हर उम्र के आदमी ने गिरी हुई भाषा बोली:स्टूडेंट प्रोटेस्ट में अभद्र भाषा इस्तेमाल होने भड़के अनुपम खेर, कहा- प्रधानमंत्री पर कही गई बातें सुन मन व्यथित हुआ

स्टूडेंट प्रोटेस्ट खत्म होने के बाद सीनियर एक्टर अनुपम खेर ने प्रोटेस्ट में इस्तेमाल हुई भाषा की जमकर आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव किया है। उन्होंने कड़े शब्दों में मर्यादा न रखे जाने पर निंदा की और कहा कि हर वर्ग के इंसान ने शब्दों की मर्यादा तोड़ दी। अनुपम खेर ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो पोस्ट किया है। इसके कैप्शन में एक्टर ने लिखा है, ‘लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हमारी आवाज है। लेकिन उसकी सबसे बड़ी खूबसूरती हमारी भाषा है। असहमति जरूरी है। सवाल पूछना भी जरूरी है। सरकारों को जवाबदेह बनाना भी जरूरी है। लेकिन अगर हम अपनी भाषा की मर्यादा खो देंगे, तो हमारी बात की ताकत भी कम हो जाएगी। यह वीडियो किसी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में नहीं है। यह उस संस्कृति के पक्ष में है जहां विचारों का संघर्ष हो सकता है, लेकिन शब्दों का पतन नहीं। मतभेद रखें, लेकिन मर्यादा भी रखें। क्योंकि एक सभ्य समाज की पहचान केवल उसके विचारों से नहीं, बल्कि उन्हें व्यक्त करने के तरीके से भी होती है। जय हिन्द। वंदे मातरम।’ वीडियो में उन्होंने कहा, ‘आंदोलन खत्म हो गया, बहुत सी बातें स्पष्ट हो गईं। ये भी साबित हो गया कि छात्र अपनी बात ईमानदारी से रखता है, तो लोकतंत्र उसे सुनता है।’ आगे उन्होंने कहा, ‘इस पूरे आंदोलन में एक घटना ने हम सबको भीतर तक दुखी किया है। कैमरों के सामने मंचों के सामने जिस तरह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपमानजनक और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया गया, उसे देखकर मन व्यथित हुआ। ये किसी एक व्यक्ति का नहीं उस संस्कृति का प्रश्न है जिसे हम आने वाली पीढ़ी के लिए छोड़कर जाना चाहते हैं।’ आगे एक्टर ने कहा, ‘हम किसी भी नेता से असहमत हो सकते हैं, उनकी नीतियों की आलोचना कर सकते हैं, उनसे सवाल पूछ सकते हैं, यही लोकतंत्र की आत्मा है। लेकिन जब तर्क समाप्त हो जाते हैं और गालियां शुरू हो जाती हैं, तो बहस नहीं बचती, सिर्फ शोर बचता है। श्री नरेंद्र मोदी पिछले 30 सालों से सार्वजनिक जीवन में हैं, देश की जनता ने उन्हें बार-बार अपना विश्वास दिया है। हम उनके हर निर्णय से सहमत हों, ये आवश्यक नहीं है, लेकिन किसी भी निर्वाचित मंत्री के पद की गरिमा का सम्मान करना हम सबका दायित्व है।’ आगे अनुपम खेर कहते हैं, ‘दुख ये नहीं कि उनका विरोध हुआ। दुख इस बात का है कि विरोध की भाषा इतनी छोटी हो गई। ये केवल युवाओं तक सीमित नहीं था। हर वर्ग के लोग इस गिरती हुई भाषा का हिस्सा बने। जब बड़े ही मर्यादा भूल जाएं, तो आने वाली पीढ़ि से इसकी अपेक्षा कैसे कर सकते हैं। लोकतंत्र से सवाल अवश्य पूछे, लेकिन शब्दों को इतना गरीब न होने दें कि वो बात से पहले हमारा चरित्र बता दें, क्योंकि देश की पहचान लोगों और उनकी भाषा से होती है।’ कई सेलेब्स ने किया स्टूडेंट प्रोटेस्ट का समर्थन सलमान खान, प्रीति जिंटा, दीया मिर्जा समेत कई बड़े कलाकारों ने स्टूडेंट प्रोटेस्ट का खुलकर समर्थन किया, वहीं प्रकाश राज, शबाना आजमी, आएशा खान, इमरान खान, मुनव्वर फारूकी समेत कई सेलेब्स प्रोटेस्ट का हिस्सा भी बने। 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सामने आने के बाद कई सेलेब्स ने इसे लोकतंत्र की जीत कहा। आलिया भट्ट, शबाना आजमी, प्रकाश राज, प्रियंका चोपड़ा, स्वरा भास्कर, तिलोत्तमा शोम, भूमि पेडनेकर, हुमा कुरैशी, ईशान खट्टर, अभिषेक बनर्जी, वीर दास, समय रैना, विजय वर्मा, रीमा कागती और जोया अख्तर समेत कई कलाकारों ने सोशल मीडिया के जरिए छात्रों को बधाई दी। प्रकाश राज ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “मेरे प्यारे साथियों, आपको बहुत-बहुत बधाई। सोनम वांगचुक सर और उन सभी लोगों को भी बधाई, जो युवाओं के साथ मजबूती से खड़े रहे। आपने साबित कर दिया कि सरकार को भी घुटनों पर झुकाया जा सकता है।” वीर दास ने छात्रों के नाम संदेश लिखते हुए कहा, “आपने उस छोटी-सी बात को फिर से जीवित कर दिया, जिसे हम स्कूल की किताबों में पढ़कर भूल गए थे। प्यारे बच्चों, आगे चाहे जो भी हो, जीत आपकी है। अब जाइए और इस जीत का जश्न मनाइए।” कॉमेडियन समय रैना ने छात्रों के समर्थन में संक्षिप्त पोस्ट करते हुए लिखा, “छात्रों को और ताकत मिले।” उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। अभिषेक बनर्जी बोले- एकजुट रहेंगे तो मजबूत रहेंगे अभिनेता अभिषेक बनर्जी ने अपनी प्रोफाइल फोटो बदलते हुए लिखा, “मैंने अपनी प्रोफाइल फोटो बदल ली है। नई पीढ़ी को बहुत-बहुत बधाई। साथ ही एक बात हमेशा याद रखिए- अगर हम एकजुट रहेंगे तो मजबूत रहेंगे, बंट जाएंगे तो हार जाएंगे।” प्रियंका चोपड़ा ने नई पीढ़ी को बताया जीत का हकदार प्रियंका चोपड़ा ने भी इस घटनाक्रम पर खुशी जताई और अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए आंदोलन का नेतृत्व करने वाली नई पीढ़ी की तारीफ की। प्रियंका ने ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे की एक पोस्ट शेयर की, जिसमें लिखा था, “देशभर में 30 दिन तक चले छात्र आंदोलन और सोनम वांगचुक की 26 दिन की कठिन भूख हड़ताल के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया।” इस पोस्ट पर उन्होंने ताली बजाने वाला, भावुक चेहरा, काला चश्मा और लाल दिल वाला इमोजी लगाकर अपनी प्रतिक्रिया दी। इसके बाद प्रियंका ने इंडिया कल्चरल हब की एक और पोस्ट शेयर की, जिस पर लिखा था, “यह जीत नई पीढ़ी की है।” प्रियंका ने इसके बाद सोनम वांगचुक की एक तस्वीर भी अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर की। हालांकि, इस तस्वीर के साथ उन्होंने कुछ भी नहीं लिखा। आलिया बोलीं- Gen Z ने इतिहास रच दिया आलिया भट्ट ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, “जेन-जी सामने आई, बाकी इतिहास बन गया।” रीमा कागती और जोया अख्तर ने की छात्रों की तारीफ फिल्ममेकर रीमा कागती ने छात्रों की सराहना करते हुए लिखा, “जेन-जी, तुम उम्मीद की सुनामी हो।” वहीं जोया अख्तर ने लिखा, “लोकतंत्र वह शासन व्यवस्था है, जिसमें सत्ता जनता के हाथों में होती है।” भूमि, हुमा और ईशान ने बताया लोकतंत्र की जीत भूमि पेडनेकर ने कहा कि इस आंदोलन ने पूरे देश को प्रेरित किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे शिक्षा व्यवस्था समेत अन्य संस्थानों में भी व्यापक
इजराइली पीएम नेतन्याहू आज अमेरिका के लिए रवाना होंगे:जंग के बाद पहली बार ट्रम्प से मुलाकात करेंगे; ईरान-US ने हमले रोके

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सोमवार को अमेरिका रवाना होंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, वह मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रम्प से मुलाकात करेंगे। इसी दिन वह दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में भी शामिल होंगे। नेतन्याहू और ट्रम्प की यह मुलाकात फरवरी के बाद पहली आमने-सामने की बैठक होगी। दोनों नेताओं की आखिरी मुलाकात ईरान युद्ध शुरू होने से पहले हुई थी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। इजराइल को आशंका है कि तेहरान अपने हमलों का दायरा बढ़ाकर इजराइल को भी सीधे निशाना बना सकता है। इसी संभावना को देखते हुए इजराइल हाई अलर्ट पर है। इस बीच, ईरान और अमेरिका ने हमले रोक दिए है। दोनों देशों के बीच 3 दिनों से हमले बंद है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज के मुताबिक, ट्रम्प ने कूटनीतिक बातचीक का मौका देने के लिए फिलहाल हमले रोक दिए हैं। वहीं ईरान ने कहा कि अमेरिका की ओर से हमला नहीं होने के बाद उसने भी क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई रोक दी है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
हरियाणा के सिंगर बोले-E20 पेट्रोल से नई डिफेंडर खराब हुई:दावा- गाड़ी का फ्यूल पंप बदलवाना पड़ा; 8 महीने पहले ₹1.55 करोड़ में खरीदी

देशभर में पेट्रोल में 20% एथेनॉल (E20) को लेकर माइलेज कम होने, इंजन में खराबी और मेंटेनेंस खर्च बढ़ने जैसे दावे किए जा रहे हैं। इसी बीच, हरियाणा के रहने वाले पंजाबी सिंगर रेशम सिंह अनमोल का एक वीडियो चर्चा में है। वीडियो में वह 8 महीने पहले खरीदी अपनी करीब 1.55 करोड़ रुपए की नई डिफेंडर-110 के अचानक रास्ते में बंद होने का किस्सा शेयर कर रहे हैं। उनका कहना है कि गाड़ी को कंपनी के सर्विस सेंटर भेजा गया, जहां उन्हें बताया गया कि खराब पेट्रोल की वजह से उसका फ्यूल पंप खराब हो गया। रेशम सिंह अनमोल कहते हैं, “मैंने सामान्य पेट्रोल (E20) डलवाना बंद कर दिया है। अब तक छह-सात पेट्रोल पंपों पर जा चुका हूं, लेकिन कहीं भी हाई-स्पीड पेट्रोल XP95 या XP100 नहीं मिला। सरकार ऐसी लिस्ट जारी करे, जिससे लोगों को पता चल सके कि किन-किन पेट्रोल पंपों पर यह पेट्रोल उपलब्ध है, क्योंकि यह परेशानी सिर्फ मुझे नहीं, कई लोगों को हो रही है।” दैनिक भास्कर से बातचीत में रेशम सिंह अनमोल के भाई डॉ. निर्मल सिंह नकटपुर ने पुष्टि की कि यह वीडियो चार दिन पहले दिल्ली जाते समय बनाया गया था। उस दिन डिफेंडर में हाई-स्पीड पेट्रोल डलवाने में दिक्कत आई थी। अनमोल कई पेट्रोल पंपों पर गए, लेकिन उन्हें कहीं भी XP95 या XP100 पेट्रोल नहीं मिला। सबसे पहले जानिए VIDEO में रेशम सिंह अनमोन ने क्या कहा…. अब जानिए सिंगर के भाई ने दैनिक भास्कर को क्या बताया… बाढ़ के पानी में फिसल गई थी रेंज रोवर स्पोर्ट्स रेशम सिंह अनमोल के बड़े भाई और नंबरदार डॉ. निर्मल सिंह नकटपुर ने बताया कि पहले अनमोल के पास रेंज रोवर स्पोर्ट्स थी। साल 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान वह इसी गाड़ी से राहत और सेवा कार्य के लिए गए थे। गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक में एक दिन पेड़ की टहनी गाड़ी पर गिर गई। इसके कुछ दिन बाद गाड़ी फिसलकर