Tuesday, 22 Sep 2026 | 05:08 PM

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ब्रांड्स का नया ट्रेंड; नस्ली न्याय से बढ़ी सेल्स:जेन जी को टारगेट करने वाले ब्रांड्स को करना पड़ रहा उनके मुद्दों को सपोर्ट

ब्रांड्स का नया ट्रेंड; नस्ली न्याय से बढ़ी सेल्स:जेन जी को टारगेट करने वाले ब्रांड्स को करना पड़ रहा उनके मुद्दों को सपोर्ट

भारतीय ब्रांड्स ने जेन जी यानी 14 से 29 साल तक की युवा पीढ़ी की भाषा और सौंदर्यबोध अपनाने में महारत हासिल कर ली है। नायका और स्विगी इंस्टामार्ट ने हाल ही में ‘गंजी चुड़ैल’ जैसे ट्रेंड भुनाए, टिंडर ने ‘सिचुएशनशिप’ और ‘मेन-कैरेक्टर एनर्जी’ जैसे शब्द अपनाए, तो फास्ट्रैक ने ‘यू डू यू’ कैंपेन के जरिए फ्लुइड पहचान का जश्न मनाया। लेकिन जब परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) आंदोलन के तहत जेन जी सड़कों पर उतरी तो ब्रांड्स की जुड़ाव वाली यह छवि गायब हो गई। दरअसल, आज ब्रांड्स सिर्फ युवा संस्कृति के सौंदर्यबोध को उधार लेकर उनकी वास्तविक चिंताओं से दूर नहीं रह सकते, जैसा कि पेप्सी ने 1960 के दशक में ‘पेप्सी जनरेशन’ कैंपेन के जरिए किया था। इसके उलट, नाइकी ने ‘कॉलिन कैपरनिक’ कैंपेन के जरिए नस्ली न्याय के मुद्दे पर लगातार फोकस करके करीब 1,550 करोड़ रुपए की मीडिया वैल्यू और बिक्री में तगड़ी बढ़त हासिल की। लेकिन बात और काम के बीच तालमेल न हो तो नुकसान भी होता है। कोविड के दौर में मैकडॉनल्ड्स के बयान और कंपनी के भीतर अश्वेत कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े आरोपों के बीच अंतर इसकी मिसाल है। बहरहाल, सीजेपी आंदोलन ने दिखाया कि भारतीय जेन जी 37.7 करोड़ की आबादी और करीब 81 लाख करोड़ रुपए खर्च करने क्षमता के साथ अपनी आर्थिक ताकत अच्छी तरह पहचानती है। प्रदर्शनकारियों ने हास्य, ‘गेट रेडी विद मी’ वीडियो और पुलिस हिंसा के फुटेज को गेमिंग इमेजरी के साथ जोड़कर पूरी स्क्रिप्ट खुद लिखी। इस ब्रीच कई मौकों पर युवाओं को जोड़ने के ब्रांड्स के दांव सही नहीं बैठे। जुलाई में वाडीलाल का ‘वर्ल्ड आइसक्रीम डे’ कैंपेन जिसमें नीट टॉपर्स की तस्वीरों में डिजिटल मुस्कान जोड़ी गई। सीजेपी आंदोलन के बीच आने पर यह आलोचनाओं में घिर गया। इसके उलट स्टेफ्री ने प्रदर्शनकारियों द्वारा गढ़े गए नारे ‘एट लीस्ट द पैड्स डोंट लीक’ को अपने चैनल पर बढ़ावा देने का मौका गंवा दिया। करवी और फॉस्टो जैसे ब्रांड्स ने प्रचार गतिविधियां रोककर सांकेतिक एकजुटता दिखाई। ब्लू टोकाई के जनपथ आउटलेट ने पुलिस हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों को शरण दी, जबकि ट्रैक ने कर्मचारियों को प्रदर्शनों में हिस्सा लेने से न रोकने की बात कही। ब्रांड्स एक्सपर्ट स्वाति शर्मा का कहना है कि बाजार का गणित अब यह नहीं रह गया कि आलोचना होगी या नहीं, बल्कि यह है कि ब्रांड लंबी अवधि की विश्वसनीयता के लिए फौरी विवाद झेलने के लिए तैयार है या नहीं। स्ट्रीटवियर ब्रांड मैनलिक के संस्थापक प्रीतम कुदेव ने कहा, ‘यदि युवा अपने बुनियादी अधिकारों के लिए सड़कों पर हैं, तो हम कम से कम उनके साथ खड़ा तो हो सकते थे।’ भारतीय कंपनियों के सामने पश्चिमी ब्रांड्स से अलग चुनौती, पक्षपाती दिखने का खतरा शर्मा का कहना है कि ब्रांड्स के सामने राजनीतिक रूप से पक्षपाती दिखने का खतरा मंडराता रहता है। 2020 में आए तनिष्क के विज्ञापन को ही ले लीजिए। उसमें एक विशेष धर्म को मानने वाली सास अन्य धर्म की बहू की गोदभराई कराती दिखी थी। ‘बायकॉट तनिष्क’ ट्रेंड के बाद उसे वापस लेना पड़ा। हालांकि सर्फ एक्सेल ने इसी तरह के बहिष्कार के बावजूद विज्ञापन नहीं हटाया, जिसे एक करोड़ से ज्यादा बार देखा गया।

नेपाली पीएम ने भारतीय राजदूत से मुलाकात की:पहली बार किसी विदेशी डिप्लोमेट से अकेले मिले; कुछ देर में चीनी राजदूत से मिलेंगे

नेपाली पीएम ने भारतीय राजदूत से मुलाकात की:पहली बार किसी विदेशी डिप्लोमेट से अकेले मिले; कुछ देर में चीनी राजदूत से मिलेंगे

