Sunday, 21 Jun 2026 | 02:03 AM

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दिव्यांका त्रिपाठी ने शेयर की जुड़वा बच्चों की पहली झलक:पोस्ट में लिखा- मुझे चुनने के लिए शुक्रिया; शादी के 10 साल बाद बने माता-पिता

दिव्यांका त्रिपाठी ने शेयर की जुड़वा बच्चों की पहली झलक:पोस्ट में लिखा- मुझे चुनने के लिए शुक्रिया; शादी के 10 साल बाद बने माता-पिता

टीवी एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी और उनके पति विवेक दहिया हाल ही में जुड़वां बेटों के माता-पिता बने हैं। मई महीने में बेटों के जन्म के बाद दिव्यांका ने आज सोशल मीडिया पर उनकी पहली झलक शेयर की है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर बच्चों की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘मुझे चुनने के लिए शुक्रिया।’ दिव्यांका और विवेक की शादी के 10 साल बाद उनके घर पहले बच्चों का जन्म हुआ है। हालांकि इन तस्वीरों में उन्होंने दोनों बेटों का चेहरा नहीं दिखाया है। भगवान से मांगी थी एक खुशी, मिली डबल दिव्यांका और विवेक ने इंस्टाग्राम पर एक जॉइंट पोस्ट शेयर कर बेटों के आने की जानकारी दी थी। “हमने भगवान से एक खुशी मांगी थी, लेकिन उन्होंने हमें डबल दे दी। हमारे घर जुड़वां बेटों का जन्म हुआ है।” विवेक दहिया ने पोस्ट में लिखा कि उनका लंबा इंतजार अब खत्म हो गया है। लड़के आ चुके हैं और जिंदगी पहले से ज्यादा खूबसूरत लग रही है। उन्होंने आगे लिखा, ‘मेरे करण अर्जुन आ गए।’ कपल ने माता-पिता के इस नए सफर के लिए लोगों से आशीर्वाद मांगा है। आगे कपल ने लिखा है, ‘दिव्यांका और मुझे पेरेंटहुड के नए खूबसूरत सफर को शुरू करने के लिए आप सभी के प्यार और आशीर्वाद की जरुरत है।’ शेयर की तस्वीर में लिखा गया है, हमने भगवान से खुशियां मांगीं और भगवान ने कहा, डबल ले लो। हमें जुड़वा बच्चे हुए हैं। मार्च में की थी प्रेग्नेंसी अनाउंस दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक ने मार्च में फैंस को गुड न्यूज दी थी। एक्ट्रेस ने बेबी बंप की तस्वीरों के साथ लिखा था, ‘10 साल बाद कहानी में आया सबसे खूबसूरत ट्विस्ट। कुछ सफर जल्दी पूरे करने के लिए नहीं होते। वो साथ-साथ तैयार होने के लिए होते हैं। और जब आपको लगता है कि आपकी कहानी पूरी हो चुकी है। तभी जिंदगी उसमें सबसे खूबसूरत अध्याय जोड़ देती है। अब भी यकीन नहीं हो रहा। बिना वजह मुस्कुरा रहे हैं। दिल में सिर्फ शुक्र और खुशी है। हम माता-पिता बनने वाले हैं।’ देखिए दिव्यांका त्रिपाठी की प्रेग्नेंसी की चुनिंदा तस्वीरें- टीवी के शो के सेट में हुआ प्यार और कर ली शादी दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दाहिया की मुलाकात टीवी शो ये है मोहब्बतें के सेट पर हुई थी। दोनों शो के लीड एक्टर्स थे। साथ काम करते हुए दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे और फिर जनवरी 2016 में कपल ने सगाई की। सगाई के 5 महीने बाद जुलाई 2016 में दिव्यांका और विवेक की शादी भोपाल में हुई। दिव्यांका त्रिपाठी को टीवी शो बनूं मैं तेरी दुल्हन से देशभर में पहचान मिली थी। इसेक बाद वो ये हैं मोहब्बतें में दिखीं। टीवी शोज के अलावा दिव्यांका कई रियलिटी शो, कई वेब सीरीज और फिल्मों का भी हिस्सा रही हैं। ‘सिनेस्टार्स की खोज’ से शुरू किया था एक्टिंग करियर दिव्यांका त्रिपाठी टीवी इंडस्ट्री का एक बड़ा नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2004 में रियलिटी शो ‘इंडियाज बेस्ट सिनेस्टार्स की खोज’ से की थी। इसके बाद साल 2006 में आए सीरियल ‘बनू मैं तेरी दुल्हन’ में विद्या का लीड रोल निभाकर वे काफी पॉपुलर हुईं। दिव्यांका ने ‘खाना खजाना’, ‘नचले वे विद सरोज खान’, ‘जोर का झटका’, ‘कॉमेडी सर्कस’ और ‘नच बलिए 8’ जैसे कई शोज में काम किया है। वे ‘खतरों के खिलाड़ी 11’ की रनर-अप भी रही थीं। हाल ही में वे सोनी लिव की सीरीज ‘अदृश्यम’ में इंस्पेक्टर पार्वती सहगल के रोल में नजर आई थीं।

