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कहीं आपका बच्चा डिहाइड्रेशन का शिकार तो नहीं हो रहा! पिंच टेस्ट से लगाएं पता, स्कूलों में शुरू हुआ ‘वॉटर बेल’

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Health Tips: बढ़ती गर्मी और तेज धूप से अक्सर कुछ बच्चे डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है. कुछ केस में तो बच्चों की जान भी चली जाती है. इसके लिए पैरेंट्स को कुछ जरूरी बातों का ध्यान देने की जरूरत है.

देहरादून: उत्तराखंड के सरकारी और निजी स्कूलों में अब पढ़ाई के बीच ‘वॉटर बेल’ यानी पानी की घंटी गूंजेगी, क्योंकि प्रशासन ने भीषण गर्मी और हीट वेव के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सभी स्कूलों को यह विशेष निर्देश जारी किए हैं. इसका मकसद बच्चों को नियमित अंतराल पर पानी पीने के लिए प्रोत्साहित करना है, क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि छोटे बच्चे खेलकूद और पढ़ाई की व्यस्तता में पानी पीना भूल जाते हैं, जिससे उनके शरीर में पानी की कमी आ जाती है. अब स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि वे घंटी बजाकर बच्चों को हाइड्रेटेड रहने के लिए काम करेंगे.

बच्चों में डिहाइड्रेशन हो सकता है जानलेवा
देहरादून के आयुर्वेदिक चिकित्सक सिराज सिद्दीकी बताते हैं कि उत्तराखंड प्रशासन की ओर से राज्य के स्कूलों में वॉटर बेल लगाने के निर्देश दिए गए हैं. इसका मतलब यह है कि गर्मियों के दिनों में हीट वेव और लू जैसी परेशानियां बच्चों को भी घेर लेती हैं. वहीं छोटे बच्चों को पता नहीं होता है कि उन्हें प्यास लगी है और पानी पीना है. खेल में उन्हें ध्यान नहीं रहता है और वह समय पर पानी नहीं पी पाते हैं, जिसके बाद डिहाइड्रेशन के शिकार हो जाते हैं.

अगर आपका बच्चा कमजोर और सुस्त हो गया है, उसके होंठ सूखे हैं, आंखों के नीचे काले घेरे आ गए हैं, तो यह डिहाइड्रेशन के लक्षण हो सकते हैं. आप पिंच टेस्ट कर सकते हैं, मतलब बच्चे के हाथ की स्किन पर पिंच करें. अगर वह अपनी पहली अवस्था में नहीं आती है, तो वह गम्भीर रूप से डिहाइड्रेशन की चपेट में है. डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए पानी के अलावा उसे ताजे फलों का रस भी दीजिए.

हेल्थ को लेकर लापरवाही खतरनाक
उन्होंने कहा कि डिहाइड्रेशन की परेशानी अगर गंभीर हो जाती है, तो लापरवाही बरतने पर यह जानलेवा भी हो सकती है. गर्मियों के मौसम में बच्चों की हेल्थ को लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है. छोटे बच्चे प्यास लगने पर भी तब तक पानी नहीं मांगते, जब तक वे पूरी तरह थक न जाएं. लगातार धूप और पसीने के चलते शरीर से तरल पदार्थ तेजी से खत्म होते हैं, जो बच्चों में डिहाइड्रेशन का कारण बनते हैं. प्रशासन की यह ‘वॉटर बेल’ न सिर्फ एक अनुशासन है, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति एक सुरक्षा कवच भी साबित होगी, ताकि वे स्कूल परिसर में ऊर्जावान और सुरक्षित महसूस कर सकें.

बच्चों के पेरेंट्स को भी ध्यान देने की जरूरत
डॉ. सिद्दकी का कहना है कि अभिभावकों के लिए अपने बच्चों में डिहाइड्रेशन के लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है. अगर आपका बच्चा सामान्य से ज्यादा सुस्त और कमजोर नजर आ रहा है, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है. इसके साथ ही बच्चे के होंठों का सूखना और आंखों के नीचे काले घेरे आना शरीर में पानी की गंभीर कमी की ओर इशारा करते हैं. डिहाइड्रेशन के चलते बच्चों में एकाग्रता की कमी और चिड़चिड़ापन भी देखा जा सकता है. ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

