पेरेंटिंग टिप्स: सुबह-सुबह ही आपका 2 साल का बच्चा भी देखने लगता है रील? जानिये मोबाइल की लत की वजह से ये 5 आसान टिप्स अन्यथा…

पालन-पोषण युक्तियाँ: आज के समय में बच्चों की स्क्रीन की आदत एक बड़ी चुनौती बन गई है। माता-पिता अक्सर इस बात से परेशान रहते हैं कि वे अपने बच्चों को मोबाइल की लत से कैसे बचाएं। फोन छीनने से बच्चे चिड़चिड़े हो सकते हैं और जिद कर सकते हैं, इसलिए यह जरूरी है कि आप उन्हें प्यार और समझदारी से जगह दें। बच्चों की दिनचर्या को बदलने से और उनके साथ कुछ रचनात्मक सक्रियता करने से आप उनका स्क्रीन टाइम कम कर सकते हैं। बच्चों के लिए एक निर्देशात्मक भारोत्तोलक तैयार करना सबसे पहला कदम होता है। आप अपने घर में कुछ खास जगह या समय को मोबाइल-फ्री जोन से ही पूरी तरह से बना लें। जैसे, परिवार के खाने के साथ समय-समय पर स्टोरेज टेबल पर फोन का इस्तेमाल पूरी तरह से अन्यत्र किया जाता है। इसी तरह, पासपोर्ट को भी मोबाइल-फ्री स्थान और रात को सॉल्यूशन समय बच्चों के कमरे में फोन बिल्कुल न ले जाएं। बच्चों के लिए नए और कमज़ोर पद बच्चे को बार-बार बोरियत के कारण फोन पोस्टर होते हैं, इसलिए उन्हें बेहतर विकल्प देना जरूरी है। उन्हें ओर ले जाएँ, जैसे कि क्रिकेट, फ़ुटबॉल या साइकल चलाना। अगर बच्चे को घर के अंदर रहना पसंद है तो वे अपनी रुचि के अनुसार डांस, पेंटिंग या म्यूजिक क्लास में डांस कर सकते हैं। इसके अलावा, उन्हें रंग-बिरंगी कॉमिक्स या दिलचस्प किताबों की किताबें पढ़ने के लिए पढ़ें। खुद को बच्चों का उदाहरण बताएं बच्चे अपने माता-पिता के व्यवहार का अनुकरण करते हैं। यदि आप घर पर लगातार बिजी बच्चों को फोन करते हैं, तो उन्हें लाभ होना बहुत मुश्किल हो जाएगा। कोशिश करें कि जब भी आप बच्चों के साथ हों, तो एक तरफ फोन करें। उनके साथ बात करें, उनके साथ खेलें और अपना पूरा समय उन्हें दें। जब बच्चा आपको फोन से दूर देखता है, तो वे खुद-ब-खुद मोबाइल की ओर अपना ध्यान देते हैं। टेक्नोलॉजी को पूरी तरह से प्रतिबंधित करना भी संभव नहीं है, लेकिन इसे सीमित जरूर किया जा सकता है। दो साल तक के बच्चों को स्क्रीन से बिल्कुल दूर। तीन से पांच साल तक के बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम दिन में ज्यादा से ज्यादा आधा घंटा तय करें। अगर आप उन्हें फोन भी करते हैं, तो पैरेंटल कंट्रोल जैसे ऐप्स का उपयोग करें ताकि बच्चा केवल सेफ नॉलेज वाला ही देख सके। प्यार और समझदारी से पुरानी आदतें अचानक हाथ से फोन काटने से बच्चे को गुस्सा या गुस्सा आ सकता है। इसे बदलने का सबसे अच्छा तरीका है उन्हें अलग-अलग सक्रियता के लिए प्यार से मनाना। जैसे, फोन छीनने के बजाय कहा जाता है कि चलो हम मिलकर प्रोजेक्ट करते हैं या कैरम कलाकार हैं। जब आप उन्हें प्यार से किसी पुराने काम में शामिल करेंगे, तो धीरे-धीरे उनके मन में फोन से हटकर खेल और अलग-अलग चीजें जुड़ जाएंगी। (टैग्सटूट्रांसलेट) पेरेंटिंग टिप्स (टी) बच्चों के लिए स्क्रीन समय कम करें (टी) बच्चों को मोबाइल की लत (टी) बच्चों के लिए बाहरी गतिविधियां (टी) माता-पिता का नियंत्रण (टी) बच्चों के लिए स्वस्थ दिनचर्या (टी) स्क्रीन समय सीमा (टी) बच्चों का विकास
पेरेंटिंग टिप्स: सुबह-सुबह ही आपका 2 साल का बच्चा भी देखने लगता है रील? जानिये मोबाइल की लत की वजह से ये 5 आसान टिप्स अन्यथा…

पालन-पोषण युक्तियाँ: आज के समय में बच्चों की स्क्रीन की आदत एक बड़ी चुनौती बन गई है। माता-पिता अक्सर इस बात से परेशान रहते हैं कि वे अपने बच्चों को मोबाइल की लत से कैसे बचाएं। फोन छीनने से बच्चे चिड़चिड़े हो सकते हैं और जिद कर सकते हैं, इसलिए यह जरूरी है कि आप उन्हें प्यार और समझदारी से जगह दें। बच्चों की दिनचर्या को बदलने से और उनके साथ कुछ रचनात्मक सक्रियता करने से आप उनका स्क्रीन टाइम कम कर सकते हैं। बच्चों के लिए एक निर्देशात्मक भारोत्तोलक तैयार करना सबसे पहला कदम होता है। आप अपने घर में कुछ खास जगह या समय को मोबाइल-फ्री जोन से ही पूरी तरह से बना लें। जैसे, परिवार के खाने के साथ समय-समय पर स्टोरेज टेबल पर फोन का इस्तेमाल पूरी तरह से अन्यत्र किया जाता है। इसी तरह, पासपोर्ट को भी मोबाइल-फ्री स्थान और रात को सॉल्यूशन समय बच्चों के कमरे में फोन बिल्कुल न ले जाएं। बच्चों के लिए नए और कमज़ोर पद बच्चे को बार-बार बोरियत के कारण फोन पोस्टर होते हैं, इसलिए उन्हें बेहतर विकल्प देना जरूरी है। उन्हें ओर ले जाएँ, जैसे कि क्रिकेट, फ़ुटबॉल या साइकल चलाना। अगर बच्चे को घर के अंदर रहना पसंद है तो वे अपनी रुचि के अनुसार डांस, पेंटिंग या म्यूजिक क्लास में डांस कर सकते हैं। इसके अलावा, उन्हें रंग-बिरंगी कॉमिक्स या दिलचस्प किताबों की किताबें पढ़ने के लिए पढ़ें। खुद को बच्चों का उदाहरण बताएं बच्चे अपने माता-पिता के व्यवहार का अनुकरण करते हैं। यदि आप घर पर लगातार बिजी बच्चों को फोन करते हैं, तो उन्हें लाभ होना बहुत मुश्किल हो जाएगा। कोशिश करें कि जब भी आप बच्चों के साथ हों, तो एक तरफ फोन करें। उनके साथ बात करें, उनके साथ खेलें और अपना पूरा समय उन्हें दें। जब बच्चा आपको फोन से दूर देखता है, तो वे खुद-ब-खुद मोबाइल की ओर अपना ध्यान देते हैं। टेक्नोलॉजी को पूरी तरह से प्रतिबंधित करना भी संभव नहीं है, लेकिन इसे सीमित जरूर किया जा सकता है। दो साल तक के बच्चों को स्क्रीन से बिल्कुल दूर। तीन से पांच साल तक के बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम दिन में ज्यादा से ज्यादा आधा घंटा तय करें। अगर आप उन्हें फोन भी करते हैं, तो पैरेंटल कंट्रोल जैसे ऐप्स का उपयोग करें ताकि बच्चा केवल सेफ नॉलेज वाला ही देख सके। प्यार और समझदारी से पुरानी आदतें अचानक हाथ से फोन काटने से बच्चे को गुस्सा या गुस्सा आ सकता है। इसे बदलने का सबसे अच्छा तरीका है उन्हें अलग-अलग सक्रियता के लिए प्यार से मनाना। जैसे, फोन छीनने के बजाय कहा जाता है कि चलो हम मिलकर प्रोजेक्ट करते हैं या कैरम कलाकार हैं। जब आप उन्हें प्यार से किसी पुराने काम में शामिल करेंगे, तो धीरे-धीरे उनके मन में फोन से हटकर खेल और अलग-अलग चीजें जुड़ जाएंगी। (टैग्सटूट्रांसलेट) पेरेंटिंग टिप्स (टी) बच्चों के लिए स्क्रीन समय कम करें (टी) बच्चों को मोबाइल की लत (टी) बच्चों के लिए बाहरी गतिविधियां (टी) माता-पिता का नियंत्रण (टी) बच्चों के लिए स्वस्थ दिनचर्या (टी) स्क्रीन समय सीमा (टी) बच्चों का विकास
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति ने हरिद्वार में की पूजा:सिद्धपीठ से नवंबर में होने वाले चुनाव में जीत की कामना की, पहली बार आए उत्तराखंड

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जूमा भारत दौरे पर हरिद्वार पहुंचे। उन्होंने सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में मां भगवती के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की और आगामी चुनावों में सफलता की कामना की। मंदिर प्रशासन ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने महामंडलेश्वर से मुलाकात कर आशीर्वाद भी लिया। इस दौरान जूमा ने कहा कि हरिद्वार का आध्यात्मिक वातावरण उन्हें बेहद पसंद आया। उन्होंने बताया कि वह पहले भी कई बार भारत आ चुके हैं, लेकिन हरिद्वार पहली बार आए हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं की सराहना की। महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका में नवंबर में स्थानीय निकाय चुनाव और 2029 में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। जूमा ने संकल्प लिया कि यदि वह दोबारा राष्ट्रपति बने तो सबसे पहले हरिद्वार आकर मां दक्षिण काली के दर्शन करेंगे। इस दौरान भारत-दक्षिण अफ्रीका के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों पर भी चर्चा हुई। तस्वीरें देखिए- सिलसिलेवार ढंग से पढ़िए पूरी खबर… 1. हरिद्वार के सिद्धपीठ में जैकब जूमा ने की पूजा- दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जूमा इन दिनों भारत के आध्यात्मिक दौरे पर हैं। उन्होंने उत्तराखंड के हरिद्वार पहुंचकर प्रसिद्ध सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में मां भगवती की विशेष पूजा-अर्चना की। जूमा ने बताया कि वे पहले भी कई बार भारत (2008, 2010, 2015, 2016) आ चुके हैं, लेकिन धर्मनगरी हरिद्वार का यह उनका पहला दौरा है। मंदिर के महामंडलेश्वर ने फूलों की भव्य माला पहनाकर उनका स्वागत किया। जूमा दक्षिण अफ्रीका के एक प्रमुख विपक्षी दल के अध्यक्ष हैं। वहां इसी साल 4 नवंबर को स्थानीय निकाय चुनाव हैं और 2029 में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। जूमा ने संकल्प लिया है कि यदि वे दोबारा राष्ट्रपति बनते हैं, तो सबसे पहले फिर से हरिद्वार आकर मां काली की पूजा करेंगे। इस यात्रा के दौरान जूमा के साथ दक्षिण अफ्रीका के राजनयिक, उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री वाईपी सिंह और उनके बेहद करीबी मित्र व विवादित कारोबारी अजय कुमार गुप्ता भी मौजूद रहे। 2. सहारनपुर की राशन दुकान से दक्षिण अफ्रीका के ‘किंगमेकर’ बने गुप्ता ब्रदर्स- जैकब जूमा की किस्मत को बदलने और फिर डुबाने के पीछे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के गुप्ता बंधुओं (अजय, अतुल और राजेश गुप्ता) का हाथ रहा है। गुप्ता बंधुओं के पिता शिवकुमार गुप्ता सहारनपुर के रायवाला बाजार में राशन और मसालों की दुकान चलाते थे। 1985 में पढ़ाई के बाद मंझले भाई अतुल गुप्ता दक्षिण अफ्रीका चले गए, जहां उन्हें रंगभेद के बाद व्यापार की बड़ी संभावनाएं दिखीं। बाद में उन्होंने अपने भाइयों अजय और राजेश को भी बुला लिया। 1993 में उन्होंने सहारा कंप्यूटर्स की शुरुआत की। मेहनत के दम पर यह देश की नंबर वन कंपनी बनी। इसके बाद उन्होंने कोल-गोल्ड माइनिंग, अखबार (न्यूज एज) और कई न्यूज चैनलों पर कब्जा कर अरबों का साम्राज्य खड़ा कर लिया। 