बांग्लादेश बोला- हमारे PM को भारत दौरे की जल्दबाजी नहीं:मंत्री ने कहा- भारत से अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित से समझौता नहीं करेंगे

बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहता है, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। हुमायूं कबीर ने कहा कि प्रधानमंत्री के भारत दौरे का फैसला दोनों देशों के बीच बातचीत और जरूरी तैयारियों के बाद होगा। द्विपक्षीय दौरे के लिए भारत ने किया आमंत्रित भारत ने तारिक रहमान को द्विपक्षीय दौरे के लिए आमंत्रित किया है। उन्हें 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने का न्योता भी मिला है। यह दौरा भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते सुधारने के लिए अहम माना जा रहा है। 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा हुआ है। शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा बांग्लादेश शेख हसीना सत्ता से हटने के बाद भारत आ गई थीं। बांग्लादेश लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। कबीर ने कहा कि हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच जारी बातचीत का हिस्सा है। हाल ही में हसीना के भारत से दिए गए बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा दिया। खबर अपडेट की जा रही है…
अमेरिका में भारतीय मूल के कारोबारी की हत्या:19 साल की बेटी के सामने लुटेरे ने पिता को गोली मारी

अमेरिका में भारतीय मूल के कारोबारी सुरेश पटेल की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना टेनेसी राज्य के जैक्सन शहर की है। पुलिस के मुताबिक, एक नकाबपोश बदमाश पैसे लूटने के इरादे से दुकान में घुसा। कैश लेने के बाद उसने सुरेश पटेल पर फायरिंग कर दी। घटना के समय उनकी 19 साल की बेटी भी दुकान में मौजूद थी। उसने अपनी आंखों के सामने यह वारदात देखी। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है। सुरेश पटेल गुजरात के मेहसाणा जिले के रहने वाले थे। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, सुरेश पटेल ने घटना से सिर्फ 3 दिन पहले ही यह दुकान खरीदी थी। गोलीबारी के बाद मौके से फरार हो गया आरोपी वहां मौजूद लोगों के मुताबिक, एक नकाबपोश व्यक्ति दुकान में घुसा और कर्मचारियों से कैश की मांग की। पैसे मिलने के बाद उसने कई राउंड फायरिंग की। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने ग्रे रंग की हुडी, जींस और काले बूट पहन रखे थे। उसके चेहरे पर मास्क था। वारदात के बाद वह सफेद रंग की कार में फरार हो गया। आरोपी की तलाश कर रही पुलिस पुलिस को इस घटना से जुड़ी CCTV फुटेज मिली है। पुलिस ने लोगों से आरोपी के बारे में जानकारी देने की अपील भी की है। खबर अपडेट की जा रही है….
अमेरिका में भारतीय मूल के कारोबारी की हत्या:19 साल की बेटी के सामने लुटेरे ने पिता को गोली मारी

अमेरिका में भारतीय मूल के कारोबारी सुरेश पटेल की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना टेनेसी राज्य के जैक्सन शहर की है। पुलिस के मुताबिक, एक नकाबपोश बदमाश पैसे लूटने के इरादे से दुकान में घुसा। कैश लेने के बाद उसने सुरेश पटेल पर फायरिंग कर दी। घटना के समय उनकी 19 साल की बेटी भी दुकान में मौजूद थी। उसने अपनी आंखों के सामने यह वारदात देखी। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है। सुरेश पटेल गुजरात के मेहसाणा जिले के रहने वाले थे। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, सुरेश पटेल ने घटना से सिर्फ 3 दिन पहले ही यह दुकान खरीदी थी। गोलीबारी के बाद मौके से फरार हो गया आरोपी वहां मौजूद लोगों के मुताबिक, एक नकाबपोश व्यक्ति दुकान में घुसा और कर्मचारियों से कैश की मांग की। पैसे मिलने के बाद उसने कई राउंड फायरिंग की। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने ग्रे रंग की हुडी, जींस और काले बूट पहन रखे थे। उसके चेहरे पर मास्क था। वारदात के बाद वह सफेद रंग की कार में फरार हो गया। आरोपी की तलाश कर रही पुलिस पुलिस को इस घटना से जुड़ी CCTV फुटेज मिली है। पुलिस ने लोगों से आरोपी के बारे में जानकारी देने की अपील भी की है। खबर अपडेट की जा रही है….
