पेट फूलना, एसिडिटी के उपाय: पेट फूलना जैसा फूल? गैस से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये असरदार उपाय

सूजन अम्लता के उपचार: अक्सर हम पेट फूलना, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं को बहुत ही इच्छाओं में लेते हैं। हमें लगता है कि शायद आज का खाना थोड़ा सा था, या फिर देर से खाना खाया, या फिर खाने के समय में कुछ गड़बड़ी हो गई। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये सामान्य दिखने वाले लक्षण किसी गंभीर कमी के संकेत हो सकते हैं? बार-बार गैस बनाना केवल आपके खान-पान की गलती नहीं है, बल्कि शरीर में कुछ जरूरी विटामिन और तत्वों की कमी का परिणाम भी हो सकता है। आइए जानते हैं। पाचन तंत्र को सही से संचालित करने के लिए विटामिन बी12 अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल हमारे नर्वस सिस्टम के लिए जरूरी है, बल्कि पेट की लाइनिंग भी स्वस्थ है। इसके कम होने से पाचन प्रक्रिया सामान्य हो जाती है, जिससे पाचन, पेट में भारीपन और गैस की समस्या बनी रहती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि साल में कम से कम एक बार अपने शरीर में विटामिन के स्तर की जांच अवश्य करवानी चाहिए। विटामिन डी को ‘सनशाइन विटामिन’ के नाम से जाना जाता है, लेकिन इसका असर केवल यौगिकों तक ही सीमित नहीं है। विटामिन डी का सीधा संबंध हमारी कंपनी के स्वास्थ्य से है। यह शरीर में सूजन को कम करने का काम करता है। विटामिन डी की कमी से खुजली में जलन हो सकती है, जिससे गैस और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। मैग्नीशियम हमारे शरीर में एक जरूरी जगह है। मैग्नीशियम हमारे पेट के मसालों को आराम देने में मदद करता है। अगर शरीर में इसकी कमी हो जाए, तो पेट की मांसपेशियां ठीक से रिलैक्स नहीं हो पातीं, जिससे गैस और ब्लोटिंग का रिसाव मुख्य रूप से होता है। गैस की समस्या से बचने के लिए करें ये काम विटामिन बी12 और डी की कमी को पूरा करने के लिए मांसाहारी लोग अंडा, मछली और मीट का सेवन कर सकते हैं। वहीं, शाकाहारी लोग अपने आहार में दूध, दही, पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों को शामिल करते हैं।दही और छाछ को अपने अन्तर्विषय का नियमित हिस्सा बनायें। ये प्रोबायोटिक्स के रूप में काम करते हैं और पेट में ‘गुड क्रिएटर’ की मात्रा पचाने में सहायक होते हैं।कार्बोहाइड्रेट पाचन के लिए अच्छा है, लेकिन इसका बहुत अधिक या बहुत कम सेवन भी गैस का कारण बन सकता है। धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे की मात्राअगर आप जड़ी-बूटी वाली चीजें ले जा रहे हैं या फिर मंजीले ले जा रहे हैं तो पानी न भूलें। क्योंकि पर्याप्त पानी के बिना स्टार्च का जन्म हो सकता है। (टैग्सटूट्रांसलेट)किस विटामिन की कमी से पेट में गैस बनती है(टी)क्या मल्टीविटामिन गैस और सूजन का कारण बन सकते हैं(टी)दवाओं के कारण होने वाली गैस से कैसे छुटकारा पाएं(टी)ब्लड प्रेशर की दवाएं जो गैस का कारण बनती हैं(टी)कौन से विटामिन गैस और सूजन का कारण बनते हैं(टी)दवाएं जो सूजन और वजन बढ़ाती हैं(टी)क्या विटामिन बी12 की कमी से गैस्ट्राइटिस हो सकता है(टी)क्या विटामिन डी गैस और सूजन का कारण बनता है(टी)कौन से विटामिन सबसे अधिक कारण बनते हैं गैस(टी)किस विटामिन की कमी से गैस बनती है
मूवी रिव्यू- पेड्डी:पहचान की लड़ाई को दमदार अंदाज में दिखाती है फिल्म, राम चरण के करियर की बेस्ट परफॉर्मेंस, फर्स्ट हाफ स्लो, लेकिन कहानी असरदार

स्टार- 3.5/5 रनटाइम- 3 घंटे 8 मिनट कास्ट- राम चरण, जान्हवी कपूर, जगपति बाबू कई बार कुछ फिल्में कहानी से ज्यादा अपने जज्बातों के लिए याद रखी जाती हैं। पेड्डी भी ऐसी ही फिल्म है। यह सिर्फ एक खिलाड़ी की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की आवाज है जिनकी मौजूदगी तक सरकारी कागजों में दर्ज नहीं है। राम चरण और निर्देशक बुच्ची बाबू सना ने एक बड़े व्यावसायिक कैनवास पर पहचान, सम्मान और हक की लड़ाई को पेश करने की कोशिश की है। फिल्म हर मोड़ पर परफेक्ट नहीं है, लेकिन जब यह दिल पर वार करती है तो असर छोड़ जाती है। कैसी है फिल्म की कहानी? विजयनगरम जिले की पहाड़ियों के नीचे बसा एक गांव ऐसा है जिसका कोई सरकारी अस्तित्व नहीं है। वहां रहने वाले लोगों के पास पहचान नहीं, वोट देने का अधिकार नहीं और बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। पेड्डी