मूवी रिव्यू – गवर्नर:देश को दिवालिया होने से बचाने की कहानी, मनोज बाजपेयी ने कठिन विषय को भी दिलचस्प बना दिया

आज का भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब देश के पास जरूरी सामान आयात करने तक के पैसे नहीं बचे थे। विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा था और देश आर्थिक संकट के कगार पर खड़ा था। ‘गवर्नर’ उसी दौर की कहानी लेकर आती है। यह फिल्म बंदूक, बम और एक्शन की नहीं, बल्कि फाइलों, बैठकों और फैसलों की लड़ाई दिखाती है। हैरानी की बात यह है कि इतना गंभीर विषय होने के बावजूद फिल्म कई जगह दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहती है। फिल्म की कहानी फिल्म की कहानी 1990-91 के उस आर्थिक संकट पर आधारित है जब भारत दिवालिया होने की स्थिति में पहुंच गया था। ऐसे समय में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ए. रामानन को देश की आर्थिक व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी मिलती है। एक तरफ बढ़ती महंगाई, घटता विदेशी मुद्रा भंडार और अंतरराष्ट्रीय दबाव है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक अस्थिरता। ऐसे हालात में रामानन और उनकी टीम ऐसे फैसले लेने की कोशिश करती है जो देश को आर्थिक संकट से बाहर निकाल सकें। कहानी का बड़ा हिस्सा इसी संघर्ष और रणनीति पर आधारित है। फिल्म की अच्छी बात यह है कि यह इतिहास की किताब जैसा महसूस नहीं होती। जटिल आर्थिक मुद्दों को भी आसान तरीके से समझाने की कोशिश की गई है। फिल्म में एक्टिंग मनोज बाजपेयी पूरी फिल्म की जान हैं। लगभग हर दृश्य उनके कंधों पर टिका है और वह इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हैं। एक ऐसे व्यक्ति का दबाव, चिंता और जिम्मेदारी वह बिना ज्यादा शोर किए दर्शकों तक पहुंचा देते हैं। अदा शर्मा पत्रकार की भूमिका में ठीक लगती हैं। हालांकि उनके हिस्से में बहुत ज्यादा प्रभावशाली दृश्य नहीं आए हैं, लेकिन वह कहानी को आगे बढ़ाने का काम करती हैं। मधु ने सीमित स्क्रीन टाइम में अच्छा काम किया है। वहीं सहायक कलाकार भी अपने-अपने किरदारों में विश्वसनीय लगते हैं। फिल्म में डायरेक्शन निर्देशक चिन्मय डी. मांडलेकर का सबसे बड़ा काम यह है कि उन्होंने अर्थव्यवस्था जैसे कठिन विषय को समझने लायक बनाया है। फिल्म कई बार डॉक्यूमेंट्री बनने के खतरे के करीब पहुंचती है, लेकिन निर्देशन उसे नीरस होने से बचा लेता है। हालांकि कुछ जगह फिल्म जरूरत से ज्यादा सरल समाधान पेश करती हुई महसूस होती है। कुछ घटनाओं और फैसलों के पीछे की जटिलता को और विस्तार से दिखाया जा सकता था। फिल्म का तकनीकी पहलू फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन उस दौर का माहौल बनाने में सफल रहता है। दफ्तर, सरकारी बैठकें और उस समय का माहौल विश्वसनीय लगता है। छायांकन साधारण है, लेकिन कहानी की जरूरत पूरी करता है। संपादन भी ठीक है, हालांकि कुछ हिस्सों में फिल्म थोड़ी लंबी महसूस होती है। फिल्म में कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी गति है। कुछ दृश्यों में कहानी ठहरती हुई लगती है। आर्थिक फैसलों को लेकर जो तनाव महसूस होना चाहिए था, वह हर जगह पूरी तरह नहीं बन पाता। इसके अलावा कुछ दर्शकों को लग सकता है कि फिल्म कई जटिल राजनीतिक पहलुओं को छूकर आगे बढ़ जाती है। अगर उन हिस्सों को थोड़ा और विस्तार मिलता तो कहानी और मजबूत बन सकती थी। फिल्म में म्यूजिक फिल्म में संगीत कहानी का मुख्य हिस्सा नहीं है। पृष्ठभूमि संगीत माहौल बनाने में मदद करता है और जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किया गया है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। फिल्म क्यों देखें? ‘गवर्नर’ उन फिल्मों में से है जो मनोरंजन के साथ-साथ जानकारी भी देती हैं। यह फिल्म बताती है कि देश का भविष्य सिर्फ सीमा पर लड़ी जाने वाली लड़ाइयों से नहीं, बल्कि बंद कमरों में लिए गए फैसलों से भी तय होता है। मनोज बाजपेयी का मजबूत अभिनय और एक कम चर्चित लेकिन महत्वपूर्ण विषय इसे देखने लायक बनाता है। हालांकि इसकी धीमी रफ्तार और कुछ सतही हिस्से इसे बहुत ऊंचाई तक नहीं ले जा पाते, लेकिन फिर भी यह एक ईमानदार और दिलचस्प कोशिश है।