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सोमवार को भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात की। प्रधानमंत्री बनने के बाद किसी विदेशी राजदूत के साथ शाह की यह पहली वन-टू-वन मुलाकात है। नवीन श्रीवास्तव ने शाह को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी। उन्होंने भारत की ओर से नेपाल के साथ अच्छे रिश्ते और सहयोग को आगे बढ़ाने की बात कही। दोनों के बीच भारत-नेपाल संबंधों, विकास सहयोग और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा हुई। बालेन शाह ने कहा कि भारत और नेपाल के रिश्ते पुराने और भरोसेमंद हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने, बिजली, सड़क और दूसरे विकास कार्यों में मिलकर काम जारी रखने पर जोर दिया। बालेन शाह कुछ देर में चीनी राजदूत झांग माओमिंग से भी मिलेंगे। पहले विदेशी अधिकारियों से अकेले नहीं मिलते थे शाह प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती दौर में शाह ने विदेश मंत्री के स्तर से नीचे के विदेशी अधिकारियों से वन-टू-वन मुलाकात नहीं करने की नीति अपनाई थी। वह विदेशी राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते थे। इसी वजह से भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की 11-12 मई की नेपाल यात्रा के दौरान भी शाह से उनकी अकेले में मुलाकात नहीं हो सकी थी। शाह ने अमेरिकी अधिकारियों समीर पॉल कपूर और सर्जियो गोर से मुलाकात के अनुरोध भी स्वीकार नहीं किए थे। इसके बजाय शाह ने 9 अप्रैल और 26 मई को काठमांडू में तैनात कई देशों के राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकें की थीं। नेपाली PM बालेन शाह ने अपना ही नियम क्यों तोड़ा बालेन शाह जब काठमांडू के मेयर थे, तब उन्होंने विदेशी राजदूतों से अकेले मुलाकात न करने का रुख अपनाया था। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने भारत, चीन और अमेरिका समेत कई देशों के राजदूतों और वरिष्ठ अधिकारियों से वन-टू-वन बैठक से दूरी बनाए रखी। शाह का मानना था कि शक्तिशाली देश नेपाल की सरकारी व्यवस्था को दरकिनार कर सीधे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। सामूहिक बैठकों से वह सभी देशों के साथ बराबरी का संदेश देना चाहते थे। लेकिन सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद सलाहकारों ने उन्हें घरेलू और विदेशी स्तर पर अलग-अलग लोगों से मिलने की सलाह दी। इसके बाद शाह ने नेताओं, कारोबारियों और उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें शुरू कीं। अब विदेशी राजदूतों से सीधे मुलाकात भी इसी बदली हुई रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक सीधे संवाद से दूरी बनाने पर नेपाल के कूटनीतिक रिश्तों पर असर पड़ने की चिंता भी थी। बालेन शाह के PM बनने से पहले क्या होता था? नेपाल में नई सरकार बनने के बाद भारत, चीन और अमेरिका जैसे बड़े देशों के राजदूत अक्सर सीधे प्रधानमंत्री से अलग-अलग मुलाकात करते थे। कई बार ये बैठकें प्रधानमंत्री के निजी आवास पर होती थीं। इन मुलाकातों में विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद नहीं होते थे और इनका कोई औपचारिक रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता था। नेपाल में लंबे समय से यह चलन था कि बड़े देशों के राजदूत प्रधानमंत्री से सीधे मिलकर अपनी बात रख सकते थे। माना जाता है कि इन मुलाकातों में आधिकारिक बातचीत के साथ व्यक्तिगत संपर्क बढ़ाने पर भी जोर रहता था। कुछ विशेषज्ञों का मानना था कि ऐसी अनौपचारिक मुलाकातों से हितों के टकराव का खतरा रहता था और नेपाल के राष्ट्रीय हितों पर भी सवाल उठ सकते थे। ———————————- ये खबर भी पढ़ें…

26/11 हमले से जुड़े लश्कर आतंकी अब्दुल-अजीज की मौत:इस्लामाबाद में मस्जिद के बाहर अचानक गिरा; मौत की वजह साफ नहीं

26/11 हमले से जुड़े लश्कर आतंकी अब्दुल-अजीज की मौत:इस्लामाबाद में मस्जिद के बाहर अचानक गिरा; मौत की वजह साफ नहीं