दिव्यांका त्रिपाठी ने शेयर की जुड़वा बच्चों की पहली झलक:पोस्ट में लिखा- मुझे चुनने के लिए शुक्रिया; शादी के 10 साल बाद बने माता-पिता

दिव्यांका त्रिपाठी ने शेयर की जुड़वा बच्चों की पहली झलक:पोस्ट में लिखा- मुझे चुनने के लिए शुक्रिया; शादी के 10 साल बाद बने माता-पिता

टीवी एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी और उनके पति विवेक दहिया हाल ही में जुड़वां बेटों के माता-पिता बने हैं। मई महीने में बेटों के जन्म के बाद दिव्यांका ने आज सोशल मीडिया पर उनकी पहली झलक शेयर की है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर बच्चों की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘मुझे चुनने के लिए शुक्रिया।’ दिव्यांका और विवेक की शादी के 10 साल बाद उनके घर पहले बच्चों का जन्म हुआ है। हालांकि इन तस्वीरों में उन्होंने दोनों बेटों का चेहरा नहीं दिखाया है। भगवान से मांगी थी एक खुशी, मिली डबल दिव्यांका और विवेक ने इंस्टाग्राम पर एक जॉइंट पोस्ट शेयर कर बेटों के आने की जानकारी दी थी। “हमने भगवान से एक खुशी मांगी थी, लेकिन उन्होंने हमें डबल दे दी। हमारे घर जुड़वां बेटों का जन्म हुआ है।” विवेक दहिया ने पोस्ट में लिखा कि उनका लंबा इंतजार अब खत्म हो गया है। लड़के आ चुके हैं और जिंदगी पहले से ज्यादा खूबसूरत लग रही है। उन्होंने आगे लिखा, ‘मेरे करण अर्जुन आ गए।’ कपल ने माता-पिता के इस नए सफर के लिए लोगों से आशीर्वाद मांगा है। आगे कपल ने लिखा है, ‘दिव्यांका और मुझे पेरेंटहुड के नए खूबसूरत सफर को शुरू करने के लिए आप सभी के प्यार और आशीर्वाद की जरुरत है।’ शेयर की तस्वीर में लिखा गया है, हमने भगवान से खुशियां मांगीं और भगवान ने कहा, डबल ले लो। हमें जुड़वा बच्चे हुए हैं। मार्च में की थी प्रेग्नेंसी अनाउंस दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक ने मार्च में फैंस को गुड न्यूज दी थी। एक्ट्रेस ने बेबी बंप की तस्वीरों के साथ लिखा था, ‘10 साल बाद कहानी में आया सबसे खूबसूरत ट्विस्ट। कुछ सफर जल्दी पूरे करने के लिए नहीं होते। वो साथ-साथ तैयार होने के लिए होते हैं। और जब आपको लगता है कि आपकी कहानी पूरी हो चुकी है। तभी जिंदगी उसमें सबसे खूबसूरत अध्याय जोड़ देती है। अब भी यकीन नहीं हो रहा। बिना वजह मुस्कुरा रहे हैं। दिल में सिर्फ शुक्र और खुशी है। हम माता-पिता बनने वाले हैं।’ देखिए दिव्यांका त्रिपाठी की प्रेग्नेंसी की चुनिंदा तस्वीरें- टीवी के शो के सेट में हुआ प्यार और कर ली शादी दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दाहिया की मुलाकात टीवी शो ये है मोहब्बतें के सेट पर हुई थी। दोनों शो के लीड एक्टर्स थे। साथ काम करते हुए दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे और फिर जनवरी 2016 में कपल ने सगाई की। सगाई के 5 महीने बाद जुलाई 2016 में दिव्यांका और विवेक की शादी भोपाल में हुई। दिव्यांका त्रिपाठी को टीवी शो बनूं मैं तेरी दुल्हन से देशभर में पहचान मिली थी। इसेक बाद वो ये हैं मोहब्बतें में दिखीं। टीवी शोज के अलावा दिव्यांका कई रियलिटी शो, कई वेब सीरीज और फिल्मों का भी हिस्सा रही हैं। ‘सिनेस्टार्स की खोज’ से शुरू किया था एक्टिंग करियर दिव्यांका त्रिपाठी टीवी इंडस्ट्री का एक बड़ा नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2004 में रियलिटी शो ‘इंडियाज बेस्ट सिनेस्टार्स की खोज’ से की थी। इसके बाद साल 2006 में आए सीरियल ‘बनू मैं तेरी दुल्हन’ में विद्या का लीड रोल निभाकर वे काफी पॉपुलर हुईं। दिव्यांका ने ‘खाना खजाना’, ‘नचले वे विद सरोज खान’, ‘जोर का झटका’, ‘कॉमेडी सर्कस’ और ‘नच बलिए 8’ जैसे कई शोज में काम किया है। वे ‘खतरों के खिलाड़ी 11’ की रनर-अप भी रही थीं। हाल ही में वे सोनी लिव की सीरीज ‘अदृश्यम’ में इंस्पेक्टर पार्वती सहगल के रोल में नजर आई थीं।

तेंदुलकर फ्लाइट में फैमिली के साथ क्रिकेट खेलते दिखे:वीडियो पोस्ट कर लिखा- एटीट्यूड चेंज नहीं होना चाहिए, बेटी सारा ने कैच पकड़ा

