जुबिन नौटियाल बोले- प्रकृति और वन्यजीवों को बचाना असली मुद्दा:रामनगर में कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल में की शिरकत, संरक्षण प्रयासों की तारीफ

रामनगर में कॉर्बेट प्रशासन की ओर से आयोजित लिटरेचर फेस्टिवल के आखिरी दिन मशहूर गायक जुबिन नौटियाल पहुंचे। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम प्रकृति, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों को लोगों तक पहुंचाने का बेहतर माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति को बचाने की जिम्मेदारी केवल किसी एक विभाग या व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की है। डॉ. साकेत बडोला के कहने पर फेस्टिवल में पहुंचे जुबिन नौटियाल ने मीडिया से बातचीत में बताया कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने उन्हें लिटरेचर फेस्टिवल के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि आयोजन में अच्छे फोटोग्राफर और स्टोरीटेलर शामिल हो रहे थे। इस पहल से प्रभावित होकर उन्होंने तुरंत कार्यक्रम में शामिल होने का फैसला किया। कॉर्बेट को बताया उत्तराखंड और देश की पहचान जुबिन नौटियाल ने कॉर्बेट नेशनल पार्क को उत्तराखंड के साथ ही पूरे देश की पहचान बताया। उन्होंने डॉ. साकेत बडोला और उनकी टीम की ओर से वन्यजीव और प्रकृति संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कॉर्बेट से पूरे देश को सीखने की जरूरत है। बोले- बेवजह के मुद्दों पर नहीं, प्रकृति पर ध्यान दें जुबिन नौटियाल ने कहा कि कई बार समाज ऐसे मुद्दों पर आपस में लड़ता है, जो उतने महत्वपूर्ण नहीं होते। असली मुद्दा प्रकृति और पर्यावरण है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को सुरक्षित रखना सबसे जरूरी है। इसके लिए समाज के हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल को इसी दिशा में एक सकारात्मक पहल बताया। नाना पाटेकर के निधन पर जताई संवेदना फिल्म जगत के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर जुबिन नौटियाल ने भी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नाना जी ने उन्हें हमेशा बहुत प्यार और अपनापन दिया। जुबिन ने कहा कि छोटे शहरों से मुंबई पहुंचने वाले कलाकारों के लिए जब बड़े कलाकार प्यार और गर्मजोशी से बात करते हैं तो उन्हें लगता है कि वे भी इस दुनिया का हिस्सा हैं। जुबिन नौटियाल ने नाना पाटेकर के परिवार, उनके प्रशंसकों और पूरी फिल्म इंडस्ट्री के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनका निधन फिल्म जगत के लिए बड़ी क्षति है।
रानी मुखर्जी ने केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में किए दर्शन:सुख-शांति की कामना की, केदारनाथ में पूर्वजों की स्मृति में कराई पूजा

बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी गुरुवार को उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम पहुंचीं। सबसे पहले उन्होंने केदारनाथ धाम पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। श्राद्ध पक्ष के अवसर पर उन्होंने अपने पूर्वजों की स्मृति में विशेष पूजा भी कराई और बाबा केदार का आशीर्वाद लिया। केदारपुरी की आध्यात्मिक और प्राकृतिक सुंदरता से हुईं अभिभूत तीर्थ पुरोहित हिमांशु तिवारी ने रानी मुखर्जी को विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई। इस दौरान अभिनेत्री ने केदारनाथ धाम में काफी समय बिताया और तीर्थ पुरोहितों से बातचीत की। उन्होंने केदारपुरी की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण की भी तारीफ की। रानी मुखर्जी ने कहा कि बाबा केदार की नगरी स्वर्ग के समान है और यहां पहुंचकर मन को शांति का अनुभव होता है। पुनर्निर्माण कार्यों और यात्रा व्यवस्थाओं की ली जानकारी पूजा के दौरान रानी मुखर्जी ने केदारनाथ धाम में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों और यात्रा व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी ली। तीर्थ पुरोहित के मुताबिक, अभिनेत्री धाम के आध्यात्मिक वातावरण और हिमालयी सुंदरता को देखकर काफी प्रसन्न नजर आईं। केदारनाथ पहुंचने की खबर के बाद उनके प्रशंसकों और स्थानीय लोगों में भी उत्सुकता देखने को मिली। बदरीविशाल के दरबार में पहुंचकर की पूजा-अर्चना केदारनाथ के बाद रानी मुखर्जी बदरीनाथ धाम पहुंचीं। यहां उन्होंने भगवान बदरीविशाल के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और देश-प्रदेश की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से अभिनेत्री का स्वागत किया गया। समिति पदाधिकारियों ने उन्हें बदरीविशाल और बाबा केदार का प्रसाद भेंट किया। दोनों धामों की आध्यात्मिक अनुभूति को बताया अद्भुत रानी मुखर्जी ने केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की आध्यात्मिक अनुभूति और प्राकृतिक सौंदर्य की सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार की ओर से केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम को भव्य और दिव्य स्वरूप देने के लिए किए जा रहे कार्यों की भी तारीफ की। बद्रीनाथ में प्रभारी अधिकारी राजन नैथानी, प्रोटोकॉल अधिकारी राकेश सेमवाल, मंदिर अधिकारी यदुवीर पुष्पवान, मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ समेत योगंबर नेगी, राहुल नेगी, वैभव उनियाल, राकेश झिंक्वाण और विकास सनवाल मौजूद रहे।
