गैस से तुरंत राहत देगा नींबू का ये देसी नुस्खा, दवा की नहीं पड़ेगी जरूरत, 2 घंटे में दिखेगा असर

Last Updated:April 29, 2026, 14:42 IST Home Remedies for Gas: झारखंड की राजधानी रांची में खासतौर पर लोकल लोगों को जब गैस हो जाता है तो बाजार जाकर दवाइयां नहीं खरीदते हैं. साथ ही न दौड़ते हुए डॉक्टर के पास जाते हैं. वह अपने घर में ही 1-2 टोटके को अपनाते हैं, जिससे उनको जबरदस्त राहत मिलती है. इनमें से एक विकल्प नींबू वाला पानी है. जिसको आजमाते ही आपको दो से तीन घंटे में काफी राहत मिलना शुरू हो जाएगी. आयुर्वेदिक डॉक्टर भी इसे लोहा मानते हैं. आइये जानते हैं और भी घरेलू इलाज के बारे में. रांची के आयुर्वेदिक डॉक्टर वीके पांडे ( विनोबा भावे यूनिवर्सिटी से बीएएमएस, 20 सालों से अधिक का अनुभव) बताते हैं कि अगर पेट में गैस हो जाए तो सबसे पहले एक नींबू ले लें. उसको बीच से काट लें. वह जो आधा नींबू है, उसको चिमटे की मदद से सीधा गैस की बर्नर में रख दें और गर्म कर लें. मतलब अच्छा खासा गरम हो जाना चाहिए. जब ऐसा हो जाए तो उसको नीचे उतार लें और बस दो चीज और मिला लें. इसी नींबू में आपको ऊपर काला नमक और जीरा पाउडर थोड़ा सा डालकर इन दोनों को मिला लेना है. बस बहुत अधिक नहीं डालना है. एकदम एक-एक चुटकी और उसको मिलाना भी नहीं है और ना कहीं रगड़ना है. Add News18 as Preferred Source on Google अब आपको इसको सीधे अपने जीभ में इसका रस बढ़िया से गार लेना है और ऐसा करने के बाद ऐसा नहीं की तुरंत पी भी लेना है, अब इसे 2-3 मिनट तक जीभ में छोड़ दें. दो से तीन मिनट जब आप छोड़ेंगे तो यह आपके मुंह में अपने आप ही घुल जाएगा, थोड़ा सा अधिक खट्टा लगेगा, पर थोड़ा सब्र रखिये. इसके बाद आप देखेंगे आपके मुंह में पूरी तरह घुल चुका है और फिर थोड़ा गुनगुना पानी भी पी सकते हैं और आप देखेंगे दो-तीन घंटे में ही आपका पेट काफी हल्का लगने लगेगा व गैस प्राकृतिक रूप से खत्म हो जाएगी. आयुर्वैदिक डॉक्टर वीके पांडे बताते हैं कि जीरा पाउडर, नींबू और काला नमक जब भी तीनों मिलता है तो एक तो आपका मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है और आपके डाइजेस्टिव सिस्टम और गट हेल्थ को एक्टिव करता है व अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाता है. इससे आपका पेट काफी हल्का और काफी रिलैक्स महसूस होगा. First Published : April 29, 2026, 14:42 IST
गर्मी में शराब पीने के भयंकर नुकसान! जानिए कैसे बढ़ता है डिहाइड्रेशन, बिगड़ता है पेट, कमजोर हो जाती है शरीर की एनर्जी

Last Updated:April 27, 2026, 14:51 IST Alcohol Side Effects in Summer: गर्मी में शराब पीने से शरीर में पानी की कमी तेजी से बढ़ती है. यह एनर्जी को कम कर देती है और थकान बढ़ाती है. पेट और पाचन तंत्र पर इसका सीधा बुरा असर पड़ता है. हीट स्ट्रोक और सिर दर्द जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. स्किन और दिल की सेहत पर भी इसका नकारात्मक असर दिखता है. Alcohol Side Effects in Summer: गर्मियों का मौसम अपने आप में शरीर के लिए एक चैलेंज लेकर आता है. तेज धूप, पसीना और लगातार पानी की कमी शरीर को जल्दी थका देती है. ऐसे में अगर इस मौसम में शराब का सेवन किया जाए, तो इसका असर कई गुना बढ़ जाता है. बहुत से लोग पार्टी, वीकेंड या रिलैक्स होने के लिए शराब पीते हैं, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आता कि गर्मी में इसका असर सर्दियों से बिल्कुल अलग होता है. शरीर पहले ही गर्मी से जूझ रहा होता है और शराब उसे और ज्यादा कमजोर कर देती है. नतीजा यह होता है कि डिहाइड्रेशन, सिर दर्द, चक्कर, पेट खराब और थकान जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं. कई बार लोग इसे हल्के में लेते हैं, लेकिन धीरे धीरे यह आदत शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचाने लगती है. डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है: गर्मी में शराब पीने का सबसे बड़ा नुकसान है डिहाइड्रेशन. शराब शरीर से पानी को तेजी से बाहर निकालती है. जब पहले से ही शरीर पसीने के कारण पानी खो रहा होता है, तब शराब इसे और ज्यादा बढ़ा देती है. इससे शरीर में कमजोरी, मुंह सूखना और चक्कर आने जैसी समस्या हो सकती है. अगर समय पर पानी न पिया जाए तो हालत और खराब हो सकती है. शरीर की एनर्जी तेजी से गिरती है: शराब पीने के बाद आपको थोड़ी देर के लिए रिलैक्स महसूस हो सकता है, लेकिन असल में यह आपकी एनर्जी को कम कर देती है. गर्मी में जब शरीर को ज्यादा एनर्जी की जरूरत होती है, तब शराब उसे कमजोर कर देती है. इसके कारण थकान, सुस्ती और काम में मन न लगने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. Add News18 as Preferred