Tuesday, 22 Sep 2026 | 11:52 PM

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चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा 4,000 क्विंटल तय:केंद्र ने अधिकतम 30 दिन स्टॉक रखने का आदेश दिया; 1 अगस्त से 30 नवंबर तक लागू रहेंगे नियम

चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा 4,000 क्विंटल तय:केंद्र ने अधिकतम 30 दिन स्टॉक रखने का आदेश दिया; 1 अगस्त से 30 नवंबर तक लागू रहेंगे नियम

केंद्र सरकार ने देशभर में चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आदेश जारी कर चीनी व्यापारियों के लिए अधिकतम 30 दिन की स्टॉक लिमिट और 4,000 क्विंटल की होल्डिंग सीमा तय कर दी है। खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की गजट अधिसूचना के अनुसार, यह नया आदेश 1 अगस्त 2026 से लागू होगा और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। मानसून में कमी के अनुमान को देखते हुए घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। देश के किसी भी व्यापारी पर 4,000 क्विंटल की सीमा लागू मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और चीनी (नियंत्रण) आदेश, 2025 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह पाबंदी लगाई है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि देश भर में कोई भी चीनी व्यापारी या डीलर किसी भी स्थान पर 4,000 क्विंटल से अधिक चीनी स्टॉक में नहीं रख सकेगा। स्टॉक रखने की अवधि की गिनती रसीद की तारीख से होगी केंद्र सरकार के निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि किसी व्यापारी द्वारा स्टॉक रखने की अवधि की गणना उस तारीख से शामिल की जाएगी, जिस दिन व्यापारी को चीनी का स्टॉक प्राप्त हुआ है। इसके अलावा व्यापारी प्राप्त स्टॉक को 30 दिनों से अधिक समय तक होल्ड नहीं कर पाएंगे। राज्य सरकारों को टर्नओवर सीमा तय करने के निर्देश मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को अपने स्तर पर स्टॉक होल्डिंग और टर्नओवर की सीमाएं निर्धारित करने को कहा है। हालांकि, राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी सीमाएं केंद्र द्वारा तय की गई 4,000 क्विंटल की सीमा या 30 दिन की अवधि से अधिक न हों। व्यापारियों को पोर्टल पर अपडेट करना होगा डेटा सरकार ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने देश के सभी चीनी व्यापारियों और डीलरों से कहा है कि वे निर्दिष्ट पोर्टल पर अपनी चीनी की स्टॉक स्थिति की घोषणा करें और इसे नियमित रूप से अपडेट करते रहें। PDS और सरकारी चीनी स्टॉक को पाबंदी से छूट यह आदेश सरकारी खाते में रखी गई चीनी पर लागू नहीं होगा। इसके अलावा, राज्य सरकारों द्वारा नामित डीलरों या राशन दुकानों (PDS) के जरिए वितरण के लिए अधिकृत अधिकारियों के पास मौजूद चीनी के स्टॉक को इस पाबंदी से बाहर रखा गया है। कम मानसून के अनुमान के बीच चीनी एक्सपोर्ट पर पहले ही बैन कीमतों पर काबू पाने और घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर पहले ही रोक लगा दी है। सरकार ने मई में ही तत्काल प्रभाव से चीनी निर्यात पर बैन लगाया था, जिसकी समयसीमा 30 सितंबर तक तय की गई है। चालू विपणन वर्ष 2025-26 (सितंबर में समाप्त होने वाले) के लिए सरकार ने लगभग 16 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी। इस सीजन में 29.3 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, एथेनॉल डायवर्जन के बाद 2025-26 मार्केटिंग सीजन में कुल चीनी उत्पादन 29.3 मिलियन टन रहने का अनुमान है। यह पिछले 2024-25 सीजन में दर्ज किए गए 26.12 मिलियन टन उत्पादन से अधिक है। इंडस्ट्री बॉडीज बोलीं- देश में पर्याप्त स्टॉक, सट्टेबाजी न करें हालिया कीमतों में उछाल के बीच 17 जुलाई को चीनी उद्योग निकायों ISMA और NFCSF ने कहा था कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने संस्थागत खरीदारों, थोक और खुदरा व्यापारियों से अपील की थी कि वे कीमतों में बढ़ोतरी के बीच ‘सट्टेबाजी और घबराहट में खरीदारी’ करने से बचें। क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम?

विजय के बाद शिल्पा शेट्टी के नाम से फर्जी पोस्ट:एक्ट्रेस ने भड़ककर कहा- मेरे नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे; दावा था- आरक्षण पर बयान दिया

विजय के बाद शिल्पा शेट्टी के नाम से फर्जी पोस्ट:एक्ट्रेस ने भड़ककर कहा- मेरे नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे; दावा था- आरक्षण पर बयान दिया

एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के नाम से आरक्षण पर फर्जी पोस्ट वायरल हो गई। जानकारी मिलने पर एक्ट्रेस भड़क गईं और उन्होंने साफ किया कि उनके नाम का गलत इस्तेमाल हो रहा है। शिल्पा शेट्टी ने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा, आरक्षण को लेकर मेरे नाम से जो बातें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह झूठी हैं। मैंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। कुछ लोग जानबूझकर मेरे नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और फर्जी खबर फैला रहे हैं। ऐसी फर्जी न्यूज पर बिल्कुल भरोसा मत कीजिए।” विजय वर्मा ने भी फर्जी पोस्ट वायरल होने पर दी सफाई हाल ही में एक्टर विजय वर्मा के नाम से भी रिजर्वेशन पर एक पोस्ट वायरल हो गई। पोस्ट में विजय के नाम से लिखा गया था, “मेरे पिता ने मारुति 800 खरीदी थी, जब मैं पैदा हुआ था। जब मैं 12वीं कक्षा में पहुंचा, तब उन्होंने होंडा सिटी खरीदी। मैं उसी कार से कॉलेज जाता था, जबकि मेरा सबसे अच्छा दोस्त, जो एक मारवाड़ी परिवार से था, अब भी 12 साल पुरानी हीरो होंडा बाइक चलाता था। हमने एक सरकारी नौकरी की परीक्षा दी। उसने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन उसे सीट नहीं मिली। नतीजे वाले दिन वह रोते हुए घर लौटा, जबकि मैं मुस्कुराते हुए घर गया। मैं उस आरक्षण का हकदार नहीं था, लेकिन मुझे वह मिला। अगर मेरा नहीं, तो कम से कम उसके लिए तो निष्पक्ष मौका उसका अधिकार था।” पोस्ट वायरल होने के बाद विजय ने सफाई देते हुए कहा, “मैंने यह कभी पोस्ट नहीं किया। यह पूरी तरह झूठ है।” रिजर्वेशन पर क्यों वायरल हो रही हैं सेलेब्स की पोस्ट नीट पेपर लीक के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन के बाद शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दे दिया है। इस मुद्दे पर जीत के बाद कई लोग जनरल कैटेगरी के लोगों को सामान्य अधिकार न मिलने पर सवाल उठा रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसके लिए भी विरोध करने की बात कही, जिसके बाद से ही रिजर्वेशन का मुद्दा गरम हो गया। इसी बीच सेलेब्स को इससे जोड़ा जा रहा है।

