हाथ फ्रैक्चर था, अगले दिन विराट कोहली के साथ शूट:मिहिर आहूजा बोले- शाहरुख की तारीफ से लगा, मेहनत सही दिशा में जा रही है

जमशेदपुर से मुंबई आए मिहिर आहूजा ने एक्टिंग के लिए करीब चार साल तक ऑडिशन दिए। सुपर 30 से फिल्मी सफर शुरू हुआ, द आर्चीज से पहचान मिली और अब ऑपरेशन सफेद सागर में एयरफोर्स ऑफिसर के किरदार में नजर आ रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में मिहिर ने संघर्ष, रिजेक्शन, शाहरुख खान से मुलाकात और प्यार पैसा प्राफिट को लेकर हुई चर्चा पर बात की। सवाल: जमशेदपुर में रहते हुए एक्टिंग की तरफ आपका झुकाव कैसे हुआ? जवाब: मुझे याद नहीं कि मैंने कभी एक्टिंग के अलावा कुछ और करने के बारे में सोचा हो। सातवीं-आठवीं क्लास में ही तय कर लिया था कि मुझे एक्टर बनना है। घर के फंक्शन में मैं रिश्तेदारों की मिमिक्री करता था। लोग खुश होते थे और मुझे भी परफॉर्म करने में मजा आता था। वहीं से लगा कि मुझे यही करना है। सवाल: स्कूल के दिनों में जब आप एक्टिंग को लेकर इतने सीरियस थे, तो क्या लोगों ने आपका मजाक भी उड़ाया? जवाब: जमशेदपुर में मैंने एक छोटी-सी शॉर्ट फिल्म की थी। उसके बाद स्कूल में चर्चा होने लगी कि मैं फिल्म शूट करके आया हूं। उसी दौरान 10वीं में एक दिन मैं नोटबुक नहीं लेकर आया। टीचर ने मेरी नोटबुक डस्टबिन में फेंकते हुए कहा, ‘तुम खुद को सुपरस्टार समझते हो? तुम सुपरस्टार नहीं हो और कभी बन भी नहीं पाओगे।’ मैंने उसी दिन उनकी ये बात लिखकर रख ली थी। आज भी वो कागज मेरे पास है। उस दिन उन्होंने जो पत्थर मुझ पर फेंका था, मैंने उसी से अपनी इमारत बनाना सीख लिया। मैंने इंडिया गॉट टैलेंट में भी कोशिश की थी, लेकिन वहां से रिजेक्ट हो गया। उस समय दुख हुआ, लेकिन बाद में समझ आया कि रिजेक्शन इस फील्ड का हिस्सा है। सवाल: फिर मुंबई आने का फैसला कब किया? जवाब: 2017 में मैं मुंबई आया। हालांकि उससे पहले 10वीं के बाद छुट्टियों में भी मुंबई आया था। परिवार के साथ आकर देखा कि ऑडिशन कहां होते हैं। मैंने कई जगह अपना परिचय दिया। जमशेदपुर लौटने के बाद भी एड्स के लिए ऑडिशन आने लगे। इससे भरोसा बढ़ा कि अगर कोशिश करता रहूंगा तो कुछ न कुछ जरूर होगा। सवाल: मुंबई आने के बाद आपने पढ़ाई और ऑडिशन दोनों कैसे संभाले? जवाब: मैं कॉलेज के लिए मुंबई आया था, इसलिए रूटीन बन गया था- सुबह कॉलेज और शाम को ऑडिशन। यही मेरे लिए अच्छा रहा। अगर मैं सिर्फ एक्टिंग के लिए आता और काम नहीं मिलता तो शायद बहुत मुश्किल होती। मैंने ऑडिशन देने के अपने तरीके भी निकाल लिए थे। कई बार दोस्तों या आसपास के लोगों को नहीं बताता था कि एक्टर बनने आया हूं। ऑडिशन के कपड़े बैग में रखता और कह देता था कि ट्यूशन के लिए जा रहा हूं। सवाल: इतने साल ऑडिशन देने के बाद पहला बड़ा मौका कैसे मिला? जवाब: करीब चार साल तक ऑडिशन देने के बाद मुझे विराट कोहली के साथ कोलगेट का एड मिला। लेकिन शूट से एक दिन पहले मेरा एक्सीडेंट हो गया। बाइक ने मुझे टक्कर मार दी और मेरा हाथ फ्रैक्चर हो गया। अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टर ने आराम करने को कहा। लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ यही था कि अगले दिन मेरा पहला बड़ा शूट है, वह भी विराट कोहली के साथ। मैंने डॉक्टर से कहा कि प्लास्टर मत कीजिए, मुझे शूट करना है। पेनकिलर लेकर अगले दिन शूट पर चला गया। सवाल: उसके बाद फिल्म में पहला मौका कब मिला? जवाब: सुपर 30 से मेरा फिल्मी सफर शुरू हुआ। ऋतिक रोशन के साथ काम करने का मौका मिला। हालांकि फिल्म में मेरा रोल छोटा रह गया और मेरे हिस्से का काफी काम एडिट हो गया। लेकिन मेरे लिए वह बड़ा अनुभव था। सवाल: सुपर 30 के बाद भी आपको पहचान मिलने में समय लगा? जवाब: हां, मैंने उसके बाद भी काम किया। मेड इन हेवन, फील्स लाइक इश्क और दूसरे प्रोजेक्ट किए। लेकिन द आर्चीज के बाद चीजें बदलीं। फिल्म में मुझे जुगहेड जोन्स का किरदार मिला और लोगों ने मुझे नोटिस किया। सवाल: द आर्चीज के दौरान शाहरुख खान से मुलाकात का मौका भी मिला? जवाब: हां, वह मेरे लिए खास अनुभव था। शाहरुख सर से मिलना अपने आप में बड़ी बात थी। मैं उन्हें देखकर बड़ा हुआ हूं। द आर्चीज के प्रीमियर में उनसे मिलने और बात करने का मौका मिला। उन्होंने मेरे काम को लेकर जो बातें कहीं, वह मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं। उन्होंने कहा था- बेटा, बस अच्छा काम करते रहो, यही मैंने भी किया है।