Sunday, 13 Sep 2026 | 01:23 AM

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ट्रम्प ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया:तीन दिन की बातचीत बेनतीजा; पीएम कार्नी बोले- US ने आखिरी समय शर्तें बदली

ट्रम्प ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया:तीन दिन की बातचीत बेनतीजा; पीएम कार्नी बोले- US ने आखिरी समय शर्तें बदली

अमेरिका और कनाडा के बीच 3 दिन तक चली ट्रेड डील की बातचीत नाकाम रही। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार आधी रात से कनाडा के 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया। यह कनाडा के अमेरिका को सालाना निर्यात का 5% है। अमेरिका और कनाडा के अधिकारियों ने वॉशिंगटन डीसी में तीन दिन की बातचीत की थी, लेकिन व्यापार समझौता फाइनल नहीं हो सका। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका जितना टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उतना ही जवाब देगा। उन्होंने कहा कि, पिछले कुछ हफ्तों में बातचीत में अच्छी प्रगति हुई थी, लेकिन वह कनाडा के हितों को पूरा करने के लिए काफी नहीं थी। आखिरी समय में अमेरिका ने डील की शर्तें बदल दीं। इससे किसी भी समझौते पर भरोसा करना मुश्किल हो गया। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

53 साल के अर्जुन रामपाल ने दूसरी शादी की:14 साल छोटी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला से शादी रजिस्टर कराई, रिलेशनशिप से दो बेटे हैं

53 साल के अर्जुन रामपाल ने दूसरी शादी की:14 साल छोटी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला से शादी रजिस्टर कराई, रिलेशनशिप से दो बेटे हैं

बॉलीवुड एक्टर अर्जुन रामपाल ने अपनी लंबे समय से गर्लफ्रेंड गैब्रिएला डेमेट्रियड्स से शादी कर ली है। गोवा में बुधवार को यह शादी रजिस्टर्ड कराई है। दोनों ने उत्तरी गोवा के मापुसा स्थित सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में शादी की कानूनी प्रक्रिया पूरी की। PTI के मुताबिक, इस दौरान उनके करीबी दोस्त मौजूद थे। स्थानीय कानून के तहत पहले और दूसरे हस्ताक्षर के बीच 15 दिन का इंतजार जरूरी होता है। इस अवधि को माफ कराने के लिए कपल ने स्थानीय कोर्ट के असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर से विशेष अनुमति ली थी। सब-रजिस्ट्रार सूरज वर्नेकर ने बताया कि शादी गोवा के यूनिफॉर्म सिविल कोड के तहत रजिस्टर्ड हुई। अर्जुन और गैब्रिएला शाम करीब 4 बजे ऑफिस पहुंचे थे। दोनों इस मौके पर कैजुअल कपड़ों में थे। 2018 से रिश्ते में हैं अर्जुन और गैब्रिएला अर्जुन और गैब्रिएला 2018 से रिश्ते में हैं। यह रिश्ता एक्टर के पूर्व पत्नी मेहर जेसिया से अलग होने के बाद शुरू हुआ था। शादी से 7 पहले यानी 2019 में अर्जुन और गैब्रिएला के पहले बेटे एरिक का जन्म हुआ था। इसके चार साल बाद उनके दूसरे बेटे एरिव का जन्म हुआ। 2025 में अर्जुन ने गैब्रिएला से अपनी सगाई की जानकारी दी थी। यह सगाई दोनों के डेटिंग शुरू करने के छह साल बाद हुई थी। दो बच्चों के बाद शादी नहीं करने पर यह कहा था अर्जुन ने इससे पहले रणवीर इलाहाबादिया के यूट्यूब चैनल पर बताया था कि दो बच्चों के माता-पिता होने के बावजूद उन्होंने गैब्रिएला से शादी क्यों नहीं की थी? एक्टर ने कहा था कि यह न मेरी वजह से है और न उसकी वजह से। शादी आखिर है क्या? एक कागज ही तो है। मुझे लगता है कि हम पहले से शादीशुदा हैं और मेरे मन में इसे लेकर कोई शक नहीं है, लेकिन कभी-कभी वह कागज आपको बदल भी सकता है क्योंकि आपको लगता है कि अब सब स्थायी है, जबकि असल में यह एक गलत धारणा है और आप कानूनी तौर पर बंध जाते हैं। उन्होंने आगे कहा था, इससे एक-दूसरे के प्रति आपका रवैया बदल सकता है। मुझे लगता है कि हम दोनों ऐसा ही महसूस करते हैं। हमारे बीच जो कुछ हुआ, वह बहुत स्वाभाविक था। मैं इसके बारे में ज्यादा बात नहीं करना चाहता, क्योंकि मैं इसे नजर न लगने देना चाहता हूं। मुझे नहीं लगता कि मुझे किसी को इस बात का जवाब देना जरूरी है। हमारे लिए यह बहुत खूबसूरत है। आपको जब तक संभव हो, इसे महसूस करते रहना चाहिए। हम दोनों के मन में एक-दूसरे से शादी हो चुकी है। हम एक-दूसरे को सही दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं और साथ ही बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड भी हैं। हालांकि, अर्जुन रामपाल ने यह भी साफ किया था कि वह शादी के खिलाफ नहीं हैं। अर्जुन की पहली शादी मेहर जेसिया से हुई थी अर्जुन रामपाल की पहली शादी पूर्व सुपरमॉडल मेहर जेसिया से 1998 में हुई थी। इस शादी से उनकी दो बेटियां माहिका और मायरा हुईं। 20 साल साथ रहने के बाद, मई 2018 में उन्होंने अलग होने की घोषणा की और नवंबर 2019 में दोनों का तलाक हो गया।

53 साल के अर्जुन रामपाल ने दूसरी शादी की:14 साल छोटी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला से शादी रजिस्टर कराई, रिलेशनशिप से दो बेटे हैं

53 साल के अर्जुन रामपाल ने दूसरी शादी की:14 साल छोटी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला से शादी रजिस्टर कराई, रिलेशनशिप से दो बेटे हैं