बादशाह दूसरी बार लेंगे तलाक!:पत्नी ईशा बोलीं- उनके पावर के डर से चुप थी, अब दिखावा नहीं कर सकती; 5 महीने पहले सीक्रेटली शादी की थी

बादशाह दूसरी बार लेंगे तलाक!:पत्नी ईशा बोलीं- उनके पावर के डर से चुप थी, अब दिखावा नहीं कर सकती; 5 महीने पहले सीक्रेटली शादी की थी

पॉपुलर सिगंर और रैपर बादशाह की दूसरी शादी में अनबन की खबरें लगातार बढ़ती जा रही हैं। उनकी पत्नी ईशा रिखी ने हाल ही में एक पोस्ट में लिखा है कि वो अब तक बादशाह के पावर के डर से चुप थीं, लेकिन वो अब और दिखावा नहीं कर सकतीं। ईशा ने पोस्ट में तलाक का हिंट भी दिया था। ईशा रिखी ने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट शेयर कर लिखा है, ‘कुछ लड़ाइयां ऐसी भी होती हैं, जिनके जख्म बाहर दिखाई नहीं देते। मैं बहुत लंबे समय तक चुप रही, क्योंकि मैं डरी हुई थी। मुझे लगता था कि मेरे पति के पास इतना इन्फ्लूएंस, पावर और रीसोर्स हैं कि उनके सामने मैं कुछ नहीं कर पाऊंगी। मैंने खुद को यही समझा लिया था कि चुप रहना ही मेरे लिए सबसे सुरक्षित रास्ता है।’ आगे ईशा ने लिखा है, ‘चुप्पी कभी स्वीकार नहीं की जाती, वह सिर्फ अपने अस्तित्व को बचाने की कोशिश थी। आज मैं डर नहीं, बल्कि हिम्मत को चुन रही हूं। शायद मैं अभी पूरी कहानी बताने के लिए तैयार नहीं हूं, लेकिन अब मैं यह दिखावा करना बंद करने के लिए तैयार हूं कि सब कुछ ठीक था।’ बादशाह के साथ शादी की तस्वीरें पोस्ट कीं, लिखा- तूफान एक सबक है इस क्रिप्टिक पोस्ट से कुछ दिन पहले ही ईशा ने बादशाह के साथ कुछ तस्वीरें और वीडियोज शेयर कर लिखा था, कुछ तूफान, सबक लेकर आता है और हर दुआ उम्मीद। ईशा की इस पोस्ट पर करीबी दोस्त जैस्मिन भसीन ने कमेंट कर उन्हें मजबूत बने रहने की सलाह दी थी। बता दें कि ईशा रिखी की पोस्ट सामने आने के बाद कई करीबी और दोस्त उनके समर्थन में पोस्ट शेयर कर रहे हैं। एक करीबी ने लिखा है, “तुम जिस दौर से गुजर हो और अब भी गुजर रही हो, उसकी मैं गवाह हूं। मैं और तुम्हारे करीब रहने वाले बाकी लोग जानते हैं कि तुमने हर मुश्किल का सामना ईमानदारी, सच्चाई और पूरे आत्मसम्मान के साथ किया है। मजबूत बनी रहो, ईशा रिखी। हम तुम्हारे साथ हैं, और सच के साथ भी।” वहीं एक ने लिखा, स्ट्रॉन्ग रहो, डर कर नहीं। एक करीबी ने लिखा, तुम बहुत स्ट्रॉन्ग और सुंदर हो। सोशल मीडिया के जरिए कन्फर्म की शादी सिंगर और रैपर बादशाह ने मार्च 2026 में ईशा से गुपचुप शादी की थी। इंटिमेट वेडिंग में कपल के करीबी ही शामिल हुए थे। बादशाह ने शादी को राज रखा, हालांकि ईशा रिखी ने सोशल मीडिया में रोमांटिक तस्वीर पोस्ट कर इस पर कन्फर्मेशन दी। वहीं ईशा ने एक फैन के सवाल का जवाब देते हुए बादशाह को पति देव कहा था। इससे पहले ईशा की मां ने उनकी और बादशाह की शादी की तस्वीरें पोस्ट कर दोनों को सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं दी थीं। कौन हैं ईशा रिखी? तलाक के बाद बादशाह ने की ईशा से शादी बादशाह ने साल 2012 में जैस्मिन मसीह से शादी की थी। 2017 में बादशाह बेटी के पिता बने, लेकिन 3 साल बाद ही उनका तलाक हो गया। तलाक के 6 साल बाद बादशाह ने ईशा से दूसरी शादी की है। बादशाह ने फिलहाल कभी शादी पर बात नहीं की है।

कंगना ने नई जनरेशन की महिलाओं को कहा- गटर छाप:कहा- नशा, शराब, कई आदमियों से यौन संबंध बनाना इनके लिए आजादी, हाउसवाइफ तक नहीं बन सकतीं

कंगना ने नई जनरेशन की महिलाओं को कहा- गटर छाप:कहा- नशा, शराब, कई आदमियों से यौन संबंध बनाना इनके लिए आजादी, हाउसवाइफ तक नहीं बन सकतीं

सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने नई पीढ़ी की भारतीय महिलाओं को गटर कहा है। कंगना का कहना है कि ये महिलाएं स्वतंत्र महिलाओं की नकल उतारते हुए नशे करने, शराब पीने और अनगिनत आदमियों से यौन संबंध बनाने को स्वतंत्रता कहती हैं। कंगना ने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट के स्टोरी सेक्शन से लिखा है, ‘सबसे शर्मनाक बात उन युवा हिंदू महिलाओं का व्यवहार है, जो स्वतंत्र और करियर बनाने वाली महिलाओं की जिंदगी की नकल करना चाहती हैं, लेकिन उस आजादी के साथ आने वाली जिम्मेदारियों को नहीं निभाना चाहतीं। असल में स्वतंत्र महिलाएं विद्रोही फैसले लेती हैं, बेबाक राय रखती हैं, परंपराओं से हटकर करियर चुनती हैं और अपने हर फैसले की पूरी जिम्मेदारी भी उठाती हैं। उन्हें अपने कर्मों की कीमत खुद चुकानी पड़ती है। वे अपने माता-पिता या परिवार की कीमत पर ऐसा नहीं करतीं।’ आगे कंगना ने लिखा, ‘आज तथाकथित वेस्टर्न सोच से प्रभावित भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी सामने आई है। मैं इन्हें ‘गटर जेनरेशन’ कहती हूं। इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छी नहीं हैं, लेकिन इतनी बदसूरत सोच और भ्रष्ट मानसिकता रखती हैं कि अच्छी हाउसवाइफ भी नहीं बन सकतीं।’ ‘इसके बावजूद वे अपनी तथाकथित आजादी का दिखावा करती हैं, नशा, शराब और अनगिनत यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं। बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं और लगातार स्वतंत्र जीवन जीने की बातें करती हैं, जबकि वास्तव में वे आत्मनिर्भर होती ही नहीं। एक छोटी-सी याद दिला दूं, आजाद जीवन कमाना पड़ता है। अगर बिना जिम्मेदारी उठाए स्वतंत्र बनने की कोशिश करोगे, तो तुम सिर्फ एक विकृत मानसिकता वाले इंसान हो, ‘गटर छाप’।’ स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर कहा था- कैसी परवरिश हो रही है भाजपा सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने सोमवार को स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर भी विवादित राय दी और नई जनरेशन की परवरिश पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया से लिखा, ‘अपनी पूरी जिंदगी में मैंने कभी इतनी बदसूरती एक साथ नहीं देखी। Gen Z के विरोध-प्रदर्शनों की ये रीलें देखकर घिन आती है। इन लोगों के बोलने का तरीका और जिस भाषा का ये इस्तेमाल कर रहे हैं, वैसा मैंने पहले कभी नहीं देखा। हर फ्रेम इतना अजीब और परेशान करने वाला है कि देखकर घिन होती है। आखिर इन्हें जन्म कौन दे रहा है और इनकी परवरिश कौन कर रहा है?’ स्टूडेंट प्रोटेस्ट के खिलाफ भी दिए कई बयान कंगना रनोट ने सोशल मीडिया के जरिए स्टूडेंट प्रोटेस्ट का जमकर विरोध किया था। उन्होंने कहा कि किसी को पद से हटाने या रखने के लिए सरकार पर दबाव बनाना गलत है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मुद्दों पर बहस के लिए संसद सही जगह है, न कि आंदोलन। कंगना ने कहा था की ये सब जंतर-मंतर पर हुड़दंग कर रहे हैं, उत्पात मचा रहे हैं। जिस तरह से आंदोलन चल रहा है वो ठीक नहीं है। दरअसल दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) छात्रों की मांगों के समर्थन में कई दिनों से प्रदर्शन कर रही है। इसके बाद जब प्रोटेस्ट खत्म हुआ तो कंगना ने प्रदर्शनकारियों की भाषा की आलोचना की।

कंगना ने नई जनरेशन की महिलाओं को कहा- गटर छाप:कहा- नशा, शराब, कई आदमियों से यौन संबंध बनाना इनके लिए आजादी, हाउसवाइफ तक नहीं बन सकतीं

कंगना ने नई जनरेशन की महिलाओं को कहा- गटर छाप:कहा- नशा, शराब, कई आदमियों से यौन संबंध बनाना इनके लिए आजादी, हाउसवाइफ तक नहीं बन सकतीं

सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने नई पीढ़ी की भारतीय महिलाओं को गटर कहा है। कंगना का कहना है कि ये महिलाएं स्वतंत्र महिलाओं की नकल उतारते हुए नशे करने, शराब पीने और अनगिनत आदमियों से यौन संबंध बनाने को स्वतंत्रता कहती हैं। कंगना ने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट के स्टोरी सेक्शन से लिखा है, ‘सबसे शर्मनाक बात उन युवा हिंदू महिलाओं का व्यवहार है, जो स्वतंत्र और करियर बनाने वाली महिलाओं की जिंदगी की नकल करना चाहती हैं, लेकिन उस आजादी के साथ आने वाली जिम्मेदारियों को नहीं निभाना चाहतीं। असल में स्वतंत्र महिलाएं विद्रोही फैसले लेती हैं, बेबाक राय रखती हैं, परंपराओं से हटकर करियर चुनती हैं और अपने हर फैसले की पूरी जिम्मेदारी भी उठाती हैं। उन्हें अपने कर्मों की कीमत खुद चुकानी पड़ती है। वे अपने माता-पिता या परिवार की कीमत पर ऐसा नहीं करतीं।’ आगे कंगना ने लिखा, ‘आज तथाकथित वेस्टर्न सोच से प्रभावित भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी सामने आई है। मैं इन्हें ‘गटर जेनरेशन’ कहती हूं। इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छी नहीं हैं, लेकिन इतनी बदसूरत सोच और भ्रष्ट मानसिकता रखती हैं कि अच्छी हाउसवाइफ भी नहीं बन सकतीं।’ ‘इसके बावजूद वे अपनी तथाकथित आजादी का दिखावा करती हैं, नशा, शराब और अनगिनत यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं। बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं और लगातार स्वतंत्र जीवन जीने की बातें करती हैं, जबकि वास्तव में वे आत्मनिर्भर होती ही नहीं। एक छोटी-सी याद दिला दूं, आजाद जीवन कमाना पड़ता है। अगर बिना जिम्मेदारी उठाए स्वतंत्र बनने की कोशिश करोगे, तो तुम सिर्फ एक विकृत मानसिकता वाले इंसान हो, ‘गटर छाप’।’ स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर कहा था- कैसी परवरिश हो रही है भाजपा सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने सोमवार को स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर भी विवादित राय दी और नई जनरेशन की परवरिश पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया से लिखा, ‘अपनी पूरी जिंदगी में मैंने कभी इतनी बदसूरती एक साथ नहीं देखी। Gen Z के विरोध-प्रदर्शनों की ये रीलें देखकर घिन आती है। इन लोगों के बोलने का तरीका और जिस भाषा का ये इस्तेमाल कर रहे हैं, वैसा मैंने पहले कभी नहीं देखा। हर फ्रेम इतना अजीब और परेशान करने वाला है कि देखकर घिन होती है। आखिर इन्हें जन्म कौन दे रहा है और इनकी परवरिश कौन कर रहा है?’ स्टूडेंट प्रोटेस्ट के खिलाफ भी दिए कई बयान कंगना रनोट ने सोशल मीडिया के जरिए स्टूडेंट प्रोटेस्ट का जमकर विरोध किया था। उन्होंने कहा कि किसी को पद से हटाने या रखने के लिए सरकार पर दबाव बनाना गलत है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मुद्दों पर बहस के लिए संसद सही जगह है, न कि आंदोलन। कंगना ने कहा था की ये सब जंतर-मंतर पर हुड़दंग कर रहे हैं, उत्पात मचा रहे हैं। जिस तरह से आंदोलन चल रहा है वो ठीक नहीं है। दरअसल दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) छात्रों की मांगों के समर्थन में कई दिनों से प्रदर्शन कर रही है। इसके बाद जब प्रोटेस्ट खत्म हुआ तो कंगना ने प्रदर्शनकारियों की भाषा की आलोचना की।