नाना पाटेकर ने कहा था- आई लव पंजाबी:गोल्डन टेंपल देख बोले थे- रब का शुक्र है, जीते जी दर्शन हो गए; चंडीगढ़ में किसान को ₹3 लाख दिए

बॉलीवुड के सुपरस्टार नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें गोवा स्थित घर में कार्डियक अरेस्ट हुआ। मणिपाल अस्पताल के डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक नाना पाटेकर का सुबह 5:20 बजे निधन हुआ। घटना के वक्त नाना के साथ घर पर परिवार का कोई सदस्य नहीं था। उनके दोस्त और केयरटेकर मौजूद थे। अब शव का पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। नाना पाटेकर पंजाबियों को बहुत पसंद करते थे। 17 साल पहले वह पंजाब में शूटिंग कर रहे थे तो उन्होंने पंजाबी सीखी। उन्होंने कहा था कि पंजाबी उन्हें बहुत पसंद हैं। चंडीगढ़ में वेलकम की शूटिंग के दौरान उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के किसान पिता की बाइपास सर्जरी के लिए तुरंत 3 लाख रुपए दे दिए थे। इसके अलावा नाना पाटेकर जनवरी 2018 में पत्नी नीलकांति पाटेकर के साथ अमृतसर आए थे। यहां उन्होंने गोल्डन टेंपल में माथा टेका। यह गोल्डन टेंपल के दर्शन के बाद नाना ने कहा था- रब का शुक्र है कि जीते जी मुझे गोल्डन टेंपल में माथा टेकने का मौका मिला इस दौरान उन्होंने गोल्डन टेंपल की पूरी परिक्रमा की और फिर लंगर हॉल में जूठे बर्तन भी मांजे थे। इसके बाद जब वे फिर अमृतसर आए तो वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी में भी पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने BSF की नशा विरोधी दौड़ में भी हिस्सा लिया था। नाना ने कहा था- ऐसी शांति कहीं नहीं मिली नाना पाटेकर ने गोल्डन टेंपल के दर्शन के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा था कि मुझे यहां आकर बहुत शांति मिली है, ऐसी शांति मैंने कभी कहीं और महसूस नहीं की। यहां के लोगों की सेवा और श्रद्धा देखकर मैं बहुत हैरान हूं। मैं सोच रहा हूं कि मैं पहले कभी यहां क्यों नहीं आया। यहां कोई छोटा-बड़ा या किसी तरह का भेदभाव नहीं है। अगर पूरा देश इस बात को समझ ले और अपनी जिंदगी में अपना ले तो हमारा देश सोने जैसा बन जाएगा। नाना पाटेकर ने पंजाब में शूटिंग के दौरान पंजाबी सीखी थी साल 2009 में एक: द पॉवर ऑफ वन की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर चंडीगढ़ और पंजाब में शूटिंग कर रहे थे। फिल्म में उन्हें CBI अधिकारी का किरदार निभाना था और उनके कई सीन पंजाब में लोगों से बातचीत करते हुए थे। अपने मराठी लहजे के बावजूद संवादों को पंजाबी अंदाज में बोलने के लिए उन्होंने बाकायदा स्थानीय पंजाबी महिलाओं से पंजाबी एक्सेंट सीखने की कोशिश की थी। उस दौरान एक रिपोर्ट में नाना ने कहा था कि मुझे पंजाबी पसंद हैं। मेरे पिता भी फर्राटेदार पंजाबी बोलते थे, क्योंकि टेक्सटाइल प्रिंटिंग के कारोबार में उनका रोजाना पंजाबियों से संपर्क रहता था। नाना पाटेकर को खेती-किसानी भी खूब पसंद थी। उन्होंने चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए कहा था कि मैं प्रकृति के करीब रहना पसंद करता हूं और “दिल से किसान” हूं। चंडीगढ़ में असिस्टेंट डायरेक्टर के पिता को तुरंत मदद दी साल 2007 में फिल्म ‘वेलकम’ की शूटिंग के दौरान नाना को पता चला कि यूनिट के एक असिस्टेंट डायरेक्टर बिट्टू चंडोक के चाचा अवतार सिंह चंडीगढ़ में रहते हैं और किसान हैं। वह गंभीर रूप से बीमार थे और बाईपास सर्जरी के लिए करीब 3 लाख रुपये की जरूरत थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, नाना ने तुरंत 3 लाख रुपये का चेक दे दिया था। नाना ने इस मदद को ‘दान’ मानने से भी इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि अवतार सिंह उनके पिता की उम्र के हैं, इसलिए यह ऐसा था जैसे वह अपने पिता के लिए कुछ कर रहे हों। उन्होंने यह भी कहा था कि एक समय उनके पास कुछ नहीं था और जो कुछ उनके पास है, वह लोगों की वजह से है।
दिलजीत दोसांझ का घर समझ लिखे खालिस्तानी नारे:पड़ोसी बोला- मुंह बांधकर आए 4-5 लोग, स्प्रे की स्मेल आने पर मेरी नींद खुली

पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ के गांव दोसांझ कलां में कुछ लोगों ने एक घर की दीवार पर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लिख दिए। बाद में पता चला कि जिस घर की दीवार पर नारे लिखे गए, वह दिलजीत दोसांझ का नहीं, बल्कि उनके पड़ोसी का है। घटना से नाराज पड़ोसी ने कहा कि बिना किसी वजह के उसकी दीवार खराब कर दी। पड़ोसी मुख्तियार ने बताया बुधवार देर रात करीब डेढ़ बजे चार-पांच आदमी दीवार पर कुछ लिख रहे थे, स्प्रे की स्मेल आने पर मेरी नींद खुली, जब मैंने उन्हें डांटा, तो भाग गए। मामले में पुलिस का कहना है कि यह घर मुख्तियार का है। सीसीटीवी कैमरे चेक करवाए जा रहे हैं। इसके बारे में अभी कुछ कन्फर्म नहीं है। कैमरों की जांच करके फिर पूरा पता लगेगा। दीवार पर खालिस्तान वगैरह कुछ लिखा हुआ था मुख्तियार ने कहा कि स्प्रे की स्मेल अंदर तक आ गई। मेरी नींद खुली तो मैंने उन्हें डांटा। उन्होंने मुंह बांधे हुए थे। इसके बाद वे लोग यहां से निकल गए। जब मैं उठकर देखने गया तो दीवार पर खालिस्तान वगैरह कुछ लिखा हुआ था। नीचे उन्होंने दिलजीत दोसांझ का नाम मेंशन किया हुआ था। उन्हें शायद यह पता नहीं था कि यह दिलजीत का घर नहीं है। पांच से सात हजार रुपए का नुकसान हो गया उन्होंने कहा कि मैं दिहाड़ी करने वाला आदमी हूं। ये लोग मेरी दीवार खराब करके चले गए हैं। इस वजह से मेरा पांच से सात हजार रुपए का नुकसान हो गया है। उन्होंने कहा कि दिलजीत का घर अगली ओर रोड पर है। उन्होंने बताया कि गुरुवार सुबह पुलिस आई थी और पूछताछ करके चली गई। दिलजीत और खालिस्तानी समर्थकों से जुड़े विवाद… ************* ये खबर भी पढ़ें: लुधियाना में DIG ऑफिस के बाहर फायरिंग का दावा: कार के शीशे तोड़े, CCTV में दिखे 3 लोग; ACP बोले- गोली नहीं चली, सिविल सूट का मामला लुधियाना में DIG ऑफिस के ठीक सामने युवकों ने एक व्यक्ति पर जानलेवा हमला कर दिया। उसने दावा किया कि आरोपियों ने पहले उसके साथ मारपीट की, फिर कार के शीशे तोड़ दिए। इसके बाद हवाई फायरिंग करते हुए मौके से फरार हो गए। (पढ़ें पूरी खबर)
