Sunday, 14 Jun 2026 | 02:01 AM

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मनोज वाजपेयी की गर्वनर 12 जून को होगी रिलीज:किरदार के परिवार से नहीं मिले मनोज, स्क्रिप्ट और मजबूत रिसर्च के सहारे बने ‘गवर्नर’

मनोज वाजपेयी की गर्वनर 12 जून को होगी रिलीज:किरदार के परिवार से नहीं मिले मनोज, स्क्रिप्ट और मजबूत रिसर्च के सहारे बने ‘गवर्नर’

मनोज बाजपेयी की ‘गवर्नर’ 12 जून को रिलीज हो रही है। इंटरव्यू में निर्देशक चिन्मय मंडलेकर ने फिल्म की रिसर्च, किरदारों और रेफरेंसेज पर खास बातें साझा कीं… फिल्म अब दर्शकों के सामने जाने को तैयार है, पूरी टीम में एक खास उत्साह है चिन्मय कहते हैं…‘गवर्नर’ पर हम लंबे समय से काम कर रहे थे और अब जब फिल्म रिलीज के करीब है तो पूरी टीम में एक अलग तरह का उत्साह है। मनोज बाजपेयी देशभर में जाकर प्रचार कर रहे हैं। जब आप किसी कहानी पर वर्षों मेहनत करते हैं और वह आखिरकार दर्शकों तक पहुंचने वाली होती है, तो एक जिम्मेदारी और संतोष दोनों महसूस होते हैं। ‘यह कोई डॉक्यूमेंट्री जैसी नहीं, पूरी रिसर्च पर आधारित एक इकोनॉमिक थ्रिलर है… बकौल चिन्मय…‘फिल्म का आधार पूरी तरह उन वास्तविक घटनाओं पर टिका है, जिनकी जानकारी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है। हालांकि हमें यह भी ध्यान रखना था कि हम कोई डॉक्यूमेंट्री नहीं बना रहे हैं। कई बड़े फैसलों के नतीजे तो इतिहास में दर्ज हैं लेकिन उन फैसलों तक पहुंचने के लिए बंद कमरों में क्या चर्चाएं हुईं, किन मतभेदों और दबावों का सामना करना पड़ा, इसकी पूरी जानकारी कहीं उपलब्ध नहीं है। ऐसे में हमने गहन रिसर्च के आधार पर उन परिस्थितियों की कल्पना की और उन्हें सिनेमाई रूप दिया। हमारा प्रयास था कि तथ्य और ड्रामा के बीच संतुलन बना रहे। ’परिवारों से बातचीत और दस्तावेजों ने मजबूत की फिल्म की रिसर्च चिन्मय बताते हैं, ‘हमने केवल रिपोर्ट्स या पब्लिश कंटेंट पर भरोसा नहीं किया। हमारी टीम ने उन लोगों और परिवारों से भी बातचीत की, जो उस दौर और घटनाओं से किसी न किसी रूप में जुड़े रहे हैं। लेखक और सह-निर्माताओं ने स्क्रिप्ट के अलग-अलग स्टेज में उनसे संवाद किया। हमें असल परिस्थितियों और फैसलों के पीछे की नियत को समझना था। ’यह किसी एक व्यक्ति की बायोपिक नहीं, एक पूरे दौर की कहानी है चिन्मय ने बताया कि ‘कई लोग पूछते हैं कि क्या ‘गवर्नर’ बायोपिक है तो मेरा कहना साफ है कि नहीं। यह किसी एक व्यक्ति के जीवन की कहानी नहीं है। यह उस दौर की कहानी है, जब देश आर्थिक संकट के सबसे कठिन चरणों में से एक से गुजर रहा था। परिस्थितियों की वजह से कुछ पात्र कहानी के केंद्र में जरूर आते हैं लेकिन फिल्म केवल उन्हीं तक सीमित नहीं। इसमें कई ऐसे किरदार हैं, जिन्होंने उस दौर के फैसलों और घटनाओं को प्रभावित किया था।’ 2-3 वास्तविक लोगों को मिलाकर गढ़े गए हैं फिल्म के कई किरदार चिन्मय के मुताबिक, ‘अगर हम हर वास्तविक व्यक्ति को अलग-अलग प्रस्तुत करते, तो कहानी बहुत जटिल हो जाती। इसलिए कुछ पात्र ऐसे बनाए गए हैं जो 2 या 3 वास्तविक व्यक्तित्वों के अनुभवों और भूमिकाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। खासकर पत्रकारों और अन्य सहायक किरदारों के माध्यम से हमने उस समय की सोच, दबाव और सार्वजनिक विमर्श को सामने लाने की कोशिश की।’ मनोज ने एस वेंकटरमणन के व्यक्तित्व को पूरी गरिमा के साथ पेश किया है चिन्मय बताते हैं…‘फिल्म में कुछ संस्थानों और नामों को रचनात्मक कारणों से बदला गया है लेकिन जिस किरदार से कहानी प्रेरित है, उसकी आत्मा को पूरी ईमानदारी से प्रस्तुत किया गया है। मनोज ने इस भूमिका के लिए एस वेंकटरमणन के परिवार से मुलाकात करने के बजाय उपलब्ध डॉक्यूमेंट्स, स्क्रिप्ट और अपने अध्ययन पर भरोसा किया।’