तापसी पन्नू के बयान पर कंगना रनोट भड़कीं:बोलीं- B-ग्रेड फिल्म के लिए 'सस्ती कॉपी' ने सारी हदें पार कर दीं

तापसी पन्नू के कंगना रनोट से मतभेदों पर दिए बयान के बाद कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर प्रतिक्रिया दी। तापसी ने कहा था कि वह विवाद से पहले या बाद में कभी कंगना से नहीं मिलीं। जिसके बाद कंगना ने तापसी पर अपनी परवरिश और माता-पिता का मजाक उड़ाने का आरोप लगाते हुए उन्हें सस्ती कॉपी कहा। दरअसल, हाल ही में इंडिया टुडे से बातचीत में तापसी से पूछा गया कि क्या उन्होंने और कंगना ने अपने मतभेद सुलझा लिए हैं। तापसी ने कहा कि वह कंगना से कभी नहीं मिलीं और कथित विवाद शुरू होने से पहले भी उनकी मुलाकात नहीं हुई थी। तापसी ने आगे कहा कि मेरी उनके बारे में राय मेरी परवरिश, मेरे बात करने के तरीके और चीजों को देखने के नजरिए को दिखाती है। वह अपने नजरिए पर कायम हैं। तापसी के इस बयान के सामने आने के बाद कंगना ने शनिवार शाम बिना नाम लिए एक पोस्ट शेयर की। उन्होंने लिखा, “एक सस्ती कॉपी अपनी आने वाली B-ग्रेड फिल्म को लेकर भी हमेशा की तरह मीडिया में सिर्फ हेडलाइन बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन आज उन्होंने सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने मेरी परवरिश और मेरे माता-पिता का बेहद बेशर्मी से मजाक उड़ाया।” एक्ट्रेस ने आगे लिखा, “मुझे लगता है कि सभी माता-पिता अपने बच्चों के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ करते हैं। मैं कभी किसी बहस में माता-पिता को नहीं लाती, लेकिन आज मैं उनके माता-पिता से भी पूछना चाहती हूं कि वे मेरे माता-पिता की तरह कोई ओरिजिनल इंसान क्यों नहीं पैदा कर सके? इतनी सस्ती कॉपी क्यों? आपकी कोशिशों के लिए मुझे अफसोस है।” कंगना ने कहा- वो प्रतिष्ठित परिवार से आती हैं इसके बाद कंगना ने तापसी की टिप्पणी वाली एक खबर शेयर की और कहा कि कई लोग उनकी परवरिश और माता-पिता पर सवाल उठाते हैं। कंगना ने बताया कि उनका परिवार एक प्रतिष्ठित राजपूत जमींदार परिवार से आता है और उनके माता-पिता पढ़े-लिखे हैं। कंगना ने कहा कि यह उनकी निजी पसंद थी कि वह अपने करियर की शुरुआत बिल्कुल शुरुआत से करें। इसके लिए उनके माता-पिता पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं? कंगना ने ये पोस्ट शनिवार शाम अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की थीं। हालांकि, रविवार सुबह तक उन्होंने दोनों स्टोरी डिलीट कर दी थीं। तापसी-कंगना का विवाद कई साल पुराना है गौरतलब है कि अभिनेत्री तापसी पन्नू और कंगना रनोट के बीच विवाद काफी पुराना है। विवाद की शुरुआत 2018-19 के आसपास हुई। तापसी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि कंगना को अपनी बात कहने के लिए फिल्टर की जरूरत है। इसके बाद 2019 में तापसी ने कंगना की फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ के ट्रेलर की तारीफ की, लेकिन कंगना का नाम नहीं लिया। इस पर कंगना की बहन रंगोली चंदेल ने तापसी को ‘सस्ती कॉपी’ कह दिया था। इसके बाद 2020 में सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर बहस तेज हुई। इसी दौरान कंगना ने तापसी और स्वरा भास्कर को ‘बी-ग्रेड एक्ट्रेस’ कहा था। कंगना ने कहा था कि दोनों आउटसाइडर होने के बावजूद नेपोटिज्म का समर्थन करती हैं। तापसी ने इस पर कहा था कि आउटसाइडर्स को आपस में नहीं लड़ना चाहिए।
पंजाबी युवक की अमेरिका में गोली मारकर हत्या:पिज्जा डिलीवर करने जाते वक्त लुटेरों ने फायरिंग की; पिता बोले- ₹30 लाख कर्ज लेकर भेजा था