बॉलीवुड एक्टर अर्जुन रामपाल ने अपनी लंबे समय से गर्लफ्रेंड गैब्रिएला डेमेट्रियड्स से शादी कर ली है। गोवा में शुक्रवार को यह शादी रजिस्टर्ड कराई गई। दोनों ने उत्तरी गोवा के मापुसा स्थित सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में शादी की कानूनी प्रक्रिया पूरी की। PTI के मुताबिक, इस दौरान उनके करीबी दोस्त मौजूद थे। स्थानीय कानून के तहत पहले और दूसरे हस्ताक्षर के बीच 15 दिन का इंतजार जरूरी होता है। इस अवधि को माफ कराने के लिए कपल ने स्थानीय कोर्ट के असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर से विशेष अनुमति ली थी। सब-रजिस्ट्रार सूरज वर्नेकर ने बताया कि शादी गोवा के यूनिफॉर्म सिविल कोड के तहत रजिस्टर्ड हुई। अर्जुन और गैब्रिएला शाम करीब 4 बजे ऑफिस पहुंचे थे। दोनों इस मौके पर कैजुअल कपड़ों में थे। 2018 से रिश्ते में हैं अर्जुन और गैब्रिएला अर्जुन और गैब्रिएला 2018 से रिश्ते में हैं। यह रिश्ता एक्टर के पूर्व पत्नी मेहर जेसिया से अलग होने के बाद शुरू हुआ था। शादी से 7 साल पहले यानी 2019 में अर्जुन और गैब्रिएला के पहले बेटे एरिक का जन्म हुआ था। इसके चार साल बाद उनके दूसरे बेटे एरिव का जन्म हुआ। 2025 में अर्जुन ने गैब्रिएला से अपनी सगाई की जानकारी दी थी। दो बच्चों के बाद शादी नहीं करने पर यह कहा था अर्जुन ने इससे पहले रणवीर अलाहबादिया के यूट्यूब चैनल पर बताया था कि दो बच्चों के माता-पिता होने के बावजूद उन्होंने गैब्रिएला से शादी क्यों नहीं की थी? एक्टर ने कहा था कि यह न मेरी वजह से है और न उसकी वजह से। शादी आखिर है क्या? एक कागज ही तो है। मुझे लगता है कि हम पहले से शादीशुदा हैं और मेरे मन में इसे लेकर कोई शक नहीं है, लेकिन कभी-कभी वह कागज आपको बदल भी सकता है क्योंकि आपको लगता है कि अब सब स्थायी है, जबकि असल में यह एक गलत धारणा है और आप कानूनी तौर पर बंध जाते हैं। उन्होंने आगे कहा था, इससे एक-दूसरे के प्रति आपका रवैया बदल सकता है। मुझे लगता है कि हम दोनों ऐसा ही महसूस करते हैं। हमारे बीच जो कुछ हुआ, वह बहुत स्वाभाविक था। मैं इसके बारे में ज्यादा बात नहीं करना चाहता, क्योंकि मैं इसे नजर न लगने देना चाहता हूं। मुझे नहीं लगता कि मुझे किसी को इस बात का जवाब देना जरूरी है। हमारे लिए यह बहुत खूबसूरत है। आपको जब तक संभव हो, इसे महसूस करते रहना चाहिए। हम दोनों के मन में एक-दूसरे से शादी हो चुकी है। हम एक-दूसरे को सही दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं और साथ ही बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड भी हैं। हालांकि, अर्जुन रामपाल ने यह भी साफ किया था कि वह शादी के खिलाफ नहीं हैं। अर्जुन की पहली शादी मेहर जेसिया से हुई थी अर्जुन रामपाल की पहली शादी पूर्व सुपरमॉडल मेहर जेसिया से 1998 में हुई थी। इस शादी से उनकी दो बेटियां माहिका और मायरा हुईं। 20 साल साथ रहने के बाद, मई 2018 में उन्होंने अलग होने की घोषणा की और नवंबर 2019 में दोनों का तलाक हो गया।

कनाडा में 2 गुरुद्वारों को गिराने की धमकी:एक ही नंबर से 2 बार धमकी भरी कॉल आई, कैलगरी पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई

कनाडा में 2 गुरुद्वारों को गिराने की धमकी:एक ही नंबर से 2 बार धमकी भरी कॉल आई, कैलगरी पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई

कनाडा के कैलगरी स्थित प्रमुख सिख धार्मिक स्थल दशमेश कल्चर सेंटर को अज्ञात लोगों ने इमारत गिराने की धमकी दी है। लगातार आ रहे इन नस्ली और धमकी भरे फोन कॉल्स के बाद गुरुद्वारा प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन और पुलिस की चिंता बढ़ गई है। एहतियात के तौर पर गुरुद्वारा साहिब परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड तैनात कर दिए गए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उसी नंबर से कनाडा के ही सवाना स्थित गोबिंद सरवर गुरुद्वारा साहिब को भी इसी तरह की धमकी मिली है। मामले की शिकायत मिलने के बाद कैलगरी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और समुदाय या दोनों में से किसी भी गुरुद्वारा साहिब को किसी सक्रिय खतरे की संभावना नहीं है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि धमकी देने वाले लोग कौन थे और उनका मकसद क्या था? पहले पार्किंग खाली करने को कहा, फिर इमारत ढहाने की धमकी दशमेश कल्चर सेंटर के चेयरमैन रणबीर सिंह परमार ने बताया कि गुरुद्वारा साहिब के कार्यालय में