मिडिल ईस्ट में शुरू हो सकती है एक नई जंग:सऊदी अरब का यमन की राजधानी सना पर हमला, हूती ने शुरू की समुद्री नाकेबंदी

28 फरवरी को जब अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू हुई थी, तभी माना जा रहा था कि इसमें ईरान के सहयोगी हूती विद्रोही भी कूद सकते हैं। करीब पांच महीने बाद वही आशंका सच साबित होती दिख रही है। पिछले एक हफ्ते में हूतियों ने सऊदी अरब और रेड सी में जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए हैं। जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने भी हूती ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। यानी करीब चार साल से किसी तरह टला हुआ यमन का युद्ध फिर भड़कने की कगार पर है। हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है, जबकि दोनों तरफ से हमले लगातार बढ़ रहे हैं। इससे मिडिल ईस्ट में एक नई जंग शुरू होने का खतरा बढ़ गया है। हूती और सऊदी के बीच विवाद की शुरुआत हूती और सऊदी के बीच ताजा विवाद 13 जुलाई को शुरू हुआ। दरअसल, कुछ हूती नेता अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल होने के बाद ईरान से यमन लौट रहे थे। लेकिन यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने इस प्लेन को सना एयरपोर्ट पर उतरने ही नहीं दिया। यमन सरकार का कहना था कि हूती अधिकारी यमन की राष्ट्रीय एयरलाइन से ही वापस लौटें। उन्हें ईरान की एयरलाइन में आने नहीं दिया जाएगा। वहीं हूती ईरानी विमान को सीधे सना में उतारने पर अड़े रहे। इसके बाद सरकार समर्थित फोर्स ने सना एयरपोर्ट के रनवे को बम से उड़ा दिया, ताकि ईरानी विमान वहां उतर न सके। नतीजतन, हूती नेताओं वाला प्लेन सना एयरपोर्ट पर उतर ही नहीं सका। प्लेन ने अपना रास्ता बदलकर हूदैदाह एयरपोर्ट पर लैंडिंग की, जो हूतियों के कंट्रोल में है। इस घटना के बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। शुरुआत में ईरान जंग से दूर रहे हूती विद्रोही फरवरी में जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, तब हूती विद्रोही सीधे इस लड़ाई में उतरने से बचते दिखे। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने के बाद उनका रुख बदल गया। कई विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने हूतियों पर जंग में सक्रिय भूमिका निभाने का दबाव बनाया। हालांकि उनका कहना है कि इससे सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि हूतियों को भी फायदा है। वे इस मौके का इस्तेमाल यमन में अपनी राजनीतिक पकड़ और ताकत बढ़ाने के लिए करना चाहते हैं। 4 साल से यमन-सऊदी के बीच जंग रूकी थी 2022 में हुए युद्धविराम के बाद यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच लड़ाई लगभग रुक गई थी। हालांकि इसका मतलब यह नहीं था कि दोनों पक्षों के बीच विवाद खत्म हो गया था। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में स्थायी शांति समझौते पर बातचीत भी शुरू हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। तनाव बना रहा, मगर दोनों पक्ष बड़े युद्ध से बचने की कोशिश करते रहे। अब अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद हालात तेजी से बदल गए हैं। पिछले कुछ हफ्तों में हूती और सऊदी अरब के बीच फिर टकराव बढ़ा है और चार साल पुराना युद्धविराम टूटने की कगार पर पहुंच गया है। हूती से जंग नहीं चाहता सऊदी अरब सऊदी अरब इस समय हूतियों के साथ फिर युद्ध नहीं चाहता। इसकी वजह पिछला संघर्ष है, जो करीब एक दशक तक चला। इस लड़ाई में सऊदी अरब ने अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन उसे कोई निर्णायक सफलता नहीं मिली। उल्टा उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा और युद्ध, भूख व बीमारियों की वजह से लाखों यमनियों की जान चली गई। दूसरी ओर, हूतियों को लगता है कि सऊदी अरब पर दबाव बढ़ाकर वे अपनी शर्तें मनवा सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, वे यमन के तेल से होने वाली कमाई में ज्यादा हिस्सा और देश की राजनीति में बड़ी भूमिका चाहते हैं। यमन मामलों के विशेषज्ञ फारिया अल-मुस्लिमी कहते हैं, हूतियों के लिए हर समस्या का एक ही जवाब है- युद्ध। वहीं सऊदी अरब हर समस्या को पैसे से सुलझाने की कोशिश करता है, जबकि हूती हथियारों से जवाब देते हैं। ईरान की मदद से मजबूत हुए हूती विद्रोही हूती कभी यमन के उत्तरी पहाड़ी इलाकों में सक्रिय शिया विद्रोहियों का एक छोटा समूह थे। उनका नारा था- “अमेरिका और इजराइल की मौत।” 