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Tata’s iPhone parts manufacturing plant in Tamil Nadu’s Hosur is facing shutdown over wastewater discharge

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नई दिल्ली6 मिनट पहले

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तमिलनाडु पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने आरोप लगाया है कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की आईफोन कंपोनेंट्स फैक्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी (वेस्टवाटर) ने पास के खेतों के भूजल यानी ग्राउंडवाटर को दूषित कर दिया है।

रेगुलेटर ने कंपनी को चेतावनी दी है कि अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो फैक्ट्री की बिजली काट दी जाएगी और इसे जबरन बंद कर दिया जाएगा।

खेतों और कुओं का पानी दूषित होने की शिकायत मिली थी

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का यह प्लांट तमिलनाडु के होसुर में स्थित है, जहां आईफोन के बैक पैनल और अन्य पार्ट्स बनाए जाते हैं। प्लांट के पास मौजूद कृषि भूमि के मालिकों ने प्रदूषण बोर्ड से शिकायत की थी कि फैक्ट्री का वेस्टवाटर उनके खेतों और खुले कुओं के पानी को खराब कर रहा है। किसानों की इस शिकायत के बाद ही प्रदूषण बोर्ड ने मामले की जांच शुरू की थी।

5 बार हुआ निरीक्षण, निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप

रेगुलेटर के नोटिस के मुताबिक, किसानों की शिकायतों के बाद दिसंबर 2025 से मई 2026 के बीच इस प्लांट का 5 बार राज्य स्तरीय निरीक्षण यानी इंसपेक्शन किया गया। 25 मई 2026 को जारी तीन पन्नों के नोटिस में बोर्ड ने कहा कि टाटा ने अपने परिसर के भीतर बने रेन वाटर हार्वेस्टिंग पोंड (वर्षा जल संचयन तालाब) में गंदा पानी छोड़ दिया था।

यह तालाब ओवरफ्लो हो गया, जिससे आसपास की कृषि भूमि में स्थित खुले कुओं का भूजल दूषित हो गया। इससे पहले 23 दिसंबर 2025 को भी बोर्ड ने कंपनी को निर्देश जारी किए थे, लेकिन टाटा ने उन पर कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया।

टाटा का दावा- हम नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं

इस पूरे मामले पर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपना रुख साफ किया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि उन्होंने एक मान्यता प्राप्त लेबोरेटरी से स्वतंत्र रूप से इसकी जांच (इंडिपेंडेंट एनालिसिस) करवाई है। इस स्टडी में सामने आया है कि कंपनी सभी नियामक मानदंडों (रेगुलेटरी नॉर्म्स) का पूरी तरह से पालन कर रही है।

कंपनी जिम्मेदार व्यावसायिक तौर-तरीकों, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उन्होंने प्रदूषण अधिकारियों को अपना जवाब भेज दिया है। हालांकि, टाटा ने इस जवाब की विस्तृत जानकारी नहीं दी है।

एपल की भारत सप्लाई चेन में पहले भी आ चुकी हैं मुश्किलें

यह नोटिस एपल की भारत में मौजूद सप्लाई चेन के लिए एक नई परेशानी बनकर आया है। इससे पहले सितंबर 2024 में टाटा के इसी होसुर प्लांट में आग लग गई थी, जिससे आईफोन कंपोनेंट्स का प्रोडक्शन कुछ समय के लिए रुक गया था।

वहीं सितंबर 2023 में एपल के पूर्व सप्लायर पेगाट्रॉन के आईफोन प्लांट में भी आग लगने से कई दिनों तक कामकाज ठप रहा था। इसके अलावा 2024 में एक जांच में सामने आया था कि फॉक्सकॉन अपने एक भारतीय प्लांट में विवाहित महिलाओं को असेंबली जॉब्स से दूर रखता है, हालांकि कंपनी ने सभी नियमों के पालन का दावा किया था।

एपल के लिए क्यों अहम है टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स?