ऐसे पलों से आपको लगता है कि आपकी मेहनत सही दिशा में जा रही है। सवाल: इसके बाद प्यार पैसा प्राफिट में महवश के साथ काम किया। इस शो को लेकर काफी बातें हुईं, खासकर इंटिमेट सीन को लेकर, क्या कहना चाहोगे? जवाब: वह बात काफी बढ़ा-चढ़ाकर कही गई। शो में ऐसा कोई इंटिमेट सीन नहीं था, जैसा सोशल मीडिया के कुछ थंबनेल में दिखाया गया। एक किसिंग सीन भी था, जिसे हमने चीट करके शूट किया था। असल में कहानी अच्छी थी और मुझे अपना किरदार पसंद आया, इसलिए मैंने शो किया। कुछ लोगों ने सिर्फ व्यूज के लिए चीजों को अलग तरह से पेश किया। सवाल: इसी शो के दौरान आपको ऑपरेशन सफेद सागर का ऑफर मिला? जवाब: हां। जब प्यार पैसा प्राफिट की शूटिंग चल रही थी, उसी दौरान मुझे ऑपरेशन सफेद सागर के ऑडिशन का फोन आया। पहले मुझसे मूंछों में तस्वीरें मांगी गईं। मैंने मूंछ रखकर फोटो भेजी और सोचा कि पता नहीं कैसा किरदार होगा। बाद में पता चला कि एयरफोर्स ऑफिसर का रोल है। स्क्रिप्ट पढ़ी तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए। यह कारगिल युद्ध और एयरफोर्स की एक सच्ची कहानी से जुड़ी है। मुझे लगा कि ऐसा किरदार करने का मौका छोड़ना नहीं चाहिए। सवाल: एयरफोर्स ऑफिसर बनने के लिए सबसे अलग अनुभव क्या रहा? जवाब: असली एयरफोर्स स्टेशन पर शूट करना। फाइटर जेट के सामने खड़े होना और कॉकपिट में बैठना मेरे लिए अविश्वसनीय था। कॉकपिट में इतने कंट्रोल थे कि मैं सोच रहा था कि पायलट इन्हें याद कैसे रखते हैं। जिस मिग में मैं बैठा, वह कारगिल युद्ध के समय इस्तेमाल हुआ था। उसे देखकर एहसास होता
अमिताभ बच्चन ने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी:हाथ में तिरंगा पकड़कर जोर से वंदे मातरम कहा

बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान वह हाथ में तिरंगा पकड़े हुए नजर आए और उन्होंने जोर से वंदे मातरम कहा।
अमिताभ बच्चन ने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी:हाथ में तिरंगा पकड़कर जोर से वंदे मातरम कहा

बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान वह हाथ में तिरंगा पकड़े हुए नजर आए और उन्होंने जोर से वंदे मातरम कहा।
विद्युत जामवाल का देसी मार्शल आर्ट अंदाज:स्वतंत्रता दिवस पर शेयर किया वीडियो, गतका के वड़ा-चक्कर से दिखाया हुनर; 16 अक्टूबर को रिलीज होगी 'स्ट्रीट फाइटर'

बॉलीवुड एक्टर और मार्शल आर्टिस्ट विद्युत जामवाल अपने फिजिकल हुनर से चर्चा में हैं। स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया, जिसमें वे भारत की पारंपरिक मार्शल आर्ट गतका के खास हथियार ‘वड़ा-चक्कर’ का इस्तेमाल करते नजर आए। विद्युत ने बताया कि इस हथियार को नियंत्रित करने और इसकी घूमने की गति समझने के लिए वर्षों की प्रैक्टिस जरूरी होती है। उनका यह अंदाज हॉलीवुड फिल्म ‘स्ट्रीट फाइटर’ के किरदार धालसिम से भी जुड़ता है। फिल्म में विद्युत भारतीय योगी और मार्शल आर्टिस्ट धालसिम का किरदार निभा रहे हैं। विद्युत जामवाल सिर्फ फिल्मों में एक्शन करने वाले अभिनेता नहीं हैं, बल्कि मार्शल आर्ट उनकी पहचान का अहम हिस्सा है। यही वजह है कि ‘स्ट्रीट फाइटर’ में भारतीय फाइटर धालसिम के किरदार में नजर आने को लेकर उनके प्रशंसकों में खास उत्साह है। स्वतंत्रता दिवस पर शेयर किए वीडियो में विद्युत ने दिखाया कि भारतीय मार्शल आर्ट की बारीकियों पर उनकी मजबूत पकड़ है। वीडियो में विद्युत ‘वड़ा-चक्कर’ का इस्तेमाल करते दिखाई देते हैं। यह गतका से जुड़ा पारंपरिक हथियार है। इसे तेजी से घुमाते हुए नियंत्रण बनाए रखना आसान नहीं होता। विद्युत बताते हैं कि इसकी घूमने की गति और मोमेंटम समझने में लंबे समय की ट्रेनिंग लगती है। उनके मूवमेंट में स्पीड के साथ संतुलन और सटीकता भी नजर आती है। विद्युत ने सिर्फ गतका के इस हथियार का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि भारतीय मार्शल आर्ट की अलग-अलग परंपराओं के बीच समानताओं की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने वड़ा-चक्कर की तुलना केरल की पारंपरिक मार्शल आर्ट कलरिपयट्टू के ‘उरुमी’ से की। दोनों हथियारों की अलग तकनीक और इस्तेमाल का तरीका है, लेकिन इनके साथ काम करने के लिए शरीर के संतुलन, गति और नियंत्रण की जरूरत होती है। धालसिम से जुड़ता है विद्युत का असली हुनर ‘स्ट्रीट फाइटर’ में विद्युत जामवाल धालसिम की भूमिका निभा रहे हैं। पैरामाउंट पिक्चर्स की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक फिल्म में उनका किरदार धालसिम है। गेम की दुनिया में धालसिम भारतीय योगी और मार्शल आर्टिस्ट के तौर पर जाना जाता है। उसकी पहचान सिर्फ लड़ाई की तकनीक से नहीं, बल्कि योग, अनुशासन और आध्यात्मिक सोच से भी जुड़ी है। ऐसे में विद्युत की असल जिंदगी की मार्शल आर्ट ट्रेनिंग इस किरदार को अलग तरह की प्रामाणिकता देती है। विद्युत