2011 में ट्यूनीशिया से शुरू हुई अरब क्रांति की लहर यमन भी पहुंची। उस समय राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह करीब 33 साल से सत्ता में थे। युवाओं के प्रदर्शन की वजह से उनकी गद्दी छीन गई। फरवरी 2012 में अब्दरब्बू मंसूर हादी राष्ट्रपति बने। लेकिन उनकी सरकार कमजोर थी। हूती विद्रोहियों ने इसका फायदा उठाया और सितंबर 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को वहां से हटा दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि 2015 में राष्ट्रपति हादी को देश छोड़कर सऊदी अरब में शरण लेनी पड़ी। सऊदी ने 2015 में हूती के खिलाफ जंग शुरू की हादी के पद छोड़ने के बाद से यमन पर किसी एक सरकार का कंट्रोल नहीं रह गया। इससे पड़ोस के सऊदी अरब को खतरा महसूस हुआ क्योंकि हूती का समर्थन ईरान कर रहा था। ऐसे में सऊदी ने 2015 में आठ अरब देशों के साथ मिलकर सैन्य गठबंधन बनाया और हूतियों के खिलाफ जंग शुरू कर दी। इस गठबंधन का मकसद राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को फिर सत्ता में लाना था। करीब आठ साल तक लड़ाई के बाद सऊदी अरब को समझ आ गया कि सिर्फ सैन्य ताकत से हूतियों को हराना संभव नहीं है। इसके बाद उसने बातचीत का रास्ता अपनाया और सीधे हूती नेताओं से संपर्क शुरू किया। आज उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर हूतियों का नियंत्रण है। वहीं दक्षिणी यमन अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण में है, लेकिन वह आर्थिक और सैन्य मदद के लिए काफी हद तक सऊदी अरब पर निर्भर है। गाजा युद्ध ने बिगाड़ दिया शांति समझौता 2022 में युद्धविराम लागू होने के बाद पहली बार लगा कि यमन में स्थायी शांति लौट सकती है। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में सऊदी अरब और हूतियों के बीच समझौते पर बातचीत आगे बढ़ रही थी। दोनों पक्ष ऐसे फॉर्मूले पर काम कर रहे थे, जिससे वर्षों
भारत ने यूक्रेन के राजदूत को तलब किया:ब्लैक सी में जहाज पर हमले में भारतीय चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत

भारत ने ब्लैक सी में एक जहाज पर हुए हमले में भारतीय नाविक की मौत के मामले में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को तलब किया है। भारतीय नाविकों की यूनियनों ने हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। विदेश मंत्रालय ने इस मामले को यूक्रेन के सामने मजबूती से उठाया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जहाज एमवी ओमोर्फी पर 18 जुलाई को ब्लैक सी से गुजरते समय हमला हुआ था। मंत्रालय ने पिछले हफ्ते जारी एक बयान में कहा था कि यह हमला कथित तौर पर रूसी क्षेत्रीय जलक्षेत्र में हुआ। हमले के समय जहाज पर 10 क्रू मेंबर सवार थे। इनमें 3 भारतीय नागरिक थे। हमले में भारतीय क्रू मेंबर और चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत हो गई। जहाज पर मौजूद दो अन्य भारतीय क्रू मेंबर सुरक्षित बताए गए हैं। भारत ने हमले की निंदा की भारत ने जहाज पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कमर्शियल शिपिंग और नागरिक क्रू मेंबर पर हमले स्वीकार नहीं किए जा सकते। मंत्रालय ने सभी पक्षों से समुद्री आवाजाही की सुरक्षा सुनिश्चित करने और वैश्विक व्यापार के मुक्त प्रवाह को बनाए रखने की अपील की है। भारत का कहना है कि कमर्शियल शिपिंग रूट्स की सुरक्षा जरूरी है और नागरिक नाविकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला जहाज था एमवी ओमोर्फी एमवी ओमोर्फी मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला बल्क कैरियर है। इसे 2010 में बनाया गया था। यह उस क्षेत्र में संचालित हो रहा था, जहां रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच व्यापारी जहाजों पर बार-बार हमले हुए हैं। इस घटना ने ब्लैक सी क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों के सामने बढ़ते सुरक्षा जोखिम को भी सामने रखा है। भारतीय नाविक दुनिया की मर्चेंट नेवी में सबसे बड़े समूहों में शामिल हैं। भारतीय नाविकों और शिपिंग कंपनियों को एडवाइजरी भारतीय अधिकारियों ने नाविकों और शिपिंग कंपनियों को एडवाइजरी जारी कर ब्लैक सी या उसके आसपास के इलाकों में काम से पहले सुरक्षा जोखिमों का सावधानी से आकलन करने को कहा है। एडवाइजरी में नाविकों और शिपिंग कंपनियों को समुद्री मार्गों की पुष्टि करने, इंश्योरेंस कवरेज की जांच करने और इमरजेंसी प्रक्रियाओं को समझने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी असाइनमेंट को स्वीकार करने से पहले इन पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। हमले में यूक्रेनी ड्रोन के इस्तेमाल का आरोप भारतीय नाविकों की यूनियनों ने इस हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यूक्रेन की ओर से इस आरोप की पुष्टि का उल्लेख नहीं है। हमले की जिम्मेदारी और इसकी पूरी परिस्थितियों को लेकर उपलब्ध कॉपी में आगे की जानकारी नहीं दी गई है। भारत ने इससे पहले भी कमर्शियल शिपिंग लेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। नई दिल्ली लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि समुद्री रास्तों से होने वाले वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखा जाए और नागरिक नाविकों की सुरक्षा से किसी भी स्थिति में समझौता न हो।