Source on Google पेट और पाचन पर बुरा असर: गर्मी में शराब पीने से पेट पर सीधा असर पड़ता है. इससे एसिडिटी, गैस और अपच की समस्या बढ़ जाती है. कई बार लोगों को उल्टी या पेट दर्द भी होने लगता है. अगर लगातार ऐसा होता रहे तो पाचन तंत्र कमजोर पड़ सकता है. हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है: शराब शरीर के तापमान को कंट्रोल करने की क्षमता को कमजोर कर देती है. ऐसे में अगर आप धूप या गर्म माहौल में हैं, तो हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. यह स्थिति खतरनाक हो सकती है और इसमें तुरंत इलाज की जरूरत पड़ती है. नींद और दिमाग पर असर: कई लोग सोचते हैं कि शराब पीने से नींद अच्छी आती है, लेकिन गर्मी में इसका उल्टा असर होता है. शराब नींद को खराब कर देती है और दिमाग को सही तरह से आराम नहीं मिल पाता. इसके कारण अगली सुबह सिर भारी रहना, चिड़चिड़ापन और ध्यान की कमी जैसी समस्याएं होती हैं. स्किन और शरीर की चमक पर असर: गर्मी में शराब पीने से स्किन पर भी असर दिखने लगता है. डिहाइड्रेशन के कारण त्वचा सूखी और बेजान हो जाती है. चेहरे की चमक कम हो जाती है और कई बार पिंपल या जलन की समस्या भी हो सकती है. दिल और ब्लड प्रेशर पर प्रभाव: शराब का ज्यादा सेवन दिल और ब्लड प्रेशर पर भी असर डालता है. गर्मी में यह असर और ज्यादा खतरनाक हो सकता है. इससे दिल की धड़कन तेज होना और ब्लड प्रेशर का असंतुलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. First Published : April 27, 2026, 14:51 IST
गर्मियों में मिलने वाला यह पौधा सेहत के लिए फायदेमंद, कई गंभीर बीमारियों का जड़ से करता खात्मा

Last Updated:April 25, 2026, 17:46 IST Health News: हमारे देश के लोग आज भी बड़ी से बड़ी बीमारी में आयुर्वेदिक औषधीयों का सहारा लेते हैं, क्योंकि आयुर्वेद में हर मर्ज का इलाज है ऐसी ही एक औषधि, जिसे मेंथा का पौधा कहते हैं. यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद ही फायदेमंद है. आइए एक्सपर्ट से इसके फायदों के बारे में जानते हैं. आयुर्वेद में कई ऐसे पेड़-पौधे बताए गए हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं. उन्हीं में से एक है मेंथा का पौधा. यह एक सुगंधित और शीतल प्रकृति वाला पौधा है, जो खासतौर पर गर्मियों के मौसम में आसानी से खेतों और बागानों में उगाया जाता है. मेंथा को प्राकृतिक औषधि के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इसमें कई प्रकार के औषधीय गुण मौजूद होते हैं. इसकी पत्तियों का उपयोग शरीर की विभिन्न प्रकार की समस्याओं में मददगार साबित होता है और सामान्य उपयोग में इसके कोई विशेष दुष्प्रभाव नहीं होते. आयुर्वेद के अनुसार, मेंथा का नियमित सेवन शरीर को स्वस्थ रखने और कई छोटी-बड़ी बीमारियों से बचाव में सहायक होता है. जिला अस्पताल बाराबंकी के चिकित्सक डॉक्टर अमित वर्मा एमडी मेडिसिन ने बताया कि गर्मियों के दिनों में पाए जाने वाला मेंथा एक औषधीय पौधा है. इसे मेंथा पुदीना के नाम से भी जाना जाता है. इसके पत्ते तना हमारी सेहत वह स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद हैं. इसमें बहुत सारे औषधीय गुण मौजूद होते हैं. इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नियासिन, विटामिन-ए, विटामिन-सी, सोडियम, पोटैशियम, आयरन, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमें कई बीमारियों से बचाते हैं. बस इसका सही से इस्तेमाल करने की जरूरत है. गठिया की समस्या में फायदेमंद: अगर आपको काफी ज्यादा सूजन हो रही है, तो इसकी पत्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए पिपरमिंट की पत्तियों को अच्छे से पीस लें. अब इस पीसी हुई पत्तियों के पेस्ट को अपने प्रभावित हिस्से पर लगाएं. इससे गठिया में होने वाले सूजन से तुरंत आराम मिल सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google पेट की समस्या में फायदेमंद: अक्सर मसालेदार खाना या ज्यादा खाना खा लेने से पेट में गैस हो जाता है, जो पेट दर्द का कारण बन जाता है. घर में पेट दर्द से जल्द आराम पाने के लिए 25 ग्राम पिपरमिंट के निचोड़ में शक्कर मिलाकर सेवन करने से पेट दर्द से राहत मिलती है. दांत दर्द में फायदेमंद: आजकल बच्चे से लेकर बूढ़े सभी दांत दर्द से किसी न किसी समय परेशान होते ही हैं. सबसे अहम बात यह है कि दांत दर्द होने पर लोग घरेलू उपाय ही सबसे पहले उपयोग करते हैं. पिपरमिंट के क्रिस्टल को दांतों के बीच में रखकर दबाने से दांत दर्द में लाभ होता है. सर्दी में फायदेमंद: सालभर में जब भी मौसम में उतार-चढ़ाव होता है, सर्दी सबको अपनी चपेट में ले लेती है. सर्दी से आराम दिलाने में पिपरमिंट बहुत ही गुणकारी होता है. पिपरमिंट का बफारा या भाप लेने से सर्दी या कफ जैसी बीमारियों से राहत मिलती है. दस्त की समस्या में फायदेमंद: अक्सर गलत खानपान की वजह से दस्त होना शुरू हो जाता है. दस्त होने पर पिपरमिंट का सेवन इस तरह से करने पर लाभ मिलता है. पिपरमिंट के पत्तों का काढ़ा बनाकर 5-10 मिली मात्रा में पीने से दस्त, पेट संबंधी समस्या और पेट दर्द में लाभ मिलता है. सिर दर्द की समस्या में फायदेमंद: दिनभर काम के तनाव की वजह से या मौसम के कारण सिरदर्द से सबको कभी न कभी परेशान होना पड़ता है. पिपरमिंट के पत्ते, तना को पीसकर मस्तक पर लगाने से सिरदर्द से लाभ होता है. First Published : April 25, 2026, 17:46 IST
