इंपैक्ट फीचर:वित्तीय लेनदेन और निवेश में लालच से बचें, सही समय पर सही निवेश ही सुरक्षित भविष्य की गारंटी

आदित्य बिरला सन लाइफ म्यूचुअल फंड और दैनिक भास्कर की संयुक्त पहल ‘शिक्षित निवेशक, विकसित भारत एवं सुरक्षित भविष्य’ के तहत पटना में आयोजित निवेश जागरूकता कार्यशाला में विशेषज्ञों ने निवेशकों को वित्तीय अनुशासन, साइबर सुरक्षा और दीर्घकालिक निवेश के महत्व से अवगत कराया। निवेश केवल धन बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव है। इसी उद्देश्य के साथ आदित्य बिरला सन लाइफ म्यूचुअल फंड और दैनिक भास्कर की संयुक्त पहल ‘शिक्षित निवेशक, विकसित भारत एवं सुरक्षित भविष्य’ के अंतर्गत पटना में निवेश जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वित्तीय विशेषज्ञों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश, वित्तीय अनुशासन और डिजिटल फ्रॉड से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय बताए। पैसे की बचत करना पर्याप्त नहीं मुख्य वक्ता मोहम्मद आमिर सुलेमान ने कहा कि केवल पैसे की बचत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही समय पर सही जगह निवेश करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपनी आय का बजट बनाकर नियमित बचत करनी चाहिए और दीर्घकालिक लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए निवेश की योजना बनानी चाहिए। उन्होंने निवेशकों को लालच में आकर अवास्तविक रिटर्न के वादों पर भरोसा न करने की सलाह दी। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बचत और निवेश के बीच का अंतर भी विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि बचत केवल धन को सुरक्षित रखने का माध्यम है, जबकि निवेश उस धन को समय के साथ बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। सही वित्तीय योजना और अनुशासित निवेश से ही आर्थिक रूप से सुरक्षित भविष्य का निर्माण संभव है। धोखाधड़ी का संदेह हो तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें साइबर सुरक्षा सत्र में डिजिटल वित्तीय लेनदेन से जुड़े बढ़ते जोखिमों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या मैसेज पर अपनी बैंकिंग अथवा निवेश संबंधी जानकारी साझा न करें। यदि किसी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का संदेह हो तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, साइबर क्राइम पोर्टल और संबंधित बैंक को भी तत्काल सूचित करने की सलाह दी गई, ताकि वित्तीय नुकसान को कम किया जा सके। नियमित निवेश और विश्वसनीय वित्तीय साधन चुनें कार्यक्रम के दौरान निवेशकों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए, जहां म्यूचुअल फंड, दीर्घकालिक निवेश, जोखिम प्रबंधन और वित्तीय योजना से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी साझा की। वक्ताओं ने कहा कि निवेश करते समय धैर्य बनाए रखना, नियमित निवेश करना और विश्वसनीय वित्तीय साधनों का चयन करना ही बेहतर रिटर्न और सुरक्षित भविष्य की कुंजी है। इस कार्यशाला का उद्देश्य लोगों में वित्तीय साक्षरता बढ़ाना और उन्हें जागरूक, जिम्मेदार एवं आत्मविश्वास के साथ निवेश करने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में निवेशकों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया।
इंपैक्ट फीचर:वित्तीय लेनदेन और निवेश में लालच से बचें, सही समय पर सही निवेश ही सुरक्षित भविष्य की गारंटी

आदित्य बिरला सन लाइफ म्यूचुअल फंड और दैनिक भास्कर की संयुक्त पहल ‘शिक्षित निवेशक, विकसित भारत एवं सुरक्षित भविष्य’ के तहत पटना में आयोजित निवेश जागरूकता कार्यशाला में विशेषज्ञों ने निवेशकों को वित्तीय अनुशासन, साइबर सुरक्षा और दीर्घकालिक निवेश के महत्व से अवगत कराया। निवेश केवल धन बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव है। इसी उद्देश्य के साथ आदित्य बिरला सन लाइफ म्यूचुअल फंड और दैनिक भास्कर की संयुक्त पहल ‘शिक्षित निवेशक, विकसित भारत एवं सुरक्षित भविष्य’ के अंतर्गत पटना में निवेश जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वित्तीय विशेषज्ञों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश, वित्तीय अनुशासन और डिजिटल फ्रॉड से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय बताए। पैसे की बचत करना पर्याप्त नहीं मुख्य वक्ता मोहम्मद आमिर सुलेमान ने कहा कि केवल पैसे की बचत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही समय पर सही जगह निवेश करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपनी आय का बजट बनाकर नियमित बचत करनी चाहिए और दीर्घकालिक लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए निवेश की योजना बनानी चाहिए। उन्होंने निवेशकों को लालच में आकर अवास्तविक रिटर्न के वादों पर भरोसा न करने की सलाह दी। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बचत और निवेश के बीच का अंतर भी विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि बचत केवल धन को सुरक्षित रखने का माध्यम है, जबकि निवेश उस धन को समय के साथ बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। सही वित्तीय योजना और अनुशासित निवेश से ही आर्थिक रूप से सुरक्षित भविष्य का निर्माण संभव है। धोखाधड़ी का संदेह हो तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें साइबर सुरक्षा सत्र में डिजिटल वित्तीय लेनदेन से जुड़े बढ़ते जोखिमों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या मैसेज पर अपनी बैंकिंग अथवा निवेश संबंधी जानकारी साझा न करें। यदि किसी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का संदेह हो तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, साइबर क्राइम पोर्टल और संबंधित बैंक को भी तत्काल सूचित करने की सलाह दी गई, ताकि वित्तीय नुकसान को कम किया जा सके। नियमित निवेश और विश्वसनीय वित्तीय साधन चुनें कार्यक्रम के दौरान निवेशकों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए, जहां म्यूचुअल फंड, दीर्घकालिक निवेश, जोखिम प्रबंधन और वित्तीय योजना से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी साझा की। वक्ताओं ने कहा कि निवेश करते समय धैर्य बनाए रखना, नियमित निवेश करना और विश्वसनीय वित्तीय साधनों का चयन करना ही बेहतर रिटर्न और सुरक्षित भविष्य की कुंजी है। इस कार्यशाला का उद्देश्य लोगों में वित्तीय साक्षरता बढ़ाना और उन्हें जागरूक, जिम्मेदार एवं आत्मविश्वास के साथ निवेश करने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में निवेशकों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया।
अफ्रीका के मोरक्को से हजारों प्रवासी तैरकर स्पेन पहुंचे:सेना ने रोकने की कोशिश की, भगदड़ में 18 लोगों की मौत

अफ्रीकी देश मोरक्को की तरफ से स्पेन में जबरन घुसने की कोशिश के दौरान गुरुवार सुबह भीषण भगदड़ मच गई। इसमें कम से कम 18 अफ्रीकी प्रवासियों की मौत हो गई, जबकि स्पेनिश और मोरक्को के 100 से ज्यादा सैनिक घायल हो गए। दरअसल बेहतर जीवन की तलाश में अफ्रीकी और एशियाई देशों के प्रवासी यूरोपीय देशों में घुसना चाहते हैं। सिउटा मोरक्को के उत्तरी तट पर स्थित एक स्पेनिश शहर है। यहां घुसने के बाद प्रवासियों को यूरोपीय संघ के क्षेत्र में एंट्री मिल जाती है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक सीमा पर तैनात फोर्स को चकमा देने के लिए करीब 3,000 प्रवासियों ने सुबह का वक्त चुना। तब सैनिकों की चौकसी कम होती है। सीमा पर पुलिस की घेराबंदी और बाड़ के संकरे रास्तों के कारण अफरातफरी मच गई। लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े, जिससे दबने, दम घुटने और समुद्र में डूबने के कारण यह हादसा हुआ। हादसे के बाद की 5 फोटोज… स्यूटा से ही यूरोप में घुसने की सबसे ज्यादा कोशिश क्यों होती है? स्यूटा भले ही भौगोलिक तौर पर अफ्रीका में है, लेकिन यह स्पेन और यूरोपीय संघ (EU) का हिस्सा है। यानी अगर कोई प्रवासी स्यूटा में घुस जाता है, तो वह यूरोप की सीमा तक पहुंच जाता है। यही वजह है कि हजारों लोग हर साल यहां से यूरोप में दाखिल होने की कोशिश करते हैं। स्यूटा और इसके करीब मेलिला ऐसे दो शहर हैं, जहां अफ्रीका और यूरोप की सीधी जमीनी सीमा मिलती है। इसलिए बेहतर नौकरी और अच्छी जिंदगी की तलाश में मोरक्को समेत कई अफ्रीकी देशों के लोग सबसे ज्यादा इन्हीं रास्तों को चुनते हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में ही करीब 1,500 प्रवासी स्यूटा में प्रवेश कर चुके थे। इसके बाद गुरुवार को हालात अचानक बिगड़ गए। स्यूटा में घुसने के लिए कुछ लोग समुद्र में तैरकर सीमा पार करते हैं, कुछ छोटी नावों का सहारा लेते हैं। वहीं