तेंदुलकर फ्लाइट में फैमिली के साथ क्रिकेट खेलते दिखे:वीडियो पोस्ट कर लिखा- एटीट्यूड चेंज नहीं होना चाहिए, बेटी सारा ने कैच पकड़ा

दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर परिवार के साथ फ्लाइट में क्रिकेट खेलते नजर आए। 53 साल के पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने शुक्रवार को इसका 31 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। उन्होंने लिखा, ‘एल्टीट्यूड चाहे जो हो, एटीट्यूड नहीं बदलना चाहिए।’ वीडियो में सचिन उल्टे बल्ले से बेटी सारा तेंदुलकर और बहू सानिया चंडोक के साथ क्रिकेट खेल रहे हैं। सानिया गेंदबाजी करती दिखीं, जबकि उनकी एक गेंद पर सारा ने सचिन का कैच पकड़ लिया। इसके बाद तीनों हंसते नजर आए और इस हल्के-फुल्के पल का आनंद लेते दिखे। फोटो देखिए… पिछले हफ्ते क्लाइमेट स्मार्ट विलेज पहुंचे थे तेंदुलकर पिछले हफ्ते पालघर के गुहिर गांव पहुंचे थे। वहां उन्होंने बच्चों के बीच क्लाइमेट स्मार्ट विलेज प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। सचिन ने खुद इसके फोटो शेयर किए थे। इंटरनेशनल क्रिकेट में 100 शतक लगाने वाले इकलौते क्रिकेटर तेंदुलकर इंटरनेशनल क्रिकेट में 100 शतक लगाने वाले इकलौते क्रिकेटर हैं। उन्होंने भारत के लिए 664 इंटरनेशनल मैच खेले हैं। उनके नाम टेस्ट और वनडे में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड दर्ज हैं। तेंदुलकर ने 200 टेस्ट मैचों में 15,921 रन बनाए हैं, जबकि 463 वनडे में उनके नाम 18,426 रन हैं। सचिन ने एक टी-20 इंटरनेशनल मैच भी खेला है। तेंदुलकर का इंटरनेशनल करियर ———————————————– भारतीय क्रिकेटर्स से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… 24 जून को शादी करेंगे आकाश दीप, अक्षिता संग सात फेरे लेंगे भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज आकाशदीप जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। आकाशदीप 24 जून को वाराणसी में शादी करेंगे। वे अपने ही जिले के डेहरी-ऑन-सोन स्थित मानिकपुर गांव की अक्षिता के साथ सात फेरे लेंगे। पढ़ें पूरी खबर

तेंदुलकर फ्लाइट में फैमिली के साथ क्रिकेट खेलते दिखे:वीडियो पोस्ट कर लिखा- एटीट्यूड चेंज नहीं होना चाहिए, बेटी सारा ने कैच पकड़ा

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दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर परिवार के साथ फ्लाइट में क्रिकेट खेलते नजर आए। 53 साल के पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने शुक्रवार को इसका 31 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। उन्होंने लिखा, ‘एल्टीट्यूड चाहे जो हो, एटीट्यूड नहीं बदलना चाहिए।’ वीडियो में सचिन उल्टे बल्ले से बेटी सारा तेंदुलकर और बहू सानिया चंडोक के साथ क्रिकेट खेल रहे हैं। सानिया गेंदबाजी करती दिखीं, जबकि उनकी एक गेंद पर सारा ने सचिन का कैच पकड़ लिया। इसके बाद तीनों हंसते नजर आए और इस हल्के-फुल्के पल का आनंद लेते दिखे। फोटो देखिए… पिछले हफ्ते क्लाइमेट स्मार्ट विलेज पहुंचे थे तेंदुलकर पिछले हफ्ते पालघर के गुहिर गांव पहुंचे थे। वहां उन्होंने बच्चों के बीच क्लाइमेट स्मार्ट विलेज प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। सचिन ने खुद इसके फोटो शेयर किए थे। इंटरनेशनल क्रिकेट में 100 शतक लगाने वाले इकलौते क्रिकेटर तेंदुलकर इंटरनेशनल क्रिकेट में 100 शतक लगाने वाले इकलौते क्रिकेटर हैं। उन्होंने भारत के लिए 664 इंटरनेशनल मैच खेले हैं। उनके नाम टेस्ट और वनडे में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड दर्ज हैं। तेंदुलकर ने 200 टेस्ट मैचों में 15,921 रन बनाए हैं, जबकि 463 वनडे में उनके नाम 18,426 रन हैं। सचिन ने एक टी-20 इंटरनेशनल मैच भी खेला है। तेंदुलकर का इंटरनेशनल करियर ———————————————– भारतीय क्रिकेटर्स से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… 24 जून को शादी करेंगे आकाश दीप, अक्षिता संग सात फेरे लेंगे भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज आकाशदीप जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। आकाशदीप 24 जून को वाराणसी में शादी करेंगे। वे अपने ही जिले के डेहरी-ऑन-सोन स्थित मानिकपुर गांव की अक्षिता के साथ सात फेरे लेंगे। पढ़ें पूरी खबर