नाना पाटेकर को पीएम मोदी की श्रद्धांजलि:बोले- तिरंगे की आन, बान और शान के लिए समर्पित रहा जीवन, फिल्मों से व्यवस्था पर किया प्रहार

नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा में कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई लोगों ने नाना को श्रद्धांजलि दी। इंडिया मोबाइल कांग्रेस के दूसरे दिन पीएम मोदी ने कहा कि नाना असाधारण कलाकार थे, जिन्होंने अलग-अलग किरदारों के जरिए दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। PM मोदी ने कहा कि नाना पाटेकर जी का जीवन तिरंगे की आन, बान और शान के लिए समर्पित रहा। वह बंधनों में नहीं रहे, परिंदे की तरह फिल्मों के आसमान में उड़े। उन्होंने समाज में व्याप्त व्यवस्था पर अपनी फिल्मों के माध्यम से करारा प्रहार किया। उन्होंने आगे कहा कि वे एक ऐसे क्रांतिवीर थे, जिन्होंने बुराइयों के विरुद्ध काम किया। उनकी वाणी जितनी तेज थी, उनकी खामोशी भी उतनी ही प्रभावी थी। वह देश विरोधियों पर निरंतर अंकुश के समर्थक थे। मैं नाना पाटेकर जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और उनके परिवारजनों और चाहने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। अक्षय कुमार बोले- यकीन करना मुश्किल है कि आप चले गए अक्षय कुमार ने नाना के साथ (वेलकम) और हाल ही में (हाउसफुल 5) में काम किया था। उन्होंने कहा कि नाना उन दुर्लभ कलाकारों में थे, जिन्हें दर्शकों का ध्यान खींचने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं थी। अक्षय ने उनकी आवाज, इंटेंसिटी और हर परफॉर्मेंस में ईमानदारी को याद किया। उन्होंने लिखा कि नाना की कमी को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। रितेश देशमुख बोले- एक युग का अंत रितेश देशमुख ने नाना के निधन पर कहा कि उनके पास शब्द नहीं हैं और यह खबर सुनकर ऐसा लगा जैसे उन पर ट्रक चढ़ गया हो। रितेश ने उन्हें बेमिसाल अभिनेता बताया। उन्होंने (ब्लफमास्टर) और (हाउसफुल 5) में नाना के साथ काम किया था। रितेश ने कहा कि नाना के साथ मराठी फिल्म में काम करना उनकी अधूरी इच्छा रह गई। मेहुल कुमार बोले- नाना पाटेकर हमेशा जमीन से जुड़े इंसान रहे दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में डायरेक्टर मेहुल कुमार ने नाना पाटेकर को याद करते हुए कहा कि उनके साथ तिरंगा, क्रांतिवीर और कोहराम जैसी तीन यादगार फिल्में कीं। उन्होंने बताया कि नाना बेहद जमीन से जुड़े और सच्चाई के साथ चलने वाले इंसान थे। फिल्मों की सफलता और कई अवॉर्ड मिलने के बाद भी उनका व्यवहार कभी नहीं बदला। मेहुल कुमार ने बताया कि नाना ने किसी और डायरेक्टर के साथ तीन फिल्में नहीं की थीं। क्रांतिवीर को लेकर दिलीप कुमार ने भी कहा था कि नाना को लोग हमेशा इस किरदार के नाम से याद रखेंगे। उन्होंने बताया कि कोहराम के दौरान अमिताभ बच्चन को शुरुआत में नाना के साथ काम करने में थोड़ा संकोच था, लेकिन नाना और अमिताभ की बाद में अच्छी दोस्ती हो गई। वहीं (तिरंगा) के सेट पर नाना और राज कुमार के बीच भी अच्छी बॉन्डिंग बन गई थी। मेहुल कुमार ने कहा कि नाना सिर्फ एक स्टार नहीं थे, बल्कि अच्छे इंसान भी थे। उन्होंने गरीबों और किसानों की काफी मदद की। उनका नाम हमेशा याद रखा जाएगा। उदित नारायण बोले- नाना के निधन की खबर सुनकर हिल गया हूं दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में सिंगर उदित नारायण ने नाना पाटेकर के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि सुबह-सुबह यह खबर सुनकर उन्हें यकीन ही नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि 75 साल की उम्र में नाना का जाना फिल्म इंडस्ट्री और देश के लिए बहुत बड़ी क्षति है। बतौर एक्टर उनका कोई जवाब नहीं था और बतौर इंसान भी उनकी शानदार पर्सनालिटी थी। उदित ने बताया कि उन्हें नाना के साथ काम करने का मौका मिला था। एक फिल्म की रिकॉर्डिंग के दौरान नाना ने खुद माइक पर गाकर बताया था कि वह गाने को किस तरह चाहते हैं। उदित ने उनके लिए एक टेक में गाना गाया, जिसके बाद नाना ने उनकी तारीफ की थी। उन्होंने (तिरंगा) में भी नाना के साथ काम की यादें साझा कीं। जूनियर NTR बोले- हर किरदार में दिखती थी ईमानदारी साउथ स्टार जूनियर NTR ने नाना को भारतीय सिनेमा के बेहतरीन कलाकारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि नाना के हर किरदार में एक खास ईमानदारी और इंटेंसिटी नजर आती थी। उनकी परफॉर्मेंस अभिनय जैसी नहीं, बल्कि पर्दे पर जिंदगी के सामने आने जैसी लगती थी। NTR ने कहा कि भारतीय सिनेमा में नाना का योगदान पीढ़ियों तक याद