मोटापा बना साइलेंट खतरा, आंखों से दिल तक हमला! कानपुर मेडिकल कॉलेज की स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

Last Updated:April 25, 2026, 13:22 IST Kanpur News: बढ़ता मोटापा शरीर के लिए काफी घातक हो सकता है. कानपुर के मेडिसिन विभाग के सीनियर डॉक्टर एसके गौतम ने 196 मरीजों पर शोध किया, जिसमें सामने आया कि मोटापा आंखों, किडनी, लीवर और दिल पर असर डाल रहा है. कानपुर: बढ़ता वजन सिर्फ शरीर का आकार नहीं बदलता, यह धीरे-धीरे अंदर से कई अंगों को नुकसान भी पहुंचा सकता है. कानपुर के GSVM Medical College में हुई एक स्टडी ने यही संकेत दिए हैं. यहां मेडिसिन विभाग के सीनियर डॉक्टर एसके गौतम ने 196 मरीजों पर शोध किया, जिसमें सामने आया कि मोटापा आंखों, किडनी, लीवर और दिल पर असर डाल रहा है. डॉक्टरों के मुताबिक, कई लोग वजन बढ़ने को सामान्य बात मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर बड़ी बीमारी की वजह बन सकती है. स्टडी में शामिल ज्यादातर मरीजों का बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई तय मानक से ज्यादा मिला. इसका मतलब था कि शरीर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो चुका था और इसका असर सेहत पर दिखने लगा था. सबसे ज्यादा असर किडनी और दिल पर मिलाकरीब डेढ़ साल तक चली इस रिसर्च में पाया गया कि 37 प्रतिशत मरीजों की किडनी प्रभावित थी. 23.38 प्रतिशत लोगों में आंखों से जुड़ी दिक्कतें शुरू हो चुकी थीं. 55 प्रतिशत मरीज हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे थे, जबकि 40 प्रतिशत मरीजों में दिल से जुड़ी बीमारियों के संकेत मिले. डॉक्टरों का कहना है कि मोटापा शरीर में सूजन, ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है. यही वजह है कि धीरे-धीरे दिल, किडनी और आंखों पर असर पड़ने लगता है. समय रहते संभले तो बचाव संभवडॉ. गौतम ने बताया कि जिन मरीजों की समय पर जांच हुई, उन्हें शुरुआती स्तर पर इलाज दिया गया. दवाएं, खानपान में बदलाव, वजन कम करने की सलाह और नियमित जांच से काफी मरीजों की हालत में सुधार हुआ. कई मरीज पूरी तरह सामान्य स्थिति में लौट आए. उन्होंने कहा कि अगर वजन तेजी से बढ़ रहा है, थकान रहती है, सांस फूलती है या ब्लड प्रेशर बढ़ा रहता है, तो इसे हल्के में न लें बल्कि तुरंत जांच कराएं. ऐसे समझें अपना बीएमआईबीएमआई यानी बॉडी मास इंडेक्स से पता चलता है कि आपका वजन आपकी लंबाई के हिसाब से सही है या नहीं है. इसे वजन और लंबाई से निकाला जाता है. आजकल मोबाइल पर भी आसानी से बीएमआई कैलकुलेटर मिल जाते हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, पश्चिमी देशों में 25 से कम बीएमआई सामान्य माना जाता है, लेकिन भारतीयों के लिए 23 से कम बेहतर माना जाता है. अगर बीएमआई 23 से ऊपर है, तो सतर्क हो जाना चाहिए. अप्रैल 2024 से अक्टूबर 2025 तक चला शोधयह शोध कार्य अप्रैल 2024 में शुरू हुआ था और अक्टूबर 2025 तक चला. इस दौरान मरीजों की जांच, रिपोर्ट और इलाज के आधार पर निष्कर्ष निकाले गए. डॉक्टरों की साफ सलाह है कि रोज थोड़ा चलें, तला-भुना कम खाएं, मीठा नियंत्रित रखें और वजन को बढ़ने न दें, क्योंकि मोटापा दिखने में भले सामान्य लगे, लेकिन अंदर ही अंदर बड़ा खतरा बन सकता है. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Kanpur Nagar,Uttar Pradesh First Published : April 25, 2026, 13:22 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
लू का कहर बच्चों के लिए ना बन जाए जहर! जानलेवा गर्मी में बचाव के लिए वैद्य की खास सलाह, इन आदतों से करें बचाव