मूवी रिव्यू – भारत भाग्य विधाता रिव्यू:26/11 की अनसुनी बहादुरी को सामने लाती है फिल्म, कंगना रनोट ने सादगी से जीता दिल

26/11 मुंबई हमलों पर पहले भी कई फिल्में और वेब सीरीज बन चुकी हैं। ज्यादातर कहानियां पुलिस, आतंकियों या सुरक्षा बलों के इर्द-गिर्द घूमती रही हैं। लेकिन उस रात कामा अस्पताल के भीतर क्या चल रहा था, वहां मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों ने किन हालात में मरीजों को बचाया, इस पर बहुत कम बात हुई। ‘भारत भाग्य विधाता’ उसी भूले हुए अध्याय को सामने लाती है। यह सिर्फ एक हमले की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जो सुर्खियों में कभी नहीं आए, लेकिन जिनकी वजह से सैकड़ों लोग सुरक्षित घर लौट सके। फिल्म की कहानी फिल्म की कहानी 26 नवंबर 2008 की उस रात पर आधारित है जब मुंबई दहशत के साए में थी। शहर के अलग-अलग हिस्सों में गोलियां चल रही थीं और उसी दौरान कामा अस्पताल भी खतरे के दायरे में आ गया। अस्पताल के भीतर मौजूद नर्सें, वार्ड स्टाफ और दूसरे कर्मचारी अचानक ऐसे हालात में फंस जाते हैं जिनके लिए कोई प्रशिक्षण काफी नहीं होता। कहानी का केंद्र एक नर्स और उसके साथ काम करने वाले लोग हैं, जो अपनी जान बचाने से पहले मरीजों की सुरक्षा के बारे में सोचते हैं। फिल्म का अच्छा पक्ष यह है कि यह किसी एक किरदार को सुपरहीरो नहीं बनाती। यहां बहादुरी सामूहिक है। हर व्यक्ति अपनी क्षमता के हिसाब से लड़ता है और यही बात कहानी को विश्वसनीय बनाती है। हालांकि फिल्म की पटकथा शुरुआत में थोड़ा समय लेती है। पहले आधे घंटे में किरदारों और उनके रिश्तों को स्थापित करने की कोशिश की गई है, जिससे गति कुछ धीमी महसूस होती है। लेकिन जैसे-जैसे खतरा करीब आता है, फिल्म पकड़ बनाती चली जाती है। फिल्म में एक्टिंग कंगना रनोट इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक हैं। दिलचस्प बात यह है कि यहां वह अपने स्टारडम पर नहीं, बल्कि किरदार पर भरोसा करती दिखाई देती हैं। लंबे समय बाद उन्हें ऐसे रोल में देखा गया है जहां ऊंची आवाज, लंबे भाषण या नाटकीयता नहीं है। उनका अभिनय संयमित है और यही बात असर छोड़ती है। कई दृश्यों में कंगना सिर्फ आंखों और चेहरे के भावों से डर, बेचैनी और जिम्मेदारी को व्यक्त कर देती हैं। यह उनके हालिया कामों से अलग प्रदर्शन है। गिरिजा ओक, स्मिता तांबे और बाकी कलाकार भी कहानी को मजबूती देते हैं। फिल्म का एक बड़ा गुण यह है कि सहायक कलाकार सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं बनते, बल्कि कहानी का जरूरी हिस्सा लगते हैं। कई बार ऐसा महसूस होता है कि फिल्म किसी एक कलाकार की नहीं, पूरी टीम की है। फिल्म का डायरेक्शन निर्देशक मनोज तापड़िया ने विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए काम किया है। उन्होंने 26/11 को तमाशे की तरह पेश करने के बजाय इंसानी नजरिए से देखने की कोशिश की है। फिल्म आतंकियों से ज्यादा उन लोगों पर फोकस करती है जिन्होंने मुश्किल समय में अपना कर्तव्य निभाया। निर्देशन की सबसे अच्छी बात यह है कि फिल्म लगातार सम्मानजनक बनी रहती है। कहीं भी अनावश्यक देशभक्ति या भावनाओं का दबाव डालने की कोशिश नहीं की गई। कई दृश्य स्वाभाविक रूप से असर छोड़ते हैं। हालांकि कुछ जगहों पर फिल्म और ज्यादा तीखी हो सकती थी। कुछ घटनाएं पर्दे पर जितना तनाव पैदा कर सकती थीं, उतना नहीं कर पातीं। फिल्म का तकनीकी पहलू फिल्म की सिनेमैटोग्राफी माहौल बनाने में सफल रहता है। अस्पताल के गलियारों, बंद कमरों और भय के माहौल को कैमरा प्रभावी ढंग से पकड़ता है। कई दृश्य ऐसे हैं जहां दर्शक जानते हैं कि आगे क्या होने वाला है, फिर भी तनाव बना रहता है। फिल्म की एडिटिंग भी काफी टाइट है। फिल्म बेवजह लंबी नहीं लगती, हालांकि पहले हिस्से में थोड़ी काट-छांट की जा सकती थी। प्रोडक्शन डिजाइन और कॉस्ट्यूम कहानी को असलियत के करीब लाते हैं। हॉस्पिटल का माहौल बनावटी नहीं लगता। फिल्म का म्यूजिक फिल्म का म्यूजिक याद रह जाने वाला नहीं है, लेकिन यह शिकायत भी नहीं बनता। पृष्ठभूमि संगीत कई महत्वपूर्ण दृश्यों में भावनात्मक असर बढ़ाता है। अच्छी बात यह है कि संगीत कहानी पर हावी नहीं होता। फिल्म की कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी धीमी शुरुआत है। कुछ दर्शकों को लग सकता है कि कहानी मुख्य संघर्ष तक पहुंचने में ज्यादा समय लेती है। इसके अलावा कुछ सहायक किरदारों को थोड़ा और विस्तार दिया जा सकता था। जो दर्शक पूरी तरह थ्रिलर देखने की उम्मीद से जाएंगे, उन्हें फिल्म कुछ जगहों पर अपेक्षा से ज्यादा भावनात्मक और कम रोमांचक लग सकती है। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘भारत भाग्य विधाता’ उन लोगों को याद करने की कोशिश है जिनका नाम इतिहास के बड़े पन्नों में शायद नहीं लिखा गया, लेकिन जिन्होंने अपने हिस्से की बहादुरी पूरी ईमानदारी से निभाई। फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह आतंक की कहानी सुनाते-सुनाते इंसानियत की कहानी बन जाती है। कंगना रनोट का सधा हुआ अभिनय, मजबूत सहायक कलाकार और संवेदनशील निर्देशन इसे एक असरदार अनुभव बनाते हैं। यह परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन दिल से बनाई गई फिल्म जरूर है। अगर आप सच्ची घटनाओं पर आधारित और भावनात्मक मानवीय कहानियां पसंद करते हैं, तो ‘भारत भाग्य विधाता’ एक बार देखी जा सकती है।
मूवी रिव्यू – भारत भाग्य विधाता रिव्यू:26/11 की अनसुनी बहादुरी को सामने लाती है फिल्म, कंगना रनोट ने सादगी से जीता दिल

26/11 मुंबई हमलों पर पहले भी कई फिल्में और वेब सीरीज बन चुकी हैं। ज्यादातर कहानियां पुलिस, आतंकियों या सुरक्षा बलों के इर्द-गिर्द घूमती रही हैं। लेकिन उस रात कामा अस्पताल के भीतर क्या चल रहा था, वहां मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों ने किन हालात में मरीजों को बचाया, इस पर बहुत कम बात हुई। ‘भारत भाग्य विधाता’ उसी भूले हुए अध्याय को सामने लाती है। यह सिर्फ एक हमले की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जो सुर्खियों में कभी नहीं आए, लेकिन जिनकी वजह से सैकड़ों लोग सुरक्षित घर लौट सके। फिल्म की कहानी फिल्म की कहानी 26 नवंबर 2008 की उस रात पर आधारित है जब मुंबई दहशत के साए में थी। शहर के अलग-अलग हिस्सों में गोलियां चल रही थीं और उसी दौरान कामा अस्पताल भी खतरे के दायरे में आ गया। अस्पताल के भीतर मौजूद नर्सें, वार्ड स्टाफ और दूसरे कर्मचारी अचानक ऐसे हालात में फंस जाते हैं जिनके लिए कोई प्रशिक्षण काफी नहीं होता। कहानी का केंद्र एक नर्स और उसके साथ काम करने वाले लोग हैं, जो अपनी जान बचाने से पहले मरीजों की सुरक्षा के बारे में सोचते हैं। फिल्म का अच्छा पक्ष यह है कि यह किसी एक किरदार को सुपरहीरो नहीं बनाती। यहां बहादुरी सामूहिक है। हर व्यक्ति अपनी क्षमता के हिसाब से लड़ता है और यही बात कहानी को विश्वसनीय बनाती है। हालांकि फिल्म की पटकथा शुरुआत में थोड़ा समय लेती है। पहले आधे घंटे में किरदारों और उनके रिश्तों को स्थापित करने की कोशिश की गई है, जिससे गति कुछ धीमी महसूस होती है। लेकिन जैसे-जैसे खतरा करीब आता है, फिल्म पकड़ बनाती चली जाती है। फिल्म में एक्टिंग कंगना रनोट इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक हैं। दिलचस्प बात यह है कि यहां वह अपने स्टारडम पर नहीं, बल्कि किरदार पर भरोसा करती दिखाई देती हैं। लंबे समय बाद उन्हें ऐसे रोल में देखा गया है जहां ऊंची आवाज, लंबे भाषण या नाटकीयता नहीं है। उनका अभिनय संयमित है और यही बात असर छोड़ती है। कई दृश्यों में कंगना सिर्फ आंखों और चेहरे के भावों से डर, बेचैनी और जिम्मेदारी को व्यक्त कर देती हैं। यह उनके हालिया कामों से अलग प्रदर्शन है। गिरिजा ओक, स्मिता तांबे और बाकी कलाकार भी कहानी को मजबूती देते हैं। फिल्म का एक बड़ा गुण यह है कि सहायक कलाकार सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं बनते, बल्कि कहानी का जरूरी हिस्सा लगते हैं। कई बार ऐसा महसूस होता है कि फिल्म किसी एक कलाकार की नहीं, पूरी टीम की है। फिल्म का डायरेक्शन निर्देशक मनोज तापड़िया ने विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए काम किया है। उन्होंने 26/11 को तमाशे की तरह पेश करने के बजाय इंसानी नजरिए से देखने की कोशिश की है। फिल्म आतंकियों से ज्यादा उन लोगों पर फोकस करती है जिन्होंने मुश्किल समय में अपना कर्तव्य निभाया। निर्देशन की सबसे अच्छी बात यह है कि फिल्म लगातार सम्मानजनक बनी रहती है। कहीं भी अनावश्यक देशभक्ति या भावनाओं का दबाव डालने की कोशिश नहीं की गई। कई दृश्य स्वाभाविक