बड़ी संख्या में लोग सीमा पर लगी ऊंची बाड़ पर चढ़कर या उसे काटकर अंदर जाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, सीमा पर लगे सेंसर, निगरानी टावर और स्पेनिश सुरक्षाबल अक्सर उन्हें पकड़ लेते हैं। सेना और गोताखोरों की तैनाती स्पेन सरकार ने एक बयान जारी कर बताया कि सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सैन्य टुकड़ियों को भेजा गया है। इसके अलावा हवाई और नौसैनिक सहायता बढ़ाई गई है और पानी में गश्त के लिए गोताखोरों की टीमें तैनात की गई हैं। यूरोपीय संघ ने भी स्पेन को सीमा और तटरक्षक एजेंसी फ्रोंटेक्स के जरिए मदद देने की पेशकश की है ताकि वहां व्यवस्था बहाल की जा सके।
अफ्रीका से हजारों प्रवासी तैरकर स्पेन पहुंचे:सेना ने रोकने की कोशिश की, भगदड़ में 18 लोगों की मौत

अफ्रीकी देश मोरक्को की तरफ से स्पेन में जबरन घुसने की कोशिश के दौरान शुक्रवार सुबह भीषण भगदड़ मच गई। इसमें कम से कम 18 अफ्रीकी प्रवासियों की मौत हो गई, जबकि स्पेनिश और मोरक्को के 100 से ज्यादा सैनिक घायल हो गए। दरअसल बेहतर जीवन की तलाश में अफ्रीकी और एशियाई देशों के प्रवासी यूरोपीय देशों में घुसना चाहते हैं। सिउटा मोरक्को के उत्तरी तट पर स्थित एक स्पेनिश शहर है। यहां घुसने के बाद प्रवासियों को यूरोपीय संघ के क्षेत्र में एंट्री मिल जाती है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक सीमा पर तैनात फोर्स को चकमा देने के लिए करीब 3,000 प्रवासियों ने सुबह का वक्त चुना। तब सैनिकों की चौकसी कम होती है। सीमा पर पुलिस की घेराबंदी और बाड़ के संकरे रास्तों के कारण अफरातफरी मच गई। लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े, जिससे दबने, दम घुटने और समुद्र में डूबने के कारण यह हादसा हुआ। हादसे के बाद की 5 फोटोज…
दुनिया में बढ़ रहीं ‘वन-मैन कंपनियां:न बॉस, न टीम, एआई से अकेले करोड़ों की कंपनी खड़ी कर रहे युवा

औद्योगिक क्रांति में फैक्ट्रियां बनी थीं। एआई क्रांति ‘वन-मैन कंपनी’ बना रही है। 2023-25 के बीच ऐसी कंपनियां तेजी से बढ़ी हैं, जिन्हें सिर्फ एक व्यक्ति चला रहा है। लेकिन नई नौकरियां सिमट रही हैं। पेमेंट कंपनी स्ट्राइप का विश्लेषण कहता है कि अमेरिका में दो साल में एक करोड़ डॉलर ( 95 करोड़) तक सालाना कमाई वाली वन-मैन कंपनियां दोगुनी हो गईं। इसी दौरान एक करोड़ डॉलर से ज्यादा कमाई वाली ऐसी कंपनियां तीन गुनी हो गई। स्ट्राइप के चीफ इकोनॉमिस्ट अर्नी टेडेस्ची के मुताबिक, एआई उद्यमियों का ‘बिल्ट-इन बिजनेस पार्टनर’ बन गई है। बेन ब्रोका – बिना किसी कर्मचारी के 10,000 से ज्यादा ग्राहक जोड़े अमेरिका में 40 साल के बेन ब्रोका ने बीते दिसंबर में उद्यमियों के लिए एआई टूल्स बनाने वाली कंपनी शुरू की। बिना किसी कर्मचारी के सिर्फ 8 महीने में उन्होंने 10,000 से ज्यादा ग्राहक जोड़ लिए। इस साल करीब 95 करोड़ आय का अनुमान है। इन्होंने निवेशकों से पहले ही 287 करोड़ जुटा लिए हैं। उछाल – टेक सेक्टर में बिजनेस एप्लिकेशन 45 फीसदी बढ़े बैंक ऑफ अमेरिका इंस्टीट्यूट की अर्थशास्त्री टेलर बॉले इस घटनाक्रम की एक अन्य उभरती तस्वीर की तरफ ध्यान खींचते हैं। उनके मुताबिक सिर्फ एक साल में इन्फॉर्मेशन सेक्टर में नए बिजनेस एप्लिकेशन करीब 45% बढ़े, जो सभी सेक्टरों में सबसे ज्यादा है। लेकिन इसी सेक्टर में नई भर्ती की मंशा वाले प्रमोटर सबसे तेजी से घटे। चुनौती – दूसरों के आइडिया की नकल करना अब बेहद आसान ऑरलैंडो में अकेले क्रेडिट-कार्ड बेनिफिट्स एप चलाने वाले ट्रॉय जॉनस्टन (40) हर महीने करीब 3,000 डॉलर (लगभग 29 लाख रुपए) मुनाफा कमा रहे हैं। उनका कहना है कि एआई ने हर किसी को ‘एक्सकैलिबर तलवार’ थमा दी है। यानी कोई भी आसानी से उनके आइडिया की नकल कर सकता है। कामयाबी – 9 महीने सोलो, फिर बिजनेस को मिली तेज रफ्तार क्लेयर वो (41) ने 2023 में एक डॉलर यानी 95.6 रुपए प्रति माह वाला एक कम खर्चीला डॉक्यूमेंटेशन एप बनाया। शुरुआती 9 महीने अकेले काम करने के बाद उन्होंने एक इंजीनियर को काम पर रख लिया। आज इस एप के करीब एक लाख यूजर हैं और इस साल उन्हें लगभग 10 करोड़ रुपए का जोरदार मुनाफा तय माना जा रहा है। एआई-केंद्रित फर्म्स में औसतन 25 फीसदी कम कर्मचारी – हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर रेम्ब्रांड कोनिंग की स्टडी में शामिल 50,000 एआई-केंद्रित कंपनियों में औसतन 25% कम कर्मी मिले। – सैन फ्रांसिस्को के एक सोलो-फाउंडर जूलियन वाइसर को जून में 10 सीटों के लिए 4,500 आवेदन मिले, मई के मुकाबले 5 गुना। – 39 वर्षीय समीर अहमद ने 20 साल की नौकरी छोड़कर सोलो कोचिंग-कंसल्टिंग बिजनेस शुरू किया। कुछ ही महीनों में यह बंद हो गया।