‘वे कानून नहीं जानते’: महुआ मोइत्रा ने 19 टीएमसी ‘गद्दारों’ को इस्तीफा देने और बीजेपी के टिकट पर जनादेश मांगने की चुनौती दी | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:12 जून, 2026, 12:59 IST काकोली दस्तीदार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में स्थिति “बद से बदतर होती जा रही है” और उन्होंने शासन और कथित वित्तीय अनियमितताओं पर चिंताओं का हवाला दिया। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा (छवि पीटीआई) हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बढ़ते तनाव के बीच, पार्टी सांसद महुआ मोइत्रा ने शुक्रवार को उन 19 सांसदों पर तीखा हमला बोला, जिन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने की घोषणा की है, उन्हें “देशद्रोही” कहा और जोर देकर कहा कि उन्हें इस्तीफा देना चाहिए और भाजपा के टिकट पर मतदाताओं से नया जनादेश लेना चाहिए। एक्स पर एक पोस्ट में, इस दावे को खारिज कर दिया गया कि विद्रोही सांसद दल-बदल विरोधी प्रावधानों के तहत अयोग्यता से बच सकते हैं, यह तर्क देते हुए कि संविधान के 91 वें संशोधन ने विभाजन या अलग गुट के प्रावधान को हटा दिया है। उन्होंने कहा, “देशद्रोही टीएमसी सांसदों को कानून की जानकारी नहीं है। संविधान के 91वें संशोधन 2003 ने विभाजन/अलग गुट के प्रावधान को हटा दिया। सांसदों की संख्या अप्रासंगिक है – मूल राजनीतिक दल के 2/3 को किसी अन्य पार्टी के साथ विलय करना होगा। सभी 19 गद्दारों को इस्तीफा देने और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की जरूरत है।” गद्दार टीएमसी विधायक कानून नहीं जानते। संविधान के 91वें संशोधन 2003 ने विभाजन/पृथक गुट के प्रावधान को हटा दिया। सांसदों की संख्या अप्रासंगिक है- मूल राजनीतिक दल के 2/3 को किसी अन्य पार्टी के साथ विलय करना होगा। सभी 19 गद्दारों को इस्तीफा देने और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की जरूरत है।- महुआ मोइत्रा (@MahuaMoitra) 12 जून, 2026 उनकी टिप्पणी काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 19 असंतुष्ट टीएमसी सांसदों के एक समूह द्वारा पिछले महीने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र सौंपने के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया है कि दस्तीदार सदन में पार्टी के मुख्य सचेतक बने रहेंगे और उन्हें एनडीए का समर्थन करने के अपने फैसले के बारे में सूचित किया जाएगा। विद्रोहियों ने तर्क दिया है कि हालांकि ममता बनर्जी ने दस्तीदार को मुख्य सचेतक के पद से हटा दिया और उनके स्थान पर कल्याण बनर्जी को नियुक्त किया, लेकिन कथित तौर पर इस बदलाव के बारे में लोकसभा सचिवालय को औपचारिक रूप से सूचित नहीं किया गया था। उनका तर्क है कि दस्तीदार इसलिए आधिकारिक रिकॉर्ड में पद पर बने हुए हैं। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, दस्तीदार ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में स्थिति “बद से बदतर होती जा रही है” और शासन और कथित वित्तीय अनियमितताओं पर चिंताओं का हवाला दिया। द इंडियन एक्सप्रेस के साथ एक अलग साक्षात्कार में, मोइत्रा ने भाजपा पर चुनाव जीतने के बजाय दलबदल कराकर अपनी संसदीय ताकत बढ़ाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बागी सांसदों ने अपनी चुनावी जीत का श्रेय ममता बनर्जी को दिया और उन पर पार्टी नेतृत्व को धोखा देने का आरोप लगाया। मोइत्रा ने कहा, “लालच और विश्वासघात की कोई सीमा नहीं है। भाजपा लोकसभा में हार के बाद से हताश थी, जब उन्हें दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला था। इसलिए, उन्होंने अपनी गणना कर ली है, और किसी भी तरह से वे 40-50 सांसद और लाना चाहते हैं। वे इसे चुनावों के माध्यम से प्राप्त करने में विश्वास नहीं करते हैं; वे इसे जोड़-तोड़ (पार्टियों को तोड़ना) के माध्यम से करना चाहते हैं।” टीएमसी संकट का जिक्र करते हुए, मोइत्रा ने टिप्पणी की कि “लालच और विश्वासघात की कोई सीमा नहीं है”, इस बात पर जोर दिया कि सभी विद्रोही सांसद पूरी तरह से ममता बनर्जी के कारण चुने गए थे। उन्होंने कहा, ”पार्टी किसकी है, इस बारे में रत्ती भर भी अनिश्चितता नहीं है। पार्टी ममता बनर्जी हैं।” विधानसभा चुनाव में हार के बाद विद्रोह ने टीएमसी में सबसे बड़े संकटों में से एक को जन्म दिया है, जिसमें पार्टी के भीतर इस्तीफे और खुले असंतोष सामने आए हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में शोभित गुप्ता शोभित गुप्ता News18.com में उप-संपादक हैं और भारत और अंतर्राष्ट्रीय समाचारों को कवर करते हैं। वह भारत के रोजमर्रा के राजनीतिक मामलों और भू-राजनीति में रुचि रखते हैं। उन्होंने बीए पत्रकारिता (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘वे कानून नहीं जानते’: महुआ मोइत्रा ने 19 टीएमसी ‘गद्दारों’ को इस्तीफा देकर बीजेपी के टिकट पर जनादेश मांगने की चुनौती दी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)टीएमसी बागी सांसद(टी)महुआ मोइत्रा हमला(टी)ममता बनर्जी संकट(टी)टीएमसी आंतरिक दरार(टी)एनडीए समर्थन विवाद(टी)दलबदल विरोधी कानून भारत(टी)बीजेपी इंजीनियरिंग दलबदल(टी)लोकसभा विद्रोह