किया जाएगा। प्रकाश राज बोले- बातचीत और बहसें हमेशा याद रहेंगी एक्टर प्रकाश राज ने नाना को याद करते हुए कहा कि वह उनके साथ बिताए पलों, बातचीत, बहसों और नाना के हाथ का बना खाना हमेशा याद रखेंगे। उन्होंने नाना से मिली सीख को भी याद किया और कहा कि उनकी जिंदगी में आने के लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे। नितिन गडकरी ने दोस्ती को किया याद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि उनके और नाना पाटेकर के बेहद करीबी और दोस्ताना संबंध थे। उन्होंने नाना के पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर और उनकी खास डायलॉग डिलीवरी को याद किया। गडकरी ने (नाम फाउंडेशन) के जरिए किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए नाना के काम को भी श्रद्धांजलि में याद किया। सुवेंदु अधिकारी बोले- भारतीय सिनेमा ने खास आवाज खो दी पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी ने नाना को भारतीय सिनेमा की बेबाक और खास आवाज बताया। उन्होंने (परिंदा), (क्रांतिवीर), (प्रहार) और (अब तक छप्पन) में उनके अभिनय को याद किया। उन्होंने नाना के सामाजिक काम और ग्रामीण समुदायों के लिए किए गए प्रयासों का भी जिक्र किया। नाना का करीब पांच दशक का करियर नाना पाटेकर ने 1978 में गमन से फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा के साथ थिएटर में भी काम किया। परिंदा, क्रांतिवीर, प्रहार, अब तक छप्पन, नटसम्राट, वेलकम और हाउसफुल 5 जैसी फिल्मों में उनके किरदार यादगार रहे। उन्हें तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिले थे और 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
उत्तराखंड में घर खरीदना चाहते थे नाना पाटेकर:शूटिंग के लिए पहुंचे जोशीमठ, यहीं रहने की थी जिद; गंगा आरती कर लौटे

बॉलीवुड एक्टर नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से गोवा के डोना पाउला में निधन हो गया। उनका उत्तराखंड से भी गहरा जुड़ाव रहा है। सितंबर-अक्टूबर 2022 में चमोली की नीती घाटी में मराठी फिल्म ‘ओले आले’ की शूटिंग के दौरान वे करीब नौ दिन पहाड़ों में रहे थे। चमोली की खूबसूरत वादियों, शांत वातावरण और स्थानीय लोगों की सादगी से वे काफी प्रभावित हुए। उन्होंने भविष्य में उत्तराखंड में जमीन खरीदकर घर बनाने की इच्छा जताई थी। शूटिंग के दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से पहाड़ी रहन-सहन, वेशभूषा, मौसम और आसपास के तीर्थ-पर्यटन स्थलों के बारे में भी जानकारी ली थी। नाना पाटेकर ने नीती गांव, तपोवन, लाता और मलारी क्षेत्र में फिल्म की शूटिंग की थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, उन्होंने यहां मकान बनाने की बात भी कही थी, जिसके बाद जोशीमठ की तत्कालीन SDM कुमकुम जोशी ने उनसे मुलाकात कर स्थानीय सेब और अखरोट भेंट किए थे। इसी दौरान 29 सितंबर 2022 को नाना पाटेकर ने ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में गंगा आरती में भी हिस्सा लिया था। नाना पाटेकर की उत्तराखंड से जुड़ी दो तस्वीरें- सेना के जवानों से भी मिले, स्थानीय बोली में की बातचीत शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने सेना की ब्रिगेड में अधिकारियों और जवानों से मुलाकात की थी। मराठी और तेलुगु भाषी जवानों से उन्होंने उनकी ही बोली में बातचीत की और खूब हंसी-मजाक किया। स्थानीय लोगों ने बताया कि नाना का व्यवहार बेहद सहज और सरल था। वे शूटिंग से इतर आसपास के जीवन को जानने में भी काफी रुचि लेते थे। करीब नौ दिन चमोली में रहने के बाद नाना पाटेकर हेलिकॉप्टर से रुद्रप्रयाग जिले के गुप्तकाशी पहुंचे थे। कोकोनट मोशन पिक्चर्स के बैनर तले निर्माता रिश्मन मजेठिया की फिल्म की शूटिंग नीती घाटी के लाता और मलारी क्षेत्र में हुई थी। फिल्म में नाना पाटेकर पिता की भूमिका निभा रहे थे। सीएम धामी से भी कही थी घर बनाने की बात उत्तराखंड को लेकर नाना पाटेकर की पसंद सिर्फ शूटिंग तक सीमित नहीं रही। 1 अक्टूबर 2022 को देहरादून में मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में उन्होंने सीएम पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की थी। सीएम धामी ने पहाड़ी टोपी पहनाकर उनका स्वागत किया था। बातचीत के दौरान नाना ने उत्तराखंड के लोगों के व्यवहार और यहां के वातावरण की तारीफ करते हुए प्रदेश में अपना घर बनाने की इच्छा जताई थी। नाना पाटेकर का यह सपना पूरा नहीं हो सका। पहाड़ों में घर बसाने की उनकी इच्छा अब उत्तराखंड से जुड़ी उनकी खास यादों में शामिल हो गई है। नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 की उम्र में निधन हो गया। उन्हें गोवा स्थित अपने घर पर कार्डियक अरेस्ट हुआ था। उन्हें करीब 45 मिनट तक CPR दी गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। मणिपाल हॉस्पिटल के डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक नाना पाटेकर का सुबह 5:20 बजे निधन हुआ। उनके निधन के बाद मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज किया गया है और पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। ‘परिंदा’ में विलेन बने, 3 नेशनल अवॉर्ड जीते नाना ने 100 से ज्यादा फिल्में कीं। 1989 की फिल्म ‘परिंदा’ में नाना पाटेकर ने अन्ना का किरदार निभाया, जिसके लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। 