इसी गांव का रहने वाला युवक है। वह गुड़ की फैक्ट्री में काम करता है और स्थानीय क्रिकेट मैचों में पैसे लेकर खेलने जाता है। गांव के बुजुर्ग अप्पलासूरी सालों से अपने गांव के लिए रेलवे स्टेशन की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज कोई नहीं सुनता। एक दर्दनाक घटना के बाद पेड्डी इस लड़ाई को अपना मिशन बना लेता है। क्रिकेट से शुरू हुआ उसका सफर कुश्ती और फिर एथलेटिक्स तक पहुंचता है। सवाल सिर्फ एक रेलवे स्टेशन का नहीं रह जाता, बल्कि पूरे गांव को पहचान दिलाने का बन जाता है। पेड्डी इस लड़ाई को कैसे अंजाम देता है, यही फिल्म की मुख्य कहानी है। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? राम चरण ने अपने करियर की सबसे परिपक्व और समर्पित परफॉर्मेंस दी है। उनका शारीरिक बदलाव, अलग बोली पर पकड़ और भावनात्मक दृश्यों में दिखाई गई ईमानदारी प्रभावित करती है। खासकर दूसरे हिस्से में उनका अभिनय कई जगह आंखें नम कर देता है। शिव राजकुमार सीमित लेकिन प्रभावी भूमिका में नजर आते हैं। उनके और राम चरण के बीच गुरु शिष्य वाला रिश्ता फिल्म की बड़ी ताकत बनकर उभरता है। जगपति बाबू ने अपने किरदार में भावनात्मक गहराई लाने की कोशिश की है। हालांकि कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा नाटकीय लगते हैं। जाह्नवी कपूर के हिस्से में ज्यादा कुछ करने को नहीं है। उनका किरदार कहानी के मुख्य मुद्दे से लगभग कटा हुआ महसूस होता है। एक मजबूत भूमिका बनने की संभावना थी, लेकिन लेखन ने उन्हें सिर्फ प्रेम कहानी तक सीमित कर दिया। कैसा है फिल्म का डायरेक्शन? बुच्ची बाबू सना की सबसे बड़ी ताकत भावनाओं को पर्दे पर जीवंत करना है। फिल्म का मूल विचार बेहद दमदार है और दूसरे हिस्से में निर्देशक इस विचार को मजबूती से पकड़कर रखते हैं। कुश्ती वाले दृश्य और अंतिम आधा घंटा फिल्म का सबसे प्रभावशाली हिस्सा है। हालांकि पहले हिस्से में कहानी कई बार भटकती है। रोमांस और कुछ व्यावसायिक मसाला दृश्य फिल्म की रफ्तार को धीमा करते हैं। तीन घंटे से ज्यादा की अवधि भी कुछ जगह महसूस होती है। तकनीकी पक्ष मजबूत है। रत्नवेलु की सिनेमैटोग्राफी गांव, खेल के मैदान और भावनात्मक दृश्यों को खूबसूरती से कैद करती है। प्रोडक्शन डिजाइन भी फिल्म को वास्तविकता के करीब रखता है। हालांकि कुछ दृश्य प्रभाव अपेक्षित स्तर के नहीं लगते। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? ए आर रहमान का संगीत फिल्म की आत्मा है। गाने कहानी का हिस्सा बनकर आते हैं और पृष्ठभूमि संगीत कई दृश्यों के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। खासकर भावनात्मक और प्रेरणादायक दृश्यों में उनका काम फिल्म को ऊंचाई देता है। फाइनल वर्डिक्ट: फिल्म देखें या नहीं? पेड्डी एक ऐसी फिल्म है जो तर्क से ज्यादा भावनाओं के सहारे चलती है। इसमें कई कमियां हैं, कुछ सवाल भी अनुत्तरित रह जाते हैं, लेकिन फिल्म का दिल सही जगह पर है। राम चरण का शानदार अभिनय, दमदार क्लाइमैक्स और पहचान की लड़ाई पर आधारित भावनात्मक कहानी इसे देखने लायक बनाती है। अगर आपको खेल, संघर्ष और इंसानी जज्बातों से जुड़ी कहानियां पसंद हैं तो पेड्डी आपको निराश नहीं करेगी।
मूवी रिव्यू- पेड्डी:पहचान की लड़ाई को दमदार अंदाज में दिखाती है फिल्म, राम चरण के करियर की बेस्ट परफॉर्मेंस, फर्स्ट हाफ स्लो, लेकिन कहानी असरदार

स्टार- 3.5/5 रनटाइम- 3 घंटे 8 मिनट कास्ट- राम चरण, जान्हवी कपूर, जगपति बाबू कई बार कुछ फिल्में कहानी से ज्यादा अपने जज्बातों के लिए याद रखी जाती हैं। पेड्डी भी ऐसी ही फिल्म है। यह सिर्फ एक खिलाड़ी की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की आवाज है जिनकी मौजूदगी तक सरकारी कागजों में दर्ज नहीं है। राम चरण और निर्देशक बुच्ची बाबू सना ने एक बड़े व्यावसायिक कैनवास पर पहचान, सम्मान और हक की लड़ाई को पेश करने की कोशिश की है। फिल्म हर मोड़ पर परफेक्ट नहीं है, लेकिन जब यह दिल पर वार करती है तो असर छोड़ जाती है। कैसी है फिल्म की कहानी? विजयनगरम जिले की पहाड़ियों के नीचे बसा एक गांव ऐसा है जिसका कोई सरकारी अस्तित्व नहीं है। वहां रहने वाले लोगों के पास पहचान नहीं, वोट देने का अधिकार नहीं और बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। पेड्डी इसी गांव का रहने वाला युवक है। वह गुड़ की फैक्ट्री में काम करता है और स्थानीय क्रिकेट मैचों में पैसे लेकर खेलने जाता है। गांव के बुजुर्ग अप्पलासूरी सालों से अपने गांव के लिए रेलवे स्टेशन की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज कोई नहीं सुनता। एक दर्दनाक घटना के बाद पेड्डी इस लड़ाई को अपना मिशन बना लेता है। क्रिकेट से शुरू हुआ उसका सफर कुश्ती और फिर एथलेटिक्स तक पहुंचता है। सवाल सिर्फ एक रेलवे स्टेशन का नहीं रह जाता, बल्कि पूरे गांव को पहचान दिलाने का बन जाता है। पेड्डी इस लड़ाई को कैसे अंजाम देता है, यही फिल्म की मुख्य कहानी है। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? राम चरण ने अपने करियर की सबसे परिपक्व और समर्पित परफॉर्मेंस दी है। उनका शारीरिक बदलाव, अलग बोली पर पकड़ और भावनात्मक दृश्यों में दिखाई गई ईमानदारी प्रभावित करती है। खासकर दूसरे हिस्से में उनका अभिनय कई जगह आंखें नम कर देता है। शिव राजकुमार सीमित लेकिन प्रभावी भूमिका में नजर आते हैं। उनके और राम चरण के बीच गुरु शिष्य वाला रिश्ता फिल्म की बड़ी ताकत बनकर उभरता है। जगपति बाबू ने अपने किरदार में भावनात्मक गहराई लाने की कोशिश की है। हालांकि कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा नाटकीय लगते हैं। जाह्नवी कपूर के हिस्से में ज्यादा कुछ करने को नहीं है। उनका किरदार कहानी के मुख्य मुद्दे से लगभग कटा हुआ महसूस होता है। एक मजबूत भूमिका बनने की संभावना थी, लेकिन लेखन ने उन्हें सिर्फ प्रेम कहानी तक सीमित कर दिया। कैसा है फिल्म का डायरेक्शन? बुच्ची बाबू सना की सबसे बड़ी ताकत भावनाओं को पर्दे पर जीवंत करना है। फिल्म का मूल विचार बेहद दमदार है और दूसरे हिस्से में निर्देशक इस विचार को मजबूती से पकड़कर रखते हैं। कुश्ती वाले दृश्य और अंतिम आधा घंटा फिल्म का सबसे प्रभावशाली हिस्सा है। हालांकि पहले हिस्से में कहानी कई बार भटकती है। रोमांस और कुछ व्यावसायिक मसाला दृश्य फिल्म की रफ्तार को धीमा करते हैं। तीन घंटे से ज्यादा की अवधि भी कुछ जगह महसूस होती है। तकनीकी पक्ष मजबूत है। रत्नवेलु की सिनेमैटोग्राफी गांव, खेल के मैदान और भावनात्मक दृश्यों को खूबसूरती से कैद करती है। प्रोडक्शन डिजाइन भी फिल्म को वास्तविकता के करीब रखता है। हालांकि कुछ दृश्य प्रभाव अपेक्षित स्तर के नहीं लगते। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? ए आर रहमान का संगीत फिल्म की आत्मा है। गाने कहानी का हिस्सा बनकर आते हैं और पृष्ठभूमि संगीत कई दृश्यों के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। खासकर भावनात्मक और प्रेरणादायक दृश्यों में उनका काम फिल्म को ऊंचाई देता है। फाइनल वर्डिक्ट: फिल्म देखें या नहीं? पेड्डी एक ऐसी फिल्म है जो तर्क से ज्यादा भावनाओं के सहारे चलती है। इसमें कई कमियां हैं, कुछ सवाल भी अनुत्तरित रह जाते हैं, लेकिन फिल्म का दिल सही जगह पर है। राम चरण का शानदार अभिनय, दमदार क्लाइमैक्स और पहचान की लड़ाई पर आधारित भावनात्मक कहानी इसे देखने लायक बनाती है। अगर आपको खेल, संघर्ष और इंसानी जज्बातों से जुड़ी कहानियां पसंद हैं तो पेड्डी आपको निराश नहीं करेगी।
IPL 2026 में देसी Vs विदेशी खिलाड़ी:भारतीय बल्लेबाज स्ट्राइक रेट में आगे निकले, गेंदबाजी में अब भी विदेशी ज्यादा असरदार

एक समय IPL की पहचान विदेशी पावर-हिटर्स से होती थी। क्रिस गेल, एबी डिविलियर्स, पोलार्ड और वॉर्नर जैसे खिलाड़ी लीग का टेम्पो तय करते थे। लेकिन IPL 2026 ने तस्वीर बदल दी। अब मैच का रुख भारतीय बल्लेबाज तय कर रहे हैं। इस सीजन भारतीय बल्लेबाजों ने विदेशियों से ज्यादा आक्रामक स्ट्राइक रेट से रन बनाए। हालांकि गेंदबाजी में कहानी उलट गई। जहां भारतीय गेंदबाज पूरे सीजन दबाव में दिखे, वहीं विदेशी गेंदबाज कम संख्या में होने के बावजूद ज्यादा असरदार साबित हुए। स्टोरी में आगे पढ़िए 2026 में भारतीय और विदेशी खिलाड़ियों का प्रदर्शन पिछले सीजन की तुलना में कैसा रहा है। 1. भारतीयों बल्लेबाजों का स्ट्राइक विदेशी बल्लेबाजों से ज्यादा पहले भारतीय बल्लेबाज एंकर रोल में दिखते थे और तेज बल्लेबाजी का जिम्मा विदेशी खिलाड़ियों पर रहता था। अब भारतीय खिलाड़ी शुरुआत से ही अटैकिंग क्रिकेट खेल रहे हैं और मैच का टेम्पो कंट्रोल कर रहे हैं। IPL 2026 में भारतीय बल्लेबाजों का औसत स्ट्राइक रेट 157.01 रहा। पिछले सीजन यह आंकड़ा 152 का ही था। वहीं, विदेशी बल्लेबाजों ने 155.37 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। पिछले सीजन विदेशी बल्लेबाजों ने करीब 153 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए थे। 