Last Updated:April 23, 2026, 17:13 IST Meerut News: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ की बात करें, तो मेरठ में गर्मी का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ने लगा है. गर्म हवाएं भी चल रही हैं, जिसको लेकर अब शासन की ओर से भी चेतावनी जारी की गई है. ऐसे में एक्सपर्ट का कहना है कि विशेष रूप से सावधानी बढ़ती जाए, तो कोई बीमार नहीं होगा. मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ सहित अन्य जनपदों की अगर बात की जाए तो गर्मी का असर देखने को मिल रहा है. सुबह 11 बजे के बाद बाहर निकलना भी लोगों के लिए मुश्किल हो गया. इसी कड़ी में जिस तरह से लगातार लू चल रही है, उसमें हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है. इन्हीं बातों को देखते हुए लोकल 18 की टीम की ओर से आयुर्वेदिक एक्सपर्ट वैद्य बृजभूषण शर्मा से खास बातचीत की. लोकल 18 की टीम से खास बातचीत करते हुए वैद्य बृजभूषण शर्मा ने बताया कि वर्तमान समय में जिस तरह से मौसम में परिवर्तन हो रहा है, उसमें लोगों को खान-पान का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए. जितना आप हल्का खाना खाएंगे, उतना ही सेहत के लिए काफी बेहतर रहता है. तला-भुना खाने से करें परहेजउन्होंने कहा कि बाहर का तला-भुना खाने से परहेज करें. इसी के साथ उन्होंने कहा कि सभी लोग पानी का सेवन भी लगातार करते रहें, क्योंकि गर्मी के मौसम में पानी ही एक ऐसा माध्यम है, जो लोगों के लिए लू के समय सबसे बड़ा सुरक्षा कवच होता है. साथ ही अगर पानी में नींबू या ग्लूकोस रखें, तो वह आपके लिए और भी ज्यादा बेहतर है, क्योंकि हीट स्ट्रोक सहित लू से बचाने में पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. फैशन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य को दे तरजीहउन्होंने बताया कि वर्तमान समय में जब लू चलने की संभावना हो, तो सभी लोगों को फुल बाजू के कपड़े जरूर पहनने चाहिए, क्योंकि हल्की सी लापरवाही भी लोगों के लिए भारी पड़ सकती है. उन्होंने बताया कि जो गर्मी की तपन होती है, उस समय अगर आप फुल बाजू के कपड़े नहीं पहनते, तो लू आपको अपने जपेट में ले लेती है. इससे बीमार होने की संभावनाएं बढ़ जाती है. इसलिए आप लगातार खानपान का ध्यान रखते हुए न्यूट्रिशन वाले फलों का उपयोग करें. जैसे तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा सेहत के लिए काफी बेहतर रहते हैं. इन बातों का रखें विशेष ध्यान इसी के साथ ही अगर आवश्यक कार्य न हो, तो दोपहर 12:00 बजे से 4:00 के बीच घर से ना निकलें. इतना ही नहीं, उन्होंने बताया कि अगर आप किसी भी ऑफिस में काम करते हैं और वहां AC का प्रयोग होता है, तो ऑफिस से बाहर निकलते समय और प्रवेश करते समय भी आपको कुछ देर इंतजार करना चाहिए. गर्मी से एकदम अगर आप निकल जाएंगे, तो उससे भी आपको गर्मी-सर्दी होने की संभावना बढ़ जाती है. इसी तरह का ध्यान आपको कूलर, पंखे और अन्य चीजों का भी रखना होगा. बताते चलें कि लगातार मौसम में बदलाव के कारण लोग अपना ट्रीटमेंट कराने के लिए अस्पताल में भी पहुंच रहे हैं. ऐसे में आपको दवाइयों की आवश्यकता ना पड़े, इसलिए इन सभी बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Meerut,Uttar Pradesh First Published : April 23, 2026, 17:13 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
गर्मियों में डायरिया का अटैक! स्ट्रीट फूड ही नहीं, चॉकलेट भी बच्चों को कर रही बीमार, एक्सपर्ट से जानें

Last Updated:April 22, 2026, 17:30 IST Summer Health Tips: बदलता मौसम अपने साथ बीमारियों का खतरा लेकर आता है, जिसमें डायरिया सबसे ज्यादा पैर पसार रहा है. चिलचिलाती धूप और बिना मौसम की बारिश के बीच छोटे बच्चे तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ स्ट्रीट फूड ही नहीं, बल्कि बच्चों की पसंदीदा चॉकलेट भी इस गर्मी में उनके पेट को खराब कर रही है. डॉक्टरों के पास आने वाले मरीजों में 30 से 40 फीसदी मामले अकेले डायरिया के हैं. देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इन दिनों मौसम के बदलते मिजाज ने लोगों की सेहत बिगाड़ दी है. कभी तेज धूप तो कभी अचानक होने वाली बारिश की वजह से बीमारियां बढ़ रही हैं, जिनमें डायरिया सबसे गंभीर समस्या बनकर उभरा है. खासकर छोटे बच्चों में उल्टी और दस्त की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में खाना बहुत जल्दी खराब हो जाता है और उसमें मौजूद बैक्टीरिया शरीर में पहुंचते ही पेट दर्द और लूज मोशन जैसी परेशानियां खड़ी कर देते हैं.