महिला आयोग का प्रणित मोरे-हिमांशु जांगड़ा को नोटिस:सेजल पवार के कमेंट्स पर AIMSA ने कार्रवाई की मांग की; तीनों पर FIR भी दर्ज

महिला आयोग का प्रणित मोरे-हिमांशु जांगड़ा को नोटिस:सेजल पवार के कमेंट्स पर AIMSA ने कार्रवाई की मांग की; तीनों पर FIR भी दर्ज

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने गुरुग्राम में हुए कॉमेडियन प्रणित मोरे के स्टैंड-अप कॉमेडी शो से जुड़े विवाद का स्वतः संज्ञान लिया है। 370 की बिरयानी वाली वीडियो के मामले में आयोग ने प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा को सुनवाई नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई 22 जून को शाम 4 बजे आयोग के सामने तय की गई है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, NCW ने कहा कि वायरल वीडियो का कंटेंट और उसे मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत किए जाने पर गंभीर चिंता है। मामले को गंभीरता से लेते हुए NCW की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा है। उन्होंने मामले में जल्द, सख्त और तय समय के भीतर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही आयोग ने पुलिस से सात दिनों के अंदर की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट भी मांगी है। आयोग ने एफआईआर दर्ज होने की स्थिति, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य लागू कानूनों के तहत की गई कार्रवाई, वायरल वीडियो की जांच और वेरिफिकेशन, तथा आयोजकों, कलाकारों और वेन्यू मैनेजमेंट की भूमिका से संबंधित जानकारी मांगी है। वहीं, ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) ने प्रणित मोरे के दूसरे स्टैंड-अप शो के दौरान MBBS स्टूडेंट सेजल पवार द्वारा कैडवर और बॉडी डोनर्स पर की गई कमेंट्स की निंदा की है। AIMSA ने कहा कि शवों और बॉडी डोनर्स को एंटरटेनमेंट या कॉमेडी का टॉपिक बनाना असंवेदनशील और अपमानजनक है। ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, हर बॉडी डोनर मेडिकल एजुकेशन में योगदान देकर भविष्य के डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने और जानें बचाने में अहम भूमिका निभाता है। एसोसिएशन ने कहा कि शवों का मजाक उड़ाना या उन्हें हल्के में लेना मंजूर नहीं है और इससे मेडिकल शिक्षा की गरिमा कम होती है। AIMSA ने संबंधित लोगों से तुरंत माफी मांगने और सख्त कार्रवाई की मांग की। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि अगर सही कार्रवाई नहीं की गई तो वह कानूनी कार्रवाई कर सकता है। महाराष्ट्र साइबर ने FIR दर्ज की महाराष्ट्र साइबर ने कॉमेडियन प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा, डॉ. सेजल पवार और इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। FIR इंडियन पीनल कोड (IPC) 2023 की अलग-अलग धाराओं और IT एक्ट 2000 की धारा 67 के तहत दर्ज की गई है। आरोप है कि शो और उससे जुड़े ऑनलाइन वीडियो में महिलाओं, सहमति और मृत लोगों के बारे में आपत्तिजनक कमेंट्स थे।

महिला आयोग का प्रणित मोरे-हिमांशु जांगड़ा को नोटिस:सेजल पवार के कमेंट्स पर AIMSA ने कार्रवाई की मांग की; तीनों पर FIR भी दर्ज

महिला आयोग का प्रणित मोरे-हिमांशु जांगड़ा को नोटिस:सेजल पवार के कमेंट्स पर AIMSA ने कार्रवाई की मांग की; तीनों पर FIR भी दर्ज