2. भारतीय गेंदबाज ज्यादा दबाव में दिखे इस सीजन भारतीय गेंदबाजों ने 2025 के 533 विकेट के मुकाबले 506 विकेट लिए। उनकी इकोनॉमी 9.42 से बढ़कर 9.79 हो गई। विदेशी गेंदबाज भी पिछले सीजन की तुलना में इस बार ज्यादा महंगे साबित हुए, फिर भी वे भारतीय गेंदबाजों की तुलना में ज्यादा किफायती रहे हैं। 3. प्लेयर ऑफ द मैच में भारतीयों के नंबर घटे इस सीजन 53 खिलाड़ियों को प्लेयर ऑफ द मैच दिया गया। इनमें 31 भारतीय और 22 विदेशी खिलाड़ी शामिल रहे। वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन और संजू सैमसन को भारतीयों में सबसे ज्यादा 3-3 बार यह अवॉर्ड मिला। पिछले सीजन भी 53 खिलाड़ी प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए थे। इनमें 35 भारतीय और 18 विदेशी खिलाड़ियों को यह अवॉर्ड मिला था। भारतीयों में श्रेयस अय्यर और क्रुणाल पंड्या सबसे ज्यादा 3-3 बार प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए थे। इस सीजन बल्लेबाजों का स्ट्राइक रेट और एवरेज दोनों बढ़ा क्रिकेट में अक्सर कहा जाता है कि बल्लेबाजी की एवरेज बढ़ानी है तो स्ट्राइक रेट की कुर्बानी देनी होगी और अगर स्ट्राइक रेट में इजाफा करना है तो एवरेज से समझौता करना होगा। इस बार यह कहावत फेल होती दिखाई दे रही है। इस सीजन में ओवरलऑल बैटिंग एवरेज और स्ट्राइकरेट दोनों में पिछले सीजन की तुलना में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चौके, छक्के, शतक और अर्धशतक के नंबर भी 2025 की तुलना में बढ़े हैं। गेंदबाज और महंगे साबित हुए 2025 में जहां कुल 829 विकेट गिरे थे, वहीं 2026 में यह संख्या घटकर 813 रह गई। गेंदबाजों का औसत 31.42 से बढ़कर 32.45 पहुंच गया। यानी एक विकेट लेने में पहले से ज्यादा रन खर्च हुए। इकोनॉमी रेट भी IPL इतिहास में सबसे महंगा रहा। 2025 की तुलना में इकोनॉमी 9.50 से बढ़कर 9.76 हो गई।
भीषण गर्मी और लू से बचने के लिए अपनाएं ये आर्युर्वेदिक नुस्खे, एक्सपर्ट से जानें आसान और असरदार उपाय

Last Updated:May 20, 2026, 12:36 IST Heatwave Safety Tips: गर्मी में कुछ पारंपरिक पेय पदार्थ किसी दवा से कम नहीं होते है.कच्चे आम से बना आम पन्ना लू से बचाने का सबसे असरदार उपाय माना जाता है. यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित रखता है.इसी तरह बेल का शरबत पेट को ठंडा रखता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है.वहीं सत्तू का घोल शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ-साथ ठंडक भी प्रदान करता है तेज धूप और भीषण गर्मी का असर सीधे हमारे शरीर पर पड़ता है. लू लगना, डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और थकान जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं. ऐसे में आयुर्वेद में बताए गए. कुछ आसान घरेलू उपाय आपको न सिर्फ लू से बचाते हैं, बल्कि शरीर को अंदर से ठंडा और तरोताजा भी रखते हैं. अच्छी बात यह है कि ये सभी उपाय पूरी तरह प्राकृतिक, सुरक्षित और आसानी से घर पर अपनाए जा सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इन उपायों को रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल कर लिया जाए, तो गर्मी का असर काफी हद तक कम किया जा सकता है और शरीर संतुलित बना रहता है. देसी ड्रिंक जो बनेंगे गर्मी के रक्षकगर्मी में कुछ पारंपरिक पेय पदार्थ किसी दवा से कम नहीं होते है.कच्चे आम से बना आम पन्ना लू से बचाने का सबसे असरदार उपाय माना जाता है. यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित रखता है.इसी तरह बेल का शरबत पेट को ठंडा रखता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है.वहीं सत्तू का घोल शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ-साथ ठंडक भी प्रदान करता है, जिससे आप दिनभर एक्टिव बने रहते हैं प्राकृतिक चीजों से शरीर को ठंडकरसोई में मौजूद कई चीजें भी गर्मी से राहत दिलाने में कारगर हैं.धनिया बीज का पानी और पुदीने का शरबत या चटनी शरीर की आंतरिक गर्मी को कम करते हैं. रातभर भिगोई हुई सौंफ का पानी सुबह पीने से पित्त दोष शांत होता है. शरीर ठंडा रहता है.अगर शरीर में ज्यादा गर्मी महसूस हो, तो चंदन का लेप माथे और छाती पर लगाने से तुरंत राहत मिलती है. खानपान में रखें खास ध्यानआयुर्वेद के अनुसार गर्मी में खानपान का सही चुनाव बहुत जरूरी है.