देहरादून के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सिराज सिद्दीकी के अनुसार, उनके पास आने वाले मरीजों में लगभग 30 से 40 प्रतिशत मामले डायरिया के ही आ रहे हैं. उन्होंने बच्चों की सेहत से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताई हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. चॉकलेट भी बन रही है डायरिया की वजहआमतौर पर माता-पिता को लगता है कि बाहर का खाना या गंदा पानी ही बच्चों को बीमार करता है, लेकिन डॉक्टर ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि गर्मियों में ज्यादा तापमान होने की वजह से चॉकलेट बहुत जल्दी खराब हो जाती है और अंदर ही अंदर सड़ने लगती है. इसमें पनपने वाले बैक्टीरिया ही बच्चों में डायरिया और फूड पॉइजनिंग का मुख्य कारण बन रहे हैं. यही वजह है कि देहरादून के अस्पतालों में पहुंचने वाले ज्यादातर बच्चों में इस तरह की शिकायतें देखने को मिल रही हैं. इसलिए गर्मियों के दिनों में बच्चों को ज्यादा चॉकलेट देने से परहेज करना चाहिए. स्ट्रीट फूड और मोमोज की चटनी से रहें सावधानदेहरादून के हर कोने में मिलने वाले स्ट्रीट फूड बच्चों और युवाओं की पहली पसंद हैं, लेकिन यही उनकी सेहत के दुश्मन बन रहे हैं. डॉ. सिद्दीकी ने बताया कि मोमोज के साथ दी जाने वाली तीखी चटनी में बैक्टीरिया बहुत जल्दी पनपते हैं जो सीधे पेट पर हमला करते हैं. इसके अलावा, ज्यादातर फास्ट फूड मैदे से तैयार किए जाते हैं जो हमारे मेटाबॉलिज्म को कमजोर करने के साथ ही लीवर पर भी बुरा असर डालते हैं. जब शरीर का पाचन तंत्र कमजोर होता है, तो बीमारियां बहुत जल्दी शरीर को अपनी चपेट में ले लेती हैं. बेमौसम बारिश और दूषित पानी का खतराडॉक्टर के मुताबिक, इन दिनों होने वाली बिना मौसम की बारिश प्राकृतिक रूप से शुद्ध नहीं होती है. इसमें मौजूद टॉक्सिन्स यानी जहरीले तत्व पानी के साथ मिलकर उसे दूषित कर देते हैं. हालांकि सरकार पानी को फिल्टर करके सप्लाई करती है, लेकिन उन प्लांट्स की भी अपनी एक सीमा होती है. अगर पीने के पानी में किसी भी तरह के माइक्रोप्स रह जाते हैं, तो डायरिया होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. ऐसे में पानी की शुद्धता को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है. लापरवाही पड़ सकती है भारीउल्टी और दस्त होने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है और मरीज बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस करने लगता है. वैसे तो इलाज करवाने पर मरीज जल्दी ठीक हो जाता है, लेकिन अगर शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर लापरवाही बरती गई, तो यह स्थिति मरीज के लिए जानलेवा भी हो सकती है. बच्चों के मामले में यह और भी संवेदनशील हो जाता है क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम वयस्कों के मुकाबले कमजोर होता है. इसलिए बचाव के लिए घर में बनी ताजी चीजें ही खिलाएं और पानी हमेशा अच्छी तरह फिल्टर किया हुआ ही इस्तेमाल करें. About the Author Seema Nath सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Dehradun,Uttarakhand First Published : April 22, 2026, 17:30 IST
dry bitter gourd benefits | natural ways to control diabetes | सूखे करेले के फायदे |

Last Updated:April 22, 2026, 13:35 IST Natural Ways to control Diabetes: उत्तराखंड के बागेश्वर और अन्य पहाड़ी इलाकों में सूखा करेला केवल एक सब्जी नहीं, बल्कि सदियों पुराना एक घरेलू नुस्खा है. आयुर्वेद के गुणों से भरपूर यह सूखा करेला डायबिटीज के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना जाता. इसमें मौजूद प्राकृतिक इंसुलिन और फाइबर न केवल ब्लड शुगर को नियंत्रित करते हैं, बल्कि लिवर को डिटॉक्स करने और वजन घटाने में भी जादू की तरह काम करते हैं. पहाड़ों में आज भी लोग इसे धूप में सुखाकर साल भर के लिए सुरक्षित रखते हैं और खाली पेट इसके पानी का सेवन करते हैं. जानिए कैसे ये हार्ट हेल्थ से लेकर चमकती त्वचा तक, शरीर को अंदर से फौलाद बना सकता है. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सूखा करेला खासतौर पर डायबिटीज मरीजों के लिए किसी औषधि से कम नहीं माना जाता है. इसमें चारेंटिन और इंसुलिन जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं. नियमित रूप से सूखे करेले का सेवन करने से शरीर की ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया बेहतर होती है. पहाड़ों में लोग इसे रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट पीते हैं, जिससे शुगर लेवल संतुलित रहता है. यह प्राकृतिक उपाय लंबे समय तक सुरक्षित तरीके से शुगर कंट्रोल करने में सहायक हो सकता है, लेकिन दवा लेने वाले मरीजों को डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. सूखा करेला पाचन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में भी बेहद उपयोगी है. इसमें मौजूद फाइबर और कड़वे तत्व पेट की सफाई करते हैं, कब्ज, गैस, अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाते हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में इसे चूर्ण बनाकर गुनगुने पानी के साथ लिया जाता है, जिससे पाचन क्रिया तेज होती है. यह आंतों को साफ रखता है, शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है. नियमित