लंबे समय से अलग-अलग भारतीय मार्शल आर्ट और फिजिकल ट्रेनिंग का अभ्यास करते रहे हैं। फिल्मों में भी उनकी पहचान ऐसे एक्टर की रही है, जो एक्शन सीक्वेंस में स्टंट और मार्शल आर्ट खुद करने के लिए जाने जाते हैं। अब हॉलीवुड की बड़ी गेम-फ्रेंचाइजी में भारतीय फाइटर का किरदार निभाना उनके करियर का बड़ा पड़ाव माना जा रहा है। हॉलीवुड में विद्युत का डेब्यू ‘स्ट्रीट फाइटर’ विद्युत जामवाल का हॉलीवुड डेब्यू है। फिल्म में उनके साथ नोआ सेंटीनियो, एंड्रयू कोजी, कैलिना लियांग, जेसन मोमोआ, 50 सेंट, कोडी रोड्स और डेविड डास्टमालचियन जैसे कलाकार नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन किताओ सकुराई ने किया है। फिल्म की कहानी 1993 के दौर में सेट है। इसमें चन-ली, रयू और केन को एक नए वर्ल्ड वॉरियर टूर्नामेंट में शामिल होने के लिए बुलाती हैं। टूर्नामेंट आगे चलकर बड़ी साजिश का हिस्सा बन जाता है और किरदारों को न सिर्फ अपने विरोधियों, बल्कि अपने अतीत का भी सामना करना पड़ता है। फिल्म का ट्रेलर अप्रैल 2026 में रिलीज हो चुका है, जिसमें विद्युत धालसिम के रूप में नजर आए। ट्रेलर के बाद उनके किरदार और एक्शन को लेकर भारतीय दर्शकों में खास दिलचस्पी देखने को मिली। 16 अक्टूबर को रिलीज होगी फिल्म ‘स्ट्रीट फाइटर’ 16 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। पैरामाउंट पिक्चर्स ने भी फिल्म की रिलीज डेट यही बताई है। भारत में फिल्म अंग्रेजी के साथ हिंदी, तमिल और तेलुगु में भी रिलीज होगी। स्वतंत्रता दिवस पर विद्युत का भारतीय मार्शल आर्ट प्रदर्शित करना सिर्फ सोशल मीडिया वीडियो नहीं, बल्कि उनके आने वाले हॉलीवुड किरदार से भी जुड़ा खास क्षण है। धालसिम जैसे भारतीय किरदार को निभाने वाले अभिनेता का देश की पारंपरिक युद्ध कलाओं को दुनिया के सामने दिखाना फिल्म के भारतीय कनेक्शन को और मजबूत करता है।
विद्युत जामवाल का देसी मार्शल आर्ट अंदाज:स्वतंत्रता दिवस पर शेयर किया वीडियो, गतका के वड़ा-चक्कर से दिखाया हुनर; 16 अक्टूबर को रिलीज होगी 'स्ट्रीट फाइटर'

बॉलीवुड एक्टर और मार्शल आर्टिस्ट विद्युत जामवाल अपने फिजिकल हुनर से चर्चा में हैं। स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया, जिसमें वे भारत की पारंपरिक मार्शल आर्ट गतका के खास हथियार ‘वड़ा-चक्कर’ का इस्तेमाल करते नजर आए। विद्युत ने बताया कि इस हथियार को नियंत्रित करने और इसकी घूमने की गति समझने के लिए वर्षों की प्रैक्टिस जरूरी होती है। उनका यह अंदाज हॉलीवुड फिल्म ‘स्ट्रीट फाइटर’ के किरदार धालसिम से भी जुड़ता है। फिल्म में विद्युत भारतीय योगी और मार्शल आर्टिस्ट धालसिम का किरदार निभा रहे हैं। विद्युत जामवाल सिर्फ फिल्मों में एक्शन करने वाले अभिनेता नहीं हैं, बल्कि मार्शल आर्ट उनकी पहचान का अहम हिस्सा है। यही वजह है कि ‘स्ट्रीट फाइटर’ में भारतीय फाइटर धालसिम के किरदार में नजर आने को लेकर उनके प्रशंसकों में खास उत्साह है। स्वतंत्रता दिवस पर शेयर किए वीडियो में विद्युत ने दिखाया कि भारतीय मार्शल आर्ट की बारीकियों पर उनकी मजबूत पकड़ है। वीडियो में विद्युत ‘वड़ा-चक्कर’ का इस्तेमाल करते दिखाई देते हैं। यह गतका से जुड़ा पारंपरिक हथियार है। इसे तेजी से घुमाते हुए नियंत्रण बनाए रखना आसान नहीं होता। विद्युत बताते हैं कि इसकी घूमने की गति और मोमेंटम समझने में लंबे समय की ट्रेनिंग लगती है। उनके मूवमेंट में स्पीड के साथ संतुलन और सटीकता भी नजर आती है। विद्युत ने सिर्फ गतका के इस हथियार का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि भारतीय मार्शल आर्ट की अलग-अलग परंपराओं के बीच समानताओं की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने वड़ा-चक्कर की तुलना केरल की पारंपरिक मार्शल आर्ट कलरिपयट्टू के ‘उरुमी’ से की। दोनों हथियारों की अलग तकनीक और इस्तेमाल का तरीका है, लेकिन इनके साथ काम करने के लिए शरीर के संतुलन, गति और नियंत्रण की जरूरत होती है। धालसिम से जुड़ता है विद्युत का असली हुनर ‘स्ट्रीट फाइटर’ में विद्युत जामवाल धालसिम की भूमिका निभा रहे हैं। पैरामाउंट पिक्चर्स की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक फिल्म में उनका किरदार धालसिम है। गेम की दुनिया में धालसिम भारतीय योगी और मार्शल आर्टिस्ट के तौर पर जाना जाता है। उसकी पहचान सिर्फ लड़ाई की तकनीक से नहीं, बल्कि योग, अनुशासन और आध्यात्मिक सोच से भी जुड़ी है। ऐसे में विद्युत की असल जिंदगी की मार्शल आर्ट ट्रेनिंग इस किरदार को अलग तरह की प्रामाणिकता देती है। विद्युत लंबे समय से अलग-अलग भारतीय मार्शल आर्ट और फिजिकल ट्रेनिंग का अभ्यास