26/11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी कारी सईद अब्दुल-अजीज की पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मौत हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह कुबा मस्जिद के बाहर अचानक गिर पड़ा, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मस्जिद पहुंचने से पहले अजीज ने एक रेस्टोरेंट में खाना खाया था। इसके बाद नमाज के लिए पहुंचने पर वह अचानक गिर पड़ा। मौत की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अजीज पर 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों की साजिश में शामिल होने का आरोप था। हमले में लश्कर के 10 आतंकियों ने मुंबई के कई ठिकानों को निशाना बनाया था। इसमें 166 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। उस पर लश्कर की एक यूनिट संभालने का भी आरोप था, जो आतंकियों के बीच कम्युनिकेशन और जम्मू-कश्मीर में मारे गए लश्कर आतंकियों के परिवारों को आर्थिक मदद से जुड़े काम देखती थी। पाकिस्तान में लश्कर आतंकियों की रहस्यमय मौतों का सिलसिला जारी अजीज की मौत ऐसे समय हुई है, जब पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई आतंकियों और ऑपरेटिव्स की रहस्यमय तरीके से हत्या की खबरें सामने आती रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अलग-अलग घटनाओं में 30 से 40 लश्कर ऑपरेटिव्स मारे जा चुके हैं। हालांकि, इन घटनाओं और अजीज की मौत के बीच कोई सीधा संबंध होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल यह भी साफ नहीं है कि अजीज की मौत बीमारी या किसी दूसरे कारण से हुई। मामले में पाकिस्तानी अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। 26/11 हमले की पूरी टाइमलाइन 26 नवंबर 2008 की रात समुद्र के रास्ते आए 10 लश्कर-ए-तैयबा आतंकियों ने मुंबई में कई जगहों पर हमला किया। CST, ताज होटल, ओबेरॉय-ट्राइडेंट और नरीमन हाउस मुख्य निशाने थे। 29 नवंबर की सुबह ताज होटल में आखिरी आतंकियों के मारे जाने के साथ ऑपरेशन खत्म हुआ। बॉम्बे हाईकोर्ट के मुताबिक, हमले में 166 लोगों की मौत और 238 लोग घायल हुए थे। 26 नवंबर | हमले की शुरुआत CST के बाद पुलिस पर हमला 27 नवंबर | कमांडो ऑपरेशन शुरू 28 नवंबर | दो जगह ऑपरेशन खत्म 29 नवंबर | ताज में आखिरी ऑपरेशन 10 आतंकियों का क्या हुआ? 9 आतंकी मारे गए | 1 आतंकी अजमल कसाब जिंदा पकड़ा गया। जांच और अदालत की कार्रवाई में सामने आया कि हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा का नेटवर्क था। लश्कर का आतंकी नेटवर्क कैसे काम करता है लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन का नेटवर्क केवल हमले करने वाले आतंकियों तक सीमित नहीं होता। इसके पीछे भर्ती, ट्रेनिंग, कम्युनिकेशन, फंडिंग और संगठन से जुड़े लोगों के परिवारों की मदद जैसे अलग-अलग काम संभालने वाले नेटवर्क होते हैं।

26/11 हमले से जुड़े लश्कर आतंकी अब्दुल-अजीज की मौत:इस्लामाबाद में मस्जिद के बाहर अचानक गिरा; रेस्टोरेंट में खाना खाया था

26/11 हमले से जुड़े लश्कर आतंकी अब्दुल-अजीज की मौत:इस्लामाबाद में मस्जिद के बाहर अचानक गिरा; मौत की वजह साफ नहीं

26/11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी कारी सईद अब्दुल-अजीज की पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मौत हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह कुबा मस्जिद के बाहर अचानक गिर पड़ा, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मस्जिद पहुंचने से पहले अजीज ने एक रेस्टोरेंट में खाना खाया था। इसके बाद नमाज के लिए पहुंचने पर वह अचानक गिर पड़ा। मौत की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अजीज पर 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों की साजिश में शामिल होने का आरोप था। हमले में लश्कर के 10 आतंकियों ने मुंबई के कई ठिकानों को निशाना बनाया था। इसमें 166 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। उस पर लश्कर की एक यूनिट संभालने का भी आरोप था, जो आतंकियों के बीच कम्युनिकेशन और जम्मू-कश्मीर में मारे गए लश्कर आतंकियों के परिवारों को आर्थिक मदद से जुड़े काम देखती थी। पाकिस्तान में लश्कर आतंकियों की रहस्यमय मौतों का सिलसिला जारी अजीज की मौत ऐसे समय हुई है, जब पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई आतंकियों और ऑपरेटिव्स की रहस्यमय तरीके से हत्या की खबरें सामने आती रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अलग-अलग घटनाओं में 30 से 40 लश्कर ऑपरेटिव्स मारे जा चुके हैं। हालांकि, इन घटनाओं और अजीज की मौत के बीच कोई सीधा संबंध होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल यह भी साफ नहीं है कि अजीज की मौत बीमारी या किसी दूसरे कारण से हुई। मामले में पाकिस्तानी अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। 26/11 हमले की पूरी टाइमलाइन 26 नवंबर 2008 की रात समुद्र के रास्ते आए 10 लश्कर-ए-तैयबा आतंकियों ने मुंबई में कई जगहों पर हमला किया। CST, ताज होटल, ओबेरॉय-ट्राइडेंट और नरीमन हाउस मुख्य निशाने थे। 29 नवंबर की सुबह ताज होटल में आखिरी आतंकियों के मारे जाने के साथ ऑपरेशन खत्म हुआ। बॉम्बे हाईकोर्ट के मुताबिक, हमले में 166 लोगों की मौत और 238 लोग घायल हुए थे। 26 नवंबर | हमले की शुरुआत CST के बाद पुलिस पर हमला 27 नवंबर | कमांडो ऑपरेशन शुरू 28 नवंबर | दो जगह ऑपरेशन खत्म 29 नवंबर | ताज में आखिरी ऑपरेशन 10 आतंकियों का क्या हुआ? 9 आतंकी मारे गए | 1 आतंकी अजमल कसाब जिंदा पकड़ा गया। जांच और अदालत की कार्रवाई में सामने आया कि हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा का नेटवर्क था। लश्कर का आतंकी नेटवर्क कैसे काम करता है लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन का नेटवर्क केवल हमले करने वाले आतंकियों तक सीमित नहीं होता। इसके पीछे भर्ती, ट्रेनिंग, कम्युनिकेशन, फंडिंग और संगठन से जुड़े लोगों के परिवारों की मदद जैसे अलग-अलग काम संभालने वाले नेटवर्क होते हैं।

एक्ट्रेस बोलीं-रानियां हैवी ज्वेलरी पहनती थीं,मेरे लिए आसान नहीं था:राजस्थानी ट्रेडिशनल ड्रेस पहनकर लगा, जैसे मैं भंसाली की फिल्म से निकलकर आई हूं

