पाकिस्तानी यात्रियों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया है। उन्होंने मंगलवार को संसद में कहा कि फ्लाइट कैंसिल होने के बाद होटल में ठहराने के दौरान भारतीय और अमेरिकी नागरिकों को कमरा दिया गया, जबकि पाकिस्तानी यात्रियों को ठहरने की सुविधा नहीं मिली। कैसर ने दावा किया कि वह खुद इस घटना के दौरान वहां मौजूद थे। उनके मुताबिक, फ्लाइट कैंसिल होने के बाद यात्रियों को होटल में ठहराने की व्यवस्था की जा रही थी। सांसद बोले- UAE सरकार के सामने मामला उठाए पाकिस्तान कैसर ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय और विदेश मंत्री से मामले को UAE अधिकारियों के सामने उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और UAE के बीच करीबी रिश्ते हैं और ऐसी घटनाओं को दोनों देशों के संबंधों पर असर नहीं डालना चाहिए। उन्होंने UAE को पाकिस्तान का ‘इस्लामिक भाई देश’ बताते हुए कहा कि UAE के विकास में पाकिस्तानियों का भी योगदान रहा है। कैसर ने यह भी दावा किया कि एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मिलकर UAE में इसी तरह के व्यवहार की शिकायत की थी। हालांकि, उन्होंने अपने दावे के समर्थन में होटल का नाम, यात्रियों की संख्या या कोई दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया है। PAK संसद में कैसर का पूरा सुनिए… UAE में 15 लाख से ज्यादा पाकिस्तानी UAE में 15 लाख से ज्यादा पाकिस्तानी रहते हैं। यह वहां के सबसे बड़े प्रवासी समुदायों में से एक है। कैसर ने कहा कि पाकिस्तानी लोग UAE और वहां की सरकार का सम्मान करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह की घटनाओं को दोनों देशों के रिश्तों पर असर नहीं डालने दिया जाएगा। UAE में फ्लाइट कैंसिल होने पर यात्रियों के लिए क्या नियम हैं UAE के जनरल सिविल एविएशन अथॉरिटी (GCAA) के नियमों के मुताबिक, फ्लाइट कैंसिल या लंबे समय तक लेट होने पर एयरलाइन को यात्रियों की जरूरी मदद करनी होती है। ये नियम UAE से आने-जाने वाली कमर्शियल फ्लाइट्स पर लागू होते हैं। 8 घंटे से ज्यादा इंतजार पर क्या मिलेगा? अगर फ्लाइट कैंसिल होने या देरी के चलते यात्रियों को 8 घंटे से ज्यादा इंतजार करना पड़ता है, तो एयरलाइन को जरूरत के मुताबिक होटल, खाना-पीना, फोन/कम्युनिकेशन और एयरपोर्ट से होटल तक आने-जाने की सुविधा देनी होती है। अगर कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गई है और अगली संभावित फ्लाइट 8 घंटे से ज्यादा बाद है, तब भी होटल की व्यवस्था का प्रावधान है। पासपोर्ट के आधार पर अलग सुविधा का नियम नहीं GCAA के Passenger Welfare Program में यात्री सुविधाओं को फ्लाइट की देरी, कैंसिलेशन और कनेक्शन की स्थिति से जोड़ा गया है। भारतीय, अमेरिकी या पाकिस्तानी पासपोर्ट के आधार पर होटल की सुविधा अलग करने का कोई सामान्य नियम नहीं है। इसलिए अगर मौजूदा मामले में पासपोर्ट के आधार पर यात्रियों को अलग सुविधा दी गई, तो यह सामान्य यात्री-सहायता नियमों से अलग मामला होगा। हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी से यह पुष्टि नहीं होती कि होटल ने वास्तव में पासपोर्ट के आधार पर ऐसा किया था। खबर अपडेट हो रही है…
अमेरिका से 5200 भारतीय डिपोर्ट; इनमें प्रोफेशनल्स-छात्र भी:हर तीसरे सप्ताह में 1 डिपोर्टेशन फ्लाइट, कनाडा में 1500 भारतीय छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दूसरे साल मिशन डिपोर्टेशन तेज कर दिया है। इस अगस्त के पहले 15 दिन में ही 5200 से अधिक भारतीयों को डिपोर्ट किया जा चुका है।इस बार की डिपोर्टेशन लिस्ट में एच-1 बी, ओ-1 और स्टूडेंट वीसा पर अमेरिका गए भारतीय भी शामिल हैं। इन प्रोफेशनल्स की भी अच्छी खासी संख्या है। इस साल हर तीसरे हफ्ते में एक डिपोर्टेशन फ्लाइट रवाना की गई। वहीं, कनाडा के अल्बर्टा प्रांतीय सरकार ने पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (पीजीडब्ल्यूपी) रद्द कर दिया। अब वहां पर पढ़ाई कर रहे लगभग 1500 भारतीय छात्रों पर डिपोटेंशन का खतरा बढ़ गया है। 2025 में डिपोर्ट किए गए भारतीयों की संख्या 16 साल में सबसे ज्यादा इमिग्रेशन एजेंसी (आईस) के एक अधिकारी के अनुसार अवैध प्रवासियों के खिलाफ इनकी धरपकड़ और डिपोर्टेशन दोनों की संख्या बढ़ी है। साल के अंत तक डिपोर्ट किए जाने वाले अवैध प्रवासियों की रिकॉर्ड संख्या होने वाली है। जबकि, पिछले साल डिपोर्ट किए गए 3567 भारतीयों में सभी ऐसे थे, जो अवैध रूप से अमेरिका में आए थे। आईएस ने जून में ही 801 भारतीयों को रिमूवल ऑर्डर (वापसी आदेश) जारी किया। हालांकि, इस रिमूवल ऑर्डर से तुरंत डिपोर्टेशन नहीं होता है। इसके खिलाफ कोर्ट में अपील की जा सकती है या फिर संबंधित व्यक्ति अपनी इच्छा से अमेरिका को छोड़ सकता है। 2025 में डिपोर्ट किए गए भारतीयों की संख्या 16 साल में सर्वाधिक स्तर पर थी। ट्रैफिक लाइट पार करने या सोशल मीडिया पोस्ट पर भी कार्रवाई ट्रैफिक लाइट पार करने या सोशल मीडिया पोस्ट पर भी कार्रवाई, तुरंत डिपोर्ट कर रहे वैध वीसा पर आए प्रोफेशनल्स को किसी भी उल्लंघन का आरोप लगा डिपोर्ट किया जा रहा है। अमेरिका के किसी शहर में ट्रैफिक लाइट पार करने पर छात्रों को डिपोर्ट करने के मामले सामने आए हैं। कुछ छात्रों द्वारा सोशल मीडिया जैसे एक्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर ट्रम्प सरकार की आलोचना का दोषी मानकर डिपोर्ट कर दिया गया। टेक्सास में एच-1बी वीसा होल्डर की जॉब चली गई। उसके पास 60 दिन तक अमेरिका में रहकर नई जॉब सर्च करने का अधिकार था। इस बीच, एक रेस्तरां में पार्ट टाइम जॉब करते समय आईस ने रेड डाली। वीसा होल्डर को पकड़ लिया गया। उसे आईस ने वीसा उल्लंघन का दोषी माना और भारत डिपोर्ट कर दिया। कनाडा में 1500 भारतीय छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा, वर्क परमिट रद्द कनाडा की अल्बर्टा प्रांतीय सरकार की ओर से पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) रद्द किए जाने से वहां पढ़ाई कर रहे करीब 1,500 भारतीय छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा बढ़ गया है। कनाडा में वर्क परमिट होने से ये सभी छात्र स्टडी-जॉब प्रोग्राम में शामिल थे। यानी ये सभी स्टडी के बाद जॉब भी कर रहे थे। अल्बर्टा के इन छात्रों ने धरना-प्रदर्शन किया। फिलहाल कनाडा इमिग्रेशन का कहना है कि कुछ समय तक ये छात्र जॉब कर सकते हैं। लेकिन, इन छात्रों का कहना है कि कनाडा सरकार की ओर से जॉब गारंटी को बढ़ाया जाना चाहिए। इसके लिए नए कानून बनाए जाएं। पीएम बोले- बिना वैध वीजा-वर्क परमिट वाले छात्रों को जाना होगा उधर, कनाडा के पीएम मार्क कार्नी का कहना है कि जिन छात्रों के पास यहां रहने का वैध वीसा या फिर वर्क परमिट नहीं है, उन्हें जाना ही पड़ेगा। अल्बर्टा के प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने और भी सख्त रवैया अपनाया है। उन्होंने कहा, स्टडी वीसा अस्थायी दस्तावेज है। विदेशी छात्र इस आधार पर कनाडा में हमेशा के लिए नहीं रह सकते हैं। हमारे कॉलेज पहले अल्बर्टा के टैक्सपेयर्स के लिए हैं। यहां पढ़ने वाले छात्रों को स्टडी पूरी करने के बाद अपने देश लौटना ही पड़ेगा। जहां तक नियमों की बात है, कनाडा आने वाले हरेक विदेशी छात्र को इन्हें मानना ही होगा। टेक्सास के हालिंग से 20 घंटे की फ्लाइट से नई दिल्ली भेजा जा रहा ह्यूमन राइट्स फर्स्ट संगठन के अनुसार भारतीयों को ओमानी एयरवेज से डिपोर्ट कर रहे हैं। टेक्सास के हालिंग से 20 घंटे की फ्लाइट से नई दिल्ली भेजा जा रहा है। इस साल डिपोर्टेशन उड़ानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पिछले साल अमेरिका ने सैन्य विमान हरक्यूलिस से डिपोर्ट किया था। 