कच्चा प्याज लू से बचाने में बेहद फायदेमंद माना गया है, इसलिए इसे सलाद के रूप में जरूर खाएं.इसके अलावा हल्का और सुपाच्य भोजन जैसे लौकी, तोरई, खीरा और कद्दू जैसी पानी से भरपूर सब्जियां शरीर को हाइड्रेट रखती हैं.गर्मी से बचाव के लिए कुछ छोटी-छोटी आदतें भी बहुत काम की होती हैं. फ्रिज के ठंडे पानी की बजाय मिट्टी के घड़े का पानी पिएं, यह प्राकृतिक रूप से ठंडा और शरीर के लिए बेहतर होता है.धूप में निकलते समय सिर ढककर रखें और नंगे पैर बाहर न चलें. आंखों में जलन के लिए गुलाब जल का करें इस्तेमालआंखों में जलन होने पर गुलाब जल का इस्तेमाल करने से राहत मिलती है. ताजगी महसूस होती है. डॉ. अनिल पटेल के अनुसार, अगर इन उपायों को नियमित रूप से अपनाया जाए, तो गर्मी से होने वाली समस्याएं जैसे थकान, चक्कर आना, डिहाइड्रेशन और पाचन संबंधी परेशानियां काफी हद तक कम हो सकती हैं.वे तुलसी के बीज, सफेद प्याज, खस, चंदन और मोगरा जैसी ठंडी तासीर वाली चीजों को भी गर्मी में उपयोग करने की सलाह देते हैं. ये आयुर्वेदिक नुस्खे न सिर्फ आपको लू से बचाते हैं, बल्कि बिना किसी साइड इफेक्ट के शरीर को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ और ठंडा बनाए रखते हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Khandwa,Madhya Pradesh
खांसी में कौन से फल खाएं ताकि दवा से भी तेजी से मिले आराम? जानिए ये 4 असरदार फ्रूट्स का राज

Last Updated:May 18, 2026, 20:39 IST खांसी और गले की खराश होने पर सही खानपान शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद कर सकता है. अनानास, अनार का जूस, केला और कीवी जैसे फल विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो इम्यूनिटी मजबूत करने में सहायक माने जाते हैं. खांसी में खाने वाले फल. मौसम बदलते ही खांसी, गले में खराश और बलगम जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं. कई लोग दवाइयों के साथ खानपान पर भी ध्यान देते हैं, क्योंकि कुछ चीजें गले को राहत पहुंचाने में मदद कर सकती हैं. खासतौर पर फल शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट देते हैं, जिससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और शरीर जल्दी रिकवर करने में मदद पाता है. हालांकि खांसी में हर फल फायदेमंद नहीं होता, इसलिए ऐसे फलों का चुनाव जरूरी है जो गले को आराम दें और शरीर को हाइड्रेट रखें. सही फल खाने से कमजोरी कम होती है और गले की जलन में भी राहत मिल सकती है. आइए जानते हैं कौनसे फल आपको राहत दे सकते हैं. अनानासअनानास में ब्रोमेलिन नाम का एंजाइम पाया जाता है, जो गले में जमा बलगम को पतला करने और सूजन कम करने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि कई लोग खांसी और गले की खराश में अनानास को फायदेमंद मानते हैं. इसमें विटामिन C भी होता है, जो इम्यूनिटी को सपोर्ट करता है. लेकिन बहुत ज्यादा खट्टा अनानास कुछ लोगों के गले में जलन भी कर सकता है, इसलिए इसे संतुलित मात्रा में खाना चाहिए. अनार का जूसअनार का जूस एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन्स से भरपूर होता है. यह शरीर को हाइड्रेट रखने और कमजोरी कम करने में मदद कर सकता है. खांसी के दौरान जब शरीर थका हुआ महसूस करता है, तब अनार का जूस एनर्जी देने का काम कर सकता है. इसे बहुत ठंडा पीने से बचना चाहिए, क्योंकि ठंडी चीजें कुछ लोगों की खांसी बढ़ा सकती हैं. केलाकेला पोषक तत्वों से भरपूर और आसानी से पचने वाला फल माना जाता है. इसमें फास्ट-एक्टिंग कार्बोहाइड्रेट और सॉल्युबल फाइबर होता है, जो शरीर को जल्दी एनर्जी देने में मदद करता है. खांसी, सर्दी या कमजोरी के दौरान केला रिकवरी में मददगार माना जाता है. यही वजह है कि BRAT डाइट में भी केले को शामिल किया जाता है. हालांकि अगर केला खाने से बलगम बढ़ता महसूस हो, तो इसकी मात्रा कम रखनी चाहिए. कीवी भी काफी फायदेमंद कीवी भले ही खांसी में थोड़ा अलग विकल्प लगे, लेकिन इसे इम्यूनिटी बढ़ाने वाले फलों में गिना जाता है. इसमें विटामिन C और कई माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर को इंफेक्शन से लड़ने में मदद कर सकते हैं. कुछ स्टडीज के मुताबिक, सर्दी-जुकाम के दौरान कीवी खाने से गले की परेशानी और रिकवरी में फायदा मिल सकता है. इसे भी सामान्य तापमान पर खाना बेहतर माना जाता है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