मलेशिया में पंजाबी लड़की पाकिस्तानी युवक साथ पकड़ी, थप्पड़ जड़े-VIDEO:मोगा के युवकों ने घेरा, रोड पर जोर-जोर से रोने लगी, बोली-मेरे परिवार को सब पता

मलेशिया के एक हाईवे पर पंजाबी युवती को बीच सड़क थप्पड़ मारे गए। दावा है कि मोगा की रहने वाली युवती को कुछ पंजाबी युवकों ने पाकिस्तानी युवक के साथ पकड़ा। इसके बाद बीच सड़क पर युवती से बहस हुई, उसे थप्पड़ मारे गए और पाकिस्तानी युवक के साथ भी धक्का-मुक्की की गई। पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है। 30 जुलाई को शेयर किए वीडियो में युवकों ने खुद को मोगा का रहने वाला बताते हुए दावा किया कि युवती पाकिस्तान के युवक के साथ मलेशिया में रह रही है। उन्होंने इसे पंजाब की बदनामी बताते हुए युवती को डिपोर्ट कराने की मांग की। पंजाब की लड़कियां जब ऐसा करती हैं तो हमारी बेइज्जती होती है। वहीं, वीडियो में यह भी दावा किया गया कि कुछ निहंग जत्थेबंदियां भी युवती को भारत वापस भेजने की मांग कर रही हैं। हालांकि, इन दावों और वीडियो की दैनिक भास्कर पुष्टि नहीं करता। युवती से बहस के PHOTOS… पढ़िए वीडियो में क्या दिख रहा… युवती बोली-परिवार को जानकारी, फोन नहीं लग पाया वीडियो में पाकिस्तानी युवक दावा करता है कि युवती के परिवार को उनके साथ रहने की जानकारी है और वह रोजाना उनसे बात करता है। इस पर मौजूद पंजाबी युवक उसे मौके पर ही युवती के माता-पिता से फोन मिलाने के लिए कहते हैं, लेकिन कॉल नहीं लग पाती। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस तेज हो जाती है। डिपोर्ट कराने की मांग, निहंग जत्थेबंदियों का भी सपोर्ट बहस के दौरान कुछ युवक किसी ‘रूबी मैम’ को फोन कर युवती को डिपोर्ट कराने की मांग करते हैं। वीडियो में वे यह भी दावा करते हैं कि कई निहंग जत्थेबंदियां भी युवती को भारत वापस भेजने की मांग कर रही हैं। इसी दौरान कुछ युवक पाकिस्तानियों के साथ युवती के रहने पर आपत्ति जताते हुए अपनी नाराजगी भी व्यक्त करते हैं। बहस के बाद धक्का-मुक्की वीडियो में आगे बहस बढ़ने पर पंजाबी युवक युवती से पाकिस्तानी युवक का साथ छोड़ने के लिए कहते हैं। इसी दौरान पाकिस्तानी युवक के साथ धक्का-मुक्की होती है। युवती बीच में आकर उसे बचाने की कोशिश करती दिखाई देती है। पैसों के विवाद का भी हुआ जिक्र बातचीत के दौरान कुछ युवक पाकिस्तानी युवक से कहते हैं कि उसका ‘हैप्पी’ नाम के व्यक्ति के साथ पैसों का विवाद है और उसे पहले वही मामला सुलझाना चाहिए। इस दौरान ‘रूबीना’ नाम की एक युवती का भी जिक्र होता है, जिसे वीडियो कॉल कर पूरी घटना बताने का दावा किया जाता है। युवती परिवार से बात नहीं करवा सकी वीडियो के अंत में युवती से उसके घर का पता और परिवार से बात कराने के लिए कहा जाता है। युवती कहती है कि उसके परिजनों को सब पता है, लेकिन वह मौके पर अपने माता-पिता से फोन पर बात नहीं करवा पाती।
इजराइल गाजा से पीछे हटेगा:हमास ने हथियार छोड़ने पर पर दी सहमती; ट्रम्प बोले- ये ऐतिहासिक समझौता

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को घोषणा की कि गाजा में हमास के निशस्त्रीकरण और इजरायली सेना की वापसी को लेकर एक समझौता हो गया है। हालांकि, फिलिस्तीनी क्षेत्र में युद्ध खत्म करने की राह में अभी भी कई शर्तें और लंबी समय सीमा जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। फिलहाल हमास या इजरायल, किसी ने भी इस समझौते पर सहमति के संकेत नहीं दिए हैं। यह घोषणा अमेरिका द्वारा मध्यस्थता वाले संघर्ष विराम के नौ महीने बाद आई है। इजरायल और हमास के बीच बातचीत दूसरे चरण के क्रियान्वयन को लेकर रुकी हुई थी, जिसमें हमास का निशस्त्रीकरण और गाजा का पुनर्निर्माण शामिल है। गाजा में शांति बहाली की कोशिशें तेज एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि अगर इजराइल गाजा के पुनर्निर्माण के लिए के 20 सूत्रीय प्लान को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं देता है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बहुत निराश होंगे। यह टिप्पणी हमास