1994 की ‘क्रांतिवीर’ के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। 1996 की ‘अग्निसाक्षी’ के लिए भी उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। इस तरह उन्हें करियर में 3 नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिले। भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए नाना पाटेकर को 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। अपने लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने हिंदी के साथ मराठी फिल्मों में भी काम किया। पीएम मोदी बोले- कई पीढ़ियों तक याद किए जाएंगे नाना पाटेकर के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, कुछ ही अभिनेता ऐसे थे, जिनमें नाना पाटेकर जैसी गहराई, अलग पहचान और खास मौजूदगी थी। उन्होंने हर किरदार में शानदार विविधता और रचनात्मकता दिखाई। उनके निभाए किरदार कई पीढ़ियों तक याद किए जाएंगे। अक्षय कुमार ने कहा- नाना जी के निधन की खबर से बहुत दुखी हूं। वह उन चुनिंदा कलाकारों में से एक थे, जिन्हें आपको रुककर देखने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ती थी। मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि मुझे उनके साथ (वेलकम) और फिर हाल ही में (हाउसफुल 5) में काम करने का मौका मिला। उन दोनों फिल्मों के सेट की बहुत सारी यादें हैं, जिन्हें मैं हमेशा अपने दिल के करीब रखूंगा। रितेश देशमुख ने कहा- मेरे पास शब्द नहीं हैं। नाना पाटेकर जी के निधन की खबर से ऐसा लग रहा है, जैसे मुझ पर कोई ट्रक चढ़ गया हो। मैं बेहद दुखी हूं। वह एक बेहतरीन अभिनेता थे और उनका कोई मुकाबला नहीं था। वह पर्दे से बाहर भी हीरो थे। लोगों की भलाई के लिए उन्होंने अपनी चैरिटी के जरिए लगातार काम किया। शिखर धवन ने कहा- भारतीय सिनेमा ने आज एक बेहद खास प्रतिभा को खो दिया है। नाना पाटेकर साहब, आपका काम आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। ॐ शांति। ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी बनकर कॉमेडी में भी छाए 2007 में आई फिल्म ‘वेलकम’ में नाना पाटेकर ने गैंगस्टर उदय शेट्टी का किरदार निभाया था। इस कॉमेडी रोल को काफी पसंद किया गया। वे इसके सीक्वल ‘वेलकम बैक’ में भी उदय शेट्टी के किरदार में नजर आए। फिल्म प्रहार के लिए मिलिट्री ट्रेनिंग ली थी नाना पाटेकर ने फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ में आर्मी मेजर की भूमिका निभाने के लिए भारतीय सेना की मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ सैन्य प्रशिक्षण लिया था। इस दौरान उन्होंने करीब तीन साल तक ट्रेनिंग की थी। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद नाना पाटेकर टेरिटोरियल आर्मी से जुड़े। उन्हें मानद कैप्टन के रूप में कमीशन मिला। बाद में उन्होंने लेफ्टिनेंट कर्नल के मानद पद तक सेवाएं दीं और 2013 में रिटायर हुए। कारगिल युद्ध के दौरान भी सेना के साथ रहे नाना पाटेकर का सेना से जुड़ाव 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी सामने आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से विशेष अनुमति लेकर करीब 2 महीने सेना के साथ अग्रिम इलाकों में बिताए। इस दौरान वह द्रास, लेह, कुपवाड़ा और सोपोर जैसे क्षेत्रों में
रेपिस्ट के रोल पर नाना ने डायरेक्टर को गालियां दीं:'परिंदा' के क्लाईमैक्स में आग से झुलसे, आर्मी जॉइन करने के लिए रक्षामंत्री को फोन किया

बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर का गुरुवार को 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा के डोना पाउला स्थित उनके घर पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 45 मिनट तक CPR देने की कोशिश की गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। नाना पाटेकर का करीब पांच दशक लंबा फिल्मी करियर रहा। उन्होंने थिएटर से शुरुआत की और बाद में फिल्मों का रुख किया। गमन, अंकुश, परिंदा, क्रांतिवीर, तिरंगा, अब तक छप्पन, अपहरण और वेलकम जैसी फिल्मों में उन्होंने यादगार भूमिकाएं निभाई थीं। 1 जनवरी, 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के गांव मुरुद-जंजीरा में जन्मे विश्वनाथ गजानन पाटेकर, जिन्हें दुनिया ने नाना पाटेकर के नाम से जाना। नाना बचपन से ही बाकी बच्चों से अलग रहे। तेवर में बगावती सुर थे। समाज की कुरीतियों को कला के माध्यम से दिखाना चाहते थे। इसलिए पहले थिएटर में आए, फिर फिल्मों का रुख किया। नाना अपने गुस्सैल स्वभाव के लिए भी चर्चा में रहते थे। जब रवि चोपड़ा ने इन्हें रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो इन्होंने गाली दे दी थी। फिल्म परिंदा की शूटिंग के वक्त नाना और फिल्म के डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा भिड़ गए थे। नाना पाटेकर से जुड़े कुछ खास किस्से.. 