पंजाब में कपूरथला के रहने वाले एक 28 वर्षीय युवक की अमेरिका में गोली मारकर हत्या कर दी गई। जिस समय युवक पर हमला हुआ, वह पिज्जा डिलीवरी देने जा रहा था। इसी दौरान बाइक पर आए हमलावरों ने उसपर फायरिंग कर दी। युवक को घायल अवस्था में अस्पताल भी पहुंचाया गया था, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। युवक की पहचान गुरदीप सिंह के रूप में हुई है। वह कपूरथला में बेगोवाल कस्बे में जब्बोवाल गांव का रहने वाला था और करीब 10 साल पहले काम करने के लिए अमेरिका गया था। शनिवार, 22 अगस्त को उसकी मौत की सूचना मिलने के परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिवार ने केंद्र और पंजाब सरकार से मांग की है कि उनके बेटे का शव भारत लाया जाए और अमेरिका में उसकी हत्या करने वालों को सजा दी जाए। मृतक के पिता ने ये जानकारियां दीं अविवाहित था गुरदीप सिंह परिजनों के मुताबिक, गुरदीप सिंह अविवाहित था। उसका एक भाई है जो गांव में ही रहकर परिवार को संभालता है। गुरदीप की मौत के बाद अब माता-पिता का यह भाई ही इकलौता सहारा बचा है। परिवार ने शव वापस लाने की लगाई गुहार गुरदीप सिंह के परिवार ने पंजाब सरकार और केंद्र सरकार से अपील की है कि उनके बेटे का शव जल्द से जल्द भारत लाने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान की जाए। परिवार ने अमेरिकी प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और हत्या के जिम्मेदार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाने की भी मांग की है। गांव के लोगों ने भी सरकार से परिवार की मदद करने और गुरदीप सिंह का शव भारत लाने के लिए हरसंभव प्रयास करने का आग्रह किया है। ॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… जालंधर में महिला को पति-सास ने हार्पिक पिलाया:फोर्टिस अस्पताल में छोड़कर भागे; पत्नी को एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का पता चल गया था जालंधर के करतारपुर थाने में महिला को हार्पिक पिलाकर मारने की कोशिश करने का मामला दर्ज हुआ है। केस महिला के पति और सास के खिलाफ है। महिला को गंभीर हालत में जालंधर के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया। पढ़ें पूरी खबर…
सायरा बानो@82, दिलीप कुमार से शादी की भविष्यवाणी हुई सच:मेहमानों ने शादी से चुराए कांटे-छुरी, खाना कम पड़ा; शाहरुख को बेटा माना; जानिए किस्से

साल 1955 तमिलनाडु के कोयंबटूर में फिल्म ‘आजाद’ की शूटिंग चल रही थी। इसी दौरान फिल्म प्रोड्यूसर एस.एस. वासन ने दिलीप कुमार की मुलाकात एक मशहूर ज्योतिषी से कराई। ज्योतिषी ने दिलीप कुमार का चेहरा देखा, हाथ की रेखाएं पढ़ीं और फिर उनकी कुंडली बनाई। इसके बाद उन्होंने ऐसी भविष्यवाणी की, जिसे सुनकर खुद दिलीप कुमार भी हैरान रह गए। ज्योतिषी ने कहा कि दिलीप कुमार की शादी 40 साल की उम्र के बाद होगी। उनकी दुल्हन उनसे करीब आधी उम्र की होगी। इतना ही नहीं, वह भी फिल्मों से जुड़ी होगी। भविष्यवाणी यहीं खत्म नहीं हुई। ज्योतिषी ने यह भी कहा कि उस महिला को एक गंभीर बीमारी भी होगी। यह सुनकर दिलीप कुमार ने कहा था, “मैं तो कभी फिल्म वाली लड़की से शादी ही नहीं करूंगा।” उस वक्त दिलीप कुमार ने इस भविष्यवाणी को गंभीरता से नहीं लिया था, लेकिन करीब 11 साल बाद ज्योतिषी की कही लगभग हर बात सच हो गई। 1966 में 44 साल के दिलीप कुमार ने 22 साल की एक्ट्रेस सायरा बानो से निकाह किया। आज सायरा बानो के 82वें जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी और दिलीप कुमार के साथ उनकी प्रेम कहानी के कुछ अनसुने किस्से। दिलीप कुमार के चलते उर्दू सीखनी शुरू की सायरा बानो का जन्म 1944 में मशहूर अदाकारा नसीम बानो और प्रोड्यूसर मियां एहसान-उल-हक के घर हुआ था। दिलचस्प बात ये है कि जिस साल सायरा दुनिया में आईं, उसी साल दिलीप कुमार की पहली फिल्म ज्वार भाटा (1944) रिलीज हुई थी। सायरा करीब 6 साल की थीं, जब उनको पढ़ाई के लिए यूनाइटेड किंगडम भेज दिया गया। लंदन के मशहूर एलीट स्कूल क्वीन्स हाउस में उनकी पढ़ाई हुई। छुट्टियां होतीं, तो सायरा हिंदुस्तान आती थीं। ऐसी ही एक छुट्टी में 12 साल की सायरा अपनी मां के साथ घर पर फिल्म आन देख रही थीं। फिल्म महबूब खान ने बनाई थी और हीरो थे दिलीप कुमार। दिलीप