द्वारा अमेरिका नियंत्रित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के निरस्त्रीकरण प्लान को मंजूरी देने के बाद एक ब्रीफिंग के दौरान की गई। इससे पहले गुरुवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा था कि यह प्रस्ताव इजराइली मांगों को पूरा नहीं करता, जिससे संकेत मिला कि यरुशलम इसे आगे नहीं बढ़ने देगा। अमेरिकी अधिकारी ने चेतावनी दी कि वे इजराइल से ऐसा कुछ नहीं मांग रहे जो उस 20 सूत्रीय प्लान का हिस्सा न हो, जिस पर इजराल ने शुरू में सहमति जताई थी। अधिकारी ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि इजराइल इसका पालन करेगा। उन्होंने कहा कि इजराइल को उस मूल समझौते पर टिके रहने की जरूरत है, जिससे बंधकों की घर वापसी हुई और युद्ध समाप्त हुआ। अधिकारी के अनुसार, इजराइल के सामने अभी कई मुद्दे हैं और वे इस मामले को फिलहाल और नहीं बढ़ाना चाहते। हमास ने हथियार छोड़ने के प्लान पर दी सहमति ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ने पुष्टि की है कि हमास ने पिछले साल गाजा में हुए संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने के लिए अपने हथियारों को हटाने के रोडमैप पर सहमति दे दी है। बोर्ड ने एक बयान में कहा कि पहली बार हमास आधिकारिक तौर पर अपने सभी हथियार छोड़ने के एक व्यावहारिक प्लान के लिए प्रतिबद्ध हुआ है, जिसके बाद इजराइल गाजा से अपनी सेना हटाएगा। बोर्ड के अनुसार, अब उनका ध्यान इस प्लान को लागू करने पर है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ने ‘नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा’ (NCAG) के साथ मिलकर काम किया है। जल्द ही ‘इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स’ (ISF) के समर्थन से पूर्ण अधिकार की ओर एक चरणबद्ध बदलाव शुरू होगा। बोर्ड के उच्च प्रतिनिधि निकोले म्लादेनोव ने कहा कि इसके बाद गाजा का पुनर्निर्माण होगा, जिसका शासन फिलिस्तीनी करेंगे और यह इजराइल के साथ शांति से रहेगा। 14 दिन में तय होगी समयसीमा हमास की मंजूरी के बाद 14 दिन की अवधि शुरू हो गई है, जिसमें दोनों पक्ष प्रस्ताव के हर चरण को लागू करने की समयसीमा तय करेंगे। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के अधिकारियों के अनुसार, पूर्ण निरस्त्रीकरण प्रक्रिया के लिए संभावित समयसीमा लगभग 200 से 350 दिनों के बीच है। समयसीमा तय होने के बाद, बोर्ड इजराइल को अक्टूबर 2025 के गाजा संघर्ष विराम के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए कहेगा। अधिकारियों ने बताया कि इजराइल को मूल ‘येलो लाइन’ तक पीछे हटना होगा, जो अक्टूबर 2025 के समझौते में तय की गई थी। उस समय इजराइल का गाजा के लगभग 53 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण था, लेकिन बाद में इजराइल ने इसे बढ़ाकर 70 प्रतिशत तक कर लिया था। इजराइल को तब तक पीछे हटने की जरूरत नहीं होगी जब तक हमास अपने हथियार सौंपना शुरू नहीं करता। साथ ही, दोनों पक्षों की प्रतिबद्धताओं की स्वतंत्र पुष्टि के लिए एक ‘इम्प्लीमेंटेशन वेरिफिकेशन कमेटी’ (IVC) बनाई जाएगी।
इजराइल गाजा से पीछे हटेगा:हमास ने हथियार छोड़ने पर दी सहमती; ट्रम्प बोले- ये ऐतिहासिक समझौता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को बताया कि गाजा में हमास और इजराइल के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। ट्रम्प के मुताबिक, हमास और दूसरे सभी हथियारबंद संगठनों ने हथियार छोड़ने पर सहमति जताई है। इसके बाद इजराइली सेना भी चरणबद्ध तरीके से गाजा से पीछे हटेगी। हालांकि, अब तक न तो इजराइल और न ही हमास ने आधिकारिक तौर पर इस समझौते को मंजूरी दी है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि यह उनके 20-पॉइंट गाजा प्लान का सबसे अहम हिस्सा है और गाजा में स्थायी शांति व सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि उनकी टीम की कई महीनों की कोशिशों के बाद यह समझौता हो सका। फिलिस्तीन में नई तकनीकी सरकार बनेगी गाजा का प्रशासन नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) नाम की नई संस्था को सौंपा जाएगा। यह संस्था हमास और फिलिस्तीनी अथॉरिटी से अलग होगी। इसका काम गाजा में नागरिक सेवाएं, प्रशासन और कानून-व्यवस्था संभालना होगा। इस योजना का मकसद गाजा में एक ही सरकार, कानून और सुरक्षा व्यवस्था लागू करना है। ट्रम्प के मुताबिक समझौता कई चरणों में लागू होगा। जैसे-जैसे हमास अपने हथियार छोड़ेगा, वैसे-वैसे इजराइली सेना गाजा से हटेगी। इसके बाद एक इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स और नई फिलिस्तीनी पुलिस गाजा की सुरक्षा संभालेंगे। योजना के मुताबिक गाजा का प्रशासन संभालने वाली नई तकनीकी फिलिस्तीनी सरकार ट्रम्प के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के साथ मिलकर काम करेगी। ट्रम्प का कहना है कि इससे गाजा फिर कभी इजराइल पर हमलों का अड्डा नहीं बन पाएगा। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इसे पूरी तरह लागू करना अभी आसान नहीं होगा। हमास और दूसरे संगठनों के हथियार छोड़ने, इजराइली सेना की वापसी और नई व्यवस्था लागू होने में कई महीने लग सकते हैं। बोर्ड ऑफ पीस क्या है? ट्रम्प ने पहली बार पिछले साल सितंबर 2025 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है। पिछले हफ्ते दुनिया के नेताओं को भेजे गए न्योते में बताया गया कि इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने में भी काम करेगा। भेजे गए एक मसौदा (चार्टर) में कहा है कि जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक इस बोर्ड का सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा। कैसे होगा हमास का निरस्त्रीकरण? योजना के तहत पहले हमास की सिविल पुलिस अपने हथियार नई फिलिस्तीनी पुलिस को सौंपेगी। इसके बाद भारी हथियार सुरक्षित जगहों पर रखे जाएंगे। हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियां और सुरंगों को नष्ट किया जाएगा। छोटे हथियार भी फिलिस्तीनी कानून के तहत जमा कराए जाएंगे। गाजा में सक्रिय दूसरे हथियारबंद गुटों और युद्ध के दौरान बने एंटी-हमास मिलिशिया को भी हथियार छोड़ने होंगे। अमेरिकी और Board of Peace अधिकारियों के मुताबिक पूरी प्रक्रिया करीब 200 से 350 दिन तक चल सकती है। हर चरण पूरा होने के बाद स्वतंत्र निगरानी एजेंसियां इसकी पुष्टि करेंगी। तभी अगला चरण शुरू होगा। इजराइल कब हटेगा? समझौते के मुताबिक इजराइल की सेना उसी अनुपात में पीछे हटेगी, जिस अनुपात में हमास हथियार छोड़ेगा। साथ ही इजराइल को गाजा में सैन्य अभियान और हवाई हमले रोकने होंगे। हालांकि, अगर कोई तत्काल सुरक्षा खतरा हुआ तो कार्रवाई की गुंजाइश रहेगी। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि बातचीत के हर चरण में इजराइल को शामिल रखा गया और उससे वही करने को कहा गया है, जिस पर वह पहले ही ट्रम्प के 20-पॉइंट प्लान के तहत सहमत हो चुका है। हमास ने पूरी तरह हामी नहीं भरी ट्रम्प के दावे के बावजूद हमास की ओर से अलग संकेत मिले हैं। हमास के वरिष्ठ नेता गाजी हमद ने अल जजीरा से कहा कि बातचीत सकारात्मक रही है, लेकिन जब तक इजराइली सेना पूरी तरह गाजा से नहीं हटती, तब तक संगठन हथियार छोड़ने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाएगा। हमास का कहना है कि निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया नई फिलिस्तीनी प्रशासनिक व्यवस्था के तहत होगी और उसमें इजराइल की कोई भूमिका नहीं होगी। यह रुख ट्रम्प के बताए गए चरणबद्ध मॉडल से अलग नजर आता है। मध्यस्थ देशों की बड़ी भूमिका अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक मिस्र, कतर और तुर्किये ने कई महीनों तक बातचीत कराई। मिस्र की खुफिया एजेंसी के प्रमुख हसन रशीद ने मध्यस्थता में अहम भूमिका निभाई। अधिकारियों का दावा है कि ईरान ने हमास को यह प्रस्ताव ठुकराने की सलाह दी थी, लेकिन आखिरकार संगठन बातचीत जारी रखने पर राजी हुआ।
रेड सी की सुरक्षा के लिए गठबंधन बना रहा सऊदी:यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से शिपिंग को बचाने की तैयारी