उन्होंने बताया कि सबसे पहले आप अगर बच्चे को बाहर ले जा रहे हैं, तो उसे कैप पहनाकर या छाता ओढ़ाकर लेकर जाएं. आप उसे इलेक्ट्रोल दे सकते हैं. नींबू पानी भी छोटे बच्चों के लिए अच्छा रहता है. ध्यान रहे कि आप उसे कॉल्ड ड्रिंक्स आदि ज्यादा न दें, क्योंकि वह बॉडी के शुगर और नमक को अवशोषित करती है, जिससे और ज्यादा प्यास लगती है.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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देहरादून: उत्तराखंड के सरकारी और निजी स्कूलों में अब पढ़ाई के बीच ‘वॉटर बेल’ यानी पानी की घंटी गूंजेगी, क्योंकि प्रशासन ने भीषण गर्मी और हीट वेव के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सभी स्कूलों को यह विशेष निर्देश जारी किए हैं. इसका मकसद बच्चों को नियमित अंतराल पर पानी पीने के लिए प्रोत्साहित करना है, क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि छोटे बच्चे खेलकूद और पढ़ाई की व्यस्तता में पानी पीना भूल जाते हैं, जिससे उनके शरीर में पानी की कमी आ जाती है. अब स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि वे घंटी बजाकर बच्चों को हाइड्रेटेड रहने के लिए काम करेंगे.

बच्चों में डिहाइड्रेशन हो सकता है जानलेवा
देहरादून के आयुर्वेदिक चिकित्सक सिराज सिद्दीकी बताते हैं कि उत्तराखंड प्रशासन की ओर से राज्य के स्कूलों में वॉटर बेल लगाने के निर्देश दिए गए हैं. इसका मतलब यह है कि गर्मियों के दिनों में हीट वेव और लू जैसी परेशानियां बच्चों को भी घेर लेती हैं. वहीं छोटे बच्चों को पता नहीं होता है कि उन्हें प्यास लगी है और पानी पीना है. खेल में उन्हें ध्यान नहीं रहता है और वह समय पर पानी नहीं पी पाते हैं, जिसके बाद डिहाइड्रेशन के शिकार हो जाते हैं.

अगर आपका बच्चा कमजोर और सुस्त हो गया है, उसके होंठ सूखे हैं, आंखों के नीचे काले घेरे आ गए हैं, तो यह डिहाइड्रेशन के लक्षण हो सकते हैं. आप पिंच टेस्ट कर सकते हैं, मतलब बच्चे के हाथ की स्किन पर पिंच करें. अगर वह अपनी पहली अवस्था में नहीं आती है, तो वह गम्भीर रूप से डिहाइड्रेशन की चपेट में है. डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए पानी के अलावा उसे ताजे फलों का रस भी दीजिए.

हेल्थ को लेकर लापरवाही खतरनाक
उन्होंने कहा कि डिहाइड्रेशन की परेशानी अगर गंभीर हो जाती है, तो लापरवाही बरतने पर यह जानलेवा भी हो सकती है. गर्मियों के मौसम में बच्चों की हेल्थ को लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है. छोटे बच्चे प्यास लगने पर भी तब तक पानी नहीं मांगते, जब तक वे पूरी तरह थक न जाएं. लगातार धूप और पसीने के चलते शरीर से तरल पदार्थ तेजी से खत्म होते हैं, जो बच्चों में डिहाइड्रेशन का कारण बनते हैं. प्रशासन की यह ‘वॉटर बेल’ न सिर्फ एक अनुशासन है, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति एक सुरक्षा कवच भी साबित होगी, ताकि वे स्कूल परिसर में ऊर्जावान और सुरक्षित महसूस कर सकें.

बच्चों के पेरेंट्स को भी ध्यान देने की जरूरत
डॉ. सिद्दकी का कहना है कि अभिभावकों के लिए अपने बच्चों में डिहाइड्रेशन के लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है. अगर आपका बच्चा सामान्य से ज्यादा सुस्त और कमजोर नजर आ रहा है, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है. इसके साथ ही बच्चे के होंठों का सूखना और आंखों के नीचे काले घेरे आना शरीर में पानी की गंभीर कमी की ओर इशारा करते हैं. डिहाइड्रेशन के चलते बच्चों में एकाग्रता की कमी और चिड़चिड़ापन भी देखा जा सकता है. ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

उन्होंने बताया कि सबसे पहले आप अगर बच्चे को बाहर ले जा रहे हैं, तो उसे कैप पहनाकर या छाता ओढ़ाकर लेकर जाएं. आप उसे इलेक्ट्रोल दे सकते हैं. नींबू पानी भी छोटे बच्चों के लिए अच्छा रहता है. ध्यान रहे कि आप उसे कॉल्ड ड्रिंक्स आदि ज्यादा न दें, क्योंकि वह बॉडी के शुगर और नमक को अवशोषित करती है, जिससे और ज्यादा प्यास लगती है.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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