बाढ़ के पानी में चली गई। नवंबर 2025 में 1.55 करोड़ रुपए में खरीदी नई गाड़ी नकटपुर ने बताया कि रेंज रोवर बेचने के बाद 7 नवंबर 2025 को अनमोल ने सफेद रंग की डिफेंडर-110 खरीदी। सभी खर्च मिलाकर इसकी कीमत करीब 1.55 करोड़ रुपए पड़ी। अनमोल को आमतौर पर ट्रैक्टर ज्यादा पसंद हैं, लेकिन यह गाड़ी उन्होंने बड़े शौक से खरीदी थी। शो पर जाते समय रास्ते में बंद हुई गाड़ी 27 मई 2026 को अनमोल अपनी टीम के साथ एक शो के लिए जा रहे थे। रास्ते में डिफेंडर चलते-चलते अचानक बंद हो गई। उन्होंने तुरंत कंपनी से संपर्क किया। कंपनी ने उन्हें एक घंटे तक गाड़ी स्टार्ट नहीं करने की सलाह दी। करीब एक घंटे बाद गाड़ी को दादा मोटर्स, चंडीगढ़ ले जाया गया। जांच में पता चला कि फ्यूल पंप खराब हो गया है, जिसे बाद में बदल दिया गया। जंतर-मंतर जाते समय नहीं मिला हाई-स्पीड पेट्रोल चार दिन पहले अनमोल छात्रों के जंतर-मंतर पर चल रहे धरने में समर्थन और सेवा देने के लिए चंडीगढ़ से दिल्ली जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने पांच पेट्रोल पंपों पर हाई-स्पीड पेट्रोल (XP100) तलाशा, लेकिन कहीं भी नहीं मिला। काफी परेशानी के बाद उन्होंने यह वीडियो रिकॉर्ड किया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कई राज्यों में शो, हर जगह आती है पेट्रोल की दिक्कत डॉ. निर्मल सिंह नकटपुर ने बताया कि अनमोल के पंजाब और हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में स्टेज शो होते हैं। यात्रा के दौरान अक्सर हाई-स्पीड या बेहतर गुणवत्ता वाला पेट्रोल नहीं मिल पाता। उनका मानना है कि यह समस्या सिर्फ उनके साथ नहीं, बल्कि कई अन्य लोगों के साथ भी हो रही होगी, इसलिए इसका समाधान निकाला जाना चाहिए। 8 देशों में कर चुके हैं शो, 70 गाने रिलीज रेशम सिंह अनमोल भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दुबई और मलेशिया में भी स्टेज शो कर चुके हैं। अब तक उनके 70 गाने रिलीज हो चुके हैं। उन्होंने यो यो हनी सिंह, बोहेमिया, रफ्तार, देसी क्रू, अफसाना खान, गुरलेज अख्तर और बंटी बैंस जैसे कलाकारों के साथ भी काम किया है। अक्टूबर में उनका न्यूजीलैंड और नवंबर में ऑस्ट्रेलिया का टूर प्रस्तावित है। इसके अलावा, वह अनमोल सेवा फाउंडेशन के जरिए सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहते हैं। इंफोग्राफिक्स से एथेनॉल के बारे में जानिए…
वित्त-मंत्री बोलीं- IT विभाग आम लोगों को परेशान न करे:अपनी ताकत से डराएं नहीं; आम जनता की भलाई के लिए काम करें

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स विभाग को आम जनता की भलाई के लिए काम करने की सख्त हिदायत दी है। उन्होंने अफसरों से कहा कि आम लोगों को अपने काम के लिए एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर के चक्कर न कटवाएं। सीतारमण रविवार, 26 जुलाई को मुंबई के नरीमन पॉइंट बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में 13 मंजिला ‘आयकर सिंधु’ इमारत का उद्घाटन करने पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने यह बातें कही हैं। 13 मंजिला इमारत के क्लीयरेंस का उदाहरण दिया वित्त मंत्री ने उद्घाटन समारोह के दौरान अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) अधिकारियों को खुद 1.13 लाख स्क्वायर फीट में बनी इस 13 मंजिला इमारत के निर्माण और अनुमतियों यानी क्लीयरेंस के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। सीतारमण ने अधिकारियों को याद दिलाया कि एक IRS अफसर के नाम के पीछे आयकर विभाग का नाम जुड़ा होता है, जो लोगों को डराने के लिए एक शक्तिशाली ताकत जैसा काम करता है। उन्होंने कहा कि जब इतनी पावरफुल बॉडी होने के बावजूद अफसरों को खुद अनुमतियां लेने के लिए दर-दर भटकना पड़ा, तो उन्हें समझ आना चाहिए कि एक आम नागरिक को किस तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि क्या यह अनुभव आपको उस आम नागरिक की स्थिति समझने के लिए प्रेरित कर सकता है जो आपके पास आता है? जहां आपके अधिकार की जरूरत है, वहां उन्हें दर-दर मत भटकाइए; उनके लिए काम कीजिए। सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे पर नाराजगी जताई वित्त मंत्री ने सरकारी विभागों के ढीले रवैये पर सार्वजनिक रूप से गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विभागों के ढीलेपन की वजह से ही सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण होते हैं। सीतारमण ने बताया कि नरीमन पॉइंट स्थित जिस जमीन पर ‘आयकर सिंधु’ इमारत बनाई गई है, वह जमीन आयकर विभाग के पास साल 1973 से मौजूद थी। इसके बावजूद इतने सालों में उस जमीन पर अवैध कब्जे हो गए। उन्होंने कहा कि हमारी संपत्ति का ध्यान रखना किसी की जिम्मेदारी थी, लेकिन जब अतिक्रमण हो जाता है तो हम बस यही कहते हैं कि हमारे पास जमीन तो है पर हम बना नहीं पा रहे हैं। यह दिखाता है कि हमारे सिस्टम में कितनी ढिलाई है। मुंबई में अधिकारियों के आवास और लंबी दूरी का मुद्दा वित्त मंत्री ने मुंबई और नवी मुंबई