Sunday, 08 Nov 2026 | 03:16 AM

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400 साल पुराने मंदिर से निकली 'द वन' की कहानी:अरुणाभ बोले- कहानी लिखते समय जीभ कटी, फिर नॉन-वेज छोड़ने का फैसला किया

400 साल पुराने मंदिर से निकली 'द वन' की कहानी:अरुणाभ बोले- कहानी लिखते समय जीभ कटी, फिर नॉन-वेज छोड़ने का फैसला किया

टीवीएफ की चर्चित वेब सीरीज ‘पंचायत’ के निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा अब बड़े पर्दे पर ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ लेकर आ रहे हैं। फिल्म की कहानी भारतीय लोककथाओं, आस्था और संस्कृति से जुड़ी है। इसका आइडिया बिहार के करीब 400 साल पुराने वन देवी मंदिर की कहानी से आया। अरुणाभ कुमार ने एकता कपूर के साथ इसे प्रोड्यूस किया है और आनंदेश्वर द्विवेदी के साथ कहानी लिखी है। फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमन्ना भाटिया, मनीष पॉल और सुनील ग्रोवर नजर आएंगे। दैनिक भास्कर से बातचीत में अरुणाभ और दीपक ने फिल्म के आइडिया, 35-40 रातों तक चली शूटिंग, कलाकारों की मेहनत और कहानी से जुड़ा दिलचस्प किस्सा साझा किया। अरुणाभ ने बताया कि कहानी लिखते समय एक बार उनकी जीभ कट गई, जिसके बाद उन्होंने फिल्म पर काम करते हुए नॉन-वेज खाना छोड़ दिया। सवाल: सबसे पहले फिल्म के आइडिया के बारे में बताइए। क्या यह किसी लोककथा या सच्ची घटना से प्रेरित है? जवाब/अरुणाभ कुमार: इस कहानी के मूल स्रोत दो हैं। पहला श्रेय मैं एकता कपूर को देना चाहूंगा। हम अक्सर साथ में मंदिर जाते हैं। एक जनवरी को नए साल के मौके पर हम सिद्धिविनायक मंदिर जाते हैं। महाशिवरात्रि पर मुक्तेश्वर मंदिर भी गए हैं। इन यात्राओं के दौरान मंदिरों से जुड़ी कहानियों पर हमारी बातचीत होने लगी। एकता ने मुझे महालक्ष्मी मंदिर और मुक्तेश्वर मंदिर से जुड़ी कुछ अद्भुत कहानियां सुनाईं। इसके बाद मैंने उन्हें बताया कि बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में भी ऐसे कई मंदिर हैं, जिनके पीछे बहुत दिलचस्प कहानियां हैं। तब हमें एहसास हुआ कि भारतीय संस्कृति में लगभग हर मंदिर के पीछे कोई न कोई अद्भुत कहानी है। सवाल : इस कहानी से आपका व्यक्तिगत जुड़ाव कैसे हुआ और फिल्म बनाने का फैसला कैसे हुआ? जवाब/अरुणाभ कुमार: दूसरा स्रोत मेरी मां हैं। वह मुझे दुर्गा पूजा के दौरान देवी और शक्ति के अलग-अलग मंदिरों में ले जाया करती थीं। हम वहां पूजा करते थे, साड़ी चढ़ाते थे और कई दिनों तक मंदिर जाते थे। इसी दौरान वह मुझे पटना से करीब 35 किलोमीटर दूर बिहटा स्थित वन देवी मंदिर लेकर गई थीं। यह करीब 400 साल पुराना मंदिर है। मान्यता है कि 16वीं सदी में वैद्यनाथ मिश्रा नाम के व्यक्ति ने इसे स्थापित किया था। उस समय वहां के लोग जंगल से जुड़े रहस्यमय तत्वों से परेशान थे। उनसे बचने के लिए उन्होंने दुर्गा के दस रूपों की प्रार्थना की और उन्हीं में से एक रूप वन देवी के रूप में वहां स्थापित हुआ। मैं इस कहानी से बहुत प्रभावित हुआ। मैंने यह कहानी दीपक और फिर एकता को सुनाई। उन्हें भी यह कहानी बहुत पसंद आई। एकता ने कहा कि इतनी बड़ी और अद्भुत कहानी को बड़े पर्दे पर लाना चाहिए। उन्हें लगा कि यह कहानी बड़े कैनवास की मांग करती है। यहीं से फिल्म की शुरुआत हुई। सवाल: दीपक जी, जब आपने पहली बार यह कहानी सुनी तो आपकी क्या प्रतिक्रिया थी? जवाब/दीपक कुमार मिश्रा: मैं बहुत उत्साहित था। हिंदी सिनेमा में इस तरह की लोककथा बड़े पर्दे पर पहले नहीं दिखाई गई है। मुझे यह बात बहुत नई लगी। हालांकि कहानी लोककथा है, लेकिन इसकी कहानी आज के समाज से जुड़ी है। जब हम किसी ऐसे मंदिर में जाते हैं तो हमारे मन में कई सवाल आते हैं- क्या यह सच है? ऐसा क्यों हुआ? ऐसी मान्यताएं कैसे बनीं? यही जिज्ञासा मुझे इस कहानी की तरफ खींच लाई। सवाल: जब आप सेट पर पहुंचे तो आपके दिमाग में फिल्म की पहली तस्वीर क्या थी? जवाब/दीपक कुमार मिश्रा: हमने कहानी के उस हिस्से से शुरुआत की थी, जहां कहानी मुंबई से शुरू होती है। मेरी पहली कोशिश यही थी कि शुरुआत में यह कहानी बिल्कुल सामान्य इंसान की कहानी लगे। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़े, उसकी असली दुनिया धीरे-धीरे खुलती जाए और उसमें अलग-अलग आयाम जुड़ते जाएं। जब मैं मुंबई में शूट कर रहा था तो मेरे दिमाग में फिल्म की तस्वीर अलग थी। जब गांव और जंगल वाले हिस्से में पहुंचा तो वह तस्वीर पूरी तरह बदल गई। हर लोकेशन और हर दिन अपने साथ एक नई चुनौती लेकर आया। हमारी कोशिश थी कि कहानी को उसकी जरूरत के मुताबिक पूरी तरह जस्टिस दिया जाए। सवाल: इस फिल्म से जुड़ा कोई ऐसा अनुभव रहा, जब आप लोग कहानी में पूरी तरह डूब गए? जवाब/अरुणाभ कुमार: हां, एक बहुत मजेदार किस्सा है। मैंने पहली बार गोवा में दीपक को यह कहानी सुनाई थी। कहानी लिखने के दौरान एक बार मैंने नॉन-वेज खाया और उसी समय मेरी जीभ कट गई। इसके बाद मैंने मन में तय कर लिया कि जब तक इस कहानी पर काम करूंगा, नॉन-वेज नहीं खाऊंगा। धीरे-धीरे बात इतनी आगे बढ़ गई कि मैं वेजिटेरियन ही बन गया। सुनने में यह बात आपको अजीब लग सकती है, लेकिन जब आप किसी कहानी में पूरी तरह डूब जाते हैं तो ऐसी चीजें होने लगती हैं। कई बार ऐसा होता है कि लव स्टोरी लिखते समय आपको अपना पुराना प्यार याद आने लगता है। माता-पिता पर कहानी लिखते हैं तो अपने पेरेंट्स की याद आती है। इसी तरह हम भी इस कहानी में धीरे-धीरे पूरी तरह घुसते चले गए। सवाल: दीपक जी, इस फिल्म की शूटिंग के दौरान आपके साथ ऐसा क्या हुआ जो हमेशा याद रहेगा? जवाब/दीपक कुमार मिश्रा: हमने करीब 35-40 रातों तक लगातार शूटिंग की। पूरी टीम ऐसी हो गई थी कि शूट खत्म होने के बाद भी रात में नींद आना मुश्किल हो गया था। इस कहानी में रात अपने आप में एक कैरेक्टर है। हमने रात में लगातार एक्शन और एक्टिंग सीन्स शूट किए। सुबह 6 बजे तक शूटिंग के बाद भी कलाकार पूरी ऊर्जा के साथ काम करते थे। सबसे अच्छी बात यह थी कि पूरी टीम कहानी में इतनी डूब गई थी कि किसी को महसूस ही नहीं होता था कि हम इतनी रातों से लगातार जाग रहे हैं। सवाल: कलाकारों ने फिल्म के लिए कितनी मेहनत की? जवाब/दीपक कुमार मिश्रा: : सभी कलाकारों ने बहुत मेहनत की। सिद्धार्थ और तमन्ना अपने सीन्स को लेकर काफी सीरियस थे। वे बार-बार पूछते थे कि इसे और बेहतर कैसे किया जा सकता है। कल्चरल ऑथेंटिसिटी को लेकर भी वे बहुत सजग