भारत ने यूक्रेन के राजदूत को तलब किया:ब्लैक सी में जहाज पर हमले में भारतीय चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत

भारत ने ब्लैक सी में एक जहाज पर हुए हमले में भारतीय नाविक की मौत के मामले में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को तलब किया है। भारतीय नाविकों की यूनियनों ने हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। विदेश मंत्रालय ने इस मामले को यूक्रेन के सामने मजबूती से उठाया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जहाज एमवी ओमोर्फी पर 18 जुलाई को ब्लैक सी से गुजरते समय हमला हुआ था। मंत्रालय ने पिछले हफ्ते जारी एक बयान में कहा था कि यह हमला कथित तौर पर रूसी क्षेत्रीय जलक्षेत्र में हुआ। हमले के समय जहाज पर 10 क्रू मेंबर सवार थे। इनमें 3 भारतीय नागरिक थे। हमले में भारतीय क्रू मेंबर और चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत हो गई। जहाज पर मौजूद दो अन्य भारतीय क्रू मेंबर सुरक्षित बताए गए हैं। भारत ने हमले की निंदा की भारत ने जहाज पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कमर्शियल शिपिंग और नागरिक क्रू मेंबर पर हमले स्वीकार नहीं किए जा सकते। मंत्रालय ने सभी पक्षों से समुद्री आवाजाही की सुरक्षा सुनिश्चित करने और वैश्विक व्यापार के मुक्त प्रवाह को बनाए रखने की अपील की है। भारत का कहना है कि कमर्शियल शिपिंग रूट्स की सुरक्षा जरूरी है और नागरिक नाविकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला जहाज था एमवी ओमोर्फी एमवी ओमोर्फी मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला बल्क कैरियर है। इसे 2010 में बनाया गया था। यह उस क्षेत्र में संचालित हो रहा था, जहां रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच व्यापारी जहाजों पर बार-बार हमले हुए हैं। इस घटना ने ब्लैक सी क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों के सामने बढ़ते सुरक्षा जोखिम को भी सामने रखा है। भारतीय नाविक दुनिया की मर्चेंट नेवी में सबसे बड़े समूहों में शामिल हैं। भारतीय नाविकों और शिपिंग कंपनियों को एडवाइजरी भारतीय अधिकारियों ने नाविकों और शिपिंग कंपनियों को एडवाइजरी जारी कर ब्लैक सी या उसके आसपास के इलाकों में काम से पहले सुरक्षा जोखिमों का सावधानी से आकलन करने को कहा है। एडवाइजरी में नाविकों और शिपिंग कंपनियों को समुद्री मार्गों की पुष्टि करने, इंश्योरेंस कवरेज की जांच करने और इमरजेंसी प्रक्रियाओं को समझने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी असाइनमेंट को स्वीकार करने से पहले इन पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। हमले में यूक्रेनी ड्रोन के इस्तेमाल का आरोप भारतीय नाविकों की यूनियनों ने इस हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यूक्रेन की ओर से इस आरोप की पुष्टि का उल्लेख नहीं है। हमले की जिम्मेदारी और इसकी पूरी परिस्थितियों को लेकर उपलब्ध कॉपी में आगे की जानकारी नहीं दी गई है। भारत ने इससे पहले भी कमर्शियल शिपिंग लेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। नई दिल्ली लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि समुद्री रास्तों से होने वाले वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखा जाए और नागरिक नाविकों की सुरक्षा से किसी भी स्थिति में समझौता न हो।
पेंशनर्स के लिए काम की गाइड:पेंशन रुकने पर न हों परेशान; जानें 5 समस्याएं और उनका समाधान