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने गुरुग्राम में हुए कॉमेडियन प्रणित मोरे के स्टैंड-अप कॉमेडी शो से जुड़े विवाद का स्वतः संज्ञान लिया है। 370 की बिरयानी वाली वीडियो के मामले में आयोग ने प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा को सुनवाई नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई 22 जून को शाम 4 बजे आयोग के सामने तय की गई है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, NCW ने कहा कि वायरल वीडियो का कंटेंट और उसे मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत किए जाने पर गंभीर चिंता है। मामले को गंभीरता से लेते हुए NCW की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा है। उन्होंने मामले में जल्द, सख्त और तय समय के भीतर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही आयोग ने पुलिस से सात दिनों के अंदर की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट भी मांगी है। आयोग ने एफआईआर दर्ज होने की स्थिति, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य लागू कानूनों के तहत की गई कार्रवाई, वायरल वीडियो की जांच और वेरिफिकेशन, तथा आयोजकों, कलाकारों और वेन्यू मैनेजमेंट की भूमिका से संबंधित जानकारी मांगी है। वहीं, ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) ने प्रणित मोरे के दूसरे स्टैंड-अप शो के दौरान MBBS स्टूडेंट सेजल पवार द्वारा कैडवर और बॉडी डोनर्स पर की गई कमेंट्स की निंदा की है। AIMSA ने कहा कि शवों और बॉडी डोनर्स को एंटरटेनमेंट या कॉमेडी का टॉपिक बनाना असंवेदनशील और अपमानजनक है। ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, हर बॉडी डोनर मेडिकल एजुकेशन में योगदान देकर भविष्य के डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने और जानें बचाने में अहम भूमिका निभाता है। एसोसिएशन ने कहा कि शवों का मजाक उड़ाना या उन्हें हल्के में लेना मंजूर नहीं है और इससे मेडिकल शिक्षा की गरिमा कम होती है। AIMSA ने संबंधित लोगों से तुरंत माफी मांगने और सख्त कार्रवाई की मांग की। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि अगर सही कार्रवाई नहीं की गई तो वह कानूनी कार्रवाई कर सकता है। महाराष्ट्र साइबर ने FIR दर्ज की महाराष्ट्र साइबर ने कॉमेडियन प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा, डॉ. सेजल पवार और इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। FIR इंडियन पीनल कोड (IPC) 2023 की अलग-अलग धाराओं और IT एक्ट 2000 की धारा 67 के तहत दर्ज की गई है। आरोप है कि शो और उससे जुड़े ऑनलाइन वीडियो में महिलाओं, सहमति और मृत लोगों के बारे में आपत्तिजनक कमेंट्स थे।

मूवी रिव्यू – गवर्नर:देश को दिवालिया होने से बचाने की कहानी, मनोज बाजपेयी ने कठिन विषय को भी दिलचस्प बना दिया

मूवी रिव्यू – गवर्नर:देश को दिवालिया होने से बचाने की कहानी, मनोज बाजपेयी ने कठिन विषय को भी दिलचस्प बना दिया

आज का भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब देश के पास जरूरी सामान आयात करने तक के पैसे नहीं बचे थे। विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा था और देश आर्थिक संकट के कगार पर खड़ा था। ‘गवर्नर’ उसी दौर की कहानी लेकर आती है। यह फिल्म बंदूक, बम और एक्शन की नहीं, बल्कि फाइलों, बैठकों और फैसलों की लड़ाई दिखाती है। हैरानी की बात यह है कि इतना गंभीर विषय होने के बावजूद फिल्म कई जगह दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहती है। फिल्म की कहानी फिल्म की कहानी 1990-91 के उस आर्थिक संकट पर आधारित है जब भारत दिवालिया होने की स्थिति में पहुंच गया था। ऐसे समय में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ए. रामानन को देश की आर्थिक व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी मिलती है। एक तरफ बढ़ती महंगाई, घटता विदेशी मुद्रा भंडार और अंतरराष्ट्रीय दबाव है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक अस्थिरता। ऐसे हालात में रामानन और उनकी टीम ऐसे फैसले लेने की कोशिश करती है जो देश को आर्थिक संकट से बाहर निकाल सकें। कहानी का बड़ा हिस्सा इसी संघर्ष और रणनीति पर आधारित है। फिल्म की अच्छी बात यह है कि यह इतिहास की किताब जैसा महसूस नहीं होती। जटिल आर्थिक मुद्दों को भी आसान तरीके से समझाने की कोशिश की गई है। फिल्म में एक्टिंग मनोज बाजपेयी पूरी फिल्म की जान हैं। लगभग हर दृश्य उनके कंधों पर टिका है और वह इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हैं। एक ऐसे व्यक्ति का दबाव, चिंता और जिम्मेदारी वह बिना ज्यादा शोर किए दर्शकों तक पहुंचा देते हैं। अदा शर्मा पत्रकार की भूमिका में ठीक लगती हैं। हालांकि उनके हिस्से में बहुत ज्यादा प्रभावशाली दृश्य नहीं आए हैं, लेकिन वह कहानी को आगे बढ़ाने का काम करती हैं। मधु ने सीमित स्क्रीन टाइम में अच्छा काम किया है। वहीं सहायक कलाकार भी अपने-अपने किरदारों में विश्वसनीय लगते हैं। फिल्म में डायरेक्शन निर्देशक चिन्मय डी. मांडलेकर का सबसे बड़ा काम यह है कि उन्होंने अर्थव्यवस्था जैसे कठिन विषय को समझने लायक बनाया है। फिल्म कई बार डॉक्यूमेंट्री बनने के खतरे के करीब पहुंचती है, लेकिन निर्देशन उसे नीरस होने से बचा लेता है। हालांकि कुछ जगह फिल्म जरूरत से ज्यादा सरल समाधान पेश करती हुई महसूस होती है। कुछ घटनाओं और फैसलों के पीछे की जटिलता को और विस्तार से दिखाया जा सकता था। फिल्म का तकनीकी पहलू फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन उस दौर का माहौल बनाने में सफल रहता है। दफ्तर, सरकारी बैठकें और उस समय का माहौल विश्वसनीय लगता है। छायांकन साधारण है, लेकिन कहानी की जरूरत पूरी करता है। संपादन भी ठीक है, हालांकि कुछ हिस्सों में फिल्म थोड़ी लंबी महसूस होती है। फिल्म में कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी गति है। कुछ दृश्यों में कहानी ठहरती हुई लगती है। आर्थिक फैसलों को लेकर जो तनाव महसूस होना चाहिए था, वह हर जगह पूरी तरह नहीं बन पाता। इसके अलावा कुछ दर्शकों को लग सकता है कि फिल्म कई जटिल राजनीतिक पहलुओं को छूकर आगे बढ़ जाती है। अगर उन हिस्सों को थोड़ा और विस्तार मिलता तो कहानी और मजबूत बन सकती थी। फिल्म में म्यूजिक फिल्म में संगीत कहानी का मुख्य हिस्सा नहीं है। पृष्ठभूमि संगीत माहौल बनाने में मदद करता है और जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किया गया है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। फिल्म क्यों देखें? ‘गवर्नर’ उन फिल्मों में से है जो मनोरंजन के साथ-साथ जानकारी भी देती हैं। यह फिल्म बताती है कि देश का भविष्य सिर्फ सीमा पर लड़ी जाने वाली लड़ाइयों से नहीं, बल्कि बंद कमरों में लिए गए फैसलों से भी तय होता है। मनोज बाजपेयी का मजबूत अभिनय और एक कम चर्चित लेकिन महत्वपूर्ण विषय इसे देखने लायक बनाता है। हालांकि इसकी धीमी रफ्तार और कुछ सतही हिस्से इसे बहुत ऊंचाई तक नहीं ले जा पाते, लेकिन फिर भी यह एक ईमानदार और दिलचस्प कोशिश है।