करते रहे हैं। फिल्मों में भी उनकी पहचान ऐसे एक्टर की रही है, जो एक्शन सीक्वेंस में स्टंट और मार्शल आर्ट खुद करने के लिए जाने जाते हैं। अब हॉलीवुड की बड़ी गेम-फ्रेंचाइजी में भारतीय फाइटर का किरदार निभाना उनके करियर का बड़ा पड़ाव माना जा रहा है। हॉलीवुड में विद्युत का डेब्यू ‘स्ट्रीट फाइटर’ विद्युत जामवाल का हॉलीवुड डेब्यू है। फिल्म में उनके साथ नोआ सेंटीनियो, एंड्रयू कोजी, कैलिना लियांग, जेसन मोमोआ, 50 सेंट, कोडी रोड्स और डेविड डास्टमालचियन जैसे कलाकार नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन किताओ सकुराई ने किया है। फिल्म की कहानी 1993 के दौर में सेट है। इसमें चन-ली, रयू और केन को एक नए वर्ल्ड वॉरियर टूर्नामेंट में शामिल होने के लिए बुलाती हैं। टूर्नामेंट आगे चलकर बड़ी साजिश का हिस्सा बन जाता है और किरदारों को न सिर्फ अपने विरोधियों, बल्कि अपने अतीत का भी सामना करना पड़ता है। फिल्म का ट्रेलर अप्रैल 2026 में रिलीज हो चुका है, जिसमें विद्युत धालसिम के रूप में नजर आए। ट्रेलर के बाद उनके किरदार और एक्शन को लेकर भारतीय दर्शकों में खास दिलचस्पी देखने को मिली। 16 अक्टूबर को रिलीज होगी फिल्म ‘स्ट्रीट फाइटर’ 16 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। पैरामाउंट पिक्चर्स ने भी फिल्म की रिलीज डेट यही बताई है। भारत में फिल्म अंग्रेजी के साथ हिंदी, तमिल और तेलुगु में भी रिलीज होगी। स्वतंत्रता दिवस पर विद्युत का भारतीय मार्शल आर्ट प्रदर्शित करना सिर्फ सोशल मीडिया वीडियो नहीं, बल्कि उनके आने वाले हॉलीवुड किरदार से भी जुड़ा खास क्षण है। धालसिम जैसे भारतीय किरदार को निभाने वाले अभिनेता का देश की पारंपरिक युद्ध कलाओं को दुनिया के सामने दिखाना फिल्म के भारतीय कनेक्शन को और मजबूत करता है।
छोटा आर्टिस्ट हूं इसलिए नहीं बुलाते:कोलकाता फिल्म फेस्टिवल का न्योता न मिलने से नाराज मिथुन चक्रवर्ती, मोस्को से इनवाइट मिला; कुछ दिन पहले हुए थे भर्ती

मिथुन चक्रवर्ती ने कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (KIFF) में न्योता नहीं मिलने पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने गुरुवार, 13 अगस्त को कोलकाता में इससे जुड़ी बैठक के बाद इस मामले पर मीडिया से बात की। एक्टर ने बंगाल और भारतीय सिनेमा से अपने लंबे जुड़ाव का जिक्र करते हुए पूछा कि उन्हें फेस्टिवल में शामिल क्यों नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि वे मॉस्को जा रहे हैं, जहां उन्हें एक फिल्म फेस्टिवल में बुलाया गया है। मॉस्को से बुलावा आया और बंगाल में न्योता तक नहीं एएनआई के मुताबिक, मिथुन ने कहा, “मुझे निकाल दिया गया। मुझे फिल्म फेस्टिवल में नहीं बुलाया गया। मैं अब मॉस्को जा रहा हूं, मुझे वहां सम्मान देने के लिए बुलाया गया है, लेकिन यहां बंगाल में मुझे न्योता नहीं दिया गया। मैं बहुत छोटा आर्टिस्ट हूं, शायद वो इसलिए नहीं बुलाते। वे बाहर के बड़े-बड़े लोगों को बुलाते हैं, जिनका बंगाल से बिल्कुल कोई लेना-देना नहीं है। बोलिए, हम कोई डरते नहीं हैं।” बठक में बंगाली फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई लोग मौजूद थे। इनमें प्रसेनजीत चटर्जी, रुद्रनील घोष, अरिंदम सिल, शांतिलाल मुखर्जी, कंचन मल्लिक, श्रीजीत मुखर्जी और शंकर चक्रवर्ती शामिल थे। कोलकाता फिल्म फेस्टिवल 8 से 13 सितंबर तक होंगे। मिथुन चक्रवर्ती ने गुरुवार को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से भी मुलाकात की थी। कुछ दिन पहले अस्पताल में थे भर्ती, सर्जरी हुई सीनियर एक्टर और भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती की हाल ही में सर्जरी हुई। इसके बाद पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी भी कोलकाता के एक निजी अस्पताल में मिथुन चक्रवर्ती से मिलने पहुंचे थे। न्यूज एजेंसी PTI के सूत्रों के अनुसार, मिथुन चक्रवर्ती के शरीर में पहले लगाई गई धातु (मेटल) की प्लेट को निकाला गया। यह प्लेट एक पुराने हादसे के बाद लगाई गई थी। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा, फेमस फिल्म एक्टर और भाजपा की केंद्रीय समिति के सदस्य मिथुन चक्रवर्ती स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं। आज मैं उनसे मिलने अस्पताल गया। मैंने उनसे बातचीत की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। मैं ईश्वर से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। 