2025 में 3,567 भारतीय अमेरिका से डिपोर्ट हुए थे 2025 में अमेरिका ने 3,567 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया था। यह जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने जून 2026 में दी थी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि 2026 में जून तक 1,076 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया है। 5 फरवरी 2025 को अमेरिका ने पहली बार सैन्य विमान से 104 भारतीयों को अमृतसर भेजा था। इस दौरान कई लोगों को हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां लगी थीं। इसकी तस्वीरें सामने आने के बाद देशभर में विवाद हुआ। संसद में भी हंगामा हुआ था। ———— ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 15 हजार भारतीयों की छंटनी, नई जॉब नहीं:H-1B पर गए थे, ट्रम्प के सख्त नियम से अब डिपोर्ट का खतरा अमेरिका में 15 हजार भारतीय टेक कर्मियों की नौकरी जाने के बाद उनके सामने संकट खड़ा हो गया है। पूरी खबर पढ़ें…
सुविंदर विक्की ने कभी इंश्योरेंस पॉलिसी बेची थी:खाने तक के पैसे नहीं थे; ‘आवारापन 2’ के किरदार को अपनी जिंदगी से जुड़ा बताया

एक्टर सुविंदर विक्की हाल ही में फिल्म ‘आवारापन 2’ में दिखाई दिए। कभी वो एक थिएटर प्ले से मिले सिर्फ 5 हजार रुपए लेकर मुंबई पहुंचे थे, लेकिन पैसे जल्दी खत्म हो गए और उन्हें एक महीने के अंदर पंजाब लौटना पड़ा। मुंबई में एक समय ऐसा भी आया, जब उनके पास खाने तक के पैसे नहीं थे। गुजारा करने के लिए उन्होंने इंश्योरेंस पॉलिसी बेचीं और छोटे-मोटे काम किए। करीब एक दशक तक पंजाबी फिल्मों में छोटे किरदार निभाने के बाद उन्होंने ‘उड़ता पंजाब’ से हिंदी फिल्मों में कदम रखा। इसके बाद ‘केसरी’, ‘माइलस्टोन’, ‘कोहरा’ और ‘धुरंधर द रिवेंज’ जैसे प्रोजेक्ट्स में काम किया है। हाल ही में सुविंदर विक्की ने दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में अपनी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘आवारापन 2’ के बारे में बात की। पढ़िए इंटरव्यू की अहम बातें। सवाल: ‘आवारापन 2’ का हिस्सा बनने का मौका आपको कैसे मिला और जब आपको फिल्म ऑफर हुई तो पहला रिएक्शन क्या था? जवाब: मेरे लिए सबसे खुशी की बात यह है कि मैं ‘आवारापन 2’ से जुड़ा। करीब 18 साल पहले जब ‘आवारापन’ आई थी, तब उसने युवाओं के बीच एक अलग ही इमेज बनाई थी। फिल्म के म्यूजिक और इमरान हाशमी के काम को लेकर उस समय काफी चर्चा हुई थी। आज मेरी बेटी भी बड़ी हो गई है और वह भी ‘आवारापन’ को लेकर काफी एक्साइटेड रहती है। जैसे ही उसे पता चला कि मैं ‘आवारापन 2’ में काम कर रहा हूं, उसने फिल्म को लेकर बातें शुरू कर दीं। मेरे लिए यह एक बड़ी खुशी थी कि मैं उस फिल्म की दुनिया का हिस्सा बन रहा हूं, जिसे एक पीढ़ी ने इतना पसंद किया है। सवाल: ‘आवारापन 2’ में आपके किरदार जयदीप का अपना आंतरिक संघर्ष क्या है? जवाब: जयदीप का संघर्ष मुझे अपने जीवन के संघर्ष से काफी जुड़ा हुआ लगा। मेरी जिंदगी में भी एक समय यह द्वंद्व रहा कि क्या करना है, अभिनेता बनना है तो कैसे बनना है, कितनी स्ट्रगल करनी पड़ेगी, पैसे आएंगे या नहीं आएंगे, नौकरी के साथ यह काम करना पड़ेगा या पूरी तरह इसमें आना चाहिए। जयदीप के भीतर भी कुछ इसी तरह के सवाल हैं। वह सोचता है कि यहां रहूं या छोड़ दूं, साथ दूं या नहीं दूं। मुझे लगा कि उसके ये संघर्ष मेरे अपने संघर्षों से काफी मैच करते हैं। इसलिए मुझे इस किरदार से जुड़ना बहुत आसान लगा। सवाल: आपने अब तक कई ग्रे और नेगेटिव शेड्स वाले किरदार निभाए हैं। क्या अब कुछ अलग करने की इच्छा थी? जवाब: बिल्कुल। मन करता है कि कुछ अलग भी नजर आए। ऐसा नहीं है कि मैं रोमांस नहीं कर सकता। मेरा भी मन करता है कि पर्दे पर मेरी कोई हीरोइन हो, हम रोमांटिक सीन करें, तारों की छांव में बैठें या मैं उसके लिए मारधाड़ करूं और वह मेरे जख्मों पर मरहम लगाए। लेकिन फिर लगता है कि अगर हर कोई यही करेगा तो हम जो करते हैं, वह कौन करेगा? हमारे हिस्से में अच्छाई के साथ-साथ निगेटिविटी और बुराई को भी पर्दे पर उतारने की जिम्मेदारी आती है। सवाल: क्या किसी विलेन या ग्रे किरदार की सफलता का पैमाना यह है कि दर्शक उससे नफरत करने लगें? जवाब: बिल्कुल। एक विलेन तब कामयाब होता है, जब लोगों को उससे नफरत होने लगे। अगर आप किसी किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाते हैं और दर्शक उस किरदार को लेकर रिएक्ट करते हैं, उसकी तारीफ करते हैं या उससे डरते-नफरत करते हैं, तो एक अभिनेता के तौर पर वही आपकी सफलता है। सवाल: क्या किसी किरदार को निभाने के बाद उससे बाहर निकलने में आपको कभी परेशानी हुई है? जवाब: ऐसा बहुत ज्यादा नहीं हुआ, लेकिन ‘माइलस्टोन’ में गालिब का किरदार करते समय मुझे काफी पीठ दर्द रहता था। शूटिंग के बाद भी कुछ समय तक वह दर्द मेरे साथ रहा। फिर मैंने अपने दिमाग को यह समझाया कि आपने इतनी मेहनत की है, लगातार सीढ़ियां चढ़ते रहे हैं, इसलिए शरीर में कोई मसल खिंच गया होगा। पता नहीं सच में ऐसा था या मैंने अपने दिमाग को उस तरह सेट किया, लेकिन मेरे लिए वह तरीका काम कर गया। कई बार ऐसा भी होता है कि एक किरदार से निकलकर तुरंत दूसरे किरदार में जाना पड़ता है। जैसे मैंने बलबीर का किरदार किया और उसके बाद ‘सतलुज’ के लिए तैयारी करनी थी। ऐसे समय में अभिनेता को बहुत जल्दी स्विच ऑन और स्विच ऑफ करना पड़ता है। सवाल: पंजाबी सिनेमा, हिंदी फिल्मों और ओटीटी तीनों जगह काम करते हुए क्या आपकी एक्टिंग अप्रोच बदलती है? जवाब: मैं खुद को इस मामले में किस्मत वाला मानता हूं कि मुझे अक्सर ऐसा काम मिल जाता है, जो मुझे पसंद आता है। मेरे पास बहुत ज्यादा ऑप्शंस भी नहीं होते। अगर 8-10 स्क्रिप्ट आती हैं और उनमें से एक चुननी है तो मेरे लिए जो काम करने लायक है, मैं उसे करना चाहता हूं। चाहे किरदार एक सीन का हो, दो सीन का हो या 40 दिन का काम हो, मेरे लिए उसमें कुछ करने लायक जरूर होना चाहिए। अब तक मुझे जो काम मिला है, उसमें मैं खुद को काफी लकी मानता हूं। सवाल: इतने साल इंडस्ट्री में काम करने के बाद भी क्या आज काम मांगने में झिझक नहीं होती? जवाब: नहीं, काम मांगने में कैसी झिझक? यह मेरा काम है। मैंने अपनी खुशी से, पूरे होश-हवास में इस फील्ड को चुना है। भगवान को साक्षी मानकर तय किया है कि मुझे अभिनेता बनना है। अब मेरी ड्यूटी है कि मुझे हर किरदार को अपनी 100 प्रतिशत क्षमता के साथ निभाना है। लोगों को वह पसंद आए, यही मेरे लिए सबसे बड़ी बात है। मेरे लिए मेरे सारे किरदार एक जैसे हैं। कोई एक दूसरे से कम या ज्यादा नहीं है। सवाल: आगे ऐसा कौन-सा किरदार करना चाहते हैं, जो अभी तक नहीं मिला? जवाब: मैं ऐसा किरदार करना चाहता हूं, जो मेरी अपनी जिंदगी के ज्यादा करीब हो। मैंने पुलिस वाले काफी किए हैं। अब कोई ऐसा आम आदमी, इंश्योरेंस एजेंट जैसा किरदार, बिजनेसमैन या पिता की भूमिका जिसमें जिंदगी की सच्चाई और मेरे अपने अनुभवों की झलक हो ऐसा कुछ करना चाहूंगा। क्योंकि जब किरदार