संजय दत्त के मराठी बोलने से इनकार पर विवाद:बोले- 6 साल जेल में रहा, तब भी नहीं सीखी; शिवसेना नेता हंसे; शक्स ने धक्का दिया

संजय दत्त के मराठी बोलने से इनकार पर विवाद:बोले- 6 साल जेल में रहा, तब भी नहीं सीखी; शिवसेना नेता हंसे; शक्स ने धक्का दिया

महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर चल रहे विवाद के बीच बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त ने मराठी में बोलने से इनकार कर दिया। रविवार को मुंबई में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “मैं 6 साल तक येरवडा जेल में रहा, तब भी मराठी भाषा नहीं सीख पाया।” संजय दत्त के बयान पर अब विवाद हो गया है। यह कार्यक्रम ठाणे में शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आयोजित किया था। संजय दत्त मंच पर हिंदी में बोल रहे थे। इस पर मंत्री ने उन्हें मराठी में बोलने के लिए कहा, लेकिन 67 साल के एक्टर ने मजाकिया अंदाज में ऐसा करने से मना कर दिया। संजय दत्त और प्रताप सरनाईक मंच पर खड़े थे तभी मंत्री ने कहा, “आजकल मैं सभी लोगों को मराठी सिखा रहा हूं। तो मैंने सोचा कि क्यों न हम सब संजय दत्त से मराठी में बात करवाएं। वह हिंदी में बात करते हैं, लेकिन हम सभी मराठी समझते हैं।” मंत्री की बात पर मंच पर मौजूद लोगों के चेहरे पर हंसी दिखाई दी। इसके बाद संजय दत्त ने माइक लिया और पहले “हर हर महादेव” के नारे लगाए। फिर उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “प्रताप भाई, मैं 6 साल जेल में रहा, येरवडा में। तब भी मराठी नहीं सीख पाया। मैंने थोड़ी सी सीखी थी।” बीजेपी विधायक ने शिवसेना मंत्री पर निशाना साधा संजय दत्त के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रताप सरनाईक पर सवाल उठाए। नरेंद्र मेहता ने कहा, “अगर कोई कलाकार मराठी नहीं जानता तो उस पर आप हंसते हैं, लेकिन दूसरी तरफ आम रिक्शा चालकों पर मराठी भाषा को लेकर दबाव बनाया जाता है। यह कैसा न्याय है? एकनाथ शिंदे ने उन्हें कभी कुछ करने नहीं दिया। वहां डमी मंत्री की जरूरत है, इसलिए वे हैं।” रैली में संजय दत्त को शख्स ने दिया धक्का, एक्टर ने हाथ पकड़कर खींचा मंच पर कुछ समय रहने के बाद संजय दत्त अपनी टीम के साथ रवाना होने लगे। वह उतर रहे थे, तभी एक शख्स तेजी से उन्हें धक्का देते हुए पास से गुजरा। संजय दत्त ने इसे नजरअंदाज नहीं किया और उस शख्स का हाथ पकड़कर अपनी ओर खींच लिया। जैसे ही शख्स ने देखा कि वह संजय दत्त हैं, उसने तुरंत माफी मांग ली। मराठी न बोलने पर सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल संजय दत्त के मराठी बोलने से इनकार के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। एक यूजर ने लिखा, “सिर्फ संजय दत्त या सलमान खान ही किसी मंत्री को इस तरह मना कर सकते हैं और फिर भी मुस्कुरा सकते हैं।” एक यूजर ने लिखा, “मतलब साफ है, मराठी भाषा का अनिवार्य होना सिर्फ शहर के ऑटो-रिक्शा और टैक्सी वालों के लिए है, बड़े लोगों के लिए नहीं।” एक ने कहा, “विडंबना देखिए, काश शहर के ऑटो वाले भी ऐसा कह पाते और भारी जुर्माने से बच पाते।” कुछ लोग मराठी न बोलने पर संजय दत्त को ट्रोल भी कर रहे हैं। एक ने कहा, “आप पूरी जिंदगी महाराष्ट्र में रहे, फिर भी आपको मराठी नहीं आती। यह शर्मनाक है।” संजय दत्त के वो बयान और डायलॉग, जिनसे हुआ विवाद 1. 2009: चुनावी सभा में TADA को लेकर बयान 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान संजय दत्त समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार कर रहे थे। उत्तर प्रदेश के मऊ में एक चुनावी सभा के दौरान उन्होंने अपने पिता सुनील दत्त और मां नरगिस का जिक्र करते हुए 1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद अपने खिलाफ हुई कार्रवाई पर बात की। संजय दत्त ने कहा था कि उनकी मां मुस्लिम थीं और इसी वजह से उनके परिवार को परेशान किया गया। उन्होंने अपने खिलाफ TADA के तहत हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया। इस बयान को लेकर विवाद हुआ और चुनाव आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया। संजय दत्त के बयान को चुनाव प्रचार में सांप्रदायिक संदर्भ के तौर पर देखा गया। 2. 2016: सलमान खान को बताया ‘एरोगेंट’ संजय दत्त और सलमान खान की दोस्ती बॉलीवुड की चर्चित दोस्तियों में रही है। ऐसे में 2016 में एक कार्यक्रम के दौरान जब संजय दत्त से सलमान खान को एक शब्द में बयान करने के लिए कहा गया और उन्होंने ‘एरोगेंट’ कहा, तो यह जवाब सुर्खियों में आ गया। मीडिया में दोनों के बीच अनबन की अटकलें लगने लगीं। हालांकि, संजय दत्त ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनके और सलमान के बीच कोई झगड़ा नहीं है। 3. 2026: ‘धुरंधर’ के डायलॉग को लेकर विवाद फिल्म ‘धुरंधर में संजय दत्त के किरदार एसपी चौधरी असलम के एक डायलॉग पर बलोच समुदाय ने आपत्ति जताई। विवाद के बाद थिएटर रिलीज के वर्जन में उस हिस्से को म्यूट किया गया।