कूलर में पानी भरने के टिप्स: लोकतंत्र में पानी भरते समय भूलकर भी न करें ये 5 नलियां, कभी भी लग सकते हैं कूलर में पानी भरने का समय

कूलर सुरक्षा युक्तियाँ

12 जून 2026 को 11:41 IST पर अपडेट किया गया कूलर में पानी भरने के टिप्स: गर्मी से राहत पाने का सबसे अच्छा तरीका है गर्मी में ब्लॉकचेन। लेकिन लोग बार-बार इसका इस्तेमाल करते समय कुछ न कुछ ऐसी स्थिति कर देते हैं, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है। कई बार मलेशिया में पानी भरे वक्त लोग करंट मछली जैसी मछली का शिकार हो जाते हैं। फॉक्सवैगन के गलत इस्तेमाल से फंगस, बैक्टीरिया और मच्छरों का खतरा भी बढ़ जाता है। आइए जानते हैं चॉकलेट का इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। अनुसरण करना : अर्थशास्त्र का एक ही पानी के इस्तेमाल से रुका हुआ पानी विद्वान-मशत्रों के पठने की जगह बन जाता है। संक्रमण, मलेरिया और अन्य गंभीर संक्रमणों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। समय पर पानी चलाना बहुत जरूरी है छवि: एआई डेंजरस के टैंकों में काई और गंदगी जमा हो जाती है, जो बिकाऊ उत्पाद बनाती है। हवा के माध्यम से रोग संबंधी रोग हो सकते हैं। सप्ताह में कम से कम एक बार मैनचेस्टर के टैंक और उसके पैड की अच्छी तरह से सफाई करें। छवि: एआई समय रहते पानी भी खतरनाक हो सकता है क्योंकि इसके साथ ही ब्लैक करंट भी खतरनाक हो सकता है। दुर्घटना से बचने के लिए डेमोक्रेट का स्विच बंद करें, दूसरा कारण, उसके बाद ही पानी भरना छवि: इंस्टाग्राम लंबे समय तक पैड की सफाई न की जाए या उसे बदला न जाए, तो हवा के साथ एलर्जी पैदा होने वाले कण और स्कैनर पूरे कमरे में फेल हो सकते हैं। पैड साफ करें, खराब को बदलें बेहतर है। छवि: एआई लोहे के पेंसिल में करंट आने की समस्या होती है, जिससे हाथ में झटका महसूस होता है। अगर आपके लेबल में भी ऐसा हो रहा है, तो तुरंत उसका ढांचा हटा दें। अर्थशास्त्र के सभी सिद्धांतों की जाँच करें छवि: एआई टैंक का पानी पूरी तरह से खाली और ज़रूरत पर उसकी मोटर की जाँच करवाएँ। किसी भी जोखिम से बचने के लिए अंतिम की सलाह अवश्य लें। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 12 जून 2026 11:41 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)कूलर सुरक्षा युक्तियाँ(टी)कूलर में पानी कैसे भरें(टी)कूलर में बिजली का झटका(टी)कूलर का रखरखाव(टी)कूलर से डेंगू को रोकें(टी)ग्रीष्मकालीन सुरक्षा(टी)घरेलू उपकरणों की देखभाल