2024 में भी अस्पताल में भर्ती हुए थे इससे पहले फरवरी 2024 में मिथुन चक्रवर्ती को ब्रेन स्ट्रोक और सीने में दर्द की शिकायत के बाद कोलकाता के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय भी शुभेंदु अधिकारी अस्पताल पहुंचकर मिथुन चक्रवर्ती से मिले थे और उनका हालचाल जाना था। मिथुन चक्रवर्ती पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार किया था, जिसमें भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस को हराकर राज्य में सरकार बनाई। एक नजर मिथुन चक्रवर्ती के फिल्मी करियर पर मिथुन चक्रवर्ती ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साल 1976 में निर्देशक मृणाल सेन की फिल्म मृगया से की थी। पहली ही फिल्म में उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। इसके बाद उन्होंने हिंदी और बंगाली सिनेमा में कई यादगार फिल्में कीं। डिस्को डांसर उनके करियर की सबसे बड़ी हिट साबित हुई। अपने लंबे करियर में मिथुन ने सुरक्षा, प्यार झुकता नहीं, गुलामी, डांस डांस, प्यार का मंदिर, गुरु, गोलमाल 3, हाउसफुल 2, ओएमजी, किक, द ताशकंद फाइल्स और द कश्मीर फाइल्स जैसी कई फिल्मों में काम किया। मिथुन चक्रवर्ती को अब तक तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, 2 फिल्मफेयर पुरस्कार और साल 2024 में पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है। ……… मिथुन चक्रवर्ती से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… मिथुन चक्रवर्ती@76, कभी बिल्डिंग की टंकी-फुटपाथ पर सोए: झूठ से खतरे में डाली ऋषि कपूर की जान, राजकुमार देखकर बोले- किस स्ट्रगलिंग एक्टर को उठा लाए
आवारापन-2 से आधी कमाई भी नहीं कर सकी बंटवारा 1947:क्लैश के बावजूद इमरान हाशमी के करियर की हाईएस्ट ओपनिंग फिल्म बनी, जानिए कैसी हुई कमाई

इमरान हाशमी की ‘आवारापन 2’ और सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ 14 अगस्त को एक ही दिन रिलीज हुईं। इस बॉक्स ऑफिस क्लैश में इमरान हाशमी की फिल्म ने सनी देओल की बंटवारा को पछाड़ते हुए ज्यादा कमाई की है। इमरान हाशमी के करियर की हाईएस्ट ओपनिंग वाली फिल्म बनी इंडस्ट्री ट्रैकर वेबसाइड Sacnilk के मुताबिक, ‘आवारापन 2’ ने रिलीज के पहले दिन 21 करोड़ रुपए से ज्यादा नेट कलेक्शन किया। यह इमरान हाशमी के करियर की सबसे बड़ी ओपनिंग वाली फिल्म बन गई है। ‘आवारापन 2’ ने पहले दिन खत्म होने से पहले ही 2007 में रिलीज हुई पहली फिल्म ‘आवारापन’ की पूरी लाइफटाइम कमाई को पार कर लिया। यह फिल्म 2026 में बॉलीवुड की सबसे बड़ी ओपनिंग वाली फिल्मों में शामिल होने की ओर बढ़ रही है। ‘आवारापन 2’ का ग्रॉस कलेक्शन 25.20 करोड़ रुपए पहुंच गया है। विदेशों में फिल्म ने 2 करोड़ रुपए कमाए हैं। इस तरह इसकी कुल वर्ल्डवाइड ग्रॉस कमाई 27.20 करोड़ रुपए हो गई है। 2007 में रिलीज हुई पहली ‘आवारापन’ बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी। उसने अपनी पूरी लाइफटाइम कमाई में सिर्फ 7.76 करोड़ रुपए जुटाए थे। ‘आवारापन 2’ ने इस आंकड़े तक पहुंचने में सिर्फ 8 घंटे लिए। इमरान की दो फिल्मों की ओपनिंग का रिकॉर्ड टूटा ‘आवारापन 2’ के टिकट शुक्रवार को बुक माय शो पर हर घंटे 20 हजार से ज्यादा बिके। फिल्म की मौजूदा रफ्तार के आधार पर इसके जल्द ही 50 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार करने की बात कही जा रही है। वीकेंड में फिल्म की कमाई में उछाल देखने मिल सकता है। अब तक इमरान हाशमी की सिर्फ दो फिल्मों ने डबल डिजिट ओपनिंग की थी। 2012 में ‘राज 2’ ने पहले दिन 10.35 करोड़ रुपए कमाए थे। 2017 में ‘बादशाहो’ ने रिलीज के दिन 12.60 करोड़ रुपए कमाकर यह रिकॉर्ड तोड़ा था। ‘आवारापन 2’ अपनी ओपनिंग रफ्तार के साथ इन दोनों फिल्मों से आगे निकल गई है। ‘आवारापन 2’ में इमरान का पुराना किरदार नितिन कक्कड़ के निर्देशन और विशेष भट्ट के प्रोडक्शन में बनी ‘आवारापन 2’ में इमरान हाशमी ‘शिवम पंडित’ के अपने मशहूर किरदार में लौटे हैं। फिल्म में शबाना आजमी, दिशा पाटनी और सुविंदर विक्की भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म को मिले-जुले से लेकर अच्छे रिव्यू मिले हैं। इमरान हाशमी की एक्टिंग और फिल्म के माहौल की खास तौर पर तारीफ हुई है। ‘बंटवारा 1947’ का पहले दिन का कलेक्शन दूसरी तरफ, सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ ने भारत में ओपनिंग डे पर अब तक 5.75 करोड़ रुपए नेट कमाए हैं। ट्रेड ट्रैकर Sacnilk के अनुसार, भारत में इसका ग्रॉस कलेक्शन 6.84 करोड़ रुपए है। विदेशों में फिल्म ने 1.50 करोड़ रुपए कमाए हैं। इससे इसकी कुल वर्ल्डवाइड कमाई 8.34 करोड़ रुपए हो गई है। फिल्म देशभर में 8,721 शो में चल रही है। ‘बंटवारा 1947’ की पहले दिन ऑक्यूपेंसी ‘बंटवारा 1947’ के हिंदी 2D वर्जन ने ओपनिंग