लगातार दो संदिग्ध फोन कॉल्स आईं। पहली कॉल में अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर गुरुद्वारा साहिब की पार्किंग खाली कराने को कहा। उसने दावा किया कि वहां कुछ तार बिछाने का काम किया जाना है। जबकि, कुछ समय बाद एक अन्य व्यक्ति ने फोन कर खुद को एक कंस्ट्रक्शन कंपनी का CEO बताया। उसने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चेयरमैन रणबीर सिंह परमार से बात की और सीधे गुरुद्वारा भवन को गिराने की धमकी दी। रणबीर ने बताया कि उसी नंबर से कनाडा के सवाना स्थित गोबिंद सरवर गुरुद्वारा साहिब को भी इसी तरह की धमकी भरी कॉल आई। कैलगरी पुलिस कर रही मामले की जांच कैलगरी पुलिस सर्विस ने मीडिया को दिए अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि वे इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कर रहे हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि केवल दशमेश कल्चर सेंटर ही नहीं, बल्कि एक अन्य नजदीकी गुरुद्वारे को भी इसी तरह का धमकी भरा फोन कॉल आया था। पुलिस कॉल करने वाले अज्ञात व्यक्तियों की पहचान करने और नंबरों को ट्रेस करने का प्रयास कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि यह कोई शरारत थी या इसके पीछे कोई नफरती मानसिकता थी। समाज सेवा से जुड़ा है गुरुद्वारा स्थानीय संगत और नियमित आने वाले लोगों ने घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि यह गुरुद्वारा सभी धर्मों के लिए खुला है और समाज सेवा, फूड बैंक और कपड़े बांटने जैसे काम करता है। दुनिया में पहले से तनाव है, ऐसे में देश के भीतर नफरत फैलाने के बजाय प्यार बांटना चाहिए। मेयर और नेताओं को दी गई सूचना घटना की गंभीरता को देखते हुए गुरुद्वारा कमेटी ने पुलिस के साथ-साथ अल्बर्टा प्रांत की प्रीमियर के कार्यालय, स्थानीय पार्षदों, सांसदों और विधायकों को सूचित किया है। कैलगरी के मेयर जेरेमी फारकस ने सोशल मीडिया पर इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए सिख समुदाय के प्रति अपना समर्थन जताया है। सिख संगठनों और गुरुद्वारा प्रबंधन के बयान गुरुद्वारा प्रबंधन के प्रतिनिधि अमनप्रीत सिंह परमार ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि गुरुद्वारा बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए फूड बैंक और कपड़े दान करने जैसे सामाजिक कार्य चलाता है। जब दुनिया में पहले से ही इतनी जंग चल रही है, तो हमें देश के भीतर आंतरिक युद्ध शुरू नहीं करने चाहिए, बल्कि प्यार फैलाना चाहिए। वहीं, डायरेक्टर ऑफ ऑपरेशंस, दशमेश कल्चर सेंटर राज सिद्धू ने बताया कि धमकी भरे फोन के समय परिसर में काफी संख्या में परिवार और बच्चे मौजूद थे। यह घटना परेशान करने वाली जरूर है, लेकिन यह समय डरने का नहीं, बल्कि एकजुट होने और संवाद करने का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरुद्वारे के दरवाजे हमेशा की तरह सभी संस्कृतियों और धर्मों के लोगों के लिए खुले रहेंगे। गुरुद्वारा अध्यक्ष हरपाल सिंह और अन्य सदस्यों ने चिंता जताई कि सोशल मीडिया पर चल रही कुछ तीखी और अनियंत्रित बयानबाजियां इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने फोन करने वाले व्यक्ति को भी आमंत्रित किया कि वह गुरुद्वारे आए और सिख समुदाय के बारे में करीब से जाने। कनाडा में बसे पंजाबी समुदाय में गुस्सा बता दें, दशमेश कल्चर सेंटर का इतिहास गौरवमयी है और 46 साल पहले इसकी नींव रखी गई थी। यह गुरुद्वारा अब 15 हजार से अधिक पंजीकृत सदस्यों और कैलगरी के करीब एक लाख से अधिक सिख प्रवासियों की धार्मिक और सामाजिक जरूरतों को पूरा करता है। ऐसे धार्मिक स्थान को गिराने की धमकी से कैलगरी ही नहीं पूरे कनाडा में बसे पंजाबियों में गुस्सा है। यही कारण है कि इस घटना पर स्थानीय प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। मेयर ने घटना की निंदी की कैलगरी के मेयर मेयर जेरोमी फारकास ने भी इस कायरतापूर्ण कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि कैलगरी में नफरत, डर या कट्टरता के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने सिख समुदाय के प्रति अपनी संवेदना और समर्थन व्यक्त करते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा दिया है। फिलहाल, दशमेश कल्चर सेंटर और दूसरे गुरुद्वारे में अतिरिक्त निजी सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए हैं और आने-जाने वाले वाहनों पर पैनी नजर रखी जा रही है।