साहब की अदाकारी ने सायरा के दिल पर ऐसा असर किया कि फिल्म खत्म होते ही उन्होंने मां के सामने अपनी ख्वाहिश जाहिर कर दी। सायरा ने साफ कह दिया- अगर शादी करेंगी, तो सिर्फ दिलीप कुमार से। लंदन में पढ़ाई के दौरान भी सायरा बानो के दिल में एक ही ख्वाब था- एक दिन वह मिसेज दिलीप कुमार बनेंगी। सायरा ने दैनिक भास्कर को दिए एक पुराने इंटरव्यू में यह बात बताई थी। सायरा की मां नसीम बानो उनसे कहती थीं कि अगर उन्हें दिलीप कुमार की पत्नी बनना है, तो पहले उनकी पसंद-नापसंद और शौक को समझना होगा। बस फिर क्या था, सायरा ने भी दिलीप साहब की पसंद की चीजें सीखना शुरू कर दिया। जब उन्हें मालूम हुआ कि दिलीप कुमार को उर्दू और शायरी बेहद पसंद है, तो सायरा ने बाकायदा मौलवी साहब से उर्दू पढ़ना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, दिलीप साहब को सितार पसंद था, तो सायरा ने सितार सीखने की कोशिश भी की। काम करने को लेकर दिलीप कुमार ने सफेद बाल दिखा दिए सायरा की मां नसीम एक एक्ट्रेस थीं, इसलिए दिलीप कुमार की नसीम बानो से मुलाकात होती रहती थी। वो सायरा के बारे में भी जानते थे। जब सायरा ने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने का फैसला किया और निर्माता एस. मुखर्जी ने यह बात दिलीप कुमार से कही तो उन्होंने कहा था कि सायरा को फिल्मों में करियर बनाने से रोका जाना चाहिए। 1960 के दशक की शुरुआत में फिल्म ‘दिल दिया दर्द लिया’ की कास्टिंग शुरू होने वाली थी। इसी दौरान निर्माता एस. मुखर्जी ने दिलीप कुमार से कहा था, “यूसुफ, यह लड़की आपके साथ काम करने के लिए पागल है।” जिस पर दिलीप कुमार ने अपने सफेद-काले बालों में हाथ फेरकर सायरा से कहा था, “क्या तुमने मेरे ये सफेद बाल देखे हैं? मैं तुमसे बहुत ज्यादा उम्र का हूं और मैं सुअर की तरह खाता हूं!” शम्मी कपूर की डांट सुनकर सायरा रोने लगी थीं सायरा बानो की पहली फिल्म 1961 में रिलीज हुई ‘जंगली’ थी। हालांकि फिल्मों में कदम रखने का फैसला उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था। परिवार, खासकर उनकी मां नसीम बानो, इसके खिलाफ थीं, लेकिन सायरा ने अपने इस ख्वाब को छोड़ना मंजूर नहीं किया। उन्होंने स्कूल की छुट्टियों के दौरान ‘जंगली’ की शूटिंग शुरू की। कुछ महीने शूटिंग करने के बाद वह वापस लंदन चली गईं और अपनी पढ़ाई पूरी करने लगीं। लेकिन फिल्म की शूटिंग से लेकर रिलीज तक, कुछ ऐसे वाकये हुए, जिन्होंने सायरा को रुला दिया। दरअसल, सायरा बानो ने फिल्म ‘जंगली’ साइन तो कर ली थी, लेकिन उन्हें एक्टिंग का कोई तजुर्बा नहीं था। शूटिंग के पहले दिन वह कश्मीर के शालीमार बाग पहुंचीं। वहां हजारों लोग शूटिंग देखने के लिए जमा थे। सायरा वैसे भी काफी शर्मीली थीं। उन्हें ‘कश्मीर की कली’ गाने की एक लाइन पर घूमकर लिप-सिंक करना था, लेकिन वह बार-बार गलती कर रही थीं। लिप-सिंक पर ध्यान देतीं, तो गलत दिशा में घूम जातीं। घूमने पर ध्यान देतीं, तो गाने की लाइन छूट जाती। कई रीटेक के बाद शम्मी कपूर ने उन्हें डांटते हुए कहा कि अगर काम करना है, तो ठीक से करो। यह सुनकर सायरा बहुत शर्मिंदा हुईं और रोने लगीं। उनकी बहन ने भी कहा कि अभी वक्त है, चाहो तो एक्टिंग छोड़कर वापस चल सकते हैं, लेकिन सायरा ने हार नहीं मानी। उन्होंने दोबारा वही सीन किया और इस बार बिल्कुल सही कर दिया। लेकिन रिलीज से पहले एक और वाकये ने सायरा को परेशान कर दिया। एक दिन वह अपनी मां के साथ मुंबई की एक दुकान पर गई थीं। वहां एक सेल्समैन दिलीप कुमार का बड़ा फैन था। उसने सायरा की मां से पूछा कि बेटी की फिल्म कब आ रही है? मां ने बताया कि अगले महीने। यह सुनते ही सेल्समैन बोला कि अगले महीने दिलीप कुमार की ‘गंगा जमुना’ भी रिलीज हो रही है। दोनों फिल्में साथ आईं, तो सायरा की फिल्म कौन देखेगा? यह सुनकर सायरा घबरा गईं और वहीं रोने लगीं। उन्हें लगा कि उनकी फिल्म फ्लॉप हो जाएगी। लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा। ‘जंगली’ और ‘गंगा जमुना’ एक हफ्ते के अंतर से रिलीज हुईं और दोनों फिल्मों ने शानदार कामयाबी हासिल की। पार्टी में पहली बार दिलीप कुमार