3. संकट के समय जैकब जूमा की मदद और गुप्ता राज की शुरुआत- 2000 के आसपास गुप्ता ब्रदर्स और तत्कालीन उपराष्ट्रपति जैकब जूमा के बीच दोस्ती हुई। इसके बाद जूमा पर भ्रष्टाचार और गंभीर आरोप लगे, जिसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया और 15 साल की सजा सुनाई गई। इस बुरे वक्त में गुप्ता बंधुओं ने जैकब जूमा की 5 पत्नियों और 23 बच्चों की आर्थिक मदद की, बच्चों को नौकरियां दीं और जुमा को राष्ट्रपति बनाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया। 2009 में जैकब ज़ूमा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बन गए। इसके बाद देश में गुप्ता बंधुओं का परोक्ष राज शुरू हो गया। सरकारी ठेके केवल गुप्ता ब्रदर्स को मिलते, बड़े पदों पर नियुक्तियां वे तय करते और यहां तक कि सेना के एयरपोर्ट पर अपने निजी विमान उतारते थे। 4. तीन भाइयों के चक्कर में गई राष्ट्रपति की कुर्सी और फिर जेल- 2016 में तत्कालीन उप वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि गुप्ता भाइयों ने उन्हें वित्त मंत्री बनाने का सौदा किया था। इसके बाद देश में भारी बवाल मच गया। इस बेतहाशा राजनीतिक दखल और अरबों के घोटाले के आरोप के चलते दक्षिण अफ्रीका में बेहद लोकप्रिय रहे जैकब ज़ूमा को अपनी राष्ट्रपति की कुर्सी गंवानी पड़ी और उन्हें 15 महीने की जेल काटनी पड़ी। जुमा के हटते ही गुप्ता ब्रदर्स पर शिकंजा कसा। 2018 में छापेमारी के बाद तीनों भाई कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए दुबई (UAE) भाग गए। हालांकि, प्रत्यर्पण संधि होने के बाद हाल ही में दो भाइयों को यूएई में गिरफ्तार कर लिया गया है, जिन्हें वापस दक्षिण अफ्रीका लाने की तैयारी है। राष्ट्रपति पद गंवाने और जेल जाने के बाद, अब जैकब ज़ूमा एक बार फिर अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। अभी वे अपने पुराने साथी अजय गुप्ता को साथ लेकर हरिद्वार में मां भगवती की शरण में पहुंचे हैं। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें… देहरादून बॉर्डर पांवटा साहिब पर डटे 200 निहंग:SSP को दिया दो दिन का अल्टीमेटम; बोले- साथियों को छोड़ो वरना कूच करेंगे देहरादून कूच करने वाले निहंगों में से कुछ लोग अब भी पांवटा साहिब में डटे हुए हैं। मामले में हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने पांवटा साहिब पहुंचकर निहंग जत्थेदारों से बातचीत की। उन्होंने उनकी मांगों और उत्तराखंड कूच को लेकर विस्तार से चर्चा की। (पढ़ें पूरी खबर)
110 करोड़ की एडवेंचर थ्रिलर फिल्म 'नागबंधम- द सीक्रेट ट्रेजर':अभिषेक ने बताया- फिल्म में सिर्फ खजाने की खोज नहीं, मंदिरों-रहस्यों से भरी दुनिया भी दिखेगी

फिल्म ‘नागबंधम द सीक्रेट ट्रेजर’ अपने माइथो कंटेंट को लेकर चर्चा में हैं। इसमें भगवान शिव को खास तरीके से प्रेजेंट किया गया है। यह 3 जुलाई को रिलीज होगी। निर्देशक अभिषेक नामा ने मेकिंग से जुड़ी रोचक बातें शेयर कीं… अभिषेक बताते हैं…‘नागबंधम द सीक्रेट ट्रेजर’ एक भव्य एडवेंचर थ्रिलर फिल्म है, जो सदियों से छिपे एक रहस्य के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में एक ऐसी जर्नी दिखाई गई है, जिसमें पौराणिक कथाएं, पवित्र मंदिर, भूले-बिसरे योद्धा, ब्रह्मकमल और एक खजाना शामिल है, जो मानवता की किस्मत बदल सकता है। यह फिल्म 5 भाषाओं तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और हिंदी में बनी है।’ अभिषेक ने बताया, ‘फिल्म की शूटिंग कई जगहों पर की गई, जिनमें हैदराबाद, विशेष रूप से तैयार किए गए स्टूडियो सेट, जंगल, पानी वाले लोकेशन और बड़े आउटडोर क्षेत्र शामिल हैं, जिन्हें कहानी की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग दुनिया और समय को दर्शाने के लिए तैयार किया गया। सभी शेड्यूल, एक्शन सीक्वेंस, गानों और अन्य कामों को मिलाकर इस फिल्म को पूरा करने में एक साल से अधिक का समय लगा।’ देश के प्राचीन इतिहास और रहस्यमयी खजानों के प्रति रुचि से आया आइडिया अभिषेक साझा करते हैं…‘नागबंधम का मूल आइडिया भारत के प्राचीन इतिहास और रहस्यमयी खजानों के प्रति मेरी गहरी रुचि से आया। कई वर्षों तक मैंने पवित्र मंदिरों, नाग परंपराओं, खो चुकी सभ्यताओं से जुड़ी कहानियों पर रिसर्च की। कई एडवेंचर से भरी कहानियों ने प्रेरित किया।’ हर किरदार के व्यक्तित्व के हिसाब से एक्टर्स को फिल्म में चुना गया है अभिषेक कहते हैं…‘फिल्म के हर किरदार के लिए एक खास व्यक्तित्व और स्क्रीन प्रेजेंस की जरूरत थी। विराट कर्ण को इसलिए चुना गया, क्योंकि उनके भीतर मुख्य किरदार की जर्नी को दिखाने की क्षमता थी। महेश मांजरेकर और मुरली शर्मा जैसे अनुभवी कलाकारों ने फिल्म को गहराई और विश्वसनीयता दी। वहीं नाभा नटेश और दक्षा नागरकर अपने किरदारों में मजबूती और आकर्षण लाईं। जब ये कलाकार जुड़े तो हमें लगा कि ‘नागबंधम’ की दुनिया के लिए हमें बिल्कुल सही टीम मिल गई है। विराट कर्ण उन पहले कलाकारों में शामिल थे, जो इस प्रोजेक्ट से जुड़े, क्योंकि पूरी कहानी उनके किरदार के इर्द-गिर्द घूमती है। ’ करीब 110 करोड़ रुपए है लागत अभिषेक कहते हैं…‘नागबंधम’ का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं है। हर सेट, कॉस्ट्यूम, हथियार और फ्रेम को भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और जुनून के साथ तैयार किया गया है। सिर्फ ट्रेजर हंट नहीं, देश की संस्कृति से लोगों को परिचय भी कराना है। इसका बजट करीब 110 करोड़ रुपए है।’ शूटिंग लोकेशन – हैदराबाद में विशेष रूप से तैयार किए गए स्टूडियो अभिषेक के मुताबिक, ‘फिल्म की शूटिंग कई जगहों पर की गई, जिनमें हैदराबाद, विशेष रूप से तैयार किए गए स्टूडियो सेट, जंगल, पानी वाले लोकेशन और बड़े आउटडोर क्षेत्र शामिल हैं, जिन्हें कहानी की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग दुनिया और समय को दर्शाने के लिए तैयार किया गया। सभी शेड्यूल, एक्शन सीक्वेंस, गानों और अन्य कामों को मिलाकर इस फिल्म को पूरा करने में एक साल से अधिक का समय लगा।’ 10 बड़े सेट में तैयार हुई फिल्म की दुनिया ‘नागबंधम’ के लिए करीब 10 बड़े सेट तैयार किए गए। ‘फिल्म के हर हथियार और कॉस्ट्यूम को अलग तरीके से डिजाइन किया गया है। एक्शन और क्लोजअप सीन्स के लिए हथियारों के अलग-अलग संस्करण तैयार किए गए। फिल्म के इमोशन को शिद्दत से दिखाएंगे 5 भव्य गाने अभिषेक ने बताया ‘फिल्म का हर गीत इसकी कहानी को आगे बढ़ाने के साथ इससे जुड़ी अलग-अलग भावनाओं को भी दिखाता है। – एक भव्य भक्ति गीत, जो दिव्य ऊर्जा और आध्यात्मिकता का उत्सव पर है। – दूसरा रोमांटिक गीत है, जो मुख्य किरदारों के इमोशल रिश्ते को दिखाता है। – तीसरा इमोशनल गीत है, जिसमें दर्द, त्याग और आंतरिक संघर्ष नजर आएगा। – चौथा सनातन धर्म और नागा साधुओं की दुनिया से प्रेरित गीत है। – पांचवें गाने में पारिवारिक उत्सव है, जिसमें खुशी, अपनापन और परंपरा दिखेगी।
मार्केट-कैप में माइक्रोन ने मेटा-टेस्ला को पीछे छोड़ा:AI चिप की डिमांड से शेयरों में 18.4% का उछाल; कंपनी की कुल वैल्यू $1.37 ट्रिलियन पहुंची

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और मेमोरी चिप की भारी मांग के चलते अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयरों में ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली है। गुरुवार को कारोबारी सेशन में माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन कुछ समय के लिए दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों मेटा प्लेटफॉर्म्स और टेस्ला से भी ज्यादा हो गया। मजबूत तिमाही अनुमानों (गाइडेंस) के बाद निवेशकों के बढ़े भरोसे से कंपनी के शेयर इंट्राडे में 18.4% तक उछल गए। मेटा-टेस्ला के बिल्कुल करीब बंद हुआ मार्केट कैप रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को कारोबार खत्म होने पर माइक्रोन टेक्नोलॉजी का शेयर 15.8% की बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार बंद होने पर माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.37 ट्रिलियन डॉलर रहा। इसकी तुलना में मेटा प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैप 1.38 ट्रिलियन डॉलर और इलॉन मस्क की कंपनी टेस्ला का मार्केट कैप 1.41 ट्रिलियन डॉलर था। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान आई बड़ी तेजी से माइक्रोन कुछ समय के लिए इन दोनों कंपनियों से आगे निकल गया था। चौथी तिमाही में $50 बिलियन रेवेन्यू का अनुमान माइक्रोन की इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे कंपनी का चौथी तिमाही (अगस्त में समाप्त होने वाली तिमाही) के लिए जारी किया गया मजबूत रेवेन्यू अनुमान है। कंपनी ने इस तिमाही में करीब 50 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू हासिल करने का अनुमान जताया है। यह वॉल स्ट्रीट के 43.2 बिलियन डॉलर के अनुमान से काफी ज्यादा है। इस शानदार परफॉर्मेंस ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि हाइपरस्केलर्स के कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर जारी चिंताओं के बावजूद AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च मजबूत बना हुआ है। भविष्य की सप्लाई के लिए $22 बिलियन के एडवांस ऑर्डर चिप मार्केट में मची इस होड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि माइक्रोन को भविष्य में मेमोरी चिप्स की सप्लाई सुरक्षित करने के लिए ग्राहकों से 22 बिलियन डॉलर के कमिटमेंट (एडवांस ऑर्डर) मिल चुके हैं। यह हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और अन्य AI फोकस्ड प्रोडक्ट्स की भारी डिमांड को दर्शाता है। 