मनोज मुंतशिर बोले- श्रीकृष्ण थे दुनिया के पहले साइकोलॉजिस्ट:भगवद्गीता हर दुख का इलाज; राधा-कृष्ण के एक ना होने का कारण बताया

मनोज मुंतशिर बोले- श्रीकृष्ण थे दुनिया के पहले साइकोलॉजिस्ट:भगवद्गीता हर दुख का इलाज; राधा-कृष्ण के एक ना होने का कारण बताया

गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर का नाट्य शो ‘राधा से रणभूमि तक’ आज 22 और 23 अगस्त को इंदौर के लता मंगेशकर ऑडिटोरियम में मंचित होने जा रहा है। नीलम मुंतशिर और विक्रम मेहरा ने इस शो का निर्माण किया है। पुनीत जे। पाठक के निर्देशन में बने इस शो में श्रीकृष्ण की अनकही यात्रा को जीवंत किया गया है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में मनोज मुंतशिर ने श्रीकृष्ण के मनोविज्ञान, 50 से अधिक किताबों के अध्ययन से जुड़ी 2 साल की लेखन यात्रा, राधा-कृष्ण के अटूट प्रेम और आज की जेन-जी (Gen-Z) पीढ़ी के लिए श्रीकृष्ण के संदेशों पर खुलकर बात की। सवाल: ‘राधा से रणभूमि तक’ पहुंचते-पहुंचते कृष्ण में सबसे बड़ा बदलाव क्या पाते हैं? जवाब:कृष्ण में कुछ बदला ही नहीं। कृष्ण सदैव से ही पूर्ण थे प्रेम में भी, नीति में भी, युद्ध में भी और दर्शन में भी। जो पूर्ण हो वो बदलेगा कैसे? सवाल: दर्शक यह शो क्यों देखें? जवाब: हमारा शो किसी रेस में नहीं है। हम किसी से अच्छा या बेहतर बनने की कोशिश नहीं कर रहे। हम बस कृष्ण की एक ऐसी यात्रा आपके सामने रखना चाहते हैं, जो आपने इससे पहले किसी मंच, सिनेमा या टेलीविजन पर नहीं देखी होगी। शो में कुछ ऐसे पल हैं, जिनपर मैंने दर्शकों की हिचकियां सुनी हैं, उनका रोना सुना है, वहीं अनेक ऐसे पल भी हैं जहां लोग सीट्स से उठकर नाचते हैं। राधा-कृष्ण की अंतिम मुलाकात, गांधारी का श्राप, कृष्ण की मृत्यु, द्रौपदी का चीरहरण और जिस तरह हम गीता सार प्रस्तुत कर पाए। ये सभी क्षण अविस्मरणीय बन के उभरे हैं। और सबसे बड़ी बात, यह पूरे परिवार के लिए एक मनोरंजक और भावनात्मक अनुभव है। बच्चे इसे युद्ध के भव्य दृश्यों के लिए देख सकते हैं, बड़े इसके संगीत और वैभव के लिए और बुजुर्ग गीता सार के दौरान भावुक हुए बिना शायद रह ही नहीं पाएंगे। इस शो को लिखने के लिए मैंने 50 से अधिक किताबें पढ़ीं। श्रीमद्भागवत और हरिवंश पुराण सहित अनेक शास्त्रों और कृष्ण पर लिखे गए ग्रंथों का अध्ययन किया और दो साल से अधिक की लेखन यात्रा के बाद इसे आकार दिया। मैं आपसे सिर्फ एक बार यह शो देखने का आग्रह करता हूं। उसके बाद दर्शक खुद इसे सात-आठ बार देखने वापस आते हैं। मुंबई में हमें कई ऐसे लोग मिले जो लगातार आठवीं बार शो देखने आए थे। हमारे निर्माता श्री विक्रम मेहरा और नीलम मुंतशिर और निर्देशक पुनीत जे। पाठक ने मिलकर ऐसा शो तैयार किया है, जिसपर मुझे आकाश भर गर्व है। सवाल: प्ले के नाम में ही एक पूरी यात्रा है। आपके लिए कृष्ण क्या हैं प्रेमी, रणनीतिकार, दार्शनिक या योद्धा? जवाब: मेरे कृष्ण पूर्ण परमेश्वर हैं। वो मनुष्य योनि में जन्मे, इसलिए प्रेमी भी हैं, सखा भी, गुरु भी, बेटे भी और पिता भी। लेकिन मेरे लिए कृष्ण सबसे बड़े दार्शनिक योद्धा हैं, जो कहते हैं कि “वो शांति निंदनीय है जो युद्ध से घबराये और वो युद्ध वंदनीय है जो शांति के लिए लड़ा जाए”। सवाल: इस कहानी में आपकी सबसे बड़ी अनकही बात क्या है? जवाब:एक ऐसा प्रश्न है जो मुझे हमेशा व्यथित करता रहा। जब कृष्ण अपने अंतिम क्षणों में मृत्यु के सामने थे, तब उनके मन में क्या चल रहा था? भगवान क्या सोच रहे थे? हमने उसी अनकहे क्षण को समझने और महसूस करने की कोशिश की है। सवाल: कृष्ण की यात्रा में आपको सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली घटना कौन-सी है? जवाब: कोई एक हो तो बताऊं। लेकिन दो बातें मुझे विशेष तौर पर प्रभावित करती हैं, युद्ध और शांति के बीच वो संतुलन जो कृष्ण बना पाये। आज की दुनिया यही संतुलन बना पाने में असफल हो रही है। और दूसरी बात, सफलता को सुख समझने की हमारी भूल। कृष्ण की जीवन यात्रा से आप समझेंगे की सफलता और सुख में अंतर है। एक बार कृष्ण की और लौटिए, सारे उत्तर मिल जाएंगे। सवाल: राधा और कृष्ण कभी एक क्यों नहीं हो पाए? जवाब: राधा और कृष्ण एक कैसे होते, जब दो थे ही नहीं! कृष्ण कभी राधा से दूर गए ही नहीं। वे सर से पांव तक स्वयं राधा बन गए थे। आज भी अगर आपको कृष्ण को बुलाना हो, तो राधा रानी का नाम लेना पड़ता है। ‘राधे-राधे बोले, चले आएंगे बिहारी।’ सवाल:कृष्ण का सबसे बड़ा हथियार क्या था बुद्धि, नीति या मनोविज्ञान? जवाब:कृष्ण का सबसे बड़ी सुपरपावर था मनोविज्ञान। कृष्ण दुनिया के सबसे पहले मनोवैज्ञानिक चिकित्सक थे। पश्चिम का ये दावा एकदम आधारहीन है कि मनोविज्ञान के जनक सिग्मंड फ्रायड थे। फ्रायड से 5000 पहले मनोविज्ञान का सबसे बड़ा शास्त्र अवतरित हो चुका था जिसे हम श्रीमद्भगवद्गीता कहते हैं। 700 श्लोकों का एक कैप्सूल है भगवद्गीता, जो संसार के हर दुख की दवा है। गीता को सहजता से समझना है तो एक बार राधा से रणभूमि तक देखिए, गीता का इस से भावुक रूप शायद आपने अब तक नहीं देखा होगा। सवाल:अगर कृष्ण स्वयं आपसे पूछें ‘मेरी कहानी लिखते समय मुझे कितना समझा?’ तो आप क्या कहेंगे? जवाब:मैं कृष्ण को समझने का दावा बिल्कुल नहीं करता। एक ही दावा है मेरा और वो अभिमान की हद तक है। मैं कृष्ण में विश्वास करता हूं, मैंने उनके हाथ पकड़ लिए हैं, वो जहां चाहे ले जाएं। मैं अपने सभी श्रोताओं और दर्शकों से एक ही आग्रह करता हूं। कृष्ण का हाथ पकड़ के चलिए, जीवन में कभी किसी के पांव पकड़ने की नौबत नहीं आएगी। सवाल:लेखक के तौर पर क्या डर लगा कि कहीं आस्था आड़े न आ जाए या कल्पना मर्यादा न लांघ जाए? जवाब: मैंने पहले खुद को कृष्ण के बारे में जितना संभव हो सका, उतना भरा और उसके बाद लिखना शुरू किया। 50 से अधिक किताबें पढ़ीं, कृष्ण पर लिखे गए ग्रंथ पढ़े, गीता पढ़ी और पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ इस यात्रा में उतरा। और जब हमारे साथ श्रीनाथजी का आशीर्वाद हो, तो फिर चिंता किस बात की? हमने पूरे देश में लगभग 30 हाउसफुल शो किए हैं और हर जगह से सिर्फ प्रशंसा ही सुनने को मिली। यह कृष्ण जी की ही कृपा है। अब 22 और 23 अगस्त को इंदौर के लता मंगेशकर ऑडिटोरियम में चार शो हैं। माँ अहिल्याबाई

मनोज मुंतशिर बोले- श्रीकृष्ण थे दुनिया के पहले साइकोलॉजिस्ट:भगवद्गीता हर दुख का इलाज; राधा-कृष्ण के एक ना होने का कारण बताया

मनोज मुंतशिर बोले- श्रीकृष्ण थे दुनिया के पहले साइकोलॉजिस्ट:भगवद्गीता हर दुख का इलाज; राधा-कृष्ण के एक ना होने का कारण बताया

गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर का नाट्य शो ‘राधा से रणभूमि तक’ आज 22 और 23 अगस्त को इंदौर के लता मंगेशकर ऑडिटोरियम में मंचित होने जा रहा है। नीलम मुंतशिर और विक्रम मेहरा ने इस शो का निर्माण किया है। पुनीत जे। पाठक के निर्देशन में बने इस शो में श्रीकृष्ण की अनकही यात्रा को जीवंत किया गया है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में मनोज मुंतशिर ने श्रीकृष्ण के मनोविज्ञान, 50 से अधिक किताबों के अध्ययन से जुड़ी 2 साल की लेखन यात्रा, राधा-कृष्ण के अटूट प्रेम और आज की जेन-जी (Gen-Z) पीढ़ी के लिए श्रीकृष्ण के संदेशों पर खुलकर बात की। सवाल: ‘राधा से रणभूमि तक’ पहुंचते-पहुंचते कृष्ण में सबसे बड़ा बदलाव क्या पाते हैं? जवाब:कृष्ण में कुछ बदला ही नहीं। कृष्ण सदैव से ही पूर्ण थे प्रेम में भी, नीति में भी, युद्ध में भी और दर्शन में भी। जो पूर्ण हो वो बदलेगा कैसे? सवाल: दर्शक यह शो क्यों देखें? जवाब: हमारा शो किसी रेस में नहीं है। हम किसी से अच्छा या बेहतर बनने की कोशिश नहीं कर रहे। हम बस कृष्ण की एक ऐसी यात्रा आपके सामने रखना चाहते हैं, जो आपने इससे पहले किसी मंच, सिनेमा या टेलीविजन पर नहीं देखी होगी। शो में कुछ ऐसे पल हैं, जिनपर मैंने दर्शकों की हिचकियां सुनी हैं, उनका रोना सुना है, वहीं अनेक ऐसे पल भी हैं जहां लोग सीट्स से उठकर नाचते हैं। राधा-कृष्ण की अंतिम मुलाकात, गांधारी का श्राप, कृष्ण की मृत्यु, द्रौपदी का चीरहरण और जिस तरह हम गीता सार प्रस्तुत कर पाए। ये सभी क्षण अविस्मरणीय बन के उभरे हैं। और सबसे बड़ी बात, यह पूरे परिवार के लिए एक मनोरंजक और भावनात्मक अनुभव है। बच्चे इसे युद्ध के भव्य दृश्यों के लिए देख सकते हैं, बड़े इसके संगीत और वैभव के लिए और बुजुर्ग गीता सार के दौरान भावुक हुए बिना शायद रह ही नहीं पाएंगे। इस शो को लिखने के लिए मैंने 50 से अधिक किताबें पढ़ीं। श्रीमद्भागवत और हरिवंश पुराण सहित अनेक शास्त्रों और कृष्ण पर लिखे गए ग्रंथों का अध्ययन किया और दो साल से अधिक की लेखन यात्रा के बाद इसे आकार दिया। मैं आपसे सिर्फ एक बार यह शो देखने का आग्रह करता हूं। उसके बाद दर्शक खुद इसे सात-आठ बार देखने वापस आते हैं। मुंबई में हमें कई ऐसे लोग मिले जो लगातार आठवीं बार शो देखने आए थे। हमारे निर्माता श्री विक्रम मेहरा और नीलम मुंतशिर और निर्देशक पुनीत जे। पाठक ने मिलकर ऐसा शो तैयार किया है, जिसपर मुझे आकाश भर गर्व है। सवाल: प्ले के नाम में ही एक पूरी यात्रा है। आपके लिए कृष्ण क्या हैं प्रेमी, रणनीतिकार, दार्शनिक या योद्धा? जवाब: मेरे कृष्ण पूर्ण परमेश्वर हैं। वो मनुष्य योनि में जन्मे, इसलिए प्रेमी भी हैं, सखा भी, गुरु भी, बेटे भी और पिता भी। लेकिन मेरे लिए कृष्ण सबसे बड़े दार्शनिक योद्धा हैं, जो कहते हैं कि “वो शांति निंदनीय है जो युद्ध से घबराये और वो युद्ध वंदनीय है जो शांति के लिए लड़ा जाए”। सवाल: इस कहानी में आपकी सबसे बड़ी अनकही बात क्या है? जवाब:एक ऐसा प्रश्न है जो मुझे हमेशा व्यथित करता रहा। जब कृष्ण अपने अंतिम क्षणों में मृत्यु के सामने थे, तब उनके मन में क्या चल रहा था? भगवान क्या सोच रहे थे? हमने उसी अनकहे क्षण को समझने और महसूस करने की कोशिश की है। सवाल: कृष्ण की यात्रा में आपको सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली घटना कौन-सी है? जवाब: कोई एक हो तो बताऊं। लेकिन दो बातें मुझे विशेष तौर पर प्रभावित करती हैं, युद्ध और शांति के बीच वो संतुलन जो कृष्ण बना पाये। आज की दुनिया यही संतुलन बना पाने में असफल हो रही है। और दूसरी बात, सफलता को सुख समझने की हमारी भूल। कृष्ण की जीवन यात्रा से आप समझेंगे की सफलता और सुख में अंतर है। एक बार कृष्ण की और लौटिए, सारे उत्तर मिल जाएंगे। सवाल: राधा और कृष्ण कभी एक क्यों नहीं हो पाए? जवाब: राधा और कृष्ण एक कैसे होते, जब दो थे ही नहीं! कृष्ण कभी राधा से दूर गए ही नहीं। वे सर से पांव तक स्वयं राधा बन गए थे। आज भी अगर आपको कृष्ण को बुलाना हो, तो राधा रानी का नाम लेना पड़ता है। ‘राधे-राधे बोले, चले आएंगे बिहारी।’ सवाल:कृष्ण का सबसे बड़ा हथियार क्या था बुद्धि, नीति या मनोविज्ञान? जवाब:कृष्ण का सबसे बड़ी सुपरपावर था मनोविज्ञान। कृष्ण दुनिया के सबसे पहले मनोवैज्ञानिक चिकित्सक थे। पश्चिम का ये दावा एकदम आधारहीन है कि मनोविज्ञान के जनक सिग्मंड फ्रायड थे। फ्रायड से 5000 पहले मनोविज्ञान का सबसे बड़ा शास्त्र अवतरित हो चुका था जिसे हम श्रीमद्भगवद्गीता कहते हैं। 700 श्लोकों का एक कैप्सूल है भगवद्गीता, जो संसार के हर दुख की दवा है। गीता को सहजता से समझना है तो एक बार राधा से रणभूमि तक देखिए, गीता का इस से भावुक रूप शायद आपने अब तक नहीं देखा होगा। सवाल:अगर कृष्ण स्वयं आपसे पूछें ‘मेरी कहानी लिखते समय मुझे कितना समझा?’ तो आप क्या कहेंगे? जवाब:मैं कृष्ण को समझने का दावा बिल्कुल नहीं करता। एक ही दावा है मेरा और वो अभिमान की हद तक है। मैं कृष्ण में विश्वास करता हूं, मैंने उनके हाथ पकड़ लिए हैं, वो जहां चाहे ले जाएं। मैं अपने सभी श्रोताओं और दर्शकों से एक ही आग्रह करता हूं। कृष्ण का हाथ पकड़ के चलिए, जीवन में कभी किसी के पांव पकड़ने की नौबत नहीं आएगी। सवाल:लेखक के तौर पर क्या डर लगा कि कहीं आस्था आड़े न आ जाए या कल्पना मर्यादा न लांघ जाए? जवाब: मैंने पहले खुद को कृष्ण के बारे में जितना संभव हो सका, उतना भरा और उसके बाद लिखना शुरू किया। 50 से अधिक किताबें पढ़ीं, कृष्ण पर लिखे गए ग्रंथ पढ़े, गीता पढ़ी और पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ इस यात्रा में उतरा। और जब हमारे साथ श्रीनाथजी का आशीर्वाद हो, तो फिर चिंता किस बात की? हमने पूरे देश में लगभग 30 हाउसफुल शो किए हैं और हर जगह से सिर्फ प्रशंसा ही सुनने को मिली। यह कृष्ण जी की ही कृपा है। अब 22 और 23 अगस्त को इंदौर के लता मंगेशकर ऑडिटोरियम में चार शो हैं। माँ अहिल्याबाई

जिन्ना की बीमारी छिपाने वाले डॉक्टरों को पाकिस्तान सम्मान देगा:मुंबई के दो डॉक्टरों ने 1946 में बताया था- जिन्ना को गंभीर टीबी