एक्ट्रेस बोलीं-रानियां हैवी ज्वेलरी पहनती थीं,मेरे लिए आसान नहीं था:राजस्थानी ट्रेडिशनल ड्रेस पहनकर लगा, जैसे मैं भंसाली की फिल्म से निकलकर आई हूं

जयपुर कॉट्योर शो सीजन-14 के दूसरे दिन बॉलीवुड अभिनेत्री संदीपा धर ने ज्वेलरी डिजाइनर हुकुम सिंह के लिए शोस्टॉपर के रूप में रैंप वॉक किया। इस दौरान अभिनेत्री ने पारंपरिक राजस्थानी पोशाक के साथ बेहद खूबसूरत और भारी पारंपरिक ज्वेलरी पहनी थी। रैंप वॉक के बाद अपने अनुभव साझा करते हुए संदीपा धर ने कहा- “इस पहनावे और ज्वेलरी को पहनकर वे खुद को एक रानी की तरह महसूस कर रही हैं। मुझे ऐसा लग रहा है जैसे वे किसी राजमहल में हैं और वह महल उनका अपना ही है। संदीपा धर ने अपने राजस्थानी लुक को लेकर कहा कि मैं बता नहीं सकती कि मैं इस पहनावे को लेकर कितनी एक्साइटेड हूं। यह पोशाक और इतनी खूबसूरत ज्वेलरी पहनकर मैं अपनी खुशी शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकती। मैं एक रानी की तरह महसूस कर रही हूं। ऐसा लग रहा है जैसे मैं किसी राजमहल में हूं और वह मेरा ही महल है। ‘ऐसा लग रहा है जैसे भंसाली की फिल्म से निकलकर आई हूं’ शिव ज्वेलर्स के हुकुम सिंह का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें राजस्थान की संस्कृति का हिस्सा बनने और इस तरह की पारंपरिक पोशाक व ज्वेलरी पहनने का अवसर मिला, यह उनके लिए खास अनुभव है। संदीपा ने कहा कि एक लड़की के तौर पर मुझे लगता है कि इस तरह तैयार होना हर लड़की का सपना होता है। आज मुझे लग रहा है कि मैं सीधे किसी संजय लीला भंसाली की फिल्म से निकलकर आई हूं। आसान नहीं है ऐसी ज्वैलरी पहनना राजस्थान की रानियों की ओर से पहनी जाने वाली भारी ज्वेलरी और पारंपरिक परिधानों को लेकर भी संदीपा ने दिलचस्प अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इतनी भारी ज्वेलरी पहनने के बाद शरीर और व्यक्तित्व में एक अलग तरह का ठहराव और ग्रेस आ जाता है। उन्होंने कहा कि शायद इसी वजह से उस समय की रानियां इतनी ग्रेसफुल दिखाई देती थीं। इस तरह की पोशाक और हैवी ज्वेलरी पहनने के बाद एक ठहराव आ जाता है। मैं तो एक दिन पहनकर ही थक गई हूं, लेकिन उन महिलाओं को सलाम है जो रोजाना इतनी भारी ज्वेलरी और पोशाक पहनती थीं। संदीपा ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह सोचती हैं कि अगर उनका जन्म उस दौर में हुआ होता तो उन्हें रोज इस तरह तैयार होने का मौका मिलता। उन्होंने कहा कि महिलाएं किसी मायने में सुपर ह्यूमन होती हैं, जो इतनी भारी ज्वेलरी और परिधानों को भी सहजता से संभाल लेती थीं। तीन महीने बीकानेर में शूटिंग, राजस्थान से खास जुड़ाव संदीपा धर का राजस्थान से जुड़ाव हाल के समय में और गहरा हुआ है। उन्होंने बताया कि वह करीब तीन महीने बीकानेर में शूटिंग कर रही थीं और इस दौरान उनका जयपुर आना-जाना भी लगातार रहा। ऐसे में राजस्थान की संस्कृति, खान-पान और कला को करीब से समझने का मौका मिला। राजस्थान के खाने की तारीफ करते हुए संदीपा ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यहां की थालियां खा-खाकर उनका वजन करीब पांच-छह किलो बढ़ गया है। हालांकि उन्होंने तुरंत यह भी कहा कि राजस्थान का खाना इतना शानदार है कि उसे छोड़ना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि राजस्थान से उनका जुड़ाव सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है। यहां की कला, फाइन आर्ट, फर्नीचर, ज्वेलरी और पारंपरिक पोशाकें उन्हें बेहद प्रभावित करती हैं। संदीपा ने कहा कि राजस्थान की खासियत यह है कि यहां कला केवल संग्रहालयों या प्रदर्शनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हुई है। यहां के लोगों की प्रतिभा और पारंपरिक कला के प्रति जुड़ाव उन्हें बेहद खास लगता है। राजस्थान का आर्ट और कल्चर कमाल का है। चाहे फाइन आर्ट हो, फर्नीचर हो, ज्वेलरी हो या पोशाक, यहां हर चीज में कला दिखाई देती है। यहां के लोग बेहद प्रतिभाशाली हैं और यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि कला यहां लोगों की जिंदगी से इतनी गहराई से जुड़ी हुई है। 28 अगस्त को नेटफ्लिक्स पर नजर आएंगी संदीपा संदीपा धर ने बातचीत में अपने आगामी प्रोजेक्ट्स को लेकर भी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उनका नया शो ‘चुंबक’ 28 अगस्त को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने जा रहा है। इस शो को लेकर वह काफी उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि ‘चुंबक’ के मेकर्स इससे पहले लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘खिचड़ी’ और ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ से जुड़े रहे हैं। संदीपा इस प्रोजेक्ट के जरिए पहली बार कॉमेडी जॉनर में काम कर रही हैं। इस शो में अभिनेत्री नीना गुप्ता सहित कई प्रतिभाशाली कलाकार नजर आएंगे। संदीपा ने उनके साथ काम करने के अनुभव को भी शानदार बताया और दर्शकों से 28 अगस्त को शो देखने की अपील की।