सेवन से भूख भी बढ़ती है, पेट हल्का महसूस होता है. जिन लोगों को लंबे समय से पाचन संबंधी समस्याएं हैं, उनके लिए सूखा करेला एक सरल और घरेलू उपाय के रूप में काम करता है. सूखा करेला खून को साफ करने में मदद करता है, जिससे त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं दूर हो सकती हैं. पहाड़ों में लोग इसे त्वचा रोगों और मुंहासों से बचाव के लिए इस्तेमाल करते हैं. खून में मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकालने से त्वचा साफ और चमकदार बनती है. इसके नियमित सेवन से फोड़े-फुंसी, एलर्जी और दाग-धब्बों में भी कमी देखी जाती है. प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुण होने के कारण यह त्वचा को अंदर से स्वस्थ बनाता है. यह उन लोगों के लिए खासतौर पर फायदेमंद है, जिन्हें बार-बार स्किन प्रॉब्लम होती है, जो बिना दवाओं के प्राकृतिक तरीके अपनाना चाहते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google सूखे करेले में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में बदलते मौसम और संक्रमण से बचने के लिए लोग इसका सेवन करते हैं. यह शरीर को वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने की ताकत देता है. नियमित सेवन से सर्दी-खांसी और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है. यह शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाता है, उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में भी मदद करता है. इसलिए इसे प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर के रूप में भी जाना जाता है. सूखा करेला लीवर की सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसमें मौजूद तत्व लीवर को डिटॉक्स करते हैं, उसकी कार्यक्षमता को बेहतर बनाते हैं. पहाड़ों में लोग इसे शरीर से गंदगी और विषैले पदार्थों को निकालने के लिए इस्तेमाल करते हैं. लीवर स्वस्थ रहने से पाचन क्रिया सही रहती है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है. यह फैटी लीवर जैसी समस्याओं में भी मददगार माना जाता है. नियमित सेवन से लीवर से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. प्राकृतिक तरीके से शरीर को साफ रखने के लिए सूखा करेला एक बेहतरीन विकल्प है. पहाड़ों में लोग इसे आज भी इस्तेमाल करते है. डॉ. ऐजल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए सूखा करेला एक अच्छा विकल्प हो सकता है. यह मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद करता है. पहाड़ी इलाकों में लोग इसे सुबह खाली पेट लेते हैं, जिससे शरीर में फैट बर्निंग प्रक्रिया तेज होती है. इसमें कैलोरी कम और फाइबर अधिक होता है, जिससे लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है. यह भूख को नियंत्रित करता है, ओवरईटिंग से बचाता है. सूखा करेला हार्ट हेल्थ के लिए भी लाभकारी माना जाता है. यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है, अच्छे कोलेस्ट्रल को बढ़ाता है. इससे दिल की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है. पहाड़ी क्षेत्रों में इसे प्राकृतिक रूप से हृदय को मजबूत बनाने के लिए उपयोग किया जाता है. यह रक्त संचार को बेहतर करता है, ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी मदद करता है. नियमित सेवन से हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव संभव हो सकता है. इसलिए इसे दिल के लिए एक नेचुरल टॉनिक भी माना जाता है. पहाड़ों में सूखे करेले का उपयोग बेहद सरल और पारंपरिक तरीके से किया जाता है. लोग इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर धूप में सुखा लेते हैं, जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल करते हैं. इसका सबसे आम तरीका है, रातभर पानी में भिगोकर सुबह उस पानी को खाली पेट पीना है. इसके अलावा, सूखे करेले का पाउडर बनाकर एक चम्मच गुनगुने पानी के साथ लेना भी फायदेमंद माना जाता है. कुछ लोग इसे सब्जी या काढ़े के रूप में भी उपयोग करते हैं. यह सस्ता, आसानी से उपलब्ध और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला घरेलू उपाय है, जिसे पहाड़ों में आज भी अपनाया जा रहा है. First Published : April 22, 2026, 13:34 IST
गर्मी में AC का काम करता है ये स्पेशल शरबत! चिलचिलाती धूप में बना देता सुरक्षा कवच, एक्सपर्ट से जानिए फायदे

सिरफल के शरबत का सेवन पाचन तंत्र, शरीर में पानी की कमी, डायरिया, पेचिश, इम्युनिटी बूस्टर, कोलेस्ट्रॉल, वजन, त्वचा रोग, ब्लड शुगर, दिल, मोटापा, लिवर, कान का दर्द, सिरदर्द, स्कर्वी, अपच, और बवासीर जैसी समस्याओं का समाधान करता है. इसके अलावा, यह शरीर की कई अन्य समस्याओं को भी दूर करता है.