क्षेत्रों में अधिकारियों के सरकारी आवास में न रहने और दफ्तर पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करने की समस्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने संकेत दिया कि लगभग आधे अधिकारियों को सरकारी आवास की सुविधा नहीं मिल पाती है। सीतारमण ने वादा किया कि वे इस मुद्दे को देखेंगी और इसके लिए सरकार-से-सरकार जमीन ट्रांसफर को प्राथमिकता देंगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे जमीनों के इंस्टेंट ट्रांसफर की प्रोसेस को आसान बनाएंगी। CPWD और BSNL की जमीन को लेकर निर्देश दिए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि जमीन ट्रांसफर में मदद के बाद निर्माण से जुड़े काम अधिकारियों को खुद समय पर पूरे करने होंगे। इसमें CPWD (सेंट्रल पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट) से निपटना, अनुमतियां लेना, बिल्डिंग बनाना और कॉन्ट्रैक्ट व टेंडर आवंटित करना जैसे काम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी कामों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि 21वीं सदी के उत्तरार्ध में अलग-अलग बिखरे ऑफिस स्पेस और महंगे किराए के मकानों में न रहना पड़े। सीतारमण ने खासतौर पर सरकारी दूरसंचार कंपनी BSNL का जिक्र किया और अधिकारियों से कहा कि वे BSNL की जमीनों को प्राप्त करने की कोशिश करें। इसके लिए वे खुद संबंधित केंद्रीय मंत्री से बात करेंगी। अफसरों को दी ‘इंटीग्रिटी’ बनाए रखने की सलाह वित्त मंत्री ने कहा कि वे अधिकारियों से नियमों को तोड़ने या आम नागरिकों के लिए कुछ आउट-ऑफ-वे करने को नहीं कह रही हैं। हालांकि, उन्होंने दुख जताया कि इस देश में लोगों को अपने जायज हक और दावों को पाने के लिए भी बहुत मेहनत करनी पड़ती है। देश के लिए टैक्स कलेक्शन जैसे महत्वपूर्ण काम में ईमानदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए सीतारमण ने कहा कि इंटीग्रिटी यानी निष्ठा और ईमानदारी ही एकमात्र सिद्धांत है जिसकी मैं आप में से हर एक को सलाह दूंगी। ये खबर भी पढ़ें… टॉप-10 में 9 कंपनियों का मार्केट-कैप ₹2.74 लाख करोड़ घटा: HDFC बैंक टॉप लूजर रहा, वैल्यू ₹1.18 लाख करोड़ घटी; HUL की वैल्यू बढ़ी शेयर बाजार में गिरावट के रुख के बीच पिछले हफ्ते देश की टॉप-10 में से 9 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन में टोटल ₹2.74 लाख करोड़ से ज्यादा की गिरावट रही। इस गिरावट में HDFC बैंक को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 2,091.68 अंक (2.67%) गिरा, जबकि निफ्टी में 566.85 अंक (2.32%) की गिरावट आई। टॉप-10 की लिस्ट में से केवल हिंदुस्तान यूनिलीवर ही ऐसी कंपनी रही, जिसकी वैल्यूएशन बीते हफ्ते बढ़ी है। पूरी खबर पढ़ें….
वित्त-मंत्री बोलीं- IT विभाग आम लोगों को परेशान न करे:अपनी ताकत से डराएं नहीं; जनता की भलाई के लिए काम करें

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स विभाग को आम जनता की भलाई के लिए काम करने की सख्त हिदायत दी है। उन्होंने अफसरों से कहा कि आम लोगों को अपने काम के लिए एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर के चक्कर न कटवाएं। सीतारमण रविवार, 26 जुलाई को मुंबई के नरीमन पॉइंट बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में 13 मंजिला ‘आयकर सिंधु’ इमारत का उद्घाटन करने पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने यह बातें कही हैं। 13 मंजिला इमारत के क्लीयरेंस का उदाहरण दिया वित्त मंत्री ने उद्घाटन समारोह के दौरान अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) अधिकारियों को खुद 1.13 लाख स्क्वायर फीट में बनी इस 13 मंजिला इमारत के निर्माण और अनुमतियों यानी क्लीयरेंस के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। सीतारमण ने अधिकारियों को याद दिलाया कि एक IRS अफसर के नाम के पीछे आयकर विभाग का नाम जुड़ा होता है, जो लोगों को डराने के लिए एक शक्तिशाली ताकत जैसा काम करता है। उन्होंने कहा कि जब इतनी पावरफुल बॉडी होने के बावजूद अफसरों को खुद अनुमतियां लेने के लिए दर-दर भटकना पड़ा, तो उन्हें समझ आना चाहिए कि एक आम नागरिक को किस तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि क्या यह अनुभव आपको उस आम नागरिक की स्थिति समझने के लिए प्रेरित कर सकता है जो आपके पास आता है? जहां आपके अधिकार की जरूरत है, वहां उन्हें दर-दर मत भटकाइए; उनके लिए काम कीजिए। सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे पर नाराजगी जताई वित्त मंत्री ने सरकारी विभागों के ढीले रवैये पर सार्वजनिक रूप से गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विभागों के ढीलेपन की वजह से ही सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण होते हैं। सीतारमण ने बताया कि नरीमन पॉइंट स्थित जिस जमीन पर ‘आयकर सिंधु’ इमारत बनाई गई है, वह जमीन आयकर विभाग के पास साल 1973 से मौजूद थी। इसके बावजूद इतने सालों में उस जमीन पर अवैध कब्जे हो