डे पर कुल 10.73% ऑक्यूपेंसी दर्ज की। सुबह के शो में ऑक्यूपेंसी 7.54% रही। दोपहर के शो में यह बढ़कर 12.31% हो गई। शाम और रात के शो में इससे थोड़ी ज्यादा ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई। फिल्म की कहानी और स्टारकास्ट राजकुमार संतोषी की ‘बंटवारा 1947’ भारत के बंटवारे की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म में सनी देओल ने सिकंदर मिर्जा का रोल निभाया है। फिल्म में प्रीति जिंटा, शबाना आजमी, करण देओल, अली फजल, अभिमन्यु सिंह, मिथुन चक्रवर्ती, रुखसार रहमान और दीया मिर्जा भी हैं। आमिर खान प्रोडक्शंस के तहत आमिर खान और अपर्णा पुरोहित ने फिल्म को प्रोड्यूस किया है। फिल्म का संगीत एआर रहमान ने दिया है और गानों के बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं।
पंजाबी फिल्मों पर बयान देकर घिरीं वामिका गब्बी:बोलीं-'सिर्फ पैसों के लिए कीं फिल्में, दिल से काम करने का नहीं मन; अब हो रहीं ट्रोल

पंजाबी सिनेमा से अपने अभिनय करियर की शुरुआत कर आज बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री तक अपनी पहचान बना चुकी मोहाली की बेटी और मशहूर अभिनेत्री वामिका गब्बी अपने एक विवादित बयान को लेकर चौतरफा घिर गई हैं। पंजाबी फिल्मों को लेकर दिए गए उनके एक बयान ने पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री और सोशल मीडिया पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में जब वामिका से उन प्रोजेक्ट्स के बारे में पूछा गया जो उन्होंने सिर्फ पैसों के लिए किए थे, तो उन्होंने बेबाकी से कुबूल किया कि उन्होंने कई पंजाबी फिल्में केवल पैसों और इंडस्ट्री में बने रहने (Survival) के लिए की थीं, क्योंकि उस समय उनके पास कोई और विकल्प नहीं था और न ही उन किरदारों को करने में उनका दिल या कोई खास दिलचस्पी थी। वामिका के इस बयान के सामने आते ही पंजाबी सिनेमा प्रेमियों और फिल्म समीक्षकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिस पंजाबी इंडस्ट्री ने बाल कलाकार से सीधे बतौर मुख्य अभिनेत्री ब्रेक देकर वामिका को बॉलीवुड तक का रास्ता दिखाया, आज वही अदाकारा इतनी जल्दी अपने पांव पीछे खींचकर उसी सिनेमा का अनादर कर रही है। हालांकि ये इंटरव्यू 2 साल पुराना है। लेकिन, ट्रोलरों ने इसे अब फिर से वायरल कर वामिका के बयान को गलत बताया है। ट्रोलर कह रहे हैं कि वामिका को हनी सिंह, अमरिंदर गिल जैसे कलाकारों का आभारी होना चाहिए, जिनके कारण उन्हें ये मुकाम मिला। लेकिन, इसके उलट वामिका ने शोहरत हासिल करने के लिए पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री को ही कटघरे में ला खड़ा किया। ‘सर्वाइव करना था, इसलिए बिना दिल के कीं पंजाबी फिल्में’- वामिका का विवादित बयान इंटरव्यू के दौरान पूछे गए सवाल पर वामिका गब्बी ने बिना किसी झिझक के कहा: “अ फ्यू पंजाबी फिल्म्स आई हैव डन एंड आल्सो बिकॉज़ आई डिडन्ट हैव एनी अदर फिल्म्स। एंड इट्स नॉट लाइक जस्ट फॉर मनी, बट कुछ और था ही नहीं। तो सर्वाइव तो करना ही है ना, तो वो कर लिया जिसमें इतना दिल नहीं था। इतना मजे कैरेक्टर में इतना कुछ था नहीं बस है, तो कर लिया। लेकिन अब नहीं करना।” ट्रोलर्स का कहना है कि वामिका के इस कुबूलनामे से साफ झलकता है कि जिन पंजाबी फिल्मों के दम पर उन्होंने स्टारडम हासिल किया, उनके प्रति उनका रुझान महज एक मजबूरी और आर्थिक जरूरत तक ही सीमित था। ‘तू मेरा 22 मैं तेरा 22’ से मिली थी बतौर एक्ट्रेस बनाई पहचान वामिका गब्बी ने ‘जब वी मेट’ जैसी कई बड़ी हिंदी फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम जरूर किया था, लेकिन बतौर मुख्य अभिनेत्री उन्हें पहला बड़ा ब्रेक पंजाबी सिनेमा से ही मिला था। डेब्यू फिल्म: साल 2013 में आई सुपरहिट पंजाबी फिल्म ‘तू मेरा 22 मैं तेरा 22’ से उन्होंने लीड एक्ट्रेस के रूप में कदम रखा था, जिसमें उनके साथ पंजाबी सिंगर-एक्टर अमरिंदर गिल और यो यो हनी सिंह मुख्य भूमिका में थे। प्रमुख पंजाबी फिल्में: इसके बाद वामिका ने ‘इश्क बरांडी’, ‘निक्का जैलदार 2’, ‘निक्का जैलदार 3’, ‘प्रौणा’, ‘नाडू खान’, ‘दिल दीयां गल्लां’, ‘दूरबीन’ और ‘गल वक्कड़ी’ जैसी एक से बढ़कर एक कई कमर्शियल सुपरहिट फिल्मों में काम किया। पंजाबी सिनेमा से पैन इंडिया स्टार बनने तक का सफर पंजाबी इंडस्ट्री में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने के बाद वामिका ने साउथ इंडियन सिनेमा और फिर हिंदी वेब सीरीज व फिल्मों में अपने पैर पसारे। प्रमुख पैन इंडिया प्रोजेक्ट्स: ‘ग्रहण’, ’83’, ‘खुफिया’, ‘जवान’ (कैमियो) और ‘बचक माफ’ जैसी बड़ी फिल्मों व वेब सीरीज के जरिए