13 साल की उम्र, दिन में 16 किमी पैदल चलते थे नाना के पिता टेक्सटाइल पेंटिंग का एक छोटा सा बिजनेस चलाते थे। नाना जब 13 साल के थे, तभी किसी ने पिता के साथ फ्रॉड कर दिया। रातों-रात बिजनेस चौपट हो गया। सारी प्रॉपर्टी बिक गई। पैसे कमाने के लिए नाना को भी सड़क पर आना पड़ा। वे सुबह स्कूल जाते, शाम में फिल्म के पोस्टर्स पेंट करते थे। जहां पोस्टर पेंट करते थे, वहां से घर की दूरी 8 किलोमीटर थी। इस तरह दिन में 16 किलोमीटर की दूरी पैदल ही तय करते थे। इस काम के लिए हर महीने 35 रुपए मिलते थे। यह बात 1963 के आस-पास की है। पैसों की इतनी किल्लत थी कि कभी-कभार खाना भी नसीब नहीं होता था। लंच या डिनर टाइम में नाना यूं ही अपने दोस्तों से मिलने चले जाते थे। इस उम्मीद में कि सामने से कोई दो रोटी खाने को पूछ ले। टीचर बगल में बिठाते थे, ताकि मारने के लिए बार-बार उठना न पड़े नाना बचपन में बहुत शरारती थे। इतने शरारती कि टीचर इन्हें बगल में बिठाकर रखते थे, ताकि मारने के लिए बार-बार उठना न पड़े। शरारत इतनी बढ़ गई कि नाना की मां ने उन्हें छठी कक्षा के बाद अपनी बहन के गांव भेज दिया। मां को लगा कि दूसरी जगह जाएगा तो सुधर जाएगा। नाना अपनी मौसी के घर एक-दो साल रहे, फिर वापस लौट आए। मौसी ने ही उन्हें वापस भेज दिया। उन्हें डर था कि नाना की संगत में कहीं उन्हीं के बच्चे न बिगड़ जाएं। खुद को बदसूरत समझते थे, पिता को लेकर पाला था भ्रम नाना अपने आप को दूसरों से कमतर आंकते थे। वे अपने आप को बदसूरत मानते थे। नाना के दोनों भाई लुक में उनसे ठीक थे। नाना को लगता था कि पिता बाकी भाइयों को ज्यादा तवज्जो देते हैं। नाना बचपन से ही गांव-दराज में होने वाले नाटक-ड्रामों में भाग लेते थे। एक बार वे गांव में नाटक कर रहे थे। उनके पिता बंबई (अब मुंबई) से सिर्फ नाटक देखने गांव आ गए। उस वक्त नाना का भ्रम टूट गया कि पिता उनसे प्यार नहीं करते। नाना को उस वक्त एहसास हुआ कि जैसे उन्होंने अपनी कला से पिता को प्रभावित किया, वैसे ही पूरी दुनिया को भी कर सकते हैं। पिता हॉस्पिटल में थे, उनकी दवाई के भी पैसे नहीं थे नाना ने पिता को लेकर जो भ्रम पाला था, वह तो समय के साथ खत्म हो गया, लेकिन एक बात का मलाल आज भी है। नाना अपने पिता के हाथ पर एक रुपया तक नहीं रख पाए। नाना ने यह बात दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में कही थी। उन्होंने कहा था, ‘मुझे इस बात का गहरा दुख है कि अपनी कमाई से पिता के लिए कुछ नहीं कर पाया। उनका निधन भी एक म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के अस्पताल में हुआ था। उस वक्त उनकी दवाई के लिए भी मेरे पास पैसे नहीं थे। मेरे दोस्तों ने काफी मदद की। उन्होंने ही मुझे दवा के पैसे दिए थे।’ रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो रवि चोपड़ा को गालियां बक दीं स्मिता पाटिल ने नाना को बी.आर. चोपड़ा के बेटे रवि चोपड़ा के पास भेजा। रवि चोपड़ा उस वक्त फिल्म ‘आज की आवाज’ बना रहे थे। उन्होंने नाना को रेपिस्ट का रोल ऑफर किया। ऑफर सुनते ही नाना भड़क उठे। उन्होंने सबके सामने रवि को गालियां बक दीं। नाना ने कहा कि तुम मुझे ऐरा-गैरा आदमी समझते हो, क्या मैं ऐसा रोल करूंगा? यह कहकर नाना वहां से लौटने लगे। तभी स्मिता पाटिल वहां पहुंच गईं। उन्होंने नाना और रवि, दोनों को समझाया। तब रवि चोपड़ा ने उन्हें मेन विलेन का रोल ऑफर किया। नाना इस बार भी सीधी तरह नहीं माने। उन्होंने कहा कि मैं कर तो लूंगा, लेकिन अपना किरदार खुद लिखूंगा। आखिरकार उन्होंने फिल्म में काम कर लिया था। विधु विनोद चोपड़ा के साथ हाथापाई, नाना का कुर्ता फट गया फिल्म परिंदा की शूटिंग के दौरान विधु विनोद चोपड़ा और नाना पाटेकर में लड़ाई हो गई थी। यह बात खुद विधु ने एक टीवी रियलिटी शो के दौरान स्वीकारी थी। उन्होंने कहा था, ‘नाना हर सीन में गाली देता था। मुझे यह बात बड़ी अजीब लगती थी। मुझे उस वक्त गालियां नहीं आती थीं। नाना बार-बार गालियां दिए जा रहा था। ऊपर से बिना शूटिंग किए घर जाने लगा। मैंने कहा कि पहले पैसे दो, फिर वापस जाओ। कम से कम मेरा नुकसान तो मत कराओ। यही बात कहते हुए मैंने उसका कुर्ता फाड़ दिया। अभी यह सब चल ही रहा था कि कैमरामैन ने शॉट रेडी कर दिया। आप फिल्म देखिए, एक सीन में नाना बनियान में बैठकर रोता दिखाई देगा। वह शॉट झगड़े के तुरंत बाद लिया गया था। खैर, शॉट परफेक्ट हो गया। बाद में नाना ने मुझे गले लगा लिया।’ सेफ्टी गार्ड पहनने से मना किया, आग में झुलसे
रेपिस्ट के रोल पर नाना ने डायरेक्टर को गालियां दीं:'परिंदा' के क्लाईमैक्स में आग से झुलसे, आर्मी जॉइन करने के लिए रक्षामंत्री को फोन किया

बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर का गुरुवार को 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा के डोना पाउला स्थित उनके घर पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 45 मिनट तक CPR देने की कोशिश की गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। नाना पाटेकर का करीब पांच दशक लंबा फिल्मी करियर रहा। उन्होंने थिएटर से शुरुआत की और बाद में फिल्मों का रुख किया। गमन, अंकुश, परिंदा, क्रांतिवीर, तिरंगा, अब तक छप्पन, अपहरण और वेलकम जैसी फिल्मों में उन्होंने यादगार भूमिकाएं निभाई थीं। 1 जनवरी, 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के गांव मुरुद-जंजीरा में जन्मे विश्वनाथ गजानन पाटेकर, जिन्हें दुनिया ने नाना पाटेकर के नाम से जाना। नाना बचपन से ही बाकी बच्चों से अलग रहे। तेवर में बगावती सुर थे। समाज की कुरीतियों को कला के माध्यम से दिखाना चाहते थे। इसलिए पहले थिएटर में आए, फिर फिल्मों का रुख किया। नाना अपने गुस्सैल स्वभाव के लिए भी चर्चा में रहते थे। जब रवि चोपड़ा ने इन्हें रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो इन्होंने गाली दे दी थी। फिल्म परिंदा की शूटिंग के वक्त नाना और फिल्म के डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा भिड़ गए थे। नाना पाटेकर से जुड़े कुछ खास किस्से.. 