सऊदी अरब ने लाल सागर में शिपिंग को यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों से बचाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की घोषणा की है। रॉयटर्स की बुधवार की रिपोर्ट के अनुसार, इस गठबंधन में शामिल होने के लिए दर्जनों देशों को आमंत्रित किया गया है, हालांकि अभी सदस्यता को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। यह गठबंधन रियाद में स्थित होगा और इसे गुरुवार तक सार्वजनिक किया जा सकता है। गठबंधन में कौन हो सकता है शामिल? सऊदी अरब ने आधिकारिक तौर पर आमंत्रित देशों की सूची जारी नहीं की है। हालांकि, खबरों के अनुसार अमेरिका, पाकिस्तान, मिस्र, तुर्की, जिबूती, सोमालिया, सूडान और जर्मनी, फ्रांस व इटली जैसे यूरोपीय देशों को निमंत्रण भेजा गया है। अल-मॉनिटर की रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्र, जिबूती और सूडान ने गठबंधन में शामिल होने पर सहमति जताई है। सऊदी अरब ने करीब 50 देशों को भागीदारी की पुष्टि के लिए समय सीमा दी है। सऊदी रक्षा मंत्री की अमेरिकी नेताओं से मुलाकात अमेरिकी मीडिया के अनुसार, सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ आपात बैठक की। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंस सलमान ने वाशिंगटन को बताया कि सऊदी अरब ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध के और बढ़ने के खिलाफ है, लेकिन वह अपनी रक्षा के लिए तैयार है। उन्होंने वेंस से यह भी कहा कि सऊदी अरब हूती विद्रोहियों के साथ स्थिति को खुद संभाल सकता है और फिलहाल अमेरिकी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। लाल सागर का महत्व और हूतियों का खतरा लाल सागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक व्यापार का 30 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है, वैश्विक तेल निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है। 2024 में, 4.1 अरब बैरल कच्चा तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद इस जलडमरूमध्य से गुजरे, जो वैश्विक कुल का लगभग पांच प्रतिशत है। हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब पर समुद्री नाकेबंदी लागू की थी, जिससे तेल शिपमेंट बाधित हुए। हूतियों ने सऊदी नेताओं पर 12 वर्षों से अन्यायपूर्ण घेराबंदी करने का आरोप लगाया है। मंगलवार को हूती प्रवक्ता याह्या सारी ने एक्स पर पोस्ट किया कि समूह ने सऊदी तेल टैंकर ‘एनसीसी गजाली’ को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया, जिससे उसे अपना रास्ता बदलना पड़ा। शिपिंग पर टोल लगाने की योजना रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, हूती विद्रोही शिपिंग पर शुल्क लगाने पर विचार कर रहे हैं। यमन के सूचना मंत्री मोअम्मर अल-एर्यानी ने बुधवार को इस खबर की पुष्टि की और आरोप लगाया कि इसमें ईरान का इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) शामिल है। एर्यानी ने चेतावनी दी कि यह एक खतरनाक कदम है, जिसका उद्देश्य समुद्री गलियारे को मिलिशिया की गतिविधियों के लिए फंडिंग का जरिया बनाना है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत, प्राकृतिक जलडमरूमध्य के किनारे स्थित देशों को टोल वसूलने की अनुमति नहीं है। वैश्विक व्यापार और तेल कीमतों पर असर लाल सागर में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति लाइनों पर बुरा असर पड़ा है। रॉयटर्स के अनुसार, सप्ताहांत में लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर केवल 11 रह गई, जबकि 2023 से पहले प्रतिदिन 70 से अधिक जहाज यहां से गुजरते थे। फरवरी में अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की कीमतें अस्थिर हैं। बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 88.09 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि पिछले हफ्ते कीमतें 100 डॉलर के पार चली गई थीं।
रेड सी की सुरक्षा के लिए गठबंधन बना रहा सऊदी:50 देशों को न्योता भेजा; हूती विद्रोहियों के हमलों से जहाजों को बचाना मकसद

सऊदी अरब ने ऐलान किया है कि वह रेड सी (लाल सागर) में जहाजों की सुरक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाएगा। इसका मकसद यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से जहाजों की रक्षा करना है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गठबंधन में शामिल होने के लिए कई देशों को न्योता भेजा गया है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि कौन-कौन से देश इसमें शामिल होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक इसकी औपचारिक घोषणा जल्द की जा सकती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सऊदी ने 50 से ज्यादा देशों को गठबंधन में शामिल होने का न्योता भेजा है। हालांकि अभी तक उन देशों की आधिकारिक सूची जारी नहीं हुई है। हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया था। इससे रेड सी के