सायरा बानो@82, दिलीप कुमार से शादी की भविष्यवाणी हुई सच:मेहमानों ने शादी से चुराए कांटे-छुरी, खाना कम पड़ा; शाहरुख को बेटा माना; जानिए किस्से

साल 1955 तमिलनाडु के कोयंबटूर में फिल्म ‘आजाद’ की शूटिंग चल रही थी। इसी दौरान फिल्म प्रोड्यूसर एस.एस. वासन ने दिलीप कुमार की मुलाकात एक मशहूर ज्योतिषी से कराई। ज्योतिषी ने दिलीप कुमार का चेहरा देखा, हाथ की रेखाएं पढ़ीं और फिर उनकी कुंडली बनाई। इसके बाद उन्होंने ऐसी भविष्यवाणी की, जिसे सुनकर खुद दिलीप कुमार भी हैरान रह गए। ज्योतिषी ने कहा कि दिलीप कुमार की शादी 40 साल की उम्र के बाद होगी। उनकी दुल्हन उनसे करीब आधी उम्र की होगी। इतना ही नहीं, वह भी फिल्मों से जुड़ी होगी। भविष्यवाणी यहीं खत्म नहीं हुई। ज्योतिषी ने यह भी कहा कि उस महिला को एक गंभीर बीमारी भी होगी। यह सुनकर दिलीप कुमार ने कहा था, “मैं तो कभी फिल्म वाली लड़की से शादी ही नहीं करूंगा।” उस वक्त दिलीप कुमार ने इस भविष्यवाणी को गंभीरता से नहीं लिया था, लेकिन करीब 11 साल बाद ज्योतिषी की कही लगभग हर बात सच हो गई। 1966 में 44 साल के दिलीप कुमार ने 22 साल की एक्ट्रेस सायरा बानो से निकाह किया। आज सायरा बानो के 82वें जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी और दिलीप कुमार के साथ उनकी प्रेम कहानी के कुछ अनसुने किस्से। दिलीप कुमार के चलते उर्दू सीखनी शुरू की सायरा बानो का जन्म 1944 में मशहूर अदाकारा नसीम बानो और प्रोड्यूसर मियां एहसान-उल-हक के घर हुआ था। दिलचस्प बात ये है कि जिस साल सायरा दुनिया में आईं, उसी साल दिलीप कुमार की पहली फिल्म ज्वार भाटा (1944) रिलीज हुई थी। सायरा करीब 6 साल की थीं, जब उनको पढ़ाई के लिए यूनाइटेड किंगडम भेज दिया गया। लंदन के मशहूर एलीट स्कूल क्वीन्स हाउस में उनकी पढ़ाई हुई। छुट्टियां होतीं, तो सायरा हिंदुस्तान आती थीं। ऐसी ही एक छुट्टी में 12 साल की सायरा अपनी मां के साथ घर पर फिल्म आन देख रही थीं। फिल्म महबूब खान ने बनाई थी और हीरो थे दिलीप कुमार। दिलीप साहब की अदाकारी ने सायरा के दिल पर ऐसा असर किया कि फिल्म खत्म होते ही उन्होंने मां के सामने अपनी ख्वाहिश जाहिर कर दी। सायरा ने साफ कह दिया- अगर शादी करेंगी, तो सिर्फ दिलीप कुमार से। लंदन में पढ़ाई के दौरान भी सायरा बानो के दिल में एक ही ख्वाब था- एक दिन वह मिसेज दिलीप कुमार बनेंगी। सायरा ने दैनिक भास्कर को दिए एक पुराने इंटरव्यू में यह बात बताई थी। सायरा की मां नसीम बानो उनसे कहती थीं कि अगर उन्हें दिलीप कुमार की पत्नी बनना है, तो पहले उनकी पसंद-नापसंद और शौक को समझना होगा। बस फिर क्या था, सायरा ने भी दिलीप साहब की पसंद की चीजें सीखना शुरू कर दिया। जब उन्हें मालूम हुआ कि दिलीप कुमार को उर्दू और शायरी बेहद पसंद है, तो सायरा ने बाकायदा मौलवी साहब से उर्दू पढ़ना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, दिलीप साहब को सितार पसंद था, तो सायरा ने सितार सीखने की कोशिश भी की। काम करने को लेकर दिलीप कुमार ने सफेद बाल दिखा दिए सायरा की मां नसीम एक एक्ट्रेस थीं, इसलिए दिलीप कुमार की नसीम बानो से मुलाकात होती रहती थी। वो सायरा के बारे में भी जानते थे। जब सायरा ने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने का फैसला किया और निर्माता एस. मुखर्जी ने यह बात दिलीप कुमार से कही तो उन्होंने कहा था कि सायरा को फिल्मों में करियर बनाने से रोका जाना चाहिए। 