13 साल की उम्र, दिन में 16 किमी पैदल चलते थे नाना के पिता टेक्सटाइल पेंटिंग का एक छोटा सा बिजनेस चलाते थे। नाना जब 13 साल के थे, तभी किसी ने पिता के साथ फ्रॉड कर दिया। रातों-रात बिजनेस चौपट हो गया। सारी प्रॉपर्टी बिक गई। पैसे कमाने के लिए नाना को भी सड़क पर आना पड़ा। वे सुबह स्कूल जाते, शाम में फिल्म के पोस्टर्स पेंट करते थे। जहां पोस्टर पेंट करते थे, वहां से घर की दूरी 8 किलोमीटर थी। इस तरह दिन में 16 किलोमीटर की दूरी पैदल ही तय करते थे। इस काम के लिए हर महीने 35 रुपए मिलते थे। यह बात 1963 के आस-पास की है। पैसों की इतनी किल्लत थी कि कभी-कभार खाना भी नसीब नहीं होता था। लंच या डिनर टाइम में नाना यूं ही अपने दोस्तों से मिलने चले जाते थे। इस उम्मीद में कि सामने से कोई दो रोटी खाने को पूछ ले। टीचर बगल में बिठाते थे, ताकि मारने के लिए बार-बार उठना न पड़े नाना बचपन में बहुत शरारती थे। इतने शरारती कि टीचर इन्हें बगल में बिठाकर रखते थे, ताकि मारने के लिए बार-बार उठना न पड़े। शरारत इतनी बढ़ गई कि नाना की मां ने उन्हें छठी कक्षा के बाद अपनी बहन के गांव भेज दिया। मां को लगा कि दूसरी जगह जाएगा तो सुधर जाएगा। नाना अपनी मौसी के घर एक-दो साल रहे, फिर वापस लौट आए। मौसी ने ही उन्हें वापस भेज दिया। उन्हें डर था कि नाना की संगत में कहीं उन्हीं के बच्चे न बिगड़ जाएं। खुद को बदसूरत समझते थे, पिता को लेकर पाला था भ्रम नाना अपने आप को दूसरों से कमतर आंकते थे। वे अपने आप को बदसूरत मानते थे। नाना के दोनों भाई लुक में उनसे ठीक थे। नाना को लगता था कि पिता बाकी भाइयों को ज्यादा तवज्जो देते हैं। नाना बचपन से ही गांव-दराज में होने वाले नाटक-ड्रामों में भाग लेते थे। एक बार वे गांव में नाटक कर रहे थे। उनके पिता बंबई (अब मुंबई) से सिर्फ नाटक देखने गांव आ गए। उस वक्त नाना का भ्रम टूट गया कि पिता उनसे प्यार नहीं करते। नाना को उस वक्त एहसास हुआ कि जैसे उन्होंने अपनी कला से पिता को प्रभावित किया, वैसे ही पूरी दुनिया को भी कर सकते हैं। पिता हॉस्पिटल में थे, उनकी दवाई के भी पैसे नहीं थे नाना ने पिता को लेकर जो भ्रम पाला था, वह तो समय के साथ खत्म हो गया, लेकिन एक बात का मलाल आज भी है। नाना अपने पिता के हाथ पर एक रुपया तक नहीं रख पाए। नाना ने यह बात दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में कही थी। उन्होंने कहा था, ‘मुझे इस बात का गहरा दुख है कि अपनी कमाई से पिता के लिए कुछ नहीं कर पाया। उनका निधन भी एक म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के अस्पताल में हुआ था। उस वक्त उनकी दवाई के लिए भी मेरे पास पैसे नहीं थे। मेरे दोस्तों ने काफी मदद की। उन्होंने ही मुझे दवा के पैसे दिए थे।’ रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो रवि चोपड़ा को गालियां बक दीं स्मिता पाटिल ने नाना को बी.आर. चोपड़ा के बेटे रवि चोपड़ा के पास भेजा। रवि चोपड़ा उस वक्त फिल्म ‘आज की आवाज’ बना रहे थे। उन्होंने नाना को रेपिस्ट का रोल ऑफर किया। ऑफर सुनते ही नाना भड़क उठे। उन्होंने सबके सामने रवि को गालियां बक दीं। नाना ने कहा कि तुम मुझे ऐरा-गैरा आदमी समझते हो, क्या मैं ऐसा रोल करूंगा? यह कहकर नाना वहां से लौटने लगे। तभी स्मिता पाटिल वहां पहुंच गईं। उन्होंने नाना और रवि, दोनों को समझाया। तब रवि चोपड़ा ने उन्हें मेन विलेन का रोल ऑफर किया। नाना इस बार भी सीधी तरह नहीं माने। उन्होंने कहा कि मैं कर तो लूंगा, लेकिन अपना किरदार खुद लिखूंगा। आखिरकार उन्होंने फिल्म में काम कर लिया था। विधु विनोद चोपड़ा के साथ हाथापाई, नाना का कुर्ता फट गया फिल्म परिंदा की शूटिंग के दौरान विधु विनोद चोपड़ा और नाना पाटेकर में लड़ाई हो गई थी। यह बात खुद विधु ने एक टीवी रियलिटी शो के दौरान स्वीकारी थी। उन्होंने कहा था, ‘नाना हर सीन में गाली देता था। मुझे यह बात बड़ी अजीब लगती थी। मुझे उस वक्त गालियां नहीं आती थीं। नाना बार-बार गालियां दिए जा रहा था। ऊपर से बिना शूटिंग किए घर जाने लगा। मैंने कहा कि पहले पैसे दो, फिर वापस जाओ। कम से कम मेरा नुकसान तो मत कराओ। यही बात कहते हुए मैंने उसका कुर्ता फाड़ दिया। अभी यह सब चल ही रहा था कि कैमरामैन ने शॉट रेडी कर दिया। आप फिल्म देखिए, एक सीन में नाना बनियान में बैठकर रोता दिखाई देगा। वह शॉट झगड़े के तुरंत बाद लिया गया था। खैर, शॉट परफेक्ट हो गया। बाद में नाना ने मुझे गले लगा लिया।’ सेफ्टी गार्ड पहनने से मना किया, आग में झुलसे
एक्टर नाना पाटेकर का 75 की उम्र में निधन:गोवा में घर पर कार्डियक अरेस्ट आया, 45 मिनट CPR के बाद भी नहीं बची जान