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एपल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी चीन से बाहर अपने आईफोन प्रोडक्शन का विस्तार करना चाहती है। दक्षिण एशिया में ताइवान की फॉक्सकॉन के बाद टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एपल की दूसरी सबसे बड़ी सप्लायर बन चुकी है।

रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट के अनुसार, चार साल पहले वैश्विक स्तर पर बनने वाले कुल आईफोन्स में भारत की हिस्सेदारी महज 6% थी, जिसके साल 2026 में बढ़कर 26% होने का अनुमान है।

नियमों के उल्लंघन पर फैक्ट्रियों को बंद करने का रिकॉर्ड

भारत में प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन न करने पर कंपनियों के खिलाफ लगातार अनुशासनात्मक कार्रवाई होती रही है। पर्यावरण मंत्रालय ने फरवरी में संसद को बताया था कि पिछले पांच सालों में जांच की गई 5,44,364 इंडस्ट्रीज में से 4.4% उद्योग पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करते पाए गए, जिसके बाद प्रदूषण नियंत्रण विभागों ने 3,600 फैक्ट्रियों को बंद कर दिया।

इससे पहले 2024 में मर्सिडीज-बेंज के इकलौते भारतीय कार प्लांट में भी नियमों की अनदेखी पकड़े जाने के बाद कंपनी ने वेस्टवाटर और एयर पॉल्यूशन मैनेजमेंट में सुधार किया था।

क्या होते हैं एपल के सप्लायर नियम?

एपल अपने सप्लायर्स के लिए बेहद कड़े नियम (सप्लायर कोड ऑफ कंडक्ट) लागू करता है। इसके तहत वेस्टवाटर (कारखाने के गंदे पानी) के मैनेजमेंट और पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर सख्त गाइडलाइंस होती हैं।

अगर कोई सप्लायर इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो एपल उसके साथ अपना कॉन्ट्रैक्ट भी सस्पेंड या खत्म कर सकता है। इस मामले में एपल और तमिलनाडु सरकार की तरफ से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

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यह तालाब ओवरफ्लो हो गया, जिससे आसपास की कृषि भूमि में स्थित खुले कुओं का भूजल दूषित हो गया। इससे पहले 23 दिसंबर 2025 को भी बोर्ड ने कंपनी को निर्देश जारी किए थे, लेकिन टाटा ने उन पर कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया।

टाटा का दावा- हम नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं

इस पूरे मामले पर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपना रुख साफ किया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि उन्होंने एक मान्यता प्राप्त लेबोरेटरी से स्वतंत्र रूप से इसकी जांच (इंडिपेंडेंट एनालिसिस) करवाई है। इस स्टडी में सामने आया है कि कंपनी सभी नियामक मानदंडों (रेगुलेटरी नॉर्म्स) का पूरी तरह से पालन कर रही है।

कंपनी जिम्मेदार व्यावसायिक तौर-तरीकों, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उन्होंने प्रदूषण अधिकारियों को अपना जवाब भेज दिया है। हालांकि, टाटा ने इस जवाब की विस्तृत जानकारी नहीं दी है।

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इससे पहले 2024 में मर्सिडीज-बेंज के इकलौते भारतीय कार प्लांट में भी नियमों की अनदेखी पकड़े जाने के बाद कंपनी ने वेस्टवाटर और एयर पॉल्यूशन मैनेजमेंट में सुधार किया था।

क्या होते हैं एपल के सप्लायर नियम?

एपल अपने सप्लायर्स के लिए बेहद कड़े नियम (सप्लायर कोड ऑफ कंडक्ट) लागू करता है। इसके तहत वेस्टवाटर (कारखाने के गंदे पानी) के मैनेजमेंट और पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर सख्त गाइडलाइंस होती हैं।

अगर कोई सप्लायर इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो एपल उसके साथ अपना कॉन्ट्रैक्ट भी सस्पेंड या खत्म कर सकता है। इस मामले में एपल और तमिलनाडु सरकार की तरफ से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

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