'पंचायत' के दामाद पहुंचे बिग बॉस के घर:सलमान खान के पास रोए; बोले- सैफ-करीना की शादी में होटल के किचन में सफाई भी की

'पंचायत' के दामाद पहुंचे बिग बॉस के घर:सलमान खान के पास रोए; बोले- सैफ-करीना की शादी में होटल के किचन में सफाई भी की

‘पंचायत’ वेब सीरीज में दामाद का रोल निभाने वाले राजस्थान के आसिफ खान बिग बॉस में नजर आएंगे। बिग बॉस के मंच पर वे सलमान खान के पास रोने लग गए। इस दौरान उन्होंने कहा- अम्मी आज सलमान खान के साथ खड़ा हूं। आसिफ ने कहा- पढ़ाई में मन नहीं था, स्कूल में नाटक करता था। तब टीचर की तारीफ मिलती थी। इस बीच 2008 में पिता का निधन हो गया। प्राइवेट से सरकारी स्कूल में आ गया। घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए साथ-साथ काम किया। चित्तौड़गढ़ के निंबाहेड़ा से जयपुर आने का मौका मिला तो थिएटर किया। अभिनय की बारीकियां सीखीं। मुंबई आकर सपने पूरे हुए और पंचायत वेब सीरीज से लोगों का बहुत प्यार मिला। आसिफ ने अपने संघर्ष के दिनों में सैफ अली खान और करीना कपूर की शादी में होटल के किचन में बर्तन भी धोए। करीब एक साल पहले बीमारी के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर जिंदगी को लेकर एक भावुक संदेश साझा किया था। उन्होंने लिखा था- 6 घंटे तक एक चीज को देखनेस के बाद उन्हें एहसास हुआ कि जिंदगी बहुत छोटी है। एक दिन को सामान्य मानकर नहीं चलना चाहिए, क्योंकि सब कुछ पलभर में बदल सकता है। उन्होंने लोगों से अपनी जिंदगी में मौजूद चीजों के लिए आभार व्यक्त करने और यह याद रखने की बात कही थी। आसिफ ने अपने जीवन और करियर के बारे में कई बातें साझा की, पढ़िए- सलमान खान के सामने 16 साल पुराना संघर्ष बताया 35 साल के आसिफ ने बिग बॉस के मंच पर 16 साल पुराना किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि जब सलमान खान की फिल्म ‘रेडी’ बन रही थी। उस समय फिल्म के एक गाने में वह भी भीड़ के बीच बैक डांसर के तौर पर शामिल हुआ। उस समय शायद सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन वह उसी सलमान खान के सामने खड़े होंगे और उनके साथ मंच पर डांस करेंगे। बिग बॉस के मंच पर सलमान खान ने उसी गाने पर आसिफ के साथ डांस किया। यह पल आसिफ के लिए बेहद भावुक कर देने वाला था। पढ़ाई से बचने के लिए नाटक करते थे आसिफ के पिता एक सीमेंट कंपनी में काम करते थे। मां गृहिणी थी। आसिफ ने बताया कि वे इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ते थे, लेकिन पढ़ाई में उनका मन नहीं लगता था। जैसे-तैसे वह परीक्षा पास करते थे। पढ़ाई से बचने के लिए एनुअल फंक्शन में नाटक में हिस्सा लेते थे। इस छोटे से फैसले ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। पहली बार उन्हें दोस्तों के साथ-साथ उन टीचरों से भी तारीफ मिली, जो पढ़ाई के लिए कभी उनकी प्रशंसा नहीं करते थे। इसी के कारण अलग-अलग नाटक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगे। धीरे-धीरे चित्तौड़गढ़ और आस-पास के इलाकों में उनकी पहचान एक अच्छे कलाकार के रूप में बनने लगी। पिता के निधन के बाद जीवन में आया संघर्ष आसिफ ने बताया कि पिता का निधन हुआ तब वह सातवीं क्लास में पढ़ते थे। परिवार पर आर्थिक संकट आ गया था। बड़े भाई पढ़ाई में अच्छे थे, इसलिए परिवार ने तय किया कि भाई अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे और वह घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए काम करेंगे। निजी स्कूल की फीस भरना मुश्किल हो गया था। तब सरकारी स्कूल में एडमिशन लिया था। परिवार की मदद के लिए काम करना भी शुरू कर दिया था। सुबह से दोपहर तक काम करने के बाद वह स्कूल जाते थे। स्कूल के बाद भी काम करते थे। करीब डेढ़-दो साल तक यह सिलसिला चलता रहा। इस दौरान उन्होंने कई नौकरियां कीं। कुछ समय अपने मामा के साथ स्टील फर्नीचर का काम भी किया। जयपुर से मुंबई गए, पंचायत में दामादजी का रोल मिल आसिफ ने जयपुर में कई साल तक थिएटर किया और यहीं से अभिनय की बारीकियां सीखीं। रंगमंच ने उन्हें मंच पर आत्मविश्वास दिया और अभिनय को पेशे के रूप में आगे बढ़ाने की दिशा दिखाई। इसके बाद वे मुंबई गए, जहां शुरुआत में आर्थिक परेशानी और छोटे-मोटे कामों से गुजरना पड़ा। लेकिन धीरे-धीरे उन्हें अभिनय के मौके मिलने लगे और उन्होंने फिल्मों, वेब सीरीज में काम करना शुरू किया। आसिफ खान को सबसे ज्यादा चर्चा लोकप्रिय वेब सीरीज ‘पंचायत’ से मिली। सीरीज में उनके किरदार ने दर्शकों का ध्यान खींचा और उनके अभिनय को खास पहचान मिली। इसके बाद वह मनोरंजन जगत में एक पहचाना हुआ चेहरा बन गए।