2027 के बाद तक बनी रहेगी चिप की किल्लत ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोन के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) संजय मेहरोत्रा ने एनालिस्ट्स से बात करते हुए कहा कि फिलहाल मांग के मुकाबले सप्लाई पूरी होने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। बाजार में यह तंग स्थिति (शॉर्टेज) कैलेंडर वर्ष 2027 के बाद भी बने रहने की आशंका है। चिप की उपलब्धता में केवल 2028 से धीरे-धीरे सुधार होने की संभावना है। मई में छुआ था $1 ट्रिलियन का पड़ाव माइक्रोन ने इसी साल मई के आखिरी हफ्ते में पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप का आंकड़ा पार किया था। इस आंकड़े को छूकर कंपनी दुनिया की चुनिंदा दिग्गज टेक कंपनियों के क्लब में शामिल हो गई थी। इस अर्निंग रिपोर्ट के आने के बाद से अब तक कंपनी का शेयर 15% से ज्यादा चढ़ चुका है, जबकि साल 2026 में अब तक इस स्टॉक में कुल 326% की भारी बढ़त दर्ज की जा चुकी है। सेमीकंडक्टर और स्टोरेज शेयरों में आई चौतरफा तेजी माइक्रोन के शानदार नतीजों का असर पूरी इंडस्ट्री पर देखने को मिला। गुरुवार को फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 3.2% चढ़ गया। एलएसईजी (LSEG) के डेटा के मुताबिक, यह इंडेक्स अब तक के अपने सबसे मजबूत तिमाही प्रदर्शन की राह पर है। माइक्रोन की कॉम्पिटिटर कंपनियों में सैंडिस्क का शेयर 22%, वेस्टर्न डिजिटल 7.4% और सीगेट टेक्नोलॉजी 4.3% मजबूत हुआ। वहीं क्वालकॉम के शेयरों में भी तेजी आई, क्योंकि कंपनी ने अपने AI-फोकस्ड डेटा-सेंटर बिजनेस के लिए महत्वाकांक्षी ग्रोथ प्लान पेश किया है। एप्पल के कारण टेक सेक्टर में दिखा मिला-जुला रुख माइक्रोन के ब्लॉकबस्टर नतीजों के बावजूद ग्लोबल टेक सेक्टर में मिला-जुला रुख रहा। निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि हाइपरस्केलर्स द्वारा AI पर किया जा रहा भारी खर्च कब तक टिक पाएगा। इसी बीच एपल ने मेमोरी और स्टोरेज चिप की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए अपने आईपैड और मैकबुक की कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर दिया। एपल के इस कदम से कंपनी के शेयरों में 6.1% की गिरावट आई और बाजार में एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर बूम की इस बढ़ी हुई लागत का बोझ आखिरी में कौन उठाएगा। क्या होते हैं हाइपरस्केलर्स और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी? हाइपरस्केलर्स: ये वे बड़ी क्लाउड कंप्यूटिंग और टेक कंपनियां (जैसे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एमेजन और मेटा) होती हैं, जो बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर का संचालन करती हैं। इनके द्वारा किया जाने वाला खर्च पूरी टेक इंडस्ट्री की दिशा तय करता है। हाई-बैंडविड्थ मेमोरी: यह एक एडवांस और सुपर-फास्ट मेमोरी चिप होती है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से AI और डीप लर्निंग के प्रोसेस को तेजी से चलाने के लिए किया जाता है। इसकी मांग इस समय दुनिया भर में सबसे ज्यादा है।
मार्केट-कैप में माइक्रोन ने मेटा-टेस्ला को पीछे छोड़ा:AI चिप की डिमांड से शेयरों में 18.4% का उछाल; कंपनी की कुल वैल्यू $1.37 ट्रिलियन पहुंची

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और मेमोरी चिप की भारी मांग के चलते अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयरों में ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली है। गुरुवार को कारोबारी सेशन में माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन कुछ समय के लिए दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों मेटा प्लेटफॉर्म्स और टेस्ला से भी ज्यादा हो गया। मजबूत तिमाही अनुमानों (गाइडेंस) के बाद निवेशकों के बढ़े भरोसे से कंपनी के शेयर इंट्राडे में 18.4% तक उछल गए। मेटा-टेस्ला के बिल्कुल करीब बंद हुआ मार्केट कैप रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को कारोबार खत्म होने पर माइक्रोन टेक्नोलॉजी का शेयर 15.8% की बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार बंद होने पर माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.37 ट्रिलियन डॉलर रहा। इसकी तुलना में मेटा प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैप 1.38 ट्रिलियन डॉलर और इलॉन मस्क की कंपनी टेस्ला का मार्केट कैप 1.41 ट्रिलियन डॉलर था। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान आई बड़ी तेजी से माइक्रोन कुछ समय के लिए इन दोनों कंपनियों से आगे निकल गया था। चौथी तिमाही में $50 बिलियन रेवेन्यू का अनुमान माइक्रोन की इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे कंपनी का चौथी तिमाही (अगस्त में समाप्त होने वाली तिमाही) के लिए जारी किया गया मजबूत रेवेन्यू अनुमान है। कंपनी ने इस तिमाही में करीब 50 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू हासिल करने का अनुमान जताया है। यह वॉल स्ट्रीट के 43.2 बिलियन डॉलर के अनुमान से काफी ज्यादा है। इस शानदार परफॉर्मेंस ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि हाइपरस्केलर्स के कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर जारी चिंताओं के बावजूद AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च मजबूत बना हुआ है। भविष्य की सप्लाई के लिए $22 बिलियन के एडवांस ऑर्डर चिप मार्केट में मची इस होड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि माइक्रोन को भविष्य में मेमोरी चिप्स की सप्लाई सुरक्षित करने के लिए ग्राहकों से 22 बिलियन डॉलर के कमिटमेंट (एडवांस ऑर्डर) मिल चुके हैं। यह हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और अन्य AI फोकस्ड प्रोडक्ट्स की भारी डिमांड को दर्शाता है। 2027 के बाद तक बनी रहेगी चिप की किल्लत ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोन के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) संजय मेहरोत्रा ने एनालिस्ट्स से बात करते हुए कहा कि फिलहाल मांग के मुकाबले सप्लाई पूरी होने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। बाजार में यह तंग स्थिति (शॉर्टेज) कैलेंडर वर्ष 2027 के बाद भी बने रहने की आशंका है। चिप की उपलब्धता में केवल 2028 से धीरे-धीरे सुधार होने की संभावना है। मई में छुआ था $1 ट्रिलियन का पड़ाव माइक्रोन ने इसी साल मई के आखिरी हफ्ते में पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप का आंकड़ा पार किया था। इस आंकड़े को छूकर कंपनी दुनिया की चुनिंदा दिग्गज टेक कंपनियों के क्लब में शामिल हो गई थी। इस अर्निंग रिपोर्ट के आने के बाद से अब तक कंपनी का शेयर 15% से ज्यादा चढ़ चुका है, जबकि साल 2026 में अब तक इस स्टॉक में कुल 326% की भारी बढ़त दर्ज की जा चुकी है। सेमीकंडक्टर और स्टोरेज शेयरों में आई चौतरफा तेजी माइक्रोन के शानदार नतीजों का असर पूरी इंडस्ट्री पर देखने को मिला। गुरुवार को फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 3.2% चढ़ गया। एलएसईजी (LSEG) के डेटा के मुताबिक, यह इंडेक्स अब तक के अपने सबसे मजबूत तिमाही प्रदर्शन की राह पर है। माइक्रोन की कॉम्पिटिटर कंपनियों में सैंडिस्क का शेयर 22%, वेस्टर्न डिजिटल 7.4% और सीगेट टेक्नोलॉजी 4.3% मजबूत हुआ। वहीं क्वालकॉम के शेयरों में भी तेजी आई, क्योंकि कंपनी ने अपने AI-फोकस्ड डेटा-सेंटर बिजनेस के लिए महत्वाकांक्षी ग्रोथ प्लान पेश किया है। एप्पल के कारण टेक सेक्टर में दिखा मिला-जुला रुख माइक्रोन के ब्लॉकबस्टर नतीजों के बावजूद ग्लोबल टेक सेक्टर में मिला-जुला रुख रहा। निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि हाइपरस्केलर्स द्वारा AI पर किया जा रहा भारी खर्च कब तक टिक पाएगा। इसी बीच एपल ने मेमोरी और स्टोरेज चिप की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए अपने आईपैड और मैकबुक की कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर दिया। एपल के इस कदम से कंपनी के शेयरों में 6.1% की गिरावट आई और बाजार में एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर बूम की इस बढ़ी हुई लागत का बोझ आखिरी में कौन उठाएगा। क्या होते हैं हाइपरस्केलर्स और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी? हाइपरस्केलर्स: ये वे बड़ी क्लाउड कंप्यूटिंग और टेक कंपनियां (जैसे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एमेजन और मेटा) होती हैं, जो बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर का संचालन करती हैं। इनके द्वारा किया जाने वाला खर्च पूरी टेक इंडस्ट्री की दिशा तय करता है। हाई-बैंडविड्थ मेमोरी: यह एक एडवांस और सुपर-फास्ट मेमोरी चिप होती है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से AI और डीप लर्निंग के प्रोसेस को तेजी से चलाने के लिए किया जाता है। इसकी मांग इस समय दुनिया भर में सबसे ज्यादा है। ये खबर भी पढ़ें… सोमवार को गिरावट के साथ खुल सकता है भारतीय बाजार: गिफ्टी निफ्टी में 150 अंकों की कमजोरी; 8% टूटा दक्षिण कोरिया का कोस्पी मुहर्रम की छुट्टी के कारण आज 26 जून को भारतीय शेयर बाजार बंद हैं। लेकिन वैश्विक बाजारों में मंदी के कारण सोमवार को ये गिरावट के साथ खुल सकता है। आज दक्षिण कोरिया का बाजार कोस्पी 8% नीचे हैं और गिफ्ट निफ्टी 150 अंकों से ज्यादा टूट गया है। पूरी खबर पढ़ें…
सुशांत केस से ट्रॉमा से रिकवर नहीं हुईं रिया चक्रवर्ती:कहा- ये ट्रॉमा ऐसी चीज है, जिससे उबर नहीं सकते; 27 दिन जेल में रही थीं एक्ट्रेस