कहीं आपका बच्चा डिहाइड्रेशन का शिकार तो नहीं हो रहा! पिंच टेस्ट से लगाएं पता, स्कूलों में शुरू हुआ ‘वॉटर बेल’

Last Updated:April 19, 2026, 13:44 IST Health Tips: बढ़ती गर्मी और तेज धूप से अक्सर कुछ बच्चे डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है. कुछ केस में तो बच्चों की जान भी चली जाती है. इसके लिए पैरेंट्स को कुछ जरूरी बातों का ध्यान देने की जरूरत है. देहरादून: उत्तराखंड के सरकारी और निजी स्कूलों में अब पढ़ाई के बीच ‘वॉटर बेल’ यानी पानी की घंटी गूंजेगी, क्योंकि प्रशासन ने भीषण गर्मी और हीट वेव के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सभी स्कूलों को यह विशेष निर्देश जारी किए हैं. इसका मकसद बच्चों को नियमित अंतराल पर पानी पीने के लिए प्रोत्साहित करना है, क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि छोटे बच्चे खेलकूद और पढ़ाई की व्यस्तता में पानी पीना भूल जाते हैं, जिससे उनके शरीर में पानी की कमी आ जाती है. अब स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि वे घंटी बजाकर बच्चों को हाइड्रेटेड रहने के लिए काम करेंगे. बच्चों में डिहाइड्रेशन हो सकता है जानलेवा देहरादून के आयुर्वेदिक चिकित्सक सिराज सिद्दीकी बताते हैं कि उत्तराखंड प्रशासन की ओर से राज्य के स्कूलों में वॉटर बेल लगाने के निर्देश दिए गए हैं. इसका मतलब यह है कि गर्मियों के दिनों में हीट वेव और लू जैसी परेशानियां बच्चों को भी घेर लेती हैं. वहीं छोटे बच्चों को पता नहीं होता है कि उन्हें प्यास लगी है और पानी पीना है. खेल में उन्हें ध्यान नहीं रहता है और वह समय पर पानी नहीं पी पाते हैं, जिसके बाद डिहाइड्रेशन के शिकार हो जाते हैं. अगर आपका बच्चा कमजोर और सुस्त हो गया है, उसके होंठ सूखे हैं, आंखों के नीचे काले घेरे आ गए हैं, तो यह डिहाइड्रेशन के लक्षण हो सकते हैं. आप पिंच टेस्ट कर सकते हैं, मतलब बच्चे के हाथ की स्किन पर पिंच करें. अगर वह अपनी पहली अवस्था में नहीं आती है, तो वह गम्भीर रूप से डिहाइड्रेशन की चपेट में है. डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए पानी के अलावा उसे ताजे फलों का रस भी दीजिए. हेल्थ को लेकर लापरवाही खतरनाकउन्होंने कहा कि डिहाइड्रेशन की परेशानी अगर गंभीर हो जाती है, तो लापरवाही बरतने पर यह जानलेवा भी हो सकती है. गर्मियों के मौसम में बच्चों की हेल्थ को लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है. छोटे बच्चे प्यास लगने पर भी तब तक पानी नहीं मांगते, जब तक वे पूरी तरह थक न जाएं. लगातार धूप और पसीने के चलते शरीर से तरल पदार्थ तेजी से खत्म होते हैं, जो बच्चों में डिहाइड्रेशन का कारण बनते हैं. प्रशासन की यह ‘वॉटर बेल’ न सिर्फ एक अनुशासन है, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति एक सुरक्षा कवच भी साबित होगी, ताकि वे स्कूल परिसर में ऊर्जावान और सुरक्षित महसूस कर सकें. बच्चों के पेरेंट्स को भी ध्यान देने की जरूरत डॉ. सिद्दकी का कहना है कि अभिभावकों के लिए अपने बच्चों में डिहाइड्रेशन के लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है. अगर आपका बच्चा सामान्य से ज्यादा सुस्त और कमजोर नजर आ रहा है, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है. इसके साथ ही बच्चे के होंठों का सूखना और आंखों के नीचे काले घेरे आना शरीर में पानी की गंभीर कमी की ओर इशारा करते हैं. डिहाइड्रेशन के चलते बच्चों में एकाग्रता की कमी और चिड़चिड़ापन भी देखा जा सकता है. ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है. उन्होंने बताया कि सबसे पहले आप अगर बच्चे को बाहर ले जा रहे हैं, तो उसे कैप पहनाकर या छाता ओढ़ाकर लेकर जाएं. आप उसे इलेक्ट्रोल दे सकते हैं. नींबू पानी भी छोटे बच्चों के लिए अच्छा रहता है. ध्यान रहे कि आप उसे कॉल्ड ड्रिंक्स आदि ज्यादा न दें, क्योंकि वह बॉडी के शुगर और नमक को अवशोषित करती है, जिससे और ज्यादा प्यास लगती है. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Dehradun,Uttarakhand First Published : April 19, 2026, 13:44 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