यौन अपराधी एपस्टीन की करोड़ों की संपत्ति किसे मिलेगी:बेलारूस की डेंटिस्ट सबसे बड़ी दावेदार, एपस्टीन ने मरने से पहले आखिरी कॉल उन्हें किया था

यौन अपराधी एपस्टीन की करोड़ों की संपत्ति किसे मिलेगी:बेलारूस की डेंटिस्ट सबसे बड़ी दावेदार, एपस्टीन ने मरने से पहले आखिरी कॉल उन्हें किया था

दुनिया के सबसे चर्चित यौन अपराधियों में शामिल जेफ्री एपस्टीन की मौत को सात साल हो चुके हैं, लेकिन उसकी अरबों की संपत्ति को लेकर विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। अमेरिकी जांच एजेंसियों के नए दस्तावेज सामने आने के बाद माना जा रहा है कि बेलारूस की रहने वाली 37 साल की डेंटिस्ट कारिना शुलियाक एपस्टीन की संपत्ति की सबसे बड़ी दावेदार हैं। दस्तावेजों के मुताबिक, एपस्टीन ने मरने से पहले अपनी वसीयत में उनके लिए करीब 959 करोड़ रुपए तक की संपत्ति और 33 कैरेट की हीरे की अंगूठी छोड़ी थी। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, डॉ. शुलियाक एपस्टीन की गर्लफ्रेंड रही हैं। 10 अगस्त 2019 को न्यूयॉर्क की जेल में आत्महत्या करने से पहले एपस्टीन ने आखिरी फोन भी उन्हें ही किया था। दोनों के निजी ईमेल-तस्वीरें जारी हुए डॉ. कारिना शुलियाक 2019 में एपस्टीन की मौत के बाद से लोगों की नजरों से दूर रहकर सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश कर रही थी। लेकिन उनकी यह कोशिश ज्यादा समय तक नहीं चल सकी। जनवरी के आखिर में अमेरिकी न्याय विभाग ने जेफ्री एपस्टीन से जुड़े करीब 30 लाख पन्नों के दस्तावेज और ईमेल जारी कर दिए। इन रिकॉर्ड में डॉ. शुलियाक और एपस्टीन के बीच हुए हजारों निजी ईमेल और दोनों की साथ में ली गई कई तस्वीरें भी शामिल थीं। इसके बाद दोनों का करीब 8 साल लंबा रिश्ता सबके सामने आ गया। रिकॉर्ड के मुताबिक, बेलारूस में जन्मीं शुलियाक ने खुद को कभी एपस्टीन की पीड़िता नहीं बताया। वहीं, एफबीआई ने भी उनसे एपस्टीन के मामले में कभी पूछताछ नहीं की। एपस्टीन की सैकड़ों पीड़िताओं की ओर से केस लड़ने वाले वकीलों ने भी उनका बयान कभी दर्ज नहीं कराया। 21 साल की उम्र में एपस्टीन से मिली थी जांच रिकॉर्ड के मुताबिक, मार्च 2011 के आखिर में डॉ. कारिना शुलियाक की मुलाकात जेफ्री एपस्टीन से हुई थी। तब वह 21 साल की थीं और न्यूयॉर्क आए सिर्फ नौ महीने हुए थे। वह बेलारूस से अस्थायी स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका आई थीं, ताकि वहां डेंटिस्ट की अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। उस समय एपस्टीन फ्लोरिडा में एक नाबालिग लड़की से वेश्यावृत्ति कराने के मामले में अपना अपराध स्वीकार कर चुका था और उस पर दर्जनों नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के आरोप भी थे। द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, साइबेरिया की एक लड़की ने दोनों की मुलाकात कराई थी। उस महिला ने बताया कि उससे समय-समय पर दूसरी युवा महिलाओं को भी एपस्टीन के पास लाने के लिए कहा जाता था। शुरुआती मुलाकातों में एपस्टीन ने महंगे तोहफों और दूसरी सुविधाओं से शुलियाक को प्रभावित करने की कोशिश की। पहली ही मुलाकात के दौरान उसने उनके डेंटिस्ट बनने के सपने को पूरा कराने में मदद करने की पेशकश भी की। डॉ. शुलियाक पर जमकर खर्च करता था एपस्टीन एपस्टीन डॉ. शुलियाक को अपनी सबसे पसंदीदा बता चुका था और अक्सर कहता था कि वह उनसे प्यार करता है। उसने उन्हें अपनी क्रेडिट कार्ड से मनचाही खरीदारी करने की पूरी छूट दे रखी थी। दोनों कई देशों में साथ घूमते थे। एपस्टीन ने कई सालों में उन्हें करीब 10 लाख डॉलर दिए। इतना ही नहीं, उसने बेलारूस में रहने वाले उनके माता-पिता को भी हजारों डॉलर भेजे थे। ईमेल से यह भी पता चलता है कि 2012 में एपस्टीन ने उन्हें कोलंबिया यूनिवर्सिटी के डेंटल स्कूल में दाखिला दिलाने में मदद की थी और तीन साल की पढ़ाई की पूरी फीस भी भरने का फैसला किया था। समय के साथ डॉ. शुलियाक ने जेफ्री एपस्टीन का इतना भरोसा जीत लिया कि वह उसकी संपत्तियों और कर्मचारियों के मैनेजमेंट में भी मदद करने लगीं। एपस्टीन ने ग्रीन कार्ड दिलाने में भी मदद की 2012 में डॉ. कारिना शुलियाक ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए आवेदन किया। तब तक उनका स्टूडेंट वीजा खत्म हो चुका था और वह तय समय से ज्यादा अमेरिका में रह रही थीं। अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक, 2013 की शुरुआत में जेफ्री एपस्टीन ने उन्हें अमेरिका में रखने का रास्ता निकाला। उस समय न्यूयॉर्क में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिल चुकी थी। एपस्टीन का मानना था कि अगर कारिना की शादी किसी अमेरिकी महिला से करा दी जाए, तो उन्हें ग्रीन कार्ड और बाद में नागरिकता मिलने का रास्ता आसान हो जाएगा। इसके लिए उसने अपनी एक महिला असिस्टेंट से कारिना की शादी कराई। एक ईमेल में एपस्टीन ने लिखा था कि ग्रीन कार्ड पाने का सबसे तेज तरीका समलैंगिक विवाह है। बाद में अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट सांसदों ने आरोप लगाया कि एपस्टीन ने अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया। उनका कहना था कि यह शादी सिर्फ कागजों पर दिखाई गई थी। मई 2018 में डॉ. शुलियाक अमेरिकी नागरिक बन गईं और करीब एक साल बाद उनका तलाक हो गया। मौत से पहले एपस्टीन ने डॉ. शुलियाक के नाम की संपत्ति जुलाई 2019 में जैफ्री एप्सटीन की गिरफ्तारी हो गई। इसके एक महीने बाद उनकी डॉ. शुलियाक से आखिरी बार करीब 20 मिनट फोन पर बातचीत हुई। एपस्टीन ने कहा कि सेक्स ट्रैफिकिंग का मामला उम्मीद से ज्यादा लंबा चलेगा। अगले ही दिन, 10 अगस्त 2019 को एपस्टीन अपनी जेल में मृत मिला। अधिकारियों ने उसकी मौत को आत्महत्या बताया। दस्तावेजों के मुताबिक, मौत से कुछ समय पहले एपस्टीन ने अपनी वसीयत में बदलाव किया था। एक नोट में उसने अपनी उस समय की 60 करोड़ डॉलर की संपत्ति का बड़ा हिस्सा डॉ. शुलियाक के नाम करने की बात लिखी थी। इसमें शादी के इरादे से दी जाने वाली एक बड़ी हीरे की अंगूठी का भी जिक्र था।