मूवी रिव्यू – गवर्नर:देश को दिवालिया होने से बचाने की कहानी, मनोज बाजपेयी ने कठिन विषय को भी दिलचस्प बना दिया

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आज का भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब देश के पास जरूरी सामान आयात करने तक के पैसे नहीं बचे थे। विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा था और देश आर्थिक संकट के कगार पर खड़ा था। ‘गवर्नर’ उसी दौर की कहानी लेकर आती है। यह फिल्म बंदूक, बम और एक्शन की नहीं, बल्कि फाइलों, बैठकों और फैसलों की लड़ाई दिखाती है। हैरानी की बात यह है कि इतना गंभीर विषय होने के बावजूद फिल्म कई जगह दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहती है। फिल्म की कहानी फिल्म की कहानी 1990-91 के उस आर्थिक संकट पर आधारित है जब भारत दिवालिया होने की स्थिति में पहुंच गया था। ऐसे समय में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ए. रामानन को देश की आर्थिक व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी मिलती है। एक तरफ बढ़ती महंगाई, घटता विदेशी मुद्रा भंडार और अंतरराष्ट्रीय दबाव है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक अस्थिरता। ऐसे हालात में रामानन और उनकी टीम ऐसे फैसले लेने की कोशिश करती है जो देश को आर्थिक संकट से बाहर निकाल सकें। कहानी का बड़ा हिस्सा इसी संघर्ष और रणनीति पर आधारित है। फिल्म की अच्छी बात यह है कि यह इतिहास की किताब जैसा महसूस नहीं होती। जटिल आर्थिक मुद्दों को भी आसान तरीके से समझाने की कोशिश की गई है। फिल्म में एक्टिंग मनोज बाजपेयी पूरी फिल्म की जान हैं। लगभग हर दृश्य उनके कंधों पर टिका है और वह इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हैं। एक ऐसे व्यक्ति का दबाव, चिंता और जिम्मेदारी वह बिना ज्यादा शोर किए दर्शकों तक पहुंचा देते हैं। अदा शर्मा पत्रकार की भूमिका में ठीक लगती हैं। हालांकि उनके हिस्से में बहुत ज्यादा प्रभावशाली दृश्य नहीं आए हैं, लेकिन वह कहानी को आगे बढ़ाने का काम करती हैं। मधु ने सीमित स्क्रीन टाइम में अच्छा काम किया है। वहीं सहायक कलाकार भी अपने-अपने किरदारों में विश्वसनीय लगते हैं। फिल्म में डायरेक्शन निर्देशक चिन्मय डी. मांडलेकर का सबसे बड़ा काम यह है कि उन्होंने अर्थव्यवस्था जैसे कठिन विषय को समझने लायक बनाया है। फिल्म कई बार डॉक्यूमेंट्री बनने के खतरे के करीब पहुंचती है, लेकिन निर्देशन उसे नीरस होने से बचा लेता है। हालांकि कुछ जगह फिल्म जरूरत से ज्यादा सरल समाधान पेश करती हुई महसूस होती है। कुछ घटनाओं और फैसलों के पीछे की जटिलता को और विस्तार से दिखाया जा सकता था। फिल्म का तकनीकी पहलू फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन उस दौर का माहौल बनाने में सफल रहता है। दफ्तर, सरकारी बैठकें और उस समय का माहौल विश्वसनीय लगता है। छायांकन साधारण है, लेकिन कहानी की जरूरत पूरी करता है। संपादन भी ठीक है, हालांकि कुछ हिस्सों में फिल्म थोड़ी लंबी महसूस होती है। फिल्म में कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी गति है। कुछ दृश्यों में कहानी ठहरती हुई लगती है। आर्थिक फैसलों को लेकर जो तनाव महसूस होना चाहिए था, वह हर जगह पूरी तरह नहीं बन पाता। इसके अलावा कुछ दर्शकों को लग सकता है कि फिल्म कई जटिल राजनीतिक पहलुओं को छूकर आगे बढ़ जाती है। अगर उन हिस्सों को थोड़ा और विस्तार मिलता तो कहानी और मजबूत बन सकती थी। फिल्म में म्यूजिक फिल्म में संगीत कहानी का मुख्य हिस्सा नहीं है। पृष्ठभूमि संगीत माहौल बनाने में मदद करता है और जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किया गया है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। फिल्म क्यों देखें? ‘गवर्नर’ उन फिल्मों में से है जो मनोरंजन के साथ-साथ जानकारी भी देती हैं। यह फिल्म बताती है कि देश का भविष्य सिर्फ सीमा पर लड़ी जाने वाली लड़ाइयों से नहीं, बल्कि बंद कमरों में लिए गए फैसलों से भी तय होता है। मनोज बाजपेयी का मजबूत अभिनय और एक कम चर्चित लेकिन महत्वपूर्ण विषय इसे देखने लायक बनाता है। हालांकि इसकी धीमी रफ्तार और कुछ सतही हिस्से इसे बहुत ऊंचाई तक नहीं ले जा पाते, लेकिन फिर भी यह एक ईमानदार और दिलचस्प कोशिश है।