अमेरिका में यात्री को फ्लाइट में टेप से बांधा:मारपीट और हंगामा कर रहा था, विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी

अमेरिका में यात्री को फ्लाइट में टेप से बांधा:मारपीट और हंगामा कर रहा था, विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी

अमेरिका में अमेरिकन एयरलाइंस की एक फ्लाइट में 67 साल के यात्री ने अचानक हंगामा शुरू कर दिया। उसने पहले फ्लाइट अटेंडेंट और दूसरे यात्रियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। इसके बाद पास बैठे यात्री पर हमला कर दिया और बीच-बचाव करने आई एक महिला को भी धक्का दिया। हालात बिगड़ने पर तीन यात्रियों ने उसे काबू कर डक्ट टेप और जिप टाई से सीट पर बांध दिया। घटना के कारण फ्लाइट को बाल्टीमोर डायवर्ट करना पड़ा। यह घटना 3 सितंबर की रात अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट 618 में हुई। विमान टेक्सास के डलास-फोर्ट वर्थ से न्यू जर्सी के नेवार्क जा रहा था। जीसस और नरक की बातें करते हुए चिल्लाने लगा रिपोर्ट्स के मुताबिक, उड़ान के करीब दो घंटे बाद यात्री अचानक आक्रामक हो गया। वह जीसस और नरक में जाने की बातें करते हुए चिल्ला रहा था। उसने एक अश्वेत फ्लाइट अटेंडेंट के खिलाफ नस्लीय गाली दी और समलैंगिक लोगों को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। इसके बाद वह पास बैठे यात्री से भिड़ गया। गवाहों के मुताबिक, उसने पहले उस यात्री के लैपटॉप पर वार किया और फिर उसका गला पकड़ लिया। एक महिला यात्री ने बीच-बचाव की कोशिश की तो उसने उसकी तरफ भी हमला करने की कोशिश की। 3 यात्रियों ने मिलकर काबू किया आरोपी के हिंसक होने के बाद तीन पुरुष यात्री उसकी तरफ मदद के लिए आगे आए। उन्होंने मिलकर उसे रोकने की कोशिश की। इनमें रिटायर्ड अफसर जुआन मेजिया भी शामिल थे। मेजिया के मुताबिक, कुछ ही सेकंड में विमान का माहौल पूरी तरह बदल गया। पहले सब कुछ सामान्य था, लेकिन यात्री अचानक चिल्लाने और मारपीट करने लगा। आरोपी को रोकने की कोशिश के दौरान उसने मेजिया के हाथ पर काट लिया। इसके बाद फ्लाइट क्रू ने यात्रियों को डक्ट टेप और जिप टाई दीं। यात्रियों ने उसे सीट से बांध दिया और उसके हाथ जिप टाई से सुरक्षित कर दिए। बाल्टीमोर में उतरते ही गिरफ्तार फ्लाइट को बाल्टीमोर-वॉशिंगटन इंटरनेशनल थर्गूड मार्शल एयरपोर्ट डायवर्ट किया गया। विमान के उतरने के बाद मैरीलैंड ट्रांसपोर्टेशन अथॉरिटी पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया। पुलिस के मुताबिक, उसकी पहचान 67 वर्षीय आर्थर लेन लुंडीन के रूप में हुई है। वह एरिजोना के टक्सन का रहने वाला है। उसके खिलाफ सेकंड-डिग्री असॉल्ट और डिसऑर्डरली कंडक्ट के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने बताया कि लुंडीन के हाथ में एक खुला घाव भी था। उसे मौके पर पैरामेडिक्स ने देखा और इलाज के बाद यात्रा के लिए सुरक्षित बताया। कोर्ट ने रिहा किया, 19 अक्टूबर को सुनवाई स्थानीय पुलिस की कार्रवाई के अलावा FBI भी मामले की जांच कर रही है। एजेंसी यह देख रही है कि घटना में संघीय कानून के तहत भी कोई मामला बनता है या नहीं। FAA भी घटना की जांच कर रही है। कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक, लुंडीन शुरुआती सुनवाई में पेश हुआ और उसे अपने मुचलके पर रिहा कर दिया गया। उसकी अगली सुनवाई 19 अक्टूबर को तय की गई है। रियल एस्टेट कंपनी ने नौकरी से हटाया लुंडीन एरिजोना की रियल एस्टेट कंपनी लॉन्ग रियलिटी में काम करता था। घटना के बाद कंपनी ने उसे हटा दिया और वेबसाइट से उसका प्रोफाइल भी डिलीट कर दिया। अमेरिकन एयरलाइंस ने कहा कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है। लुंडीन के विमान से उतरने के बाद फ्लाइट ने नेवार्क के लिए अपनी यात्रा पूरी की

अमेरिका में यात्री को फ्लाइट में टेप से बांधा:मारपीट और हंगामा कर रहा था, विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी

अमेरिका में यात्री को फ्लाइट में टेप से बांधा:मारपीट और हंगामा कर रहा था, विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी

अमेरिका में अमेरिकन एयरलाइंस की एक फ्लाइट में 67 साल के यात्री ने अचानक हंगामा शुरू कर दिया। उसने पहले फ्लाइट अटेंडेंट और दूसरे यात्रियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। इसके बाद पास बैठे यात्री पर हमला कर दिया और बीच-बचाव करने आई एक महिला को भी धक्का दिया। हालात बिगड़ने पर तीन यात्रियों ने उसे काबू कर डक्ट टेप और जिप टाई से सीट पर बांध दिया। घटना के कारण फ्लाइट को बाल्टीमोर डायवर्ट करना पड़ा। यह घटना 3 सितंबर की रात अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट 618 में हुई। विमान टेक्सास के डलास-फोर्ट वर्थ से न्यू जर्सी के नेवार्क जा रहा था। जीसस और नरक की बातें करते हुए चिल्लाने लगा रिपोर्ट्स के मुताबिक, उड़ान के करीब दो घंटे बाद यात्री अचानक आक्रामक हो गया। वह जीसस और नरक में जाने की बातें करते हुए चिल्ला रहा था। उसने एक अश्वेत फ्लाइट अटेंडेंट के खिलाफ नस्लीय गाली दी और समलैंगिक लोगों को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। इसके बाद वह पास बैठे यात्री से भिड़ गया। गवाहों के मुताबिक, उसने पहले उस यात्री के लैपटॉप पर वार किया और फिर उसका गला पकड़ लिया। एक महिला यात्री ने बीच-बचाव की कोशिश की तो उसने उसकी तरफ भी हमला करने की कोशिश की। 3 यात्रियों ने मिलकर काबू किया आरोपी के हिंसक होने के बाद तीन पुरुष यात्री उसकी तरफ मदद के लिए आगे आए। उन्होंने मिलकर उसे रोकने की कोशिश की। इनमें रिटायर्ड अफसर जुआन मेजिया भी शामिल थे। मेजिया के मुताबिक, कुछ ही सेकंड में विमान का माहौल पूरी तरह बदल गया। पहले सब कुछ सामान्य था, लेकिन यात्री अचानक चिल्लाने और मारपीट करने लगा। आरोपी को रोकने की कोशिश के दौरान उसने मेजिया के हाथ पर काट लिया। इसके बाद फ्लाइट क्रू ने यात्रियों को डक्ट टेप और जिप टाई दीं। यात्रियों ने उसे सीट से बांध दिया और उसके हाथ जिप टाई से सुरक्षित कर दिए। बाल्टीमोर में उतरते ही गिरफ्तार फ्लाइट को बाल्टीमोर-वॉशिंगटन इंटरनेशनल थर्गूड मार्शल एयरपोर्ट डायवर्ट किया गया। विमान के उतरने के बाद मैरीलैंड ट्रांसपोर्टेशन अथॉरिटी पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया। पुलिस के मुताबिक, उसकी पहचान 67 वर्षीय आर्थर लेन लुंडीन के रूप में हुई है। वह एरिजोना के टक्सन का रहने वाला है। उसके खिलाफ सेकंड-डिग्री असॉल्ट और डिसऑर्डरली कंडक्ट के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने बताया कि लुंडीन के हाथ में एक खुला घाव भी था। उसे मौके पर पैरामेडिक्स ने देखा और इलाज के बाद यात्रा के लिए सुरक्षित बताया। कोर्ट ने रिहा किया, 19 अक्टूबर को सुनवाई स्थानीय पुलिस की कार्रवाई के अलावा FBI भी मामले की जांच कर रही है। एजेंसी यह देख रही है कि घटना में संघीय कानून के तहत भी कोई मामला बनता है या नहीं। FAA भी घटना की जांच कर रही है। कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक, लुंडीन शुरुआती सुनवाई में पेश हुआ और उसे अपने मुचलके पर रिहा कर दिया गया। उसकी अगली सुनवाई 19 अक्टूबर को तय की गई है। रियल एस्टेट कंपनी ने नौकरी से हटाया लुंडीन एरिजोना की रियल एस्टेट कंपनी लॉन्ग रियलिटी में काम करता था। घटना के बाद कंपनी ने उसे हटा दिया और वेबसाइट से उसका प्रोफाइल भी डिलीट कर दिया। अमेरिकन एयरलाइंस ने कहा कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है। लुंडीन के विमान से उतरने के बाद फ्लाइट ने नेवार्क के लिए अपनी यात्रा पूरी की ———————– यह खबर भी पढ़ें… मेक्सिको में आतिशबाजी के दौरान धमाका, 10 की मौत:64 घायल; चर्च में सेलिब्रेशन चल रहा था, सैकड़ों लोग जमा थे मेक्सिको में धार्मिक उत्सव के दौरान शनिवार को बड़ा हादसा हो गया। यहां आतिशबाजी के सामान में जोरदार धमाका होने से कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 60 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

रानी पद्मावती का जौहर कायरता नहीं बहादुरी:स्वरा भास्कर के बयान पर भड़के धीरेंद्र शास्त्री, धर्म परिवर्तन पर भी तंज कसा

रानी पद्मावती का जौहर कायरता नहीं बहादुरी:स्वरा भास्कर के बयान पर भड़के धीरेंद्र शास्त्री, धर्म परिवर्तन पर भी तंज कसा