गर्मी में जांघ के आसपास खुजली से हैं परेशान, अपनाएं 5 असरदार देसी उपाय, तुरंत मिलेगा आराम

Last Updated:May 18, 2026, 18:15 IST Itching Home Remedies: गर्मियों में पसीना और नमी बढ़ने से जांघों के आसपास खुजली और रैशेज की समस्या होने लगती है. खासकर टाइट कपड़े पहनने के बाद यह परेशानी हो जाती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो नारियल तेल, एलोवेरा जेल और नीम जैसे घरेलू उपाय जांघ के आसपास होने वाली खुजली से तुरंत राहत दिला सकते हैं. सूती कपड़े भी काफी राहत दे सकते हैं. खुजली से निजात पाने के लिए एलोवेरा जेल या नारियल तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं. Home Remedies of Itching: गर्मी के मौसम में स्किन से जुड़ी समस्याएं सबसे ज्यादा परेशान करती हैं. पसीना, उमस और स्किन में नमी बढ़ने की वजह से जांघों के आसपास खुजली, जलन और रैशेज की समस्या काफी आम है. जो लोग लंबे समय तक बाहर रहते हैं या ज्यादा पसीना बहाते हैं, उन्हें यह परेशानी ज्यादा हो सकती है. कई बार लगातार खुजलाने से त्वचा लाल हो जाती है और इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार जांघों के आसपास खुजली की वजह फंगल इंफेक्शन, पसीना, टाइट कपड़े या त्वचा में रगड़ भी हो सकती है. ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपाय जल्द राहत दे सकते हैं. खुजली से निजात पाने के देसी नुस्खे नारियल तेल : नारियल तेल में एंटीबैक्टीरियल और मॉइस्चराइजिंग गुण पाए जाते हैं, जो स्किन को ठंडक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं. अगर खुजली हल्की हो, तो प्रभावित जगह को साफ करके वहां हल्का नारियल तेल लगाया जा सकता है. इससे त्वचा की ड्राइनेस कम होती है और जलन में राहत मिल सकती है. एलोवेरा जेल : एलोवेरा को त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद कूलिंग गुण खुजली और जलन को शांत करने में मदद कर सकते हैं. ताजा एलोवेरा जेल को प्रभावित जगह पर लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और लालिमा कम हो सकती है. नीम का पानी : नीम में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. अगर खुजली पसीने या हल्के फंगल इंफेक्शन की वजह से हो रही हो, तो नीम के पत्तों को पानी में उबालकर उस पानी से प्रभावित जगह साफ की जा सकती है. इससे त्वचा को राहत मिल सकती है. एंटीफंगल पाउडर : जांघों के आसपास लगातार नमी बने रहने से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ सकते हैं. इसलिए नहाने के बाद उस हिस्से को अच्छी तरह सुखाना जरूरी है. जरूरत पड़ने पर एंटीफंगल पाउडर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. ढीले और सूती कपड़े : गर्मी में टाइट और सिंथेटिक कपड़े पहनने से पसीना ज्यादा जमा होता है, जिससे खुजली और रैशेज बढ़ सकते हैं. डॉक्टर के अनुसार सूती और ढीले कपड़े पहनने से त्वचा को हवा मिलती है और पसीना जल्दी सूखता है. इससे संक्रमण का खतरा कम हो सकता है. डॉक्टर से कब करें संपर्क? इस समस्या से बचने के लिए पसीने से गीले कपड़े ज्यादा देर तक न पहनें. दूसरों का तौलिया या कपड़े इस्तेमाल करने से बचें. त्वचा को बार-बार खुजलाने से बचें. अगर खुजली लंबे समय तक बनी रहे, त्वचा पर लाल चकत्ते, सूजन, बदबू या पस बनने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में डर्मेटोलॉजिस्ट से मिलकर सलाह लेना जरूरी हो सकता है, क्योंकि यह फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन का संकेत हो सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
पनीर-मटन को भी टक्कर देती है तालाब में मिलने वाली ये सब्जी! डायबिटीज से लेकर एनीमिया तक में असरदार