रिपोर्ट-होर्मुज खोलने पर ईरान से समझौता कर सकता है अमेरिका:बदले में ट्रम्प परमाणु समझौते की मांग छोड़ सकते हैं; सीजफायर की तैयारी

रिपोर्ट-होर्मुज खोलने पर ईरान से समझौता कर सकता है अमेरिका:बदले में ट्रम्प परमाणु समझौते की मांग छोड़ सकते हैं; सीजफायर की तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प होर्मुज खोलने के बदलने परमाणु समझौते की मांग छोड़ सकते हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प चाहते हैं ईरान होर्मुज पूरी तरह खोल दें। इससे ईरान के साथ फिर से सीजफायर का रास्ता भी बन सकता है। ट्रम्प समझौते के बिना पीछे हटने को तैयार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रम्प प्रशासन कई हफ्तों से इसके तैयार कर रहा है। उन्होंने वरिष्ठ सहयोगियों से निजी बातचीत में कहा है कि वे ईरान के साथ नया परमाणु समझौता किए बिना भी पीछे हट सकते हैं। ईरान ने भी होर्मुज खोलने के लिए कई शर्तें रखी हैं। इनमें अरबों डॉलर का भुगतान, अमेरिक नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना और इलाके से अमेरिकी सैनिकों की वापसी शामिल है। ईरान ने प्रतिबंध हटाने और उसकी जब्त संपत्तियां लौटाने की मांग भी की है। खबर अपडेट हो रही है…

सर्जरी के दौरान सोनू निगम ने गाना गाया:हॉस्पिटल बेड से शेयर किया वीडियो, श्रेया घोषाल ने की जल्द रिकवरी की कामना

सर्जरी के दौरान सोनू निगम ने गाना गाया:हॉस्पिटल बेड से शेयर किया वीडियो, श्रेया घोषाल ने की जल्द रिकवरी की कामना

सिंगर सोनू निगम ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वो हॉस्पिटल में सर्जरी के दौरान मेडिकल स्टाफ के लिए गाना गाते नजर आ रहे हैं। सोनू निगम ने वीडियो शेयर कर लिखा- “मेरी सर्जरी के दौरान प्यारे डॉक्टर नीलेश सतभाई और उनकी पूरी टीम के लिए अचानक एक छोटा सा परफॉर्मेंस दिया। दर्द में भी गाया… क्योंकि संगीत की खुशी सबसे अलग है!” वीडियो में सोनू को हॉस्पिटल बेड पर देखा जा सकता है। उनकी सर्जरी चल रही है और सोनू मोहम्मद रफी का ‘सुहानी रात ढल चुकी’ गाना गा रहे हैं। बता दें कि ये गाना फिल्म ‘दुलारी’ का है। फिल्म 1949 में रिलीज हुई थी। सोनू निगम की सर्जरी के बाद उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए कई सेलेब्स ने उनकी पोस्ट पर कमेंट किए। सोनू के वीडियो पर श्रेया घोषाल ने कमेंट किया, ‘सोनू जी आप जल्द ठीक हो जाइए। आप जल्दी रिकवर करें। आपका म्यूजिक के लिए डेडिकेशन और परफेक्शन इस हालत में भी बहुत इंस्पायरिंग है।’ सिंगर श्रद्धा पंडित ने सोनू को ‘ईश्वर की आवाज’ बताते हुए उनके जल्द ठीक होने की कामना की। सिंगर विशाल मिश्रा ने लिखा, ‘इसीलिए आप मेरे भगवान हैं। जल्द ठीक हो जाइए भैया।’ इसके अलावा रणवीर अल्लाहबादिया ने भी लिखा, ‘जल्द ठीक हो जाइए सोनू सर, ढेर सारा प्यार।’ वहीं महिमा चौधरी ने लिखा, ‘हे भगवान। ये शानदार है। जल्द ठीक हो जाइए। आपकी आवाज। कोलेब के लिए ये अच्छा आइडिया है, आजकल के मेडिकल बिलों को देखते हुए। फैंस भी सोनू की जल्द रिकवरी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।’ सोनू निगम ने बताया था- उनकी नसें दब गई थीं सोनू निगम की सर्जरी क्यों हुई है, अभी इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, जून में उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी सेहत के बारे में जानकारी शेयर की थी। सोनू ने बताया था कि वो नसों से जुड़ी एक दर्दनाक बीमारी से जूझ रहे हैं और इसका इलाज करवा रहे हैं। जून में सोनू ने बताया था कि उनकी नसें दब गई हैं और उन्होंने MRI और CT स्कैन करवाए थे। सोनू ने कहा था कि मेरी कई MRI और CT स्कैन हो चुके हैं। मैं पिछले कई दिनों से दवाइयां ले रहा हूं। उन्होंने अपनी गर्दन के पास लगा एक पैच भी दिखाया था। सोनू ने बताया था कि नस दबने की वजह से उन्हें गले में भारीपन महसूस हो रहा था। उन्होंने बताया था कि फिजियोथेरेपी उनके लिए दर्दभरा एक्सपीरियंस रहा और रिकवरी प्रोसेस आसान नहीं है। वो दर्द की दवाई ले रहे थे। सोनू निगम हाल ही में 30 जुलाई को 53 साल के हुए हैं। अपने करियर में उन्होंने ‘कल हो न हो’, ‘अभी मुझ में कहीं’, ‘सूरज हुआ मद्धम’, ‘संदेशे आते हैं’, ‘मुझसे रात दिन बस’, ‘दीवाना तेरा’, ‘मैं अगर कहूं’ जैसे कई गाने गाए हैं। उन्हें गाने ‘कल हो न हो’ के लिए बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला था। सोनू निगम को 2022 में पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। पर्सनल लाइफ की बात करें तो सोनू निगम की पत्नी का नाम मधुरिमा निगम है। उनकी शादी 15 फरवरी 2002 में हुई थी। उनका एक बेटा भी है, जिसका नाम नेवान निगम है।