धीरेंद्र शास्त्री ने स्वरा भास्कर के उस बयान की निंदा की है, जिसमें उन्होंने रानी पद्मावती के जौहर को कायरता कहा था। स्वरा बयान पर सफाई दे चुके हैं, लेकिन विवाद जारी है। अब बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने स्वरा भास्कर के जौहर को ‘कायरता’ कहने वाले बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जौहर कायरता नहीं, बल्कि बहादुरी, भक्ति और पति के प्रति समर्पण है। यह बयान पश्चिम बंगाल के लीलुआ वर्कशॉप ग्राउंड में चल रही ‘हनुमत कथा’ के दूसरे दिन दिया गया। कार्यक्रम में दिए बयान के मुताबिक, धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनसे इस मुद्दे पर बिना बात किए रहा नहीं जा रहा था। धीरेंद्र शास्त्री- आप संस्कृति के बारे में क्या जानते हैं? धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, ‘एक तथाकथित महिला ने रानी पद्मावती के बारे में बयान दिया। उस महिला ने जौहर को कायरता कहा। ऐ नाककटु, चंडालन, जौहर कायरता नहीं है, यह बहादुरी, भक्ति और पति के प्रति समर्पण है। आप जौहर की संस्कृति के बारे में क्या जानते हैं?’ आगे उन्होंने कहा, ‘जो लोग आस्था का विरोध करते हैं, वे जौहर को समझ ही नहीं सकते। कुछ लोग तो भईया को सईयां बना देते हैं, वे जौहर के बारे में क्या जानेंगे? अगर मेरी बातों से किसी को बुरा लगे या उनकी भावनाएं आहत हों, तो भी मैं सच ही कहूंगा।’ क्या था स्वरा भास्कर का पूरा बयान, क्यों हुआ विवाद? 31 अगस्त को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘वुमन, लाइफ, फ्रीडम’ टॉक में स्वरा ने फिल्म पद्मावत के जौहर सीन का जिक्र करते हुए कहा की इससे रेप सर्वाइवर्स तक गलत संदेश जा सकता है। उन्होंने आगे कहा ‘क्या हम सर्वाइवर्स को यही बताना चाहते हैं कि वे जीने के लायक नहीं हैं, कि अगर आप सच में इज्जतदार और बहादुर महिला होतीं, तो आपने खुद को मार लिया होता? क्या हम यह कह रहे हैं कि रेप किसी महिला की जिंदगी का अंत है?’ एक सीन में गर्भवती महिला का पेट दिखाया गया है जो जौहर करने जा रही है। स्वरा ने कहा था, “यह देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया था और मैंने थियेटर में ही ‘छी’ कह दिया था। 5 दिन विचार करने के बाद मैंने डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को ओपन लेटर लिखा था।” स्वरा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन पर ऐतिहासिक बलिदान का अपमान करने का आरोप लगाया था। विवाद बढ़ने पर स्वरा ने दी सफाई स्वरा के बयान पर विवाद हो गया। कुछ समय बाद उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर मेरा एक क्लिप वायरल हो रहा है। मुझसे पूछा गया था कि पद्मावत देखने के बाद मैंने ओपन लेटर क्यों लिखा था। मैं साफ करना चाहती हूं कि मैंने रानी पद्मावती या महल की बाकी महिलाओं को कायर नहीं कहा। अगर गाली देनी है तो सही बात पर दीजिए। मैंने कहा था कि अगर मैं रेप पीड़िता होती, तो क्लाइमेक्स देखकर मुझे लगता कि रेप के बाद जिंदा बचकर मैंने कायरता दिखाई है।” ‘क्या महिला की पवित्रता उसकी जान से ज्यादा कीमती है?’ स्वरा ने कहा कि देश में आज भी रेप एक महामारी जैसा बन चुका है। हाल ही में दिल्ली में चलती बस में हुए गैंगरेप का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हमें ऐसी फिल्में बनानी चाहिए जो संदेश दें कि महिला की पवित्रता उसकी जिंदगी से ज्यादा कीमती है? उन्होंने निर्भया केस का उदाहरण देते हुए कहा कि निर्भया ने आखिरी सांस तक अपनी जिंदगी के लिए लड़ाई लड़ी थी। किसी भी महिला की जीने की इच्छा को कम नहीं आंकना चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी से सोशल मीडिया पर हुई बहस स्वरा के बयान पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रियंका ने लिखा- ‘अगर विकल्प विजेताओं की गुलाम बनने और उनके हरम में रखी जाने वाली सेक्स स्लेव बनने के बीच हो, तो कई महिलाएं पहला विकल्प चुनेंगी। कुछ महिलाएं दूसरा विकल्प चुन सकती हैं। हालांकि, आप अपनी पसंद के अनुसार इनमें से किसी एक को चुन सकते हैं। आपकी इस पसंद से कोई सहमत हो या असहमत, इस पर बहस की जा सकती है, लेकिन यह एक चॉइस थी।’ इस पर जवाब देते हुए स्वरा ने लिखा, “प्रियंका जी, आप असल बात नहीं समझ रही हैं। बात जौहर करने वाली महिलाओं की पसंद की नहीं, बल्कि इस बात की है कि हम किस चीज को महिमामंडित कर रहे हैं। क्या रेप के बाद किसी सर्वाइवर को जीने का हक नहीं है?” क्या है पद्मावत का जौहर सीन फिल्म में जौहर का सीन क्लाइमैक्स के पास आता है। अलाउद्दीन खिलजी की सेना राजपूतों को हरा देती है और चित्तौड़ के किले में घुस जाती है। दीपिका पादुकोण का किरदार ‘रानी पद्मावती’ किले की महिलाओं के साथ जौहर करती हैं। फिल्म में इसे पकड़े जाने से बचने के लिए खुद को आग के हवाले करने की घटना के तौर पर दिखाया गया है।

रानी पद्मावती का जौहर कायरता नहीं बहादुरी:स्वरा भास्कर के बयान पर भड़के धीरेंद्र शास्त्री, धर्म परिवर्तन पर भी तंज कसा

रानी पद्मावती का जौहर कायरता नहीं बहादुरी:स्वरा भास्कर के बयान पर भड़के धीरेंद्र शास्त्री, धर्म परिवर्तन पर भी तंज कसा