Last Updated:May 17, 2026, 15:08 IST Kamal Kakdi Benefits in Hindi: भारतीय रसोई में कई ऐसी सब्जियां हैं जो स्वाद के साथ-साथ शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. इन्हीं में से एक है कमल ककड़ी, जिसके आगे स्वाद और सेहत के मामले में पनीर से लेकर मटन तक फेल हैं. तालाब में खिलने वाले कमल के फूल की जड़ से तैयार होने वाली यह सब्जी न सिर्फ खाने का जायका बढ़ाती है, बल्कि शरीर को अंदर से ताकतवर भी बनाती है. आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सही तरीके से सेवन करने पर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है. Kamal Kakdi Benefits in Hindi: अभी तक आपने कई तरह की हरी और मौसमी सब्जियों का स्वाद चखा होगा, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी शाकाहारी सब्जी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके आगे स्वाद में पनीर और मटन भी फीके पड़ जाते हैं. हम बात कर रहे हैं ‘कमल ककड़ी’ की. यह सब्जी असल में तालाबों में खिलने वाले कमल के पौधे की जड़ होती है. हल्के मीठे स्वाद और कुरकुरी बनावट वाली कमल ककड़ी न केवल खाने का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि शरीर को कई तरह के रोगों से दूर रखकर अंदर से फौलादी बनाने का काम भी करती है. पोषक तत्वों की खान है यह सब्जीआयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रियंका सिंह ने बताया कि कमल ककड़ी को नेचुरल हेल्थ बूस्टर भी कहा जाता है. इसमें फाइबर, आयरन, पोटैशियम, विटामिन सी, कैल्शियम और प्रोटीन जैसे कई जरूरी पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. यह सब्जी शरीर को अंदर से पोषण देने के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखती है. इसमें मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और कब्ज जैसी पेट की परेशानियां दूर होती हैं. इसके अलावा यह कैंसर के संभावित खतरे को कम करने में भी असरदार मानी गई है. वजन और डायबिटीज को रखती है कंट्रोलमोटापा कम करने की कोशिश में जुटे लोगों के लिए कमल ककड़ी फायदेमंद है. इसमें कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी काफी लो होता है. इसका सीधा फायदा यह होता है कि इसे खाने के बाद शरीर में ब्लड शुगर का लेवल तेजी से नहीं बढ़ता. खून की कमी और दिल की बीमारियों में वरदानएनीमिया से जूझ रहे मरीजों के लिए कमल ककड़ी किसी वरदान से कम नहीं है. इसमें आयरन और कॉपर दोनों ही तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण कर हीमोग्लोबिन के स्तर को तेजी से बढ़ाते हैं. वहीं, इसमें मौजूद पोटैशियम दिल की सेहत का ख्याल रखता है. यह हाई ब्लड प्रेशर को संतुलित बनाए रखने और शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी काफी मददगार साबित होता है. तनाव को करती है दूर, ऐसे करें इस्तेमालकमल ककड़ी न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है. इसमें विटामिन बी6 पाया जाता है, जो दिमाग को शांत रखने, तनाव कम करने और मूड को बेहतर बनाने में मददगार होता है. इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर के अंदरूनी हिस्सों की सूजन को कम करते हैं. रसोई में इसका उपयोग सब्जी, सूप, सलाद, अचार या कुरकुरे चिप्स के रूप में किया जा सकता है. इसे हमेशा अच्छी तरह धोकर और पकाकर ही खाना चाहिए, क्योंकि कच्ची कमल ककड़ी में बैक्टीरिया होने का खतरा रहता है. साथ ही, यदि आप पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, तो इसका सेवन शुरू करने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें. About the Author Seema Nath सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Ballia,Uttar Pradesh Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
Tips To get rid of mosquito| worlds deadliest animal: मच्छर भगाने के असरदार उपाय

Last Updated:May 15, 2026, 21:32 IST National Dengue Day 2026: मच्छर के काटने से हर साल लाखों मौत होती हैं. डेंगू मच्छर के काटने से होने वाली सबसे कॉमन और जानलेवा बीमारी है. इसलिए हर साल 16 मई को नेशनल डेंगू डे के रूप में मनाया जाता है, जिससे लोगों में जागरूकता फैलायी जा सके. इसी कड़ी में मच्छर से बचाव के 5 जरूरी उपायों को यहां हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं. ख़बरें फटाफट दुनिया में एक से बड़े एक आदमखोर खुंखार जानवर हैं. कोई एक बार में साबूत निगलने की क्षमता रखता है, तो कोई एक नाखून से दो हिस्सों में चीर देने की ताकत. लेकिन फिर भी दुनिया के सबसे जानलेवा जानवर की लिस्ट में टॉप पर इनका नामोनिशान नहीं दिखता है. आपको ये जानकर हैरानी हो सकती है कि वर्ल्ड के डेडलिस्ट एनिमल का खिताब मच्छर के पास है. CDC के अनुसार, मच्छर किसी भी अन्य जीव की तुलना में मनुष्यों को अधिक पीड़ा पहुंचाते हैं. विश्व स्तर पर हर साल दस लाख से अधिक लोग मच्छर के काटने से होने वाली बीमारियों से मरते हैं. इसमें में डेंगू, वेस्ट