सर्जरी के दौरान सोनू निगम ने गाना गाया:हॉस्पिटल बेड से शेयर किया वीडियो, श्रेया घोषाल ने की जल्द रिकवरी की कामना

सर्जरी के दौरान सोनू निगम ने गाना गाया:हॉस्पिटल बेड से शेयर किया वीडियो, श्रेया घोषाल ने की जल्द रिकवरी की कामना

सिंगर सोनू निगम ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वो हॉस्पिटल में सर्जरी के दौरान मेडिकल स्टाफ के लिए गाना गाते नजर आ रहे हैं। सोनू निगम ने वीडियो शेयर कर लिखा- “मेरी सर्जरी के दौरान प्यारे डॉक्टर नीलेश सतभाई और उनकी पूरी टीम के लिए अचानक एक छोटा सा परफॉर्मेंस दिया। दर्द में भी गाया… क्योंकि संगीत की खुशी सबसे अलग है!” वीडियो में सोनू को हॉस्पिटल बेड पर देखा जा सकता है। उनकी सर्जरी चल रही है और सोनू मोहम्मद रफी का ‘सुहानी रात ढल चुकी’ गाना गा रहे हैं। बता दें कि ये गाना फिल्म ‘दुलारी’ का है। फिल्म 1949 में रिलीज हुई थी। सोनू निगम की सर्जरी के बाद उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए कई सेलेब्स ने उनकी पोस्ट पर कमेंट किए। सोनू के वीडियो पर श्रेया घोषाल ने कमेंट किया, ‘सोनू जी आप जल्द ठीक हो जाइए। आप जल्दी रिकवर करें। आपका म्यूजिक के लिए डेडिकेशन और परफेक्शन इस हालत में भी बहुत इंस्पायरिंग है।’ सिंगर श्रद्धा पंडित ने सोनू को ‘ईश्वर की आवाज’ बताते हुए उनके जल्द ठीक होने की कामना की। सिंगर विशाल मिश्रा ने लिखा, ‘इसीलिए आप मेरे भगवान हैं। जल्द ठीक हो जाइए भैया।’ इसके अलावा रणवीर अल्लाहबादिया ने भी लिखा, ‘जल्द ठीक हो जाइए सोनू सर, ढेर सारा प्यार।’ वहीं महिमा चौधरी ने लिखा, ‘हे भगवान। ये शानदार है। जल्द ठीक हो जाइए। आपकी आवाज। कोलेब के लिए ये अच्छा आइडिया है, आजकल के मेडिकल बिलों को देखते हुए। फैंस भी सोनू की जल्द रिकवरी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।’ सोनू निगम ने बताया था- उनकी नसें दब गई थीं सोनू निगम की सर्जरी क्यों हुई है, अभी इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, जून में उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी सेहत के बारे में जानकारी शेयर की थी। सोनू ने बताया था कि वो नसों से जुड़ी एक दर्दनाक बीमारी से जूझ रहे हैं और इसका इलाज करवा रहे हैं। जून में सोनू ने बताया था कि उनकी नसें दब गई हैं और उन्होंने MRI और CT स्कैन करवाए थे। सोनू ने कहा था कि मेरी कई MRI और CT स्कैन हो चुके हैं। मैं पिछले कई दिनों से दवाइयां ले रहा हूं। उन्होंने अपनी गर्दन के पास लगा एक पैच भी दिखाया था। सोनू ने बताया था कि नस दबने की वजह से उन्हें गले में भारीपन महसूस हो रहा था। उन्होंने बताया था कि फिजियोथेरेपी उनके लिए दर्दभरा एक्सपीरियंस रहा और रिकवरी प्रोसेस आसान नहीं है। वो दर्द की दवाई ले रहे थे। सोनू निगम हाल ही में 30 जुलाई को 53 साल के हुए हैं। अपने करियर में उन्होंने ‘कल हो न हो’, ‘अभी मुझ में कहीं’, ‘सूरज हुआ मद्धम’, ‘संदेशे आते हैं’, ‘मुझसे रात दिन बस’, ‘दीवाना तेरा’, ‘मैं अगर कहूं’ जैसे कई गाने गाए हैं। उन्हें गाने ‘कल हो न हो’ के लिए बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला था। सोनू निगम को 2022 में पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। पर्सनल लाइफ की बात करें तो सोनू निगम की पत्नी का नाम मधुरिमा निगम है। उनकी शादी 15 फरवरी 2002 में हुई थी। उनका एक बेटा भी है, जिसका नाम नेवान निगम है।

नेतन्याहू ने गाजा से सेना हटाने की योजना ठुकराई:कहा- हमास के निहत्था होने तक वापसी नहीं होगी; ट्रम्प का 15-पॉइंट गाजा प्लान खारिज किया

नेतन्याहू ने गाजा से सेना हटाने की योजना ठुकराई:कहा- हमास के निहत्था होने तक वापसी नहीं होगी; ट्रम्प का 15-पॉइंट गाजा प्लान खारिज किया