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह निधन हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें गोवा स्थित अपने घर पर हार्ट अटैक आया था। उन्हें बचाने के लिए करीब 45 मिनट तक CPR दी गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक नाना पाटेकर का सुबह 5:20 बजे निधन हुआ। उनके निधन के बाद मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज किया गया है और पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। ‘परिंदा’ में विलेन बने, 3 नेशनल अवॉर्ड जीता 1989 की फिल्म ‘परिंदा’ में नाना पाटेकर ने अन्ना का किरदार निभाया, जिसके लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। 1994 की ‘क्रांतिवीर’ के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। 1996 की ‘अग्निसाक्षी’ के लिए भी उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। इस तरह उन्हें करियर में 3 नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिले। भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए नाना पाटेकर को 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। अपने लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने हिंदी के साथ मराठी फिल्मों में भी काम किया। ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी बनकर कॉमेडी में भी छाए 2007 में आई फिल्म ‘वेलकम’ में नाना पाटेकर ने गैंगस्टर उदय शेट्टी का किरदार निभाया। इस कॉमेडी रोल को काफी पसंद किया गया। वे इसके सीक्वल ‘वेलकम बैक’ में भी उदय शेट्टी के किरदार में नजर आए। फिल्म प्रहार के लिए मिलिट्री ट्रेनिंग ली थी नाना पाटेकर का भारतीय सेना से जुड़ाव सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहा। फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ की तैयारी के दौरान उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ कड़ी सैन्य ट्रेनिंग ली थी। इस ट्रेनिंग में उन्होंने जवानों के साथ रहकर सैन्य जीवन को करीब से समझा। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी नाना पाटेकर जवानों के साथ रहे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने करीब दो हफ्ते से ज्यादा समय सैनिकों के बीच बिताया और अलग-अलग पोस्ट पर जाकर उनका हौसला बढ़ाया। बाद में उन्होंने बताया कि वे उस दौरान क्विक रिएक्शन टीम का हिस्सा भी रहे थे। नाना पाटेकर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि देश के लिए हर व्यक्ति को अपनी तरफ से कुछ न कुछ करना चाहिए। सेना के जवानों के प्रति उनका सम्मान कई मौकों पर सामने आया है। 2016 में उन्होंने कहा था कि उनके लिए देश सबसे पहले है और जवान ही देश के असली हीरो हैं।
'रामायण' फिल्म के मेकर पर इनकम टैक्स रेड की खबर:नमित मल्होत्रा की कंपनी प्राइम फोकस के मुंबई दफ्तरों में जांच; विदेशी लेन-देन से जुड़ा मामला

फिल्म ‘रामायण’ के निर्माता नमित मल्होत्रा की कंपनी ‘प्राइम फोकस लिमिटेड’ के मुंबई स्थित दफ्तरों पर छापेमारी की खबर है। CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक आयकर विभाग ने यह कार्रवाई विदेशी लेन-देन (फॉरेन रेमिटेंस) में हुई गड़बड़ियों के सिलसिले में की है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही बड़ी बजट की फिल्म रामायण की रिलीज से कुछ हफ्ते पहले यह कार्रवाई सामने आई है। विदेशी लेन-देन से जुड़ा है मामला आयकर विभाग की यह सर्च कार्रवाई विदेशों में पैसे भेजने से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं को लेकर की गई है। हालांकि, किस तरह के लेन-देन की जांच की जा रही है और इस कार्रवाई का दायरा कितना बड़ा है, इसे लेकर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी या खुलासा नहीं किया गया है। 7 अक्टूबर की सुबह जैसे ही इस रेड की खबर फैली, शेयर बाजार में प्राइम फोकस के शेयरों में तुरंत 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। हाल ही में सेट पर लगी थी मामूली आग आयकर विभाग की यह कार्रवाई मुंबई स्थित प्राइम फोकस स्टूडियोज में ‘रामायण’ के सेट के पास हुई आगजनी की घटना के कुछ दिनों बाद हुई है। उस समय स्टूडियो के पास मामूली आग लग गई थी। हालांकि, इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ था और स्थिति पर काबू पाने के तुरंत बाद शूटिंग का काम दोबारा शुरू कर दिया गया था। 4000 करोड़ के बजट में बन रही है ‘रामायण’ नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही यह फिल्म दो भागों में रिलीज होगी। इस पौराणिक फिल्म को लगभग 4,000 करोड़ रुपए के बजट पर तैयार किया जा रहा है। इसका संगीत ऑस्कर विजेता संगीतकार हंस जिमर और एआर रहमान मिलकर तैयार कर रहे हैं। फिल्म का पहला भाग 5 नवंबर 2026 को दिवाली के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज होगा, जबकि दूसरा भाग दिवाली 2027 में रिलीज करने की योजना है। हॉलीवुड स्तर का काम कर रही है DNEG नमित मल्होत्रा की कंपनी प्राइम फोकस मनोरंजन जगत में विजुअल इफेक्ट्स (VFX), एनिमेशन, पोस्ट-प्रोडक्शन और कंटेंट क्रिएशन का काम करती है। नमित मल्होत्रा इस रामायण फिल्म का निर्माण एक्टर यश की कंपनी ‘मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस’ और ‘DNEG’ के साथ मिलकर कर रही है। DNEG इस फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स संभाल रही है। फिल्म में रणबीर कपूर (भगवान राम), साई पल्लवी (माता सीता) और यश (रावण) की भूमिका में हैं। वहीं सनी देओल (हनुमान), रवि दुबे (लक्ष्मण), अरुण गोविल (दशरथ), लारा दत्ता (कैकेयी) और रकुल प्रीत सिंह (शूर्पणखा) के किरदारों में नजर आएंगे। ये खबर भी पढ़ें फिल्म ‘रामायण’ से जारी हुआ अरुण गोविल का पोस्टर:’राजा दशरथ’ के किरदार में दिखे; रामानंद सागर की ‘रामायण’ में राम बने थे रामानंद सागर के टीवी शो रामायण में भगवान राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल जल्द राजा दशरथ के रोल में नजर आएगे । वह नितेश तिवारी की दो हिस्सों में बन रही फिल्म रामायण में नजर आएंगे। पूरी खबर पढ़ें