हिमाचल के गर्वनर ने अपना काफिला किया आधा:हेलीकॉप्टर इस्तेमाल नहीं करने की भी घोषणा; PM मोदी की अपील पर लिया फैसला

हिमाचल के गर्वनर ने अपना काफिला किया आधा:हेलीकॉप्टर इस्तेमाल नहीं करने की भी घोषणा; PM मोदी की अपील पर लिया फैसला

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल नहीं करने और अपना काफिला आधा करने की घोषणा की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की अपील पर यह कदम उठाया है। राज्यपाल के बाद अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर टिकी है। उन्होंने अब तक ऐसी कोई घोषणा नहीं की। वहीं पश्चिम एशिया में जारी संकट और बढ़ती वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों के बीच राज्यपाल ने हिमाचल को ईंधन बचत की दिशा में मॉडल राज्य बनाने का संकल्प जताया। राज्यपाल ने घोषणा की कि अब लोक भवन को ‘फ्यूल कंजर्वेशन जोन’ के रूप में संचालित किया जाएगा। इसके तहत हर रविवार को “पेट्रोल-फ्री संडे” मनाया जाएगा। रविवार को किसी भी सरकारी वाहन में एक लीटर भी आयातित ईंधन का उपयोग नहीं होगा। रविवार के सभी सरकारी कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या संयुक्त यात्रा व्यवस्था के माध्यम से आयोजित किए जाएंगे। गैर-जरूरी बैठक अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी राज्यपाल ने अपने आधिकारिक काफिले (कन्वॉय) का आकार तत्काल प्रभाव से आधा करने के निर्देश दिए। साथ ही गैर-जरूरी बैठकों को अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित किया जाएगा, ताकि अनावश्यक सड़क यात्रा और ईंधन खर्च को कम किया जा सके। सरकारी कार्यक्रमों और आयोजनों को भी समेकित (कंसोलिडेट) किया जाएगा, जिससे वाहनों की आवाजाही कम हो। सरकारी कार्यक्रम के लिए हेलीकॉप्टर नहीं लेंगे राज्यपाल ने यह भी घोषणा की कि पश्चिम एशिया संकट खत्म होने और वैश्विक ईंधन कीमतों में स्थिरता आने तक वह किसी भी सरकारी कार्यक्रम के लिए राज्य सरकार के हेलीकॉप्टर का उपयोग नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि जब देश को ईंधन की हर बूंद बचाने का आह्वान किया जा रहा है, तब ईंधन की सबसे अधिक खपत वाले साधन का इस्तेमाल करना उचित नहीं होगा। कुलपतियों से भी ईंधन बचाने की अपील प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति (चांसलर) होने के नाते राज्यपाल ने कुलपतियों से भी कैंपस में ईंधन और ऊर्जा संरक्षण को संस्थागत रूप से लागू करने की अपील की। उन्होंने शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों के लिए कारपूलिंग, साइकिल चलाने और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश देने को कहा। राज्यपाल ने युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे कॉलेज, हॉस्टल और अपने समुदायों में ईंधन संरक्षण अभियान के “ब्रांड एंबेसडर” बनें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल संरक्षण पढ़ाना ही नहीं, बल्कि उसे अपनी संस्कृति का हिस्सा भी बनाना चाहिए। साइकिल का उपयोग करें: राज्यपाल राज्यपाल ने कहा कि यह केवल ईंधन बचाने का कदम नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं सहित सभी नागरिकों से कारपूलिंग अपनाने, छोटी दूरी के लिए पैदल चलने, सार्वजनिक परिवहन और साइकिल के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की।