जिन्ना की बीमारी छिपाने वाले डॉक्टरों को पाकिस्तान सम्मान देगा:मुंबई के दो डॉक्टरों ने 1946 में बताया था- जिन्ना को गंभीर टीबी

पाकिस्तान अपने संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की गंभीर बीमारी की जानकारी गुप्त रखने वाले मुंबई के दो डॉक्टरों को देश के बड़े नागरिक सम्मानों में से एक निशान-ए-इम्तियाज देगा। दोनों डॉक्टरों ने 1946 में जिन्ना के एक्स-रे की जांच कर उन्हें गंभीर टीबी होने की जानकारी दी थी। पाकिस्तान के योजना मंत्री और अवॉर्ड्स कमेटी के अध्यक्ष अहसन इकबाल ने सोशल मीडिया पर बताया कि दोनों डॉक्टरों को सम्मान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने जिन्ना की बीमारी की बात किसी को नहीं बताई और उस समय ‘चुपचाप लेकिन बहुत बड़ी जिम्मेदारी निभाई।’ कौन थे दोनों डॉक्टर? दोनों डॉक्टर मुंबई के पारसी समुदाय से थे। डॉ. जेआर पटेल और डॉ. जेए धायभो-कू ने 1946 में जिन्ना के एक्स-रे की जांच की थी। इसमें पता चला कि जिन्ना को गंभीर टीबी है। फ्रीडम एट मिडनाइट किताब के मुताबिक, डॉक्टरों को लगा था कि जिन्ना के पास सिर्फ 1 से 2 साल का समय बचा है। उनकी बीमारी के बारे में बहुत कम लोगों को पता था। इनमें उनकी बहन फातिमा जिन्ना और दोनों डॉक्टर शामिल थे। खबर अपडेट हो रही है…

श्वेता तिवारी को मराठी यूजर्स ने दीं भद्दी गालियां:एक्ट्रेस ने राज ठाकरे से पूछा- क्या आपके सपोर्टर्स ऐसे हैं, क्या ये जायज; जानिए पूरा विवाद

श्वेता तिवारी को मराठी यूजर्स ने दीं भद्दी गालियां:एक्ट्रेस ने राज ठाकरे से पूछा- क्या आपके सपोर्टर्स ऐसे हैं, क्या ये जायज; जानिए पूरा विवाद

एक्ट्रेस श्वेता तिवारी सोशल मीडिया पर मिल रहीं भद्दी गालियों पर भड़क गई हैं। उन्होंने गाली देने वाले यूजर्स की प्रोफाइल और उनके परिवार की तस्वीरें शेयर की हैं। साथ ही एक्ट्रेस ने राज ठाकरे से पूछा है कि क्या उनके सपोर्टर्स ऐसे हैं, जो खुद को मराठी कहते हैं और महिलाओं को घटिया गालियां देते हैं। श्वेता तिवारी ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम से कुछ ऐसी प्रोफाइल भी शेयर कीं, जिनमें ट्रोलर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के चीफ राज ठाकरे की पार्टी से जुड़ा नजर आ रहा था। श्वेता ने इसके साथ लिखा, आज मैं ऐसी एक बात करना चाहती हूं जो बहुत गहरी चिंता का विषय है और दुर्भाग्य से सोशल मीडिया पर बहुत आम हो चुकी है, किसी भी महिला को गंदी गाली देना। किसी भी महिला को। किसी भी उम्र की। किसी भी पेशे से जुड़ी हुई। कोई भी पुरुष, किसी भी बैकग्राउंड से, ऑनलाइन आकर किसी भी महिला को आपत्तिजनक शब्द कह सकता है। आगे श्वेता ने लिखा, ‘और जो बात मुझे सबसे ज्यादा झकझोरती है, वह यह है कि ये पुरुष जरूरी नहीं कि अनपढ़ हों या किसी खराब माहौल से आते हों। इनमें से बहुत से लोग पढ़े-लिखे हैं, देखने में सम्मानित परिवारों से आते हैं, उनकी पत्नियां हैं, बेटियां हैं, मां हैं और बहनें हैं और फिर भी वे किसी दूसरी महिला के लिए सबसे अपमानजनक शब्द इस्तेमाल करने में बिल्कुल सहज महसूस करते हैं।’ श्वेता तिवारी ने कुछ गाली देने वाले यूजर्स की प्रोफाइल भी शेयर की और साथ ही उनके परिवार की तस्वीरें भी शेयर कीं। राज ठाकरे से पूछा- क्या ऐसा व्यवहार जायज है श्वेता ने एक ऐसी प्रोफाइल दिखाई, जिस पर राज ठाकरे के समर्थन से जुड़ी चीजें पोस्ट की गई थीं। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “एक शख्स राज ठाकरे और उनकी पार्टी का सपोर्टर है। यह बात मेरे लिए थोड़ी पर्सनल हो गई, क्योंकि मैं अपनी पूरी जिंदगी महाराष्ट्र में रही हूं।” उन्होंने आगे लिखा, “मेरे पिता मुंबई में पले-बढ़े। मेरा भी यहीं जन्म हुआ और इसी शहर में मैं बड़ी हुई। पूरी जिंदगी मैंने मराठी माणुस से जुड़े गर्व और सम्मान को महसूस किया है। मैंने मराठी महिलाओं को गर्व से कहते सुना है कि वे मराठी मुलगी हैं।” श्वेता ने कहा, “मुझे लगता है कि मराठी संस्कृति महिलाओं के सम्मान, उनकी ताकत और गरिमा का ख्याल रखती है। लेकिन जब कोई मराठी माणुस किसी महिला को पर्सनल मैसेज करके गाली देता है, तो मुझे हैरानी होती है।” उन्होंने पूछा, “क्या मराठी माणुस का यही मतलब होता है? राज ठाकरे, मैं जानना चाहती हूं कि अगर ऐसे लोग आपके समर्थक हैं, तो क्या आप मानते हैं कि ऐसा व्यवहार जायज है?” एक्ट्रेस ने लिखा, “खुद को मराठी माणुस कहना ही काफी नहीं होता। महिलाओं का सम्मान करना भी मराठी माणुस की पहचान होती है।” श्वेता के मुताबिक, ट्रोल्स इस कदर बेशर्म हो चुके हैं कि उनके 8 साल के बेटे और बेटी पलक को लेकर भी भद्दी बातें बोलते हैं। ऑनलाइन डिलीवरी में कॉकरोच निकलने पर तुकाराम मुंढे को किया टैग श्वेता तिवारी ने गुरुवार को ऑनलाइन एनर्जी ड्रिंक ऑर्डर की थी। जब ऑर्डर खोला गया, तो उसमें कॉकरोच मिलने से एक्ट्रेस घबरा गईं। एक्ट्रेस ने वीडियो जारी कर महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी कार्रवाई से चर्चा में बने हुए FDA ऑफिसर तुकाराम मुंढे से सवाल किया है। ऑफिशियल इंस्टाग्राम से शेयर किए गए वीडियो में श्वेता तिवारी ने कहा, ‘हमने इंस्टामार्ट से रेडबुल मंगवाया। लेकिन इंस्टामार्ट से हमारे घर में ये (कॉकरोच) भी आया। कॉकरोच पूरे घर में भाग रहा है।’ दूसरे वीडियो में श्वेता ने कॉकरोच दिखाया और कहा, ‘क्या हमें तुकाराम मुंढे जी को टैग करना चाहिए। मुंढे जी ये हमारे घर में इंस्टामार्ट से कॉकरोच आ रहे हैं। आप कहां हैं, ध्यान दीजिए।’ द ट्रेटर में नजर आईं श्वेता तिवारी कसौटी जिंदगी की शो से देशभर में पहचान हासिल करने वालीं श्वेता तिवारी इन दिनों अमेजन प्राइम के शो द ट्रेटर्स सीजन 2 में नजर आ रही हैं। इससे पहले श्वेता रियलिटी शो बिग बॉस की विजेता रह चुकी हैं। श्वेता तिवारी अपनी निजी जिंदगी के चलते भी चर्चा में रह चुकी हैं।