रास्ते भेजे जा रहे तेल की खेप पर असर पड़ा है। गठबंधन में कौन हो सकता है शामिल? मिडिल ईस्ट की न्यूज वेबसाइट अल-मॉनिटर के मुताबिक अमेरिका, पाकिस्तान, मिस्र, तुर्किये, जिबूती, सोमालिया और सूडान को न्योता भेजा गया है। इसके अलावा जर्मनी, फ्रांस और इटली समेत कई यूरोपीय देशों को भी निमंत्रण मिला है। इस रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि मिस्र, जिबूती और सूडान गठबंधन में शामिल होने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, सऊदी अरब का करीबी सहयोगी अमेरिका अभी तक आधिकारिक तौर पर गठबंधन में शामिल होने की पुष्टि नहीं कर पाया है, लेकिन उसके इसमें शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। सऊदी रक्षा मंत्री की अमेरिकी नेताओं से मुलाकात एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ इमरजेंसी बैठक की। बैठक से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि प्रिंस खालिद ने अमेरिका से कहा कि सऊदी अरब, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध को और फैलाने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर वह अपनी रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 28 फरवरी से अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद, ईरान जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दूसरे इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंस खालिद ने जेडी वेंस से यह भी कहा कि सऊदी अरब, यमन के हूती विद्रोहियों से निपटने में सक्षम है और फिलहाल उसे इस मामले में अमेरिका की सैन्य मदद की जरूरत नहीं है। दुनिया के लिए रेड सी इतना अहम क्यों है? रेड सी दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। इसके एक तरफ सऊदी अरब और यमन हैं, जबकि दूसरी तरफ मिस्र, सूडान, इरिट्रिया, जिबूती और सोमालिया स्थित हैं। दुनिया के करीब 30% समुद्री व्यापार का आवागमन इसी रास्ते से होता है। रेड सी में आने-जाने के केवल दो रास्ते हैं। पूर्व में बाब अल-मंदेब स्ट्रेट और पश्चिम में स्वेज नहर। इसलिए इनमें से किसी एक रास्ते में रुकावट आने पर वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ता है। बाब अल-मंदेब अपने सबसे संकरे हिस्से में सिर्फ 29 किलोमीटर चौड़ा है। इसी वजह से यहां जहाजों के आने और जाने के लिए केवल दो समुद्री लेन हैं। ईरान जंग के बाद होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी के कारण सऊदी अरब अपना ज्यादातर तेल इसी रास्ते से भेज रहा है। लेकिन अब इस रास्ते में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का असर बढ़ गया है। ईरान जंग से एक चौथाई सप्लाई पर असर पड़ा सामान्य समय में दुनिया के लगभग 20% तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती है। अब होर्मुज स्ट्रेट और रेड सी, दोनों क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया की करीब 25% ऊर्जा आपूर्ति किसी न किसी रूप में इस संघर्ष से प्रभावित हो रही है। शिपिंग पर टोल लगाने की योजना रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, हूती विद्रोही शिपिंग पर शुल्क लगाने पर विचार कर रहे हैं। यमन के सूचना मंत्री मोअम्मर अल-एर्यानी ने बुधवार को इस खबर की पुष्टि की और आरोप लगाया कि इसमें ईरान का इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) शामिल है। एर्यानी ने चेतावनी दी कि यह एक खतरनाक कदम है, जिसका उद्देश्य समुद्री गलियारे को मिलिशिया की गतिविधियों के लिए फंडिंग का जरिया बनाना है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत, प्राकृतिक जलडमरूमध्य के किनारे स्थित देशों को टोल वसूलने की अनुमति नहीं है। वैश्विक व्यापार और तेल कीमतों पर असर लाल सागर में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति लाइनों पर बुरा असर पड़ा है। रॉयटर्स के अनुसार, सप्ताहांत में लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर केवल 11 रह गई, जबकि 2023 से पहले प्रतिदिन 70 से अधिक जहाज यहां से गुजरते थे। फरवरी में अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की कीमतें अस्थिर हैं। बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 88.09 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि पिछले हफ्ते कीमतें 100 डॉलर के पार चली गई थीं।