1960 के दशक की शुरुआत में फिल्म ‘दिल दिया दर्द लिया’ की कास्टिंग शुरू होने वाली थी। इसी दौरान निर्माता एस. मुखर्जी ने दिलीप कुमार से कहा था, “यूसुफ, यह लड़की आपके साथ काम करने के लिए पागल है।” जिस पर दिलीप कुमार ने अपने सफेद-काले बालों में हाथ फेरकर सायरा से कहा था, “क्या तुमने मेरे ये सफेद बाल देखे हैं? मैं तुमसे बहुत ज्यादा उम्र का हूं और मैं सुअर की तरह खाता हूं!” शम्मी कपूर की डांट सुनकर सायरा रोने लगी थीं सायरा बानो की पहली फिल्म 1961 में रिलीज हुई ‘जंगली’ थी। हालांकि फिल्मों में कदम रखने का फैसला उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था। परिवार, खासकर उनकी मां नसीम बानो, इसके खिलाफ थीं, लेकिन सायरा ने अपने इस ख्वाब को छोड़ना मंजूर नहीं किया। उन्होंने स्कूल की छुट्टियों के दौरान ‘जंगली’ की शूटिंग शुरू की। कुछ महीने शूटिंग करने के बाद वह वापस लंदन चली गईं और अपनी पढ़ाई पूरी करने लगीं। लेकिन फिल्म की शूटिंग से लेकर रिलीज तक, कुछ ऐसे वाकये हुए, जिन्होंने सायरा को रुला दिया। दरअसल, सायरा बानो ने फिल्म ‘जंगली’ साइन तो कर ली थी, लेकिन उन्हें एक्टिंग का कोई तजुर्बा नहीं था। शूटिंग के पहले दिन वह कश्मीर के शालीमार बाग पहुंचीं। वहां हजारों लोग शूटिंग देखने के लिए जमा थे। सायरा वैसे भी काफी शर्मीली थीं। उन्हें ‘कश्मीर की कली’ गाने की एक लाइन पर घूमकर लिप-सिंक करना था, लेकिन वह बार-बार गलती कर रही थीं। लिप-सिंक पर ध्यान देतीं, तो गलत दिशा में घूम जातीं। घूमने पर ध्यान देतीं, तो गाने की लाइन छूट जाती। कई रीटेक के बाद शम्मी कपूर ने उन्हें डांटते हुए कहा कि अगर काम करना है, तो ठीक से करो। यह सुनकर सायरा बहुत शर्मिंदा हुईं और रोने लगीं। उनकी बहन ने भी कहा कि अभी वक्त है, चाहो तो एक्टिंग छोड़कर वापस चल सकते हैं, लेकिन सायरा ने हार नहीं मानी। उन्होंने दोबारा वही सीन किया और इस बार बिल्कुल सही कर दिया। लेकिन रिलीज से पहले एक और वाकये ने सायरा को परेशान कर दिया। एक दिन वह अपनी मां के साथ मुंबई की एक दुकान पर गई थीं। वहां एक सेल्समैन दिलीप कुमार का बड़ा फैन था। उसने सायरा की मां से पूछा कि बेटी की फिल्म कब आ रही है? मां ने बताया कि अगले महीने। यह सुनते ही सेल्समैन बोला कि अगले महीने दिलीप कुमार की ‘गंगा जमुना’ भी रिलीज हो रही है। दोनों फिल्में साथ आईं, तो सायरा की फिल्म कौन देखेगा? यह सुनकर सायरा घबरा गईं और वहीं रोने लगीं। उन्हें लगा कि उनकी फिल्म फ्लॉप हो जाएगी। लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा। ‘जंगली’ और ‘गंगा जमुना’ एक हफ्ते के अंतर से रिलीज हुईं और दोनों फिल्मों ने शानदार कामयाबी हासिल की। पार्टी में पहली बार दिलीप कुमार
ओडिशा के पास चीनी क्रू वाला जहाज डूबा:24 लोग सवार थे; इंडियन कोस्ट गार्ड-नेवी ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया

ओडिशा के पारादीप तट से करीब 240 समुद्री मील दूर बंगाल की खाड़ी में आज एक मालवाहक जहाज डूब गया। पनामा के झंडे वाले इस जहाज पर 24 क्रू सदस्य सवार थे। पीटीआई के मुताबिक, इनमें ज्यादातर चीनी नागरिक थे। जहाज ओडिशा से लौह अयस्क लेकर सिंगापुर जा रहा था। यह शुक्रवार को ओडिशा तट से रवाना हुआ था। जहाज के डूबने की वजह अभी पता नहीं चल पाई है। इंडियन कोस्ट गार्ड और नेवी ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया हादसे की जानकारी मिलते ही इंडियन कोस्ट गार्ड और इंडियन नेवी ने क्रू सदस्यों की तलाश और बचाव अभियान शुरू कर दिया। आसपास मौजूद दूसरे जहाजों को भी अलर्ट किया गया है और रेस्क्यू में मदद करने को कहा गया है। न्यूज एजेंसी से एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि अभी यह साफ नहीं है कि कितने क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि जहाज पर सवार ज्यादातर लोग चीनी नागरिक थे। हादसे के समय बंगाल की खाड़ी में मौसम भी पूरी तरह सामान्य नहीं था। मौसम विभाग ने उत्तर बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना जताई थी। इससे समुद्र में मौसम खराब हो सकता है। हालांकि, जहाज इसी वजह से डूबा, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। खबर अपडेट हो रही है…