रिटायरमेंट के बाद पेंशन सिर्फ हर महीने मिलने वाली राशि नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक सुरक्षा होती है। लेकिन पेंशन रुक जाए, जीवन प्रमाण-पत्र जमा न हो पाए, फैमिली पेंशन शुरू न हो, बैंक बार-बार दौड़ाए या राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) और एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को लेकर भ्रम हो जाए, तो अधिकांश पेंशनर्स समझ नहीं पाते कि किस कार्यालय या सरकारी व्यवस्था में जाएं। यहां जानिए पेंशन से जुड़ी 5 सबसे बड़ी परेशानियां और उनका कैसे समाधान मिलेगा। 1. सबसे पहले जानिए किस समस्या के लिए कहां जाएं गलत कार्यालय पहुंचना पेंशनधारकों की सबसे आम गलती होती है। सही जगह जाने से समय और परेशानी दोनों से बचते हैं। पेंशन रुकी: →बैंक और CPENGRAMS में जाएं। जीवन प्रमाण पत्र: →सीएससी/बैंक या डाकघर। एनपीएस: पेंशन निधि विनियामक विकास प्राधिकरण। ईपीएस-95: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन। रक्षा पेंशन: → स्पर्श (SPARSH) में संपर्क करें। बैंक की शिकायत: →पहले बैंक फिर आरबीआई की एकीकृत लोकपाल व्यवस्था में जा सकते हैं। 2. पेंशन रुकी, देर से आई या गलत कटौती हुई तो… यदि आपकी मासिक पेंशन रुक गई है, देर से आ रही है या बैंक ने गलत कटौती कर दी है, तो सबसे पहले संबंधित बैंक शाखा या पेंशन वितरण कार्यालय में लिखित शिकायत करें। अधिकांश मामलों का समाधान यहीं हो जाता है। क्या करें – समाधान नहीं मिलने पर केंद्रीकृत पेंशन शिकायत निवारण व निगरानी प्रणाली (CPENGRAMS) में ऑनलाइन शिकायत करें। यहां पर अपना पीपीओ नंबर, बैंक विवरण और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। 3. जीवन प्रमाण-पत्र जमा करने के लिए कहां जाएं अधिक उम्र, बीमारी या चलने-फिरने में परेशानी होने पर अब बैंक जाने की जरूरत नहीं है। सरकार ने डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई है। आप अपने घर पर बैठकर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। क्या करें: मोबाइल पर जीवन प्रमाण एप और फेस अथेंटिकेशन की मदद से यह सर्टिफिकेट ऑनलाइन तैयार कर जमा किया जा सकता है। यदि स्मार्टफोन चलाना कठिन लगता है तो सीएससी या बैंक मित्र की मदद ले सकते हैं। 4. फैमिली पेंशन शुरू नहीं हो रही या बैंक बदलना है… मृत्यु, विवाह प्रमाण-पत्र, आश्रित का आधार, पैन नंबर व बैंक खाता विवरण, मृतक का पीपीओ नंबर,नामांकन फॉर्म आदि दस्तावेज तैयार रखें। फिर संबंधित विभाग या बैंक में आवेदन दें। देरी होने पर निर्धारित शिकायत व्यवस्था का उपयोग करें। क्या करें? : दोनों तरह के मामले में पीपीओ नंबर व आधार सबसे महत्वपूर्ण हैं। देरी होने पर एल्डर 14567 या संबंधित विभाग या बैंक की हेल्पलाइन पर कॉल करें। पीपीओ नंबर सहित अन्य जानकारी के साथ शिकायत दर्ज कराएं। 5. NPS, UPS या APY समझ में नहीं आ रही… राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली, एकीकृत पेंशन योजना या अटल पेंशन योजना (एपीवाय) से जुड़े मामलों में पेंशन निधि विनियामक-विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के एआई चैटबॉट PFRDA पेंशन सहायक से सवाल पूछ सकते हैं। क्या करें? : PFRDA हेल्पलाइन 1800110708 पर सोमवार से शुक्रवार सुबह 9.30 से शाम 5.30 बजे के बीच बात कर सकते हैं। ईमेल: complaints@pfrda.org.in या वेबसाइट: www.pfrda.org.in →पर परेशानी बताएं। (एक्सपर्ट- डॉ. मनजीत सिंह पटेल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इंडिया एनपीएस एम्पलाइज फेडरेशन ∙ एससी जैन, जनरल सेक्रेटरी, एआईबीआरए)
चांदी ₹2,050 बढ़कर ₹2.25 लाख पर पहुंची:सोना ₹751 महंगा होकर ₹1.45 लाख का 10 ग्राम हुआ, इस साल ₹1.60 लाख तक जा सकता है

सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 27 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 2,050 रुपए बढ़कर 2.25 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 751 रुपए चढ़कर 1.45 लाख रुपए पर पहुंच गया है। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत सोर्स: goodreturns 27 जुलाई 2026 सोना इस साल ₹12 हजार महंगा हुआ इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 12 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.45 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 5 हजार रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.25 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल नोट:- सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत किलो में | सोर्स:- IBJA सोना इस साल 1.60 लाख तक जा सकता है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके
चांदी ₹2,050 बढ़कर ₹2.25 लाख पर पहुंची:सोना ₹751 महंगा होकर ₹1.45 लाख का 10 ग्राम हुआ, इस साल ₹1.60 लाख तक जा सकता है

सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 27 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 2,050 रुपए बढ़कर 2.25 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 751 रुपए चढ़कर 1.45 लाख रुपए पर पहुंच गया है। सोना इस साल ₹12 हजार महंगा हुआ इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 12 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.45 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 5 हजार रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.25 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। सोना इस साल 1.60 लाख तक जा सकता है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके
पुलिस ने स्टैंड-अप कॉमेडियन को बुरी तरह पीटा:बोले- पत्नी को लात मारी, पसलियां टूटीं; वीडियो जारी कर रौनक रजनी ने लगाए गंभीर आरोप

मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन रौनक रजनी के साथ मुंबई में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट में मारपीट हुई। उनकी पत्नी को भी मेल पुलिस ऑफिसर ने पीटा, जिससे उनकी पसली तक टूट गई है। कॉमेडियन ने अब पत्नी की रिपोर्ट और मारपीट के वीडियोज पोस्ट कर मुंबई पुलिस पर कई संगीन आरोप लगाए हैं। रौनक रजनी ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो जारी कर कहा है, प्रोटेस्ट की वजह से मेरी पत्नी की रिब टूट गई है। यह एक पुलिसवाले ने तोड़ी है। रौनक ने पत्नी की मेडिकल रिपोर्ट भी शेयर की। आगे उन्होंने कहा है, ‘22 जुलाई को 4 बजकर 47 मिनट पर मुझे और मेरी पत्नी को डीटेन किया गया था। पुलिस शिवाजी पार्क में चल रहे प्रोटेस्ट से लोगों को बेवजह उठा रही थी। हमें बेरहमी से धक्का देकर हटाया गया, जिससे मेरी गर्दन में मोच आई और मेरे रिब्स में दर्द उठ गया। हमने इसका बतंगड़ नहीं बनाया, क्योंकि लोगों के साथ इससे भी ज्यादा बर्बरता हुई, वो पुलिस की बेरहमी का शिकार हुए।’ आगे कॉमेडियन ने कहा, ‘हम दिल्ली वापस आ गए। उसका दर्द कम नहीं हो रहा था। हम डॉक्टर के पास गए, उन्होंने एक्स-रे की सलाह दी और उसे फ्रैक्चर निकला।’ वीडियो में आगे कॉमेडियन ने वो सारे फुटेज दिखाए, जिसमें उनके और पत्नी के साथ पुलिस मारपीट करती नजर आ रही है। कॉमेडियन ने बताया है कि विवाद तब शुरू हुआ, जब पुलिस कुछ शांत खड़े बच्चों को जबरदस्ती डीटेन कर रही थी। जब उन्होंने पुलिस को दूर से रोकने की कोशिश की तो एक पुलिसवाला उन्हें खींचने लगा। कॉमेडियन के साथ धक्का-मुक्की होते देख पत्नी पास आईं, उससे पहले कॉमेडियन को जमीन पर पटक दिया गया। कुछ देर बाद दोनों को जबरदस्ती धक्के देते हुए बस के अंदर किया गया, जहां एक पुलिसवाले ने कॉमेडियन की पत्नी को लात मारी। वीडियो में पुलिसवाला लात मारते हुए साफ नजर भी आया है। शेयर किए गए वीडियो में कॉमेडियन ने मुंबई पुलिस, राहुल गांधी, कॉकरोज जनता पार्टी, शिव सेना, कांग्रेस को भी टैग किया है। कौन हैं रौनक रजनी?
पुलिस ने स्टैंड-अप कॉमेडियन को बुरी तरह पीटा:बोले- पत्नी को लात मारी, पसलियां टूटीं; वीडियो जारी कर रौनक रजनी ने लगाए गंभीर आरोप

मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन रौनक रजनी के साथ मुंबई में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट में मारपीट हुई। उनकी पत्नी को भी मेल पुलिस ऑफिसर ने पीटा, जिससे उनकी पसली तक टूट गई है। कॉमेडियन ने अब पत्नी की रिपोर्ट और मारपीट के वीडियोज पोस्ट कर मुंबई पुलिस पर कई संगीन आरोप लगाए हैं। रौनक रजनी ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो जारी कर कहा है, प्रोटेस्ट की वजह से मेरी पत्नी की रिब टूट गई है। यह एक पुलिसवाले ने तोड़ी है। रौनक ने पत्नी की मेडिकल रिपोर्ट भी शेयर की। आगे उन्होंने कहा है, ‘22 जुलाई को 4 बजकर 47 मिनट पर मुझे और मेरी पत्नी को डीटेन किया गया था। पुलिस शिवाजी पार्क में चल रहे प्रोटेस्ट से लोगों को बेवजह उठा रही थी। हमें बेरहमी से धक्का देकर हटाया गया, जिससे मेरी गर्दन में मोच आई और मेरे रिब्स में दर्द उठ गया। हमने इसका बतंगड़ नहीं बनाया, क्योंकि लोगों के साथ इससे भी ज्यादा बर्बरता हुई, वो पुलिस की बेरहमी का शिकार हुए।’ आगे कॉमेडियन ने कहा, ‘हम दिल्ली वापस आ गए। उसका दर्द कम नहीं हो रहा था। हम डॉक्टर के पास गए, उन्होंने एक्स-रे की सलाह दी और उसे फ्रैक्चर निकला।’ वीडियो में आगे कॉमेडियन ने वो सारे फुटेज दिखाए, जिसमें उनके और पत्नी के साथ पुलिस मारपीट करती नजर आ रही है। कॉमेडियन ने बताया है कि विवाद तब शुरू हुआ, जब पुलिस कुछ शांत खड़े बच्चों को जबरदस्ती डीटेन कर रही थी। जब उन्होंने पुलिस को दूर से रोकने की कोशिश की तो एक पुलिसवाला उन्हें खींचने लगा। कॉमेडियन के साथ धक्का-मुक्की होते देख पत्नी पास आईं, उससे पहले कॉमेडियन को जमीन पर पटक दिया गया। कुछ देर बाद दोनों को जबरदस्ती धक्के देते हुए बस के अंदर किया गया, जहां एक पुलिसवाले ने कॉमेडियन की पत्नी को लात मारी। वीडियो में पुलिसवाला लात मारते हुए साफ नजर भी आया है। शेयर किए गए वीडियो में कॉमेडियन ने मुंबई पुलिस, राहुल गांधी, कॉकरोज जनता पार्टी, शिव सेना, कांग्रेस को भी टैग किया है। कौन हैं रौनक रजनी?