वामिका की पहचान पैन इंडिया लेवल पर बेहद मजबूत हुई। ईमानदार कुबूलनामा या एहसानफरामोशी? सोशल मीडिया पर बंटी राय वामिका गब्बी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस छिड़ गई है: एक वर्ग का कहना: कई फैंस और समीक्षकों का मानना है कि वामिका जिस पंजाबी सिनेमा की बदौलत आज इस मुकाम पर पहुंची हैं, आज उसी को ‘सिर्फ पैसों के लिए किया काम’ बताकर वह एहसान फरामोश साबित हो रही हैं और अपने शुरुआती दौर को भूल चुकी हैं। दूसरा वर्ग: वहीं कुछ लोगों का मानना है कि वामिका ने किसी बनावटीपन के बिना एक कलाकार के तौर पर अपनी जिंदगी के स्ट्रगल फेज को लेकर एक बेहद ईमानदार कुबूलियत की है, जिसे सकारात्मक रूप से देखा जाना चाहिए। फिलहाल, वामिका गब्बी का यह बयान पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है और अब देखना यह होगा कि पंजाबी सिनेमा के दिग्गज कलाकार और निर्माता इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
दावा- चीनी सामान भारत के रास्ते अमेरिका भेजा जा रहा:टैरिफ से बचने की कोशिश; अमेरिकी रिपोर्ट में पुणे, गुजरात और चेन्नई नेटवर्क का हिस्सा

अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए चीनी प्रोडक्ट्स को भारत के रास्ते अमेरिकी बाजारों में पहुंचाया जा रहा है। यह दावा व्हाइट हाउस की रिपोर्ट ‘द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम: राइज, स्कोप एंड कॉस्ट्स’ में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से आने वाले सामान या पार्ट्स को पहले भारत समेत दूसरे एशियाई देशों में भेजा जाता है। वहां उन्हें प्रोसेस, असेंबल या किसी दूसरे प्रोडक्ट में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद तैयार सामान को अमेरिका निर्यात किया जाता है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इससे चीन पर लगाए गए टैरिफ से बचने का रास्ता मिल सकता है। रिपोर्ट में इसके लिए दुनिया भर में ट्रेड रूट्स का नेटवर्क बनने की बात कही गई है। भारत के पुणे, गुजरात और चेन्नई को चीन से आने वाले सामान के एक अहम रास्ते के तौर पर बताया गया है। रिपोर्ट में यहां बनने वाले इंडस्ट्रियल पंप और कंप्रेसर में चीनी पार्ट्स का इस्तेमाल होने की संभावना का खास तौर पर जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में रूट नेटवर्क को ‘अग्ली सिस्टर सिटीज’ कहा गया चीनी सामान को तीसरे देशों के जरिए अमेरिका भेजने के लिए इस्तेमाल हो रहे रूट नेटवर्क को रिपोर्ट में ‘अग्ली सिस्टर सिटीज’ कहा गया है। इसका मतलब शहरों की सुंदरता या बदसूरती से नहीं है। यह शब्द अलग-अलग देशों के ऐसे औद्योगिक शहरों के लिए इस्तेमाल किया गया है, जहां एक जैसे प्रोडक्ट बनते हैं और वे अमेरिकी बाजार में एक-दूसरे से मुकाबला करते हैं। भारत के मामले में रिपोर्ट ने पुणे, गुजरात और चेन्नई की तुलना अमेरिका के ओहायो राज्य के सिनसिनाटी, डेटन और कोलंबस से की है। इन अमेरिकी शहरों में भी पंप, कंप्रेसर और दूसरे औद्योगिक सामान का उत्पादन और कारोबार होता है। रिपोर्ट का तर्क है कि अगर तीसरे देशों के जरिए कम टैरिफ पर सामान अमेरिका पहुंचता है, तो वहां के स्थानीय निर्माताओं को नुकसान हो सकता है। अमेरिकी कंपनियों को कम कीमत वाले आयात से मुकाबला करना पड़ सकता है। इसका असर उत्पादन, ऑर्डर और नौकरियों पर भी पड़ सकता है। मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड का भी जिक्र व्हाइट हाउस की रिपोर्ट में सिर्फ भारत का जिक्र नहीं है। इसमें मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड के उन इलाकों का भी जिक्र है, जहां बड़े पैमाने पर सामान बनाया और दूसरे देशों को भेजा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे रास्तों से हर साल अरबों डॉलर का सामान अमेरिकी बाजार तक पहुंच सकता है, जिसमें चीनी पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया हो। क्या ये टैरिफ से बचने की कोशिश को साबित करता है? किसी प्रोडक्ट में चीनी पार्ट का इस्तेमाल होना और चीन का सामान सिर्फ भारत के रास्ते अमेरिका भेजना, दोनों अलग बातें हैं। अगर भारत में किसी प्रोडक्ट की असली मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली और उस पर काफी काम हो रहा है, तो उसे सिर्फ चीन का सामान घुमाकर अमेरिका भेजना नहीं माना जा सकता। इसलिए यह देखा जाता है कि प्रोडक्ट बनाने में असल काम और प्रोडक्ट की कीमत में कितना हिस्सा किस देश में तैयार हुआ है। सिर्फ किसी प्रोडक्ट में चीनी पार्ट लगा होने से यह साबित नहीं होता कि टैरिफ से बचने की कोशिश हुई है। आज की ग्लोबल सप्लाई चेन में एक प्रोडक्ट के