यौन अपराधी एपस्टीन की करोड़ों की संपत्ति किसे मिलेगी:बेलारूस की डेंटिस्ट सबसे बड़ी दावेदार, एपस्टीन ने मरने से पहले आखिरी कॉल उन्हें किया था

यौन अपराधी एपस्टीन की करोड़ों की संपत्ति किसे मिलेगी:बेलारूस की डेंटिस्ट सबसे बड़ी दावेदार, एपस्टीन ने मरने से पहले आखिरी कॉल उन्हें किया था

दुनिया के सबसे कुख्यात यौन अपराधियों में शामिल जेफ्री एपस्टीन की मौत को सात साल हो चुके हैं, लेकिन उसकी अरबों रुपए की संपत्ति को लेकर विवाद अब भी जारी है। अमेरिकी जांच एजेंसियों के नए दस्तावेजों से पता चला है कि बेलारूस की 37 वर्षीय डेंटिस्ट कारिना शुलियाक उसकी संपत्ति की सबसे बड़ी दावेदार हो सकती हैं। दस्तावेजों के मुताबिक, एपस्टीन ने अपनी वसीयत में कारिना के नाम करीब 959 करोड़ रुपए की संपत्ति और 33 कैरेट की हीरे की अंगूठी छोड़ी थी। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कारिना शुलियाक एपस्टीन की गर्लफ्रेंड थीं। 10 अगस्त 2019 को न्यूयॉर्क की जेल में आत्महत्या से पहले एपस्टीन ने आखिरी फोन कॉल भी उन्हें ही किया था। दोनों के प्राइवेट ईमेल और तस्वीरें सार्वजनिक हुईं जेफ्री एपस्टीन की 2019 में मौत के बाद डॉ. कारिना शुलियाक लोगों की नजरों से दूर रहकर सामान्य जिंदगी जी रही थीं। हालांकि, यह ज्यादा समय तक नहीं चल सका। जनवरी के आखिर में अमेरिकी न्याय विभाग ने एपस्टीन से जुड़े करीब 30 लाख पन्नों के दस्तावेज, ईमेल और रिकॉर्ड जारी किए। इनमें डॉ. कारिना शुलियाक और एपस्टीन के बीच हुए हजारों निजी ईमेल और दोनों की साथ में ली गई कई तस्वीरें भी शामिल हैं। इन दस्तावेजों से दोनों के करीब 8 साल पुराने रिश्ते का खुलासा हुआ। रिकॉर्ड के मुताबिक, बेलारूस में जन्मीं कारिना शुलियाक ने कभी खुद को एपस्टीन की पीड़िता नहीं बताया। वहीं, एफबीआई ने भी एपस्टीन मामले में उनसे कभी पूछताछ नहीं की। एपस्टीन की सैकड़ों कथित पीड़िताओं की ओर से केस लड़ने वाले वकीलों ने भी उनका बयान कभी दर्ज नहीं कराया। 21 साल की उम्र में एपस्टीन से मिली थीं कारिना जांच रिकॉर्ड के मुताबिक, मार्च 2011 के आखिर में डॉ. कारिना शुलियाक की मुलाकात जेफ्री एपस्टीन से हुई थी। तब वह 21 साल की थीं और न्यूयॉर्क आए उन्हें सिर्फ नौ महीने हुए थे। वह बेलारूस से स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका आई थीं, ताकि डेंटिस्ट की पढ़ाई पूरी कर सकें। उस समय एपस्टीन फ्लोरिडा में एक नाबालिग लड़की से वेश्यावृत्ति कराने के मामले में अपना अपराध स्वीकार कर चुका था। उस पर दर्जनों नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के आरोप भी लग चुके थे। एक महिला ने कराई थी मुलाकात द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, दोनों की मुलाकात एक महिला ने कराई थी। उस महिला ने बताया कि उससे समय-समय पर दूसरी युवा महिलाओं को भी एपस्टीन के पास लाने के लिए कहा जाता था। महंगे तोहफों से प्रभावित करने की कोशिश शुरुआती मुलाकातों में एपस्टीन ने कारिना को महंगे तोहफे और दूसरी सुविधाएं देकर प्रभावित करने की कोशिश की। पहली मुलाकात में ही उसने उनके डेंटिस्ट बनने के सपने को पूरा करने में मदद की पेशकश भी की। शुलियाक पर जमकर खर्च करता था एपस्टीन