पाकिस्तान ने पत्रकार को आतंकी सूची में डाला:PoK प्रदर्शन कवर करने वाले दानिश इरशाद पर बिना मुकदमे कार्रवाई, बैंक-यात्रा पर रोक

पाकिस्तान ने PoK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार और शोधकर्ता डेनिश इरशाद का नाम आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची यानी फोर्थ शेड्यूल में डाल दिया है। खास बात यह है कि उनके खिलाफ किसी खास आतंकवादी गतिविधि का आरोप या अदालत का कोई फैसला सामने नहीं आया है। इरशाद पिछले करीब 10 साल से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान की राजनीति और वहां के हालात पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने PoK में हुए प्रदर्शनों, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की स्थिति को प्रमुखता से कवर किया था। अब उनका नाम उस सूची में डाला गया है, जिसमें सरकार उन लोगों को रखती है, जिन्हें वह आतंकवाद या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ा मानती है। इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर डेनिश इरशाद ने ऐसा क्या किया, जिसके आधार पर उन्हें फोर्थ शेड्यूल में डाला गया? उपलब्ध आदेश में इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। डेनिश इरशाद कौन हैं? डेनिश इरशाद रावलपिंडी में रहने वाले पत्रकार और शोधकर्ता हैं। उन्होंने 2015 में इस्लामाबाद से पत्रकारिता शुरू की थी। इसके बाद से वे लगातार PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान की राजनीति, इतिहास और वहां के सामाजिक-राजनीतिक हालात पर काम कर रहे हैं। वे लाहौर स्थित नियो न्यूज के साथ काम करते हैं और जम्मू से प्रकाशित कश्मीर टाइम्स में कॉलम भी लिखते हैं। वे 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर के इतिहास पर एक किताब भी लिख चुके हैं। बीबीसी उर्दू के पत्रकार रोहान अहमद ने उन्हें पेशेवर पत्रकार और शोधकर्ता बताया है। उनके मुताबिक, इरशाद उन लोगों की आवाज सामने लाने की कोशिश करते रहे हैं, जिन्हें अपनी बात रखने के लिए मदद की जरूरत होती है। इरशाद ने ऐसा क्या किया? पाकिस्तान के जिस आदेश के आधार पर डेनिश इरशाद का नाम फोर्थ शेड्यूल में डाला गया है, उसमें उनके खिलाफ कोई खास आरोप नहीं बताया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि उन्होंने ऐसा कौन सा काम किया, जिसे आतंकवाद से जोड़कर देखा गया। कश्मीर टाइम्स के मुताबिक, इरशाद का नाम PoK के 24 लोगों की सूची में 12वें नंबर पर है। आदेश में जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी जेके-जेएएसी से जुड़े कार्यकर्ताओं का भी जिक्र है। पाकिस्तान सरकार ने जेएएसी को जून में प्रतिबंधित कर दिया था। हाल के महीनों में इरशाद ने PoK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की लगातार रिपोर्टिंग की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मांगों और वहां की स्थिति को कवर करने के साथ उन परिवारों से भी बातचीत की, जिनके बच्चों के पाकिस्तान की सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे जाने का आरोप है। यानी उनकी रिपोर्टिंग में आंदोलनकारियों और प्रभावित परिवारों का पक्ष भी सामने आया। हालांकि, सरकार के आदेश में यह नहीं बताया गया कि उनकी ऐसी कौन सी रिपोर्टिंग या गतिविधि फोर्थ शेड्यूल में नाम डालने का आधार बनी। इरशाद के मुताबिक, उन्हें न तो किसी मामले में अदालत में पेश किया गया और न ही किसी अपराध में दोषी ठहराया गया। उन्हें सरकार की तरफ से सीधे यह जानकारी भी नहीं दी गई कि उनका नाम सूची में क्यों डाला गया। उन्हें 18 अगस्त को सोशल मीडिया के जरिए इस कार्रवाई का पता चला। इसके बाद उन्होंने PoK के गृह विभाग के एक सूत्र से इसकी पुष्टि की। फोर्थ शेड्यूल क्या है? पाकिस्तान में फोर्थ शेड्यूल आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची है। इसमें उन लोगों को रखा जा सकता है, जिन्हें सरकार आतंकवाद