इलेक्ट्रिक की जगह हाइब्रिड प्लेन का दौर क्यों शुरू:विमानों की भारी बैटरियां बनीं अड़चन; कम लागत और लंबी दूरी के लिए हाइब्रिड तकनीक बेहतर

वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 2.5% की हिस्सेदारी रखने वाला एविएशन सेक्टर बड़े बदलाव से गुजर रहा है। पायलट ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल हो रहे पिपिस्ट्रेल के इलेक्ट्रिक प्लेन ‘वेलिस इलेक्ट्रो’ ने कम मेंटेनेंस लागत और जीरो कार्बन उत्सर्जन से उम्मीदें तो जगाई हैं, लेकिन सीमित रेंज और भारी बैटरियों की चुनौती के कारण अब इस इंडस्ट्री का मुख्य फोकस ‘हाइब्रिड टेक्नोलॉजी’ पर शिफ्ट हो रहा है। लंदन के फार्नबोरो एयर शो में आई एविएशन कंपनियों का इस नए ट्रेंड पर फोकस रहा। अमेरिकी समूह ‘टेक्स्ट्रॉन’ के स्वामित्व वाली पिपिस्ट्रेल का यह विमान आपातकालीन समय को छोड़कर अधिकतम 50 मिनट ही उड़ सकता है। सीमित रेंज के बावजूद फ्लाइंग स्कूलों के बीच इसकी मांग बढ़ रही है। ‘नेबोएयर’ जैसी कंपनियां चार्जिंग स्टेशन का नेटवर्क विकसित कर रही हैं। ऑटो इंडस्ट्री में हो रहे सुधारों से भविष्य में रेंज बढ़ाने के लिए इसकी बैटरियों को नए वर्जन से बदला जा सकेगा। हालांकि, बड़ी संख्या में यात्रियों को लंबी दूरी तक ले जाने के लिए बैटरियों का पर्याप्त शक्तिशाली या हल्का होना असंभव है। ऐसे में इंडस्ट्री का फोकस हाइब्रिड प्लेन की तरफ झुक रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक पूरी तरह इलेक्ट्रिक प्लेन के मुकाबले हाइब्रिड मॉडल कमर्शियल एविएशन के लिए अधिक व्यावहारिक हैं। हार्ट एयरोस्पेस और जीई-नासा जैसे दिग्गज अब टर्बोप्रॉप और इलेक्ट्रिक मोटर के संयोजन पर काम कर रहे हैं। इससे क्षेत्रीय उड़ानों में ईंधन खपत व परिचालन लागत 40% तक घट सकती है। कैलिफोर्नियाई कंपनी ने बनाया 30 सीटों वाला हाइब्रिड प्लेन – हार्ट एयरोस्पेस – कैलिफोर्निया की यह कंपनी 30 सीटों वाला हाइब्रिड विमान बना रही है। यह बैटरी पर 200 किमी और हाइब्रिड मोड में 800 किमी उड़ सकता है। इसमें सीरीज हाइब्रिड सेटअप है, जहां प्रोपेलर हमेशा इलेक्ट्रिक मोटर से घूमते हैं और गैस टर्बाइन जनरेटर के रूप में बिजली देता है। ईंधन की खपत 50% तक घट सकती है। – जीई एयरोस्पेस और नासा – नासा और जीई एयरोस्पेस ने ‘फार्नबोरो इंटरनेशनल एयर शो’ के दौरान हाइब्रिड इंजन साब 340बी उड़ान का सफल प्रदर्शन किया। हालिया परीक्षणों के दौरान यह 30,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर उड़ान भरने वाला दुनिया का पहला हाइब्रिड इलेक्ट्रिक-पावर्ड विमान बन चुका है। वर्टिकल टेक- ऑफ और लैंडिंग करने वाले इलेक्ट्रिक क्राफ्ट अब एयर टैक्सी और हेलीकॉप्टर के विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। वर्टिकल एयरोस्पेस ने इनकी रेंज बढ़ाने के लिए हाइब्रिड मॉडल पर काम शुरू कर दिया। इलेक्ट्रिक प्लेन आपात स्थिति में ज्यादा देर नहीं उड़ सकते पारंपरिक विमान उड़ते समय ईंधन जलने से हल्के होते जाते हैं, जबकि बैटरी का वजन हमेशा एक समान बना रहता है। साथ ही, हवाई नियमों के तहत रनवे उपलब्ध न होने या डायवर्जन की स्थिति के लिए अतिरिक्त ईंधन रखना अनिवार्य है। यदि किसी छोटे पैसेंजर विमान को भी कई घंटों के लिए उड़ाना हो, तो आवश्यक बैटरी इतनी भारी होगी कि यात्रियों या सामान के लिए जगह ही नहीं बचेगी। यही इलेक्ट्रिक विमानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में उद्योग अब हाइब्रिड विमानों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसमें इलेक्ट्रिक मोटर और गैस टर्बाइन इंजन दोनों का उपयोग होता है।