गए। उन्होंने कहा कि हमारी संपत्ति का ध्यान रखना किसी की जिम्मेदारी थी, लेकिन जब अतिक्रमण हो जाता है तो हम बस यही कहते हैं कि हमारे पास जमीन तो है पर हम बना नहीं पा रहे हैं। यह दिखाता है कि हमारे सिस्टम में कितनी ढिलाई है। मुंबई में अधिकारियों के आवास और लंबी दूरी का मुद्दा वित्त मंत्री ने मुंबई और नवी मुंबई क्षेत्रों में अधिकारियों के सरकारी आवास में न रहने और दफ्तर पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करने की समस्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने संकेत दिया कि लगभग आधे अधिकारियों को सरकारी आवास की सुविधा नहीं मिल पाती है। सीतारमण ने वादा किया कि वे इस मुद्दे को देखेंगी और इसके लिए सरकार-से-सरकार जमीन ट्रांसफर को प्राथमिकता देंगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे जमीनों के इंस्टेंट ट्रांसफर की प्रोसेस को आसान बनाएंगी। CPWD और BSNL की जमीन को लेकर निर्देश दिए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि जमीन ट्रांसफर में मदद के बाद निर्माण से जुड़े काम अधिकारियों को खुद समय पर पूरे करने होंगे। इसमें CPWD (सेंट्रल पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट) से निपटना, अनुमतियां लेना, बिल्डिंग बनाना और कॉन्ट्रैक्ट व टेंडर आवंटित करना जैसे काम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी कामों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि 21वीं सदी के उत्तरार्ध में अलग-अलग बिखरे ऑफिस स्पेस और महंगे किराए के मकानों में न रहना पड़े। सीतारमण ने खासतौर पर सरकारी दूरसंचार कंपनी BSNL का जिक्र किया और अधिकारियों से कहा कि वे BSNL की जमीनों को प्राप्त करने की कोशिश करें। इसके लिए वे खुद संबंधित केंद्रीय मंत्री से बात करेंगी। अफसरों को दी ‘इंटीग्रिटी’ बनाए रखने की सलाह वित्त मंत्री ने कहा कि वे अधिकारियों से नियमों को तोड़ने या आम नागरिकों के लिए कुछ आउट-ऑफ-वे करने को नहीं कह रही हैं। हालांकि, उन्होंने दुख जताया कि इस देश में लोगों को अपने जायज हक और दावों को पाने के लिए भी बहुत मेहनत करनी पड़ती है। देश के लिए टैक्स कलेक्शन जैसे महत्वपूर्ण काम में ईमानदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए सीतारमण ने कहा कि इंटीग्रिटी यानी निष्ठा और ईमानदारी ही एकमात्र सिद्धांत है जिसकी मैं आप में से हर एक को सलाह दूंगी। ये खबर भी पढ़ें… टॉप-10 में 9 कंपनियों का मार्केट-कैप ₹2.74 लाख करोड़ घटा: HDFC बैंक टॉप लूजर रहा, वैल्यू ₹1.18 लाख करोड़ घटी; HUL की वैल्यू बढ़ी शेयर बाजार में गिरावट के रुख के बीच पिछले हफ्ते देश की टॉप-10 में से 9 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन में टोटल ₹2.74 लाख करोड़ से ज्यादा की गिरावट रही। इस गिरावट में HDFC बैंक को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 2,091.68 अंक (2.67%) गिरा, जबकि निफ्टी में 566.85 अंक (2.32%) की गिरावट आई। टॉप-10 की लिस्ट में से केवल हिंदुस्तान यूनिलीवर ही ऐसी कंपनी रही, जिसकी वैल्यूएशन बीते हफ्ते बढ़ी है। पूरी खबर पढ़ें….
लौकी-सोयाबीन का चीला रेसिपी: मिनटों में लौकी और सोयाबीन का चीला, हाई इंट्रोडक्शन से करें दिन की शुरुआत, नोट करें विधि

सामग्री के लिए लौकी-सोयाबीन चीला: 1 कपसोयाबीन, 1 लोकी, 1 हरी मिर्च, 1 छोटा टुकड़ा अदरक, हरा धनिया, ½ छोटा मक्खन जीरा, ¼ छोटा मक्खन हल्दी, ½ छोटा मक्खन लाल मिर्च पाउडर, स्वाद मसाला, तेल या घी छवि: इंस्टाग्राम बनाने की विधि: सबसे पहले भीगी हुई सोयाबीन का पानी उसे भूखा और सीधे से पानी के साथ प्लास्टिक में पीस लें। तैयार पेस्ट को एक बड़े बाउल में डाला गया। छवि: फ्रीपिक इसमें कद्दू की हुई लौकी, हरी मिर्च, हरा धनिया, जीरा, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और नमक के टुकड़े अच्छी तरह मिला लें।अगर बैटर बहुत सारे एसेट में लगे तो थोड़ा-सा पानी चिली जैसा नासा तैयार करें। छवि: इंस्टाग्राम अब तवा गर्म करें और प्रभाव-सा तेल का कपड़ा। एक कलछी बैटर मैनुअल गोल आकार में फैला हुआ। मध्यम किनारे पर दोनों तरफ से सोनार और कुरकुरा होने तक सेंक लें। इसी तरह बाकी सभी चीले तैयार कर लें। छवि: एआई गरमा-गरम लौकी और सोयाबीन चीला हरी धनिया की चटनी, दही, टमाटर की चटनी या पुदीने की चटनी के साथ बनाएं। फ़्लोरिडा तो इसके साथ एक कटोरी दही या कीक भी सर्व करें, जिससे स्टान्ट और भी नैमित्तिक बन जायेंगे। छवि: एआई हाई प्रोटीन होने के कारण लंबे समय तक पेट भरा रहता है। लॉकी बॉडी को गोदाम में रखने में मदद मिलती है। वनस्पति से भरपूर होना की वजह से पाचन के लिए अच्छा माना जाता है। छवि: एआई सोयाबीन और लोकी का चीला जल्दी तैयार हो जाता है, इसलिए सुबह-सुबह के लिए परफेक्ट रेसिपी है। बच्चों और बड़ों दोनों के लिए स्वादिष्ट और स्वादिष्ट विकल्प हैं। छवि: एआई अगर आप अपने दिन की शुरूआती स्टेक और टेस्टी प्रोजेक्ट से करना चाहते हैं, तो लोकी सोयाबीन और का यह चीला जरूर ट्राई करें। इसे एक बार बनाने के बाद आपकी यह फेवरेट ब्रेकफ़ास्ट रेसिपी बन सकती है। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)लौकी-सोयाबीन चीला(टी)लौकी का चिल्ला(टी)सोयाबीन का चिल्ला(टी)लौकी सोयाबीन का चिल्ला(टी)हाई प्रोटीन रेसिपी(टी)ब्रेकफास्ट रेसिपी(टी)स्वस्थ नाश्ता(टी)लौकी(टी)चीला रेसिपी(टी)सोयाबीन लौकी चीला रेसिपी