रूप से असर छोड़ते हैं। हालांकि कुछ जगहों पर फिल्म और ज्यादा तीखी हो सकती थी। कुछ घटनाएं पर्दे पर जितना तनाव पैदा कर सकती थीं, उतना नहीं कर पातीं। फिल्म का तकनीकी पहलू फिल्म की सिनेमैटोग्राफी माहौल बनाने में सफल रहता है। अस्पताल के गलियारों, बंद कमरों और भय के माहौल को कैमरा प्रभावी ढंग से पकड़ता है। कई दृश्य ऐसे हैं जहां दर्शक जानते हैं कि आगे क्या होने वाला है, फिर भी तनाव बना रहता है। फिल्म की एडिटिंग भी काफी टाइट है। फिल्म बेवजह लंबी नहीं लगती, हालांकि पहले हिस्से में थोड़ी काट-छांट की जा सकती थी। प्रोडक्शन डिजाइन और कॉस्ट्यूम कहानी को असलियत के करीब लाते हैं। हॉस्पिटल का माहौल बनावटी नहीं लगता। फिल्म का म्यूजिक फिल्म का म्यूजिक याद रह जाने वाला नहीं है, लेकिन यह शिकायत भी नहीं बनता। पृष्ठभूमि संगीत कई महत्वपूर्ण दृश्यों में भावनात्मक असर बढ़ाता है। अच्छी बात यह है कि संगीत कहानी पर हावी नहीं होता। फिल्म की कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी धीमी शुरुआत है। कुछ दर्शकों को लग सकता है कि कहानी मुख्य संघर्ष तक पहुंचने में ज्यादा समय लेती है। इसके अलावा कुछ सहायक किरदारों को थोड़ा और विस्तार दिया जा सकता था। जो दर्शक पूरी तरह थ्रिलर देखने की उम्मीद से जाएंगे, उन्हें फिल्म कुछ जगहों पर अपेक्षा से ज्यादा भावनात्मक और कम रोमांचक लग सकती है। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘भारत भाग्य विधाता’ उन लोगों को याद करने की कोशिश है जिनका नाम इतिहास के बड़े पन्नों में शायद नहीं लिखा गया, लेकिन जिन्होंने अपने हिस्से की बहादुरी पूरी ईमानदारी से निभाई। फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह आतंक की कहानी सुनाते-सुनाते इंसानियत की कहानी बन जाती है। कंगना रनोट का सधा हुआ अभिनय, मजबूत सहायक कलाकार और संवेदनशील निर्देशन इसे एक असरदार अनुभव बनाते हैं। यह परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन दिल से बनाई गई फिल्म जरूर है। अगर आप सच्ची घटनाओं पर आधारित और भावनात्मक मानवीय कहानियां पसंद करते हैं, तो ‘भारत भाग्य विधाता’ एक बार देखी जा सकती है।
कोच के निधन का पता चलते मनु ने मैच रोका:पिस्टल छोड़ जमीन पर बैठीं; कल शाम फोन पर जसपाल ने कहा था- अब तबीयत में सुधार

ओलिंपियन मेडलिस्ट शूटर मनू भाकर के कोच जसपाल राणा का 49 साल की उम्र में निधन हो गया। कोच के निधन की खबर सुनते ही मनु भाकर के हाथ से पिस्टल छूट गई। कुछ पल के मनु एक जगह ही खड़ी रहीं। इसके बाद भावुक होकर वहीं जमीन पर बैठ गईं। उन्होंने शूटिंग मुकाबला भी बीच में ही छोड़ दिया। मनु राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेने के लिए देहरादून गई हैं। यहां 25 मीटर एयर पिस्टल में मैच खेल रही थीं। परिजनों का कहना है कि मनु प्रतियोगिता में बिजी थी, इसीलिए कई घंटों तक उनसे ये बात छिपानी पड़ी। सुबह करीब 10 बजे उन्हें कोच के निधन की बात बताई गई, इसके बाद मनु ने बीच में ही अपना मैच रोक दिया। जसपाल के हार्ट में स्टेंट डला था एक जून की रात को म्यूनिख से लौटते समय फ्लाइट में जसपाल की तबीयत खराब हो गई थी, जहां उन्हें मेडिकल हेल्प दी गई थी। दिल्ली पहुंचते ही जसपाल को मैक्स साकेत हास्पिटल में एडमिट कराया गया। टेस्ट के बाद उन्हें हार्ट में एक स्टेंट डाला गया था। शुक्रवार सुबह उनका निधन हो गया। कल शाम तक हुई थी बातचीत कोच जसपाल की तबीयत खराब होने के बाद मनु लगातार उनके टच में थी। गुरुवार शाम भी उन्होंने फोन पर जसपाल से बातचीत की थी। बातचीत के दौरान कोच ने तबीयत में सुधार और जल्द ही ठीक होने की बात कही थी, मगर अगले दिन ही उनका निधन हो गया। मनु के करियर में कोच जसपाल का बड़ा रोल अंतिम दर्शन के लिए जाएंगी मनु कोच के निधन की खबर मिलने के बाद मनु भाकर ने अपने सभी कार्यक्रम और स्पोर्ट्स इवेंट स्थगित कर दिए हैं। देहरादून से वे सीधे कोच को अंतिम विदाई देने के लिए जाएंगी।
पहले टी-20 में वेस्टइंडीज ने श्रीलंका को 7 विकेट हराया:शाई होप के नाबाद 65 रन, होल्डर-जोसेफ ने 3-3 विकेट लिए