रिया चक्रवर्ती ने हाल ही में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद हुए ट्रॉमा पर बात की है। उन्होंने बताया है कि वो पूरी तरह इससे रिकवर नहीं कर सकी हैं। इसके अलावा एक्ट्रेस ने अपनी वायरल टी-शर्ट पर भी बात की है। नेहा धूपिया और अंगद बेदी से बातचीत के दौरान रिया चक्रवर्ती ने सुशांत सिंह राजपूत और ट्रॉमा पर बात की है। नेहा धूपिया ने रिया से पूछा कि एक इंटरव्यू में आपकी मां ने सवाल किया था कि मेरी बेटी इससे कैसे हील करेगी, क्या आपने इससे पूरी तरह रिकवर कर लिया है? तो जवाब में एक्ट्रेस ने कहा, ‘यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिससे आप कभी पूरी तरह उबर सकें। यह ट्रॉमा है। अगर दिमाग में न भी रहे, तो भी इसका असर शरीर में बना रहता है।’ आगे उन्होंने कहा, ‘इसमें PTSD (पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) जैसी स्थिति हो सकती है। आप थेरेपी लेते हैं और धीरे-धीरे इससे निपटने की कोशिश करते हैं। क्योंकि हमारी चीज पब्लिक में है, तो लोग इसके बारे में बात करते हैं, सोचते हैं।’ सुशांत सिंह राजपूत डेथ केस के समय रिया चक्रवर्ती द्वारा एक टी-शर्ट भी काफी सुर्खियों में रही थी, जिसमें पैट्रियारकी खत्म करने से जुड़ी एक लाइन लिखी गई थी। अब रिया ने वो टी-शर्ट पहनने के फैसले पर कहा है, ‘वो टी-शर्ट मैंने इसलिए पहनी, क्योंकि वो मेरे पहले अध्याय का हिस्सा थी। जब मैं अरेस्ट हुई, तब मैंने वो टी-शर्ट पहनी थी, जिसमें लिखा था,”Roses are red, violets are blue, let’s smash the patriarchy, me and you.”, उस टी-शर्ट ने मेरे लिए बात की, जब कोई भी मेरी तरफ से बात नहीं कर रहा था। मैंने कहा था कि ऐसी और टी-शर्ट बनाओ, जो उन लोगों की मदद कर सके, जिनके लिए कोई नहीं बोलता।’ रिया ने कहा कि यही वजह है कि उन्होंने भाई शौविक के साथ क्लोदिंग ब्रांड (चैप्टर-2) शुरू किया, जिसमें वो टी-शर्ट बना रही हैं। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद 27 दिन जेल में रहीं सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद उनके पिता ने रिया चक्रवर्ती पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगाए थे। इसके अलावा ड्रग्स से जुड़ी बात सामने आने के बाद नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने भी एक्ट्रेस और उनके भाई शौविक को जांच के दायरे में लिया था। केस के चलते रिया चक्रवर्ती 27 दिनों तक जेल में रही थीं। CBI ने 22 मार्च 2025 को अपनी क्लोजर रिपोर्ट में रिया और उनके परिवार को क्लीन चिट दे दी।
श्रीलंका पहले टेस्ट की पहली पारी में 308 पर ऑलआउट:वेस्टइंडीज से जस्टिन ग्रेव्स ने 3 विकेट झटके, धनंजय डी सिल्वा का शतक

श्रीलंका ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में 308 रन बनाए हैं। गुरुवार को मैच के पहले दिन का खेल समाप्त होने तक वेस्टइंडीज अपना खाता भी नहीं खोल सकी है। टीम के ओपनर्स नाबाद लौटे हैं। तीसरे सेशन में कैरेबियाई पारी का पहला ओवर समाप्त होने के बाद अंपायर्स ने बेल्स उठा लिए। ओपनर जॉन कैंपबेल 6 बॉल खेलकर नाबाद रहे। जबकि ब्रैंडन किंग ने एक भी बॉल नहीं फेस की। इससे पहले जॉयडन सेल्स ने श्रीलंकाई टीम का आखिरी विकेट झटका। उन्होंने असिथा फर्नांडो को अल्जारी जोसेफ के हाथों कैच कराया। सेल्स को श्रीलंकाई पारी में एक विकेट ही मिला। श्रीलंका की खराब शुरुआत, 50 के अंदर 3 विकेट गंवाए टॉस हारकर बैटिंग कर रही श्रीलंका की शुरुआत खराब रही। टीम ने 50 रन के अंदर 3 विकेट गंवा दिए थे। केमार रोच ने पहले ओवर की आखिरी बॉल पर पाथुम निसांका को 2 रन के स्कोर पर पवेलियन भेजा दिया। उसके बाद 10वें ओवर में अल्जारी जोसेफ ने निशान मदुष्का (23 रन) और कामिंदु मेंडिस (जीरो) को लगातार बॉल पर आउट किया। चंडीमल और डी सिल्वा ने पारी संभाली निसांका के आउट होने के बाद क्रीज पर उतरे दिनेश चांदीमल ने धनंजय डी सिल्वा के साथ पारी संभाली। दोनों ने 94 बॉल पर 68 रनों की साझेदारी की। वे चौथे विकेट के रूप में आउट हुए। उन्हें शमार जोसेफ ने बोल्ड कर दिया। चांदीमल 67 बॉल पर 54 रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने 8 चौके लगाए। डी सिल्वा का शतक, स्कोर 250 पार पहुंचाया 110 के स्कोर पर चांदीमल का विकेट गंवाने के बाद धनंजया डी सिल्वा ने श्रीलंकाई पारी को 250 पार पहुंचाया। डी सिल्वा ने 168 गेंद पर 120 रन की शतकीय पारी खेली। इस पारी में 17 चौके लगाए। उन्होंने लोअर ऑर्डर में 2 अर्धशतकीय साझेदारियां कीं। इनमें सोनल दिनुषा (43 रन) के साथ 150 गेंद पर 99 रन और मिलन रथनायके के साथ 85 गेंद पर 64 रन की साझेदारी शामिल रही। ग्रेव्स ने सबसे ज्यादा विकेट, 3 बॉलर्स को 2-2 विकेट वेस्टइंडीज की ओर से जस्टिन ग्रेव्स ने सबसे ज्यादा 3 विकेट लिए। उनके अलावा, 3 अन्य गेंदबाजों ने 2-2 विकेट हासिल किए। इनमें केमार रोच, अल्जारी जोसेफ और शमार जोसेफ के नाम शामिल रहे। एक विकेट जॉयडन सेल्स को मिला। ———————————————–
श्रीलंका पहले टेस्ट की पहली पारी में 308 पर ऑलआउट:वेस्टइंडीज से जस्टिन ग्रेव्स ने 3 विकेट झटके, धनंजय डी सिल्वा का शतक