आम ही नहीं इसकी गुठली में भी छिपे हैं बेशुमार फायदे, जान लेंगे तो भूलकर भी नहीं फेकेंगे गुठलियां

Last Updated:April 17, 2026, 09:12 IST गर्मियों में आम आते ही सभी उसकी अलग-अलग डिश बनाकर खाना शुरू कर देते हैं, लेकिन उसकी गुठली फेंक देते हैं. आज हम आपको बताएंगे कि क्यों इसकी गुठली फेंकना गलती हो सकती है. आम फलों का राजा यूं ही नहीं कहलाता, उसका स्वाद इतना लाजवाब होता है कि बच्चे-बूढ़े सभी उसे खाना पसंद करते हैं. इसके मीठे स्वाद के सभी दीवाने होते हैं. कुछ इसे साबुत खाना पसंद करते हैं, तो कुछ को इसका शेक बनाकर पीना ज्यादा रास आता है, तो कुछ को आम रस भाता है. एक आम के अनेकों रूप आपको हमारे घरों में मिल जाएंगे, लेकिन एक बात कॉमन है. वह है, आम खाकर सभी उसकी गुठली फेंक देते हैं, लेकिन आज हम आपको इसके कुछ ऐसे फायदे बताने वाले हैं, जो आपने पहले शायद ही सुने हो. आम की गुठली में कई विटामिन, मिनरल और एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जिसकी वजह से यह सेहत के लिए इतना फायदेमंद होता है. इसे सुखाकर, उसका पाउडर बना सकते हैं, उसका बटर या ऑयल भी बना सकते हैं, जो आपको कई हैरान करने वाले फायदे पहुंचा सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google डैंड्रफ की समस्या सिर्फ सर्दी ही नहीं बल्कि, गर्मियों में भी आपको परेशान कर सकती है. इससे छुटकारा दिलाने में आम की गुठली काफी मददगार हो सकती है. इससे बने बटर को बालों और स्कैल्प पर लगाएं और कुछ देर के लिए छोड़ दें और फिर पानी से धो लें. इससे स्कैल्प मॉइस्चराइज होगी और बालों में चमक भी आएगी. कोलेस्ट्रॉल की ज्यादा मात्रा जानलेवा भी साबित हो सकती है. इसलिए बैंड कोलेस्ट्रॉल के लेवल को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है. इसे कंट्रोल करने में आम की गुठली फायदेमंद हो सकती है. इसके पाउडर की मदद से कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के साथ-साथ ब्लड सर्कुलेशन को भी बेहतर बनाता है. मोटापा कई बीमारियों के खतरे को दोगुना कर देता है. इसलिए हेल्दी वजन होना बहुत जरूरी है. वजन कम करने में आम की गुठली मददगार हो सकती है. यह मेटाबॉलिक रेट तेज करता है, जिससे फैट बर्न होता है और वजन कम होता है. आम की गुठली दस्त की समस्या को ठीक करने में भी मदद कर सकती है. इससे बने पाउडर से दस्त से आराम मिलता है, लेकिन इसे खाने की मात्रा का ध्यान रखें. वहीं, दांतो की ठीक से सफाई न होने पर उनमें सड़न और दर्द की समस्या हो सकती है, ऐसे में आम की गुठली से बना पाउडर दांतों से प्लेग साफ करने में मदद कर सकता है. इसके पाउडर से ब्रश करने से दांत मजबूत और हेल्दी बनते हैं. आम की गुठली कोलेस्ट्रॉल तो कम करती ही है. साथ ही यह हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को भी कम करने में कारगर हो सकती है. हाई ब्लड प्रेशर की वजह से स्ट्रोक का भी खतरा रहता है, जो जानलेवा भी साबित हो सकता है. इसलिए आम की गुठली दिल को हेल्दी बनाए रखने में मददगार होती है. एक्ने की वजह से चेहरे पर दाग-धब्बे और निशान हो सकते हैं. आम की गुठली एक्ने की समस्या को कम करने में मददगार हो सकती है. इसके पाउडर में टमाटर का रस मिलाएं और स्क्रब करें. इससे डेड स्किन सेल्स हटेंगे और त्वचा निखरी हुई नजर आएगी. वहीं, आम की गुठली से बना तेल स्किन को मॉइस्चराइज करता है, जिससे त्वचा रूखी और खिंची-खिंची नजर नहीं आती. यह स्किन को बहुत ऑयली भी नहीं बनाता, जो इसकी खास बात है. आम की गुठली होठों की ड्राईनेस दूर करने में भी मदद करते हैं. इससे बने बटर को लिप बाम के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे होंठ मॉइस्चराइज होते हैं और फटते नहीं है. साथ ही यह प्राकृतिक होता है, जिससे नुकसान का खतरा भी कम होता है. आम की गुठली न केवल डैंड्रफ कम करने में मददगार है, बल्कि यह बालों को मजबूती और पोषण भी देता है. इसमें मौजूद फैटी एसिड्स बालों के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. इससे बाल मजबूत बनते हैं और उनका टूटना व झड़ना कम होता है. First Published : April 17, 2026, 09:12 IST