जमैका के किंग्स्टन में खेले गए पहले टी-20 मुकाबले में वेस्टइंडीज ने श्रीलंका को 7 विकेट से हरा दिया। श्रीलंका के कप्तान कुसल मेंडिस ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका ने निर्धारित 20 ओवर में 9 विकेट के नुकसान पर 147 रन बनाए। 148 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम ने 19.2 ओवर में 3 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। टीम की जीत में कप्तान शाई होप ने अहम भूमिका निभाई और 53 गेंदों पर नाबाद 65 रन की पारी खेली। उनकी कप्तानी पारी की बदौलत वेस्टइंडीज ने 4 गेंद शेष रहते मुकाबला अपने नाम कर लिया। कामिंदु मेंडिस और कुसल मेंडिस ने संभाली श्रीलंका की पारी श्रीलंका के लिए कामिंदु मेंडिस सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। उन्होंने 39 गेंदों में 51 रन बनाए, जिसमें 4 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। कप्तान कुसल मेंडिस ने 23 गेंदों में 36 रन बनाकर दूसरी सबसे बड़ी पारी खेली। उन्होंने 2 चौके और 3 छक्के लगाए। श्रीलंका की शुरुआत अच्छी रही। पथुम निसांका और कुसल मेंडिस ने पहले विकेट के लिए 43 रन जोड़े। निसांका 18 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद 43 रन पर लसित क्रूसपुले बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। टीम का तीसरा विकेट 49 रन पर गिरा, जबकि कुसल मेंडिस 65 रन के कुल स्कोर पर आउट हुए। कांमिंदु और दासुन के बीच 59 रन की साझेदारी इसके बाद कामिंदु मेंडिस और दासुन शनाका ने पांचवें विकेट के लिए 48 गेंदों में 59 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर पारी संभाली। कामिंदु ने 51 और शनाका ने 23 गेंदों पर 22 रन बनाए। इनके आउट होने के बाद श्रीलंका कोई बड़ी साझेदारी नहीं कर सका और 20 ओवर में 9 विकेट पर 147 रन ही बना सका। होल्डर-जोसेफ ने 3-3 विकेट लिए वेस्टइंडीज के लिए जेसन होल्डर और शमर जोसेफ ने 3-3 विकेट लिए, जबकि रोस्टन चेज को 1 विकेट मिला। लसिथ क्रूसपुले को मिला मौका श्रीलंका ने मैच से एक दिन पहले अपनी प्लेइंग इलेवन की घोषणा कर दी थी। नए हेड कोच गैरी कस्टर्न के आने के बाद मैच से पहले टीम का एलान करने का ट्रेंड बढ़ा है। टीम 6 बल्लेबाज और 5 गेंदबाजों के कॉम्बिनेशन के साथ उतरी। इसमें तीन तेज गेंदबाज और दो फ्रंट-लाइन स्पिनर्स शामिल थे। युवा खिलाड़ी लसिथ क्रूसपुले को प्लेइंग इलेवन में जगह मिली। यह उनके करियर का सिर्फ दूसरा टी-20 इंटरनेशनल मैच है। ब्रैंडन किंग और शाई होप ने टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई वेस्टइंडीज के सामने जीत हासिल करने के लिए 148 रनों का लक्ष्य था जिसका पीछा करते हुए मेजबान टीम के लिए ब्रैंडन किंग और कैप्टन शाई होप ने शानदार शुरुआत की। इन दोनों ने मिलकर पहले विकेट के लिए 6.2 ओवर में 67 रन जोड़े। इसके बाद ब्रैंडन किंग 22 गेंदों पर 37 रन बनाकर आउट हुए। हालांकि दूसरी तरफ से शाई होप ने एक छोर संभाले रखा और आखिर तक बैटिंग करके 54 गेंदों पर 5 चौके और 2 छक्के की मदद से नाबाद 65 रनों की पारी खेली। वेस्टइंडीज के लिए शिमरोन हेटमायर (9 गेंदों पर 17 रन), रोस्टन चेज (26 गेंदों पर 16 रन) और रोवमैन पॉवेल (06 गेंदों पर नाबाद 10 रन) ने भी कुछ अहम रन जोड़े। इन्हीं सब के दम पर वेस्टइंडीज ने 19.2 ओवर में 148 रनों का टारगेट हासिल करके 7 विकेट से जीत दर्ज की। वानिंदु हसरंगा ने 2 विकेट लिए श्रीलंकाई टीम के लिए सिर्फ वानिंदु हसरंगा (4 ओवर में 32 रन देकर 2 विकेट) और ईशान मलिंगा (4 ओवर में 26 रन देकर 1 विकेट) ही अपनी गेंदबाज़ी से सफलता हासिल कर पाए। ध्यान दें कि ये मुकाबला जीतकर वेस्टइंडीज ने तीन मैचों की टी20 सीरीज में श्रीलंका पर 1-0 की बढ़त बना ली है। वेस्टइंडीज ने गुडाकेश मोती को ड्रॉप किया, 4 तेज गेंदबाजों को खिलाया दूसरी ओर, मेजबान वेस्टइंडीज ने पिच की कंडीशन को देखते हुए एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज को शामिल किया। टीम 4 तेज गेंदबाजों के अटैक के साथ मैदान पर उतरी। इस रणनीति के कारण स्पिनर गुडाकेश मोती को प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठना पड़ा। श्रीलंका की टीम: पथुम निसांका, कुसल मेंडिस (कप्तान और विकेटकीपर), लसिथ क्रूसपुले, पवन रथनायके, कामिंदु मेंडिस, दासुन शनाका, वानिंदु हसरंगा, महीश तीक्ष्णा, दुष्मंता चमीरा, ईशान मलिंगा, दिलशान मदुशंका। वेस्टइंडीज की टीम: शाई होप (कप्तान और विकेटकीपर), ब्रैंडन किंग, शिमरॉन हेटमायर, रोस्टन चेज, शेरफेन रदरफोर्ड, रोवमैन पॉवेल, जेसन होल्डर, रोमारियो शेफर्ड, मैथ्यू फोर्ड, अकील होसेन, शमर जोसेफ।