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को गाजा से सेना हटाने के प्लान को ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा कि हमास के पूरी तरह निहत्था होने तक इजराइली सेना गाजा से वापस नहीं हटेगी। नेतन्याहू ने साप्ताहिक कैबिनेट बैठक की शुरुआत में उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि इजराइल ने अमेरिकी प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि इजराइल हमास को दिखावटी तौर पर नहीं, बल्कि वास्तव में खत्म करना चाहता है। अमेरिका से बातचीत जारी, कुछ सुझाव मंजूर नेतन्याहू ने कहा कि इस मुद्दे पर अमेरिका से बातचीत चल रही है। उनके मुताबिक, अमेरिका की ओर से कुछ सुझाव दिए गए हैं, जिनमें से कुछ इजराइल को मंजूर हैं और कुछ नहीं। अमेरिका के समर्थन वाला बोर्ड ऑफ पीस युद्ध के बाद गाजा के लिए अपनी योजना आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हमास इस योजना को स्वीकार कर चुका है, लेकिन इजराइली अधिकारियों का आरोप है कि आतंकी संगठन इस प्रक्रिया का इस्तेमाल इजराइल की दोबारा सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए कर रहा है। पिछले महीने ट्रम्प के बोर्ड ऑफ पीस ने हमास और गाजा के दूसरे सशस्त्र संगठनों को पूरी तरह निहत्था करने और इसके साथ इजराइली सेना की वापसी का समझौता घोषित किया था। ट्रम्प ने इसे युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ी सफलता और स्थायी शांति-सुरक्षा की ओर बड़ा कदम बताया था। गाजा प्लान में स्टेप्स में सेना हटाने का प्रस्ताव अमेरिकी प्रस्ताव के तहत हमास अलग-अलग फेज में अपने हथियार गाजा की नई फिलिस्तीनी प्रशासनिक व्यवस्था को सौंपता। इसके बदले इजराइल गाजा के उस आधे से ज्यादा हिस्से से धीरे-धीरे सेना हटाता, जिस पर अभी उसका नियंत्रण है। प्लान के मुताबिक, इजराइल और हमास को पहले मौजूदा संघर्षविराम से जुड़ी अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करनी होंगी। इसके बाद हमास और दूसरे फिलिस्तीनी गुट गाजा का नागरिक प्रशासन और आंतरिक सुरक्षा राष्ट्रीय समिति को सौंपेंगे। इस समिति का नाम नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा है। इसे संक्रमण के दौरान गाजा का प्रशासन संभालने वाली फिलिस्तीनी तकनीकी समिति के तौर पर बनाया जाना है। योजना में भारी हथियारों, हथियार भंडार, सैन्य ठिकानों और सुरंगों की पहचान कर उन्हें समिति के नियंत्रण में देने की बात कही गई है। इजराइली सैनिकों और फिलिस्तीनी प्रशासन वाले इलाकों के बीच अंतर रखने तथा समझौते की निगरानी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाना है। इजराइली सेना तय समयसीमा के तहत चरणों में गाजा से हटेगी। इसके साथ अंतरराष्ट्रीय निगरानी में पुनर्निर्माण और सार्वजनिक सेवाएं बहाल करने का काम शुरू होगा। योजना में फिलिस्तीनी आत्मनिर्णय और फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के लिए लंबे समय की राजनीतिक प्रक्रिया का भी जिक्र है। नेतन्याहू बोले- मेरे रहते फिलिस्तीनी राज्य नहीं बनेगा नेतन्याहू ने यह भी कहा कि जब तक वह प्रधानमंत्री हैं, गाजा या वेस्ट बैंक में कोई फिलिस्तीनी राज्य नहीं बनेगा। उन्होंने यह बात ट्रम्प के योजना को बड़ी उपलब्धि बताए जाने के एक हफ्ते से ज्यादा समय बाद कही। नेतन्याहू के कार्यालय ने पहले इस योजना पर आपत्ति जताई थी। कार्यालय ने कहा था कि यह ढांचा इजराइल के रुख को नहीं दिखाता, लेकिन तब योजना को सीधे तौर पर खारिज नहीं किया गया था। रविवार को नेतन्याहू ने पहली बार खुले तौर पर योजना को नामंजूर किया। उनके कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इजराइल ने ट्रम्प प्रशासन को अपनी चिंताओं से अवगत करा दिया है। यह ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच सार्वजनिक तौर पर सामने आया एक दुर्लभ मतभेद है। दोनों के बीच साझेदारी को अक्सर तेज बदलावों वाली और अनुमान लगाना मुश्किल साझेदारी के रूप में बताया जाता रहा है। ट्रम्प ने नेतन्याहू से वॉशिंगटन में मुलाकात के बाद कहा था कि इजराइल इस समझौते से बहुत खुश है। उन्होंने कहा था, “इजराइल ने हमारी मदद की है और वह हमारे साथ बहुत अच्छा रहा है।” हालांकि, ट्रम्प ने यह भी माना था कि योजना को लागू करना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा था, “क्या इसमें उतार-चढ़ाव आएंगे? वहां की स्थिति बहुत जटिल है।” एक इजराइली राजनीतिक सूत्र ने यह भी कहा था कि नेतन्याहू की ट्रम्प से मुलाकात में गाजा का मुद्दा नहीं उठा था। हमास ने भी रखी शर्तें हमास ने कहा है कि हथियार सौंपने से पहले इजराइल को अपने हमले रोकने होंगे और पहले हुए संघर्षविराम समझौते की शर्तें पूरी करनी होंगी। संगठन ने कहा कि समझौते की दिशा में पहला कदम इजराइल की ओर से हत्या और हमले रोकने की प्रतिबद्धता होना चाहिए। बातचीत में शामिल हमास के वरिष्ठ अधिकारी गाजी हमद ने कहा कि संगठन मुश्किल और तकलीफदेह समझौते को स्वीकार करने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने तुरंत निहत्था होने की बात स्वीकार नहीं की। हमद ने कहा कि इजराइल को पहले शर्म अल-शेख में हुए शुरुआती संघर्षविराम समझौते का पहला चरण लागू करना होगा। इसमें हमले रोकना, सेना को पहले के ठिकानों पर वापस ले जाना और गाजा में सामान तथा मानवीय सहायता की सप्लाई बढ़ाना शामिल है। हमास के मुताबिक, इसके बाद ही वह अपने हथियार गाजा के प्रशासन के लिए बनी राष्ट्रीय समिति के नियंत्रण में देने पर सहमत होगा। हमास के अनुसार, भारी हथियार सौंपने की शर्त इजराइल की ओर से सभी तरह के हमले रोकना और अपनी सेना हटाना है। हमास के पास अब भी इजराइल पर हमला करने की क्षमता: नेतन्याहू नेतन्याहू ने कहा कि हमास के पास अब भी इजराइल पर हमला करने की क्षमता है। उन्होंने कहा, “वह हमला कर सकता है, लेकिन कई हफ्ते बीत जाने के बाद भी उसने हम पर हमला क्यों नहीं किया? क्योंकि उसे पता है कि ऐसा करने पर हम उसे कितना ताकतवर जवाब देंगे।” उन्होंने ईरान के खिलाफ सहयोग के लिए ट्रम्प की तारीफ की। नेतन्याहू ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रम्प से मेरा बहुत सम्मान है। वह व्हाइट हाउस में हमारे बहुत अच्छे दोस्त हैं।” उन्होंने कहा, “मैं ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अमेरिका के साथ ऐतिहासिक साझेदारी की बहुत सराहना करता हूं। मैं फिर साफ करना चाहता हूं कि समझौता हो या न हो, जब तक मैं प्रधानमंत्री हूं, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे।” नेतन्याहू ने कहा, “जो लोग हमें केवल उपदेश देते हैं,