जांच रिकॉर्ड के मुताबिक, जेफ्री एपस्टीन डॉ. कारिना शुलियाक को अपनी सबसे पसंदीदा बताता था और अक्सर कहता था कि वह उनसे प्यार करता है। उसने उन्हें अपने क्रेडिट कार्ड से मनचाही खरीदारी की पूरी छूट दे रखी थी। दोनों कई देशों की यात्रा भी साथ करते थे। रिकॉर्ड के अनुसार, एपस्टीन ने कई वर्षों में कारिना को करीब 10 लाख डॉलर दिए। उसने बेलारूस में रहने वाले उनके माता-पिता को भी हजारों डॉलर भेजे थे। ईमेल से यह भी पता चलता है कि 2012 में एपस्टीन ने कारिना का कोलंबिया यूनिवर्सिटी के डेंटल स्कूल में दाखिला कराने में मदद की। उसने तीन साल की पढ़ाई की पूरी फीस भरने का भी फैसला किया था। समय के साथ कारिना ने एपस्टीन का इतना भरोसा जीत लिया कि वह उसकी संपत्तियों और कर्मचारियों के प्रबंधन में भी मदद करने लगीं। ग्रीन कार्ड दिलाने के लिए कराई थी समलैंगिक शादी 2012 में डॉ. कारिना शुलियाक ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए आवेदन किया। तब तक उनका स्टूडेंट वीजा खत्म हो चुका था और वह तय समय से ज्यादा अमेरिका में रह रही थीं। अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक, 2013 की शुरुआत में जेफ्री एपस्टीन ने उन्हें अमेरिका में रखने का रास्ता निकाला। उस समय न्यूयॉर्क में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिल चुकी थी। एपस्टीन का मानना था कि किसी अमेरिकी महिला से शादी होने पर कारिना के लिए ग्रीन कार्ड और बाद में नागरिकता हासिल करना आसान हो जाएगा। इसी योजना के तहत उसने अपनी एक महिला कर्मचारी से कारिना की शादी कराई। एक ईमेल में एपस्टीन ने लिखा था कि ग्रीन कार्ड पाने का सबसे तेज तरीका समलैंगिक विवाह है। बाद में अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट सांसदों ने आरोप लगाया कि एपस्टीन ने अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम का दुरुपयोग किया। उनका कहना था कि यह शादी सिर्फ कागजों पर थी। मई 2018 में डॉ. कारिना शुलियाक अमेरिकी नागरिक बन गईं और करीब एक साल बाद उनका तलाक हो गया। मौत से पहले वसीयत में कारिना का नाम जोड़ा जुलाई 2019 में जेफ्री एपस्टीन को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के करीब एक महीने बाद उसकी डॉ. कारिना शुलियाक से आखिरी बार करीब 20 मिनट फोन पर बात हुई। इस दौरान उसने कहा था कि सेक्स ट्रैफिकिंग का मामला उसकी उम्मीद से ज्यादा लंबा चलेगा। अगले ही दिन, 10 अगस्त 2019 को एपस्टीन न्यूयॉर्क की जेल में मृत मिला। अधिकारियों ने उसकी मौत को आत्महत्या बताया। दस्तावेजों के मुताबिक, मौत से कुछ समय पहले एपस्टीन ने अपनी वसीयत में बदलाव किया था। एक नोट में उसने अपनी उस समय की 60 करोड़ डॉलर की संपत्ति का बड़ा हिस्सा डॉ. कारिना शुलियाक के नाम करने की बात लिखी थी। इसमें शादी के इरादे से दी जाने वाली एक बड़ी हीरे की अंगूठी का भी जिक्र था।

हरियाणा के सुधीर सांगवान CJP कोर टीम के मेंबर:कभी मेडिकल स्टोर पर ₹200 की नौकरी की; 'मामला लीगल है' वेब-सीरिज में SHO पेप्सू से फेमस हुए

हरियाणा के सुधीर सांगवान CJP कोर टीम के मेंबर:कभी मेडिकल स्टोर पर ₹200 की नौकरी की; 'मामला लीगल है' वेब-सीरिज में SHO पेप्सू से फेमस हुए