हिंदू-मुस्लिम की सोच से बाहर आइए:कंगना रनोट ने शर्मिता टैगोर पर साधा निशाना, वंदे मातरम् पर सीनियर एक्ट्रेस के बयान पर भड़कीं

हिंदू-मुस्लिम की सोच से बाहर आइए:कंगना रनोट ने शर्मिता टैगोर पर साधा निशाना, वंदे मातरम् पर सीनियर एक्ट्रेस के बयान पर भड़कीं

दिग्गज एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर की वंदे मातरम् पर टिप्पणी के बाद कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी है। शर्मिला टैगोर ने कहा था कि वंदे मातरम् के कुछ हिस्से एक ईश्वर को मानने वाले लोगों की आस्था से मेल नहीं खा सकते। उन्होंने कहा कि गीत में कई देवताओं का जिक्र है। कंगना बोलीं- हैरान हूं कि आपकी सोच इतनी छोटी है कंगना ने शर्मिला टैगोर के इंटरव्यू का वीडियो अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर किया। उन्होंने लिखा, “मैं खुश हूं कि शर्मिला जी ने वंदे मातरम् को लेकर अपनी आपत्ति के बारे में बात की। लेकिन एक कलाकार के तौर पर मैं हैरान हूं कि कला और कविता को लेकर उनकी सोच इतनी छोटी और बनावटी कैसे हो सकती है।” कंगना ने आगे लिखा, “किसी भी कविता या गीत में शब्द रूपक होते हैं। कवि या कलाकार मनचाहा असर पैदा करने के लिए हर तरह की कल्पना करता है और असंभव लगने वाली समानताएं खींचता है। विवेकानंद ने मशहूर तौर पर कहा था कि मुझे ऐसे युवा चाहिए, जो लोहे जैसे बने हों, जिनकी हड्डियां फौलाद की हों और जिनकी नसों में बिजली दौड़ती हो।” उन्होंने कहा, “विवेकानंद मौसम का अनुमान नहीं बता रहे थे। वह केवल शक्ति को जगाने की मांग कर रहे थे। कृपया हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर आइए।” आखिर में कंगना ने लिखा, “भले ही हम एक ईश्वर में विश्वास करते हों, डॉक्टर भी ताकत को शक्ति कहते हैं। आइए, एक-दूसरे को अपनों की तरह अपनाएं। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं और उस जोरदार गले मिलने से भी मुझे परेशानी नहीं है, जैसा आप हमेशा देती हैं।” शर्मिला बोलीं- एक ईश्वर को मानने वालों के लिए कहना मुश्किल शर्मिला टैगोर ने आईएएनएस से अपनी बात समझाते हुए कहा, “मेरी राय यह है कि बहुत से धार्मिक लोग एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं, कई ईश्वरों में नहीं। वंदे मातरम् में एक अंतरा है, जिसमें कई देवताओं का जिक्र किया गया है।” उन्होंने आगे कहा, “जो लोग एक धर्म में विश्वास करते हैं, उनके लिए ‘वंदे काली, वंदे दुर्गा’ कहना मुश्किल है। इसलिए, अगर हम भारत के सभी धार्मिक लोगों को साथ लेकर चलें, तो इसके पहले दो अंतरे बहुत अच्छे हैं।” शर्मिला टैगोर ने अब तक कंगना रनौत की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बयानों से चर्चा में हैं कंगना रनोट GenZ को कहा गटरछाप- जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में पहुंचे स्टूडेंट पर कंगना ने कहा था, ‘मैंने अपनी जिंदगी में कभी एक जगह पर इतनी बदसूरती नहीं देखी। Gen Z के विरोध प्रदर्शनों की ये रील्स उल्टी लाने वाली हैं। जिस तरह से वे बात करते हैं और जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं। मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी हर एक फ्रेम में सब कुछ इतना खटकने वाला और इतना भद्दा एक साथ नहीं देखा। मैं उन्हें जेनरेशन गटर कहती हूं। उनमें से कुछ के पास सिस्टम को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई-लिखाई में अच्छे नहीं हैं।’ बयान पर विवाद बढ़ने के बाद कंगना ने कहा कि पूरे देश के युवाओं को ‘गटरछाप’ नहीं कहा था। उनका बयान जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में मौजूद एक खास नस्ल को लेकर था। बाबा रामदेव से कहा- मेरी जवानी के सपने न देखें- योग गुरू बाबा रामदेव ने कंगना की आलोचना की है। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने जेन Z को लेकर कंगना की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के जवान को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए बाबा रामदेव पर पलटवार करते हुए लिखा, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम मत कीजिए। कोई सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही ऐसा सोच सकता है। कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से झूठे या फर्जी मेडिकल दावों को लेकर फटकार नहीं लगी। इसलिए मुझे चरित्र का पाठ मत पढ़ाइए। आपका चरित्र जैसा भी है, मेरा उससे कहीं बेहतर है। यहां कोई फ्रॉड नहीं मिला है।” महिलाओं को लिखा- यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं कंगना ने पोस्ट में लिखा कि पश्चिमी सोच से प्रभावित भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी सामने आई है, जिसे वह ‘गटर जेनरेशन’ कहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ नहीं है। साथ ही, उन्होंने उनकी सोच और मानसिकता पर भी सवाल उठाए और कहा कि वे अच्छी गृहिणी बनने के लिए भी सक्षम नहीं हैं। इसके बावजूद वे अपनी आजादी का दिखावा करती हैं। नशा, शराब और अनगिनत यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं। बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं। लगातार स्वतंत्र जीवन जीने की बातें करती हैं, जबकि वास्तव में वे आत्मनिर्भर होती ही नहीं। एक छोटी-सी बात याद दिला दूं, आजाद जीवन में कमाना पड़ता है। अगर बिना जिम्मेदारी उठाए स्वतंत्र बनने की कोशिश करोगे, तो तुम सिर्फ एक विकृत मानसिकता वाले इंसान हो, ‘गटर छाप’।’ बता दें कि कंगना भाजपा सांसद हैं। वह अक्सर अपने बयानों से चर्चा में रहती हैं। राजनैतिक करियर के साथ-साथ कंगना फिल्मों में भी काम कर रही हैं। जल्द ही वो तनु वेड्स मनु 3 और सीता द इन्कार्नेशन में नजर आएंगी।