अलग-अलग पार्ट कई देशों में बनते हैं और उसकी आखिरी असेंबली किसी दूसरे देश में हो सकती है। अमेरिका अब AI और डेटा से संदिग्ध शिपमेंट पकड़ेगा रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब अमेरिका तीसरे देशों के जरिए टैरिफ से बचने की कोशिशों पर निगरानी बढ़ा रहा है। व्हाइट हाउस ने सीमा पर आने वाले सामान की जांच में टेक्नोलॉजी और डेटा एनालिसिस के ज्यादा इस्तेमाल की बात कही है। रिपोर्ट में ऐसे AI सिस्टम का भी जिक्र है, जो अमेरिकी कस्टम अधिकारियों को संदिग्ध शिपमेंट की पहचान करने में मदद कर सकता है। इसका मकसद पूरी सप्लाई चेन को ट्रैक करना है। —————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी सर्वे-10 में 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं: भारतीयों के लिए रूस सबसे अहम पार्टनर, पाकिस्तानियों की पहली पसंद चीन 10 में से 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं, ये बात अमेरिकी प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में सामने आई है। इंडियंस भी अपना सबसे बड़ा दुश्मन पाकिस्तान को ही मानते हैं। सर्वे में कहा गया कि दोनों देशों के लोग पड़ोसी के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन भरोसे की कमी है। पूरी खबर पढ़ें…
ऑस्ट्रेलिया में सम्मान मिला, भावुक हुईं रानी मुखर्जी:प्रतिष्ठित लॉ यूनिवर्सिटी से सर्वोच्च सम्मान मिला; शाहरुख के बाद सम्मान पाने वालीं दूसरी भारतीय एक्टर

बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी को ऑस्ट्रेलिया की लॉ ट्रोब यूनिवर्सिटी ने ‘डॉक्टर ऑफ लेटर्स’ (D.Litt.) की मानद डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित किया है। स्टेज पर यह सम्मान लेते व्यक्त रानी मुखर्जी भावुक दिखाई दीं। मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वेयर में इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न (IFFM) 2026 के दौरान 14 अगस्त को आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान दिया गया। उन्हें तीन दशक के करियर और सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्मों में योगदान के लिए रानी को यह सर्वोच्च उपाधि मिली है। वे शाहरुख खान के बाद ला ट्रोब यूनिवर्सिटी से यह सम्मान पाने वाली दूसरी भारतीय कलाकार बन गई हैं। शाहरुख के बाद सम्मान पाने वाली दूसरी भारतीय कलाकार ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने इससे पहले साल 2019 में शाहरुख खान को सिनेमा और सामाजिक कार्यों में योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट दी थी और उनके नाम पर पीएचडी स्कॉलरशिप की घोषणा की थी। यूनिवर्सिटी के चांसलर जॉन ब्रम्बी एओ ने कहा कि रानी मुखर्जी के काम ने सिर्फ मनोरंजन तक सीमित न रहकर सामाजिक न्याय, समानता और समावेश जैसे विषयों पर चर्चा शुरू की है। यूनिवर्सिटी ने महिलाओं, बच्चों और वंचित समुदायों के लिए उनके निरंतर काम की सराहना की। शुरुआत से ही जोखिम भरे रोल चुने: रानी मुखर्जी समारोह में सम्मान स्वीकार करते हुए रानी मुखर्जी ने कहा कि यह उनके जीवन के सबसे विनम्र और भावुक पलों में से एक है। बचपन में वे अपने माता-पिता और देश को गौरवान्वित करना चाहती थीं और सिनेमा उस सपने को पूरा करने का माध्यम बन गया। रानी ने बताया कि उन्होंने करियर की शुरुआत से ही जोखिम भरे रोल चुने हैं। वे हमेशा ऐसी कहानियों का हिस्सा बनीं, जिन्होंने सबसे पहले उनके दिल को छुआ और लोगों को प्रेरित किया। एक्टिंग में एक्सीलेंस के लिए भी विशेष सम्मान आईएफएफएम 2026 में रानी मुखर्जी को उनकी बेहतरीन एक्टिंग और वैश्विक पहचान के लिए एक विशेष प्रशस्ति पत्र भी दिया गया। फेस्टिवल डायरेक्टर मितु भौमिक लांगे ने कहा कि यह सम्मान रानी की कला और सिनेमा की उस ताकत का जश्न है जो दो देशों को जोड़ती है। 13 से 23 अगस्त तक चलने वाले इस फेस्टिवल में भारतीय फिल्मों और कहानियों के प्रभाव को दिखाया जा रहा है। तीन दशक का करियर और सामाजिक मुद्दों पर फिल्में रानी मुखर्जी ने 1990 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने ‘गुलाम’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘साथिया’, ‘हम तुम’, ‘बंटी और बबली’ और ‘युवा’ जैसी हिट फिल्मों में काम किया। इसके बाद उन्होंने ‘ब्लैक’, ‘मर्दानी’ फ्रेंचाइजी, ‘नो वन किल्ड जेसिका’, ‘हिचकी’ और ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ जैसी फिल्मों के जरिए लैंगिक न्याय, महिलाओं के अधिकार, दिव्यांगों के समावेश और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को बड़े पर्दे पर मजबूती से रखा।