पहले टी-20 में वेस्टइंडीज ने श्रीलंका को 7 विकेट हराया:शाई होप के नाबाद 65 रन, होल्डर-जोसेफ ने 3-3 विकेट लिए

जमैका के किंग्स्टन में खेले गए पहले टी-20 मुकाबले में वेस्टइंडीज ने श्रीलंका को 7 विकेट से हरा दिया। श्रीलंका के कप्तान कुसल मेंडिस ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका ने निर्धारित 20 ओवर में 9 विकेट के नुकसान पर 147 रन बनाए। 148 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम ने 19.2 ओवर में 3 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। टीम की जीत में कप्तान शाई होप ने अहम भूमिका निभाई और 53 गेंदों पर नाबाद 65 रन की पारी खेली। उनकी कप्तानी पारी की बदौलत वेस्टइंडीज ने 4 गेंद शेष रहते मुकाबला अपने नाम कर लिया। कामिंदु मेंडिस और कुसल मेंडिस ने संभाली श्रीलंका की पारी श्रीलंका के लिए कामिंदु मेंडिस सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। उन्होंने 39 गेंदों में 51 रन बनाए, जिसमें 4 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। कप्तान कुसल मेंडिस ने 23 गेंदों में 36 रन बनाकर दूसरी सबसे बड़ी पारी खेली। उन्होंने 2 चौके और 3 छक्के लगाए। श्रीलंका की शुरुआत अच्छी रही। पथुम निसांका और कुसल मेंडिस ने पहले विकेट के लिए 43 रन जोड़े। निसांका 18 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद 43 रन पर लसित क्रूसपुले बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। टीम का तीसरा विकेट 49 रन पर गिरा, जबकि कुसल मेंडिस 65 रन के कुल स्कोर पर आउट हुए। कांमिंदु और दासुन के बीच 59 रन की साझेदारी इसके बाद कामिंदु मेंडिस और दासुन शनाका ने पांचवें विकेट के लिए 48 गेंदों में 59 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर पारी संभाली। कामिंदु ने 51 और शनाका ने 23 गेंदों पर 22 रन बनाए। इनके आउट होने के बाद श्रीलंका कोई बड़ी साझेदारी नहीं कर सका और 20 ओवर में 9 विकेट पर 147 रन ही बना सका। होल्डर-जोसेफ ने 3-3 विकेट लिए वेस्टइंडीज के लिए जेसन होल्डर और शमर जोसेफ ने 3-3 विकेट लिए, जबकि रोस्टन चेज को 1 विकेट मिला। लसिथ क्रूसपुले को मिला मौका श्रीलंका ने मैच से एक दिन पहले अपनी प्लेइंग इलेवन की घोषणा कर दी थी। नए हेड कोच गैरी कस्टर्न के आने के बाद मैच से पहले टीम का एलान करने का ट्रेंड बढ़ा है। टीम 6 बल्लेबाज और 5 गेंदबाजों के कॉम्बिनेशन के साथ उतरी। इसमें तीन तेज गेंदबाज और दो फ्रंट-लाइन स्पिनर्स शामिल थे। युवा खिलाड़ी लसिथ क्रूसपुले को प्लेइंग इलेवन में जगह मिली। यह उनके करियर का सिर्फ दूसरा टी-20 इंटरनेशनल मैच है। ब्रैंडन किंग और शाई होप ने टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई वेस्टइंडीज के सामने जीत हासिल करने के लिए 148 रनों का लक्ष्य था जिसका पीछा करते हुए मेजबान टीम के लिए ब्रैंडन किंग और कैप्टन शाई होप ने शानदार शुरुआत की। इन दोनों ने मिलकर पहले विकेट के लिए 6.2 ओवर में 67 रन जोड़े। इसके बाद ब्रैंडन किंग 22 गेंदों पर 37 रन बनाकर आउट हुए। हालांकि दूसरी तरफ से शाई होप ने एक छोर संभाले रखा और आखिर तक बैटिंग करके 54 गेंदों पर 5 चौके और 2 छक्के की मदद से नाबाद 65 रनों की पारी खेली। वेस्टइंडीज के लिए शिमरोन हेटमायर (9 गेंदों पर 17 रन), रोस्टन चेज (26 गेंदों पर 16 रन) और रोवमैन पॉवेल (06 गेंदों पर नाबाद 10 रन) ने भी कुछ अहम रन जोड़े। इन्हीं सब के दम पर वेस्टइंडीज ने 19.2 ओवर में 148 रनों का टारगेट हासिल करके 7 विकेट से जीत दर्ज की। वानिंदु हसरंगा ने 2 विकेट लिए श्रीलंकाई टीम के लिए सिर्फ वानिंदु हसरंगा (4 ओवर में 32 रन देकर 2 विकेट) और ईशान मलिंगा (4 ओवर में 26 रन देकर 1 विकेट) ही अपनी गेंदबाज़ी से सफलता हासिल कर पाए। ध्यान दें कि ये मुकाबला जीतकर वेस्टइंडीज ने तीन मैचों की टी20 सीरीज में श्रीलंका पर 1-0 की बढ़त बना ली है। वेस्टइंडीज ने गुडाकेश मोती को ड्रॉप किया, 4 तेज गेंदबाजों को खिलाया दूसरी ओर, मेजबान वेस्टइंडीज ने पिच की कंडीशन को देखते हुए एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज को शामिल किया। टीम 4 तेज गेंदबाजों के अटैक के साथ मैदान पर उतरी। इस रणनीति के कारण स्पिनर गुडाकेश मोती को प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठना पड़ा। श्रीलंका की टीम: पथुम निसांका, कुसल मेंडिस (कप्तान और विकेटकीपर), लसिथ क्रूसपुले, पवन रथनायके, कामिंदु मेंडिस, दासुन शनाका, वानिंदु हसरंगा, महीश तीक्ष्णा, दुष्मंता चमीरा, ईशान मलिंगा, दिलशान मदुशंका। वेस्टइंडीज की टीम: शाई होप (कप्तान और विकेटकीपर), ब्रैंडन किंग, शिमरॉन हेटमायर, रोस्टन चेज, शेरफेन रदरफोर्ड, रोवमैन पॉवेल, जेसन होल्डर, रोमारियो शेफर्ड, मैथ्यू फोर्ड, अकील होसेन, शमर जोसेफ।