'बेटी पढ़ाने से पहले दादा-दादी और नाना-नानी को पढ़ाना पड़ेगा':एक्ट्रेस नीना गुप्ता बोलीं- लड़कियों की जिंदगी नहीं बदली, 98% घरों में आज भी घूंघट

बॉलीवुड एक्ट्रेस नीना गुप्ता ने कहा कि समाज में महिलाओं की स्थिति को लेकर जितनी बातें की जाती हैं, असलियत उससे कहीं अलग है। आज भी देश के अधिकांश घरों में लड़कियों के लिए सोच नहीं बदली है। उन्होंने कहा कि बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का नारा देने से पहले दादा-दादी और नाना-नानी को पढ़ाओ वाला काम करना होगा, तभी बेटी सच में बचेगी। नीना गुप्ता ने यह बात जयपुर के होटल ललित में आयोजित ‘डायलॉग ऑन मेंटल वेलनेस’ कार्यक्रम में कही। इस दौरान उन्होंने अपनी आत्मकथा सच कहूं तो, परिवार, महिलाओं की स्थिति, पालन-पोषण, रिश्तों, मानसिक स्वास्थ्य और अपने जीवन के अनुभवों पर खुलकर बात की। मेरे पास काम नहीं था तो कोई भी मेरे बारे में कुछ भी लिख देता था नीना गुप्ता ने कहा कि अपनी आत्मकथा लिखने का विचार करीब 25 साल पहले आया था। शुरू में जब मेरे पास काम नहीं था, तब मेरी कोई वैल्यू नहीं थी, तो कोई भी मेरे बारे में कुछ भी लिख देता था। तब मुझे लगा कि किसी को पता ही नहीं कि मैं असल में कैसी हूं। इसलिए मैंने सोचा कि मैं खुद लिखूंगी कि मैं वास्तव में कैसी हूं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्होंने किताब लिखने के लिए एडवांस भी ले लिया था, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाई। मैं मम्मी, पापा, भाई और उनका परिवार के बारे में लिखना चाहती थी। उन्होंने पूरी जिंदगी अपनी सच्चाई छिपाकर रखी थी। मुझे लगा कि मुझे उनकी जिंदगी सामने लाने का अधिकार नहीं है। जब भी लिखना शुरू करती, सोचती कि मम्मी को बुरा लगेगा, पापा को बुरा लगेगा, भाई को बुरा लगेगा और मैं रुक जाती थी। ‘कोविड में हिम्मत आई, क्योंकि अब किसी का डर नहीं था’ उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान जब वह छह महीने अपने पहाड़ी घर में रहीं, तब जाकर किताब पूरी हो सकी। तब तक मेरे परिवार के लगभग सभी लोग इस दुनिया से जा चुके थे। तब मुझे किसी का डर नहीं था। क्योंकि हम सबसे ज्यादा अपने लोगों से ही डरते हैं। मैं तो भगवान से ज्यादा अपनी बेटी से डरती हूं। नीना ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी किताब में भी सब कुछ नहीं लिखा। उन्होंने कहा कि मैंने झूठ नहीं लिखा, लेकिन सब कुछ भी नहीं लिखा। कुछ लोगों के बारे में बातें छिपा दीं क्योंकि लगा कि वह मेरी बेटी मसाबा, मेरे पति या कुछ दूसरे लोगों के लिए ठीक नहीं होगा। मैं किसी से बदला नहीं लेना चाहती थी। मेरे पास मौका था कि जिन लोगों ने मेरे साथ गलत किया, उनके बारे में लिखूं, लेकिन मैंने खुद को रोका। उन्होंने हंसते हुए कहा कि प्रकाशक के वकीलों ने तो उन्हें लगभग सभी लोगों के नाम तक बदलने के लिए कह दिया था। ‘भगवान से लड़ती भी हूं और धन्यवाद भी देती हूं’ मानसिक स्वास्थ्य पर बात करते हुए नीना ने कहा कि वह अपना मन भगवान के सामने खोल देती हैं। मैं दिन में कम से कम दस बार भगवान को धन्यवाद कहती हूं। जब रात को अपनी सफेद चादर पर लेटती हूं तो सबसे पहले ‘थैंक यू’ बोलती हूं। और जब गुस्सा आता है तो भगवान को डांटती भी हूं। कोई तो ताकत है जो मुझसे बड़ी है। मैं उसी से बात करती हूं। महिलाओं की स्थिति पर उन्होंने कहा कि शहरों में थोड़ा बदलाव जरूर दिखता है, लेकिन गांवों और छोटे कस्बों में हालात अब भी पहले जैसे हैं। हम लोग शायद एक-दो प्रतिशत आबादी की बात कर रहे हैं। बाकी जगह आज भी घूंघट है, पैर छूना है, सेवा करना है। बहुत कुछ नहीं बदला है। पंचायत वेबसीरीज का सुनाया किस्सा नीना ने पंचायत की शूटिंग के दौरान मध्य प्रदेश के एक गांव का अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि मैंने एक लड़की से पूछा कि क्या पढ़ती हो? उसकी मां बोली- पढ़ तो रही है, लेकिन 18 साल की होते ही शादी कर देंगे। फिर घूंघट करेगी, घर संभालेगी, बच्चे पैदा करेगी। यह आज भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि केवल बेटी को पढ़ाने से बदलाव नहीं आएगा। मैंने अपनी एक दोस्त से कहा कि ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ से पहले दादा-दादी और नाना-नानी को पढ़ाओ। जब तक उनकी सोच नहीं बदलेगी, बेटी पढ़ भी जाएगी तो उससे कहा जाएगा कि अब बर्तन मांजो। ‘बच्चों पर गुस्सा नहीं, प्यार से बात कीजिए’ उन्होंने अपनी बेटी मसाबा के साथ रिश्ते का जिक्र करते हुए कहा कि समय के साथ उन्होंने खुद भी बहुत कुछ सीखा। पहले मैं कहती थी- नहीं जाना है तो नहीं जाना है। फिर जवाब मिलता था- मैं तो जाऊंगी। बाद में समझ आया कि अगर वही बात