धीरेंद्र शास्त्री ने स्वरा भास्कर के उस बयान की निंदा की है, जिसमें उन्होंने रानी पद्मावती के जौहर को कायरता कहा था। स्वरा बयान पर सफाई दे चुके हैं, लेकिन विवाद जारी है। अब बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने स्वरा भास्कर के जौहर को ‘कायरता’ कहने वाले बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जौहर कायरता नहीं, बल्कि बहादुरी, भक्ति और पति के प्रति समर्पण है। यह बयान पश्चिम बंगाल के लीलुआ वर्कशॉप ग्राउंड में चल रही ‘हनुमत कथा’ के दूसरे दिन दिया गया। कार्यक्रम में दिए बयान के मुताबिक, धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनसे इस मुद्दे पर बिना बात किए रहा नहीं जा रहा था। धीरेंद्र शास्त्री- आप संस्कृति के बारे में क्या जानते हैं? धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, ‘एक तथाकथित महिला ने रानी पद्मावती के बारे में बयान दिया। उस महिला ने जौहर को कायरता कहा। ऐ नाककटु, चंडालन, जौहर कायरता नहीं है, यह बहादुरी, भक्ति और पति के प्रति समर्पण है। आप जौहर की संस्कृति के बारे में क्या जानते हैं?’ आगे उन्होंने कहा, ‘जो लोग आस्था का विरोध करते हैं, वे जौहर को समझ ही नहीं सकते। कुछ लोग तो भईया को सईयां बना देते हैं, वे जौहर के बारे में क्या जानेंगे? अगर मेरी बातों से किसी को बुरा लगे या उनकी भावनाएं आहत हों, तो भी मैं सच ही कहूंगा।’ क्या था स्वरा भास्कर का पूरा बयान, क्यों हुआ विवाद? 31 अगस्त को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘वुमन, लाइफ, फ्रीडम’ टॉक में स्वरा ने फिल्म पद्मावत के जौहर सीन का जिक्र करते हुए कहा की इससे रेप सर्वाइवर्स तक गलत संदेश जा सकता है। उन्होंने आगे कहा ‘क्या हम सर्वाइवर्स को यही बताना चाहते हैं कि वे जीने के लायक नहीं हैं, कि अगर आप सच में इज्जतदार और बहादुर महिला होतीं, तो आपने खुद को मार लिया होता? क्या हम यह कह रहे हैं कि रेप किसी महिला की जिंदगी का अंत है?’ एक सीन में गर्भवती महिला का पेट दिखाया गया है जो जौहर करने जा रही है। स्वरा ने कहा था, “यह देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया था और मैंने थियेटर में ही ‘छी’ कह दिया था। 5 दिन विचार करने के बाद मैंने डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को ओपन लेटर लिखा था।” स्वरा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन पर ऐतिहासिक बलिदान का अपमान करने का आरोप लगाया था। विवाद बढ़ने पर स्वरा ने दी सफाई स्वरा के बयान पर विवाद हो गया। कुछ समय बाद उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर मेरा एक क्लिप वायरल हो रहा है। मुझसे पूछा गया था कि पद्मावत देखने के बाद मैंने ओपन लेटर क्यों लिखा था। मैं साफ करना चाहती हूं कि मैंने रानी पद्मावती या महल की बाकी महिलाओं को कायर नहीं कहा। अगर गाली देनी है तो सही बात पर दीजिए। मैंने कहा था कि अगर मैं रेप पीड़िता होती, तो क्लाइमेक्स देखकर मुझे लगता कि रेप के बाद जिंदा बचकर मैंने कायरता दिखाई है।” ‘क्या महिला की पवित्रता उसकी जान से ज्यादा कीमती है?’ स्वरा ने कहा कि देश में आज भी रेप एक महामारी जैसा बन चुका है। हाल ही में दिल्ली में चलती बस में हुए गैंगरेप का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हमें ऐसी फिल्में बनानी चाहिए जो संदेश दें कि महिला की पवित्रता उसकी जिंदगी से ज्यादा कीमती है? उन्होंने निर्भया केस का उदाहरण देते हुए कहा कि निर्भया ने आखिरी सांस तक अपनी जिंदगी के लिए लड़ाई लड़ी थी। किसी भी महिला की जीने की इच्छा को कम नहीं आंकना चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी से सोशल मीडिया पर हुई बहस स्वरा के बयान पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रियंका ने लिखा- ‘अगर विकल्प विजेताओं की गुलाम बनने और उनके हरम में रखी जाने वाली सेक्स स्लेव बनने के बीच हो, तो कई महिलाएं पहला विकल्प चुनेंगी। कुछ महिलाएं दूसरा विकल्प चुन सकती हैं। हालांकि, आप अपनी पसंद के अनुसार इनमें से किसी एक को चुन सकते हैं। आपकी इस पसंद से कोई सहमत हो या असहमत, इस पर बहस की जा सकती है, लेकिन यह एक चॉइस थी।’ इस पर जवाब देते हुए स्वरा ने लिखा, “प्रियंका जी, आप असल बात नहीं समझ रही हैं। बात जौहर करने वाली महिलाओं की पसंद की नहीं, बल्कि इस बात की है कि हम किस चीज को महिमामंडित कर रहे हैं। क्या रेप के बाद किसी सर्वाइवर को जीने का हक नहीं है?” क्या है पद्मावत का जौहर सीन फिल्म में जौहर का सीन क्लाइमैक्स के पास आता है। अलाउद्दीन खिलजी की सेना राजपूतों को हरा देती है और चित्तौड़ के किले में घुस जाती है। दीपिका पादुकोण का किरदार ‘रानी पद्मावती’ किले की महिलाओं के साथ जौहर करती हैं। फिल्म में इसे पकड़े जाने से बचने के लिए खुद को आग के हवाले करने की घटना के तौर पर दिखाया गया है।

जर्मनी में कट्टर दक्षिणपंथी पार्टी पहली बार सत्ता के करीब:राज्य चुनाव में AfD को 44% वोट; इलॉन मस्क ने दी बधाई

जर्मनी में कट्टर दक्षिणपंथी पार्टी पहली बार सत्ता के करीब:राज्य चुनाव में AfD को 44% वोट; इलॉन मस्क ने दी बधाई

जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने सक्सोनी-आनहाल्ट के राज्य चुनाव में बड़ी जीत हासिल की है। एग्जिट पोल के मुताबिक, AfD को करीब 44% वोट मिले हैं और वह सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। यह नतीजा चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और उनकी कंजरवेटिव पार्टी के लिए बड़ा झटका है। अमेरिकी कारोबारी इलॉन मस्क ने भी AfD की जीत पर बधाई दी। AfD पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी जर्मन राज्य में सत्ता के इतने करीब पहुंची है। हालांकि, जर्मनी की मुख्य पार्टियां उसके साथ गठबंधन करने से इनकार करती रही हैं। जर्मनी की राजनीति में AfD की जीत कितनी बड़ी है? जर्मनी में नाजी शासन के इतिहास की वजह से मुख्यधारा की पार्टियां लंबे समय से बहुत ज्यादा दक्षिणपंथी मानी जाने वाली पार्टियों से दूरी रखती हैं। AfD पर भी दक्षिणपंथी चरमपंथ के आरोप लगते रहे हैं। इसलिए उसका किसी राज्य में सत्ता के करीब पहुंचना जर्मन राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। और बात सिर्फ इस एक राज्य की नहीं है। AfD राष्ट्रीय स्तर पर भी सबसे लोकप्रिय पार्टी बन चुकी है। हालिया INSA सर्वे में उसे करीब 28% समर्थन मिला है, जबकि मर्ज की CDU/CSU करीब 20% पर है। AfD की राजनीति में इमिग्रेशन, शरणार्थी और जर्मनी की राष्ट्रीय पहचान बड़े मुद्दे हैं। जर्मनी में AfD का समर्थन क्यों बढ़ रहा है? AfD खुद को मौजूदा पार्टियों के विकल्प के तौर पर पेश करती है। चुनाव प्रचार में पार्टी ने इमिग्रेशन, सुरक्षा और जर्मन पहचान को लेकर लोगों की चिंता को मुद्दा बनाया। उसके समर्थकों का कहना है कि मौजूदा पार्टियां इन समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रही हैं। इसी नाराजगी का फायदा AfD को खासकर पूर्वी जर्मनी में मिल रहा है। AfD ने इस चुनाव में 35 साल के उलरिश जिगमुंड को उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने नतीजे को ऐतिहासिक बताया। जिगमुंड ने कहा कि लोगों ने साफ कर दिया है कि वे राजनीतिक बदलाव चाहते हैं और इसके लिए AfD को मौका देना चाहते हैं। उन्होंने इसे 2029 के राष्ट्रीय चुनाव से पहले अहम कदम बताया। खबर अपडेट हो रही है…