नाइल, ज़िका, चिकनगुनिया, मलेरिया और लिम्फैटिक फाइलेरियासिस जैसी बीमारियां शामिल है. ऐसे में नेशनल डेंगू डे के मौके पर यहां हम आपको ऐसे 5 उपाय बता रहे हैं, जो आपको इनसे बचाने में मददगार साबित हो सकते हैं. मच्छरों भगाने के असरदार उपाय घर के आसपास पानी जमा न होने देंमच्छर साफ और गंदे दोनों तरह के रुके हुए पानी में पनपते हैं. ऐसे में कूलर, गमले, बाल्टी और टायर जैसी जगहों पर पानी जमा न होने दें. समय-समय पर इन्हें साफ करते रहें. खिड़की और दरवाजों पर जाली लगाएंघर में मच्छरों को आने से रोकने के लिए खिड़कियों और दरवाजों पर महीन जाली लगवाएं. इससे हवा भी आती रहेगी और मच्छर भी अंदर नहीं आएंगे. मच्छर भगाने वाले पौधे लगाएंतुलसी, लैवेंडर, पुदीना और सिट्रोनेला जैसे पौधों की खुशबू मच्छरों को दूर रखने में मदद करती है. इन्हें घर की बालकनी या खिड़की के पास लगाया जा सकता है. रात में मच्छरदानी का इस्तेमाल करेंसोते समय मच्छरदानी लगाना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह बहुत फायदेमंद होता है. इससे बिना किसी केमिकल के मच्छरों से बचाव होता है. घर की नियमित सफाई करेंघर के कोनों, पर्दों और फर्नीचर के पीछे धूल और गंदगी जमा न होने दें. साफ-सफाई रखने से मच्छरों के छिपने की जगह कम हो जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
इन 8 फलों में भरपूर विटामिन C, इम्यूनिटी मजबूत करने में बेहद असरदार, गर्मी में जमकर करें सेवन

Last Updated:May 04, 2026, 23:41 IST Best Vitamin C Fruits in Summer: गर्मियों के मौसम में शरीर को स्वस्थ और इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. इस दौरान ऐसे फलों का सेवन करना फायदेमंद रहता है, जिनमें विटामिन C भरपूर मात्रा में पाया जाता है. विटामिन C न सिर्फ शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाता है, बल्कि स्किन को भी हेल्दी और ग्लोइंग बनाता है. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने ऐसे 8 फलों के बारे में बताया है, जिन्हें गर्मियों में जरूर डाइट में शामिल करना चाहिए. संतरा विटामिन C का सबसे बेहतरीन सोर्स माना जाता है. यह शरीर को ताजगी देता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है. रोजाना संतरा खाने या उसका जूस पीने से कई तरह के संक्रमण का खतरा कम होता है. इससे शरीर में भरपूर एनर्जी भी बनी रहती है. नींबू छोटा सा फल है, लेकिन इसके फायदे बड़े हैं. इसमें विटामिन C के साथ एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं. गर्मियों में नींबू पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और इम्यूनिटी भी बेहतर होती है. आंवला को विटामिन C का पावरहाउस कहा जाता है. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को तेजी से बढ़ाता है और पाचन को भी सुधारता है. आंवला जूस या मुरब्बा के रूप में भी लिया जा सकता है, जिससे शरीर को कई तरह के पोषक तत्व मिलते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google कीवी ऐसा फ्रूट है, जिसमें विटामिन C के साथ-साथ फाइबर और पोटैशियम भी अच्छी मात्रा में होते हैं. यह शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करता है और स्किन के लिए भी फायदेमंद होता है. नियमित रूप से कीवी खाने से इम्यून सिस्टम मजबूत बना रहता है. पपीता भी विटामिन C का अच्छा सोर्स होता है और यह पाचन के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद एंजाइम्स पेट को साफ रखने में मदद करते हैं. गर्मियों में पपीता खाने से शरीर हल्का महसूस करता है और इम्यूनिटी भी बढ़ती है. स्ट्रॉबेरी स्वाद में मीठी और हल्की खट्टी होती है, लेकिन इसमें विटामिन C भरपूर मात्रा में होता है. यह शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स बढ़ाती है और त्वचा को हेल्दी बनाती है. इसे स्नैक या स्मूदी के रूप में भी खाया जा सकता है. अनानास एक स्वादिष्ट फल है, जिसमें विटामिन C के साथ ब्रोमेलिन नामक एंजाइम होता है. यह पाचन सुधारने और सूजन कम करने में मदद करता है. गर्मियों में अनानास खाने से शरीर को ठंडक मिलती है और इम्यूनिटी मजबूत होती है. अमरूद भी विटामिन C से भरपूर फल है, जो सस्ती कीमत में आसानी से मिल जाता है. यह शरीर को संक्रमण से बचाने के साथ-साथ पाचन और त्वचा के लिए भी फायदेमंद होता है. नियमित रूप से अमरूद खाने से शरीर स्वस्थ और मजबूत बना रहता है.