प्यार से कहूं कि बेटा, मुझे यह ठीक नहीं लग रहा… बाकी फैसला तुम्हारा है, तो वह खुद सोचती थी। उन्होंने कहा कि बच्चे वही सीखते हैं जो माता-पिता करते हैं। एक दिन मैंने बेटी से कहा कि चिल्लाओ मत। उसने जवाब दिया- आप भी तो चिल्लाती हैं। तब समझ आया कि बच्चे वही दोहराते हैं जो हमें करते हुए देखते हैं। ‘मेरा फोकस काम से हटकर रिश्तों पर चला गया’ कार्यक्रम में अपने करियर को लेकर उन्होंने खुलकर आत्ममंथन किया। उन्होंने कहा कि अगर मेरा फोकस सही रहता तो मैं और ऊंचाई तक पहुंच सकती थी। एक समय ऐसा आया जब मेरा ध्यान काम से ज्यादा एक अच्छे जीवनसाथी की तलाश पर चला गया। मुझे लगता है कि यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी। महिलाओं का फोकस कई बार करियर से हटकर पति ढूंढने पर चला जाता है। अर्जुन की तरह अगर सिर्फ लक्ष्य पर नजर रहे तो मंजिल जरूर मिलती है। ‘आज की पीढ़ी बहुत कन्फ्यूज है’ युवाओं की मानसिक स्थिति पर उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी सबसे ज्यादा भ्रम में है। मैं बहुत सारी युवा लड़कियों के साथ काम कर रही हूं। वे कहती हैं कि अच्छे लड़के नहीं मिलते। डेटिंग ऐप्स पर जा रही हैं, लेकिन वहां भी परेशान हैं। दूसरी तरफ लड़के भी यही कहते होंगे कि अच्छी लड़कियां नहीं मिलतीं। यह पीढ़ी बहुत कन्फ्यूज है। घर में पुराने विचार हैं और बाहर बहुत आधुनिक सोच। ऐसे में उन्हें समझ नहीं आता कि सही क्या है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि
PAK की लेडी अफसर पंजाबी गानों की शौकीन:सोशल मीडिया पर एक्टिव; सिद्धू मूसेवाला, आर-नैत, रंजीत बावा के गानों पर रील्स बनाईं

पाकिस्तान की सीनियर पुलिस अधिकारी डॉ. अनूश मसूद चौधरी पंजाबी गानों की बड़ी फैन हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर सिद्धू मूसेवाला के ईस्ट साइड फ्लो, रंजीत बावा के शेर मारना, गुर सिद्धू के 8 पर्चे, आर नेत के दबदा किथे आ जैसे गानों पर कई रील्स बनाई हैं। पेशावर की रहने वाली डॉ. अनूश फिलहाल पाकिस्तान के पंजाब एलीट पुलिस में डिप्टी डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन) के पद पर तैनात हैं। वह सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं। उनके फेसबुक अकाउंट पर करीब 2.5 लाख फॉलोअर्स हैं। डॉ. अनूश साल 2018 में खैबर पख्तूनख्वा की पहली महिला SSP बनी थीं। उस समय उनकी कार्यशैली के साथ-साथ उनकी खूबसूरती की काफी चर्चा हुई थी। इसके बाद वह लाहौर की भी SSP बनीं। डॉ. अनूश इंडियन म्यूजिक को खास पसंद करती हैं। उन्होंने पंजाबी के साथ हरियाणवी और बॉलीवुड गानों पर रील्स बनाई हैं। जानिए कौन है डॉ. अनूश मसूद चौधरी… पेरेंट्स डॉक्टर बनाना चाहते थे एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में डॉ. अनूश मसूद चौधरी ने बताया था- पेरेंट्स का सपना था कि मैं डॉक्टर बनूं। मैंने MBBS भी पूरी कर ली थी। मगर, पिता के मौत के बाद सब बदल गया। परिवार वाले चाहते थे कि मैं डॉक्टर बनकर विदेश सैटल हो जाऊं, लेकिन मैं पाकिस्तान में ही रहकर जनता की सेवा करना चाहती थी। इसके मैंने सेंट्रल सुपीरियर सर्विसेज (CSS) का फील्ड चुना। ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… पंजाबी सिंगर करनदीप को आया हार्ट अटैक:खुद VIDEO शेयर किया, बोले- जिम जाता हूं, फिर भी दिल-दिमाग ने काम करना बंद कर दिया पंजाबी सिंगर, एक्टर, मॉडल और फिटनेस इन्फ्लुएंसर करनदीप को ऑस्ट्रेलिया में हार्ट अटैक आ गया। सिंगर ने खुद इसके वीडियो इंस्टा पर शेयर करते हुए लिखा कि 19 मई उनकी जिंदगी का लास्ट दिन था। अगर उनके दोस्त पास न होते तो वो जिंदा न होते। पढ़ें पूरी खबर…
सर्वगुण संपन्न:अब नॉन ग्लैमरस रोल में दिखेंगी वाणी कपूर, 3 महीने की तैयारी

वाणी कपूर की अगली फिल्म ‘सर्वगुण संपन्न’ है। इसकी निर्देशक सोनाली रतन देशमुख हैं। उन्होंने इस फिल्म के आइडिया से लेकर वाणी के इससे जुड़ने और कहानी के फोकस पर खास बातचीत की… निर्देशक सोनाली ‘सर्वगुण संपन्न’ को लेकर कहती हैं…‘फिल्म की शुरुआत किसी स्टार को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि एक वन-लाइनर आइडिया से हुई थी। ‘शिद्दत’ के बाद मैडॉक फिल्म्स की क्रिएटिव हेड शारदा कार्की ने मुझे लेखक सुमित घिल्डियाल के साथ तैयार की गई कहानी सुनाई, जिसमें मुझे अलग तरह की मानवीय कॉमेडी नजर आई। इसके बाद स्क्रिप्ट पर कई महीनों तक काम हुआ। कहानी को बार-बार लिखा गया ताकि हास्य परिस्थितियों से पैदा हो और भावनात्मक संतुलन भी बना रहे। वन-लाइनर सिर्फ दिशा देता है, असली फिल्म स्क्रीनप्ले में तैयार होती है।’ फिल्म पूरी तरह फैमिली ड्रामा, जिंदगी में आए बदलावों के इर्द-गिर्द घूमती है कहानी सोनाली का कहना है कि ‘फिल्म की बाहरी परत देखकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। किसी एडल्ट स्टार से मिलती-जुलती शक्ल कहानी की सिर्फ शुरुआती वजह है, जबकि पूरी फिल्म एक छोटे शहर की लड़की की जिंदगी में आए बदलावों और पारिवारिक रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है। किरदार को जीने पर रहा वाणी का पूरा जोर बकौल सोनाली…‘फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले वाणी ने करीब तीन महीने तक अपने किरदार पर काम किया। इस दौरान लगातार स्क्रिप्ट रीडिंग, वर्कशॉप और किरदार की मानसिकता, भाषा, बॉडी लैंग्वेज व व्यवहार पर विस्तार से चर्चा की गई। हमारा उद्देश्य वाणी से सिर्फ अभिनय कराना नहीं था, बल्कि उन्हें उस लड़की की दुनिया और व्यक्तित्व में पूरी तरह ढालना था, ताकि स्क्रीन पर उनका किरदार पूरी तरह स्वाभाविक लगे।’ ऋषिकेश भी फिल्म में, सिर्फ लोकेशन नहीं, कहानी का अहम किरदार भी सोनाली बताती हैं…‘फिल्म के लिए ऋषिकेश का चयन केवल खूबसूरत लोकेशन की वजह से नहीं किया गया। धार्मिक माहौल, छोटे शहर की सामाजिक संरचना और पारिवारिक जीवन कहानी का अहम हिस्सा हैं। शूटिंग ऋषिकेश के साथ हरिद्वार और देहरादून में भी हुई, लेकिन कहानी की आत्मा ऋषिकेश में ही बसती है।’ रिश्तों की केमिस्ट्री पर फोकस, दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाने का लक्ष्य सोनाली ये भी कहती है कि ‘फैमिली कॉमेडी में पंचलाइन से ज्यादा रिश्तों की केमिस्ट्री काम करती है। अगर फिल्म खत्म होने के बाद दर्शक मुस्कुराते हुए सिनेमाघर से बाहर निकलेंगे, तो वही ‘सर्वगुण संपन्न’ की सबसे बड़ी सफलता होगी।’ स्क्रिप्ट लॉक होने के बाद फिल्म से जुड़ी थीं वाणी, तोड़ी अपनी ग्लैमरस इमेज सोनाली के अनुसार, ‘स्क्रिप्ट के कई ड्राफ्ट पूरे होने के बाद ही वाणी को कहानी सुनाई गई। इस बार वाणी अपने अब तक के ग्लैमरस स्क्रीन इमेज से अलग ऋषिकेश की एक साधारण, चश्मा लगाने वाली और सलवार-कमीज पहनने वाली लड़की के किरदार में नजर आएंगी। कई बार सेट इमेज से निकलकर सामान्य किरदार निभाना भी चैलेंजिंग होता है।’
संडे प्रोफाइल : जो मैनचिन:अमेरिकी राजनीति में तीसरे विकल्प की खोज में जुटे डेमोक्रेटिक पार्टी के पूर्व सांसद

डेमोक्रेटिक पार्टी के पूर्व सांसद जो मैनचिन उन राजनेताओं में हैं, जिनका अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखने में ज्यादा यकीन है। वे अमेरिका की दो ध्रुवीय राजनीति को अलग रास्ते पर ले जाने की नई पहल से सुर्खियों में हैं। राजनीति में कुछ हस्तियां हमेशा मुख्य धारा से अलग हटकर चलने की कोशिश करती हैं। दो बार सांसद रह चुके जो मैनचिन ऐसे ही हैं। वे अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए कुछ नया करते रहते हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी में रहते हुए उन्होंने कई बार पार्टी लाइन का विरोध किया था। उन्होंने मतभेदों के कारण 2024 में पार्टी छोड़ दी। अब वे नए रास्ते पर निकल पड़े हैं। उन्होंने स्वतंत्र लीडरशिप काउंसिल लॉन्च की है। 78 साल के मैनचिन अमेरिकी संसद के एक सदन-कांग्रेस के लिए चुनाव लड़ने वाले निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे। 23 जुलाई को जब उन्होंंने एक समारोह में काउंसिल के गठन का ऐलान किया तो कैलिफोर्निया के सांसद केविन किली सहित कई उम्मीदवार मौजूद थे। मैनचिन का कहना है, हम एक अन्य पार्टी नहीं बना रहे हैं। हम उन लोगों का साथ देंगे जो किसी पार्टी के नहीं हैं, स्वतंत्र हैं। अमेरिका की दो दलीय राजनीति में तीसरी राजनीतिक ताकत बनाने के प्रयास बहुत कम हुए हैं। इसलिए उनकी पहल अहम है। अपने राजनीतिक करियर में मैनचिन मध्यमार्गी रहे हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़ने से पहले उन्होंने 2020-2024 के बीच जलवायु परिवर्तन और अमीरों पर टैक्स सहित कई मुद्दों पर संसद में पार्टी लाइन का विरोध किया था। जो मैनचिन का सफर वेस्ट वर्जीनिया के कोयला खदान क्षेत्र फार्मिंगटन से शुरू हुआ। उनके पिता शहर के मेयर थे। किराना दुकान संचालक उनके दादा जरूरतमंदों की मदद करते थे। उनसे प्रेरित होकर मैनचिन ने भी लोगों का हाल जानना और उनकी सहायता करना शुरू किया। इससे स्थानीय प्रभाव बढ़ता गया। वेस्ट वर्जीनिया यूनिवर्सिटी में छात्रों की एक पार्टी के दौरान उनकी मुलाकात गेल कोनेली से हुई, जो बाद में उनकी पत्नी बनीं। राजनीति में उनकी शुरुआत राज्य विधानसभा से हुई। 2004 में वे वेस्ट वर्जीनिया के गवर्नर बने और 2010 में पहली बार अमेरिकी सीनेट पहुंचे। वे कोयला उद्योग के समर्थक रहे हैं। 2021-22 में सीनेट में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकंस के 50-50 सदस्य होने से जो मैनचिन का वोट निर्णायक बन गया। उनके दबाव में राष्ट्रपति जो बाइडेन को कई विधेयकों में बदलाव करने पड़े। मैनचिन का कहना है कि डेमोक्रेटिक पार्टी में अब उनके जैसे अनुदारवादी नेताओं के लिए जगह नहीं है। वे राजनीतिक ध्रुवीकरण के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। गैलप के अनुसार अधिकांश अमेरिकी दोनों प्रमुख दलों के प्रति अनुकूल राय नहीं रखते, जबकि एक सर्वे में 45% लोगों ने खुद को निर्दलीय बताया। रिपब्लिकन प्रभाव वाले वेस्ट वर्जीनिया से उनका दो बार सीनेट जीतना उल्लेखनीय रहा, हालांकि 2024 में वे चुनाव हार गए थे।