या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ा मानती है। इस सूची में नाम आने के बाद संबंधित व्यक्ति पर कई तरह की पाबंदियां लग सकती हैं। इनमें विदेश यात्रा पर रोक, पासपोर्ट से जुड़ी पाबंदियां, बैंक खातों पर कार्रवाई, कर्ज या क्रेडिट कार्ड लेने में परेशानी और हथियार का लाइसेंस लेने पर रोक जैसी पाबंदियां शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा सरकारी निगरानी भी बढ़ सकती है। इसलिए किसी पत्रकार का नाम इस सूची में डाला जाना सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई नहीं मानी जाती। इससे उस व्यक्ति की आवाजाही, आर्थिक गतिविधियों और सार्वजनिक कामकाज पर गंभीर असर पड़ सकता है। PoK में क्या चल रहा है? डेनिश इरशाद के खिलाफ यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब PoK में लंबे समय से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। इन प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी कर रही है। प्रदर्शनकारी राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सब्सिडी और शासन व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे उठा रहे हैं। उनकी मांगों में PoK विधानसभा में पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना भी शामिल है। पाकिस्तान सरकार ने 5 जून को जेएएसी पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव बढ़ गया। इस दौरान इंटरनेट बंद करने और मीडिया पर पाबंदियां लगाने जैसी कार्रवाई भी हुई। जेएएसी का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 80 से ज्यादा नागरिक मारे गए हैं। यह आंकड़ा संगठन का दावा है। इसी दौरान डेनिश इरशाद लगातार PoK के हालात की रिपोर्टिंग कर रहे थे। उन्होंने प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के अलावा प्रभावित परिवारों से भी बात की। यही वजह है कि उनके खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनकी रिपोर्टिंग और आंदोलन को कवर करने की वजह से उन्हें निशाना बनाया गया। पाकिस्तानी पत्रकारों ने क्या कहा? डेनिश इरशाद को फोर्थ शेड्यूल में डाले जाने की पाकिस्तान के कुछ पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने भी आलोचना की है। पाकिस्तानी पत्रकार सालेह सफीर अब्बासी ने इसे प्रेस की आजादी पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि असहमति रखना अपराध नहीं, बल्कि एक अधिकार है। ब्रिटेन में रहने वाले पाकिस्तानी कार्यकर्ता अजहर अहमद ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी पत्रकार के खिलाफ आतंकवाद रोधी कानून का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है। इससे उन पत्रकारों में डर पैदा हो सकता है, जो विरोध प्रदर्शनों, सरकारी कार्रवाई और मानवाधिकारों की स्थिति पर रिपोर्टिंग करते हैं। न्यूयॉर्क की पाकिस्तानी खोजी पत्रकार अरीबा फातिमा ने भी सवाल उठाया कि इरशाद के खिलाफ न कोई मुकदमा है और न अदालत का आदेश, फिर उन्हें आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची में किस आधार पर डाला गया? सिर्फ
अमेरिका ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया:तीन दिन की बातचीत के बाद समझौता नहीं हुआ

अमेरिका ने कनाडा से आने वाले 20 अरब डॉलर से ज्यादा के सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। यह कदम दोनों देशों के ट्रेड बातचीत के बाद समझौता नहीं होने के बाद उठाया गया। अमेरिका और कनाडा के अधिकारियों ने वॉशिंगटन डीसी में तीन दिन की बातचीत की थी, लेकिन व्यापार समझौता फाइनल नहीं हो सका। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तय समय सीमा शनिवार को खत्म हो गई है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि उनका देश इन नए टैरिफ का जवाब “डॉलर फॉर डॉलर” देगा। यानी कनाडा भी अमेरिका के सामान पर उतने ही मूल्य का टैरिफ लगाएगा। खबर लगातार अपडेट हो रही है…