'पहले हीरोइन थी और अब हीरोइन की मां है':अक्षय कुमार ने सुनाया रवीना टंडन का शूटिंग का पुराना किस्सा; एक्ट्रेस की तारीफ भी की

90 के दशक में अक्षय कुमार और रवीना टंडन की जोड़ी काफी फेमस रही थी। 22 साल बाद अब दोनों फिल्म वेलकम टू द जंगल में फिर से स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में अक्षय कुमार ने रवीना टंडन के साथ काम करने के अनुभव पर बात की। उन्होंने कहा कि रवीना हमेशा से बहुत प्रोफेशनल रही हैं। अक्षय ने एक पुराने शूटिंग अनुभव को याद करते हुए बताया कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान सूरज डूबने से पहले सीन पूरा करना था। ग्रीन रूम दूर होने के बावजूद रवीना ने समय बचाने के लिए जनरेटर वैन में कपड़े बदले और तुरंत शूटिंग पर लौट आईं। अक्षय ने उन्हें बेहतरीन कलाकार बताया। रवीना के बारे में मजाकिया अंदाज में बोले अक्षय अक्षय कुमार ने कहा कि रवीना में समय के साथ कई बदलाव आए हैं। उन्होंने मजाक में कहा कि पहले हीरोइन थी और अब हीरोइन की मां है। बता दें कि रवीना टंडन की बेटी राशा थडानी भी फिल्मों में कदम रख चुकी हैं। उन्होंने फिल्म आजाद से डेब्यू किया है। 90 के दशक में अक्षय कुमार और रवीना टंडन की जोड़ी बॉलीवुड की सबसे फेमस जोड़ियों में शुमार थी। साल 1994 में रिलीज हुई मोहरा उनकी सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक रही। इसी फिल्म का मशहूर गाना ‘टिप टिप बरसा पानी’ आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। इसके बाद खिलाड़ियों का खिलाड़ी (1996) और दावा (1997) जैसी फिल्मों में भी दोनों की केमिस्ट्री को खूब सराहा गया। साल 2004 में रिलीज हुई आन: मेन एट वर्क में दोनों आखिरी बार बड़े पर्दे पर साथ नजर आए थे। सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि पर्सनल लाइफ में भी अक्षय और रवीना का रिश्ता चर्चा में रहा। बताया जाता है कि फिल्म मोहरा की शूटिंग के दौरान दोनों करीब आए और बाद में गुपचुप सगाई भी कर ली थी। हालांकि, साल 1998 में दोनों का रिश्ता टूट गया। इसके बाद अक्षय ने 2001 में ट्विंकल खन्ना से और रवीना ने 2004 में अनिल थडानी से शादी कर अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए।
विशेष | ‘असली टीएमसी’ का उदय? टीएमसी में उथल-पुथल के बीच 20 लोकसभा सांसदों ने स्वतंत्र गुट बनाया | न्यूज18

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बांग्लादेश ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को वनडे सीरीज में हराया:दूसरा वनडे 5 विकेट से जीता; मुस्तफिजुर-तस्कीन ने 3-3 विकेट लिए

बांग्लादेश ने गुरुवार को ढाका स्टेडियम में खेले गए दूसरे वनडे में ऑस्ट्रेलिया को 5 विकेट से हरा दिया। इसके साथ ही बांग्लादेश ने 3 मैचों की सीरीज में 2-0 से अजेय बढ़त बना ली। यह क्रिकेट इतिहास में पहली बार है, जब बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को वनडे सीरीज में हराया है। बांग्लादेश ने सीरीज का पहला मैच डकवर्थ लुइस नियम के तहत 86 रन से जीता था। ऑस्ट्रेलिया के 3 विकेट शून्य पर गिरे टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत किसी बुरे सपने की तरह रही। टीम ने बिना खाता खोले 3 विकेट गंवा दिए। पहले ओवर में तस्कीन अहमद ने मैथ्यू शॉर्ट को शून्य पर आउट किया। अगले ओवर में मुस्तफिजुर रहमान ने कूपर कॉनोली और मैट रेनशॉ को बिना खाता खोले पवेलियन भेजा। टीम ने 22वें ओवर में 81 रन तक 6 विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद मार्नस लाबुशेन और जेवियर बार्टलेट के बीच 7वें विकेट के लिए 103 रन की साझेदारी हुई। हालांकि 184 रन पर ही ऑस्ट्रेलिया का 7वां