हिंदू-मुस्लिम की सोच से बाहर आइए:कंगना रनोट ने शर्मिता टैगोर पर साधा निशाना, वंदे मातरम् पर सीनियर एक्ट्रेस के बयान पर भड़कीं

हिंदू-मुस्लिम की सोच से बाहर आइए:कंगना रनोट ने शर्मिता टैगोर पर साधा निशाना, वंदे मातरम् पर सीनियर एक्ट्रेस के बयान पर भड़कीं

दिग्गज एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर की वंदे मातरम् पर टिप्पणी के बाद कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी है। शर्मिला टैगोर ने कहा था कि वंदे मातरम् के कुछ हिस्से एक ईश्वर को मानने वाले लोगों की आस्था से मेल नहीं खा सकते। उन्होंने कहा कि गीत में कई देवताओं का जिक्र है। कंगना बोलीं- हैरान हूं कि आपकी सोच इतनी छोटी है कंगना ने शर्मिला टैगोर के इंटरव्यू का वीडियो अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर किया। उन्होंने लिखा, “मैं खुश हूं कि शर्मिला जी ने वंदे मातरम् को लेकर अपनी आपत्ति के बारे में बात की। लेकिन एक कलाकार के तौर पर मैं हैरान हूं कि कला और कविता को लेकर उनकी सोच इतनी छोटी और बनावटी कैसे हो सकती है।” कंगना ने आगे लिखा, “किसी भी कविता या गीत में शब्द रूपक होते हैं। कवि या कलाकार मनचाहा असर पैदा करने के लिए हर तरह की कल्पना करता है और असंभव लगने वाली समानताएं खींचता है। विवेकानंद ने मशहूर तौर पर कहा था कि मुझे ऐसे युवा चाहिए, जो लोहे जैसे बने हों, जिनकी हड्डियां फौलाद की हों और जिनकी नसों में बिजली दौड़ती हो।” उन्होंने कहा, “विवेकानंद मौसम का अनुमान नहीं बता रहे थे। वह केवल शक्ति को जगाने की मांग कर रहे थे। कृपया हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर आइए।” आखिर में कंगना ने लिखा, “भले ही हम एक ईश्वर में विश्वास करते हों, डॉक्टर भी ताकत को शक्ति कहते हैं। आइए, एक-दूसरे को अपनों की तरह अपनाएं। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं और उस जोरदार गले मिलने से भी मुझे परेशानी नहीं है, जैसा आप हमेशा देती हैं।” शर्मिला बोलीं- एक ईश्वर को मानने वालों के लिए कहना मुश्किल शर्मिला टैगोर ने आईएएनएस से अपनी बात समझाते हुए कहा, “मेरी राय यह है कि बहुत से धार्मिक लोग एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं, कई ईश्वरों में नहीं। वंदे मातरम् में एक अंतरा है, जिसमें कई देवताओं का जिक्र किया गया है।” उन्होंने आगे कहा, “जो लोग एक धर्म में विश्वास करते हैं, उनके लिए ‘वंदे काली, वंदे दुर्गा’ कहना मुश्किल है। इसलिए, अगर हम भारत के सभी धार्मिक लोगों को साथ लेकर चलें, तो इसके पहले दो अंतरे बहुत अच्छे हैं।” शर्मिला टैगोर ने अब तक कंगना रनौत की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बयानों से चर्चा में हैं कंगना रनोट GenZ को कहा गटरछाप- जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में पहुंचे स्टूडेंट पर कंगना ने कहा था, ‘मैंने अपनी जिंदगी में कभी एक जगह पर इतनी बदसूरती नहीं देखी। Gen Z के विरोध प्रदर्शनों की ये रील्स उल्टी लाने वाली हैं। जिस तरह से वे बात करते हैं और जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं। मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी हर एक फ्रेम में सब कुछ इतना खटकने वाला और इतना भद्दा एक साथ नहीं देखा। मैं उन्हें जेनरेशन गटर कहती हूं। उनमें से कुछ के पास सिस्टम को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई-लिखाई में अच्छे नहीं हैं।’ बयान पर विवाद बढ़ने के बाद कंगना ने कहा कि पूरे देश के युवाओं को ‘गटरछाप’ नहीं कहा था। उनका बयान जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में मौजूद एक खास नस्ल को लेकर था। बाबा रामदेव से कहा- मेरी जवानी के सपने न देखें- योग गुरू बाबा रामदेव ने कंगना की आलोचना की है। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने जेन Z को लेकर कंगना की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के जवान को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए बाबा रामदेव पर पलटवार करते हुए लिखा, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम मत कीजिए। कोई सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही ऐसा सोच सकता है। कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से झूठे या फर्जी मेडिकल दावों को लेकर फटकार नहीं लगी। इसलिए मुझे चरित्र का पाठ मत पढ़ाइए। आपका चरित्र जैसा भी है, मेरा उससे कहीं बेहतर है। यहां कोई फ्रॉड नहीं मिला है।” महिलाओं को लिखा- यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं कंगना ने पोस्ट में लिखा कि पश्चिमी सोच से प्रभावित भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी सामने आई है, जिसे वह ‘गटर जेनरेशन’ कहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ नहीं है। साथ ही, उन्होंने उनकी सोच और मानसिकता पर भी सवाल उठाए और कहा कि वे अच्छी गृहिणी बनने के लिए भी सक्षम नहीं हैं। इसके बावजूद वे अपनी आजादी का दिखावा करती हैं। नशा, शराब और अनगिनत यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं। बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं। लगातार स्वतंत्र जीवन जीने की बातें करती हैं, जबकि वास्तव में वे आत्मनिर्भर होती ही नहीं। एक छोटी-सी बात याद दिला दूं, आजाद जीवन में कमाना पड़ता है। अगर बिना जिम्मेदारी उठाए स्वतंत्र बनने की कोशिश करोगे, तो तुम सिर्फ एक विकृत मानसिकता वाले इंसान हो, ‘गटर छाप’।’ बता दें कि कंगना भाजपा सांसद हैं। वह अक्सर अपने बयानों से चर्चा में रहती हैं। राजनैतिक करियर के साथ-साथ कंगना फिल्मों में भी काम कर रही हैं। जल्द ही वो तनु वेड्स मनु 3 और सीता द इन्कार्नेशन में नजर आएंगी।