श्रीलंका ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में 308 रन बनाए हैं। गुरुवार को मैच के पहले दिन का खेल समाप्त होने तक वेस्टइंडीज अपना खाता भी नहीं खोल सकी है। टीम के ओपनर्स नाबाद लौटे हैं। तीसरे सेशन में कैरेबियाई पारी का पहला ओवर समाप्त होने के बाद अंपायर्स ने बेल्स उठा लिए। ओपनर जॉन कैंपबेल 6 बॉल खेलकर नाबाद रहे। जबकि ब्रैंडन किंग ने एक भी बॉल नहीं फेस की। इससे पहले जॉयडन सेल्स ने श्रीलंकाई टीम का आखिरी विकेट झटका। उन्होंने असिथा फर्नांडो को अल्जारी जोसेफ के हाथों कैच कराया। सेल्स को श्रीलंकाई पारी में एक विकेट ही मिला। श्रीलंका की खराब शुरुआत, 50 के अंदर 3 विकेट गंवाए टॉस हारकर बैटिंग कर रही श्रीलंका की शुरुआत खराब रही। टीम ने 50 रन के अंदर 3 विकेट गंवा दिए थे। केमार रोच ने पहले ओवर की आखिरी बॉल पर पाथुम निसांका को 2 रन के स्कोर पर पवेलियन भेजा दिया। उसके बाद 10वें ओवर में अल्जारी जोसेफ ने निशान मदुष्का (23 रन) और कामिंदु मेंडिस (जीरो) को लगातार बॉल पर आउट किया। चंडीमल और डी सिल्वा ने पारी संभाली निसांका के आउट होने के बाद क्रीज पर उतरे दिनेश चांदीमल ने धनंजय डी सिल्वा के साथ पारी संभाली। दोनों ने 94 बॉल पर 68 रनों की साझेदारी की। वे चौथे विकेट के रूप में आउट हुए। उन्हें शमार जोसेफ ने बोल्ड कर दिया। चांदीमल 67 बॉल पर 54 रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने 8 चौके लगाए। डी सिल्वा का शतक, स्कोर 250 पार पहुंचाया 110 के स्कोर पर चांदीमल का विकेट गंवाने के बाद धनंजया डी सिल्वा ने श्रीलंकाई पारी को 250 पार पहुंचाया। डी सिल्वा ने 168 गेंद पर 120 रन की शतकीय पारी खेली। इस पारी में 17 चौके लगाए। उन्होंने लोअर ऑर्डर में 2 अर्धशतकीय साझेदारियां कीं। इनमें सोनल दिनुषा (43 रन) के साथ 150 गेंद पर 99 रन और मिलन रथनायके के साथ 85 गेंद पर 64 रन की साझेदारी शामिल रही। ग्रेव्स ने सबसे ज्यादा विकेट, 3 बॉलर्स को 2-2 विकेट वेस्टइंडीज की ओर से जस्टिन ग्रेव्स ने सबसे ज्यादा 3 विकेट लिए। उनके अलावा, 3 अन्य गेंदबाजों ने 2-2 विकेट हासिल किए। इनमें केमार रोच, अल्जारी जोसेफ और शमार जोसेफ के नाम शामिल रहे। एक विकेट जॉयडन सेल्स को मिला। ———————————————–
कच्चा-तेल ईरान युद्ध से पहले वाले भाव 72 डॉलर पर:एक्सपर्ट ने कहा- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत दशहरे तक ही संभव

ईरान युद्ध से पहले कच्चे तेल की जो कीमतें थीं, गुरुवार को वैश्विक बाजार में दाम उसी स्तर पर आ गए हैं। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। यह वही भाव (72.29 डॉलर) है, जो युद्ध शुरू होने से एक दिन पहले 27 फरवरी को था। 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के बाद स्विट्जरलैंड में हुई शांति वार्ता में अमेरिका ने ईरानी तेल के निर्यात पर आंशिक प्रतिबंध हटा लिए। इसके बाद होर्मुज रूट से गुजरने वाले जहाज की संख्या बढ़ने लगी है। सोमवार के बाद से करीब 80 जहाज इस होर्मुज से गुजर चुके हैं। हालांकि यह संख्या युद्ध से पहले रोजाना 100 से ज्यादा जहाजों से कम है। हालांकि कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद पेट्रोल पंपों पर दाम दशहरे तक ही कम हो सकते हैं। कंपनियां पहले अपने नुकसान की भरपाई कर सकती हैं पेट्रोलियम की कीमतों में राहत मिलने की कितनी उम्मीद है? एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा के मुताबिक, पेट्रोल, डीजल जैसे प्रोडक्ट्स जो अभी हम खरीद रहे हैं, उन्हें तैयार करने के लिए जो कच्चा तेल इस्तेमाल हो रहा है, उसे तब खरीदा गया था जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी कीमत करीब 110 डॉलर प्रति बैरल थी। भारतीय रिफाइनरियों के लिए ये करीब 125 डॉलर प्रति बैरल थे। 72 डॉलर के क्रूड से बने पेट्रोल, डीजल कब तक पंपों पर पहुंचेंगे? इसमें करीब ढाई महीने लगेंगे। मौजूदा भाव का तेल स्रोत देशों के बंदरगाहों पर जहाजों में लोड होने में 15-20 दिन लगेंगे। उन्हें भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचने में 55-60 दिन लगेंगे। वहां से रिफाइनरी और फिर पेट्रोल पंपों तक पहुंचने में भी समय लगेगा। यह पूरा चक्र 75-80 दिनों का होता है। तो क्या ढाई महीने बाद फौरन कीमतें कम हो जाएंगी? इसकी संभावना कम है। अभी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल-डीजल पर करीब 7.5 रुपए प्रति लीटर नुकसान हो रहा है। सरकार ने भी एक्साइज ड्यूटी 10 रुपए प्रति लीटर घटाई थी। कुछ दिन इसकी भरपाई की जा सकती है। उसके बाद ही पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की संभावना है। कब तक राहत मिल सकती है? दशहरे के आसपास पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने लगेंगे। ये भी उम्मीद कर सकते हैं कि अगस्त के आखिर तक या सितंबर की शुरुआत से कुछ राहत मिलने लगे। क्या कच्चे तेल के दाम फिर बढ़ेंगे? मुझे नहीं लगता है कि निकट भविष्य में कच्चे तेल के दाम बढ़ेंगे। ऐसी आशंका अब बेहद कम है।