और फिर 8वां विकेट गिरा। डकवर्थ लुइस से बांग्लादेश को टारगेट मिला 42 ओवर में ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 187/8 था, तभी बारिश आ गई। इसके बाद डकवर्थ लुइस नियम के तहत बांग्लादेश को 41 ओवर में 192 रन का टारगेट दिया गया। ऑस्ट्रेलिया के लिए लाबुशेन ने सबसे ज्यादा नाबाद 55 रन बनाए। बार्टलेट 52 रन बनाकर आउट हुए। श्रीलंका के लिए मुस्तफिजुर और तस्कीन ने 3-3 विकेट लिए। तन्वीर इस्लाम ने 2 विकेट लिए। बांग्लादेश ने भी शून्य पर पहला विकेट गंवाया रनचेज में बांग्लादेश ने दूसरी गेंद पर ही तंजीद हसन तमीम का विकेट गंवा दिया। हालांकि इसके बाद नजमुल हुसैन शांतो (41) और सौम्य सरकार (42) के बीच दूसरे विकेट के लिए 86 रन की साझेदारी हुई। हालांकि इसके बाद टीम ने 144 रन तक 5 विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद तौहीद ह्रदोय और मेहदी हसन मिराज ने 51 की नाबाद साझेदारी कर टीम को जीत दिला दी। ह्रदोय ने 40* और मेहदी ने 22 रन बनाए। ———————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… 2027 वनडे वर्ल्ड कप 4 अक्टूबर से 21 नवंबर तक:54 में से 41 मैच साउथ अफ्रीका में होंगे; अगले महीने ICC ऐलान करेगी मेंस वनडे वर्ल्ड कप 2027 की संभावित तारीखें तय हो गई हैं। टूर्नामेंट 4 अक्टूबर से 21 नवंबर तक खेला जाएगा। क्रिकेट वेबसाइट ईएसपीएन क्रिकइंफों की रिपोर्ट के मुताबिक, मई में हुई अहमदाबाद ICC बोर्ड की बैठक में तारीखों पर सहमति बनी है। पूरी खबर पढ़ें…
बांग्लादेश ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को वनडे सीरीज में हराया:दूसरा वनडे 5 विकेट से जीता; मुस्तफिजुर-तस्कीन ने 3-3 विकेट लिए

बांग्लादेश ने गुरुवार को ढाका स्टेडियम में खेले गए दूसरे वनडे में ऑस्ट्रेलिया को 5 विकेट से हरा दिया। इसके साथ ही बांग्लादेश ने 3 मैचों की सीरीज में 2-0 से अजेय बढ़त बना ली। यह क्रिकेट इतिहास में पहली बार है, जब बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को वनडे सीरीज में हराया है। बांग्लादेश ने सीरीज का पहला मैच डकवर्थ लुइस नियम के तहत 86 रन से जीता था। ऑस्ट्रेलिया के 3 विकेट शून्य पर गिरे टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत किसी बुरे सपने की तरह रही। टीम ने बिना खाता खोले 3 विकेट गंवा दिए। पहले ओवर में तस्कीन अहमद ने मैथ्यू शॉर्ट को शून्य पर आउट किया। अगले ओवर में मुस्तफिजुर रहमान ने कूपर कॉनोली और मैट रेनशॉ को बिना खाता खोले पवेलियन भेजा। टीम ने 22वें ओवर में 81 रन तक 6 विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद मार्नस लाबुशेन और जेवियर बार्टलेट के बीच 7वें विकेट के लिए 103 रन की साझेदारी हुई। हालांकि 184 रन पर ही ऑस्ट्रेलिया का 7वां और फिर 8वां विकेट गिरा। डकवर्थ लुइस से बांग्लादेश को टारगेट मिला 42 ओवर में ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 187/8 था, तभी बारिश आ गई। इसके बाद डकवर्थ लुइस नियम के तहत बांग्लादेश को 41 ओवर में 192 रन का टारगेट दिया गया। ऑस्ट्रेलिया के लिए लाबुशेन ने सबसे ज्यादा नाबाद 55 रन बनाए। बार्टलेट 52 रन बनाकर आउट हुए। श्रीलंका के लिए मुस्तफिजुर और तस्कीन ने 3-3 विकेट लिए। तन्वीर इस्लाम ने 2 विकेट लिए। बांग्लादेश ने भी शून्य पर पहला विकेट गंवाया रनचेज में बांग्लादेश ने दूसरी गेंद पर ही तंजीद हसन तमीम का विकेट गंवा दिया। हालांकि इसके बाद नजमुल हुसैन शांतो (41) और सौम्य सरकार (42) के बीच दूसरे विकेट के लिए 86 रन की साझेदारी हुई। हालांकि इसके बाद टीम ने 144 रन तक 5 विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद तौहीद ह्रदोय और मेहदी हसन मिराज ने 51 की नाबाद साझेदारी कर टीम को जीत दिला दी। ह्रदोय ने 40* और मेहदी ने 22 रन बनाए। ———————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… 2027 वनडे वर्ल्ड कप 4 अक्टूबर से 21 नवंबर तक:54 में से 41 मैच साउथ अफ्रीका में होंगे; अगले महीने ICC ऐलान करेगी मेंस वनडे वर्ल्ड कप 2027 की संभावित तारीखें तय हो गई हैं। टूर्नामेंट 4 अक्टूबर से 21 नवंबर तक खेला जाएगा। क्रिकेट वेबसाइट ईएसपीएन क्रिकइंफों की रिपोर्ट के मुताबिक, मई में हुई अहमदाबाद ICC बोर्ड की बैठक में तारीखों पर सहमति बनी है। पूरी खबर पढ़ें…