दिल्ली के जंतर-मंतर पर स्टूडेंट्स के प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास के अलावा एक और चेहरा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। यह चेहरा था हरियाणा के चरखी दादरी निवासी और एक्टर सुधीर सांगवान का। सुधीर नेटफ्लिक्स की चर्चित वेब सीरीज ‘मामला लीगल है’, फिल्म ‘RAAKH’ और कई OTT प्रोजेक्ट्स में नजर आ चुके हैं। मामला लीगल सीरिज में SHO पेप्सू से उन्हें पहचान मिली। एक्टिंग के साथ-साथ वे इन दिनों CJP की संस्थापक कोर टीम के सदस्य भी हैं। चरखी दादरी के छोटे से गांव छप्पर से निकलकर सुधीर ने संघर्ष के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई। किसान परिवार से आने वाले सुधीर ने आर्थिक तंगी के दौर में मेडिकल स्टोर हेल्पर पर 200 रुपए के लिए नौकरी की। इसके बाद सिम कार्ड हॉकर, डीजे, ट्रांसपोर्ट कंपनी कर्मचारी और बैंकिंग सेक्टर में भी काम किया। दैनिक भास्कर ने सुधीर सांगवान से बातचीत कर उनके गांव से OTT तक के सफर और CJP से जुड़ने की पूरी कहानी जानी। बैंकों में काम करने से लेकर खुद के स्टार्टअप तक शुरू किए सुधीर सांगवान का जन्म 9 नवंबर 1988 को हरियाणा के चरखी दादरी जिले के छप्पर गांव के किसान परिवार में हुआ। शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की। बाद में राजस्थान के बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई के दौरान थिएटर से जुड़े। आर्थिक तंगी के कारण भिवानी के सरकारी कॉलेज में ग्रेजुएशन बीच में छोड़नी पड़ी। परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए कम उम्र में ही काम शुरू कर दिया। सबसे पहले मेडिकल स्टोर पर हेल्पर बने, जहां रोजाना ₹200 मिलते थे। अतिरिक्त कमाई के लिए रात में डीजे बजाते और फोटोग्राफी भी करते थे। साल 2006 में ₹3,500 महीने की सैलरी पर ट्रांसपोर्ट कंपनी में असिस्टेंट बने। दो साल बाद एक विदेशी कार्गो कंपनी में सुपरवाइजर बने और 2010 तक काम किया। इसके बाद HDFC बैंक में कैशियर के रूप में बैंकिंग सेक्टर में कदम रखा। 2016 में कोटक महिंद्रा बैंक में ब्रांच मैनेजर बने। इसी साल इक्विटस बैंक में असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट (AVP) बने, जहां उनकी सैलरी ₹1.24 लाख महीने तक पहुंच गई। नौकरी के साथ उन्होंने MoneyMind.com और LoanWon.com नाम से लोन सर्विस स्टार्टअप शुरू किए। 2019 में MyMistri.com लॉन्च किया, जिसे बाद में करीब ₹40 लाख में बेच दिया। इसके बाद ‘तुरंत डील’ नाम से प्रॉपर्टी स्टार्टअप और कोरोना काल में ZORKA Grocery शुरू की, लेकिन घाटे के कारण दोनों कारोबार बंद करने पड़े। 2019 में एक्टिंग लाइन में आए, हरियाणवी वेब सीरिज से शुरुआत सुधीर सांगवान बताते हैं कि 2019 में फिल्म निर्माता राहुल दहिया से मुलाकात के बाद एक्टिंग करियर की शुरुआत हुई। पहला मौका हरियाणवी वेब सीरीज ‘विरोध’ में मिला। इसके बाद ‘मायाजाल’, ‘ब्याह के लड्डू’, ‘अखाड़ा’ और ‘स्कैम’ जैसी वेब सीरीज में अलग-अलग किरदार निभाए। मुंबई में 100 से ज्यादा ऑडिशन दिए। ज्यादातर काम उन्हें ऑनलाइन ऑडिशन से मिला। नेटफ्लिक्स की ‘मामला लीगल है’ में SHO जयवंत पेप्सू के रोल से देशभर में पहचान मिली। अमेजन प्राइम वीडियो के विज्ञापन अभियान में मनोज बाजपेयी के साथ भी नजर आए। उनकी फिल्म ‘राख’ अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो चुकी है। अन्ना आंदोलन में शामिल हुए, CJP के मूवमेंट से जुड़े सुधीर ने बताया कि 2011 के अन्ना आंदोलन के दौरान सामाजिक गतिविधियों से जुड़े। इसी दौरान उनकी मुलाकात भिवानी के लोकेश से हुई। बाद में दोनों ने स्टैंड विद नेचर नाम से एक NGO शुरू की। सुप्रीम कोर्ट में ‘कॉकरोच’ शब्द की चर्चा के बाद सोशल मीडिया पर शुरू हुए मूवमेंट से जुड़े। शिक्षा और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय रहने की वजह से उन्होंने CJP के अभियान में हिस्सा लेना शुरू किया। 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए पहले बड़े प्रदर्शन में शामिल हुए। उस दिन भीड़ को संभालने के लिए उन्होंने खुद आगे आकर व्यवस्था संभाली। प्रोटेस्ट के दौरान ये समझ नहीं आ रहा था कि वह बड़े स्पीकर को कहां रखें। भीड़ के बीच जब जगह नहीं मिली तो स्पीकर कंधे पर रखकर लोगों के बीच घूमता रहा। इस दौरान उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। 15 जून को जयपुर और 20 जून को जंतर-मंतर के कार्यक्रम में CJP के प्रमुख आशुतोष रानका ने मंच से उनका परिचय कराया। इसके बाद उन्हें CJP की संस्थापक कोर टीम का सदस्य बनाया गया। पूरे देश में टीम तैयार कर रही CJP सांगवान ने बताया कि संगठन देशभर में अपनी टीम का विस्तार कर रहा है। शिक्षा, रोजगार और जनहित के मुद्दों पर अभियान चलाने की तैयारी है। अलग-अलग राज्यों में संगठन की इकाइयों को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। सोशल मीडिया के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान चलाए जाएंगे।

भारत ने यूक्रेन के राजदूत को तलब किया:ब्लैक सी में जहाज पर हमले में भारतीय चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत

भारत ने यूक्रेन के राजदूत को तलब किया:ब्लैक सी में जहाज पर हमले में भारतीय चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत

भारत ने ब्लैक सी में एक जहाज पर हुए हमले में भारतीय नाविक की मौत के मामले में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को तलब किया है। भारतीय नाविकों की यूनियनों ने हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। विदेश मंत्रालय ने इस मामले को यूक्रेन के सामने मजबूती से उठाया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जहाज एमवी ओमोर्फी पर 18 जुलाई को ब्लैक सी से गुजरते समय हमला हुआ था। मंत्रालय ने पिछले हफ्ते जारी एक बयान में कहा था कि यह हमला कथित तौर पर रूसी क्षेत्रीय जलक्षेत्र में हुआ। हमले के समय जहाज पर 10 क्रू मेंबर सवार थे। इनमें 3 भारतीय नागरिक थे। हमले में भारतीय क्रू मेंबर और चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत हो गई। जहाज पर मौजूद दो अन्य भारतीय क्रू मेंबर सुरक्षित बताए गए हैं। भारत ने हमले की निंदा की भारत ने जहाज पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कमर्शियल शिपिंग और नागरिक क्रू मेंबर पर हमले स्वीकार नहीं किए जा सकते। मंत्रालय ने सभी पक्षों से समुद्री आवाजाही की सुरक्षा सुनिश्चित करने और वैश्विक व्यापार के मुक्त प्रवाह को बनाए रखने की अपील की है। भारत का कहना है कि कमर्शियल शिपिंग रूट्स की सुरक्षा जरूरी है और नागरिक नाविकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला जहाज था एमवी ओमोर्फी एमवी ओमोर्फी मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला बल्क कैरियर है। इसे 2010 में बनाया गया था। यह उस क्षेत्र में संचालित हो रहा था, जहां रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच व्यापारी जहाजों पर बार-बार हमले हुए हैं। इस घटना ने ब्लैक सी क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों के सामने बढ़ते सुरक्षा जोखिम को भी सामने रखा है। भारतीय नाविक दुनिया की मर्चेंट नेवी में सबसे बड़े समूहों में शामिल हैं। भारतीय नाविकों और शिपिंग कंपनियों को एडवाइजरी भारतीय अधिकारियों ने नाविकों और शिपिंग कंपनियों को एडवाइजरी जारी कर ब्लैक सी या उसके आसपास के इलाकों में काम से पहले सुरक्षा जोखिमों का सावधानी से आकलन करने को कहा है। एडवाइजरी में नाविकों और शिपिंग कंपनियों को समुद्री मार्गों की पुष्टि करने, इंश्योरेंस कवरेज की जांच करने और इमरजेंसी प्रक्रियाओं को समझने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी असाइनमेंट को स्वीकार करने से पहले इन पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। हमले में यूक्रेनी ड्रोन के इस्तेमाल का आरोप भारतीय नाविकों की यूनियनों ने इस हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यूक्रेन की ओर से इस आरोप की पुष्टि का उल्लेख नहीं है। हमले की जिम्मेदारी और इसकी पूरी परिस्थितियों को लेकर उपलब्ध कॉपी में आगे की जानकारी नहीं दी गई है। भारत ने इससे पहले भी कमर्शियल शिपिंग लेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। नई दिल्ली लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि समुद्री रास्तों से होने वाले वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखा जाए और नागरिक नाविकों की सुरक्षा से किसी भी स्थिति में समझौता न हो।

भारत ने यूक्रेन के राजदूत को तलब किया:ब्लैक सी में जहाज पर हमले में भारतीय चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत

भारत ने यूक्रेन के राजदूत को तलब किया:ब्लैक सी में जहाज पर हमले में भारतीय चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत

भारत ने ब्लैक सी में एक जहाज पर हुए हमले में भारतीय नाविक की मौत के मामले में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को तलब किया है। भारतीय नाविकों की यूनियनों ने हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। विदेश मंत्रालय ने इस मामले को यूक्रेन के सामने मजबूती से उठाया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जहाज एमवी ओमोर्फी पर 18 जुलाई को ब्लैक सी से गुजरते समय हमला हुआ था। मंत्रालय ने पिछले हफ्ते जारी एक बयान में कहा था कि यह हमला कथित तौर पर रूसी क्षेत्रीय जलक्षेत्र में हुआ। हमले के समय जहाज पर 10 क्रू मेंबर सवार थे। इनमें 3 भारतीय नागरिक थे। हमले में भारतीय क्रू मेंबर और चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत हो गई। जहाज पर मौजूद दो अन्य भारतीय क्रू मेंबर सुरक्षित बताए गए हैं। भारत ने हमले की निंदा की भारत ने जहाज पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कमर्शियल शिपिंग और नागरिक क्रू मेंबर पर हमले स्वीकार नहीं किए जा सकते। मंत्रालय ने सभी पक्षों से समुद्री आवाजाही की सुरक्षा सुनिश्चित करने और वैश्विक व्यापार के मुक्त प्रवाह को बनाए रखने की अपील की है। भारत का कहना है कि कमर्शियल शिपिंग रूट्स की सुरक्षा जरूरी है और नागरिक नाविकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला जहाज था एमवी ओमोर्फी एमवी ओमोर्फी मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला बल्क कैरियर है। इसे 2010 में बनाया गया था। यह उस क्षेत्र में संचालित हो रहा था, जहां रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच व्यापारी जहाजों पर बार-बार हमले हुए हैं। इस घटना ने ब्लैक सी क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों के सामने बढ़ते सुरक्षा जोखिम को भी सामने रखा है। भारतीय नाविक दुनिया की मर्चेंट नेवी में सबसे बड़े समूहों में शामिल हैं। भारतीय नाविकों और शिपिंग कंपनियों को एडवाइजरी भारतीय अधिकारियों ने नाविकों और शिपिंग कंपनियों को एडवाइजरी जारी कर ब्लैक सी या उसके आसपास के इलाकों में काम से पहले सुरक्षा जोखिमों का सावधानी से आकलन करने को कहा है। एडवाइजरी में नाविकों और शिपिंग कंपनियों को समुद्री मार्गों की पुष्टि करने, इंश्योरेंस कवरेज की जांच करने और इमरजेंसी प्रक्रियाओं को समझने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी असाइनमेंट को स्वीकार करने से पहले इन पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। हमले में यूक्रेनी ड्रोन के इस्तेमाल का आरोप भारतीय नाविकों की यूनियनों ने इस हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यूक्रेन की ओर से इस आरोप की पुष्टि का उल्लेख नहीं है। हमले की जिम्मेदारी और इसकी पूरी परिस्थितियों को लेकर उपलब्ध कॉपी में आगे की जानकारी नहीं दी गई है। भारत ने इससे पहले भी कमर्शियल शिपिंग लेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। नई दिल्ली लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि समुद्री रास्तों से होने वाले वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखा जाए और नागरिक नाविकों की सुरक्षा से किसी भी स्थिति में समझौता न हो।