जर्मनी में कट्टर दक्षिणपंथी पार्टी पहली बार सत्ता के करीब:राज्य चुनाव में AfD को 44% वोट; इलॉन मस्क ने दी बधाई

जर्मनी में कट्टर दक्षिणपंथी पार्टी पहली बार सत्ता के करीब:राज्य चुनाव में AfD को 44% वोट; इलॉन मस्क ने दी बधाई

जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने सक्सोनी-आनहाल्ट के राज्य चुनाव में बड़ी जीत हासिल की है। एग्जिट पोल के मुताबिक, AfD को करीब 44% वोट मिले हैं और वह सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। यह नतीजा चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और उनकी कंजरवेटिव पार्टी के लिए बड़ा झटका है। अमेरिकी कारोबारी इलॉन मस्क ने भी AfD की जीत पर बधाई दी। AfD पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी जर्मन राज्य में सत्ता के इतने करीब पहुंची है। हालांकि, जर्मनी की मुख्य पार्टियां उसके साथ गठबंधन करने से इनकार करती रही हैं। जर्मनी की राजनीति में AfD की जीत कितनी बड़ी है? AfD की राजनीति में इमिग्रेशन, शरणार्थी और जर्मनी की राष्ट्रीय पहचान बड़े मुद्दे हैं। पार्टी की प्रमुख मांगें और नीतियां: इमिग्रेशन पर रोक: पार्टी जर्मनी में आने वाले प्रवासियों की संख्या कम करने और नियम कड़े करने की समर्थक है। शरणार्थियों पर सख्ती: पार्टी शरणार्थियों के लिए नियम कड़े करने और उनके बच्चों की पढ़ाई के लिए अलग कक्षाओं की मांग करती है। रूस से बेहतर रिश्ते: AfD रूस के साथ संबंध सुधारना चाहती है। यूक्रेन की मदद कम करना: पार्टी यूक्रेन को जर्मनी की सैन्य मदद कम करने की मांग करती है। यूरो से बाहर निकलना: AfD जर्मनी को यूरो मुद्रा से बाहर निकालने की बात करती रही है। पारंपरिक मूल्यों पर जोर: पार्टी स्कूलों और सांस्कृतिक संस्थानों में पारंपरिक मूल्यों को बढ़ावा देना चाहती है। रेनबो झंडे पर रोक: AfD स्कूलों में रेनबो झंडे लगाने पर रोक की समर्थक है। जर्मन पहचान पर जोर: पार्टी स्कूलों में रोज जर्मन झंडा फहराने और कार्यक्रमों में राष्ट्रगान गाने की मांग करती है। विंड फार्म पर रोक: पार्टी नए विंड फार्म बनाने का विरोध करती है। सरकारी मीडिया में बदलाव: AfD सरकारी प्रसारण व्यवस्था में भी बदलाव चाहती है। इन मुद्दों पर AfD को समर्थन क्यों मिल रहा है? AfD खुद को मौजूदा पार्टियों के विकल्प के तौर पर पेश करती है। चुनाव प्रचार में पार्टी ने इमिग्रेशन, सुरक्षा और जर्मन पहचान को लेकर लोगों की चिंता को मुद्दा बनाया। उसके समर्थकों का कहना है कि मौजूदा पार्टियां इन समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रही हैं। इसी नाराजगी का फायदा AfD को खासकर पूर्वी जर्मनी में मिल रहा है। सक्सोनी-आनहाल्ट में 44% वोट मिलना इसी बढ़ते समर्थन का बड़ा संकेत है। खबर अपडेट हो रही है…

मेक्सिको में आतिशबाजी का सामान फटा, 10 की मौत:धमाकों से मेले में दीवार गिरी; 64 घायल

मेक्सिको में आतिशबाजी का सामान फटा, 10 की मौत:धमाकों से मेले में दीवार गिरी; 64 घायल

मेक्सिको में धार्मिक उत्सव के दौरान आतिशबाजी का सामान फटने से कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई और 64 लोग घायल हुए हैं। विस्फोट के बाद एक दीवार भी गिर गई। हादसा शनिवार रात टेमास्कालसिंगो में नुएस्त्रा सेन्योरा दे ला लूज चर्च के पास हुआ। यहां संरक्षक संत के सम्मान में उत्सव चल रहा था और सैकड़ों लोग आतिशबाजी देखने की तैयारी कर रहे थे। टेमास्कालसिंगो मध्य मेक्सिको का एक कस्बा है, जिसकी आबादी करीब 66 हजार है। यह मेक्सिको सिटी से लगभग 160 km उत्तर-पश्चिम में स्थित है। विस्फोट की वजह अभी पता नहीं चली है। मेक्सिको स्टेट अटॉर्नी जनरल्स ऑफिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय बिशप ने बताया कि घायलों में दो पादरी भी शामिल हैं। हादसे के 2 वीडियो… वायरल वीडियो में जान बचाकर भागते दिखे लोग… सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में विस्फोट के बाद का मंजर दिख रहा है। इसमें दर्जनों लोग धुएं और मलबे के बीच बचे हुए लोगों की तलाश करते नजर आ रहे हैं। मेक्सिको में आतिशबाजी से जुड़े विस्फोट आम हैं। सड़कों पर होने वाले समारोहों और धार्मिक उत्सवों में अक्सर आतिशबाजी का इस्तेमाल किया जाता है। करीब चार साल पहले मध्य मेक्सिको के हिडाल्गो राज्य के हुआहुत्ला नगरपालिका के एक गांव में भी तेज आतिशबाजी विस्फोट हुआ था। इसमें 17 लोग घायल हुए थे।