संडे प्रोफाइल : मोहम्मद बिन सलमान:सुधारों, कूटनीति से सल्तनत का चेहरा बदलते एमबीएस

संडे प्रोफाइल : मोहम्मद बिन सलमान:सुधारों, कूटनीति से सल्तनत का चेहरा बदलते एमबीएस

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इन दिनों सक्रिय कूटनीति को लेकर चर्चा में हैं। जुलाई में अमेरिका से परमाणु समझौते और 7 अगस्त को सऊदी, पाकिस्तान व तुर्किये के रक्षा करार में उनकी सक्रियता दिखी है। राजनेता को कई चेहरे लगाकर राजकाज चलाना पड़ता है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) इसका उदाहरण हैं। एक तरफ वे सऊदी समाज में बदलाव और आधुनिकता लाने की कोशिश करते हैं तो दूसरी तरफ सत्ता पर पकड़ मजबूत रखने के लिए सख्त फैसलों को लेकर चर्चा में रहते हैं। जनवरी 2015 में किंग सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सऊद के सत्ता संभालने के बाद एमबीएस को अहम जिम्मेदारियां मिलीं। इसके बाद वे तेजी से सत्ता के केंद्र में पहुंचे। आज 41 साल की उम्र में वे देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हैं। हाल के दिनों में अमेरिका के साथ परमाणु समझौते और पाकिस्तान-तुर्किये के साथ रक्षा गठजोड़ ने उनकी सक्रिय कूटनीति को फिर चर्चा में ला दिया है। इन कदमों के जरिए वे एक तरफ ईरान जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी का मुकाबला करना चाहते हैं तो दूसरी तरफ चीन, रूस और अमेरिका के बीच संतुलन साधते नजर आते हैं। एमबीएस ने सत्ता में आने के बाद सामाजिक बदलावों पर भी जोर दिया। धार्मिक पुलिस के अधिकार सीमित किए गए। महिलाओं को लेकर कई पुरानी पाबंदियां हटाई गईं। स्कूलों में लड़कियों के खेलने पर लगी रोक खत्म हुई और करीब 40 साल बाद 2018 में देश में सिनेमा फिर शुरू हुआ। 2019 में महिलाओं को पुरुष अभिभावक के बिना यात्रा और काम करने की ज्यादा स्वतंत्रता मिली। विश्व बैंक के अनुसार 2025 में सऊदी अरब की लेबर फोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 35% थी। आर्थिक मोर्चे पर एमबीएस ने तेल पर निर्भरता घटाने के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू कीं। निओम का हाईटेक शहर, लाल सागर के पर्यटन प्रोजेक्ट और खेलों को बढ़ावा देना इसी रणनीति का हिस्सा हैं। रियाद में 2024 में ई-स्पोर्ट्स वर्ल्ड कप हुआ। सऊदी अरब 2030 में एक्सपो और 2034 में फुटबॉल विश्व कप की मेजबानी की तैयारी भी कर रहा है। हालांकि एमबीएस का दूसरा चेहरा विवादों से जुड़ा है। सत्ता मजबूत करने के दौरान उनके कई रिश्तेदारों और विरोधियों पर कार्रवाई हुई। पत्रकार जमाल खाशोगी की 2018 में हत्या के मामले में भी उन पर गंभीर आरोप लगे। मानवाधिकार संगठनों ने सऊदी सरकार की आलोचना की है। एमबीएस की निजी छवि भी पारंपरिक सऊदी शासकों से अलग है। उन्हें वीडियो गेम, फॉर्मूला-1 और मोटरसाइकिलों में दिलचस्पी है। वे आम लोगों के साथ सेल्फी लेते भी नजर आते हैं। हालांकि, एक दशक से अधिक समय से सत्ता के केंद्र में रहने के बावजूद सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था अब भी तेल पर काफी निर्भर है। यही उनकी महत्वाकांक्षी योजनाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।