हर उम्र के आदमी ने गिरी हुई भाषा बोली:स्टूडेंट प्रोटेस्ट में अभद्र भाषा इस्तेमाल होने भड़के अनुपम खेर, कहा- प्रधानमंत्री पर कही गई बातें सुन मन व्यथित हुआ

स्टूडेंट प्रोटेस्ट खत्म होने के बाद सीनियर एक्टर अनुपम खेर ने प्रोटेस्ट में इस्तेमाल हुई भाषा की जमकर आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव किया है। उन्होंने कड़े शब्दों में मर्यादा न रखे जाने पर निंदा की और कहा कि हर वर्ग के इंसान ने शब्दों की मर्यादा तोड़ दी। अनुपम खेर ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो पोस्ट किया है। इसके कैप्शन में एक्टर ने लिखा है, ‘लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हमारी आवाज है। लेकिन उसकी सबसे बड़ी खूबसूरती हमारी भाषा है। असहमति जरूरी है। सवाल पूछना भी जरूरी है। सरकारों को जवाबदेह बनाना भी जरूरी है। लेकिन अगर हम अपनी भाषा की मर्यादा खो देंगे, तो हमारी बात की ताकत भी कम हो जाएगी। यह वीडियो किसी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में नहीं है। यह उस संस्कृति के पक्ष में है जहां विचारों का संघर्ष हो सकता है, लेकिन शब्दों का पतन नहीं। मतभेद रखें, लेकिन मर्यादा भी रखें। क्योंकि एक सभ्य समाज की पहचान केवल उसके विचारों से नहीं, बल्कि उन्हें व्यक्त करने के तरीके से भी होती है। जय हिन्द। वंदे मातरम।’ वीडियो में उन्होंने कहा, ‘आंदोलन खत्म हो गया, बहुत सी बातें स्पष्ट हो गईं। ये भी साबित हो गया कि छात्र अपनी बात ईमानदारी से रखता है, तो लोकतंत्र उसे सुनता है।’ आगे उन्होंने कहा, ‘इस पूरे आंदोलन में एक घटना ने हम सबको भीतर तक दुखी किया है। कैमरों के सामने मंचों के सामने जिस तरह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपमानजनक और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया गया, उसे देखकर मन व्यथित हुआ। ये किसी एक व्यक्ति का नहीं उस संस्कृति का प्रश्न है जिसे हम आने वाली पीढ़ी के लिए छोड़कर जाना चाहते हैं।’ आगे एक्टर ने कहा, ‘हम किसी भी नेता से असहमत हो सकते हैं, उनकी नीतियों की आलोचना कर सकते हैं, उनसे सवाल पूछ सकते हैं, यही लोकतंत्र की आत्मा है। लेकिन जब तर्क समाप्त हो जाते हैं और गालियां शुरू हो जाती हैं, तो बहस नहीं बचती, सिर्फ शोर बचता है। श्री नरेंद्र मोदी पिछले 30 सालों से सार्वजनिक जीवन में हैं, देश की जनता ने उन्हें बार-बार अपना विश्वास दिया है। हम उनके हर निर्णय से सहमत हों, ये आवश्यक नहीं है, लेकिन किसी भी निर्वाचित मंत्री के पद की गरिमा का सम्मान करना हम सबका दायित्व है।’ आगे अनुपम खेर कहते हैं, ‘दुख ये नहीं कि उनका विरोध हुआ। दुख इस बात का है कि विरोध की भाषा इतनी छोटी हो गई। ये केवल युवाओं तक सीमित नहीं था। हर वर्ग के लोग इस गिरती हुई भाषा का हिस्सा बने। जब बड़े ही मर्यादा भूल जाएं, तो आने वाली पीढ़ि से इसकी अपेक्षा कैसे कर सकते हैं। लोकतंत्र से सवाल अवश्य पूछे, लेकिन शब्दों को इतना गरीब न होने दें कि वो बात से पहले हमारा चरित्र बता दें, क्योंकि देश की पहचान लोगों और उनकी भाषा से होती है।’ कई सेलेब्स ने किया स्टूडेंट प्रोटेस्ट का समर्थन सलमान खान, प्रीति जिंटा, दीया मिर्जा समेत कई बड़े कलाकारों ने स्टूडेंट प्रोटेस्ट का खुलकर समर्थन किया, वहीं प्रकाश राज, शबाना आजमी, आएशा खान, इमरान खान, मुनव्वर फारूकी समेत कई सेलेब्स प्रोटेस्ट का हिस्सा भी बने। 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सामने आने के बाद कई सेलेब्स ने इसे लोकतंत्र की जीत कहा। आलिया भट्ट, शबाना आजमी, प्रकाश राज, प्रियंका चोपड़ा, स्वरा भास्कर, तिलोत्तमा शोम, भूमि पेडनेकर, हुमा कुरैशी, ईशान खट्टर, अभिषेक बनर्जी, वीर दास, समय रैना, विजय वर्मा, रीमा कागती और जोया अख्तर समेत कई कलाकारों ने सोशल मीडिया के जरिए छात्रों को बधाई दी। प्रकाश राज ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “मेरे प्यारे साथियों, आपको बहुत-बहुत बधाई। सोनम वांगचुक सर और उन सभी लोगों को भी बधाई, जो युवाओं के साथ मजबूती से खड़े रहे। आपने साबित कर दिया कि सरकार को भी घुटनों पर झुकाया जा सकता है।” वीर दास ने छात्रों के नाम संदेश लिखते हुए कहा, “आपने उस छोटी-सी बात को फिर से जीवित कर दिया, जिसे हम स्कूल की किताबों में पढ़कर भूल गए थे। प्यारे बच्चों, आगे चाहे जो भी हो, जीत आपकी है। अब जाइए और इस जीत का जश्न मनाइए।” कॉमेडियन समय रैना ने छात्रों के समर्थन में संक्षिप्त पोस्ट करते हुए लिखा, “छात्रों को और ताकत मिले।” उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। अभिषेक बनर्जी बोले- एकजुट रहेंगे तो मजबूत रहेंगे अभिनेता अभिषेक बनर्जी ने अपनी प्रोफाइल फोटो बदलते हुए लिखा, “मैंने अपनी प्रोफाइल फोटो बदल ली है। नई पीढ़ी को बहुत-बहुत बधाई। साथ ही एक बात हमेशा याद रखिए- अगर हम एकजुट रहेंगे तो मजबूत रहेंगे, बंट जाएंगे तो हार जाएंगे।” प्रियंका चोपड़ा ने नई पीढ़ी को बताया जीत का हकदार प्रियंका चोपड़ा ने भी इस घटनाक्रम पर खुशी जताई और अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए आंदोलन का नेतृत्व करने वाली नई पीढ़ी की तारीफ की। प्रियंका ने ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे की एक पोस्ट शेयर की, जिसमें लिखा था, “देशभर में 30 दिन तक चले छात्र आंदोलन और सोनम वांगचुक की 26 दिन की कठिन भूख हड़ताल के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया।” इस पोस्ट पर उन्होंने ताली बजाने वाला, भावुक चेहरा, काला चश्मा और लाल दिल वाला इमोजी लगाकर अपनी प्रतिक्रिया दी। इसके बाद प्रियंका ने इंडिया कल्चरल हब की एक और पोस्ट शेयर की, जिस पर लिखा था, “यह जीत नई पीढ़ी की है।” प्रियंका ने इसके बाद सोनम वांगचुक की एक तस्वीर भी अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर की। हालांकि, इस तस्वीर के साथ उन्होंने कुछ भी नहीं लिखा। आलिया बोलीं- Gen Z ने इतिहास रच दिया आलिया भट्ट ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, “जेन-जी सामने आई, बाकी इतिहास बन गया।” रीमा कागती और जोया अख्तर ने की छात्रों की तारीफ फिल्ममेकर रीमा कागती ने छात्रों की सराहना करते हुए लिखा, “जेन-जी, तुम उम्मीद की सुनामी हो।” वहीं जोया अख्तर ने लिखा, “लोकतंत्र वह शासन व्यवस्था है, जिसमें सत्ता जनता के हाथों में होती है।” भूमि, हुमा और ईशान ने बताया लोकतंत्र की जीत भूमि पेडनेकर ने कहा कि इस आंदोलन ने पूरे देश को प्रेरित किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे शिक्षा व्यवस्था समेत अन्य संस्थानों में भी व्यापक









